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Wednesday, March 25, 2026
डॉ० कुमार विमलेन्दु सिंह | Navpravah Desk छोटे शहर बहुत प्यारे होते हैं, उनमें रहना चाहिए, लेकिन एक वक़्त आने पर, उन्हें छोड़ भी देना...
डॉ. कुमार विमलेन्दु सिंह | Navpravah Desk गुज़रने के बाद भी अगर हयात में ठहरना हो, किसी के दिल तक जाना हो, कोई बात भूलनी...
डॉ. कुमार विमलेन्दु सिंह | Navpravah Desk शमा का काम ही होता है नूर बांटना और सहर होते ही ग़ैब में शरीक़ हो जाना|जो टिमटिमाते...
डॉ. कुमार विमलेन्दु सिंह | Navpravah Desk 1942 का साल था, दूसरी जंग-ए-अज़ीम के शोलों से, दुनिया जल रही थी और हिन्दुस्तान में क्रिप्स मिशन...
डॉ. कुमार विमलेन्दु सिंह | Navpravah Desk बीत चुका ज़माना अपनी ख़ूबियों को, अगले ज़माने में ज़ाहिर कर सकने का ज़रिया बना कर ही गुज़रता...
डॉ. कुमार विमलेन्दु सिंह | Navpravah Desk "आसाइश मयस्सर न हुई हयात में मसायल, महशर को मुकर्रर किया है मैंने" -विमलेन्दु पूछना मुनासिब नहीं जान पड़ता और बमुश्किल...
डॉ. कुमार विमलेन्दु सिंह | Navpravah Desk "नफ़ाज़ हुआ है हुक्म लम्हात का मुंतज़िर रहो सहर होने तक" -विमलेन्दु लम्हा लम्हा गुज़रते हुए, एक गुज़ारिश करता है कि...
डॉ. कुमार विमलेन्दु सिंह | Navpravah Desk ज़िंदगी गुज़र जाती है, दाम-ए-ख़्वाहिश में उलझते निकलते और फिर एक शाम यकीन हो जाता है कि अगली...
डॉ. कुमार विमलेन्दु सिंह | Navpravah Desk "रग़बत ही न थी हदों के पैमाइश की हमें  इश्क़ था या होना बेज़ार, खूब किया जो भी किया"                                ...
डॉ. कुमार विमलेन्दु सिंह | Navpravah Desk "हस्ती अपनी हुबाब की सी है ये नुमाइश सराब की सी है" - मीर इस फ़ानी दुनिया में ख़ूबसूरती एक खु़लूक़...