नहीं रहीं दरभंगा राजघराने की अंतिम महारानी, पूरे बिहार में शोक की लहर

नीतीश कुमार मिश्र | navpravah.com 

बिहार | दरभंगा राजघराने की अंतिम महारानी कामसुंदरी देवी का आज सोमवार को 96 वर्ष की आयु में निधन हो गया। जिसके बाद दरभंगा, मिथिला समेत पूरे बिहार में शोक की लहर दौड़ गई। नवंबर 2025 में तबीयत बिगड़ने के बाद से वह अस्वस्थ चल रही थीं। महारानी का अंतिम संस्कार राज परिसर स्थित श्यामा माई मंदिर परिसर में किया जाएगा, जहां परंपरागत रूप से राज परिवार के सदस्यों का अंतिम संस्कार होता रहा है। महारानी कामसुंदरी देवी के बड़े पोते रत्नेश्वर सिंह मुखाग्नि देंगे।

महारानी कामसुंदरी देवी महाराजा कामेश्वर सिंह की तीसरी पत्नी थीं। महारानी कामसुंदरी देवी का जन्म वर्ष 1930 में हुआ था। दरभंगा महाराज कामेश्वर सिंह रियासत के अंतिम शासक माने जाते हैं, जिनका निधन वर्ष 1962 में हुआ था। उनकी पहली पत्नी महारानी राजलक्ष्मी देवी का निधन 1976 में और दूसरी पत्नी महारानी कामेश्वरी प्रिया का निधन 1940 में ही हो गया था।

महाराजा कामेश्वर सिंह की याद में महारानी कामसुंदरी देवी ने महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह कल्याणी फाउंडेशन की स्थापना की थी। यह मिथिला की सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत को संरक्षित करती है। जानकारी के मुताबिक, फाउंडेशन के जरिए महाराजा कामेश्वर की प्राइवेट लाइब्रेरी में हजारों किताबें और पांडुलिपियां लोगों के लिए उपलब्ध कराई गई है। महारानी ने महाराजा के नाम पर एक समृद्ध पुस्तकालय की स्थापना कराई, जिसमें आज भी करीब 15 हजार से अधिक पुस्तकें उपलब्ध हैं। इसके साथ ही महारानी साहित्यिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के संचालन में भी सक्रिय भूमिका निभाती रहीं और दरभंगा की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का कार्य किया।

महारानी कामसुंदरी देवी दरभंगा राज की आखिरी जीवित सदस्य थीं। महाराजा के निधन के बाद उन्होंने कई संपत्ति और ट्रस्ट से जुड़े कानूनी विवादों को संभाला है। इतना ही नहीं, फाउंडेशन के जरिए उन्होंने संस्कृति, शिक्षा के साथ-साथ कला को भी बढ़ावा दिया। आज महारानी कामसुंदरी देवी के निधन की खबर मिलते ही कई लोग कल्याणी निवास पहुंचे। पारंपरिक रीति-रिवाज से उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

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