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Tuesday, September 8, 2026
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हज़ारों ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ किसानों का दिल्ली कूच का आह्वान, दिल्ली पुलिस हाई अलर्ट

ब्यूरो | navpravah.com

नई दिल्ली | चौथे दौर की बातचीत के बाद भी नतीजा ना निकलने के कारण किसानों ने बुधवार को दिल्ली कूच का आह्वान किया है। जिसको लेकर दिल्ली पुलिस हाई अलर्ट मोड पर है। दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने बैठक के बाद तमाम सुरक्षा तैयारियों का जायजा लिया।

हरियाणा-पंजाब को जोड़ने वाले शंभू बॉर्डर की सुरक्षा इंतजाम का भी दिल्ली पुलिस ने जायजा लिया है। इसका मकसद हरियाणा पुलिस की रणनीति को समझना था, ताकि दिल्ली पुलिस की ओर से सीमावर्ती इलाकों में की गई तैयारियों के बीच अगर कुछ प्वाइंट पर या फिर सुरक्षा लेयर बढ़ाने की गुंजाइश है तो उस पर काम किया जा सके। किसानों को दिल्ली में न घुसने के लिए पुलिस कई तरह से तैयारी कर रही है।

किसानों को दिल्ली में घुसने से रोकने के लिए पूरी तरह तैयार दिल्ली पुलिस ने सीमावर्ती इलाकों में मल्टी लेयर की सिक्योरिटी का इंतजाम किया। रास्ते में बैरिकेड लगाकर कंटेनर खड़े कर दिए गए हैं। साथ ही सुरक्षा घेरे को मजबूत करने के लिए बैरिकेडिंग पर लोहे की तार लगाई गई है। तमाम सुरक्षा के बीच दिल्ली में भारी पुलिस और अर्ध सैनिक बलों को तैनाती कर दी गई हैं।

किसानों के नेता सरवन सिंह पंढेर ने कहा कि हमने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की। हम बैठकों में शामिल हुए, हर बिंदु पर चर्चा हुई और अब फैसला केंद्र सरकार को लेना है। हम शांत रहेंगे…प्रधानमंत्री को आगे आना चाहिए और हमारी मांगों को स्वीकार करना चाहिए। 1.5-2 लाख करोड़ रुपये ज्यादा बड़ी रकम नहीं है…इन बाधाओं को हटाकर हमें दिल्ली की ओर मार्च करने की अनुमति दी जानी चाहिए…’

कल्कि धाम शिलान्यास: PM मोदी ने एक तीर से साधे कई निशाने

नृपेन्द्र मौर्य | navpravah.com

नई दिल्ली | प्रधानमंत्री मोदी ने आज संभल में कल्कि धाम मंदिर का शिलान्यास किया है। वैदिक मंत्रों के साथ पीएम ने कल्कि धाम मंदिर का भूमि पूजन किया। इस मंदिर को श्री कल्कि धाम निर्माण ट्रस्ट की तरफ से बनवाया जा रहा है। इसके अध्यक्ष आचार्य प्रमोद कृष्णम हैं। उनके साथ उत्तर प्रदेश को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी इस कार्यक्रम में शामिल थे। इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए देशभर से 11000 से अधिक साधु-संत पहुंचे हैं। साथ ही, कई धार्मिक नेता और गणमान्य व्यक्ति भी मंदिर के शिलान्यास कार्यक्रम में मौजूद हैं।

पीएम मोदी बोले- कल्कि धाम मंदिर का शिलान्यास करने का सौभाग्य मिला-

हिंदू तीर्थ कल्कि धाम के शिलान्यास में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज संतों की भक्ति और जनता की भावना से एक और पवित्र स्थान की आधारशिला रखी जा रही है। आचार्यों और संतों की उपस्थिति में भव्य कल्कि धाम की आधारशिला रखने का सौभाग्य मिला। मुझे विश्वास है कि कल्कि धाम भारतीय आस्था का एक और महान केंद्र बनकर उभरेगा। पीएम मोदी ने आगे कहा कि आज छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती भी है, इसलिए यह दिन और भी पवित्र और अधिक प्रेरणादायक हो जाता है। इस अवसर पर मैं छत्रपति शिवाजी महाराज के चरणों में आदरपूर्वक नमन करें और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करे।

मोदी ने कहा कि आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा था कि हर किसी के पास देने के लिए कुछ न कुछ है लेकिन मेरे पास कुछ नहीं है, मैं केवल अपनी भावनाएं व्यक्त कर सकता हूं। प्रमोद जी, अच्छा हुआ आपने मुझे कुछ नहीं दिया, वरना जमाना ऐसा बदल गया है कि अगर आज के जमाने में सुदामा श्री कृष्ण को चावल देते और वीडियो सामने आ जाता तो शीर्ष अदालत में जनहित याचिका दायर कर दी जाती और फैसला आएगा कि भगवान कृष्ण को भ्रष्टाचार में कुछ दिया गया था और भगवान कृष्ण भ्रष्टाचार कर रहे थे। बेहतर होगा कि आपने अपनी भावनाएं व्यक्त कीं और कुछ नहीं दिया।

वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछले 10 सालों में हमने एक नया भारत देखा है। भारत देश विकास के पथ पर काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है। सीएम योगी ने कहा कि आज वैश्विक मंच पर पीएम मोदी का सम्मान है। देश की सभी सीमाएं एकदम सुरक्षित हैं।

लोकसभा चुनावों में भी होगा भाजपा के फायदा-

कई राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार बीजेपी इस मौके को लोकसभा चुनावों में भुनाना चाहती है। संभल में समाजवादी पार्टी के सांसद और किसान आंदोलन के कारण भी भाजपा की पकड़ थोड़ी कमजोर हो गई हैं। मुस्लिम बहुल इलाका होने के कारण भाजपा को थोड़ी मुश्किलें हैं जिन्हे भाजपा इस मौके से भुनाना चाह रही हैं।
कुछ राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक इस कारण से बीजेपी को पिछले चुनावों से भी ज्यादा फायदे की उम्मीद हैं।

हिंदू वोट बैंक भी नजर- 

अयोध्या में राम मंदिर के शिलान्यास के बाद इसे भी हिंदू वोट बैंक के तौर पे देखा जा रहा हैं। अवध समेत पूरे पूर्वी यूपी में भाजपा राम मंदिर के वजह से मजबूत दिख रही है जबकि अब कल्कि धाम के शिलान्यास के वजह से पश्चिमी यूपी और हिंदू वोटर्स को लुभाने का प्रयास हैं।

प्रधान मंत्री मोदी का ये दौरा इस तरह कई तरह से महत्वपूर्ण है और उनका ये संभल का दौरा उन्हें कई फायदे पहुंचाने जा रहा है।

क्या है ‘चुनावी बॉण्ड’ ? सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से क्यों परेशान है सरकार ?

नृपेंद्र मौर्य | navpravah.com

नई दिल्ली | सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को झटका देते हुए बड़ा फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत ने चुनावी बॉन्ड को असंवैधानिक करार कर दिया। इस चुनावी वर्ष में ये सरकार के लिए बहुत बड़ा झटका हैं।

कोर्ट ने फैसले में ये भी कहा कि जनता को सूचना का अधिकार है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया साल 2023 के अप्रैल महीने से लेकर अब तक की सारी जानकारियां चुनाव आयोग को दे और आयोग ये जानकारी कोर्ट को दे।

सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायधीशों की संविधान पीठ ने राजनीतिक दलों को फंडिंग का एक तरीका, चुनावी बॉन्ड योजना की वैधता से संबंधित मामले में घटनाओं का क्रम में इसे रद्द करते हुए एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।

भारत में कब कब क्या हुआ-

अगर हम भारत में चुनावी बॉन्ड को लेकर घटनाक्रमों को देखे तो वे इस प्रकार होंगे –

2017: वित्त विधेयक में चुनावी बॉन्ड योजना पेश की गई।
14 सितंबर, 2017 को मुख्य याचिकाकर्ता एनजीओ ‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ ने योजना को चुनौती दिया और सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

03 अक्टूबर, 2017 को शीर्ष अदालत ने एनजीओ द्वारा दायर जनहित याचिका पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को सुनवाई के लिए नोटिस जारी किया।

2 जनवरी, 2018: केंद्र सरकार ने चुनावी बॉन्ड योजना को अधिसूचित किया।

7 नवंबर, 2022 को चुनावी बॉन्ड योजना में एक वर्ष में बिक्री के दिनों को 70 से बढ़ाकर 85 करने के लिए संशोधन किया गया, जहां कोई भी विधानसभा चुनाव निर्धारित हो सकता है।

16 अक्टूबर, 2023 को मुख्य न्यायधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली एससी बेंच ने योजना के खिलाफ याचिकाओं को पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ को भेजा।

31 अक्टूबर, 2023 को सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने योजना के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की।

2 नवंबर, 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा और 15 फरवरी, 2024 को शीर्ष अदालत ने योजना को रद्द करते हुए सर्वसम्मति से फैसला सुनाया और कहा कि यह भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकार के साथ-साथ सूचना के अधिकार का उल्लंघन करता है।

आर-पार का द्वंद्व: सरकार और किसानों के बीच तीसरे दौर की वार्ता आज

ब्यूरो | navpravah.com 

नई दिल्ली | किसानों के विरोध के क्रम में केंद्र सरकार और किसान संगठनों के बीच आज तीसरे दौर की बातचीत होगी। इससे पहले भी 8 और 12 फरवरी को हुई दोनों के बीच बैठकें हुई थी जो बेनतीजा रही थीं। एक तरफ सरकार ने एम.एस.पी. पर कानून बनाने से मना किया तो बातचीत का कोई हल नहीं निकला। इसके बाद केंद्र सरकार ने किसानों को तीसरे दौर की वार्ता के लिए आमंत्रित किया है।

किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा है कि तीन केंद्रीय मंत्रियों का एक दल गुरुवार शाम को किसान नेताओं के साथ उनकी विभिन्न मांगों पर फिर से बैठक करेगा। बैठक में भारत सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, अर्जुन मुंडा और नित्यानंद राय शामिल होंगे। संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा फसलों के लिए एमएसपी पर कानून और ऋण माफी सहित अपनी विभिन्न मांगों के लिए केंद्र पर दबाव बनाने के लिए ‘दिल्ली चलो’ कूच करने के लिए आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं। सरकार के साथ ही किसानों को भी सकारात्मक परिणाम की उम्मीद हैं।

किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि हम केंद्र सरकार को यह कहने के लिए कोई गुंजाइश नहीं देना चाहते कि वह हमें आमंत्रित कर रहे हैं, लेकिन हमने इसे स्वीकार नहीं किया। सरकार के आमंत्रण को हमने स्वीकार कर लिया है और हम बातचीत के लिए तैयार हैं। किसान मजदूर संघर्ष समिति के महासचिव पंधेर ने कहा कि मंगलवार रात बातचीत के लिए संदेश मिला। इसके बाद हमने बातचीत करने का मन बनाया। किसान नेता ने कहा कि हम पूरे विश्वास के साथ मीटिंग में जा रहे हैं। हम उम्मीद कर रहे हैं कि आज की बैठक में कुछ अहम् फ़ैसला हो सकेगा।

भारतीय किसान यूनियन (एकता सिद्धूपुर) के अध्यक्ष डल्लेवाल ने कहा कि उनकी सहमति के बाद हम बातचीत करेंगे। हमारी प्राथमिकता है कि यह बातचीत चंडीगढ़ में हो। यदि केंद्र ने यह सब देखने के बाद सुझाव दिया है और कहा है कि वे हमारे मुद्दों का समाधान करने के लिए तैयार हैं तो हमें उनकी बात सुननी चाहिए।

किसान नेताओं ने कहा कि वे बैठक होने तक दिल्ली के घेराव करने का फिर से प्रयास नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि आगे की कार्रवाई केंद्र के प्रस्तावों के आधार पर तय की जाएगी। किसान नेता ने जानबूझकर किसानों पर बल प्रयोग करने का भी आरोप लगाया।

संकट में INDI गठबंधन, समझ नहीं आ रहा केजरीवाल ने शर्त रखी या मज़े लिए

नृपेंद्र मौर्य | navpravah.com

नई दिल्ली | इंडिया गठबंधन में फूट का सिलसिला लगतार जारी हैं, विपक्षी इंडिया गठबंधन से एक-एक कर राजनीतिक पार्टियां किनारा करती जा रही हैं। तृणमूल कांग्रेस, रालोद और जेडीयू के झटके से इंडिया गठबंधन उबर भी नहीं पाया था कि अब दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने भी सीट शेयरिंग को लेकर डेडलाइन तय कर दी हैं।

दिल्ली और पंजाब की सत्ताधारी पार्टी आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में कांग्रेस को एक लोकसभा सीट पर चुनाव लडने का ऑफर दिया है। आम आदमी पार्टी के नेता संदीप पाठक ने कहा है कि हम कांग्रेस को दिल्ली में एक सीट का प्रस्ताव देते हैं। आम आदमी पार्टी छह सीटों पर चुनाव लड़ेगी। संदीप पाठक बस यहीं तक नहीं रुके बल्कि उन्होंने कह दिया कि अगर कांग्रेस जल्द फैसला नहीं लेती है, तो वे सभी सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा कर देंगे।

इससे पहले पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान भी यह कह चुके हैं कि पंजाब की सभी 13 और चंडीगढ़ की सीट आम आदमी पार्टी ही जीतेगी। भगवंत मान के बयान से पंजाब और दिल्ली में इंडिया गठबंधन की तस्वीर को लेकर कयास लगाए जा रहे थे। दोनों ही दलों की स्टेट यूनिट्स गठबंधन के पक्ष में नहीं नजर आ रही थीं।

बता दें कि कुछ दिन पहले ममता बनर्जी ने भी पश्चिम बंगाल में सभी सीटों पर उम्मीदवार उतारने की घोषणा कर दी है। इसके बाद विपक्षी एकजुटता की कवायद के अगुवा नीतीश कुमार ने भी इंडिया गठबंधन का हाथ झटक एनडीए का दामन थाम लिया। यूपी में आरएलडी भी एनडीए के साथ जा चुकी है।

बैठकें बेनतीजा, गहराता जा रहा है किसानों और सरकार के बीच का द्वंद्व

नृपेंद्र मौर्य | navpravah.com

नई दिल्ली | कल आधी रात किसानों और केंद्र सरकार के बीच चंडीगढ़ में चली बैठक बेनतीजा रहने के बाद पंजाब-हरियाणा के किसानों ने आज दिल्ली कूच करना शुरू कर दिया है। किसान आंदोलन पर अड़े किसानों के ऐलान को देखते हुए दिल्ली और हरियाणा में धारा-144 लागू कर दी गई है।

दिल्ली की तीनों प्रमुख सीमाओं सिंघु, टीकरी, गाजीपुर में लोहे और कंक्रीट के बैरिकेड लगाए गए हैं। कंटीले तार, कंटेनर और डंपर लगाकर भी रास्ते बंद कर दिए गए हैं। एहतियातन सरकार ने बहुत बड़े फैसले उठाए है, जिसमें नोएडा-दिल्ली बॉर्डर के आस पास के स्कूलों को भी बंद रखने का आदेश दिया हैं।

सरकार ने लिए कड़े फैसले:

1. सिंघु बॉर्डर से दिल्ली आना जाने वाली वाला रास्ता पूरी तरह से बंद, लोहे और सीमेंट के बैरिकेड लगाने के बाद कंटेनर रखे गए हैं।

2. किसानों के दिल्ली कूच के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा कारणों से एहतियातन लाल किले में आम लोगों की एंट्री बैन कर दी है।

3.दिल्ली मेट्रो पटेल चौक, बाराखंभा, राजीव चौक, उद्योग भवन, केंद्रीय सचिवालय, जनपथ और मंडी हाउस स्टेशनों पर प्रवेश व निकास के लिए सीमित गेटों का इस्तेमाल कर रही है। स्टेशनों पर गहन जांच के बाद लोगों को अंदर-बाहर जाने दिया जा रहा है।

4. सभी बॉर्डरों के बंद होने के कारण डीएनडी फ्लाईओवर पे ट्रैफिक बढ़ गई है जिसके कारण घंटो जाम का सामना करना पड़ रहा हैं।

Qatar: भारत की बड़ी डिप्लोमैटिक जीत, मौत की सजा पाए आठों भारतीय रिहा, लौटे वतन

ब्यूरो | navpravah.com 

भारत की कतर में एक बड़ी डिप्लोमैटिक जीत देखने को मिली है। कतर में मौत की सजा पाए भारतीय नौसेना के पूर्व आठ कर्मचारियों को रिहा कर दिया गया है। इससे पूर्व भारत के राजनयिक हस्तक्षेप के बाद उनके मृत्युदंड की सजा को एक लंबी जेल की अवधि में बदल दिया गया था। कतर ने जब भारतीय नेवी के पूर्व सैनिकों को फांसी की सजा सुनाई थी, तो पूरा देश इनके लिए चिंतित हो गया था वहीं सियासी गलियारों में भी संपूर्ण विपक्ष एक सुर में वर्तमान सरकार से उनके सकुशल वापसी की मांग करने लगा।

परिजनों की ओर से रिहाई और सुरक्षित वापसी की गुहार लगाई जा रही थी। उस वक्त सरकार के अधीन विदेश मंत्रालय की ओर से परिजनों एवं समस्त देशवासियों को आश्वस्त किया गया था कि वह यथा संभव सभी राजनयिक चैनलों का इस्तेमाल करेगा और इन्हें कानूनी सहायता की व्यवस्था देगा एवं सकुशल भारत ले कर आएंगे। आज विदेश मंत्रालय ने अपना वादा पूरा किया एवं सभी पूर्व नौसैनिक सकुशल भारत लौट आए हैं। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान में बताया गया कि उनमें से सात भारत लौट आए हैं। सात भारतीयों में नवतेज सिंह गिल, सौरभ वशिष्ठ, पूर्णेंदु तिवारी, बीरेंद्र कुमार वर्मा, सुगुनाकर पकाला, संजीव गुप्ता, अमित नागपाल और रागेश। ये भी एक निजी कंपनी ‘अल दहरा ‘कंपनी के लिए काम कर रहे थे।

ये अक्टूबर 2022 से कतर की जेल में बंद थे। कतर ने इन पर पनडुब्बी से जुड़ी कथित जासूसी का आरोप लगाया था, जिसके बाद इनकी गिरफ़्तारी हुई और अक्टूबर 2023 में इन्हे फांसी की सजा सुनाई गई, यह सभी आठ लोग भारतीय नौसेना के रिटायर्ड कर्मी हैं।

भारत लौटे पूर्व नौसैनिकों ने रिहाई के लिए पीएम मोदी की खूब प्रशंसा की एवं धन्यवाद कहा। एक पूर्व नौसैनिक ने कहा कि यदि पीएम मोदी और भारत सरकार उनकी रिहाई सुनिश्चित करने के लिए हस्तक्षेप और निरंतर राजनयिक प्रयास नहीं करती तो उन्हें रिहा नहीं किया गया होता। यह भारत सरकार की निरंतर राजनयिक हस्तक्षेप ही थी, जिसने मौत की सजा को जेल की सजा में बदल दिया था।

समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए एक पूर्व नौसैनिक ने कहा कि आखिरकार सुरक्षित और स्वस्थ घर वापस आकर मुझे राहत और खुशी महसूस हो रही है। मैं प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद देना चाहता हूं क्योंकि यह संभव नहीं होता अगर हमारी रिहाई सुनिश्चित करने के लिए उनका व्यक्तिगत हस्तक्षेप नहीं होता। मैं अपना आभार व्यक्त करना चाहता हूं।

साहित्यकार पद्मश्री डॉ. ऊषा किरण का निधन

ब्यूरो | navpravah.com

पद्मश्री से सम्मानित हिंदी और मैथिली साहित्य की प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. उषा किरण खान का 82 वर्ष की आयु में निधन हो गया। डॉ. खान विगत कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रही थीं, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए पटना के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शनिवार को लगभग दोपहर के 3 बजे वह गोलोक वासी हो गई। उनके निधन की खबर से मिथिलांचल समेत संपूर्ण देश के साहित्य प्रेमी सहित साहित्यकारों में शोक की लहर दौड़ गई है। उनके लेखन में मिथिला का इतिहास, कला, संस्कृति और समाज का सौंदर्य स्पष्ट रूप से झलकता था।

डॉ उषा किरण खान का जन्म दरभंगा जिले के हायाघाट प्रखंड अंतर्गत मझौलिया गांव में 24 अक्टूबर 1945 में हुआ था। उनके पिता जगदीश चौधरी स्वतंत्रता सेनानी थे। डॉ. ऊषा किरण ने पटना विश्वविद्यालय से भारतीय प्राचीन इतिहास एवं पुरातत्त्व विज्ञान में पीजी की डिग्री ली। इसके बाद उन्होंने मगध विश्वविद्यालय से पीएचडी किया।

साहित्यिक रुचि को देखते हुए उन्होंने 1977 में लेखन की शुरुआत की। संपूर्ण जीवन काल में उनके द्वारा रचित 50 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हुई जिनमें उपन्यास, कहानी, नाटक और बाल-साहित्य जैसी विविध विधाएँ सम्मिलित हैं। उनकी विभिन्न रचनाओं का अनुवाद उड़िया, बांग्ला, उर्दू एवं अंग्रेजी समेत अनेक भाषाओं में किया जा चुका हैं। भामती, सृजनहार, हसीना मंज़िल, घर से घर तक उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं। ‘विवश विक्रमादित्य’, ‘दूबधान’, ‘गीली पांक’, ‘कासवन’, ‘जलधार’, ‘जनम अवधि’ जैसी कई रचनाएं उनकी कृतियों में शामिल हैं।

अपने रचनात्मक एवं सृजनात्मक लेखन कार्यों के लिए डॉ. ऊषा किरण खान को वर्ष 2015 में देश के सर्वोच्च सम्मानों में शुमार ‘पद्मश्री’ से विभूषित किया गया। वर्ष 2011 उन्हें मैथिली उपन्यास ‘भामति’ एक प्रेम कथा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला, यह पुरस्कार राष्ट्रीय साहित्य अकादमी द्वारा प्रदान किया गया था। 2019 में भारत-भारती और 2020 में उन्हें प्रबोध साहित्य सम्मान मिला। इसके अलावा उन्हें राष्ट्रभाषा परिषद का हिंदी सम्मान, राजभाषा विभाग का महादेवी वर्मा सम्मान, दिनकर राष्ट्रीय पुरस्कार, कुसुमांजली पुरस्कार, विद्या निवास मिश्र पुरस्कार सहित कई अन्य प्रतिष्ठित पुरस्कार-सम्मान से नवाजा जा चुका हैं।

अगर बात डॉ खान के परिवार की करे तो उनका विवाह सुपौल-बिरौल निवासी रामचंद्र खां से हुईं थीं जो भूतपूर्व IPS अधिकारी थे, जिनका निधन वर्ष 2022 में हो चुका हैं।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. उषा किरण खान के निधन पर गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है। मुख्यमंत्री ने अपने शोक संदेश में कहा कि स्व. डॉ. उषा किरण खान प्रसिद्ध साहित्यकार एवं लेखिका थीं। उन्होंने हिन्दी एवं मैथिली साहित्य में कई उपन्यासों, कथाओं की रचना की थी। डॉ. उषा किरण खान को पद्मश्री तथा साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। डॉ. उषा किरण खान के निधन से हिन्दी एवं मैथिली साहित्य जगत को अपूरणीय क्षति हुई है। मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की चिर शांति तथा उनके परिजनों को दुख की इस घड़ी में धैर्य धारण करने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की है।

दिल्ली पहुंचा कोनियावासियों का संघर्ष, नितिन गडकरी ने दिया आश्वासन

•दो दशक से उठ रही है तीन तरफ से गंगा से घिरे भदोही के कोनिया इलाके में पक्के पुल निर्माण की मांग

•स्थानीय प्रतिनिधियों के प्रयास अब तक असफल, शीर्ष नेताओं के वादे निकले चुनावी झुनझुने

स्पेशल रिपोर्ट: रामकृष्ण पाण्डेय

भदोही (उप्र) | तीन तरफ से गंगा से घिरे जिले के अंतिम छोर पर स्थित डीघ ब्लॉक क्षेत्र का कोनिया आज भी उपेक्षित है और विकास की बाट जोह रहा है। कोनिया के तुलसीकला-डेंगुरपुर गंगा घाट पर पक्के पुल की मांग करीब तीन दशक से चली आ रही है। युवाओं के जुड़ने के बाद पिछले दस-बारह सालों में इसकी मांग व समर्थन को अत्यधिक बल मिला। बात नेताओं तक पहुंचीं, लेकिन स्थानीय जनप्रतिनिधियों से लेकर बड़े नेताओं तक ने चुनाव के दौरान इसे मुद्दा बनाकर झूठे वादे की भट्ठी में क्षेत्रवासियों को झोंक दिया। नेताओं ने ढिंढोरा पीटा, लेकिन कसौटी पर खरे नहीं उतरे।

लोगों की उम्मीद, ख़याली पुलाव और सपना हर बार चकनाचूर होता रहा। पक्के पुल की आस आज भी अधूरी है और लोग उसकी मांग में जूझ रहे हैं। इसके संघर्ष की लड़ाई अब दिल्ली पहुंच गई है। संघर्षरत युवाओं के एक प्रतिनिधि मंडल ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर पक्के पुल के निर्माण के सम्बंध में सार्थक वार्ता की है, उन्हें ज्ञापन सौंपा है। प्रतिनिधि मंडल ने गडकरी को कोनिया की भौगोलिक स्थिति एवं समस्यायों से भी रूबरू कराया और पक्के पुल के निर्माण से होने वाले लाभ, विकास को अल्प समय में विवेचित करते हुए मांग को पुरजोर तरीके से रखा।

संघर्ष के तवे पर सिंक चुके यहां के लोग नेताओं के झूठे वादे, प्रपंच एवं मक्कारी को भली-भांति जान समझकर ढीठ से हो चुके हैं। उनके अनुसार, उन्होंने मंत्री नितिन गडकरी को बड़े नेताओं के मंचीय वादे बताए और खुद गडकरी के ही इस पुल के सपने दिखाने वाले वीडियो भी दिखाये। फिलहाल केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने उनकी बातों को सुन और मांग पत्र को लेकर पूर्णतया आश्वस्त किया है। उन्होंने कहा कि जल्द ही कोनिया में पक्के ब्रिज का निर्माण कराया जाएगा। फिलहाल यह तो भविष्य बताएगा कि अब तक नेताओं की वादाखिलाफी झेल रहे यहां के लोगों के सपने की उड़ान को पंख लग पाती है और मंत्री को सौंपी उम्मीद की यह पाती फलीभूत होती है या नही!

प्रतिनिधि मंडल ने केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा (टेनी) एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता सतीश उपाध्याय से भी मुलाकात कर क्षेत्र की समस्यायों से अवगत कराया। प्रतिनिधि मंडल में प्रमुख रूप से शामिल पवन तिवारी, भाजपा नेता डॉ. अजय शुक्ला, मंटू पाण्डेय, विपिन पाण्डेय (एडवोकेट) नितेश सिंह, राकेश पांडेय, पवन पांडेय, टिंकू शुक्ला एवं गुलाब तिवारी आदि शामिल रहे।

पुल निर्माण से कम होगी दो प्रदेशों की दूरी-

भदोही के डीघ ब्लॉक क्षेत्र के तुलसीकला (धनतुलसी)-डेंगुरपुर गंगा घाट पर पक्के पुल निर्माण की मांग लगातार उठ रही है। पिछले दो दशकों से यह डीघ ब्लॉक क्षेत्र की बुनियादी जरूरत के तौर पर उभरकर सामने आई है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी मांग को लेकर सक्रियता दिखाई है लेकिन बड़े नेताओं के वादे अब तक झुनझुने ही निकले। बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, सांसद व बीजेपी के स्टार प्रचारक रवि किशन शुक्ला से लेकर तमाम नेताओं ने मंच से इसको लेकर वादे किये हैं। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या तो दो-तीन दफा वादा से लेकर और उद्घाटन तक करने की बात तक कह चुके हैं। लेकिन डिप्टी सीएम का ‘सोमवार’ नही आया। चार-पांच चुनावों से यह पुल स्थानीय चुनावी मुद्दा रहा है। लेकिन ठोस कदम अब तक इस दिशा में नही उठ सके।

अब तक के धोखे ने उम्मीद पाले कोनियावासियों के जहन में साल 1977 में आये मोहम्मद रफी साहब के गीत..क्या हुआ तेरा वादा, वो कसम वो इरादा..की भी याद दिला दी। किंचित सियासी पुलाव से ऊबकर संघर्षशील टीम ने हाल में ही 10 किलोमीटर लम्बी ‘पुल नहीं तो, वोट नहीं’ के नारे संग वोट बहिष्कार समर्थन यात्रा निकाली थी। बता दें कि इस पुल के निर्माण से गंगा उस पार न सिर्फ मांडा क्षेत्र के जरिये प्रयागराज की दूरी कम होगी अपितु सीधे-सीधे मध्य प्रदेश से भी ठोस जुड़ाव हो जाएगा। इसका लाभ भदोही जनपद ही नहीं, वरन प्रयागराज गंगापार के काफी हिस्से, जौनपुर जनपदवासियों एवं कुछ अन्य उत्तरी पूर्वी जनपदों को भी खास तौर पर पहुंचेगा। यातायात व व्यावसायिक गति को भी बढ़ावा मिलेगा, तो रोजगार का सृजन भी होगा। अब तक उपेक्षा का शिकार मां गंगा की गोद में बसे भदोही के कोनिया-कोइरौना के तीन दर्जन से अधिक गांवों में विकास का पहिया दौड़ पड़ेगा।

बता दें कि तुलसीकला-डेंगुरपुर पक्के पुल मांग स्थल से पूर्व में अन्य निर्मित पुल काफी दूर हैं। कोनिया क्षेत्र से प्रयागराज के झूंसी-दारागंज शास्त्री ब्रिज की दूरी लगभग 65 किलोमीटर जबकि मिर्जापुर गंगा नदी पर बने पक्के पुल की दूरी लगभग 55 किलोमीटर होगी। संघर्षरत लोगों का कहना है कि वह इसके मांग की लड़ाई आगे भी और मजबूती से लड़ते रहेंगें।

राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा: साइकिल से अयोध्या धाम रवाना हुए झारखण्ड के दो राम भक्त

नीतीश कुमार मिश्र | navpravah.com 

झारखण्ड | ‘22 जनवरी’ भारत के लिए इतिहास के पन्नों में एक ऐतिहासिक दिवस के रूप में दर्ज होगा, क्योंकि वर्षों की तपस्या, कोर्ट की तारीखों से लेकर कारसेवकों की शहादत के प्रतीक राम मंदिर में रामलला लगभग 500 वर्षों के बाद आसीन होंगे। उसी दिन अयोध्या में भव्य प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम भी होना तय हुआ है, पूरा विश्व इस वक्त राममय हो चुका है। हर कोई प्रभु राम के आशीष को ग्रहण कर अभिभूत होना चाहता है। 22 जनवरी को होने वाले प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को लेकर देश-विदेश से लोग अयोध्या पहुंच रहे हैं।

सभी राम भक्त किसी न किसी माध्यम से इस कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराना चाह रहे हैं। इसी क्रम में जमशेदपुर के बागबेड़ा ट्रैफिक कॉलोनी निवासी दो युवा प्रिंस मिश्र और रोहित तिवारी साइकिल से अयोध्या धाम के लिए निकल चुके हैं। इन्होंने यात्रा की शुरुवात जय श्री राम के उद्घोष के साथ 12 जनवरी को किया एवं खबर लिखे जाने तक वह उत्तरप्रदेश के सुल्तानपुर पहुंच चुके हैं। यात्रा आरंभ करने के दौरान स्थानीय समाजसेवी एवं समस्त बस्तीवासियों के प्रमुख व्यक्तियों ने उनका अभिनंदन किया। तिलक लगाकर एवं अंग वस्त्र पहनाकर उनका सम्मान किया।

जमशेदपुर से अयोध्या तक की उनकी यात्रा लगभग 750 किमी तक की है। रामलला के भक्ति में लीन दोनों युवा पूरे दिन उत्साह पूर्वक साइकिल से यात्रा करते हैं एवं रात्रि में मंदिर में, विश्रामगृह में या फिर किसी रामभक्त के यहां विश्राम करते हैं। पुनः प्रभात की प्रथम लाली के साथ राम नाम के उदघोष के साथ यात्रा पर निकल पड़ते हैं। ऐसी भीषण ठंड और कोहरे की मार भी उनके अटल संकल्प और ऊर्जा को बाधित नहीं कर पाई है। बक़ौल रोहित तिवारी, “यह प्रभु राम की ही कृपा है, जिसने उन्हें इस यात्रा के लिए प्रेरित किया और वह आगे बढ़ रहे है, 22 तारीख को अयोध्या में दीपक जलाएंगे एवं संपूर्ण देशवासियों से भी आह्वाहन किया है कि प्रभु श्री राम के पुनः अयोध्या आगमन के अवसर पर सभी अपने घरों में दीया जला कर भव्य रूप से दिवाली मनाएं।