नई दिल्ली | किसानों के विरोध के क्रम में केंद्र सरकार और किसान संगठनों के बीच आज तीसरे दौर की बातचीत होगी। इससे पहले भी 8 और 12 फरवरी को हुई दोनों के बीच बैठकें हुई थी जो बेनतीजा रही थीं। एक तरफ सरकार ने एम.एस.पी. पर कानून बनाने से मना किया तो बातचीत का कोई हल नहीं निकला। इसके बाद केंद्र सरकार ने किसानों को तीसरे दौर की वार्ता के लिए आमंत्रित किया है।
किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा है कि तीन केंद्रीय मंत्रियों का एक दल गुरुवार शाम को किसान नेताओं के साथ उनकी विभिन्न मांगों पर फिर से बैठक करेगा। बैठक में भारत सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, अर्जुन मुंडा और नित्यानंद राय शामिल होंगे। संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा फसलों के लिए एमएसपी पर कानून और ऋण माफी सहित अपनी विभिन्न मांगों के लिए केंद्र पर दबाव बनाने के लिए ‘दिल्ली चलो’ कूच करने के लिए आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं। सरकार के साथ ही किसानों को भी सकारात्मक परिणाम की उम्मीद हैं।
किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि हम केंद्र सरकार को यह कहने के लिए कोई गुंजाइश नहीं देना चाहते कि वह हमें आमंत्रित कर रहे हैं, लेकिन हमने इसे स्वीकार नहीं किया। सरकार के आमंत्रण को हमने स्वीकार कर लिया है और हम बातचीत के लिए तैयार हैं। किसान मजदूर संघर्ष समिति के महासचिव पंधेर ने कहा कि मंगलवार रात बातचीत के लिए संदेश मिला। इसके बाद हमने बातचीत करने का मन बनाया। किसान नेता ने कहा कि हम पूरे विश्वास के साथ मीटिंग में जा रहे हैं। हम उम्मीद कर रहे हैं कि आज की बैठक में कुछ अहम् फ़ैसला हो सकेगा।
भारतीय किसान यूनियन (एकता सिद्धूपुर) के अध्यक्ष डल्लेवाल ने कहा कि उनकी सहमति के बाद हम बातचीत करेंगे। हमारी प्राथमिकता है कि यह बातचीत चंडीगढ़ में हो। यदि केंद्र ने यह सब देखने के बाद सुझाव दिया है और कहा है कि वे हमारे मुद्दों का समाधान करने के लिए तैयार हैं तो हमें उनकी बात सुननी चाहिए।
किसान नेताओं ने कहा कि वे बैठक होने तक दिल्ली के घेराव करने का फिर से प्रयास नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि आगे की कार्रवाई केंद्र के प्रस्तावों के आधार पर तय की जाएगी। किसान नेता ने जानबूझकर किसानों पर बल प्रयोग करने का भी आरोप लगाया।
नई दिल्ली |इंडिया गठबंधन में फूट का सिलसिला लगतार जारी हैं, विपक्षी इंडिया गठबंधन से एक-एक कर राजनीतिक पार्टियां किनारा करती जा रही हैं। तृणमूल कांग्रेस, रालोद और जेडीयू के झटके से इंडिया गठबंधन उबर भी नहीं पाया था कि अब दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने भी सीट शेयरिंग को लेकर डेडलाइन तय कर दी हैं।
दिल्ली और पंजाब की सत्ताधारी पार्टी आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में कांग्रेस को एक लोकसभा सीट पर चुनाव लडने का ऑफर दिया है। आम आदमी पार्टी के नेता संदीप पाठक ने कहा है कि हम कांग्रेस को दिल्ली में एक सीट का प्रस्ताव देते हैं। आम आदमी पार्टी छह सीटों पर चुनाव लड़ेगी। संदीप पाठक बस यहीं तक नहीं रुके बल्कि उन्होंने कह दिया कि अगर कांग्रेस जल्द फैसला नहीं लेती है, तो वे सभी सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा कर देंगे।
इससे पहले पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान भी यह कह चुके हैं कि पंजाब की सभी 13 और चंडीगढ़ की सीट आम आदमी पार्टी ही जीतेगी। भगवंत मान के बयान से पंजाब और दिल्ली में इंडिया गठबंधन की तस्वीर को लेकर कयास लगाए जा रहे थे। दोनों ही दलों की स्टेट यूनिट्स गठबंधन के पक्ष में नहीं नजर आ रही थीं।
बता दें कि कुछ दिन पहले ममता बनर्जी ने भी पश्चिम बंगाल में सभी सीटों पर उम्मीदवार उतारने की घोषणा कर दी है। इसके बाद विपक्षी एकजुटता की कवायद के अगुवा नीतीश कुमार ने भी इंडिया गठबंधन का हाथ झटक एनडीए का दामन थाम लिया। यूपी में आरएलडी भी एनडीए के साथ जा चुकी है।
नई दिल्ली |कल आधी रात किसानों और केंद्र सरकार के बीच चंडीगढ़ में चली बैठक बेनतीजा रहने के बाद पंजाब-हरियाणा के किसानों ने आज दिल्ली कूच करना शुरू कर दिया है। किसान आंदोलन पर अड़े किसानों के ऐलान को देखते हुए दिल्ली और हरियाणा में धारा-144 लागू कर दी गई है।
दिल्ली की तीनों प्रमुख सीमाओं सिंघु, टीकरी, गाजीपुर में लोहे और कंक्रीट के बैरिकेड लगाए गए हैं। कंटीले तार, कंटेनर और डंपर लगाकर भी रास्ते बंद कर दिए गए हैं। एहतियातन सरकार ने बहुत बड़े फैसले उठाए है, जिसमें नोएडा-दिल्ली बॉर्डर के आस पास के स्कूलों को भी बंद रखने का आदेश दिया हैं।
सरकार ने लिए कड़े फैसले:
1. सिंघु बॉर्डर से दिल्ली आना जाने वाली वाला रास्ता पूरी तरह से बंद, लोहे और सीमेंट के बैरिकेड लगाने के बाद कंटेनर रखे गए हैं।
2. किसानों के दिल्ली कूच के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा कारणों से एहतियातन लाल किले में आम लोगों की एंट्री बैन कर दी है।
3.दिल्ली मेट्रो पटेल चौक, बाराखंभा, राजीव चौक, उद्योग भवन, केंद्रीय सचिवालय, जनपथ और मंडी हाउस स्टेशनों पर प्रवेश व निकास के लिए सीमित गेटों का इस्तेमाल कर रही है। स्टेशनों पर गहन जांच के बाद लोगों को अंदर-बाहर जाने दिया जा रहा है।
4. सभी बॉर्डरों के बंद होने के कारण डीएनडी फ्लाईओवर पे ट्रैफिक बढ़ गई है जिसके कारण घंटो जाम का सामना करना पड़ रहा हैं।
भारत की कतर में एक बड़ी डिप्लोमैटिक जीत देखने को मिली है। कतर में मौत की सजा पाए भारतीय नौसेना के पूर्व आठ कर्मचारियों को रिहा कर दिया गया है। इससे पूर्व भारत के राजनयिक हस्तक्षेप के बाद उनके मृत्युदंड की सजा को एक लंबी जेल की अवधि में बदल दिया गया था। कतर ने जब भारतीय नेवी के पूर्व सैनिकों को फांसी की सजा सुनाई थी, तो पूरा देश इनके लिए चिंतित हो गया था वहीं सियासी गलियारों में भी संपूर्ण विपक्ष एक सुर में वर्तमान सरकार से उनके सकुशल वापसी की मांग करने लगा।
परिजनों की ओर से रिहाई और सुरक्षित वापसी की गुहार लगाई जा रही थी। उस वक्त सरकार के अधीन विदेश मंत्रालय की ओर से परिजनों एवं समस्त देशवासियों को आश्वस्त किया गया था कि वह यथा संभव सभी राजनयिक चैनलों का इस्तेमाल करेगा और इन्हें कानूनी सहायता की व्यवस्था देगा एवं सकुशल भारत ले कर आएंगे। आज विदेश मंत्रालय ने अपना वादा पूरा किया एवं सभी पूर्व नौसैनिक सकुशल भारत लौट आए हैं। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान में बताया गया कि उनमें से सात भारत लौट आए हैं। सात भारतीयों में नवतेज सिंह गिल, सौरभ वशिष्ठ, पूर्णेंदु तिवारी, बीरेंद्र कुमार वर्मा, सुगुनाकर पकाला, संजीव गुप्ता, अमित नागपाल और रागेश। ये भी एक निजी कंपनी ‘अल दहरा ‘कंपनी के लिए काम कर रहे थे।
ये अक्टूबर 2022 से कतर की जेल में बंद थे। कतर ने इन पर पनडुब्बी से जुड़ी कथित जासूसी का आरोप लगाया था, जिसके बाद इनकी गिरफ़्तारी हुई और अक्टूबर 2023 में इन्हे फांसी की सजा सुनाई गई, यह सभी आठ लोग भारतीय नौसेना के रिटायर्ड कर्मी हैं।
भारत लौटे पूर्व नौसैनिकों ने रिहाई के लिए पीएम मोदी की खूब प्रशंसा की एवं धन्यवाद कहा। एक पूर्व नौसैनिक ने कहा कि यदि पीएम मोदी और भारत सरकार उनकी रिहाई सुनिश्चित करने के लिए हस्तक्षेप और निरंतर राजनयिक प्रयास नहीं करती तो उन्हें रिहा नहीं किया गया होता। यह भारत सरकार की निरंतर राजनयिक हस्तक्षेप ही थी, जिसने मौत की सजा को जेल की सजा में बदल दिया था।
समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए एक पूर्व नौसैनिक ने कहा कि आखिरकार सुरक्षित और स्वस्थ घर वापस आकर मुझे राहत और खुशी महसूस हो रही है। मैं प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद देना चाहता हूं क्योंकि यह संभव नहीं होता अगर हमारी रिहाई सुनिश्चित करने के लिए उनका व्यक्तिगत हस्तक्षेप नहीं होता। मैं अपना आभार व्यक्त करना चाहता हूं।
पद्मश्री से सम्मानित हिंदी और मैथिली साहित्य की प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. उषा किरण खान का 82 वर्ष की आयु में निधन हो गया। डॉ. खान विगत कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रही थीं, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए पटना के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शनिवार को लगभग दोपहर के 3 बजे वह गोलोक वासी हो गई। उनके निधन की खबर से मिथिलांचल समेत संपूर्ण देश के साहित्य प्रेमी सहित साहित्यकारों में शोक की लहर दौड़ गई है। उनके लेखन में मिथिला का इतिहास, कला, संस्कृति और समाज का सौंदर्य स्पष्ट रूप से झलकता था।
डॉ उषा किरण खान का जन्म दरभंगा जिले के हायाघाट प्रखंड अंतर्गत मझौलिया गांव में 24 अक्टूबर 1945 में हुआ था। उनके पिता जगदीश चौधरी स्वतंत्रता सेनानी थे। डॉ. ऊषा किरण ने पटना विश्वविद्यालय से भारतीय प्राचीन इतिहास एवं पुरातत्त्व विज्ञान में पीजी की डिग्री ली। इसके बाद उन्होंने मगध विश्वविद्यालय से पीएचडी किया।
साहित्यिक रुचि को देखते हुए उन्होंने 1977 में लेखन की शुरुआत की। संपूर्ण जीवन काल में उनके द्वारा रचित 50 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हुई जिनमें उपन्यास, कहानी, नाटक और बाल-साहित्य जैसी विविध विधाएँ सम्मिलित हैं। उनकी विभिन्न रचनाओं का अनुवाद उड़िया, बांग्ला, उर्दू एवं अंग्रेजी समेत अनेक भाषाओं में किया जा चुका हैं। भामती, सृजनहार, हसीना मंज़िल, घर से घर तक उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं। ‘विवश विक्रमादित्य’, ‘दूबधान’, ‘गीली पांक’, ‘कासवन’, ‘जलधार’, ‘जनम अवधि’ जैसी कई रचनाएं उनकी कृतियों में शामिल हैं।
अपने रचनात्मक एवं सृजनात्मक लेखन कार्यों के लिए डॉ. ऊषा किरण खान को वर्ष 2015 में देश के सर्वोच्च सम्मानों में शुमार ‘पद्मश्री’ से विभूषित किया गया। वर्ष 2011 उन्हें मैथिली उपन्यास ‘भामति’ एक प्रेम कथा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला, यह पुरस्कार राष्ट्रीय साहित्य अकादमी द्वारा प्रदान किया गया था। 2019 में भारत-भारती और 2020 में उन्हें प्रबोध साहित्य सम्मान मिला। इसके अलावा उन्हें राष्ट्रभाषा परिषद का हिंदी सम्मान, राजभाषा विभाग का महादेवी वर्मा सम्मान, दिनकर राष्ट्रीय पुरस्कार, कुसुमांजली पुरस्कार, विद्या निवास मिश्र पुरस्कार सहित कई अन्य प्रतिष्ठित पुरस्कार-सम्मान से नवाजा जा चुका हैं।
अगर बात डॉ खान के परिवार की करे तो उनका विवाह सुपौल-बिरौल निवासी रामचंद्र खां से हुईं थीं जो भूतपूर्व IPS अधिकारी थे, जिनका निधन वर्ष 2022 में हो चुका हैं।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. उषा किरण खान के निधन पर गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है। मुख्यमंत्री ने अपने शोक संदेश में कहा कि स्व. डॉ. उषा किरण खान प्रसिद्ध साहित्यकार एवं लेखिका थीं। उन्होंने हिन्दी एवं मैथिली साहित्य में कई उपन्यासों, कथाओं की रचना की थी। डॉ. उषा किरण खान को पद्मश्री तथा साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। डॉ. उषा किरण खान के निधन से हिन्दी एवं मैथिली साहित्य जगत को अपूरणीय क्षति हुई है। मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की चिर शांति तथा उनके परिजनों को दुख की इस घड़ी में धैर्य धारण करने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की है।
•दो दशक से उठ रही है तीन तरफ से गंगा से घिरे भदोही के कोनिया इलाके में पक्के पुल निर्माण की मांग
•स्थानीय प्रतिनिधियों के प्रयास अब तक असफल, शीर्ष नेताओं के वादे निकले चुनावी झुनझुने
स्पेशल रिपोर्ट: रामकृष्ण पाण्डेय
भदोही (उप्र) | तीन तरफ से गंगा से घिरे जिले के अंतिम छोर पर स्थित डीघ ब्लॉक क्षेत्र का कोनिया आज भी उपेक्षित है और विकास की बाट जोह रहा है। कोनिया के तुलसीकला-डेंगुरपुर गंगा घाट पर पक्के पुल की मांग करीब तीन दशक से चली आ रही है। युवाओं के जुड़ने के बाद पिछले दस-बारह सालों में इसकी मांग व समर्थन को अत्यधिक बल मिला। बात नेताओं तक पहुंचीं, लेकिन स्थानीय जनप्रतिनिधियों से लेकर बड़े नेताओं तक ने चुनाव के दौरान इसे मुद्दा बनाकर झूठे वादे की भट्ठी में क्षेत्रवासियों को झोंक दिया। नेताओं ने ढिंढोरा पीटा, लेकिन कसौटी पर खरे नहीं उतरे।
लोगों की उम्मीद, ख़याली पुलाव और सपना हर बार चकनाचूर होता रहा। पक्के पुल की आस आज भी अधूरी है और लोग उसकी मांग में जूझ रहे हैं। इसके संघर्ष की लड़ाई अब दिल्ली पहुंच गई है। संघर्षरत युवाओं के एक प्रतिनिधि मंडल ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर पक्के पुल के निर्माण के सम्बंध में सार्थक वार्ता की है, उन्हें ज्ञापन सौंपा है। प्रतिनिधि मंडल ने गडकरी को कोनिया की भौगोलिक स्थिति एवं समस्यायों से भी रूबरू कराया और पक्के पुल के निर्माण से होने वाले लाभ, विकास को अल्प समय में विवेचित करते हुए मांग को पुरजोर तरीके से रखा।
संघर्ष के तवे पर सिंक चुके यहां के लोग नेताओं के झूठे वादे, प्रपंच एवं मक्कारी को भली-भांति जान समझकर ढीठ से हो चुके हैं। उनके अनुसार, उन्होंने मंत्री नितिन गडकरी को बड़े नेताओं के मंचीय वादे बताए और खुद गडकरी के ही इस पुल के सपने दिखाने वाले वीडियो भी दिखाये। फिलहाल केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने उनकी बातों को सुन और मांग पत्र को लेकर पूर्णतया आश्वस्त किया है। उन्होंने कहा कि जल्द ही कोनिया में पक्के ब्रिज का निर्माण कराया जाएगा। फिलहाल यह तो भविष्य बताएगा कि अब तक नेताओं की वादाखिलाफी झेल रहे यहां के लोगों के सपने की उड़ान को पंख लग पाती है और मंत्री को सौंपी उम्मीद की यह पाती फलीभूत होती है या नही!
प्रतिनिधि मंडल ने केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा (टेनी) एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता सतीश उपाध्याय से भी मुलाकात कर क्षेत्र की समस्यायों से अवगत कराया। प्रतिनिधि मंडल में प्रमुख रूप से शामिल पवन तिवारी, भाजपा नेता डॉ. अजय शुक्ला, मंटू पाण्डेय, विपिन पाण्डेय (एडवोकेट) नितेश सिंह, राकेश पांडेय, पवन पांडेय, टिंकू शुक्ला एवं गुलाब तिवारी आदि शामिल रहे।
पुल निर्माण से कम होगी दो प्रदेशों की दूरी-
भदोही के डीघ ब्लॉक क्षेत्र के तुलसीकला (धनतुलसी)-डेंगुरपुर गंगा घाट पर पक्के पुल निर्माण की मांग लगातार उठ रही है। पिछले दो दशकों से यह डीघ ब्लॉक क्षेत्र की बुनियादी जरूरत के तौर पर उभरकर सामने आई है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी मांग को लेकर सक्रियता दिखाई है लेकिन बड़े नेताओं के वादे अब तक झुनझुने ही निकले। बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, सांसद व बीजेपी के स्टार प्रचारक रवि किशन शुक्ला से लेकर तमाम नेताओं ने मंच से इसको लेकर वादे किये हैं। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या तो दो-तीन दफा वादा से लेकर और उद्घाटन तक करने की बात तक कह चुके हैं। लेकिन डिप्टी सीएम का ‘सोमवार’ नही आया। चार-पांच चुनावों से यह पुल स्थानीय चुनावी मुद्दा रहा है। लेकिन ठोस कदम अब तक इस दिशा में नही उठ सके।
अब तक के धोखे ने उम्मीद पाले कोनियावासियों के जहन में साल 1977 में आये मोहम्मद रफी साहब के गीत..क्या हुआ तेरा वादा, वो कसम वो इरादा..की भी याद दिला दी। किंचित सियासी पुलाव से ऊबकर संघर्षशील टीम ने हाल में ही 10 किलोमीटर लम्बी ‘पुल नहीं तो, वोट नहीं’ के नारे संग वोट बहिष्कार समर्थन यात्रा निकाली थी। बता दें कि इस पुल के निर्माण से गंगा उस पार न सिर्फ मांडा क्षेत्र के जरिये प्रयागराज की दूरी कम होगी अपितु सीधे-सीधे मध्य प्रदेश से भी ठोस जुड़ाव हो जाएगा। इसका लाभ भदोही जनपद ही नहीं, वरन प्रयागराज गंगापार के काफी हिस्से, जौनपुर जनपदवासियों एवं कुछ अन्य उत्तरी पूर्वी जनपदों को भी खास तौर पर पहुंचेगा। यातायात व व्यावसायिक गति को भी बढ़ावा मिलेगा, तो रोजगार का सृजन भी होगा। अब तक उपेक्षा का शिकार मां गंगा की गोद में बसे भदोही के कोनिया-कोइरौना के तीन दर्जन से अधिक गांवों में विकास का पहिया दौड़ पड़ेगा।
बता दें कि तुलसीकला-डेंगुरपुर पक्के पुल मांग स्थल से पूर्व में अन्य निर्मित पुल काफी दूर हैं। कोनिया क्षेत्र से प्रयागराज के झूंसी-दारागंज शास्त्री ब्रिज की दूरी लगभग 65 किलोमीटर जबकि मिर्जापुर गंगा नदी पर बने पक्के पुल की दूरी लगभग 55 किलोमीटर होगी। संघर्षरत लोगों का कहना है कि वह इसके मांग की लड़ाई आगे भी और मजबूती से लड़ते रहेंगें।
झारखण्ड | ‘22 जनवरी’ भारत के लिए इतिहास के पन्नों में एक ऐतिहासिक दिवस के रूप में दर्ज होगा, क्योंकि वर्षों की तपस्या, कोर्ट की तारीखों से लेकर कारसेवकों की शहादत के प्रतीक राम मंदिर में रामलला लगभग 500 वर्षों के बाद आसीन होंगे। उसी दिन अयोध्या में भव्य प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम भी होना तय हुआ है, पूरा विश्व इस वक्त राममय हो चुका है। हर कोई प्रभु राम के आशीष को ग्रहण कर अभिभूत होना चाहता है। 22 जनवरी को होने वाले प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को लेकर देश-विदेश से लोग अयोध्या पहुंच रहे हैं।
सभी राम भक्त किसी न किसी माध्यम से इस कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराना चाह रहे हैं। इसी क्रम में जमशेदपुर के बागबेड़ा ट्रैफिक कॉलोनी निवासी दो युवा प्रिंस मिश्र और रोहित तिवारी साइकिल से अयोध्या धाम के लिए निकल चुके हैं। इन्होंने यात्रा की शुरुवात जय श्री राम के उद्घोष के साथ 12 जनवरी को किया एवं खबर लिखे जाने तक वह उत्तरप्रदेश के सुल्तानपुर पहुंच चुके हैं। यात्रा आरंभ करने के दौरान स्थानीय समाजसेवी एवं समस्त बस्तीवासियों के प्रमुख व्यक्तियों ने उनका अभिनंदन किया। तिलक लगाकर एवं अंग वस्त्र पहनाकर उनका सम्मान किया।
जमशेदपुर से अयोध्या तक की उनकी यात्रा लगभग 750 किमी तक की है। रामलला के भक्ति में लीन दोनों युवा पूरे दिन उत्साह पूर्वक साइकिल से यात्रा करते हैं एवं रात्रि में मंदिर में, विश्रामगृह में या फिर किसी रामभक्त के यहां विश्राम करते हैं। पुनः प्रभात की प्रथम लाली के साथ राम नाम के उदघोष के साथ यात्रा पर निकल पड़ते हैं। ऐसी भीषण ठंड और कोहरे की मार भी उनके अटल संकल्प और ऊर्जा को बाधित नहीं कर पाई है। बक़ौल रोहित तिवारी, “यह प्रभु राम की ही कृपा है, जिसने उन्हें इस यात्रा के लिए प्रेरित किया और वह आगे बढ़ रहे है, 22 तारीख को अयोध्या में दीपक जलाएंगे एवं संपूर्ण देशवासियों से भी आह्वाहन किया है कि प्रभु श्री राम के पुनः अयोध्या आगमन के अवसर पर सभी अपने घरों में दीया जला कर भव्य रूप से दिवाली मनाएं।
दरभंगा | मैथिली के प्रख्यात एकांकीकार, कुशल कथाकार और शिक्षाविद उपेंद्र झा का शनिवार देर शाम दरभंगा के एक निजी अस्पताल में 86 वर्ष की आयु में निधन हो गया। श्री झा लंबे समय से बीमार चल रहे थे। रविवार को उनका अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव मधुबनी जिले के महरैल गांव में हुआ। मुखाग्नि उनके ज्येष्ठ पुत्र डा. दिलीप कुमार झा ने दी। उपेंद्र झा का जन्म 1938 में मधुबनी जिले के महरैल गांव में हुआ था।
स्वर्गीय झा ने झंझारपुर के केजरीवाल स्कूल से मैट्रिक, दरभंगा के सीएम कालेज से स्नातक और बिहार विवि से एमए किया। इसके बाद उपेंद्र झा ने अपनी कर्मस्थली सहरसा को चुना। वहीं सहरसा कॉलेज में उन्होंने अर्थशास्त्र विभाग में लगभग 33 साल तक अध्यापन कार्य किया। वे 1998 में सेवानिवृत के समय यूनिवर्सिटी प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष थे।
उनकी पहली कथा मस्तान पत्रिका बागमती में प्रकाशित हुई तथा अंतिम कथा भंग मूर्ति मिथिला मिहिर में प्रकाशित हुई। अस्सी के दशक से लेखन कार्य में सक्रिय उपेंद्र झा की तीन दर्जन से अधिक कथा व एकांकी प्रकाशित हो चुकी है। इनमें से कई विश्वविद्यालय के मैथिली पाठ्यक्रम में भी शामिल है।
‘श्री राम मंदिर’ की भव्यता में रंगत बिखेरेगी भदोही की वॉल हैंगिंग कार्पेट
जिला जेल के क़ैदी कर रहे बुनाई, उकेरेंगें भगवान की आकृति
स्पेशल रिपोर्ट: रामकृष्ण पाण्डेय
भदोही (उ.प्र.) | कालीन नगरी भदोही का कार्पेट मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्या के भव्य राम मंदिर की खूबसूरती में चार-चांद लगाएगा। भदोही के जिला कारागार (District Jail) के करीब दर्जनभर बंदी भगवान राम, हनुमान व मां जानकी के छवि (आकृति) वाली वॉल हैंगिंग कार्पेट तैयार करेंगें, जिसे नवनिर्मित राममंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के पूर्व लगा दिया जाएगा।
इन कार्पेट्स को हॉल व गैलरी में लगाया जाएगा। पीएम के दौरे के बाद कालीन लगाने हेतु मंदिर में स्थान चिन्हित किये जायेंगे। जिलाधिकारी भदोही गौरांग राठी की पहल व शासन की अनुमति के बाद जेल बंदी बुनकरों को चुना गया है। जो आगामी 15 दिन में आकर्षक, मखमली वॉल हैंगिंग कालीन तैयार करेंगें। उसके बाद भदोही की टीम अयोध्या जाकर उसे अधिष्ठापित करेगी। जिलाधिकारी गौरांग राठी ने कहा कि वॉल हैंगिग बनाने हेतु 12 जेल बंदी बुनकरों को चुना गया है।
बुनकरों में मंदिर में लगाने हेतु वॉल हैंगिग बनाने के काम को लेकर काफी उत्साह और खुशी है। बंदी बुनकरों का कहना है कि यह काम उनके लिए अत्यंत सौभाग्यपूर्ण है। ‘राम काज कीन्हे बिनु, मोहि कहा विश्राम’ रामचरितमानस की इन पंक्तियों को चरितार्थ करते हुए वह बेहद तन्मयता से ताने-बाने के काम में जुटे हुए हैं। बताते हैं कि क्वालिटी युक्त वॉल हैंगिग न सिर्फ श्रद्धालुओं का मन मोह लेगी, बल्कि करीब सौ सालों तक मंदिर के आकर्षण में चार-चांद लगाएगी।
● वॉल हैंगिंग पर बुनकर उकेरेंगें देवी-देवताओं की कलाकृति, दसों दशक बघारेंगी शान-
श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या में बन रहे भगवान श्री रामचन्द्र के भव्य और अलौकिक मंदिर में यूपी के भदोही जिले के जेल बंदी बुनकरों द्वारा हस्तनिर्मित वॉल हैंगिंग (दीवारों पर लटकने वाला चित्रगत कालीन) चमक बिखेरेगी। मंदिर के हॉल और गैलरी में कालीनें बिछाई जायेंगीं। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर अयोध्या दर्शन हेतु पहुंचने वाले करोड़ों भारतीय श्रद्धालुओं को जहां भदोही के बुनकरों के उंगलियों की जादूगरी लुभाएगी। वहीं विदेशी पर्यटक भी कुशल कारीगरों द्वारा मखमली कालीन पर उकेरी गई कलाकृतियों को निहारेंगें।
इसके लिए जिला कारागार ज्ञानपुर प्रशासन को सिंहासन पर आशीर्वाद देने की मुद्रा में बैठे राजाराम, मां सीता एवं हनुमान जी का फ़ोटो दिया जाएगा। जिसे देखकर बुनकर वॉल हैंगिंग पर चित्र उकेरेंगें। जिलाधिकारी ने बताया कि 40 बुनकर बंदियों में से 12 कुशल बुनकरों को चुना किया गया है।
जेलर राजेश वर्मा का कहना है कि तस्वीर की व्यवस्था की जा रही है। एक-दो में दिन बुनाई शुरू हो जाएगी। वॉल हैंगिग को मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा के वृहद कार्यक्रम के एक सप्ताह पूर्व 15 जनवरी तक अयोध्या भेजकर यहां के कारीगरों को लगाकर स्थापित करा दिया जाएगा। हैंगिग का आकार (Size) छह गुणा आठ फिट निश्चित किया गया है। इसका वजन (Weight) भी करीब छह से आठ किलोग्राम रहेगा। इसे भगवा (गेरुआ) रंग या गाढ़े नीले रंग में बनाया जाएगा। जिससे अनेक रंगों में बुनी गई आकृतियां स्पष्ट उभर सकें। अधिकारी व कालीन क्षेत्र के जानकार बताते हैं कि कालीने बेहतर और दमदार क्वालिटी के धागों से बनाई जायेंगीं। लंबे अरसे तक उनकी चमक फीकी नही पड़ेगी। और वे करीब सौ बरस यानी 10 दशक तक श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की भव्यता में रंगत और रौनक बिखेरेंगीं। मंदिर के हॉल व गैलरी की शोभा और आकर्षण बढ़ाते हुए शान बघारेंगी।
● भदोही के डीएम के प्रस्ताव पर शासन की मंजूरी, पीएम के दौरे के बाद चिन्हित होगा स्थान-
बता दें कि भदोही के युवा, तेज तर्रार जिलाधिकारी गौरांग राठी ने श्रीराम मंदिर के हॉल, गैलरी व भगवान के गर्भ गृह के आसपास कालीन बिछाने हेतु करीब एक सप्ताह पूर्व ही प्रस्ताव भेजा था, जिसे शासन ने मंजूरी दे दी। नगर आयुक्त अयोध्या व विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष विशाल सिंह ने वॉल हैंगिग तैयार कराने के साथ मंदिर में गलीचे बिछवाने को भी कहा है। प्रधानमंत्री के दौरे के बाद कालीन बिछाने हेतु स्थानों को चयनित करते हुए नगर आयुक्त द्वारा जानकारी दी जाएगी।
● भदोही की सांस्कृतिक विरासत है कालीन, विदेशों तक धमक, ‘संसद भवन’ में भी बिखेर रही रौनक-
हैंड नॉटेड कार्पेट (हस्तनिर्मित कालीन) कभी बनारस से अलग हुए भदोही की परंपरागत कालीन उद्योग ही नहीं, बल्कि यह यहां की सांस्कृतिक विरासत भी है। गलीचे के शहर भदोही में सदियों से कॉरपेट का कारोबार होता चला आ रहा है। जिसका निर्यात अमेरिका, यूरोप, जर्मनी, फ्रांस सहित दुनिया भर के करीब 50 से 60 देशों में होता है। भदोही का यह परंपरागत उत्पाद बीते 28 मई 2023 को दिल्ली में नवउद्घाटित संसद भवन की सेंट्रल विस्टा में भी अपनी चमक, धमक बिखेर रहा है। वहीं यशोभूमि भारत मण्डपम में भी भदोही का सतरंगी गलीचा छाया रहा। भदोही अकेले देश का 35 से 40 प्रतिशत उत्पादन अकेले करता है। हाल ही बीते अक्टूबर माह में भदोही के कार्पेट एक्सपो मार्ट में चार दिवसीय एक्सपो का आयोजन हुआ था, जिसमें 60 देशों के करीब 700 खरीददार शामिल हुए थे। सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ भी मेले में शामिल हुए तय। ‘एक जिला एक एक उत्पाद योजना’ में भी भदोही में कार्पेट शामिल है।
●जेल बंदी भी करते हैं कालीन बुनाई, विदेशों तक छोड़ रहे कुशल कारीगरी व बारीकियों की छाप-
गलीचे के शहर भदोही में कैदी भी कालीन बुनाई का काम कर रहे हैं। उनके उंगलियों की कुशल कारीगरी तीन-चार कालीन निर्यातकों के जरिये जापान, इंग्लैंड व यूएस सहित करीब आधा दर्जन देशों तक पहुंच चुकी है। डीएम भदोही ने पिछले दिनों बताया था कि करीब 50 से 60 कैदी ज्ञानपुर जेल में भी कालीन बुनाई का काम कर रहे हैं। उनकी कारीगरी को और पहचान मिल सके, इसलिए प्रयास करके निर्यातकों द्वारा उसे विदेशों तक भेजा जा रहा है। हाल ही में आयोजित कालीन मेले में भी जिला कारागार कार्पेट का एक स्टॉल लगाया गया था। वहीं अब अयोध्या में नवनिर्मित हो रहे भगवान श्री रामचन्द्र जी के मंदिर में भी उनके द्वारा बुनी गई वॉल हैंगिंग लगाई जाएगी।
नई दिल्ली | दिल्लीशराबघोटालामामलेमेंप्रवर्तननिदेशालयनेदिल्लीकेमुख्यमंत्रीएवंआमआदमीपार्टीप्रमुखअरविन्दकेजरीवालकोसमन भेजकरपूछताछकेलिएतलबकियाहै।पेशहोनेकीतिथिकेएकदिनपूर्वहीकेजरीवालनेसाधनाकेलिएपंजाबकीओररुख़कर लियाहै, जहांवेविपश्यनामेडिटेशनसेंटरमेंदसदिनरहकरमेडिटेशनकरेंगे।
अरविन्दकेजरीवालकोपिछलेबारजबपूछताछकेलिएप्रवर्तननिदेशालयमेंसमनभेजाथा, उससमयकेजरीवालनेदीपावलीमेंबढ़े हुएकाम–काजकोलेकरअपनीव्यस्तताज़ाहिरकीऔरकहाकिउनकेपाससमयनहींहैकिवेसबज़रूरीकामछोड़करईडी के सवालोंकाजवाबदें।इसबारजबउन्हेंसमनभेजागयातोपूछताछकेलियेएजेंसीकेसामनेपेशहोनेकीजगहउन्होंनेसाधनाको चुना।
केजरीवालकाहोशियारपुरकेपासआनंदगढ़स्थितमेडिटेशनसेंटरपरदसदिनरहेंगे।इसकेमद्देनजरजिलाप्रशासनचौकसहोगया है। विपश्यनामेडीटेशनसेंटरकेइर्दगिर्दपुलिसकोसतर्ककरदियागयाहै।उनकेसाथपंजाबकेमुख्यमंत्रीभगवंतमानभीरहेंगे। इसकेअलावाभीकिसीभीआपनेताऔरकार्यकर्ताकेरहनेकीइजाजतनहींहोगी, क्योंकिकेजरीवालकायहपूरीतरहसेनिजी कार्यक्रमहै।
बिनाकिसीसेमिलेपुलिसकीकड़ीसुरक्षामेंकेजरीवालसीधेविपश्यनामेडीटेशनसेंटरपहुंचेंगे।उनकेसाथसीएमभगवंतमान भी जाएंगे।फिरकेजरीवालवहींपररुकेंगेऔरमानवहांसेचलेजाएंगे।