चित्रकूट: इस पहल के चलते एक बार फिर से चर्चा के केंद्र में डीएम पुलकित गर्ग

अनुज हनुमत | नवप्रवाह.कॉम

चित्रकूट |  बुंदेलखंड के चित्रकूट जनपद में जल संरक्षण और विकास कार्यों को एक साथ नई गति देने के लिए जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने एक अभूतपूर्व पहल की है। जिलाधिकारी के एक सूझबूझ भरे निर्णय से न सिर्फ सालों से उपेक्षित पड़े तालाब अपने मूल स्वरूप में लौटेंगे, बल्कि सरकारी निर्माण कार्यों के लिए जरूरी साधारण मिट्टी की उपलब्धता भी बेहद आसान हो जाएगी। इस अनोखे मॉडल की शुरुआत मानिकपुर तहसील के ग्राम मडैयन से हो चुकी है, जिसकी चर्चा पूरे जनपद में है।

​जनपद के तहसील-मानिकपुर अंतर्गत ग्राम-मडैयन के ग्रामीणों ने पिछले दिनों जिलाधिकारी से मुलाकात कर गांव के एक प्राचीन तालाब के पुनरुद्धार और उसे मूल स्वरूप में वापस लाने का अनुरोध किया था। ग्रामीणों की इस मांग पर एक्शन लेते हुए जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने एक बड़ा फैसला लिया।

​गांव की गाटा संख्या-513 (रकबा 1.819 हेक्टेयर) भूमि, जो राजस्व अभिलेखों में तालाब के रूप में दर्ज है, वहां से साधारण मिट्टी खनन की अनुमति संबंधित कार्यदायी संस्था को प्रदान कर दी गई। जैसा कि तस्वीर में साफ देखा जा सकता है, मौके पर पोकलैंड मशीन और डंपर के जरिए तेजी से तालाब की सिल्ट-सफाई और मिट्टी उठान का कार्य किया जा रहा है।

एक पंथ दो काज’-

​जिलाधिकारी के इस निर्णय से एक साथ कई मोर्चों पर बड़ी राहत मिली है। सालों से गाद (मिट्टी) भरने के कारण समतल हो चुके तालाब की गहराई बढ़ रही है, जिससे वह अपने मूल स्वरूप में लौट रहा है। सरकारी निर्माण कार्य में लगी संस्थाएं अपने खर्च पर तालाब की खुदाई कर रही हैं, जिससे प्रशासन का पैसा बच रहा है और आगामी बरसात में जलसंचय के लिए ग्रामीणों को अप्रत्याशित लाभ मिलना तय है। निर्माण कार्यों के लिए कार्यदायी संस्था को बिना किसी व्यवधान के गुणवत्तापूर्ण साधारण मिट्टी की आपूर्ति सुनिश्चित हो गई है।

“जल संरक्षण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। मडैयन गांव का यह प्रयोग बेहद सफल रहा है। इससे भूगर्भ जल स्तर सुधरेगा और किसानों व मवेशियों के लिए पानी की किल्लत दूर होगी।”

  पुलकित गर्ग, जिलाधिकारी, चित्रकूट

मडैयन गांव में इस योजना को देखते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा है कि जनपद की सभी तहसीलों में ऐसे तालाबों को तत्काल चिन्हित किया जाए, जो उपेक्षित पड़े हैं और जहाँ से मिट्टी निकालकर सरकारी विकास कार्यों में इस्तेमाल की जा सकती है।

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