अनुज हनुमत | नवप्रवाह डॉट कॉम
चित्रकूट | मध्य प्रदेश और चित्रकूट के पहाड़ी क्षेत्रों में शुक्रवार रात से शुरू हुई मूसलाधार बारिश ने भीषण तबाही मचाई है। उफान पर आई मंदाकिनी और बरदहा नदियों के कारण धर्मनगरी चित्रकूट और आसपास के इलाके जलमग्न हो गए हैं। मंदाकिनी नदी का जलस्तर खतरे के निशान (126.50 मीटर) से 8.70 मीटर ऊपर उठकर 135.200 मीटर तक पहुंच गया है, जिसने वर्ष 2003 में बने 134.500 मीटर के रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया है। फिलहाल नदी का जलस्तर घट रहा है लेकिन अचानक आई आपदा ने लोगों को मुश्किलों में डाल दिया है।
मानिकपुर-सतना रेल मार्ग पर मझगवां रेलवे अंडरब्रिज के पास भारी जलभराव के चलते रेलवे ट्रैक के नीचे की मिट्टी कट गई, जिससे ट्रैक धंस गया। इसके चलते मुंबई-हावड़ा और झांसी-मानिकपुर रूट पर ट्रेनों का संचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। दर्जनों ट्रेनों को रोक दिया गया या उन्हें धीमी गति से रवाना किया जा रहा है।
मानिकपुर-सतना रेल मार्ग पर मझगवां रेलवे अंडरब्रिज के पास भारी जलभराव के चलते रेलवे ट्रैक के नीचे की मिट्टी कट गई, जिससे ट्रैक धंस गया। इसके चलते मुंबई-हावड़ा और झांसी-मानिकपुर रूट पर ट्रेनों का संचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। दर्जनों ट्रेनों को रोक दिया गया या उन्हें धीमी गति से रवाना किया जा रहा है।
मंदाकिनी के तेज बहाव में रामघाट से हनुमान धारा जाने वाला लगभग 300 मीटर लंबा बड़ा पुल टूटकर बह गया है। इसके अलावा मानिकपुर-सतना मार्ग पर कारी बराह पुल के क्षतिग्रस्त होने से यूपी-एमपी का संपर्क टूट गया है। झांसी-मिर्जापुर हाईवे और चित्रकूट-बांदा मार्ग पर पानी भर जाने से वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं और यातायात पूरी तरह बंद कर दिया गया है। मंदाकिनी नदी के उफान से तरौंहा, शंकरगंज, नेही, नींवा, चोहरी और गोबरिया सहित दर्जनों गांव पूरी तरह पानी में डूब चुके हैं। सैकड़ों मकान और दुकानें जलमग्न हैं। कई ग्रामीण अपने-अपने पक्के मकानों की छतों पर राशन व सामान लेकर शरण लिए हुए हैं। वहीं, मार्कंडी स्थित टिकरिया डोडा माफी बांध के ओवरफ्लो होने और मिट्टी के कटाव से बांध टूटने का खतरा मंडरा रहा है।
बाढ़ का पानी शहर के जल संस्थान के इंटेकवेल और 10 प्रमुख ट्रांसफार्मरों में घुस गया है, जिससे पूरे क्षेत्र की बिजली और पेयजल आपूर्ति ठप हो गई है। अधिकारियों के अनुसार स्थिति सामान्य होने में कम से कम तीन दिन का समय लग सकता है।
सेना के हेलीकॉप्टर व SDRF की टीमें रेस्क्यू में जुटीं-
प्रशासन, पुलिस, NDRF और SDRF की टीमें प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव कार्य चला रही हैं। नांवों की मदद से अब तक 50 से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। होटलों और जलमग्न मकानों में फंसे श्रद्धालुओं व नागरिकों तक राहत सामग्री पहुंचाने और उन्हें निकालने के लिहाज से वायुसेना के हेलीकॉप्टर की मदद ली जा रही है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया के जरिए अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाने और प्रभावितों तक तुरंत मदद पहुंचाने के सख्त निर्देश दिए हैं। वहीं मौसम विभाग ने जिले में भारी बारिश की चेतावनी जारी करते हुए 3 सितंबर तक के लिए येलो अलर्ट जारी किया है।














