चित्रकूट | प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का हालिया चित्रकूट और बांदा दौरा बुंदेलखंड की राजनीति और विकास के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मोड़ पर हुआ है। एक तरफ जहां सरकार ने ₹1600 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं के जरिए इस पिछड़े क्षेत्र की तकदीर बदलने का खाका खींचा है, वहीं दूसरी तरफ आगामी राजनीतिक समीकरणों को साधने की कोशिशें भी साफ दिखी हैं। इस दौरे को सिर्फ एक प्रशासनिक कार्यक्रम के तौर पर देखना अधूरी तस्वीर होगी । इसके वास्तविक सामाजिक और राजनीतिक निहितार्थों को समझने के लिए हमें एक सजग नागरिक की उम्मीदों और एक तार्किक आलोचक के संशयों, दोनों पैमानों पर इसे कसना होगा ।
चित्रकूट को ₹950 करोड़ (124 परियोजनाएं) और बांदा को ₹709 करोड़ (229 परियोजनाएं) के विकास कार्यों की सौगात मिलना इस पिछड़े क्षेत्र की बुनियादी संरचना को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है।मुख्यमंत्री द्वारा कामदगिरि की पंचकोसीय परिक्रमा करना और धर्मनगरी के विकास की बात करना, चित्रकूट को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की प्रतिबद्धता दिखाता है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। बांदा में वीरांगना अवंतीबाई लोधी की प्रतिमा का अनावरण करना हमारे ऐतिहासिक नायकों और लोक-चेतना को सम्मान देने का एक सराहनीय प्रयास है।
मंच से विकास योजनाओं के लोकार्पण के साथ-साथ विपक्षी दलों (विशेषकर सपा) पर तीखे तंज और ‘सैफई बनाम बुंदेलखंड’ का नैरेटिव यह साफ करता है कि इस दौरे का बड़ा मकसद आगामी विधानसभा चुनावों के लिए जमीन तैयार करना था। भाषणों में प्रशासनिक जवाबदेही से ज्यादा राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता हावी दिखी।
लगभग ₹1600 करोड़ से अधिक की इन परियोजनाओं की घोषणा तो शानदार है, लेकिन असली चुनौती इनके समयबद्ध क्रियान्वयन की है। बुंदेलखंड आज भी पानी के संकट, अन्ना प्रथा (आवारा पशु), स्थानीय बेरोजगारी और युवाओं के भारी पलायन जैसी बुनियादी समस्याओं से जूझ रहा है। क्या ये परियोजनाएं इन कड़वी हकीकतों का स्थायी इलाज कर पाएंगी?
सरकार भले ही भू-माफियाओं पर ‘डंडे’ की बात करे, लेकिन बुंदेलखंड में अवैध खनन और स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक भ्रष्टाचार की जड़ें आज भी गहरी हैं, जिन पर केवल राजनीतिक भाषणों से नहीं, बल्कि कड़े जमीनी सुधारों से लगाम लगेगी।
मुख्यमंत्री का यह दौरा बुंदेलखंड के प्रति सरकार की सक्रियता को तो रेखांकित करता है, लेकिन एक नागरिक और मतदाता के रूप में हमारी उम्मीदें केवल शिलान्यास के पत्थरों तक सीमित नहीं हो सकतीं। विकास तब सार्थक माना जाएगा जब बुंदेलखंड का युवा रोजगार के लिए महानगरों की तरफ भागने को मजबूर न हो और चित्रकूट-बांदा की जनता को बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष न करना पड़े। राजनीति अपनी जगह है, लेकिन वादों की कसौटी पर खरा उतरना सरकार की असली परीक्षा होगी।
चित्रकूट | बांदा-चित्रकूट के दो दिवसीय दौरे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कई महत्वपूर्ण फैसले किये। चित्रकूट में अधिकारियों के साथ बैठक में मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों की योजनाओं एवं विकास कार्यों की विस्तार से समीक्षा करते हुए अधिकारियों को समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण एवं पारदर्शी ढंग से कार्य संपादित करने के निर्देश दिए।
स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी से आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत संबद्ध चिकित्सालयों एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी प्राप्त की। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि जनपद के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर योजना का लाभ उपलब्ध कराया जा रहा है। इस पर मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत देय भुगतान समय से सुनिश्चित किया जाए तथा सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर पोषण किट की उपलब्धता बनी रहे। उन्होंने क्षय रोग (टीबी) उन्मूलन अभियान के अंतर्गत जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों को एक-एक टीबी मरीज गोद लेकर उसके उपचार एवं पोषण में सहयोग करने के निर्देश दिए। साथ ही जनपद में न्यूनतम 300 शैय्याओं वाले मेडिकल कॉलेज की स्थापना हेतु उपयुक्त भूमि चिन्हित कर प्रस्ताव शासन को भेजने के निर्देश दिए।
वन विभाग की समीक्षा के दौरान प्रभागीय वनाधिकारी ने अवगत कराया कि 12 जुलाई को प्रस्तावित वृक्षारोपण अभियान के अंतर्गत लगभग 88 लाख पौधों के रोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है तथा गड्ढों की खुदाई एवं पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित कर ली गई है। माननीय मुख्यमंत्री ने वन भूमि पर अवैध कब्जों की समीक्षा करते हुए उन्हें हटाने तथा जिन वन मार्गों का जनसामान्य द्वारा उपयोग किया जाता है, उनके विकास हेतु आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए।
पशुपालन विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि जनपद में 290 निराश्रित गोवंश आश्रय स्थल संचालित हैं। माननीय मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि कोई भी निराश्रित गोवंश सड़कों पर विचरण करता हुआ न मिले। उन्होंने भूसा बैंक की उपलब्धता की जानकारी प्राप्त की तथा निर्देश दिए कि सभी गोशालाओं में भूसे के साथ-साथ हरे चारे की भी समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
शिक्षा विभाग की समीक्षा में जिला विद्यालय निरीक्षक ने बताया कि जनपद में 141 इंटर कॉलेज संचालित हैं, जिनमें 114 विद्यालय उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद से संबद्ध हैं। माननीय मुख्यमंत्री ने छात्र संख्या की समीक्षा करते हुए प्रोजेक्ट अलंकार के अंतर्गत स्वीकृत समस्त कार्यों को शत-प्रतिशत पूर्ण कराने के निर्देश दिए।
बेसिक शिक्षा विभाग की समीक्षा के दौरान बेसिक शिक्षा अधिकारी ने बताया कि जनपद में 1,262 विद्यालय संचालित हैं तथा लगभग 1.11 लाख विद्यार्थियों का पंजीकरण किया जा चुका है। उन्होंने यह भी अवगत कराया कि स्कूल चलो अभियान के प्रथम चरण में लगभग 25 हजार नए विद्यार्थियों का नामांकन कराया गया है। इस पर माननीय मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी पात्र विद्यार्थियों को समय से निःशुल्क यूनिफॉर्म, जूते, मोजे, बैग एवं अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं तथा कोई भी बच्चा विद्यालय जाने से वंचित न रहे। उन्होंने विद्यालयों में कायाकल्प योजना के कार्यों को भी समयबद्ध रूप से पूर्ण कराने के निर्देश दिए।
कृषि एवं बैंकिंग क्षेत्र की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने अग्रणी जिला प्रबंधक को किसानों एवं युवाओं को स्वरोजगार एवं उद्यमिता के लिए अधिकाधिक ऋण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। जिला कृषि अधिकारी ने अवगत कराया कि वर्ष 2025-26 में 1,858 कृषकों को विभिन्न योजनाओं का लाभ प्रदान किया गया है। मुख्यमंत्री ने उर्वरक एवं बीज की समय से उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को समयबद्ध क्षतिपूर्ति उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को नियमित रूप से क्षेत्र भ्रमण कर योजनाओं की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करने को भी कहा।
खनिज विभाग की समीक्षा में मुख्यमंत्री ने अवैध खनन एवं ओवरलोडिंग पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करने तथा अन्य राज्यों से आने वाले अवैध खनन से जुड़े वाहनों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
पर्यटन विभाग की समीक्षा के दौरान उन्होंने निर्माणाधीन परियोजनाओं का नियमित निरीक्षण कर गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। सिंचाई विभाग को राजापुर क्षेत्र में प्रस्तावित फ्रंट कॉरिडोर का विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर शासन को प्रेषित करने के निर्देश दिए।
बैठक के दौरान जनप्रतिनिधियों ने रामघाट स्थित लेटे हुए हनुमान मंदिर क्षेत्र में जल संरक्षण हेतु बांध निर्माण का प्रस्ताव रखा, जिससे श्रद्धालुओं को स्नान हेतु पर्याप्त जल उपलब्ध हो सके। इस पर मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी को परियोजना तैयार कर शासन को भेजने के निर्देश दिए।
बैठक में जनप्रतिनिधियों द्वारा विभिन्न सड़क परियोजनाओं सहित स्थानीय विकास संबंधी विषय भी उठाए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि विगत वर्षों में जनपद चित्रकूट में उल्लेखनीय विकास कार्य हुए हैं तथा इसकी स्वच्छता, सौंदर्यीकरण एवं सड़क अवसंरचना सराहनीय है। उन्होंने राजस्व प्रकरणों, विशेषकर पैमाइश एवं नामांतरण के मामलों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गोवंश संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा मंदाकिनी नदी के पुनरुत्थान के लिए प्रभावी कार्ययोजना बनाकर कार्य किया जाए। उन्होंने चित्रकूट को धार्मिक एवं आध्यात्मिक नगरी बताते हुए श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु छोटी धर्मशालाओं के विकास पर भी बल दिया।
उन्होंने जल जीवन मिशन के अंतर्गत सभी परियोजनाओं को समयबद्ध पूर्ण करने, जनसुनवाई को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रत्येक शिकायत का गुणवत्तापूर्ण एवं निष्पक्ष निस्तारण सुनिश्चित करने तथा पात्र लाभार्थियों को प्रधानमंत्री आवास योजना एवं मुख्यमंत्री आवास योजना का लाभ बिना किसी भेदभाव के उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
कानून-व्यवस्था की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने पुलिस अधीक्षक को नियमित पुलिस गश्त बढ़ाने, थाना व्यवस्था को सुदृढ़ करने, सोशल मीडिया पर अफवाह एवं असामाजिक गतिविधियों में संलिप्त तत्वों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने, मिशन शक्ति अभियान के अंतर्गत ग्राम पंचायतों में महिलाओं से संवाद स्थापित करने तथा शहरी क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरों का नेटवर्क विस्तारित करने के निर्देश दिए। उन्होंने भू-माफियाओं, तस्करों एवं संगठित अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई करने तथा जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक को कोर ग्रुप की नियमित बैठक कर कानून-व्यवस्था की सतत समीक्षा करने के निर्देश दिए।
बैठक के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि जनपद चित्रकूट ने विगत वर्षों में विकास एवं सुशासन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने अधिकारियों को जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पारदर्शिता एवं संवेदनशीलता के साथ पहुंचाने तथा विकास कार्यों को निर्धारित समय सीमा में गुणवत्तापूर्वक पूर्ण कराने के निर्देश दिए।
तत्पश्चात मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में लोक निर्माण विभाग पुराने कार्यों एवं नए कार्यों की कार्ययोजना पर समीक्षा की गई। बैठक में मुख्यमंत्री द्वारा मंडल के ग्रामीण मार्गों के पुनर्निर्माण, नवनिर्माण व अन्य जिला मार्ग व राजमार्ग का चौड़ीकरण एवं सौंदर्यीकरण बाईपास एवं सड़क सुरक्षा, लघुसेत एवं दीर्घसेतु की कार्ययोजनाएं से संबंधित जनपद में जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक कर अनुमोदित की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़के गड्ढा मुक्त होनी चाहिए, यह सुनिश्चित कराएं। उन्होंने यह भी कहा कि सभी निर्माण कार्य गुणवत्तापूर्ण व समय सीमा के अंतर्गत पूर्ण होना चाहिए।
बैठक में प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग अजय चौहान, प्रमुख अभियंता लोक निर्माण विभाग अशोक कुमार द्विवेदी, मुख्य अभियंता बांदा मंडल लोक निर्माण विभाग तथा संबंधित अधिकारीगण उपस्थित रहे।
नई दिल्ली | राजनीति की पाठशाला के संस्थापक डॉ. अजय पाण्डेय के नेतृत्व में संगठन का 9वां फाउंडेशन डे दिल्ली सहित देश के कई राज्यों में बड़े उत्साह के साथ मनाया गया। नई दिल्ली में यह कार्यक्रम कॉन्स्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित किया गया।
इस खास मौके पर देश के विभिन्न प्रदेशों से आए सामाजिक कार्यकर्ता, युवा और राजनेता शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्देश्य नई पीढ़ी को राजनीति के सही मायने, संविधान की ताकत और लोकतंत्र में भागीदारी का महत्व समझाना था।
संस्थापक डॉ. अजय पाण्डेय ने कहा कि “राजनीति गंदी नहीं है, गंदे लोग राजनीति को गंदा करते हैं। जब ईमानदार और शिक्षित लोग राजनीति में आएंगे, तभी देश बदलेगा” उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि युवा राजनीति में आएँ और देश की बागडोर अपने हाथों में लें तभी ये गंदगी समाप्त होगी।
संविधान पर चर्चा-
युवाओं को बताया गया कि संविधान ही देश की आत्मा है। अपने अधिकारों के साथ कर्तव्य भी जानना जरूरी है
डॉ. पाण्डेय के मार्गदर्शन में राजनीति की पाठशाला ने 9 साल में हजारों युवाओं को ट्रेन किया। ये लोग आज पंचायत से लेकर संसद तक देश सेवा कर रहे हैं।
रंगला पंजाब, फिरोजपुर इकाई की तरफ से संस्थापक डॉ. अजय पाण्डेय और पूरी टीम को धन्यवाद दिया गया। फिरोजपुर टीम ने संकल्प लिया कि हम पंजाब में भी ज्यादा से ज्यादा युवाओं को जोड़कर राजनीति की पाठशाला के मिशन को आगे बढ़ाएंगे।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान और इस संकल्प के साथ हुआ कि हम सब मिलकर एक ईमानदार, मजबूत और शिक्षित भारत बनाएंगे।
लखनऊ | यूपी की सियासत में ‘दिल्ली का रास्ता लखनऊ से होकर गुजरता है’ वाली कहावत अभी पुरानी भी नहीं हुई थी कि 2027 के विधानसभा चुनाव की बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है। लोकसभा चुनाव के नतीजों से उत्साहित विपक्षी खेमे के भीतर से भविष्य की जमीन तैयार करने वाली पहली बड़ी सुगबुगाहट सामने आई है। यह सुगबुगाहट किसी बंद कमरे की नहीं, बल्कि सीटों के बंटवारे के उस ‘जादुई फॉर्मूले’ की है, जो सूबे की राजनीति में नए समीकरण गढ़ सकता है।
कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम के होठों से निकले एक बयान ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। संकेतों की मानें तो आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच ‘बराबरी’ के आधार पर सीटों का बंटवारा हो सकता है। लोकसभा चुनाव में जहां समाजवादी पार्टी ‘बड़े भाई’ की भूमिका में थी, वहीं विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस का यह ‘बराबरी का दावा’ यह साफ करता है कि दिल्ली की संजीवनी के बाद अब कांग्रेस यूपी में बैकफुट पर खेलने के मूड में बिल्कुल नहीं है।
पिछले कुछ विधानसभा चुनावों में हाशिए पर रही कांग्रेस अब यूपी में खुद को क्षेत्रीय दलों के रहमो-करम पर नहीं छोड़ना चाहती। लोकसभा में मिले जनसमर्थन को कांग्रेस अपने सांगठनिक पुनरुत्थान के तौर पर देख रही है और बराबरी का दावा इसी बदली हुई आक्रामकता का प्रतीक है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव के लिए यह फॉर्मूला एक बड़ी परीक्षा जैसा होगा। लोकसभा में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी सपा क्या विधानसभा में अपने गढ़ और मजबूत जमीन को कांग्रेस के साथ आधी-आधी सीटों पर बांटने को तैयार होगी? यह देखना दिलचस्प होगा कि पीडीए का नैरेटिव इस नए फॉर्मूले में कैसे फिट बैठता है।
यह सुगबुगाहट बताती है कि विपक्ष यह भांप चुका है कि अगर 2027 में सत्ता विरोधी लहर का फायदा उठाना है, तो आपसी सिरफुटव्वल से बचकर ‘वन-टू-वन’ की सीधी लड़ाई लड़नी होगी। सीटों का जल्द तालमेल गठबंधन को जमीन पर बगावत रोकने और उम्मीदवारों को तैयारी का पूरा मौका देगा।
लोकसभा और विधानसभा के चुनाव दो अलग मिजाज के होते हैं। स्थानीय मुद्दे, क्षेत्रीय क्षत्रपों की महत्वाकांक्षाएं और जमीनी कार्यकर्ताओं का दबाव अक्सर कागजी फॉर्मूलों को बिगाड़ देता है। राजेंद्र पाल गौतम का यह बयान गठबंधन के भीतर भविष्य की सौदेबाजी की शुरुआत है या आपसी सहमति की परिपक्वता, यह तो वक्त बताएगा। लेकिन एक बात साफ है कि यूपी की चुनावी ढोलक पर थाप अभी से पड़नी शुरू हो गई है और इसकी गूंज 2027 तक बनी रहेगी।
चित्रकूट | जनपद के मानिकपुर क्षेत्र से विकास कार्यों में भारी लापरवाही और भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है। लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा बनाई जा रही एक मुख्य सड़क वित्तीय अनियमितताओं और घटिया निर्माण कार्य को लेकर सुर्खियों में है। स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
पुराना मानिकपुर से जीरा गांव सड़क में भारी अनियमितता-
मिली जानकारी के अनुसार, पुराना मानिकपुर से जीरा गांव तक जाने वाली सड़क का निर्माण कार्य PWD विभाग द्वारा कराया जा रहा है। आरोप है कि इस सड़क के निर्माण में मानकों को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया है। सड़क में इस्तेमाल की जा रही सामग्री बेहद घटिया स्तर की है, जिसके कारण सड़क बनने के साथ ही उखड़ने लगी है। ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है।
भ्रष्टाचार का नया मॉडल-
स्थानीय लोगों का आरोप है कि ठेकेदार और विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से इस परियोजना में ‘भ्रष्टाचार का नया मॉडल’ तैयार किया गया है। बिना उचित डामरीकरण और गिट्टी के ही आनन-फानन में सड़क की लीपापोती की जा रही है। इस सड़क के निर्माण से क्षेत्र के हजारों लोगों को राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन घटिया काम को देखकर अब लोगों में भारी आक्रोश है।
जांच और कार्रवाई की मांग-
मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर इस सड़क निर्माण की जांच की मांग तेज हो गई है। ग्रामीणों ने उच्चाधिकारियों से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों व ठेकेदार के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि सरकारी धन के इस दुरुपयोग को रोका जा सके।
चित्रकूट |बुंदेलखंड के चित्रकूट जनपद में जल संरक्षण और विकास कार्यों को एक साथ नई गति देने के लिए जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने एक अभूतपूर्व पहल की है। जिलाधिकारी के एक सूझबूझ भरे निर्णय से न सिर्फ सालों से उपेक्षित पड़े तालाब अपने मूल स्वरूप में लौटेंगे, बल्कि सरकारी निर्माण कार्यों के लिए जरूरी साधारण मिट्टी की उपलब्धता भी बेहद आसान हो जाएगी। इस अनोखे मॉडल की शुरुआत मानिकपुर तहसील के ग्राम मडैयन से हो चुकी है, जिसकी चर्चा पूरे जनपद में है।
जनपद के तहसील-मानिकपुर अंतर्गत ग्राम-मडैयन के ग्रामीणों ने पिछले दिनों जिलाधिकारी से मुलाकात कर गांव के एक प्राचीन तालाब के पुनरुद्धार और उसे मूल स्वरूप में वापस लाने का अनुरोध किया था। ग्रामीणों की इस मांग पर एक्शन लेते हुए जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने एक बड़ा फैसला लिया।
गांव की गाटा संख्या-513 (रकबा 1.819 हेक्टेयर) भूमि, जो राजस्व अभिलेखों में तालाब के रूप में दर्ज है, वहां से साधारण मिट्टी खनन की अनुमति संबंधित कार्यदायी संस्था को प्रदान कर दी गई। जैसा कि तस्वीर में साफ देखा जा सकता है, मौके पर पोकलैंड मशीन और डंपर के जरिए तेजी से तालाब की सिल्ट-सफाई और मिट्टी उठान का कार्य किया जा रहा है।
‘एक पंथ दो काज’-
जिलाधिकारी के इस निर्णय से एक साथ कई मोर्चों पर बड़ी राहत मिली है। सालों से गाद (मिट्टी) भरने के कारण समतल हो चुके तालाब की गहराई बढ़ रही है, जिससे वह अपने मूल स्वरूप में लौट रहा है। सरकारी निर्माण कार्य में लगी संस्थाएं अपने खर्च पर तालाब की खुदाई कर रही हैं, जिससे प्रशासन का पैसा बच रहा है और आगामी बरसात में जलसंचय के लिए ग्रामीणों को अप्रत्याशित लाभ मिलना तय है। निर्माण कार्यों के लिए कार्यदायी संस्था को बिना किसी व्यवधान के गुणवत्तापूर्ण साधारण मिट्टी की आपूर्ति सुनिश्चित हो गई है।
“जल संरक्षण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। मडैयन गांव का यह प्रयोग बेहद सफल रहा है। इससे भूगर्भ जल स्तर सुधरेगा और किसानों व मवेशियों के लिए पानी की किल्लत दूर होगी।”
—पुलकित गर्ग, जिलाधिकारी, चित्रकूट
मडैयन गांव में इस योजना को देखते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा है कि जनपद की सभी तहसीलों में ऐसे तालाबों को तत्काल चिन्हित किया जाए, जो उपेक्षित पड़े हैं और जहाँ से मिट्टी निकालकर सरकारी विकास कार्यों में इस्तेमाल की जा सकती है।
मुम्बई |ऑपरेशन टाइगर की कामयाबी के बाद शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे का राजनीतिक कद राष्ट्रीय स्तर पर तेज़ी से बढ़ता हुआ दिख रहा है। इस पूरे ऑपरेशन का मास्टरमाइंड उन्हें माना जा रहा है। दिल्ली के सियासी गलियारों में अब उन्हें किंगमेकर के तौर पर देखा जा रहा है।
आमतौर पर लाइमलाइट से दूर रहकर संगठन का काम करने वाले श्रीकांत शिंदे इस बार खुलकर सामने आए। उन्होंने उद्धव बालासाहेब ठाकरे (उबाठा) गुट के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए नाराज सांसदों को शिवसेना के पाले में लाने का काम किया। सूत्रों के अनुसार, ऑपरेशन की शुरुआत एक साल पहले ही हो गई थी। शिंदे ने बेहद गोपनीय तरीके से उद्धव गुट के असंतुष्ट सांसदों से संपर्क साधा। इसकी जानकारी उनके कुछ चुनिंदा भरोसेमंद लोगों को ही थी।
क्यों हुए सांसद नाराज ?
श्रीकांत शिंदे की राजनीतिक सूझबूझ ने भांप लिया था कि महाविकास अघाड़ी में कांग्रेस और एनसीपी के बढ़ते प्रभाव से उद्धव गुट कमजोर पड़ रहा है। उनके नेता स्वतंत्र निर्णय लेने में असमर्थ थे, जिससे कई सांसद असहज महसूस कर रहे थे। श्रीकांत शिंदे ने इन सांसदों को ताकत दी, जिससे उनका भरोसा शिवसेना पर बढ़ा।
रणनीतिक रूप से काम करते हुए शिंदे ने उद्धव गुट के 6 नाराज सांसदों का विश्वास जीता। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात का समय तय करने से लेकर कानूनी कागजी कार्रवाई तक, हर पहलू पर उन्होंने खुद निगरानी रखी। दिल्ली से मुंबई तक मीडिया और विपक्ष की नजरों से बचाकर पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया गया।
संसद में मुद्दे मजबूती से रखने के साथ-साथ डॉ. शिंदे ने विदेश में भी देश की छवि बेहतर की है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान विदेशों में भारत का पक्ष रखकर मजबूत समर्थन जुटाया, जिसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनकी सराहना की थी।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, सांसदों के साथ निरंतर संवाद और संगठनात्मक समन्वय ने इस अभियान को सफल बनाया। डॉ. शिंदे केवल संसदीय राजनीति तक सीमित नहीं, बल्कि रणनीति और राजनीतिक प्रबंधन में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। पार्टी के बड़े फैसलों में उनका सुझाव महत्वपूर्ण माना जाता है। एक सामान्य महिला कार्यकर्ता को राज्यसभा भेजने का निर्णय भी उन्हीं की पहल पर हुआ था।
जब कंपनियों पर हजारों करोड़ का AGR बकाया आया, तो उसकी कीमत आखिरकार आम मोबाइल उपयोगकर्ता को ही चुकानी पड़ी।
क्या आपने सोचा है कि मोबाइल रिचार्ज इतने महंगे क्यों होते जा रहे हैं?
कहानी सिर्फ कंपनियों की नहीं है, इसमें अदालत, सरकार और अंत में आम जनता सब शामिल हैं।
शुरुआत 1999 से होती है
भारत सरकार ने 1999 की New Telecom Policy के तहत टेलीकॉम कंपनियों से कहा कि वे अपनी कमाई का एक हिस्सा सरकार को देंगी।
इसे कहा गया Adjusted Gross Revenue यानी AGR।
कंपनियों को अपनी कमाई का लगभग 8% लाइसेंस फीस और अलग से स्पेक्ट्रम चार्ज देना होता था।
कई साल तक कंपनियाँ AGR को सिर्फ कॉल और डेटा की कमाई पर लागू मानती रहीं। लेकिन सरकार का कहना था कि इसमें ब्याज, रेंट, और दूसरी आय भी शामिल होगी। यहीं से विवाद शुरू हुआ।
2019: वह साल जिसने पूरे टेलीकॉम सेक्टर की दिशा बदल दी
24 अक्टूबर 2019 को भारत के सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि सरकार की AGR परिभाषा सही है और कंपनियों को पिछली पूरी देनदारी ब्याज और पेनल्टी के साथ चुकानी होगी।
इस फैसले के बाद टेलीकॉम कंपनियों पर कुल ₹1.77 लाख करोड़ से ज्यादा का AGR बकाया निकल आया। इनमें सबसे ज्यादा बोझ पड़ा Vodafone Idea पर, जिस पर लगभग ₹89,952 करोड़ की देनदारी बताई गई।
Vodafone Idea पर कर्ज का पहाड़
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद Vodafone और Idea, जो पहले ही ग्राहकों के कम होने से कमजोर हो चुके थे, अचानक भारी कर्ज में दब गए।
2025 तक कंपनी का कुल कर्ज लगभग ₹2.4 लाख करोड़ के आसपास पहुंच गया। यह सिर्फ व्यापारिक नुकसान नहीं था, बल्कि अदालत के आदेश से पैदा हुई देनदारी भी थी।
सरकार ने राहत दी, लेकिन समस्या खत्म नहीं हुई
सितंबर 2021 में सरकार ने टेलीकॉम सेक्टर को राहत देने के लिए एक पैकेज घोषित किया और कंपनियों को AGR और स्पेक्ट्रम भुगतान पर चार साल का मोराटोरियम दिया। इसका मतलब यह था कि कंपनियाँ कुछ समय तक भुगतान टाल सकती थीं, लेकिन पैसा माफ नहीं हुआ। यानी कर्ज बना रहा, सिर्फ उसकी किस्तें आगे बढ़ गईं।
अब सवाल यह है कि इसका असर जनता पर कैसे पड़ा
जब किसी कंपनी पर अचानक हजारों करोड़ का कर्ज आ जाता है, तो उसके पास तीन ही रास्ते होते हैं:- कंपनी बंद कर दे, सरकार से पूरी माफी मांगे या फिर ग्राहकों से ज्यादा कमाई शुरू करे। टेलीकॉम कंपनियों ने तीसरा रास्ता चुना।
2016 के आसपास जो प्लान ₹149 या ₹199 में मिल जाते थे, वही 2024-2026 तक ₹299 या उससे ज्यादा में मिलने लगे। यह सिर्फ महंगाई नहीं थी, बल्कि कंपनियों की मजबूरी भी थी।
Jio की एंट्री ने आग में घी का काम किया
2016 में Reliance Jio ने बेहद सस्ते डेटा और मुफ्त कॉल के साथ बाजार में एंट्री की। इससे बाकी कंपनियों की कमाई घट गई, लेकिन AGR की देनदारी उतनी ही रही। मतलब- कमाई कम और भुगतान ज्यादा। यही वजह थी कि Vodafone और Idea को 2018 में मिलकर एक कंपनी बनानी पड़ी।
आज की स्थिति
आज भारत में मोबाइल नेटवर्क का बाजार लगभग तीन कंपनियों तक सिमट चुका है- Vodafone Idea, Bharti Airtel, Reliance Jio. कम प्रतिस्पर्धा का मतलब है कि कंपनियां अब उतनी सस्ती कीमतों पर प्लान देने की स्थिति में नहीं हैं।
सबसे बड़ा सच
जब आप ₹299 या ₹349 का रिचार्ज करते हैं, तो आप सिर्फ डेटा नहीं खरीद रहे होते- आप उस पूरी व्यवस्था का खर्च भी उठा रहे होते हैं जिसमें, सरकारी नीतियां, अदालत के फैसले, और कंपनियों की वित्तीय हालत सब शामिल हैं। यानी टेलीकॉम सेक्टर की सबसे बड़ी कीमत आखिरकार जनता ने ही चुकाई है।
अस्वीकरण: इस लेख में व्यक्त विचार और विश्लेषण उपलब्ध तथ्यों और सार्वजनिक स्रोतों पर आधारित हैं। किसी भी प्रकार की वित्तीय या सेवा-संबंधी निर्णय लेने से पूर्व पाठकों को संबंधित कंपनियों की आधिकारिक जानकारी की पुष्टि करने की सलाह दी जाती है।
बांदा |शहर के मवई बाईपास चौराहे पर आयोजित हनुमंत कथा के दूसरे दिन बागेश्वरधाम पीठाधीश्वर पं.धीरेंद्र शास्त्री ने धर्म की कथा सुनाई और मर्यादापुरुषोत्तम भगवान श्रीराम को धर्म की साक्षात प्रतिमूर्ति बताया। कहा कि दीनहीनों की मदद करना, दूसरे को प्रसन्नता देना ही सच्चा धर्म होता है। उन्होंने मंच से अहिंसा परमो धर्म: की सीख दी। बताया कि जो धर्म की रक्षा करता है उसकी रक्षा स्वयं धर्म करता है।
हनुमंत कथा के दूसरे दिन बागेश्वरधाम सरकार ने रोचक कथाओं के जरिए धर्म का महत्व समझाया और सभी को सनातन संस्कृति की रक्षा का संकल्प दिलाया। कथा व्यास पं.धीरेंद्र शास्त्री ने मनुष्य को अपना जीवन भगवान को समर्पित करने की सीख दी। कहा कि मनुष्य तो अपने लिए बेहतर ही सोचता है, लेकिन परमात्मा अपने भक्त के लिए बेहतरीन सोचते हैं। उन्होंने मौजूदा पारिवारिक स्थितियों पर चर्चा करते हुए कहा कि पति-पत्नी का रिश्ता भरोसे की मजबूत डोर पर टिका होता है।
परिवार में पति-पत्नी के बीच विश्वास और भरोसे का रिश्ता कायम हो तो घर स्वर्ग से भी सुंदर बन जाता है, लेकिन जिस रिश्ते में विश्वास का आभाव हो वहां जीवन नरक से बदतर हो जाता है। उन्होंने सोशल मीडिया पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि रील के चक्कर में भारत का चरित्र खराब हो रहा है। बागेश्वरधाम सरकार ने परिवारों के टूटने और तलाक के बढ़ते मामलों के लिए सोशल मीडिया को जिम्मेदार बताया। कहा कि सोशल मीडिया में धोखे के मित्रों के साथ लोग अपना हसता खेलता परिवार तोड़ने का आतुर हो रहे हैं। उन्होंने जीवन को सार्थक बनाने के लिए गुरुकृपा को महत्वपूर्ण बताया। कहा कि खुद के प्रभाव या गुरुकृपा के बल पर ही भगवान की कृपा प्राप्त हो सकती है। एक सच्चा व अच्छा गुरु रंक को भी राजा
बनाने की शक्ति रखता है। बागेश्वरधाम पीठाधीश्वर ने स्वामी एकनाथ की कथा सुनाकर जरूरतमंदों की मदद करने की प्रेरणा दी।
प्रभारी मंत्री और जलशक्ति मंत्री ने सुनी हनुमंत कथा-
शहर के मवई बाईपास चौराहे पर आयोजित बागेश्वरधाम पीठाधीश्वर पं.धीरेंद्र शास्त्री की हनुमंत कथा सुनने के लिए जहां बांदा जनपद समेत आसपास के सभी जिलों समेत पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश के लाखों श्रद्धालु उमड़ रहे हैं, वहीं शनिवार को कथा के दूसरे दिन प्रदेश सरकार के मंत्रियों ने भी यहां पहुंचकर कथा का रसपान किया और बागेश्वरधाम सरकार का आशीर्वाद प्राप्त किया। शनिवार की दोपहर प्रदेश सरकार के औद्योगिक विकास मंत्री व प्रभारी मंत्री नंदगोपाल गुप्ता नंदी कथा पंडाल पर पहुंचे और करीब दो घंटे तक कथा सागर में गोते लगाए। दो घंटे तक कथा सुनने के बाद प्रभारी मंत्री श्री नंदी ने मंच पर पहुंचकर बागेश्वरधाम सरकार का आशीर्वाद ग्रहण किया।
वहीं प्रदेश सरकार के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह ने भी कथा स्थल पर पहुंचकर बागेश्वरधाम सरकार का आशीर्वाद लिया और कथा का रसपान किया। जबकि प्रदेश सरकार में जलशक्ति राज्यमंत्री रामकेश निषाद कथा आयोजन के संरक्षक की भूमिका में हैं और आयोजन की तैयारियों से लेकर प्रतिदिन कथा सुनने पहुंच रहे हैं। कथा आयोजक बुंदेलखंड यूथ फाउंडेशन के संस्थापक भाजपा नेता प्रवीण सिंह, मुख्य यजमान प्रशांत सिंह अपने सभी परिजनों, समर्थकों और इष्टमित्रों के साथ कथा श्रवण करने पहुंचे लाखों की संख्या में श्रद्धालु श्रोताओं की व्यवस्थाओं में जुटे रहे।
बिहार | दरभंगा राजघराने की अंतिम महारानी कामसुंदरी देवी का आज सोमवार को 96 वर्ष की आयु में निधन हो गया। जिसके बाद दरभंगा, मिथिला समेत पूरे बिहार में शोक की लहर दौड़ गई। नवंबर 2025 में तबीयत बिगड़ने के बाद से वह अस्वस्थ चल रही थीं। महारानी का अंतिम संस्कार राज परिसर स्थित श्यामा माई मंदिर परिसर में किया जाएगा, जहां परंपरागत रूप से राज परिवार के सदस्यों का अंतिम संस्कार होता रहा है। महारानी कामसुंदरी देवी के बड़े पोते रत्नेश्वर सिंह मुखाग्नि देंगे।
महारानी कामसुंदरी देवी महाराजा कामेश्वर सिंह की तीसरी पत्नी थीं। महारानी कामसुंदरी देवी का जन्म वर्ष 1930 में हुआ था। दरभंगा महाराज कामेश्वर सिंह रियासत के अंतिम शासक माने जाते हैं, जिनका निधन वर्ष 1962 में हुआ था। उनकी पहली पत्नी महारानी राजलक्ष्मी देवी का निधन 1976 में और दूसरी पत्नी महारानी कामेश्वरी प्रिया का निधन 1940 में ही हो गया था।
महाराजा कामेश्वर सिंह की याद में महारानी कामसुंदरी देवी ने महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह कल्याणी फाउंडेशन की स्थापना की थी। यह मिथिला की सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत को संरक्षित करती है। जानकारी के मुताबिक, फाउंडेशन के जरिए महाराजा कामेश्वर की प्राइवेट लाइब्रेरी में हजारों किताबें और पांडुलिपियां लोगों के लिए उपलब्ध कराई गई है। महारानी ने महाराजा के नाम पर एक समृद्ध पुस्तकालय की स्थापना कराई, जिसमें आज भी करीब 15 हजार से अधिक पुस्तकें उपलब्ध हैं। इसके साथ ही महारानी साहित्यिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के संचालन में भी सक्रिय भूमिका निभाती रहीं और दरभंगा की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का कार्य किया।
महारानी कामसुंदरी देवी दरभंगा राज की आखिरी जीवित सदस्य थीं। महाराजा के निधन के बाद उन्होंने कई संपत्ति और ट्रस्ट से जुड़े कानूनी विवादों को संभाला है। इतना ही नहीं, फाउंडेशन के जरिए उन्होंने संस्कृति, शिक्षा के साथ-साथ कला को भी बढ़ावा दिया। आज महारानी कामसुंदरी देवी के निधन की खबर मिलते ही कई लोग कल्याणी निवास पहुंचे। पारंपरिक रीति-रिवाज से उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।