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Monday, September 7, 2026
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‘ब्रेस्ट पर मारी लात… कपडे भी उतारे, ‘, सेना के अधिकारी की मंगेतर ने पुलिस पर लगाया गंभीर आरोप

नृपेंद्र कुमार मौर्य। navpravah.com

नई दिल्ली। उन लोगों ने मेरी जैकेट से ही मेरे हाथ बांध दिए। एक महिला कांस्टेबल के दुपट्टे से मेरे पैरों को बांधकर, मुझे एक कमरे के अंदर बंद कर दिया। कुछ देर बाद एक पुलिसवाला आया और मेरी ब्रा हटाकर मेरे ब्रेस्ट पर लगातार लात मारता रहा…। ये आपबीती है भारतीय सेना में नियुक्त एक मेजर की मंगेतर की। महिला ने आरोप लगाया  कि जब वो पुलिस थाने में अपने मंगेतर के साथ शिकायत दर्ज कराने गई, तो उसके हाथ पैर बांधकर उसका उत्पीड़न किया गया। बाल पकड़े और मारपीट की गई।

फिर एक पीसीआर आई और उसमें से एक महिला पुलिसकर्मी सहित कुछ पुलिसवाले उनके पास पहुंचे। उन्होंने महिला के मंगेतर से कहा कि वो लिखित में अपनी शिकायत उन्हें दें। हालांकि कुछ देर बाद ही पता नहीं क्यों, पुलिसकर्मियों ने मेजर को हवालात में बंद कर दिया। पीड़ित महिला ने जब कहा कि वो एक आर्मी ऑफिसर को इस तरह सलाखों के पीछे बंद नहीं कर सकते, तो दोनों महिला पुलिसकर्मियों ने उनके बाल पकड़े और मारपीट शुरू कर दी।

सेना के सूत्रों का कहना है कि अधिकारी और उनकी मंगेतर पर भुवनेश्वर में अपने कार्यस्थल से घर लौटते समय बदमाशों के एक समूह ने कथित तौर पर हमला किया था. दंपति का दावा है कि हमलावर तीन कारों में सवार थे, उन्होंने अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और घटनास्थल से भागने से पहले शारीरिक हिंसा की. एक वाहन का रजिस्ट्रेशन नोट करने के बाद दंपत्ति ने भरतपुर पुलिस स्टेशन में मदद मांगी, उन्हें उम्मीद थी कि जल्द ही कार्रवाई की जाएगी.

पहले तीखी बहस हुई

दंपत्ति ने बताया कि उनकी उम्मीदों के विपरीत, ड्यूटी पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने न केवल तुरंत कार्रवाई करने से इनकार कर दिया, बल्कि इस बात पर भी जोर दिया कि कोई भी कार्रवाई करने से पहले वे लिखित शिकायत दर्ज करें. जब दंपत्ति ने वरिष्ठ अधिकारियों से बात करने के लिए कहा, तो तनाव बढ़ गया, जिसके कारण तीखी बहस हुई.

हाथ-पैर बांधकर कमरे में किया बंद

अपनी आपबीती में पीड़िता ने बताया कि वो बार-बार उनसे खुद को छोड़ने की गुहार लगाती रही, लेकिन दोनों महिला पुलिसकर्मी उन्हें बाल पकड़कर घसीटती हुईं थाने के अंदर ले गईं। इस दौरान एक महिला कांस्टेबल ने उनका गला घोंटने की कोशिश की, जिसपर पीड़िता ने उसके हाथ पर काट लिया। फिर इन लोगों ने पीड़िता के हाथ उनकी जैकेट से और पैर एक महिला कांस्टेबल के दुपट्टे से बांधकर एक कमरे में बंद कर दिया।

महिला की पैंट नीचे कर दिखाया निजी अंग

पीड़िता के मुताबिक, कुछ देर बाद उस कमरे में एक पुलिसवाला आया और उनकी ब्रा उतारने के बाद लगातार उनके ब्रेस्ट पर लात मारने लगा। सुबह करीब 6 बजे थाने के इचार्ज इंस्पेक्टर वहां आए और महिला की पैंट नीचे की। इसके बाद उन्होंने अपनी पैंट उतारी और अपना निजी अंग दिखाते हुए महिला से अश्लील तरीके से बात की। वो लगातार चीखती रहीं, लेकिन कोई उनकी मदद के लिए नहीं आया।

आधे घंटे तक सुनीं मंगेतर की चीखें

आर्मी अफसर ने आरोप लगाया है कि प्रभारी इंस्पेक्टर ने उनकी मंगेतर के साथ यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ की। उन्हें बाहर लगभग 30 मिनट तक अपनी मंगेतर की चीखें सुनाई दीं। अपने आरोपों में उन्होंने ये भी कहा कि जब सुबह 3 बजे वह शिकायत लिख रहे थे, तो चार पुलिसकर्मियों ने उन्हें पकड़ लिया और एक कोठरी में ले गए। यहां उनकी पैंट उतारी गई और पर्स, फोन, आर्मी का आईडी कार्ड सहित कार की चाबी छीन ली गई। मामले में अब ओडिशा पुलिस ने भरतपुर थाने के इंचार्ज दीनाकृष्ण मिश्रा सहित पांच पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया है।सेना के एक अधिकारी और उनकी मंगेतर ने ओडिशा पुलिस पर हिरासत में दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है. दोनों का दावा है कि गुंडागर्दी की घटना की रिपोर्ट करने के बाद उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया. सेना के सूत्रों के अनुसार, 14 सितंबर की रात को भरतपुर पुलिस स्टेशन पहुंचे दंपति ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने उन पर शारीरिक हमला किया, छेड़छाड़ किया और गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखा.

हालांकि, उनका दावा है कि मेडिकल रिपोर्ट अभी तक उपलब्ध नहीं कराई गई है. पुलिस स्टेशन लौटने पर दम्पति ने आरोप लगाया कि उन पर माफी मांगने के लिए दबाव डाला गया, जिसे उन्होंने अस्वीकार कर दिया और कहा कि वे कानूनी कार्रवाई करना चाहते हैं .

केंद्र सरकार ने तिरुपति प्रसाद मामले में लिया संज्ञान, जांच का दिया आश्वासन

इशिका गुप्ता| navpravah.com

नई दिल्ली | तिरुपति लड्डू के मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने कहा कि टीडीपी धार्मिक मामलों का राजनीतिकरण कर रही है।

हाल ही में तिरुमाला मंदिर में प्रसाद में पशु चर्बी के इस्तेमाल को लेकर विवाद उठने पर, कर्नाटक के मुजराई मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने शुक्रवार को बताया कि राज्य के प्रमुख मंदिरों में दिए जाने वाले सभी प्रसाद की जांच की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि प्रसाद बनाने में सिर्फ कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (केएमएफ) द्वारा आपूर्ति किया जाने वाला नंदिनी घी ही इस्तेमाल होगा।

कर्नाटक सरकार की यह घोषणा आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के उस बयान के दो दिन बाद आई, जिसमें उन्होंने तिरुपति लड्डू बनाने में पशु वसा जैसी घटिया सामग्री के इस्तेमाल का आरोप लगाया था।

रामलिंगा रेड्डी ने कहा, “कर्नाटक के सभी प्रमुख मंदिरों को जल्द ही एक परिपत्र जारी किया जाएगा, जिसमें प्रसाद में केवल केएमएफ के नंदिनी घी का उपयोग अनिवार्य किया जाएगा। हम इन मंदिरों में दिए जाने वाले प्रसाद का परीक्षण भी करेंगे।”

यह मामला उस समय और गर्म हो गया जब नायडू ने दावा किया कि पिछली वाईएसआरसीपी सरकार के दौरान तिरुपति के श्री वेंकटेश्वर मंदिर में चढ़ाई जाने वाली मिठाई में घटिया सामग्री का इस्तेमाल हो रहा था।

उन्होंने स्पष्ट किया कि निविदा प्रक्रिया हर छह महीने में होती है और योग्यता मानदंड दशकों से नहीं बदले हैं। आपूर्तिकर्ताओं को एनएबीएल प्रमाणपत्र और उत्पाद गुणवत्ता प्रमाणपत्र देना अनिवार्य है। टीटीडी घी के नमूने एकत्र करता है और केवल प्रमाणन पास करने वाले उत्पादों का ही इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि उनके शासन में 18 बार उत्पादों को अस्वीकार किया गया है।

इस बीच, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने मुख्यमंत्री नायडू से बात की और इस मामले पर पूरी रिपोर्ट मांगी। उन्होंने कहा कि केंद्र इस मामले की जांच करेगा और उचित कार्रवाई करेगा।

मोदी सरकार की 100 दिन की उपलब्धियों पर एक प्रेस वार्ता में, जब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से तिरुपति प्रसादम में मिलावट के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, “इस मुद्दे की जानकारी मिलने के बाद मैंने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू से बात की और उनसे विस्तृत जानकारी मांगी। मैंने उनसे उपलब्ध रिपोर्ट साझा करने के लिए कहा है ताकि मैं इसकी जांच कर सकूं।

उन्होंने यह भी कहा कि वह राज्य नियामकों से संपर्क करेंगे और खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुसार उचित कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, उन्होंने रिपोर्ट मांगी है और इसकी जांच करने का आश्वासन दिया।

क्या है लेबनान अटैक का वायनाड कनेक्शन?

नृपेंद्र कुमार मौर्य | navpravah.com

नई दिल्ली | रिंसन जोस, केरल के वायनाड जिले से ताल्लुक रखने वाले एक व्यवसायी, का नाम हाल ही में लेबनान में हुए हिज़बुल्ला पेजर विस्फोटों में सामने आया है। इन विस्फोटों में कई हिज़बुल्ला लड़ाके मारे गए थे, और इस घटना ने जोस को वैश्विक मीडिया में चर्चा का विषय बना दिया है। विस्फोटों में इस्तेमाल किए गए पेजर्स को रिंसन की कंपनी, नोर्टा ग्लोबल, द्वारा बेचा गया था, जो अब जांच के घेरे में है।

हालांकि, यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि रिंसन या उनकी कंपनी की इन विस्फोटों में सीधी भूमिका थी या नहीं। फिलहाल, जांचकर्ताओं का ध्यान उस सप्लाई चेन पर है जिसके जरिए ये पेजर्स हिज़बुल्ला तक पहुंचे। नोर्टा ग्लोबल एक वैश्विक तकनीकी कंपनी है, और यह संभव है कि ये पेजर्स सामान्य रूप से बेचे गए हों, बिना यह जाने कि उनका उपयोग आतंकवादी गतिविधियों के लिए किया जाएगा। रिंसन, जो अब नॉर्वे के नागरिक हैं, का दावा है कि उन्हें इस घटना से जुड़ी किसी भी जानकारी का कोई अंदाजा नहीं है।

रिंसन का परिवार, जो अभी भी केरल के वायनाड में रहता है, इस मामले से स्तब्ध है। उनके पिता, जो एक दर्जी हैं, ने मीडिया से कहा कि उनका बेटा हमेशा से मेहनती और ईमानदार रहा है। उन्होंने कहा कि रिंसन कभी किसी गलत गतिविधि में शामिल नहीं हुआ और परिवार को इस घटना से जुड़ी किसी भी जानकारी का पता नहीं है।

लेबनान के सुरक्षा अधिकारी फिलहाल इस बात की जांच कर रहे हैं कि पेजर्स को किस तरीके से हथियारों में बदला गया और किसकी मदद से ये हिज़बुल्ला तक पहुंचे। वहीं, रिंसन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी या नहीं, यह अभी जांच पर निर्भर है।

यह मामला दिखाता है कि कैसे वैश्विक व्यापार और तकनीकी सप्लाई चेन का आतंकवादी गतिविधियों में इस्तेमाल हो सकता है, यहां तक कि उन कंपनियों के लिए भी जो सीधे तौर पर इसमें शामिल नहीं होतीं।

जम्मू-कश्मीर: खाईं में गिरी BSF की बस, तीन जवान शहीद

इशिका गुप्ता| navpravah.com

नई दिल्ली | जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले के ब्रिल गांव में बुधवार को एक दर्दनाक हादसा हुआ, जब सीमा सुरक्षा बल (BSF) की एक बस गहरी खाई में गिर गई। इस बस में 36 जवान सवार थे, जिनमें से 27 जवान घायल हो गए हैं और दो की मौके पर ही मौत हो गई। गंभीर रूप से घायल जवानों को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

हादसे की जानकारी मिलते ही स्थानीय प्रशासन और बचाव दल मौके पर पहुंचा और घायलों को निकालने का कार्य शुरू किया। अधिकारियों के अनुसार, बस अचानक संतुलन खो बैठी और गहरी खाई में जा गिरी। हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है, लेकिन माना जा रहा है कि खराब मौसम या सड़क की स्थिति के चलते यह दुर्घटना हुई हो सकती है।

यह हादसा उस वक्त हुआ है जब मंगलवार रात जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में सेना का एक वाहन भी खाई में गिर गया था। मंजाकोट इलाके में हुए इस हादसे में चार जवान घायल हो गए थे, जिनमें से लांसनायक बलजीत सिंह ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। राजौरी हादसे में स्थानीय ग्रामीणों और बचावकर्मियों ने तेजी से प्रतिक्रिया दी थी और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया था, लेकिन बलजीत सिंह की जान नहीं बचाई जा सकी।

इन दोनों घटनाओं ने एक बार फिर से सुरक्षाबलों की कठिन परिस्थितियों को उजागर किया है, जहां दुर्गम इलाके और खतरनाक रास्तों पर उन्हें अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना पड़ता है। सरकार ने घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं और सभी घायल जवानों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना की है।

अमित शाह ने ऐसा क्या कहा कि भड़क गए ओवैसी ?

नृपेन्द्र कुमार मौर्य | navpravah.com

नई दिल्ली | गुरुवार, 19 सितंबर 2024 को वफ्फ संशोधन बिल पर संयुक्त संसदीय समिति की 5वीं बैठक में हंगामेदार स्थिति देखने को मिली। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने इस बैठक में गृह मंत्री अमित शाह के वक्फ से जुड़े बयान पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि जब मामला संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) में है, तो गृह मंत्री को बाहर इस विषय पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है।

संजय सिंह ने बैठक में स्पष्ट किया कि क्या गृह मंत्री इस प्रकार के बयान देकर संसदीय समिति पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब जेपीसी का गठन हो चुका है, सरकार को सार्वजनिक बयान देने से बचना चाहिए।

अमित शाह ने क्या कहा था?

गृह मंत्री अमित शाह ने वक्फ संशोधन बिल के संबंध में यह कहा था कि यह बिल वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में सुधार लाएगा और वक्फ ट्रस्टों को अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही प्रदान करेगा। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस बिल के माध्यम से वक्फ संपत्तियों के बेहतर उपयोग के लिए नीतिगत सुधार किए जाएंगे। उनके बयान का उद्देश्य यह बताना था कि यह संशोधन समाज के विभिन्न वर्गों के हित में है।

हालांकि, इस बयान पर संजय सिंह और असदुद्दीन ओवैसी ने सवाल उठाए, यह कहते हुए कि जब मामला जेपीसी में है, तो ऐसे बयानों की आवश्यकता नहीं थी।

इस बीच, पटना की चाणक्य लॉ यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर फैजान मुस्तफा ने बैठक में वक्फ बाय यूजर और वक्फ ट्रिब्यूनल का समर्थन किया। उन्होंने चेतावनी दी कि जिला प्रशासन (डीएम) को सभी अधिकार देना सही नहीं होगा, और केंद्र सरकार से अपील की कि वक्फ संशोधन में सावधानी बरती जाए। मुस्तफा ने जोर देकर कहा कि संशोधन उन बिंदुओं पर होना चाहिए जिन पर सभी की सहमति हो।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने भी बैठक में भाग लिया और 200 पृष्ठों की एक रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें वक्फ बिल में संशोधन के खिलाफ विस्तृत बिंदु दिए गए हैं। बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना सैफुल्लाह रहमानी और अन्य सदस्यों ने अपने विचार साझा किए, और इस मुद्दे पर एक संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया।

इस बैठक ने स्पष्ट किया कि वक्फ संशोधन बिल पर विचार-विमर्श अभी जारी है, और सभी पक्षों के विचारों को सुनना आवश्यक है।

आखिर चीन में गायब होने वाले लोगों का रहस्य क्या है?

नृपेन्द्र कुमार मौर्य | navpravah.com

नई दिल्ली | चीन में कुछ प्रमुख व्यक्ति अचानक गायब हो जाते हैं, और ये घटनाएँ अक्सर भ्रष्टाचार की जांच से जुड़ी होती हैं। बाओ फ़ान जैसे बैंकरों से लेकर चिन गांग, हू जिंताओ, और जैक मा जैसे प्रभावशाली लोगों तक, ये गुमशुदगी का एक समान पैटर्न दिखाती हैं।

चीन का वन पार्टी सिस्टम, जहां चाइनीज़ कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) का एकाधिकार है, इस प्रकार की घटनाओं को बढ़ावा देता है। जब किसी व्यक्ति का रुतबा बढ़ता है या वह सत्ता के लिए खतरा बनता है, तो उन्हें अक्सर निशाना बनाया जाता है। यह स्थिति माओ ज़ेदोंग के समय से चली आ रही है, जब पार्टी ने आलोचना करने वाले व्यक्तियों को ठिकाने लगाने का काम किया था।

चिन गांग, पूर्व विदेश मंत्री, और हू जिंताओ, पूर्व राष्ट्रपति, जैसे उच्च पदों पर बैठे व्यक्तियों का अचानक लापता होना दर्शाता है कि सरकार अपने भीतर के किसी भी संभावित खतरे को कैसे नकारती है। इसी तरह, जैक मा की कहानी भी इस प्रवृत्ति को दिखाती है। अलीबाबा के संस्थापक के रूप में उनकी सफलता ने उन्हें सार्वजनिक जीवन में एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाया, लेकिन जब उन्होंने चीनी बैंकों की आलोचना की, तो सरकार ने उन्हें निशाना बनाया।

उदाहरण के लिए, जैक मा, अलीबाबा के संस्थापक, भी इसी प्रकार की परिस्थितियों का सामना कर चुके हैं। जब उन्होंने चीनी बैंकों की आलोचना की, तो उनके खिलाफ सरकार ने कार्रवाई की, और वे 2020 के बाद से सार्वजनिक जीवन से गायब हो गए। इसी प्रकार, जाओ वेई, एक प्रसिद्ध अभिनेत्री, पर भी पश्चिमी जीवनशैली फैलाने का आरोप लगा था और वह भी कुछ समय के लिए गुम हो गई थीं।

बाओ फान : एक विशेष उदाहरण

बाओ फ़ान, 53 वर्ष के बैंकर, ने 2005 में चाइना रेनेसां की स्थापना की और जल्द ही ब्लूमबर्ग की 50 सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची में शामिल हो गए। उनकी सफलता की कहानी अचानक ही एक रहस्य में बदल गई जब फरवरी 2023 से उनका कोई अता-पता नहीं है। बताया गया कि उनसे भ्रष्टाचार के मामलों में पूछताछ चल रही है। उनकी संपत्ति, जो 2021 में 6,500 करोड़ रुपये से अधिक थी, अब घटकर केवल 400 करोड़ रुपये रह गई है। यह गिरावट केवल उनकी व्यक्तिगत कहानी नहीं है, बल्कि चीन में उच्च-profile व्यक्तियों के अचानक गायब होने के व्यापक पैटर्न का हिस्सा है।

बाओ के जैसे कई अन्य प्रमुख व्यक्ति भी इसी प्रकार की परिस्थितियों का सामना कर चुके हैं। चीन के पूर्व विदेश मंत्री चिन गांग और पूर्व राष्ट्रपति हू जिंताओ से लेकर उद्योगपति गुओ गुआंगचांग तक, सभी अचानक गायब हो गए हैं। इन गायबियों का एक सामान्य पैटर्न है: पहले उनकी बीमारी का हवाला दिया जाता है, फिर उनके खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच की बातें होती हैं।

चीन में वन पार्टी सिस्टम के कारण, जहां चाइनीज़ कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) की निरंतरता है, यह प्रवृत्ति कोई नई नहीं है। माओ ज़ेदोंग के समय से इस तरह के “शुद्धिकरण अभियान” चलाए जाते रहे हैं, जिसमें संभावित विरोधियों को टारगेट किया जाता था। बाओ फ़ान की गुमशुदगी इसी सन्दर्भ में देखी जा सकती है, जहां सत्ता के साथ-साथ ऑप्टिक्स को भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

बाओ फ़ान का मामला विशेष रूप से ध्यान आकर्षित करता है, क्योंकि उनकी कंपनी ने कई पुरस्कार जीते और उनकी स्थिति बुलंद थी। लेकिन जैसे ही उनके खिलाफ जांच शुरू हुई, उनकी कंपनी की कीमत आधी हो गई। हाल में एक रिपोर्ट में यह सामने आया है कि ग़ायब होने के बाद सरकारी अधिकारियों ने उनकी कंपनी को 92 करोड़ रुपये ट्रांसफ़र करने के लिए कहा। यह तथ्य यह सवाल उठाता है कि बाओ की गुमशुदगी के पीछे क्या और कौन है।

बाओ फ़ान की कहानी एक सतर्कता का संदेश देती है कि कैसे सत्ता और राजनीति के खेल में एक व्यक्ति की पहचान, उसकी मेहनत और सफलता भी एक पल में धूमिल हो सकती है। इस तरह के मामलों से यह साफ़ होता है कि चीन की राजनीति में किस तरह से ताकतवर लोग, जिनका रुतबा बहुत ऊंचा होता है, भी अचानक गायब हो सकते हैं। उनकी गुमशुदगी केवल एक व्यक्तिगत दुखदाई घटना नहीं है, बल्कि यह एक प्रणालीगत समस्या का संकेत है, जो देश की राजनीतिक स्थिरता को प्रभावित करती है।

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव: एक लाख मतदाताओं की नजर, कौन बनेगा अगला विजेता?

नृपेन्द्र कुमार मौर्य | navpravah.com

नई दिल्ली | दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में छात्र संघ चुनाव की तैयारियाँ अपने चरम पर हैं, जहां 27 सितंबर को छात्र संघ के चार महत्वपूर्ण पदों—अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव, और संयुक्त सचिव—के लिए मतदान होगा। चुनावी प्रक्रिया के तहत विश्वविद्यालय ने 19 सितंबर को सभी पदों के लिए उम्मीदवारों की प्रोविजनल सूची जारी की है। इसमें अध्यक्ष पद के लिए 8, उपाध्यक्ष के लिए 5, सचिव के लिए 4, और संयुक्त सचिव के लिए 4 उम्मीदवारों का नाम शामिल है।

छात्र संगठनों में सबसे पहले अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने अपने उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा कर दी है। एबीवीपी ने अध्यक्ष पद के लिए ऋषभ चौधरी, उपाध्यक्ष के लिए भानु प्रताप सिंह, सचिव के लिए मित्रविन्दा, और संयुक्त सचिव के लिए अमन कपासिया के नामों का ऐलान किया है। एबीवीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राज शरण शाही ने चुनाव में चारों सीटों पर विजय का दावा करते हुए संगठन के मजबूत आधार पर विश्वास जताया है। उन्होंने कहा कि एबीवीपी पिछले वर्षों की तरह इस बार भी छात्रों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगी।

वहीं, नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) ने भी चुनावी दंगल में कूदते हुए अपने उम्मीदवारों की घोषणा की है। एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुण चौधरी ने आशा व्यक्त की है कि संगठन चारों सीटों पर विजय प्राप्त करेगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय के राजनीतिक परिदृश्य में इस बार एक महत्वपूर्ण बदलाव की संभावना दिखाई दे रही है। एनएसयूआई अपने मैनिफेस्टो को 21 सितंबर को दोपहर 12 बजे लॉन्च करने की योजना बना रहा है, जिसमें छात्र कल्याण से संबंधित मुद्दों पर जोर दिया जाएगा।

जैसे-जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है, एबीवीपी और एनएसयूआई के बीच प्रचार-प्रसार की होड़ तेज हो गई है। छात्र संगठनों ने मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए विभिन्न रणनीतियाँ अपनाई हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय में एक लाख से अधिक मतदाता हैं, जो इस चुनाव में अपनी भागीदारी निभाएंगे। चुनावी प्रक्रिया के दौरान बैनर, पोस्टर, और किसी भी प्रकार की छपी सामग्री का प्रचार करने की अनुमति नहीं है, जिससे चुनाव की पारदर्शिता और निष्पक्षता बनी रहे।

चुनाव के परिणाम 28 सितंबर को घोषित किए जाएंगे, जो कि छात्र संगठनों के लिए एक महत्वपूर्ण दिन होगा। इस बार के चुनावों में उम्मीदवारों की संख्या और छात्रों के बीच बढ़ती जागरूकता यह संकेत दे रही है कि चुनावी प्रक्रिया पहले से कहीं अधिक प्रतिस्पर्धात्मक होगी।

दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र संघ चुनाव को लेकर अब हलचल तेज हो गई है, और सभी संगठनों ने अपने-अपने दावे और रणनीतियाँ स्पष्ट कर दी हैं। छात्रों की भागीदारी और उनकी जागरूकता इस बार के चुनाव को और भी महत्वपूर्ण बना रही है, जिससे विश्वविद्यालय का राजनीतिक माहौल और भी रोचक बनता जा रहा है। सभी की निगाहें अब 27 सितंबर की मतदान प्रक्रिया और उसके बाद आने वाले परिणामों पर टिकी हुई हैं।

उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में चोरी के आरोप से आहत किशोर ने लगाई फांसी

सौम्या केसरवानी | navpravah.com

नई दिल्ली | मैनपुरी थाना के बिछवां क्षेत्र में एक किशोर नदी में कूद गया, किशोर पर चोरी का आरोप लगा था, जिससे वह किशोर डरा व सहमा था, इस घटना की सूचना मिलते ही एसडीएम और बिछवां थाने के फोर्स मौके पर पहुंच गये।

नदी में किशोर की तलाश की जा रही है, लेकिन 24 घंटे बाद भी उसका अभी तक कुछ पता नहीं चल सका है, उधर किशोर के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, किशोर की मां रो-रो कर बेहोश हुई जा रही है।

शीशराम का पुत्र ऊदल कुमार जो कि 15 साल का था, कल बृहस्पतिवार की दोपहर भनऊ घाट के पास काली नदी के पुल के पास पहुंचा, वह रेलिंग पकड़ कर पुल पर चढने लगा तो वहां आसपास मौजूद लोगों ने उसे रोकने के लिए आवाज लगाई, लेकिन ऊदल ने किसी की नहीं सुनी और काली नदी में कूद गया।

किशोर को नदी में कूदता देख वहां मौजूद लाेगों में अफरा तफरी मच गई, भीड़ में ही किसी ने पुलिस को सूचना दी, सूचना मिलने के तत्काल बाद एसडीएम भोगांव अंंजली सिंह, सीओ सत्यप्रकाश शर्मा पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए।

ऊदल के पिता शीशराम ने बताया कि, पुत्र पर गांव निवासी एक व्यक्ति ने 30 हजार रुपये चोरी करने का आरोप लगाया था, आरोप लगने के बाद से उनका पुत्र आहत था, इस मामले में पंचायत हुई तो 30 हजार रुपये भी वापस करा दिए गए थे, इसके बाद भी आरोपी पुत्र को परेशान कर रहे थे। परेशान होकर पुत्र दोपहर करीब एक बजे घर से निकल आया था, और नदी पहुंचकर वह उसमें कूद गया।

सुल्तानपुर लूट काण्ड : एक और बदमाश का एनकाउंटर, घायल बदमाश अस्पताल में भर्ती

इशिका गुप्ता| navpravah.com

लखनऊ | प्रदेश में मंगेश के बाद अब अजय यादव का एनकाउंटर हुआ है। वह सुल्तानपुर के ज्वैलरी शॉप लूट कांड में शामिल था, जिसके लिए उस पर 1 लाख का इनाम था। पुलिस के साथ मुठभेड़ के दौरान उसे पैर में गोली लगी। अब उसे इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

यूपी के सुल्तानपुर में ज्वैलरी शॉप लूटकांड में शामिल एक और बदमाश की गुरुवार को पुलिस के साथ मुठभेड़ हुई, जिसमें वह घायल हो गया। इस बदमाश की पहचान अजय यादव के रूप में हुई है, जो 1 लाख रुपये का इनामी था और उसे पैर में गोली लगी है। उसे इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इससे पहले पुलिस ने लूटकांड में शामिल एक अन्य आरोपी, मंगेश यादव को एनकाउंटर में मार गिराया था।

गत 28 अगस्त को सुल्तानपुर में ज्वैलरी शॉप में हुई डकैती के मामले में पुलिस ने अब तक 5 बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया है। इनमें से एक आरोपी मंगेश यादव, एनकाउंटर में मारा गया था। गिरफ्तार बदमाशों पर 1-1 लाख रुपये का इनाम था।

पुलिस ने बदमाशों के पास से 2 किलो 700 ग्राम हीरे जड़ित सोने के आभूषण बरामद किए हैं। डकैती के दौरान इस्तेमाल की गई बोलेरो गाड़ी भी बरामद हो गई है। इस गाड़ी के मालिक, त्रिभुवन कोरी को एनकाउंटर के बाद पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।

सुल्तानपुर में 28 अगस्त को ठठेरी बाजार स्थित ओम ऑर्नामेंट नामक दुकान में कुछ नाकाबपोश हथियारबंद बदमाशों ने दिनदहाड़े डाका डाला था। इस घटना के दौरान बदमाशों ने हथियार के बल पर दुकानदार और अन्य लोगों को बंधक बना लिया। पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी, मंगेश यादव को एनकाउंटर में मार गिराया था।

बांग्लादेश पर डबल अटैक: बैटिंग के बाद बॉलिंग में भी कहर ढाएंगे अश्विन-जडेजा

नृपेंद्र कुमार मौर्य | navpravah.com

नई दिल्ली | चेन्नई के चेपॉक स्टेडियम में भारतीय टीम और बांग्लादेश के बीच चल रही 2 मैचों की टेस्ट सीरीज का पहला मुकाबला बेहद रोमांचक हुआ। मैच के पहले दिन, गुरुवार (19 सितंबर), भारतीय टीम ने 6 विकेट पर 339 रन बनाए। स्पिन ऑलराउंडर रविचंद्रन अश्विन और रवींद्र जडेजा की शानदार बल्लेबाजी ने टीम को संभाला। अश्विन 102 रन और जडेजा 86 रन बनाकर नाबाद क्रीज पर हैं। दूसरे दिन, भारतीय टीम इन्हीं दोनों बल्लेबाजों के दम पर अपनी पारी को आगे बढ़ाएगी।

पहले दिन का खेल शुरू होने पर बांग्लादेशी गेंदबाजों ने भारत को शुरुआती झटके दिए थे। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए भारतीय टीम ने 34 रनों पर ही तीन विकेट गंवा दिए थे। शुभमन गिल, यशस्वी जायसवाल और कप्तान रोहित शर्मा जल्दी ही पवेलियन लौट गए। इसके बाद विराट कोहली और केएल राहुल ने कुछ संघर्ष किया, लेकिन 144 रनों तक पहुंचते-पहुंचते आधी भारतीय टीम पवेलियन लौट चुकी थी।

बांग्लादेशी तेज गेंदबाज हसन महमूद ने चार विकेट लेकर भारत की शुरुआत को बुरी तरह हिला दिया। उनके साथ नाहिद राणा और मेहदी हसन मिराज ने भी एक-एक विकेट झटका। पहले सत्र में बांग्लादेश पूरी तरह से हावी थी और ऐसा लग रहा था कि भारत जल्द ही ढेर हो सकता है। लेकिन, इसके बाद मैदान पर आए रवींद्र जडेजा और रविचंद्रन अश्विन, जिन्होंने मैच की तस्वीर बदल दी।

अश्विन और जडेजा की इस जोड़ी ने बांग्लादेशी गेंदबाजों का डटकर मुकाबला किया। दोनों ने न केवल विकेट गिरने से रोका, बल्कि तेजी से रन भी बनाए। अश्विन ने अपना छठा टेस्ट शतक जड़ा, जबकि जडेजा ने 86 रनों की नाबाद पारी खेली। इन दोनों के बीच 227 गेंदों पर 195 रनों की नाबाद साझेदारी हुई, जो बांग्लादेश के खिलाफ सातवें या उससे निचले क्रम के किसी भी विकेट के लिए सबसे बड़ी साझेदारी बन गई है। इससे पहले यह रिकॉर्ड सचिन तेंदुलकर और जहीर खान के नाम था, जिन्होंने 2004 में बांग्लादेश के खिलाफ 133 रनों की साझेदारी की थी।

पहले दिन के अंत तक भारतीय टीम ने 339 रन बना लिए थे, और अश्विन-जडेजा की जोड़ी दूसरे दिन भी बल्लेबाजी की शुरुआत करेगी। बांग्लादेशी गेंदबाजों के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण दिन होगा, क्योंकि उन्हें इन दोनों सेट बल्लेबाजों को जल्दी आउट करना होगा, ताकि भारतीय टीम को और बड़े स्कोर तक पहुंचने से रोका जा सके।

दूसरी ओर, भारत के पास अब बड़ा स्कोर खड़ा करने का सुनहरा मौका है। टीम के पास जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद सिराज, आकाश दीप जैसे तेज गेंदबाजों के साथ-साथ अश्विन और जडेजा की स्पिन जोड़ी है, जो बांग्लादेशी बल्लेबाजों को मुश्किल में डाल सकती है। चेपॉक की पिच पर दूसरे दिन स्पिन का असर ज्यादा होने की उम्मीद है, इसलिए भारतीय टीम का ध्यान जल्द से जल्द बांग्लादेश को बैकफुट पर धकेलने पर रहेगा।

बांग्लादेश के बल्लेबाजों के लिए यह अग्निपरीक्षा होगी, क्योंकि पहले दिन गेंदबाजी में बेहतर शुरुआत के बावजूद वे भारतीय टीम को जल्दी आउट नहीं कर सके। अब उनके बल्लेबाजों को अपनी टीम को वापसी दिलाने की जिम्मेदारी निभानी होगी।