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Monday, September 7, 2026
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तिरुपति बाला जी के प्रसाद के रिर्पोट में हुआ बड़ा खुलासा, जानें क्या?

इशिका गुप्ता| navpravah.com

नई दिल्ली |

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के आरोपों के बाद, तिरुपति मंदिर के प्रसाद के सैंपल जांच के लिए भेजे गए। जांच के परिणामों में यह बात सामने आई कि प्रसाद में फिश ऑयल पाया गया है, जिसने विवाद को और भी बढ़ा दिया है।

आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने हाल ही में आरोप लगाया कि तिरुपति मंदिर के प्रसाद में घी की जगह जानवरों की चर्बी का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने यह दावा किया कि पिछले कुछ समय से प्रसाद की गुणवत्ता में गिरावट आई है। नायडू ने कहा, “हमने यह सुनिश्चित किया कि प्रसाद में केवल असली घी का ही इस्तेमाल हो। लेकिन जो रिपोर्ट सामने आई हैं, उनसे स्पष्ट है कि घी की जगह घटिया सामग्री का उपयोग किया गया है।” उनके इस बयान ने मंदिर की पवित्रता और प्रसाद की गुणवत्ता को लेकर भक्तों में चिंता पैदा कर दी है।

जांच की प्रक्रिया:

नायडू के आरोपों के बाद, तिरुपति मंदिर के प्रसाद के सैंपल जांच के लिए भेजे गए। जांच के परिणामों में यह बात सामने आई कि प्रसाद में फिश ऑयल पाया गया है, जिसने विवाद को और भी बढ़ा दिया है। नायडू ने कहा, “यह रिपोर्ट हमारे लिए चिंता का विषय है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि भक्तों को केवल शुद्ध और पवित्र प्रसाद मिले।” इस स्थिति ने तिरुपति मंदिर के प्रति भक्तों की आस्था को चुनौती दी है।

जगन मोहन रेड्डी, आंध्र प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री, ने नायडू के आरोपों पर तीखा पलटवार किया है। रेड्डी ने कहा, “चंद्रबाबू नायडू ने तिरुपति की पवित्रता और करोड़ों हिंदुओं की आस्था को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की है। उनकी बातें बेहद घटिया हैं।” YSRCP पार्टी के प्रवक्ता ने आगे कहा, “क्या चंद्रबाबू अपने परिवार के साथ शपथ लेने के लिए तैयार हैं कि उनके आरोप सच हैं? उनकी इस तरह की टिप्पणियों से केवल राजनीति का स्तर गिरता है।”

भक्तों की आस्था पर असर:

इस विवाद ने तिरुपति मंदिर के भक्तों के मन में गहरी चिंता पैदा की है। भक्तों का मानना है कि तिरुपति का प्रसाद केवल एक धार्मिक सामग्री नहीं है, बल्कि यह उनकी आस्था का प्रतीक है। कई भक्तों ने अपनी चिंताओं को व्यक्त करते हुए कहा, “हम तिरुपति आते हैं ताकि हम भगवान से आशीर्वाद ले सकें। प्रसाद की गुणवत्ता हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण है। हमें उम्मीद है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेगा।”

तिरुपति लड्डू की गुणवत्ता पर सवाल:

नायडू ने यह भी कहा कि तिरुपति लड्डू बनाने में घटिया सामग्री का इस्तेमाल होता है। उन्होंने कहा, “अब हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हर लड्डू शुद्ध सामग्री से बने और उसकी गुणवत्ता उच्चतम स्तर की हो।” टीटीडी (तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम) ने इस बात की पुष्टि की है कि वे प्रसाद की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए कई उपाय कर रहे हैं।

क्या कहता है मंदिर प्रशासन?

तिरुपति मंदिर प्रशासन ने इन आरोपों को गंभीरता से लिया है। उन्होंने कहा कि वे हमेशा भक्तों की आस्था और प्रसाद की गुणवत्ता को सर्वोपरि मानते हैं। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि सभी नियमों का पालन किया जा रहा है और किसी भी प्रकार की चूक को रोकने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। एक प्रवक्ता ने कहा, “हम भक्तों को उच्च गुणवत्ता का प्रसाद प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

तिरुपति मंदिर का प्रसाद सिर्फ एक भौतिक वस्तु नहीं है; यह करोड़ों भक्तों की आस्था और विश्वास का प्रतीक है। ऐसे में, यह आवश्यक है कि मंदिर की पवित्रता और प्रसाद की गुणवत्ता पर सही और स्पष्ट जानकारी सामने आए। सभी संबंधित पक्षों को मिलकर इस मुद्दे का समाधान निकालना चाहिए, ताकि भक्तों की आस्था को मजबूत किया जा सके और उन्हें उचित प्रसाद प्रदान किया जा सके।

महिलाएँ: परिवार और समाज के आर्थिक ताने-बाने की रीढ़

नलिनी मिश्रा | navpravah.com

नई दिल्ली | एक दृश्य ने मुझे गहरे विचारों में डाल दिया। सड़क किनारे एक स्थानीय महिला, जो समाज के वंचित वर्ग से थी, सब्जी बेच रही थी। यह दृश्य मेरे लिए नया नहीं था, लेकिन आज मैंने इसे अलग नज़र से देखा। मुझे एहसास हुआ कि हमारे देश, भारत में, जितनी भी वंचित वर्ग की महिलाएँ हैं, वे सदियों से अपने दम पर आर्थिक रूप से सशक्त रही हैं। चाहे वह सब्जी बेचना हो, सफाई का काम हो, चूड़ी बेचना हो, कपड़े धोना हो, या बर्तन मांजना हो- ये महिलाएँ हमेशा से अपने परिवार के आर्थिक मामलों में सहयोग करती आई हैं।

मुझे यह सोचने पर मजबूर किया कि आखिर क्यों उनके पतियों या परिवार के सदस्यों ने कभी उनसे यह नहीं कहा कि “तुम घर पर रहो, मैं कमाई करके लाऊँगा।” इसके विपरीत, समाज के संपन्न वर्ग की महिलाओं की स्थिति बिल्कुल उलट रही है। सदियों से, संपन्न वर्ग की महिलाएँ शायद ही कभी आर्थिक भागीदारी का हिस्सा हो और आज जब समाज में महिलाएँ खुद से कमाई करने की बात करती हैं, तो कई सवाल उठते हैं। “घर कौन देखेगा?” “बच्चों की देखभाल कौन करेगा?” “मैं पैसे कमा रहा हूँ, तुम्हें क्या ज़रूरत?” -कि तुम देश का भविष्य बना रही हो। (बच्चों की देखभाल को देश के भविष्य से जोड़ा जाता है।)यह सवाल सामाजिक ढाँचे और परंपराओं पर सवाल खड़े करते हैं।

वंचित वर्ग की महिलाएँ, जो हमेशा से कठिन परिश्रम करती रही हैं, उन्हें सशक्तिकरण की परिभाषा समझाने की आवश्यकता ही नहीं थी। वे पहले से ही आत्मनिर्भर थीं। उनके लिए घर और बाहर का संतुलन साधना उनकी ज़िंदगी का हिस्सा रहा है। वहीं संपन्न वर्ग की महिलाओं को घर की चारदीवारी में बंधी रहने के लिए मजबूर किया गया, उन्हें आर्थिक तौर पर आत्मनिर्भर बनने के अवसर ही नहीं दिए गए। और आज जब वे इस दिशा में कदम बढ़ाना चाहती हैं, तो उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

यह समझना भी ज़रूरी है कि केवल पैसा कमाना सशक्तिकरण की परिभाषा नहीं है। असल सशक्तिकरण तब होता है जब महिलाएँ अपने जीवन से जुड़े फैसले स्वयं ले पाती हैं। चाहे वह घर के भीतर काम करने का निर्णय हो या बाहर काम करने का, असली सशक्तिकरण यही है कि महिलाएँ खुद अपनी पसंद से निर्णय ले सकें। पैसा कमाना सशक्तिकरण का एक हिस्सा हो सकता है, लेकिन फैसले लेने की स्वतंत्रता असल सशक्तिकरण की पहचान है।

हमारे समाज में यह फर्क सिर्फ आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण से भी जुड़ा हुआ है। जहाँ वंचित वर्ग की महिलाएँ जीवनयापन के लिए बाहर काम करती हैं, वहीं संपन्न वर्ग की महिलाएँ घर की चारदीवारी में बंधी रहती हैं। यह अंतर इस बात की तरफ इशारा करता है कि सशक्तिकरण का असल अर्थ केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता नहीं, बल्कि सामाजिक मानसिकता में बदलाव भी है।

समाज को यह समझना होगा कि महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता न केवल उनके लिए, बल्कि पूरे परिवार और समाज के लिए फायदेमंद है। महिलाओं के काम करने से उनके आत्मसम्मान में वृद्धि होती है और वे समाज में एक सक्रिय भूमिका निभाती हैं। इसके साथ ही, बच्चों और परिवार की देखभाल का भार केवल महिलाओं पर डालना एक पुरानी और गलत धारणा है।

परिवार एक साझेदारी होती है, और इसका संतुलन दोनों पति-पत्नी को मिलकर साधना चाहिए।यह सोचने का वक्त है कि आखिर क्यों हमारा समाज अब तक इन धारणाओं में बंधा हुआ है, और हमें इन्हें तोड़ने की दिशा में क्या कदम उठाने चाहिए। महिलाएँ, चाहे किसी भी वर्ग से हों, उन्हें सशक्त बनाना समय की मांग है। सशक्तिकरण केवल उनके काम करने से नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग में उनके प्रति सम्मान और समर्पण से भी होना चाहिए।

(नलिनी मिश्रा, एक दशक से अधिक समय से समाज सेवा में सक्रिय हैं।)

भाजपा ने हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए संकल्प पत्र जारी किया, पढ़ें विस्तार से

सौम्या केसरवानी | navpravah.com

नई दिल्ली | आज भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने रोहतक से हरियाणा विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी का घोषणा पत्र जारी कर दिया है, घोषित पत्र जारी करते समय प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सैनी, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर, प्रदेश प्रभारी सतीश पूनिया, हरियाणा चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर, ओमप्रकाश धनखड़, सुभाष बराला, सुधा यादव व अन्य लोग मौजूद थे।

इस घोषणा पत्र में प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं –

1 – चिरायु-आयुष्मान योजना के तहत प्रत्येक परिवार को ₹10 लाख तक का मुफ्त इलाज एवं परिवार के 70 वर्ष से अधिक प्रत्येक बुजुर्ग को अलग से 5 लाख तक के मुफ्त इलाज की सुविधा

2 – 24 फसलों की घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद

3 – 2 लाख युवाओं को पक्की सरकारी नौकरी

4 – सभी महिलाओं को लाडो लक्ष्मी योजना के तहत प्रतिमाह 2,100 रुपये दिये जायेगें

5 – शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में 5 लाख आवास

6 – सरकारी अस्पतालों में डायलिसिस तथा सभी अस्पतालों में डायग्नोसिस मुफ्त

7 – हरियाणा को वैश्विक शिक्षा का केंद्र बनाकर आधुनिक स्किल का प्रशिक्षण प्रदान करेंगे

8 – दक्षिण हरियाणा में एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का अरावली जंगल सफारी पार्क

9 – हर घर गृहणी योजना तहत 500 रुपये में सिलेंडर

10 – अळल बालिका योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्र में कॉलेज जाने वाली प्रत्येक छात्रा को स्कूटर

11 – डीए और पेंशनों को जोड़ने वाले साइंटिफिक फॉर्मूले के आधार पर सभी सामाजिक मासिक पेंशनों में वृद्धि

12 – भारत के किसी भी सरकारी कॉलेज से मेडिकल और इंजीनियरिंग पढ़ने वाले ओबीसी एवं एससी जातियों के हरियाणा के विद्यार्थियों को पूर्ण छात्रवृत्ति

13 – भारत सरकार के सहयोग से विभिन्न रैपिड रेल सेवाओं एवं फरीदाबाद से गुरुग्राम के बीच इंटरसिटी एक्सप्रेस मेट्रो सेवा की शुरुआत

14 – छोटी पिछड़े समाज की जातियों के लिए पर्याप्त बजट के साथ अलग-अलग कल्याण बोर्ड

15 –  हर जिले में ओलंपिक खेलों की नर्सरी

इस घोषणा पत्र को लेकर मेनिफेस्टो कमेटी के चेयरमैन ने कहा कि,
मुझे ये बताते हुए खुशी हो रही है कि 2 लाख से ज्यादा लोगों ने इस घोषणा पत्र को बनाने में अपने सुझाव दिए हैं, इस बार हमारे घोषणा पत्र में एरिया वाइज जरूरत की चीजों का शामिल किया है। इस पत्र में महिला, युवा, किसान, उद्योगपति, छोटे व्यापारी, पिछड़े वर्ग के लोग, बेरोजगार युवाओं के लिए संकल्प पत्र में कुछ न कुछ रखा गया है।

चंद्रबाबू नायडू का जगन मोहन पर गम्भीर आरोप, “पशुओं की चर्बी से बनते थे तिरूपति मंदिर के लड्डू“

इशिका गुप्ता | navpravah.com

नई दिल्ली | तिरुपति लड्डू का वितरण तिरुपति के प्रसिद्ध श्री वेंकटेश्वर मंदिर में किया जाता है, जिसे तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) संचालित करता है।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने हाल ही में पिछली वाईएसआरसीपी सरकार पर आरोप लगाया कि उन्होंने तिरुपति लड्डू बनाने में जानवरों की चर्बी का इस्तेमाल किया। हालांकि, वाईएसआरसीपी ने इस दावे को खारिज कर दिया है। तिरुपति लड्डू का वितरण तिरुपति के प्रसिद्ध श्री वेंकटेश्वर मंदिर में होता है, जिसका संचालन तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) करता है।

बुधवार को एक पार्टी बैठक में, मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि लड्डू घटिया सामग्री से बनाए जाते थे। उन्होंने कहा, “यहां तक कि तिरुमाला के लड्डू भी घटिया सामग्री से बनते थे… उन्होंने घी की जगह पशु वसा का इस्तेमाल किया था।” बाद में, उन्होंने बताया कि अब लड्डू बनाने में शुद्ध घी का उपयोग किया जा रहा है।

आंध्र प्रदेश के आईटी मंत्री नारा लोकेश ने भी पूर्ववर्ती वाईएस जगन मोहन रेड्डी सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा, “तिरुमाला में भगवान वेंकटेश्वर स्वामी का मंदिर हमारा सबसे पवित्र स्थल है। मुझे यह जानकर आश्चर्य हुआ कि वाईएस जगन मोहन रेड्डी प्रशासन ने तिरुपति प्रसादम में घी की जगह पशु वसा का इस्तेमाल किया।”

हालांकि, वाईएसआरसीपी के वरिष्ठ नेता और टीटीडी के पूर्व अध्यक्ष वाईवी सुब्बा रेड्डी ने चंद्रबाबू नायडू के आरोप को “दुर्भावनापूर्ण” बताया और कहा कि टीडीपी सुप्रीमो “राजनीतिक लाभ के लिए किसी भी स्तर तक गिर सकते हैं।”

सुब्बा रेड्डी ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “तिरुमाला प्रसादम के बारे में उनकी टिप्पणी बेहद दुर्भावनापूर्ण है। कोई भी व्यक्ति ऐसे शब्द नहीं बोलेगा या ऐसे आरोप नहीं लगाएगा।” उन्होंने यह भी कहा कि नायडू की टिप्पणी ने तिरुमाला मंदिर की पवित्रता और करोड़ों हिंदुओं की आस्था को गंभीर नुकसान पहुंचाया है।

चेपॉक में भारत-बांग्लादेश की भिड़ंत, बारिश से मैच पर संकट के बादल

नृपेंद्र कुमार मौर्य | navpravah.com

नई दिल्ली | भारत और बांग्लादेश के बीच दो मैचों की टेस्ट सीरीज का पहला मुकाबला आज से चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में खेला जाएगा, जिसे चेपॉक के नाम से भी जाना जाता है। टेस्ट मैच सुबह 9:30 बजे से शुरू होगा, और इस ऐतिहासिक मैदान पर क्रिकेट फैंस एक रोमांचक मुकाबले की उम्मीद कर रहे हैं। हालांकि, इस मैच से पहले भारतीय फैंस के लिए एक निराशाजनक खबर सामने आ रही है – मौसम के चलते बारिश की आशंका ने मैच के आयोजन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मौसम की चुनौती-

Accuweather के पूर्वानुमान के मुताबिक, चेन्नई में पहले दिन यानी 19 सितंबर को 46% तक बारिश हो सकती है। यह स्थिति मैच के दूसरे दिन तक भी जारी रह सकती है, जब बारिश की संभावना 41% तक रहेगी। इसका मतलब है कि शुरुआती दो दिनों में मैच के प्रभावित होने की पूरी संभावना है। तेज हवाओं के साथ बादल भी छाए रहेंगे, जिससे खेल में व्यवधान की स्थिति बन सकती है।

हालांकि, आखिरी तीन दिनों में मौसम कुछ हद तक साफ रहने की उम्मीद है। 21 से 23 सितंबर तक बारिश की संभावना क्रमशः 25%, 24%, और 25% तक गिर जाएगी, जिससे मैच के बाकी दिन सुचारु रूप से खेले जा सकने की उम्मीद बनी रहेगी।

टीमों की तैयारियां-

भारतीय टीम के कप्तान रोहित शर्मा हैं, जबकि बांग्लादेश की कमान नजमुल हुसैन शांतो संभालेंगे। भारतीय टीम में विराट कोहली, शुभमन गिल, और जसप्रीत बुमराह जैसे दिग्गज खिलाड़ी शामिल हैं, जबकि बांग्लादेश की टीम शाकिब अल हसन और मुश्फिकुर रहीम जैसे अनुभवी खिलाड़ियों के साथ मैदान में उतरेगी। दोनों टीमें इस सीरीज के लिए पूरी तरह तैयार हैं और जीत के इरादे से खेलेंगी।

फैंस की उम्मीदें-

चेन्नई का चेपॉक स्टेडियम भारत के क्रिकेट इतिहास में कई यादगार मुकाबलों का गवाह रहा है, और फैंस को उम्मीद है कि बारिश के बावजूद एक शानदार टेस्ट मुकाबला देखने को मिलेगा।

संसद में पेश होगा ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ बिल, देशभर में नई बहस शुरू

इशिका गुप्ता| navpravah.com

नई दिल्ली| एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मोदी कैबिनेट ने बुधवार को ‘एक देश, एक चुनाव’ (One Nation, One Election) के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। इस फैसले से देशभर में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की राह साफ हो गई है। यह कदम पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर लिया गया, जो इस व्यवस्था की व्यवहार्यता पर विचार कर रही थी।

2029 से पहले लागू होगी व्यवस्था: अमित शाह

कैबिनेट के इस फैसले से ठीक एक दिन पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने यह साफ किया था कि 2029 से पहले हर हाल में वन नेशन, वन इलेक्शन लागू किया जाएगा। शाह ने कहा था, “हमारी योजना इस सरकार के कार्यकाल के दौरान ही इसे लागू करने की है और इसे लेकर तैयारियां जोरों पर हैं।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में स्वतंत्रता दिवस पर अपने संबोधन में इस मुद्दे पर जोर दिया था। उन्होंने कहा, “देश में बार-बार चुनाव होने से विकास कार्य प्रभावित होते हैं। हमें वन नेशन, वन इलेक्शन की दिशा में आगे बढ़ना ही होगा।”

क्या है ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’?

इस नीति के तहत देशभर में एक ही समय पर लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं के चुनाव कराए जाएंगे। अभी की व्यवस्था में लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव अलग-अलग समय पर होते हैं, जिससे प्रशासनिक और सुरक्षा तंत्र पर दबाव पड़ता है। नई व्यवस्था से संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा और चुनावी प्रक्रिया में तेजी आएगी।

सरकार के अनुसार, ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ के लागू होने से कई फायदे होंगे:

1. प्रशासनिक कार्यों में तेजी: बार-बार चुनाव से सरकारी मशीनरी पर पड़ने वाला दबाव कम होगा।

2. सतत विकास की ओर ध्यान: बार-बार चुनाव होने से अक्सर लोकलुभावन योजनाओं पर फोकस होता है, जो दीर्घकालिक विकास को प्रभावित करता है। नई व्यवस्था लंबी अवधि की नीतियों पर जोर देगी।

3. वोट प्रतिशत में वृद्धि: एक साथ चुनाव होने से मतदाता आसानी से एक ही दिन कई चुनावों में वोट डाल सकेंगे, जिससे वोट प्रतिशत बढ़ने की संभावना है।

चुनौतियां और विपक्ष का रुख

हालांकि, इस प्रस्ताव का विपक्ष ने तीखा विरोध किया है। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और सपा जैसे दल इसे असंवैधानिक और लोकतंत्र विरोधी करार दे रहे हैं। उनका मानना है कि क्षेत्रीय मुद्दे हाशिए पर चले जाएंगे और राष्ट्रीय मुद्दे हावी रहेंगे। इसके अलावा, संविधान में कई संशोधन करने की भी जरूरत पड़ेगी, जो अपने आप में एक जटिल प्रक्रिया है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होने पर अक्सर मतदाता केंद्र और राज्य में एक ही पार्टी को वोट देते हैं। क्षेत्रीय दलों को यह डर है कि यह व्यवस्था उनके राजनीतिक अस्तित्व को खतरे में डाल सकती है।

क्या होगा आगे?

कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब इस प्रस्ताव को संसद में पेश किया जाएगा, जहां इसके विभिन्न पहलुओं पर चर्चा होगी। हालांकि, अभी यह देखना बाकी है कि यह बड़ा राजनीतिक बदलाव कब और कैसे लागू किया जाएगा, लेकिन इस कदम ने देश के राजनीतिक परिदृश्य में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने 25,000 पेड़ों की कटाई पर रोका, बिजवासन रेलवे विस्तार परियोजना पर संकट

इशिका गुप्ता| navpravah.com 

नई दिल्ली| सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बिजवासन रेलवे स्टेशन के विस्तार के लिए दिल्ली के शाहाबाद मोहम्मदपुर में लगभग 25,000 पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी। यह आदेश न्यायमूर्ति अभय ओका और पंकज मिथल की खंडपीठ ने उस याचिका पर सुनाया, जिसमें राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के 13 फरवरी के आदेश के खिलाफ अपील की गई थी। एनजीटी ने पेड़ों की कटाई रोकने से मना किया था, यह मानते हुए कि 120 एकड़ का हरित क्षेत्र वन संरक्षण अधिनियम के तहत “वन भूमि” नहीं है।

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि “हम प्रतिवादियों को संबंधित भूमि पर पेड़ों को काटने या नुकसान पहुंचाने से रोकते हैं। यह भी कहा गया कि वहां कोई निर्माण कार्य नहीं किया जाएगा।”

न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति पंकज मिथल की पीठ ने अपीलकर्ताओं के तर्कों पर ध्यान दिया, जिन्होंने कहा कि विस्तार परियोजना का क्षेत्र एक “माना हुआ वन” है, जिसे टीएन गोदावर्मन बनाम भारत संघ के 1996 के फैसले के बाद वन समान संरक्षण प्राप्त है।

उन्होंने यह भी बताया कि यह क्षेत्र दिल्ली हवाई अड्डे के निकट स्थित है और कार्बन डाइऑक्साइड का प्राथमिक फिल्टर का काम करता है। इसके अलावा, यह दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के निवासियों के लिए शहर के फेफड़ों की भूमिका निभाता है, जहाँ हरियाली की बहुत कमी है।

न्यायालय ने रेल मंत्रालय के अधीन रेल भूमि विकास प्राधिकरण, दिल्ली वन विभाग और परियोजना को लागू करने वाली कंपनी से जवाब मांगा है। इसके साथ ही, मामले की अगली सुनवाई 21 अक्टूबर को होगी, और न्यायालय ने अंतरिम राहत पर नोटिस भी जारी किया है।

वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन और अधिवक्ता अंकुर सूद, माधव गुप्ता, मनन वर्मा, मधुर पंजवानी, धमन त्रिवेदी और प्रशांत ने अपीलकर्ताओं की ओर से कोर्ट में पेशी दी।

सिंधु जल संधि पर भारत का कड़ा कदम, संशोधन के लिए पाकिस्तान को चेतावनी

इशिका गुप्ता| navpravah.com 

नई दिल्ली | भारत ने 30 अगस्त 2024 को पाकिस्तान को एक औपचारिक नोटिस भेजकर 1960 की सिंधु जल संधि की समीक्षा और संशोधन की मांग की है। यह कदम भारत की बढ़ती निराशा को दर्शाता है। संधि के अनुच्छेद XII (3) के अनुसार, इसके प्रावधानों में बदलाव दोनों सरकारों के बीच सहमति से किया जा सकता है।

भारतीय अधिकारियों का मानना है कि पाकिस्तान लगातार भारतीय जल परियोजनाओं में बाधा डालता रहा है और सिंधु जल संधि के तहत भारत की उदारता का गलत फायदा उठाता है।

भारत के इस बड़े कदम के पीछे कई चिंताएं हैं, जो 1960 में संधि के हस्ताक्षर के बाद के घटनाक्रमों से जुड़ी हैं। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, भारतीय अधिसूचना में ऐसी परिस्थितियों का जिक्र है जो मौलिक और अप्रत्याशित हैं, और जिनके लिए संधि के अनुच्छेदों का पुनर्मूल्यांकन आवश्यक है।

भारत ने तीन मुख्य चिंताओं पर जोर दिया है, जो दिखाती हैं कि 1960 की समझ अब टिकाऊ नहीं है। पहली चिंता जनसंख्या की जनसांख्यिकी में बड़े बदलाव और जल आधारित कृषि के उपयोग से संबंधित है। दूसरी, स्वच्छ ऊर्जा के विकास में तेजी लाने की आवश्यकता है, ताकि भारत अपने उत्सर्जन लक्ष्यों को पूरा कर सके। तीसरी चिंता जम्मू और कश्मीर में सीमा पार आतंकवाद के प्रभाव को लेकर है, जिसने संधि के सुचारू कार्यान्वयन में बाधा डाली है और भारत के अधिकारों के पूर्ण उपयोग को कमजोर किया है।

 रतले और किशनगंगा परियोजनाओं पर विवाद:

रतले और किशनगंगा जलविद्युत परियोजनाओं के संचालन को लेकर विवाद हाल ही में और बढ़ गया है। भारतीय अधिकारियों का कहना है कि पाकिस्तान हमेशा भारतीय परियोजनाओं में बाधा डालता रहा है और सिंधु जल संधि के तहत भारत की उदारता का गलत लाभ उठाता है।

स्थिति और भी जटिल हो गई है, क्योंकि विश्व बैंक ने तटस्थ विशेषज्ञों और मध्यस्थता न्यायालय दोनों को सक्रिय कर दिया है। भारत सरकार ने अपने हाल के संवाद में संधि के विवाद समाधान तंत्र पर पुनर्विचार की आवश्यकता को भी बताया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का यह कदम पाकिस्तान के अड़ियल रवैये और सीमा पार आतंकवादी हमलों के प्रति बढ़ते गुस्से को दर्शाता है। यह भावना पनप रही है कि 1960 की संधि में पाकिस्तान के साथ संबंधों को अनुचित रूप से सकारात्मक रूप से देखा गया था। हाल की घटनाओं ने भारत के प्रति गहरी दुश्मनी को उजागर किया है, जो आतंकवाद के समर्थन में स्पष्ट रूप से दिखता है।

जम्मू और कश्मीर में भी संधि की समीक्षा की मांग की जा रही है, जहां लोगों का मानना है कि उनके अधिकारों को बिना किसी परामर्श के नजरअंदाज किया गया है। पंजाब और हरियाणा में भी पानी को लेकर भावनाएं बढ़ी हैं, जहां लोग नई परियोजनाओं और प्रौद्योगिकियों के लाभ की उम्मीद कर रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, संशोधन का नोटिस सरकार के भीतर व्यापक विचार-विमर्श के बाद भेजा गया है। इसे मोदी सरकार की ऐतिहासिक गलती को सुधारने की दृढ़ इच्छाशक्ति के रूप में देखा जा रहा है।

लेबनान-सीरिया पेजर विस्फोट कांड: क्या मोसाद की थी खुफिया साजिश?

नृपेन्द्र कुमार मौर्य| navpravah.com 

नई दिल्ली| मंगलवार को लेबनान और सीरिया के कुछ इलाकों में अचानक हुए सिलसिलेवार पेजर विस्फोटों ने दहशत फैला दी। लगभग एक घंटे तक इन क्षेत्रों में कई पेजर विस्फोट होते रहे, जिनमें कई लोग घायल हुए और अफरातफरी मच गई। कुछ घटनाओं में, पेजर जेब में फट गया तो कहीं हाथ में पेजर में विस्फोट हो गया। इस हादसे से हर तरफ चीख-पुकार मच गई और राहत एवं बचाव दल मौके पर पहुंचे।

लेबनान के चरमपंथी संगठन हिजबुल्लाह ने इन पेजर विस्फोटों के लिए इजरायल को जिम्मेदार ठहराया है। संगठन का दावा है कि इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने इन विस्फोटों को अंजाम दिया है। हिजबुल्लाह के मुताबिक, इजरायल ने ताइवान से खरीदे गए पेजरों में पहले ही विस्फोटक सामग्री फिट कर दी थी, जिससे यह विस्फोट संभव हो सके।

मोसाद का खुफिया ऑपरेशन और ताइवान की कंपनी पर सवाल

न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल ने हिजबुल्लाह के खिलाफ अपने खुफिया ऑपरेशन के तहत पेजरों में विस्फोटक प्लांट किए थे। हिजबुल्लाह ने ताइवान की Gold Apollo नामक कंपनी से लगभग 3000 पेजर का ऑर्डर दिया था। लेकिन इन पेजरों को लेबनान पहुंचने से पहले ही मोसाद द्वारा छेड़छाड़ की गई थी।

अमेरिकी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि पेजरों का AP924 मॉडल था, जिनमें हर पेजर पर 1-2 औंस विस्फोटक फिट किया गया था। विस्फोटक को पेजर में लगी बैटरी के पास लगाया गया था ताकि इसे आसानी से डिटेक्ट न किया जा सके। रिपोर्ट्स के अनुसार, मंगलवार को दोपहर 3:30 बजे पेजरों पर एक संदेश आया, जिसने इन पेजरों में लगे विस्फोटक को एक्टिवेट कर दिया।

विस्फोट से पहले पेजरों से कुछ सेकंड तक बीप की आवाज सुनाई दी, जिसके बाद धमाके हुए। सूत्रों के मुताबिक, मोसाद ने पेजरों में एक छोटा इलेक्ट्रॉनिक बोर्ड इंजेक्ट किया था, जिसमें PETN नामक विस्फोटक था। इस प्रकार के विस्फोटक को किसी डिवाइस या स्कैनर से आसानी से डिटेक्ट करना मुश्किल होता है।

इजरायली खुफिया ऑपरेशन और PETN विस्फोटक

स्काई न्यूज अरबिया की रिपोर्ट के अनुसार, मोसाद ने पेजरों में PETN नामक विस्फोटक फिट किया था, जो बैटरी के तापमान को बढ़ाकर विस्फोट करता है। यह विस्फोटक इतना सूक्ष्म था कि इसका वजन 20 ग्राम से भी कम था, फिर भी यह भारी नुकसान पहुंचाने में सक्षम था।

यह पहली बार नहीं है जब मोसाद ने इस प्रकार का हमला किया हो। 1996 में, इजरायल ने हमास के नेता याहया अयाश की हत्या के लिए उनके फोन में 15 ग्राम RDX विस्फोटक प्लांट किया था, जिसने उनकी मृत्यु हो गई थी।

ताइवान की कंपनी का इनकार

विस्फोटों के बाद Gold Apollo कंपनी के संस्थापक और चेयरमैन Hsu Ching Kuang ने बयान जारी कर कहा कि उनकी कंपनी ने ये पेजर नहीं बनाए थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूरोप की एक अन्य कंपनी के पास उनके ब्रांड का उपयोग करने का अधिकार है और वही पेजर की आपूर्ति के लिए जिम्मेदार थी।

लेबनान और सीरिया में हुए इन पेजर विस्फोटों ने सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि हिजबुल्लाह ने इन विस्फोटों के लिए इजरायल को जिम्मेदार ठहराया है, लेकिन ताइवान की कंपनी की भूमिका पर भी जांच हो रही है। मोसाद की इस ऑपरेशन में कथित संलिप्तता और ताइवान की कंपनी द्वारा जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने के बाद इस मामले में और गहराई से जांच की जरूरत है ताकि सच्चाई का पता चल सके।

“एवेंजर्स: एंडगेम” की सुपरहीरो लड़ाई पहुंची IIT के परीक्षा हॉल तक

इशिका गुप्ता | navpravah.com

वाराणसी | भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) वाराणसी में हाल ही में एक परीक्षा के पेपर में “एवेंजर्स: एंडगेम” की उस ऐतिहासिक लड़ाई के दृश्य को शामिल किया गया है। वायरल हो रही तस्वीर में दिख रहा है कि प्रश्न पत्र में इस शानदार लड़ाई के दृश्य पर आधारित एक 10 अंकों का सवाल था। इस सवाल में छात्रों से कहा गया था कि वे उस दृश्य में कैप्टन अमेरिका द्वारा थोर के हथौड़े, म्योलनिर, को चलाने की क्षमता साबित करने के लिए इंजीनियरिंग के सिद्धांतों को लागू करें।

प्रश्न पत्र में लिखा था, “हथौड़े के हैंडल पर तनाव क्या है, जिसका व्यास 5/8 इंच है?” इसके साथ ही छात्रों से यह भी पूछा गया था कि थानोस पर हमला करने के बाद जब हथौड़े का सिरा लोचदार क्षेत्र से प्लास्टिक क्षेत्र में जाता है, तो म्योलनिर के हथौड़े के सिरा और हैंडल पर तनाव की गणना कैसे करें।

इसके अलावा, छात्रों को यह भी गणना करनी थी कि जब कैप्टन अमेरिका ने हमले के बाद हथौड़ा वापस बुलाया, तो “रिकवरिंग स्ट्रेन और शेष प्लास्टिक स्ट्रेन” कितना था।

मार्वल की 2019 की ब्लॉकबस्टर फिल्म “एवेंजर्स: एंडगेम” को भारत में बहुत पसंद किया गया है। इस सुपरहीरो फिल्म का एक सबसे खास पल वो है जब कैप्टन अमेरिका (क्रिस इवांस) और थानोस (जोश ब्रोलिन) के बीच की लड़ाई होती है। रिलीज़ के लगभग पांच साल बाद भी, यह फिल्म भारत में लोगों के बीच काफी चर्चा में है।

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कई यूजर्स ने वायरल पोस्ट पर अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। एक यूजर ने इच्छा जताई कि उनके प्रोफेसर भी आज के प्रोफेसरों की तरह “कूल” होते। उन्होंने लिखा, “काश मेरे प्रोफेसर मेरे IIT BHU के दिनों में इतने कूल होते।” वहीं, एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की, “बिल्कुल नहीं। कैप्टन ने खुद अपने थ्रो की गणना नहीं की है, और न ही थानोस ने हिट लेने के लिए। फिर भी, मैं इस काम की प्रशंसा करता हूँ।”