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Monday, September 7, 2026
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योगेश्वर दत्त ने विनेश फोगाट पर लगाए गम्भीर आरोप, कहा, “विनेश को देश से माफ़ी माँगनी चाहिए”

नृपेंद्र कुमार मौर्य | navpravah.com

नई दिल्ली | योगेश्वर दत्त ने हाल ही में विनेश फोगाट के कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ने के फैसले पर एक निजी चैनल को दिए साक्षात्कार में अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने कहा कि राजनीति में जाना व्यक्तिगत विकल्प है लेकिन देश को सच्चाई का पता होना चाहिए। उन्होंने पिछले एक साल की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि ओलंपिक में विनेश का डिसक्वालिफाई होना और पहलवानों का जंतर-मंतर पर आंदोलन, दोनों ही मामलों ने भारत की गलत छवि पेश की है।

योगेश्वर ने यह भी कहा कि जब कोई खिलाड़ी ओलंपिक में डिसक्वालिफाई होता है, तो उसे पूरे देश के सामने माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि विनेश के मामले में इसे साजिश का नाम दिया गया और पीएम मोदी पर अनावश्यक आरोप लगाए गए। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन में भी गलत जानकारी फैलाई गई और लोगों को एकत्रित किया गया। ऐसा माहौल बनाने का कोई औचित्य नहीं है, खासकर जब देश को एक मेडल का नुकसान उठाना पड़ा हो।

जब उनसे पूछा गया कि राजनीति और कुश्ती में क्या फर्क है, तो उन्होंने कहा कि कुश्ती कहीं ज्यादा आसान है। राजनीति में झूठ बोलना और लोगों को भ्रमित करना सबसे गलत बात है। योगेश्वर का मानना है कि राजनीति का उद्देश्य समाज की भलाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीति में सिर गिने जाते हैं, जबकि कुश्ती में आपकी ताकत मायने रखती है।

उन्होंने यह भी कहा कि अगर वे पहले चुनाव में जीत जाते, तो शायद उन्हें बहुत कुछ सीखने का मौका नहीं मिलता। बीजेपी के प्रति उन्होंने कोई विरोध नहीं जताया और कहा कि हरियाणा में बीजेपी की सरकार फिर से बनने जा रही है। उन्होंने कहा कि लोगों में बीजेपी को जीताने की भावना है और कुछ लोग माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

केजरीवाल की कुर्सी ख़ाली रखकर क्या संदेश देना चाहती हैं आतिशी ?

नृपेंद्र कुमार मौर्या | navpravah.com

नई दिल्ली | आतिशी ने सोमवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री पद का चार्ज ग्रहण किया, जिसके बाद राजनीतिक चर्चाएँ शुरू हो गईं। उन्होंने इस अवसर पर अनोखे तरीके से सीएम की कुर्सी के बगल में एक कुर्सी रखी और कहा कि यह कुर्सी पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि कुछ महीनों में दिल्ली की जनता उन्हें फिर से चुनकर सीएम बनाएगी और तब तक यह कुर्सी यहीं रहेगी।

आतिशी ने यह संदेश भी दिया कि वे केजरीवाल के विचारों को आगे बढ़ा रही हैं। केजरीवाल ने इस्तीफा देने के बाद कहा था कि जनता ही अब निर्णय करेगी, और आतिशी भी उसी दिशा में बढ़ रही हैं। यह संकेत मिलता है कि वे केजरीवाल के संदेश को जनता तक पहुंचाना चाहती हैं।

आतिशी ने कहा कि अरविंद केजरीवाल की कुर्सी का स्थान इसी कमरे में रहेगा, जो उनकी वापसी का प्रतीक है। उन्होंने सीएम ऑफिस में केजरीवाल की कुर्सी को बगल में रखकर इमोशनल संदेश देने की कोशिश की, यह दर्शाते हुए कि सभी को केजरीवाल का इंतज़ार है।

सीएम पद की शपथ लेने के बाद की पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में, आतिशी ने भी केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि आज अरविंद केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री क्यों नहीं हैं। उनके अनुसार, बीजेपी की केंद्र सरकार ने केजरीवाल के खिलाफ साजिश रची, उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाया और छह महीने से अधिक समय तक जेल में रखा।

आतिशी की यह कोशिश स्पष्ट करती है कि वे न केवल केजरीवाल के विचारों को आगे बढ़ा रही हैं, बल्कि केंद्र सरकार के खिलाफ भी आवाज उठा रही हैं। उनकी यह रणनीति अगले चुनावों को ध्यान में रखते हुए है, जिसमें वे जनता के सामने केजरीवाल की सरकार की उपलब्धियों और उनकी वापसी का मुद्दा उठाना चाहती हैं।

इस प्रकार, आतिशी ने अपने पदभार ग्रहण के साथ ही एक राजनीतिक संदेश देने का प्रयास किया है, जो न केवल अरविंद केजरीवाल की विरासत को संरक्षित करता है, बल्कि आगामी चुनावों की तैयारियों का भी संकेत देता है।

ऑस्कर में ‘लापता लेडीज़’ की एंट्री, पढ़िए पूरी ख़बर

नृपेंद्र कुमार मौर्या | navpravah.com

नई दिल्ली | किरण राव द्वारा बनाई गई फिल्म “लापता लेडीज” ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। इस फिल्म को ऑस्कर 2025 के लिए आधिकारिक भारतीय प्रविष्टि के रूप में चुना गया है। फिल्म की पहली स्क्रीनिंग पिछले साल टोरंटो फिल्म फेस्टिवल में हुई, जहां इसे दर्शकों और आलोचकों से जबरदस्त प्रशंसा मिली।

“लापता लेडीज” एक अनोखी कहानी पेश करती है, जो सामाजिक मुद्दों और मानवीय भावनाओं को गहराई से छूती है। किरण राव ने इसकी पटकथा और निर्देशन पर विशेष ध्यान दिया है, जिससे यह फिल्म न केवल मनोरंजक बल्कि गहराई से प्रभावित करने वाली भी बन गई है।

किरण ने इस बारे में कहा, “यह कहानी उन महिलाओं की है जो समाज में अदृश्य हैं। मैं चाहती थी कि दर्शक उनकी यात्रा को महसूस करें।” फिल्म में नारीवादी दृष्टिकोण को दर्शाया गया है, जो भारतीय सिनेमा में एक नया आयाम जोड़ता है।

आमिर खान प्रोडक्शन द्वारा निर्मित, “लापता लेडीज” इस प्रोडक्शन हाउस की चौथी फिल्म है, जो ऑस्कर की दौड़ में शामिल हो रही है। आमिर खान के लिए यह गर्व का क्षण है, क्योंकि उनकी फिल्मों ने हमेशा वैश्विक मंच पर भारतीय सिनेमा का प्रतिनिधित्व किया है।

मार्च 2024 में रिलीज़ होने वाली “लापता लेडीज” के प्रति दर्शकों की उत्सुकता बढ़ती जा रही है। फिल्म का ट्रेलर और पोस्टर पहले ही लोगों का ध्यान खींच चुके हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह फिल्म ऑस्कर में भारत का नाम रोशन कर पाएगी।

इस उपलब्धि के साथ, किरण राव और उनकी टीम ने भारतीय सिनेमा में एक नई लहर को जन्म दिया है, जो न केवल मनोरंजन प्रदान करती है बल्कि सामाजिक मुद्दों पर भी प्रकाश डालती है।

‘लापता लेडीज’ को भारत के तरफ से ऑफिशियल ऑस्कर एंट्री बनाए जाने पर फिल्म के एक्टर रवि किशन ने खुशी जाहिर की. उन्होंने कहा, ‘मेरे लिए ये सपना सच होने जैसा मोमेंट है. ये सबसे बड़ा सम्मान है और मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं कभी इतनी दूर पहुंच पाऊंगा. ये मेरी जिंदगी की बेस्ट और सबसे बड़ी खबर है. ये फिल्म भारत का रिफ्लेक्शन है और सबसे खूबसूरत तरीके से महिला सशक्तिकरण को दिखाती है.’

जानिये कौन है 19 वर्षीय मिस यूनिवर्स इंडिया ?

इशिका गुप्ता | navpravah.com

नई दिल्ली | गुजरात की 19 वर्षीय रिया सिंघा ने रविवार को मिस यूनिवर्स इंडिया 2024 का खिताब जीतकर सभी को चौंका दिया। 51 फाइनलिस्टों के बीच अपनी अद्भुत प्रतिभा और आत्मविश्वास से उन्होंने यह सफलता हासिल की। अब वह नवंबर में मैक्सिको में होने वाली मिस यूनिवर्स 2024 प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए तैयार हैं। रिया का यह सफर न केवल उनके लिए, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व की बात है।

रिया सिंघा को रविवार को मिस यूनिवर्स इंडिया 2024 का ताज पहनाया गया है, और अब वह भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए वैश्विक मिस यूनिवर्स 2024 प्रतियोगिता में शामिल होंगी। यह विशेष आयोजन रविवार को राजस्थान की राजधानी जयपुर में हुआ, जहां रिया ने यह सम्मान हासिल किया।

कार्यक्रम के बाद, मिस यूनिवर्स इंडिया के इंस्टाग्राम पेज पर रिया सिंघा की जीत का जश्न मनाते हुए खास पल साझा किया गया। इस पोस्ट में ब्रिटिश रॉक बैंड कोल्डप्ले के प्रसिद्ध गीत “माई यूनिवर्स” का पृष्ठभूमि संगीत शामिल किया गया, जो इस उत्सव को और भी खास बना गया।

रिया सिंघा ने एएनआई को बताया, “आज मैंने मिस यूनिवर्स इंडिया 2024 का खिताब जीत लिया। मैं बेहद आभारी हूं। मैंने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए कड़ी मेहनत की है और अब खुद को इस ताज का हकदार मानती हूं। पिछले विजेताओं से मुझे बहुत प्रेरणा मिली है।”

अपने खिताब जीतने के बाद, रिया ने कहा कि वह पिछले विजेताओं से प्रेरित हैं और उनका उद्देश्य भारत का नाम दुनिया में ऊंचा करना है। वह इस मंच का उपयोग समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए करना चाहती हैं। रिया सिंघा का आत्मविश्वास और प्रतिबद्धता निश्चित रूप से उन्हें आगे बढ़ने में मदद करेगी और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाएगी।

रिया एक मॉडल और महत्वाकांक्षी उद्यमी हैं, जो खुद को फिटनेस उत्साही मानती हैं। मिस यूनिवर्स इंडिया के तहत, वह जीएलएस यूनिवर्सिटी की एंबेसडर एट लार्ज हैं और वहां बैचलर ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स की पढ़ाई कर रही हैं। उनकी पहल, “वर्क रेडी विद रिया,” का मकसद युवाओं को जरूरी कौशल प्रदान करना है, ताकि वे अपने करियर में सफलता हासिल कर सकें। रिया का यह प्रयास उन्हें एक प्रेरणादायक भूमिका मॉडल बनाता है।

2015 में मिस यूनिवर्स इंडिया का खिताब जीतने वाली मॉडल और अभिनेत्री उर्वशी रौतेला इस साल की प्रतियोगिता की जज थीं। उन्होंने आशा जताई कि भारत इस बार मिस यूनिवर्स का ताज जीत सकता है। एएनआई से बातचीत में उन्होंने कहा, “विजेता अद्भुत हैं और वे हमारे देश का शानदार प्रतिनिधित्व करेंगी। मुझे पूरा विश्वास है कि भारत इस साल भी ताज जीतेगा। सभी लड़कियां मेहनती, प्रतिभाशाली और बेहद खूबसूरत हैं।”

जयपुर में आयोजित प्रतियोगिता में प्रांजल प्रिया ने पहले रनर-अप का खिताब जीता, जबकि छवि वर्ग द्वितीय रनर-अप रहीं।

चाइल्ड पॉर्न: जानिए, सुप्रीम कोर्ट ने क्यों पलट दिया हाई कोर्ट का फ़ैसला ?

सौम्या केसरवानी | navpravah.com

नई दिल्ली | आज सुप्रीम कोर्ट ने चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर फैसला सुनाया है। अब चाइल्ड पोर्नोग्राफी को डाउनलोड करना और देखना भी पॉस्‍को के तहत अपराध होगा। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से चाइल्ड पोर्नोग्राफी की जगह बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार सामग्री लाने के लिए अध्यादेश जारी करने का भी अनुरोध किया है।

मद्रास हाई कोर्ट ने अपने मोबाइल फोन में चाइल्ड पोर्नोग्राफी से जुड़े कंटेंट रखने के एक आरोपी के खिलाफ चल रहे केस को रद्द कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को रद्द करके इस मामले को फिर से सेशन कोर्ट भेजा है। बच्चों के अधिकार के लिए काम करने वाली कई संस्थाओं ने इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

इसके पहले मद्रास हाई कोर्ट ने कहा था कि केवल किसी के व्यक्तिगत इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस पर चाइल्‍ड पोर्नोग्राफ़ी डाउनलोड करना या उसे देखना कोई अपराध नहीं है। यह पॉस्‍को अधिनियम और आईटी अधिनियम के तहत अपराध की श्रेणी मे नहीं आता है।

सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ कि अध्यक्षता वाली बेंच ने चाइल्ड पोर्नोग्राफ़ी केस में सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा था कि बच्चे का पोर्न देखना अपराध नहीं हो सकता है। लेकिन बच्चे का पोर्नोग्राफी में इस्तेमाल किया जाना अपराध होगा।

आगे इस विषय में CJI ने कहा था कि, किसी से वीडियो का मिलना पॉस्‍को की धारा-15 का उल्लंघन नहीं है लेकिन अगर आप इसे देखते हैं और दूसरों को भेजते हैं, तो यह कानून के उल्लंघन के दायरे में आएगा। व्यक्ति सिर्फ इसलिए अपराधी नहीं होगा कि उसे वीडियो किसी ने भेज दिया है।

भारत-अमेरिका के बीच ‘मेगा डील’, जिसे परमाणु समझौते से भी बड़ी सफलता माना जा रहा

नृपेंद्र कुमार मौर्य | navpravah.com

नई दिल्ली | भारत और अमेरिका के सहयोग से भारत को पहला राष्ट्रीय सुरक्षा सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट प्राप्त होने जा रहा है। यह परियोजना अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह न केवल भारत का पहला, बल्कि वैश्विक स्तर पर पहला मल्टी-मटेरियल निर्माण संयंत्र होगा जो राष्ट्रीय सुरक्षा के उद्देश्यों के लिए बनाया जाएगा। यह कदम सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।

भारत और अमेरिका के बीच हुआ यह ऐतिहासिक समझौता केवल सेमीकंडक्टर उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन्नत तकनीकी साझेदारी को भी उजागर करता है। दोनों देशों ने राष्ट्रीय सुरक्षा, अगली पीढ़ी के दूरसंचार, और हरित ऊर्जा के लिए अत्याधुनिक सेंसिंग और संचार तकनीकों के निर्माण हेतु एक स्थायी सेमीकंडक्टर उत्पादन प्रणाली स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की है। यह कदम उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि असैन्य परमाणु समझौता, क्योंकि पहली बार अमेरिकी सेना ने उच्च तकनीकी साझेदारी के लिए भारत का समर्थन किया है।

आज के समय में, जब संपूर्ण विश्व सेमीकंडक्टर की भारी कमी से जूझ रहा है, भारत का यह प्रयास उसकी तकनीकी स्वायत्तता को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। वैश्विक सेमीकंडक्टर उत्पादन पर ताइवान, दक्षिण कोरिया और चीन का प्रभुत्व है। इन देशों के बीच व्यापारिक संघर्षों और वैश्विक महामारी के बाद से चिप्स की आपूर्ति में अवरोध उत्पन्न हुआ, जिससे संपूर्ण विश्व, विशेषकर भारत, पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इस कमी ने भारतीय अर्थव्यवस्था को गंभीरता से प्रभावित किया है, क्योंकि सेमीकंडक्टर का उपयोग मोबाइल, कम्प्यूटर, और यहां तक कि आधुनिक वाहनों के ब्रेक सिस्टम और इंजन नियंत्रण जैसी प्रमुख तकनीकों में होता है।

इस अत्याधुनिक प्लांट के माध्यम से भारत की 2026 तक अनुमानित 80 अरब डॉलर की सेमीकंडक्टर मांग पूरी करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। यह संयंत्र न केवल आर्थिक विकास को गति देगा, बल्कि रोजगार सृजन के नए अवसर भी प्रदान करेगा।

रेलवे पर लगातार तोड़फोड़ की साजिश: कानपुर में पर रेल पटरी पर मिला गैस सिलेंडर

इशिका गुप्ता| navpravah.com

उत्तर प्रदेश| कानपुर जिले के प्रेमपुर रेलवे स्टेशन पर रेल पटरी पर एक खाली एलपीजी गैस सिलेंडर मिलने से उत्तर प्रदेश में रेलवे को नुकसान पहुंचाने की कोशिशों की एक नई कड़ी सामने आई है। इस घटना के बाद अधिकारियों ने कई अन्य मामलों की जांच शुरू कर दी है, जहां रेलवे के काम में रुकावट डालने के लिए विभिन्न चीजों का इस्तेमाल किया गया था।

एक पखवाड़े के भीतर, बदमाशों ने फिर से इस तरह की कोशिश की, जिससे रेलवे संचालन को खतरा हुआ। प्रेमपुर स्टेशन पर, जो कानपुर सेंट्रल और फतेहपुर के बीच है, लूपलाइन पर 5 लीटर का खाली गैस सिलेंडर पाया गया। सुरक्षा बलों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इसे ट्रैक से हटा दिया।

सिलेंडर के अलावा, स्थानीय पुलिस ने घटनास्थल से दो खाली बीयर के डिब्बे और एक स्नैक रैपर भी बरामद किया। उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) के अनुसार, सुबह करीब 5:50 बजे जोरहाट जाने वाली मालगाड़ी के लोको-पायलट देव आनंद गुप्ता और सीबी सिंह ने सिग्नल के आगे ट्रैक पर एक खाली सिलेंडर देखा। चालक दल ने संभावित खतरे को टालने के लिए तुरंत आपातकालीन ब्रेक लगाए।

खाली सिलेंडर की गहन जांच के बाद पुलिस ने उसे ट्रैक से हटा दिया, जिससे मालगाड़ी अपनी यात्रा फिर से शुरू कर सकी। कानपुर सेंट्रल जीआरपी के एसएचओ ओम नारायण सिंह ने बताया कि सिलेंडर सिग्नल से महज 30 मीटर की दूरी पर रखा गया था। उन्होंने कहा कि ऐसे सिलेंडर आमतौर पर हॉस्टल में रहने वाले छात्रों, निर्माण स्थलों पर काम करने वाले मजदूरों और रेलवे ट्रैक के किनारे झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले लोगों द्वारा इस्तेमाल होते हैं। कानपुर सिविल पुलिस, आरपीएफ, और जीआरपी इस घटना की गहन जांच कर रहे हैं।

कानपुर के पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार ने कहा, “हालांकि पटरी से उतरने की संभावना बहुत कम थी, क्योंकि चलती ट्रेन की गति ने संभवतः सिलेंडर को दूर धकेल दिया होगा, लेकिन जानबूझकर गैस सिलेंडर को ट्रैक पर रखना, चाहे अपराधी कोई भी हो, स्पष्ट रूप से तोड़फोड़ की मंशा को दर्शाता है।”

इससे पहले 8 सितंबर को कानपुर नगर में कालिंदी एक्सप्रेस को पटरी से उतारने और विस्फोट करने का प्रयास किया गया था। कानपुर-कासगंज रूट पर बर्राजपुर और उतरीपुरा के बीच एक एलपीजी गैस सिलेंडर ट्रेन के इंजन से टकरा गया था, और ट्रैक के पास एक मोलोटोव कॉकटेल भी मिला था।

हालांकि, कानपुर पुलिस अब तक मामले में कोई महत्वपूर्ण प्रगति नहीं कर पाई है। अगस्त से उत्तर प्रदेश में रेलवे संचालन को बाधित करने के लिए कम से कम छह प्रयास हो चुके हैं।

10 सितंबर को गाजीपुर घाट और गाजीपुर सिटी रेलवे स्टेशन के बीच तीन लोगों ने बजरी रखी थी और प्रयागराज-बलिया पैसेंजर ट्रेन पर पत्थर फेंके थे, जिन्हें अगले दिन गिरफ्तार किया गया। 16 सितंबर को दिल्ली जाने वाली स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस का इंजन गाजीपुर घाट और गाजीपुर सिटी रेलवे स्टेशन के बीच रेल ट्रैक पर पड़े लकड़ी के लट्ठे से टकरा गया। ट्रेन 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही थी, और इमरजेंसी ब्रेक लगाने के बाद भी टक्कर को नहीं रोका जा सका।

इसी तरह, 24 अगस्त को फर्रुखाबाद के एक किसान नेता के बेटे समेत दो लोगों को कानपुर-कासगंज रूट पर ट्रेन को पटरी से उतारने की कोशिश करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। 17 अगस्त को वाराणसी से अहमदाबाद जा रही साबरमती एक्सप्रेस कानपुर के पास पटरी से उतर गई जब उसका इंजन एक मीटर लंबे पुराने जंग लगे पटरी के टुकड़े से टकरा गया।

आतिशी मार्लेना: दिल्ली की नई मुख्यमंत्री कौन हैं?

इशिका गुप्ता| navpravah.com

नई दिल्ली | आम आदमी पार्टी की नेता आतिशी ने शनिवार शाम को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने उन्हें यह शपथ दिलाई, जिससे वे दिल्ली की तीसरी महिला मुख्यमंत्री बन गईं, इसके पूर्व शीला दीक्षित और सुषमा स्वराज इस पद पर रह चुकी हैं।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने हाल ही में शराब नीति मामले में जेल से रिहा होने के बाद सीएम पद से इस्तीफा देने का फैसला किया था, और उनका इस्तीफा शुक्रवार रात को स्वीकार कर लिया गया।

आतिशी को विधायक दल की नेता चुने जाने के बाद, उन्होंने उपराज्यपाल से शपथ ग्रहण की तारीख तय करने की गुजारिश की थी। अरविंद केजरीवाल के करीबी सहयोगी के रूप में, आतिशी पर कई लोगों को भरोसा है।

साल 2023 में जब मनीष सिसोदिया जेल गए, तब आतिशी ने शिक्षा मंत्री का पद संभाला। इसके अलावा, उन्होंने वित्त, राजस्व, पीडब्ल्यूडी, बिजली, सेवा, और महिला एवं बाल विकास जैसे महत्वपूर्ण विभागों का भी जिम्मा लिया।

आतिशी शनिवार को दिल्ली की तीसरी महिला मुख्यमंत्री बनीं, जिनसे पहले शीला दीक्षित और सुषमा स्वराज इस पद पर रह चुकी थीं। दिल्ली में जन्मी और पली-बढ़ी आतिशी ने 2013 में आम आदमी पार्टी में शामिल होकर राजनीति में कदम रखा और 11 साल में सीएम बन गईं।

आतिशी का जन्म 8 जून 1981 को दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर विजय सिंह और त्रिप्ता वाही के घर हुआ। उन्होंने द स्प्रिंगडेल्स स्कूल से अपनी स्कूली शिक्षा प्राप्त की और दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफंस कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की। बाद में उन्होंने ऑक्सफोर्ड से इतिहास में मास्टर डिग्री ली। उनके माता-पिता मार्क्सवादी थे, जिसके कारण उनका मध्य नाम ‘मार्लेना’ रखा गया, जो मार्क्स और लेनिन का संयोजन है। हालांकि, उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले इसे अपने नाम से हटा दिया।

आतिशी की शादी साल 2006 में पंजाबी राजपूत परिवार के प्रवीण सिंह से हुई। प्रवीण संभावना इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक पॉलिसी एंड पॉलिटिक्स में शोधकर्ता और शिक्षक हैं। उन्होंने आईआईटी दिल्ली और आईआईएम अहमदाबाद से शिक्षा प्राप्त की और लगभग आठ साल तक भारत और अमेरिका में कंसल्टेंसी फर्मों में काम किया। वे समाज सेवा में भी सक्रिय हैं, हालांकि सार्वजनिक जीवन में उनकी उपस्थिति कम रहती है।

आतिशी ने साल 2013 में आम आदमी पार्टी में शामिल होकर राजनीति में कदम रखा और मेनिफेस्टो ड्राफ्टिंग कमेटी की सदस्य बनीं। 2015-2018 तक, उन्होंने दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के सलाहकार के रूप में काम किया। इसके बाद, उन्होंने सक्रिय राजनीति में भाग लिया और मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में जल सत्याग्रह आंदोलन में भी हिस्सा लिया।

साल 2019 के लोकसभा चुनाव में आतिशी ने पूर्वी दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें भाजपा नेता गौतम गंभीर से हार का सामना करना पड़ा। 2020 के चुनावों के बाद, उन्हें आम आदमी पार्टी की गोवा इकाई का प्रभारी बनाया गया। उसी साल, उन्होंने दिल्ली के कालकाजी विधानसभा क्षेत्र से जीत हासिल की, जहां उन्होंने भाजपा नेता धर्मबीर सिंह को हराया, जिससे उनका दिल्ली की राजनीति में उभार हुआ।

मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन के इस्तीफे के बाद, अरविंद केजरीवाल ने आतिशी को कैबिनेट में शामिल किया। उन्होंने वित्त, पीडब्ल्यूडी, बिजली, सेवा, राजस्व, महिला और बाल विकास, और शिक्षा जैसे विभिन्न विभागों का जिम्मा संभाला।

2019 में लोकसभा चुनाव के दौरान, आतिशी ने अपनी संपत्ति का हलफनामा पेश किया, जिसमें उनके पास कुल 1 करोड़ 41 लाख रुपये की चल और अचल संपत्ति दर्शाई गई। हालांकि, उनके पास कोई कार या आभूषण जैसी संपत्ति नहीं थी।

प्रधानमंत्री मोदी के अमरीका दौरे से पहले क्या हुआ जिससे भारत की चिंता बढ़ी?

नृपेंद्र कुमार मौर्या | navpravah.com

नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर अमेरिका पहुंचने वाले हैं, और इस दौरे से कुछ घंटे पहले व्हाइट हाउस ने खालिस्तान आंदोलन के समर्थक सिखों के एक समूह के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में व्हाइट हाउस ने इन सिख नेताओं को यह आश्वासन दिया कि अमेरिका अपने नागरिकों को किसी भी अंतरराष्ट्रीय आक्रमण से सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

अमेरिका और कनाडा में खालिस्तानी अलगाववादियों की स्थिति

हाल ही में, कनाडा और अमेरिका खालिस्तानी अलगाववादियों को शरण देने की वजह से चर्चा में हैं। खालिस्तान आंदोलन से जुड़े समूह भारत में प्रतिबंधित हैं और कई ने पिछले कुछ दशकों में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम दिया है। जबकि अमेरिका ने इन तत्वों को “आश्रय” देने पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की, कनाडा ने इसे अपनी “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता” के तहत समझा है।

जयशंकर का स्पष्ट संदेश

इस संदर्भ में, भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, “भारत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करता है, लेकिन इसका मतलब अलगाववाद का समर्थन नहीं है।” उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे तत्वों को राजनीतिक स्थान देने की स्वतंत्रता नहीं होनी चाहिए, जो विदेशी राजनयिकों को धमकाने या हिंसा की वकालत करते हैं। उनका यह बयान इस बात को रेखांकित करता है कि किसी भी लोकतांत्रिक समाज में नियमों का पालन होना अनिवार्य है।

व्हाइट हाउस की बैठक का उद्देश्य

यह बैठक व्हाइट हाउस के आधिकारिक परिसर में आयोजित की गई, जिसमें अमेरिकन सिख कॉकस कमेटी के प्रीतपाल सिंह और सिख गठबंधन के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। प्रीतपाल सिंह ने बताया, “हमने सिख अमेरिकियों की सुरक्षा को लेकर संघीय अधिकारियों को धन्यवाद दिया और उनसे और अधिक सहयोग की अपील की।” उन्होंने इस बैठक को सकारात्मक बताया और कहा कि यह आश्वासन कि सरकार उनके साथ खड़ी है, महत्वपूर्ण है।

प्रधानमंत्री मोदी के इस दौरे को लेकर देशभर में उम्मीदें हैं, लेकिन साथ ही यह घटनाक्रम अमेरिका के खालिस्तानी अलगाववादी तत्वों के प्रति नीति और भारत के चिंताओं के बीच की जटिलता को भी उजागर करता है।

क्या आपको हर समस्या का हल दवा में नजर आता है? जानें संभावित नुकसान

नृपेंद्र कुमार मौर्या | navpravah.com

नई दिल्ली | हालिया एक अध्ययन ने एक गंभीर समस्या को उजागर किया है: 2050 तक लगभग 40 मिलियन लोग एंटीबायोटिक प्रतिरोधी संक्रमणों के कारण अपनी जान गंवा सकते हैं। यह आंकड़ा स्वास्थ्य जगत के लिए एक बड़ा अलार्म है, जो दिखाता है कि हम एक खतरनाक दिशा में बढ़ रहे हैं। एंटीबायोटिक प्रतिरोध तब होता है जब बैक्टीरिया विकसित होते हैं और आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली एंटीबायोटिक्स के प्रति प्रतिरोधी हो जाते हैं।

एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल हमारे लिए जीवन रक्षक रहा है। ये दवाएं ना केवल सामान्य संक्रमणों के इलाज में मदद करती हैं, बल्कि जटिल सर्जरी और कैंसर जैसे उपचारों में भी अत्यधिक महत्वपूर्ण होती हैं। लेकिन जब बैक्टीरिया इन दवाओं के खिलाफ प्रतिरोध विकसित कर लेते हैं, तो यह पूरी चिकित्सा प्रणाली को खतरे में डाल देता है। ऐसे संक्रमणों के उपचार में अधिक समय लग सकता है, और कभी-कभी, यह जानलेवा भी हो सकता है।

यह अध्ययन हमें इस बात की याद दिलाता है कि एंटीबायोटिक का अनियंत्रित उपयोग और इसके गलत तरीके से सेवन की प्रवृत्ति हमें किस संकट की ओर ले जा रही है। उदाहरण के लिए, कई लोग बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक्स लेते हैं, या पूरी खुराक खत्म किए बिना ही उन्हें रोक देते हैं। इसके अलावा, पशुपालन में भी एंटीबायोटिक्स का अत्यधिक उपयोग इस समस्या को बढ़ा रहा है, जिससे प्रतिरोधी बैक्टीरिया का विकास हो रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हम तत्काल कदम नहीं उठाते हैं, तो आने वाले समय में सामान्य संक्रमणों का इलाज भी मुश्किल हो सकता है। सरकारों, स्वास्थ्य संगठनों और जनता को इस विषय पर जागरूकता बढ़ाने और जिम्मेदार व्यवहार अपनाने की आवश्यकता है। उचित नीतियों का निर्माण, नए एंटीबायोटिक्स के विकास में निवेश, और चिकित्सकों द्वारा एंटीबायोटिक प्रिस्क्रिप्शन में सावधानी बरतने से हम इस समस्या को नियंत्रित कर सकते हैं।

सिर्फ चिकित्सा क्षेत्र ही नहीं, बल्कि समाज के सभी हिस्सों को इस दिशा में कार्य करना होगा। शिक्षा और जागरूकता अभियानों के माध्यम से लोगों को सही जानकारी देना आवश्यक है, ताकि वे एंटीबायोटिक्स का उपयोग समझदारी से करें।

यदि हम सब मिलकर इस समस्या का सामना नहीं करते हैं, तो भविष्य में हम एक ऐसी दुनिया में रह सकते हैं जहां सामान्य बीमारियाँ भी जानलेवा साबित हो सकती हैं। यह अध्ययन सभी के लिए एक चेतावनी है—आज की गई कोशिशें भविष्य की पीढ़ियों के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।