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Tuesday, July 28, 2026
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‘आपने तो मुझे हराने के लिए चंदा दिया था…’ – ट्रंप का पुराना गुस्सा क्या बांग्लादेश – अमरीका संबंधों में डालेगा खटास?

नृपेन्द्र कुमार मौर्य| navpravah.com 

नई दिल्ली | अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की वापसी लगभग तय मानी जा रही है। रिपब्लिकन उम्मीदवार ट्रंप ने 294 इलेक्टोरल वोट हासिल किए हैं, जबकि उनके प्रतिद्वंदी, मौजूदा उपराष्ट्रपति और डेमोक्रेट उम्मीदवार कमला हैरिस, 226 इलेक्टोरल वोटों पर अटकी हुई हैं। हालाँकि, वोटों की गिनती अभी जारी है, लेकिन संकेत स्पष्ट हैं कि जनवरी में ट्रंप फिर से राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे।

भारत के लिए सकारात्मक, पड़ोसी मुल्कों में हड़कंप

ट्रंप की वापसी को भारत के हित में माना जा रहा है, लेकिन इसके उलट, बांग्लादेश में इस पर विपरीत असर देखा जा रहा है। पिछले अगस्त में शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद छोड़कर भारत में शरण लेनी पड़ी थी, और इसके बाद मोहम्मद यूनुस ने बांग्लादेश की सत्ता संभाली थी। माना जा रहा था कि हसीना सरकार के तख्तापलट में अमेरिकी समर्थन था।

लेकिन अब ट्रंप के सत्ता में आने से यूनुस के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं, क्योंकि पूर्व में ट्रंप और यूनुस के बीच संबंध अच्छे नहीं रहे हैं। ट्रंप के पिछले कार्यकाल में मोहम्मद यूनुस से उनकी दूरी जगजाहिर थी, और यह समझा जा रहा है कि बाइडेन प्रशासन द्वारा मिले समर्थन की कमी यूनुस के लिए चुनौती बन सकती है।

ट्रंप और यूनुस के पुराने मतभेद

रिपोर्ट्स के अनुसार, 2016 में ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद जब बांग्लादेश का एक डेलिगेशन व्हाइट हाउस में उनसे मिला था, तो ट्रंप ने यूनुस का नाम लेकर तीखे सवाल किए थे। ट्रंप ने उस समय नाराजगी जताते हुए कहा था कि उन्होंने सुना है यूनुस ने उनकी हार के लिए डेमोक्रेट उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन के क्लिंटन फाउंडेशन को डोनेशन दिया था।

यूनुस और क्लिंटन फाउंडेशन का संबंध

माइक्रो फाइनेंसिंग के क्षेत्र में बांग्लादेश में प्रभावशाली भूमिका निभाने वाले मोहम्मद यूनुस ने 2016 में क्लिंटन फाउंडेशन को 1 से 2.5 लाख डॉलर का योगदान दिया था। उसी साल हिलेरी क्लिंटन ने उन दानकर्ताओं से मुलाकात की थी जो उनके चुनाव अभियान में समर्थन दे रहे थे। यूनुस, जो बांग्लादेश के ग्रामीण बैंक के प्रमुख रहे हैं, को 2006 में माइक्रो फाइनेंस में उनके कार्यों के लिए नोबेल पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।

ट्रंप की वापसी और बांग्लादेश-अमेरिका संबंधों का भविष्य

ट्रंप की सत्ता में वापसी के बाद यह देखा जाना बाकी है कि बांग्लादेश और अमेरिका के संबंधों में क्या बदलाव आता है, लेकिन यह तय है कि यूनुस के लिए यह नया राजनीतिक समीकरण चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

शाहरुख खान को मिली जान से मारने की धमकी से बॉलीवुड में हड़कंप, आरोपी ने किया चौंकाने वाला दावा

मेधा सिंह| navpravah.com 

नई दिल्ली | बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख खान को जान से मारने की धमकी मिलने की खबर ने फिल्म इंडस्ट्री और उनके फैंस को हैरान कर दिया है। धमकी भरे कॉल से जुड़े मामले में नया मोड़ तब आया जब आरोपी फैजान खान ने दावा किया कि उसका फोन कुछ दिन पहले चोरी हो गया था।

धमकी देने वाला कॉल रायपुर से ट्रेस

मुंबई पुलिस ने इस धमकी भरे कॉल का तुरंत संज्ञान लिया और कॉल ट्रेस कर जांच शुरू की। पुलिस की जांच में यह सामने आया कि यह कॉल रायपुर से किया गया था। रायपुर में जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी फैजान खान से पूछताछ की, जिसने बताया कि उसका फोन 2 नवंबर को चोरी हो गया था। फैजान ने यह भी कहा कि धमकी देने वाले कॉल से उसका कोई लेना-देना नहीं है।

क्या कहा गया था धमकी में?

5 नवंबर को दोपहर 1 बजकर 21 मिनट पर बांद्रा पुलिस स्टेशन को एक कॉल प्राप्त हुआ, जिसमें कॉल करने वाले ने धमकी देते हुए कहा, “शाहरुख खान मन्नत बैंड स्टैंड वाला है ना… अगर उसने मुझे 50 लाख रुपये नहीं दिए, तो उसे मार डालूंगा।” जब पुलिस ने कॉल करने वाले की पहचान पूछी, तो उसने जवाब दिया, “ये मैटर नहीं करता कि मेरा नाम क्या है… अगर लिखना ही है तो मेरा नाम हिन्दुस्तानी लिखो।”

सलमान खान को भी मिल चुकी हैं धमकियां

शाहरुख खान को मिली इस धमकी से पहले भी बॉलीवुड में सुरक्षा का मुद्दा गर्माया हुआ था। पिछले महीने कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के गैंग ने पॉलिटिशियन बाबा सिद्दीकी की हत्या की जिम्मेदारी ली थी, जिसके बाद सलमान खान की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई थी। सलमान को भी अक्टूबर में दो अलग-अलग मौकों पर जान से मारने की धमकियां मिली थीं और पुलिस ने मामले में गिरफ्तारियां भी की हैं।

शाहरुख की सुरक्षा पर भी सवाल

बॉलीवुड में धमकियों का यह सिलसिला सलमान से लेकर अब शाहरुख तक पहुंच गया है, जिससे इंडस्ट्री में चिंता बढ़ गई है। मुंबई पुलिस इस मामले की गहन जांच कर रही है ताकि शाहरुख खान की सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह की कमी न रहे।

अनिल विज का गंभीर आरोप, कहा प्रशासन ने की जान से मारने की कोशिश

मेधा सिंह| navpravah.com 

नई दिल्ली | हरियाणा के कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने हरियाणा प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाया है।उन्होंने कहा “प्रशासन ने पूरी कोशिश करी कि अनिल विज को हराया जाए । किसके कहने से करी क्यों करी ये जांच का विषय है।मैं एकदम सीधा साधा कोई आरोप नहीं लगाता हूँ लेकिन जो घटित हुआ नगरपालिका ने हमारी मंजूरशुदा सड़कें भी बनाने से रोक दीं।”

अंबाला कैंट से विधानसभा चुनाव में अनिल विज इस बार कांग्रेस के परविंदर सिंह परी से 7000से अधिक वोटों से जीत गए थे । उन्होंने पहले ही ऐलान कर दिया था कि वह हरियाणा के मुख्यमंत्री बन सकते हैं पर ऐसा ना हुआ नायब सिंह सैनी को मुख्यमंत्री पद दिया गया इस बात से अनिल विज नाराज़ भी थे । उनका कहना था कि वह पार्टी में सीनियर हैं अगर पार्टी चाहेगी तो अगली मुलाकात मुख्यमंत्री आवास पर होगी।

उन्होंने प्रशासन के बारे में ये भी कहा कि “प्रशासन चाहता था इस चुनाव में कोई खून खराबा हो जाए जिसमें अनिल विज या उनका कोई वर्कर मर जाए ताकि इस चुनाव को प्रभावित किया जा सके या रोका जा सके।”

उन्होंने आरोपों का सिलसिला यहीं नहीं थामा उन्होंने बताया कि शाहपुर गांव की धर्मशाला में उनका कार्यक्रम था और उन्होंने चुनाव आयोग से अनुमति ले रखी थी जिसकी वजह से उन्हें पुलिस से एनओसी मिल गई पर फिर भी जब वह कार्यक्रम में पहुंचे तब कई लोग किसान यूनियन का झंडा ले कर बड़े बड़े दंडों के साथ अंदर हॉल में घुस गए पर गाँववालों ने उनसे झड़प करके उन्हें बाहर भगा दिया वरना कोई अनहोनी हो सकती थी।

पहले जब हरियाणा में भाजपा की सरकार थी और मनोहर लाल खट्टर मुख्यमंत्री थे तब अनिल विज ने गृह मंत्रालय का कार्यभार संभाला था लेकिन जबसे नायब सिंह सैनी मुख्यमंत्री बने हैं तबसे अनिल विज इससे नाराज़ हैं हालांकि इस बार भी उनको मंत्री बनाया गया है।

अगर ट्रंप – हैरिस के बीच वोट बराबर हुआ तो क्या होगा? जानिए क्या कहता है अमरीकी संविधान

नृपेन्द्र कुमार मौर्य| navpravah.com

नई दिल्ली | अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव हर चार साल में होता है, लेकिन इस बार का चुनाव कुछ खास है। डोनाल्ड ट्रंप, जो पहले राष्ट्रपति रह चुके हैं, और कमला हैरिस, जो उपराष्ट्रपति पद पर रह चुकी हैं, के बीच कड़ा मुकाबला हो रहा है। इस चुनाव पर न केवल अमेरिका, बल्कि पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं।

इस बार का चुनाव 5 नवंबर को हो रहा है, और इसके परिणाम का सबको बेसब्री से इंतजार है। अगर ट्रंप और हैरिस के बीच एक अद्भुत संयोगवश बराबरी हो जाती है, तो क्या होगा? अमेरिकी संविधान के अनुसार, यदि दोनों उम्मीदवार 270 वोटों की सीमा तक पहुंचने में विफल रहते हैं, तो निर्णय की बागडोर कांग्रेस को थामनी होगी। इसका अर्थ है कि निर्णय अमेरिकी संसद करेगी, और यहां प्रत्येक राज्य को एक-एक वोट देने का अधिकार होगा। भले ही किसी राज्य की जनसंख्या अधिक हो या कम, हर राज्य का वोट बराबरी का होगा।

ऐसा मौका इतिहास में बहुत कम देखने को मिला है। पिछली बार 1800 के चुनाव में, जब थॉमस जेफरसन और मौजूदा राष्ट्रपति जॉन एडम्स के बीच टाई हुई थी, तो अंततः कांग्रेस ने जेफरसन को राष्ट्रपति चुना। उस समय सदन में सहमति बनाने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा। इस टाई के बाद अमेरिकी संविधान में 12वां संशोधन जोड़ा गया, ताकि चुनाव की प्रक्रिया को स्पष्ट किया जा सके और भविष्य में टाई की स्थिति से निपटा जा सके। अगर इस बार फिर से ऐसा होता है, तो कांग्रेस में 6 जनवरी 2025 को आकस्मिक चुनाव होगा, जिसमें राज्य एक-एक वोट डालेंगे। यह एक रोमांचक लेकिन दुर्लभ स्थिति होगी।

अब सवाल उठता है कि आखिर अमेरिका में चुनाव कैसे होते हैं? अमेरिका में चुनाव की प्रक्रिया काफी लंबी होती है और इसमें पांच मुख्य चरण होते हैं। सबसे पहले प्राइमरी और कॉकस होते हैं, जहां पार्टी के भीतर उम्मीदवार चुने जाते हैं। इसके बाद नेशनल कन्वेंशन होता है, जहां प्रत्येक पार्टी अपने अंतिम उम्मीदवार का ऐलान करती है। फिर आता है आम चुनाव का दौर, जो सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। आम चुनाव में जनता अपने मत का प्रयोग करके इलेक्टर्स को चुनती है। हर राज्य के पास उसकी जनसंख्या के अनुसार इलेक्टर्स की संख्या होती है। इनमें “विनर टेक्स ऑल” का नियम लागू होता है, यानी जिस उम्मीदवार को राज्य में सबसे ज्यादा वोट मिलते हैं, उसे उस राज्य के सभी इलेक्टर्स का समर्थन मिलता है।

इसके बाद इलेक्टोरल कॉलेज का चरण आता है। इसमें प्रत्येक राज्य के इलेक्टर्स एक विशेष दिन पर मिलकर मतदान करते हैं और राष्ट्रपति के लिए अंतिम निर्णय लेते हैं। अंत में, नए चुने गए राष्ट्रपति का शपथ ग्रहण होता है और वह अपने कार्यकाल की शुरुआत करते हैं।

इस चुनाव में लोगों की उम्मीदें और चिंताएं दोनों ही ऊंचाई पर हैं। नतीजा जो भी हो, इस चुनाव का असर न केवल अमेरिका पर, बल्कि दुनिया के बाकी हिस्सों पर भी पड़ने वाला है।

Canada: ख़ालिस्तानी चरमपंथियों ने की सारी हदें पार, हिंदू सभा मंदिर गए भक्तों पर किया हमला

मेधा सिंह | navpravah.com 

नई दिल्ली | ब्रैम्पटन के हिन्दू सभा मंदिर में खालिस्तानी चरमपंथियों ने तोड़फोड़ की और श्रद्धालुओं पर हमला किया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर हिंदू फोरम कनाडा ने इस घटना का एक वीडियो साझा किया है जिसमें साफ तौर पर देखा जा सकता है कि खालिस्तानी चरमपंथी मंदिर में आए हुए श्रद्धालुओं पर डंडे से हमला कर रहे हैं और मंदिर परिसर में हंगामा करते हुए नजर आ रहे हैं।उन्होंने पीले रंग के खालिस्तानी झंडे लिए हुए थे और उसी के डंडे से श्रद्धालुओं पर हमला कर रहे थे।

इस तरह की घटनाएं कनाडा में आम बात हो गई है। इसके पहले इस साल एडमोंटन के बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिर में हिंदू विरोधी नारे लिखे गए थे और हिंदू कनाडाई सांसद चंद्र आर्य को धमकी मिली थी।

प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो ने हाल में होने वाले हमले की निंदा करते हुए X पर लिखा है – “ब्रैम्पटन के हिन्दू सभा मंदिर में हिंसा की घटना स्वीकार्य नहीं हैं। हर कनाडाई को अपना धर्म पालन करने के लिए पूर्ण आज़ादी और सुरक्षा मिली है।मैं पील रीजनल पुलिस का धन्यवाद करना चाहूंगा जिन्होंने तुरंत मौके पर पहुंच कर लोगों को सुरक्षा दी और मामला की तहकीकात शुरू कर दी।”

इस हमले के बाद ट्रुडो और कनाडाई पुलिस पर खालिस्तानी चरमपंथियों को खुली छूट देने का इल्ज़ाम लग रहा है। कहा जाने लगा है कि कनाडा की सियासत में खालिस्तानियों का दबदबा हो गया है। एक वीडियो में दिख रहा है कि जब घटना हो रही है, तब वहां कोई पुलिस या सुरक्षाकर्मी मौजूद नहीं है। ऐसा लग रहा है कि कनाडा में कोई सुरक्षा व्यवस्था है ही नहीं।

कनाडा के हाउस ऑफ कॉमन्स के हिन्दू सांसद चंद्र आर्य ने X पर लिखा “कनाडाई खालिस्तानी चरमपंथियों ने आज लाल रेखा पार कर दी है और इस घटना ने दर्शा दिया है कि खालिस्तानी चरमपंथी सोच कनाडा में कितनी गहरी और बेशर्म हो चुकी है। मुझे विश्वास होने लगा है उस रिपोर्ट पर जिसमें लिखा है कि कनाडा के राजनितिक ढांचे के साथ साथ खालिस्तानियों ने कनाडा के कानूनी व्यवस्था के अंदर भी अपनी पकड़ बना ली है। अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर खालिस्तानी चरमपंथियों को कनाडा में फ्री पास मिल जा रहा है। मैंने बार-बार कहा है हिंदू कनाडाई को आगे बढ़कर अपने हक की मांग रखनी होगी और नेताओं को जिम्मेदार ठहराना होगा।” चंद्र आर्य ने पहले भी ऐसे हादसों पर खुल के बयान दिए हैं ।

कनाडा में आए दिन खालिस्तानी कुछ न कुछ हंगामा करते रहते हैं। कनाडा में अब खालिस्तानी चरमपंथी सोच ताकतवर होती जा रही है कनाडा में भारत के खिलाफ बहुत नारेबाजी होने लगी है और कनाडा सरकार की पॉलिसी का झुकाव इसकी तरफ नज़र आ रहा है जिसकी वजह से भारत और कनाडा के बीच रिश्ते खराब हो रहे हैं। वहां की सरकार खालिस्तानियों को नाराज़ नहीं करना चाह रही है वरना उन्हें चुनाव में हार का सामना झेलना पड़ सकता है ।

डायबिटीज, स्ट्रोक और कैंसर – वायु प्रदूषण ने छीनी 21 लाख जिंदगियां

नृपेन्द्र कुमार मौर्य|navpravah.com 

नई दिल्ली | दिल्ली के वायु प्रदूषण ने एक बार फिर गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। अभी ठंड का मौसम पूरी तरह शुरू भी नहीं हुआ है, और दिल्ली के कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) का स्तर लाल निशान को पार कर 350 से ऊपर पहुँच चुका है। यह ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है और यह संकेत है कि राजधानी की हवा सांस लेने योग्य नहीं रह गई है। हर साल इस मुद्दे पर राजनीति होती है, लेकिन यह गंभीर समस्या केवल राजनीति तक सीमित नहीं है। आम इंसान की सेहत पर इसका सीधा असर पड़ता है, और यह प्रदूषण कई गंभीर बीमारियों का कारण बनता है।

वायु प्रदूषण से होने वाले जानलेवा खतरे

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया में सबसे अधिक मौतें दिल और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों के कारण होती हैं। हालिया सालों में भी इस दिशा में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, वायु प्रदूषण के कारण इस साल दुनियाभर में 81 लाख लोगों की मौत हुई है। अकेले भारत में इस साल करीब 21 लाख लोग प्रदूषण के कारण जान गंवा चुके हैं। यह केवल एक संख्या नहीं है; यह लाखों परिवारों की दुर्दशा है, जो इस प्रदूषण की चपेट में आ गए हैं। प्रदूषण का यह संकट न केवल स्वास्थ्य बल्कि जीवन स्तर पर भी गंभीर प्रभाव डाल रहा है।

वायु प्रदूषण और डायबिटीज का संबंध

पार्टिकुलेट मैटर (PM) 2.5 – एक ऐसा प्रदूषक है जो हवा में घुले हुए धूल, मिट्टी और रासायनिक कणों का मिश्रण है। PM 2.5 के कण इतने सूक्ष्म होते हैं कि इनका आकार लगभग 2.5 माइक्रोमीटर के बराबर होता है। तुलना के लिए, इंसान के बाल का औसतन व्यास 50 माइक्रोमीटर होता है। इस सूक्ष्म आकार के कारण PM 2.5 के कण आसानी से हमारे फेफड़ों तक पहुँच जाते हैं, फिर रक्तप्रवाह में मिलकर पूरे शरीर में फैल जाते हैं, और विभिन्न अंगों को क्षति पहुँचाते हैं।

इन महीन कणों का डायबिटीज जैसे रोगों से भी गहरा संबंध पाया गया है। हाल ही में, लैंसेट में प्रकाशित एक रिसर्च में बताया गया कि PM 2.5 और बढ़े हुए ब्लड शुगर लेवल में सीधा संबंध है। इसका मतलब यह है कि वायु प्रदूषण हमारे फेफड़ों के साथ-साथ ब्लड शुगर और मेटाबॉलिज्म को भी प्रभावित कर सकता है। इससे डायबिटीज का खतरा बढ़ता है, जो आगे चलकर हृदय रोग, गुर्दे की समस्याओं और अन्य कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।

वायु प्रदूषण और मानसिक स्वास्थ्य

प्रदूषण के हानिकारक प्रभाव केवल फेफड़ों तक ही सीमित नहीं हैं; यह मस्तिष्क को भी प्रभावित कर सकता है। न्यूरोलॉजी में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, PM 2.5 कण दिमाग में प्रवेश कर सकते हैं और इसे क्षति पहुँचा सकते हैं। यह अल्जाइमर और अन्य प्रकार की मानसिक बीमारियों से भी जुड़ा हुआ पाया गया है। यानी कि वायु प्रदूषण मस्तिष्क के लिए भी एक खतरा बन गया है। ऐसे में यह स्पष्ट है कि हम जो हवा में सांस ले रहे हैं, वह न केवल हमारे फेफड़ों बल्कि हमारे दिमाग को भी प्रभावित कर रही है।

हड्डियों पर प्रभाव

विभिन्न स्टडीज ने वायु प्रदूषण के कारण हड्डियों पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को भी रेखांकित किया है। शोध के अनुसार, PM 2.5 कणों के कारण हड्डियों में कैल्शियम और अन्य खनिजों की कमी हो सकती है, जिससे हड्डियाँ कमजोर हो जाती हैं। बुजुर्गों में इसका प्रभाव ज्यादा गंभीर होता है और उनके फ्रैक्चर होने का जोखिम बढ़ जाता है। कमजोर हड्डियाँ न केवल शारीरिक अक्षमता का कारण बनती हैं, बल्कि वृद्धावस्था में जीवन की गुणवत्ता भी घटा देती हैं।

दिल की बीमारियाँ और स्ट्रोक का खतरा

ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज 2015 की रिपोर्ट के अनुसार, दिल से जुड़ी बीमारियों के कारण हुई मौतों में से 19% मौतें वायु प्रदूषण के कारण होती हैं। वायु प्रदूषण में मौजूद विभिन्न रसायन दिल की धमनियों को सख्त बना सकते हैं, जिससे रक्तचाप बढ़ सकता है और दिल का दौरा पड़ने का खतरा बढ़ जाता है। इस प्रकार की प्रदूषित हवा न केवल हमारे दिल के लिए बल्कि संपूर्ण शरीर के लिए भी हानिकारक है।

कैंसर का खतरा

वायु प्रदूषण फेफड़ों के कैंसर के खतरे को भी बढ़ाता है। इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) ने PM 2.5 और बाहरी वायु प्रदूषण को ‘कार्सिनोजेनिक’ यानी कैंसर पैदा करने वाले तत्वों के रूप में वर्गीकृत किया है। यह वही समूह है जिसमें तंबाकू और रेडियोएक्टिव तत्व शामिल होते हैं। PM 2.5 के कारण लंग कैंसर का खतरा सिगरेट पीने वालों और न पीने वालों दोनों पर होता है।

एक स्टडी के अनुसार, भारत के अधिकांश शहरों में PM 2.5 का स्तर WHO द्वारा निर्धारित सुरक्षित स्तर से कई गुना अधिक है। ऐसे में शहरों में रहने वाले लोगों में लंग कैंसर का खतरा निरंतर बढ़ता जा रहा है। यह स्थिति अत्यधिक चिंताजनक है, खासकर उन लोगों के लिए जो बड़े शहरों में लंबे समय तक रहते हैं और वहाँ की हवा में सांस लेते हैं।

प्रदूषण का अर्थव्यवस्था पर असर

वायु प्रदूषण के स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों का अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक असर होता है। जब लोग बीमार होते हैं, तो कार्यक्षमता घट जाती है, और अस्पताल में भर्ती होने, दवाइयों और इलाज पर खर्च बढ़ जाता है। इसके अतिरिक्त, समय से पहले हुई मौतों के कारण समाज में कुशल लोगों की कमी होती है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ता है।

प्रदूषण से बचने के उपाय

वायु प्रदूषण से बचने के लिए विभिन्न उपाय किए जा सकते हैं। घर के अंदर एयर प्यूरीफायर का उपयोग करना, N95 मास्क पहनना और घर के अंदर रहना प्रदूषण के असर को कम कर सकता है। इसके साथ ही, पेड़-पौधों का संरक्षण, वाहनों का सीमित उपयोग और सरकार द्वारा प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए सख्त नीतियाँ बनाने से भी वायु गुणवत्ता में सुधार लाया जा सकता है।

इसके अलावा, सरकार और समाज के सभी लोगों को इस समस्या को गंभीरता से लेना होगा। इसके लिए पौधारोपण, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग, और उद्योगों में प्रदूषण को नियंत्रित करने वाले उपायों को बढ़ावा देना आवश्यक है। स्कूल, कॉलेज और सामाजिक संगठन भी इस मुद्दे पर जागरूकता फैला सकते हैं ताकि आम लोग इस अनदेखे खतरे को समझें और प्रदूषण से बचने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएं।

IND vs NZ: भारत की हार के कौन हैं जिम्मेदार?

मेधा सिंह| navpravah.com 

नई दिल्ली | भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच 1-3 नवम्बर के बीच भारत में चल रहे टेस्ट मैच में भारत को बुरी हार का सामना झेलना पड़ा है। भारत की इस हार ने बीसीसीआई को एक्शन लेने पर मजबूर कर दिया है। न्यू ज़ीलैंड ने भारत को टेस्ट मैच में 3-0 से हराकर सबको अचंभित कर दिया है। तीसरे टेस्ट मैच में भारत को 147रन का स्कोर मिला था लेकिन भारत 121 रन पर ऑल आउट हो गई और 25 रन से ये मैच भी हार गई । किसी को उम्मीद नहीं थी न्यू ज़ीलैंड के खिलाफ भारत इस टेस्ट सीरीज में क्लीन स्वीप हो जाएगा । न्यूज़ीलैंड के एजाज़ पटेल प्लेयर ऑफ द मैच बने उन्होंने तीसरे टेस्ट में 11 विकेट लिए और विल यंग प्लेयर ऑफ द सीरीज बने।

विराट और रोहित से मिली निराशा

विराट कोहली ने तीसरे टेस्ट की पहली इनिंग में 4 रन और दूसरे इनिंग में 1 रन बनाया वहीं उन्होंने पूरे टेस्ट सीरीज में 15.5 के एवरेज के साथ 93 रन और रोहित शर्मा ने 15.16के एवरेज के साथ 91 रन बनाए। विराट कोहली का पूरे टेस्ट सीरीज में हाइएस्ट स्कोर 70 रन है वहीं रोहित शर्मा का 52 रन है।

वॉशिंगटन सुंदर ने पूरे टेस्ट सीरीज में शानदार प्रदर्शन दिया है।उन्होंने पहला टेस्ट मैच नहीं खेला पर बाकी दोनों मैच में उन्होंने कुल 16 विकेट और 89 रन बनाए।ऋषभ पंत और शुभमन गिल ने भी अच्छी बल्लेबाजी की।सरफराज खान ने पहले टेस्ट मैच में शतक लगाया था।भारत की बल्लेबाजी काफी ढीली दिखाई दी और ताल मेल में कमी थी। गेंदबाजी में भी न्यूज़ीलैंड ने भारत को पछाड़ दिया।

भारत ने पहले टेस्ट मैच की पहली इनिंग में 46 रन पर ऑल आउट हो गए थे जो कि भारत का भारत में आज तक का सबसे कम स्कोर है।इस हार के बाद रोहित शर्मा की कप्तानी और गौतम गंभीर की कोचिंग पर भी सवाल उठने लगे हैं।

1932से ले कर आज तक 92 सालों में भारत कभी अपनी सरजमीं पर टेस्ट सीरीज के तीनों मैच नहीं हारा है । आज तक भारत कभी न्यू ज़ीलैंड से भारत में टेस्ट सीरीज नहीं हारी थी । 1988 से ले कर आज तक न्यू ज़ीलैंड भारत में कभी भारत के खिलाफ टेस्ट सीरीज नहीं जीती थी लेकिन इस बार न्यू ज़ीलैंड ने पलटफेर कर दिया।

वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचने के लिए भारत की बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच मैच में 4-0 से जीत हासिल करनी।पड़ेगी वरना उन्हें बाकी टीमों के नतीजों पर निर्भर रहना पड़ेगा।

रोहित शर्मा ने हार की जिम्मेदारी लेते हुए बोला कि एक टेस्ट मैच या सीरीज हारना कभी भी आसान नहीं होता है। टीम ने अपना बेस्ट क्रिकेट नहीं खेला और कई गलतियां की। पंत, गिल और वॉशिंगटन सुंदर ने हमें दिखाया कि ऐसे समय में कैसे बल्लेबाजी करनी चाहिए।टीम को लीड करने में और बल्लेबाजी में उनसे चूक हो गई और भारतीय टीम एक यूनिट के तौर पर फ़ेल हो गई।

भाजपा ने झारखंड के लिए जारी किया संकल्प पत्र, जानिए क्या हैं प्रमुख संकल्प?

नृपेन्द्र कुमार मौर्य| navpravah.com 

नई दिल्ली| झारखंड में विधानसभा चुनावों की घोषणा के साथ ही राज्य में सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने झारखंड के रांची में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का घोषणापत्र जारी करते हुए कई अहम वादे किए। चुनावी ‘संकल्प पत्र’ जारी करते हुए शाह ने राज्य में भाजपा की सरकार बनने पर समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने का वादा किया, लेकिन यह साफ किया कि आदिवासी समुदाय इस दायरे से बाहर रहेगा। उनके इस बयान ने चुनावी माहौल में हलचल मचा दी है, क्योंकि इससे पहले विपक्ष ने यूसीसी को लेकर आदिवासियों के हितों पर चिंता जताई थी।

शाह ने इस बात पर जोर दिया कि झारखंड में यूसीसी लागू होने से आदिवासी संस्कृति या उनके अधिकारों पर कोई असर नहीं पड़ेगा, बल्कि यह राज्य के लिए एक बेहतर कदम होगा। शाह ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) पर यूसीसी के बारे में गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा सरकार आदिवासी समुदायों की परंपराओं और संस्कृति का पूरा सम्मान करती है, और उन्हें यूसीसी के दायरे से बाहर रखेगी। उन्होंने झारखंड के लोगों को आश्वासन दिया कि यह कदम केवल एकता और समानता को बढ़ावा देने के लिए उठाया जा रहा है और किसी के अधिकारों पर कोई आंच नहीं आएगी।

शाह ने आगे कहा कि राज्य में भाजपा की सरकार बनने पर झारखंड के विकास के लिए कई ठोस कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने रोजगार के मुद्दे को प्रमुखता देते हुए पांच लाख नए रोजगार अवसर पैदा करने का वादा किया, जिसमें 2.87 लाख सरकारी नौकरियां भी शामिल होंगी। भाजपा का यह कदम युवाओं के बीच काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि रोजगार की कमी लंबे समय से झारखंड में एक प्रमुख मुद्दा रहा है।

इसके अलावा, शाह ने हाल के वर्षों में झारखंड में हुई प्रश्न पत्र लीक घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा सत्ता में आने पर इन मामलों की सीबीआई और एसआईटी के जरिए जांच कराएगी। उनका कहना था कि शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार और परीक्षा प्रणाली में अनियमितताओं को सख्ती से नियंत्रित किया जाएगा, और दोषियों को जेल भेजा जाएगा। इससे छात्रों में एक नई उम्मीद जगी है कि अगर भाजपा सत्ता में आती है, तो उनकी मेहनत और परीक्षा की निष्पक्षता को सुनिश्चित किया जाएगा।

घोषणापत्र में विस्थापन आयोग के गठन का भी वादा किया गया है। शाह ने बताया कि झारखंड में उद्योगों और खदानों के कारण कई लोग विस्थापित हुए हैं, और उनका पुनर्वास सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता होगी। उन्होंने कहा कि इस आयोग के जरिए उन लोगों को पुनः स्थापित करने के प्रयास किए जाएंगे, जो वर्षों से विस्थापन का दंश झेल रहे हैं।

भाजपा ने झारखंड के आदिवासी समुदाय की एक प्रमुख मांग, ‘सरना धर्म कोड’ के मुद्दे पर भी विचार करने का आश्वासन दिया। शाह ने कहा कि अगर भाजपा सत्ता में आई तो ‘सरना धर्म कोड’ के मुद्दे पर विचार-विमर्श कर उचित निर्णय लिया जाएगा। सरना धर्म कोड का मुद्दा आदिवासी समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण विषय है, जो उनकी धार्मिक पहचान और परंपराओं को संरक्षित रखने में मददगार साबित हो सकता है। भाजपा का यह वादा झारखंड के आदिवासियों के बीच एक सकारात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

झारखंड में जनसंख्या असंतुलन और अवैध प्रवासियों के मुद्दे को लेकर भी शाह ने कड़े शब्दों में अपनी बात रखी। उन्होंने झारखंड में अवैध प्रवासियों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई और कहा कि राज्य में ‘माटी, बेटी और रोटी’ पर खतरा बढ़ रहा है। शाह ने आरोप लगाया कि झामुमो सरकार अवैध प्रवासियों को संरक्षण दे रही है, जिसके कारण जनजातीय आबादी घट रही है और राज्य की जनसांख्यिकी में बदलाव हो रहा है। उन्होंने वादा किया कि भाजपा सत्ता में आई तो अवैध प्रवासियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे, जिससे झारखंड के स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

शाह ने कहा कि झारखंड में धार्मिक तुष्टीकरण की नीति चरम पर है, जिससे हिंदुओं पर हमले बढ़ गए हैं। उन्होंने इसे राज्य में भ्रष्टाचार और तुष्टीकरण की राजनीति का नतीजा बताया। शाह का कहना था कि झारखंड को भ्रष्टाचारमुक्त और सुरक्षित बनाना भाजपा की प्राथमिकता होगी। उनका यह बयान उन लोगों को ध्यान में रखते हुए था जो झारखंड में बढ़ते धार्मिक असंतुलन और सुरक्षा के मुद्दों को लेकर चिंतित हैं।

भाजपा के ‘संकल्प पत्र’ में झारखंड की जनता को एक साफ संदेश दिया गया है कि पार्टी राज्य में सुशासन, रोजगार और सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। शाह के वादों को झारखंड में भाजपा की सरकार बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने झारखंड की जरूरतों के मुताबिक वादे किए हैं। राज्य के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर, आदिवासी समुदाय के लिए उनकी संस्कृति और पहचान की सुरक्षा, और झारखंड के हर वर्ग के लिए एक समान और सुरक्षित माहौल का आश्वासन देकर भाजपा ने राज्य में एक नई उम्मीद जगाई है।

झारखंड की जनता अब इस संकल्प पत्र के वादों और भाजपा की नीतियों पर विचार कर रही है। राज्य में 13 और 20 नवंबर को दो चरणों में चुनाव होने हैं और 23 नवंबर को नतीजे आएंगे। इन चुनावों में भाजपा के वादे और शाह की यह घोषणा कि उनकी पार्टी राज्य में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए तैयार है, झारखंड की जनता को कितना आकर्षित करेगी,यह देखना बाकी है।

दीपावली की रात दीप जलाने पर विवाद, एक परिवार की खुशियाँ मातम में बदलीं

नृपेन्द्र कुमार मौर्य| navpravah.com

नई दिल्ली | उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के आरा कला कजरीगढ़ गांव में दीपावली के दिन, जब हर घर रोशनी से जगमगा रहा था, दुबे परिवार के घर पर एक भयानक हादसे ने खुशियों को मातम में बदल दिया। दिलीप कुमार दुबे का परिवार, हर साल की तरह इस बार भी दीप जलाकर अपने घर को सजाने की तैयारी कर रहा था। लेकिन इस दीप जलाने की परंपरा के बीच कुछ लोगों के विरोध ने एक भयानक मोड़ ले लिया।

गांव के रविशंकर, ध्रुवशंकर, दारा सिंह और राम अभिलाष सहित अन्य लोग अचानक वहां पहुंचे और दीप जलाने का विरोध करने लगे। बात गाली-गलौज तक पहुंच गई, और जब दिलीप के छोटे भाई पवन दुबे ने इसका विरोध किया, तो मामला बढ़ गया। हाथों में लाठी, डंडे, सरिया और गड़ासे लिए हुए लोग पवन पर टूट पड़े, उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया। खून से लथपथ पवन को बेहोशी की हालत में छोड़कर हमलावर उनकी दुकान में भी तोड़फोड़ करते हुए निकल गए।

परिवार के बाकी सदस्य-पिता राजेंद्र दुबे, चाचा जितेंद्र, और भाई इंद्र कुमार-जो बीचबचाव के लिए आगे आए, उन्हें भी पीट-पीटकर घायल कर दिया गया। सभी के सिर, हाथ और पैर में गहरी चोटें आईं। हमले के बाद पवन की हालत गंभीर थी और उन्हें तुरंत एसआरएन अस्पताल ले जाया गया, जहां उनके परिवार और गांव के लोग उनके ठीक होने की प्रार्थना करते रहे। लेकिन रविवार की सुबह की पहली किरण के साथ, उनके परिवार को एक दर्दनाक खबर मिली- पवन अब इस दुनिया में नहीं रहे।

यह खबर पूरे गांव में शोक और स्तब्धता का कारण बन गई। दीपावली के जिस पर्व पर अंधकार का अंत माना जाता है, उसी दिन दुबे परिवार के जीवन में एक ऐसा अंधेरा आया जो शायद कभी न मिट सके। पवन की मां और परिवार के लोग दीपावली पर घर के आंगन में रखे उन बुझते दीपों को देख रहे हैं, जो इस बार उनके बेटे के बिना रोशनी नहीं दे पाएंगे।

इस दर्दनाक घटना ने गांव को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि छोटी-छोटी बातों पर इतना बड़ा विवाद कैसे खड़ा हो सकता है। दीप जलाने जैसी बात पर इतना घातक हमला, जिसने एक युवक की जान ले ली और एक परिवार को हमेशा के लिए तोड़ दिया, किसी के लिए भी असहनीय है।

दिलीप कुमार दुबे की शिकायत पर पुलिस ने रवि शंकर यादव, ध्रुव शंकर, रतन सिंह, लवकुश, राम अभिलाष, धारा सिंह, कुलदीप, विकास यादव, चिंतामणि, विपिन यादव और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज किया था। चार आरोपियों – सुनील कुमार, ध्रुव शंकर, रवि शंकर और धारा सिंह-को गिरफ्तार किया गया है। पहले जो मुकदमा मारपीट का दर्ज था, उसे पवन की मृत्यु के बाद हत्या की धारा में परिवर्तित कर दिया गया है।

आज, आरा कला कजरीगढ़ का यह गांव, जो दीपावली के रौशन पर्व पर जगमगाने वाला था, उस अंधेरे में डूबा हुआ है जिसे एक परिवार ने झेला है। दुबे परिवार को अब केवल न्याय का इंतजार है, और गांव के लोग उस परिवार की तकलीफ के बीच यह उम्मीद कर रहे हैं कि ऐसी घटनाएं कभी किसी के साथ न हों।

दीपावली: प्रकाश के इस महापर्व का सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक महत्व

दीपावली

दीपावली, जिसे हम सभी प्यार से ‘दीवाली’ भी कहते हैं, भारतीय संस्कृति का सबसे महत्वपूर्ण और आकर्षक पर्व है। यह पर्व न केवल उजालों का त्योहार है, बल्कि यह भारतीय समाज के मनोविज्ञान, सांस्कृतिक धरोहर और आध्यात्मिक विचारों का प्रतीक भी है। दीपावली के आते ही वातावरण में एक अजीब-सा उल्लास भर जाता है, एक ऐसी खुशी जिसे शब्दों में बयां करना कठिन है। पूरे देश में एक समान भावना के साथ इसे मनाया जाता है, चाहे किसी का धर्म या जाति कुछ भी हो।

दीपावली का इतिहास पौराणिक कथाओं से भरा पड़ा है। मुख्य रूप से यह माना जाता है कि त्रेता युग में जब भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर लंका पर विजय प्राप्त की और 14 वर्षों के वनवास के बाद अयोध्या लौटे, तो अयोध्यावासियों ने घी के दीयों से उनका स्वागत किया। इसी तरह, भगवान विष्णु ने समुद्र मंथन के दौरान इस दिन देवी लक्ष्मी का उद्धार किया, और इस दिन को धन-समृद्धि का प्रतीक माना गया। इसी दिन, नरकासुर का वध करके भगवान कृष्ण ने प्रजा को बुराई से मुक्त किया था। इन सभी कथाओं में एक बात समान है – अंधकार पर प्रकाश की विजय, बुराई पर अच्छाई की विजय, और असत्य पर सत्य की जीत।

दीपावली के पर्व में पांच दिनों का विशेष महत्व है – धनतेरस, नरक चतुर्दशी, मुख्य दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज। हर दिन का अपना सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व है। धनतेरस पर धन की देवी लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की पूजा होती है। इस दिन सोने-चांदी या बर्तनों की खरीदारी का विशेष महत्व है। नरक चतुर्दशी, जिसे छोटी दिवाली भी कहते हैं, बुराई के अंत और अच्छे की शुरुआत का प्रतीक है।

मुख्य दीपावली के दिन देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा होती है। यह दिन घर-घर में दीयों की रोशनी, फूलों की सजावट, रंगोली और मिठाइयों का दिन होता है। गोवर्धन पूजा में प्रकृति और गोवंश की पूजा होती है, जो कृषि समाज की समृद्धि और धरोहर को दर्शाता है। भाई दूज के दिन बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र और खुशहाल जीवन की कामना करती हैं।

दीपावली का त्योहार केवल पूजा-पाठ और धार्मिक मान्यताओं तक सीमित नहीं है; यह एक सामाजिक और सांस्कृतिक महापर्व भी है। यह वह समय होता है जब लोग अपने घरों और दुकानों की साफ-सफाई करते हैं, उन्हें सजाते हैं और अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार रंग-बिरंगे दीयों और लाइटों से रोशन करते हैं। परिवार के सदस्य दूर-दूर से अपने घर लौटते हैं, जिससे आपसी बंधन और प्रेम की मिठास बढ़ती है। घर-घर में पकवान, मिठाइयाँ, और व्यंजनों का आयोजन होता है जो परिवारों को और करीब लाते हैं।

दीपावली का महत्व आर्थिक दृष्टि से भी देखा जा सकता है। यह त्योहार व्यवसायों के लिए साल का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। व्यापारी वर्ग विशेष तैयारियाँ करते हैं, विभिन्न प्रकार के उत्पाद बेचते हैं, और बाजारों में रौनक देखते ही बनती है। शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में खरीददारी के प्रति उत्साह रहता है। इस प्रकार, दीपावली न केवल व्यक्तिगत स्तर पर बल्कि समाज और अर्थव्यवस्था के स्तर पर भी महत्वपूर्ण है।

दीपावली का एक अन्य महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि यह पर्यावरण और स्वास्थ्य के प्रति हमारी जिम्मेदारियों को भी याद दिलाता है। वर्तमान समय में पटाखों और ध्वनि प्रदूषण ने इस त्योहार के उल्लास को एक हद तक प्रभावित किया है। हमें इस पर्व के साथ-साथ हमारी धरती का भी ख्याल रखना चाहिए। आज के समय में ग्रीन दिवाली का महत्व बढ़ गया है। हर वर्ष, यह प्रयास किया जाता है कि इस पर्व को प्रदूषण मुक्त तरीके से मनाया जाए। दीयों और मिट्टी के बर्तनों का उपयोग, प्राकृतिक रंगों से बनी रंगोली, और रीसाइकल पेपर का प्रयोग पर्यावरण के अनुकूल दिवाली का हिस्सा बन सकते हैं।

दीपावली केवल बाहरी रोशनी का पर्व नहीं है; यह आत्मा की उज्जवलता का पर्व है। यह वह समय है जब हमें अपने भीतर की बुराइयों, जैसे कि लालच, अहंकार, और द्वेष, को जलाना होता है। इस पर्व का असली महत्व तभी सार्थक होता है जब हम भीतर से शुद्ध हों, प्रेम और करुणा का दीप जलाएँ, और हर व्यक्ति के जीवन में खुशियों का उजाला फैलाएँ।

संक्षेप में कहें तो, दीपावली का त्योहार भारतीय संस्कृति, समाज और आस्था के अद्भुत संयोजन का प्रतीक है। यह पर्व हमें जीवन में प्रकाश का महत्व समझाता है, बुराइयों का अंत कर सच्चाई और अच्छाई के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। दीपावली की यही अनोखी भावना हमें सिखाती है कि चाहे कितना भी अंधकार हो, एक छोटा-सा दीपक भी प्रकाश फैला सकता है, और यही प्रकाश हर दिल में प्रेम, शांति और समृद्धि का संदेश फैलाए।

इस वर्ष दीपावली मनाते समय हम सब यह संकल्प लें कि हम इसे पर्यावरण के अनुकूल, प्रेम और सौहार्द्र से परिपूर्ण बनाएँगे, ताकि यह पर्व सचमुच हर जीवन में उजाला और खुशियाँ बिखेरे। दीपावली का यह प्रकाश हमारे समाज में प्रेम और सौहार्द्र के नए दीप जलाए और हमारे देश को हर प्रकार के अंधकार से मुक्ति दिलाए।

आप सभी को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ!