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Wednesday, July 29, 2026
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JNU में फिर भगवान का अपमान! श्रीराम पर की अभद्र टिप्‍पणी; ABVP का वामपंथी स्टूडेंट्स पर गंभीर आरोप

नृपेन्द्र कुमार मौर्य| navpravah.com

नई दिल्ली| जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में हाल ही में आयोजित जनरल बॉडी मीटिंग में एक अप्रत्याशित घटना सामने आई। इस बैठक का उद्देश्य इंटरनल कमिटी (IC) के चुनावों और महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करना था, जिसमें विशेष रूप से महिलाओं के यौन उत्पीड़न के मामले भी शामिल थे। हालांकि, इस बैठक के दौरान एक बार फिर से वामपंथी समर्थकों की तरफ से विवादास्पद गतिविधियों को देखा गया।

बैठक में लेफ्ट-समर्थित JNUSU के कुछ नेताओं ने महिलाओं के मुद्दों पर चर्चा के बावजूद किसी भी महिला प्रतिनिधि को मंच देने से इनकार कर दिया। इस निर्णय पर छात्रों ने नाराजगी जताई और इसे महिला सशक्तिकरण के खिलाफ एक कदम बताया। साथ ही, जिन काउंसलर्स को छात्रों की आवाज़ उठाने के लिए चुना गया था, उन्हें भी अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया गया। इस संदर्भ में एक विशेष घटना ने सबका ध्यान आकर्षित किया, जब एक वामपंथी कार्यकर्ता ने भगवान श्रीराम के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी कर दी। इस टिप्पणी से छात्रों की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं और उन्होंने इसका जमकर विरोध किया। छात्रों ने इस असंवेदनशील बयान के लिए माफी की मांग की, लेकिन JNUSU के वामपंथी नेताओं ने इस विरोध को नजरअंदाज किया और बीच में ही मीटिंग छोड़ दी। इसके बाद कुछ विरोध करने वाले छात्रों को धमकाने का भी प्रयास किया गया।

ABVP की JNU इकाई के अध्यक्ष राजेश्वरकांत दुबे ने इस घटना की कड़ी निंदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि यह वामपंथियों की सोची-समझी साजिश है, जिसके माध्यम से भगवान श्रीराम का अपमान किया गया। उन्होंने कहा कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, बल्कि हर जनरल बॉडी मीटिंग का उपयोग हिंदू भावनाओं को आहत करने के लिए किया जाता है। उनका कहना था कि JNU प्रशासन को इस तरह के अभद्र व्यवहार पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए ताकि विश्वविद्यालय की छवि को बचाया जा सके और एक स्वस्थ शैक्षणिक वातावरण स्थापित किया जा सके।

ABVP JNU इकाई की मंत्री शिखा स्वराज ने भी इस घटना की आलोचना करते हुए कहा कि महिलाओं के मुद्दों पर चर्चा के बावजूद किसी भी महिला प्रतिनिधि को मंच न देना वामपंथी नेताओं की तानाशाही मानसिकता को दर्शाता है। शिखा ने इसे एक सोची-समझी रणनीति बताया और कहा कि कुछ ही दिन पहले जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में दीपावली के अवसर पर छात्रों पर हमले की घटना सामने आई थी, जिसमें आपत्तिजनक नारे भी लगाए गए थे। उनका मानना है कि यह घटनाएं एक ही विचारधारा का हिस्सा हैं, जो धार्मिक भावनाओं को आहत करने और सामाजिक सौहार्द्र को बिगाड़ने की मंशा से प्रेरित हैं। उन्होंने कहा कि ABVP हमेशा भगवान श्रीराम के सम्मान की रक्षा के लिए खड़ा रहेगा और किसी भी प्रकार के अपमान का सख्त जवाब देगा।

इस घटना ने JNU के छात्रों और समाज के अन्य वर्गों के बीच एक बहस को जन्म दिया है। कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के अंतर्गत मानते हैं, तो कुछ इसे धार्मिक असंवेदनशीलता के रूप में देखते हैं। यह घटना न केवल JNU के भीतर के विचारधारा संघर्ष को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि कैसे छात्रों के बीच मतभेद बढ़ रहे हैं।

कौन हैं अभिनव अरोड़ा जिनको पड़ी जगतगुरु रामभद्राचार्य से फटकार

मेधा सिंह | navpravah.com 

नई दिल्ली| अभिनव अरोड़ा 10 वर्षीय एक कथा वाचक हैं जिनके इंस्टाग्राम पर 9 लाख 50हज़ार फॉलोवर्स हैं।उनका कहना है कि उन्होंने खुद को भगवान की भक्ति में लीन कर लिया है और वह बड़े हो कर संत बनना चाहते हैं।

सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें जगतगुरु रामभद्राचार्य उन्हें स्टेज पर फटकार लगा रहे हैं। वीडियो में देखा जा सकता है कि अभिनव स्टेज पर चढ़ते हैं और इधर उधर टहलने लगते हैं फिर थोड़ी देर बाद वह राजा रामचंद्र भगवान की जय का नारा लगाते हैं जिसके बाद रामभद्राचार्य उन्हें स्टेज से नीचे उतारने को कहते हैं “इनको कहो नीचे जाएं मेरी मर्यादा है” इस वीडियो के वायरल होते ही अभिनव अरोड़ा को सोशल मीडिया पर भारी मात्रा में ट्रोलिंग का सामना करना पड़ रहा है।

जगतगुरु रामभद्राचार्य से मीडिया ने सुल्तानपुर में उनके कथा के बाद जब इस वायरल वीडियो के बारे में सवाल किया तब उन्होंने अभिनव के बारे में कहा कि वह एक मूर्ख बच्चा है।वह कहता है भगवान श्री कृष्ण उसके साथ पढ़ते हैं भला श्री कृष्ण उसके साथ पढ़ेंगे? उन्होंने आगे बोला कि अभिनव को उन्होंने वृंदावन में भी डांटा था।

अभिनव ने लिया हाई कोर्ट का सहारा, आखिर क्यों?

अभिनव की माताश्री ज्योति अरोड़ा ने सुप्रीम कोर्ट के वकील डॉ. किसलय पांडेय को अपने बेटे का केस लड़ने के लिए हायर किया है। किसलय ने बताया कि पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया के द्वारा अभिनव को जान से मारने की धमकी मिल रही है साथ ही कुछ यूट्यूबर्स उनके ऊपर वीडियो बना रहे हैं और अभिनव के खिलाफ बोल रहे हैं जिससे उनकी छवि खराब हो रही है।

अभिनव ने अपनी सफाई में कहा कि सच्चाई छुपाई गई अफवाह उड़ाई गई बात कुछ और थी बताई कुछ और गई । उन्होंने बताया कि वह वीडियो एक डेढ़ साल पुराना वृंदावन का है उन्होंने कहा क्या आपके माता पिता या गुरु ने कभी आपको नहीं डांटा। अगर जगतगुरु रामभद्राचार्य ने उन्हें डांटा तो इसे देश का सबसे बड़ा मुद्दा क्यों बनाया जा रहा है? उन्हें बोला कि बाद में जगतगुरु रामभद्राचार्य उनसे मिले भी थे।

सोशल मीडिया पर लोग तीन पक्षों में बंट गए हैं एक पक्ष अभिनव को ढोंगी बुला रहे हैं और स्कूल जाने की नसीहत दे रहे हैं। दूसरा पक्ष कह रहा कि बच्चे को कुछ नहीं बोलना चाहिए वो छोटा है इसमें उसके माता पिता की गलती है जो बच्चे को मार्केटिंग के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं और तीसरा पक्ष कह रहा कि बच्चे को भगवान की भक्ति करने देना उचित कार्य है और इसके लिए उसे ट्रोल करना अनावश्यक है ।

अभिनव ने स्कूल न जाने वाली बात पर बोला कि वह विद्यालय जाते हैं लेकिन इधर जान से मारने की धमकी मिलने की वजह से वह और उनकी बहन दोनों विद्यालय नहीं जा पा रहे हैं।

अभिनव के माता पिता पर भड़के लोग-

अभिनव के पिता तरुण अरोड़ा एक व्यवसायी हैं जिन्होंने चार पांच साल पहले फालूदा एक्सप्रेस नाम की एक आईसक्रीम फैक्ट्री खोली थी। वह जनता जंक्शन नाम के यूट्यूब चैनल से अपने आईसक्रीम का प्रचार करते थे और पब्लिक रिव्यूज डालते थे लेकिन सोशल मीडिया पर उन वीडियो में देखा जा सकता है कि तरुण अपने खुद के बच्चों और परिवारवालों को अंजान व्यक्ति दिखा कर रिव्यू लेते थे। सोशल मीडिया पर लोग अभिनव के माता पिता को अपने बच्चे को मार्केटिंग के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगा रहे हैं। लोगों ने ये भी आरोप लगाया है कि अभिनव की हर बात स्क्रिप्टेड रहती है ।

ऐसा नहीं है कि अभिनव पहले ट्रोल नहीं हुए हैं पर इस बार की ट्रोलिंग सिर्फ ट्रोलिंग तक ही नहीं सीमित है इस बार लोग उन्हें जान से मारने की भी धमकी दे रहे हैं।

ऑनलाइन ट्रोलिंग कल्चर-

अभिनव पहले सोशल मीडिया पर ट्रोल होने वाले बच्चे नहीं हैं। कई बच्चे, जो सोशल मीडिया पर कंटेंट बनाते हैं उन्हें ट्रोलिंग का सामना करना पड़ रहा है। पिछले साल सोलह साल के प्रियांशु यादव ने ऑनलाइन ट्रोलिंग के नकरात्मक असर की वजह से अपनी जान दे दी थी। वह एक मेकअप आर्टिस्ट थे और इंस्टाग्राम पर उनके हजारों में फॉलोवर्स थे। इसके पहले सेलेब्स के बच्चे भी ऑनलाइन ट्रोलिंग का शिकार हुए हैं, चाहे वो करीना कपूर के बेटे तैमूर हों या दीपिका कक्कड़ के बेटे रूहान। बच्चों के मस्तिष्क पर ऑनलाइन ट्रोलिंग का गंभीर नकारात्मक असर पड़ सकता है और आजकल के दौर में ऐसा देखने को भी मिल रहा है।

डिजिटल फ़्रॉड को लेकर चिंतित पीएम मोदी, safe digital india पर दिया ज़ोर

पीएम मोदी
पीएम मोदी

मेधा सिंह | navpravah.com

नई दिल्ली | मन की बात के 115 वें एपिसोड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड के बारे में बात की।उन्होंने बताया कि आजकल हर वर्ग के लोग इस फ्रॉड का शिकार बन रहे हैं। लोग अपने बचाए हुए लाखों रूपए गंवा दे रहे हैं। डिजिटल अरेस्ट एक फ्रॉड है और इसे करने वाले लोग समाज के दुश्मन हैं। यह डिजिटल अरेस्ट को चलाने वाले गिरोह आरबीआई या नारकोटिक्स या किसी सरकारी जांच एजेंसी का नाम ले कर लोगों में डर बना कर उनसे पैसे ऐंठ लेते हैं।

पीएम मोदी ने आगे बोला कि इस गिरोह में शामिल लोग जिसे कॉल करते हैं उसकी पूरी व्यक्तिगत जानकारी रखते हैं, वह लोगों में डर का माहौल बना देते हैं कानूनी धाराओं का प्रयोग करना, हड़काना इन सब कारणों से व्यक्ति डर जाता है और फिर वह समय का दबाव बनाते हैं जिससे सामने वाले व्यक्ति पर मनोवैज्ञानिक दबाव बन जाता है। उन्होंने कहा इससे बचने के लिए “रुको सोचो और एक्शन” लेने की आवश्यकता है। हड़बड़ी में काम करने से सब बिगड़ जाएगा ।

उन्होंने कहा कि “रुको” यानी शांत रहें और अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें। मुनासिब हो तो रिकॉर्डिंग और स्क्रीनशॉट ले लेना चाहिए।

दूसरा “सोचो” यानी कोई भी जांच एजेंसी कॉल या वीडियो कॉल पर धमकी नहीं देती है और न ही पैसे की मांग करती है। डिजिटल अरेस्ट स्कैम का प्रावधान हमारे संविधान में कहीं नहीं है। तीसरा “शांत रहो” यानी हेल्पलाइन नंबर 1930 या http://cybercrime.gov.in पर मामला रिपोर्ट करें ।

डिजिटल अरेस्ट स्कैम के जरिए ठग लोगों की बैंक डिटेल्स निकाल लेते हैं उन्हें कानून का रौब दिखा कर उनसे ओटीपी ले लेते हैं और लोगों के पैसे ठग लेते हैं। 2023 में भारत में फिशिंग अटैक के 7.93 करोड़ से अधिक मामले सामने आए हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस फ्रॉड के जाल में फंसे लोगों से गुजारिश की कि वह “safedigitalindia” हैशटैग का प्रयोग करके लोगों में जागरूकता फैला सकते हैं। उन्होंने स्कूल और कॉलेज से अनुरोध किया कि साइबर स्कैम के खिलाफ मुहिम में छात्रों को भी जोड़ा जाए।

डिजिटल अरेस्ट जैसे फ्रॉड से बचने के लिए सभी को सचेत रहने की आवश्यकता है। ऐसे स्कैम से लोगों को लाखों का नुकसान हो सकता है।

शहरों को यूँ ही बदनाम किया है…

नलिनी मिश्रा | navpravah.com 

कविता –

शहरों को यूँ ही बदनाम किया है,

ना जाने कितनी संस्कृतियों को

अपने आँचल में बसा रखा है।

यहाँ जात-पात का बंधन कम हुआ है,

इंसानियत के रंग में रंगा हर चेहरा है।

गाँव की मिट्टी भी अब शहर की सड़कों पर चलती है,

खेतों की खुशबू यहाँ की हवाओं में भी पलती है।

नौकरी की तलाश में गाँव से जो आते हैं

शहर उन्हें अपने दिल में जगह देता है।

संघर्ष के रास्ते यहाँ आसान नहीं,

पर सपनों को उड़ान यही शहर देता है।

महिलाएँ भी अब आगे बढ़ रही हैं,

शहर की रफ्तार से कदम मिलाकर चल रही हैं।

नया भारत, जो गाँव से उठकर आया है,

शहर ने उसे अपने रंग में रंग लिया है।

शहर सिर्फ इमारतों का नाम नहीं,

यहाँ गाँव की आत्मा ने भी घर बना रखा है।

शहर ने भारत को अपनाया है,

और उसे नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया है।

राष्ट्रीय राजधानी की हिली सुरक्षा व्यवस्था, ख़ालिस्तानी एंगल ने बढ़ाई ‘टेंशन’

नृपेंद्र कुमार मौर्य | navpravah.com 

नई दिल्ली | दिल्ली के रोहिणी इलाके में हुए बम विस्फोट ने एक बार फिर राष्ट्रीय राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को हिला कर रख दिया है। इस विस्फोट में खालिस्तानी एंगल की आशंका जताई जा रही है, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। सूत्रों के अनुसार, यह विस्फोट एक अदालत कक्ष में हुआ, जहाँ एक सुनवाई चल रही थी। यह हमला न केवल देश की सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बन गया है, बल्कि यह भी सवाल उठाता है कि क्या खालिस्तानी गुट फिर से अपनी गतिविधियों को तेज कर रहे हैं।

घटना का विवरण:

रोहिणी अदालत परिसर में यह विस्फोट उस समय हुआ जब अदालत की सुनवाई जारी थी। विस्फोट की वजह से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। अदालत परिसर में भगदड़ जैसे हालात पैदा हो गए, और तुरंत ही पुलिस तथा बम निरोधक दस्ते को मौके पर बुलाया गया। घटनास्थल पर पहुंची पुलिस ने पूरे इलाके को घेर लिया और वहां मौजूद लोगों को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि विस्फोट में टेलीग्राम चैनल का इस्तेमाल किया गया है, जो खालिस्तान समर्थक समूहों से जुड़ा हुआ हो सकता है।

खालिस्तानी एंगल:

जांच एजेंसियों का मानना है कि इस विस्फोट के पीछे खालिस्तानी तत्वों का हाथ हो सकता है। टेलीग्राम चैनल, जिसे खालिस्तानी गुट संचालित करते हैं, पर इस विस्फोट की योजना से जुड़ी सूचनाएँ साझा की गई थीं। पुलिस अब इस चैनल की जांच कर रही है और इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या वाकई खालिस्तानी संगठनों ने इस हमले को अंजाम दिया है या यह केवल एक ध्यान भटकाने वाली चाल है। सुरक्षा एजेंसियाँ इस चैनल के सदस्यों और इससे जुड़े व्यक्तियों की भी गहन जांच कर रही हैं।

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निगरानी की कमी:

यह घटना डिजिटल प्लेटफॉर्मों पर निगरानी की कमी की ओर भी इशारा करती है। आतंकी और चरमपंथी गुट अब टेलीग्राम और अन्य सोशल मीडिया चैनलों का इस्तेमाल अपने नेटवर्क को फैलाने और आतंकी गतिविधियों की योजना बनाने के लिए कर रहे हैं। इससे पहले भी कई आतंकी हमलों में टेलीग्राम जैसे सुरक्षित मैसेजिंग एप्लिकेशन्स का इस्तेमाल किया गया है। सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह एक बड़ी चुनौती है कि वे इन डिजिटल माध्यमों पर नज़र रखें और इस तरह की गतिविधियों को समय रहते पकड़ सकें।

शहर की सुरक्षा पर सवाल:

इस विस्फोट के बाद दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा के कड़े इंतजाम होने के बावजूद इस तरह की घटना का हो जाना सुरक्षा एजेंसियों की तैयारियों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। दिल्ली पुलिस ने पूरे शहर में सुरक्षा बढ़ा दी है और सभी प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। इसके अलावा, अदालत परिसरों की सुरक्षा भी सख्त कर दी गई है ताकि भविष्य में इस तरह की कोई घटना न हो।

जांच जारी:

दिल्ली पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियाँ इस मामले की गहनता से जांच कर रही हैं। विस्फोट के पीछे का सटीक कारण और दोषियों की पहचान अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाई है। हालांकि, खालिस्तानी एंगल की जांच प्राथमिकता के आधार पर की जा रही है। पुलिस ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि के बारे में तुरंत पुलिस को सूचित करें और शांति बनाए रखें।

सुरक्षा के लिए कड़ा संदेश:

इस घटना ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि भारत की सुरक्षा व्यवस्था को किसी भी सूरत में हल्के में नहीं लिया जा सकता। चरमपंथी गुट लगातार देश की शांति और सुरक्षा को भंग करने की कोशिश कर रहे हैं, और ऐसे में हमें सतर्क रहना होगा। सरकार और सुरक्षा एजेंसियों को चाहिए कि वे इन गुटों के खिलाफ सख्त कदम उठाएं और डिजिटल प्लेटफॉर्मों पर भी कड़ी निगरानी रखें ताकि इस तरह की घटनाओं को समय रहते रोका जा सके।

इस घटना के बाद अब दिल्ली समेत पूरे देश में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है, और सुरक्षा एजेंसियाँ हर संभावित पहलू की जांच कर रही हैं।

कलाम को सलाम 2024: मुंबई में कलाम साहब को किया गया याद

मुंबई, 15 अक्टूबर 2024: राजनीति की पाठशाला द्वारा आयोजित “कलाम को सलाम” कार्यक्रम आज मुंबई के मेयर्स हॉल में सम्पन्न हुआ। इस भव्य आयोजन का उद्देश्य देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के योगदान और उनकी विशिष्ट कृतियों को याद करना था। इस विशेष कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से आए युवाओं और प्रतिष्ठित अतिथियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई, जो भारतीय संस्कृति में शुभ माना जाता है। इस अवसर पर मुख्य अतिथि आनंद दुबे (शिवसेना उद्धव ठाकरे), सुखबीर शर्मा, तनवीर गाजी, अशोक जाधव, सुजाता मजूमदार और पंकज आठवले जैसे सम्माननीय व्यक्तित्वों ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम को गौरवान्वित किया। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में सभी प्रमुख अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया और कलाम साहब पर अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएं

अतिथियों ने कलाम साहब के जीवन की प्रेरणादायक घटनाओं और उनके विचारों पर आधारित प्रेरणादायक भाषण दिए। पंकज आठवले ने अपने संबोधन में बताया कि कैसे कठिन परिश्रम, आत्मविश्वास और सही मार्गदर्शन से सफलता प्राप्त की जा सकती है। सुखबीर शर्मा ने रतन टाटा का उल्लेख करते हुए दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की, जबकि आनंद दुबे ने अपने अनुभवों के माध्यम से कलाम साहब को याद किया।

राजनीति की पाठशाला की पहल

राजनीति की पाठशाला, एक गैर-राजनीतिक संस्था, इस प्रकार के आयोजनों के माध्यम से लोगों को संविधान और विशेष रूप से संविधान के अनुच्छेद 51 (मूल कर्तव्यों) के प्रति जागरूक करने का कार्य करती है। यह संस्था लोगों को उनके कर्तव्यों के प्रति सजग करते हुए समाज में एक जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित करती है। राजनीति की पाठशाला परिचर्चाओं, कॉन्क्लेव और जागरूकता अभियानों के माध्यम से लोगों को शिक्षित और सशक्त बनाने में सक्रिय भूमिका निभा रही है।

राजनीति की पाठशाला के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष हरीश भारद्वाज की कुशल नेतृत्व क्षमता और संगठन में उनके बेहतरीन कार्यों को देखते हुए संस्था ने उन्हें संगठन महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी है। इस महत्वपूर्ण घोषणा के दौरान संस्था के फाउंडर अजय पांडेय ने कहा कि भारद्वाज के नेतृत्व में संस्था ने अब तक उल्लेखनीय प्रगति की है और उनके अनुभव व नेतृत्व कौशल से संगठन और भी ऊंचाइयों पर पहुंचेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारद्वाज की नई भूमिका से संगठन की कार्यक्षमता और विस्तार में बड़ा योगदान होगा। भारद्वाज को यह जिम्मेदारी उनके समर्पण और लगातार अच्छे प्रदर्शन के कारण दी गई है, जिससे अन्य सदस्यों में भी नई ऊर्जा का संचार होगा।

संस्थापक डॉ. अजय पांडेय का आभार

कार्यक्रम के अंत में राजनीति की पाठशाला के संस्थापक डॉ. अजय पांडेय ने सभी अतिथियों, युवाओं और आयोजन समिति के सदस्यों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “यह कार्यक्रम हमारे पूर्व राष्ट्रपति और ‘मिसाइल मैन’ डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के प्रति हमारी श्रद्धांजलि है। हम गर्व महसूस करते हैं कि इस आयोजन के माध्यम से हम कलाम साहब की अनसुनी कहानियों से प्रेरणा प्राप्त कर सके।”

 

महाराष्ट्र: कामगारों पर हो रहे अत्याचार को लेकर सरकार पर जमकर बरसे पण्डित सुखबीर शर्मा

विशेष संवाददाता | navpravah.com

मुंबई स्थित कांग्रेस कार्यालय में आज अखिल भारतीय कर्मचारी कामगार कांग्रेस के नवनियुक्त राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (नेशनल वाईस चेयरमैन) पण्डित सुखबीर शर्मा जी ने कामगारों के साथ सीधा संवाद किया, जिसमें उन्होंने कामगारों को हो रही समस्याओं को सुना और उनके समाधान को लेकर उन्हें आश्वस्त किया। इस कार्यक्रम में श्री शर्मा का मुंबई पहुँचने पर अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम में मुंबई की अध्यक्षा नीता महाडिक, वरिष्ठ कांग्रेसी नेत्री डॉ. अजंता यादव एवं संगठन की महासचिव अनुराधा काशेलकर भी उपस्थित रही।

इस आयोजन में पण्डित शर्मा ने बताया कि कर्मचारी कामगार कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. उदित राज के नेतृत्व में हम महाराष्ट्र चुनाव की तैयारियों में जुट गए हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि आगामी चुनाव में कांग्रेस पार्टी प्रदेश में सरकार बनाएगी और राज्य के कामगारों के साथ हो रहे अत्याचार को हमेशा के लिए समाप्त करेगी।

इस बैठक में मुंबई के विभिन्न क्षेत्रों के कामगार उपस्थित थे, जिन्होंने खुलकर अपनी समस्याएँ रखीं। महाराष्ट्र सरकार द्वारा किए जा रहे अमानवीय व्यवहार की वजह से कामगारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। महानगर पालिका के कर्मचारियों और पुलिस के द्वारा कामगारों को प्रताड़ित किया जा रहा है। इन कामगारों की बात कांग्रेस की कार्यसमिति ने सुनी और उनकी समस्याओं के यथाशीघ्र समाधान के लिए उन्हें आश्वस्त किया।

पण्डित शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि कांग्रेस पार्टी कामगारों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और उनकी समस्याओं का समाधान करने के लिए हर संभव प्रयास करेगी। उन्होंने कहा कि डॉ. उदित राज जी के नेतृत्व में, हम एक मजबूत और संगठित अभियान चलाएंगे ताकि महाराष्ट्र के कामगारों को न्याय मिल सके।

कार्यक्रम के दौरान, कामगारों ने अपनी समस्याओं को खुलकर रखा और कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने उनकी बातों को गंभीरता से सुना। उन्होंने आश्वासन दिया कि कामगारों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।

इस स्वागत समारोह ने कांग्रेस पार्टी के प्रति कामगारों के विश्वास को और मजबूत किया है और उन्हें उम्मीद है कि आगामी चुनाव में कांग्रेस पार्टी उनकी समस्याओं का समाधान करेगी और राज्य में एक न्यायपूर्ण और समृद्ध समाज की स्थापना करेगी

कलाम साहब को याद करने के लिए सजेगा मंच, राजनीति की पाठशाला की अनोखी पहल

विशेष संवाददाता| navpravah.com

मुंबई| मुंबई के मेयर हॉल में आगामी १५ अक्तूबर २०२४ को राजनीति की पाठशाला द्वारा ‘कलाम को सलाम’ नामक एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में देशभर से विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित लोग उपस्थित होंगे, जो डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की उपलब्धियों और उनके योगदान पर चर्चा करेंगे।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से मशहूर पटकथा लेखक सलीम ख़ान को नवाज़ा जाना है। सलीम ख़ान ने भारतीय सिनेमा में अपने योगदान से एक महत्वपूर्ण स्थान बनाया है और उनकी लेखनी ने कई पीढ़ियों को प्रेरित किया है। इसके अलावा, कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में बेहतरीन कार्य करने वाले दस युवाओं को डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम मेमोरियल अवार्ड प्रदान किया जाएगा। इन युवाओं ने अपने-अपने क्षेत्रों में उत्कृष्टता प्राप्त की है और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इन पुरस्कारों के माध्यम से, राजनीति की पाठशाला युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने का प्रयास कर रही है।

 

कार्यक्रम के दौरान, डॉ. कलाम की जीवन यात्रा और उनके योगदान पर विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। वक्ता उनके वैज्ञानिक उपलब्धियों, शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान, और उनके प्रेरणादायक व्यक्तित्व पर चर्चा करेंगे। डॉ. कलाम की विचारधारा और उनके संदेश को युवाओं तक पहुंचाने का यह एक महत्वपूर्ण प्रयास होगा।

 

‘कलाम को सलाम’ कार्यक्रम का उद्देश्य डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की विरासत को सम्मानित करना और उनके विचारों को आगे बढ़ाना है। इस कार्यक्रम के माध्यम से, राजनीति की पाठशाला युवाओं को प्रेरित करने और उन्हें समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए प्रोत्साहित करने का प्रयास कर रही है।

 

इस कार्यक्रम में प्रतिष्ठित उद्योगपति, शिक्षाविद, वैज्ञानिक, प्रशासनिक अधिकारी, राजनेता और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल होंगे। वे अपने अनुभवों और विचारों को साझा करेंगे और युवाओं को अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रेरित करेंगे।

‘कलाम को सलाम’ कार्यक्रम एक महत्वपूर्ण अवसर होगा जहां देशभर के युवा और प्रतिष्ठित व्यक्ति एक साथ मिलकर डॉ. कलाम की विरासत को सम्मानित करेंगे और उनके विचारों को आगे बढ़ाने का संकल्प लेंगे।

भारतीय रेलवे : विकास के नाम पर जनता के लिए आफत

नृपेन्द्र कुमार मौर्य | navpravah.com

नई दिल्ली | त्योहारों का समय आते ही भारतीय रेलवे एक नई समस्या लेकर हाजिर हो जाती है। इस बार उत्तर प्रदेश और बिहार की जनता के लिए सरकार और रेलवे ने मिलकर जो विशेष उपहार दिया है, वह है ट्रेनें निरस्त करने का। दीपावली और छठ जैसे महत्वपूर्ण त्योहारों के दौरान, जब ज्यादातर लोग अपने घरों को लौटने के लिए ट्रेन की टिकट बुक कर चुके हैं, रेलवे ने अपनी योजनाओं को जनता के हित से परे रखकर विकास कार्यों का शंखनाद कर दिया है।

गोरखपुर-गोंडा रेलखंड पर डोमिनगढ़-जगतबेला के बीच ऑटोमेटिक सिग्नलिंग और कुसम्ही-गोरखपुर कैंट-गोरखपुर के तीसरी लाइन के निर्माण के चलते डोमिनगढ़ स्टेशन पर नॉन इंटरलॉकिंग का काम जारी है। इसका नतीजा? 36 ट्रेनें रद्द, 64 ट्रेनों का मार्ग परिवर्तन, और हजारों यात्रियों की उम्मीदों पर पानी फिरना। दीपावली और छठ के मौके पर जब घर की ओर जाने की तड़प हर किसी के दिल में होती है, ऐसे में रेलवे का यह कदम न सिर्फ निराशाजनक है, बल्कि समझ से परे भी।

विकास के नाम पर जनता की उपेक्षा?

रेलवे के अधिकारी और सरकार बार-बार यह दावा करते हैं कि इन कार्यों का उद्देश्य देश की परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाना है। पर सवाल यह है कि त्योहारों के दौरान जब लाखों लोग सफर में होते हैं, तब ही इन योजनाओं को लागू करने की क्या जरूरत थी? क्या यह पहले से तय नहीं किया जा सकता था कि इस संवेदनशील समय में ऐसा कोई कार्य न किया जाए? विकास की आड़ में जब जनता को इतनी तकलीफ दी जाए, तो वह विकास किस काम का?

उत्तर प्रदेश और बिहार के लोग, जो पहले से ही अपने घर लौटने के लिए संघर्ष कर रहे थे, अब इस नई समस्या से जूझ रहे हैं। जिन लोगों ने महीने पहले टिकट बुक की होगी, वे अब या तो अपने टिकट कैंसिल करवाने की जद्दोजहद में लगेंगे, या फिर नए मार्ग पर जाने के लिए अपनी योजना को बदलने पर मजबूर होंगे।

उत्सव के समय असंवेदनशीलता-

यह कोई छोटी समस्या नहीं है। दीपावली और छठ के त्योहार भारतीय समाज में विशेष महत्व रखते हैं, खासकर बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए। ये त्योहार सिर्फ धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अपने परिवार के साथ समय बिताने, रीति-रिवाजों को निभाने और अपनों के साथ खुशी के पलों को साझा करने का अवसर होते हैं। ऐसे में जब लोग महीनों पहले अपने घर जाने की तैयारी करते हैं और टिकट बुक कराते हैं, रेलवे का इस तरह का कदम उनकी पूरी योजना को ध्वस्त कर देता है।

क्या रेलवे के अधिकारियों और सरकार को यह अंदाजा नहीं था कि इस समय इस तरह के कार्यों से जनता को कितनी परेशानी हो सकती है? या फिर यह मान लिया गया है कि जनता को असुविधा देना विकास का अनिवार्य हिस्सा है?

प्रशासन की अदूरदर्शिता-

यहां सवाल सिर्फ ट्रेनें निरस्त होने का नहीं है, बल्कि प्रशासनिक अदूरदर्शिता का है। किसी भी बड़े कार्य को करने से पहले उसके प्रभावों पर विचार करना जरूरी होता है। खासकर तब, जब वह कार्य आम जनता के जीवन को सीधे प्रभावित करता हो। क्या रेलवे और सरकार को यह बात समझ में नहीं आई कि दीपावली और छठ के दौरान इस तरह के काम से कितने लोगों की मुश्किलें बढ़ जाएंगी?

इतने महत्वपूर्ण समय में अगर प्रशासनिक व्यवस्था इस तरह ढीली हो जाती है, तो जनता के मन में सवाल उठना लाजमी है। आखिर क्या यह सब योजनाबद्ध तरीके से नहीं किया जा सकता था? क्या त्योहारों के बाद इन कामों को पूरा करने का कोई और समय नहीं मिल सकता था?

रेलवे का यह कदम किसी भी दृष्टिकोण से जनता के हित में नहीं कहा जा सकता। त्योहारों के समय यात्रा करना पहले से ही मुश्किल होता है, और ऐसे में रेलवे के इस फैसले ने लोगों की परेशानियों को और बढ़ा दिया है। जनता के लिए ट्रेन यात्रा सिर्फ एक सफर नहीं, बल्कि अपने परिवार के साथ जुड़ने का माध्यम होता है, और इस माध्यम में बाधा डालना एक तरह से उनकी भावनाओं के साथ खिलवाड़ है।

सरकार और रेलवे से जनता की यही अपेक्षा है कि वे अपनी योजनाओं को आम जनता की सुविधा के अनुसार बनाएं। विकास जरूरी है, पर जनता की परेशानियों को नजरअंदाज करके नहीं।

अच्छाई पर बुराई की विजयादशमी..!!

विजयादशमी
  • डॉ. इंद्रकुमार विश्वकर्मा 

विजयादशमी, बुराई पर अच्छाई की जीत, अनैतिकता पर नैतिकता की विजय; अधर्म, अन्याय व अहंकार पर धर्म, न्याय व विनम्रता की विजय, इसी रूप में देखा जाता है इस पर्व को । आज पूरे देश में हर्षोल्लास का वातावरण है। घर के द्वार पर तोरण आदि बांधे जा रहे हैं, लोग एक-दूसरे को दशहरे की शुभकामनायें दे रहे हैं। लोग अपने खून-पसीने की कमाई से लाये गए वाहनों का अभिषेक कर उन पर फूल-मालाएँ चढ़ाकर उनकी पूजा-अर्चना कर रहे हैं। घरों में तरह-तरह के पकवान बनाए जा रहे हैं, जिसका सभी लोग अवश्य आनंद उठायेंगे। आज सभी लोग पूरे मन से इस त्यौहार को मनाएंगे।

बुराई पर अच्छाई की जीत..? बड़ा आश्चर्य होता है, इस बारे में सोचकर व आज की परिस्थिति को देखकर! यह बात सतयुग के लिए ही शोभनीय है, आज कलियुग में ऐसी आशा करना भी मूर्खता है। मानव में आज मानवता छोड़कर अन्य हर भाव दृश्यमान हो रहे हैं। हर एक व्यक्ति खुद को शक्तिशाली दिखाने की होड़ में लगा हुआ है। गरीब व असहाय, उच्च वर्ग के हर तबके द्वारा सताए जा रहे हैं। धर्म-जाति के नाम पर गृह युद्ध विराम लेने का कोई संकेत नहीं दे रहा है। लोग अपने स्वार्थ हेतु किसी भी श्रेणी तक जाने को तैयार हैं।

मध्यम वर्ग, जो अपनी सभ्य संस्कृति व ईमानदारी की मिसाल बना हुआ था, आज उसके कदम भी लड़खड़ा रहे हैं। पूरा विश्व आतंकवाद की भीषण आग में जल रहा है व तृतीय विश्वयुद्ध की कगार पर खड़ा है। असहाय औरतों व बच्चों को जिन्दा अग्नि के हवाले कर दिया जा रहा है। उनका हर तरह से शोषण किया जा रहा है। इंसान का खून धर्म के नाम पर पानी की तरह बहाया जा रहा है। स्थिति बड़ी भयावह है! यही तो है, बुराई पर अच्छाई की जीत..!

ये तो बड़ी समस्याएं हैं। छोटी-छोटी समस्याएँ भी आज जीवन-मृत्यु का कारण बनती जा रही हैं। गुंडा-गर्दी, मारपीट, छेड़खानी, बिजली व पानी की चोरी आज महानगरों में आम बात हो गई है। प्रशासन सब देखते हुए भी आँखें बंद किये हुए है। इन सब के बीच गरीब व असहाय व्यक्ति सब जुर्म सहे जा रहा है। सारे नियमों व कानूनों को सत्य साबित करने के लिए उसकी बलि चढ़ाई जा रही है। वह गरीब है, कौन सुनेगा उसकी..? न तो किसी बड़े नेता से उसकी पहचान है, ना ही वह आर्थिक दृष्टि से इतना सुदृढ़ है कि अपनी लड़ाई स्वयं लड़ सके। वह स्वीकार कर लेता है कि शोषित होने के लिए ही उसका जन्म हुआ है। बेचारा गरीब किसान, सबके लिए अन्न पैदा करता है, पर अपने बच्चों का अच्छी तरह से लालन-पालन कर सके, इतनी भी हैसियत नहीं होती उसकी।

समाज में गरीबों व असहायों पर हो रहे अन्यायों को देखकर हमारा ह्रदय व्याकुल हो जाता है। ऐसा लगता है कि कुछ करना चाहिए। पर वास्तविक परिवेश में अच्छाई पर बुराई की जीत ही नज़र आती है! रावण ने सतयुग में राक्षस के रूप में भी नैतिकता का पालन किया, लेकिन आज कलियुग के राम भी रावण की तुलना में नैतिकता के क्षेत्र में काफ़ी नीचे दिखाई पड़ते हैं!

सभ्यता व संस्कृति का निरंतर पतन होता जा रहा है। मानव-मूल्य घटते जा रहे हैं। लोग दिन-प्रतिदिन अधिक आक्रामक होते जा रहे हैं। आपसी सद्भाव व सहिष्णुता अदृश्य होती जा रही है। मनुष्य पूरे लोक का स्वामी हो गया है, पर मानवता के क्षेत्र में बिल्कुल दरिद्र! हर तरफ बुराई का ही वर्चस्व दिखाई दे रहा है!

जितना हर वर्ष रावण का पुतला जलाया जा रहा है, उतना ही रावण लोगों के मन में घर करता जा रहा है। रावण का पुतला हर वर्ष और बड़ा और ऊँचा होता जा रहा है, उतना ही बढ़ता जा रहा है लोगों के मन में पाप और उतनी ही बढ़ती जा रही है निजी स्वार्थ की ऊंचाई!

क्या कहें इसे.. ? बुराई पर अच्छाई की जीत.. या अच्छाई पर बुराई की विजयादशमी..!!