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Monday, September 7, 2026
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भाजपा ने झारखंड के लिए जारी किया संकल्प पत्र, जानिए क्या हैं प्रमुख संकल्प?

नृपेन्द्र कुमार मौर्य| navpravah.com 

नई दिल्ली| झारखंड में विधानसभा चुनावों की घोषणा के साथ ही राज्य में सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने झारखंड के रांची में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का घोषणापत्र जारी करते हुए कई अहम वादे किए। चुनावी ‘संकल्प पत्र’ जारी करते हुए शाह ने राज्य में भाजपा की सरकार बनने पर समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने का वादा किया, लेकिन यह साफ किया कि आदिवासी समुदाय इस दायरे से बाहर रहेगा। उनके इस बयान ने चुनावी माहौल में हलचल मचा दी है, क्योंकि इससे पहले विपक्ष ने यूसीसी को लेकर आदिवासियों के हितों पर चिंता जताई थी।

शाह ने इस बात पर जोर दिया कि झारखंड में यूसीसी लागू होने से आदिवासी संस्कृति या उनके अधिकारों पर कोई असर नहीं पड़ेगा, बल्कि यह राज्य के लिए एक बेहतर कदम होगा। शाह ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) पर यूसीसी के बारे में गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा सरकार आदिवासी समुदायों की परंपराओं और संस्कृति का पूरा सम्मान करती है, और उन्हें यूसीसी के दायरे से बाहर रखेगी। उन्होंने झारखंड के लोगों को आश्वासन दिया कि यह कदम केवल एकता और समानता को बढ़ावा देने के लिए उठाया जा रहा है और किसी के अधिकारों पर कोई आंच नहीं आएगी।

शाह ने आगे कहा कि राज्य में भाजपा की सरकार बनने पर झारखंड के विकास के लिए कई ठोस कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने रोजगार के मुद्दे को प्रमुखता देते हुए पांच लाख नए रोजगार अवसर पैदा करने का वादा किया, जिसमें 2.87 लाख सरकारी नौकरियां भी शामिल होंगी। भाजपा का यह कदम युवाओं के बीच काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि रोजगार की कमी लंबे समय से झारखंड में एक प्रमुख मुद्दा रहा है।

इसके अलावा, शाह ने हाल के वर्षों में झारखंड में हुई प्रश्न पत्र लीक घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा सत्ता में आने पर इन मामलों की सीबीआई और एसआईटी के जरिए जांच कराएगी। उनका कहना था कि शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार और परीक्षा प्रणाली में अनियमितताओं को सख्ती से नियंत्रित किया जाएगा, और दोषियों को जेल भेजा जाएगा। इससे छात्रों में एक नई उम्मीद जगी है कि अगर भाजपा सत्ता में आती है, तो उनकी मेहनत और परीक्षा की निष्पक्षता को सुनिश्चित किया जाएगा।

घोषणापत्र में विस्थापन आयोग के गठन का भी वादा किया गया है। शाह ने बताया कि झारखंड में उद्योगों और खदानों के कारण कई लोग विस्थापित हुए हैं, और उनका पुनर्वास सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता होगी। उन्होंने कहा कि इस आयोग के जरिए उन लोगों को पुनः स्थापित करने के प्रयास किए जाएंगे, जो वर्षों से विस्थापन का दंश झेल रहे हैं।

भाजपा ने झारखंड के आदिवासी समुदाय की एक प्रमुख मांग, ‘सरना धर्म कोड’ के मुद्दे पर भी विचार करने का आश्वासन दिया। शाह ने कहा कि अगर भाजपा सत्ता में आई तो ‘सरना धर्म कोड’ के मुद्दे पर विचार-विमर्श कर उचित निर्णय लिया जाएगा। सरना धर्म कोड का मुद्दा आदिवासी समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण विषय है, जो उनकी धार्मिक पहचान और परंपराओं को संरक्षित रखने में मददगार साबित हो सकता है। भाजपा का यह वादा झारखंड के आदिवासियों के बीच एक सकारात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

झारखंड में जनसंख्या असंतुलन और अवैध प्रवासियों के मुद्दे को लेकर भी शाह ने कड़े शब्दों में अपनी बात रखी। उन्होंने झारखंड में अवैध प्रवासियों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई और कहा कि राज्य में ‘माटी, बेटी और रोटी’ पर खतरा बढ़ रहा है। शाह ने आरोप लगाया कि झामुमो सरकार अवैध प्रवासियों को संरक्षण दे रही है, जिसके कारण जनजातीय आबादी घट रही है और राज्य की जनसांख्यिकी में बदलाव हो रहा है। उन्होंने वादा किया कि भाजपा सत्ता में आई तो अवैध प्रवासियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे, जिससे झारखंड के स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

शाह ने कहा कि झारखंड में धार्मिक तुष्टीकरण की नीति चरम पर है, जिससे हिंदुओं पर हमले बढ़ गए हैं। उन्होंने इसे राज्य में भ्रष्टाचार और तुष्टीकरण की राजनीति का नतीजा बताया। शाह का कहना था कि झारखंड को भ्रष्टाचारमुक्त और सुरक्षित बनाना भाजपा की प्राथमिकता होगी। उनका यह बयान उन लोगों को ध्यान में रखते हुए था जो झारखंड में बढ़ते धार्मिक असंतुलन और सुरक्षा के मुद्दों को लेकर चिंतित हैं।

भाजपा के ‘संकल्प पत्र’ में झारखंड की जनता को एक साफ संदेश दिया गया है कि पार्टी राज्य में सुशासन, रोजगार और सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। शाह के वादों को झारखंड में भाजपा की सरकार बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने झारखंड की जरूरतों के मुताबिक वादे किए हैं। राज्य के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर, आदिवासी समुदाय के लिए उनकी संस्कृति और पहचान की सुरक्षा, और झारखंड के हर वर्ग के लिए एक समान और सुरक्षित माहौल का आश्वासन देकर भाजपा ने राज्य में एक नई उम्मीद जगाई है।

झारखंड की जनता अब इस संकल्प पत्र के वादों और भाजपा की नीतियों पर विचार कर रही है। राज्य में 13 और 20 नवंबर को दो चरणों में चुनाव होने हैं और 23 नवंबर को नतीजे आएंगे। इन चुनावों में भाजपा के वादे और शाह की यह घोषणा कि उनकी पार्टी राज्य में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए तैयार है, झारखंड की जनता को कितना आकर्षित करेगी,यह देखना बाकी है।

दीपावली की रात दीप जलाने पर विवाद, एक परिवार की खुशियाँ मातम में बदलीं

नृपेन्द्र कुमार मौर्य| navpravah.com

नई दिल्ली | उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के आरा कला कजरीगढ़ गांव में दीपावली के दिन, जब हर घर रोशनी से जगमगा रहा था, दुबे परिवार के घर पर एक भयानक हादसे ने खुशियों को मातम में बदल दिया। दिलीप कुमार दुबे का परिवार, हर साल की तरह इस बार भी दीप जलाकर अपने घर को सजाने की तैयारी कर रहा था। लेकिन इस दीप जलाने की परंपरा के बीच कुछ लोगों के विरोध ने एक भयानक मोड़ ले लिया।

गांव के रविशंकर, ध्रुवशंकर, दारा सिंह और राम अभिलाष सहित अन्य लोग अचानक वहां पहुंचे और दीप जलाने का विरोध करने लगे। बात गाली-गलौज तक पहुंच गई, और जब दिलीप के छोटे भाई पवन दुबे ने इसका विरोध किया, तो मामला बढ़ गया। हाथों में लाठी, डंडे, सरिया और गड़ासे लिए हुए लोग पवन पर टूट पड़े, उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया। खून से लथपथ पवन को बेहोशी की हालत में छोड़कर हमलावर उनकी दुकान में भी तोड़फोड़ करते हुए निकल गए।

परिवार के बाकी सदस्य-पिता राजेंद्र दुबे, चाचा जितेंद्र, और भाई इंद्र कुमार-जो बीचबचाव के लिए आगे आए, उन्हें भी पीट-पीटकर घायल कर दिया गया। सभी के सिर, हाथ और पैर में गहरी चोटें आईं। हमले के बाद पवन की हालत गंभीर थी और उन्हें तुरंत एसआरएन अस्पताल ले जाया गया, जहां उनके परिवार और गांव के लोग उनके ठीक होने की प्रार्थना करते रहे। लेकिन रविवार की सुबह की पहली किरण के साथ, उनके परिवार को एक दर्दनाक खबर मिली- पवन अब इस दुनिया में नहीं रहे।

यह खबर पूरे गांव में शोक और स्तब्धता का कारण बन गई। दीपावली के जिस पर्व पर अंधकार का अंत माना जाता है, उसी दिन दुबे परिवार के जीवन में एक ऐसा अंधेरा आया जो शायद कभी न मिट सके। पवन की मां और परिवार के लोग दीपावली पर घर के आंगन में रखे उन बुझते दीपों को देख रहे हैं, जो इस बार उनके बेटे के बिना रोशनी नहीं दे पाएंगे।

इस दर्दनाक घटना ने गांव को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि छोटी-छोटी बातों पर इतना बड़ा विवाद कैसे खड़ा हो सकता है। दीप जलाने जैसी बात पर इतना घातक हमला, जिसने एक युवक की जान ले ली और एक परिवार को हमेशा के लिए तोड़ दिया, किसी के लिए भी असहनीय है।

दिलीप कुमार दुबे की शिकायत पर पुलिस ने रवि शंकर यादव, ध्रुव शंकर, रतन सिंह, लवकुश, राम अभिलाष, धारा सिंह, कुलदीप, विकास यादव, चिंतामणि, विपिन यादव और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज किया था। चार आरोपियों – सुनील कुमार, ध्रुव शंकर, रवि शंकर और धारा सिंह-को गिरफ्तार किया गया है। पहले जो मुकदमा मारपीट का दर्ज था, उसे पवन की मृत्यु के बाद हत्या की धारा में परिवर्तित कर दिया गया है।

आज, आरा कला कजरीगढ़ का यह गांव, जो दीपावली के रौशन पर्व पर जगमगाने वाला था, उस अंधेरे में डूबा हुआ है जिसे एक परिवार ने झेला है। दुबे परिवार को अब केवल न्याय का इंतजार है, और गांव के लोग उस परिवार की तकलीफ के बीच यह उम्मीद कर रहे हैं कि ऐसी घटनाएं कभी किसी के साथ न हों।

दीपावली: प्रकाश के इस महापर्व का सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक महत्व

दीपावली

दीपावली, जिसे हम सभी प्यार से ‘दीवाली’ भी कहते हैं, भारतीय संस्कृति का सबसे महत्वपूर्ण और आकर्षक पर्व है। यह पर्व न केवल उजालों का त्योहार है, बल्कि यह भारतीय समाज के मनोविज्ञान, सांस्कृतिक धरोहर और आध्यात्मिक विचारों का प्रतीक भी है। दीपावली के आते ही वातावरण में एक अजीब-सा उल्लास भर जाता है, एक ऐसी खुशी जिसे शब्दों में बयां करना कठिन है। पूरे देश में एक समान भावना के साथ इसे मनाया जाता है, चाहे किसी का धर्म या जाति कुछ भी हो।

दीपावली का इतिहास पौराणिक कथाओं से भरा पड़ा है। मुख्य रूप से यह माना जाता है कि त्रेता युग में जब भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर लंका पर विजय प्राप्त की और 14 वर्षों के वनवास के बाद अयोध्या लौटे, तो अयोध्यावासियों ने घी के दीयों से उनका स्वागत किया। इसी तरह, भगवान विष्णु ने समुद्र मंथन के दौरान इस दिन देवी लक्ष्मी का उद्धार किया, और इस दिन को धन-समृद्धि का प्रतीक माना गया। इसी दिन, नरकासुर का वध करके भगवान कृष्ण ने प्रजा को बुराई से मुक्त किया था। इन सभी कथाओं में एक बात समान है – अंधकार पर प्रकाश की विजय, बुराई पर अच्छाई की विजय, और असत्य पर सत्य की जीत।

दीपावली के पर्व में पांच दिनों का विशेष महत्व है – धनतेरस, नरक चतुर्दशी, मुख्य दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज। हर दिन का अपना सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व है। धनतेरस पर धन की देवी लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की पूजा होती है। इस दिन सोने-चांदी या बर्तनों की खरीदारी का विशेष महत्व है। नरक चतुर्दशी, जिसे छोटी दिवाली भी कहते हैं, बुराई के अंत और अच्छे की शुरुआत का प्रतीक है।

मुख्य दीपावली के दिन देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा होती है। यह दिन घर-घर में दीयों की रोशनी, फूलों की सजावट, रंगोली और मिठाइयों का दिन होता है। गोवर्धन पूजा में प्रकृति और गोवंश की पूजा होती है, जो कृषि समाज की समृद्धि और धरोहर को दर्शाता है। भाई दूज के दिन बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र और खुशहाल जीवन की कामना करती हैं।

दीपावली का त्योहार केवल पूजा-पाठ और धार्मिक मान्यताओं तक सीमित नहीं है; यह एक सामाजिक और सांस्कृतिक महापर्व भी है। यह वह समय होता है जब लोग अपने घरों और दुकानों की साफ-सफाई करते हैं, उन्हें सजाते हैं और अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार रंग-बिरंगे दीयों और लाइटों से रोशन करते हैं। परिवार के सदस्य दूर-दूर से अपने घर लौटते हैं, जिससे आपसी बंधन और प्रेम की मिठास बढ़ती है। घर-घर में पकवान, मिठाइयाँ, और व्यंजनों का आयोजन होता है जो परिवारों को और करीब लाते हैं।

दीपावली का महत्व आर्थिक दृष्टि से भी देखा जा सकता है। यह त्योहार व्यवसायों के लिए साल का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। व्यापारी वर्ग विशेष तैयारियाँ करते हैं, विभिन्न प्रकार के उत्पाद बेचते हैं, और बाजारों में रौनक देखते ही बनती है। शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में खरीददारी के प्रति उत्साह रहता है। इस प्रकार, दीपावली न केवल व्यक्तिगत स्तर पर बल्कि समाज और अर्थव्यवस्था के स्तर पर भी महत्वपूर्ण है।

दीपावली का एक अन्य महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि यह पर्यावरण और स्वास्थ्य के प्रति हमारी जिम्मेदारियों को भी याद दिलाता है। वर्तमान समय में पटाखों और ध्वनि प्रदूषण ने इस त्योहार के उल्लास को एक हद तक प्रभावित किया है। हमें इस पर्व के साथ-साथ हमारी धरती का भी ख्याल रखना चाहिए। आज के समय में ग्रीन दिवाली का महत्व बढ़ गया है। हर वर्ष, यह प्रयास किया जाता है कि इस पर्व को प्रदूषण मुक्त तरीके से मनाया जाए। दीयों और मिट्टी के बर्तनों का उपयोग, प्राकृतिक रंगों से बनी रंगोली, और रीसाइकल पेपर का प्रयोग पर्यावरण के अनुकूल दिवाली का हिस्सा बन सकते हैं।

दीपावली केवल बाहरी रोशनी का पर्व नहीं है; यह आत्मा की उज्जवलता का पर्व है। यह वह समय है जब हमें अपने भीतर की बुराइयों, जैसे कि लालच, अहंकार, और द्वेष, को जलाना होता है। इस पर्व का असली महत्व तभी सार्थक होता है जब हम भीतर से शुद्ध हों, प्रेम और करुणा का दीप जलाएँ, और हर व्यक्ति के जीवन में खुशियों का उजाला फैलाएँ।

संक्षेप में कहें तो, दीपावली का त्योहार भारतीय संस्कृति, समाज और आस्था के अद्भुत संयोजन का प्रतीक है। यह पर्व हमें जीवन में प्रकाश का महत्व समझाता है, बुराइयों का अंत कर सच्चाई और अच्छाई के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। दीपावली की यही अनोखी भावना हमें सिखाती है कि चाहे कितना भी अंधकार हो, एक छोटा-सा दीपक भी प्रकाश फैला सकता है, और यही प्रकाश हर दिल में प्रेम, शांति और समृद्धि का संदेश फैलाए।

इस वर्ष दीपावली मनाते समय हम सब यह संकल्प लें कि हम इसे पर्यावरण के अनुकूल, प्रेम और सौहार्द्र से परिपूर्ण बनाएँगे, ताकि यह पर्व सचमुच हर जीवन में उजाला और खुशियाँ बिखेरे। दीपावली का यह प्रकाश हमारे समाज में प्रेम और सौहार्द्र के नए दीप जलाए और हमारे देश को हर प्रकार के अंधकार से मुक्ति दिलाए।

आप सभी को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ!

JNU में फिर भगवान का अपमान! श्रीराम पर की अभद्र टिप्‍पणी; ABVP का वामपंथी स्टूडेंट्स पर गंभीर आरोप

नृपेन्द्र कुमार मौर्य| navpravah.com

नई दिल्ली| जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में हाल ही में आयोजित जनरल बॉडी मीटिंग में एक अप्रत्याशित घटना सामने आई। इस बैठक का उद्देश्य इंटरनल कमिटी (IC) के चुनावों और महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करना था, जिसमें विशेष रूप से महिलाओं के यौन उत्पीड़न के मामले भी शामिल थे। हालांकि, इस बैठक के दौरान एक बार फिर से वामपंथी समर्थकों की तरफ से विवादास्पद गतिविधियों को देखा गया।

बैठक में लेफ्ट-समर्थित JNUSU के कुछ नेताओं ने महिलाओं के मुद्दों पर चर्चा के बावजूद किसी भी महिला प्रतिनिधि को मंच देने से इनकार कर दिया। इस निर्णय पर छात्रों ने नाराजगी जताई और इसे महिला सशक्तिकरण के खिलाफ एक कदम बताया। साथ ही, जिन काउंसलर्स को छात्रों की आवाज़ उठाने के लिए चुना गया था, उन्हें भी अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया गया। इस संदर्भ में एक विशेष घटना ने सबका ध्यान आकर्षित किया, जब एक वामपंथी कार्यकर्ता ने भगवान श्रीराम के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी कर दी। इस टिप्पणी से छात्रों की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं और उन्होंने इसका जमकर विरोध किया। छात्रों ने इस असंवेदनशील बयान के लिए माफी की मांग की, लेकिन JNUSU के वामपंथी नेताओं ने इस विरोध को नजरअंदाज किया और बीच में ही मीटिंग छोड़ दी। इसके बाद कुछ विरोध करने वाले छात्रों को धमकाने का भी प्रयास किया गया।

ABVP की JNU इकाई के अध्यक्ष राजेश्वरकांत दुबे ने इस घटना की कड़ी निंदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि यह वामपंथियों की सोची-समझी साजिश है, जिसके माध्यम से भगवान श्रीराम का अपमान किया गया। उन्होंने कहा कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, बल्कि हर जनरल बॉडी मीटिंग का उपयोग हिंदू भावनाओं को आहत करने के लिए किया जाता है। उनका कहना था कि JNU प्रशासन को इस तरह के अभद्र व्यवहार पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए ताकि विश्वविद्यालय की छवि को बचाया जा सके और एक स्वस्थ शैक्षणिक वातावरण स्थापित किया जा सके।

ABVP JNU इकाई की मंत्री शिखा स्वराज ने भी इस घटना की आलोचना करते हुए कहा कि महिलाओं के मुद्दों पर चर्चा के बावजूद किसी भी महिला प्रतिनिधि को मंच न देना वामपंथी नेताओं की तानाशाही मानसिकता को दर्शाता है। शिखा ने इसे एक सोची-समझी रणनीति बताया और कहा कि कुछ ही दिन पहले जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में दीपावली के अवसर पर छात्रों पर हमले की घटना सामने आई थी, जिसमें आपत्तिजनक नारे भी लगाए गए थे। उनका मानना है कि यह घटनाएं एक ही विचारधारा का हिस्सा हैं, जो धार्मिक भावनाओं को आहत करने और सामाजिक सौहार्द्र को बिगाड़ने की मंशा से प्रेरित हैं। उन्होंने कहा कि ABVP हमेशा भगवान श्रीराम के सम्मान की रक्षा के लिए खड़ा रहेगा और किसी भी प्रकार के अपमान का सख्त जवाब देगा।

इस घटना ने JNU के छात्रों और समाज के अन्य वर्गों के बीच एक बहस को जन्म दिया है। कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के अंतर्गत मानते हैं, तो कुछ इसे धार्मिक असंवेदनशीलता के रूप में देखते हैं। यह घटना न केवल JNU के भीतर के विचारधारा संघर्ष को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि कैसे छात्रों के बीच मतभेद बढ़ रहे हैं।

कौन हैं अभिनव अरोड़ा जिनको पड़ी जगतगुरु रामभद्राचार्य से फटकार

मेधा सिंह | navpravah.com 

नई दिल्ली| अभिनव अरोड़ा 10 वर्षीय एक कथा वाचक हैं जिनके इंस्टाग्राम पर 9 लाख 50हज़ार फॉलोवर्स हैं।उनका कहना है कि उन्होंने खुद को भगवान की भक्ति में लीन कर लिया है और वह बड़े हो कर संत बनना चाहते हैं।

सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें जगतगुरु रामभद्राचार्य उन्हें स्टेज पर फटकार लगा रहे हैं। वीडियो में देखा जा सकता है कि अभिनव स्टेज पर चढ़ते हैं और इधर उधर टहलने लगते हैं फिर थोड़ी देर बाद वह राजा रामचंद्र भगवान की जय का नारा लगाते हैं जिसके बाद रामभद्राचार्य उन्हें स्टेज से नीचे उतारने को कहते हैं “इनको कहो नीचे जाएं मेरी मर्यादा है” इस वीडियो के वायरल होते ही अभिनव अरोड़ा को सोशल मीडिया पर भारी मात्रा में ट्रोलिंग का सामना करना पड़ रहा है।

जगतगुरु रामभद्राचार्य से मीडिया ने सुल्तानपुर में उनके कथा के बाद जब इस वायरल वीडियो के बारे में सवाल किया तब उन्होंने अभिनव के बारे में कहा कि वह एक मूर्ख बच्चा है।वह कहता है भगवान श्री कृष्ण उसके साथ पढ़ते हैं भला श्री कृष्ण उसके साथ पढ़ेंगे? उन्होंने आगे बोला कि अभिनव को उन्होंने वृंदावन में भी डांटा था।

अभिनव ने लिया हाई कोर्ट का सहारा, आखिर क्यों?

अभिनव की माताश्री ज्योति अरोड़ा ने सुप्रीम कोर्ट के वकील डॉ. किसलय पांडेय को अपने बेटे का केस लड़ने के लिए हायर किया है। किसलय ने बताया कि पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया के द्वारा अभिनव को जान से मारने की धमकी मिल रही है साथ ही कुछ यूट्यूबर्स उनके ऊपर वीडियो बना रहे हैं और अभिनव के खिलाफ बोल रहे हैं जिससे उनकी छवि खराब हो रही है।

अभिनव ने अपनी सफाई में कहा कि सच्चाई छुपाई गई अफवाह उड़ाई गई बात कुछ और थी बताई कुछ और गई । उन्होंने बताया कि वह वीडियो एक डेढ़ साल पुराना वृंदावन का है उन्होंने कहा क्या आपके माता पिता या गुरु ने कभी आपको नहीं डांटा। अगर जगतगुरु रामभद्राचार्य ने उन्हें डांटा तो इसे देश का सबसे बड़ा मुद्दा क्यों बनाया जा रहा है? उन्हें बोला कि बाद में जगतगुरु रामभद्राचार्य उनसे मिले भी थे।

सोशल मीडिया पर लोग तीन पक्षों में बंट गए हैं एक पक्ष अभिनव को ढोंगी बुला रहे हैं और स्कूल जाने की नसीहत दे रहे हैं। दूसरा पक्ष कह रहा कि बच्चे को कुछ नहीं बोलना चाहिए वो छोटा है इसमें उसके माता पिता की गलती है जो बच्चे को मार्केटिंग के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं और तीसरा पक्ष कह रहा कि बच्चे को भगवान की भक्ति करने देना उचित कार्य है और इसके लिए उसे ट्रोल करना अनावश्यक है ।

अभिनव ने स्कूल न जाने वाली बात पर बोला कि वह विद्यालय जाते हैं लेकिन इधर जान से मारने की धमकी मिलने की वजह से वह और उनकी बहन दोनों विद्यालय नहीं जा पा रहे हैं।

अभिनव के माता पिता पर भड़के लोग-

अभिनव के पिता तरुण अरोड़ा एक व्यवसायी हैं जिन्होंने चार पांच साल पहले फालूदा एक्सप्रेस नाम की एक आईसक्रीम फैक्ट्री खोली थी। वह जनता जंक्शन नाम के यूट्यूब चैनल से अपने आईसक्रीम का प्रचार करते थे और पब्लिक रिव्यूज डालते थे लेकिन सोशल मीडिया पर उन वीडियो में देखा जा सकता है कि तरुण अपने खुद के बच्चों और परिवारवालों को अंजान व्यक्ति दिखा कर रिव्यू लेते थे। सोशल मीडिया पर लोग अभिनव के माता पिता को अपने बच्चे को मार्केटिंग के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगा रहे हैं। लोगों ने ये भी आरोप लगाया है कि अभिनव की हर बात स्क्रिप्टेड रहती है ।

ऐसा नहीं है कि अभिनव पहले ट्रोल नहीं हुए हैं पर इस बार की ट्रोलिंग सिर्फ ट्रोलिंग तक ही नहीं सीमित है इस बार लोग उन्हें जान से मारने की भी धमकी दे रहे हैं।

ऑनलाइन ट्रोलिंग कल्चर-

अभिनव पहले सोशल मीडिया पर ट्रोल होने वाले बच्चे नहीं हैं। कई बच्चे, जो सोशल मीडिया पर कंटेंट बनाते हैं उन्हें ट्रोलिंग का सामना करना पड़ रहा है। पिछले साल सोलह साल के प्रियांशु यादव ने ऑनलाइन ट्रोलिंग के नकरात्मक असर की वजह से अपनी जान दे दी थी। वह एक मेकअप आर्टिस्ट थे और इंस्टाग्राम पर उनके हजारों में फॉलोवर्स थे। इसके पहले सेलेब्स के बच्चे भी ऑनलाइन ट्रोलिंग का शिकार हुए हैं, चाहे वो करीना कपूर के बेटे तैमूर हों या दीपिका कक्कड़ के बेटे रूहान। बच्चों के मस्तिष्क पर ऑनलाइन ट्रोलिंग का गंभीर नकारात्मक असर पड़ सकता है और आजकल के दौर में ऐसा देखने को भी मिल रहा है।

डिजिटल फ़्रॉड को लेकर चिंतित पीएम मोदी, safe digital india पर दिया ज़ोर

पीएम मोदी
पीएम मोदी

मेधा सिंह | navpravah.com

नई दिल्ली | मन की बात के 115 वें एपिसोड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड के बारे में बात की।उन्होंने बताया कि आजकल हर वर्ग के लोग इस फ्रॉड का शिकार बन रहे हैं। लोग अपने बचाए हुए लाखों रूपए गंवा दे रहे हैं। डिजिटल अरेस्ट एक फ्रॉड है और इसे करने वाले लोग समाज के दुश्मन हैं। यह डिजिटल अरेस्ट को चलाने वाले गिरोह आरबीआई या नारकोटिक्स या किसी सरकारी जांच एजेंसी का नाम ले कर लोगों में डर बना कर उनसे पैसे ऐंठ लेते हैं।

पीएम मोदी ने आगे बोला कि इस गिरोह में शामिल लोग जिसे कॉल करते हैं उसकी पूरी व्यक्तिगत जानकारी रखते हैं, वह लोगों में डर का माहौल बना देते हैं कानूनी धाराओं का प्रयोग करना, हड़काना इन सब कारणों से व्यक्ति डर जाता है और फिर वह समय का दबाव बनाते हैं जिससे सामने वाले व्यक्ति पर मनोवैज्ञानिक दबाव बन जाता है। उन्होंने कहा इससे बचने के लिए “रुको सोचो और एक्शन” लेने की आवश्यकता है। हड़बड़ी में काम करने से सब बिगड़ जाएगा ।

उन्होंने कहा कि “रुको” यानी शांत रहें और अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें। मुनासिब हो तो रिकॉर्डिंग और स्क्रीनशॉट ले लेना चाहिए।

दूसरा “सोचो” यानी कोई भी जांच एजेंसी कॉल या वीडियो कॉल पर धमकी नहीं देती है और न ही पैसे की मांग करती है। डिजिटल अरेस्ट स्कैम का प्रावधान हमारे संविधान में कहीं नहीं है। तीसरा “शांत रहो” यानी हेल्पलाइन नंबर 1930 या http://cybercrime.gov.in पर मामला रिपोर्ट करें ।

डिजिटल अरेस्ट स्कैम के जरिए ठग लोगों की बैंक डिटेल्स निकाल लेते हैं उन्हें कानून का रौब दिखा कर उनसे ओटीपी ले लेते हैं और लोगों के पैसे ठग लेते हैं। 2023 में भारत में फिशिंग अटैक के 7.93 करोड़ से अधिक मामले सामने आए हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस फ्रॉड के जाल में फंसे लोगों से गुजारिश की कि वह “safedigitalindia” हैशटैग का प्रयोग करके लोगों में जागरूकता फैला सकते हैं। उन्होंने स्कूल और कॉलेज से अनुरोध किया कि साइबर स्कैम के खिलाफ मुहिम में छात्रों को भी जोड़ा जाए।

डिजिटल अरेस्ट जैसे फ्रॉड से बचने के लिए सभी को सचेत रहने की आवश्यकता है। ऐसे स्कैम से लोगों को लाखों का नुकसान हो सकता है।

शहरों को यूँ ही बदनाम किया है…

नलिनी मिश्रा | navpravah.com 

कविता –

शहरों को यूँ ही बदनाम किया है,

ना जाने कितनी संस्कृतियों को

अपने आँचल में बसा रखा है।

यहाँ जात-पात का बंधन कम हुआ है,

इंसानियत के रंग में रंगा हर चेहरा है।

गाँव की मिट्टी भी अब शहर की सड़कों पर चलती है,

खेतों की खुशबू यहाँ की हवाओं में भी पलती है।

नौकरी की तलाश में गाँव से जो आते हैं

शहर उन्हें अपने दिल में जगह देता है।

संघर्ष के रास्ते यहाँ आसान नहीं,

पर सपनों को उड़ान यही शहर देता है।

महिलाएँ भी अब आगे बढ़ रही हैं,

शहर की रफ्तार से कदम मिलाकर चल रही हैं।

नया भारत, जो गाँव से उठकर आया है,

शहर ने उसे अपने रंग में रंग लिया है।

शहर सिर्फ इमारतों का नाम नहीं,

यहाँ गाँव की आत्मा ने भी घर बना रखा है।

शहर ने भारत को अपनाया है,

और उसे नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया है।

राष्ट्रीय राजधानी की हिली सुरक्षा व्यवस्था, ख़ालिस्तानी एंगल ने बढ़ाई ‘टेंशन’

नृपेंद्र कुमार मौर्य | navpravah.com 

नई दिल्ली | दिल्ली के रोहिणी इलाके में हुए बम विस्फोट ने एक बार फिर राष्ट्रीय राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को हिला कर रख दिया है। इस विस्फोट में खालिस्तानी एंगल की आशंका जताई जा रही है, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। सूत्रों के अनुसार, यह विस्फोट एक अदालत कक्ष में हुआ, जहाँ एक सुनवाई चल रही थी। यह हमला न केवल देश की सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बन गया है, बल्कि यह भी सवाल उठाता है कि क्या खालिस्तानी गुट फिर से अपनी गतिविधियों को तेज कर रहे हैं।

घटना का विवरण:

रोहिणी अदालत परिसर में यह विस्फोट उस समय हुआ जब अदालत की सुनवाई जारी थी। विस्फोट की वजह से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। अदालत परिसर में भगदड़ जैसे हालात पैदा हो गए, और तुरंत ही पुलिस तथा बम निरोधक दस्ते को मौके पर बुलाया गया। घटनास्थल पर पहुंची पुलिस ने पूरे इलाके को घेर लिया और वहां मौजूद लोगों को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि विस्फोट में टेलीग्राम चैनल का इस्तेमाल किया गया है, जो खालिस्तान समर्थक समूहों से जुड़ा हुआ हो सकता है।

खालिस्तानी एंगल:

जांच एजेंसियों का मानना है कि इस विस्फोट के पीछे खालिस्तानी तत्वों का हाथ हो सकता है। टेलीग्राम चैनल, जिसे खालिस्तानी गुट संचालित करते हैं, पर इस विस्फोट की योजना से जुड़ी सूचनाएँ साझा की गई थीं। पुलिस अब इस चैनल की जांच कर रही है और इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या वाकई खालिस्तानी संगठनों ने इस हमले को अंजाम दिया है या यह केवल एक ध्यान भटकाने वाली चाल है। सुरक्षा एजेंसियाँ इस चैनल के सदस्यों और इससे जुड़े व्यक्तियों की भी गहन जांच कर रही हैं।

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निगरानी की कमी:

यह घटना डिजिटल प्लेटफॉर्मों पर निगरानी की कमी की ओर भी इशारा करती है। आतंकी और चरमपंथी गुट अब टेलीग्राम और अन्य सोशल मीडिया चैनलों का इस्तेमाल अपने नेटवर्क को फैलाने और आतंकी गतिविधियों की योजना बनाने के लिए कर रहे हैं। इससे पहले भी कई आतंकी हमलों में टेलीग्राम जैसे सुरक्षित मैसेजिंग एप्लिकेशन्स का इस्तेमाल किया गया है। सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह एक बड़ी चुनौती है कि वे इन डिजिटल माध्यमों पर नज़र रखें और इस तरह की गतिविधियों को समय रहते पकड़ सकें।

शहर की सुरक्षा पर सवाल:

इस विस्फोट के बाद दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा के कड़े इंतजाम होने के बावजूद इस तरह की घटना का हो जाना सुरक्षा एजेंसियों की तैयारियों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। दिल्ली पुलिस ने पूरे शहर में सुरक्षा बढ़ा दी है और सभी प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। इसके अलावा, अदालत परिसरों की सुरक्षा भी सख्त कर दी गई है ताकि भविष्य में इस तरह की कोई घटना न हो।

जांच जारी:

दिल्ली पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियाँ इस मामले की गहनता से जांच कर रही हैं। विस्फोट के पीछे का सटीक कारण और दोषियों की पहचान अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाई है। हालांकि, खालिस्तानी एंगल की जांच प्राथमिकता के आधार पर की जा रही है। पुलिस ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि के बारे में तुरंत पुलिस को सूचित करें और शांति बनाए रखें।

सुरक्षा के लिए कड़ा संदेश:

इस घटना ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि भारत की सुरक्षा व्यवस्था को किसी भी सूरत में हल्के में नहीं लिया जा सकता। चरमपंथी गुट लगातार देश की शांति और सुरक्षा को भंग करने की कोशिश कर रहे हैं, और ऐसे में हमें सतर्क रहना होगा। सरकार और सुरक्षा एजेंसियों को चाहिए कि वे इन गुटों के खिलाफ सख्त कदम उठाएं और डिजिटल प्लेटफॉर्मों पर भी कड़ी निगरानी रखें ताकि इस तरह की घटनाओं को समय रहते रोका जा सके।

इस घटना के बाद अब दिल्ली समेत पूरे देश में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है, और सुरक्षा एजेंसियाँ हर संभावित पहलू की जांच कर रही हैं।

कलाम को सलाम 2024: मुंबई में कलाम साहब को किया गया याद

मुंबई, 15 अक्टूबर 2024: राजनीति की पाठशाला द्वारा आयोजित “कलाम को सलाम” कार्यक्रम आज मुंबई के मेयर्स हॉल में सम्पन्न हुआ। इस भव्य आयोजन का उद्देश्य देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के योगदान और उनकी विशिष्ट कृतियों को याद करना था। इस विशेष कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से आए युवाओं और प्रतिष्ठित अतिथियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई, जो भारतीय संस्कृति में शुभ माना जाता है। इस अवसर पर मुख्य अतिथि आनंद दुबे (शिवसेना उद्धव ठाकरे), सुखबीर शर्मा, तनवीर गाजी, अशोक जाधव, सुजाता मजूमदार और पंकज आठवले जैसे सम्माननीय व्यक्तित्वों ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम को गौरवान्वित किया। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में सभी प्रमुख अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया और कलाम साहब पर अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएं

अतिथियों ने कलाम साहब के जीवन की प्रेरणादायक घटनाओं और उनके विचारों पर आधारित प्रेरणादायक भाषण दिए। पंकज आठवले ने अपने संबोधन में बताया कि कैसे कठिन परिश्रम, आत्मविश्वास और सही मार्गदर्शन से सफलता प्राप्त की जा सकती है। सुखबीर शर्मा ने रतन टाटा का उल्लेख करते हुए दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की, जबकि आनंद दुबे ने अपने अनुभवों के माध्यम से कलाम साहब को याद किया।

राजनीति की पाठशाला की पहल

राजनीति की पाठशाला, एक गैर-राजनीतिक संस्था, इस प्रकार के आयोजनों के माध्यम से लोगों को संविधान और विशेष रूप से संविधान के अनुच्छेद 51 (मूल कर्तव्यों) के प्रति जागरूक करने का कार्य करती है। यह संस्था लोगों को उनके कर्तव्यों के प्रति सजग करते हुए समाज में एक जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित करती है। राजनीति की पाठशाला परिचर्चाओं, कॉन्क्लेव और जागरूकता अभियानों के माध्यम से लोगों को शिक्षित और सशक्त बनाने में सक्रिय भूमिका निभा रही है।

राजनीति की पाठशाला के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष हरीश भारद्वाज की कुशल नेतृत्व क्षमता और संगठन में उनके बेहतरीन कार्यों को देखते हुए संस्था ने उन्हें संगठन महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी है। इस महत्वपूर्ण घोषणा के दौरान संस्था के फाउंडर अजय पांडेय ने कहा कि भारद्वाज के नेतृत्व में संस्था ने अब तक उल्लेखनीय प्रगति की है और उनके अनुभव व नेतृत्व कौशल से संगठन और भी ऊंचाइयों पर पहुंचेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारद्वाज की नई भूमिका से संगठन की कार्यक्षमता और विस्तार में बड़ा योगदान होगा। भारद्वाज को यह जिम्मेदारी उनके समर्पण और लगातार अच्छे प्रदर्शन के कारण दी गई है, जिससे अन्य सदस्यों में भी नई ऊर्जा का संचार होगा।

संस्थापक डॉ. अजय पांडेय का आभार

कार्यक्रम के अंत में राजनीति की पाठशाला के संस्थापक डॉ. अजय पांडेय ने सभी अतिथियों, युवाओं और आयोजन समिति के सदस्यों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “यह कार्यक्रम हमारे पूर्व राष्ट्रपति और ‘मिसाइल मैन’ डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के प्रति हमारी श्रद्धांजलि है। हम गर्व महसूस करते हैं कि इस आयोजन के माध्यम से हम कलाम साहब की अनसुनी कहानियों से प्रेरणा प्राप्त कर सके।”

 

महाराष्ट्र: कामगारों पर हो रहे अत्याचार को लेकर सरकार पर जमकर बरसे पण्डित सुखबीर शर्मा

विशेष संवाददाता | navpravah.com

मुंबई स्थित कांग्रेस कार्यालय में आज अखिल भारतीय कर्मचारी कामगार कांग्रेस के नवनियुक्त राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (नेशनल वाईस चेयरमैन) पण्डित सुखबीर शर्मा जी ने कामगारों के साथ सीधा संवाद किया, जिसमें उन्होंने कामगारों को हो रही समस्याओं को सुना और उनके समाधान को लेकर उन्हें आश्वस्त किया। इस कार्यक्रम में श्री शर्मा का मुंबई पहुँचने पर अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम में मुंबई की अध्यक्षा नीता महाडिक, वरिष्ठ कांग्रेसी नेत्री डॉ. अजंता यादव एवं संगठन की महासचिव अनुराधा काशेलकर भी उपस्थित रही।

इस आयोजन में पण्डित शर्मा ने बताया कि कर्मचारी कामगार कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. उदित राज के नेतृत्व में हम महाराष्ट्र चुनाव की तैयारियों में जुट गए हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि आगामी चुनाव में कांग्रेस पार्टी प्रदेश में सरकार बनाएगी और राज्य के कामगारों के साथ हो रहे अत्याचार को हमेशा के लिए समाप्त करेगी।

इस बैठक में मुंबई के विभिन्न क्षेत्रों के कामगार उपस्थित थे, जिन्होंने खुलकर अपनी समस्याएँ रखीं। महाराष्ट्र सरकार द्वारा किए जा रहे अमानवीय व्यवहार की वजह से कामगारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। महानगर पालिका के कर्मचारियों और पुलिस के द्वारा कामगारों को प्रताड़ित किया जा रहा है। इन कामगारों की बात कांग्रेस की कार्यसमिति ने सुनी और उनकी समस्याओं के यथाशीघ्र समाधान के लिए उन्हें आश्वस्त किया।

पण्डित शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि कांग्रेस पार्टी कामगारों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और उनकी समस्याओं का समाधान करने के लिए हर संभव प्रयास करेगी। उन्होंने कहा कि डॉ. उदित राज जी के नेतृत्व में, हम एक मजबूत और संगठित अभियान चलाएंगे ताकि महाराष्ट्र के कामगारों को न्याय मिल सके।

कार्यक्रम के दौरान, कामगारों ने अपनी समस्याओं को खुलकर रखा और कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने उनकी बातों को गंभीरता से सुना। उन्होंने आश्वासन दिया कि कामगारों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।

इस स्वागत समारोह ने कांग्रेस पार्टी के प्रति कामगारों के विश्वास को और मजबूत किया है और उन्हें उम्मीद है कि आगामी चुनाव में कांग्रेस पार्टी उनकी समस्याओं का समाधान करेगी और राज्य में एक न्यायपूर्ण और समृद्ध समाज की स्थापना करेगी