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Tuesday, July 28, 2026
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आखिर क्या है X-RAY,MRI और CT SCAN के बीच अंतर?

नृपेंद्र कुमार मौर्य। navpravah.com

नई दिल्ली | आजकल, डॉक्टर्स मरीजों की बीमारियों और समस्याओं का सही तरीके से पता लगाने के लिए कई प्रकार की इमेजिंग तकनीकों का उपयोग करते हैं। इनमें सीटी स्कैन (CT Scan), एमआरआई (MRI), और एक्स-रे (X-Ray) प्रमुख हैं। ये तीनों तकनीकें शरीर के अंदर की तस्वीरें (इमेजेज) लेती हैं, लेकिन इनकी कार्यप्रणाली और उपयोग में फर्क है। इस लेख में हम इन तीनों तकनीकों को सरल तरीके से समझेंगे।

1. एक्स-रे (X-Ray)

एक्स-रे एक पुरानी और बहुत सामान्य तकनीक है, जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से हड्डियों और कुछ खास समस्याओं को देखने के लिए किया जाता है। एक्स-रे में विकिरण (radiation) का इस्तेमाल किया जाता है, जो शरीर के अंदर से होकर फिल्म या डिजिटल सेंसर तक पहुंचता है और हमें शरीर के अंदर की तस्वीरें दिखाता है।

कैसे काम करता है:
जब एक्स-रे की किरण शरीर के अंदर से गुजरती है, तो यह हड्डियों और सॉफ़्ट टिशूज़ (जैसे मांसपेशियां) से अलग तरीके से टकराती है। हड्डियां ज्यादा विकिरण अवशोषित करती हैं, जिससे वे सफेद दिखाई देती हैं, और मांसपेशियां और अन्य सॉफ़्ट टिशूज़ काले दिखाई देते हैं।

कहाँ उपयोग होता है:
– हड्डियों के फ्रैक्चर, चोट या ट्यूमर की पहचान में।
– फेफड़ों की बीमारियाँ जैसे निमोनिया या टीबी के लिए।
– दांतों की समस्याओं में।

सीमाएँ:
एक्स-रे सिर्फ हड्डियों और कुछ सॉफ़्ट टिशूज़ को दिखा सकता है, और यह काफी सीमित जानकारी देता है।

2. सीटी स्कैन (CT Scan)

सीटी स्कैन (Computed Tomography), एक्स-रे की उन्नत तकनीक है। इसमें एक साथ कई एक्स-रे तस्वीरें ली जाती हैं और कंप्यूटर से मिलाकर एक 3D इमेज बनाई जाती है। यह शरीर के अंदर की बहुत स्पष्ट और विस्तृत जानकारी देता है।

कैसे काम करता है:
सीटी स्कैन में एक एक्स-रे मशीन शरीर के चारों ओर घूमती है और विभिन्न कोणों से तस्वीरें लेती है। फिर कंप्यूटर इन तस्वीरों को जोड़कर एक सटीक और विस्तृत क्रॉस-सेक्शनल (कट) इमेज तैयार करता है।

कहाँ उपयोग होता है:
– शरीर के आंतरिक अंगों (जैसे मस्तिष्क, हृदय, लिवर) की जांच में।
– ट्यूमर, रक्तस्राव और आंतरिक चोटों का पता लगाने में।
– गंभीर दुर्घटनाओं के बाद तेजी से निदान में।

सीमाएँ:
सीटी स्कैन में विकिरण की मात्रा ज्यादा होती है, जिससे शरीर पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है, खासकर अगर बहुत बार किया जाए।

3. एमआरआई (MRI)

एमआरआई (Magnetic Resonance Imaging) एक ऐसी तकनीक है, जो बिना किसी विकिरण के शरीर के अंदर की तस्वीरें लेती है। इसमें मजबूत चुंबकीय क्षेत्र और रेडियो तरंगों का उपयोग होता है। यह मुख्य रूप से सॉफ़्ट टिशूज़ (जैसे मांसपेशियां, तंत्रिका तंत्र) की जांच के लिए बहुत उपयोगी है।

कैसे काम करता है:
एमआरआई में चुंबकीय क्षेत्र का इस्तेमाल करके शरीर के अणुओं को आकर्षित किया जाता है और फिर रेडियो तरंगों की मदद से उनकी प्रतिक्रिया को पकड़ा जाता है। इससे हमें शरीर के सॉफ़्ट टिशूज़ की बहुत स्पष्ट तस्वीरें मिलती हैं।

कहाँ उपयोग होता है:
– मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी, जोड़ों, और दिल की समस्याओं की जांच में।
– सॉफ़्ट टिशूज़, रक्त वाहिकाओं और तंत्रिकाओं की समस्याओं को पहचानने में।
– ट्यूमर, सूजन या आंतरिक चोटों की पहचान में।

सीमाएँ:
यह प्रक्रिया थोड़ी महंगी हो सकती है और इसमें समय ज्यादा लगता है (लगभग 30-60 मिनट)। इसके अलावा, मशीन के अंदर रहने के लिए थोड़ा असहज भी हो सकता है, क्योंकि यह एक संकरी जगह होती है।

एक्स-रे, सीटी स्कैन, और एमआरआई तीनों ही इमेजिंग तकनीकें महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इनका उपयोग अलग-अलग समस्याओं के लिए किया जाता है।
– एक्स-रे- हड्डियों और कुछ सॉफ़्ट टिशूज़ की समस्याओं के लिए उपयुक्त है।
– सीटी स्कैन – शरीर के आंतरिक अंगों और जटिल समस्याओं की जांच के लिए बेहतरीन है।
– एमआरआई – सॉफ़्ट टिशूज़, तंत्रिकाओं और दिल की समस्याओं की पहचान के लिए सबसे अच्छा है।

डॉक्टर इन तकनीकों का चयन मरीज की स्थिति और बीमारी के आधार पर करते हैं। इन तकनीकों की मदद से जल्दी और सही निदान संभव हो पाता है, जो इलाज में मदद करता है।

10 नवजातों की मौत से झांसी में मातम, राजनीति गरमाई: सुरजेवाला ने साधा योगी पर निशाना

नृपेंद्र कुमार मौर्य| navpravah.com

नई दिल्ली | “10 नवजात बच्चों की मौत हो गई। उस मां के आंसू और भावना को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता जिसने अपनी औलाद को खो दिया है। यह सिर्फ हादसा नहीं, बल्कि एक संस्थागत हत्या है।” यह बयान कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद रणदीप सुरजेवाला ने नागपुर में आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस में दिया। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तीखा हमला करते हुए कहा, “योगी आदित्यनाथ ने संन्यास लिया है, जो उनका व्यक्तिगत फैसला है। उन्होंने शादी नहीं की और उनके अपने बच्चे नहीं हैं, लेकिन काश वे समझ पाते कि बच्चे खोने का दर्द क्या होता है।”

झांसी में दर्दनाक हादसा

झांसी के रानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में शुक्रवार रात हुए हादसे में 10 नवजातों की मौत ने पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया, जिससे पूरे क्षेत्र में हाहाकार मच गया। इस घटना के बाद माता-पिता और अस्पताल का स्टाफ रोते-बिलखते इधर-उधर भागते रहे। हादसे में 17 बच्चों की स्थिति अभी भी गंभीर बताई जा रही है, और कई माता-पिता अपने बच्चों के लापता होने से भयभीत हैं।

कैसे हुआ हादसा?

मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) सचिन माहौर ने बताया कि एनआईसीयू में कुल 54 नवजात शिशु भर्ती थे। शुक्रवार रात करीब 10:30 से 10:45 बजे के बीच ऑक्सीजन कंसंट्रेटर में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई। आग तेजी से फैल गई, जिससे अंदर के यूनिट में अधिक नुकसान हुआ और कई बच्चों की झुलसने से मौत हो गई। इस भयंकर दुर्घटना के कारण अस्पताल परिसर में अफरातफरी मच गई।

मुख्यमंत्री और डिप्टी सीएम का बयान

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है और तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि एक उच्चस्तरीय जांच की जाएगी और डीजीएमई, फायर और इलेक्ट्रिक विभाग की संयुक्त रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

परिजनों का दर्द और प्रशासन की चुनौतियां

अस्पताल में इस त्रासदी के बाद से परिजनों में गहरा आक्रोश और मातम है। कई परिजन अभी भी अपने बच्चों की स्थिति को लेकर अंधेरे में हैं। जांच प्रक्रिया और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग तेजी से उठ रही है।

UP: छात्रों की माँग के आगे झुका UPPSC, ‘वन डे वन शिफ्ट’ पर लगी मुहर

नृपेन्द्र मौर्य | navpravah.com

प्रयागराज | उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) द्वारा आयोजित PSC और RO/ARO की परीक्षाएं अब स्थगित कर दी गई हैं। इसके अलावा, PCS परीक्षा अब केवल एक ही शिफ्ट में होगी। यह महत्वपूर्ण फैसला छात्रों के लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शन और उनकी मांगों के बाद लिया गया।

सूत्रों के अनुसार, यह निर्णय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हस्तक्षेप के बाद लिया गया। छात्रों की प्रमुख मांगों में PSC और RO/ARO और PCS परीक्षा की परीक्षा को एक शिफ्ट में आयोजित करने की मांग थी।

इस बदलाव के बाद, छात्रों को राहत मिली है, और इसे उनकी एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है। यह फैसला उन छात्रों के लिए महत्वपूर्ण है जो पहले ही परीक्षा की तिथियों और समय को लेकर परेशान थे।

प्रदर्शनकारी छात्रों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपने मुद्दों का समाधान करने की अपील की थी, और उनके दखल के बाद यह सकारात्मक कदम उठाया गया। यह फैसला छात्रों के संघर्ष की जीत मानी जा रही है, और अब आगामी परीक्षाओं के लिए छात्र शांतिपूर्वक तैयारी कर सकेंगे।

दिल्ली में कांग्रेस की असंगठित कामगार कांग्रेस की बैठक, 26 संगठनों ने लिया हिस्सा

नृपेन्द्र कुमार मौर्य| navpravah.com 

नई दिल्ली | कांग्रेस के दिल्ली स्थित मुख्यालय में मंगलवार को अखिल भारतीय असंगठित कामगार एवं कर्मचारी कांग्रेस की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में दिल्ली और आस-पास के राज्यों से आए 26 से अधिक संगठनों के पदाधिकारियों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य नवनियुक्त नेशनल वाईस चेयरमैन पंडित सुखबीर शर्मा का स्वागत और अभिनंदन करना था।

बैठक के दौरान, पंडित सुखबीर शर्मा ने विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और उनके समाधान का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि कर्मचारी कामगार कांग्रेस के यशस्वी अध्यक्ष डॉ. उदित राज जी के नेतृत्व में हम देश के प्रत्येक कामगारों के हित के लिए संघर्ष करेंगे।

श्री शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि कांग्रेस पार्टी कामगारों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और उनकी भलाई के लिए हर तरह का संघर्ष करने के लिए तैयार है। कांग्रेस की कार्यसमिति ने उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना और उनके यथाशीघ्र समाधान का आश्वासन दिया।

इस बैठक ने कामगारों के बीच कांग्रेस पार्टी के प्रति विश्वास को और भी मजबूत किया है और उन्हें उम्मीद है कि आगामी चुनाव में कांग्रेस पार्टी उनकी समस्याओं का समाधान करेगी और राज्य में एक न्यायपूर्ण और समृद्ध समाज की स्थापना करेगी।

मणिपुर में फिर लगा कर्फ्यू, तीन महिलाओं समेत कई बच्चे गायब

मेधा सिंह| navpravah.com 

नई दिल्ली | मणिपुर में हिंसा का माहौल बना हुआ है।जिरीबाम में 11नवंबर को कुकी समुदाय के उग्रवादियों ने एक पुलिस स्टेशन पर हमला बोल दिया था जिसके बाद से सुरक्षा बल और कुकी समुदाय में मुठभेड़ हुई और 10 संदिग्ध कुकी समुदाय के लोग मारे गए।इस भीषण गोलीबारी में सीआरपीएफ के दो जवान भी घायल हो गए,एक काफी गंभीर रूप से घायल हैं ।

तीन महिलाएं और बच्चे लापता

इस घटना के बाद जकुराधोर गांव में मंगलवार को दो लोगों की लाश मिली जिनकी पहचान हो गई है – लैशराम बरेल (61) और माईबाम केशो सिंह (75)।साथ ही तीन महिलाएं और तीन नाबालिग बच्चे भी लापता हैं ।महिलाओं की पहचान टी थोइबी देवी (31),एल हेतोम्बी देवी (25) और रानी देवी (60) नाम से हुई है।

सीआरपीएफ ने जिरिबाम में काफी फोर्स भेजा गया है।कुकी ज़ो के ज्यादातर इलाकों में कुकी समुदाय के लोगों के मारे जाने पर उन्होंने सुरक्षा बल द्वारा मारे गए लोगों के विरोध में उन इलाकों को बंद करके विरोध करने का निर्णय लिया है ।

बताया जा रहा है पुलिस कर्मी और सीआरपीएफ का कुकी समुदाय के उग्रवादियों से इसलिए झगड़ा हुआ क्योंकि उन्होंने जिरिबाम के पुलिस स्टेशन को निशाना बनाया था उसके बाद उन्होंने पुलिस स्टेशन के बगल में बने रिलीफ कैंप पर हमला कर दिया जिसके चलते सुरक्षा बलों ने उग्रवादियों पर हमला बोला और कई की मौत हो गई।

 उग्रवादियों ने बस्ती में मचाया हड़कंप

जकुराडोर करोंग में स्थित एक बस्ती में उग्रवादियों ने जा कर घरों में आग लगाना शुरू कर दिया।यह इलाका हमला किए गए पुलिस स्टेशन से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर है।

इंफाल घाटी में भी हिंसा का मामला सामने आ रहा है। वहां भी गोलीबारी हुई है।

बड़े चेहरों नहीं, बड़े मुद्दों पर लड़ा जा रहा महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव?

नृपेन्द्र कुमार मौर्य| navpravah.com 

नई दिल्ली| महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में भाजपा और कांग्रेस ने अपनी चुनावी रणनीति में बड़े बदलाव किए हैं। पार्टियों ने पारंपरिक तरीकों से हटकर माइक्रो मैनेजमेंट पर ध्यान दिया है, जिसमें स्थानीय नेताओं और मुद्दों को अहमियत दी जा रही है। इस बार चुनाव में राष्ट्रीय नेताओं की भूमिका कम और स्थानीय नेताओं की भूमिका अधिक नजर आ रही है। यह रणनीति हरियाणा में भी कारगर साबित हुई थी, जहां बीजेपी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को सीमित तौर पर प्रचार में शामिल किया।

महाराष्ट्र में भी यही फॉर्मूला अपनाते हुए पीएम मोदी केवल 4 दिनों में 11 रैलियां करेंगे, जबकि डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस को लगभग 100 रैलियों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। दूसरी ओर, कांग्रेस भी लोकल मुद्दों पर फोकस कर रही है, जिसके कारण राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के दौरे भी सीमित हैं।

चुनाव में वोटरों का रुख तय करने वाले प्रमुख मुद्दों में मराठा आरक्षण, लडकी बहिन योजना, शरद पवार और अजित पवार के बीच का संघर्ष, और उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के बीच की खींचतान प्रमुख हैं। इन मुद्दों पर नज़र डालते हैं:

1. मराठा आरक्षण: किस पार्टी को मिलेगी बढ़त?

मराठा आरक्षण एक महत्वपूर्ण मुद्दा है जिसने राज्य में चुनावी माहौल को गरमा दिया है। पिछले साल मराठा कोटा कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया था, जिसके बाद से मराठा समुदाय के वोट अहम हो गए हैं। देवेंद्र फडणवीस की सरकार ने पहले मराठा आरक्षण का प्रस्ताव दिया था, लेकिन अदालत की वजह से यह लागू नहीं हो सका। जरांगे पाटिल ने सरकार के प्रति समर्थन और विरोध दोनों के संकेत दिए हैं, जिससे वे शिंदे सरकार के साथ होते हुए भी एमवीए को समर्थन देने का इशारा कर सकते हैं। यदि उन्होंने स्वतंत्र मराठा उम्मीदवारों का समर्थन किया होता, तो इससे महायुति को लाभ होता। एमवीए के गठबंधन द्वारा मराठा-मुस्लिम-दलित धुरी का निर्माण कांग्रेस और एनसीपी के लिए एक पुरानी जीत की धुरी रही है, पर इस बार स्थिति जटिल है क्योंकि जरांगे पाटिल का रुख स्पष्ट नहीं है।

2. लडकी बहिन योजना:

महिलाओं के मुद्दों को भुनाने में महायुति की लडकी बहिन योजना का महत्वपूर्ण योगदान है। इस योजना के कारण महिलाएं जाति और धार्मिक विभाजन से ऊपर उठकर वोट कर सकती हैं। पत्रकार नीरजा चौधरी की रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में दलित, नवबौद्ध और मातंग समुदाय की महिलाएं महायुति को समर्थन दे रही हैं। ये महिलाएं कहती हैं कि उन्होंने पिछली बार कांग्रेस को वोट दिया था, लेकिन इस बार एकनाथ शिंदे के प्रयासों को देखते हुए उन्हें वोट देंगी। चौधरी की रिपोर्ट बताती है कि इस समूह की एकमात्र मराठा महिला को जरांगे पाटिल का संदेश भी प्रभावित कर रहा है, लेकिन उन्होंने शिंदे की योजना से मिले लाभ के कारण अपने मत का समर्थन महायुति को देने की ठानी है।

3. शरद पवार बनाम अजित पवार: एनसीपी का आंतरिक संघर्ष

महाराष्ट्र में एनसीपी का आंतरिक संघर्ष भी इस चुनाव में महत्वपूर्ण है। अजित पवार चाहते हैं कि पार्टी की प्रचार सीटों पर बीजेपी के बड़े नेताओं का दखल न हो ताकि उनके कोर वोटर मुस्लिम नाराज न हों। वहीं, शरद पवार ने भी भावनात्मक कार्ड खेलते हुए अपने समर्थकों से सहानुभूति बटोरी है। उनका दावा है कि यह उनके जीवन की आखिरी चुनावी लड़ाई है। मुस्लिम वोटों के लिए एनसीपी की स्थिति मजबूत मानी जा रही है, क्योंकि शरद पवार की बयानबाजी ने मुस्लिम समुदाय को प्रभावित किया है। एक तरफ अजित पवार मुस्लिम वोटरों को खोना नहीं चाहते, तो दूसरी ओर शरद पवार अपनी राजनीति में भावनात्मक और समुदायिक अपील को बढ़ावा दे रहे हैं।

4. उद्धव ठाकरे बनाम एकनाथ शिंदे: मराठा स्वाभिमान का मुद्दा

महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना का नेतृत्व करने वाले एकनाथ शिंदे मराठा नेता के रूप में उभर रहे हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद से शिंदे ने मराठा समुदाय के मुद्दों पर ध्यान दिया है, खासकर आरक्षण और मराठा स्वाभिमान के मुद्दे पर। शिंदे को ‘माझी लडकी बहिन’ योजना के कारण महिलाओं का भी समर्थन मिल रहा है। वहीं, उद्धव ठाकरे अभी भी असली शिवसेना के रूप में पहचान बनाए रखने की कोशिश में लगे हैं। लोकसभा चुनावों के दौरान उनके प्रति जितनी सद्भावना थी, उतनी अब नहीं रही।

महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में इस बार राष्ट्रीय नेताओं के बजाय स्थानीय नेताओं और मुद्दों पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। जहां भाजपा ने मराठा आरक्षण और महिला समर्थन के मुद्दों पर अपनी पकड़ बनाई है, वहीं कांग्रेस और एमवीए ने मराठा-मुस्लिम-दलित गठजोड़ को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया है।

इस प्रकार, महाराष्ट्र की इस चुनावी जंग में मुद्दों का झुकाव राष्ट्रीय मुद्दों से हटकर स्थानीय समस्याओं और जनभावनाओं की ओर है।

UP: एक बार फिर सवालों के घेरे में UPPSC, हज़ारों छात्रों ने आयोग कार्यालय को घेरा

नृपेन्द्र मौर्य | navpravah.com

गोरखपुर | उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) द्वारा ‘पीसीएस प्री’ और ‘आरओ-एआरओ’ परीक्षा दो दिन कराने का निर्णय लिया गया है, जिसके कारण प्रतियोगी छात्र आक्रोशित हैं और इसके विरोध में आंदोलन कर रहे हैं। इस निर्णय के विरोध में सोमवार से छात्रों ने आयोग के गेट पर धरना-प्रदर्शन शुरू किया, जो देर रात तक जारी रहा। दिन ढलने के साथ, हजारों छात्र वहां इकट्ठा हुए और अपनी एकता प्रदर्शित करने के लिए मोबाइल टॉर्च जलाकर प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन में छात्रों की प्रमुख मांग है कि परीक्षा को एक ही दिन में समाप्त किया जाए, ताकि सभी छात्रों को समान अवसर मिले और परीक्षा प्रक्रिया पारदर्शी रहे।

आयोग के प्रवक्ता ने इस निर्णय के पक्ष में स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि परीक्षाओं की शुचिता और अभ्यर्थियों की सुविधा सुनिश्चित करना आयोग की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि परीक्षा उन केंद्रों पर आयोजित की जा रही है, जहां किसी प्रकार की अनियमितताओं की संभावना नहीं है। आयोग का दावा है कि कुछ दूर-दराज के परीक्षा केंद्रों पर पहले कई प्रकार की गड़बड़ियां सामने आई थीं। इन गड़बड़ियों से बचने के लिए आयोग ने केवल उन केंद्रों का चयन किया है, जो उचित और सुरक्षित माने जाते हैं।

इसके अलावा, प्रवक्ता ने कहा कि कुछ अभ्यर्थियों ने आयोग को पत्र लिखकर जानकारी दी है कि कुछ टेलीग्राम और यूट्यूब चैनल परीक्षा को टलवाने की साजिश कर रहे हैं। इस प्रकार के दावों के बावजूद, छात्रों का प्रदर्शन जारी है। धरने पर बैठे छात्रों ने रातभर आयोग के गेट के सामने अपनी मांगों के समर्थन में विरोध जारी रखा।

विरोध प्रदर्शन के दौरान आयोग के आसपास भारी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात थे। पुलिस ने छात्रों को गेट नंबर-दो की तरफ आने से रोका, लेकिन छात्रों की बड़ी भीड़ ने बैरिकेड को पार करते हुए गेट के पास पहुंचकर धरना शुरू कर दिया। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने का प्रयास किया और उन्हें खदेड़ा, परंतु छात्र फिर से एकत्रित होकर धरने पर बैठ गए। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि युवा विरोधी भाजपा सरकार का छात्रों पर लाठीचार्ज अत्यंत निंदनीय है। उन्होंने आयोग में कथित धांधली का आरोप लगाते हुए सरकार की कड़ी आलोचना की और कहा कि भाजपा के एजेंडे में नौकरियां नहीं हैं।

धरने में भाग ले रहे प्रतियोगी छात्रों ने अपनी मांगों के समर्थन में विभिन्न तख्तियां उठाई हुई थीं, जिन पर “बटेंगे नहीं, हटेंगे नहीं, न्याय मिलने तक एक रहेंगे” और “एक दिन, एक परीक्षा” जैसे नारे लिखे थे। आंदोलनरत छात्रों का कहना है कि यूपीपीएससी का दो दिन में परीक्षा कराने का निर्णय अव्यवहारिक है और छात्रों के हित में नहीं है। छात्रों का यह भी कहना है कि आयोग ने पहले इस बात का जिक्र नहीं किया था कि परीक्षा दो दिनों में कराई जाएगी। प्रतियोगी छात्र चाहते हैं कि परीक्षा एक ही दिन में समाप्त हो, ताकि सभी छात्रों के लिए निष्पक्ष और समान अवसर सुनिश्चित किया जा सके।

छात्रों का यह भी कहना है कि आयोग के पास सीमित परीक्षा केंद्र होने के बावजूद, वह पूरी व्यवस्था संभालने में असमर्थ है। प्रतियोगी छात्र विमल त्रिपाठी ने कहा कि आयोग की ओर से परीक्षा के पहले ही अधिसूचना जारी कर दी गई थी कि परीक्षा दो दिन में होगी, जबकि छात्रों का मानना है कि इस तरह का निर्णय अव्यावहारिक है और एक ही दिन में परीक्षा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आयोग केवल सरकारी विद्यालयों में परीक्षा आयोजित कर रहा है और केवल 41 जिलों में ही केंद्रों की व्यवस्था की गई है। त्रिपाठी का कहना है कि आयोग का कार्य केवल परीक्षाएं आयोजित करना है, लेकिन वह इस जिम्मेदारी को पूरी तरह से निभाने में असमर्थ है।

प्रतियोगी छात्रा ने इस निर्णय की आलोचना की और कहा कि आयोग का दो दिन में परीक्षा कराना नियम के विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि अधिसूचना में इस बात का कहीं उल्लेख नहीं था कि परीक्षा दो दिनों में कराई जाएगी। मनोरमा और अन्य छात्रों का मानना है कि परीक्षा को एक दिन में ही संपन्न कराया जाना चाहिए, ताकि सभी छात्रों को एक समान अवसर मिले। आयोग ने पिछले मंगलवार को परीक्षा की तिथियों की घोषणा की, जिसमें पीसीएस प्री की परीक्षा के लिए 7 और 8 दिसंबर की तिथि निर्धारित की गई है, जबकि समीक्षा अधिकारी और सहायक समीक्षा अधिकारी (आरओ-एआरओ) की परीक्षा के लिए 22 और 23 दिसंबर की तिथि निर्धारित की गई है।

पुलिस उपायुक्त (नगर) अभिषेक भारती ने बताया कि अपर पुलिस आयुक्त एन. कोलांची और अन्य वरिष्ठ अधिकारी छात्रों से बातचीत कर स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि आयोग के भीतर अधिकारियों के साथ छात्रों की मांगों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है और समाधान निकालने का प्रयास हो रहा है।

इस आंदोलन के दौरान छात्र अपनी मांगों के लिए दृढ़ बने हुए हैं और आयोग के समक्ष उन्हें मनवाने के लिए डटे हुए हैं। छात्र किसी भी स्थिति में पीछे हटने को तैयार नहीं हैं और उनकी मांगें स्पष्ट हैं कि परीक्षा एक ही दिन में संपन्न कराई जाए। वहीं, आयोग का कहना है कि परीक्षा की शुचिता और पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए ही यह निर्णय लिया गया है।

आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि इस निर्णय से उनका भविष्य प्रभावित होगा और उनके परीक्षा देने के अवसरों में असमानता उत्पन्न होगी। इसलिए, वे चाहते हैं कि आयोग अपने इस निर्णय पर पुनर्विचार करे और सभी छात्रों के हित में एक ही दिन में परीक्षा आयोजित करे।

सत्तारूढ़ महायुति Vs महा विकास आघाड़ी : जानिए किसके घोषणा पत्र में कितना है दम

मेधा सिंह| navpravah.com

नई दिल्ली| रविवार को अमित शाह ने सत्तारूढ़ महायुति का ‘संकल्प पत्र’ जारी किया वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने महा विकास आघाड़ी का घोषणा पत्र जारी किया । महायुति के घोषणा पत्र समारोह में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले, मुंबई भाजपा अध्यक्ष आशीष शेलार और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल सहित अन्य पार्टी नेता उपस्थित थे।

क्या हैं दोनों गठबंधन के वादे –

दोनों ने महिलाओं के लिए बड़े वादे किए हैं। महायुति ने लड़की बहन योजना के तहत महिलाओं को प्रतिमाह 2100 रुपए देने का वादा किया है तथा 2027तक महाराष्ट्र में 50 लाख लखपति दीदी बनाने का भी वादा किया है,वहीं महा विकास आघाड़ी ने महालक्ष्मी योजना के तहत महिलाओं को 3000रुपए प्रतिमाह देने का वादा किया है और महिलाओं के लिए फ्री बस सेवा का भी वादा किया है।

दोनों ने किसानों के लिए बड़े वादे किए हैं।15000 तक के किसानों के कर्ज माफ करने का महायुति ने वादा किया है और किसानों को कृषि उपज पर एमएसपी पर 20%सब्सिडी मिलेगी और कृषियों के लिए सोलर एनर्जी का भी जिक्र है वहीं महा विकास आघाड़ी ने वादा किया है समय से अपना कर्ज चुकाने वाले किसानों को 50000रुपए देंगे तथा किसानों का तीन लाख तक का कर्ज माफ किया जाएगा।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए महायुति ने पेंशन बढ़ाने का वादा किया है 21,500 रुपये से बढ़ाकर 82,100 रुपये करने का वादा किया है पर महा विकास आघाड़ी ने वरिष्ठ नागरिकों के ऊपर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया है।

महायुति ने छात्रों के लिए भी विशेष वादे किए हैं।10लाख विद्यार्थियों को 10हजार वजीफा देने का वादा किया गया है और पुणे, नागपुर, अहिल्याबाई नगर में देश की पहले एआई यूनिवर्सिटी बनाने का वादा किया गया है साथ ही 25लाख रोजगार के अवसर पैदा करने का वादा किया वहीं महा विकास आघाड़ी ने हर विद्यार्थी को 4हजार रुपए वजीफा देने का वादा किया है।

स्वास्थ्य के क्षेत्र में दोनों गठबन्धन ने जोर दिया है- महायुति ने विवेकानंद युवा स्वास्थ्य कार्ड प्रदान करने का वादा किया है वहीं महा विकास आघाड़ी ने राजस्थान के समान 25 लाख की हेल्थ स्कीम शुरू करने का वादा किया है।महायुति ने युवाओं के लिए प्रति वर्ष स्वास्थ्य जांच का वादा किया है तथा वरिष्ठ नागरिकों के लिए आधार-एनेबल सर्विस नीति शुरू करने का वादा किया है।

महायुति ने एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग को 15लाख तक का ब्याज मुक्त कर्ज देने का वादा किया और महा विकास आघाड़ी ने जाती जनगणना करने का वादा किया है तथा आरक्षण को 50 फीसदी से ज्यादा करने का जिक्र भी अपने घोषणापत्र में किया है।

दोनों गठबन्धन ने एड़ी चोटी का दम लगा दिया है । अब चुनाव के नतीजे बताएंगे किसके वादे लोगों को ज्यादा लाभकारी और सच्चे लगे।

इंडिया पोएट्री हाउस ने गोरखपुर में मनाया ‘काव्य उत्सव’, पांच साल की सफल यात्रा का जश्न

ब्यूरो | navpravah.com 

गोरखपुर | पूर्वांचल की प्रतिष्ठित एवं लोकप्रिय साहित्यिक संस्था इंडिया पोएट्री हाउस के द्वारा संस्था के पांच वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में गोरखपुर के शाहपुर स्थित सेंट्रल एकेडमी स्कूल के सभागार में काव्य उत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया किया ।

जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में गोरखपुर विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर श्री अजय कुमार शुक्ला जी एवं सेंट्रल एकेडमी की प्राचार्य श्रीमती निवेदिता कौशिक जी तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री उदित नारायण मौर्या जी एवं जनता लाइब्रेरी के संस्थापक प्रणव द्विवेदी जी ने कार्यक्रम का मान बढ़ाया ।

कार्यक्रम के आयोजन में संस्था के संस्थापक श्री दुर्गेश मौर्या, अनुपम मिश्रा, सूरज कसौधन, चंदन प्रताप सिंह, रोहन मिश्र, राज एवं सहित साथियों का सहयोग रहा ।कार्यक्रम का संचालन कवि आशीष उपाध्याय ‘एकाकी’ जी ने किया।

कार्यक्रम में गोरखपुर के साथ – साथ महराजगंज, कुशीनगर, देवरियां, आजमगढ़ आदि स्थानों से आए प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया । सभी प्रतिभागियों की प्रस्तुति लाजवाब रही ।

संस्था के फाउंडर दुर्गेश मौर्य ने कहा कि संस्था के द्वारा इस तरह से पिछले पांच वर्षों से लगातार नवांकुर युवाओं को साहित्यिक मंच प्रदान करके उनकी प्रतिभाओं को निखारने का मौका देकर उन्हें सम्मानित किया जा रहा है। आगे भी यह कार्य लगातार चलता रहेगा ।

वाराणसी हत्याकांड : शराब कारोबारी और परिवार का कत्ल, बड़ा भतीजा सस्पेक्ट

मेधा सिंह| navpravah.com

नई दिल्ली | वाराणसी के शराब कारोबारी राजेंद्र गुप्ता समेत परिवार के चार लोगों का बीते मंगलवार को कत्ल कर दिया गया । कत्ल का प्राइम सस्पेक्ट उसका भतीजा विशाल गुप्ता उर्फ विक्की(33) है।वह पेशे से सॉफ्टवेयर डेवलपर है।तहकीकात के लिए पुलिस विशाल की गर्लफ्रेंड तक पहुंचने की कोशिश कर रही है जो महाराष्ट्र में रहती है। विशाल की तलाश छह राज्यों में जारी है पर अभी तक वह पुलिस के हाथ नहीं आया है।उसका फोन 24 अक्टूबर से बंद है।चार नवंबर तक वह वाराणसी में ही था।उसकी आखिरी लोकेशन बेंगलुरु मिली है।उसका भाई प्रशांत उर्फ जुगनू (29)अपने परिवार वालों का अंतिम संस्कार करने के बाद से पुलिस कस्टडी में है। कहा जा रहा है कत्ल के लिए शूटरों को सुपारी दी गई थी कई नंबर सर्विलांस पर रखे गए हैं ताकि विशाल का पता चल पाए। राजेंद्र गुप्ता(45) ,उसकी पत्नी नीतू(42) उसके तीन बच्चे नवनेंद्र(25),गौरांगी(17), सुबेंद्र(15)का कत्ल कर दिया गया है। नवनेंद्र बेंगलुरु में नौकरी करता था वह पेशे से इंजीनियर था और बाकी दोनों बच्चे डीपीएस में पढ़ते थे।राजेंद्र की यह दूसरी शादी थी पहली पत्नी से उसे एक बेटा है जिसका नाम आदित्य है वह अपनी मां के साथ आसनसोल में रहता है ।

 कैसे हुआ कत्ल?

राजेंद्र को मारने के लिए कातिल पहले उसके मीरापुर वाले घर गए और उसे गोलियां दाग दीं। जिस घर में राजेंद्र का कत्ल हुआ उसका निर्माण कार्य चल रहा था। राजेंद्र की अर्धनग्न लाश बिस्तर पर मिली उसे एक गोली सिर में और दो गोली सीने में मारी गई। कत्ल से एक घंटे पहले उसके कमरे से एक महिला निकली थी उस महिला की तलाश जारी है।राजेंद्र के कत्ल के बाद कातिल उसके भदैनी के पुश्तैनी घर पहुंचे और वहां उसकी पत्नी और तीनों बच्चों का कत्ल कर दिया । उनके भी सीने और कनपटी पर गोली मारी गई।दोनों जगह मिले खोखे से पुलिस यही आशंका जता रही कि कत्ल 0.32बोर की पिस्तौल से किया गया है।

 हत्या का खुलासा कब और कैसे हुआ?

इस हत्या का खुलासा तब हुआ जब घर में काम करने वाली रीता देवी 11 बजे आई और उसने प्रथम मंजिल का दरवाजा खटखटाया कोई सुगबुगाहट ना पाकर उसने दरवाजे को धक्का दिया तो देखा नीतू जमीन पर खून से लथपथ पड़ी हुई है जब वह दूसरी मंजिल पर गई तब उसने देखा नमनेंद्र और गौरांगी भी खून से लहूलुहान मृत पड़े हैं और शौचालय में सुबेंद्र मृत पड़ा था। जब पुलिस को खबर मिली तब वह राजेंद्र को ढूंढने लगी।उसका नंबर सर्विलांस पर डाला गया।उसकी लोकेशन पाकर जब पुलिस मीरापुर स्थित उसके आवास पर पहुंची तब राजेंद्र की लाश मच्छरदानी लगे बिस्तर के अंदर अर्धनग्न मिली।

 कातिल का कत्ल 28 साल बाद, भतीजे ने लिया बदला?

दरअसल इस हत्याकांड के बीज आज से 28 साल पहले बोए गए थे वर्ष 1997 वाराणसी के एक बड़े कारोबारी लक्ष्मी नारायण के बेटे राजेंद्र गुप्ता और कृष्णा गुप्ता में प्रॉपर्टी को ले कर विवाद था।यह लक्ष्मी नारायण का दूसरा विवाह था उनकी पहली पत्नी का निधन हो गया था।दोनों बेटे उनकी दूसरी पत्नी शारदा देवी के साथ थे।दोनों बेटों में विवाद अत्यधिक बढ़ गया था और एक बार कृष्णा ने अपने बड़े भाई को मारपीट दिया था जिसके बाद से राजेंद्र ने बोला था कि अगर वह उसे प्रॉपर्टी में हिस्सा नहीं देंगे तो वह उन सबको जान से मार देगा पर उसकी बात को किसी ने गंभीरता से नहीं किया। राजेंद्र गुप्ता एक दिन रात को अपने कमरे से निकला और अपने छोटे भाई कृष्णा गुप्ता और उसकी पत्नी बबिता गुप्ता के कमरे में गया और उनपर गोली चलाकर उनका कत्ल कर दिया ।उनके साथ में सोए बेटे जुगनू पर भी दो गोलियां चलाईं।वह मौके से फरार हो गया।लक्ष्मी नारायण और उनकी पत्नी जब आवाज सुन कर पहुंचे तब वह बिस्तर पर लहूलुहान पड़े अपने बेटे बहु और पोते को अस्पताल ले गए जहां बेटे और बहु को मृत घोषित कर दिया गया पर पोते जुगनू को ऑपरेशन करके बचा लिया गया।लक्ष्मी नारायण ने बड़े बेटे राजेंद्र के खिलाफ केस कर दिया। कृष्णा और बबिता के तीन बच्चे थे डॉली ,विशाल(विक्की) और प्रशांत (जुगनू)।

घर में शराब और प्रॉपर्टी का कारोबार था । कृष्णा पिता लक्ष्मी नारायण से ज्यादा करीब थे इसलिए कारोबार वह संभालते थे यह बात राजेंद्र को अखरती थी इसलिए उसने 10 जून 1997 को अपने छोटे भाई और उसकी पत्नी को सोते वक्त गोली मार दिया । पुलिस इन्वेस्टीगेशन में राजेंद्र कातिल निकला और उसे पुलिस ने अरेस्ट कर लिया।लक्ष्मी नारायण और उनकी पत्नी बच्चों का ख्याल रखते थे और लक्ष्मी नारायण अपने पौत्रों को कारोबार सीखाने लगे।छह महीने बाद 5दिसम्बर 1997 को राजेंद्र जेल से पैरोल पर छूटा तब उसने धंधे पर अपना हक जमाना चाहा पर पिता के कड़े रुख से वह ये कर नहीं पाया तब उसने अपने पिता के कत्ल का षडयंत्र रचा उसने आचार्य रामचंद्र शुक्ल चौराहा पर देसी शराब ठेके के पास सुपारी देकर अपने पिता और उनके बॉडीगार्ड का कत्ल करवा दिया ।

कृष्णा के बेटे विशाल और जुगनू हमेशा कोर्ट में जाते थे ताकि उनके माता पिता को न्याय मिल सके पर दादा जी की हत्या के बाद चीज़ें बदल गईं।पहले लक्ष्मी नारायण केस के वादी थे बाद में उनकी पत्नी अपने बेटे बहु और अपने पति के केस की वादी थीं लेकिन शारदा देवी ने बाद में 1999 में अपना बयान बदल दिया और राजेंद्र को दोनों केस से राहत मिल गई और वह बच गया इसके बाद उसने पूरे कारोबार पर अपना हक जमा लिया । उसकी पहली पत्नी कई बार बुलाने पर भी मायके से नहीं आई।

 राजेंद्र और विशाल के बीच थे खराब रिश्ते

राजेंद्र विशाल और जुगनू के पढ़ाई का खर्च उठाता था। विशाल और राजेंद्र के बीच अच्छे संबंध नहीं थे दोनों एक दूसरे को पसंद नहीं करते थे।

राजेंद्र की मां ने बताया कि उन्होंने दोनों बच्चों विशाल और जुगनू का ख्याल रखा । दो साल पहले राजेंद्र ने विशाल को घर से निकाल दिया तब से वह बाहर काम करता है।उन्होंने बताया राजेंद्र और उसके बड़े बेटे नवनेंद्र ने विशाल को इसी बात पर बहुत मारा था इस बात से विशाल बहुत गुस्से में था उसने कहा था वो अपने माता पिता की मौत का बदला लेगा । विशाल दिवाली पर घर आया था और भाई दूज पर भी आया था तब तक सब ठीक था । इस भाई दूज पर राजेंद्र ने विशाल से उसके साथ काम करने को कहा वह उसे बीस पच्चीस हजार रुपए देगा यह भी कहा।राजेंद्र और विशाल के बीच अक्सर कई बातों पर टकरार होती रहती थी।विशाल कई बार प्रॉपर्टी में आधे हिस्से की बात करता था जिससे राजेंद्र उसे बहुत मारता पीटता था उसे बहुत परेशान करता था ।राजेंद्र ने एक बार विशाल से कहा था उसके माता पिता की तरह वह उसका भी कत्ल कर देगा।

काशी जोन के DCP गौरव बंसवाल के अनुसार राजेंद्र की मां शारदा देवी के बयान से शक विशाल पर जा रहा है।राजेंद्र की पहली शादी से हुए बेटे आदित्य की तलाश में जब पुलिस आसनसोल स्थित उसके आवास पर पहुंची तब वह वहां से नदारद था।

 राजेंद्र और नीतू की प्रेम कहानी

नीतू मऊ की मूलनिवासी है ।1998 में उसने वाराणसी के बसंत महाविद्यालय में दाखिला लिया वह शिवाला स्थित एक किराए के मकान में अपने परिवार संग रहने लगी।राजेंद्र उस घर का मकान मालिक था। 15अगस्त1999को दोनों की मुलाकात हुई और दोनों में प्रेम प्रसंग शुरू हो गया।जब परिवार को इसके बारे में पता चला तब उन्होंने नीतू का घर से बाहर आना जाना बंद करा दिया।राजेंद्र नीतू की सहेलियों के मदद से उसे पत्र लिखा करता था।दोनों ने 2000में विवाह कर लिया पर नीतू का परिवार इससे खुश नहीं था और उन्होंने उससे सारे रिश्ते नाते तोड़ दिए जिसके बाद वह अपने पति के घर भदैनी में आ कर रहने लगी उसने कृष्णा के दोनों बच्चों को अपनाया और उनके बीच अच्छे रिश्ते कायम हो गए । बच्चों ने उसे अपनी सगी मां की तरह अपनाया।

जुगनू ने बताया कि उसका बड़ा भाई विशाल अंतर्मुखी है।वह बहन डॉली और जुगनू से भी ज्यादा बात नहीं करता है।जुगनू ने बताया घर छोड़ने के बाद विशाल किसी रिश्तेदार से ज्यादा बातचीत नहीं करता था।वह जब भी कॉल करता था फोन नंबर नया होता था। इस हत्याकांड में अभी कई खुलासे होना बाकी हैं।