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Tuesday, August 18, 2026
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मोदी सरकार के 90% नेताओं को जानता नहीं, बाकी 10 को मानता नहीं -शत्रुघ्न सिन्हा 

एनपी न्यूज़ डेस्क | Navpravah.com
भाजपा नेता और बॉलीवुड के मशहूर एक्टर शत्रुघ्न सिन्हा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रियों की खिल्ली उड़ाई है। गुरुवार को उन्होंने सोशल मिडिया पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कैबिनेट के 90 फीसदी मंत्रियों को कोई नहीं जानता है। जबकि, बचे हुए 10 फीसद मंत्रियों की कोई इज्जत नहीं करता है।
शत्रुघ्न सिन्हा द्वारा की गई इस टिप्पणी पर गुस्साए युजर्स ने जवाब में सीधे सिन्हा को बीजेपी छोड़ देने की सलाह दे दी, जबकि एक युजर ने बीजेपी के प्रति उनकी ईमानदारी पर सवाल खड़े किए और कहा कि “आपने कितनी इज्जत दी, जिस पार्टी ने बढ़ाया, उसी को अपशब्द कहे।” किसी ने मजाक बनाने के पीछे का कारण उनकी कुंठा को बताया।
इसी के साथ उन्होंने बॉलीवुड के दिग्गजों को की भी कठघरे में खड़ा किया। मंगलवार अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा  “जैसा कि पद्मावती ज्वलंत मुद्दा बन गई है। लोग पूछ रहे हैं कि महानायक अमिताभ बच्चन, बेहद बहुमुखी आमिर खान और सबसे मशहूर शाहरुख खान के पास बोलने के लिए इस पर कुछ नहीं है। कैसे हमारी सूचना और प्रसारण मंत्री और सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्री इस पर मौन क्यों धारण किए हुए हैं। हाई टाइम!”
अपना पक्षसाफ़ करते हुए उन्होंने लिखा कि वह केवल फिल्मकार और प्रड्यूसर संजय लीला भंसाली के चुप्पी तोड़ने के बाद बोलेंगे। वह फिल्मकार की अभिरुचियों के साथ मामले की संवेदनशीलता, राजपूतों की वीरता और निष्ठा को ध्यान में रखकर बोलेंगे।”

व्यापम घोटाला: सीबीआई ने पेश की चार्जशीट, 4 पूर्व अधिकारियों समेत 592 आरोपियों के नाम

एनपी न्यूज़ डेस्क | Navpravah.com

मध्य प्रदेश के बहुचर्चित व्यापम घोटाले में एक बड़ी खबर सामने आ रही है। पीएमटी-2012 मामले में सीबीआई ने  गुरुवार को चार्जशीट पेश कर दी। 28 महीने चली लंबी पड़ताल में जांच एजेंसी ने 592 लोगों को आरोपी ठहराया है। इस लिस्ट में व्यापम के चार पूर्व अधिकारियों के नाम भी शामिल हैं, जिसके तहत पंकज त्रिवेदी, नितिन मोहिंद्र, अजय कुमार सेन और सीके मिश्रा जैसे बड़े नाम सामने आए हैं।

सीबीआई द्वारा बनी आरोपियों की इस लंबी सूची में व्यवसाइयों के नाम भी शामिल हैं, जिसमें पीपुल्स ग्रुप के चेयरमैन सुरेश एन. विजयवर्गीय, उनके दामाद और डायरेक्टर एडमिनिस्ट्रेशन अंबरीश शर्मा, पीपुल्स के मेडिकल डायरेक्टर अशोक नागनाथ, पीपुल्स यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर विजय कुमार पांडे और चिरायु मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर डॉ. अजय गोयनका समेत दो अन्य मेडिकल कॉलेज के कर्ता-धर्ता भी शामिल हैं।

विदित हो कि पीएमटी-2012 मामले में 2000 करोड़ से ज्यादा का लेन-देन हुआ था। इतना ही नहीं, इस घोटाले के चलते तक़रीबन 5000 स्टूडेंट्स का करियर दांव पर लग गया था।  इस मामले में 500 अभिभावकों सहित करीब 2000 आरोपी हैं। इस दाखिले में एमबीबीएस दाखिले का रेट 80 लाख था। इतना ही नहीं 1.5 करोड़ रुपए तक प्री-पीजी दाखिले के लिए वसूले गए।

गुजरात चुनाव: 50 मंत्रियों के साथ मैदान में उतरेंगे पीएम मोदी

बजट 2018 पीएम मोदी
एनपी न्यूज़ डेस्क | Navpravah.com
गुजरात चुनाव जीतने के लिए अब टीम मोदी पूरी तरह तैयार है। पीएम नरेंद्र मोदी अपने 50 मंत्री समेत कई वरिष्‍ठ नेताओं के साथ 26 नवंबर से प्रचार अभियान शुरू करेंगे।
गुजरात चुनाव के पहले चरण की वोटिंग नौ दिसंबर को होगी, इसे ध्यान में रखते हुए बीजेपी के नेता और मंत्री 26 और 27 नवंबर को पूरे राज्य में भगवा झंडा लहराएंगे। इस दौरान मंत्री जनसभाएं और जनसंपर्क करेंगे। पीएम मोदी 27 नवंबर से गुजरात में चुनाव प्रचार का आगाज करेंगे। गुजरात में चुनाव से पहले मोदी तकरीबन 35 रैलियां करेंगे। 27 को पीएम मोदी भुज, जसदण, अमरेली, सूरत में रैली करेंगे और 29 नवंबर को मोरबी, सोमनाथ, भावनगर और नवसारी में पीएम की जनसभाएं हैं।
वहीं विपक्ष भी पीछे हटती नहीं दिख रही, राहुल गांधी भी शुक्रवार से दो दिन के चुनावी दौरे पर गुजरात पहुंच रहे हैं। शुक्रवार को राहुल पोरबंदर और अहमदाबाद में रैलियां करेंगे और शनिवार को राहुल गांधीनगर, अरावली, महिसागर और दाहोद में प्रचार करेंगे। विदित हो कि गुजरात विधानसभा के लिए नौ दिसम्बर को होने वाले प्रथम चरण के चुनाव में 1703 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया है। पहले चरण में 89 सीटों पर चुनाव होना है। सम्भवतः सौराष्ट्र और दक्षिण गुजरात के 19 जिलों में प्रथम चरण में चुनाव हो रहा है।

शिक्षा से उखड़ रहे हैं हिंदी के पाँव

PC: Dainik Jagaran

डॉ. जितेन्द्र पाण्डेय | Navpravah.com

भूमण्डलीकरण के दौर में हिंदी की दिन दूनी रात चौगुनी प्रगति देखकर हर हिंदुस्तानी का सीना गर्व से चौड़ा हो रहा है। विश्व की अट्ठारह प्रतिशत जनता हिंदी बोलती है और समझती है। दुनिया की बारह भारोपीय भाषाओं में से चार भारोपीय भाषाएं तो हमारे देश में अपनी खुशबू लुटा रही हैं। भाषाओं की इस विविधता पर कोई भी राष्ट्र इतरा सकता है। ये खुशनुमा यथार्थ हमें विश्वगुरु का एहसास दिलाता है। इन सबके अलावा मेरा सरोकार यथार्थ के कुछ अन्य चट्टानों से टकराना है।

तकरीबन डेढ़ दसक के अंदर-अंदर देश में अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों की बाढ़-सी आ गई है। अंग्रेजी भाषा के नाम पर अप्रशिक्षित छोकरे (अध्यापक) राष्ट्र के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। स्कूल प्रबंधन को भी कम दाम में चोखा काम (आर्थिक लाभ) मिल रहा है। कुकुरमुत्ते की तरह पनपे इन स्कूलों का हमला सर्वप्रथम भारतीय भाषाओं पर होता है। ऐसा प्रतीत होता है ‘वर्नाकुलर’ शब्द भारतीय भाषाओं की गरिमा पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर रहा हो। हिंदी भाषा को हेय दृष्टि से देखते ये शैक्षणिक संस्थान “कैम्पस फ्री हिंदी” की बात करते हैं। उन छात्रों पर फाइन लगाते हैं, जो हिंदी बोलने की ज़ुर्रत करते हैं। यह है हिंदुस्तान की ज़मीनी हक़ीकत। विद्या के इन मंदिरों को तो यह एहसास होना चाहिए कि कोई भी व्यक्ति मात्र अंग्रेजी बोलकर विवेकशील, ज्ञानी और बुद्धिमान नहीं बनता। यदि ऐसा होता तो बंग्ला में लिखी ‘गीतांजली’ को नोबेल पुरस्कार नहीं मिलता। हर साल अंग्रेजी भाषा के ही साहित्य को यह प्रतिष्ठित अवार्ड दिया जाता।

पिछले दिनों जब मैं हिंदी के एक समारोह में शामिल होने मुंबई गया था,तो एक अज़ीब वाकया सामने आया। एक सम्मानित विद्यालय के प्राचार्य ने बताया कि वे अपने संस्थान में हिंदी बोलने की इजाज़त नहीं देते। सिर्फ ब्रेक में। अपनी बात आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा, “यदि कोई ब्रेक में हिंदी बोलता है तो मैं कहता हूँ, बच्चों ने हिंदी बोला नहीं, मैंने सुना नहीं।” शैक्षणिक संस्थानों में हिंदी की यही असलियत है। ज़ुर्माना, दंड, घृणा आदि। यदि इसे मनोवैज्ञानिक ढंग से विश्लेषण किया जाय, तो पाएंगे कि हमें जिस साँचे में ढालने की कोशिश हो रही है, हम ढल रहे हैं। अंग्रेजियत हिंदी को दब्बू और हतवीर्य बनाने पर आमादा है। आधुनिकता के नाम पर भारतीय शिक्षा में हिंदी माध्यम को पिछड़ा मानना और मनवाना गहरे षड्यंत्र का उदाहरण है। आखिर इस विचार को क्या कहेंगे ?

We must do our best to form a class who may be interpreters between us and the millions whom we govern;a class of persons Indian in blood and colour, but English in taste, in opinions, words, and intellect. ” (हमारे तथा जिन पर हमारा शासन है, ऐसे करोड़ों जनों के बीच दुभाषिए का कार्य करने में समर्थ एक वर्ग तैयार करने के लिए हमें भरपूर कोशिश करनी है; उन लोगों का वर्ग जो खून एवं रंग में भारतीय हों, लेकिन रुचियों, धारणाओं, शब्दों एवं बुद्धि से अंग्रेज हों।)
– T.B. Macaulay

हम सभी जानते हैं कि भाषा और संस्कृति अभिन्न हैं। जब कोई हमारी भाषा छीनता है, तो वह परोक्ष रूप से हमारे ऊपर सांस्कृतिक हमला करता है। हमारी नई पीढ़ी अपनी संस्कृति से कितनी दूर जा चुकी है! इसके लिए शिक्षा जगत में प्रचलित कुछ उदाहरण ज़रूर देखें- भारतीय परिधान धारण करने में हीन भावना, हिंदी बोलने में शर्मिंदगी महसूस करना, किसी के द्वारा पैर छूता देख हँसी के फव्वारे छूटना, आदरसूचक शब्दों के प्रयोगकर्ता को मूर्ख समझना इत्यादि। नई पीढ़ी की यही सोच जब व्यापक और व्यवहारिक स्तर पर उतरती है, तो वृद्धाश्रमों में बेतहाशा बढ़ोत्तरी होती है। आत्महत्याओं का ग्राफ बढ़ने लगता है और अपराध निरंकुश हो उठता है। संवेदनाएं सूखती हैं और मानवता मरने लगती है।

PC: Satyagrah

यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारी सरकारें और ब्यूरोक्रेसी आए दिन अंग्रेजी को बढ़ावा दे रही हैं। इनका यही मानना है कि कोई भी व्यक्ति अथवा राष्ट्र अंग्रेजी पढ़कर ही विकास कर सकता है। संभवतः इसी कारण दिल्ली नगर निगम की सभी पाठशालाओं को अंग्रेजी माध्यम में बदलने की योजना बनाई गई होगी। बाल-मन पर भाषा का गहरा असर पड़ता है। यह वही समय होता है, जब स्वभाषा के प्रति बालक के मन में अनुरक्ति और आदर जगाया जा सकता है, अन्यथा सरकारी तंत्र है। उनका राजभाषा विभाग है। हिंदी दिवस पर छलछलाता भाषाई प्रेम है। हिंदी सेवी संस्थाओं के मान-सम्मान, पुरस्कार हैं। उनके प्राप्तकर्ताओं तथा दाताओं की अपनी दुनिया और अपना पैतरा है।

मुझे लगता है कि हिंदी की सच्ची सेवा तो तब होगी, जब शिक्षा जगत में उसे उचित स्थान मिले। बच्चा-बच्चा हिंदी बोले और हिंदी जिए। आज सवा सौ करोड़ भारतवासियों की भावनाओं पर अंग्रेजियत राज कर रही है। अभी हम भाषाई गुलाम हैं। प्रतिभाएं दम तोड़ रही हैं। यह गुलामी ही कही जा सकती है, जिसके कारण विश्व के शीर्ष 200 विश्वविद्यालयों की सूची में भारत का नाम तक नहीं है। उधार पैसा हो, मकान हो, कपड़ा हो या भाषा, कभी भी गौरव का कारण नहीं बन सकती। हिंदी के सभी आंदोलन यदि शिक्षा पर फोकस करें, तो बात बनें अन्यथा वह दिन दूर नहीं जब किसान का बेटा, मजदूर का बेटा, सब्जी विक्रेता का बेटा, ऑटो चालक का बेटा हिंदी बोलने से कतराएगा। बोलेगा अंग्रेजी ही, भले टूटी-फूटी हो। गली-मोहल्ले में अंग्रेजी माध्यम के स्कूल जो खुल रहे हैं।

हतभाग्य हमारा कि हिंदी जैसी समृद्ध भाषा को छोड़ हम ‘पर भाषा’ के पीछे दौड़ लगा रहे हैं। कितना खो रहे हैं! इसका अनुमान भी हम नहीं लगा सकते। पिछले दिनों भारत के उपराष्ट्रपति माननीय वेंकैया नायडू ने इसी तरह की पीड़ा को एक समारोह में शब्द दिया था, “उस समय दक्षिण में हिंदी का विरोध जोरों पर था। रेलवे स्टेशन, पोस्ट ऑफिस पर लगे हिंदी के बोर्ड्स उखाड़े जा रहे थे, उन पर कालिख पोती जा रही थी। उन आंदोलनकारियों में मैं भी था। मुझे नहीं मालुम था कि यह कालिख हिंदी पर नहीं बल्कि हमारे भाग्य पर पोती जा रही थी।” कमोबेश यही स्थिति पूरे देश की है। दुनिया के साथ कदमताल करने और करवाने की ललक में हम सभी जिम्मेदार हैं।

मानसिक गुलामी की इस अमावस का सवेरा होना हमारे अस्तित्त्व के लिए ज़रूरी है। उम्मीद की किरण कहीं-न-कहीं अवश्य है। आइए, पहचानें और अपने हिस्से की जिम्मेदारी निभाएं।

(लेखक वरिष्ठ साहित्यकार और नवप्रवाह.कॉम के साहित्य सम्पादक हैं।)

इंडियन नेवी की पहली महिला पायलट बनीं शुभांगी स्वरुप

shubhangi: first famale pilot of indian navy
पारुल पाण्डेय | Navpravah.com
महिलाएं हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही हैं। इसी कड़ी में एक और गौरवान्वित करने वाली खबर सामने आई है। इंडियन नेवी ने पहली बार किसी महिला की नियुक्ति पायलट पद के लिए की है। यह पद हासिल करने वाली महिला का नाम शुभांगी स्वरुप है। वह जल्द ही आकाश में मेरीटाइम रेकोनकायसन्स विमान उड़ाएंगी। उत्तर प्रदेश की शुभांगी का बचपन से ही विमान उड़ाने का सपना था, जो उन्होंने पूरा कर दिखाया है।
इसके आलावा नौसेना की नेवल आर्मामेंट इंस्पेक्टोरेट (एनएआई) शाखा में देश की पहली महिला अधिकारी की सूची में नई दिल्ली की आस्था सहगल, पुडुचेरी की रूपा ए और केरल की शक्ति माया एस के नाम शामिल हैं। कल चारों महिलाओं ने एझीमाला नौसेना अकादमी में हुए एक कार्यक्रम में नेवल ओरियन्टेशन कोर्स पास करने के बाद पासिंग आउट परेड में हिस्सा लिया।
इस समारोह में मौजूद दक्षिणी नेवल प्रवक्ता कमांडर श्रीधर वॉरियर ने बताया की नौसेना की एविएशन ब्रांच में पहले भी वायु यातायात नियंत्रण अधिकारी और विमान में ‘पर्यवेक्षक’ अधिकारी के तौर पर महिलाएं काम कर चुकी हैं, लेकिन पायलट के तौर पर शुभांगी पहली महिला हैं। आगे उन्होंने बताया कि सभी महिलाओं को सबसे पहले प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसके बाद ही उन्हें ड्यूटी पर तैनात किया जाएगा।
शुभांगी को हैदराबाद की वायु सेना अकादमी में प्रशिक्षण दिया जाएगा, जहां सेना, नौसेना और वायु सेना के पायलटों को प्रशिक्षण दिया जाता है। विदित हो कि एनएआई शाखा पर नौसेना के हथियारों और गोला-बारूद के ऑडिट एवं आकलन की जिम्मेदारी होती है।

इंडिया का पता नहीं, लेकिन ब्रिटेन में समय पर रिलीज़ होगी ‘पद्मावती’

ब्रिटेन में सही समय पर रिलीज़ होगी पद्मावती
एनपी न्यूज़ नेटवर्क | Navpravah.com
फिल्म पद्मावती को लेकर भारत में विवाद थमने का नाम नही ले रहा है। सेंसर बोर्ड ने अधूरे कागजात की वजह से निर्माताओं को फिल्म वापस लौटा दी है, लेकिन ब्रिटेन में ऐसा नहीं है, वहां के सेंसर बोर्ड ने संजय लीला भंसाली की फिल्म को बिना कट के पास कर दिया है।
जानकारी के मुताबिक, ब्रिटिश बोर्ड ऑफ़ फिल्म क्लासिफिकेशन ने फिल्म पद्मावती को एपिक ड्रामा कैटेगरी में 12A सर्टिफिकेट दिया है, इसके मुताबिक फिल्म को 12 साल या उससे अधिक उम्र के व्याक्तियों को दिखाई जा सकती है। BBFC के नोट के मुताबिक 164 मिनट लंबी ‘पद्मावती’ हिंदी भाषा की एपिक ड्रामा है, जिसमें एक सुल्तान राजपूत रानी को हासिल करने के लिए आक्रमण का नेतृत्व करता है, जिसमें कोई आपत्ति नही है।
BBFC की ओर से ट्विटर पर शेयर की गई जानकारी की मानें, तो फिल्म ब्रिटेन में 1 दिसंबर को रिलीज की जानी है, हालांकि वायकॉम 18 के सूत्रों ने बताया था कि 1 दिसंबर को भारत में फिल्म रिलीज नही होगी। इसी क्रम में बुधवार को गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने इसके प्रदर्शन पर रोक लगाने की घोषणा की है, उन्होंने कहा, फैसला क्षत्रीय और दूसरे संगठनों से बातचीत के बाद लिया गया है, तय हुआ है कि जब तक आपत्तियों का समाधान नहीं होगा, क़ानून-व्यवस्था को देखते हुए गुजरात में फिल्म रिलीज नहीं की जा सकती।

फिल्म ‘पद्मावती’ पर करणी सेना का यूटर्न

पद्मावत विवाद
एनपी न्यूज़ डेस्क | Navpravah.com
फिल्‍म ‘पद्मावती’ पर जमकर विरोध कर रही करणी सेना ने अब अपने विरोध में थोड़ी ढिलाई बरत दी है। अभी तक फिल्‍म देखे बिना इसे रिलीज न होने देने की धमकी देने वाली राजपूत करणी सेना ने कह दिया है कि उन्‍हें न सही तो यह फिल्‍म मेवाड़ के महाराजाओं को दिखा दी जाए।
करणी सेना इस फिल्‍म की शूटिंग के समय से ही भंसाली के विरोध में रही है और पिछले साल जयपुर में फिल्म के सेट पर उनके ऊपर हमला भी किया गया था। करणी सेना इस फिल्‍म को पूरी तरह प्रतिबंधित करने की मांग भी कर रही थी।
कल करणी सेना ने अपना स्‍टैंड बदलते हुए कहा कि वह फिल्‍म मेवाड़ के राजघराने के लोगों को दिखाये और अगर उन्‍हें कोई विरोध नहीं हुआ, तो वह फिल्‍म के विरोध में चल रहे अपने अंदोलन को वापस ले लेंगे। ‘पद्मावती’ को लेकर इस बात का विवाद है कि यह फिल्म राजपूत रानी पद्मावती के बारे में इतिहास को बिगाड़ती है। 1303 में चित्तौड़ के घेराबंदी होने के दौरान पद्मावती ने अपने समुदाय के सम्मान की रक्षा के लिए जौहर कर लिया था।

पिंजड़े से निकला हाफ़िज़ और बोला, “कश्मीर लेकर रहेंगे”

हाफ़िज़ सईद ने अमेरिका पर बोला हमला

एनपी न्यूज़ डेस्क | Navpravah.com

आतंकवाद के मुद्दे पर एक बार फिर से पकिस्तान की सच्चाई वैश्विक मंच पर सबके सामने आ ही गई। जिस आतंकी ने भारत में आतंकी हमला करवाया, उसे पाकिस्तानी हुकूमत ने खुले आम आतंक फैलाने के लिए आज़ाद कर दिया। और आज़ाद होते ही हाफ़िज़ सईद कश्मीर का राग भी अलापने लगा।

जिस आतंकी को यूनाइटेड नेशंस और अमेरिका ने भी आतंकवादी नेता घोषित कर दिया है, उसे पाकिस्तान ने मुक्त कर दिया। प्राप्त जानकारी के मुताबिक़, इस आतंकी को जेल से बाहर निकालने में मात्र पाकिस्तान सरकार का हाथ नहीं है, बल्कि पाकिस्तानी आर्मी और उसकी खुफिया एजेंसी ISI ने भी भरपूर सहयोग दिया है।

जिस आतंकी को छुड़वाने में पाकिस्तान ने पूरा बल लगा दिया, उसने बाहर निकलते ही भारत के खिलाफ ज़हर उगलना शुरू कर दिया। जेल से आज़ाद होते ही हाफ़िज़ सईद ने कहा कि कश्मीर हम लेकर ही छोड़ेंगे। हाफ़िज़ सईद जैसे कुख्यात आतंकी को जेल से बाहर करने वाला देश पाकिस्तान यूनाइटेड नेशंस में आतंकवाद का रोना रोता है। यूएन में पाकिस्तान कहता है वो आतंकवाद से पीड़ित है।

नज़रबंदी पर कोर्ट में बहस हो रही थी, लेकिन पाकिस्तान की सरकार ने न्यायालय को उसे आतंकी सिद्ध करने के लिए एक भी सबूत पेश नहीं किया। यहाँ तक कि जो भारत ने पाकिस्तान को सबूत सौंपा था, वह भी कोर्ट को नहीं दिया गया, जिसकी वजह से कोर्ट को उसे बरी करने का आदेश देना पड़ा।

वरुण धवन सड़क पर लेने लगे सेल्फी, मुंबई पुलिस ने सरेआम की बेईज्ज़ती, भेजा ई-चालान

mumbai police sent e chalan to varun dhawan

अमित द्विवेदी | Navpravah.com

अक्सर अपनी सक्रियता की वजह से मुंबई पुलिस चर्चा में रहती है। मुंबई पुलिस कितनी सक्रिय रहती है, इसका एक ताज़ा उदाहरण देखने को मिला है। अपने ट्विटर हैंडल के ज़रिए मुंबई पुलिस ने अभिनेता वरुण धवन को टैग करते हुए एक ट्वीट किया। इस ट्वीट में मुंबई पुलिस ने वरुण धवन को एक सजग और ज़िम्मेदार मुंबईकर बनने की नसीहत भी दी, साथ ही उनके घर ई-चालान भी भेज दिया। इस ट्वीट के जवाब में वरुण ने एक ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने अपनी गलती के लिए माफी मांगी।

दरअसल अभिनेता वरुण धवन ट्रैफिक के बीचो-बीच अपनी गाड़ी का शीशा नीचे करके एक लड़की के साथ सेल्फी लेते हुए नज़र आए, जिसके बाद मुंबई पुलिस ने उन्हें ट्वीट करके ऐसा न करने की नसीहत दी। मुंबई पुलिस ने अपनी ट्वीट में लिखा, “वरुण इस तरह का एडवेंचर निश्चित ही सिल्वर स्क्रीन पर अच्छा लगता होगा, लेकिन मुंबई की सड़कों पर नहीं। आपका यह कृत्य आपकी जान को तो जोखिम में डालेगा ही, साथ ही जो आपके प्रशंसक हैं, उन्हें भी गलत सन्देश मिलेगा। हम आप जैसे एक बेहद ज़िम्मेदार मुंबईकर से इस तरह के कृत्य की आशा नहीं करते। हालाँकि इस गलती के लिए हमने आपको ई-चालान भेज दिया है।”

मुंबई पुलिस के इस ट्वीट के बाद देखते देखते सैकड़ों लोगों ने पुलिस की सक्रिय सेवा की तारीफ़ की। लोगों ने अपने ट्वीट के ज़रिए मुंबई पुलिस का हौसला बढाते हुए लिखा कि “हमें इस बात की ख़ुशी और फ़क्र है कि हम एक ऐसे शहर में रहते हैं, जहां की पुलिस भेदभाव नहीं करती।

हालाँकि मुंबई पुलिस के ट्वीट के बाद वरुण धवन ने भी माफी भरा एक सन्देश ट्वीट किया। वरुण ने लिखा कि उस समय ट्रैफिक रुका हुआ था और मैं अपने फैन का दिल दुखाना नहीं चाहता था, इस वजह से मैंने सेल्फी ले ली, लेकिन मैं इस हरकत से शर्मिंदा हूँ, और माफी मांगता हूँ। मैं विश्वास दिलाता हूँ कि भविष्य में मुझसे ऐसी भूल नहीं होगी।”

भारत को लगातार धोखा देता रहा पाकिस्तान, आतंकी हाफिज सईद आज हो जाएगा रिहा

एनपी न्यूज़ डेस्क । Navpravah.com 
मुबई के 26/11 हमलों का मास्टर माइंड हाफिज सईद आज रिहा हो जाएगा, पाकिस्तान के न्यायिक समीक्षा बोर्ड ने आतंकी हाफिज सईद को रिहा करने के आदेश दिए हैं। इस आदेश के बाद जमात-उद-दावा चीफ हाफिज सईद के वकील ए. के. डोगर ने इंडिया टूडे से बातचीत में बताया कि हाफिज सईद के खिलाफ पाकिस्तान सरकार ने कोर्ट में कोई सबूत पेश नहीं किए हैं।
पाकिस्तान की धोखाधड़ी-
पाकिस्तान सरकार ने ही रिव्यू बोर्ड से हाफिज सईद का हाउस अरेस्ट तीन महीने बढ़ाने की मांग की थी, जिस पर सुनवाई के बाद हाफिज की रिहाई का आदेश दिया है। ए.के. डोगर ने बताया, ‘पाकिस्तान की सरकार ने कोर्ट में कभी कोई सबूत पेश नहीं किया, भारत सरकार की ओर से पाकिस्तान को सौंपे गए डोजियर (अभिलेख) भी कोर्ट को नहीं दिए गए हैं।
डोगर ने बताया, “इसके बाद ज्यूडिशियल रिव्यू बोर्ड ने हाफिज सईद के सारे रिकॉर्ड खंगाले और पाकिस्तान की पंजाब सरकार (प्रांतीय सरकार) से कहा कि जमात-उद-दावा चीफ को अब ज्यादा दिन हाउस अरेस्ट में नहीं रखा जा सकता, क्योंकि उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं है।
पाकिस्तान की पंजाब सरकार ने आतंकवाद रोधी कानून 1997 के तहत 31 जनवरी को सईद और उसके चार सहयोगियों को 90 दिनों के लिए हिरासत में लिया था। सईद के साथ उसके साथी अब्दुल्ला उबैद, मलिक जफर इकबाल, अब्दुल रहमान आबिद और काजी काशिफ हुसैन को हिरासत में लिया गया था।