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Thursday, September 3, 2026
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CBI निदेशक आलोक वर्मा पर केंद्र ने की बड़ी कार्रवाई 

CBI निदेशक आलोक वर्मा पर केंद्र ने की बड़ी कार्रवाई 
CBI निदेशक आलोक वर्मा पर केंद्र ने की बड़ी कार्रवाई 
सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्‍थाना पर केंद्र सरकार ने कड़ा रुख अख्‍तियार किया है, केंद्र सरकार ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा से न केवल उनके सभी अधिकार छीन लिए हैं, बल्कि देर रात आदेश जारी कर एम नागेश्‍वर राव को सीबीआई का नया अंतरिम निदेशक नियुक्‍त कर दिया है।
सरकार के इस फैसले के बाद सीबीआई हेडक्वार्टर स्थित आलोक वर्मा के और राकेश अस्थाना के ऑफिस को सील कर दिया गया है, वहां न तो सीबीआईकर्मियों और न ही बाहरी लोगों को जाने की इजाजत दी जा रही है।
वर्तमान समय में एम नागेश्‍वर राव सीबीआई में ही संयुक्‍त निदेशक के पद पर कार्यरत हैं, इसके अलावा, सीबीआई में कार्यरत अतिरिक्‍त निदेशक पॉलिसी अरुण शर्मा और डीआईजी मनीष कुमार सिन्‍हा के खिलाफ भी कार्रवाई कर छुट्टी पर भेज दिया गया है।
सीबीआई के दो बड़े अधिकारियों के बीच मचा घमासान अब अदालत की दहलीज पर पहुंच गया है और कल दिल्ली हाईकोर्ट ने सीबीआई को निर्देश दिया कि वह एजेंसी के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही में यथास्थिति बरकरार रखे।
जबकि वहीं एक निचली अदालत ने घूस लेने के आरोप में गिरफ्तार किये गए एजेंसी के डीएसपी देवेंद्र सिंह को सात दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है।
अदालत में सुनवाई के दौरान सीबीआई ने कहा कि, अस्थाना और देवेंद्र सिंह के खिलाफ जबरन वसूली और जालसाजी के आरोप जोड़े गए हैं, कुमार को कथित तौर पर घूस लेने, रिकॉर्ड में हेरफेर के मामले में सोमवार को गिरफ्तार किया गया था।
अपने ऊपर दर्ज एफआईआर को रद्द करने के लिए अस्थाना ने दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी, इस पर न्यायाधीश ने सीबीआई से कहा कि, वह मामले में विशेष निदेशक के खिलाफ शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही पर 29 अक्टूबर को मामले की अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनाए रखे।

नमो ऐप के जरिए पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने दान किए 1000 रुपए

नमो ऐप के जरिए पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने दान किए 1000 रुपए
नमो ऐप के जरिए पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने दान किए 1000 रुपए
भाजपा ने पार्टी कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों से ‘नमो एप’ के माध्यम से 5 रुपए से लेकर 1000 रुपए तक की धनराशि का योगदान देने का आग्रह किया है, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने नमो ऐप के माध्यम से पार्टी को 1000 रुपये दिए हैं।
अमित शाह ने अपने ट्विटर हैंडल से इसकी जानकारी दी है, बीजेपी अध्यक्ष ने लिखा, मैं खुद पार्टी कार्यकर्ता के तौर पर पार्टी फंड में नमो ऐप के जरिए 1000 रुपये दान कर रहा हूं और मैं सबसे अपील करता हूं कि आप इस मुहिम का हिस्सा बने।
इस मुहिम में केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज ने भी 1000 रुपए का योगदान दिया है, बीजेपी ने ऑनलाइन माध्यम से अपनी अपील में कहा है ‘आपका छोटा योगदान ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के निर्माण में बड़ा अंतर ला सकता है।
बीजेपी की वरिष्ठ नेता एवं केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज ने अपने ट्वीट में कहा है कि, मैंने भी इस एप पर 1000 रुपए की राशि दी है मेरा सभी बीजेपी कार्यकर्ताओं, समर्थकों तथा हितैषियों से अनुरोध है कि सार्वजनिक जीवन शुचिता बनाये रखने के लिए इस अभियान में अपना योगदान अवश्य दें।
पीएम मोदी नमो एप के जरिए अलग-अलग मौकों पर कार्यकर्ताओं के साथ संवाद स्थापित करते रहते हैं, पीएम मोदी आईटी पेशेवरों तथा विनिर्माण एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र से जुड़े युवाओं से, नमो एप पर विकसित किये जा रहे ‘सेल्फ 4 सोसाइटी’ मंच के जरिये 24 अक्टूबर को संवाद करेंगें।

राजस्थान : 48 घंटे के अंदर सरकार लगाए अवैध माइनिंग पर रोक – SC

पश्चिम बंगाल: कलकत्ता HC के आदेश के खिलाफ बीजेपी पहुंची SC
पश्चिम बंगाल: कलकत्ता HC के आदेश के खिलाफ बीजेपी पहुंची SC
राजस्थान के अरावली माइनिंग पर सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को निर्देश दिया है कि,  48 घंटे के अंदर अरावली क्षेत्र में 115 हेक्टेयर में हो रहे अवैध माइनिंग पर रोक लगाई जाए।
वहीं सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हैरान करने वाली जानकारी देते हुए कहा कि, दिल्ली बार्डर के पास अरावली क्षेत्र में 138 पहाड़ में से 28 पहाड़ गायब हो गए हैं, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि क्या लोग हनुमान हो गए हैं कि वह पहाड़ को लेकर गायब हो जा रहे हैं।
पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की अध्यक्षता वाली पीठ ने अंतिम सुनवाई की तारीख तय करते हुए कहा था कि, 6 हफ्ते बाद मामले में अंतिम सुनवाई की जाएगी।
सुनवाई के दौरान पर्यावरण मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि, 82 LOI (लेटर ऑफ इंटेंट) धारकों की लीज एक्सपायर हो चुकी है, ऐसे में अब इन धारकों के पर्यावरणीय मंजूरी पर पर्यावरण मंत्रालय विचार नहीं कर सकता।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि, आप खनन माफियाओं को पैदा कर रहे हैं और खनन माफिया लोगों की हत्या कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण मंत्रालय को 6 सप्ताह के भीतर अध्ययन रिपोर्ट पेश करने को कहा था, सुप्रीम कोर्ट में पर्यावरण मंत्रालय को ये भी बताने को कहा था कि निर्माण कार्यों के लिए बजरी या फिर बालू क्यों आवश्यक है।
राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की थी कि, जिन 12 लाइसेंस होल्डरों को पर्यावरण मंजूरी मिल गई है, उन्हें बजरी खनन की इजाजत दी जाए, सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया था कि बजरी खनन के लिए सबसे पहले यह बताना होगा कि निर्माण कार्यों के लिए बजरी या फिर बालू क्यों आवश्यक है और इनके बिना निर्माण क्यों नहीं हो सकता है।

#LetAvniLive : बाघिन अवनी को मौत की सज़ा कितनी जायज़!

#LetAvniLive : बाघिन अवनी को मौत की सज़ा कितनी जायज़!
#LetAvniLive : बाघिन अवनी को मौत की सज़ा कितनी जायज़!

विवेक राय | Navpravah.com

अवनी

एक पाँच साल की बाघिन जो अपने दो बच्चों के साथ जंगल में रहती है , जिसको मारने के लिए पीछे छः महीने से पूरा प्रशासन पड़ा हुआ है … इटालीयन हाउंड्ज़ से लेके बदनाम शिकारी नवाब शफ़त अली तक की सेवाएँ ली जा रही है , फ़ेमस गोल्फ़र ज्योति रंधावा डॉग हैंड्लर की भूमिका में है इस पूरे ओपरेशन में …

लेकिन ऐसा क्या किया अवनी ने जिसके लिए सब उसके पीछे पड़ गए है , एक्चुआलि अवनी पर आरोप है कि पिछले दो सालों में अवनी ने तेरह लोगों को अपना शिकार बनाया और “मैन ईटर यानी कि आदमखोर “ हो गयी …. लेकिन ये आरोप केवल आरोप ही है क्यूँकि तेरह लोगों में से केवल एक की हत्या वैज्ञानिक रूप से प्रूफ़ हुयी है कि वो अवनी के हाथों मारा गया है बाक़ी बारह लोगों की हत्या का शक है अवनी के ऊपर ….

वैसे शेर मैन ईटर तब कहा जाता है जब वो आसान शिकार की ताक में मनुष्य को मार के खाने लगे , अक्सर घायल शेर मैन ईटर बनते है जब वो अन्य जनवारो(जो कि तेज़ होते है उनका शिकार करने में सक्षम नहीं रह पाते ) , दूसरा मैन ईटर बनते ही शेर बहुत कुटिल हो जाता है वो बडी धूर्तता से मनुष्यों में से भी कमज़ोर (बच्चों और बूढ़ों)को चुन के मारता है …. “मैन ईटर ऑफ़ रूद्रप्रयाग “ पढ़नी/देखनी चाहिए(यूट्यूब पर) कि वो तेंदुआ कैसे लोगों की बस्ती से बच्चे उठा ले जाता था , क्लेम करते है लोग कि माँ बाप के बीच में सोए हुवे बच्चे को भी वो इतनी सफ़ाई से उठाता था कि माँ बाप की नींद ना खुले …. ३३ से ज़्यादा मैन ईटर मारके विश्व प्रसिद्ध होने वाले जिम कार्बेट उस शिकार को अपने जीवन का सबसे मुश्किल शिकार बताते थे ….

हाँ तो बात कर रहे थे हम अवनी की , अवनी के ऊपर जिन हत्याओं का आरोप है उसमें से कोई हत्या बस्ती में घुस के नहीं की गयी है , अधिकतर केसों में लाश को खाया तक नहीं है उसने … रणथंबौर में “T-24 उर्फ़ उस्ताद” भी कुछ वक़्त पहले इसी तरह बदनाम हुआ था जब उसने एक के बाद एक तीन लोगों को मार दिया, बाद में जब इंवेस्टिगेशन हुयी तो पता चला कि एक झाड़ी में छुपे उस्ताद पर रोड बनाने में लगे मज़दूर ने मूत दिया था और मारा गया , दूसरी हत्या उसके द्वारा तब हुयी जब फ़ॉरेस्ट गार्ड सैनी उसके ‘किल’के बीच में आ गया ….

अवनी आज भी जंगल में अपना और अपने बच्चों का पेट भरने के लिए जानवरों का शिकार कर रही है , भूख लगने पर भी वो बस्ती और आसपास नहीं जा रही है… जितने भी लोग मारे गए है वो
सब ख़ुद शेर के घर में गए थे (रिस्ट्रिक्टेड एरीया में)….. फिर अवनी की ग़लती क्या है ? शायद ये कि वो इंसानो की बनायी दुनिया में अपना पक्ष नहीं रख सकती, हमारे बनाए पैरामीटर पर हमसे तर्क नहीं कर सकती,

अब हमें तय करना है कि हम इतनी छोटी छोटी बात/बिना किसी ग़लती के वन्य जीवों को मारते रहेंगे या हमारा स्टैंड कुछ अलग होगा??

मेरा मत एकदम साफ़ है #LetAvniLive

(आलेख साभार- विवेक राय की फेसबुक पोस्ट)

कवि के पुनरागमन का हलफ़नामा है ‘सृष्टि पर पहरा’    

कवि के पुनरागमन का हलफ़नामा है 'सृष्टि पर पहरा'    
कवि के पुनरागमन का हलफ़नामा है 'सृष्टि पर पहरा'    

कवि के पुनरागमन का हलफ़नामा है ‘सृष्टि पर पहरा’    

   ‘सृष्टि पर पहरा’ कवि एवं आलोचक केदारनाथ सिंह का वर्ष 2014 में प्रकाशित आठवाँ एवं अंतिम कविता संग्रह है । पुस्तक को पढ़कर आश्चर्य होता है कि कैसे कोई सर्जक अपनी मृत्यु का पूर्वाभास कर सकता है ? उन्हें यकीन है कि उनका पुनरागमन होगा। यह ‘पुनरागमन’ कुछ और नहीं बल्कि कवि की ‘जिजीविषा’ और ‘आशावाद’ है । बड़ी सादगी और निडरता से जीवन की सच्चाई को ‘जाऊँगा कहाँ’ शीर्षक कविता में लिखते हैं – 
“देखना
रहेगा सब जस का तस
सिर्फ़ मेरी दिनचर्या बदल जाएगी
साँझ को जब लौटेंगे पक्षी
लौट आऊँगा मैं भी
सुबह जब उड़ेंगे
उड़ जाऊँगा उनके संग…”
                   संयोग की बात यह कि ‘जाऊँगा कहाँ’ शीर्षक की कविता इस कृति की अंतिम कविता है । वैसे तो इस पुस्तक में कुल 59 कविताएँ संगृहीत हैं, किंतु अधिकांश ग्रामीण परिवेश से उपजी हैं । यह इसलिए भी, कि उम्र की ढलान में गाँव की स्मृतियाँ अधिक बलवती होती हैं । कवि वहाँ की आबो-हवा से बेहद प्यार करता है । इसीलिए केदारनाथ जी ने यह पुस्तक गाँव के उन लोगों को समर्पित की है ‘जिन तक यह किताब कभी नहीं पहुँचेगी’ । ‘एक पुरबिहा का आत्मकथ्य’, ‘फ़सल’, ‘समय से पहली मुलाक़ात, ‘अगर इस बस्ती से गुज़रो’, ‘नदी का स्मारक’, ‘सृष्टि पर पहरा’, ‘बबूल के नीचे सोता बच्चा’, ‘अन्न संकट?’, ‘लौटते हुए बगुले’ ‘भोजपुरी’, ‘देश और घर’, ‘कन्धे की मृत्यु’, ‘बैलों का संगीत-प्रेम’, ‘जहाँ से अनहद शुरू होता है’, ‘काली सदरी’, ‘हीरा भाई’, ‘एक लोकगीत की अनु-कृति’, ‘एक ठेठ किसान के सुख’ और ‘जाऊँगा कहाँ’ शीर्षक कविताओं में कवि की बेचैनी साफ नज़र आती है । उनकी छटपटाहट की एक बानगी ‘काली सदरी’ शीर्षक कविता में देखें –
“मैंने कोशिश बहुत की
कि वह ज़रा-सी धूल
मेरे संग-संग बची रहे महानगर में
पर पता नहीं कैसे
धीरे-धीरे झरती रही वह
झरती रही मेरी पहचान
मेरी देह से धीरे-धीरे
और एक दिन मैंने पाया
अब मेरी पहचान
80/3 दिल्ली है

पर सुनो
ओ उस सुदूर कस्बे के लोगो
तुम्हारी धूल तो बचा न सका मैं
पर महानगर को लगे चाहे जितना अटपटा
एक दिन वह काली सदरी
जो अब हो चुकी है जर्जर
पहनकर ज़रूर आऊँगा”
                केदारनाथ सिंह का जन्म पूर्वी उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद में हुआ था। आरम्भिक शिक्षा भी गाँव में संपन्न हुई। अतः भोजपुरी की मिठास इन्हें विरासत में मिली थी। भोजपुरी से हिंदी में और हिंदी से भोजपुरी में इनका आना-जाना था। एक उनका घर  तो दूसरा देश। कहीं कोई अवरोध नहीं। ख़लल नहीं । ‘देश और घर’ शीर्षक कविता में लिखते हैं – “हिंदी मेरा देश है / भोजपुरी मेरा घर / घर से निकलता हूँ / तो चला जाता हूँ देश में / देश से छुट्टी मिलती है / तो लौट आता हूँ घर / इस आवाजाही में / कई बार घर में चला आता है देश / देश में कई बार / छूट जाता है घर /” भोजपुरी को कवि ने ‘ध्वनि-लोकतंत्र’ माना है जिसके ‘हम’ में करोड़ों ‘मैं’ की धड़कनें सुनाई देती हैं । इस भाषा ने निसर्ग से ध्वनियाँ प्राप्त की हैं । ‘बिजली की कौंध’ और ‘महुए की टपक’  ने इसे समृद्धि दी है । भाषाई गौरव के ये शिल्प देखें – 
“कभी आना मेरे घर
तुम्हें सुनाऊँगा
मेरे झरोखे पर रखा एक शंख है यह
जिसमें धीमे-धीमे बजते हैं
सातों समुद्र”
            कवि की ख़ासियत यह है कि लगभग नगण्य समझी जाने वाली चीजों को बड़े सलीके से तराशकर  विशिष्ट अर्थ में बदल देते हैं। ऐसा लगता है कोई कलाकार कीचड़ में पड़े अणुओं को इकट्ठाकर बेशकीमती पत्थर बना रहा हो और ये चमकदार पत्थर बिंब-शृंखला में बदलते जा रहे हों । यहाँ कवि वराह अवतार-सा लेता प्रतीत होता है । सदियों से गुमनामी के अँधेरे में पड़े शब्द सहसा अनेक अर्थ-छवियों से दीप्त  हो उठते हैं । ये अपनी पूर्णाभा के साथ प्रत्येक कविता में मौजूद होते हैं । इनकी सादगी अपने पाठकों पर गहरा प्रभाव छोड़ती है । एक बिंब ‘कृतज्ञ कीचड़’ शीर्षक कविता में कितना स्वाभाविक बन पड़ा है – 
“उस कीचड़ के तल में
बस ज़रा-सा जल था
कोई जानवर अभी-अभी गया था
उसे जबड़ों से सुड़ककर
उसके जबड़ों की
गरम-गरम भाप
अब भी टँगी थी हवा में
खुरों के लम्बे निशान गवाह थे
कि कृतज्ञ कीचड़
उस प्यासे को छोड़ने 
कुछ दूर गया था”
               कवि की भाषा अपने पाठकों से संवाद स्थापित करती है । लगता है कि इन कविताओं की भाषा किसी शीर्षस्थ कवि की नहीं, बल्कि भोजन की तलाश करते चिरई-चुरङ्ग और किसी मज़दूर के कन्धे की अनकही है । गंगा की तरह पारदर्शी और पवित्र । अबाध प्रवाह का कलकल निनाद मनोहारी है। यहाँ कविता में जीवन पलता है। जड़-चेतन में कोई भेद नहीं। संवाद का ऐसा खुला मंच, जहाँ मनुष्य ही नहीं बल्कि वनस्पतियाँ भी आपस में बतियाती हैं – “आम की सोर पर / मत करना वार / नहीं तो महुआ रातभर / रोएगा जंगल में / कच्चा बाँस कभी काटना मत / नहीं तो सारी बाँसुरियाँ / हो जाएँगी बेसुरी / कल जो मिला था राह में / हैरान-परेशान / उसकी पूछती हुई आँखें / भूलना मत / नहीं तो साँझ का तारा / भटक जाएगा रास्ता ।”
           साहित्य और सत्ता में सदैव अनबन रही है। इन दोनों में कभी पटी नहीं। लगभग सभी कालजयी रचनाएँ राजाश्रय से अलग रहकर लिखी गईं। इसी कारण साहित्य का इतिहास समृद्ध हो सका। साहित्य एवं साहित्यकार की यह समृद्धि कहीं न कहीं हमारा पथ-प्रदर्शन करती है। डगमगाते कदमों का सम्बल बनती है। केदारनाथ जी ने भक्तिकालीन कवि कुम्भनदास की पीड़ा को समकालीन संदर्भों में मार्मिक अभिव्यक्ति दी है । महल का चक्कर लगाने में कुम्भनदास की पनही का टूटना तथा झोली से हरिनाम का गिरना, द्रवित करता है, किंतु दूसरे ही क्षण ‘हिंदी की वह सबसे अकेली पंक्ति’ का प्रस्फुटित होना अपने आप में असाधारण है। ‘कवि कुम्भनदास के प्रति’ शीर्षक कविता की इन पंक्तियों की तपिश को महसूस करें –
“सन्तकवि
खड़ा हूँ आपकी समाधि के सामने
और मेरे दिमाग़ में गूँज रही है
आपकी वह पंक्ति –
‘सन्तन को कहा सीकरी सों काम’
सदियों पुरानी एक छोटी-सी पंक्ति
और उसमें इतना ताप
कि लगभग पाँच सौ वर्षों से हिला रही है हिन्दी को”
             माँ के बाद पत्नी का जीवन में महत्त्वपूर्ण स्थान है। पत्नी सुख-दुःख की सहधर्मिणी होती है। उसके न होने की कल्पना मात्र से रूह काँप जाती है। सही मायने में बुढ़ापे की लाठी संतान नहीं बल्कि पति-पत्नी का साथ है। कवि हृदयेश मयंक ने ठीक  लिखा है – साँप सूँघ जाता है यह सोचकर / कि जब वह हमसे हो जायेगी दूर / कैसे मैं पहचान पाऊँगा / तेल और इत्र की शीशियाँ / शायद दिन भर ढूँढ़ता रह जाऊँ रूमाल / और वह पड़ा रह जायेगा शर्ट के नीचे /  बिना मोज़े ही जा आऊँगा बाज़ार / और देर रात तक नहीं मिलेगी ऐनक।” वहीं ‘सृष्टि पर पहरा’ का कवि पत्नी-बिछोह की पीड़ा से छटपटा रहा है। पत्नी के जाने के बाद एक-एक कर सभी चले गए  – ढेर सारे पक्षी, जाने कितनी भाषाएँ और कितने जलस्रोत। बाकी जो बचा, वह शून्य था। उसी में रहने आ गए थे झुंड के झुंड शब्द और किताबों के रेवड़। इस स्थान पर कवि  अपनी पत्नी को कविता से अधिक ऊँचाई प्रदान करता है। पद-प्रतिष्ठा-पुरस्कार में सब कुछ था, किंतु वही नहीं थी। कवि का दर्द ‘पत्नी की अट्ठाइसवीं पुण्यतिथि पर’ शीर्षक कविता में कुछ यूँ छलका –
“और जब अलंकृत होकर
उतर रहा था नीचे
तो लगा
कोई कान में बुदबुदा रहा है –
कवि जी,
यह कैसा मंच है 
शब्दों का यह कैसा उत्सव
जहाँ प्यार की एक ही तुक है
पुरस्कार !”
           अनुभवों के कई सीमांतों को छूता यह संग्रह अनुपम है। कविता के कई प्रतिमान यहाँ टूटते एवं बनते हैं। ‘एक सूखते हुए वृक्ष की फुनगी पर महज़ तीन-चार पत्तों का हिलना’ कथ्य और शिल्प के धरातल पर  कई अर्थ-छवियों को उकेरता है। सारी अर्थ छवियाँ अपने पूर्ण प्रभाव में पाठकों के मन-मस्तिष्क पर अमिट छाप छोड़ती हैं। एक खूबसूरत बिंब का आनंद ‘सृष्टि पर पहरा’ शीर्षक कविता में लें –
“जड़ों की डगमग खड़ाऊँ पहने
वह सामने खड़ा था
सिवान का प्रहरी
जैसे मुक्तिबोध का ब्रह्मराक्षस-
एक सूखता हुआ लंबा झरनाठ वृक्ष
जिसके शीर्ष पर हिल रहे
तीन-चार पत्ते

कितना भव्य था
एक सूखते हुए वृक्ष की फुनगी पर
महज तीन-चार पत्तों का हिलना

उस विकट सुखाड़ में
सृष्टि पर पहरा दे रहे थे
तीन-चार पत्ते”
              निष्कर्षतः ‘सृष्टि पर पहरा’ कविता-संग्रह हिंदी साहित्य की अनमोल धरोहर है। इस अद्भुत कृति का स्थान समकालीन कविता में विशिष्ट है । अनुभव की टकसाल से निकला हर शब्द  पठनीय और संरक्षणीय। अस्तु।

– जीतेन्द्र पांडेय

पुस्तक      – सृष्टि पर पहरा
कवि         – केदारनाथ सिंह
प्रकाशक   – राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली 
मूल्य         – ₹ 250

पीएम मोदी पर भड़के शरद पवार, मन की बात को लेकर कसा तंज

शरद पवार ने कहा कि, PM मोदी ने जन की बात सुनी नहीं, मन की बात करते हैं
शरद पवार ने कहा कि, PM मोदी ने जन की बात सुनी नहीं, मन की बात करते हैं
सौम्या केसरवानी | Navpravah.Com 
यूपीए सरकार में सहयोगी रही राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार एक निजी चैनल के कार्यक्रम में मौजूद रहे, जहां उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनाव से लेकर महागठबंधन और मोदी सरकार के कामकाज पर अपने विचार रखे।
पीएम मोदी के कार्यकाल की सफलता के बारे में तंज भरा जवाब देते हुए पवार ने कहा कि, पीएम मोदी एक शक्तिशाली लीडर के तौर पर उभरे हैं, उन्होंने कहा कि वो भारतीय जनता पार्टी के अंदर यह साबित करने में कामयाब हो गए हैं, लेकिन देश के लिए वो सफल लीडर नहीं हैं।
हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि, मोदी सरकार ने स्थायी नेतृत्व देने में सफल हो गई है, इसे मैं स्वीकार करता हूं, उन्होंने फिर तंज कसते हुए कहा, पीएम ने कभी जन की बात नहीं सुनी, वो सिर्फ मन की बात करते हैं, यही उनकी सफलता है।
मोदी सरकार की कमजोरी पर जब शरद पवार से सवाल किया गया तो उन्होंने उनके मंत्रिमंडल पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं, पवार ने कहा, मोदी के पास टीम तो है, लेकिन उसके अंदर क्षमता नहीं है।
मोदी सरकार पर टिप्पणी करते हुए शरद पवार ने ये भी कहा कि, फिलहाल भारतीय जनता पार्टी और सरकार को बस दो लोग चला रहे हैं, जिनमें पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल है।
वहीं कांग्रेस में वापसी को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि, मैंने ऐसा नहीं सोचा नहीं और न ही कोई इरादा है, हम एनसीपी में खुश हैं, इसलिए ऐसी बातों पर ध्यान न दें।
सोनिया गांधी के खिलाफ बगावत करने के बाद लोगों ने कहा कि, शरद पवार उन पर भरोसा नहीं कर सकते, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि अगर भरोसा नहीं होता तो साथ में सरकार क्यों बनाते हमने राज्य में भी और केंद्र दोनों जगह कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाई है।
कांग्रेस कमजोर कड़ी है, इस सवाल पर उन्होंने कहा ऐसा मुझे नहीं लगता, हर राज्य में हम गठबंधन की कोशिश करेंगें, उसमें कांग्रेस की भी जरूरत होगी, कांग्रेस का रोल हर राज्य में होगा, उसे नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं।

प्रेम में हिन्दुस्तान से खिंचा चला आया पाकिस्तान – नवाज शरीफ

प्रेम में हिन्दुस्तान से खिंचा चला आया पाकिस्तान - नवाज शरीफ
प्रेम में हिन्दुस्तान से खिंचा चला आया पाकिस्तान - नवाज शरीफ

सौम्या केसरवानी | Navpravah.Com 

पाकिस्तान के पूर्व पीएम नवाज शरीफ ने भावुक बयान दिया है, नवाज शरीफ ने कहा, मैं देशद्रोही नहीं हूं, मैं और मेरा परिवार पाकिस्तान की जमीन से प्यार करता है।
उन्होंने कहा कि, वे और उनका परिवार पाकिस्तान से प्रेम करते हैं, यही वजह है कि 1947 में जब देश का बंटवारा हुआ तो उनका परिवार हिन्दुस्तान छोड़कर पाकिस्तान आ गया था।
नवाज शरीफ पर देशद्रोह का मुकदमा चल रहा है, इसी मामले में सुनवाई हुई, सुनवाई के दौरान नवाज शरीफ ने अपने बचाव में कहा कि, उनकी देशभक्ति पर सवाल न उठाया जाए, वे पाकिस्तान से बेइंतहा प्रेम करते हैं। 
नवाज शरीफ ने एक इंटरव्यू में कबूल किया था कि 2008 के मुंबई आतंकी हमले में पाकिस्तान का हाथ था, उनके इस बयान को देश के खिलाफ गद्दारी बताया जा रहा है।
लाहौर हाई कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए नवाज ने कहा, जिस व्यक्ति ने देश को परमाणु राष्ट्र बनाया वह देशद्रोही कैसे हो सकता है, हाल में हुए उपचुनाव में जिस व्यक्ति की पार्टी को सबसे ज्यादा वोट मिले वह देशद्रोही कैसे हो सकता है। 
शरीफ ने गद्दारी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा, मुझे और मेरे परिवार को इस मिट्टी (पाकिस्तान) के जर्रे जर्रे से मोहब्बत है, शरीफ के पिता मियां मोहम्मद शरीफ पंजाब के तरन तारन जिले के जट्टी उमरा में रहते थे, 1947 में विभाजन के पश्चात वह लाहौर चले गए थे।
मामले में अपने जवाब में एक अन्य पूर्व प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी ने इस बात से इंकार कर दिया कि उन्होंने मुंबई आतंकवादी हमलों में शामिल होने वाले लोगों के बारे में शरीफ की टिप्पणी के संबंध में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक की जानकारी साझा की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने शर्तों के साथ दिवाली पर पटाखों की बिक्री पर दी मंजूरी

सुप्रीम कोर्ट ने शर्तों के साथ दिवाली पर पटाखों की बिक्री पर दी मंजूरी
सुप्रीम कोर्ट ने शर्तों के साथ दिवाली पर पटाखों की बिक्री पर दी मंजूरी

सौम्या केसरवानी | Navpravah.Com 

सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली पर राहत की खबर दी है, सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में कुछ शर्तों के साथ दिवाली पर पटाखा बिक्री की अनुमति दी है, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि, देश भर में पटाखों की बिक्री पर पूरी तरह से रोक नहीं है, केवल लाइसेंस धारक दुकानदार ही पटाखे बेच पाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार, रात 8 बजे से 10 बजे तक ही पटाखे फोड़ने की अनुमति दी गई है, सुप्रीम कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ ऐसे पटाखों की खरीद और ब्रिकी की इजाजत दी है।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन पटाखों की बिक्री पर रोक लगा दी है, ऐसे में फ्लिपकार्ट, अमेजन जैसी वेबसाइट पर पटाखों की बिक्री नहीं होगी, सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली के अलावा क्रिसमस और नव वर्ष पर रात 11:45 से 12:30 के बीच पटाखे जलाने की अनुमति दी है।
बता दें कि, अर्जुन गोपाल सहित अन्य लोगों ने याचिका दायर कर देशभर में पटाखों के उत्पादन और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की थी, पटाखों पर पूरी तरह प्रतिबंध संबंधी याचिका में दलील दी गई थी कि 1 नवंबर से शादियों का सीजन शुरू हो जाएगा जिसमें बड़े पैमाने पर पटाखों की मांग होगी जो शहर की हवा सबसे खराब समय होता है।
गौरतलब है कि, सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल दिवाली से पहले दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर बैन लगाने का फैसला किया था, कोर्ट के इस फैसले का एक ओर लोगों ने स्वागत किया था वहीं कुछ लोगों ने इसे परंपरा और आस्था से जोड़ते हुए कोर्ट के इस फैसले से विरोध भी जताया था।

एक्टर एजाज खान ड्रग्स के साथ हुए गिरफ्तार, 8 प्रतिबंधित गोलियां बरामद 

एक्टर एजाज खान ड्रग्स के साथ हुए गिरफ्तार, 8 प्रतिबंधित गोलियां बरामद 
एक्टर एजाज खान ड्रग्स के साथ हुए गिरफ्तार, 8 प्रतिबंधित गोलियां बरामद 
ज्योति विश्वकर्मा | Navpravah.Com 

 
बिग बॉस 8 में बतौर कंटेस्टेंट नजर आने वाले बॉलीवुड एक्टर और टीवी अभिनेता एजाज खान को हाल ही में गिरफ्तार कर लिया गया है। न्यूज एजेंसी एएनआई के ट्वीट के मुताबिक एजाज को ड्रग्स मामले में गिरफ्तार किया गया है। ट्वीट में दी गई जानकारी के मुताबिक ऐजाज खान को कल रात को गिरफ्तार किया गया है। उन्हें नार्कोटिक्स के साथ गिरफ्तार किया गया है और आज कोर्ट में पेश किए जाएंगे। 
 
 नवी मुंबई पुलिस ने मंगलवार को उन्हें गिरफ्तार किया और साथ ही दो मोबाइल फोन भी जब्त किए. फिलहाल नार्कोटिक्स सेल एजाज से पूछताछ कर रही है. उनके पास से प्रतिबंधित ड्रग्स (एक्सटेसी) की 8 गोलियां बरामद हुईं। गोलियों का वजन 2.3 ग्राम है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत तकरीबन 2.2 लाख रुपए है।  
 
रक्‍त चरित्र, नायक और या रब जैसी फिल्‍मों में काम कर चुके एजाज खान बिग बॉस के सीजन 7 सहित कॉमेडी नाइट विथ कपिल, करम अपना अपना, कहानी हमारे महाभारत की और रहे तेरा आर्शीवाद में भी नजर आ चुके हैं।  सूत्रों के मुताबिक, जब एजाज को पकड़ा गया तब भी वे नशे की हालत में ही थे।एएनआई के मुताब‍िक, एक होटल में रेव पार्टी के दौरान छापा मारा गया और एजाज खान वहां से ही गिरफ्तार किए गए। 
 
एजाज एक्ट्रेस निधि कश्यप के साथ रिलेशनशिप में थे। बाद में निधि ने उन पर दुष्कर्म का आरोप लगाया। 2011 में निधि ने शिकायत वापस ले ली थी। एजाज बिग बॉस-7 में साथी कन्टेस्टेंट के साथ मारपीट के बाद सुर्खियों में आए थे।बिग बॉस में साथी कन्टेस्टेंट अली के साथ मारपीट करने के आरोप में वे घर से निकाले गए थे। 

अब दया नहीं तोड़ेगा दरवाज़ा, 21 साल बाद बंद होगा CID 

अब दया नहीं तोड़ेगा दरवाज़ा, 21 साल बाद बंद होगा CID 
अब दया नहीं तोड़ेगा दरवाज़ा, 21 साल बाद बंद होगा CID 
ज्योति विश्वकर्मा | Navpravah.Com 

दरवाजे तोड़ने वाला दया हमेशा एसीपी प्रद्युमन के साथ रहा। चाहे जैसी भी मुश्किलें आईं, एक से बढ़कर एक पेचीदा केस को इस टीम ने मिलकर सुलझाया। कभी-कभी तो हालात ऐसे हो जाते थे कि केस सॉल्व हुए बिना दर्शकों को भी चैन की नींद नहीं आती थी। ये सब फैन्स का दीवानापन था जो मेकर्स भी इतने सालों से इस शो आगे बढ़ा रहे थे। लेकिन अब ये सिलसिला थमने वाला है। 
 
सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन ने एक वक्तव्य जारी कर कहा हैः “CID अपने 20 साल पूरे करने जा रहा है, इस तरह सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन पर सबसे ज्यादा समय तक चलने वाला शो बन गया है। अभी तक बहुत शानदार सफर रहा है। अब CID 28 अक्टूबर से कुछ समय के लिए बंद हो रहा है। शो का आखिरी एपिसोड 27 अक्टूबर को रिलीज होगा। शो नए सीजन के साथ लौटेगा और नई रहस्यमय कहानियां भी होंगी ताकि ऑडियंस पहले जैसा रोमांच हासिल कर सकें.”
 
CID 1997 से लगातार दर्शकों का मनोरंजन कर रहा है। हाल ही में 1546 एपिसोड्स पूरे किए थे। शो को बंद किए जाने के पीछे कोई खास कारण समझ नहीं आया क्‍योंकि टीआरपी के मामले में आज भी ये शो पीछे नहीं है। शो के प्रमुख किरदार एसीपी प्रद्युमन के रोल में शिवाजी साथम, दयानंद शेट्टी बतौर इंस्पेक्टर दया और आदित्य श्रीवास्तव को अभिजीत के रोल में पहचाना जाता है।  दर्शक सीआईडी के बंद होने पर दुखी हैं और ट्वीट कर शो के मेकर्स से इसे बंद न करने की अपील कर रहे हैं। जैसे ही शो के ऑफ एयर होने की खबर आई तुरंत ट्व‍िटर पर #SaveCID शुरू हो गया।