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Tuesday, September 8, 2026
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यूपी: गायिका से दुष्कर्म मामले में बाहुबली विजय मिश्रा दोषी करार, पुत्र विष्णु व पौत्र विकास दोषमुक्त

रामकृष्ण पाण्डेय | navpravah.com

भदोही (यूपी)। पिछले तीन साल से कई गम्भीर अपराधिक मामलों में आगरा जेल में निरुद्ध भदोही के ज्ञानपुर से चार दफा विधायक रहे बाहुबली विजय मिश्रा की मुश्किलें शुक्रवार को और बढ़ गईं। भदोही की एमपी-एमएलए कोर्ट ने विजय मिश्रा को वाराणसी की गायिका के साथ रेप के मामले में दोषी करार दे दिया। राहत की बात यह रही कि न्यायाधीश सुबोध सिंह की अदालत ने इसी मामले में पूर्व विधायक के बेटे विष्णु मिश्रा व पौत्र विकास मिश्रा को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।

शासकीय अधिवक्ता फौजदारी दिनेश पाण्डेय ने बताया कि कोर्ट ने रेप मामले में दोषसिद्ध अभियुक्त विजय मिश्रा पर शनिवार 04 नवम्बर को सजा सुनाने की तिथि नियत की है। गैंगरेप का यह मामला वर्ष 2020 में गोपीगंज थाने में दर्ज किया गया था।

यह था पूरा मामला-

बता दें कि वाराणसी की रहने वाली एक गायिका ने पूर्व विधायक विजय मिश्रा, पुत्र विष्णु मिश्रा एवं पौत्र विकास मिश्रा पर सामुहिक दुराचार का मामला वर्ष 2020 में भदोही के गोपीगंज थाने में दर्ज कराया था। उस वक्त विजय मिश्रा विधायक थे, और रिश्तेदार की संपत्ति हड़पने के मामले में मध्यप्रदेश से गिरफ्तार होकर यूपी की जेल में निरुद्ध थे। सिंगर ने आरोप लगाया था कि साल 2014 में लोकसभा चुनाव के दौरान वह कार्यक्रम के लिए टीम के साथ भदोही आई थी। उसी समय हुए परिचय के बाद पूर्व विधायक ने युवती के साथ असलहे व अपने प्रभाव एवं हनक का भय दिखाकर कई बार उसके संग कुकर्म किये। बाद में पूर्व एमएलए के पुत्र विष्णु व भाई के नाती विकास मिश्रा ने भी उसके संग दुराचार किया। पीड़िता के अनुसार विजय मिश्रा धमकाकर वीडियो कॉल पर भी उसके साथ अश्लीलता करते थे।

कोर्ट ने पूर्व विधायक को माना दुराचार का दोषी, 04 नवम्बर को सजा का ऐलान-

पूर्व विधायक विजय मिश्रा को भदोही की एमपी-एमएलए कोर्ट के न्यायाधीश सुबोध सिंह ने रेप की धारा 376 (2)(एन) में दोषी करार दिया है। इस मामले में कोर्ट 04 नवंबर को सजा सुनायेगी। कोर्ट ने मामले के दों और अभियुक्त पूर्व विधायक के बेटे व पोते को दोषमुक्त कर दिया है। जिसके बाद गैंगरेप का मामला न बनने पर पूर्व विधायक दुष्कर्म के दोषी पाए गए। बता दें कि वाराणसी की युवती की तहरीर पर भदोही के गोपीगंज कोतवाली में धारा 376 डी, 342 व 506 के तहत मुकदमा 03 नामजद आरोपियों के खिलाफ दर्ज हुआ था।

मामले में नामजद विजय मिश्रा उनके पुत्र व पौत्र पर कोर्ट में आरोप तय होने के बाद ट्रायल चल रहा था। ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष व आरोपी (प्रतिवादी) पक्ष द्वारा साक्ष्य, गवाह पेश किए गए। साथ ही लम्बी बहस व जिरह के बाद कोर्ट ने फैसले के लिए 03 नवम्बर 2023 तिथि सुनिश्चित की थी। विधिक जानकार बताते हैं कि दोषी पाए गए धारा-376(2)-एन दंड संहिता में कम से कम 07 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास की सजा पूर्व में निर्धारित थी। किंतु निर्भया कांड के बाद उक्त दंड संहिता में सजा के प्राविधान में बढ़ोत्तरी की गई। अब इस धारा में कम से कम 10 वर्ष से लेकर उम्रकैद तक की सजा निर्धारित है। फिलहाल यह मामला निर्भया कांड के पूर्व का बताया गया है। इसलिए इस मामले में विधिक जानकार कुछ कहने से कतराते नजर आए। फिलहाल कोर्ट इस मामले में सजा पर फैसला 04 नवम्बर शनिवार को सुनायेगी।

दर्ज हैं 83 मुकदमें, गैंगस्टर एक्ट के तहत विजय मिश्रा व कुनबे की 60 करोड़ से अधिक की संपत्ति हो चुकी है कुर्क-

सपा व निषाद पार्टी से विधायक रहे बाहुबली विधायक विजय मिश्रा की छवि पूर्वांचल के दबंग ब्राह्मण नेताओं वाली रही है। सपा की सरकार में विजय मिश्रा की तूती बोलती थी, लेकिन पिछले 03 सालों से सितारे गर्दिश में हैं। माफिया के तौर पर चिन्हित कर योगी सरकार में लगातार बाहुबली पर शिकंजा कसा जा रहा है।

विजय मिश्रा पर हत्या, हत्या के प्रयास, रंगदारी, धमकी व बलात्कार सहित करीब 83 मुकदमे दर्ज हैं। मार्च 2023 में आर्म्स एक्ट मामले में प्रयागराज की एमपी एमएलए कोर्ट ने 5 वर्ष की सजा का ऐलान किया था। और आर्म्स एक्ट के ही एक मामले में 2022 में भदोही न्यायालय ने भी ढ़ाई साल की सजा का ऐलान किया था, जिस पर फिलहाल जिला अदालत ने रोक लगा दी थी। वहीं अब रेप के मामले में कोर्ट ने दोषी माना है। गैंगस्टर एक्ट के तहत विजय मिश्रा, परिवार एवं उसके सक्रिय सदस्यों की अब तक करीब 60 करोड़ से अधिक की चल-अचल संपत्तियां राज्य सरकार के पक्ष में जिला प्रशासन ने अटैच की है।

दिल्ली: चाँदनी चौक में बिज़नेसमैन पर जानलेवा हमला, लूटपाट की वजह से सहमे इलाक़े के व्यापारी

ब्यूरो | navpravah.com

दिल्ली में आम नागरिक सुरक्षित नहीं हैं, इसका एक ताज़ा उदाहरण सामने आया है। दिल्ली के सबसे व्यस्ततम् इलाक़े में से एक चाँदनी चौक में खुलेआम लूटपाट हो रही है। बदमाश बेख़ौफ़ होकर घूम रहे हैं और पुलिस अपनी धुन में मस्त है। आदमी की तो बात छोड़ दीजिए, इस इलाक़े में वर्षों से व्यापार करने वाले व्यापारी भी सुरक्षित नहीं हैं। शुक्रवार शाम लगभग साढ़े सात बजे सन्दीप वर्मा नामक व्यापारी पर जानलेवा हमला करके उनका क़ीमती फ़ोन और सामान लूट कर बदमाश फ़रार हो गए। बदमाशों ने व्यापारी का गर्दन इतनी देर तक दबाए रखा कि वे बेहोश हो गये।

चाँदनी चौक इलाक़े में व्यापारी संदीप वर्मा पर पीछे से वार करके बदमाशों ने उन्हें बेहोश कर दिया और फ़ोन समेत क़ीमती सामान लूटकर फ़रार हो गये। घटना की रिपोर्ट लिखने के तीन दिन बाद भी पुलिस के पास कोई जवाब नहीं है।

चाँदनी चौक थाने की सीसीटीवी फुटेज 👇🏼

संदीप वर्मा ने नवप्रवाह को बताया कि बीच बाज़ार हमारे साथ ऐसी घटना घट गई और अब तक पुलिस कुछ भी पता नहीं लगा सकी। संदीप ने कहा कि हम सालों से इस इलाक़े में धंधा कर रहे हैं। जब हमारे साथ ऐसा हो रहा है तो आम आदमी और बाहर से घूमने आने वाले लोग कितने ख़तरे में हैं, आप इसका अंदाज़ा भी नहीं लगा सकते।

वर्मा ने बताया कि स्थानीय पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज़ कर दिया गया है लेकिन मामला जस का तस बना हुआ है। उन्होंने कहा कि उनके दो फ़ोन के अलावा ज़रूरी काग़ज़ात भी थे। संदीप ने बताया कि ये तो क़िस्मत थी कि मेरी जान बच गई, नहीं तो बदमाश कुछ देर और गर्दन दबाए रखते तो शायद मेरी जान ही न बच पाती।

U.P. : 08 करोड़ का 13 किलो सोने का बिस्किट बरामद, 02 तस्कर गिरफ्तार, 01 फरार

जांच एजेंसी डीआरआई, भदोही पुलिस व एसओजी की संयुक्त टीम ने कार्रवाई को दिया अंजाम

ब्यूरो | navpravah.com

उत्तर प्रदेश के भदोही ज़िले में जांच एजेंसी डीआरआई की सूचना पर भदोही पुलिस ने 8 करोड़ के 13 किलो सोने के बिस्किट बरामद किये हैं। वाराणसी प्रयागराज राष्ट्रीय राजमार्ग से अर्टिगा से तीन तस्करों के आने की सूचना मिली थी। तस्कर भदोही पुलिस व एसओजी की नाकेबंदी से वाहन छोड़ भाग निकले, लेकिन अंततः 02 तस्करों को 13 किलो सोने के साथ दबोच लिया गया। दोनों तस्कर महाराष्ट्र के रहने वाले हैं।

भदोही के एसपी ने बताया कि बीती रात पुलिस, एसओजी व डीआरआई की टीम ने नाकेबंदी कर इस कार्रवाई को अंजाम दिया है। कार्रवाई हेतु तस्करों को DRI को सौंप दिया गया है। वहीं एक तस्कर की तलाश की जा रही है।

एसपी मीनाक्षी कात्यायन ने बताया कि शुक्रवार की देर शाम जिले की पुलिस को जांच एजेंसी डीआरआई से सूचना मिली कि वाराणसी-प्रयागराज राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक सफेद रंग की आर्टिगा वाहन में सवार तीन तस्कर बड़ी मात्रा में सोने की बिस्किट लेकर कहीं जा रहे हैं। सूचना मिलते ही पूरे जिले की पुलिस को अलर्ट कर दिया गया और जगह-जगह चेकिंग अभियान शुरू कर दिया गया। इस बीच तस्करों को भनक लगी तो वे जिले के अंदर प्रवेश कर गए और सर्रोई के पास वाहन खड़ा कर माल ले फरार हो गए।

तस्करों के फरार होने के बाद एसपी डॉ. मीनाक्षी कात्यायन ने तस्करों की गिरफ्तारी के लिए एसओजी टीम को लगाया। जगह-जगह बैरियर लगाया गया। जिससे जिले में नाकेबंदी की स्थिति उत्पन्न हो गई। पुलिस व एसओजी और डीआरआई की टीम ने पूरे एरिया में कांबिंग आपरेशन चलाया। इस दौरान दो तस्कर पुलिस के हत्थे चढ़ गए। पुलिस ने उनके पास से 13 किलो सोने के बिस्किट बरामद किए।

पूछताछ में गिरफ्तार तस्करों ने अपना नाम राहुल महादेव निवासी मूलम पोस्ट कौवथूड़ी, कौथुली महाराष्ट्र व दीपक निवासी सांगवी महाराष्ट्र बताया। वहीं फरार तस्कर का नाम बिट्टल निवासी दिंगची, आटपड़ी, शांगली बताया जा रहा है। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि डीआरआई की सूचना पर चले सर्च आपरेशन में दो तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। जिनके पास सोने की 13 बिस्किट बरामद हुए हैं। जिसकी कीमत लगभग आठ करोड़ होगी। तस्करों को डीआरआई को सौंप दिया गया है। आगे कार्रवाई उनके द्वारा ही जाएगी।

U.P. : 35 लाख का घपला, ग्राम प्रधान के अधिकार सीज, पांच कर्मचारी निलंबित

ब्यूरो | navpravah.com

भदोही से खबर है, जहां जिलाधिकारी ने भदोही ब्लाक क्षेत्र के दरुनहां ग्राम पंचायत के ग्राम प्रधान अखिलेश सिंह का अधिकार सीज कर दिया है। साथ ही पूर्व प्रधान पर मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। डीएम ने प्रशासक समेत पांच कर्मचारियों को भी निलंबित किया है। साथ ही एफआईआर कराकर घोटाले की धनराशि रिकवरी कराने का भी आदेश डीएम ने दिया है।

समाजसेवी उपेंद्र सिंह व अन्य के द्वारा ग्राम पंचायत में धांधली और भ्रष्टाचार की शिकायत की गई थी। वहीं जांच में 35 लाख के घपले की पुष्टि होने पर डीएम ने यह बड़ी कार्रवाई की है। समाजसेवी व ग्रामीणों ने निष्पक्षता से जांच व कार्रवाई हेतु डीएम की सराहना की है।

मामला भदोही जिले के भदोही ब्लाक के दरूनहां गांव का है, जहां ग्राम पंचायत के दो पंचवर्षीय कार्यकाल में 35 लाख का घोटाला सामने आया है। जांच आख्या पर गौरांग राठी ने ग्राम प्रधान के वित्तीय-प्रशासनिक अधिकार सीज़ कर दिए हैं। पूर्व प्रधान के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने, गबन के धन की वसूली और एक प्रशंसक, दो सचिव, एक अवर अभियंता ग्रामीण अभियंत्रण व तकनीकी सहायक को निलंबित कर रिकवरी का आदेश भी दिया है।

दरुनहा गांव निवासी समाजसेवी उपेंद्र सिंह व अन्य ग्रामीणों ने बीते 3 मार्च 2023 को जिलाधिकारी को हलफनामा देकर दो पंचवर्षीय में गांव में कराए गए इंटरलॉकिंग पंचायत भवन निर्माण सामुदायिक शौचालय मनरेगा संबंधित कार्यों में धांधली और गबन का आरोप लगाया गया था। उपायुक्त स्वतः रोजगार, सहायक अभियंता लोक निर्माण एवं जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी की टीम ने मामले की जांच की। स्कूल की बाउंड्री निर्माण में अपनी भाभी के फर्म से ग्राम प्रधान अखिलेश प्रकाश सिंह ने ईंट की खरीदारी की, चौरी दरूनहा मार्ग पर जूनियर हाईस्कूल तक चकरोड निर्माण में घटिया ईंटों का इस्तेमाल पाया गया था।

ग्राम पंचायत की जांच में अधिकारियों ने 17 लाख 41 हजार 837 रुपए का प्रथम दृष्टया मामला पाया गया। डीएम गौरांग राठी ने ग्राम प्रधान अखिलेश सिंह का वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार सीज़ कर दिया है। सचिन रामसूरत यादव तकनीकी सहायक राम कृपाल यादव अवर अध्ययंता आलोक मौर्य को निलंबित और विभागीय कार्यवाही का आदेश दिया है। अंतिम जांच के लिए डीआईओएस डीईओ और अन्य को जांच अधिकारी नामित किया है।

इसी तरह 2015 से 2020 और प्रशासक के कार्यकाल में कराए गए कार्य की जांच भी अधिकारियों ने की है। यहां भी शौचालय पंचायत भवन निर्माण मनरेगा में जमकर गड़बड़ी सामने आई। 18 लाख रुपए का गबन पाया गया। जांच आख्या के आधार पर डीएम ने पूर्व प्रधान जय देवी से 9 लाख 33 हजार 852 रुपए की वसूली और मुकदमा दर्ज कराए जाने का आदेश दिया है।

प्रशासक एवं सहायक विकास अधिकारी सहकारिता सत्यप्रकाश गुप्ता से 4 लाख 8 हजार व तत्कालीन सचिव दिलीप कुमार से 4 लाख 8 हजार की वसूली का आदेश दिया है। डीएम ने प्रशासक और सचिव को भी निलंबित करने का आदेश दिया है।

Bhadohi: कमीशन की सेटिंग, कर्मचारियों की चांदी, लुट रहे मरीज, देखिए सीएचसी का खेल…

एक ही बाहरी लैब संचालक को सीएचसी बुला कराया जा रहा जांच

•सीएचसी प्रभारी मौन, सीएचसी में लैब होने के बाद चल रहा यह खेल

•ब्लड टेस्ट के लिए जा रहे 500 से 1000 रुपये

रामकृष्ण पाण्डेय | navpravah.com

भदोही (उप्र.)। भदोही जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डीघ के स्वास्थ्य कर्मचारी-अधिकारी पूरी तरह मनमानी पर उतारू हैं। यहां के बेदर्द हाकिमों को न सरकार की मंशा व आदेशों का ख्याल है, न ही अफसरों की कार्रवाई का डर। मानवता और संवेदनशीलता तो इनमें अब बची ही नही है।

सीएचसी डीघ में पैथालॉजी उपलब्ध होने के बावजूद आदर्श पैथालॉजी सेंटर के पैथालाजिस्ट को खून जांच हेतु बुलाया जा रहा है। उसे मरीज नहीं, बल्कि यहां के कर्मचारी ही बुला रहे हैं। जांच के एवज में बेबस मरीजों से 500 से 1000 रुपये तक की वसूली कर उनके तीमारदारों को और लाचार बनाया जा रहा है।

हाल ही में सीएचसी आये क्षेत्र के नारेपार पाल बस्ती निवासी एक गर्भवती महिला के तीमारदारों से अस्पताल पर ब्लड टेस्ट के लिए सैम्पल दिलाकर जब 600 रुपये लिए गए तो जागरूक परिजन उखड़ गए। उन्हें बताया गया कि बाहर से डॉक्टर बुलाया गया था। पीड़ित परिजनों ने तत्काल आरोप का वीडियो बनाते हुए मौके पर मौजूद सीएचसी प्रभारी डॉ. फूलचंद से वीडियो बनाते हुए इस बात की शिकायत की। किंतु शिकायत के दौरान वीडियो में प्रभारी व चिकित्सक मामले की जानकारी लेने व कार्रवाई करने के बजाय सिर गड़ाए बैठे रहे। जानकारी होने बाद भी मीडियाकर्मियों के सवाल पर प्रभारी चिकित्सक पहले तो अनभिज्ञ बने। बाद में मीडियाकर्मियों से कहा कि आप लोग नाम बताएंगें तो कार्रवाई होगी।

यह है पूरा माजरा, सेटिंग के तहत चल रही पैथालॉजी-

सवाल है कि पैथालॉजी की सुविधा अस्पताल पर होने के बाद भी आखिर किस खेल और सेटिंग के तहत बाहर के एक ही पैथालॉजी सेंटर के संचालक को बुलाकर ब्लड टेस्ट कराया जा रहा है और सरकार की निःशुल्क स्वास्थ्य सेवा देने की मंशा पर पानी फेरते हुए गरीब मरीजों का खून चूसा जा रहा है। कहीं न कहीं यह पूरा खेल कमीशनखोरी से जुड़ा हुआ है।

सूत्र बताते हैं कि यहां के कर्मचारियों की सेटिंग से ही ब्लॉक गेट के निकट आदर्श पैथालॉजी सेंटर डाला गया है। मरीजों के ब्लड टेस्ट के लिए उसी टुटपुँजिया सेंटर को बुलाकर सैम्पल दिया जाता है। जिसके एवज में मनमानी रुपये मरीजों से लिए जाते हैं। सीएचसी में लैब होने बावजूद बाहर के एक ही सेंटर से पैथालाजिस्ट को बुलाना सेटिंग-गेटिंग के चक्कर की कहानी साफ बयां करता है।

यह लैब सेंटर विभाग में पंजीकृत है या नहीं और टेक्निकल असिस्टेंट की उपस्थिति होती है या नहीं, यह भी जांच का विषय है। जानकारी होने के बाद भी प्रभारी किसको बचा रहे हैं। यही नहीं करीब बारह सालों से अंगद के पांव की तरह एक ही सीएचसी पर कुंडली मारे बैठे डीघ चिकित्सा प्रभारी को किसका अभयदान मिल रहा है। वहीं सीएमओ डॉ. संतोष कुमार चक ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है, जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

UP: भदोही के सीएचसी पर ब्लड टेस्ट के नाम पर चूसा जा रहा मरीजों का खून

भदोही: सीएचसी पर ब्लड टेस्ट के नाम पर चूसा जा रहा मरीजों का खून

सीएचसी प्रभारी की सरपरस्ती में कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले, आमजन त्रस्त,जानकारी होने के बाद भी प्रभारी बोल रहे सफेद झूठ।

धरती के भगवान फेर सरकार सरकार के दावों पर पानी, ब्लड टेस्ट का पैसा दिला कर रहे कमीशनखोरी।

रामकृष्ण पाण्डेय | navpravah.com

जिले में स्वास्थ्य महकमे का बुरा हाल है। सीएचसी डीघ में पैथालॉजी यानी खून जांच के नाम पर मरीजों का खून चूसने का बड़ा खेल चल रहा है। जिसमें नीचे से लेकर ऊपर तक के अधिकारियों की मिलीभगत नजर आ रही है। यहां कमीशन की सेटिंग गेटिंग कर दवाएं भी बाहर से लिखी जा रही हैं।

पिछले दिनों क्षेत्र के नारेपार गांव निवासी गर्भवती महिला को लेकर उनके परिजन सीएचसी पहुंचे थे। जिनसे अस्पताल में जांच के लिए 100 रुपये बताकर पहले सैम्पल लिए गए। फिर सैम्पल लेने के बाद 600 रुपये जांच के लिये ले लिए गए। बताया गया कि बाहर से डॉक्टर बुलाये गए थे। परिजनों ने पूरे मामले के सम्बंध में वीडियो बनाया, फिर वहीं पर एक साथ मौजूद चिकित्सा अधीक्षक व अन्य डॉक्टरों से भी वीडियो बनाते हुए इस बात की जानकारी दी और आरोप लगाया। किंतु किसी जिम्मेदार की जुबान नही खुली।

दो-तीन दिन तो चिकित्सा अधीक्षक मामले के सम्बंध में बयान देने से भागते रहे। किंतु गुरुवार को आमना सामना होने पर मामले से अनभिज्ञता जाहिर की। यही नही वह बातचीत में बार बार बयान बदलकर बचते नजर आए। जबकि परिजन वीडियो में साफ साफ आरोप उनके मुंह पर ही लगाते दिख रहे हैं। फिर उन्होंने कहा कि मामला संज्ञान में आया है, अगर नाम आप लोग बताएंगें तो कार्रवाई की जाएगी। उनके साथ बैठा एक चिकित्सक भी नेताओं की तरह बीच बचाव करता नजर आया।

आखिर जानकारी होने के बावजूद इस पर चिकित्सा अधीक्षक ने एक्शन क्यों नही लिया। वह आखिरकार बचा किसे रहे हैं। अनभिज्ञ होने के बाद भी मीडियाकर्मियों से क्यों भागते रहे। फिलहाल अब देखना है कि पर्दे के पीछे चल रहे भ्रष्टाचार के इस खेल में शामिल मगरमच्छों पर कार्रवाई होती है या नही, यह अपने आप में बड़ा सवाल है। फिलहाल इस कारनामे से आमजन को जेबें ढ़ीली करनी पड़ रही हैं। जिसको लेकर लोगों में रोष है।

स्वास्थ्य कर्मियों का यह कारनामा सरकार की छवि को भी धूमिल कर रही है। सरकार के निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं व सुविधाएं मुहैया कराने के दावे पर भी पानी फेर रही है। वहीं दूसरी ओर कमीशनखोरी से स्वास्थ्यकर्मियों की चांदी कट रही है।

लगा आरोप, एक दशक से कुंडली मारे बैठे हैं चिकित्सा प्रभारी-

मरीजों का आरोप है कि जिन्हें वर्तमान में सीएचसी का प्रभारी बनाया गया है वह पिछले करीब दस-बारह सालों से डीघ में ही चिकित्सक के पद पर तैनात रहे हैं। अधिकारियों व क्षेत्रीय लोगों एवं स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारियों से अच्छी पैठ होने के चलते उनकी मिलीभगत से इस तरह के भ्रष्टाचार का खेल किया जा रहा है। लोगों का आरोप है कि एक दशक से अधिक समय से डॉ. फूलचंद पहले चिकित्सक और अब चिकित्सा प्रभारी के पद पर डीघ में कुंडली मारे बैठे हुए हैं। उनकी सरपरस्ती में केंद्र के कर्मचारी भ्रष्टाचार व स्वास्थ्य सेवाओं में धांधली व संवेदनहीनता बरत रहे है।

चिकित्सा प्रभारी को बताने पर भी वे किसी मामले का संज्ञान नही ले रहे हैं। वास्तव में केंद्र पर चल रहे इस तरह के भ्रष्टाचार के खेल से विज्ञ होने के बावजूद प्रभारी ने अनभिज्ञता जाहिर की। उन्होंने पहले कहा कि मामला रविवार या सोमवार का है। फिर कहा कि मीडियाकर्मियों से मामले की संज्ञानता हुई है। जबकि वह उसी दिन परिजनों द्वारा आरोप लगाने के दौरान वीडियो में मौन साधे और आनाकानी करते दिख रहे हैं।

MP: चुनाव जीतने के पहले ही ताण्डव करने लगे भाजपा प्रत्याशी !

ब्यूरो | navpravah.com

बीते दिनों चुनाव आयोग ने 5 राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों के तारीखों का ऐलान किया है, लेकिन तारीखों के ऐलान के संग ही राज्यों में प्रत्याशियों का तापमान भी बढ़ने लगा है। खबर मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिला अंतर्गत गोटेगांव विधानसभा क्षेत्र से है।

भाजपा ने महेंद्र नागेश को अपने प्रत्याशी के तौर पर मौका दिया है, लेकिन चुनाव जीतने से पहले ही साहब के सर विधायकी का बुखार चढ़ कर तांडव करने लगा है। यह बात इसलिए की जा रही है क्योंकि जब से उनको भाजपा ने गोटेगांव हेतु प्रत्याशी बनाया है। तब से अभी तक उनके द्वारा कई विवादित कृत्यों में सम्मिलित पाए गए हैं।

मामला पिछले दिनों का ही हैं जब महेन्द्र नागेश ने एक बुजुर्ग को झूठे चेक बाउंस केस में फंसावाकर जेल भिजवा दिया था जेल से वापस आकर बुजुर्ग ने बताया महेंद्र नागेश ने ज़ोर जबरदस्ती करके उससे चेक में रुपए भरवाकर साइन करवाया फिर उसे बाउंस करावाकर झूठे मामले में फंसा दिया।

पूर्व में भी जिला पंचायत अध्यक्ष रहते हुए नवोदय विद्यालय में एक शासकीय कर्मचारी को जूते मारने की घटना सामने आई थी। अब महेन्द्र नागेश के खिलाफ एक ताजा तरीन मामला आया है, जिसमें भाजपा प्रत्याशी ने सेक्टर कमोड के सुपरवाइजर पद पर कार्यरत कर्मचारी रविशंकर चौधरी के साथ ड्यूटी के दौरान अभद्र व्यवहार किया। उनके संग गाली गलौज की एवं जान से मारने की धमकी भी दे डाली।

घटना के बाद कर्मचारी ने इसकी तात्कालिक शिकायत दर्ज करवाई अपने शिकायत में शिकायतकर्ता ने बताया कि बुधवार दोपहर लगभग 2 से 3 बजे के उनके साथ यह घटना तब घटी जब वह (रविशंकर चौधरी) ग्राम बागलई आई एम आई का निरीक्षण कर रहे थे एवं कैंप में आए हितग्राहियों के स्वास्थ्य को लेकर जानकारी ले रहे थे। तभी वहां पर भाजपा प्रत्याशी महेंद्र नागेश अपने साथियों के साथ आ धमके एवं रविशंकर चौधरी को कुर्सी से उठने को कहा तथा ना उठने पर उन्हें गंदी-गंदी गालियां देने लगे और कहा विभाग कौन सा है तेरा? फिर अपने आदमियों से कहा फोटो खींचो इसकी फिर गालियां देकर नौकरी से निकलवाने की धमकी देने लगे। फिर कहा तुम्हारे हाथ पैर तुड़वा दूंगा फिर आदमियों संग मारपीट करने लगे एवं जान से मारनें तक की धमकी दे डाली कर्मचारी रविशंकर चौधरी हरिजन जाति से ताल्लुक रखते हैं एवं गोटेगांव विधानसभा सीट हरिजन समाज के लिए रिजर्व है। भाजपा प्रत्याशी महेंद्र नागेश के द्वारा लगातार की जा रही आपराधिक घटनाएं साबित करती हैं कि वह किस चरित्र की व्यक्ति हैं।

PFI के विरुद्ध NIA का बड़ा एक्शन, दिल्ली समेत 6 राज्यों में ताबड़तोड़ छापेमारी, जानिए वजह

ब्यूरो | navpravah.com

भारत सरकार ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) संगठन पर भले ही बैन लगा रखा है, लेकिन देश के भिन्न-भिन्न भागों में आज भी इनके कार्यकर्ताओं का किसी न किसी माध्यम से सामाजिक सरोकार में सक्रियता दिखाई दे ही जाती है। पीएफआई (PFI ) को पिछले साल आतंकवाद विरोधी गैरकानूनी गतिविधियां अधिनियम (UAPA) के तहत भारत मे 5 सालों के लिए बैन कर दिया गया है।

वर्तमान में PFI की हर मूवमेंट पर NIA ने पैनी नजर बनाए रखी है। इसी क्रम में आज राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने 6 राज्यों के लगभग दर्जन भर से अधिक PFI ठिकानों पर एक्शन लेते हुए सघन छापेमारी की है। जिसमें उत्तर प्रदेश ,राजस्थान, महाराष्ट्र और दिल्ली जैसे राज्य भी शामिल हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी से संबंधित गोपनीय सूत्रों के अनुसार PFI के सदस्य अंडरग्राउंड रहकर, देश के बाहर से एवं अलग-अलग माध्यमों से देश विरोधी अभियानों को हवा देने में जुटे हुए हैं।

समाचार एजेंसी पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि ये छापेमारी केस नंबर 31/2022 के तहत की गई है। ये मामला पीएफआई, उसके नेताओं और कैडरों की हिंसक और गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होने से जुड़ा हुआ है। NIA जांच अधिकारियों अनुसार, जुलाई 2022 में प्रधानमंत्री मोदी के पटना दौरे के दौरान आत्मघाती हमले की साजिश रची गई थी। जिसके अंतर्गत PFI के सदस्यों का मूल मकसद प्रधानमंत्री मोदी की हत्या कर सामाजिक सौहार्द को निरस्त करना था।

इस क्रम में पटना के फुलवारी शरीफ पुलिस थाने में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के सदस्यों के खिलाफ आपराधिक साजिश रचने को लेकर मामला दर्ज कराया गया था। हालांकि यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा नीति से जुड़ा हुआ था, जिसे बाद में NIA ने दर्ज मामले के जांच की बागडोर अपने हाथ में ले ली थी।

Pakistan: पठानकोट हमले का मोस्टवांटेड आतंकी शाहिद लतीफ़ की गोली मारकर हत्या

ब्यूरो | navpravah.com 

पाकिस्तान के सियालकोट की एक मस्जिद में अज्ञात हमलावरों के द्वारा भारत के मोस्ट वांटेड आतंकी शाहिद लतीफ की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। शाहिद लतीफ पंजाब के पठानकोट एयरबेस में हुए 2 जनवरी, 2016 के हमले का मास्टरमाइंड था। एनआईए ने यूएपीए के तहत शाहिद के खिलाफ केस दर्ज किया था। वो भारत सरकार के नामित आतंकियों की सूची में स्थान बनाए हुए था।

शाहिद तलीफ मूल रूप से पाकिस्तान स्थित पंजाब के गुजरांवाला अंतर्गत अमीनाबाद कस्बे के मोर गांव का रहने वाला था। वो जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा हुआ था एवं सियालकोट सेक्टर के कमांडर की जिम्मेदारी उसके कंधों पर था, जिसका मूल लक्ष्य भारत में आतंकवादी गतिविधियों को सुनियोजित करना, उनकी निगरानी करना और अंतिम अवस्था तक ले जाना यानी कि किसी भी हमले को संचालन से समापन तक पहुंचाने की जिम्मेदारी इसकी ही थी। इसलिए शाहिद लतीफ को जैश के लॉन्चिंग कमांडर के तौर पर भी जाना जाता है। पठानकोट हमलें के अलावा शाहिद लतीफ पर उन आतंकियों में भी शामिल होने का आरोप है, जिन्होंने 1999 में इंडियन एयरलाइंस के विमान को अगवा किया था।

शाहिद लतीफ को 12 नवंबर, 1994 में आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में भारत में गिरफ्तार किया गया था। उस पर मुकदमा चलाया गया और जेल भेज दिया गया। भारत की जेलों में 16 साल की सजा काटने के बाद 2010 में तत्कालीन केन्द्र की कांग्रेस सरकार ने गुडविल जेस्चर के तहत जेल से मुक्त कर दिया था, 2010 में तत्कालीन सरकार 25 आतंकवादियों को छोड़ा था उसमें से एक यह भी था।

भारत से आजाद होने के बाद शाहिद लतीफ वापस पाकिस्तान की उसी जिहादी फैक्ट्री में चला गया, जहां से वह आया था। इसके बाद उसने ना सिर्फ पठानकोट एयरबेस आतंकी हमले की योजना बनाई, बल्कि इस हमलें को अंजाम तक पहुंचाने में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

क्या था पठानकोट एयरबेस हमला?

पंजाब के पठानकोट स्थित एयरबेस में 2016 में आतंकी हमला हुआ था, यह हमला आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद ने करवाया था। आतंकी भारतीय सेना की वर्दी में घटनास्थल पहुंचे थे। सशस्त्र हथियारों से परिपूर्ण उन्होंने नृशंसता पूर्वक सैनिकों पर हमला किया था, जिसमें देश के 7 जांबाज सैनिक शहीद हुए थे एवं क़रीब 37 अन्य लोग घायल हो गए थे। सभी आतंकी भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर रावी नदी के रास्ते भारत आए थे।

सबसे पहले भारतीय इलाके में पहुंचकर आतंकियों ने कुछ गाड़ियां हाईजैक कीं और पठानकोट एयरबेस की ओर बढ़ गए। बाद में, कैंपस की दीवार कूदकर, लंबी घास से होते हुए उस जगह पहुंचे, जहां सैनिक रहते थे। यहां उनका पहला सामना सैनिकों से हुआ। फायरिंग में चार हमलावर मारे गए और तीन जवान शहीद हो गए। अगले दिन एक आईईडी धमाके में चार और भारतीय सैनिक शहीद हुए थे।

UP: भदोही में NIA ने की छापेमारी, संदिग्ध से की गई पूछताछ, सिमकार्ड, मोबाइल व मैगजीन ज़ब्त

ब्यूरो | navpravah.com

भदोही | बुधवार को उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में एनआईए ने फिर PFI से जुड़े दर्जनों संदिग्धों के ठिकानों पर छापेमारी की है। यूपी के जनपद भदोही के शहर इलाके स्थित मामदेवपुर बधवा में राष्ट्रीय जांच एजेंसी की टीम ने छापेमारी की, और संदिग्धों से पूछताछ किया। सघन तलाशी के दौरान NIA की टीम के हाथ 02 सिमकार्ड, 02 मैगजीन और एक मोबाइल फोन हाथ लगे, जिसे वे छानबीन हेतु अपने साथ ले गए हैं। वहीं अचानक हुई छापेमारी की खबर से भदोही नगर में हड़कंप मच गया।

बता दें कि एनआईए की टीम ने भदोही के मामदेवपुर स्थिति मौलाना सोएब के यहां बुधवार सुबह करीब 05 बजे छापेमारी की। छापेमारी के दौरान टीम ने संदिग्ध मौलाना से पूछताछ किया और पूछताछ के दौरान पूंछा कि आप गाइडेंस पब्लिकेशन संस्था से जुड़े हैं, तो मौलाना ने कहा कि किसी गाइडेंस संस्था से नहीं जुड़ा हूं और ना तो मैं उसे जानता हूं। मौलाना ने बताया कि टीम द्वारा मेरे घर के प्रत्येक कमरे की सघन चेकिंग की गई। जहां से कुछ आपत्तिजनक जीचें नहीं मिलीं। हमारे घर से सिर्फ एक मोबाइल, सिम कार्ड, दो मैगजीन एवं पत्रिका व एक ट्रस्ट का रसीद मिला, जिसे NIA की टीम अपने साथ ले गई है।

मौलाना ने बताया कि मेरे घर व अजीमुल्ला चौराहा स्थित मेरी ट्रैवेल एजेंसी पर छापेमारी की गई, किंतु कुछ संदिग्ध वस्तु बरामद नही हुई। टीम छापेमारी कर जब बाहर निकली, तो मामले की जानकारी हुई।, जानकारी लेने का प्रयास किया गया किंतु कुछ न बताकर वहां से चली गई।