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Monday, September 7, 2026
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ईरान-इजराइल युद्धः अर्थव्यवस्था पर नहीं पड़ेगा कोई असर, रिपोर्ट से हुआ खुलासा

संवाददाता । navpravah.com

नई दिल्ली | इजराइल और ईरान के बीच युद्ध बढ़ने की आशंकाओं से दुनिया में हलचल है। ऐसा माना जा रहा है कि दुनिया एक बार फिर से विश्व युद्ध की तरफ बढ़ रही है, जिससे दुनिया में महंगाई चरम पर पहुंच सकती हैं। भारतीय शेयर बाजार में सप्ताह के पहले कारोबारी दिन में आई जोरदार गिरावट से निवेशक भी तनाव में हैं और इसके पीछे युद्ध को वजह माना जा रहा है। इस आशंका के बीच एक रिपोर्ट आई है जिसके मुताबिक, ईरान-इजराइल युद्ध का कोई आर्थिक नुक़सान दुनिया को नहीं होगा।

आइए समझते हैं, क्या कहता है रिपोर्ट-

स्टॉक मार्केट टूटा, डाउ जोंस चढ़ा

सबसे पहले बात करें सोमवार को Share Market में आए भूचाल के बारे में। बता दें कि मार्केट ओपन होने के साथ ही सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट आई। सेंसेक्स 73,315.16 के स्तर पर खुला, बीते सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन ये 74,244.90 के लेवल पर क्लोज हुआ था। इसके अलावा निफ़्टी बीते शुक्रवार को 22,519.40 पर बंद हुआ था और सोमवार को सुबह 9.15 बजे पर गिरावट के साथ 22,339.05 के स्तर पर खुला। हालांकि, भले ही इस गिरावट के पीछे ईरान और इजराइल के युद्ध को वजह माना जा रहा हो, लेकिन अंदर की बात ये है कि इस गिरावट में सिर्फ युद्ध का असर नहीं है, भारी मुनाफावसूली का असर स्टॉक मार्केट पर दिखा है।

दूसरे संकेत की बात करें, तो ईरान और इजरायल के बीच जारी युद्ध के बावजूद अमेरिकी बाजार में डाउ जोंस फ्यूचर ग्रीन जोन में कारोबार करता नजर आ रहा है। ये 140 पॉइंट चढ़कर 38,124 के लेवल पर है।

युद्ध लंबा खिंचने की संभावना कम!

गौरतलब है कि शनिवार को ईरान ने इजरायल पर 300 से ज्यादा ड्रोन्स और मिसाइलों से हमला किया। इस हमले में ड्रोन्स, सुपरसोनिक क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलें शामिल थीं। इजरायल ने दावा किया है उसने 99 फीसदी हवाई हमले को बेकार कर दिया। इस बीच अमेरिका ने ईरान और इजराइल दोनों को हिदायत दी है। एक ओर ईरान से हमले रोकने के लिए कहा है, तो वहीं दूसरी ओर इजरायल से भी दो टूक कह दिया है कि US उसके किसी भी जवाबी हमले जैसे प्रयास का साझेदार नहीं बनेगा और तनाव बढ़ाने वाले किसी भी फैसले से पहले वह अच्छे से सोच-विचार करे। ऐसे में युद्ध लंबा खिंचने की संभावना कम दिख रही है।

ऐसे संकेतों को देख कर कह सकते है कि इस युद्ध का अर्थव्यवस्था पर कोई खासा असर नहीं पड़ेगा।

क्या तीसरे विश्व युद्ध की तरफ बढ़ रही है दुनिया? भारत सरकार के निर्देश जारी करने की क्या है वजह ?

ब्यूरो। navpravah.com

नई दिल्ली। जिसका डर था वही हुआ। ईरान के मुताबिक इजराइल के हमलों के बाद उसने भी ताबड़तोड़ हमले शुरू कर दिए। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने इजरायल पर दर्जनों मिसाइल और ड्रोन से हमला किया है। इस हमले से पूरी दुनिया अलर्ट पर है। ईरान ने इस हमले को ऑपरेशन ‘ट्रू प्रॉमिस’ नाम दिया है। ईरान का कहना है कि हमला इजरायल के अपराधों की सजा है। हालांकि ईरान के हमलों को अमेरिका ने ज़ोरदार तरीके से जवाब दिया।

इससे एक दिन पहले ओमान की खाड़ी से होर्मुज पास होते हुए भारत आ रहे एक कार्गो शिप पर ईरान की सेना ने कब्जा कर लिया है। न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक जहाज पर 17 भारतीय नागरिक भी मौजूद है। कार्गो शिप लंदन बेस्ड एक कंपनी का है, जिसका मालिकाना हक एक इजराइली अरबपति के पास है। पहले मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि शिप पर 20 क्रू मेंबर सवार हैं, जो फिलीपींस के नागरिक हैं। इस पर पुर्तगाल का झंडा लगा था।

हमले के बाद अलर्ट पर अमेरिका

ईरान का यह हमला अचानक से नहीं हुआ है। अमेरिका, इजरायल ने पहले ही हमले का अनुमान लगा लिया था। अमेरिकी सेना पहले से ही अलर्ट पर थी। उसने अपने दो युद्धपोत इजरायल की सुरक्षा में तैनात किए थे। हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन ने सुरक्षा अधिकारियों के साथ मीटिंग की। इसके अलावा उन्होंने नेतन्याहू से भी फोन पर बात की है। बाइडन ने इजरायल के सुरक्षा की प्रतिबद्धता जताई। संयुक्त राष्ट्र महासचिव, यूके, जर्मनी और फ्रांस ने इस हमले की निंदा की है। मिस्र, सऊदी, स्पेन, पुर्तगाल ने इस हमले के बाद गहरी चिंता जताते हुए संयम बरतने को कहा है।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने जारी किया निर्देश

ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते टकराव और उस क्षेत्र में गंभीर होते हालात को देखते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय ने एडवाइजरी जारी कर दी है। विदेश मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों को इन देशों की यात्रा नहीं करने और वहां रह रहे नागरिकों से अपनी सुरक्षा का खास ध्यान रखने की अपील की है।

भाजपा ने जारी किया घोषणापत्र, समझिए क्या क्या है विशेष

नृपेन्द्र कुमार मौर्य । navpravah.com

नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीजेपी का घोषणा पत्र जारी किया। इसे संकल्‍प पत्र का नाम दिया गया है। इसमें कई तरह के वादे किए गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ही इस मौके पर गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा उपस्थित रहे। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संविधान निर्माता बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। मोदी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘बाबा साहेब आंबेडकर की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि। ‘जय भीम.’ इस पोस्ट के साथ पीएम मोदी ने विभिन्न कार्यक्रमों में बाबा साहेब आंबेडकर पर दिए अपने भाषणों पर आधारित एक वीडियो भी साझा किया।

इस घोषणा पत्र में बीजेपी ‘GYAN’ यानी गरीब, युवा, अन्नदाता (किसान) और नारी शक्ति पर फोकस किया है। बीजेपी के घोषणा पत्र की थीम है ‘बीजेपी का संकल्प, मोदी की गारंटी’

आइए समझते है बीजेपी का घोषणापत्र कुछ प्रमुख बिंदुओं में

सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण.. ये मोदी की गारंटी, मध्यम घर के परिवारों के लिए पक्के घर, पर्यावरण स्वच्छ..

पेपर लीक कानून लागू करेंगे, नई शिक्षा नीति, 2036 में ओलंपिक मेजबानी

3 करोड़ लखपति दीदी बनाना है.. सर्वाइकल कैंसर पर ध्यान, महिलाओं के लिए सार्वजनिक शौचालय, महिला शक्ति वंदन अधिनियम लागू करना

नैनो यूरिया लागू करना, मछली पालकों पर खास ध्यान

प्रवासी मजदूर, और उनकी श्रेणी में आनेवाले लोगों को ई श्रम से जोड़ा जाएगा और सुविधा दी जाएगी

आगे योग का आफिसियल सर्टिफिकेशन भारत देगा

रामायण उत्सव, अयोध्या का और विकास, भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई और सख्त

लागू होगी न्याय संहिता, वन नेशन वन इलेक्शन भी होगा लागू

वेटिंग लिस्ट की समस्या एकदम समाप्त करेंगें

नार्थ ईस्ट में बुलेट ट्रेन पर काम चल रहा है

5जी विस्तार और 6जी का विकास

उर्जा में आत्मनिर्भर

कौन है माधवी लता, जो हैदराबाद से ओवैसी को देंगी टक्कर?

संवाददाता। navpravah.com

नई दिल्ली। हैदराबाद सीट बात की जाए तो इस सीट को ओवैसी का गढ़ माना जाता है। साल 1984 से ओवैसी परिवार हैदराबाद सीट से हमेशा जीत दर्ज करता आ रहा है। असदुद्दीन ओवैसी के पिता सुल्तान सलाहुद्दीन हैदराबाद सीट से 20 साल तक सांसद रहें, इसके बाद असदुद्दीन ओवैसी अबतक इस सीट से सांसद है। इस बार के लोकसभा चुनाव में यह देखना दिलचस्प होगा कि हैदराबाद की जनता क्या फैसला लेती हैं। एक ओर जहां बड़े राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखने वाले ओवैसी एक बार फिर से मैदान में है। वहीँ दूसरी ओर बीजेपी की ओर से हैदराबाद में माधवी लता हिंदुत्व का झंडा लेकर मैदान में उतर चुकी हैं।

खुद को “RSS की बेटी” और “पारंपरिक भारतीय महिला” कहने वाली कोम्पेला माधवी लता एक उद्यमी, हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेटर और प्रशिक्षित भरतनाट्यम डांसर हैं। माधवी लता तेलंगाना के राजनीतिक हलकों में बहुत जाना-पहचाना नाम नहीं है। लेकिन पिछले दिनों जब भाजपा ने उन्हें हैदराबाद लोकसभा सीट से अपने उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतारा तो वह अचानक सुर्खियों में आ गई।

एक व्यवसायी और भरतनाट्यम डांसर के अलावा वह एक एनसीसी कैडेट भी हैं। उन्हें लगभग छह महीने पहले टिकट का आश्वासन दिया गया था और वह कुछ समय से हैदराबाद के पुराने शहर में प्रचार कर रही हैं। उन्होंने तीन तलाक के खिलाफ भी अभियान चलाया है।

माधवी लता कभी भी एक सक्रिय राजनेता नहीं रही हैं यहां तक कि उनके परिवार में भी दूर-दूर तक किसी का राजनीति से वास्ता नहीं रहा। माधवी लता तीन तलाक के उन्मूलन पर कई मुस्लिम महिला समूहों के साथ सहयोग कर रही हैं और अक्सर पुराने शहर के क्षेत्रों में इस मुद्दे पर बात करने के लिए आमंत्रित की जाती हैं।

हैदराबाद से पहली बार भाजपा ने बनाया महिला उम्मीदवार

भाजपा ने हैदराबाद से पहली बार महिला उम्मीदवार पर दांव खेला है। इससे पहले पार्टी ने भगवत राव को उम्मीदवार बनाया था। हालांकि, भगवत को ओवैसी से लगभग 3 लाख वोटों से हार झेलनी पड़ी थी। इस बार भाजपा ने महिला उम्मीदवार को उतारकर मुकाबला कड़ा करने की कोशिश की है, लेकिन ओवैसी को उसके गढ़ में हराना आसान नहीं होने वाला है।

इंदिरा गाँधी के हत्यारे का बेटा लड़ेगा चुनाव, इस सीट से ठोकेगा दावेदारी

संवाददाता। navpravah.com

नई दिल्ली।  पंजाब में लोकसभा सभा चुनाव को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। प्रस्तावित लोकसभा चुनाव में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के हत्यारों में से एक के बेटे ने गुरुवार को ऐलान किया है कि वह पंजाब के फरीदकोट सीट से आगामी लोकसभा चुनाव लड़ेगा. सरबजीत सिंह (45) ने कहा कि फरीदकोट के कई लोगों ने उससे चुनाव लड़ने के लिए कहा, इसलिए वह निर्दलीय चुनाव लड़ेगा।

चौंकाने वाली बात यह है कि सरबजीत सिंह इंदिरा गांधी के दो हत्यारों में से एक बेअंत सिंह का बेटा है। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के अंगरक्षक बेअंत सिंह और सतवंत सिंह ने 31 अक्टूबर 1984 को उनके आवास पर गोली मार कर हत्या कर दी थी।

कौन हैं सरबजीत सिंह?

सरबजीत सिहं ने अपनी पढ़ाई 12वीं कक्षा में ही छोड़ दी थी। सरबजीत सिहं मोहाली का रहने वाला है। उन्होंने ग्रेजुएशन के लिए चंडीगढ़ के खालसा कॉलेज में दाखिला लिया था लेकिन उन्होंने अपना कोर्स पूरा नहीं किया। सरबजीत सिंह ने 2004 के लोकसभा चुनाव में बठिंडा से चुनाव लड़ा था लेकिन 1.13 लाख वोट पाकर हार गए थे।सरबजीत सिंह 2007 के पंजाब विधानसभा चुनाव में बरनाला की भदौर सीट से भी हार गए, जहां उन्हें केवल 15,702 वोट मिले।

माँ भी रह चुकीं हैं सांसद

सरबजीत सिंह ने 2014 के लोकसभा चुनाव में फतेहगढ़ साहिब सीट से फिर से अपनी किस्मत आजमाई लेकिन फिर हार गए। उनकी मां बिमल कौर 1989 में रोपड़ सीट से सांसद चुनी गईं। बता दें कि पंजाब की 13 लोकसभा सीटों के लिए 1 जून को मतदान होगा।

वहीं आम आदमी पार्टी ने फरीदकोट लोकसभा सीट से अभिनेता करमजीत अनमोल को मैदान में उतारा है, जबकि भाजपा ने गायक हंस राज हंस को चुनाव मैदान में उतारा है। कांग्रेस और शिअद ने अभी उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है।

आम आदमी पार्टी के नाम पर मलाई खाने वाले नेता गायब, इन नेताओं ने बढ़ाई केजरीवाल की टेंशन

arvind kejriwal
arvind kejriwal

संवाददाता । navpravah.com

नई दिल्ली | लोकसभा चुनाव के पहले आम आदमी पार्टी मुश्किल में दिख रही है। सबसे बड़ी मुश्किल है अरविन्द केजरीवाल की गिरफ़्तारी, दूसरा मुद्दा जो उनके लिए चिंता का सबब बन रहा है वो है उसके करीब 7 सांसदों का गायब रहना। इस समय 10 में से सिर्फ 3 सांसद पार्टी के लिए आवाज उठाते दिख रहे हैं। लोकसभा में आप के इकलौते सांसद सुशील कुमार रिंकू ने हाल ही में भाजपा का दामन थाम लिया था। हाल में जमानत पर बाहर आए संजय सिंह से जब इसके बारे में पूछ गया तो उन्होंने कहा, ‘पार्टी इस विषय पर चर्चा करेगी।’

कौन-कौन सांसद हैं ‘गायब’ –

१. राघव चड्ढा – आम आदमी पार्टी के लिए हमेशा अपनी बात मुखर तौर पर रखने वाले नेता राघव चड्ढा आम आदमी पार्टी के संकट के समय में गायब दिख रहे है। उसके करीब 7 सांसद दिल्ली के साथ-साथ देश के अन्य हिस्सों मो किए गए विरोध प्रदर्शन के दौरान गायब रहे। 10 में से सिर्फ 3 सांसद पार्टी के लिए आवाज उठाते दिख रहे हैं। लोकसभा में आप के इलकौते सांसद सुशील कुमार रिंकू ने हाल ही में भाजपा का दामन थाम लिया था। हाल में जमानत पर बाहर आए संजय सिंह से जब इसके बारे में पूछ गया तो उन्होंने कहा, ‘पार्टी इस विषय पर चर्चा करेगी।’

२. स्वाति मालीवाल – आम आदमी पार्टी की राज्य सभा सांसद इस वक़्त अमेरिका में है। उन्होंने कहा कि इस वक़्त उन्हें वहां रहने कि आवश्यकता हैं, उनकी बदफि बहिन बीमार है। वह समय समय पर अपने सोशल मीडिया पोस्ट्स के ज़रिये अपने बातों को रखती रहती है। बीजेपी ने आरोप लगाया कि AAP के कई नेता केजरीवाल के समर्थन में सामने नहीं आ रहे हैं। हालांकि, मालीवाल ने इस खबर का खंडन किया है।

३. हरभजन सिंह – पूर्व भारतीय क्रिकेटर और पंजाब से आप के राज्य सभा सांसद हरभजन सिंह राज्यसभा सांसद बनने के बाद से आप की गतिविधियों में शायद ही कभी भाग लिया हो। केजरीवाल की गिरफ्तारी पर भी वह चुप हैं। उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल्स पर हाल में कई पोस्ट किए हैं, लेकिन लगभग सभी आईपीएल के बारे में हैं। 24 मार्च को उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री और आप नेता भगवंत मान को उनकी बेटी के जन्म पर बधाई दी थी। उनसे जब पूछा गया कि क्या वह AAP द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन में भाग लेंगे, तो उन्होंने कहा कि नहीं।

४. अशोक मित्तल – लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के संस्थापक और आप सांसद अशोक मित्तल भी पार्टी के गतिविधियों से काफी हद तक दूर ही रहे। उन्होंने कहा कि वो पार्टी के इन गतिविधियों पर बयान देने के लिए अधिकृत नहीं है। पार्टी मुख्यालय हमें बताएगा कि क्या करना है। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें पार्टी द्वारा हाल ही में आयोजित एक विरोध प्रदर्शन में आमंत्रित नहीं किया गया था।

५.संजीव अरोड़ा – पंजाब से एक और सांसद संजीव अरोड़ा ने कहा कि उन्होंने केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद 24 मार्च को उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल से मुलाकात की थी। हालांकि, उन्होंने रामलीला मैदान में इंडिया गठबंधन के विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं होने की बात स्वीकार की। अरोड़ा ने कहा कि वह इसलिए शामिल नहीं हो सके क्योंकि वह लुधियाना में पार्टी द्वारा दिए गए एक काम में व्यस्त थे। उन्होंने कहा, “मैंने हमेशा मुझे दी गई जिम्मेदारियों को पूरा किया है। मैं एनडी गुप्ता के लगातार संपर्क में हूं, जो राज्यसभा में हमारे नेता हैं। अगर मुझे विरोध प्रदर्शन के लिए आने के लिए कहा जाता है तो मैं वहां रहूंगा।”

६.बलबीर सिंह सीचेवाल – पंजाब से आप के राज्यसभा सांसद बलवीर सिंह सीचेवाल को भी अधिकांश पार्टी विरोध प्रदर्शनों में नहीं देखा गया है। जब उनसे उनकी अनुपस्थिति के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ”मैं एक धर्मनिष्ठ व्यक्ति हूं और अपने कर्तव्यों का पालन कर रहा हूं। अगर कोई योजना है तो हम उसे साझा करेंगे।”

७.विक्रमजीत सिंह साहनी- साहनी भी दूसरे सांसदों की तरह आम आदमी पार्टी की गतिविधियों से काफी हद तक अनुपस्थित हैं। पिछले कुछ दिनों में उन्होंने स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में छात्रों के साथ और लेखक खुशवंत सिंह की स्मृति में एक सभा में अपनी बातचीत का वीडियो किए हैं।

शहाबुद्दीन की सीट को लेकर आरजेडी में टेंशन, हिना शहाब को मनाने में जुटे नेता

ब्यूरो | navpravah.com

पटना | आरजेडी ने बिहार की 40 लोकसभा सीटों में से 22 पर अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं। बीते मंगलवार (09 अप्रैल) को इसकी लिस्ट जारी कर दी गई। महागठबंधन में आरजेडी के कोटे में 23 सीटें हैं लेकिन पार्टी ने सिर्फ 22 पर ही प्रत्याशियों के नाम की घोषणा की है जबकि एक सीट सीवान को छोड़ दिया है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि सीवान सीट को लेकर क्या आरजेडी कुछ अलग सोच रही है ?

अवध बिहारी चौधरी के साथ खेला ?

मंगलवार को आरजेडी विधायक और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष अवध बिहारी चौधरी पटना से ही यह ऐलान करते हुए निकले थे कि मैं टिकट लेकर आ रहा हूं। मुझे टिकट मिल गया है। जैसे ही यह सूचना मिली, उनके समर्थक सड़क पर उमड़ गए और जगह-जगह उनका भव्य स्वागत भी किया। एक लंबे रूट के साथ अवध बिहारी चौधरी ने पूरे जिले का भ्रमण किया लेकिन रात होते-होते पता चल गया कि उनका टिकट होल्ड पर रख दिया गया है।

हिना शहाब को टिकट देने की हो रही चर्चा-

अब सियासी गलियारे में चर्चा है कि आरजेडी इस सीट को फिर से हिना शहाब को दे सकती है। सूत्रों की मानें तो इसको लेकर अंदरखाने में चर्चा हो रही है। ऐसे में यह एक वजह हो सकती है कि आरजेडी ने सीवान से अभी किसी प्रत्याशी को फाइनल नहीं किया है। हिना शहाब ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया है। वह लगातार क्षेत्र में जा रही हैं और आरजेडी के खिलाफ बयान भी दे रही हैं। उन्हें मनाने में राजद लगी हुई है।

‘शराब नीति बनाने और घूस लेने में शामिल थे अरविंद केजरीवाल’: दिल्ली हाईकोर्ट ने ED की गिरफ्तारी को माना जायज

संवाददाता| navpravah.com

नई दिल्ली| दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा हैं। मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें केजरीवाल ने ईडी द्वारा गिरफ्तारी को चुनौती दी थी। उन्होंने अपनी याचिका के जरिए गिरफ्तारी और ईडी रिमांड का विरोध किया था। इस दौरान हाईकोर्ट ने केजरीवाल को झटका देते हुए कहा कि जांच एजेंसी द्वारा एकत्रित समाग्री से पता चलता है कि केजरीवाल ने दूसरे आरोपियों के साथ मिलकर पूरी साजिश रची। 

कोर्ट ने कहा कि दस्तावेज के मुताबिक केजरीवाल साजिश में शामिल हैं। गवाहों पर शक करना कोर्ट पर शक करने जैसा है। मुख्यमंत्री को विशेषाधिकार नहीं है। जांच, पूछताछ से सीएम को छूट नहीं मिलेगी। कोर्ट ने कहा कि ईडी के पास पर्याप्त सबूत मौजूद हैं। ईडी द्वारा एकत्र की गई सामग्री से पता चलता है कि अरविंद केजरीवाल ने साजिश रची थी और अपराध की आय के उपयोग और छिपाने में सक्रिय रूप से शामिल थे। ईडी के मामले से यह भी पता चलता है कि वह निजी तौर पर आम आदमी पार्टी के संयोजक के तौर पर भी शामिल थे।

सीएम केजरीवाल की गिरफ्तारी वैध- एएसजी एसवी राजू

दिल्ली शराब नीति मामले में प्रवर्तन निदेशालय का प्रतिनिधित्व कर रहे एएसजी एसवी राजू ने कहा, ‘आज जज ने सभी सबूत देखने के बाद फैसला सुनाया और कोर्ट ने भी कहा उस मनी ट्रेल का पता चल गया है। कोर्ट ने आज न्याय किया है और कोर्ट ने कहा है कि सीएम केजरीवाल की गिरफ्तारी वैध है।’

केजरीवाल ने अपनी गिरफ्तारी के अलावा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हिरासत में भेजे जाने को भी चुनौती दी थी. ईडी की हिरासत के बाद केजरीवाल को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया और वर्तमान में वह तिहाड़ जेल में बंद हैं। 

ईडी ने आबकारी नीति ‘घोटाले’ से जुड़े धन शोधन मामले में 21 मार्च को केजरीवाल को गिरफ्तार किया था. ईडी की हिरासत की अवधि समाप्त होने पर निचली अदालत में पेश किए जाने के बाद आप नेता को एक अप्रैल को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। 

यह मामला 2021-22 के लिए दिल्ली सरकार की आबकारी नीति को तैयार करने और क्रियान्वित करने में कथित भ्रष्टाचार और धन शोधन से संबंधित है। यह नीति रद्द की जा चुकी है। 

भाजपा ने कहा- अरविंद भ्रष्टाचारी हैं, AAP बोली- एक पैसा रिकवरी नहीं हुई

भाजपा नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा- अरविंद केजरीवाल भ्रष्टाचारी हैं और वे जेल में ही रहेंगे। केजरीवाल जी की याचिका कहती थी कि उन्हें अवैध रूप से अरेस्ट किया गया, उसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने कहा- ED या CBI को एक रुपए की गैरकानूनी रिकवरी नहीं हुई।

मैनिफेस्टो जारी कर चौतरफा घिरी कांग्रेस; जानिये घोषणा -पत्र को मुस्लिम लीग से क्यों जोड़ा जा रहा हैं?

congress manifesto muslim league
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नृपेंद्र कुमार मौर्य। navpravah.com

नई दिल्ली। लोकसभा के चुनावी रण में जैसे-जैसे वोटिंग की तारीख करीब आ रहा सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज होती जा रही है। हाल ही में कांग्रेस ने इस चुनाव को लेकर पार्टी का घोषणा-पत्र जारी किया। कांग्रेस ने इसका नाम न्याय पत्र दिया है, जिसमें 5 ‘न्याय’ और 25 ‘गारंटी’ का जिक्र किया गया है। हालांकि, कांग्रेस का न्याय पत्र सामने आते ही बीजेपी ने इस पर सवाल खड़े कर दिए। केंद्र की सत्ताधारी पार्टी ने कहा कि कांग्रेस के घोषणा पत्र में ‘मुस्लिम लीग की छाप’ नजर आ रही। पीएम मोदी ने पहले बिहार के नवादा, फिर यूपी के सहारनपुर और इसके बाद पुष्कर रैली में भी इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के घोषणा पत्र में वही सोच झलकती है, जो आजादी के समय मुस्लिम लीग में थी। जैसे ही ये मुद्दा उठा तो कांग्रेस ने इसे लेकर चुनाव आयोग से शिकायत कर दी।

कांग्रेस की दिक्कत ये है कि वह एक अकेली ऐसी राजनीतिक पार्टी है, जिसमें वामपंथी और दक्षिणपंथी विचारों दोनों का दखल रहता है। ब्रिटेन और अमेरिका की तर्ज पर बने जिन-जिन अन्य देशों में लोकतंत्र है, वहां लिबरल और कंजरवेटिव विचारों के लोग अपने-अपने पालों में रहते हैं। वे अपने निजी फायदों के लिए पार्टी नहीं बदलते। परंतु भारत में मध्यम मार्ग पर जोर रहा है, इसलिए शुरू से दोनों तरह की विचारों वाले नेता इस संगठन में रहे हैं। आजादी के पहले कांग्रेस एक राजनैतिक दल कम अंग्रेजों से आजादी चाहने वाला नरम दलीय संगठन रहा है। कांग्रेस धरने-प्रदर्शन से आजादी चाहती थी। इसलिए कांग्रेस ने सशस्त्र क्रांति की बजाय सदैव शांति का रास्ता चुना। शायद इसके पीछे 1857 की वह क्रांति रही होगी, जिसे अंग्रेजों ने बर्बरतापूर्वक दबा दिया था।

पहले समझते हैं बीजेपी को क्यों नजर आ रही है ‘मुस्लिम लीग की छाप’

कांग्रेस के मेनिफेस्टो जारी करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सहारनपुर में एक चुनावी जनसभा को संबोधित कर पार्टी पर जमकर निशाना साधा। पीएम ने इस दौरान कहा, ‘कांग्रेस, जिसने आजादी की लड़ाई लड़ी थी वो तो दशकों पहले ही खत्म हो चुकी है। अभी जो कांग्रेस बची है, उसके पास न तो एक भी ऐसी नीति है जो देश हित में हैं और न ही राष्ट्र निर्माण का विजन।’पीएम मोदी इसी संबोधन में आगे कहते हैं, ‘कल कांग्रेस ने जिस तरह का घोषणा पत्र जारी किया है, उससे ये साबित हो चुका है कि वर्तमान की जो कांग्रेस है वो आज आज के भारत के आशाओं-आकांक्षाओं से पूरी तरह कट चुकी है।’

पीएम ने कहा कि कांग्रेस के घोषणा पत्र में वही सोच झलकती है, जो आजादी के आंदोलन के समय मुस्लिम लीग में थी. इस पार्टी के न्यायपत्र में पूरी तरह मुस्लिम लीग की छाप है और इसका जो कुछ हिस्सा बचा रह गया, उसमें वामपंथी पूरी तरह हावी हो चुके हैं। कांग्रेस इसमें दूर-दूर तक दिखाई नहीं देती है।

घोषणा पत्र पर भाजपा के आरोप पड़े भारी

भाजपा को इसी पर हमला करने से फायदा होता दिख रहा है। इस घोषणापत्र को मुस्लिम लीग के घोषणापत्र से जोड़ कर भाजपा ने अपनी बहुत सारी नाकामियों को छुपा भी लिया है। कांग्रेस ने अग्निपथ योजना को समाप्त कर पुरानी सेना भर्ती प्रणाली बहाल करने की घोषणा की है। निश्चित तौर पर कांग्रेस का यह वायदा भाजपा को भारी पड़ता। मगर अब कांग्रेस अपने मुस्लिम परस्त न होने की सफाई दे रही है। इसी तरह वन रैंक वन पेंशन के मामले में उसने यूपीए सरकार के आदेश पर अमल की घोषणा की है। इसकी भी देश के पूर्व सैनिकों पर सकारात्मक असर पड़ता। कांग्रेस ने दिल्ली सरकार के कामकाज पर कांग्रेस ने दिल्ली सरकार अधिनियम 1991 में संशोधन की भी बात की है।

यूं कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र के किसी भी बिंदु से किसी की अवमानना अथवा किसी भी समुदाय का मनोबल अनधिकृत रूप से बढ़ाने की बात नहीं किया है। पर उसके समक्ष जो राजनीतिक पार्टी है, उसके चातुर्य और उसकी रणनीति में कांग्रेस उलझ गई है। चुनाव आयोग से शिकायत उसने भले की हो और आयोग का फैसला कुछ भी आए किंतु कांग्रेस उलझ तो गई ही है। किसी भी स्पष्ट लाइन के न होने का अनावश्यक रूप से नुकसान कांग्रेस को उठाना पड़ सकता है। भाजपा तो चाहती ही है कि चुनाव में उसे बहुसंख्यकों के अंदर भय पैदा करने का अवसर मिल जाए। और सत्य यह है कि फिलहाल इस मुद्दे को लेकर भाजपा और हमलावर होगी। वह कांग्रेस को मुस्लिम लीग की तर्ज पर चलने का आरोप और तेजी से लगाएगी।

सीपीआई (M) ने जारी किया अपना घोषणापत्र, CAA लेंगे वापस

ब्यूरो | navpravah.com

नई दिल्ली | देश की प्रमुख वामपंथी राजनीतिक पार्टियों में से एक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने बीते गुरुवार को लोकसभा चुनावों के लिए अपना घोषणापत्र जारी किया है, जिसमें सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को हराने का आह्वान दोहराया गया है और वामपंथ को मजबूत करने का संकल्प किया गया हैं।

आपको बताते चलें कि सीपीआई एम के पास निचले सदन में मात्र 3 सीटें हैं और उसने अपने 44 पन्नों के घोषणापत्र में अपने देश विरोधी मंसूबों को सामने रखा हैं। सीपीआई एम ने वादा किया है वो मोदी सरकार द्वारा लाए गए दूरदर्शी शिक्षा नीति को भी हटाएंगे। उनकी पूरे घोषणापत्र से देशविरोधी बातों की बू आ रही है, चलिए समझते है उनके वादें और घोषणाओं को-

पार्टी महासचिव सीताराम येचुरी ने पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रकाश करात, बृंदा करात और नीलोत्पल बसु की मौजूदगी में वादा किया कि अगर पार्टी सत्ता में आती है तो नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

ये है मुख्य वादें और घोषणाएं – 

सीपीआई एम ने वादा किया है वो अग्निपथ योजना को खत्म करेंगें और जल्द ही एक नई प्रक्रिया से सेना में भर्ती को शुरू करवाएंगे।

पार्टी ने संपत्ति कर, विरासत कर और बढ़े हुए कारपोरेट कर जैसे उपायों के साथ बढ़ती असमानता को दूर करने, आरक्षण पर 50 प्रतिशत की सीमा हटाने, महिला आरक्षण को तुरंत लागू करने, जातिवार गणना कराने, नागरिकता संशोधन अधिनियम को खत्म करने के लिए प्रयास करने का वादा किया है। मनरेगा के तहत 700 रुपये की न्यूनतम मजदूरी देने, एक कैलेंडर वर्ष में उपलब्ध कार्य दिवसों की संख्या बढ़ाकर 200 दिन करने, अग्निपथ योजना खत्म करने, पुरानी पेंशन योजना की बहाली का भी वादा किया है।

इस घोषणापत्र में पार्टी ने सभी कथित काले कानूनों जैसे यूएपीए कानून और पीएमएलए कानून को खत्म करने का एलान किया है। सीपीएम ने मतदाताओं से अपील की कि केंद्र में वैकल्पिक धर्मनिरपेक्ष पार्टी का गठन सुनिश्चित करें। पार्टी ने कहा कि संसद में सीपीएम की मजबूत मौजूदगी जरूरी है। सीपीएम ने अमीरों पर टैक्स लगाने का भी वादा किया है। सीपीएम ने मनरेगा में बजट आवंटन दोगुना करने का भी एलान किया है। साथ ही शहरों के लिए भी मनरेगा की तर्ज पर नौकरी की गारंटी वाली योजना लाई जाएगी। माकपा ने सरकारी उपक्रमों के निजीकरण को भी वापस लेने, किसानों के लिए एमएसपी की गारंटी और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने का भी एलान किया। सीपीएम ने राजनीतिक पार्टियों को उद्योगों से चंदा लेने पर रोक लगाने का भी वादा किया।

अनुच्छेद 370 को फिर से लागू करने का किया वादा

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने भी अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35ए के विवादास्पद संवैधानिक प्रावधानों को बहाल करके केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर में अशांति वापस लाने का आश्वासन दिया है, जिन्हें अगस्त 2019 में मोदी सरकार ने रद्द कर दिया था।