नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। कांग्रेस प्रवक्ता गौरव वल्लभ और बिहार कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अनिल शर्मा ने गुरुवार को भाजपा का दामन थाम लिया। भाजपा राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े और संजय मयूख की मौजूदगी में गौरव वल्लभ और अनिल शर्मा ने गुरुवार को पार्टी मुख्यालय में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की।
इसी के साथ लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस पार्टी ने 3 बड़े चेहरे गंवा दिए है। कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ चुके बॉक्सर विजेंदर सिंह भी कल भाजपा में शामिल हो गए थे। इसके अलावा महाराष्ट्र में कांग्रेस पार्टी के बड़े चेहरे संजय निरुपम ने कांग्रेस से इस्तीफा देकर एकनाथ शिंदे नीत शिवसेना में शामिल हो सकते हैं।
कांग्रेस छोड़ने पर गौरव का बयान
लोकसभा चुनाव के दौरान राजस्थान से गौरव वल्लभ का पलायन कांग्रेस पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। उन्होंने कांग्रेस पर दिशाहीन पार्टी होने का आरोप लगाया है। गौरव वल्लभ ने कहा है कि कांग्रेस पार्टी आज जिस प्रकार से दिशाहीन होकर आगे बढ़ रही है, उससे मैं खुद को असहज महसूस कर रहा हूं इसलिए मैं पार्टी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहा हूं।
महाराष्ट्र से संजय निरुपम ने भी दिया इस्तीफा
वहीं पार्टी से तनातनी के बीच महाराष्ट्र के नेता संजय निरुपम ने भी कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। उन्हें मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना का दामन थामेंगें।
बता दें कि गौरव वल्लभ ने पार्टी से आज ही इस्तीफा दिया, इस दौरान उन्होंने कहा कि वह सनातन विरोधी नारे नहीं लगा सकते। जीके कारण पार्टी में बना रहना मुश्किल है।
नई दिल्ली| कांग्रेस को लोकसभा चुनाव से पहले एक और बड़ा झटका लग गया। बॉक्सर विजेंदर सिंह पार्टी छोड़ कर, भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। महासचिव विनोद तावड़े, दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता और दक्षिण दिल्ली से पार्टी के उम्मीदवार रामवीर सिंह बिधूड़ी की मौजूदगी में विजेंदर सिंह ने बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की।
बीजेपी में शामिल होने के बाद बॉक्सर विजेंदर सिंह ने कहा, “मैं देश के विकास और जनता की सेवा के लिए आज बीजेपी में शामिल हुआ हूं।” उन्होंने कहा कि भाजपा में शामिल होकर उनकी घर वापसी हो गई।
विजेंदर सिंह ने साल 2019 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले राजनीति में कदम रखा था। उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर दक्षिण दिल्ली से लड़ा था। हालांकि, वो बीजेपी के रमेश बिधूड़ी से चुनाव हार गए थे. बिधूड़ी को 6 लाख 87 हजार से ज्यादा वोट मिले थे। आम आदमी पार्टी के राघव चड्ढा को 3 लाख 19 हजार से ज्यादा और विजेंदर को 1 लाख 64 हजार से ज्यादा वोट मिले थे।
नई दिल्ली । सर्वोच्च न्यायलय से राहत मिलने के बाद आज राज्यसभा सांसद संजय सिंह तिहाड़ जेल से रिहा कर दिए जाएंगे। निचली अदालत से सांसद संजय सिंह को सशर्त ज़मानत मिली है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि वे केस को लेकर किसी तरह की कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। संजय सिंह को निचली अदालत ने दो लाख रुपये के निजी मुचलके पर राहत दी है।
आम आदमी पार्टी नेता संजय सिंह के वकील ऋषिकेश कुमार ने बताया कि बेल की शर्तों में केस को लेकर कोई टिप्पणी न करना, कहीं जाते समय अपना लोकेशन शेयर करना, बिना अनुमति दिल्ली-एनसीआर न छोड़ने और देश छोड़कर न जाना शामिल है। यही नहीं, उन्हें स्पष्ट कहा गया है कि वे अपना पासपोर्ट भी जमा करें। न्यायलय ने संजय सिंह को हिदायत दी है कि वे केस से सम्बंधित किसी तरह की कोई भी चर्चा किसी से न करें। उनके वकील ने बताया कि न्यायलय से कुछ देर में रिलीज़ ऑर्डर तैयार हो जाएगा और तिहाड़ जेल में जाएगा। संभवतः संजय आज शाम तक जेल से बाहर आ जाएंगे।
जानिए, दिल्ली की ट्रायल कोर्ट ने संजय सिंह को किन शर्तों के साथ जमानत दी है –
* कहीं भी जाते वक्त अपने मोबाइल फोन का लोकेशन ऑन रखना होगा। * देश छोड़कर नहीं जा सकते, पासपोर्ट जमा करना होगा। * दिल्ली शराब घोटाला मामले में किसी भी तरह की टिप्पणी करने पर रोक। * सबूतों के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं कर सकते। * दिल्ली-एनसीआर बिना इजाजत छोड़कर नहीं जा सकते।
नई दिल्ली |दिल्ली शराब घोटाले मामले में संजय सिंह को सुप्रीम कोर्ट से 6 महीने के बाद अब जमानत मिल गई है. कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट जमानत की शर्तें तय करेगा. इस जमानत को मिसाल नहीं माना जाएगा. ईडी ने भी जमानत का विरोध नहीं किया और कहा कि उन्हें जमानत दी जा सकती है. अब संजय सिंह राजनीतिक गतिविधियां कर सकेंगे.
ईडी से पूछा था सवाल-
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने ईडी से पूछा था कि क्या सिंह को और कुछ समय के लिए हिरासत में रखने की जरूरत है? सुप्रीम कोर्ट ने ईडी से कहा था कि अगर दिल्ली आबकारी नीति घोटाला मामले में आप नेता संजय सिंह की हिरासत की जरूरत है तो लंच ब्रेक के बाद इससे उसे अवगत कराया जाए.
इसके अलावा शीर्ष अदालत ने कहा कि आप नेता संजय सिंह छह महीने जेल में बिता चुके हैं और उनके खिलाफ दो करोड़ रुपये की रिश्वत लेने का आरोप है. इन आरोपों की जांच ट्रायल के दौरान की जा सकती है.
शराब नीति मामले में अरविंद केजरीवाल हैं तिहाड़ जेल में-
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी दिल्ली शराब नीति से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में तिहाड़ जेल में पहुंच गए हैं. संजय सिंह, मनीष सिसोदिया और के. कविता पहले से ही इस मामले में जेल में कैद हैं. केजरीवाल को 21 मार्च को प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया था और वह 10 दिनों तक उसकी हिरासत में रहे. प्रवर्तन निदेशालय की हिरासत खत्म होने के बाद उन्हें विशेष न्यायाधीश कावेरी बावेजा की अदालत में पेश किया गया. ईडी ने उनकी 15 दिन की न्यायिक हिरासत का अनुरोध करते हुए कहा कि उन्होंने ‘बिल्कुल भी सहयोग नहीं किया. अदालत ने ईडी की याचिका मंजूर कर ली थी.
नई दिल्ली | लोकसभा चुनाव 2024 में टिकट कटने से नाराज बिहार के मुजफ्फरपुर से सांसद अजय निषाद ने बीजेपी छोड़ दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इसकी घोषणा की। इसके कुछ देर बाद ही दिल्ली में उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली।
अजय निषाद ने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से कहा कि उनके साथ छल हुआ है। इससे वह दुखी हैं। इसलिए बीजेपी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहे हैं। अब कांग्रेस उन्हें मुजफ्फरपुर से लोकसभा का उम्मीदवार बना सकती है। बता दें कि बीजेपी ने इस चुनाव में अजय निषाद का टिकट काट दिया था। उनकी जगह मुजफ्फरपुर से राम भूषण निषाद को प्रत्याशी बनाया गया है। अजय इससे नाराज चल रहे थे।
सांसद अजय निषाद ने मंगलवार को दिल्ली स्थित कांग्रेस कार्यालय में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इस दौरान बिहार के कांग्रेस अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह, प्रदेश प्रभारी मोहन प्रकाश एवं अन्य नेता मौजूद रहे। इस दौरान अखिलेश सिंह ने कहा कि अजय निषाद को बीजेपी में घुटन हो रही थी।हालांकि, मुजफ्फरपुर से उनकी उम्मीदवारी को लेकर मंगलवार को कोई घोषणा नहीं की गई।
उनके पिता कैप्टन जय नारायण निषाद ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनने के लिए यज्ञ करवाया। यज्ञ के बाद वे भाजपा के टिकट पर पहली बार मुजफ्फरपुर लोकसभा क्षेत्र से 2014 में चुनाव लड़े और कांग्रेस प्रत्याशी अखिलेश सिंह को उन्होंने हराया। 2019 में भाजपा ने एक बार फिर अजय निषाद पर विश्वास जताते हुए उन्हें दोबारा से टिकट दिया और इस बार उन्होंने विकासशील इंसाफ पार्टी के प्रत्याशी राज भूषण चौधरी निषाद को भारी मतों से हरा दिया। जिस राज भूषण चौधरी निषाद को उन्होंने हराया था। उन्हें ही बीजेपी ने इस बार टिकट दे दिया।
नई दिल्ली | तेल कंपनियों ने 19 किलो कमर्शियल सिलेंडर और पांच किलो एफटीएल (फ्री ट्रेड एलपीजी) सिलेंडर की कीमतें कम कर दीं हैं। सूत्रों ने बताया कि 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत अब 30.50 रुपये कम की गई है। दिल्ली में एक अप्रैल से इसकी कीमत 1764.50 होगी। पांच किलो एफटीएल की कीमत अब 7.50 रुपये कम हो गई है।
एक मार्च को तेल कंपनियों ने एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा की थी। 19 किलो कमर्शियल सिलेंडर की कीमतें 25 रुपये बढ़ा दी गई थी, जिसके बाद इसका दाम बढ़कर 1795 प्रति सिलेंडर हो गया था। बता दें कि एक फरवरी को इंडेन गैस सिलेंडर की कीमतें मेट्रो शहर दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में अलग अलग थी। एक मार्च के बाद से सभी मेट्रो शहरों में इंडेन गैस सिलेंडर की कीमतों में वृद्धि देखी गई।
सरकार ने बढ़ाया था घरेलू कच्चे तेल पर अप्रत्याशित लाभ कर-
मार्च में सरकार ने घरेलू स्तर पर उत्पादित कच्चे तेल पर अप्रत्याशित लाभ कर को 3,300 रुपये प्रति टन से बढ़ाकर 4,600 रुपये प्रति टन कर दिया था। यह कर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (एसएईडी) के रूप में लगाया जाता है। अधिसूचना के मुताबिक, घरेलू कच्चे तेल पर अप्रत्याशित लाभ कर बढ़ाया गया था, लेकिन डीजल के निर्यात पर लगने वाले कर को 1.50 रुपये प्रति लीटर से घटाकर शून्य कर दिया गया था। इसके अलावा पेट्रोल और विमान ईंधन (एटीएफ) पर लगने वाले कर को पहले की तरह शून्य रखा गया था। हालांकि, फिलहाल सिलेंडर की कीमतों को कम करने के कारणों का पता नहीं चल पाया है।
इससे पहले महिला दिवस के दिन केंद्र सरकार ने घरेलू सिलेंडर की कीमतों में कमी का ऐलान किया था। अभी दिल्ली में घरेलू गैस सिलेंडर 803 रुपये का मिल रहा है। वहीं उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को 300 रुपये सब्सिडी मिलती है। ऐसे में उन्हें 503 रुपये में सिलेंडर मिलता है।
नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेरठ में जनसभा कर चुनावी शंखनाद किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि मेरठ की धरती क्रांति और क्रांतिवीरों की धरती है। इस धरती ने चौधरी चरण सिंह जैसे महान सपूत देश को दिए हैं। हमारी सरकार को उन्हें भारत रत्न देने का सौभाग्य मिला है। मैं चौधरी साहब को आदर पूर्वक श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ।
उन्होंने कहा कि मेरा इस धरती से अलग ही रिश्ता है। 2014 और 2019 में मैंने अपने चुनाव अभियान की शुरुआत मेरठ से की थी। अब 2024 के चुनाव की पहली रैली मेरठ में ही हो रही है। 2024 का चुनाव सिर्फ एक सरकार बनाने के चुनाव नहीं है। कौन सांसद बने कौन न बने, इसका चुनाव नहीं है, इस बार का चुनाव विकसित भारत बनाने के लिए है। 2024 का जनादेश भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति बनाएगा।
वहीं इस रैली के दौरान पीएम मोदी ने मंच से चौधरी चरणसिंह को याद कर भाषण की शुरुआत की और कहा कि मेरठ से मेरा खास रिश्ता है। पिछली बार भी औघड़नाथ की इसी धरती से रैली का आगाज करने का सौभाग्य मिला था। पीएम मोदी ने कहा कि जब भारत दुनिया में नंबर तीन पर पहुंचेगा, तो देश में गरीबी तो दूर होगी ही और साथ-साथ एक सामर्थ्यवान, एक सशक्त देश बनेगा।
उन्होंने कहा कि मैं भ्रष्टाचार के खिलाफ काम कर रहा हूं, इसलिए कुछ लोग अपना आपा खो बैठे हैं। मैं कहता हूं कि मोदी की गारंटी कहती है कि भ्रष्टाचार हटाओ, वो कहते हैं भ्रष्टाचारी बचाओ, ये चुनाव दो खेमों की लड़ाई है। एनडीए भ्रष्टाचार हटाने के लिए मैदान में है। दूसरा इंडिया ब्लॉक भ्रष्टाचारियों को बचाने के लिए मैदान में है। उन्होंने कहा कि मेरा भारत मेरा परिवार है। मैं भ्रष्टाचारियों के खिलाफ बहुत बड़ी लड़ाई लड़ रहा हूं। इसलिए बड़े-बड़े भ्रष्टाचारी आज सलाखों के पीछे हैं। सुप्रीम कोर्ट से भी जमानत नहीं मिल रही है। इसलिए इन भ्रष्टाचारियों को कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। पीएम ने कहा कि मैं ऐसे लोगों पर सिर्फ कार्रवाई ही नहीं कर रहा, बल्कि इन बेईमानों ने जिसका धन लूटा है, उस धन को मैं लौटा भी रहा हूं. पीएम ने कहा कि मैं भ्रष्टाचारियों से कह रहा हूं कि मोदी पर चाहे कितने भी हमले करें। मोदी झुकने वाला नहीं है। भ्रष्टाचारी कितना ही बड़ा क्यों न हो, एक्शन जरूर होगा। जिसने देश को लूटा है, उसे लौटाना ही होगा।
आज यानी रविवार को विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की दिल्ली में मेगा रैली हो रही है। दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी सहित कई मुद्दों को लेकर विपक्ष रामलीला मैदान में महारैली का आयोजन कर रहा है। इस रैली के जरिये विपक्ष सरकार पर सबसे बड़ा हमला करने की कोशिश में है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने रैली को लेकर कहा कि झारखंड के पूर्व सीएम केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई, हेमंत सोरेन, दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी समेत कई और मुद्दों को लेकर विपक्ष बड़ा आंदोलन कर रहा है।
विपक्ष के शीर्ष नेता करेंगे शिरकत
रविवार को होने वाली रैली में, मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, भगवंत मान, अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव सहित भारत के शीर्ष नेता रविवार को रामलीला मैदान की रैली में भाग लेंगे, इसे लोकसभा चुनाव से ठीक पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी की पृष्ठभूमि में शक्ति प्रदर्शन, और विपक्षी एकता के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने कहा कि “लोकतंत्र बचाओ” रैली में नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला भी शामिल होंगे। आम आदमी पार्टी के एक नेता ने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री की पत्नी सुनीता केजरीवाल के भी इसमें शामिल होने की संभावना है।
वहीं, इंडिया गठबंधन की रैली को लेकर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा है कि केंद्र सरकार के मनमाने रवैये के खिलाफ विपक्ष एकजुट होकर मेगा रैली का आयोजन कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस रैली का मकसद लोकतंत्र को बचाना है। जयराम रमेश ने कहा कि यह रैली व्यक्ति केंद्रित और एक पार्टी की रैली नहीं है, बल्कि देश में लोकतंत्र बचाने के अभियान में शामिल 27 से 28 पार्टियां इसमें शामिल होंगी। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि विपक्षी दलों के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई से साफ जाहिर होता है कि प्रधानमंत्री विपक्ष को राजनीतिक और आर्थिक तौर पर खत्म करना चाहते हैं। इस रैली में विपक्षी नेता महंगाई, बेरोजगारी और ध्रुवीकरण की राजनीति, केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग, चुनावी बॉन्ड और अन्य मुद्दों पर अपनी बात रखेंगे।
जायजा लेने आते रहे नेता
रामलीला मैदान में आप पार्टी के नेताओं का भी आना-जाना लगा रहा। वह यहां की पल-पल की जानकारी व जायजा लेने आते दिखे। इसमें दिल्ली सरकार के मंत्री गोपाल राय, विधायक दिलीप पांडेय समेत दूसरे नेता मौके पर पहुंचे। दूसरी तरफ आप नेता लोगों को महारैली में शामिल होने के लिए अपील भी की। गोपाल राय ने कहा कि महारैली को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। रविवार दिल्ली समेत देश के दूसरे हिस्से से आम लोग रामलीला मैदान की तरफ कूच करेंगे। वहीं, इंडिया गठबंधन का शीर्ष नेतृत्व भी यहां मौजूद रहेगा।
नई दिल्ली | बिहार में NDA की सीट शेयरिंग में आरएलजेपी प्रमुख पशुपति पारस के हाथ खाली रहे थे। उन्हें गठबंधन में एक भी सीट नहीं मिली थी। इसके बाद अटकलों का बाजार गर्म हो गया था। कहा जा रहा था कि पशुपति पारस अब बागी तेवर दिखा सकते हैं और वह इंडिया ब्लॉक में जा सकते हैं, लेकिन अब पशुपति पारस ने साफ कह दिया है कि वह एनडीए के साथ ही रहेंगे।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा कि हमारी पार्टी रालोजपा, एनडीए का अभिन्न अंग है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमारे भी नेता है और उनका निर्णय हमारे लिए सर्वोपरि है।
बता दें, पशुपति पारस ने बीते दिनों केंद्रीय कैबिनेट से इस्तीफा देने के बाद अपने X अकाउंट से मोदी का परिवार हटा लिया था। पशुपति पारस ने सोशल साइट X पर पोस्ट शेयर कर लिखा है- हमारी पार्टी रालोजपा, एनडीए का अभिन्न अंग है! माननीय प्रधानमंत्री आदरणीय श्री जी हमारे भी नेता है और उनका निर्णय हमारे लिए सर्वोपरि है एवं उनके नेतृत्व में एनडीए पूरे देश में 400+ सीट जीतकर तीसरी बार रिकॉर्ड तोड़ बहुमत से NDA की सरकार बनेगी।
दरअसल पशुपति कुमार पारस की पार्टी रालोजपा को लोकसभा में एक भी सीट नहीं मिली है। एनडीए सीट शेयरिंग के दौरान पशुपति पारस को एक भी सीट नहीं मिलने के बाद पारस ने केंद्रीय कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया था। लेकिन, अब पशुपति पारस x पर पोस्ट कर साफ किया है वह एनडीए में ही बने रहेंगे।
नई दिल्ली | देश के पूर्व पीएम और किसानों के मसीहा चौधरी चरण सिंह को सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मरणोपरांत चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया है। बता दें कि नई दिल्ली में हुए कार्यक्रम में चौधरी चरण सिंह के पोते जयंत चौधरी ने ये सम्मान ग्रहण किया है। चौधरी चरण सिंह को सम्मान मिलने पर बीजेपी के दिग्गज नेताओं ने अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की है।
किसान परिवार में जन्म-
चरण सिंह का जन्म 1902 में उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के नूरपुर में एक मध्यम वर्गीय किसान परिवार में हुआ था। उन्होंने 1923 में विज्ञान से स्नातक की एवं 1925 में आगरा विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। कानून में प्रशिक्षित चरण ने गाजियाबाद से अपने पेशे की शुरुआत की। वे 1929 में मेरठ आ गये और बाद में कांग्रेस में शामिल हो गए।
1937 में पहली बार विधायक बने-
चरण सिंह सबसे पहले 1937 में छपरौली से उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए चुने गए एवं 1946, 1952, 1962 एवं 1967 में विधानसभा में अपने निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। वे 1946 में पंडित गोविंद बल्लभ पंत की सरकार में संसदीय सचिव बने और राजस्व, चिकित्सा एवं लोक स्वास्थ्य, न्याय, सूचना इत्यादि विभिन्न विभागों में कार्य किया। जून 1951 में उन्हें राज्य के कैबिनेट मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया एवं न्याय तथा सूचना विभागों का प्रभार दिया गया। बाद में 1952 में वे डॉ. सम्पूर्णानन्द के मंत्रिमंडल में राजस्व एवं कृषि मंत्री बने। अप्रैल 1959 में जब उन्होंने पद से इस्तीफा दिया, उस समय उन्होंने राजस्व एवं परिवहन विभाग का प्रभार संभाला हुआ था।
सी.बी. गुप्ता के मंत्रालय में वे गृह एवं कृषि मंत्री (1960) थे। सुचेता कृपलानी के मंत्रालय में वे कृषि एवं वन मंत्री (1962-63) रहे। उन्होंने 1965 में कृषि विभाग छोड़ दिया एवं 1966 में स्थानीय स्वशासन विभाग का प्रभार संभाल लिया। 1971 के लोकसभा चुनाव में चौधरी चरण सिंह मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट से चुनाव हार गए थे। उस चुनाव में उन्हें सीपीआई के विजयपाल सिंह ने 50,279 वोट से हराया था। इसके बाद आपातकाल लगा, चुनाव टले। 1977 में जब चुनाव हुए तो चौधरी चरण सिंह मुजफ्फरनगर की जगह बागपत सीट से चुनाव में उतरे। इस चुनाव में उन्होंने 1,21,538 से बड़ी जीत दर्ज की। बाद में देश के प्रधानमंत्री की कुर्सी पर भी बैठे। एक और बात 1971 में चौधरी चरण सिंह को हराने वाले विजय पाल सिंह 1977 में अपनी जमानत तक नहीं बचा सके। उन्हें महज 8,146 वोट से संतोष करना पड़ा था। तब मुजफ्फरनगर सीट से लोकदल के सईद मुर्तजा जीतने में सफल रहे थे।
यूपी में मना जश्न-
नई दिल्ली में किसान नेता चौधरी चरण सिंह को मरणोपरांत भारत रत्न मिलने पर लखनऊ में हजरतगंज स्थित राष्ट्रीय लोकदल के प्रदेश कार्यालय पर कार्यकर्ताओं ने एक दूसरे को मिठाईयां खिलायी। राष्ट्रीय लोकदल के कार्यकर्ता हाथों में मिठाई का डिब्बा लेकर कार्यालय के बाहर निकले और लोगों में भी मिठाई बांटी।
राष्ट्रीय लोकदल के कार्यालय पर भारत रत्न चौधरी चरण सिंह की मूर्ति पर माला पहना कर पार्टी कार्यकर्ताओं ने अपने नेता जयंत चौधरी को बहुत बहुत बधाई दी। इस अवसर पर प्रवक्ता अनिल दुबे ने कार्यकर्ताओं के सामने अपनी बातों को रखा।
प्रवक्ता अनिल ने कहा कि चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न मिला है, ये हम सभी के गौरवान्वित होने का पल है। यह एक ऐतिहासिक पल है। यह ‘भारत रत्न’ का सम्मान भारत के खेत-खलिहानों, मजदूर किसानों को मिला है।
प्रदेश कार्यालय पर जुटे कार्यकर्ताओं ने प्रवक्ता अनिल दुबे की भावनाओं पर सहमति जताते हुए अपनी बातों को भी रखा। राष्ट्रीय लोकदल के कार्यकर्ताओं ने चौधरी चरण सिंह को नमन करते हुए किसानों, मजदूरों, खेतीहर का सच्चा सिपाही बताया और उनकी मूर्ति पर पष्प अर्पित किये।