नई दिल्ली | पेपर लीक जैसी समस्या को जड़ से समाप्त करने के लिए केंद्र सरकार ने एंटी पेपर लीक कानून एक्ट २०२४ आज से ही लागू कर दिया है। कार्मिक लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय ने इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी है। इस कानून के तहत दोषी पाए जाने पर दस साल की क़ैद और एक करोड़ रुपए जुर्माने का प्रावधान है। यह कानून इसी वर्ष फरवरी में संसद में पारित हुआ था।
एंटी पेपर लीक कानून एक्ट लागू होने के बाद देश में जितनी परीक्षाएं कंप्यूटर आधारित आयोजित की जाती हैं, वे सभी इसके दायरे में आएँगी। हाल ही में मेडिकल की प्रवेश परीक्षा में हुई धांधली से देश में हड़कंप मच गया था। देश के कई राज्यों में सरकार के प्रति लोगों का रोष स्पष्ट दिखा, जिसकी वजह से सरकार ने आनन-फानन में इस कानून को लागू करने का फैसला किया।
दरअसल, 5 मई को हुए नीट के एग्जाम में सभी को चौंकाते हुए एक यो दो नहीं पूरे 67 बच्चों ने टॉप किया। यही नहीं, यूजीसी नेट में पेपर लीक होने के बाद भी काफी विवाद हुआ। कई परीक्षाओं में लगातार पेपर लीक होने के बाद सरकार ने एंटी पेपर लीक कानून आज से लागू कर दिया है।
अधिनियम की अधिसूचना केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से पूछे जाने के ठीक एक दिन बाद आई है। मीडिया ने मंत्री से पूछा था कि इस कानून को लागू कब किया जाएगा, जिसके जवाब में मंत्री प्रधान ने बताया था कि मंत्रालय इस पर काम कर रहा है, यथाशीघ्र इसको लागू कर दिया जाएगा। ताकि इस तरह के कृत्य में संलिप्त लोगों को दण्डित किया जा सके।
दिल्ली हाईकोर्ट ने सीएम केजरीवाल की जमानत और रिहाई पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने शुक्रवार शाम ईडी की अर्जी पर फैसला सुरक्षित रखते हुए कहा कि केजरीवाल अभी जेल में ही रहेंगे। इस तरह ट्रायल कोर्ट की ओर से दी गई जमानत को हाईकोर्ट ने 24 घंटे के अंदर ही खारिज कर दिया। अब हाईकोर्ट में एक बार फिर बहस का दौर चलेगा और इस पर दो से तीन दिन में फैसला आ सकता है।
बता दें कि सीएम केजरीवाल को ईडी ने शराब घोटाला मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का आरोपी बनाया था। गुरुवार को ट्रायल कोर्ट में वैकेशन जज न्याय बिंदु ने दोनों पक्षों की दलील सुनते हुए सीएम केजरीवाल को जमानत दी थी और यह भी कहा था कि वह 1 लाख के मुचलके पर जमानत पर रिहा हो सकते हैं।
लेकिन शुक्रवार को सुबह ही ईडी ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में दलील दी। हाईकोर्ट में मामला जाते ही कोर्ट ने सबसे पहले केजरीवाल की जमानत पर स्टे लगा दिया और फिर दिन भर जो बहस चली उसके आधार पर शुक्रवार शाम को भी स्टे ऑर्डर पर फैसला सुरक्षित रखा है। इस फैसले का असर ये होगा की सीएम केजरीवाल को अभी तिहाड़ से रिहाई नहीं मिल रही है कोर्ट अब इस विषय पर विस्तृत सुनवाई करेगी और फिर जमानत मिलने और न मिलने पर फैसला होगा। हाईकोर्ट ने अभी स्टे ऑर्डर बरकरार रखा है। ट्रायल कोर्ट के आदेश पर एक हफ्ते तक की रोक लगाई गई है।
कोर्ट ने कही ये बात-
इस दलील पर बेंच ने कहा, ‘तो आप दो-तीन दलीलें दे रहे हैं- ‘आपकी बात नहीं सुनी गई और धारा 45 पीएमएलए पर ठीक से कार्रवाई नहीं की गई और हाईकोर्ट के निष्कर्षों पर विचार नहीं किया गया।’
एएसजी राजू ने कहा, ‘संवैधानिक कुर्सी पर बैठना जमानत का आधार है? इसका मतलब है कि हर मंत्री को जमानत मिलेगी। आप सीएम हैं, इसलिए आपको जमानत मिलेगी ?’
ASG राजू ने कहा, ‘लिखित प्रस्तुतियाँ दाखिल करने के लिए समय नहीं दिया गया यह बिल्कुल भी उचित नहीं है।’ ईडी ने पीएमएलए की धारा 45 का हवाला दिया है। ASG ने कहा, ‘इसमें ज़रूरी शर्त है कि कोर्ट ज़मानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए सरकारी वकील को अपनी दलील रखने का पूरा मौका देता है. पर इस केस में ऐसा नहीं हुआ। हमें निचली अदालत ने ज़मानत का विरोध करने का पूरा मौका नहीं दिया। ASG ने कहा कि केजरीवाल की तरफ से कभी भी असल मुद्दे नहीं उठाए गए, लेकिन जवाब में उन्होंने बिल्कुल नए मुद्दे उठाए। जवाब के बाद मुझे कोई मौका नहीं दिया गया।’
क्या कहा था राउज एवेन्यू कोर्ट ने-
राऊज एवेन्यू कोर्ट ने केजरीवाल को जमानत देते हुए फैसले में कहा, ‘ED साबित नहीं कर पाई है कि विजय नायर अरविंद केजरीवाल के इशारे पर काम कर रहा था। ED यह नहीं बता पा रही कि मनी ट्रेल की जांच के लिए और कितना समय चाहिए। ED के पास केजरीवाल के खिलाफ आगे बढ़ने के लिए सबूत पर्याप्त नहीं हैं और उसे किसी भी तरह से हासिल करने में समय लग रहा है। ED केजरीवाल द्वारा उठाए गए कुछ मुद्दों पर चुप है, जैसे कि उनका नाम न तो सीबीआई मामले में और न ही ईसीआईआर एफआईआर में था। ED अरविंद केजरीवाल के खिलाफ पूर्वाग्रह से काम कर रही है, अपराध की आय पर कोई प्रत्यक्ष सबूत नहीं है। यदि किसी अभियुक्त को अपनी बेगुनाही का एहसास होने तक सिस्टम के अत्याचारों को सहना पड़ा है, तो वह कभी भी यह कल्पना नहीं कर पाएगा कि “न्याय” वास्तव में उसके पक्ष में किया गया है।’
गाज़ा और इजराइल के बीच हो रहे युद्ध का असर पूरी दुनिया में दिखाई दे रहा है। इस बीच मालदीव ने इजराइल को लेकर एक बड़ा फैसला किया है। मालदीव के राष्ट्रपति के दफ्तर में रविवार को काफी गहमागहमी देखी गई, जिसके बाद मालदीव ने एक बड़ा अनाउंसमेंट किया। मालदीव ने ऐलान किया कि आगे से वे इज़रायली नागरिकों को अपने देश में एंट्री नहीं देंगे। गाज़ा में हो रहे हमले के मद्देनज़र किए गए इस फैसले का वैश्विक पटल पर बड़ा असर पड़ने की संभावना है।
मुइज्जू सरकार अब इजरायली पासपोर्ट वालों पर बैन लगाने के लिए कानून में भी बदलाव करेगी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, गाजा पर ताबड़तोड़ हमलों को लेकर लोगों में गुस्सा बढ़ता देख मालदीव ने यह फैसला किया है। रविवार को राष्ट्रपति मुइज्जू के ऑफिस में हुई मीटिंग के बाद गृहमंत्री अली इहुसन ने इसका ऐलान किया। उन्होंने कहा कि कैबिनेट ने इजरायली पासपोर्ट वालों को मालदीव में दाखिल होने पर बैन लगाने के लिए कानून में बदलाव का फैसला किया। इसके लिए कैबिनेट ने मंत्रियों की एक विशेष कमेटी भी बनाई है, जो इस पर तेजी से काम करेगी।
इजराइल-गाज़ा युद्ध के चलते दुनिया इस समय दो धड़े में बँट गई है, कुछ देश इजराइल का समर्थन कर रहे हैं तो कुछ ग़ज़ा (फिलिस्तीन) का। इस युद्ध की वजह से इजरायल को अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय से भी मुश्किलें झेलनी पड़ रही हैं। अब मालदीव भी इजरायल पर एक्शन ले रहा है।
ओडिशा में पिछले 72 घंटे में हीट स्ट्रोक के चलते 99 लोगों की मौत का मामला सामने आया है। हालाँकि 99 में से मात्र 20 लोगों की मौत की पुष्टि सम्बंधित अधिकारियों द्वारा की गई है। राज्य के विशेष राहत आयुक्त के मुताबिक़, इस भीषण गर्मी के दौरान जिलाधिकारियों की तरफ से स्ट्रोक के कारण हुई मौतों की कुल संख्या 141 है, जिनमें से 26 लोगों के मरने की पुष्टि लू की ही चपेट में आने से हुई है।
हीट स्ट्रोक से इतनी मौतें होने की वजह से राज्य सरकार चिंतित है। लगातार हीट स्ट्रोक से मरने वालों की संख्या को बढ़ते देख शनिवार को तीन सदस्यीय डॉक्टरों की टीम राउरकेला सरकारी अस्पताल पहुंची, जहाँ बुर्ला से आए प्रोफेसर भूटेश्वर प्रधान, स्टेट सर्विलेंस अधिकारी डॉ. अशोक कुमार पैतराय एवं डॉ. अर्घ्य प्रधान ने आरजीएच के अधीक्षक डॉ. गणेश प्रसाद दास के साथ उच्च स्तर बैठक की।
चिकित्सकों ने हीट स्ट्रोक वार्ड का दौरा कर मरीजों से बातचीत भी की। बताया जा रहा है कि तीन सदस्यीय टीम हीट स्ट्रोक की स्थिति पर रिपोर्ट तैयार कर स्वास्थ्य विभाग को सौंपेगी।
चुनावी प्रक्रिया के समाप्त होते ही अलग-अलग चैनलों और एजेंसियों ने एग्जिट पोल जारी कर दिया। एग्जिट पोल जारी करते ही राजनीतिक गलियारे में खलबली मच गई है। पोल्स की मानें तो देश में एक बार फिर से भाजपा की सरकार बनने वाली है। अंतिम चरण के मतदान के बाद अब 4 जून को मतगणना होगी और परिणाम घोषित होंगे।
एग्जिट पोल में देश के मूड का पता चलता है। हालाँकि कई बार ऐसा होता है कि एग्जिट पोल के नतीजे एकदम उलट होते हैं। इस बार रिपब्लिक भारत ने एनडीए को 353 से 365 सीटें मिलने का अनुमान लगाया है, वहीं इंडिया गठबंधन 133 सीटों के आसपास सिमट सकता है। इसके अलावा इंडिया टीवी ने भी एनडीए को 371 सीटें मिलने का अनुमान लगाया है।
कई एग्जिट पोल्स के अनुसार, इस बार भाजपा को 2019 से भी ज़्यादा सीटें मिल रही है, वहीं पर कांग्रेस की सीटों में भी बढ़ोत्तरी देखने को मिल रही है। 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के खाते में 303 सीटें थीं। वहीं कांग्रेस को केवल 52 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। टीएमसी को 22 सीटों पर जीत मिली थी। जेडीयू को 16 सीटें और समाजवादी पार्टी को मात्र पांच सीटें मिली थीं। बीएसपी को यूपी में 10 सीटों पर जीत हासिल हुई थी।
अब यह चार जून को साफ़ हो जाएगा कि किसको कितनी सीट मिल रही है लेकिन एग्जिट पोल ने राजनीतिक गलियारे की गर्मी ज़रूर बढ़ा दी है।
नई दिल्ली | एयर इंडिया की फ्लाइट के कर्मचारी किस स्तर की लापरवाही कर लोगों की भावनाओं को आहत कर रहे हैं, इसका ताज़ा उदाहरण आज राजकोट से उदयपुर जा रही फ्लाइट में देखने को मिला। आकाश शुक्ल एयर इण्डिया की फ्लाइट से राजकोट से उदयपुर जा रहे थे, जिसमें उन्हें वेज की जगह नॉन वेज खाना परोस दिया गया। शुक्ल शुद्ध शाकाहारी हैं और विमान व्यवस्था की इस लापरवाही से बेहद दुखी हैं।
एयरलाइन पर भड़कते हुए आकाश शुक्ल ने नवप्रवाह को बताया कि शिकायत करने के बावजूद एयरलाइंस ये मानने को तैयार नहीं था लेकिन बाद में एयरलाइंस ने माना कि उन्हें नॉन वेज परोस दिया गया है। आकाश ने आगे नवप्रवाह को फोटोज शेयर करते हुए बताया कि किस तरह से उस फ्लाइट में बैठे हर शख्स को चिकन दे दिया गया। साथी यात्रियों ने भी एयरलाइन के भोजन प्रबंधन के बारे में चिंता जताई।
आकाश द्वारा शेयर किए गए खाने के पैकेट के रैपर पर स्पष्ट रूप से ‘वेज मील’ लिखा हुआ था, जबकि उसके अंदर में चिकन के टुकड़े दिखाई दे रहें हैं। उन्होंने नवप्रवाह से आगे कहा, ‘जब मैंने केबिन सुपरवाइजर को सूचित किया, तो उन्होंने माफी मांगी और मुझे बताया कि मेरे और कई यात्रियों को भी ये सर्व कर दिया गया और कुछ और लोगों ने भी इसके बारे में शिकायत की थी। हालांकि, मेरे क्रू को सूचित करने के बाद भी अन्य यात्रियों को सूचित करने के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई’।
ये पहली बार नहीं हुआ है, जब एयर इंडिया ने इस तरह से वेज खाने की जगह नॉन वेज सर्व किया हो। इससे पहले भी 13 जनवरी 2024 को वीरा जैन नाम की शाकाहारी महिला को भी चिकन परोस दिया गया था। जिसके ट्वीट के बाद से सोशल मीडिया पर बवाल मच गया था।
नई दिल्ली। दो मिनट में मैगी परोसनी वाली कंपनी ‘नेस्ले’ की एक बार फिर मुश्किलें बढ़ गई हैं। दरअसल, स्विट्जरलैंड की पब्लिक आई कंपनी ने अपनी एक रिपोर्ट के जरिए नेस्ले के दो सबसे ज्यादा बिकने वाले बेबी-फूड ब्रांडों में बड़ी मात्रा में एडेड शुगर या अतिरिक्त चीनी मिली होने का खुलासा किया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बच्चों के प्रोडक्ट्स में चीनी को डालना खतरनाक और गैरजरूरी काम है, क्योंकि इससे बच्चों को चीनी खाने की आदत लग सकती है। हालांकि अब इस मामले में केंद्र सरकार ने कंपनी के खिलाफ भारत में शिशु खाद्य उत्पादों में चीनी मिलाने से जुड़ी रिपोर्ट्स पर संज्ञान लिया है।
शुगर रिपोर्ट की जांच कर रही FSSAI
सरकारी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, भारत का खाद्य नियामक एफएसएसएआई ‘पब्लिक आई’ की रिपोर्ट की जांच कर रहा है। पूरी जांच करने के बाद इसे वैज्ञानिक पैनल के सामने रखा जाएगा और फिर नेस्ले कंपनी के खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा। मामले को लेकर नेस्ले का कहना है कि, ‘वह बच्चों के लिए अपने उत्पादों की पोषण गुणवत्ता बनाए रखते हैं और हमेशा उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री का उपयोग करने को प्राथमिकता देते है।’ लेकिन स्विस जांच संगठन पब्लिक आई ने बताया है कि डब्ल्यूएचओ (WHO) द्वारा शिशु खाद्य उत्पादों में अतिरिक्त चीनी पर प्रतिबंध लगाने के कड़े दिशानिर्देशों के बावजूद, नेस्ले भारत में सेरेलक जैसे उत्पादों में चीनी मिलाती है।
क्या है WHO की गाइडलाइन?
नेस्ले पर लगे इलजाम अगर सही पाये गए तो ये वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के निर्देशों का सीधा-सीधा उल्लंघन होगा। WHO के निर्देश के मुताबिक, तीन साल के कम उम्र के बच्चों के भोन में शुगर या मीठे पदार्थ का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। अतिरिक्त चीनी मिलाने से हाई ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारी, डायबिटीज, अल्जाइमर का खतरा, दांत में कैविटीज की समस्या, मेंटल हेल्थ आदि समस्या हो सकती है।
क्या कहती है कंपनी?
नेस्ले इंडिया के प्रवक्ता ने इस बारे में बताया कि पिछले पांच सालों से कंपनी के द्वारा बेबी फूड में अतिरिक्त चीनी को 30 प्रतिशत तक कम कर दिया गया है। कंपनी के द्वारा नियमित रुप से खाने की गुणवत्ता, सुरक्षा और स्वाद की जांच करते हैं।
नेस्ले के प्रोडक्ट्स में सबसे ज्यादा शुगर
स्विस जांच संगठन पब्लिक आई की रिपोर्ट से ये पता चला है कि सबसे ज्यादा शुगर फिलीपींस के प्रोडक्ट में मिली है। यहां 1 सर्विंग में 7.3 ग्राम शुगर पाई गई है, जोकि बच्चों के हिसाब काफी ज्यादा है। वहीं नाइजीरिया में 6.8 ग्राम और सेनेगल में 5.9 ग्राम शुगर फूड्स प्रोडक्ट में मिली है। बता दें इस रिपोर्ट में 15 में से 8 देशों के प्रोडक्ट में शुगर लेवल की जानकारी दी गई है, वहीं 7 देशों की कोई जानकारी नहीं दी गई है।
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में रामनवमी के अवसर पर दो जगह हिंसा हुई। मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा शहर में मस्जिद के पास से शोभायात्रा निकालने के बाद दो समुदायों के बीच संघर्ष हुआ। इस बीच बम फटने की भी सूचना मिली।
वहीं मेदिनीपुर के इगरा में भी दो समुदाय के बीच झड़प हुई और आगजनी की गई। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, हिंसा में अब तक 18 लोगों के घायल होने की खबर है। इसमें दो नाबालिग, एक महिला और कुछ पुलिस कर्मी भी शामिल हैं।
मुर्शिदाबाद के रेजीनगर में घर की छत से पत्थरबाजी
बीजेपी आईटी सेल के हेड अमित मालवीय ने हिंसा के कुछ वीडियो शेयर किए हैं। उन्होंने लिखा- ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल के लिए कलंक हैं। वह एक बार फिर रामनवमी शोभा यात्रा की सुरक्षा करने में विफल रही। मुर्शिदाबाद के रेजीनगर में हिंदू श्रद्धालुओं को निशाना बनाया गया। इस क्षेत्र में हिंदू अल्पसंख्यक हैं। रेजीनगर में एक छत से लोगों के पत्थरबाजी करने का भी वीडियो सामने आया है।
ममता ने किया पलटवार –
ममता ने रायगंज लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में एक चुनावी रैली में कहा, ‘सब कुछ पूर्व नियोजित था। रामनवमी से एक दिन पहले मुर्शिदाबाद के पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) को हटा दिया गया ताकि आप (भाजपा) हिंसा कर सकें।’
वीडियो भी हुआ वायरल –
बता दें कि मुर्शिदाबाद में हिंदुओं की शोभायात्रा पर हमले का एक वीडियो पश्चिम बंगाल भाजपा द्वारा सोशल मीडिया साइट X पर पोस्ट किया गया था। इस वीडियो में इस वीडियो में कई लोग ऊँची छतों पर खड़े दिखाई दे रहे हैं। वो वहाँ से नीचे ईंट-पत्थर फेंक रहे हैं। नीचे शोभायात्रा में शामिल लोगों में चीख-पुकार मची हुई दिखाई दे रही है।
वीडियो में हेलमेट पहने कुछ पुलिसकर्मी भी दिख रहे हैं। वो छत से पत्थर फेंक रहे उपद्रवियों को समझाने का प्रयास कर रहे हैं। हालाँकि उनकी अपील का कोई भी असर हमलावरों पर होता नहीं दिख रहा है। 23 सेकेंड के इस वीडियो में नीचे खड़े लोग शोरगुल करते सुनाई दे रहे हैं। इस घटना में लोगों के सिर भी फट गए हैं, जिनकी तस्वीरें भी सामने आई हैं।
नई दिल्ली | कहा जाता है कि अगर इरादे मजबूत हों और मेहनत की जाए तो कामयाबी जरूर मिलती है। इस बात को सिद्ध कर रहा है देश में आईएएस-आईपीएस जैसे उच्च पदों पर अब ज्यादा संख्या में मुसलमानों का काबिज होना। इससे पहले आम तौर पर यह माना जाता रहा है कि आजादी के 75 साल बाद भी शैक्षिक रूप से मुस्लिम पिछड़े हैं और देश के रसूखदार पदों पर उनकी मौजूदगी न के बराबर है।
यह बात 2016 तक काफी हद तक हकीकत के करीब भी रही है, मगर अब ऐसा नहीं है। हाल ही में संघ लोक सेवा आयोग की जारी सिविल सर्विसेज मेरिट लिस्ट, 2023 में 50 से ज्यादा मुस्लिम कैंडिडेट्स ने जगह पाई है। इनमें से 5 तो ऐसे हैं, जिन्हें टॉप-100 में जगह मिली है। इन पांच उम्मीदवारों के नाम रुहानी, नौशीन, वर्दाह खान, ज़ुफिशान हक और फबी रशीद हैं, इन पांचों ने अपनी मेहनत से टॉप 100 में जगह बनाई है। इस सफलता से न सिर्फ उनका समुदाय बल्कि पूरा देश प्रेरित होता है।
उल्लेखनीय है कि शाह फैसल ने 2010 में IAS टॉप करके कश्मीरियों समेत पूरे देश के मुस्लिम युवाओं को प्रेरणा दी थी। इसके बाद 2015 में कश्मीर के अतहर आमिर ने UPSC में दूसरी रैंक हासिल की थी। वहीं, 2017 में मेवात के अब्दुल जब्बार भी चयनित हुए थे। वे इस क्षेत्र से पहले मुसलमान सिविल सर्वेंट हैं। और अब 2023 में दिल्ली से पढ़ाई करने वालीं गोरखपुर की नौशीन ने सिविल सेवा परीक्षा में 9वीं रैंक हासिल की है, जो मुस्लिम समुदाय के लड़के-लड़कियों को देश की सर्वोच्च सेवा में सफल होने के लिए राह दिखाएगा।
मुस्लिम कैंडिडेट्स की सफलता दर 5 फीसदी, बीते साल से ज्यादा-
इससे पहले 2022 की सिविल सेवा परीक्षा में कुल 933 अभ्यर्थी आईएएस-आईपीएस और केंद्रीय सेवाओं के लिए चुने गए थे। इनमें से महज 29 कैंडिडेट्स मुस्लिम कम्युनिटी से थे। जो कुल सफल लोगों में से करीब 3.1 फीसदी रहे। इस बार यानी 2023 की सिविल सेवा परीक्षा में 51 मुस्लिम कैंडिडेट्स सफल रहे, उनका कुल सफल लोगों में प्रतिशत 5 फीसदी से ज्यादा ही रहा है।
2022: UPSC प्रीलिम्स और मेन्स परीक्षा में 2,529 उम्मीदवार सफल हुए, जिनमें 83 मुस्लिम थे। अंत में, 933 उम्मीदवारों को IAS, IPS, IFS, IRS और अन्य सेवाओं के लिए चुना गया, जिसमें 30 मुस्लिम शामिल थे।
2021: इस साल की मेन्स परीक्षा में 1,823 उम्मीदवार पास हुए थे और इंटरव्यू के लिए बुलाए गए थे। फाइनल मेरिट लिस्ट में 685 उम्मीदवारों का नाम था, जिसमें 21 मुस्लिम उम्मीदवार थे। यह पिछले दस सालों में मुस्लिम उम्मीदवारों का सबसे कमजोर प्रदर्शन था।
2020: इस वर्ष, UPSC ने 761 उम्मीदवारों को विभिन्न शीर्ष सेवाओं के लिए सुझाया जिसमें 31 मुस्लिम शामिल थे।
2019 और 2018: 2019 में 42 मुस्लिमों ने परीक्षा पास की जबकि 2018 में केवल 27 मुस्लिम सफल हुए थे।
2016 और 2017: ये दो साल मुस्लिम उम्मीदवारों के लिए बहुत अच्छे रहे. 2016 में 52 और 2017 में 50 मुस्लिम उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की।
2015 और 2014: 2015 में 1,078 में से 34 मुस्लिम और 2014 में 1,236 उम्मीदवारों में से 38 मुस्लिम सफल हुए।
2013 में, 34 मुस्लिम उम्मीदवारों ने परीक्षा पास की।
गोरखपुर से हैंAIR 9 नौशीन –
नौशीन मूल रूप से गोरखपुर के कुशीनगर क्षेत्र के पिपरा कनक गांव के मठिया टोला की रहने वाली हैं। नौशीन ने प्रारंभिक शिक्षा गोरखपुर के रैंपस स्कूल से पूरी कर दिल्ली विश्वविद्यालय के एसजीटीबी खालसा कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की। इसके बाद वह सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में जुट गईं। नौशीन ने बताया कि उन्हें इस बात की काफी खुशी है कि उन्होंने यह सफलता बिना किसी कोचिंग के खुद की बनाई अध्ययन रणनीति से हासिल की है। उनके पिता आकाशवाणी के सहायक निदेशक (अभियांत्रिक) के पद पर कार्यरत हैं। नौशीन अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता अब्दुल कयूम, मां जेबा खातून, बहन नगमा और भाई अकरम को देती हैं। नौशीन ने बताया कि उन्हें सफलता मिलने की पूरी उम्मीद थी, लेकिन नौवीं रैंक हासिल होने को लेकर वह व परिवार उत्साहित हैं।
नई दिल्ली।दिल थामकर इंतज़ार कर रहे अभियर्थियों के लिए इंतज़ार खत्म हुआ। संघ लोक सेवा आयोग ने सिविल सर्विसेज परीक्षा 2023 के परीक्षाफल मंगलवार दोपहर १ बजे घोषणा कर दिया। वर्ष २०२३ के परीक्षा के टॉपर रहे लखनऊ के आदित्य श्रीवास्तव वहीँ दूसरे और तीसरे नंबर पर क्रमश: अनिमेष प्रधान और दोनुरू अनन्या रेड्डी रहे। आपको बता दें कि इस परीक्षा में ११४३ अभियर्थी अधिकारी बने हैं।
कौन है आदित्य श्रीवास्तव?
आदित्य ने अपने शुरूआती पढ़ाई लखनऊ के सीएमएस अलीगंज से पूरी की हैं। इसके बाद उन्होंने आईआईटी कानपुर से बीटेक और एमटेक किया। १५ माह तक उन्होंने बेंगलुरु में अमेरिकी एमएनसी कंपनी में नौकरी की। उसके बाद उन्होंने २०२० में नौकरी छोड़ दी और यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने लगे। २०२२ यूपीएससी में उन्हें २३६वीं रैंक मिली थी और उसका चयन आईपीएस के लिए हुआ था।
ऑल इंडिया रैंक के पांच टॉपर्स कौन हैं?
यूपीएससी सिविल सर्विस परीक्षा 2023 के परिणाम में आदित्य श्रीवास्तव ने ऑल इंडिया रैंक वन हासिल की है। दूसरा रैंक अनिमेष प्रधान, तीसरा दोनुरू अनन्या रेड्डी, चौथे पर पीके सिद्धार्थ रामकुमार, और पांचवे पर रूहानी पाया हैं।
सभी श्रेणी के उम्मीदवारों का इतने पदों पर हुआ चयन –
आईएएस के पदों पर सामान्य श्रेणी के 73 ईडब्लूएस के 17, ओबीसी के 49, एससी के 27 , एसटी के 14 उम्मीदवारों का चयन हुआ है। आईएफएस के पदों पर सामान्य श्रेणी के 16 ईडब्लूएस के 04, ओबीसी के 10, एससी के 05, और एसटी के 02 उम्मीदवारों का चयन हुआ है वहीं आईपीएस के पदों पर सामान्य श्रेणी के 80 ईडब्लूएस के 20, ओबीसी के 55, एससी के 32, एसटी और 13 उम्मीदवारों का चयन हुआ है। सेंट्रल सर्विसेज ग्रुप-ए के पदों पर सामान्य श्रेणी के 258 ईडब्लूएस के 64, ओबीसी के 160, एससी के 86 और एसटी के 45 उम्मीदवारों का चयन हुआ है। ग्रुप- बी सर्विसेज के पदों पर सामान्य श्रेणी के 47 ईडब्लूएस के 10, ओबीसी के 29, एससी के 15, एसटी के 12 उम्मीदवारों का चयन हुआ है।