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Thursday, July 30, 2026
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UP: सोशल मीडिया पर गंदगी फैलाने वालों की ख़ैर नहीं, बाबा की सरकार ला रही है ‘न्यू सोशल मीडिया पॉलिसी’

सौम्या केसरवानी | navpravah.com

लखनऊ | उत्तर प्रदेश सरकार नई सोशल मीडिया पॉलिसी लेकर आई है, जिसके तहत अब सिरफिरों की नकेल कसी जाएगी, जो सोशल मीडिया में गंदगी फैलाते हैं। साथ ही सरकार के फ़ैसले से अच्छे कंटेंट बनाने वालों की चाँदी भी हो गई है।

सरकार ने नए नियम के तहत असुविधाजनक और आपत्तिजनक पोस्ट करने पर तीन साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा निर्धारित की है। वहीं इसके साथ यह भी फैसला किया है कि सोशल मीडिया पर डिजिटल एजेंसी और फर्म के लिए विज्ञापन के नये मार्ग भी खोले जाएँगे। सोशल मीडिया पॉलिसी को कैबिनेट की बैठक में मंजूरी मिल गयी है।

नई सोशल मीडिया पॉलिसी में पहले राष्ट्र विरोधी कॉन्टेंट डालने पर तीन साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान था। अभी तक आईटी एक्ट की धारा 66E और 66F के तहत कार्रवाई की जाती थी, लेकिन अब नया नियम आ गया है, इसके तहत तीन साल की कैद, मानहानि अथवा उम्रकैद भी शामिल है।

आपको बता दें कि, योगी सरकार अपनी जन कल्याणकारी, लाभकारी योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी जनता तक पहुंचाने के लिए यह नई योजना लेकर आई है। इससे सरकार की उपलब्धि, योजनाएं, कार्य विज्ञापन के जरिए लोगों तक पहुचेगें और जनता सरकार की नीतियों को अच्छे से समझ पायेगी।

इस योजना के अनुसार, अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम और यू-ट्यूब पर सरकारी योजनाओं और उपलब्धियों पर आधारित कॉन्टेंट, वीडियो, ट्वीट, पोस्ट और रील को शेयर करने पर उन्हें विज्ञापन देकर प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि लोगों में जागरूकता फैले ताकि कोई साइबर क्राइम व कोई स्कैम में भी न फंसे।

पॉलिसी के तहत विज्ञापन का लाभ लेने के लिए कॉन्टेंट प्रोवाइडर को चार भागों में बांटा गया है। इसमें एजेंसी या फर्म को अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर पर बांटा गया है, वहीं यूट्यूब वीडियो, शॉर्ट्स और पॉडकास्ट भुगतान के लिए 8 लाख, 7 लाख, 6 लाख और 4 लाख रुपये है।

‘यूनिफाइड पेंशन स्कीम’ को लेकर कांग्रेस ने सरकार को घेरा, बता दिया मोदी सरकार का U TURN

नृपेन्द्र कुमार मौर्य | navpravah.com

नई दिल्ली | केंद्र सरकार की नई पेंशन योजना, यूनिफाइड पेंशन स्कीम (यूपीएस) को लेकर राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। जहां एक ओर सरकार इस योजना को सरकारी कर्मचारियों के लिए एक बड़ी उपलब्धि बता रही है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी इस पर सवाल उठा रही है।

कांग्रेस का आरोप: यू-टर्न की राजनीति-

कांग्रेस का आरोप है कि यूपीएस में ‘यू’ का मतलब मोदी सरकार का ‘यू-टर्न’ है। पार्टी का कहना है कि सरकार ने पहले एनपीएस को लागू किया था और अब जब चुनाव नजदीक हैं, तो वोट बैंक को साधने के लिए यह नई योजना लाई गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि जनता की शक्ति ने सरकार को यह यू-टर्न लेने पर मजबूर किया है।

यूपीएस क्या है और इसके फायदे क्या हैं?

यूपीएस एक ऐसी पेंशन योजना है, जिसमें सरकारी कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद सुनिश्चित पेंशन मिलती है। इस योजना के तहत कर्मचारी को सेवानिवृत्ति से पहले के 12 महीनों की औसत वेतन का 50% पेंशन के रूप में दिया जाएगा। यह योजना न्यूनतम 10 साल की सेवा वाले कर्मचारियों के लिए भी लागू होगी।

एनपीएस और यूपीएस में क्या अंतर है?

एनपीएस एक मार्केट लिंक्ड पेंशन योजना थी, जिसमें पेंशन की राशि बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करती थी। जबकि यूपीएस में पेंशन की राशि सुनिश्चित होती है।

सियासी माहौल में नई पेंशन योजना-

नई पेंशन योजना को लेकर छिड़ी इस बहस से साफ है कि यह आगामी चुनावों में एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकती है। कांग्रेस इस मुद्दे को उठाकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है, जबकि सरकार अपनी इस योजना को जनता के हित में बता रही है।

कोलकाता डॉक्टर रेप केस के आरोपी को कोई पछतावा नहीं, कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में भेजा

सौम्या केसरवानी | navpravah.com

नई दिल्ली | आजकल चर्चित कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में महिला डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या के आरोपी संजय रॉय को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का फैसला लिया गया है, संजय रॉय पहले ही अपना अपराध स्वीकार कर चुका है और उसे अपने किए गये कुकर्म का कोई पक्षतावा नहीं है।

अन्य केसों में आरोपी अपनी जमानत के लिए या सजा से बचने के लिए आवेदन करते हैं, लेकिन इस मामले में आरोपी खुद अपराध स्वीकार कर चुका है, कि उसने यह जघन्य अपराध किया है, ऐसे में इन चीजों की जरूरत ही नहीं है।

आरोपी संजय कोलकाता पुलिस का सहयोगी था, इसी वजह से उसे अस्पताल में आने-जाने की छूट थी, वह अस्पताल के सभी विभागों में बिना किसी रोक-टोक के आ जा सकता था, इसलिए वारदात वाली रात भी वह शराब के नशे में होने के बावजूद अस्पताल के अंदर पहुंच गया और इस घिनौने अपराध को किया।

सीबीआई अधिकारी ने बताया कि, तकनीकी और वैज्ञानिक दोनों तरह के सबूत इस बात को साबित करते हैं कि, आरोपी अपराध स्थल पर मौजूद था, अधिकारी ने बताया कि, फुटेज में रॉय को आठ अगस्त को रात 11 बजे छाती रोग विभाग वार्ड के पास देखा गया था, उन्होंने आगे कहा कि, फुटेज में वह नौ अगस्त को सुबह करीब चार बजे फिर से उसी इमारत में प्रवेश करते हुए दिखा था।

रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई है कि, ऐसी हैवानियत संजय जैसा दरिंदा ही कर सकता है, वह विकृत व्यक्ति था और अश्लील सामग्री देखने का आदी था। अधिकारी ने बताया कि, कोलकाता पुलिस का स्वयंसेवी रहा आरोपी ‘‘जानवर जैसी प्रवृत्ति’’ का है, उसके दिमाग में हमेशा अश्लीलता ही घूमती रहती है।

बता दें कि, महिला के साथ जानवरों की तरह व्यवहार किया गया था, इससे उसकी आंख, मुंह और प्राइवेट पार्ट से भी खून निकल रहा था, उसकी गर्दन और कमर की हड्डी भी टूटी हुई थी और आरोपी ने वारदात को अंजाम देने से पहले शराब पी थी और दो रेड लाइट एरिया में भी गया था और वहां से वापस आने के बाद उसने वारदात को अंजाम दिया था।

गुजरात: सड़क पर उतरे वड़ोदरा के डॉक्टर्स का फूटा ग़ुस्सा

पीयूष उपाध्याय | navpravah.com

वडोदरा: कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में एक महिला डॉक्टर की हत्या के विरोध में वडोदरा के गोत्री मेडिकल कॉलेज में जोरदार प्रदर्शन हुआ। इस घटना ने पूरे देश में चिकित्सा समुदाय को झकझोर कर रख दिया है और डॉक्टरों के बीच गुस्से की लहर दौड़ गई है।

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में 31 वर्षीय पोस्ट ग्रेजुएट रेजिडेंट डॉक्टर की हत्या और यौन उत्पीड़न की घटना ने चिकित्सा समुदाय को हिला कर रख दिया है। इस घटना के बाद से ही देशभर के डॉक्टरों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। डॉक्टरों का कहना है कि जब तक सरकार डॉक्टरों के लिए सेंट्रल प्रोटेक्शन एक्ट लागू नहीं करती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

वडोदरा में प्रदर्शन-

वडोदरा के गोत्री मेडिकल कॉलेज में भी डॉक्टरों ने इस घटना के विरोध में प्रदर्शन किया। डॉक्टरों ने काले बैंड पहनकर और मोमबत्तियां जलाकर विरोध जताया। उन्होंने सरकार से मांग की कि डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए सख्त कानून बनाए जाएं और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए कहा कि वे अपने साथी डॉक्टर के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं और इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।

डॉक्टरों की मांगें-

डॉक्टरों के संगठन फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) ने कहा है कि जब तक सरकार डॉक्टरों के लिए सेंट्रल प्रोटेक्शन एक्ट लागू नहीं करती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस घटना के दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए और उन्हें सख्त सजा दी जाए।

सरकार ने इस घटना की निंदा की है और दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने का आश्वासन दिया है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा है कि डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए सरकार हर संभव कदम उठाएगी और इस घटना की जांच के लिए एक विशेष टीम का गठन किया गया है।

कोलकाता की इस घटना ने पूरे देश में चिकित्सा समुदाय को एकजुट कर दिया है। डॉक्टरों का कहना है कि वे अपने साथी डॉक्टर के लिए न्याय की मांग करते रहेंगे और जब तक सरकार उनकी मांगें पूरी नहीं करती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। वडोदरा के गोत्री मेडिकल कॉलेज में हुए इस प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया है कि डॉक्टर अपने अधिकारों और सुरक्षा के लिए एकजुट हैं और वे किसी भी कीमत पर अपने साथी डॉक्टर के लिए न्याय की मांग करते रहेंगे।

गोत्री मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक डॉ. हर्षित व्यास ने कहा कि अगर कैंपस ही सुरक्षित नहीं रहेगा तो हम लोगों की जान कैसे बचा पाएँगे। कैंपस में जब ऐसी स्थिति है तो बाहर महिला चिकित्सक कैसे सुरक्षित रहेंगी। उन्होंने सरकार से यथाशीघ्र इस मामले पर फ़ैसला करने की माँग की है।

कोलकाता डॉक्टर हत्या मामले में देश भर में आक्रोश, अस्पतालों में OPD बंद

ब्यूरो | navpravah.com

नई दिल्ली |
 कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक 31 वर्षीय महिला डॉक्टर के साथ हुए बलात्कार और हत्या के जघन्य अपराध ने पूरे देश को हिला दिया है। इस घटना ने चिकित्सा समुदाय और आम जनता में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। पूरे देश में इस घटना के ख़िलाफ़ प्रदर्शन हो रहा है।

9 अगस्त की सुबह,
कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज के एक सेमिनार हॉल में एक महिला डॉक्टर का अर्धनग्न शव मिला। प्रारंभिक जांच के बाद, कोलकाता पुलिस ने संजय रॉय नामक एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया, जिसने इस अपराध को स्वीकार किया है। सीसीटीवी फुटेज और सबूतों के आधार पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता की आंखों में गंभीर चोटें आई थीं, जो उसके चश्मे के टुकड़े आंखों में घुसने के कारण हुई थीं।

हमले के वक़्त गहरी नींद में थीं डॉक्टर- 
इसके साथ ही, रिपोर्ट में बताया गया कि उसकी मौत दम घुटने और गला दबाने के कारण हुई। नाखूनों के नीचे से मिले त्वचा और खून के नमूने आरोपी संजय रॉय के डीएनए से मेल खाते हैं, जिससे उसकी संलिप्तता स्पष्ट होती है। पुलिस के अनुसार, उसने शराब के नशे में इस घिनौने अपराध को अंजाम दिया। पीड़िता उस समय गहरी नींद में थी, जब आरोपी ने उस पर हमला किया। देशभर में प्रदर्शन और विरोध की लहर इस घटना के बाद से डॉक्टरों में गहरा आक्रोश है, जो अब विरोध प्रदर्शन के रूप में उभरकर सामने आया है।
कोलकाता और अन्य प्रमुख शहरों में डॉक्टरों ने ओपीडी सेवाओं को बंद कर दिया है, और केवल आपातकालीन सेवाएं जारी हैं। डॉक्टरों का कहना है कि जब तक आरोपी को सजा नहीं मिलती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।

राष्ट्रीय मानवाधिकार सख़्त, दो हफ़्ते में माँगी रिपोर्ट- 
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने इस मामले का स्वत: संज्ञान लिया है और राज्य सरकार से दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। एनएचआरसी ने इस घटना को मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन बताया है और दोषियों को जल्द से जल्द सजा दिलाने की मांग की है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस घटना की निंदा करते हुए इसे “घृणित अपराध” करार दिया है। उन्होंने पुलिस को मामले की तेज़ी से जांच करने का निर्देश दिया है और आश्वासन दिया है कि दोषियों को कड़ी सजा दी जाएगी।

कोलकाता में हैवानियत,दरिंदो ने रेप कर की डॉक्टर की हत्या

सौम्या केसरवानी | navpravah.com 

नई दिल्ली | वह होनहार और होशियार बिटिया थी, वह पढ़ाई में हमेशा आगे रहती थी, उसने दिन रात कड़ी मेहनत करके अपने माता-पिता का सपना पूरा कर दिया था और वह डॉक्टर बन गई थी, लेकिन नियति को कुछ और मंजूर था, उसके और उसके माता-पिता के सभी सपने खत्म हो गये और वह इस दुनिया को छोड़कर चली गई।

हम बात कर रहे कोलकाता के उस हैवानियत भरे किस्से की जिसने सबकी रूह हिला दी है, उसके चेहरे से लेकर पांव तक शरीर पर कई घाव थे, प्राइवेट पार्ट से खून बह रहा था, जब लाश का पोस्टमॉर्टम हुआ तो डॉक्टरों की रूह भी कांप गई थी, उसके साथ एक दो बार नहीं बल्कि कई बार रेप किया गया था, उसकी लाश जिसने भी देखा वह रो पड़ा था।

यह घटना हुई है कोलकाता के सरकारी मेडिकल कॉलेज में काम करने वाली एक ट्रेनी डॉक्टर के साथ, इस घटना के बाद सभी स्तब्ध रह गये हैं, जगह-जगह इसके खिलाफ मोर्चे निकाले जा रहे, कैंडल मार्च निकालकर लोग न्याय की गुहार लगा रहे हैं, पीड़िता की रोज की तरह नाइट शिफ्ट थी, वह सभी काम करके थोड़ा आराम करने सेमिनार हॉल में गई थी, पर उसे क्या मालूम था कि वह अब कभी सेमिनार हॉल से बाहर नहीं आ पायेगी।

पीड़िता की प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, यौन उत्पीड़न के बाद हत्या किए जाने की पुष्टि हुई है, पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी संजय रॉय को गिरफ्तार किया है, जो कि मेडिकल कॉलेज का अस्थाई कर्मचारी है। ट्रेनी डॉक्टर चेस्ट रोग चिकित्सा विभाग की द्वितीय वर्ष की छात्रा थी और गुरुवार की रात ड्यूटी पर तैनात थी।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, महिला डॉक्टर के प्राइवेट पार्ट से खून बह रहा था, उसकी दोनों आंखों और मुंह से खून बह रहा था, चेहरे और नाखून पर चोट के निशान थे, कोलकाता पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि, यह अपराध सुबह 3 से 6 बजे के बीच हुआ होगा, उन्होंने बताया कि, आरोपी ने महिला डॉक्टर का रेप किया और उसके बाद उसकी गला घोंटकर हत्या कर दी, इस दौरान महिला डॉक्टर ने बहुत संघर्ष करने का प्रयास किया लेकिन असफल रही, वहीं कोलकाता पुलिस ने अपराध की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है।

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, कोलकाता की सीएम ममता बनर्जी ने कहा कि, यह मामला अत्यंत गंभीर है, यह मामला व्यक्तिगत हानि जैसा है, उन्होंने कहा कि, वह इस घटना को फास्ट-ट्रैक कोर्ट में ले जाएंगीं और आरोपियों को फांसी दिलवाने की कोशिश करेगीं, उन्होंने आगे कहा कि, डॉक्टरों का विरोध करना जायज है, अगर उन्हें लगता है कि, उन्हें राज्य पुलिस पर भरोसा नहीं है, तो सरकार किसी अन्य जांच एजेंसी से मामले की जांच करा सकती हैं।

हिंदुओं के नाम पर चुप्पी साध लेता है विपक्ष -कपिल मिश्रा

ग़द्दार हैं अरविन्द केजरीवाल
ग़द्दार हैं अरविन्द केजरीवाल

नृपेंद्र कुमार मौर्य | navpravah.com

नई दिल्ली | भारत के पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ अराजकता पर विपक्ष की खामोशी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। वो इसलिए भी विपक्ष ने गाजा पर इजरायल के हमले के दौरान खूब बयानबाजी की थी। अभी बांग्लादेश के हालातों पर विपक्ष चुप्पी साधे हुए तो भारतीय जनता पार्टी ने घेरना शुरू कर दिया है। बीजेपी के नेता कपिल मिश्रा का कहना है कि आपका सेकुलरिज्म गाजा और सीरिया पर बोलने और बांग्लादेश पर चुप रहने को मजबूर करता है तो आप गुलाम हो।

बीजेपी के नेता कपिल मिश्रा ने शनिवार को ‘X’ पर एक पोस्ट में लिखा- ‘अगर आप हिंदू हैं लेकिन आपका सेकुलरिज्म आपको गाजा और सीरिया पर बोलने और बांग्लादेश पर चुप रहने को मजबूर करता है तो आप हिंदू नहीं दो कौड़ी के नमकहराम है, जिहादियों के गुलाम है और आपका जीवन गटर के कीड़े से भी ज्यादा निरर्थक है।’

बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले बढ़े-

5 अगस्त को बांग्लादेश में सरकार का तख्तापलट हुआ था। विद्रोहियों ने सरकार को गिराने के साथ प्रधानमंत्री आवास पर कब्जा कर लिया है। इस्लामिक चरमपंथियों, छात्र प्रदर्शनकारियों समेत वहां की सेना ने मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार का प्रमुख बनाया है, लेकिन इसके बाद पिछले दो दिनों में बांग्लादेश में हिंदुओं का एक तरीके से कत्लेआम हो रहा है। हिंदू विरोधी हिंसा तेजी से बढ़ रही है। चरमपंथी हिंदुओं की बेटियों को भी उठाकर ले जा रहे हैं। हिंदुओं के घरों में आग लगाई जा रही है। लोगों को बुरी तरह मारा पीटा जा रहा है।

मनीष सिसोदिया को सुप्रीम कोर्ट ने दी सशर्त ज़मानत, लेकिन बाहर चुनौतियों का अम्बार

नृपेंद्र कुमार मौर्य | navpravah.com

नई दिल्ली | आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी है। फिलहाल अब सबकी नजरें इस ओर हैं कि मनीष सिसोदिया जेल से बाहर कब निकलेंगे। बता दें कि आज सुबह ही सुप्रीम कोर्ट ने मनीष सिसोदिया को जमानत दी है। इसके बाद अब कानूनी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद वह जेल से बाहर निकलेंगे। फिलहाल दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने मनीष सिसोदिया का रिलीज ऑर्डर जारी कर दिया है। यहां से रिलीज ऑर्डर जब तिहाड़ जेल को मिल जाएगा, उसके बाद सिसोदिया को रिहा कर दिया जाएगा।

रिलीज ऑर्डर हुआ जारी-

दरअसल, बताया जा रहा है कि मनीष सिसोदिया का रिलीज ऑर्डर जारी कर दिया गया है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने मनीष सिसोदिया का रिलीज ऑर्डर जारी किया है। मनीष सिसोदिया की लीगल टीम की तरफ से सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उनका रिलीज ऑर्डर जारी किया गया है। अब ये रिलीज ऑर्डर तिहाड़ जेल जाएगा। तिहाड़ जेल को जब यह रिलीज ऑर्डर मिलेगा, उसके बाद मनीष सिसोदिया को रिहा किया जाएगा। वहीं ये भी माना जा रहा है कि मनीष सिसोदिया तिहाड़ जेल से निकलकर सीधे CM हाउस जाएंगे। उनके बाद अपने घर जाएंगे।

शराब घोटाले का आरोप-

बता दें कि मनीष सिसोदिया दिल्ली में शराब नीति से जुड़े कथित घोटाले में आरोपी हैं। सिसोदिया को 26 फरवरी 2023 को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद से वह जेल में ही बंद हैं। वह 530 दिन बाद जेल से बाहर आएंगे। हालांकि, जमानत के दौरान उन्हें कई शर्तों का पालन करना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें सशर्त जमानत दी है। ताकि वह विदेश न भाग सकें और तथ्यों के साथ छेड़छाड़ न कर सकें, जिससे ईडी या सीबीआई की जांच प्रभावित न हो। दोनों एजेंसियां उनके खिलाफ जांच कर रही हैं।

वक़्फ़ बोर्ड में तब्दीली से क्यों डर रहे हैं मुसलमान ?

सौम्या केसरवानी | navpravah.com
नई दिल्ली | सरकार ने मुस्लिम वक्फ बोर्ड संशोधन विधेयक संसद में पेश किया है। सरकार का कहना है कि वह वक्फ संपत्तियों में अनियमितताओं को दूर करना चाहती है। इस संशोधन के बाद गैर-मुस्लिम व्यक्तियों और मुस्लिम महिलाओं को भी केंद्रीय और राज्य वक्फ निकायों में शामिल किया जा सकेगा। इस संशोधन विधेयक पर विपक्ष जमकर हंगामा कर रहा है, लेकिन वहीं नीतीश कुमार की जदयू ने इस विधेयक को अपना समर्थन दे दिया है।
मुस्लिम संगठनों का कहना है कि सरकार इस कदम से धर्म में दखल दे रही है, जो कि गलत है। वहीं कांग्रेस इसे धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन बता रही है। आपको बता दें कि वक्फ अरबी भाषा का शब्द है, इसका अर्थ ‘खुदा के नाम पर अर्पित वस्तु या परोपकार के लिए दिया गया धन’ होता है। इसमें चल और अचल संपत्ति को शामिल किया जाता है, कोई भी मुस्लिम व्यक्ति अपनी संपत्ति वक्फ को दान कर सकता है।
देश में शिया और सुन्नी दो तरह के वक्फ बोर्ड हैं, वक्फ संपत्ति के प्रबंधन का काम वक्फ बोर्ड करता है। यह एक कानूनी इकाई है, वक्फ बोर्ड में संपत्तियों का पंजीकरण अनिवार्य है, बोर्ड संपत्तियों का पंजीकरण, प्रबंधन और संरक्षण करता है। वक्फ बोर्ड को मुकदमा करने की शक्ति भी है।
वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन के अलावा बोर्ड वक्फ में मिले दान से शिक्षण संस्थान, मस्जिद, कब्रिस्तान और रैन-बसेरों का निर्माण व रखरखाव करता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, देश में वक्फ बोर्ड के पास आठ लाख एकड़ से ज्यादा जमीन है। साल 2009 में यह जमीन चार लाख एकड़ थी, इनमें अधिकांश मस्जिद, मदरसा, और कब्रिस्तान शामिल हैं, इस समय रेलवे और रक्षा विभाग के बाद देश में वक्फ बोर्ड के पास सबसे अधिक संपत्ति है।

शेख़ हसीना के इस्तीफ़े और देश से पलायन के बाद भी नहीं रुकी हिंसा, ख़तरे में हिंदुओं की जान

सौम्या केसरवानी | navpravah.com

नई दिल्ली | बांग्लादेश में दो महीने से चल रहे प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री शेख हसीना ने सोमवार 5 अगस्त को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। बांग्लादेश में चल रहे हिंसक माहौल के बाद शेख हसीना अपना देश छोड़कर भारत शरण लेने आ गयी हैं।

आरक्षण विरोधी छात्र आंदोलन के बाद प्रधानमंत्री शेख हसीना ने सोमवार, 5 अगस्त को पद से इस्तीफा दे दिया और हिंसक माहौल के चलते शेख हसीना को देश छोड़कर भागना पड़ा। खबरों के अनुसार, उनकी बहन रेहाना भी साथ हैं। वे सेना के विमान से गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस पर उतरीं।

रिपोर्ट के अनुसार, नौकरी में आरक्षण को लेकर छात्रों के विरोध से स्थिति एक व्यापक राजनीतिक आंदोलन में बदल गई, जिसमें विपक्षी दल के सदस्यों ने कथित तौर पर विरोधी समूहों में घुसपैठ की और हिंसा को भड़काया, जिससे यह भयावह स्थिति उत्पन्न हो गई।

जानकारी के अनुसार, बंग्लादेश के इस घटना में अब तक 300 लोगों की जान गई है, जिसमें 100 से ज्यादा लोग पिछले 24 घंटों में मरे हैं, इनमें से ज्यादातर छात्र हैं। ढाका में 4 लाख लोग सड़कों पर हैं, जगह-जगह तोड़फोड़ की जा रही है, इसी के मद्देनजर चारो तरफ BSF ने भारत-बांग्लादेश पर अलर्ट बढ़ा दिया है। यहां भारत ने भी बांग्लादेश जाने वाली सभी ट्रेनें रद्द कर दी हैं।

बांग्लादेश के सेना प्रमुख ने मीटिंग कर कहा, ” इस घटना से हमें दुःख है, पर हम अंतरिम सरकार बनाएंगे। देश को अब हम संभालेंगे, आंदोलन में जिन लोगों की हत्या की गई है, उन्हें इंसाफ दिलायेंगे।”

बता दें कि शेख हसीना के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने और देश छोड़ने के बाद भी प्रदर्शनकारी सड़कों पर डटे हुए हैं। भीड़ ने यहां के कम से कम 27 जिलों में हिंदुओं के घरों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर हमला किया और उनके कीमती सामान भी लूट लिए हैं।