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Monday, September 7, 2026
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मनीष सिसोदिया को सुप्रीम कोर्ट ने दी सशर्त ज़मानत, लेकिन बाहर चुनौतियों का अम्बार

नृपेंद्र कुमार मौर्य | navpravah.com

नई दिल्ली | आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी है। फिलहाल अब सबकी नजरें इस ओर हैं कि मनीष सिसोदिया जेल से बाहर कब निकलेंगे। बता दें कि आज सुबह ही सुप्रीम कोर्ट ने मनीष सिसोदिया को जमानत दी है। इसके बाद अब कानूनी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद वह जेल से बाहर निकलेंगे। फिलहाल दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने मनीष सिसोदिया का रिलीज ऑर्डर जारी कर दिया है। यहां से रिलीज ऑर्डर जब तिहाड़ जेल को मिल जाएगा, उसके बाद सिसोदिया को रिहा कर दिया जाएगा।

रिलीज ऑर्डर हुआ जारी-

दरअसल, बताया जा रहा है कि मनीष सिसोदिया का रिलीज ऑर्डर जारी कर दिया गया है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने मनीष सिसोदिया का रिलीज ऑर्डर जारी किया है। मनीष सिसोदिया की लीगल टीम की तरफ से सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उनका रिलीज ऑर्डर जारी किया गया है। अब ये रिलीज ऑर्डर तिहाड़ जेल जाएगा। तिहाड़ जेल को जब यह रिलीज ऑर्डर मिलेगा, उसके बाद मनीष सिसोदिया को रिहा किया जाएगा। वहीं ये भी माना जा रहा है कि मनीष सिसोदिया तिहाड़ जेल से निकलकर सीधे CM हाउस जाएंगे। उनके बाद अपने घर जाएंगे।

शराब घोटाले का आरोप-

बता दें कि मनीष सिसोदिया दिल्ली में शराब नीति से जुड़े कथित घोटाले में आरोपी हैं। सिसोदिया को 26 फरवरी 2023 को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद से वह जेल में ही बंद हैं। वह 530 दिन बाद जेल से बाहर आएंगे। हालांकि, जमानत के दौरान उन्हें कई शर्तों का पालन करना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें सशर्त जमानत दी है। ताकि वह विदेश न भाग सकें और तथ्यों के साथ छेड़छाड़ न कर सकें, जिससे ईडी या सीबीआई की जांच प्रभावित न हो। दोनों एजेंसियां उनके खिलाफ जांच कर रही हैं।

वक़्फ़ बोर्ड में तब्दीली से क्यों डर रहे हैं मुसलमान ?

सौम्या केसरवानी | navpravah.com
नई दिल्ली | सरकार ने मुस्लिम वक्फ बोर्ड संशोधन विधेयक संसद में पेश किया है। सरकार का कहना है कि वह वक्फ संपत्तियों में अनियमितताओं को दूर करना चाहती है। इस संशोधन के बाद गैर-मुस्लिम व्यक्तियों और मुस्लिम महिलाओं को भी केंद्रीय और राज्य वक्फ निकायों में शामिल किया जा सकेगा। इस संशोधन विधेयक पर विपक्ष जमकर हंगामा कर रहा है, लेकिन वहीं नीतीश कुमार की जदयू ने इस विधेयक को अपना समर्थन दे दिया है।
मुस्लिम संगठनों का कहना है कि सरकार इस कदम से धर्म में दखल दे रही है, जो कि गलत है। वहीं कांग्रेस इसे धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन बता रही है। आपको बता दें कि वक्फ अरबी भाषा का शब्द है, इसका अर्थ ‘खुदा के नाम पर अर्पित वस्तु या परोपकार के लिए दिया गया धन’ होता है। इसमें चल और अचल संपत्ति को शामिल किया जाता है, कोई भी मुस्लिम व्यक्ति अपनी संपत्ति वक्फ को दान कर सकता है।
देश में शिया और सुन्नी दो तरह के वक्फ बोर्ड हैं, वक्फ संपत्ति के प्रबंधन का काम वक्फ बोर्ड करता है। यह एक कानूनी इकाई है, वक्फ बोर्ड में संपत्तियों का पंजीकरण अनिवार्य है, बोर्ड संपत्तियों का पंजीकरण, प्रबंधन और संरक्षण करता है। वक्फ बोर्ड को मुकदमा करने की शक्ति भी है।
वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन के अलावा बोर्ड वक्फ में मिले दान से शिक्षण संस्थान, मस्जिद, कब्रिस्तान और रैन-बसेरों का निर्माण व रखरखाव करता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, देश में वक्फ बोर्ड के पास आठ लाख एकड़ से ज्यादा जमीन है। साल 2009 में यह जमीन चार लाख एकड़ थी, इनमें अधिकांश मस्जिद, मदरसा, और कब्रिस्तान शामिल हैं, इस समय रेलवे और रक्षा विभाग के बाद देश में वक्फ बोर्ड के पास सबसे अधिक संपत्ति है।

शेख़ हसीना के इस्तीफ़े और देश से पलायन के बाद भी नहीं रुकी हिंसा, ख़तरे में हिंदुओं की जान

सौम्या केसरवानी | navpravah.com

नई दिल्ली | बांग्लादेश में दो महीने से चल रहे प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री शेख हसीना ने सोमवार 5 अगस्त को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। बांग्लादेश में चल रहे हिंसक माहौल के बाद शेख हसीना अपना देश छोड़कर भारत शरण लेने आ गयी हैं।

आरक्षण विरोधी छात्र आंदोलन के बाद प्रधानमंत्री शेख हसीना ने सोमवार, 5 अगस्त को पद से इस्तीफा दे दिया और हिंसक माहौल के चलते शेख हसीना को देश छोड़कर भागना पड़ा। खबरों के अनुसार, उनकी बहन रेहाना भी साथ हैं। वे सेना के विमान से गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस पर उतरीं।

रिपोर्ट के अनुसार, नौकरी में आरक्षण को लेकर छात्रों के विरोध से स्थिति एक व्यापक राजनीतिक आंदोलन में बदल गई, जिसमें विपक्षी दल के सदस्यों ने कथित तौर पर विरोधी समूहों में घुसपैठ की और हिंसा को भड़काया, जिससे यह भयावह स्थिति उत्पन्न हो गई।

जानकारी के अनुसार, बंग्लादेश के इस घटना में अब तक 300 लोगों की जान गई है, जिसमें 100 से ज्यादा लोग पिछले 24 घंटों में मरे हैं, इनमें से ज्यादातर छात्र हैं। ढाका में 4 लाख लोग सड़कों पर हैं, जगह-जगह तोड़फोड़ की जा रही है, इसी के मद्देनजर चारो तरफ BSF ने भारत-बांग्लादेश पर अलर्ट बढ़ा दिया है। यहां भारत ने भी बांग्लादेश जाने वाली सभी ट्रेनें रद्द कर दी हैं।

बांग्लादेश के सेना प्रमुख ने मीटिंग कर कहा, ” इस घटना से हमें दुःख है, पर हम अंतरिम सरकार बनाएंगे। देश को अब हम संभालेंगे, आंदोलन में जिन लोगों की हत्या की गई है, उन्हें इंसाफ दिलायेंगे।”

बता दें कि शेख हसीना के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने और देश छोड़ने के बाद भी प्रदर्शनकारी सड़कों पर डटे हुए हैं। भीड़ ने यहां के कम से कम 27 जिलों में हिंदुओं के घरों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर हमला किया और उनके कीमती सामान भी लूट लिए हैं।

दिल्ली कोचिंग हादसा: सिर्फ़ आरोप-प्रत्यारोप, बच्चों की मौत की ज़िम्मेदारी कौन लेगा ?

सौम्या केसरवानी | navpravah.com 

नई दिल्ली | दिल्ली के राव आईएएस कोचिंग सेंटर में जो हादसा हुआ, उसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी है, इसके लिए कौन जिम्मेदार है कौन नहीं, इसकी जांच चल रही है। लेकिन लचर व्यवस्था और लापरवाही के चलते तीन स्टूडेंट्स की जान तो इस हादसे में चली गई है। उनके घरवालों की हिम्मत और सपने सब टूट गए।

इस हादसे के बाद दिल्ली पुलिस का ऐक्शन जारी है। अब तक इस हादसे में कोचिंग मालिक सहित 5 लोग अबतक गिरफ्तार हो चुके हैं। इस हादसे के बाद छात्र आक्रोशित हैं, जगह- जगह प्रदर्शन जारी है और सभी न्याय की मांग कर रहे हैं कि आखिर छात्रों के साथ ऐसा कैसे हुआ और देश में छात्रों की सुरक्षा के लिए कोचिंग व स्कूलों में कितनी व्यवस्थाएं हैं।

इस हादसे में तीन छात्र की मौत हो गयी है, नेविन डेल्विन, श्रेया यादव और तान्या सोनी तीनों ही बहुत ही होनहार छात्र थे। श्रेया यादव और तान्या सोनी इसी IAS स्टडी सेंटर में UPSC की तैयारी कर रहे थे। लेकिन नेविन डेल्विन JNU से पीएचडी कर रहे थे और हादसे के वक्त सेंटर के बेसमेंट में चल रही लाइब्रेरी से किताब लेने आए थे। नेविन के परिवार की बात करें, तो नेविन डेल्विन केरल के एर्नाकुलम जिले के रहने वाले थे, उनके पिता डेल्विन सुरेश रिटायर्ड डीएसपी हैं, जबकि उनकी मां प्रोफेसर हैं।

इस मामले में दिल्ली की राजस्व मंत्री आतिशी ने मुख्य सचिव को २४ घंटे की भीतर घटना का रिपोर्ट सौपने को कहा है। आतिशी ने कहा कि यह मामला संवेदनशील है, हादसे की जांच भी शुरू कर दी गयी है। मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिये गये हैं, इस घटना के लिए जो जि़म्मेदार है उसे बख्शा नहीं जाएगा, उस पर कड़ी कार्रवाई की जायेगी।

डीएसपी हर्षवर्धन ने बताया कि बेसमेंट में बहुत तेजी से पानी भर गया था, जिसके कारण कई लोग अंदर फंस गये थे। बेसमेंट में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए कई घंटे रेस्क्यू आपरेशन चलाया गया, एनडीआरएफ व पुलिस की मदद से लोगों को बाहर निकाला गया व साथ में तीनों बच्चों का शव भी निकाला गया।

इस मामले में नगर निगम का कहना है कि इमारत की बेसमेंट को स्टोरेज के लिए एनओसी दिया गया था। हालांकि, इंस्टीट्यूट ने नियमों का उल्लंघन करके बेसमेंट में लाइब्रेरी बना दी थी। राव के आईएएस स्टडी सर्कल सेंटर को अगस्त 2021 में दिल्ली नगर निगम से अनापत्ति प्रमाण पत्र मिला था। सिविल सेवा उम्मीदवारों के लिए कोचिंग सेंटर को इस महीने की शुरुआत में अग्निशमन विभाग से एनओसी मिली थी। अनुमति के साथ ही संबंधित डॉक्यूमेंट्स में साफ कहा गया था कि बेसमेंट का इस्तेमाल बिल्डिंग बायलॉज के अनुसार ही किया जाना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा था, जिसके चलते ये हादसा हुआ।

दिल्ली सरकार के मंत्री सौरभ भारद्वाज ने मीटिंग की, जिसमें उन्होंने कहा कि ये कोचिंग इंस्टिट्यूट की लापरवाही तो है मगर दिल्ली के लोगों के खिलाफ एक बड़ा षड्यंत्र किया गया है। उन्होंने बताया कि सभी कह रहें है दिल्ली में ड्रेन और सीवर से गाद निकालने का काम ठीक से नहीं किया गया है, जिसके चलते पूरी दिल्ली में जलभराव हुआ। हालांकि ये विभाग मेरा नहीं है, वैसे इन अफसरों का ना सरकार ट्रांसफर कर सकती है, ना कार्यवाही कर सकती है।

AAP विधायक दुर्गेश पाठक ने भी इस घटना पर कहा कि, इसकी जांच होनी चाहिए और जो जिम्मेदार है उस पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। आप विधायक ने कहा कि दिल्ली की जल निकासी व्यवस्था ध्वस्त हो गई है और इसका कारण यह है कि भाजपा 15 साल से सत्ता में थी, हम पिछले 1 साल से यहां हैं और नालों पर काम कर रहे हैं।

इस हादसे पर राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने एक्स पर लिखा कि छात्रों की बेसमेंट में डूबने से हुई मौत की ज़िम्मेदारी आखिर कौन लेगा? उन्होंने बताया कि, स्टूडेंट दस दिन से ड्रेन साफ़ करने की डिमांड कर रहे थे, पर कोई कार्यवाही नहीं की गई, पैसे खाकर सड़क-नालियों के ऊपर क़ब्ज़े हो जाते हैं, स्पष्ट है कि कोई सेफ्टी रुल्स को पालन करने की ज़रूरत नहीं है। बस पैसा दो, काम हो जाता है। बस हर दिन AC रूम में बैठ के महत्वर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस करते रहो। ग्राउंड पर कोई काम करने को तैयार नहीं है।

बरसात के मौसम में आखिर क्यों बरतनी चाहिए सावधानियां!

हेल्थ डेस्क | navpravah.com

लखनऊ | बरसात का मौसम सुहावना तो होता है, लेकिन साथ ही अपने साथ कई बीमारियां भी लाता है। इस मौसम में लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है, जिससे लोगों को वायरल, फ्लू, टाइफाइड, हैजा़, कान दर्द, फंगल इंफेक्शन और डेंगू जैसी गंभीर बीमारियां होने लगती हैं।

इस मौसम में सभी को अपना ख्याल रखना चाहिए। लापरवाही करने से बहुत नुकसान उठाना पड़ सकता है। आज मंहगाई इतनी बढ़ गई है कि अस्पताल का खर्च वहन करना कठिन हो जाता है। इसलिए बेहतर है कि ज़रूरी सावधानियाँ बरत के अपने को सुरक्षित रखा जाए।

आइये आपको बताते हैं मानसून में स्वस्थ रहने के कुछ उपाय –

विटामिन सी का सेवन बढ़ाएं।

साफ पानी पिएं।

जंक फूड खाने से बचें।

नहाने के पानी में कीटाणुनाशक मिलाएं।

नियमित व्यायाम करें।

जानिए, किस वजह से नए बजट से खुश हैं देश के युवा

कार्तिकेय दिवाकर | navpravah.com

नई दिल्ली | इस बजट में युवाओं के लिए बहुत बड़ी सौगात है। बजट में कौशल विकास को लेकर विशेष रूप से ध्यान दिया गया है। भारतीय युवाओं की सबसे बड़ी परेशानी यही थी कि वह अंततः साक्षर तो कहलाता था, पर कौशल की कमी रहती थी। जिस वजह से रोजगार के क्षेत्र में उसे अवसर नहीं मिलते थे। इस बजट में साफ-साफ बताया है कैसे उद्योग और विश्वविद्यालय एक साथ आएं और कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए अपने-अपने प्रयास करें।

सबसे अच्छी बात यह है कि देश की 500 टॉप कंपनियों युवाओं को इंटर्नशिप के अवसर प्रदान करेंगी और साथ ही वेतन भी कार्य अनुसार ज्यादा दिया जाएगा, जिससे युवाओं के रोजगार में बढ़ावा मिलेगा और बेरोजगारी का यह बोझ समाज में थोड़ा कम दिखाई देगा।

केंद्रीय बजट में निर्मला सीतारमण ने 2024-25 में हर साल 25,000 छात्रों की मदद के लिए मॉडल कौशल ऋण योजना में संशोधन का प्रस्ताव किया है। इसके तहत घरेलू संस्थानों में उच्च शिक्षा के लिए 10 लाख रुपये तक के लोन के लिए ई-वाउचर मिलेगा। हर साल 1 लाख छात्रों को सीधे ऋण राशि के 3% की वार्षिक ब्याज छूट मिलेगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, ‘मुझे 2 लाख करोड़ रुपये के केंद्रीय परिव्यय के साथ 5 वर्षों में 4.1 करोड़ युवाओं के लिए रोजगार, कौशल और अन्य अवसरों की सुविधा के लिए 5 योजनाओं और पहलों के प्रधानमंत्री पैकेज की घोषणा करते हुए खुशी हो रही है।’

बकौल वित्त मंत्री, ‘इस वर्ष हमने शिक्षा, रोजगार और कौशल के लिए 1.48 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। वहीं बजट में महिलाओं और लड़कियों को लाभ पहुंचाने वाली योजनाओं के लिए 3 लाख करोड़ रुपये की राशि का प्रस्ताव दिया गया है।

यह पूर्णतया लेखक के निजी विचार हैं।

(कार्तिकेय दिवाकर, दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ के मीडिया अध्यक्ष हैं।)

Budget 2024: बिहार, किसानों और महिलाओं के लिए खुला ख़ज़ाना, जानिए, इस बजट में क्या है ख़ास

सौम्या केसरवानी | navpravah.com

नई दिल्ली | वर्ष 2024 के इस बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कई बड़े ऐलान किए हैं, जिससे कुछ वर्गों को लाभ हुआ है और कुछ वर्गों को निराशा हाथ लगी है। वैसै इस बजट में युवाओं के कौशल विकास, शिक्षा व रोजगार जैसे क्षेत्रों पर ध्यान दिया गया है। पीएम मोदी ने संसद में कहा कि यह गर्व की बात है कि 60 साल बाद कोई सरकार तीसरी बार सत्ता में आई है और तीसरी बार अपना बजट पेश कर रही है।

वित्त मंत्री ने अपने बजट में घोषणा किया है कि महिलाओं के विकास के लिए 3 लाख करोड़ रुपये की मदद दी जाएगी। बजट में कौशल विकास को लेकर भी अलग-अलग योजनाओं का ऐलान किया गया है। साथ ही स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए MSME के तहत कई नई योजनाओं की घोषणा की गई है। विनिर्माण क्षेत्र में MSME के लिए ऋण गारंटी योजना लाई जाएगी, 100 करोड़ रुपये तक के कर्ज के लिए गारंटी की जरूरत नहीं होगी।

बिहार के लिए सरकार ने खोला ख़ज़ाना-

बिहार में चार एक्सप्रेसवे बनाने के लिए 26000 करोड़ रुपये का ऐलान किया गया है, इस बजट में ईपीएफओ मे कंट्रीब्यूशन के हिसाब से फर्स्ट टाइम एम्पलॉइज को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससै 30 लाख युवाओं को फायदा होगा।

नए कर्मचारियों को राहत-

इस बजट को लेकर सीतारमण ने कहा कि हर नए कर्मचारी के लिए कंपनियों को 2 साल तक हर महीने 3-3 हजार रुपये का रिम्बर्समेंट मिलेगा, इससे 50 लाख लोगों को लाभ होगा साथ ही मुद्रा लोन की लिमिट बढ़ाई गई है।

इस वित्त वर्ष 2024-25 के लिए नए आयकर स्लैब और मानक कटौती में बढ़ोतरी शामिल है, मानक कटौती को 50,000 रुपये से बढ़ाकर 75,000 रुपये कर दिया गया है, साथ ही 5% कर दर के लिए टैक्स स्लैब की सीमा को 5 लाख रुपये से बदलकर 7 लाख रुपये कर दिया गया।

साथ ही टैक्स पेयरों को सरकार ने राहत दी है, जो कि इस प्रकार है –

0-3 लाख पर शून्य होगी टैक्स की दर,

3-7 लाख पर 5% टैक्स देना होगा,

7-10 लाख पर 10% टैक्स देना होगा,

10-12 लाख पर 15% टैक्स देना होगा,

12-15 लाख पर 20% और 15 लाख और उससे अधिक रूपये पर 30% टैक्स देना होगा।

एक करोड़ परिवार की आवासीय ज़रूरतें होंगी पूरी-

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आगे बताया है कि पीएम आवास योजना-शहरी 2.0 के तहत 10 लाख करोड़ रुपये के निवेश से 1 करोड़ गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों की आवास जरूरतों को पूरा किया जाएगा, इसमें अगले पांच साल में 2.2 लाख करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता शामिल होगी।

अगर देखा जाए कि इस बजट में क्या सस्ता हुआ है, क्या महंगा तो बता दें कि कैंसर की दवाएं सस्ती होंगीं, मोबाइल और मोबइल चार्जर समेत अन्य उपकरण सस्ते होगें, इसके अलावा सरकार ने सोना और चांदी पर कस्टम ड्यूटी कम करके अब 6% कर दिया है, अब सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट नजर आएगी। इसके अलावा लेदर और फुटवियर पर कस्टम ड्यूटी घटाई गई है, जिससे चप्पल व जूते और सस्ते होगें, वहीं दूसरी ओर टेलिकॉम उपकरण महंगे हो गए हैं, इन पर कस्टम ड्यूटी को 15% बढ़ा दिया गया है।

(सौम्या केसरवानी वरिष्ठ पत्रकार हैं। देश के विभिन्न समाचार समूहों में आपने संपादकीय सहयोग दिया है।) 

इस बार के श्रावण मास में हैं कई दुर्लभ संयोग

हरीश भारद्वाज | navpravah.com

नई दिल्ली | भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है सावन माह, जुलाई और अगस्त के बीच में आने वाला सावन माह बहुत ही पवित्र माना गया है। इसे भगवान शिव का माह भी कहा जाता है।

भगवान शिव मां पार्वती के साथ सावन माह में धरती पर विचरण करते हैं। श्रवण नक्षत्र की पूर्णिमा इस माह में आने के कारण इसे श्रावण अर्थात् सावन माह कहा जाता है।

पुराणों के अनुसार समुंद्र मंथन इसी सावन माह में हुआ था, जिसमें से निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए अपने कंठ में रोक लिया था, जिसके कारण भगवान शिव का कंठ नीला पड़ गया और शिव नीलकंठ कहलाए। इस माह में हिंदुओं के कई त्यौहार भी मनाए जाते हैं जैसे कि रक्षा बंधन, तीज़ और नाग पंचमी इत्यादि। कांवड़ यात्रा भी इसी माह में होती है, जिसमें लाखों शिव भक्त हरिद्वार और गौमुख से भगवान शिव का अभिषेक करने के लिए पवित्र गंगाजल लेकर आते हैं।

इस बार श्रावण मास में हैं कई दुर्लभ संयोग-

सावन माह में आने वाली शिवरात्रि इस माह का सबसे पवित्र दिन माना जाता है और इसी दिन अधिकांश शिव भक्त कांवड़िए गंगाजल से भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। इस माह में आने वाले सोमवार के दिन श्रद्धालुओं में उपवास करने की परम्परा है। सावन माह में कभी चार तो कभी पांच सोमवार आते हैं। इस वर्ष सावन माह में पांच सोमवार हैं और संयोगवश 22 जुलाई 2024 को सावन माह आरम्भ हो रहा है जोकि सोमवार का दिन है और 19 अगस्त 2024 को रक्षा बंधन वाले दिन सावन माह की समाप्ति होगी वह भी सोमवार का ही दिन है।

जयंती विशेष: स्वतंत्रता संग्राम के पहले महानायक थे शहीद मंगल पाण्डेय

हरीश भारद्वाज | navpravah.com
नई दिल्ली | यह सर्वमान्य है कि किसी भी ऊंचाई पर पहुंचने के लिए सबसे कठिन होता है, प्रथम सीढ़ी पर पैर रखना। अर्थात् किसी भी कार्य को शुरू करना सबसे कठिन होता है, बाद में रास्ते बनने लगते हैं। उपरोक्त बात को यदि हम स्वतंत्रता संग्राम के साथ जोड़ें, तो 29 मार्च, 1857 को अंग्रेज़ी सरकार के विरुद्ध बगावत का पहला कदम दो अंग्रेज़ अधिकारियों पर हमला करके शहीद मंगल पांडेय जी द्वारा उठाया गया। तो क्या हमारा यह मानना ठीक नहीं कि, स्वतंत्रता आंदोलन के महानायक शहीद मंगल पाण्डेय जी थे!
सन् 1857 में अंग्रेज़ी हुकूमत के विरुद्ध आज़ादी पाने का बिगुल बजा। इस बिगुल को फूंकने का श्रेय मंगल पाण्डेय को प्राप्त हुआ। 19 जुलाई, 1827 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के नगवा गांव के एक ब्राह्मण परिवार में मंगल पाण्डेय का जन्म हुआ। इनके पिता का नाम दिवाकर पाण्डेय था। 22 वर्ष की आयु में मंगल पांडेय ईस्ट इंडिया कम्पनी में एक सैनिक के रूप में भर्ती हुए। कुछ समय पश्चात् अंग्रेज़ी हुकूमत द्वारा सैनिकों को ऐसे कारतूस दिए गए, जिन्हें काटकर खोलना पड़ता था। तभी यह अफ़वाह भी फैलने लगी कि इन कारतूसों में गाय और सूअर की चर्बी मिलाई गई है।
चूंकि उस समय अधिकांश सैनिक हिंदू और मुस्लिम थे, इसलिए दोनों ने ही विरोध किया और मंगल पांडेय ने कारतूसों के इस्तेमाल से साफ इंकार कर दिया। 29 मार्च 1857 को कलकत्ता के बैरकपुर स्थित छावनी में क्रोधित होकर मंगल पाण्डेय ने दो अंग्रेज़ अधिकारियों मेजर जेम्स ह्यूसन और लेफ्टिनेंट वाघ पर गोली चला दी और स्वयं को भी मारने की कोशिश की। 
अंग्रेज़ अधिकारी घायल हुए लेकिन बच गए और मंगल पाण्डेय को गिरफ़्तार कर लिया गया। उस समय अंग्रेज़ अधिकारियों पर हमला करने का अर्थ अपनी मौत के फ़रमान पर स्वयं हस्ताक्षर करने के समान था। मंगल पांडेय को फांसी की सज़ा सुनाई गई और उसके लिए 18 अप्रैल,1957 की तारीख़ तय की गई। लेकिन बगावत के भय से 10 दिन पूर्व ही 08 अप्रैल, 1957 को मंगल पांडेय को फांसी दे दी गई।
(लेखक, नवप्रवाह न्यूज़ नेटवर्क के असोसिएट एडिटर हैं।) 

‘राहुल गांधी को संसद के अंदर बंद कर मारने चाहिए थे तमाचे’, कर्नाटक के भाजपा विधायक का विवादित बयान

संवाददाता| navpravah.com

नई दिल्ली | हाल ही में संसद के विशेष सत्र के दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने हिंदू धर्म को लेकर एक बयान दिया था, जिसपर जमकर बवाल मचा. अब उनके इस बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के विधायक भरत शेट्टी ने विवादित बयान दे दिया. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की संसद के अंदर बंद करके पिटाई करनी चाहिए.

बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मुद्दे पर बोलते हुए मैंगलोर सिटी नॉर्थ के विधायक भरत शेट्टी ने कहा, “विपक्ष के नेता राहुल गांधी को संसद के अंदर बंद करके थप्पड़ मारना चाहिए. ऐसा करने से सात से आठ एफआईआर दर्ज हो जाएंगी. अगर विपक्ष के नेता राहुल गांधी मैंगलोर शहर आते हैं तो हम उनके लिए भी यही व्यवस्था करेंगे.”

‘भगवान शिव ने तीसरी आंख खोल दी तो…’

राहुल गांधी पर आरोप लगाते हुए बीजेपी विधायक ने कहा, “पागल को नहीं पता कि अगर भगवान शिव ने अपनी तीसरी आंख खोली तो वह (एलओपी) भस्म हो जाएंगे. उन्होंने हिंदू विरोधी नीति अपनाई है. यह स्पष्ट है कि एलओपी राहुल गांधी एक पागल है. उसे लगता है कि वह हिंदूओं के बारे में जो कुछ भी कहेगा, हिंदू चुपचाप सुन लेंगे. अगर वह संसद में बोलेगा तो स्थानीय नेता यहां अपनी दुम हिलाना शुरू कर देंगे.”

‘हिंदू धर्म की रक्षा करना बीजेपी का कर्तव्य’

भरत शेट्टी ने कहा कि हिंदू धर्म और संस्थाओं की रक्षा करना बीजेपी का कर्तव्य है. उन्होंने कहा, “कांग्रेस ने यह संदेश देना शुरू कर दिया है कि हिंदू और हिंदुत्व अलग-अलग हैं. ऐसे नेताओं की वजह से भविष्य में हिंदुओं को खतरा होगा.” शेट्टी ने आगे आरोप लगाया कि राहुल गांधी जिस इलाके का दौरा करते हैं उसके आधार पर अपना रुख बदल लेते हैं. उन्होंने कहा, “जब वह गुजरात आते हैं तो विपक्ष के नेता राहुल गांधी भगवान शिव के परम भक्त बन जाते हैं.”