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Monday, September 7, 2026
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योगी सरकार ने राज्य के कर्मचारियों दी एक महीने की मोहलत, 30 सितम्बर तक देना होगा संपत्ति का ब्योरा

सौम्या केसरवानी | navpravah.com

लखनऊ | यूपी सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को थोड़ी राहत प्रदान करते हुए अपनी संपत्ति का ब्यौरा देने की आखिरी तारीख बढ़ा दी है। सरकार ने चेतावनी दी है कि अगर 30 सितंबर तक कर्मचारी अपनी संपत्ति का ब्यौरा नहीं देंगें, तो उनका वेतन उन्हें नहीं दिया जायेगा।

सरकार ने ब्यौरा देने की आख़िरी तारीख़ एक महीने बढ़ा दी है, इससे पहले सरकार ने कर्मचारियों को 31 अगस्त तक की डेडलाइन दी थी लेकिन अब राहत देते हुए इसे बढ़ा दिया गया है। अब संपत्ति का ब्यौरा देने के लिए कर्मचारियों के पास पूरा सितंबर महीना है।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव ने 17 अगस्त को सभी राज्य कर्मचारियों को उनकी संपत्ति का ब्यौरा पेश करने का निर्देश दिया था। जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में करीब 846640 राज्य कर्मचारी हैं लेकिन अब तक इनमें से मानव संपदा पोर्टल पर 602075 कर्मचारियों ने ही अपनी चल-अचल संपत्ति का ब्यौरा दिया है।

मिली जानकारी के मुताबिक, जिन विभागों ने अब तक संपत्ति का ब्यौरा दिया है, उनमें टैक्सटाइल विभाग, खेल विभाग, महिला कल्याण विभाग, ऊर्जा विभाग और कृषि विभाग के कर्मचारी ही शामिल हैं। वहीं संपत्ति छिपाने के मामले में शिक्षा विभाग, औद्योगिक विभाग, राजस्व विभाग और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के नाम सामने आ रहा हैं।

बता दें कि, यूपी के डीजीपी हेडक्वार्टर ने नियुक्ति विभाग को चिट्ठी लिखकर संपत्ति का ब्यौरा दिए जाने की समय सीमा बढ़ाने की अपील की थी। चिट्ठी में उन्होंने लिखा था कि पुलिस भर्ती एग्जाम और त्योहारों की वजह से बहुत से पुलिसकर्मी समय पर अपनी संपत्ति का ब्यौरा नहीं दे सके हैं, अतः संपत्ति का ब्यौरा देने की समय सीमा बढ़ा दी जाए।

UP: बहराइच में आदमखोर भेड़िए का आतंक, पूरे इलाक़े में ख़ौफ़

इशिका गुप्ता| navpravah.com

लखनऊ | उत्तर प्रदेश के बहराइच में आदमखोर भेड़िए लोगों को निशाना बना रहे हैं। हाल ही में, इन भेड़ियों ने दो और बच्चों पर हमला किया। रविवार रात एक भेड़िया ने एक बच्ची की जान ले ली। इससे पहले भी भेड़िए महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को शिकार बना चुके हैं। अब तक कुल 9 लोगों की जान जा चुकी है।

बहराइच के 35 गांवों में इन भेड़ियों का आतंक फैल चुका है। हर दिन किसी न किसी पर हमला हो रहा है। पिछले 48 दिनों में भेड़ियों ने 8 बच्चों और एक महिला की जान ले ली है, और 45 लोग घायल हो चुके हैं। सोमवार रात भी भेड़िए ने एक बच्चे पर हमला किया, लेकिन शुक्र है कि बच्चा सुरक्षित रहा। यह घटना महसी के गिरधर पुरवा गांव की है, जहां भेड़िए ने आधी रात को दो बच्चों पर हमला किया। एक बच्चे को मामूली खरोंच आई, जबकि दूसरी बच्ची का इलाज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चल रहा है।

भेड़िए ने हाल ही में दो छोटे बच्चों को अपना शिकार बनाया। एक 5 साल की बच्ची अपनी दादी के साथ घर में चारपाई पर सो रही थी, जब रात के करीब 12 बजे भेड़िया अचानक हमला कर दिया। बच्ची की चीखें सुनकर भेड़िया वहां से भाग गया, लेकिन उसने फिर उसी गांव के दूसरे घर में एक और बच्चे पर हमला किया। सौभाग्य से, वह बच्चा भी बाल-बाल बच गया। यह घटना महसी तहसील के पंढुईया गांव में हुई। पिछले दो दिनों से आदमखोर भेड़िया लगातार लोगों को निशाना बना रहा है।

35 गांवों में भेड़ियों का आतंक मचा हुआ है। रविवार रात एक भेड़िए ने एक बच्ची पर हमला कर उसकी जान ले ली। इससे पहले भी भेड़िया महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को अपना शिकार बना चुका है। अब तक भेड़ियों के हमलों में 8 लोगों की मौत हो चुकी है। वन विभाग लगातार भेड़ियों को पकड़ने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, 4 आदमखोर भेड़ियों को पकड़ लिया गया है, लेकिन 2 भेड़िए अभी भी उनकी पहुंच से बाहर हैं।

रविवार रात को भेड़ियों ने संदिग्ध हमलों में ढाई साल की एक बच्ची की जान ले ली। इसके अलावा, अलग-अलग घटनाओं में दो महिलाएं गंभीर रूप से घायल हो गईं। अधिकारियों के अनुसार, भेड़ियों के हमले की आशंका पड़ोसी सीतापुर जिले में भी जताई जा रही है। उल्लेखनीय बात यह है कि भेड़िये अब नए इलाकों में भी हमले कर रहे हैं। बहराइच की जिलाधिकारी मोनिका रानी ने सोमवार को मीडिया को बताया कि भेड़िये के हमले में ढाई साल की अंजलि की मौत हो गई और दो महिलाएं घायल हुईं। जुलाई से अब तक इन हिंसक वन्य जीवों के हमलों में कुल 9 लोगों की मौत हो चुकी है।

गांव वालों के अनुसार, महसी तहसील के हरदी थाना इलाके में गरेठी गुरुदत्त सिंह के नव्वन गरेठी मजरे में एक और भयानक घटना हुई। एक-दो सितंबर की रात ढाई साल की बच्ची अंजलि अपनी मां के साथ घर में सो रही थी, जब भेड़िया उसे उठा ले गया। बच्ची की चीख सुनकर परिवारवाले उसकी तलाश में निकल पड़े, लेकिन कुछ पता नहीं चला। अंततः, गांव से एक किलोमीटर दूर अंजलि का क्षत-विक्षत शव मिला। भेड़िया ने बच्ची के दोनों हाथों को खा लिया था। अब तक भेड़ियों के हमलों में कुल 9 लोगों की जान जा चुकी है।

‘कांग्रेस में होता है कास्टिंग काउच’, केरल कांग्रेस की महिला नेता ने पार्टी पर लगाए गंभीर आरोप

सौम्या केसरवानी | navpravah.com
नई दिल्ली | कांग्रेस की नेता सिमी रोज़बेल के पार्टी पर ‘कास्टिंग काउच’ का आरोप लगाने से राजनीतिक हलके में खलबली मच गई। सिमी ने बताया कि यहां पर महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए समझौते करने पड़ते हैं, ये बातें अंदर की हैं जो मैं बता रही हूं। उन्होंने कांग्रेस पार्टी की तुलना फिल्म इंडस्ट्री में लगने वाले आरोपों से की।
महिला नेता के खिलाफ पार्टी ने बड़ा ऐक्शन लिया है और उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से हटा दिया है। सिमी रोजवेल ने यह बातें एक टीवी चैनल के साथ बातचीत में कही। केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने एक विज्ञप्ति में बताया कि अनुशासन के गंभीर उल्लंघन के चलते सिमी रोजबेल जॉन के ऊपर यह कार्रवाई की गई है।
केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने दावा किया है कि सिमी विपक्षियों के साथ मिलकर पार्टी की छवि खराब कर रही हैं। सिमी रोजबेल जॉन ने एक निजी टीवी चैनल को दिए गए इंटरव्यू में बताया था कि कई बार पार्टी में आगे बढ़ने के लिए महिला नेताओं को पुरूष नेताओं को इंप्रेस करना पड़ता है। उन्होंने आगे कहा कहा कि यहां टैलेंट या अनुभव काम नहीं आता है।
सिमी ने विपक्ष के नेता वीडी सतीशन के ऊपर भी यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे, हालांकि सतीशन ने इन आरोपों को झूठा करार दिया था। गौरतलब है कि केरल फिल्म इंडस्ट्री में मी टू की मुहिम चल रही है, जिसमें कई अभिनेत्रियों ने यौन उत्पीड़न और कास्टिंग काउच के आरोप लगाए हैं।

पत्नी जज, भाई आईएएस, कानपुर में 10000 रुपए कैश ना होने के वजह डूबा युवक, पढ़ें पूरी कहानी

इशिका गुप्ता | navpravah.com

नई दिल्ली | कानपुर के नाना मऊ घाट पर शनिवार को एक दुखद घटना घटी। यूपी हेल्थ विभाग के डिप्टी डायरेक्टर आदित्य वर्धन सिंह की गंगा में डूबने से मौत हो गई। यह हादसा नाना मऊ घाट पर हुआ, जब आदित्य और उनके दोस्त प्रदीप तिवारी गंगा में नहा रहे थे। उनकी पत्नी, शैलजा मिश्रा, महाराष्ट्र में जज हैं और उनका चचेरा भाई अनुपम सिंह बिहार के सीएम नीतीश कुमार का सचिव है।

घटना के समय, गोताखोरों ने आदित्य को बचाने के लिए 10,000 रुपये की मांग की। आदित्य के दोस्तों के पास कैश नहीं था, इसलिए उन्होंने पैसे ट्रांसफर करने की पेशकश की। लेकिन तब तक गोताखोरों ने पैसे ट्रांसफर की पुष्टि किए बिना आदित्य की मदद नहीं की, और वह गंगा में डूब गए।

पुलिस और एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और देर रात तक उनकी खोज जारी रही, लेकिन आदित्य की लाश नहीं मिली। इस घटना ने प्रशासन की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं, खासकर यह देखते हुए कि एक उच्च पदस्थ अधिकारी के साथ ऐसा हुआ। लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि प्रशासन ने गोताखोरों की तैनाती क्यों नहीं की, ताकि ऐसी परिस्थितियों में तत्काल मदद मिल सके।

उन्नाव के रहने वाले यूपी स्वास्थ्य विभाग के डिप्टी डायरेक्टर आदित्य वर्धन सिंह अपने दोस्त प्रदीप तिवारी के साथ गंगा में नहाने गए थे। आदित्य की पत्नी, शैलजा मिश्रा, महाराष्ट्र में जज हैं, और उनका चचेरा भाई अनुपम सिंह बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सचिव और सीनियर आईएएस हैं।

जैसे ही आदित्य ने गंगा में नहाते समय फोटो खींचने के लिए कहा, अचानक उनका पैर गहरे गड्ढे में चला गया और वह डूबने लगे। दोस्तों ने तुरंत घाट पर मौजूद गोताखोरों से मदद मांगी, लेकिन गोताखोरों ने पहले 10,000 रुपये की मांग की। आदित्य के दोस्तों ने कहा कि उनके पास कैश नहीं है, लेकिन वे पैसे ऑनलाइन ट्रांसफर कर देंगे। इसके बावजूद, गोताखोरों ने पैसे ट्रांसफर की पुष्टि किए बिना बचाव कार्य शुरू नहीं किया। जब तक पैसे ट्रांसफर हुए, तब तक आदित्य डूब चुके थे।

पुलिस और एसडीआरएफ की टीम ने मौके पर आकर खोजबीन की, लेकिन रात भर की कोशिशों के बावजूद आदित्य की लाश नहीं मिली। इलाके के प्रधान भी वहां आए, और पैसे लेने वाले दुकानदार शैलेश गौतम ने बताया कि गोताखोरों ने पैसे मांगने के लिए उनके अकाउंट का इस्तेमाल किया, लेकिन उन्होंने पैसे वापस कर दिए हैं।

आदित्य के माता-पिता विदेश में हैं और उनकी बहन भी वहीं पर है। उनके भाई अनुपम सिंह मौके पर पहुंचे हैं, जबकि उनकी पत्नी जल्द ही पहुंचेंगी। इस घटना ने सभी को गहरे शोक में डाल दिया है।

एडीसीपी बृजेंद्र द्विवेदी ने कहा कि सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और देर रात तक खोजबीन जारी रही, लेकिन आदित्य का पता नहीं चला। लोग इस घटना को लेकर प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं, विशेषकर यह देखते हुए कि एक उच्च पदस्थ अधिकारी के साथ ऐसा हुआ। लोगों का कहना है कि प्रशासन को गंगा किनारे गोताखोरों की तैनाती करनी चाहिए थी ताकि ऐसी परिस्थितियों में त्वरित मदद मिल सके।

पश्चिम बंगाल: ममता सरकार विधानसभा में पेश करेगी ‘एंटी रेप बिल’, क्या होंगे प्रावधान, पढ़िए पूरी ख़बर

नृपेंद्र कुमार मौर्या | navpravah.com

नई दिल्ली | पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार आज विधानसभा में एक विशेष सत्र के दौरान महिलाओं के खिलाफ बलात्कार और अन्य यौन अपराधों के लिए कठोर दंड का प्रावधान करने वाला एक बिल पेश करने जा रही है। इस नए विधेयक में बलात्कारियों के लिए मृत्युदंड का प्रावधान होगा और यौन अपराधों की सुनवाई एक निश्चित समय सीमा के भीतर पूरी करने का भी प्रावधान रखा गया है।

राज्य के कानून विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस विधेयक में बलात्कार की घटनाओं को हत्या के समान माना जाएगा, जिसमें अपराधी के लिए मृत्युदंड या आजीवन कारावास की सजा का प्रस्ताव है। भले ही पीड़िता बच जाए, पर अपराधी को हत्या के समान दंड दिया जाएगा।

इस बिल को लाने की आवश्यकता कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक पीजी ट्रेनी लेडी डॉक्टर के बलात्कार और हत्या के बाद महसूस की गई। इस विधेयक में बलात्कार के मामलों में आजीवन कारावास या मृत्युदंड की सजा का प्रावधान है। बलात्कार की गंभीरता के आधार पर यह तय किया जाएगा कि सजा क्या होगी। यदि पीड़िता जीवित बचती है, तो अपराधी को आजीवन कारावास की सजा दी जाएगी और यदि पीड़िता की मृत्यु हो जाती है या वह गंभीर रूप से घायल हो जाती है, तो अपराधी को मृत्युदंड दिया जाएगा।

मुकदमे की प्रक्रिया को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने का प्रावधान भी इस विधेयक में शामिल है। बलात्कार और हत्या के मामलों में, अपराधी को मृत्युदंड के साथ-साथ उसके परिवार पर भारी जुर्माना लगाने का भी प्रावधान होगा।

इस बिल में एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि निर्णय कम से कम समय में दिया जाएगा, विशेषकर उन मामलों में जिनमें पर्याप्त और निर्णायक सबूत उपलब्ध हों। ऐसे मामलों में अपराध की तारीख से 15 दिनों के भीतर फैसला सुनाया जाएगा। आंध्र प्रदेश सरकार ने भी 2019 में एक विधेयक पेश किया था, जिसमें 21 दिनों के भीतर फैसले का प्रावधान है, लेकिन वह विधेयक अभी भी राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतजार कर रहा है। वहीं, निर्भया अधिनियम, 2013 और आपराधिक संशोधन अधिनियम, 2018 के तहत बलात्कार के मामलों में फैसला देने के लिए मौजूदा समय चार महीने का है, जिसमें दो महीने जांच के लिए और दो महीने मुकदमे के लिए निर्धारित हैं।

पश्चिम बंगाल के नए विधेयक में कुछ खास प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। यह पहली बार होगा जब बलात्कार की घटना को हत्या के मामले के समान माना जाएगा और कानून के अनुसार मुकदमा चलाया जाएगा। इसके अलावा, बलात्कार या बलात्कार और हत्या के सभी मामलों की सुनवाई फास्ट-ट्रैक अदालतों में की जाएगी। विधेयक में यह भी अनिवार्य किया गया है कि अपराध की सूचना मिलने के छह घंटे के भीतर पीड़िता की मेडिकल जांच कराई जानी चाहिए और आरोपी को गिरफ्तारी के तुरंत बाद मेडिकल जांच करानी चाहिए।

‘बुल्डोज़र एक्शन’ मामले पर सुप्रीम कोर्ट की सख़्त टिप्पणी, पढ़िए पूरा मामला

सौम्या केसरवानी | navpravah.com

नई दिल्ली | सुप्रीम कोर्ट ने आज विभिन्न राज्यों में हो रहे बुलडोजर एक्शन मामले पर नाराज़गी व्यक्त की। जस्टिस गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच के समक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जज के सामने अपनी दलीलें पेश कीं। मेहता ने कहा कि अवैध कब्जे के मामलों में म्युनिसिपल संस्थाओं द्वारा नोटिस देने के बाद ही कार्रवाई की गई है। अदालत ने नोटिस, कार्रवाई और अन्य आरोपों पर सरकार से उत्तर मांगे हैं।

कोर्ट ने बुलडोजर कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ आरोपी होने के आधार पर किसी के घर को गिराना सही नहीं है। तुषार मेहता ने स्पष्ट किया कि जिनके खिलाफ कार्रवाई हुई है, वे अवैध कब्जे या निर्माण के कारण निशाने पर हैं न कि अपराध के आरोप की वजह से, इसलिए उनका घर अवैध कब्जे के आधार पर गिराया गया है।

कोर्ट ने कहा कि वह किसी भी अवैध संरचना को सुरक्षा नहीं प्रदान करेगा, जो सार्वजनिक सड़कों को अवरुद्ध कर रही हो। कोर्ट ने संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे हैं, ताकि वह पूरे देश में संपत्तियों के ध्वस्तीकरण के संबंध में उचित दिशा-निर्देश जारी कर सके ताकि लोगों को असुविधा न हो। बता दें याचिका में ‘बुलडोजर जस्टिस’ की प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट से सुनवाई की मांग की गई थी।

एमेनेस्टी इंटरनेशनल की फरवरी 2024 की एक रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल 2022 से जून 2023 के बीच दिल्ली, असम, गुजरात, मध्यप्रदेश और यूपी में सांप्रदायिक हिंसा के बाद 128 संपत्तियों को बुलडोजर से ढहा दिया गया था। मध्यप्रदेश में एक आरोपी के पिता की संपत्ति पर बुलडोजर चलवा दिया गया था और वहीं मुरादाबाद तथा बरेली में भी बुलडोजर से संपत्तियां ढहाई गईं थी।

AAP विधायक अमानतुल्लाह को ED ने किया गिरफ़्तार, जानिए, किस मामले में हुई गिरफ़्तारी

इशिका गुप्ता | navpravah.com

नई दिल्ली | आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान को सोमवार (2 सितंबर) को प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया। कुछ घंटे पहले जब केंद्रीय एजेंसी उनके घर पहुंची, जो दिल्ली वक्फ बोर्ड से संबंधित वित्तीय अनियमितताओं के मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच कर रही है।

ED की टीम आज सुबह पूछताछ के लिए उनके निवास पर पहुंची, जिसके बाद AAP विधायक ने दावा किया कि अधिकारी उन्हें “गिरफ्तार” करने आए हैं।

अमानतुल्लाह खान ने वीडियो बयान जारी किया:

आज सुबह, ED के उनके निवास पर पहुंचने के बाद, खान ने एक वीडियो बयान जारी किया और कहा कि केंद्रीय एजेंसी का एकमात्र मकसद उन्हें गिरफ्तार करना और दिल्ली सरकार के काम को रोकना है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ED ने उनके खिलाफ “फर्जी मामले” दर्ज किए हैं। उन्होंने कहा, “अभी सुबह के 7 बजे हैं। ED मेरे घर पर मुझे गिरफ्तार करने के लिए आई है और एक सर्च वारंट के नाम पर आई है। मेरी सास को कैंसर का पता चला है। चार दिन पहले उनकी सर्जरी हुई थी। वह भी मेरे घर पर हैं। मैंने उन्हें (ED) लिखा है और हर नोटिस का जवाब दिया है। उनका एकमात्र मकसद मुझे गिरफ्तार करना और हमारे काम को रोकना है।”

अमानतुल्लाह ने कहा, “पिछले दो वर्षों से, ये लोग मुझे परेशान कर रहे हैं, और मेरे खिलाफ फर्जी मामले दर्ज कर रहे हैं। हर दिन, वे न केवल मेरे लिए बल्कि मेरी पूरी पार्टी के लिए कोई न कोई समस्या पैदा कर रहे हैं… हम न तो इनसे झुकेंगे और न ही डरेंगे, ये हमें जेल भेज देंगे। मुझे उम्मीद है कि जिस तरह हमें पहले कोर्ट में न्याय मिला था, इस बार भी हमें न्याय मिलेगा…” उन्होंने बयान में कहा।

दिल्ली वक्फ बोर्ड मामला:

दिल्ली वक्फ बोर्ड में नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं की जांच 2016 में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज एक मामले से उत्पन्न होती है। खान, जो उस समय बोर्ड के अध्यक्ष थे, पर बोर्ड में अवैध रूप से व्यक्तियों की नियुक्ति करने और दिल्ली सरकार को वित्तीय नुकसान पहुंचाने का आरोप है, जिससे उन्होंने व्यक्तिगत रूप से लाभ उठाया। इसके बाद ED ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की, पिछले साल खान से जुड़ी जगहों पर छापेमारी की और भौतिक और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए।

‘मैं इस्तीफा देता हूं…’, कोरे कागज़ पर बांग्लादेशी हिंदू प्रोफेसर्स से लिया जा रहा इस्तीफा

इशिका गुप्ता| navpravah.com 

नई दिल्ली| बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की परेशानियां खत्म होने के नाम नहीं ले रही। पहले उनके खिलाफ हिंसा किया गया और अब जबरन इस्तीफा लिया जा रहा है।

हाल ही में बांग्लादेश में हिंदू शिक्षकों पर इस्तीफा देने के लिए बढ़ते दबाव ने चिंता का माहौल बना दिया है। गणित विभाग के प्रोफेसर डॉ. चंद्रनाथ पोद्दार और अन्य कई शिक्षकों को जबरन इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया। कुछ हिंदू प्रोफेसर अब जब सुरक्षा कारणों से कॉलेज नहीं आ रहे तो उन्हें उनके घर जाकर परेशान किया जा रहा है।

इसी तरह सरकारी बकरगंज कॉलेज की प्रिंसिपल शुक्ला रॉय को भी केवल एक साधारण कागज पर “मैं इस्तीफा देती हूं” लिखवाकर इस्तीफा दिलवाया दिया गया। ऐसे बहुत से हिन्दू प्रोफेसर है जो रोज इन्ही तरह के समस्याओं का सामना कर रहें हैं। कुछ शिक्षकों ने मीडिया से बात की और बांग्लादेश में हिंदू शिक्षकों के इस्तीफे की पुष्टि की. संजय कुमार मुखर्जी, एसोसिएट प्रोफेसर, लोक प्रशासन और गवर्नेस स्टडीज विभाग, काज़ी नजरुल विश्वविद्यालय, बांग्लादेश ने कहा, “दादा, मैं संजय कुमार मुखर्जी, एसोसिएट प्रोफेसर, लोक प्रशासन और गवर्नेस स्टडीज विभाग, काज़ी नजरुल विश्वविद्यालय, बांग्लादेश हूं. मुझे प्रॉक्टर और विभागाध्यक्ष के पद से इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया. हम इस समय बहुत असुरक्षित हैं.”

बांग्लादेश में हिंदू समुदाय की समस्याएँ दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही हैं। हमलों और अत्याचारों का सामना करने के बाद, अब उन्हें सरकारी नौकरियों से इस्तीफा देने के लिए बाध्य किया जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, 5 अगस्त से अब तक लगभग 50 हिंदू शिक्षाविदों को इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया है।

इस गंभीर स्थिति की जानकारी बांग्लादेश छात्र एक्य परिषद ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी। उनके अनुसार, उन्होंने उन शिक्षकों की सूची प्राप्त की है जिन्होंने इस्तीफा दिया है। कुछ शिक्षकों ने निजी रूप से मीडिया को बताया कि बांग्लादेश में हिंदू शिक्षकों पर इस्तीफा देने का दबाव वास्तविक और चिंताजनक है। काज़ी नजरुल विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर संजय कुमार मुखर्जी ने कहा कि उन्हें प्रॉक्टर और विभागाध्यक्ष के पद से इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया और वे इस समय बेहद असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

बांग्लादेश में हिंदू शिक्षकों के साथ हो रहे इस अत्याचार ने न केवल उनकी सुरक्षा बल्कि उनके अधिकारों को भी सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है।

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को लेकर महायुति की अहम बैठक, 173 सीटों पर बनी सहमति

नृपेंद्र कुमार मौर्य | navpravah.com

नई दिल्ली | महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार ने नागपुर में आगामी राज्य विधानसभा चुनावों के लिए सीट-बंटवारे पर चर्चा की। ये बैठक शनिवार को लगभग तीन घंटे चली, जिसकी बीजेपी सूत्रों ने जानकारी दी है।

बीजेपी सूत्रों के अनुसार, “यह बैठक पिछले दो-तीन दौर की प्रारंभिक चर्चाओं के अनुरूप थी। अंतिम सीट बंटवारे पर अगले दो से तीन बैठकों के बाद निर्णय लिया जाएगा।”

173 सीटों पर बनी सहमति- 

महा-युति गठबंधन, जिसमें बीजेपी, शिवसेना (एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में) और एनसीपी (अजित पवार के नेतृत्व में) शामिल हैं, आगामी महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के लिए सीट-बंटवारे की व्यवस्था को अंतिम रूप देने के करीब है। एनसीपी सूत्रों ने बताया कि 173 सीटों पर सहमति बन चुकी है, जिसमें बीजेपी को सबसे बड़ा हिस्सा मिला है, उसके बाद शिंदे की शिवसेना और अजित पवार का गुट है।

बाकी 115 सीटों पर चर्चा महाराष्ट्र बीजेपी अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले, मुख्यमंत्री शिंदे, और एनसीपी के वरिष्ठ नेताओं सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल के साथ आगामी बैठकों में की जाएगी।

2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में, संयुक्त शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने क्रमशः 56 और 54 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस ने 44 सीटों पर जीत हासिल की थी।

पैरा ओलंपिक 2024: एक्शन में भारत के एथलीट, रुबीना ने भारत को दिलाया एक और मेडल

नृपेंद्र कुमार मौर्य | navpravah.com

नई दिल्ली | पेरिस पैरालंपिक 2024 के तीसरे दिन यानी 30 अगस्त (शनिवार) को भी भारतीय एथलीट एक्शन में हैं। निशानेबाज रुबीना फ्रांसिस ने वूमेन्स 10 मीटर एयर पिस्टल (SH1) में ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया। पेरिस पैरालंपिक 2024 में भारत के पदकों की संख्या अब पांच हो गई है। भारत ने अब तक एक गोल्ड, एक सिल्वर और तीन ब्रॉन्ज मेडल जीते हैं।

रुबीना ने फाइनल में 211.1 अंक हासिल किए। हालांकि, वे एक समय दूसरे स्थान पर थीं, लेकिन अंततः तीसरे स्थान पर रहीं। ईरान की जावनमरडी सरेह ने गोल्ड और तुर्की की ओजगान आयसेल ने सिल्वर मेडल जीता।

इससे पहले, भारत ने दूसरे दिन चार पदक जीतकर सभी को चौंका दिया था। मनीष नरवाल ने मेन्स 10 मीटर एयर पिस्टल (SH1) में सिल्वर, प्रीति पाल ने वूमेन्स 100 मीटर रेस (T35) में ब्रॉन्ज, और अवनि लेखरा और मोना अग्रवाल ने वूमेन्स 10 मीटर एयर राइफल (SH1) में क्रमशः गोल्ड और ब्रॉन्ज मेडल जीते थे।

भारत के इन पदकवीरों ने साबित कर दिया है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और मेहनत से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। इनकी इस जीत ने पूरे देश में खुशी की लहर दौड़ा दी है। आइए, इन सभी खिलाड़ियों को दिल से बधाई दें और उनके उज्जवल भविष्य की कामना करें।

भारत के पदकवीर:

अवनि लेखरा (शूटिंग)- गोल्ड मेडल
मोना अग्रवाल (शूटिंग)- ब्रॉन्ज मेडल
प्रीति पाल (एथलेटिक्स)- ब्रॉन्ज मेडल
मनीष नरवाल (शूटिंग)- सिल्वर मेडल
रुबीना फ्रांसि (शूटिंग)- ब्रॉन्ज मेडल