30 C
Mumbai
Monday, September 7, 2026
Home Blog Page 21

योगी आदित्यनाथ के संसद में रोने से लेकर यूपी में एन्सेफलाइटिस के खात्मे तक की कहानी

नृपेन्द्र कुमार मौर्य | navpravah.com

नई दिल्ली | एक समय था जब पूर्वांचल के बच्चे गर्मी और बारिश के मौसम का नाम सुनकर कांप जाते थे। एन्सेफलाइटिस नाम की यह जानलेवा बीमारी हर साल उनके दरवाजे पर मौत बनकर दस्तक देती थी। सैकड़ों मासूम अपनी जान गंवा देते थे और हजारों ज़िंदगी भर के लिए अपंग हो जाते थे। 1996 से योगी आदित्यनाथ इस बीमारी के खिलाफ जंग छेड़ चुके थे, लेकिन उनकी लड़ाई उस समय निर्णायक मोड़ पर पहुंची, जब 2017 में उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

मुख्यमंत्री बनने के बाद, उन्होंने एन्सेफलाइटिस को मिटाने का बीड़ा उठाया और इसे एक मिशन के रूप में लिया। उनके अथक प्रयासों ने धीरे-धीरे स्थिति को बदलना शुरू किया। जो बीमारी कभी प्रदेश के कोनों में तबाही मचाती थी, आज अपने अंतिम दिन गिन रही है। योगी जी के प्रयासों का कभी मज़ाक भी उड़ाया गया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। आज एन्सेफलाइटिस लगभग समाप्ति के कगार पर है, और बस इसकी आधिकारिक घोषणा बाकी है।

इस साल फरवरी में जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर के बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन करने पहुंचे, तो उनका भाषण लोगों के दिलों को छू गया। उन्होंने याद किया, “1970 के दशक से लेकर 2017 तक एन्सेफलाइटिस जैसी भयंकर बीमारी को खत्म करने के बारे में किसी ने सोचा तक नहीं। जब मैंने मुख्यमंत्री का पद संभाला, तो इस बीमारी से निजात पाने के लिए एक मॉडल तैयार करने पर काम शुरू किया।”

योगी जी ने आगे बताया कि कैसे उन्होंने कुशीनगर के मुसहर समुदाय के बीच जाकर स्वच्छता अभियान चलाया, जहां उन्होंने लोगों को साफ-सफाई के महत्व के बारे में बताया और साबुन के इस्तेमाल की जानकारी दी। लेकिन इसके लिए उनका तीन दिनों तक मीडिया ट्रायल चला और उनका मजाक बनाया गया कि एक मुख्यमंत्री साबुन बांट रहा है।

उन्होंने कहा, “तब लोग हंसते थे, लेकिन जब कोरोना आया, तब सबको स्वच्छता और साबुन की अहमियत समझ में आई।”


मुख्यमंत्री बनने के बाद, योगी आदित्यनाथ ने एन्सेफलाइटिस जैसी घातक बीमारी के खिलाफ एक समर्पित लड़ाई शुरू की, जो पूर्वांचल के जिलों में हर साल मानसून के दौरान तबाही मचाती थी। हर मानसून से पहले, उन्होंने वेक्टर बॉर्न और वाटर बॉर्न बीमारियों के खिलाफ एक विशेष अभियान की शुरुआत की, जिसे ‘दस्तक अभियान’ के नाम से जाना गया। इसके तहत लोगों को एन्सेफलाइटिस से बचने के उपाय सिखाए गए, और यह संदेश गांव-गांव तक पहुंचाया गया कि इस बीमारी को हराया जा सकता है।

एक समय था जब पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिले, यहां तक कि बिहार और नेपाल के मरीज भी एन्सेफलाइटिस के इलाज के लिए गोरखपुर के बाबा राघव दास (बीआरडी) मेडिकल कॉलेज का रुख करते थे। तब हर साल 1200 से 1500 बच्चे इस बीमारी का शिकार होकर अपनी जान गंवा देते थे। लेकिन 2017 में मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद, योगी आदित्यनाथ ने इस समस्या की जड़ पर प्रहार करने का फैसला किया। उन्होंने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एन्सेफलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर स्थापित करने के निर्देश दिए ताकि मरीजों को शुरुआती स्तर पर ही इलाज मिल सके।

उन्होंने बीआरडी मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था को भी सुदृढ़ किया, जो एन्सेफलाइटिस से जुड़ी मौतों के लिए बदनाम हो चुका था। यहां एक समर्पित एन्सेफलाइटिस हॉस्पिटल और ब्लॉक बनाए गए। साथ ही, हर जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से लेकर जिला अस्पतालों तक एन्सेफलाइटिस के वार्ड बनाए गए और वहां डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई।

इस क्रांतिकारी कदम का असर साफ दिखा। धीरे-धीरे जापानी एन्सेफलाइटिस और एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम के मरीजों की संख्या में गिरावट आने लगी, क्योंकि प्राथमिक स्तर पर ही उन्हें इलाज मिल रहा था।

उत्तर प्रदेश ने 2017 में एक और भयानक दिन देखा, जब गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन सप्लाई बाधित होने से 67 बच्चों की मौत हो गई। इस त्रासदी ने पूरे देश को झकझोर दिया, लेकिन योगी सरकार ने इसे सुधार का एक महत्वपूर्ण अवसर मानकर बीआरडी की व्यवस्था को फिर से खड़ा किया, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

2005 में गोरखपुर जिले में एन्सेफलाइटिस का सबसे भयावह रूप सामने आया। उस साल, 6061 बच्चे इस बीमारी की चपेट में आए और उनमें से 1500 मासूमों ने अपनी जान गंवा दी। यह एक ऐसी त्रासदी थी जिसने पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया। इसके बाद, 2006 में 2320 मामले दर्ज हुए और 528 बच्चों की मौत हुई, वहीं 2007 में 3024 मामलों के साथ 645 मौतें हुईं।

इन दर्दनाक आंकड़ों ने सरकार को मजबूर किया कि इस बीमारी से निपटने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। 2006 में जापानी एन्सेफलाइटिस के खिलाफ टीकाकरण कार्यक्रम शुरू किया गया, जो बाद में 2014 में राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम का हिस्सा बन गया। इस कार्यक्रम के तहत उन 9 राज्यों के 179 जिलों में टीके उपलब्ध कराए गए, जहां एन्सेफलाइटिस का खतरा सबसे ज्यादा था।

यह बीमारी मुख्य रूप से बच्चों और युवाओं को अपना शिकार बनाती है, जो इसे और भी भयावह बना देती है। लेकिन टीकाकरण कार्यक्रम की शुरुआत ने एक नई उम्मीद जगाई, और धीरे-धीरे यह बीमारी काबू में आने लगी।


एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (AES) से पीड़ित व्यक्ति को तेज़ बुखार और मानसिक भ्रम से लेकर कोमा तक की गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्याएं हो सकती हैं। वहीं, जापानी एन्सेफलाइटिस एक मच्छर जनित वायरल संक्रमण है, जो मच्छरों के काटने से इंसानों में फैलता है और घोड़ों व सुअरों को भी संक्रमित कर सकता है। खासकर बच्चों पर इसका खतरा अधिक होता है, जिसे स्थानीय भाषा में ‘दिमागी बुखार’ कहा जाता है। गंदगी, जलजमाव और अशुद्ध पानी इसके प्रसार के मुख्य कारण हैं।

योगी आदित्यनाथ, जब गोरखपुर के सांसद थे, तबसे इस बीमारी के उन्मूलन के प्रति गंभीर रहे हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद, उन्होंने इसके खिलाफ व्यापक अभियान चलाया, जिसके सकारात्मक परिणाम अब दिखने लगे हैं।

जबलपुर में टला बड़ा रेल हादसा, सोमनाथ एक्सप्रेस के दो डिब्बे पटरी से उतरे

सौम्या केसरवानी | navpravah.com

नई दिल्ली | आज सुबह मध्य प्रदेश के जबलपुर में सोमनाथ एक्सप्रेस के दो डिब्बे पटरी से उतरने से हड़कंप मच गया। हादसे के समय गाड़ी स्टेशन से करीब 200 मीटर की दूर पर थी, हादसे के बाद अधिकारियों ने बताया कि इंदौर-जबलपुर एक्सप्रेस ट्रेन लगभग ‘डेड स्टॉप स्पीड’ पर पटरी से उतर गई थी।

पश्चिम मध्य रेलवे के सीपीआरओ हर्षित श्रीवास्तव ने इस हादसे पर कहा कि, ‘ट्रेन इंदौर से आ रही थी। जब वह जबलपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 6 की ओर जा रही थी, तो ट्रेन धीरे-धीरे चल रही थी और 2 डिब्बे पटरी से उतर गए, लेकिन रह अच्छा है कि सभी यात्री सुरक्षित हैं।’

बता दें कि ओवरनाइट एक्सप्रेस लगभग 5:30 बजे प्लेटफॉर्म 6 पर आने वाली थी, जैसे ही इंजन प्लेटफॉर्म 6 के पॉइंट से मुड़ा, अचानक से तेज आवाज आई और इंजन के पीछे लगा एसएलआर और एसी कोच के पहिए पटरी से उतर गए, इस हादसे में किसी को कुछ हुआ नहीं लेकिन एसी कोच के कई यात्री लड़खड़ा गए थे।

एक यात्री संदीप कुमार ने बताया कि वह कोच में आराम कर रहे थे, इसी दौरान कुछ इस तरह के झटके लगे जैसे बहुत तेजी से ब्रेक लगा हो। कुछ समझ में आता, तब तक ट्रेन खड़ी हो चुकी थी। कुछ देर बाद जब कोच से उतरकर बाहर देखा तो दो डिब्बे पटरी से उतरे हुए थे।

जम्मू कश्मीर : अमित शाह ने जारी किया संकल्प पत्र, जानिए क्या हैं भाजपा के 25 संकल्प?

इशिका गुप्ता | navpravah.com

नई दिल्ली | केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी का संकल्प पत्र (घोषणा पत्र) जारी किया. जम्मू में जारी किए गए इस घोषणा पत्र में बीजेपी ने अपने 25 संकल्प जाहिर किए हैं. अमित शाह ने इस मौके पर कहा कि, आजादी के समय से ही हमारी पार्टी के लिए जम्मू-कश्मीर का ये भूभाग बहुत महत्वपूर्ण रहा है और आजादी के समय से ही हमने इस भूभाग को हमेशा भारत के साथ जोड़े रखने के लिए प्रयास किए. पंडित प्रेमनाथ डोगरा से लेकर श्यामा प्रसाद मुखर्जी की शहादत तक… ये पूरा संघर्ष पहले भारतीय जनसंघ और फिर भारतीय जनता पार्टी ने आगे बढ़ाया. क्योंकि हमारी पार्टी मानती है कि जम्मू-कश्मीर हमेशा से भारत का हिस्सा है और रहेगा.

अमित शाह ने कहा कि, ”धारा 370 और 35ए… अब पास्ट बन चुका है, वो हमारे संविधान का हिस्सा नहीं है. इसका पूरा भारत और जम्मू-कश्मीर की जनता को आनंद है, क्योंकि धारा 370 ही वो कड़ी थी जो कश्मीर के अंदर युवाओं को उनके हाथ में पत्थर और हथियार पकड़ाती थी. आज मोदी जी के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर में विकास के क्षेत्र में ढेर सारे काम हुए हैं.”

राज्य मैक्सिमम टेररिज्म से, मैक्सिमम टूरिज्म की ओर शिफ्ट

उन्होंने कहा कि, 2014 से 2024 का ये कालखंड… जब जम्मू-कश्मीर और भारत का इतिहास लिखा जाएगा, जम्मू-कश्मीर को स्वर्णिम अक्षरों से अंकित किया जाएगा. ये 10 साल… जम्मू-कश्मीर के लिए शांति और विकास के रहे हैं, सुशासन के रहे हैं. इस 10 साल में यह राज्य मैक्सिमम टेररिज्म से, मैक्सिमम टूरिज्म की ओर शिफ्ट हुआ है.

उन्होंने कहा कि, पहले यहां डेमोक्रेसी तीन परिवारों में ही सीमित होकर रह गई थी. ना पंचायत चुनाव होते थे, ना तहसील पंचायतें बनती थीं, ना जिला पंचायतें होती थीं. भाजपा की सरकार ने ग्राम पंचायत, तहसील पंचायत, जिला पंचायत और म्युनिसपाल्टी का चुनाव कराकर पंचायती राज को बहाल करने का काम किया है और लोकतंत्र को प्रस्थापित किया है.

बीजेपी के घोषणा पत्र में 25 संकल्प

जम्मू-कश्मीर के लिए भाजपा की ओर से जारी किए गए संकल्प पत्र में 25 संकल्प शामिल हैं. इसमें कहा गया है कि अटल आवास योजना के माध्यम से भूमिहीन लाभार्थियों को जमीन का मुफ्त आवंटन किया जाएगा एवं वृद्धावस्था, विधवा व विकलांगता पेंशन को तीन गुना बढ़ाया जाएगा. हिंदू मंदिरों और धार्मिक स्थलों का पुनर्निर्माण और जीर्णोद्धार किया जाएगा. बिजली और पानी सहित सभी मूलभूत सुविधाओं का विकास किया जाएगा. टेररिस्ट हॉटस्पॉट से राज्य को टूरिस्ट स्पॉट बनाया जाएगा.

…जब प्रधानमंत्री मोदी ने सिंगापुर के उद्योगपतियों को दिया ‘बनारसी पान’ का न्योता

इशिका गुप्ता| navpravah.com

नई दिल्ली | प्रधानमंत्री मोदी हाल ही में ब्रुनेई और सिंगापुर का दौरा करके लौटे हैं। इन दोनों यात्राओं ने भारत और इन देशों के बीच व्यापार, सांस्कृतिक और रणनीतिक संबंधों को काफी मजबूत किया। सिंगापुर दौरे के दौरान चार महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर भी हुए।

दिलचस्प बात यह है कि पीएम मोदी ने सिंगापुर के उद्योगपतियों को बनारसी पान का स्वाद चखने का न्योता दिया, जिससे भारतीय संस्कृति को एक अनोखे तरीके से पेश किया गया।

प्रधानमंत्री मोदी के ब्रुनेई दौरे को भारत और ब्रुनेई के बीच व्यापार, सांस्कृतिक और रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना गया। ब्रुनेई के सुल्तान हसनल बोल्किया ने पीएम मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया और दोनों नेताओं के बीच व्यापक बातचीत हुई, जिसमें आर्थिक सहयोग, ऊर्जा साझेदारी और सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर जोर दिया गया।

इस दौरान भारत और ब्रुनेई के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता भी हुई और कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, जिनमें बंडर सेरी बेगवान और चेन्नई के बीच सीधी उड़ानों की शुरुआत शामिल है। सुल्तान ने पीएम मोदी के सम्मान में ‘इस्ताना नुरुल इमान’ महल में लंच भी आयोजित किया, जो दुनिया का सबसे बड़ा महल है।

पीएम मोदी ने ब्रुनेई के व्यापारिक समुदाय के साथ भी बातचीत की, जिसमें उन्होंने ‘मेक इन इंडिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’ जैसी महत्वपूर्ण पहलों के तहत निवेश करने के लिए ब्रुनेई की कंपनियों को आमंत्रित किया। इसके अलावा, दोनों देशों ने क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दों पर भी चर्चा की। उन्होंने मिलकर काम करने और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक-दूसरे का समर्थन करने का वादा किया।

प्रधानमंत्री मोदी का सिंगापुर दौरा द्विपक्षीय संबंधों के दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण रहा। इस दौरे के दौरान भारत और सिंगापुर ने सेमीकंडक्टर, डिजिटल टेक्नोलॉजी, हेल्थ और स्किल डेवलपमेंट के क्षेत्रों में चार महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। विशेष रूप से, दोनों देशों ने सेमीकंडक्टर डिजाइनिंग और मैन्युफैक्चरिंग पर ध्यान देने का निर्णय लिया।

पीएम मोदी ने सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वॉन्ग के साथ द्विपक्षीय वार्ता की और सिंगापुर की संसद में भी भव्य स्वागत किया गया। दोनों नेताओं ने आपसी व्यापार और आर्थिक संबंधों को और सशक्त बनाने पर सहमति जताई।

सिंगापुर के व्यापारिक समुदाय से मुलाकात के दौरान, पीएम मोदी ने उन्हें भारत आने और निवेश करने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने मजाक करते हुए कहा कि अगर वे पान का आनंद लेना चाहते हैं, तो उन्हें वाराणसी में निवेश करना चाहिए, क्योंकि वहां का पान मशहूर है।

पाकिस्तान-अफ़ग़ानिस्तान की सीमा पर देर रात चली ताबड़तोड़ गोलियाँ, युद्ध जैसे हालात, कई लोगों की मौत की आशंका

इशिका गुप्ता | navpravah.com

नई दिल्ली | पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच युद्ध जैसे हालात दिख रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, दोनों देशों के सीमावर्ती क्षेत्र में देर रात गोलीबारी हुई है, जिसमें कई लोगों की मौत की आशंका जताई जा रही है।

तालिबान के अधिकृत अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच रातभर गोलीबारी हुई। अफगानिस्तान की खामा प्रेस के अनुसार खोस्त प्रांत के जाजी मैदान जिले में बुधवार शाम सात बजे से लेकर रात भर गोलीबारी हुई। सूत्रों से यह भी पता चला है कि दोनों तरफ से भारी हथियार का प्रयोग भी हुआ है। स्थानीय लोगों के अनुसार अफगानी सैनिक तीन दिनों से सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा चौकियों का निर्माण कर रहे हैं, जिसकी वजह से ही यह झड़प शुरू हुई।

पाकिस्तान के स्थानीय सूत्रों ने बताया कि झड़प‌ में दोनों तरफ के लोगों की मौतों की आशंका है लेकिन कितने लोगों की मौतें हुई हैं, इसका पता अभी नहीं चल सका है।

डूरंड रेखा को मान्यता नहीं देता है अफगानिस्तान-

काल्पनिक डूरंड सीमा रेखा जो कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान को अलग करती है। अफ़ग़ानिस्तान सरकार इस रेखा को वास्तविक सीमा रेखा नहीं मानती है। यह सीमा विवाद पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच लंबे समय से होता रहा है।

साल 2021 में अफगानिस्तान की सत्ता में तालिबान की वापसी से पाकिस्तान को लगा कि यह सीमा विवाद खत्म हो जाएगा पर ऐसा नहीं हुआ। कहा जा रहा है कि तालिबान सत्ता में वापसी के बाद सीमावर्ती इलाकों पर अपना दावा ठोक रहा है। सीमावर्ती इलाकों पर अपने अफगानी सैनिकों की सुरक्षा चौकियों का निर्माण करना भी इसका एक उदाहरण हो सकता है।

क्या आज जेल से छूट जाएँगे केजरीवाल ? शराब घोटाला मामले में आज SC में सुनवाई

arvind kejriwal
arvind kejriwal

सौम्या केसरवानी | navpravah.com

नई दिल्ली | शराब नीति घोटाला मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार किया गया था, जिसकी जमानत याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। सीएम केजरीवाल को पहले ईडी ने अपनी कस्टडी में लिया था, लेकिन उस मामले में जमानत मिलने के बाद सीबीआई ने फिर उन्हें जेल से ही गिरफ्तार कर लिया था।

ईडी मामले में कोर्ट ने पहले से ही सीएम की रिहाई का आदेश दिया था, अब आज सीबीआई इस मामले में उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई करेगी और फिर यह तय करेगी कि उन्हें जमानत मिलेगी या नहीं! सीएम की जमानत याचिका पर जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस सीटी रविकुमार और जस्टिस उज्जल भुइयां की स्पेशल बेंच सुनवाई कर रही है।

सीएम के मामले की सुनवाई के लिए दो नंबर एलॉट किया गया है। लोगों के बीच यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि शराब नीति घोटाले का आरोप सीएम के दामन में दाग लगा दिया है, केजरीवाल ने इसे राजनीतिक साजिश बताते हुए चुनौती दी है और न्याय की गुहार लगाई है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 27 अगस्त को भारत राष्ट्र समिति की नेता के. कविता को जमानत दी थी। अदालत ने उन्हें जमानत देते हुए कहा कि यह नहीं कहा जा सकता कि वह पढ़ी-लिखी हैं या विधायक या सांसद हैं तो उन्हें पीएमएलए एक्ट के प्रावधानों का लाभ से वंचित रखा जा सकता है।

बता दें कि दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को भी 9 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली थी। शराब घोटाले में गिरफ्तार मनीष सिसोदिया को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई थी, मनीष सिसोदिया 17 महीने से तिहाड़ जेल में बंद थे।

दिल-दिमाग से CM आवास के नक्शे तक, बुलडोजर पर भिड़ गए सीएम योगी और अखिलेश यादव

इशिका गुप्ता | navpravah.com

नई दिल्ली | उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के बुलडोजर एक्शन को लेकर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधा, जिससे राजनीति में हलचल मच गई। अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश यादव पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि बुलडोजर चलाने के लिए दिल और दिमाग दोनों की जरूरत होती है, और यह सबके बस की बात नहीं है। सिर्फ वही लोग बुलडोजर चला सकते हैं जिनमें ताकत और दृढ़ संकल्प हो। दंगाइयों के सामने झुकने वाले लोग बुलडोजर के सामने भी हार मान जाएंगे।

बीजेपी प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा कि बुलडोजर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है, लेकिन अखिलेश यादव को इस पर आपत्ति क्यों है, यह समझ से बाहर है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव राजनीति में हमेशा नफरत और प्रतिशोध की बात करते हैं। त्रिपाठी ने भविष्यवाणी की कि 2027 में जनता अखिलेश के सपनों पर बुलडोजर चलाएगी।

अखिलेश यादव ने हाल ही में यूपी के अगले विधानसभा चुनावों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी की हार तय है और समाजवादी पार्टी की सरकार बनेगी। सपा की सरकार बनने के बाद, बुलडोजर का रुख गोरखपुर की तरह बदल दिया जाएगा। इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।

अखिलेश यादव ने कहा, “2027 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की हार निश्चित है और इसका असर देश की राजनीति पर पड़ेगा। बीजेपी की सरकार में निर्दोष लोगों को परेशान किया जा रहा है, किसानों की स्थिति दयनीय है, और नौजवानों का भविष्य अंधेरे में है। समाज का हर वर्ग संकट में है।”

पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि 2027 में समाजवादी सरकार बनने पर पूरे प्रदेश में बुलडोजरों का रुख गोरखपुर की तरफ होगा। ये बातें उन्होंने मंगलवार को लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा।

राहुल गांधी की बातों में कितना दम, कितना आसान है जम्मू कश्मीर को राज्य बनाना?

नृपेन्द्र कुमार मौर्य | navpravah.com

नई दिल्ली | जैसे ही चुनाव नजदीक आते हैं, राजनेता बयानबाजी करना शुरू कर देते हैं। जम्मू कश्मीर को केंद्र शासित राज्य बने लगभग 6 साल हो गए लेकिन कांग्रेस नेता को ये बात आज याद आई क्योंकि जम्मू कश्मीर में चुनाव नजदीक है।

जैसा कि अब जम्मू कश्मीर में चुनाव है तो आज लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी अपनी पार्टी का प्रचार करने जम्मू कश्मीर के रामबन पहुंचे थे। उन्होंने वहां प्रधान मंत्री पर जमकर निशाना साधा।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष व कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा, “पहली बार देश के एक राज्य को केंद्र शासित प्रदेश बनाकर लोगों के अधिकार छीने गए। सबसे पहले जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा वापस करना होगा क्योंकि सिर्फ आपका राज्य ही नहीं छीना गया है, आपसे आपके अधिकार, आपकी संपत्ति, सब कुछ छीना जा रहा है। 1947 में हमने राजाओं को हटाकर लोकतांत्रिक सरकार बनाई, देश को संविधान दिया। आज जम्मू-कश्मीर में एक राजा बैठा है, उसका नाम उपराज्यपाल है लेकिन वो राजा है। आपकी संपत्ति आपसे छीनकर बाहर के लोगों को दी जा रही है। हमारा पहला कदम जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा वापस दिलाना होगा, हम चाहते थे कि चुनाव से पहले आपको राज्य का दर्जा मिले और फिर चुनाव हों लेकिन भाजपा ये नहीं चाहती। भाजपा चाहे या न चाहे INDIA गठबंधन इतना दबाव डालेगी कि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा देना ही होगा।”

राहुल गांधी जी ने बयान तो से दिया कि हम केंद्र सरकार पर दवाब बनायेंगे कि हम जम्मू कश्मीर को पूर्ण राज्य बनायेंगे लेकिन आइए समझते हैं संविधान में इसकी क्या प्रक्रिया है –

जम्मू और कश्मीर को पुनः पूर्ण राज्य बनाने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद 3 और 4 के तहत निम्नलिखित प्रक्रिया अपनाई जाएगी:

1. विधेयक का प्रस्ताव: केंद्र सरकार संसद में संविधान संशोधन विधेयक पेश करेगी।

2. राष्ट्रपति की सहमति: राष्ट्रपति विधेयक को संसद में पेश करने से पहले अपनी सहमति देंगे।

3. संसद में पारित: विधेयक संसद के दोनों सदनों में बहस और वोटिंग के बाद साधारण बहुमत से पारित होगा।

4. राष्ट्रपति की स्वीकृति: राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद विधेयक कानून बन जाएगा।

5. अधिसूचना और लागू: कानून की अधिसूचना जारी होने पर जम्मू और कश्मीर को फिर से पूर्ण राज्य का दर्जा मिल जाएगा। इसके बाद विधानसभा चुनाव होंगे और राज्यपाल की नियुक्ति की जाएगी।

यह प्रक्रिया केंद्र सरकार की मंशा और संसद की सहमति पर निर्भर करेगी। अब इस तरह से देखा जाए तो राहुल गांधी की सरकार केंद्र में है नहीं, तो उनके ये दावे खोखले ही लग रहे हैं। उनका ये बयान चुनाव जीतने के लिए राजनीतिक ज्यादा लग रहा है।

अब राहुल गांधी के इस बयान के बाद से राजनीति और तेज होगी ही, अभी तो ये बयानबाजी शुरू हुई है। तमाम पार्टियां बड़ी बड़ी घोषणाएं करेंगी लेकिन इन सब के बीच देखने वाली बात ये भी होगी कि क्या कोई पार्टी आर्टिकल 370 को भी फिर से लागू करने की बात ना कर दे।

पाकिस्तान की भी होगी नजर –

जम्मू कश्मीर में चुनाव होने के कारण अब इन चुनावों पर पाकिस्तान और उसकी एजेंसी आईएसआई भी नजर गड़ाए बैठी हैं। पाकिस्तान हमेशा भारत में अस्थिरता लाने की कोशिश में लगा रहता है और इस बार चुनाव जम्मू कश्मीर में है तो पाकिस्तान और चौकन्ना होगा और चाहेगा कि उसकी विचारधारा वाली पार्टियां चुनाव जीते।

कानपुर: पाँच दिन के बच्चे को कुत्तों ने नोच-नोच कर किया घायल, ज़िंदगी-मौत की जंग लड़ रहा मासूम

सौम्या केसरवानी | navpravah.com

लखनऊ | कानपुर के हैलट हास्पिटल में एक नवजात बच्चे का इलाज चल रहा है, जिसे आवारा कुत्तों नोच-नोच कर गंभीर रूप से घायल कर दिया है। बच्चा पाँच दिन का बताया जा रहा है। ये बच्चा हमीरपुर की झाड़ियों के पीछे जख्मी हालत में पाया गया है। बच्चे के कोमल शरीर पर 25 घाव हैं।

अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ पांच दिन के नवजात बच्चे को बचाने की जद्दोजहद करने में लगे हैं। जब बच्चा अस्पताल आया तो हड़कंप सा मच गया। लोगों ने आशंका जताया कि यह बच्चा किसी अविवाहित जोड़े का हो सकता है, तभी इसे झाड़ी के पीछे फेंका गया है। अब अस्पताल में एक-एक सांस के लिए मौत से लड़ रहे इस बच्चे की जान की सलामती की दुआएं डॉक्टर और नर्स सभी कर रहे हैं। अभी फिलहाल बच्चे की हालत गंभीर बताई जा रही है।

बता दें कि, हमीरपुर राठ के कस्बाखेड़ा गांव के पुल के पास झाड़ियों में 30 अगस्त को यह नवजात रोता-बिलखता मिला था। बच्चे के कोमल शरीर को कुत्तों ने जगह-जगह काटा था शरीर पर 25 जगह गहरे जख्म थे जिसके चलते संक्रमण से हालत और भी खराब हो गई। बच्चे की गंभीर हालत में बाल रोग विभाग के एनआईसीयू वार्ड में भर्ती किया गया है।

बच्चे का इलाज कर रहे डॉ. सिद्दिकी के मुताबिक, नवजात पांच दिन का है, उसे कुत्तों ने काटा है। झाड़ियों में काफी देर तक खुला पड़ा होने से संक्रमण भी हो गया है, अभी उसका वजन दो किलो 400 ग्राम है और बच्चे को नली के सहारे से दूध दिया जा रहा है।

इस मासूम को सबसे पहले रामसनेही नाम के व्यक्ति ने देखा था, जिसकी नौ बेटियां हैं, इसलिए वह इस बच्चे को झाड़ी से निकालकर हास्पिटल ले गया ताकि वे इस बच्चे को अपना सके। फिलहाल डाक्टर उसका इलाज कर रहे हैं और उसकी जान बचाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।

IC814: भारी बवाल के बाद झुका नेटफ्लिक्स, अब सीरीज में करेगा बदलाव

इशिका गुप्ता | navpravah.com 

नई दिल्ली | Netflix की वेब सीरीज “IC 814: द कंधार हाईजैक” को लेकर सोशल मीडिया पर एक विवाद उठ खड़ा हुआ है। सीरीज में आतंकियों को उनके असली नामों की बजाय हिंदू कोड-नेम जैसे “बर्गर,” “चीफ,” “शंकर,” और “भोला” से दिखाया गया, जिस पर लोगों ने आपत्ति जताई और इसे आतंकियों के असली नाम छिपाने की कोशिश के रूप में देखा।

इस विवाद के बढ़ने पर सूचना प्रसारण मंत्रालय ने Netflix इंडिया की कंटेंट हेड मोनिका शेरगिल को समन किया और उनसे इस पर स्पष्टीकरण मांगा।

मोनिका शेरगिल ने दिल्ली में मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात के बाद कहा कि शो के डिस्क्लेमर को अपडेट कर दिया गया है। इसमें अब आतंकियों के असली नामों के साथ-साथ वे कोड-नेम भी शामिल हैं, जो उन्होंने असल घटना के दौरान इस्तेमाल किए थे।

अपने बयान में मोनिका ने बताया कि Netflix भारत में कहानियों को सटीक और सम्मानजनक तरीके से पेश करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “भारत की समृद्ध स्टोरीटेलिंग संस्कृति है, और हम इसे प्रामाणिक तरीके से दिखाने के लिए प्रयासरत हैं।”