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Thursday, July 30, 2026
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भारत में मंकीपॉक्स के मामले ने बढ़ाई चिंता, जानिए इसके क्या हैं लक्षण ?

सौम्या केसरवानी | navpravah.com

नई दिल्ली | भारत में मंकी पॉक्स ने दस्तक दे दी है। यहां अभी मंकीपॉक्स का एक केस मिला है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि विदेश से लौटे एक शख्स में एमपॉक्स के लक्षण पाए गए हैं। उसे अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में रखा गया है यह पता लगाया जा रहा है कि संदिग्ध मरीज के संपर्क में कौन-कौन लोग आए हैं, उसकी ट्रैवल हिस्ट्री भी निकाली जा रही है।

उन्होंने कहा कि यह एक चिंता का विषय है, लेकिन इससे निपटने के लिए कार्य किए जा रहे हैं। शनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल भी पूर मामले को देख रही है। WHO ने 14 अगस्त को मंकी पॉक्स को ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया था।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अफ्रीका के कई देश मंकीपॉक्स से प्रभावित हैं और यह व्यक्ति वहां से लौटा था, मंकीपॉक्स का कनेक्शन बंदर से जोड़ा जाता है, लेकिन चौंकाने वाली बात है कि यह 100 फीसदी अनिवार्य नहीं है कि इसका वायरस बंदर से ही फैले।

सीडीसी की रिपोर्ट कहती है, इसका वायरस संक्रमित मरीज की लार, पसीने और उसकी संक्रमित चीजों से स्वस्थ इंसान में फैल सकता है, यह इतना खतरनाक है कि, संक्रमित गर्भवती महिला से उसके बच्चे में भी यह वायरस पहुंच सकता है।

संक्रमित मरीज में इसके लक्षण दिखने में 1 से 4 दिन लग सकते हैं, बुखार, मांसपेशियों में दर्द, ठंड लगना, दाने, सूजी हुई लिम्फनोड जैसे लक्षण दिखते हैं. कुछ मामलों मेंं सांस लेने में दिक्कत भी होती है। लेकिन अब तक ऐसे मामले सामने नहीं सामने आए हैं कि किसी शख्स में लक्षण न दिख रहे हों और उससे दूसरे लोगों में यह फैला हो, यह जानवरों से इंसान में फैल सकता है. अफ्रीकी देशों में इसके कई मामले सामने आ चुके हैं।

WHO का कहना है कि, अफ्रीकी देशों में इसके कई ऐसे मामले सामने आए हैं जबकि इनके फैलने की वजह का पता नहीं लगाया जा सका है, अलग-अलग देशों की सरकार इमरजेंसी रेस्पॉन्स के जरिए इन पर नजर रख रही है, हालांकि, कई देश ऐसे भी हैं जहां इस बीमारी के प्रति लोगों में जागरुकता न होने के कारण इसके मामले फैले और सामने आए हैं।

Kolkata Rape-Murder Case: सीसीटीवी फुटेज पर उठे सवाल, सुनवाई के दौरान CJI ने क्या-क्या पूछा ?

सौम्या केसरवानी | navpravah.com

नई दिल्ली | कोलकाता के केआरजी मेडिकल कालेज के केस पर सुप्रीम कोर्ट में आज दोबारा बेंच बैठी थी, सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ के नेतृत्व में बेंच ने कोलकाता सरकार के वकील कपिल सिब्बल से कई सवाल पूछे, सुप्रीम कोर्ट ने ममता सरकार एफआईआर देर में दर्ज करने पर भी सवाल पूछा।

सीबीआई ने कोलकाता सरकार से जनरल डायरी और उसपर एंट्री को लेकर भी सवाल किया था, व दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद शीर्ष अदालत ने सुनवाई 17 सिंतबर के लिए मुकर्रर कर दी है, इसके साथ ही सीजेआई ने सीबीआई को अगले हफ्ते 17 सितंबर को नई स्टेटस रिपोर्ट सौंपने को कहा है।

सुनवाई के बाद सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा कि, हम सोमवार तक एक स्टेटस रिपोर्ट चाहते हैं, सीबीआई को अपनी जांच के आधार पर आगे बढ़ने दें, सीबीआई द्वारा स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर दी गई है, और अभी आगे जांच चल रही है, इसलिए हम उन्हें एक हफ्ता और देते हैं।

इससे पहले 20 अगस्त को हुई सुनवाई में सर्वोच्च अदालत ने कोलकाता पुलिस और राज्य की आलोचना की थी, अदालत ने कहा था कि, आपने समय पर जांच नहीं की और भीड़ को अस्पताल में तोड़फोड़ करने की अनुमति दी थी।

क्या चिराग को ‘बैलेंस’ करने के लिए पशुपति पारस को बहुत बड़ी जिम्मेदारी देगी केंद्र सरकार?

इशिका गुप्ता | navpravah.com

नई दिल्ली| हाल के दिनों में केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने केंद्र सरकार के कुछ प्रमुख फैसलों पर खुलेआम सवाल उठाए हैं। उनके इन बयानों ने भाजपा को असहज कर दिया है, और अब ऐसा माना जा रहा है कि भाजपा उनके चाचा पशुपति पारस को महत्वपूर्ण भूमिका देकर चिराग पर नियंत्रण की योजना बना रही है।

पशुपति पारस, जो पिछले कुछ समय से राजनीति में हाशिए पर थे, उन्हें जल्द ही किसी राज्य का राज्यपाल या किसी केंद्रीय बोर्ड का अध्यक्ष बनाया जा सकता है। भाजपा अगर ऐसा करती है, तो पारस का राजनीतिक कद चिराग के बराबर होगा, जिससे भाजपा पारस के जरिए चिराग पर दबाव बनाए रख सकेगी।

चिराग पासवान ने हाल ही में वक्फ बिल और सरकारी नौकरियों में लैटरल एंट्री जैसे मुद्दों पर विरोध जताया था। इसके अलावा, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के अनुसूचित जाति और जनजाति कोटा में सब-कैटेगरी और क्रीमी लेयर को चिन्हित करने के फैसले का भी विरोध किया था।

इन कदमों से भाजपा असहज महसूस कर रही थी, और अब चिराग की बढ़ती दखलअंदाजी को नियंत्रित करने के लिए उनके चाचा पशुपति पारस को फिर से सक्रिय किया जा रहा है। भाजपा इस कदम से यह संदेश देना चाहती है कि चिराग पासवान केंद्र सरकार के फैसलों में ज्यादा हस्तक्षेप न करें।

हालांकि, पशुपति पारस पिछले कुछ महीनों से राजनीति में हाशिए पर थे, और 2024 लोकसभा चुनाव में एनडीए में होते हुए भी उन्हें बिहार में कोई सीट नहीं दी गई थी। इसके बावजूद, पारस एनडीए में बने हुए हैं, और अब उन्हें एक महत्वपूर्ण भूमिका मिलने की संभावना है, जिससे उनकी राजनीतिक स्थिति मजबूत हो सकती है।

योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट का लोकार्पण करने पहुँचे उपराष्ट्रपति धनखड़ ने क्यों कहा, “योगी जी की नज़र गिद्ध जैसी”

नृपेंद्र कुमार मौर्य | navpravah.com

नई दिल्ली | गोरखपुर में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सीएम योगी आदित्यनाथ की खूब तारीफ की। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, “वैसे तो योगी जी की नजर पैनी है, लेकिन मेरे मामले में उनकी नजर गिद्ध जैसी रही है।” धनखड़ ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी ने उनके बारे में इतनी रिसर्च की है, जितनी शायद उनके ससुर ने भी नहीं की होगी।

धनखड़ ने यह भी कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में लोग डर और असुरक्षा के माहौल में जी रहे थे। कानून-व्यवस्था कमजोर थी और आम आदमी परेशान था। यह बातें उन्होंने एक सैनिक स्कूल के उद्घाटन के अवसर पर कहीं, जो 176 करोड़ की लागत से तैयार किया गया है। इस मौके पर सीएम योगी भी उनके साथ मौजूद थे।

इस समारोह में दोनों ने स्कूल की शूटिंग रेंज में पिस्टल से निशाना भी साधा, जिसमें कई राउंड फायर किए गए। सीएम योगी ने स्कूल में रखे आधुनिक हथियारों और मशीनगनों का निरीक्षण भी किया। योगी जी ने अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति की शिक्षा की भी चर्चा की और बताया कि वे चित्तौड़गढ़ के सैनिक स्कूल में पढ़े थे, जो देश के शुरुआती पांच सैनिक स्कूलों में से एक है।

धनखड़ ने अपनी भावनाएं जाहिर करते हुए कहा कि जब सीएम योगी उन्हें इस कार्यक्रम के लिए आमंत्रित करने उनके आवास पर आए, तो वह बेहद भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि शिक्षा समाज में बदलाव का सबसे सशक्त माध्यम है, और इस कार्यक्रम का हिस्सा बनकर उन्होंने अपने जीवन का एक नया अध्याय जोड़ा है, जिसे वे कभी नहीं भूलेंगे।

उपराष्ट्रपति ने तीन महत्वपूर्ण बातों पर जोर दिया:

1. 2017 से पहले उत्तर प्रदेश डर और असुरक्षा में जी रहा था।
2. वे योगी आदित्यनाथ के आमंत्रण से बेहद भावुक हुए।
3. आज दुनिया में भारत की एक अलग पहचान है, और इसमें उत्तर प्रदेश की भी अहम भूमिका है।

PM मोदी का सम्मानित शिक्षकों से संवाद, बोले- स्थानीय लोककथाओं से सिखाएं भाषाएं-संस्कृति

सौम्या केसरवानी | navpravah.com

नई दिल्ली | पीएम मोदी ने शिक्षक दिवस के मौके पर शिक्षकों को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया है, पीएम ने कहा कि, इनोवेटिव तरीकों के जरिए प्रतिभाशाली शिक्षकों को सम्मान देने के प्रयास किए जा रहे हैं, उन्होंने शिक्षकों को देश के युवाओं को विकसित भारत के निर्माण के लिए तैयार करने की जिम्मेदारी दी है।

पीएम मोदी ने सुझाव दिया है कि, पुरस्कार पाने वाले शिक्षक सोशल मीडिया पर एक-दूसरे से जुड़ें और अपने ज्ञान को साझा करें ताकि हर कोई कुछ नया सीख सके और सब इसका लाभ उठा सकें, उन्होंने एनईपी के प्रभाव पर चर्चा और मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करने के महत्व के बारे में भी बात की।

एक निजी न्यूज एजेंसी के अनुसार, पीएम मोदी ने सुझाव दिया है कि, शिक्षक अपने छात्रों को विभिन्न भाषाओं में स्थानीय लोककथाएं सिखाएं ताकि वे कई भाषाएं सीख सकें और भारत की सांस्कृतिक विविधता और इतिहास के बारे में जान सकें।

पीएम ने कहा कि, शिक्षक अपने छात्रों को नजदीकी विश्वविद्यालयों में ले जाएं और खेल आयोजन दिखायें, क्योंकि यह अनुभव उनके सपनों को उड़ान दे सकता है, उन्होंने कहा कि शिक्षकों को युवाओं को न केवल शिक्षा के क्षेत्र में बल्कि जीवन की चुनौतियों से निपटने के लिए भी प्रोत्साहन देना चाहिए।

आपको बता दें कि, इस शिक्षक दिवस के मौके पर राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने देश भर में 82 शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया था, एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि इनमें स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के 50 शिक्षक, उच्च शिक्षा विभाग के 16 शिक्षक और केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के 16 शिक्षक शामिल थे।

कोलकाता रेप-मर्डर केस: 2 डॉक्टरों पर गिरी गाज, किए गए सस्पेंड, लगे हैं ये आरोप

इशिका गुप्ता | navpravah.com

नई दिल्ली | आरजी कर मेडिकल कॉलेज से जुड़ा बड़ा अपडेट सामने आया है। राज्य चिकित्सा परिषद ने डॉ बिरुपाक्ष विश्वास और डॉ अभिक डे को निलंबित कर दिया है। इन दोनों डॉक्टरों पर आरोप है कि वे विभिन्न मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में दादागिरी चला रहे थे। यह भी आरोप है कि अभिक डे को 9 अगस्त को आरजी कर मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में देखा गया था।

डॉ संदीप घोष का रजिस्ट्रेशन रद्द करने की मांग-

दूसरी ओर, डॉक्टरों ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल डॉ संदीप घोष का रजिस्ट्रेशन रद्द करने की मांग की है। डॉ संदीप घोष को 72 घंटे के अंदर जवाब देना है। उचित जवाब नहीं मिलने पर संदीप घोष का लाइसेंस रद्द किया जा सकता है।

हाल ही में हॉस्पिटल पर ED ने कसा शिकंजा-

हाल ही में ये खबर सामने आई थी कि आरजी कर अस्पताल में करप्शन के मामले में ED ने भी शिकंजा कसना शरू कर दिया है। कोलकाता में ED की टीम ने शुक्रवार सुबह-सुबह कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। इसमें आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष और उनके करीबियों पर छापेमारी की गई थी। कोलकाता में ED की टीम ने 6 जगहों पर छापेमारी की कार्रवाई की थी। इसमें मुख्य रूप से संदीप घोष और उसके सहयोगियों के ठिकानों पर छापेमारी की जा रही थी। अस्पताल के डाटा एंट्री ऑपरेटर प्रसून चटर्जी पर भी ED ने कार्रवाई की थी।

ईडी की टीम ने संदीप घोष के करीबी कौशिक कोले, प्रसून चटर्जी, बिल्पब सिंह के घर छापेमारी की थी। बता दें कि संदीप घोष और बिप्लब सिंह सहित कुल चार लोगों को सीबीआई पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। कौशिक कोले, संदीप घोष का करीबी बताया जा रहा है। फिलहाल हावड़ा, सोनारपुर (दक्षिण 24 पेज) समेत अन्य जगहों पर ईडी की छापेमारी की गई। आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष पर करप्शन और कई अन्य अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। सीबीआई पहले से इस मामले की जांच कर रही है।

जज्बे को सलाम, बॉर्डर पर गंवा दिए थे पैर, अब पैरालंपिक में बढ़ाया देश की शान, जानें कौन हैं होकाटो होतोजे सेमा?

इशिका गुप्ता| navpravah.com

नई दिल्ली | जज्बे को सलाम! एक सैनिक जिसने बॉर्डर पर देश के लिए अपने पैर खो दिया और अब देश के लिए पैराओलिंपिक्स में पदक भी ले आया। होकाटो होतोझे सेमा ने पैरालंपिक में देश का सिर गर्व से ऊंचा किया है। 40 वर्षीय होकाटो ने पेरिस पैरालंपिक 2024 में मेंस शॉट पुट F57 इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है। 14.65 मीटर का थ्रो करके उन्होंने इस इवेंट में तीसरा स्थान हासिल किया और देश के लिए 27वां पदक लाया।

होकाटो होतोझे सेमा कौन हैं?

पेरिस पैरालंपिक में मेडल जीतने के बाद से होकाटो सुर्खियों में हैं, और हर कोई उनके बारे में जानना चाहता है।

होकाटो की उम्र 40 साल है और वह नागालैंड से हैं। उनका जन्म 24 दिसंबर 1983 को एक साधारण परिवार में हुआ था।

होकाटो होतोझे सेमा के पिता एक किसान हैं और उनके चार बच्चे हैं, जिसमें होकाटो उनकी दूसरी संतान हैं। दिलचस्प बात यह है कि होकाटो ने महज 17 साल की उम्र में भारतीय सेना को जॉइन कर लिया था। बचपन से ही देश के प्रति उनके मन में गहरी लगन और जज्बा था, जिसकी वजह से उन्होंने सेना में शामिल होने का फैसला किया।

हालांकि, उनकी उम्मीदों को बड़ा झटका तब लगा जब 14 अक्टूबर, 2002 को एक काउंटर घुसपैठ ऑपरेशन के दौरान LOC पर एक माइन विस्फोट के चलते वे गंभीर रूप से घायल हो गए। इस हादसे में होकाटो को अपना बायां पैर गंवाना पड़ा।

इतने बड़े हादसे के बाद, जब लोग अक्सर अपने आप को खो बैठते हैं, होकाटो ने इतिहास रच दिया है। गंभीर चोट के बावजूद, उन्होंने एथलीट बनने के लिए अथक मेहनत की और अब उसके परिणाम देखने को मिल रहे हैं। होकाटो ने शॉट पुट F57 वर्ग की प्रतिस्पर्धा में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया है।

योगी आदित्यनाथ के संसद में रोने से लेकर यूपी में एन्सेफलाइटिस के खात्मे तक की कहानी

नृपेन्द्र कुमार मौर्य | navpravah.com

नई दिल्ली | एक समय था जब पूर्वांचल के बच्चे गर्मी और बारिश के मौसम का नाम सुनकर कांप जाते थे। एन्सेफलाइटिस नाम की यह जानलेवा बीमारी हर साल उनके दरवाजे पर मौत बनकर दस्तक देती थी। सैकड़ों मासूम अपनी जान गंवा देते थे और हजारों ज़िंदगी भर के लिए अपंग हो जाते थे। 1996 से योगी आदित्यनाथ इस बीमारी के खिलाफ जंग छेड़ चुके थे, लेकिन उनकी लड़ाई उस समय निर्णायक मोड़ पर पहुंची, जब 2017 में उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

मुख्यमंत्री बनने के बाद, उन्होंने एन्सेफलाइटिस को मिटाने का बीड़ा उठाया और इसे एक मिशन के रूप में लिया। उनके अथक प्रयासों ने धीरे-धीरे स्थिति को बदलना शुरू किया। जो बीमारी कभी प्रदेश के कोनों में तबाही मचाती थी, आज अपने अंतिम दिन गिन रही है। योगी जी के प्रयासों का कभी मज़ाक भी उड़ाया गया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। आज एन्सेफलाइटिस लगभग समाप्ति के कगार पर है, और बस इसकी आधिकारिक घोषणा बाकी है।

इस साल फरवरी में जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर के बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन करने पहुंचे, तो उनका भाषण लोगों के दिलों को छू गया। उन्होंने याद किया, “1970 के दशक से लेकर 2017 तक एन्सेफलाइटिस जैसी भयंकर बीमारी को खत्म करने के बारे में किसी ने सोचा तक नहीं। जब मैंने मुख्यमंत्री का पद संभाला, तो इस बीमारी से निजात पाने के लिए एक मॉडल तैयार करने पर काम शुरू किया।”

योगी जी ने आगे बताया कि कैसे उन्होंने कुशीनगर के मुसहर समुदाय के बीच जाकर स्वच्छता अभियान चलाया, जहां उन्होंने लोगों को साफ-सफाई के महत्व के बारे में बताया और साबुन के इस्तेमाल की जानकारी दी। लेकिन इसके लिए उनका तीन दिनों तक मीडिया ट्रायल चला और उनका मजाक बनाया गया कि एक मुख्यमंत्री साबुन बांट रहा है।

उन्होंने कहा, “तब लोग हंसते थे, लेकिन जब कोरोना आया, तब सबको स्वच्छता और साबुन की अहमियत समझ में आई।”


मुख्यमंत्री बनने के बाद, योगी आदित्यनाथ ने एन्सेफलाइटिस जैसी घातक बीमारी के खिलाफ एक समर्पित लड़ाई शुरू की, जो पूर्वांचल के जिलों में हर साल मानसून के दौरान तबाही मचाती थी। हर मानसून से पहले, उन्होंने वेक्टर बॉर्न और वाटर बॉर्न बीमारियों के खिलाफ एक विशेष अभियान की शुरुआत की, जिसे ‘दस्तक अभियान’ के नाम से जाना गया। इसके तहत लोगों को एन्सेफलाइटिस से बचने के उपाय सिखाए गए, और यह संदेश गांव-गांव तक पहुंचाया गया कि इस बीमारी को हराया जा सकता है।

एक समय था जब पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिले, यहां तक कि बिहार और नेपाल के मरीज भी एन्सेफलाइटिस के इलाज के लिए गोरखपुर के बाबा राघव दास (बीआरडी) मेडिकल कॉलेज का रुख करते थे। तब हर साल 1200 से 1500 बच्चे इस बीमारी का शिकार होकर अपनी जान गंवा देते थे। लेकिन 2017 में मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद, योगी आदित्यनाथ ने इस समस्या की जड़ पर प्रहार करने का फैसला किया। उन्होंने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एन्सेफलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर स्थापित करने के निर्देश दिए ताकि मरीजों को शुरुआती स्तर पर ही इलाज मिल सके।

उन्होंने बीआरडी मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था को भी सुदृढ़ किया, जो एन्सेफलाइटिस से जुड़ी मौतों के लिए बदनाम हो चुका था। यहां एक समर्पित एन्सेफलाइटिस हॉस्पिटल और ब्लॉक बनाए गए। साथ ही, हर जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से लेकर जिला अस्पतालों तक एन्सेफलाइटिस के वार्ड बनाए गए और वहां डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई।

इस क्रांतिकारी कदम का असर साफ दिखा। धीरे-धीरे जापानी एन्सेफलाइटिस और एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम के मरीजों की संख्या में गिरावट आने लगी, क्योंकि प्राथमिक स्तर पर ही उन्हें इलाज मिल रहा था।

उत्तर प्रदेश ने 2017 में एक और भयानक दिन देखा, जब गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन सप्लाई बाधित होने से 67 बच्चों की मौत हो गई। इस त्रासदी ने पूरे देश को झकझोर दिया, लेकिन योगी सरकार ने इसे सुधार का एक महत्वपूर्ण अवसर मानकर बीआरडी की व्यवस्था को फिर से खड़ा किया, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

2005 में गोरखपुर जिले में एन्सेफलाइटिस का सबसे भयावह रूप सामने आया। उस साल, 6061 बच्चे इस बीमारी की चपेट में आए और उनमें से 1500 मासूमों ने अपनी जान गंवा दी। यह एक ऐसी त्रासदी थी जिसने पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया। इसके बाद, 2006 में 2320 मामले दर्ज हुए और 528 बच्चों की मौत हुई, वहीं 2007 में 3024 मामलों के साथ 645 मौतें हुईं।

इन दर्दनाक आंकड़ों ने सरकार को मजबूर किया कि इस बीमारी से निपटने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। 2006 में जापानी एन्सेफलाइटिस के खिलाफ टीकाकरण कार्यक्रम शुरू किया गया, जो बाद में 2014 में राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम का हिस्सा बन गया। इस कार्यक्रम के तहत उन 9 राज्यों के 179 जिलों में टीके उपलब्ध कराए गए, जहां एन्सेफलाइटिस का खतरा सबसे ज्यादा था।

यह बीमारी मुख्य रूप से बच्चों और युवाओं को अपना शिकार बनाती है, जो इसे और भी भयावह बना देती है। लेकिन टीकाकरण कार्यक्रम की शुरुआत ने एक नई उम्मीद जगाई, और धीरे-धीरे यह बीमारी काबू में आने लगी।


एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (AES) से पीड़ित व्यक्ति को तेज़ बुखार और मानसिक भ्रम से लेकर कोमा तक की गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्याएं हो सकती हैं। वहीं, जापानी एन्सेफलाइटिस एक मच्छर जनित वायरल संक्रमण है, जो मच्छरों के काटने से इंसानों में फैलता है और घोड़ों व सुअरों को भी संक्रमित कर सकता है। खासकर बच्चों पर इसका खतरा अधिक होता है, जिसे स्थानीय भाषा में ‘दिमागी बुखार’ कहा जाता है। गंदगी, जलजमाव और अशुद्ध पानी इसके प्रसार के मुख्य कारण हैं।

योगी आदित्यनाथ, जब गोरखपुर के सांसद थे, तबसे इस बीमारी के उन्मूलन के प्रति गंभीर रहे हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद, उन्होंने इसके खिलाफ व्यापक अभियान चलाया, जिसके सकारात्मक परिणाम अब दिखने लगे हैं।

जबलपुर में टला बड़ा रेल हादसा, सोमनाथ एक्सप्रेस के दो डिब्बे पटरी से उतरे

सौम्या केसरवानी | navpravah.com

नई दिल्ली | आज सुबह मध्य प्रदेश के जबलपुर में सोमनाथ एक्सप्रेस के दो डिब्बे पटरी से उतरने से हड़कंप मच गया। हादसे के समय गाड़ी स्टेशन से करीब 200 मीटर की दूर पर थी, हादसे के बाद अधिकारियों ने बताया कि इंदौर-जबलपुर एक्सप्रेस ट्रेन लगभग ‘डेड स्टॉप स्पीड’ पर पटरी से उतर गई थी।

पश्चिम मध्य रेलवे के सीपीआरओ हर्षित श्रीवास्तव ने इस हादसे पर कहा कि, ‘ट्रेन इंदौर से आ रही थी। जब वह जबलपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 6 की ओर जा रही थी, तो ट्रेन धीरे-धीरे चल रही थी और 2 डिब्बे पटरी से उतर गए, लेकिन रह अच्छा है कि सभी यात्री सुरक्षित हैं।’

बता दें कि ओवरनाइट एक्सप्रेस लगभग 5:30 बजे प्लेटफॉर्म 6 पर आने वाली थी, जैसे ही इंजन प्लेटफॉर्म 6 के पॉइंट से मुड़ा, अचानक से तेज आवाज आई और इंजन के पीछे लगा एसएलआर और एसी कोच के पहिए पटरी से उतर गए, इस हादसे में किसी को कुछ हुआ नहीं लेकिन एसी कोच के कई यात्री लड़खड़ा गए थे।

एक यात्री संदीप कुमार ने बताया कि वह कोच में आराम कर रहे थे, इसी दौरान कुछ इस तरह के झटके लगे जैसे बहुत तेजी से ब्रेक लगा हो। कुछ समझ में आता, तब तक ट्रेन खड़ी हो चुकी थी। कुछ देर बाद जब कोच से उतरकर बाहर देखा तो दो डिब्बे पटरी से उतरे हुए थे।

जम्मू कश्मीर : अमित शाह ने जारी किया संकल्प पत्र, जानिए क्या हैं भाजपा के 25 संकल्प?

इशिका गुप्ता | navpravah.com

नई दिल्ली | केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी का संकल्प पत्र (घोषणा पत्र) जारी किया. जम्मू में जारी किए गए इस घोषणा पत्र में बीजेपी ने अपने 25 संकल्प जाहिर किए हैं. अमित शाह ने इस मौके पर कहा कि, आजादी के समय से ही हमारी पार्टी के लिए जम्मू-कश्मीर का ये भूभाग बहुत महत्वपूर्ण रहा है और आजादी के समय से ही हमने इस भूभाग को हमेशा भारत के साथ जोड़े रखने के लिए प्रयास किए. पंडित प्रेमनाथ डोगरा से लेकर श्यामा प्रसाद मुखर्जी की शहादत तक… ये पूरा संघर्ष पहले भारतीय जनसंघ और फिर भारतीय जनता पार्टी ने आगे बढ़ाया. क्योंकि हमारी पार्टी मानती है कि जम्मू-कश्मीर हमेशा से भारत का हिस्सा है और रहेगा.

अमित शाह ने कहा कि, ”धारा 370 और 35ए… अब पास्ट बन चुका है, वो हमारे संविधान का हिस्सा नहीं है. इसका पूरा भारत और जम्मू-कश्मीर की जनता को आनंद है, क्योंकि धारा 370 ही वो कड़ी थी जो कश्मीर के अंदर युवाओं को उनके हाथ में पत्थर और हथियार पकड़ाती थी. आज मोदी जी के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर में विकास के क्षेत्र में ढेर सारे काम हुए हैं.”

राज्य मैक्सिमम टेररिज्म से, मैक्सिमम टूरिज्म की ओर शिफ्ट

उन्होंने कहा कि, 2014 से 2024 का ये कालखंड… जब जम्मू-कश्मीर और भारत का इतिहास लिखा जाएगा, जम्मू-कश्मीर को स्वर्णिम अक्षरों से अंकित किया जाएगा. ये 10 साल… जम्मू-कश्मीर के लिए शांति और विकास के रहे हैं, सुशासन के रहे हैं. इस 10 साल में यह राज्य मैक्सिमम टेररिज्म से, मैक्सिमम टूरिज्म की ओर शिफ्ट हुआ है.

उन्होंने कहा कि, पहले यहां डेमोक्रेसी तीन परिवारों में ही सीमित होकर रह गई थी. ना पंचायत चुनाव होते थे, ना तहसील पंचायतें बनती थीं, ना जिला पंचायतें होती थीं. भाजपा की सरकार ने ग्राम पंचायत, तहसील पंचायत, जिला पंचायत और म्युनिसपाल्टी का चुनाव कराकर पंचायती राज को बहाल करने का काम किया है और लोकतंत्र को प्रस्थापित किया है.

बीजेपी के घोषणा पत्र में 25 संकल्प

जम्मू-कश्मीर के लिए भाजपा की ओर से जारी किए गए संकल्प पत्र में 25 संकल्प शामिल हैं. इसमें कहा गया है कि अटल आवास योजना के माध्यम से भूमिहीन लाभार्थियों को जमीन का मुफ्त आवंटन किया जाएगा एवं वृद्धावस्था, विधवा व विकलांगता पेंशन को तीन गुना बढ़ाया जाएगा. हिंदू मंदिरों और धार्मिक स्थलों का पुनर्निर्माण और जीर्णोद्धार किया जाएगा. बिजली और पानी सहित सभी मूलभूत सुविधाओं का विकास किया जाएगा. टेररिस्ट हॉटस्पॉट से राज्य को टूरिस्ट स्पॉट बनाया जाएगा.