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Monday, September 7, 2026
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देश भर में बढ़ते रेल हादसे: दुर्घटना या साज़िश ?

नृपेंद्र कुमार मौर्य | navpravah.com

नई दिल्ली | देश भर में ट्रेनों को निशाना बनाने की घटनाएँ लगातार सामने आ रही हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक और ऐसा मामला सामने आया, जहां कालिंदी एक्सप्रेस ट्रेन को पटरी पर रखे गए सिलेंडर से टकराने की साजिश की गई। रविवार, 8 सितंबर 2024 को, भिवानी से प्रयागराज जा रही कालिंदी एक्सप्रेस (14723) कानपुर के अनवरगंज-कासगंज रूट पर सिलेंडर से टकराई, लेकिन ड्राइवर की सूझबूझ से बड़ी दुर्घटना टल गई। ट्रेन के लोको पायलट ने अचानक पटरी पर संदिग्ध वस्तु देखी और आपातकालीन ब्रेक लगाए, जिससे ट्रेन वहीं रुक गई। इस हादसे में कोई जान-माल का नुकसान नहीं हुआ।

मौके पर पहुँची पुलिस ने जाँच के दौरान ट्रेन के पास से एक एलपीजी सिलेंडर, पेट्रोल की बोतल और माचिस बरामद की। इसके अलावा, एक झोला भी मिला जिसमें बारूद होने की आशंका जताई जा रही थी। पुलिस और RPF की जाँच के बाद ट्रेन को आगे के लिए रवाना किया गया था। इस घटना की विस्तृत जाँच के लिए फॉरेंसिक टीम को भी मौके पर बुलाया गया।

कानपुर में कानून व्यवस्था के एसीपी हरीश चंदर ने बताया कि पटरी पर संदिग्ध वस्तु दिखाई देने पर ट्रेन चालक ने तुरंत ब्रेक लगाया, जिससे ट्रेन सिलेंडर से टकरा गई। इसके बाद पुलिस को सूचित किया गया और मौके पर आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई। पुलिस इस मामले की गंभीरता से जाँच कर रही है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

यह घटना एक गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि हाल के दिनों में कई ऐसी घटनाएँ सामने आई हैं, जहाँ ट्रेनों को जानबूझकर पलटने की साजिश रची गई थी। कुछ समय पहले कानपुर में ही साबरमती एक्सप्रेस के साथ भी ऐसा हादसा हुआ था, जिसमें ट्रेन पटरी से उतर गई थी। ऐसी घटनाओं से रेलवे और यात्रियों की सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया है।

सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि इन घटनाओं के पीछे पाकिस्तान में मौजूद आतंकवादी फरहतुल्लाह गोरी का हाथ हो सकता है, जो भारतीय इन्फ्रास्ट्रक्चर और ट्रेनों को निशाना बनाने की साजिश रच रहा है। गोरी ने अपने स्लीपर सेल को देशभर में हमला करने का निर्देश दिया है।

7 सेकंड में ज़मींदोज़ हुआ भिलाई में अवैध रूप से बना मजार

इशिका गुप्ता| navpravah.com

नई दिल्ली | छत्तीसगढ़ के भिलाई नगर में सोमवार को प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए शहर की जमीन पर बने अवैध मजार पर बुलडोजर चला दिया। जानकारी के अनुसार वह मजार अवैध रूप से करबला कमेटी के द्वारा बनाया गया था।

निगम में करोड़ों रुपए की जमीन पर बने अवैध मजार, दुकानों, शादी घरों को ध्वस्त कर दिया गया है। इसमें शहर के अफसरों का कहना है कि जो भी गैर धार्मिक कब्जा है उसे ध्वस्त किया जाएगा, और कार्रवाई करने से पहले इन्हीं नोटिस भी दिया गया था जिस पर कोई जवाब नहीं मिला और इसीलिए यह बुलडोजर कार्रवाई हुई। वहीं दूसरी ओर करबला कमेटी ने अवैध कब्जे का विरोध किया और कहा कि यह कब्जा नहीं है। उनका कहना है कि यह कब्जा सैलानी दरबार के नाम पर है।

इस अवैध कब्जे को लेकर हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की गई थी और दुर्ग के कलेक्टर को 120 दिनों में निर्णय लेने का समय दिया गया था।

इसके उपरांत नगर आयुक्त ने कब्जेधारक को तीन दिन पहले ही जमीन खाली करने का नोटिस दिया था एवं समय पर ना कार्य करने पर ही यह बुलडोजर कार्रवाई की गई।

‘मंगेश यादव इतना बड़ा लुटेरा होता तो टूटे-फूटे मकान में ना रहते’, बहन ने बताई कहानी

इशिका गुप्ता| navpravah.com

नई दिल्ली | सुल्तानपुर एनकाउंटर मामले में मंगेश यादव के परिवार ने आरोप लगाया है कि एनकाउंटर फर्जी था। परिवारवालों का कहना है कि पुलिस ने मंगेश को 2 सितंबर की रात उनके घर से उठाया था। उन्होंने बताया कि पुलिस ने उन्हें बताया कि मंगेश को पूछताछ के लिए ले जाया जा रहा है और एक-दो दिन में छोड़ दिया जाएगा। लेकिन 5 सितंबर को पुलिस ने मंगेश का फर्जी एनकाउंटर कर दिया। मंगेश की बहन ने भी कहा कि अगर मंगेश सच में बड़ा अपराधी होता, तो वह टूटे-फूटे मकान में नहीं रहता।

सुल्तानपुर डकैती कांड के आरोपी मंगेश यादव के एनकाउंटर ने गंभीर विवाद पैदा कर दिया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी जैसे बड़े नेताओं ने इस एनकाउंटर पर सवाल उठाए हैं। मंगेश यादव के परिवार का भी कहना है कि एनकाउंटर फर्जी था। उनके अनुसार, पुलिस ने मंगेश को 2 सितंबर की रात उनके घर से उठाया और कहा कि उसे पूछताछ के लिए ले जाया जा रहा है, और एक-दो दिन में छोड़ दिया जाएगा। लेकिन 5 सितंबर को उसका फर्जी एनकाउंटर कर दिया गया।

जौनपुर के बक्सा थाना क्षेत्र के अगरौरा गांव की निवासी मंगेश यादव की छोटी बहन प्रिंसी का कहना है कि उसके भाई ने 28 अगस्त को वारदात के दिन अपनी फीस जमा करने के लिए स्कूल जाना था। चूंकि वह फीस कार्ड ले जाना भूल गया था, इसलिए उस दिन फीस जमा नहीं हो पाई। प्रिंसी के मुताबिक, उसका भाई सुबह 9 बजे से लेकर दोपहर 2 बजे तक उसके साथ ही था, इसलिए वह घटना को अंजाम नहीं दे सकता था। प्रिंसी ने यह भी कहा कि अगर उनका भाई सच में अपराधी होता, तो वे टूटे-फूटे मकान में नहीं रहते और घर में एक बाइक तक नहीं होती। प्रिंसी ने बताया कि सोमवार की रात लगभग 2 बजे पुलिस वाले उनके घर आए, मंगेश को पूछताछ के लिए ले गए, घर की तलाशी ली, उसे दो तमाचे मारे और घरवालों को धमकाया। इसके बाद गुरुवार की सुबह एनकाउंटर की खबर आई।

मंगेश यादव के पिता राकेश यादव, जो गुजरात में ट्रक ड्राइवरी करते हैं, ने कहा है कि उनका बेटा जुलाई में करीब 7 महीने बाद गुजरात से लौटा था। राकेश ने सवाल उठाया कि अगर मंगेश वास्तव में बड़ा अपराधी होता, तो उनके पास ऐसा घर नहीं होता। उन्होंने कहा कि लूट या डकैती के बाद कोई भी अपराधी अपने ही घर में रात नहीं बिताता। राकेश ने यह भी कहा कि जब पुलिस ने मंगेश को सही-सलामत घर से उठाया था, तो उसके बाद एनकाउंटर कैसे हुआ? उन्होंने आरोप लगाया कि हर दिन नई कहानी बनाई जा रही है और अब उन्हें सीबीआई जांच की उम्मीद है।

सुल्तानपुर में सर्राफा कारोबारी की दुकान से दिनदहाड़े हुई करोड़ों की लूट के मामले में, एसटीएफ ने 5 अगस्त को मंगेश यादव को एनकाउंटर में मार गिराया था। इस एनकाउंटर पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा कि लगता है सुल्तानपुर की डकैती में शामिल लोगों के सत्ता पक्ष से गहरे संबंध थे, इसलिए मुख्य आरोपी को नकली एनकाउंटर से पहले संपर्क करके सरेंडर कराया गया और अन्य संदिग्ध लोगों को केवल दिखावटी गोली मारी गई। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि जाति के आधार पर जान ली गई।

भारत में मंकीपॉक्स के मामले ने बढ़ाई चिंता, जानिए इसके क्या हैं लक्षण ?

सौम्या केसरवानी | navpravah.com

नई दिल्ली | भारत में मंकी पॉक्स ने दस्तक दे दी है। यहां अभी मंकीपॉक्स का एक केस मिला है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि विदेश से लौटे एक शख्स में एमपॉक्स के लक्षण पाए गए हैं। उसे अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में रखा गया है यह पता लगाया जा रहा है कि संदिग्ध मरीज के संपर्क में कौन-कौन लोग आए हैं, उसकी ट्रैवल हिस्ट्री भी निकाली जा रही है।

उन्होंने कहा कि यह एक चिंता का विषय है, लेकिन इससे निपटने के लिए कार्य किए जा रहे हैं। शनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल भी पूर मामले को देख रही है। WHO ने 14 अगस्त को मंकी पॉक्स को ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया था।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अफ्रीका के कई देश मंकीपॉक्स से प्रभावित हैं और यह व्यक्ति वहां से लौटा था, मंकीपॉक्स का कनेक्शन बंदर से जोड़ा जाता है, लेकिन चौंकाने वाली बात है कि यह 100 फीसदी अनिवार्य नहीं है कि इसका वायरस बंदर से ही फैले।

सीडीसी की रिपोर्ट कहती है, इसका वायरस संक्रमित मरीज की लार, पसीने और उसकी संक्रमित चीजों से स्वस्थ इंसान में फैल सकता है, यह इतना खतरनाक है कि, संक्रमित गर्भवती महिला से उसके बच्चे में भी यह वायरस पहुंच सकता है।

संक्रमित मरीज में इसके लक्षण दिखने में 1 से 4 दिन लग सकते हैं, बुखार, मांसपेशियों में दर्द, ठंड लगना, दाने, सूजी हुई लिम्फनोड जैसे लक्षण दिखते हैं. कुछ मामलों मेंं सांस लेने में दिक्कत भी होती है। लेकिन अब तक ऐसे मामले सामने नहीं सामने आए हैं कि किसी शख्स में लक्षण न दिख रहे हों और उससे दूसरे लोगों में यह फैला हो, यह जानवरों से इंसान में फैल सकता है. अफ्रीकी देशों में इसके कई मामले सामने आ चुके हैं।

WHO का कहना है कि, अफ्रीकी देशों में इसके कई ऐसे मामले सामने आए हैं जबकि इनके फैलने की वजह का पता नहीं लगाया जा सका है, अलग-अलग देशों की सरकार इमरजेंसी रेस्पॉन्स के जरिए इन पर नजर रख रही है, हालांकि, कई देश ऐसे भी हैं जहां इस बीमारी के प्रति लोगों में जागरुकता न होने के कारण इसके मामले फैले और सामने आए हैं।

Kolkata Rape-Murder Case: सीसीटीवी फुटेज पर उठे सवाल, सुनवाई के दौरान CJI ने क्या-क्या पूछा ?

सौम्या केसरवानी | navpravah.com

नई दिल्ली | कोलकाता के केआरजी मेडिकल कालेज के केस पर सुप्रीम कोर्ट में आज दोबारा बेंच बैठी थी, सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ के नेतृत्व में बेंच ने कोलकाता सरकार के वकील कपिल सिब्बल से कई सवाल पूछे, सुप्रीम कोर्ट ने ममता सरकार एफआईआर देर में दर्ज करने पर भी सवाल पूछा।

सीबीआई ने कोलकाता सरकार से जनरल डायरी और उसपर एंट्री को लेकर भी सवाल किया था, व दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद शीर्ष अदालत ने सुनवाई 17 सिंतबर के लिए मुकर्रर कर दी है, इसके साथ ही सीजेआई ने सीबीआई को अगले हफ्ते 17 सितंबर को नई स्टेटस रिपोर्ट सौंपने को कहा है।

सुनवाई के बाद सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा कि, हम सोमवार तक एक स्टेटस रिपोर्ट चाहते हैं, सीबीआई को अपनी जांच के आधार पर आगे बढ़ने दें, सीबीआई द्वारा स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर दी गई है, और अभी आगे जांच चल रही है, इसलिए हम उन्हें एक हफ्ता और देते हैं।

इससे पहले 20 अगस्त को हुई सुनवाई में सर्वोच्च अदालत ने कोलकाता पुलिस और राज्य की आलोचना की थी, अदालत ने कहा था कि, आपने समय पर जांच नहीं की और भीड़ को अस्पताल में तोड़फोड़ करने की अनुमति दी थी।

क्या चिराग को ‘बैलेंस’ करने के लिए पशुपति पारस को बहुत बड़ी जिम्मेदारी देगी केंद्र सरकार?

इशिका गुप्ता | navpravah.com

नई दिल्ली| हाल के दिनों में केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने केंद्र सरकार के कुछ प्रमुख फैसलों पर खुलेआम सवाल उठाए हैं। उनके इन बयानों ने भाजपा को असहज कर दिया है, और अब ऐसा माना जा रहा है कि भाजपा उनके चाचा पशुपति पारस को महत्वपूर्ण भूमिका देकर चिराग पर नियंत्रण की योजना बना रही है।

पशुपति पारस, जो पिछले कुछ समय से राजनीति में हाशिए पर थे, उन्हें जल्द ही किसी राज्य का राज्यपाल या किसी केंद्रीय बोर्ड का अध्यक्ष बनाया जा सकता है। भाजपा अगर ऐसा करती है, तो पारस का राजनीतिक कद चिराग के बराबर होगा, जिससे भाजपा पारस के जरिए चिराग पर दबाव बनाए रख सकेगी।

चिराग पासवान ने हाल ही में वक्फ बिल और सरकारी नौकरियों में लैटरल एंट्री जैसे मुद्दों पर विरोध जताया था। इसके अलावा, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के अनुसूचित जाति और जनजाति कोटा में सब-कैटेगरी और क्रीमी लेयर को चिन्हित करने के फैसले का भी विरोध किया था।

इन कदमों से भाजपा असहज महसूस कर रही थी, और अब चिराग की बढ़ती दखलअंदाजी को नियंत्रित करने के लिए उनके चाचा पशुपति पारस को फिर से सक्रिय किया जा रहा है। भाजपा इस कदम से यह संदेश देना चाहती है कि चिराग पासवान केंद्र सरकार के फैसलों में ज्यादा हस्तक्षेप न करें।

हालांकि, पशुपति पारस पिछले कुछ महीनों से राजनीति में हाशिए पर थे, और 2024 लोकसभा चुनाव में एनडीए में होते हुए भी उन्हें बिहार में कोई सीट नहीं दी गई थी। इसके बावजूद, पारस एनडीए में बने हुए हैं, और अब उन्हें एक महत्वपूर्ण भूमिका मिलने की संभावना है, जिससे उनकी राजनीतिक स्थिति मजबूत हो सकती है।

योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट का लोकार्पण करने पहुँचे उपराष्ट्रपति धनखड़ ने क्यों कहा, “योगी जी की नज़र गिद्ध जैसी”

नृपेंद्र कुमार मौर्य | navpravah.com

नई दिल्ली | गोरखपुर में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सीएम योगी आदित्यनाथ की खूब तारीफ की। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, “वैसे तो योगी जी की नजर पैनी है, लेकिन मेरे मामले में उनकी नजर गिद्ध जैसी रही है।” धनखड़ ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी ने उनके बारे में इतनी रिसर्च की है, जितनी शायद उनके ससुर ने भी नहीं की होगी।

धनखड़ ने यह भी कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में लोग डर और असुरक्षा के माहौल में जी रहे थे। कानून-व्यवस्था कमजोर थी और आम आदमी परेशान था। यह बातें उन्होंने एक सैनिक स्कूल के उद्घाटन के अवसर पर कहीं, जो 176 करोड़ की लागत से तैयार किया गया है। इस मौके पर सीएम योगी भी उनके साथ मौजूद थे।

इस समारोह में दोनों ने स्कूल की शूटिंग रेंज में पिस्टल से निशाना भी साधा, जिसमें कई राउंड फायर किए गए। सीएम योगी ने स्कूल में रखे आधुनिक हथियारों और मशीनगनों का निरीक्षण भी किया। योगी जी ने अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति की शिक्षा की भी चर्चा की और बताया कि वे चित्तौड़गढ़ के सैनिक स्कूल में पढ़े थे, जो देश के शुरुआती पांच सैनिक स्कूलों में से एक है।

धनखड़ ने अपनी भावनाएं जाहिर करते हुए कहा कि जब सीएम योगी उन्हें इस कार्यक्रम के लिए आमंत्रित करने उनके आवास पर आए, तो वह बेहद भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि शिक्षा समाज में बदलाव का सबसे सशक्त माध्यम है, और इस कार्यक्रम का हिस्सा बनकर उन्होंने अपने जीवन का एक नया अध्याय जोड़ा है, जिसे वे कभी नहीं भूलेंगे।

उपराष्ट्रपति ने तीन महत्वपूर्ण बातों पर जोर दिया:

1. 2017 से पहले उत्तर प्रदेश डर और असुरक्षा में जी रहा था।
2. वे योगी आदित्यनाथ के आमंत्रण से बेहद भावुक हुए।
3. आज दुनिया में भारत की एक अलग पहचान है, और इसमें उत्तर प्रदेश की भी अहम भूमिका है।

PM मोदी का सम्मानित शिक्षकों से संवाद, बोले- स्थानीय लोककथाओं से सिखाएं भाषाएं-संस्कृति

सौम्या केसरवानी | navpravah.com

नई दिल्ली | पीएम मोदी ने शिक्षक दिवस के मौके पर शिक्षकों को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया है, पीएम ने कहा कि, इनोवेटिव तरीकों के जरिए प्रतिभाशाली शिक्षकों को सम्मान देने के प्रयास किए जा रहे हैं, उन्होंने शिक्षकों को देश के युवाओं को विकसित भारत के निर्माण के लिए तैयार करने की जिम्मेदारी दी है।

पीएम मोदी ने सुझाव दिया है कि, पुरस्कार पाने वाले शिक्षक सोशल मीडिया पर एक-दूसरे से जुड़ें और अपने ज्ञान को साझा करें ताकि हर कोई कुछ नया सीख सके और सब इसका लाभ उठा सकें, उन्होंने एनईपी के प्रभाव पर चर्चा और मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करने के महत्व के बारे में भी बात की।

एक निजी न्यूज एजेंसी के अनुसार, पीएम मोदी ने सुझाव दिया है कि, शिक्षक अपने छात्रों को विभिन्न भाषाओं में स्थानीय लोककथाएं सिखाएं ताकि वे कई भाषाएं सीख सकें और भारत की सांस्कृतिक विविधता और इतिहास के बारे में जान सकें।

पीएम ने कहा कि, शिक्षक अपने छात्रों को नजदीकी विश्वविद्यालयों में ले जाएं और खेल आयोजन दिखायें, क्योंकि यह अनुभव उनके सपनों को उड़ान दे सकता है, उन्होंने कहा कि शिक्षकों को युवाओं को न केवल शिक्षा के क्षेत्र में बल्कि जीवन की चुनौतियों से निपटने के लिए भी प्रोत्साहन देना चाहिए।

आपको बता दें कि, इस शिक्षक दिवस के मौके पर राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने देश भर में 82 शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया था, एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि इनमें स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के 50 शिक्षक, उच्च शिक्षा विभाग के 16 शिक्षक और केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के 16 शिक्षक शामिल थे।

कोलकाता रेप-मर्डर केस: 2 डॉक्टरों पर गिरी गाज, किए गए सस्पेंड, लगे हैं ये आरोप

इशिका गुप्ता | navpravah.com

नई दिल्ली | आरजी कर मेडिकल कॉलेज से जुड़ा बड़ा अपडेट सामने आया है। राज्य चिकित्सा परिषद ने डॉ बिरुपाक्ष विश्वास और डॉ अभिक डे को निलंबित कर दिया है। इन दोनों डॉक्टरों पर आरोप है कि वे विभिन्न मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में दादागिरी चला रहे थे। यह भी आरोप है कि अभिक डे को 9 अगस्त को आरजी कर मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में देखा गया था।

डॉ संदीप घोष का रजिस्ट्रेशन रद्द करने की मांग-

दूसरी ओर, डॉक्टरों ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल डॉ संदीप घोष का रजिस्ट्रेशन रद्द करने की मांग की है। डॉ संदीप घोष को 72 घंटे के अंदर जवाब देना है। उचित जवाब नहीं मिलने पर संदीप घोष का लाइसेंस रद्द किया जा सकता है।

हाल ही में हॉस्पिटल पर ED ने कसा शिकंजा-

हाल ही में ये खबर सामने आई थी कि आरजी कर अस्पताल में करप्शन के मामले में ED ने भी शिकंजा कसना शरू कर दिया है। कोलकाता में ED की टीम ने शुक्रवार सुबह-सुबह कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। इसमें आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष और उनके करीबियों पर छापेमारी की गई थी। कोलकाता में ED की टीम ने 6 जगहों पर छापेमारी की कार्रवाई की थी। इसमें मुख्य रूप से संदीप घोष और उसके सहयोगियों के ठिकानों पर छापेमारी की जा रही थी। अस्पताल के डाटा एंट्री ऑपरेटर प्रसून चटर्जी पर भी ED ने कार्रवाई की थी।

ईडी की टीम ने संदीप घोष के करीबी कौशिक कोले, प्रसून चटर्जी, बिल्पब सिंह के घर छापेमारी की थी। बता दें कि संदीप घोष और बिप्लब सिंह सहित कुल चार लोगों को सीबीआई पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। कौशिक कोले, संदीप घोष का करीबी बताया जा रहा है। फिलहाल हावड़ा, सोनारपुर (दक्षिण 24 पेज) समेत अन्य जगहों पर ईडी की छापेमारी की गई। आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष पर करप्शन और कई अन्य अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। सीबीआई पहले से इस मामले की जांच कर रही है।

जज्बे को सलाम, बॉर्डर पर गंवा दिए थे पैर, अब पैरालंपिक में बढ़ाया देश की शान, जानें कौन हैं होकाटो होतोजे सेमा?

इशिका गुप्ता| navpravah.com

नई दिल्ली | जज्बे को सलाम! एक सैनिक जिसने बॉर्डर पर देश के लिए अपने पैर खो दिया और अब देश के लिए पैराओलिंपिक्स में पदक भी ले आया। होकाटो होतोझे सेमा ने पैरालंपिक में देश का सिर गर्व से ऊंचा किया है। 40 वर्षीय होकाटो ने पेरिस पैरालंपिक 2024 में मेंस शॉट पुट F57 इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है। 14.65 मीटर का थ्रो करके उन्होंने इस इवेंट में तीसरा स्थान हासिल किया और देश के लिए 27वां पदक लाया।

होकाटो होतोझे सेमा कौन हैं?

पेरिस पैरालंपिक में मेडल जीतने के बाद से होकाटो सुर्खियों में हैं, और हर कोई उनके बारे में जानना चाहता है।

होकाटो की उम्र 40 साल है और वह नागालैंड से हैं। उनका जन्म 24 दिसंबर 1983 को एक साधारण परिवार में हुआ था।

होकाटो होतोझे सेमा के पिता एक किसान हैं और उनके चार बच्चे हैं, जिसमें होकाटो उनकी दूसरी संतान हैं। दिलचस्प बात यह है कि होकाटो ने महज 17 साल की उम्र में भारतीय सेना को जॉइन कर लिया था। बचपन से ही देश के प्रति उनके मन में गहरी लगन और जज्बा था, जिसकी वजह से उन्होंने सेना में शामिल होने का फैसला किया।

हालांकि, उनकी उम्मीदों को बड़ा झटका तब लगा जब 14 अक्टूबर, 2002 को एक काउंटर घुसपैठ ऑपरेशन के दौरान LOC पर एक माइन विस्फोट के चलते वे गंभीर रूप से घायल हो गए। इस हादसे में होकाटो को अपना बायां पैर गंवाना पड़ा।

इतने बड़े हादसे के बाद, जब लोग अक्सर अपने आप को खो बैठते हैं, होकाटो ने इतिहास रच दिया है। गंभीर चोट के बावजूद, उन्होंने एथलीट बनने के लिए अथक मेहनत की और अब उसके परिणाम देखने को मिल रहे हैं। होकाटो ने शॉट पुट F57 वर्ग की प्रतिस्पर्धा में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया है।