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Thursday, July 30, 2026
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भारत विरोधी इल्हान उमर से मिले राहुल गाँधी, सवालों के घेरे में कॉंग्रेस के प्रिंस

नृपेंद्र कुमार मौर्य | navpravah.com

नई दिल्ली | राहुल गांधी, कांग्रेस के प्रमुख नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष, हाल ही में तीन दिवसीय अमेरिकी दौरे पर थे। इस दौरे में उनके कुछ बयानों ने भारत में भारी विवाद पैदा किया, खासकर सिख समुदाय और जातिगत आरक्षण पर की गई टिप्पणियों को लेकर। हालांकि, सबसे ज्यादा चर्चा उस मुलाकात की हो रही है, जिसमें उन्होंने अमेरिकी सांसद इल्हान उमर से मुलाकात की, जो अपने भारत-विरोधी रुख के लिए जानी जाती हैं।

इल्हान उमर ने पहले भी भारत के खिलाफ बयान दिए हैं, खालिस्तान के समर्थन में खड़ी रही हैं और भारत के अल्पसंख्यकों के मुद्दों को उठाया है। इस मुलाकात ने भारत में खासकर बीजेपी के नेताओं के बीच तीखी आलोचना को जन्म दिया है।

बीजेपी के प्रवक्ता और अन्य नेताओं ने सवाल उठाए कि राहुल गांधी ने इस मुलाकात को क्यों चुना, जब इल्हान उमर का रिकॉर्ड भारत के खिलाफ इतना स्पष्ट है। बीजेपी ने इसे राहुल के भारत विरोधी तत्वों के साथ खड़े होने के रूप में देखा है। इस मुलाकात को लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं, जहां कई लोग राहुल के निर्णय पर सवाल उठा रहे हैं।

राहुल गांधी की अंतरराष्ट्रीय यात्राओं और उनकी मुलाकातों को लेकर पहले भी कई बार विवाद हुए हैं। जॉर्ज सोरोस, जो एक अमेरिकी व्यापारी हैं और हिंडनबर्ग की रिपोर्ट्स में शामिल थे, के साथ उनके कथित संबंधों पर भी सवाल उठाए गए थे। सोरोस पर भारत के खिलाफ काम करने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करने का आरोप भी लगाया गया था। राहुल गांधी की सोरोस की सहयोगी सुनीता विश्वनाथ से मुलाकात ने भी उन्हें आलोचनाओं के घेरे में खड़ा किया था।

इसके अलावा, राहुल गांधी के एक भाषण ने भी विवाद को और गहरा कर दिया। उन्होंने एक प्रवासी भारतीय सम्मेलन में सिखों के उत्पीड़न पर बात की, जहां उन्होंने कहा कि आरएसएस और बीजेपी सिखों को उनकी धार्मिक पहचान की वजह से दबाती हैं। यह बयान खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू द्वारा सराहा गया, जिसने इसे खालिस्तान की मांग के पक्ष में देखा।

राहुल गांधी के इन बयानों और मुलाकातों ने न केवल उनके विरोधियों को बल्कि उनके समर्थकों को भी असमंजस में डाल दिया है।

क्या होता है QR कोड और कैसे करता है काम ?

नृपेंद्र कुमार मौर्य | navpravah.com

नई दिल्ली | 15 अप्रैल 1912 की रात, एक विशाल जहाज, जिसे “अनसिंकेबल” यानी “कभी न डूबने वाला” माना गया था, ने अपने आखिरी संदेश के रूप में एक वायरलेस कोड भेजा: तीन डॉट, तीन डैश, फिर तीन डॉट्स। यह था SOS। यह जहाज था टाइटैनिक, वही जो एक आइसबर्ग से टकराकर डूब गया था। इस हादसे में कई लोग मारे गए थे, लेकिन कुछ की जान बच गई, सिर्फ उस SOS के जरिए। आसपास के जहाजों ने उस संदेश को रिसीव किया और तुरंत टाइटैनिक की ओर बढ़े।

यह वायरलेस कोड, जिसे मोर्स कोड कहा जाता है, उस रात तो सिर्फ जिंदगी बचाने के काम आया, लेकिन आने वाले समय में इसे युद्ध और संचार के कई और मौकों पर भी इस्तेमाल किया गया। फिर, एक और मोड़ आया जब इस कोडिंग की तकनीक ने एक और क्षेत्र में कदम रखा – अर्थव्यवस्था।

बार कोड से QR कोड तक का सफर-

1950 के दशक तक, अमेरिका में सुपरमार्केट्स में लंबी-लंबी लाइनें लगने लगीं। ग्राहकों को तेज सेवा देने के लिए बिलिंग काउंटर पर नई तकनीक की ज़रूरत महसूस हुई। तब 1952 में जोई वुडलैंड नामक एक अमेरिकी इंजीनियर ने मोर्स कोड की मदद से बार कोड का आविष्कार किया। यह मोटी और पतली लाइनों का एक अनोखा संयोजन था, जो हर प्रोडक्ट को एक विशेष कोड देता था। लेकिन जैसे-जैसे व्यापार का दायरा बढ़ा, यह सिस्टम भी धीमा और सीमित साबित हुआ।

1994 में बार कोड से ज्यादा क्षमता वाले QR कोड का अविष्कार हुआ। यह स्कैनिंग के जरिए क्विक और ज्यादा जानकारी को समेट सकता था। अब, QR कोड हमारी जिंदगी का ऐसा हिस्सा बन गया है, जिसे हम शायद हर दिन देखते और इस्तेमाल करते हैं।

QR कोड कैसे काम करता है ?

QR कोड का मतलब है ‘क्विक रिस्पांस कोड’, यानी ऐसा कोड जो तुरन्त प्रतिक्रिया दे। यह तकनीक दो मुख्य हिस्सों में बंटी होती है: स्ट्रक्चर और डेटा कोडिंग।

1. QR कोड का स्ट्रक्चर-

कल्पना कीजिए कि आप शतरंज खेल रहे हैं। चेस बोर्ड की तरह ही, QR कोड छोटे-छोटे ब्लॉक्स में बंटा होता है। इन ब्लॉक्स की अनूठी स्थिति डेटा को स्टोर करती है। जैसे कि शतरंज में हर मोहरा एक निश्चित जगह पर होता है, वैसे ही QR कोड में हर लाइन और डॉट्स का एक यूनिक अरेंजमेंट होता है। इनकी पोज़िशन ही वह जानकारी है जिसे स्कैनर पढ़ता है।

2. डेटा कोडिंग और डिकोडिंग-

QR कोड में डेटा को एनकोड करने के लिए एक निश्चित पैटर्न का इस्तेमाल किया जाता है। जब आप इसे स्कैन करते हैं, तो यह डेटा डिकोड हो जाता है और आपको जरूरी जानकारी तुरंत मिल जाती है। इसके लिए दो प्रकार की स्कैनिंग तकनीक होती है: एक लेजर स्कैनर और दूसरी कैमरा इंटीग्रेटेड QR रीडर।

QR कोड और बार कोड में फर्क-

बार कोड और QR कोड में सबसे बड़ा फर्क उनकी बनावट का होता है। बार कोड में लाइनों का सीधा पैटर्न होता है और इसे केवल एक दिशा में, यानी लेफ्ट से राइट पढ़ा जा सकता है। जबकि QR कोड को किसी भी दिशा में स्कैन किया जा सकता है। इसका आकार स्क्वायर होता है और इसकी बनावट बहुत जटिल होती है, जिससे यह अधिक जानकारी को स्टोर कर सकता है। उदाहरण के लिए, जहां एक बार कोड में सिर्फ 20 अंकों की जानकारी स्टोर की जा सकती है, वही QR कोड में 7,089 नंबर तक स्टोर किए जा सकते हैं।


QR कोड और सिक्योरिटी-

हालांकि QR कोड हमारे जीवन को आसान बनाता है, लेकिन इसके साथ सिक्योरिटी रिस्क भी जुड़े होते हैं। हैकर्स नकली QR कोड बनाकर फिशिंग के जरिए लोगों के बैंक डिटेल्स चुराते हैं। इसलिए, QR कोड का इस्तेमाल करते वक्त हमें सचेत रहना चाहिए।

तो, QR कोड जैसी तकनीक हमें रोजमर्रा के कामों में सुविधा देती है, लेकिन हमें इसके जोखिमों से भी बचकर रहना चाहिए।

मणिपुर: बेक़ाबू हुआ छात्रों का प्रदर्शन, तीन ज़िलों में कर्फ़्यू

इशिका गुप्ता| navpravah.com

नई दिल्ली | मणिपुर में छात्रों के प्रदर्शन लगातार बढ़ रहे हैं, जिसकी वजह से मणिपुर के तीन जिलों में कर्फ्यू लागू कर दिया गया है। शांति बहाली की मांग को लेकर लगातार मणिपुर के इंफाल में प्रदर्शन हो रहा है जिसकी वजह से राज्य के तीन जिलों में कर्फ्यू लागू किया गया।

मणिपुर के थौबल में (BNSS)भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 (2) के तहत लागू कर दी गई है जबकि इंफाल के पूर्व और पश्चिम क्षेत्र में लोगों को घरों से बाहर निकलने के लिए अनिश्चितकालीन रूप से मना कर दिया गया है।

जिलाधिकारी द्वारा आदेश दिया गया है कि जिले में कानून व्यवस्था बिगड़ने के कारण कर्फ्यू में जो छूट दी गई थी उससे संबंधित पूर्व आदेश को तत्काल प्रभाव से 10 सितंबर को 11:00 बजे ही रद्द कर दिया गया हैं, इसे देखते हुए अगले आदेश तक तत्काल प्रभाव से इंफाल के पूर्वी जिले में पूर्ण कर्फ्यू लागू किया गया है ।

छात्रों द्वारा मांगों को लेकर हो रहा प्रदर्शन-

राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति को नहीं संभाल पाने का आरोप छात्र डीजीपी और सुरक्षा सलाहकार को दे रहे हैं। दूसरी और थौबल में कर्फ्यू लागू होने के कारण पांच या उसे अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर रोक है क्योंकि पुलिस दावा कर रही थी कि सोमवार को प्रदर्शनकारी छात्रों में से किसी एक छात्र ने गोली चलाई है जिससे एक पुलिसकर्मी को चोट पहुंची है। इस दौरान अलग अलग स्कूलों और कॉलेज के सैकड़ो छात्रों ने इंफाल के ख्वाईरामबंद महिला बाजार में लगाए गए शिविर में अपनी रात बिताई।

छात्र नेता द्वारा दिया गया 24 घंटे का समय-

छात्र नेता चौधरी विक्टर सिंह के अनुसार, उन्होंने राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य से अपनी छह मांगों पर जवाब देने के लिए 24 घंटे का समय दिया है, समय सीमा समाप्त होने के बाद ही वें अपनी कार्रवाई के बारे में फैसला करेंगे।

सोमवार को लगभग हजारों छात्रों ने मणिपुर के राज भवन और सचिवालय के सामने विरोध प्रदर्शन किया था और हाल ही में हुए ड्रोन एवं मिसाइल हमलों के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी और राज्य की प्रशासनिक अखंडता और क्षेत्र की सुरक्षा की मांग की। हाल ही में हुए हिंसक घटनाओं में से आठ लोगों की मौत की खबर मिली है और 12 से अधिक लोग घायल है।

Young Entrepreneurs Conclave: देश के युवा उद्यमियों को एक मंच पर ला रही ‘राजनीति की पाठशाला’

न्यूज़ डेस्क | navpravah.com

नई दिल्ली | राजनीति की पाठशाला द्वारा 26 सितंबर 2024 को नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में यंग एंटरप्रेन्योर कॉन्क्लेव का आयोजन किया जाएगा। इस कॉन्क्लेव में देश के युवा उद्यमियों को सम्मानित भी किया जाएगा। इस मंच के माध्यम से देश के युवा उद्यमी अपने सक्सेस मंत्र देश को सुनाएंगे।

ये कॉन्क्लेव दो सत्रों में आयोजित होगा। इसमें देश के केंद्रीय मंत्री, सांसद, ब्यूरोक्रेट्स और सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के अलावा कॉर्पोरेट इंडस्ट्री के तमाम नामचीन लोग भी शामिल होंगे। इस कॉन्क्लेव में युवा उद्यमी देश के सामने अपनी बातें भी रखेंगे कि किस तरह युवा देश की प्रगति में अपना योगदान दे रहे हैं और ऐसा क्या किया जाए कि देश की प्रगति और भी तेज़ गति से हो।

संस्था के फाउंडर डॉ. अजय पांडेय ने बताया कि संस्था भविष्य में भी ऐसे आयोजन करती रहेगी ताकि जो दिन रात देश को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं, उन्हें प्रोत्साहित किया जा सके। उन्होंने कहा कि देश के विकास के लिए ज़रूरी है कि युवाओं की बात सुनी जाए उनकी समस्याओं का समाधान किया जाए। हमारे कार्यक्रम में कई ऐसे ज़िम्मेदार लोग भी सम्मिलित होंगे, जो युवा उद्यमियों की बात सरकार तक पहुँचाएँगे ताकि उन्हें बल मिल सके और देश का विकास अबाध गति से हो।

पूर्व गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने क्यों कहा, “कश्मीर के लाल चौक जाने में मेरी ‘फऽ$’ थी ?

नृपेंद्र कुमार मौर्य | navpravah.com

नई दिल्ली | पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने सोमवार को खुलासा किया कि अपने मंत्री कार्यकाल के दौरान जम्मू-कश्मीर के लाल चौक पर जाते समय उन्हें डर लगता था। अपने संस्मरण ‘राजनीति में पांच दशक’ के विमोचन के अवसर पर शिंदे ने 2012 में घाटी की अपनी यात्रा को याद किया. उन्होंने कहा, “गृह मंत्री बनने से पहले मैं उनसे (शिक्षाविद विजय धर) मिलने गया था। मैं उनसे सलाह मांगता था। उन्होंने मुझे सलाह दी कि मैं इधर-उधर न घूमूं, बल्कि श्रीनगर में लाल चौक पर जाऊं, लोगों से मिलूं और डल झील घूमूं।”

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री शिंदे ने आगे कहा, उस सलाह से मुझे प्रसिद्धि मिली और लोगों को लगा कि यहां एक गृह मंत्री है जो बिना किसी डर के वहां जाता है, लेकिन मेरी फटती थी वो किसको बताऊं? (लेकिन मैं किसे बताऊं कि मैं डर गया था?) मैंने आपको हंसाने के लिए यह कहा था, लेकिन एक पूर्व पुलिस वाला इस तरह नहीं बोल सकता…”

शिंदे के इस बयान के बाद पूरा हॉल ठहाके मारकर हंसने लगा। हालांकि इसके बाद शिंदे ने कहा कि यह सिर्फ आपको हंसाने के लिए कहा था, लेकिन एक पूर्व पुलिसकर्मी इस तरह नहीं बोल सकता। शिंदे ने ये बातें राशिद किदवई की किताब के विमोचन के मौके पर कहीं।

बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने साधा निशाना-

पूर्व गृहमंत्री के इस बयान पर बीजेपी ने निशाना साधा है। बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि कांग्रेस को शिंदे की बातों पर ध्यान देना चाहिए। यूपीए काल के गृहमंत्री सुशील शिंदे ने माना कि वह जम्मू-कश्मीर जाने से डरते थे।

पूनावाला ने कहा कि आज राहुल गांधी आराम से कश्मीर में भारत जोड़ो यात्रा और स्नो फाइटिंग करते दिखे! लेकिन नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस जम्मू-कश्मीर को आतंक के दिनों में वापस ले जाना चाहते हैं!

2012 में, जब मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे, उन्होंने सुशील कुमार शिंदे को भारत का गृह मंत्री नियुक्त किया। शिंदे ने पी. चिदंबरम के बाद यह महत्वपूर्ण पद संभाला। अपनी इस जिम्मेदारी के दौरान, उन्होंने एक यात्रा के तहत श्रीनगर का दौरा किया। इस दौरे में, शिंदे ने लाल चौक के बाजार में अपने परिवार के लिए कुछ यादगार चीजें खरीदीं। वे कश्मीर आर्ट्स के एक शोरूम में भी गए, जहां उन्होंने कश्मीरी शिल्प की खासियतों को नजदीक से देखा और सराहा। इस यात्रा में उस समय के जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी उनके साथ थे, जो उनका व्यक्तिगत रूप से स्वागत कर रहे थे।

श्रीनगर में शिंदे ने घंटाघर के नाम से मशहूर ‘क्लॉक टावर’ का भी दौरा किया। 1978 में बने इस ऐतिहासिक टावर का निर्माण शेख अब्दुल्ला की पहल पर हुआ था। यह टावर न केवल शहर का एक प्रमुख स्थल है, बल्कि इसका अपना एक जटिल इतिहास भी है। 2008 और 2010 में जब कश्मीर घाटी में प्रदर्शन हुए, तो इस टावर पर कई बार पाकिस्तानी झंडा फहराया गया था, जो उन तनावपूर्ण समयों की याद दिलाता है।

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव : राज्य में सपा और एनसीपी (शरद पवार) के बीच खटपट ?

सौम्या केसरवानी | navpravah.com

नई दिल्ली | महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव‌ नवंबर में होने की संभावना है, लेकिन चुनाव से पहले ही महाराष्ट्र में चुनावी उठक-पठक देखने को मिल रही है। महाविकास अघाड़ी और महायुति दोनों पूरे जोर शोर से चुनावी मैदान में उतरने को तैयार हैं, लेकिन इस बीच खबर आ रही है कि, शरद पवार की एनसीपी और समाजवादी पार्टी ने अपनी राहें अलग कर ली हैं।

दोनों पार्टियों की राहें अलग होने पर अलग-अलग नेता अपनी अलग-अलग प्रतिक्रियायें दे रहे हैं। इसी पर अबू आसिम आजमी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर ट्वीट किया है कि “बेशक, महाविकास आघाड़ी का नेतृत्व कर रहे शरद पवार के साथ समाजवादी पार्टी हमेशा रही है और आगे भी रहेगी। अब महाराष्ट्र की जनता महाविकास आघाड़ी को जनादेश देने जा रही है, जय हिंद, जय महाराष्ट्र‌।”

वहीं शरद पवार की पार्टी एनसीपी से विधायक जितेंद्र आव्हाड ने भी ट्वीट कर कहा कि, “कुछ लोग यहां अफवाह फैला रहे हैं कि समाजवादी पार्टी और एनसीपी अलग होने जा रहे हैं, लेकिन मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि एनसीपी और समाजवादी पार्टी दोनों एमवीए के बैनर तले चुनाव लड़ेंगे।”

जानकारी के अनुसार, महाविकास आघाडी में कांग्रेस, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना और शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) शामिल हैं। MVA में कांग्रेस ने 13 सीटें, शिवसेना ने 9 सीटें और NCP ने 8 सीटें जीतीं थी, वहीं महायुति में बीजेपी ने 9 सीटें, शिवसेना (शिंदे) ने 7 सीटें और NCP ने केवल 1 सीट जीती थी, यह मुकाबला कड़ा था जहां दोनों गठबंधनों को लगभग 44 प्रतिशत वोट मिले थे।

Gadget Review: IPhone 16 लेने से पहले पढ़ लें रिव्यू

इशिका गुप्ता| navapravah.com

नई दिल्ली | Apple ने हाल ही में अपने नए iPhone 16 सीरीज को लॉन्च किया है, जिसमें iPhone 16 और iPhone 16 Plus शामिल हैं। इस बार कंपनी ने इन फोन्स को एक नए डिजाइन के साथ पेश किया है और इनमें नया A18 प्रोसेसर भी शामिल है। इसके अलावा, iPhone 16 में Apple Intelligence फीचर भी मिलेगा, जो आपके काम को और भी आसान बना देगा। कंपनी ने प्राइवेसी पर भी खास ध्यान दिया है।

iPhone 16 के डिज़ाइन में कैमरा मॉड्यूल में बदलाव किया गया है और इसमें पिल-शेप्ड डिस्प्ले शामिल किया गया है। दोनों मॉडल्स में समान फीचर्स हैं, सिवाय बैटरी और डिस्प्ले साइज के। iPhone 16 में 6.1 इंच और iPhone 16 Plus में 6.7 इंच का डिस्प्ले मिलेगा, जिसकी ब्राइटनेस 2000 निट्स है। नए कैमरा कैप्चर बटन से आप एक क्लिक में कैमरा एक्सेस कर सकेंगे।

स्मार्टफोन में A18 चिपसेट है, जो डेस्कटॉप्स को भी चुनौती दे सकता है। इसके अलावा, इसमें बेहतर बैटरी लाइफ, प्राइवेट क्लाउड कंप्यूट और Apple Intelligence फीचर मिलेगा। कैमरा अपडेट के साथ, आप लैंडस्केप और वर्टिकल मोड में फोटोज क्लिक कर सकेंगे, और वीडियो रिकॉर्डिंग के लिए क्लिक और होल्ड विकल्प भी मिलेगा।

iPhone 16 और iPhone 16 Plus में 48MP का डुअल कैमरा सेटअप और 12MP का सेकंडरी लेंस होगा। साथ ही, True Depth फ्रंट कैमरा भी मिलेगा। भारत में सैटेलाइट कनेक्टिविटी फीचर उपलब्ध नहीं होगा, लेकिन आपको टाइप-सी चार्जिंग पोर्ट और वायरलेस चार्जिंग का भी लाभ मिलेगा।

iPhone 16 की कीमत 799 डॉलर (लगभग 67 हजार रुपये) से शुरू होगी, जबकि iPhone 16 Plus की कीमत 899 डॉलर (लगभग 75,500 रुपये) से शुरू होगी।

देश भर में बढ़ते रेल हादसे: दुर्घटना या साज़िश ?

नृपेंद्र कुमार मौर्य | navpravah.com

नई दिल्ली | देश भर में ट्रेनों को निशाना बनाने की घटनाएँ लगातार सामने आ रही हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक और ऐसा मामला सामने आया, जहां कालिंदी एक्सप्रेस ट्रेन को पटरी पर रखे गए सिलेंडर से टकराने की साजिश की गई। रविवार, 8 सितंबर 2024 को, भिवानी से प्रयागराज जा रही कालिंदी एक्सप्रेस (14723) कानपुर के अनवरगंज-कासगंज रूट पर सिलेंडर से टकराई, लेकिन ड्राइवर की सूझबूझ से बड़ी दुर्घटना टल गई। ट्रेन के लोको पायलट ने अचानक पटरी पर संदिग्ध वस्तु देखी और आपातकालीन ब्रेक लगाए, जिससे ट्रेन वहीं रुक गई। इस हादसे में कोई जान-माल का नुकसान नहीं हुआ।

मौके पर पहुँची पुलिस ने जाँच के दौरान ट्रेन के पास से एक एलपीजी सिलेंडर, पेट्रोल की बोतल और माचिस बरामद की। इसके अलावा, एक झोला भी मिला जिसमें बारूद होने की आशंका जताई जा रही थी। पुलिस और RPF की जाँच के बाद ट्रेन को आगे के लिए रवाना किया गया था। इस घटना की विस्तृत जाँच के लिए फॉरेंसिक टीम को भी मौके पर बुलाया गया।

कानपुर में कानून व्यवस्था के एसीपी हरीश चंदर ने बताया कि पटरी पर संदिग्ध वस्तु दिखाई देने पर ट्रेन चालक ने तुरंत ब्रेक लगाया, जिससे ट्रेन सिलेंडर से टकरा गई। इसके बाद पुलिस को सूचित किया गया और मौके पर आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई। पुलिस इस मामले की गंभीरता से जाँच कर रही है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

यह घटना एक गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि हाल के दिनों में कई ऐसी घटनाएँ सामने आई हैं, जहाँ ट्रेनों को जानबूझकर पलटने की साजिश रची गई थी। कुछ समय पहले कानपुर में ही साबरमती एक्सप्रेस के साथ भी ऐसा हादसा हुआ था, जिसमें ट्रेन पटरी से उतर गई थी। ऐसी घटनाओं से रेलवे और यात्रियों की सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया है।

सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि इन घटनाओं के पीछे पाकिस्तान में मौजूद आतंकवादी फरहतुल्लाह गोरी का हाथ हो सकता है, जो भारतीय इन्फ्रास्ट्रक्चर और ट्रेनों को निशाना बनाने की साजिश रच रहा है। गोरी ने अपने स्लीपर सेल को देशभर में हमला करने का निर्देश दिया है।

7 सेकंड में ज़मींदोज़ हुआ भिलाई में अवैध रूप से बना मजार

इशिका गुप्ता| navpravah.com

नई दिल्ली | छत्तीसगढ़ के भिलाई नगर में सोमवार को प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए शहर की जमीन पर बने अवैध मजार पर बुलडोजर चला दिया। जानकारी के अनुसार वह मजार अवैध रूप से करबला कमेटी के द्वारा बनाया गया था।

निगम में करोड़ों रुपए की जमीन पर बने अवैध मजार, दुकानों, शादी घरों को ध्वस्त कर दिया गया है। इसमें शहर के अफसरों का कहना है कि जो भी गैर धार्मिक कब्जा है उसे ध्वस्त किया जाएगा, और कार्रवाई करने से पहले इन्हीं नोटिस भी दिया गया था जिस पर कोई जवाब नहीं मिला और इसीलिए यह बुलडोजर कार्रवाई हुई। वहीं दूसरी ओर करबला कमेटी ने अवैध कब्जे का विरोध किया और कहा कि यह कब्जा नहीं है। उनका कहना है कि यह कब्जा सैलानी दरबार के नाम पर है।

इस अवैध कब्जे को लेकर हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की गई थी और दुर्ग के कलेक्टर को 120 दिनों में निर्णय लेने का समय दिया गया था।

इसके उपरांत नगर आयुक्त ने कब्जेधारक को तीन दिन पहले ही जमीन खाली करने का नोटिस दिया था एवं समय पर ना कार्य करने पर ही यह बुलडोजर कार्रवाई की गई।

‘मंगेश यादव इतना बड़ा लुटेरा होता तो टूटे-फूटे मकान में ना रहते’, बहन ने बताई कहानी

इशिका गुप्ता| navpravah.com

नई दिल्ली | सुल्तानपुर एनकाउंटर मामले में मंगेश यादव के परिवार ने आरोप लगाया है कि एनकाउंटर फर्जी था। परिवारवालों का कहना है कि पुलिस ने मंगेश को 2 सितंबर की रात उनके घर से उठाया था। उन्होंने बताया कि पुलिस ने उन्हें बताया कि मंगेश को पूछताछ के लिए ले जाया जा रहा है और एक-दो दिन में छोड़ दिया जाएगा। लेकिन 5 सितंबर को पुलिस ने मंगेश का फर्जी एनकाउंटर कर दिया। मंगेश की बहन ने भी कहा कि अगर मंगेश सच में बड़ा अपराधी होता, तो वह टूटे-फूटे मकान में नहीं रहता।

सुल्तानपुर डकैती कांड के आरोपी मंगेश यादव के एनकाउंटर ने गंभीर विवाद पैदा कर दिया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी जैसे बड़े नेताओं ने इस एनकाउंटर पर सवाल उठाए हैं। मंगेश यादव के परिवार का भी कहना है कि एनकाउंटर फर्जी था। उनके अनुसार, पुलिस ने मंगेश को 2 सितंबर की रात उनके घर से उठाया और कहा कि उसे पूछताछ के लिए ले जाया जा रहा है, और एक-दो दिन में छोड़ दिया जाएगा। लेकिन 5 सितंबर को उसका फर्जी एनकाउंटर कर दिया गया।

जौनपुर के बक्सा थाना क्षेत्र के अगरौरा गांव की निवासी मंगेश यादव की छोटी बहन प्रिंसी का कहना है कि उसके भाई ने 28 अगस्त को वारदात के दिन अपनी फीस जमा करने के लिए स्कूल जाना था। चूंकि वह फीस कार्ड ले जाना भूल गया था, इसलिए उस दिन फीस जमा नहीं हो पाई। प्रिंसी के मुताबिक, उसका भाई सुबह 9 बजे से लेकर दोपहर 2 बजे तक उसके साथ ही था, इसलिए वह घटना को अंजाम नहीं दे सकता था। प्रिंसी ने यह भी कहा कि अगर उनका भाई सच में अपराधी होता, तो वे टूटे-फूटे मकान में नहीं रहते और घर में एक बाइक तक नहीं होती। प्रिंसी ने बताया कि सोमवार की रात लगभग 2 बजे पुलिस वाले उनके घर आए, मंगेश को पूछताछ के लिए ले गए, घर की तलाशी ली, उसे दो तमाचे मारे और घरवालों को धमकाया। इसके बाद गुरुवार की सुबह एनकाउंटर की खबर आई।

मंगेश यादव के पिता राकेश यादव, जो गुजरात में ट्रक ड्राइवरी करते हैं, ने कहा है कि उनका बेटा जुलाई में करीब 7 महीने बाद गुजरात से लौटा था। राकेश ने सवाल उठाया कि अगर मंगेश वास्तव में बड़ा अपराधी होता, तो उनके पास ऐसा घर नहीं होता। उन्होंने कहा कि लूट या डकैती के बाद कोई भी अपराधी अपने ही घर में रात नहीं बिताता। राकेश ने यह भी कहा कि जब पुलिस ने मंगेश को सही-सलामत घर से उठाया था, तो उसके बाद एनकाउंटर कैसे हुआ? उन्होंने आरोप लगाया कि हर दिन नई कहानी बनाई जा रही है और अब उन्हें सीबीआई जांच की उम्मीद है।

सुल्तानपुर में सर्राफा कारोबारी की दुकान से दिनदहाड़े हुई करोड़ों की लूट के मामले में, एसटीएफ ने 5 अगस्त को मंगेश यादव को एनकाउंटर में मार गिराया था। इस एनकाउंटर पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा कि लगता है सुल्तानपुर की डकैती में शामिल लोगों के सत्ता पक्ष से गहरे संबंध थे, इसलिए मुख्य आरोपी को नकली एनकाउंटर से पहले संपर्क करके सरेंडर कराया गया और अन्य संदिग्ध लोगों को केवल दिखावटी गोली मारी गई। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि जाति के आधार पर जान ली गई।