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Monday, September 7, 2026
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आखिर ये ‘बीच की ऊँगली’ क्या बला है, जानिये क्या कहता है इतिहास?

नृपेंद्र कुमार मौर्य | navpravah.com

नई दिल्ली | हम सभी ने कभी न कभी तर्जनी उंगली की ताकत का अनुभव किया है। यह उंगली दिशा दिखाने, कुछ सिखाने या बस ध्यान आकर्षित करने के काम आती है। और छोटी उंगली, उसकी तो बात ही निराली है—कभी ‘चुप रहो’ का इशारा, कभी ‘मेरे पास आओ’।

फिर आती है वह उंगली, जो अक्सर विवादों में रहती हैबीच की उंगली। जब ये किसी को दिखाई जाती है, तो उसे अगला इंसान गाली समझता है; उसे देखते ही लोग ऑफेंड हो जाते हैं, बुरा मान जाते हैं. उंगली, जो अंग्रेजी की एक गाली बन गई है. मिडल फिंगर (middle finger), फ्लिपिंग द बर्ड (flipping the bird), भक यू (बूझे?) वगैरह-वगैरह भी कहा जाता है.

भाषा के साथ देह-भाषा भी विकसित होती है. कुछ मायने बदलते हैं, कुछ घटते-बढ़ते हैं. मगर बीच की उंगली के हक का सवाल है: ‘मैं ही क्यों?’ सिर्फ एक उंगली गाली कैसे बनी गाली? आइये जानते हैं इसका जवाब:

बीच की उंगली का इतिहास:

1415 का संघर्ष: एक कहानी यह कहती है कि 1415 में ब्रिटिश और फ्रेंच सैनिकों के बीच एक युद्ध हुआ। फ्रेंच सैनिकों ने अंग्रेजी आर्चरों की उंगलियां काटने का प्लान बनाया, ताकि वे तीर न चला सकें। लेकिन अंग्रेजों ने जीत हासिल की और फ्रेंच सैनिकों की तमन्ना पर पानी फिर गया तो उन्होंने बीच की उंगलियां दिखाकर फ्रेंच सैनिकों का मजाक उड़ाया। साथ में चिल्लाया – ‘प्लक यू (pluck yew)’. प्लक माने तरकश से तीर निकालना. कहा जाता है समय के साथ इसी प्लक का ‘प’ चुपके से किसी रोज ‘फ’ में बदल गया। यह कहानी थोड़ी मिक्स्ड लगती है, क्योंकि कई रिपोर्ट्स इसे सही नहीं मानतीं। फिर भी, यह कहानी यह दिखाती है कि कैसे एक इशारा भी इतिहास की धारा को बदल सकता है।

प्राचीन ग्रीस की कहानी: एक प्रसिद्ध घटना के अनुसार, डायॉजनीस ने डेमोस्थनीस (Demosthenes) नामक एक प्रसिद्ध ग्रीक राजनेता की आलोचना की थी। डेमोस्थनीस एक प्रभावशाली और लोकप्रिय वक्ता थे, जो अपने भाषणों के लिए प्रसिद्ध थे। डायॉजनीस ने उनके भाषणों की खामियों को उजागर करने के लिए एक अनोखा तरीका अपनाया।

एक दिन, जब डायॉजनीस सार्वजनिक रूप से डेमोस्थनीस की आलोचना कर रहे थे, उन्होंने अपने दर्शकों के सामने बीच की उंगली दिखाकर एक तुच्छ इशारा किया। उनका इशारा इस बात को दर्शाता था कि डेमोस्थनीस का प्रभाव और उनके भाषण कितने निम्नस्तरीय थे। यह इशारा, जो आज भी एक अपमानजनक इशारा माना जाता है, डायॉजनीस ने एक तरह से डेमोस्थनीस की प्रतिष्ठा को चुनौती देने और उनका मजाक उड़ाने के रूप में इस्तेमाल किया।

एक और कहानी:

यूनिवर्सिटी ऑफ एलिनॉइस के प्रोफेसर थॉमस कॉनले ने इस ‘प्राचीन बेइज्जती’ पर रिसर्च की है| वो बताते हैं कि एक प्राचीन रोमन इतिहासकार ने भी इस बारे में लिखा था| बताया था कि जर्मन जनजाति के लोगों ने कभी चढ़ाई कर रहे रोमन सैनिकों को बीच की उंगली दिखाने का तोहफा दिया था|

वहीं, इससे पहले प्राचीन ग्रीक लोग जननांग को दर्शाने के लिए इस उंगली का इस्तेमाल किया करते थे. ऐसा भी बताया जाता है|

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यूनिवर्सिटी ऑफ कांसस के प्रोफेसर ऐंथनी कॉरबेइल इसका नाता प्राचीन रोम से भी जोड़ते हैं| वो भी यही बताते हैं कि करीब 400 BC के आसपास प्राचीन रोम में इस उंगली को दिखाने का मतलब एक तरह से धमकी देना और जननांग की नकल दिखाने जैसा ही था| हालांकि, कहा ये भी जाता है कि एकदम सटीक ये बता पाना मुश्किल है. किस देश या समय में इस ‘उंगली का उदय’ हुआ|

बताए गए उदाहरणों से बीच की उंगली वाले मामले की जड़ों को, प्राचीन ग्रीस और रोम से जोड़कर देखा जा सकता है| जहां इसे जननांग की नकल और विरोध के तौर पर दिखाने की बातें सुनने मिलती हैं|

मिडल फिंगर की मनोवैज्ञानिक ध्वनि:

बीच की उंगली का अपमानजनक उपयोग एक सांस्कृतिक विरासत की तरह विकसित हुआ है। यह उंगली न केवल अपमान का प्रतीक है, बल्कि यह मानव की भावनाओं और सामाजिक रिवाजों का भी अंश है। जब हम इसे दिखाते हैं, तो यह अक्सर गुस्से, असहमति या तिरस्कार का इशारा होती है—यह पूरी तरह से व्यक्तिगत और सांस्कृतिक संदर्भ पर निर्भर करता है।

बीच की उंगली ने एक लंबे और विविध इतिहास को अपने साथ संजोया है। यह उंगली केवल एक इशारा नहीं है, बल्कि यह सदियों की सांस्कृतिक और सामाजिक जटिलताओं की गवाही देती है। जब भी आप इसे दिखाएं, सोचिए कि आप एक अद्वितीय और पुरानी परंपरा को निभा रहे हैं।

क्या आपने कभी सोचा है कि एक मासूम सी उंगली इतने गहरे अर्थ और भावनाओं की वाहक हो सकती है? यह दर्शाता है कि भाषा और सांस्कृतिक प्रतीक किस तरह से बदलते हैं और हमारे सामाजिक व्यवहार को आकार देते हैं।

अरविन्द केजरीवाल देंगे इस्तीफा, नए मुख्यमंत्री पर सस्पेंस!

इशिका गुप्ता| navpravah.com

नई दिल्ली | जेल से रिहाई के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने अपने समर्थकों के बीच जोश भरे अंदाज में संबोधन किया। उन्होंने पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं से बातचीत करते हुए बड़ा ऐलान किया कि दो दिन बाद वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे। उनका कहना था कि उन पर और मनीष सिसोदिया पर लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण उन्होंने यह निर्णय लिया है। केजरीवाल ने जनता से सीधा सवाल किया कि क्या वे उन्हें ईमानदार मानते हैं या नहीं।

अपने संबोधन में केजरीवाल ने कहा कि वे राजनीति में सिर्फ सत्ता के लिए नहीं, बल्कि ईमानदारी से देश की सेवा करने के लिए आए थे। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वे अब एक अग्निपरीक्षा के लिए तैयार हैं और जनता के निर्णय का सम्मान करेंगे। केजरीवाल का कहना था कि यदि जनता उन्हें ईमानदार मानती है, तो उन्हें फिर से वोट दे। उनका मुख्यमंत्री पद पर बने रहना या न रहना अब जनता के हाथ में है।

उन्होंने यह भी ऐलान किया कि आम आदमी पार्टी से ही कोई अन्य नेता मुख्यमंत्री बनेगा, लेकिन वे और मनीष सिसोदिया जनता की अदालत में जाएंगे। उनका कहना था कि अगर जनता उन्हें ईमानदार मानेगी, तो वे फिर से मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठेंगे। इसका सीधा मतलब था कि अरविंद केजरीवाल के इस्तीफे के बाद मनीष सिसोदिया भी मुख्यमंत्री नहीं बनेंगे।

केजरीवाल ने अपने संबोधन में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बीजेपी की साजिशें आम आदमी पार्टी के हौंसले को तोड़ नहीं पाईं। उनका कहना था कि जेल में भेजे जाने का असली मकसद भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि पार्टी और सरकार को तोड़ने की कोशिश थी। लेकिन उन्होंने साफ तौर पर कहा कि वे और उनकी पार्टी इससे कमजोर नहीं हुए हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि आम आदमी पार्टी ने देश की राजनीति को एक नई दिशा दी है। उनकी पार्टी ने ईमानदारी और पारदर्शिता के मुद्दे पर देश की राजनीति में बदलाव लाने का काम किया है। उनका कहना था कि विरोधियों ने उनकी पार्टी को तोड़ने की पूरी कोशिश की, लेकिन न तो वे और न ही पार्टी के विधायक और कार्यकर्ता इस दबाव के आगे झुके।

अंत में केजरीवाल ने कहा कि उनकी लड़ाई देश के लिए है, और वे इसे जारी रखेंगे। उन्हें सिर्फ अपने समर्थकों और जनता का साथ चाहिए। उन्होंने कहा कि एक क्रांतिकारी मुख्यमंत्री को जेल में डाला गया, लेकिन उनकी हिम्मत नहीं टूटी।

गाजियाबाद में यूरिन मिलाकर लोगों को पिलाए जूस: पब्लिक ने दुकानदारों को जमकर पीटा; तलाशी में बोतल में भरा मिला यूरिन

इशिका गुप्ता| navpravah.com

नई दिल्ली | गाजियाबाद से एक बेहद चौंकाने वाली खबर आई है। वहां के एक जूस विक्रेता पर आरोप है कि उसने जूस में पेशाब मिलाकर बेचा। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है और उसके स्टॉल से पेशाब भरा एक कंटेनर भी बरामद किया है। जूस विक्रेता और उसके 15 वर्षीय बेटे को गिरफ्तार कर लिया गया है, और पुलिस मामले की जांच कर रही है।

पुलिस ने शुक्रवार को गाजियाबाद में जूस विक्रेता आमिर के स्टॉल की तलाशी ली और वहां से पेशाब भरा एक प्लास्टिक कंटेनर बरामद किया।

एसीपी भास्कर वर्मा के अनुसार, आमिर से पूछताछ की गई लेकिन उसने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। इस मामले में उसके 15 वर्षीय बेटे को भी हिरासत में लिया गया है। ग्राहकों की लगातार शिकायतों के बाद पुलिस ने यह कार्रवाई की है और मामले की आगे की जांच की जा रही है।

हिंदी के साहित्यिक सितारे: कैसे दिनकर से लेकर विश्वास तक ने वैश्विक मंच पर हिंदी का परचम लहराया?

नृपेंद्र कुमार मौर्या | navpravah.com

नई दिल्ली | 14 सितंबर को हिंदी दिवस के अवसर पर हम हिंदी भाषा की समृद्धि और उसके वैश्विक प्रभाव की समीक्षा करते हैं। इस दिन को मनाने का उद्देश्य केवल हिंदी के महत्व को मान्यता देना नहीं है, बल्कि उन कवियों को भी सम्मानित करना है जिन्होंने हिंदी को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रतिष्ठित किया है। इस अवसर पर हम उन प्रमुख कवियों की चर्चा करेंगे जिन्होंने अपनी कविताओं के माध्यम से हिंदी को वैश्विक पहचान दिलाई|

1. रामधारी सिंह ‘दिनकर’: भारतीय राष्ट्रीयता की आवाज

हिंदी साहित्य के महान कवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ ने अपने लेखन के माध्यम से हिंदी को एक नई पहचान दी। उनकी रचनाएँ, जैसे कि ‘रश्मिरथी’, ‘संपूर्ण क्रांति’ और ‘कुरुक्षेत्र’, भारतीय सांस्कृतिक और राष्ट्रीय गर्व को दर्शाती हैं। दिनकर की कविताओं ने भारतीय समाज को जागरूक किया और हिंदी को एक सशक्त राष्ट्रीय भाषा के रूप में प्रस्तुत किया।

2. महादेवी वर्मा: संवेदनाओं की अनूठी कवि

महादेवी वर्मा ने हिंदी कविता को संवेदनशीलता और गहराई का एक नया आयाम दिया। उनकी रचनाएँ, जैसे कि ‘शिवाजी’ और ‘यामा’, न केवल हिंदी साहित्य में महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं, बल्कि विश्व साहित्य में भी उनकी पहचान बनाई है। उनकी कविताओं ने हिंदी को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर एक उच्च स्थान दिलाया।

3. सुमित्रानंदन पंत: प्रकृति और मानवता के कवि

सुमित्रानंदन पंत की कविताएँ हिंदी साहित्य में एक विशेष स्थान रखती हैं। उनके काम, जैसे कि ‘ग्रह’ और ‘रुदाली’, ने हिंदी कविता को न केवल भारतीय समाज में बल्कि अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक मंच पर भी प्रतिष्ठा दिलाई। पंत की रचनाएँ प्रकृति, मानवता और अध्यात्म की अद्भुत छवि प्रस्तुत करती हैं।

4. जयशंकर प्रसाद: शास्त्रीय और भावनात्मक गहराई के कवि

जयशंकर प्रसाद ने हिंदी साहित्य में एक नया अध्याय जोड़ा। उनकी रचनाएँ, जैसे कि ‘चंद्रगुप्त’ और ‘कानून’, शास्त्रीय और भावनात्मक गहराई की मिसाल हैं। उनकी कविताओं और नाटकों ने हिंदी को एक विशिष्ट पहचान दिलाई और इसे वैश्विक मंच पर सम्मानित किया।

5. कुमार विश्वास: आधुनिक हिंदी कविता का चमकता सितारा

कुमार विश्वास ने हिंदी कविता को एक नया जीवन और रंग दिया है। उनकी रचनाएँ, जैसे कि ‘हवा में उड़ता जाए’ और ‘कोई दीवाना कहता है’, ने हिंदी को एक आधुनिक स्वरूप प्रदान किया। कुमार विश्वास के काव्य पाठ और लाइव प्रदर्शन ने हिंदी को न केवल भारत में बल्कि दुनियाभर में लोकप्रिय बनाया है। उनकी कविताओं में प्रेम, जीवन और सामाजिक मुद्दों पर उनकी विशिष्ट दृष्टि ने हिंदी को एक नई पहचान दिलाई और इसे वैश्विक दर्शकों के बीच प्रसारित किया।

इन कवियों के योगदान से हिंदी भाषा ने एक अद्वितीय पहचान बनाई है। हिंदी दिवस पर हम इन साहित्यकारों की रचनाओं को सादर नमन करते हैं और उनके द्वारा हिंदी को दी गई नई ऊँचाइयों की सराहना करते हैं। यह दिन हमें याद दिलाता है कि हमारी भाषाई और सांस्कृतिक धरोहर को संजोना और बढ़ावा देना कितना महत्वपूर्ण है।

अयोध्या: दलित युवती से गैंगरेप, 9 के खिलाफ मामला दर्ज, 5 गिरफ्तार, पीड़िता ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

सौम्या केसरवानी | navpravah.com

नई दिल्ली | इंसानियत को शर्मसार करने वाली फिर से एक घटना सामने आयी है,‌ यह घटना अयोध्या में गैंगरेप की है, जी हां अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि परिसर में सफाई का काम करने वाले एक दलित युवती के साथ गैंगरेप हुआ है, पुलिस ने इस मामले में नौ आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर  लिया है, और पांच आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया है।

पुलिस ने इस मामले के बारे में जानकारी देते हुए बताया है कि, हमने इस मामले की जांच की और जांच में ये बात सामने आई है कि अलग-अलग दिन जब युवती अपने परिचित युवक से मिलने गई थी, तब उसके दोस्तों ने मिलकर और युवती के साथ दुष्कर्म किया।

एसपी सिटी मधुवन सिंह ने कहा कि, यह प्रकरण थाना कैंट का है और ये मामला दो हफ्ते पुराना है, पीड़िता द्वारा 2 सितंबर को थाना कैंट में मुकदमा पंजीकृत कराया गया था, तथ्यों के अनुसार, पीड़िता जब अपने पूर्व परिचित मित्र से मिलने अलग-अलग दिन गयी तब उसके दोस्तों ने मिलकर सामूहिक दुष्कर्म किया।

युवती ने पुलिस पर आरोप लगाया है कि, उसके दोस्त और उसके साथियों ने उसके साथ कई बार गैंगरेप किया और वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया था, जब इस मामले में 2 सितंबर को उसने रिपोर्ट दर्ज करवाई थी तो पुलिस ने उसे और उसके परिवार को मीडिया से दूर रहने के लिए धमकी दी थी।

युवती ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि, मैं श्री राम जन्मभूमि मैं काम करती हूं, इस घटना के बाद से मेरा काम भी छूट गया था, युवती ने बताया कि, वह एक लड़के के साथ रिलेशन में आ गई थी, लेकिन  लड़का अचानक अपने दोस्तों के साथ बातचीत कर मेरे साथ जबरदस्ती करने लगा और जब मैंने भागने की कोशिश की तो इस दौरान मेरे सिर में भी चोट लग गई, जिससे मैं बेहोश हो गई थी और तब उन लोगों ने मिलकर मेरे साथ दुष्कर्म किया।

युवती ने आगे बताया कि, मैं 28 तारीख को महिला थाने जा रही थी, तब भी इन लोगों ने फोन कर मुझे डराया धमकाया और कहा कि जो तुम्हारे साथ हुआ है, वह तुम्हारी बहनों के साथ भी होगा, तुम्हारे घर वालों के लिए भी अच्छा नहीं होगा, इसलिए मैं डर गयी और लौट आई थी, इसके बाद 31 तारीख को फिर मैं एप्लीकेशन लेकर महिला थाना गई तो उन्होंने कहा कि यह सारी घटना झूठ है, जो एप्लीकेशन मैं लिखा है वह सही नहीं है।

हिन्दी दिवस विशेष: हिन्दी साहित्य को समृद्ध बनाने में पाँच प्रमुख लेखिकाओं का योगदान

इशिका गुप्ता | navpravah.com 

नई दिल्ली | हर वर्ष 14 सितंबर को पूरे देश में हिन्दी दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन हिन्दी भाषा के महत्व को रेखांकित करने और इसके साहित्यिक योगदान को सम्मानित करने के लिए समर्पित है। इस अवसर पर, आज हम उन पाँच प्रमुख महिला लेखिकाओं को याद कर रहे हैं जिन्होंने हिन्दी साहित्य को समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इन लेखिकाओं की रचनाओं ने न केवल साहित्य को नए आयाम दिए, बल्कि समाज में स्त्रियों की आवाज़ को भी बुलंद किया।

1. महादेवी वर्मा: छायावाद की ‘मूक-बधिर कवयित्री’

महादेवी वर्मा, हिन्दी साहित्य की छायावादी धारा की चार प्रमुख स्तंभों में से एक मानी जाती हैं। उनकी कविताएँ करुणा, पीड़ा और प्रेम की भावनाओं से ओत-प्रोत हैं। उनकी रचनाएँ जैसे “दीपशिखा” और “यामा” हिन्दी कविता के लिए मील का पत्थर साबित हुईं। इसके अलावा, महादेवी जी ने नारी जीवन की समस्याओं को अपनी लेखनी के माध्यम से सशक्त ढंग से प्रस्तुत किया, जिससे वे हिन्दी साहित्य के इतिहास में अमर हो गईं।

2. मन्नू भंडारी: यथार्थवादी कथा की ध्वजवाहक

मध्यम वर्ग के संघर्ष और महिलाओं की समस्याओं को मन्नू भंडारी ने अपनी कहानियों और उपन्यासों में प्रमुखता दी। “आपका बंटी” और “महाभोज” जैसे उपन्यासों में उन्होंने समाज की कुरीतियों और विडंबनाओं को सामने रखा। मन्नू भंडारी की लेखनी ने स्त्री-जीवन के वास्तविक पक्षों को दिखाते हुए साहित्य को एक नया आयाम दिया, और उन्हें हिन्दी कथा-साहित्य की अग्रणी लेखिका के रूप में स्थापित किया।

3. सुभद्राकुमारी चौहान: राष्ट्रप्रेम की अनुगूँज

स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सुभद्राकुमारी चौहान की कविताएँ लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनीं। उनकी प्रसिद्ध कविता “झाँसी की रानी” ने भारतीय महिलाओं में वीरता और साहस की भावना को प्रबल किया। उनकी रचनाओं में सरल भाषा और स्पष्ट विचारधारा ने उन्हें हिन्दी साहित्य में एक विशिष्ट स्थान दिया। उनके लेखन में स्त्रियों के साथ-साथ देशभक्ति का भी अद्वितीय संगम देखने को मिलता है।

4. इस्मत चुगताई: सामाजिक वर्जनाओं पर करारी चोट

इस्मत चुगताई ने अपने साहसिक लेखन से हिन्दी और उर्दू साहित्य दोनों में एक क्रांति पैदा की। उनकी प्रसिद्ध कहानी “लिहाफ” ने सामाजिक वर्जनाओं को चुनौती दी और महिला यौनिकता के मुद्दे पर खुलकर चर्चा की। इस्मत चुगताई की लेखनी समाज के दबे-कुचले वर्गों और विशेषकर महिलाओं के हक़ की आवाज़ बनी। उनके साहित्यिक दृष्टिकोण ने हिन्दी साहित्य को नये और संवेदनशील मुद्दों की ओर मोड़ा।

5. अमृता प्रीतम: विभाजन की त्रासदी और प्रेम की कवयित्री

अमृता प्रीतम का योगदान हिन्दी और पंजाबी साहित्य दोनों में अद्वितीय है। उनका उपन्यास “पिंजर” विभाजन के दौरान महिलाओं की पीड़ा और संघर्ष की दास्तान है, जो आज भी प्रासंगिक है। अमृता प्रीतम ने प्रेम, दर्द और समाज की विडंबनाओं को अपनी कविताओं और कहानियों के माध्यम से बेहद मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया। हिन्दी साहित्य में उनकी उपस्थिति ने महिलाओं के अनुभवों और विचारों को साहित्यिक मुख्यधारा में स्थान दिलाया।

हिन्दी दिवस के इस पावन अवसर पर, इन पाँच महान लेखिकाओं के योगदान को याद करना हमारे लिए गर्व की बात है। इन्होंने अपने साहित्य के माध्यम से न केवल हिन्दी भाषा को समृद्ध किया, बल्कि समाज में महिलाओं के स्थान और उनके संघर्षों को भी सशक्त रूप से प्रस्तुत किया। इनकी रचनाएँ आज भी हिन्दी साहित्य में प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक आदर्श प्रस्तुत करती हैं।

ज़मानत केजरीवाल को, फायदा बीजेपी को, जानिए कैसे?

नृपेन्द्र कुमार मौर्य | navpravah.com

नई दिल्ली | सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को आबकारी नीति से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में जमानत मिलने के बाद, आम आदमी पार्टी (AAP) ने हरियाणा चुनाव में नए उत्साह के साथ उतरने की घोषणा की है। AAP की हरियाणा इकाई के प्रमुख, सुशील गुप्ता ने कहा है कि पार्टी अब हरियाणा में पूरी ताकत से चुनाव लड़ेगी। गुप्ता के अनुसार, केजरीवाल जल्द ही हरियाणा में चुनाव प्रचार की शुरुआत करेंगे, और पार्टी लोगों को बीजेपी से बदलाव का एक विकल्प देने के लिए तैयार है।

हरियाणा में AAP के बढ़ते प्रभाव के बावजूद, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य में मुकाबला अब भी मुख्य रूप से बीजेपी और कांग्रेस के बीच रहेगा। हालांकि, AAP द्वारा किए गए हर प्रयास से कांग्रेस के वोटों में कमी आ सकती है, जैसा कि पहले दिल्ली, पंजाब, गोवा और गुजरात में देखा गया है। इन राज्यों में AAP की प्रगति से कांग्रेस का वोट बैंक प्रभावित हुआ था, जिससे बीजेपी को लाभ मिला था।

दिल्ली और पंजाब में AAP की सफलता के बाद, हरियाणा में पार्टी का प्रदर्शन देखने योग्य होगा। विश्लेषकों का मानना है कि AAP के बढ़ते प्रभाव से कांग्रेस को बड़ा नुकसान हो सकता है, जबकि बीजेपी को अप्रत्यक्ष रूप से फायदा हो सकता है, जैसा कि पहले कई राज्यों में हुआ है। अब यह देखना बाकी है कि क्या AAP हरियाणा में कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगाने में कामयाब होती है या नहीं, और यह राज्य के चुनाव परिणामों को कितना प्रभावित करेगा।

मिस स्विट्जरलैंड फाइनलिस्ट क्रिस्टीना को पति ने उतारा मौत के घाट, शव को टुकडे़ कर मिक्सर में पीसा

इशिका गुप्ता| navpravah.com 

नई दिल्ली | स्विट्जरलैंड से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आ रही है जो न केवल स्विट्जरलैंड बल्कि पूरी दुनिया में सनसनी फैला दी है।

क्रिस्टीना जोक्सिमोविच (38) जो ब्यूटी पेजेंट में एक जाना माना नाम है, उनके शव को फरवरी 2024 में ही उनके स्विट्जरलैंड के बेसल के पास बिनिंगेन स्थित घर से क्षत विक्षत हालत में बरामद किया गया था।

क्रिस्टीना के पति थॉमस (41) ने पुलिस को पहले पूछताछ में बताया कि वह घटना के समय घर पर नहीं था और जब वह घर पर आया तो उसने अपनी पत्नी की लाश को देखा जिसे देखकर उसे हत्या का आभास हुआ। परंतु लाश को देखकर वह डर गया और इससे पहले की कोई कार्रवाई हो उसने क्रिस्टीना के शव को ठिकाने लगाने की कोशिश की।

फरवरी से चलते आ रहे कोर्ट कार्रवाई में पुलिस ने मामले की जांच पड़ताल करके सच का पता लगाने की कोशिश की जिसमें उसके पति थॉमस के किरदार का सच सामने आने लगा। जिसे देखते हुए थॉमस को कोर्ट में पेश किया गया। वकील द्वारा सवाल पूछे जाने पर धीरे-धीरे थॉमस फंसता चला गया और अंत में उसने अपनी गलती कबूल कर ली और उसने कहा की उसने अपनी पत्नी क्रिस्टीना की एक बेहद दर्दनाक हत्या की है।

स्विट्जरलैंड के स्थानीय मीडिया के अनुसार:

कोर्ट में थॉमस ने अपनी पत्नी की हत्या के बारे में आगे कहा कि उसने अपनी पत्नी की पहले हत्या की फिर शव को ठिकाने लगाने के लिए उसने उसके शव को चाकू, आरी व गार्डन की कैंची आदि से काटकर उन टुकड़ों को मिक्सी में पीस उसकी प्यूरी बना दी। उसके बाद उसने केमिकल सॉल्यूशन का प्रयोग करके उसके शव के अवशेषों के भी नामोनिशान मिटाने का प्रयास किया।

कोर्ट में थॉमस द्वारा हत्या की बात कबूले जाने पर कोर्ट ने थॉमस की रिहाई खारिज कर दी है।

स्थानीय मीडिया आगे बताती हैं कि अदालती रिकॉर्ड के अनुसार थॉमस दावा करते हैं कि पहले क्रिस्टीना ने उन्हें चाकू से मारने का प्रयास किया था जिस पर थॉमस ने अपनी आत्मरक्षा के लिए यह कदम उठाया।

परंतु फॉरेंसिक रिपोर्ट के अनुसार क्रिस्टीना के शव की जांच करने पर पता चला कि उनकी हत्या गला घोटनें से हुई है।

बताते चलें क्रिस्टीना और थॉमस के परिवार को स्विट्जरलैंड में एक आदर्श परिवार के रूप से देखा जाता था। क्रिस्टीना और थॉमस के दो बच्चे हैं।

ब्यूटी पेजेंट क्रिस्टीना जोक्सिमोविच पूर्व मिस स्वीटजरलैंड 2007 फाइनलिस्ट रहीं है। और उसके पश्चात वें एक ब्यूटी कोच के रूप में कार्यरत रहीं।

क्रिस्टीना की हत्या को किसी तीसरे पक्ष द्वारा देखे जाने पर अगले दिन ही क्रिस्टीना के पति थॉमस को हिरासत में ले लिया गया था और कार्रवाई चल रही थी जिस पर थॉमस के ही हत्यारोपी होने का पता चला।

खबरें यह भी आ रही है कि थॉमस की मानसिक स्थिति सही नहीं होने के वजह से यह घटना घटित हुई। हालांकि इस बात की जांच पड़ताल हो रही है।

राहुल गांधी पर BJP से भी ज्‍यादा आक्रामक क्‍यों हैं BSP सुप्रीमो मायावती?

इशिका गुप्ता| navpravah.com

नई दिल्ली | दलित चिंतक प्रोफेसर कालीचरण का कहना है कि मंडल कमीशन और इसके जैसे अन्य मुद्दों की जड़ कांग्रेस पार्टी में है। लोकसभा चुनाव में बसपा का पारंपरिक वोटर अब गठबंधन की ओर चला गया है।

राहुल गांधी ने अमेरिका में आरक्षण पर जो बयान दिए, उन पर बसपा प्रमुख मायावती ने बीजेपी के बाद सबसे ज्यादा हमला किया है। जानकारों का मानना है कि बसपा ने राहुल गांधी के बयान को भुनाने का फैसला किया है और इसे चुनावी मुद्दा बना सकती है। इसके अलावा, पार्टी इस मुद्दे को यूपी विधानसभा उपचुनाव में भी उठाने की योजना बना रही है।

मायावती इस समय आरक्षण के मुद्दे पर बहुत सक्रिय हैं, क्योंकि लोकसभा चुनाव में दलित वोटर के खिसकने के बाद वह उन्हें वापस लाने में जुटी हैं। वह बीजेपी की बजाय कांग्रेस को निशाना बना रही हैं, ताकि अपने वोटर को संजो सकें।

राजनीतिक जानकार बताते हैं कि लोकसभा चुनाव में बसपा की स्थिति खराब होने के बाद, उनका पारंपरिक वोटर कांग्रेस की ओर बढ़ता दिख रहा है। इस चिंता को लेकर मायावती ने आरक्षण में क्रीमी लेयर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ सबसे पहले और सबसे जोरदार विरोध किया। उन्होंने बीजेपी को कानून बनाने की सलाह दी और कांग्रेस को घेरने की कोशिश की।

विश्लेषक रविकांत का कहना है कि मायावती कांग्रेस पर इसलिए हमला कर रही हैं, क्योंकि उनका दलित वोटर कांग्रेस की ओर खिसक गया है और उन्हें अपना वोट बैंक बचाना है। इसी कारण वह कांग्रेस पर ज्यादा प्रहार कर रही हैं।

राजनीतिक विश्लेषक राजीव श्रीवास्तव के अनुसार, बसपा का जाटव वोट इस चुनाव में खिसकता दिख रहा है, जो पहले कांग्रेस के पास था। एक समय में दलित और मुस्लिम वोट कांग्रेस के पास था, लेकिन यूपी कांग्रेस के कमजोर होने के बाद दलित वोट बसपा के पास और मुस्लिम वोट सपा के पास चला गया। बसपा को कांग्रेस से ज्यादा खतरा महसूस हो रहा है और वह अपने दलित वोट को बनाए रखना चाहती है।

क्या अब PK का हाथ थामने वाले हैं भोजपुरी स्टार पवन सिंह ?

सौम्या केसरवानी | navpravah.com

नई दिल्ली | आज लखनऊ में भोजपुरी सुपरस्टार पवन सिंह ने प्रशांत किशोर के जन सुराज के नेता आनंद मिश्रा से मुलाकात की। पवन के जन सुराज के नेता से मिलने के बाद ये अटकलें लगाई जा रही हैं कि भविष्य में पवन सिंह प्रशांत किशोर का हाथ थाम सकते हैं।

पवन सिंह और आनंद मिश्रा दोनों को बीजेपी से टिकट नहीं मिला था। जिसके बाद दोनों ने निर्दलीय लोकसभा चुनाव लड़ा था। पवन सिंह की वजह से ही काराकाट से एनडीए उम्मीदवार उपेंद्र कुशवाहा की हार हुई थी। वहीं, बक्सर में बीजेपी उम्मीदवार मिथलेश तिवारी की हार आनंद मिश्रा की वजह से हुई थी।

वहीं अब पवन सिंह और आनंद मिश्रा की मुलाकात के बाद ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि आने वाले वक्त में भोजपुरी स्टार PK की पार्टी से जुड़ सकते हैं। पवन सिंह ने 2014 में बीजेपी जॉइन की थी, इस साल चुनाव से पहले मार्च में जब बीजेपी ने अपने लोकसभा प्रत्याशियों की लिस्ट जारी की, तो 195 प्रत्याशियों में से एक नाम पवन सिंह का भी था।

वहीं बीजेपी में शामिल होने के बाद सोशल मीडिया पर पवन के ‘महिला विरोधी और अश्लील’ गानों के स्क्रीनशॉट शेयर किए जाने लगे और उनको घेरा जाने लगा, तो खुद पवन सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि ‘भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व को दिल से आभार प्रकट करता हूं, पार्टी ने मुझ पर विश्वास किया, मुझे आसनसोल से उम्मीदवार बनाया, मैं उसका आभार व्यक्त करता हूं लेकिन किसी कारणवश मैं चुनाव नहीं लड़ पाऊंगा।’