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Monday, August 3, 2026
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अब सभी बिलों का भुगतान एक ही केंद्र पर

प्रमुख संवाददाता,

केंद्र सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों का जीवन अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में एक और महत्त्वपूर्ण कदम उठाया है। अब देश के ग्रामीण क्षेत्रों में लोग अपने बिजली, पानी और टेलीफोन इत्यादि के बिलों का भुगतान एक ही साझा सेवा केंद्र पर कर सकेंगे। यह भुगतान नकद के साथ-साथ क्रेडिट एवं डेबिट कार्ड से भी किया जा सकेगा।

भारतीय रिजर्व बैंक ने सीएससी ई-गर्वनेंस इंडिया को ‘भारत बिल पेमेंट ऑपरेटिंग यूनिट’ के लाइसेंस की मंजूरी दी है। सीएससी को गांवों में ऑनलाइन टिकट बुकिंग, आधार पंजीकरण और अन्य इलेक्ट्रॉनिक आधारित सेवाओं की आपूर्ति करने के लिए खोला गया है। सीएससी ई-गर्वनेंस इंडिया देशभर में 1.66 लाख साझा सेवा केंद्रों का संचालन करती है।

दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बुधवार को कहा कि रिजर्व बैंक ने सीएससी को ‘भारत बिल पेमेंट ऑपरेटिंग यूनिट’ के लिए सैद्धांतिक तौर पर मंजूरी दे दी है। अब कई बिलों को सीएससी के माध्यम से जमा कराया जा सकेगा। आपको बता दें कि ‘भारत बिल पेमेंट ऑपरेटिंग यूनिट’ ऑनलाइन एवं जमीनी स्तर पर विभिन्न एजेंटों के माध्यम से विभिन्न बिलों के भुगतान के लिए अधिकृत है।

कमल नाथ ने पंजाब के प्रभारी पद से दिया इस्तीफा

अमित द्विवेदी,

पंजाब राज्य के प्रभारी पद से वरिष्ठ कांग्रेसी नेता कमल नाथ ने इस्तीफा दे दिया। जिस गति से पार्टी अध्यक्षा सोनिया गांधी ने इस्तीफा स्वीकार किया, लगा सब योजनाबद्ध तरीके से हुआ।

राज्य सभा चुनाव के नतीजों के बाद कांग्रेस आलाकमान ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब के प्रभारियों को हटाकर नई नियुक्तियां की थी। कांग्रेस महासचिव कमल नाथ को पंजाब का प्रभारी बनाए जाने के बाद से ही आम आदमी पार्टी और भाजपा सहित अन्य दलों ने कमल नाथ की नियुक्ति पर प्रश्न उठाना शुरू कर दिया था। 1984 के सिख दंगों में कमलनाथ की भूमिका को लेकर तेज़ी से सवाल उठने लगे थे।

इस मामले में नेता कमल नाथ ने सोनिया गांधी को एक पत्र लिखा, जिसमे उन्होंने ज़िक्र किया कि कुछ पार्टियां राजनीतिक लाभ लेने के लिए, उन्हें सिख दंगे से बेवजह जोड़ने की कोशिश कर रही हैं, जोकि बेबुनियाद है। कमलनाथ ने कहा कि दंगा मामले में वर्ष 2005 तक उनके खिलाफ कोई सार्वजनिक बयान या शिकायत या प्राथमिकी तक नहीं थी और पिछली एनडीए सरकार द्वारा गठित नानावटी आयोग ने उन्हें बाद में दोषमुक्त करार दिया था।

इस्तीफा देने के कुछ देर बाद ही पार्टी प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्षा ने कमल नाथ का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। सुरजेवाला ने कहा, “कमलनाथ ने एआईसीसी में उन्हें दी गई जिम्मेदारियों से अपना इस्तीफा दे दिया। उनके निवेदन पर विचार कर सोनिया गांधी ने उनका इस्तीफा स्वीकार किया।”

SBI में पांच सहयोगी बैंकों और भारतीय महिला बैंक का विलय

शिखा पांडेय,

केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा भारतीय स्टेट बैंक के साथ उसके पांच सहयोगी बैंकों और भारतीय महिला बैंक को मिलाने की सैद्धांतिक तौर पर मंजूरी दे दी गई है। वे पांच सहयोगी बैंक स्टेट बैंक ऑफ पटियाला, स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद, स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर और स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर हैं तथा भारतीय महिला बैंक वह बैंक है, जिसे पिछली सरकार ने खास तौर से महिलाओं की बैंकिंग जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रारंभ किया था।

इस विलय का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि भारतीय स्टेट बैंक और भी बड़ा बैंक बन जाएगा। मंत्रिमंडल के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय स्टेट बैंक की चेयरपर्सन अरूंधती भट्टाचार्य ने कहा कि अभी कोई भारतीय बैंक दुनियां के चुनिंदा 50 बैंकों में शामिल नहीं है। लेकिन उम्मीद है कि विलय की प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद विश्व स्तर पर भारतीय बैंक और मजबूत पहचान के साथ नजर आएंगे। इससे मात्र भारतीय स्टेट बैंक को ही नहीं बल्कि सभी को फायदा होगा। एसबीआई का नेटवर्क बढ़ेगा और कई गुना लोगों तक यह पहुंच सकेगा। साथ ही तर्कसंगत शाखाओं और कुशल कर्मचारियों की बदौलत बैंक के कामकाज में भी सुधार आएगा।

विलय से कर्मचारी यूनियन नाराज़, आंदोलन की धमकी-

हालांकि विलय प्रस्ताव से कर्मचारी यूनियनों में नाराजगी है। इस मामले में वो आंदोलन की भी चेतावनी दे चुके हैं। लेकिन वित्त मंत्रालय के अधिकारियों की मानें तो इससे विलय की प्रक्रिया पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है। साथ ही कर्मचारियों और अधिकारियों को को संतुष्ट करने की हर संभव कोशिश होगी।

उल्लेखनीय है कि 31 मार्च 2016 तक के आंकड़ों के मुताबिक, पांच सहयोगी बैंकों के पास कुल जमा राशि 5 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा है जबकि इन्होंने करीब चार लाख करोड़ रुपए का कर्ज दे रखा है। इन पांच बैंकों का नेट वर्थ करीब 90 लाख करोड़ रुपए है। साथ ही इन पांच बैंकों में अधिकारियों और कर्मचारियों की संख्या करीब 70 हजार है। वहीं 31 मार्च, 2015 तक के आंकड़े बताते हैं कि नवम्बर 2013 में लांच किए गए भारतीय महिला बैंक की कुल जमा राशि 751 करोड़ रुपए थी जबकि इसने करीब 350 करोड़ रुपए का कर्ज दे रखा था। भारतीय स्टेट बैंक का इरादा चालू कारोबारी साल में विलय प्रक्रिया को पूरी करने का है।

आपको बता दें कि करीब साढ़े 16 हजार शाखाओं के साथ भारतीय स्टेट बैंक भले ही देश का सबसे बड़ा बैंक हो, लेकिन विश्व स्तर पर 50 बड़े बैंकों में इसे कोई जगह नहीं मिली है। विश्व स्तर पर इसकी ताजा रैकिंग 67 है। सरकार की कोशिश है कि देश में बैंकों की संख्या कम हो, लेकिन दुनिया के चुनिंदा बैंकों में किसी भारतीय बैंकों को जरूर जगह मिलनी चाहिए। इसी को ध्यान में रखते हुए विलय को प्राथमिकता दी जा रही है।

एविएशन पॉलिसी को मिली मंज़ूरी, निजी कंपनियों की मनमानी पर लगेगी रोक

शिखा पाण्डेय, 
केंद्र सरकार द्वारा देश में नई विमानन नीति को मंजूरी दे दी गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में यह निर्णय लिया गया है। इस पॉलिसी को मंजूरी मिलने से हवाई यात्रियों को काफी लाभ होगा और उनके हितों की अधिक रक्षा हो सकेगी। इस पालिसी के तहत विमानन कंपनियों की मनमानी पर रोक ज़रूर लगेगी, पर साथ ही उन्हें कुछ सहूलियतें भी दी जाएंगी।

नयी पॉलिसी में विमान कंपनियों को 5/20 नियम से राहत मिलेगी। नए नियम के तहत अब यात्रियों को एक घंटे की यात्रा के लिए मात्र 2500 रुपए चुकाने होंगे, जबकि 30 मिनट की यात्रा के लिए मात्र 1200 रुपए चुकाने होंगे। इससे मध्यम वर्गीय व निम्न मध्यमवर्गीय लोग भी आवश्यकता पड़ने पर हवाई उड़ान भर सकेंगे। घरेलू उड़ानों पर अधिक जोर होगा और विदेश उड़ान के नियम अधिक आसान बनाये जाएंगे। सिविल एविएशन मंत्रालय ने इसके लिए पूर्व में ही 15 जून तक सुझाव आमंत्रित किये थे।

जानिए क्या हैं पॉलिसी के अहम प्रावधान :

1. अगर कोई यात्री अपना टिकट कैंसिल करवाता है तो कंपनी कैंसिलेशन चार्ज के तौर पर यात्री से 200 रुपए से अधिक नहीं वसूल सकती।

2. अगर एयरलाइन अचानक फ्लाइट कैंसिल करती है, तो कंपनी यात्रियों को 400 प्रतिशत तक जुर्माना देगी।

3. नई विमानन नीति में सामान ले जाने के नियमों को भी बदला जाना है। यात्री 15 किलो सामान अपने साथ ले जा सकते हैं, लेकिन इसके ऊपर हर किलो पर 100 रुपए का अतिरिक्त चार्ज देना होगा। अबतक कंपनी इसके लिए 300 रुपये वसूलती थी।

4. टिकट कैंसिल कराने की स्थिति में घरेलू हवाई यात्रा के लिए रिफंड 15 दिनों और अंतरराष्ट्रीय यात्रा के मामले में 30 दिनों के भीतर रिफंड विमानन कंपनी को देना होगा।

5. नई पॉलिसी में कंपनियों को रीजन कनेक्टिविटी के मुद्दे पर बढ़ावा मिल सकता है।

आजाद भारत में सर्वाधिक गुलाम, शर्मसार कर देने वाले आंकड़े

अनुज हनुमत,

हमारे देश को स्वतंत्रता मिले करीब सात दशक का समय हो गया है। इस बीच दुनिया के सबसे ऊँचे पर्वत एवरेस्ट से लेकर अंतरिक्ष तक तिरंगा लहराया गया। शिक्षा, विज्ञान, व्यापार जैसे क्षेत्रों में भारतीयों ने दुनियाभर में अपना लोहा मनवाया है, पर इतना काफी नहीं है। आस्ट्रेलिया के मानवाधिकार समूह ‘वॉक फ्री फाउंडेशन’ ने वैश्विक दासता सूचकांक (ग्लोबल स्लेबरी इंडेक्स) जारी किया है, जो देश के विषय में एक शर्मनाक हकीकत से पर्दा उठाता है। सूचकांक के मुताबिक़, आधुनिक दासता के मामले में भारत दुनिया में शीर्ष पर है।

आजादी के इतने वर्षों बाद भी यहाँ 1.8 करोड़ लोग अभी गुलामी की जंजीरो में जकड़े हुए हैं और इसका शिकार अधिकतर बच्चे हैं। ये उक्त सूचकांक 167 देशों के 42 हजार प्रतिभागियों से बात कर तैयार किया गया है। इस सूचकांक को 15 भारतीय राज्यों और 80 फीसदी जनसंख्या से इस विषय पर बातचीत करके जारी किया गया, जिसमें 58℅ लोगो ने केवल भारत, चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश और उज़्बेकिस्तान से भाग लिया।

इस रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा समय में पूरे विश्व में 4.58 करोड़ लोग आधुनिक दासता का शिकार हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इस समय भारत देश में लगातार हो रहा है मानवधिकारों का हनन।

वैश्विक स्थिति –

1.भारत -1.80 करोड़ बंधुआ लोग

2.चीन -0.33 करोड़ बंधुआ लोग

3.पाकिस्तान-0.21 करोड़ बंधुआ लोग

4.बांग्लादेश -0.15 करोड़ बंधुआ लोग

5.उज़्बेकिस्तान-0.12 करोड़ बन्धुआ लोग

6.उत्तर कोरिया -0.11 करोड़ बंधुआ लोग

7.रूस -0.104 करोड़ बंधुआ लोग

आधुनिक दासता को ऐसी स्थिति के रूप में परिभाषित किया गया है, जहाँ व्यक्ति अत्याचार सहने को मजबूर है। वह चाह कर भी इसके लिए मना नहीं कर सकता और ना ही इसे छोड़ सकता है। उसे धमकाकर, प्रताड़ितकर, शक्ति के दुरूपयोग से उसकी मर्जी के विरुद्ध काम करवाया जाता है। बच्चों का शोषण भी इसी श्रेणी में आता है।

worst condition

कम उम्र के बच्चे सर्वाधिक पीड़ित-

दुनिया के सर्वाधिक आबादी वाले क्षेत्र एशिया की कुल जनसंख्या के दो तिहाई लोग गुलामी करने को मजबूर हैं, जिसमे भारत में गरीबी, जातीय भेदभाव, लैंगिक अनुपात में भारी अंतर के चलते गुलामी झेलने को मजबूर हैं लोग, इनमें घरेलू नौकरों के रूप में बच्चे सर्वाधिक पीड़ित हैं। भारत में भी सबसे ज्यादा स्थिति बुन्देलखण्ड की ख़राब है, जहाँ बाल मजदूरी सबसे ज्यादा देखने को मिलती है।

इस रिपोर्ट के आते ही एक बार फिर ये बहस तेज हो गई है कि क्या वास्तव में विकासशील देशों में मानवाधिकार के प्रति सरकारें चिंतित हैं ! क्योंकि एक तरफ इस पूंजीवादी अर्थव्यस्था के दौर में हर छोटे बड़े देश द्वारा विकास की अधाधुंध दौड़ लगाई जा रही है और इसी दौड़ में मनुष्य के ‘मानवाधिकार मूल्य’ विकास के घूमते पहिये के नीचे दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। ये सोचने वाली बात है कि क्या स्वतंत्रता मिलने के सात दशक बाद भी आज वास्तव में हम स्वतंत्र हो पाये हैं ? या जमीनी हकीकत कुछ और ही है ? कौन है इसका जिम्मेदार ?

कैराना की ज़मीनी हकीकत जानने पहुँची BJP की 8 सदस्यीय टीम

शिखा पांडेय,

आज कैराना से हिंदुओं के कथित पलायन की जमीनी हकीकत का जायज़ा लेने भाजपा की 8 सदस्यीय टीम कैराना पहुँची। यह जांच दल पार्टी के नेता सुरेश खन्ना के नेतृत्व में कैराना पहुंचा है। जांच दल में खन्ना के अलावा डा. राधामोहन दास अग्रवाल, सांसद बागपत डा. सतपाल सिंह, सांसद सहारनपुर राघव लखन पाल शर्मा, सांसद बुलन्दशहर डा. भोला सिंह, सांसद अलीगढ सतीश गौतम, सांसद आंवला धर्मेन्द्र कश्यप, यूपी के पूर्व डीजीपी बृजलाल हैं।

केंद्रीय आयुष एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्रीपद नायक ने मंगलवार को कहा कि कैराना में बहुसंख्यक समुदाय के कथित पलायन के मामले पर खुद प्रधानमंत्री नजर रख रहे हैं। श्रीपद नायक मंगलवार को एक दिवसीय दौरे पर बहराइच में थे। लोक निर्माण विभाग के अतिथि भवन में पत्रकारों से बातचीत में केंद्रीय मंत्री ने कैराना प्रकरण को काफी चिंताजनक बताया था और कहा था कि जल्द ही एक केंद्रीय दल जाँच के लिए कैराना जाएगा। उन्होंने कहा कि कैराना और मथुरा के जवाहरबाग की घटनाएं इस बात की सूचक है कि यूपी में कानून व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है।

श्रीपद नायक ने मथुरा के जवाहरबाग काण्ड में मारे गये पुलिसकर्मियों के परिजनों को प्रदेश सरकार की ओर से आर्थिक सहायता को दिखावा बताया और कहा कि पैसे देने से किसी की जान की क्षतिपूर्ति नहीं हो सकती है।

अमेरिका ने भारत के साथ काम करने की जताई इच्छा-

अपने विभाग की तरक्की और प्रयासों के विषय में बताते हुए नायक ने कहा कि विश्व की महाशक्ति अमेरिका ने भी भारतीय प्राचीन चिकित्सा पद्वति आयुष की महत्ता को समझा व स्वीकार किया है। अमेरिका ने आयुष पर भारत के साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताई है।

मंत्री ने बताया कि आयुष चिकित्सा का बजट इस बार 32 से बढ़ाकर 42 फीसदी कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक राज्य में एम्स की तरह एक आयुष चिकित्सा केंद्र बनाए जाने की योजना है। यहां आयुर्वेदिक नेचुरोपैथी व योग की व्यवस्था होगी। इसकी शुरुआत दिल्ली में हो चुकी है। दिल्ली के सरिता विहार में आयुष चिकित्सालय का निर्माण हो रहा है। तीन माह के भीतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका लोकार्पण करेंगे।

जम्मू: अमरनाथ यात्रा के पहले बिगड़ रहा माहौल, व्यवधान डालने की साज़िश!

अमित द्विवेदी,

आगामी दो जुलाई से श्री अमरनाथ यात्रा की शुरुआत होगी। चंद दिन ही बच्चे हैं इस यात्रा की शुरुआत के और पिछले चौबीस घंटे के भीतर हुई दो घटनाओं के बाद यह बात उठने लगी है कि कहीं यह आगामी यात्रा में व्यवधान डालने के लिए व्यूह तो नहीं रचा जा रहा है। मंगलवार रात हुई आप शम्भू मंदिर में विवाद और जम्मू में आतंकवादी हमलों के बाद माहौल लगातार बिगड़ता जा रहा है।

सोमवार को जम्मू-श्रीनगर मार्ग पर आतंकवादी हमला हुआ उसके एक दिन बाद ही आप शम्भू मंदिर में हंगामा। जब तक प्रशासन इस मामले को सुलझाता तब तक इलाके भर में माहौल एकदम गर्म हो चुका था। इलाके के कुछ जानकार बताते हैं कि सन् 2008 में भी कुछ इसी तरह का विवाद हुआ था, जिसकी वजह से दो माह तक पूरा जम्मू का इलाका बंद था, जिसकी वजह से जनजीवन एकदम अस्त व्यस्त रहा।

हालाँकि आप शम्भू मंदिर के हंगामे के बाद स्थानीय प्रशासन मसले को हल करने में लगा हुआ है, पुलिस-पब्लिक में हुई झड़प के बाद स्थिति भयावह न हो इसलिए मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी गई है।

कल रात विरोध कर रही भीड़ हिंसक हो गई, जिसके बाद कई गाड़ियों को भीड़ ने आग के हवाले कर दिया। उग्र भीड़ ने थाने का घेराव किया और पुलिस-पब्लिक में मुठभेड़ भी हुई। जिलाधिकारी सिमरनदीप सिंह ने बताया कि भीड़ को नियत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़ेंगे और लाठीचार्ज भी किया गया।

उत्तराखंड: बेटिकट दौड़ रही हैं रोडवेज बसें

नारायण सिंह,

तमाम सख्ती और मुख्यमंत्री की नाराजगी के बाद भी रोडवेज बसें बेटिकट दौड़ रही हैं। तीन दिन पहले काशीपुर डिपो की पूरी बस बेटिकट पकड़ी गई थी, तो अब दिल्ली से कोटद्वार जा रही बस में आधी से ज्यादा सवारी बेटिकट मिलीं। बस में 41 सवारी थी, लेकिन परिचालक ने टिकट 14 को ही दिया हुआ था। यही नहीं, चेकिंग टीम को देख परिचालक टिकट मशीन लेकर भाग गया। स्थानीय लोगों ने बाइक से पीछा कर उसे दबोचा। रोडवेज मुख्यालय ने चालक-परिचालक को बर्खास्त कर उनके विरुद्ध मुकदमे के आदेश दिए हैं।

रोडवेज मुख्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक कोटद्वार डिपो की साधारण बस (यूके07-पीए-0914) सोमवार रात करीब 11 बजे दिल्ली से कोटद्वार के लिए चली। बस में 41 सवारियां थीं। कई दिन से मुख्यालय को इस बस के बेटिकट दौड़ने की शिकायत मिल रही थी। लिहाजा, इसे चेक करने के लिए देहरादून से निरीक्षक राज सिंह राठी और रविंद्र सिंह की टीम भेजी गई।

टिकट मशीन ही लेकर भागा कंडक्टर-

टीम ने मोदीनगर में बस को रुकने का इशारा किया, लेकिन चालक ने बस नहीं रोकी। राठी ने चालक को चेतावनी दी, तो उसने कुछ दूर जाकर बस रोक ली। टीम वहां पहुंची, मगर चालक-परिचालक ने दरवाजा नहीं खोला। बस का आगे का शीशा टूटा हुआ था। टीम ने किसी तरह बस का दरवाजा खुलवाया, लेकिन परिचालक ने टिकट मशीन और बैग छुपा दिया। इसके बाद परिचालक बैग और टिकट मशीन समेत टूटे हुए शीशे से कूदकर फरार हो गया। टीम ने शोर मचाया तो वहां से गुजर रहे स्थानीय बाइक सवारों ने बदमाश समझकर परिचालक का पीछा किया और उसे दबोच लिया। हंगामा होने पर मोदीनगर पुलिस भी वहां पहुंच गई।

परिचालक को थाने ले जाकर पुलिस की मदद से बैग व मशीन कब्जे में ली गई। बस में 27 सवारी बगैर टिकट मिलीं। परिचालक ने सभी को हाथ से बने फर्जी टिकट देकर किराया ले रखा था। टीम ने निगम मुख्यालय को रिपोर्ट दी। जिस पर प्रबंध निदेशक बृजेश कुमार संत ने आरोपी परिचालक आसिफ हुसैन व चालक मोहम्मद इमरान खान को बर्खास्त करने के आदेश दिए। दोनों आउट-सोर्सिग से नियुक्त हुए थे।

खुद को सही ठहराने के लिए इस्लाम को ‘‘विकृत” कर रहे हैं आतंकी संगठन: व्हाइट हाउस

अनुज हनुमत,

एक बार फिर अमेरिका ने आतंकी संगठनों पर कड़ी टिप्पणी करते हुए ये स्पस्ट सन्देश दिया है कि वह इन संगठनों के खिलाफ हर जरुरी व कड़े कदम उठाएगा। व्हाइट हाउस ने कहा है कि आईएसआईएस जैसे आतंकी समूह अपने उस ‘हत्यारे, फर्जी एजेंडे’ को सही ठहराने के मकसद से इस्लाम को ‘‘विकृत’’ कर रहे हैं, जिसके तहत वे खुद को अमेरिका से लड़ने वाले ‘मुजाहिदीन’ के तौर पर पेश करने के लिए धर्म की आड़ लेते हैं।

एक प्रेस वार्ता के दौरान व्हाइट हाउस के प्रवक्ता जोश एर्नेस्ट ने कहा, ‘‘सच्चाई यह है कि ये संगठन अपने हत्यारे, विनाशकारी एजेंडे को सही ठहराने के लिए इस्लाम धर्म को विकृत कर रहे हैं। राष्ट्रपति ओबामा ने भी यह बात कई मौकों पर कही है। वह इसको लेकर खुलकर बोलते रहे हैं जो ये संगठन करने का प्रयास कर रहे हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘वे खुद को मुजाहिदीन या धार्मिक नेता बताने, अमेरिका के साथ लड़ने के लिए इस्लाम की आड़ लेने का प्रयास कर रहे हैं।’’

पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में एर्नेस्ट ने कहा, ‘‘ये लोग गलत हैं। ये उनका फर्जी एजेंडा है। यह मिथक है। यह सच्चाई नहीं है। यह प्रशासन और इससे पहले का प्रशासन इस मिथ को खत्म करने और यह स्पष्ट करने के लिए काफी आगे तक गया कि ये संगठन इस्लाम का विकृत रूप पेश करते हैं।’’ उनका यह बयान ओरलैंडो के एक गे क्लब में गोलीबारी की घटना के बाद आया है। अफगान मूल के युवक उमर मतीन ने गोलीबारी की जिसमें करीब 50 लोग मारे गए। उन्होने कहा कि आईएसआईएस को खत्म करने में हमारी सफलता के लिए मुस्लिम जगत में अमेरिका के साझेदार महत्वपूर्ण हैं और कार्यवाही चल भी रही है।

व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने कहा कि बहुत सारे अमेरिकी मुसलमान हैं, जो आतंकवाद के खतरे से देश की रक्षा के लिए सशस्त्र बलों और खुफिया क्षेत्र में सेवा दे रहे हैं। इसलिए हम इन आतंकी संगठनों को उनके मंसूबो में कामयाब नही होने देंगे ।

‘कैराना मुद्दे’ पर राजनीति भाजपा की सस्ती लोकप्रियता पाने की कोशिश – अखिलेश यादव

प्रमुख संवाददाता,
कैराना से पलायन के मामले पर राजनीति थमने का नाम नहीं ले रही। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर कहा, “भाजपा ने इस मुद्दे को सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए निकाला है। सच्चाई अब सामने आ रही है यह अच्छा है।”

मायावती ने इस विषय में अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, “कैराना के मुद्दे को तूल देना भाजपा की बहुत बड़ी साज़िश है। उनकी कोशिश है कि कई अहम मुद्दों से जनता का ध्यान भटक जाए।”

भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने कल इलाहाबाद में हुई रैली में कहा था,” पूरे देश को इस पर चिंता करनी चाहिए। उन्होंने इस घटना को आंख खोलने वाली घटना बताया था। भाजपा इस मुद्दे को लेकर राज्य सरकार पर जमकर निशाना साध रही है।” पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने  कैराना की पूरी जांच के लिए  एक सात सदस्यों की टीम बनाई है, जो वहां जाएगी और स्थिति की समीक्षा करेगी। रिपोर्ट आने के बाद पार्टी इस मुद्दों को लेकर आगे की रणनीति बनाएगी।

दूसरी और इस मुद्दे को उठाने वाले सांसद हुकुम सिंह अब स्वयं अपने बयान से पलट रहे हैं। उन्होंने पहले कहा था कि यह एक खास समुदाय के प्रभाव के कारण हो रहा है और एक खास समुदाय को ही निशाना बनाया जा रहा है। अब उन्होंने मीडिया में बयान दिया है कि इसमें कोई कम्युनल एंगल नहीं है। कैराना के लोगों के बाहर जाने का सबसे बड़ा कारण यहां फैली गुंडागर्दी और जुर्म है।

इस मामले पर उन्होंने समाजवादी पार्टी पर पलटवार करते हुए कहा कि सपा ही इसे कम्युनल एंगल दे रही है और मामले को राजनीतिक तौर पर भुनाना चाहती है। हुकुम सिंह ने यह भी साफ कर दिया कि वह अपनी दी हुई सूची के साथ हैं और अगर उसमें कोई गलती निकलती है तो उसके सुधार के लिए भी तैयार हैं लेकिन इस मामले पर राज्य सरकार को कुछ करना चाहिए।