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Friday, September 11, 2026
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सियासत, सरकार, बुंदेलखंड और कैराना मुद्दा

अनुज हनुमत

सबकी अपनी-अपनी रिपोर्ट हैं और सबके अपने अपने दावे। सरकार तो फिर भी सरकार बनी हुई है, लेकिन विपक्ष ऐसे सवेंदनशील मौके पर भी विपक्ष बनने को तैयार नही। चलिए सीधे विषय पर आते हैं। अभी हाल ही में कैराना से बीजेपी सांसद हुकुम सिंह ने एक रिपोर्ट क्या जारी की, मानों पूरे प्रदेश की सियासी बयार ही बदल गई। रिपोर्ट में हुकुम सिंह ने कहा कि कैराना में सांप्रदायिक गतिरोध के चलते लगभग 400-500 हिन्दू परिवारों ने पलायन किया। जैसे ही ये खुलासा हुकुम सिंह ने किया वैसे ही यूपी के सियासी गलियारों में हवायें सर्द हो गई। इस मौके पर चौका मारने के लिए हर पार्टी ने अपने कुछ विशेष नेताओं की आपातकाल बैठक बुलाई और उन्हें सभी जरुरी बातें सिखाई। अभी तक तो सभी पार्टियों के नेताओं ने इस प्रशिक्षण का काफी हद तक फायदा उठाया है।

विपक्ष की नेता और बसपा सुप्रीमो मायावती का कहना है कि भाजपा आने वाले चुनाव से पहले प्रदेश में साम्प्रदायिक हिंसा फैलाना चाहती है और इस काम में सपा उसका साथ दे रही है। मायावती का कहना है कि प्रदेश की ये वर्तमान सरकार गुंडागर्दी और बाहुबलियों की सरकार है और कैराना के पलायन के लिए बुन्देलखण्ड जैसे हालात ही जिम्मेदार हैं, जिसमे सबसे बड़ा कारण ‘भुखमरी’ और ‘बेरोजगारी’ है। मौजूदा सरकार का मानना है कि ऐसा कोई कारण नही है और ये सब भाजपा की ओछी राजनीति का ही परिणाम है।

इस मामले में स्थानीय प्रशासन का कहना है कि कैराना के पलायन में अभी हमें शुरूआत में आर्थिक कारण ही समझ आ रहे हैं। यानि कैराना के विषय पर न तो विपक्ष एक है और न ही मौजूदा सरकार। लेकिन एक बात तो स्पष्ट है कि यूपी में अगले विधानसभा के चुनावों की विसात बिछ चुकी है और राजनीतिक शतरंज के इस खेल में हर कोई बाजी मारना चाहता है। अगर हम बुन्देलखण्ड की बात करें तो पिछले पंद्रह सालों में लगभग 62 लाख लोगों ने पलायन किया है। यहाँ के लोगो के पलायन करने का मुख्य कारण कर्ज, बेरोजगारी और भुखमरी है लेकिन हम दहशत और खौफ के कारण को भी झुठला नहीं सकते हैं। कैराना की सच्चाई कुछ भी हो लेकिन दर्द बुन्देलखण्ड जैसा ही है। अपनों से बिछड़ने का दर्द, अपने घर-द्वार छोड़ने का दुःख।

इससे एक बात तो स्पष्ट है कि ये सब वोट बैंक की गंदी राजनीति का नतीजा है, जो अपने ही देश में एक नई खाईं पैदा करने में आमादा है! जिसे अगर समय रहते नही समझा गया तो इसमें पूरा देश समा जायेगा। एक दूसरा तथ्य ये भी हो सकता है कि सूखे ने किसानों की कमर तोड़ रखी है और बाकी का काम महंगाई कर रही है। कैराना की एक सच्चाई ये भी हो सकती है कि ये कुछ ऐसे कारण है, जिसके कारण बड़े पैमाने पर इस क्षेत्र से पलायन शुरू हो गया हो। कारण कुछ भी हो, ऐसे विषय एक अजीब सा संदेह पैदा करता है, इसलिए हो सकता है कि आने वाले दिनों में कैराना जैसी स्थिति वाले और भी कई शहर, गाँव सामने आ सकते हैं।

हिन्दुस्तान की ‘एनएसजी सदस्यता’ को लेकर चीं-चीं करता चीन

अमित द्विवेदी,

भारत को परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) का सदस्य न बनाया जाए, इसलिए चीन रोज़ एक नया राग अलापता नज़र आ रहा है। इस बार चीन ने भारत-पाक के परमाणु संतुलन की बात के आधार पर भारत को एनएसजी में शामिल न करने की बात कही है। चीन के एक आधिकारिक मीडिया समूह ने कहा कि यदि भारत को इस विशिष्ट समूह में शामिल किया जाता है तो भारत और पाकिस्तान का परमाणु संतुलन बिगड़ जाएगा।

जबसे भारत को एनएसजी में शामिल करने की बात हो रही है, पाकिस्तान और चीन के होश ही उड़े हुए हैं। चीन और पाकिस्तान हर संभव कोशिश कर रहे हैं कि भारत को इस समूह से दूर ही रखा जाए। ग्लोबल टाइम्स में प्रकाशित एक लेख के मुताबिक़, एनएसजी में भारत का प्रवेश ‘दक्षिण एशिया में रणनीतिक संतुलन को हिला देगा और साथ ही इससे पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता पर संकट के बादल भी मंडराने लगेंगे।’ हालांकि इस लेख में यह भी स्पष्ट है कि चीन 48 सदस्यों वाले परमाणु क्लब में भारत को शामिल किए जाने का स्वागत कर सकता है, बशर्ते यह ‘नियमों के साथ हो’।

चीन के इस रवैये से भारत और चीन के रिश्तों पर भी असर पड़ सकता है। क्योंकि एनएसजी में भारत सदस्य को लेकर सबसे ज़्यादा विरोध चीन की तरफ से ही देखने को मिल रहा है। हालाँकि पाकिस्तान भी कई देशों से भारत के विरोध की बात कर रहा है, जो इस समूह के सदस्य हैं।

खबरों की मानें तो चीन इसलिए ज़्यादा चिंतित है कि यदि भारत को एनएसजी की सदस्यता मिल जाती है तो उसका मित्र राष्ट्र पाकिस्तान पीछे छूट जाएगा। एक हिंदी डेली की मानें तो इसी मान मनौव्वल की फेहरिस्त में दो और नाम टर्की और न्यूज़ीलैंड का नाम भी जुड़ गया है। टर्की जहां पाकिस्तान के सहयोग में है वहीं न्यूज़ीलैंड भारत के समर्थन में नज़र आ रहा है।

‘कैराना मुद्दे’ पर सियासत तेज़, आज विपक्ष का प्रतिनिधि मंडल करेगा दौरा

प्रमुख संवाददाता,

यूपी के कैराना से पलायन का मामला और अधिक राजनीतिक रंग में रंगता नज़र आ रहा है। आज जेडीयू, सीपीएम और एनसीपी समेत पांच विपक्षी दलों का एक प्रतिनिधिमंडल कैराना और कांधला जाएगा। वहाँ यह दल स्थानीय लोगों से मिलेगा और सिविल सोसायटी की एक बैठक को संबोधित करेगा। इस प्रतिनिधिमंडल में जेडीयू सांसद के सी त्यागी, सीपीएम सांसद मोहम्मद सलीम, सीपीआई के डी राजा, एनसीपी के सांसद डी पी त्रिपाठी और आरजेडी प्रवक्ता मनोज झा शामिल होंगे।

जेडीयू के महासचिव के सी त्यागी ने एक बयान में कहा कि वे गोधरा और मुजफ्फरनगर के दंगों को आजमा चुके हैं और नतीजे देख चुके हैं। और अब उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों से पहले भी माहौल ऐसा ही बनाया जा रहा है। त्यागी ने कहा कि वे समाज के सभी वर्गों से मुलाकात करेंगे और कैराना में सिविल सोसायटी के लोगों को संबोधित करेंगे।

कैराना में हिंदुओं के कथित पलायन पर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के बयान की निंदा करते हुए विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि बयान ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में तनाव और बेचैनी पैदा कर दी है। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने कैराना पलायन को लेकर शाह के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई और इसकी कड़ी निंदा की है।

उल्लेखनीय है कि कैराना में हिंदुओं के कथित पलायन को लेकर बने हालात की समीक्षा करने के लिए बीजेपी के नौ सदस्यीय एक दल ने बुधवार को कस्बे का दौरा किया। इस मुद्दे पर कांग्रेस ने कहा कि बीजेपी के एक सांसद के रुख में बदलाव के बाद पार्टी नेतृत्व बेनकाब हो गया है।

अब सभी बिलों का भुगतान एक ही केंद्र पर

प्रमुख संवाददाता,

केंद्र सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों का जीवन अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में एक और महत्त्वपूर्ण कदम उठाया है। अब देश के ग्रामीण क्षेत्रों में लोग अपने बिजली, पानी और टेलीफोन इत्यादि के बिलों का भुगतान एक ही साझा सेवा केंद्र पर कर सकेंगे। यह भुगतान नकद के साथ-साथ क्रेडिट एवं डेबिट कार्ड से भी किया जा सकेगा।

भारतीय रिजर्व बैंक ने सीएससी ई-गर्वनेंस इंडिया को ‘भारत बिल पेमेंट ऑपरेटिंग यूनिट’ के लाइसेंस की मंजूरी दी है। सीएससी को गांवों में ऑनलाइन टिकट बुकिंग, आधार पंजीकरण और अन्य इलेक्ट्रॉनिक आधारित सेवाओं की आपूर्ति करने के लिए खोला गया है। सीएससी ई-गर्वनेंस इंडिया देशभर में 1.66 लाख साझा सेवा केंद्रों का संचालन करती है।

दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बुधवार को कहा कि रिजर्व बैंक ने सीएससी को ‘भारत बिल पेमेंट ऑपरेटिंग यूनिट’ के लिए सैद्धांतिक तौर पर मंजूरी दे दी है। अब कई बिलों को सीएससी के माध्यम से जमा कराया जा सकेगा। आपको बता दें कि ‘भारत बिल पेमेंट ऑपरेटिंग यूनिट’ ऑनलाइन एवं जमीनी स्तर पर विभिन्न एजेंटों के माध्यम से विभिन्न बिलों के भुगतान के लिए अधिकृत है।

कमल नाथ ने पंजाब के प्रभारी पद से दिया इस्तीफा

अमित द्विवेदी,

पंजाब राज्य के प्रभारी पद से वरिष्ठ कांग्रेसी नेता कमल नाथ ने इस्तीफा दे दिया। जिस गति से पार्टी अध्यक्षा सोनिया गांधी ने इस्तीफा स्वीकार किया, लगा सब योजनाबद्ध तरीके से हुआ।

राज्य सभा चुनाव के नतीजों के बाद कांग्रेस आलाकमान ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब के प्रभारियों को हटाकर नई नियुक्तियां की थी। कांग्रेस महासचिव कमल नाथ को पंजाब का प्रभारी बनाए जाने के बाद से ही आम आदमी पार्टी और भाजपा सहित अन्य दलों ने कमल नाथ की नियुक्ति पर प्रश्न उठाना शुरू कर दिया था। 1984 के सिख दंगों में कमलनाथ की भूमिका को लेकर तेज़ी से सवाल उठने लगे थे।

इस मामले में नेता कमल नाथ ने सोनिया गांधी को एक पत्र लिखा, जिसमे उन्होंने ज़िक्र किया कि कुछ पार्टियां राजनीतिक लाभ लेने के लिए, उन्हें सिख दंगे से बेवजह जोड़ने की कोशिश कर रही हैं, जोकि बेबुनियाद है। कमलनाथ ने कहा कि दंगा मामले में वर्ष 2005 तक उनके खिलाफ कोई सार्वजनिक बयान या शिकायत या प्राथमिकी तक नहीं थी और पिछली एनडीए सरकार द्वारा गठित नानावटी आयोग ने उन्हें बाद में दोषमुक्त करार दिया था।

इस्तीफा देने के कुछ देर बाद ही पार्टी प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्षा ने कमल नाथ का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। सुरजेवाला ने कहा, “कमलनाथ ने एआईसीसी में उन्हें दी गई जिम्मेदारियों से अपना इस्तीफा दे दिया। उनके निवेदन पर विचार कर सोनिया गांधी ने उनका इस्तीफा स्वीकार किया।”

SBI में पांच सहयोगी बैंकों और भारतीय महिला बैंक का विलय

शिखा पांडेय,

केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा भारतीय स्टेट बैंक के साथ उसके पांच सहयोगी बैंकों और भारतीय महिला बैंक को मिलाने की सैद्धांतिक तौर पर मंजूरी दे दी गई है। वे पांच सहयोगी बैंक स्टेट बैंक ऑफ पटियाला, स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद, स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर और स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर हैं तथा भारतीय महिला बैंक वह बैंक है, जिसे पिछली सरकार ने खास तौर से महिलाओं की बैंकिंग जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रारंभ किया था।

इस विलय का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि भारतीय स्टेट बैंक और भी बड़ा बैंक बन जाएगा। मंत्रिमंडल के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय स्टेट बैंक की चेयरपर्सन अरूंधती भट्टाचार्य ने कहा कि अभी कोई भारतीय बैंक दुनियां के चुनिंदा 50 बैंकों में शामिल नहीं है। लेकिन उम्मीद है कि विलय की प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद विश्व स्तर पर भारतीय बैंक और मजबूत पहचान के साथ नजर आएंगे। इससे मात्र भारतीय स्टेट बैंक को ही नहीं बल्कि सभी को फायदा होगा। एसबीआई का नेटवर्क बढ़ेगा और कई गुना लोगों तक यह पहुंच सकेगा। साथ ही तर्कसंगत शाखाओं और कुशल कर्मचारियों की बदौलत बैंक के कामकाज में भी सुधार आएगा।

विलय से कर्मचारी यूनियन नाराज़, आंदोलन की धमकी-

हालांकि विलय प्रस्ताव से कर्मचारी यूनियनों में नाराजगी है। इस मामले में वो आंदोलन की भी चेतावनी दे चुके हैं। लेकिन वित्त मंत्रालय के अधिकारियों की मानें तो इससे विलय की प्रक्रिया पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है। साथ ही कर्मचारियों और अधिकारियों को को संतुष्ट करने की हर संभव कोशिश होगी।

उल्लेखनीय है कि 31 मार्च 2016 तक के आंकड़ों के मुताबिक, पांच सहयोगी बैंकों के पास कुल जमा राशि 5 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा है जबकि इन्होंने करीब चार लाख करोड़ रुपए का कर्ज दे रखा है। इन पांच बैंकों का नेट वर्थ करीब 90 लाख करोड़ रुपए है। साथ ही इन पांच बैंकों में अधिकारियों और कर्मचारियों की संख्या करीब 70 हजार है। वहीं 31 मार्च, 2015 तक के आंकड़े बताते हैं कि नवम्बर 2013 में लांच किए गए भारतीय महिला बैंक की कुल जमा राशि 751 करोड़ रुपए थी जबकि इसने करीब 350 करोड़ रुपए का कर्ज दे रखा था। भारतीय स्टेट बैंक का इरादा चालू कारोबारी साल में विलय प्रक्रिया को पूरी करने का है।

आपको बता दें कि करीब साढ़े 16 हजार शाखाओं के साथ भारतीय स्टेट बैंक भले ही देश का सबसे बड़ा बैंक हो, लेकिन विश्व स्तर पर 50 बड़े बैंकों में इसे कोई जगह नहीं मिली है। विश्व स्तर पर इसकी ताजा रैकिंग 67 है। सरकार की कोशिश है कि देश में बैंकों की संख्या कम हो, लेकिन दुनिया के चुनिंदा बैंकों में किसी भारतीय बैंकों को जरूर जगह मिलनी चाहिए। इसी को ध्यान में रखते हुए विलय को प्राथमिकता दी जा रही है।

एविएशन पॉलिसी को मिली मंज़ूरी, निजी कंपनियों की मनमानी पर लगेगी रोक

शिखा पाण्डेय, 
केंद्र सरकार द्वारा देश में नई विमानन नीति को मंजूरी दे दी गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में यह निर्णय लिया गया है। इस पॉलिसी को मंजूरी मिलने से हवाई यात्रियों को काफी लाभ होगा और उनके हितों की अधिक रक्षा हो सकेगी। इस पालिसी के तहत विमानन कंपनियों की मनमानी पर रोक ज़रूर लगेगी, पर साथ ही उन्हें कुछ सहूलियतें भी दी जाएंगी।

नयी पॉलिसी में विमान कंपनियों को 5/20 नियम से राहत मिलेगी। नए नियम के तहत अब यात्रियों को एक घंटे की यात्रा के लिए मात्र 2500 रुपए चुकाने होंगे, जबकि 30 मिनट की यात्रा के लिए मात्र 1200 रुपए चुकाने होंगे। इससे मध्यम वर्गीय व निम्न मध्यमवर्गीय लोग भी आवश्यकता पड़ने पर हवाई उड़ान भर सकेंगे। घरेलू उड़ानों पर अधिक जोर होगा और विदेश उड़ान के नियम अधिक आसान बनाये जाएंगे। सिविल एविएशन मंत्रालय ने इसके लिए पूर्व में ही 15 जून तक सुझाव आमंत्रित किये थे।

जानिए क्या हैं पॉलिसी के अहम प्रावधान :

1. अगर कोई यात्री अपना टिकट कैंसिल करवाता है तो कंपनी कैंसिलेशन चार्ज के तौर पर यात्री से 200 रुपए से अधिक नहीं वसूल सकती।

2. अगर एयरलाइन अचानक फ्लाइट कैंसिल करती है, तो कंपनी यात्रियों को 400 प्रतिशत तक जुर्माना देगी।

3. नई विमानन नीति में सामान ले जाने के नियमों को भी बदला जाना है। यात्री 15 किलो सामान अपने साथ ले जा सकते हैं, लेकिन इसके ऊपर हर किलो पर 100 रुपए का अतिरिक्त चार्ज देना होगा। अबतक कंपनी इसके लिए 300 रुपये वसूलती थी।

4. टिकट कैंसिल कराने की स्थिति में घरेलू हवाई यात्रा के लिए रिफंड 15 दिनों और अंतरराष्ट्रीय यात्रा के मामले में 30 दिनों के भीतर रिफंड विमानन कंपनी को देना होगा।

5. नई पॉलिसी में कंपनियों को रीजन कनेक्टिविटी के मुद्दे पर बढ़ावा मिल सकता है।

आजाद भारत में सर्वाधिक गुलाम, शर्मसार कर देने वाले आंकड़े

अनुज हनुमत,

हमारे देश को स्वतंत्रता मिले करीब सात दशक का समय हो गया है। इस बीच दुनिया के सबसे ऊँचे पर्वत एवरेस्ट से लेकर अंतरिक्ष तक तिरंगा लहराया गया। शिक्षा, विज्ञान, व्यापार जैसे क्षेत्रों में भारतीयों ने दुनियाभर में अपना लोहा मनवाया है, पर इतना काफी नहीं है। आस्ट्रेलिया के मानवाधिकार समूह ‘वॉक फ्री फाउंडेशन’ ने वैश्विक दासता सूचकांक (ग्लोबल स्लेबरी इंडेक्स) जारी किया है, जो देश के विषय में एक शर्मनाक हकीकत से पर्दा उठाता है। सूचकांक के मुताबिक़, आधुनिक दासता के मामले में भारत दुनिया में शीर्ष पर है।

आजादी के इतने वर्षों बाद भी यहाँ 1.8 करोड़ लोग अभी गुलामी की जंजीरो में जकड़े हुए हैं और इसका शिकार अधिकतर बच्चे हैं। ये उक्त सूचकांक 167 देशों के 42 हजार प्रतिभागियों से बात कर तैयार किया गया है। इस सूचकांक को 15 भारतीय राज्यों और 80 फीसदी जनसंख्या से इस विषय पर बातचीत करके जारी किया गया, जिसमें 58℅ लोगो ने केवल भारत, चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश और उज़्बेकिस्तान से भाग लिया।

इस रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा समय में पूरे विश्व में 4.58 करोड़ लोग आधुनिक दासता का शिकार हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इस समय भारत देश में लगातार हो रहा है मानवधिकारों का हनन।

वैश्विक स्थिति –

1.भारत -1.80 करोड़ बंधुआ लोग

2.चीन -0.33 करोड़ बंधुआ लोग

3.पाकिस्तान-0.21 करोड़ बंधुआ लोग

4.बांग्लादेश -0.15 करोड़ बंधुआ लोग

5.उज़्बेकिस्तान-0.12 करोड़ बन्धुआ लोग

6.उत्तर कोरिया -0.11 करोड़ बंधुआ लोग

7.रूस -0.104 करोड़ बंधुआ लोग

आधुनिक दासता को ऐसी स्थिति के रूप में परिभाषित किया गया है, जहाँ व्यक्ति अत्याचार सहने को मजबूर है। वह चाह कर भी इसके लिए मना नहीं कर सकता और ना ही इसे छोड़ सकता है। उसे धमकाकर, प्रताड़ितकर, शक्ति के दुरूपयोग से उसकी मर्जी के विरुद्ध काम करवाया जाता है। बच्चों का शोषण भी इसी श्रेणी में आता है।

worst condition

कम उम्र के बच्चे सर्वाधिक पीड़ित-

दुनिया के सर्वाधिक आबादी वाले क्षेत्र एशिया की कुल जनसंख्या के दो तिहाई लोग गुलामी करने को मजबूर हैं, जिसमे भारत में गरीबी, जातीय भेदभाव, लैंगिक अनुपात में भारी अंतर के चलते गुलामी झेलने को मजबूर हैं लोग, इनमें घरेलू नौकरों के रूप में बच्चे सर्वाधिक पीड़ित हैं। भारत में भी सबसे ज्यादा स्थिति बुन्देलखण्ड की ख़राब है, जहाँ बाल मजदूरी सबसे ज्यादा देखने को मिलती है।

इस रिपोर्ट के आते ही एक बार फिर ये बहस तेज हो गई है कि क्या वास्तव में विकासशील देशों में मानवाधिकार के प्रति सरकारें चिंतित हैं ! क्योंकि एक तरफ इस पूंजीवादी अर्थव्यस्था के दौर में हर छोटे बड़े देश द्वारा विकास की अधाधुंध दौड़ लगाई जा रही है और इसी दौड़ में मनुष्य के ‘मानवाधिकार मूल्य’ विकास के घूमते पहिये के नीचे दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। ये सोचने वाली बात है कि क्या स्वतंत्रता मिलने के सात दशक बाद भी आज वास्तव में हम स्वतंत्र हो पाये हैं ? या जमीनी हकीकत कुछ और ही है ? कौन है इसका जिम्मेदार ?

कैराना की ज़मीनी हकीकत जानने पहुँची BJP की 8 सदस्यीय टीम

शिखा पांडेय,

आज कैराना से हिंदुओं के कथित पलायन की जमीनी हकीकत का जायज़ा लेने भाजपा की 8 सदस्यीय टीम कैराना पहुँची। यह जांच दल पार्टी के नेता सुरेश खन्ना के नेतृत्व में कैराना पहुंचा है। जांच दल में खन्ना के अलावा डा. राधामोहन दास अग्रवाल, सांसद बागपत डा. सतपाल सिंह, सांसद सहारनपुर राघव लखन पाल शर्मा, सांसद बुलन्दशहर डा. भोला सिंह, सांसद अलीगढ सतीश गौतम, सांसद आंवला धर्मेन्द्र कश्यप, यूपी के पूर्व डीजीपी बृजलाल हैं।

केंद्रीय आयुष एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्रीपद नायक ने मंगलवार को कहा कि कैराना में बहुसंख्यक समुदाय के कथित पलायन के मामले पर खुद प्रधानमंत्री नजर रख रहे हैं। श्रीपद नायक मंगलवार को एक दिवसीय दौरे पर बहराइच में थे। लोक निर्माण विभाग के अतिथि भवन में पत्रकारों से बातचीत में केंद्रीय मंत्री ने कैराना प्रकरण को काफी चिंताजनक बताया था और कहा था कि जल्द ही एक केंद्रीय दल जाँच के लिए कैराना जाएगा। उन्होंने कहा कि कैराना और मथुरा के जवाहरबाग की घटनाएं इस बात की सूचक है कि यूपी में कानून व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है।

श्रीपद नायक ने मथुरा के जवाहरबाग काण्ड में मारे गये पुलिसकर्मियों के परिजनों को प्रदेश सरकार की ओर से आर्थिक सहायता को दिखावा बताया और कहा कि पैसे देने से किसी की जान की क्षतिपूर्ति नहीं हो सकती है।

अमेरिका ने भारत के साथ काम करने की जताई इच्छा-

अपने विभाग की तरक्की और प्रयासों के विषय में बताते हुए नायक ने कहा कि विश्व की महाशक्ति अमेरिका ने भी भारतीय प्राचीन चिकित्सा पद्वति आयुष की महत्ता को समझा व स्वीकार किया है। अमेरिका ने आयुष पर भारत के साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताई है।

मंत्री ने बताया कि आयुष चिकित्सा का बजट इस बार 32 से बढ़ाकर 42 फीसदी कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक राज्य में एम्स की तरह एक आयुष चिकित्सा केंद्र बनाए जाने की योजना है। यहां आयुर्वेदिक नेचुरोपैथी व योग की व्यवस्था होगी। इसकी शुरुआत दिल्ली में हो चुकी है। दिल्ली के सरिता विहार में आयुष चिकित्सालय का निर्माण हो रहा है। तीन माह के भीतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका लोकार्पण करेंगे।

जम्मू: अमरनाथ यात्रा के पहले बिगड़ रहा माहौल, व्यवधान डालने की साज़िश!

अमित द्विवेदी,

आगामी दो जुलाई से श्री अमरनाथ यात्रा की शुरुआत होगी। चंद दिन ही बच्चे हैं इस यात्रा की शुरुआत के और पिछले चौबीस घंटे के भीतर हुई दो घटनाओं के बाद यह बात उठने लगी है कि कहीं यह आगामी यात्रा में व्यवधान डालने के लिए व्यूह तो नहीं रचा जा रहा है। मंगलवार रात हुई आप शम्भू मंदिर में विवाद और जम्मू में आतंकवादी हमलों के बाद माहौल लगातार बिगड़ता जा रहा है।

सोमवार को जम्मू-श्रीनगर मार्ग पर आतंकवादी हमला हुआ उसके एक दिन बाद ही आप शम्भू मंदिर में हंगामा। जब तक प्रशासन इस मामले को सुलझाता तब तक इलाके भर में माहौल एकदम गर्म हो चुका था। इलाके के कुछ जानकार बताते हैं कि सन् 2008 में भी कुछ इसी तरह का विवाद हुआ था, जिसकी वजह से दो माह तक पूरा जम्मू का इलाका बंद था, जिसकी वजह से जनजीवन एकदम अस्त व्यस्त रहा।

हालाँकि आप शम्भू मंदिर के हंगामे के बाद स्थानीय प्रशासन मसले को हल करने में लगा हुआ है, पुलिस-पब्लिक में हुई झड़प के बाद स्थिति भयावह न हो इसलिए मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी गई है।

कल रात विरोध कर रही भीड़ हिंसक हो गई, जिसके बाद कई गाड़ियों को भीड़ ने आग के हवाले कर दिया। उग्र भीड़ ने थाने का घेराव किया और पुलिस-पब्लिक में मुठभेड़ भी हुई। जिलाधिकारी सिमरनदीप सिंह ने बताया कि भीड़ को नियत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़ेंगे और लाठीचार्ज भी किया गया।