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Monday, August 3, 2026
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संगीत सोम ने उ. प्र. सरकार को दिया अल्टीमेटम

प्रमुख संवाददाता,

कैराना में हिंदुओं के कथित पलायन पर राजनीति गरमाती ही जा रही है। कैराना से हिन्दुओं के पलायन की लिस्ट जारी करने वाले सांसद हुकुम सिंह के मना करने के बावजूद बीजेपी विधायक संगीत सोम ने करीब 2000 समर्थकों के साथ अपनी ‘निर्भय यात्रा’ शुरू कर दिया था, हालांकि सरधना के 2 किलोमीटर बाद ही यह यात्रा रोक दी गई। संगीत सोम ने पलायन किए लोगों की वापसी के लिए 15 दिनों का अल्टीमेटम दिया है। नहीं तो सड़कों पर उतरने की बात कही है।

संगीत सोम की इस यात्रा से बीजेपी ने किनारा कर लिया है। बीजेपी इसे उनकी निजी यात्रा बता रही है। यूपी बीजेपी अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य भी इस यात्रा से किनारा करते दिखे लेकिन इसके बावजूद संगीत सोम यात्रा पर निकल गए और यात्रा के रोके जाने पर सोम और उनके समर्थकों ने पुलिस से जमकर बहस की।

इससे पहले हुकुम सिंह ने भी कहा था कि उनकी जानकारी के मुताबिक, संगीत सोम यात्रा नहीं निकाल रहे हैं तथा पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष का भी यही फैसला है। यूपी बीजेपी अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने भी कहा था कि अभी कैराना मुद्दे पर हमारा कोई कार्यक्रम नहीं है। रिपोर्ट आने के बाद हम राज्यपाल से मिलेंगे, फिर हमारा कार्यक्रम तय होगा। पर संगीत सोम ने इसे लेकर कहा कि हुकुम सिंह की ओर से उन्हें ऐसा कोई संदेश नहीं मिला है। वह सीनियर नेता हैं, वे जैसा कहेंगे वैसा ही होगा। इसके बावजूद संगीत सोम ने यात्रा निकाली।

दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी ने भी ‘सद्भावना यात्रा’ निकाली जबकि सपा नेता शिवपाल यादव कह रहे हैं कि कैराना से हिंदुओं का पलायन हुआ ही नहीं है। लगभग 500 लोगों की इस भीड़ को भी पुलिस ने रोक दिया।

उल्लेखनीय है कि प्रशासन ने किसी भी यात्रा को इजाज़त नहीं दी थी। हालांकि दोनों ही नेता अपने-अपने समर्थकों के साथ यात्रा निकालने पर अड़े हुए थे। लिहाजा इसके चलते सरधना में भारी सुरक्षा तैनात की गई है और धारा 144 लगा दी गई है।

दिसंबर में रिलीज़ होगी आमिर की ‘दंगल’

एंटरटेनमेंट डेस्क,

बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान ने अपनी आगामी बहुचर्चित फिल्म ‘दंगल’ की बची हुई शूटिंग दोबारा शुरू कर दी है। आमिर की यह फिल्म 23 दिसम्बर को रिलीज होने वाली है। इस फिल्म की शूटिंग लुधियाना के तूसा गांव के अखाड़ा लील में चल रही है। शूटिंग के बीच लिए गए लंबे गैप के बाद अपने किरदार के युवा अवतार में आमिर काफी फिट और यंग नज़र आ रहे हैं। 51 वर्षीय आमिर इस फिल्म में दिग्गज पहलवान महावीर सिंह फोगट की भूमिका निभा रहे हैं।

नितेश तिवारी द्वारा निर्देशित फिल्म में फोगट की अधेड़ावस्था के किरदार के लिए आमिर ने अपना वजन 95 किलोग्राम तक बढ़ा लिया था और अब पहलवान के युवा अवतार के लिए उन्होंने अपना वजन घटाया है। फिल्म के विषय में बात करते हुए आमिर ने कहा, “हम क्रिसमस की छुट्टियों पर आ रहे हैं। हम अपनी फिल्म को 16 दिसम्बर को रिलीज नहीं कर रहे हैं, यह क्रिसमस से दो दिन पहले 23 दिसम्बर शुक्रवार को को रिलीज होगी।”

आमिर ने कहा, “पहले जब मैं लुधियाना आया था, तो काफी मोटा था। उस वक्त हमने उम्रदराज फोगट से संबंधित दृश्यों की शूटिंग की थी। इस अवतार में 85 प्रतिशत फिल्म शूटिंग की जा चुकी है। अब पहलवान के युवा अवतार की शूटिंग बाकी है।” सोशल साइट्स पर जारी तस्वीर में आमिर काफी यंग नजर आ रहे हैं, फैट से फिट होने के लिए आमिर ने चार से पांच महीने का ब्रेक लिया था। एक पहलवान के किरदार को बखूबी निभाने के लिए आमिर ने कृपा शंकर पटेल से कुश्ती सीखी है।

इस फिल्म में साक्षी तन्वर को आमिर द्वारा निभाए जा रहे किरदार की पत्नी की भूमिका में देखा जाएगा। साथ ही फातिमा सना शेख और सान्या मल्होत्रा उनकी बेटियों गीता फोगट और बबीता कुमारी के किरदार में नजर आएंगी।

गुलबर्ग सोसाइटी दंगा, 11 दोषियों को उम्रकैद और 12 को 7 साल की सजा

अनुज हनुमत,

अहमदाबाद। देश के सबसे चर्चित मामलों में से एक गुलबर्ग सोसायटी केस में अहमदाबाद की स्पेशल कोर्ट ने फैसला सुना दिया है। 11 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है, जबकि 12 अन्य को 7-7 साल की कैद हुई है। एक अन्य आरोपी को 10 साल की सजा सुनाई गई है।

आप को बता दें कि गोधरा कांड के बाद हुए इस हत्याकांड ने पूरे देश में हलचल मचा दी थी और 27 फरवरी 2002 में गोधरा कांड के बाद उत्तेजित लोगों ने गुलबर्ग सोसायटी में तबाही मचाई थी, जिसमें कांग्रेस के पूर्व सांसद अहसान जाफरी सहित 69 लोगों की जान चली गयी थी। अहमदाबाद शहर में हुए दंगे के बाद दंगाइयों ने गुलबर्ग सोसायटी पर हमला बोल दिया था, जहां कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी अपने परिवार के साथ रहा करते थे।

उनतालीस लोगों के तो शव मिले भी, लेकिन बाकी तीस के शव तक नहीं मिले, जिन्हें सात साल बाद कानूनी परिभाषा के तहत मरा हुआ मान लिया गया।

दिवंगत एहसान जाफरी की पत्नी जकिया जाफरी ने फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह इससे न तो संतुष्ट हैं और न ही खुश हैं। उन्होंने कहा कि मैं अपने वकीलों से दोबारा बात करूंगी। यह इंसाफ नहीं है। इतने लोगों की मौत के बाद, क्या यही वो सब है जिसे कोर्ट ने तय किया?

गुलबर्ग सोसायटी पीड़ितों की लड़ाई लड़ने वाली सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ ने फैसले का स्वागत तो किया लेकिन कहा कि वह कम सजा दिए जाने से निराश हैं। उन्होंने कहा कि जिन्हें उम्रकैद नहीं हुई है, उनके लिए दोबारा अपील करेंगी। वहीं फैसला आते ही एक दोषी की बहन ने कोर्ट के बाहर बिलखते हुए अपने भाई को बेगुनाह बताया और कहा कि वह इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगी। कोर्ट के बाहर दोषियों के परिजनों ने भी कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले के खिलाफ अपील करेंगे।

फैसला आते ही राजनीतिक गलियारों में भी प्रतिक्रियायों का दौर शुरू हो गया है । लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा कि वह हर छोटे बड़े मामले में हस्तक्षेप करती है और इसी का असर है कि इस केस में बड़ी मछलियों को नहीं पकड़ा गया। उन्होंने इसे साजिश बताते हुए कहा कि दिखावे के लिए 2-4 लोगों को पकड़कर दिखाया जा रहा है, जनता माफ नहीं करेगी।

हकीकत बयां करती फिल्म “उड़ता पंजाब’

समीक्षा- फिल्म ‘उड़ता पंजाब’ 

अमित द्विवेदी,

रेटिंग- ***/5

निर्माता- बालाजी मोशन पिक्चर्स/फैंटम फिल्म्स
लेखक-निर्देशक- अभिषेक चौबे
संगीत- अमित त्रिवेदी

 

तमाम विवाद के बाद अंततः अभिषेक चौबे द्वारा निर्देशित फ़िल्म उड़ता पंजाब रिलीज़ हो गई। सेंसर बोर्ड और फ़िल्म के निर्माताओं के विवाद को सुलझाने के लिए उच्च न्यायालय को भी हतक्षेप करना पड़ा। आइए जानते हैं अभिषेक द्वारा डायरेक्ट की गई फ़िल्म उड़ता पंजाब है कैसी?

कहानी-

फ़िल्म उड़ता पंजाब में ड्रग्स की बुरी लत की वजह से राज्य की सामाजिक स्थिति को दर्शाने की कोशिश की गई है। ड्रग्स की वजह से युवाओं पर क्या असर पड़ रहा है, इसी को सिनेमाई शक्ल दी है निर्देशक अभिषेक चौबे ने। फ़िल्म मशहूर पॉप सिंगर टॉमी सिंह (शाहिद कपूर), पंजाब की एक डॉक्टर और सोशल वर्कर प्रीत साहनी (करीना कपूर), बिहार से पंजाब आई लड़की मेरी जेन (आलिया भट्ट) और इंस्पेक्टर सरताज सिंह (दिलजीत दोसांझ) के इर्द गिर्द घूमती है। टॉमी सिंह की लाइफस्टाइल पॉप स्टार की तरह है, जिसकी संगत में रहने वाले ज़्यादातर युवा नशेड़ी होते हैं या हो जाते हैं।

ड्रग्स की लत होने की वजह से टॉमी को काफी दिक्कतों का भी सामना करना पड़ता है, फिर भी उसे यह बात समझ में नहीं आती। एक रात जब उसे उसके घर से पुलिस उठा कर जेल में बंद कर देती हैं तो वहाँ हुए एक वाक़ये से उसे समझ में आता है कि उसकी वजह से कितने युवाओं पर बुरा असर पड़ रहा है।

यूँ तो इंस्पेक्टर सरताज ड्रग सप्लायर्स से नाके पर मिले पैसे से खुश है लेकिन उसकी सोच और ज़िन्दगी तब करवट लेती है, जब उसे पता चलता है कि उसके भाई की भी ज़िन्दगी इन्ही ड्रग सप्लायर्स की वजह से बर्बाद हो रही है। तब जाकर वह डॉक्टर प्रीत के साथ इन अपराधियों के खिलाफ मोर्चा शुरू करता है।

मेरी जेन (आलिया), बिहार से आई हुई एक लड़की जो हॉकी में अपना नाम कमाना चाहती है, पंजाब पहुँचती है। जहां उसे गुज़ारे के लिए एक गाँव में मज़दूरी करने को मिल जाता है। एक रात खेत में उसे एक पोटली मिलती है, कुछ देर बाद में उसे पता चलता है कि उसमे ड्रग है, जो काफी कीमती है। एक ड्रग एडिक्ट से उसे उसके खरीददार का पता चलता है, जिसे बेचने वो निकल पड़ती है। और यहीं उसका जीवन उलझ कर रह जाता है। इन चारों किरदारों की ज़िन्दगी का मकसद एक समय के बाद ‘ड्रग दी माँ दी’ है।

फ़िल्म इंटरवल के पहले काफी धीमी रफ़्तार से आगे बढ़ती है लेकिन इंटरवल के बाद यह दर्शकों को हंसाने-रुलाने में कामयाब नज़र आती है। निर्देशक अभिषेक ने बड़ी बारीक़ी से पंजाब की समस्याओं को समझा है, जो उनकी फ़िल्म में साफ़ नज़र आती है।

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अभिनय-

फ़िल्म में सभी मुख्य कलाकरों ने अच्छा काम किया है। खासकर आलिया ने बेहतरीन अभिनय किया है। भोजपुरी लहज़े को आलिया ने जैसे आत्मसात कर लिया है। शाहिद कई जगहों पर बनावटी नज़र आए हैं लेकिन जैसे जैसे फ़िल्म समाप्ति की ओर बढती है शाहिद प्रभावी होते जाते है। दिलजीत दोसांझ और करीना की केमिस्ट्री भी प्रभावी है। सतीश कौशिक हमेशा की तरह बेहतरीन हैं।

संगीत-

अमित त्रिवेदी का संगीत प्रभावित करता है। 7 में से 2 गानों को ऑडिएंस पहले ही पसंद कर चुकी है।

क्यों देखें-

ड्रग्स की वजह से देश की हो रही दुर्दशा को समझने के लिए। निर्देशक और निर्माता की हौसला आफजाई के लिए जिन्होंने इस विषय पर फ़िल्म बनाने की हिम्मत जुटाई।

बुरे दिनों में याद आया बिछड़ा भाई, कांग्रेस को भाजपा नेता से आस

विशेष संवाददाता,

कांग्रेस पार्टी, अपनी डूबती नैया को पार लगाने की हर संभव कोशिश में जुटी है। कहीं राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाने की मांग है, तो कहीं प्रियंका का चुनावी डेब्यू कराने की। यहाँ तक तो फिर भी ठीक था, लेकिन एक नई मांग ने सबको चौंका कर रख दिया है। अगर कांग्रेस का कोई नेता ये कहे कि कांग्रेस यूपी में वरुण गांधी को अपना मुख्यमंत्री उम्मीदवार बनाए, तो जाहिर है इस पर हैरानी तो होगी ही।

यूपी कांग्रेस के महासचिव उमेश पंडित ने वरुण को कांग्रेस में लाकर यूपी का सीएम उम्मीदवार घोषित करने की मांग की है। उमेश पंडित ने कहा है कि वरुण गांधी गांधी-नेहरू परिवार के हैं। उनका पार्टी में शामिल होना पार्टी के लिए और राहुल गांधी की सांप्रदायिकता के खिलाफ लड़ाई के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है।

पंडित का ये बयान उस समय आया है जब वरुण के बीजेपी से नाराज चलने की खबरें इन दिनों चर्चा में हैं। पिछले दिनों बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने यूपी चुनाव की रणनीति पर बातचीत के लिए यूपी के 71 सांसदों की बैठक बुलाई थी। इस बैठक में सुल्तानपुर से बीजेपी सांसद वरुण गांधी अनुपस्थित थे। इलाहाबाद में राष्ट्रीय कार्यरकारिणी की बैठक के दौरान ही यह बैठक बुलाई गई थी। वरूण की गैर-मौजूदगी के बारे में पूछे जाने पर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने बताया कि निजी कारण से वरुण गांधी बैठक में शामिल नहीं हो पाए थे।

सूत्रों की मानें तो वरुण गांधी पार्टी पर अपनी उम्मीदवारी को लेकर दबाव बना रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस के उमेश पंडित वरुण गांधी की कथित नाराजगी में अपने लिए एक उम्मीद की किरण ढूंढ रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि यूपी में कांग्रेस ने अभी तक किसी को सीएम उम्मीदवार घोषित नहीं किया है। जहाँ वरुण गांधी के समर्थक उन्हें बीजेपी के सीएम के तौर पर प्रोजेक्ट करने की मांग कर रहे हैं वहीं कांग्रेस के नेता का यह बयान और मांग खलबली तो मचाएंगे ही।

उड़ान भरने को तैयार ‘उड़ता पंजाब’

शिखा पाण्डेय,
तमाम अड़चनों के बाद अंततः ‘उड़ता पंजाब’ सिनेमा घरों में उड़ान भरने को तैयार है। फिल्‍म को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) से सेंसर प्रमाण पत्र मिल गया है। सेंसर प्रमाण पत्र को अभिनेता शाहिद कपूर द्वारा आनलाइन पोस्ट किया गया है।  फिल्‍म का डायरेक्‍शन अभिषेक चौबे ने किया है, जिसमें शाहिद कपूर, आलिया भट, करीना कपूर और पंजाबी गायक दलजीत दोसांझ मुख्‍य भूमिका में हैं। इस फिल्म को ‘ए’ सर्टिफिकेट दिया गया है।
इस फिल्म के निर्माता बालाजी मोशन पिक्चर्स ने ट्विटर पर लिखा है, ” ‘उड़ता पंजाब’ को अंतत: उड़ता प्रमाण पत्र मिल गया। आइए दो दिनों में उड़ान भरें।”
फ़िल्म लीक होने से दुखी बॉलीवुड-
जहाँ एक ओर आज फ़िल्म के रिलीज़ होने की खुशी है, वहीं दूसरी ओर फिल्म के लीक होने से पूरा बॉलीवुड नाराज है। फिल्म अभिनेता आमिर खान ने गुरुवार को कहा कि अगर फिल्म ‘उड़ता पंजाब’ की आनलाइन लीक हुई कॉपी सेंसर बोर्ड वाली है तो यह बहुत शर्म की बात है। इससे केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) की साख बुरी तरह प्रभावित होगी।

गौरतलब है कि सेंसर बोर्ड की रीवाइजिंग कमेटी ने फिल्म निर्माताओं से पंजाब के सभी उल्लेखों को हटाने तथा कुल 89 कट करने को कहा था। इसके बाद फिल्‍म के सह निर्माता अनुराग कश्‍यप और सेंसर बोर्ड के प्रमुख पहलाज निहलानी के बीच तीखी बहस भी हुई थी। वहीं फिल्‍म निर्माताओं ने बोर्ड के खिलाफ बंबई हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। बाद में कोर्ट ने सिर्फ एक कट के साथ फिल्‍म को पास कर दिया और बोर्ड से फिल्‍म को सर्टिफिकेट देने को कहा था।

सोनिया गांधी की आपत्तिजनक तस्वीर को लेकर दो गुट भिड़े, 1 की मौत 6 घायल

शिखा पाण्डेय,
कांग्रेस पार्टी या कांग्रेस सुप्रीमो सोनिया गांधी मात्र राजनीति की वजह से सुर्ख़ियों में हो ऐसा ज़रूरी नहीं। जबलपुर मध्य प्रदेश में व्हाट्स एप्प ग्रुप पर शेयर की गई सोनिया गांधी की एक आपत्तिजनक तस्वीर पर आज दो गुटों के बीच लड़ाई झगड़े में एक व्यक्ति की मौत हो गई और छह अन्य घायल हो गए। घायलों में पांच की हालत गंभीर है।

क्या है मामला-

कांग्रेस कारपोरेटर जतिन राज ने अपने इलाके के लोगों से संपर्क रखने के लिए व्हाट्सएप पर ‘विजय नगर फ्रेंड्स’ नाम से एक ग्रुप बनाया था। क्षेत्र के शहर पुलिस अधीक्षक इंद्रजीत बलसावर ने कहा कि प्रशांत नायक नामक मेंबर ने व्हाट्सएप ग्रुप पर कथित रूप से एक तस्वीर डाली जिसमें सोनिया को बर्तन धोते हुए दिखाया गया और तस्वीर के साथ व्यंग्यात्मक लहजे में लिखा था कि (प्रधानमंत्री नरेंद्र) मोदी कांग्रेस अध्यक्ष को ऐसी स्थिति में ले आए। इस आपत्तिजनक तस्वीर ने ग्रुप को दो विरोधी गुटों में बांट दिया।

मध्यरात्रि के बाद दोनों गुट अहिंसा चौक पर एकत्रित हुए और सोनिया को लेकर उनके बीच गरमागरम बहस हुई। अधिकारी ने कहा कि इस बीच खबर मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और उनसे अपने मतभेद दूर करने के लिए पुलिस थाने में आने को कहा। कांग्रेस कारपोरेटर समूह के एक सदस्य अनीमेष ने आरोप लगाया कि जब दोनों गुट थाने पहुंचे तो उनके बीच कथित रूप से जमकर बहस हुई और उमेश वर्मा नाम के व्यक्ति के चाकू लग गया जिसे अस्पताल ले जाया गया जहां उसकी मौत हो गई।

उन्होंने मांग की कि पुलिस को सच सामने लाने के लिए थाने में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज को सार्वजनिक करना चाहिए। बलसावर ने कहा कि स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा, हालाँकि पुलिस ने थाने के अंदर हिंसा की बात से इंकार किया। उन्होंने कहा कि हिंसा उस समय हुई जब समूह थाने जाने वाले रास्ते में थे। उन्होंने कहा कि घायलों में अधिवक्ता नायक भी शामिल हैं और उन्हें एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। दोनों समूहों के लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया है और आगे की जांच जारी है।

जतिन राज के गुट के अनुसार, विजय नगर पुलिस थाने के अंदर विरोधी गुट ने चाकुओं का खुलेआम प्रयोग किया जहां वे शिकायत दर्ज कराने गये थे। दोनों गुटों के हिंसक होने पर स्थिति संभालने के लिए पुलिस को अन्य थानों से अपने सहयोगियों को बुलाना पड़ा।

सियासत, सरकार, बुंदेलखंड और कैराना मुद्दा

अनुज हनुमत

सबकी अपनी-अपनी रिपोर्ट हैं और सबके अपने अपने दावे। सरकार तो फिर भी सरकार बनी हुई है, लेकिन विपक्ष ऐसे सवेंदनशील मौके पर भी विपक्ष बनने को तैयार नही। चलिए सीधे विषय पर आते हैं। अभी हाल ही में कैराना से बीजेपी सांसद हुकुम सिंह ने एक रिपोर्ट क्या जारी की, मानों पूरे प्रदेश की सियासी बयार ही बदल गई। रिपोर्ट में हुकुम सिंह ने कहा कि कैराना में सांप्रदायिक गतिरोध के चलते लगभग 400-500 हिन्दू परिवारों ने पलायन किया। जैसे ही ये खुलासा हुकुम सिंह ने किया वैसे ही यूपी के सियासी गलियारों में हवायें सर्द हो गई। इस मौके पर चौका मारने के लिए हर पार्टी ने अपने कुछ विशेष नेताओं की आपातकाल बैठक बुलाई और उन्हें सभी जरुरी बातें सिखाई। अभी तक तो सभी पार्टियों के नेताओं ने इस प्रशिक्षण का काफी हद तक फायदा उठाया है।

विपक्ष की नेता और बसपा सुप्रीमो मायावती का कहना है कि भाजपा आने वाले चुनाव से पहले प्रदेश में साम्प्रदायिक हिंसा फैलाना चाहती है और इस काम में सपा उसका साथ दे रही है। मायावती का कहना है कि प्रदेश की ये वर्तमान सरकार गुंडागर्दी और बाहुबलियों की सरकार है और कैराना के पलायन के लिए बुन्देलखण्ड जैसे हालात ही जिम्मेदार हैं, जिसमे सबसे बड़ा कारण ‘भुखमरी’ और ‘बेरोजगारी’ है। मौजूदा सरकार का मानना है कि ऐसा कोई कारण नही है और ये सब भाजपा की ओछी राजनीति का ही परिणाम है।

इस मामले में स्थानीय प्रशासन का कहना है कि कैराना के पलायन में अभी हमें शुरूआत में आर्थिक कारण ही समझ आ रहे हैं। यानि कैराना के विषय पर न तो विपक्ष एक है और न ही मौजूदा सरकार। लेकिन एक बात तो स्पष्ट है कि यूपी में अगले विधानसभा के चुनावों की विसात बिछ चुकी है और राजनीतिक शतरंज के इस खेल में हर कोई बाजी मारना चाहता है। अगर हम बुन्देलखण्ड की बात करें तो पिछले पंद्रह सालों में लगभग 62 लाख लोगों ने पलायन किया है। यहाँ के लोगो के पलायन करने का मुख्य कारण कर्ज, बेरोजगारी और भुखमरी है लेकिन हम दहशत और खौफ के कारण को भी झुठला नहीं सकते हैं। कैराना की सच्चाई कुछ भी हो लेकिन दर्द बुन्देलखण्ड जैसा ही है। अपनों से बिछड़ने का दर्द, अपने घर-द्वार छोड़ने का दुःख।

इससे एक बात तो स्पष्ट है कि ये सब वोट बैंक की गंदी राजनीति का नतीजा है, जो अपने ही देश में एक नई खाईं पैदा करने में आमादा है! जिसे अगर समय रहते नही समझा गया तो इसमें पूरा देश समा जायेगा। एक दूसरा तथ्य ये भी हो सकता है कि सूखे ने किसानों की कमर तोड़ रखी है और बाकी का काम महंगाई कर रही है। कैराना की एक सच्चाई ये भी हो सकती है कि ये कुछ ऐसे कारण है, जिसके कारण बड़े पैमाने पर इस क्षेत्र से पलायन शुरू हो गया हो। कारण कुछ भी हो, ऐसे विषय एक अजीब सा संदेह पैदा करता है, इसलिए हो सकता है कि आने वाले दिनों में कैराना जैसी स्थिति वाले और भी कई शहर, गाँव सामने आ सकते हैं।

हिन्दुस्तान की ‘एनएसजी सदस्यता’ को लेकर चीं-चीं करता चीन

अमित द्विवेदी,

भारत को परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) का सदस्य न बनाया जाए, इसलिए चीन रोज़ एक नया राग अलापता नज़र आ रहा है। इस बार चीन ने भारत-पाक के परमाणु संतुलन की बात के आधार पर भारत को एनएसजी में शामिल न करने की बात कही है। चीन के एक आधिकारिक मीडिया समूह ने कहा कि यदि भारत को इस विशिष्ट समूह में शामिल किया जाता है तो भारत और पाकिस्तान का परमाणु संतुलन बिगड़ जाएगा।

जबसे भारत को एनएसजी में शामिल करने की बात हो रही है, पाकिस्तान और चीन के होश ही उड़े हुए हैं। चीन और पाकिस्तान हर संभव कोशिश कर रहे हैं कि भारत को इस समूह से दूर ही रखा जाए। ग्लोबल टाइम्स में प्रकाशित एक लेख के मुताबिक़, एनएसजी में भारत का प्रवेश ‘दक्षिण एशिया में रणनीतिक संतुलन को हिला देगा और साथ ही इससे पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता पर संकट के बादल भी मंडराने लगेंगे।’ हालांकि इस लेख में यह भी स्पष्ट है कि चीन 48 सदस्यों वाले परमाणु क्लब में भारत को शामिल किए जाने का स्वागत कर सकता है, बशर्ते यह ‘नियमों के साथ हो’।

चीन के इस रवैये से भारत और चीन के रिश्तों पर भी असर पड़ सकता है। क्योंकि एनएसजी में भारत सदस्य को लेकर सबसे ज़्यादा विरोध चीन की तरफ से ही देखने को मिल रहा है। हालाँकि पाकिस्तान भी कई देशों से भारत के विरोध की बात कर रहा है, जो इस समूह के सदस्य हैं।

खबरों की मानें तो चीन इसलिए ज़्यादा चिंतित है कि यदि भारत को एनएसजी की सदस्यता मिल जाती है तो उसका मित्र राष्ट्र पाकिस्तान पीछे छूट जाएगा। एक हिंदी डेली की मानें तो इसी मान मनौव्वल की फेहरिस्त में दो और नाम टर्की और न्यूज़ीलैंड का नाम भी जुड़ गया है। टर्की जहां पाकिस्तान के सहयोग में है वहीं न्यूज़ीलैंड भारत के समर्थन में नज़र आ रहा है।

‘कैराना मुद्दे’ पर सियासत तेज़, आज विपक्ष का प्रतिनिधि मंडल करेगा दौरा

प्रमुख संवाददाता,

यूपी के कैराना से पलायन का मामला और अधिक राजनीतिक रंग में रंगता नज़र आ रहा है। आज जेडीयू, सीपीएम और एनसीपी समेत पांच विपक्षी दलों का एक प्रतिनिधिमंडल कैराना और कांधला जाएगा। वहाँ यह दल स्थानीय लोगों से मिलेगा और सिविल सोसायटी की एक बैठक को संबोधित करेगा। इस प्रतिनिधिमंडल में जेडीयू सांसद के सी त्यागी, सीपीएम सांसद मोहम्मद सलीम, सीपीआई के डी राजा, एनसीपी के सांसद डी पी त्रिपाठी और आरजेडी प्रवक्ता मनोज झा शामिल होंगे।

जेडीयू के महासचिव के सी त्यागी ने एक बयान में कहा कि वे गोधरा और मुजफ्फरनगर के दंगों को आजमा चुके हैं और नतीजे देख चुके हैं। और अब उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों से पहले भी माहौल ऐसा ही बनाया जा रहा है। त्यागी ने कहा कि वे समाज के सभी वर्गों से मुलाकात करेंगे और कैराना में सिविल सोसायटी के लोगों को संबोधित करेंगे।

कैराना में हिंदुओं के कथित पलायन पर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के बयान की निंदा करते हुए विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि बयान ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में तनाव और बेचैनी पैदा कर दी है। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने कैराना पलायन को लेकर शाह के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई और इसकी कड़ी निंदा की है।

उल्लेखनीय है कि कैराना में हिंदुओं के कथित पलायन को लेकर बने हालात की समीक्षा करने के लिए बीजेपी के नौ सदस्यीय एक दल ने बुधवार को कस्बे का दौरा किया। इस मुद्दे पर कांग्रेस ने कहा कि बीजेपी के एक सांसद के रुख में बदलाव के बाद पार्टी नेतृत्व बेनकाब हो गया है।