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Friday, September 11, 2026
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उत्तराखंड: बेटिकट दौड़ रही हैं रोडवेज बसें

नारायण सिंह,

तमाम सख्ती और मुख्यमंत्री की नाराजगी के बाद भी रोडवेज बसें बेटिकट दौड़ रही हैं। तीन दिन पहले काशीपुर डिपो की पूरी बस बेटिकट पकड़ी गई थी, तो अब दिल्ली से कोटद्वार जा रही बस में आधी से ज्यादा सवारी बेटिकट मिलीं। बस में 41 सवारी थी, लेकिन परिचालक ने टिकट 14 को ही दिया हुआ था। यही नहीं, चेकिंग टीम को देख परिचालक टिकट मशीन लेकर भाग गया। स्थानीय लोगों ने बाइक से पीछा कर उसे दबोचा। रोडवेज मुख्यालय ने चालक-परिचालक को बर्खास्त कर उनके विरुद्ध मुकदमे के आदेश दिए हैं।

रोडवेज मुख्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक कोटद्वार डिपो की साधारण बस (यूके07-पीए-0914) सोमवार रात करीब 11 बजे दिल्ली से कोटद्वार के लिए चली। बस में 41 सवारियां थीं। कई दिन से मुख्यालय को इस बस के बेटिकट दौड़ने की शिकायत मिल रही थी। लिहाजा, इसे चेक करने के लिए देहरादून से निरीक्षक राज सिंह राठी और रविंद्र सिंह की टीम भेजी गई।

टिकट मशीन ही लेकर भागा कंडक्टर-

टीम ने मोदीनगर में बस को रुकने का इशारा किया, लेकिन चालक ने बस नहीं रोकी। राठी ने चालक को चेतावनी दी, तो उसने कुछ दूर जाकर बस रोक ली। टीम वहां पहुंची, मगर चालक-परिचालक ने दरवाजा नहीं खोला। बस का आगे का शीशा टूटा हुआ था। टीम ने किसी तरह बस का दरवाजा खुलवाया, लेकिन परिचालक ने टिकट मशीन और बैग छुपा दिया। इसके बाद परिचालक बैग और टिकट मशीन समेत टूटे हुए शीशे से कूदकर फरार हो गया। टीम ने शोर मचाया तो वहां से गुजर रहे स्थानीय बाइक सवारों ने बदमाश समझकर परिचालक का पीछा किया और उसे दबोच लिया। हंगामा होने पर मोदीनगर पुलिस भी वहां पहुंच गई।

परिचालक को थाने ले जाकर पुलिस की मदद से बैग व मशीन कब्जे में ली गई। बस में 27 सवारी बगैर टिकट मिलीं। परिचालक ने सभी को हाथ से बने फर्जी टिकट देकर किराया ले रखा था। टीम ने निगम मुख्यालय को रिपोर्ट दी। जिस पर प्रबंध निदेशक बृजेश कुमार संत ने आरोपी परिचालक आसिफ हुसैन व चालक मोहम्मद इमरान खान को बर्खास्त करने के आदेश दिए। दोनों आउट-सोर्सिग से नियुक्त हुए थे।

खुद को सही ठहराने के लिए इस्लाम को ‘‘विकृत” कर रहे हैं आतंकी संगठन: व्हाइट हाउस

अनुज हनुमत,

एक बार फिर अमेरिका ने आतंकी संगठनों पर कड़ी टिप्पणी करते हुए ये स्पस्ट सन्देश दिया है कि वह इन संगठनों के खिलाफ हर जरुरी व कड़े कदम उठाएगा। व्हाइट हाउस ने कहा है कि आईएसआईएस जैसे आतंकी समूह अपने उस ‘हत्यारे, फर्जी एजेंडे’ को सही ठहराने के मकसद से इस्लाम को ‘‘विकृत’’ कर रहे हैं, जिसके तहत वे खुद को अमेरिका से लड़ने वाले ‘मुजाहिदीन’ के तौर पर पेश करने के लिए धर्म की आड़ लेते हैं।

एक प्रेस वार्ता के दौरान व्हाइट हाउस के प्रवक्ता जोश एर्नेस्ट ने कहा, ‘‘सच्चाई यह है कि ये संगठन अपने हत्यारे, विनाशकारी एजेंडे को सही ठहराने के लिए इस्लाम धर्म को विकृत कर रहे हैं। राष्ट्रपति ओबामा ने भी यह बात कई मौकों पर कही है। वह इसको लेकर खुलकर बोलते रहे हैं जो ये संगठन करने का प्रयास कर रहे हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘वे खुद को मुजाहिदीन या धार्मिक नेता बताने, अमेरिका के साथ लड़ने के लिए इस्लाम की आड़ लेने का प्रयास कर रहे हैं।’’

पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में एर्नेस्ट ने कहा, ‘‘ये लोग गलत हैं। ये उनका फर्जी एजेंडा है। यह मिथक है। यह सच्चाई नहीं है। यह प्रशासन और इससे पहले का प्रशासन इस मिथ को खत्म करने और यह स्पष्ट करने के लिए काफी आगे तक गया कि ये संगठन इस्लाम का विकृत रूप पेश करते हैं।’’ उनका यह बयान ओरलैंडो के एक गे क्लब में गोलीबारी की घटना के बाद आया है। अफगान मूल के युवक उमर मतीन ने गोलीबारी की जिसमें करीब 50 लोग मारे गए। उन्होने कहा कि आईएसआईएस को खत्म करने में हमारी सफलता के लिए मुस्लिम जगत में अमेरिका के साझेदार महत्वपूर्ण हैं और कार्यवाही चल भी रही है।

व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने कहा कि बहुत सारे अमेरिकी मुसलमान हैं, जो आतंकवाद के खतरे से देश की रक्षा के लिए सशस्त्र बलों और खुफिया क्षेत्र में सेवा दे रहे हैं। इसलिए हम इन आतंकी संगठनों को उनके मंसूबो में कामयाब नही होने देंगे ।

‘कैराना मुद्दे’ पर राजनीति भाजपा की सस्ती लोकप्रियता पाने की कोशिश – अखिलेश यादव

प्रमुख संवाददाता,
कैराना से पलायन के मामले पर राजनीति थमने का नाम नहीं ले रही। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर कहा, “भाजपा ने इस मुद्दे को सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए निकाला है। सच्चाई अब सामने आ रही है यह अच्छा है।”

मायावती ने इस विषय में अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, “कैराना के मुद्दे को तूल देना भाजपा की बहुत बड़ी साज़िश है। उनकी कोशिश है कि कई अहम मुद्दों से जनता का ध्यान भटक जाए।”

भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने कल इलाहाबाद में हुई रैली में कहा था,” पूरे देश को इस पर चिंता करनी चाहिए। उन्होंने इस घटना को आंख खोलने वाली घटना बताया था। भाजपा इस मुद्दे को लेकर राज्य सरकार पर जमकर निशाना साध रही है।” पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने  कैराना की पूरी जांच के लिए  एक सात सदस्यों की टीम बनाई है, जो वहां जाएगी और स्थिति की समीक्षा करेगी। रिपोर्ट आने के बाद पार्टी इस मुद्दों को लेकर आगे की रणनीति बनाएगी।

दूसरी और इस मुद्दे को उठाने वाले सांसद हुकुम सिंह अब स्वयं अपने बयान से पलट रहे हैं। उन्होंने पहले कहा था कि यह एक खास समुदाय के प्रभाव के कारण हो रहा है और एक खास समुदाय को ही निशाना बनाया जा रहा है। अब उन्होंने मीडिया में बयान दिया है कि इसमें कोई कम्युनल एंगल नहीं है। कैराना के लोगों के बाहर जाने का सबसे बड़ा कारण यहां फैली गुंडागर्दी और जुर्म है।

इस मामले पर उन्होंने समाजवादी पार्टी पर पलटवार करते हुए कहा कि सपा ही इसे कम्युनल एंगल दे रही है और मामले को राजनीतिक तौर पर भुनाना चाहती है। हुकुम सिंह ने यह भी साफ कर दिया कि वह अपनी दी हुई सूची के साथ हैं और अगर उसमें कोई गलती निकलती है तो उसके सुधार के लिए भी तैयार हैं लेकिन इस मामले पर राज्य सरकार को कुछ करना चाहिए।

कोर्ट ने विजय माल्या को भगोड़ा घोषित किया

अनुज हनुमत

देश के सबसे चर्चित शराब व्यवसायी विजय माल्या को आज भगोड़ा घोषित कर दिया गया। बैंक ऋण अदायगी में कथित चूक के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका पर यहां की एक विशेष पीएमएलए अदालत ने यह आदेश जारी किया। यह मामला विजय माल्या के खिलाफ धन शोधन जांच से जुड़ा है। अब आदेश के बाद माल्या की दिक्कते बढ़ सकती हैं ।

विशेष न्यायधीश पी.आर. भावके ने अपने फैसले में कहा, ‘‘प्रवर्तन निदेशालय के आवेदन को अनुमति दी जाती है और विजय माल्या के खिलाफ फरमान जारी किया जाता है।’’ प्रवर्तन निदेशालय ने सीआरपीसी की धारा 82 के तहत माल्या को भगोड़ा घोषित करने का अनुरोध करते हुए इस अदालत का रुख किया था। ईडी का कहना है कि माल्या के खिलाफ धन शोधन कानून :पीएमएलए: के तहत एक गैर-जमानती वारंट समेत ‘कई’ गिरफ्तारी वारंट लंबित हैं।

ईडी के मुताबिक, विभिन्न मामलों में माल्या के खिलाफ कई गिरफ्तारी वारंट लंबित हैं, जिसमें से एक मामला चेक बाउंस होने का है और वह धन शोधन के एक मामले में भी वांछित है।

भारत ने अप्रैल में ही माल्या का पासपोर्ट रद्द कर दिया था। इस सिलसिले में भारत की ओर से ब्रिटेन को उन्हें डिपोर्ट करने की रिक्वेस्ट भी की गई है।

GST को लेकर तमिलनाडु के अलावा सभी राज्यों की हरी झंडी

प्रमुख संवाददाता, 

मोदी सरकार इस बार मानसून सत्र में जीएसटी पर एक राय बनाकर इसे पास कर दिया जाने के लिए जी तोड़ मेहनत कर रही है। कोलकाता में राज्यों के वित्त मंत्रियों की इस मुद्दे पर केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली के साथ आज बैठक हुई है। इस बैठक में सबने मिलकर जीएसटी पर चर्चा की। बैठक के बाद जेटली ने कहा कि तमिलनाडु को छोड़कर बाकी सारे राज्यों के वित्त मंत्रियों ने या तो जीएसटी का समर्थन किया अथवा इसे स्वीकार किया। तमिलनाडु ने विधेयक को लेकर कुछ चिंताएं जाहिर की हैं।

राज्यों के वित्त मंत्रियों के साथ बैठक के बाद जेटली ने कहा, “प्रत्येक राज्य ने जीएसटी पर अपना पूरा नजरिया पेश किया है। एक राज्य तमिलनाडु को छोड़कर प्रत्येक राज्य ने जीएसटी के विचार का समर्थन किया है। तमिलनाडु ने कुछ सुझाव दिए हैं जिन पर गौर किया जाएगा।” इस बिल में कई सुधारों के लिए भी राज्यों ने अपने तर्क दिए हैं जिस पर सरकार विचार कर रही है।

मानसून सत्र में जीएसटी बिल पास कराने के लिहाज से ये बैठक काफी अहम मानी जा रही है। हालांकि इस बैठक में टैक्स दरों को बिल में शामिल करने पर चर्चा नहीं की जाएगी। साथ ही एक फीसदी अतिरिक्त टैक्स लगाने का मुद्दा इस बैठक के एजेंडे में शामिल नहीं है। बजट सत्र में विपक्ष के विरोध की वजह से जीएसटी बिल एक बार फिर अटक गया था।

इस बैठक में 22 राज्यों के वित्त मंत्रियों ने हिस्सा लिया। दो दिनों 15 जून तक चलने वाली इस बैठक में जीएसटी कानून के मॉडल पर भी चर्चा की जाएगी जिसे आगे चलकर केंद्र और राज्य सरकारें अपनाएंगी।

आपको बता दें कि जीएसटी देश भर में विनिर्माण, वस्तु और सेवाओं की बिक्री एवं उपभोग पर लगने वाला अप्रत्यक्ष कर होगा। यह केंद्र एवं राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले विभिन्न करों की जगह लेगा। इनपुट टैक्स क्रेडिट पद्घति के आधार पर जीएसटी खरीद एवं बिक्री के प्रत्येक स्तर पर लगाया जाएगा और इससे न केवल विनिर्माण बल्कि एक राज्य से दूसरे राज्य में वस्तुओं की आवाजाही और सुगम हो पाएगी।

सरकार इस बिल को लाने से पहले इसके विरोधों को खत्म करना चाहती है। राज्य और केंद्र के बीच कई मुद्दों को लेकर विवाद है। सरकार इस  बैठक के जरिये पहले उन विरोधों को खत्म करना चाहती है। कई राज्य जीएसटी के पक्ष में है तो कई राज्य इस बिल के बाद अपने राज्यों को होने वाले नुकसान को लेकर चिंतित हैं।

अजीबोगरीब ट्वीट से परेशान हुईं सुषमा स्वराज

प्रमुख संवाददाता,
सोशल मीडिया के ज़रिए लोगों की समस्याएँ सुनने व सुलझाने वाली विदेश मंत्री सुषमा स्वराज स्वयं एक उलझन में पड़ गईं। सुषमा स्वराज एक अजीबो गरीब दुविधा में फंस गईं, जब सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर उनसे एक यूजर ने अपने खराब फ्रिज को लेकर उनसे मदद की गुहार लगाई। दरअसल पल्ली वेंकट नाम के व्यक्ति ने ट्विटर पर सुषमा स्वराज और रामविलास पासवान को ट्वीट करते हुए अपने खराब फ्रिज के बारे में शिकायत दर्ज़ करते हुए मदद मांगी थी।
पल्ली वेंकट ने दोनों केंद्रीय मंत्रियों को ट्वीट कर शिकायत की कि एक कंपनी ने उन्हें खराब फ्रिज बेच दिया है। वह कंपनी इसे बदलने को तैयार नहीं, बल्कि मरम्मत के लिए जोर दे रही है।
सुषमा स्वराज ने इस शिकायत का बड़ी ही विनम्रता के साथ ट्वीट के ज़रिए जवाब देते हुए लिखा,” भाई मैं रेफ्रिजरेटर से जुड़े मामले में आपकी मदद नहीं कर सकती। मैं संकटग्रस्त लोगों की मदद करने में ही व्यस्त हूं।”
इसके बाद लोगों ने ट्विटर पर वेंकट का खूब मजाक उड़ाया और सुषमा की हाजिर-जवाबी की जमकर तारीफ की। दरअसल वेंकट को यह शिकायत सिर्फ उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान से ही करनी थी लेकिन उन्होंने अपनी यह शिकायत सुषमा स्वराज से भी कर दी।

एक बार फिर अंडरवर्ल्ड माफिया के किरदार में नज़र आएँगे विवेक

एंटरटेमेंट डेस्क,

अभिनेता विवेक ओबेरॉय अपनी आगामी फिल्म में अंडरवर्ल्ड सरगना मुथप्पा राय की किरदार में नज़र आएंगे। निर्देशक रामगोपाल वर्मा इस फिल्म को डायरेक्ट करेंगे और सी.आर. मोहन इस फिल्म को प्रोडूस करेंगे। यह फिल्म अंडरवर्ल्ड सरगना मुथप्पा राय के जीवन पर आधारित है।

विवेक अपनी हर फिल्म के शूटिंग शुरू करने से पहले खुद को उस करेक्टर में ढालते हैं, और मुथप्पा के किरदार को वास्तविक रूप देने के लिए उन्हें काफी मेहनत करनी पड़ेगी। विवेक कुल 10 किलो वज़न बढ़ाएंगे ताकि वे ममुथप्पा राय के लुक को वास्तविक रूप दे सके और उसके बाद मुथप्पा के यंगर लुक में दिखने के लिए वे 18 किलो वज़न घटाएंगे।

इस बारे में विवेक का कहना है कि “मुझे अपने इस किरदार को वास्तविक रूप देने के लिए काफी मेहनत करनी होगी, जहां एक तरफ मुझे फिल्म के कुछ हिस्से के लिए लगभग 10 किलो वज़न बढ़ाना है, तो वहीं दूसरी तरफ फिल्म के बाकी हिस्सों के लिए 18 किलो वज़न घटाना भी है, जो मैं नूट्रिशनिस्ट और सर्टिफाइड ट्रेनर की सहायता से करूँगा। एक अभिनेता होने के नाते मैं अपनी हर फिल्म में अपना शत प्रतिशत देने में विश्वास करता हूँ और अपने इस किरदार को वास्तविक रूप देने के लिए मैं कड़ी मेहनत कर रहा हूँ। “

राजनीती के ‘एंग्री बर्ड’ केजरीवाल फिर गुस्से में

अमित द्विवेदी,

राजनीती के ‘एंग्री बर्ड’ अरविंद केजरीवाल एक बार फिर गुस्से में पंख फड़फड़ा रहे हैं, क्योंकि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने दिल्ली के मुख्यमंत्री के संसदीय सचिव बिल को लौटा दिया है। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने दिल्ली सरकार के उस बिल को मंज़ूरी देने से मना कर दिया है, जिसमें आम आदमी पार्टी (आप) के 21 विधायकों के संसदीय सचिव के पद को लाभ के पद से अलग करने का प्रस्ताव था।

पार्टी ने इस स्थिति पर विचार करने के लिए केजरीवाल की अध्यक्षता में एक आपातकालीन बैठक की, जिसके बाद दिल्ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोल दिया। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि वह लोकतंत्र का सम्मान नहीं करते और ‘आप’ से डरते हैं। बैठक में कई आप नेताओं ने केंद्र की कड़ी आलोचना की और उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने मोदी सरकार की सिफारिश पर विधेयक खारिज किया। केजरीवाल ने ट्विटर के जरिए अपनी नाराजगी जाहिर की।

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केजरीवाल ने कहा कि किसी भी विधायक को संसदीय सचिव के रुप में उनकी क्षमता से एक भी पैसा, कार या बंगला नहीं दिया गया और उन्होंने कहा कि वे मुफ्त में सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने कहा, “मोदीजी का कहना है कि आप सभी घर पर बैठें, काम नहीं करें।” केजरीवाल ने कहा कि विधायकों को बिजली आपूर्ति, जलापूर्ति, अस्पताल एवं स्कूलों के संचालन पर गौर करने का काम दिया गया है। उन्होंने कहा, “मोदी जी का कहना है कि न काम करुंगा और न ही करने दूंगा।”

इस बिल के लौटाने के बाद अब संसदीय सचिव बनाए गए केजरीवाल के 21 विधायकों की सदस्यता पर तलवार लटक गई है। संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप का मानना है कि चुनाव आयोग इस मामले पर आखिरी फैसला लेगा। अगर चुनाव आयोग निर्णय लेता है और सदस्यता खत्म होती है तो इन सीटों पर उपचुनाव का ही रास्ता बचता है।

गौरतलब है कि इस मामले में एक याचिका के जरिए चुनाव आयोग के पास विधायकों को संसदीय सचिव बनाए जाने की शिकायत की गई थी। दिल्ली सरकार ने इस बिल को मंजूरी दिलाने के लिए उप राज्यपाल नजीब जंग के पास भेजा था और जंग ने इसे राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के पास भेज दिया था।

लिंक्डइन को 26.2 अरब डालर में खरीदेगी माइक्रोसॉफ्ट कंपनी

शिखा पाण्डेय,

माइक्रोसाफ्ट कंपनी ने घोषणा की है कि वह प्रोफेशनल नेटवर्किंग साइट लिंक्डइन को 26.2 अरब डालर में खरीदेगी। माइक्रोसाफ्ट ने एक बयान में कहा है कि कंपनी 196 डालर प्रति शेयर के हिसाब से लिंक्डइन को पूरी तरह नकदी सौदे में खरीदेगी। इस हिसाब से लिंक्डइन का मूल्यांकन 26.2 अरब डालर बैठता है।

यह सौदा इसी कैलेंडर वर्ष में पूरा होने की उम्मीद है। घोषणा के अनुसार लिंक्डइन का विशिष्ट ब्रांड, संस्कृति व स्वायत्तता ज्यों की त्यों बनी रहेगी। जेफ वेइनर लिंक्डइन के सीईओ बने रहेंगे। वह माइक्रोसाफ्ट के प्रमुख सत्य नडेला के अधीन काम करेंगे। बयान के अनुसार वेइनर तथा लिंक्डइन के चेयरमैन व सहसंस्थापक रीड हाफमैन ने इस सौदे का पूरा समर्थन किया है।

नाडेला ने कहा है, ” लिंक्डइन की टीम ने दुनिया के पेशेवरों को कनेक्टेड करने पर केंद्रित शानदार कारोबार खड़ा किया है। हम साथ मिलकर लिंक्डइन तथा माइक्रोसाफ्ट आफिस 365 तथा डायनामिक्स की वृद्धि को गति दे सकते हैं, क्योंकि हम दुनिया के हर व्यक्ति व संगठन को सक्षम बनाना चाहते हैं।”

उल्लेखनीय है कि लिंक्डइन की शुरुआत इसके सहसंस्थापक हाफमैन के घर में एक बैठक (कमरे) में 2002 में हुई थी। इसे 5 मई, 2003 को औपचारिक तौर पर शुरु किया गया था। दुनिया भर में इसके 43.3 करोड़ सदस्य हैं और यह 19 प्रतिशत सालाना की दर से बढ़ रही है। भारत में लिंक्डइन में लगभग 650 कर्मचारी हैं और इसका अनुसंधान व विकास केंद्र बेंगलुर में है।

48 घंटे के भीतर ‘उड़ता पंजाब’ को प्रमाणपत्र दे सीबीएफसी -बम्बई हाई कोर्ट

प्रमुख संवाददाता,

बंबई उच्च न्यायालय ने सीबीएफसी को 48 घंटे के भीतर फिल्म ‘उड़ता पंजाब’ को सिर्फ एक कट के साथ निर्धारित तारीख पर रिलीज करने के लिए प्रमाण पत्र देने का आदेश दे दिया है। अदालत ने फिल्म में पेशाब करने का एक दृश्य हटाने और संशोधित घोषणा दिखाने का आदेश दिया है।

न्यायमूर्ति एस सी धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति शालिनी फंसाल्कर जोशी की पीठ ने कठोर शब्दों में आदेश दिया, “दादी मां की तरह काम नहीं करें। आज के समय के अनुसार बदलें। सीबीएफसी को कला के मामले में अति संवेदनशील होने की आवश्यकता नहीं है। सीबीएफसी रचनात्मक लोगों को अचानक से रोक नहीं सकती, क्योंकि यह उन्हें हतोत्साहित कर सकता है।” खंडपीठ ने सीबीएफसी को निर्देश दिया कि नशे पर आधारित फिल्म का 48 घंटे के अंदर प्रमाणन करे, ताकि निर्माता इसे तय समय 17 जून पर रिलीज कर सकें।

udta punjab

न्यायमूर्ति धर्माधिकारी ने कहा, “आम बोलचाल में सेंसर का मतलब फिल्म का प्रमाणन करने से है। इसलिए अगर कानून के जरिए बोर्ड को बदलाव, कट या हटाने की शक्ति है तो सीबीएफसी की यह शक्ति संविधान और उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुरुप होनी चाहिए।” अदालत फिल्मकार अनुराग कश्यप की फैंटम फिल्म्स की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें सीबीएफसी के आदेश को चुनौती दी गई थी।

अदालत ने कहा, “बोर्ड के निर्देश के मुताबिक पेशाब करने के दृश्य को हटाने और घोषणा में संशोधन को छोड़कर सीबीएफसी की समीक्षा समिति के छह जून के आदेश को खारिज और दरकिनार किया जाता है, जिसमें फिल्म में कुल 13 बदलाव करने के निर्देश दिए गए थे।”

उच्च न्यायालय के बाहर फिल्म के निर्देशक अभिषेक चौबे ने संवाददाताओं से कहा, “वकीलों के कठिन परिश्रम ने नतीजा दिया है। मैं फैसले से काफी खुश हूं। मुझे उम्मीद है कि फिल्म को सही संदर्भ में देखा जाएगा।”