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Monday, August 3, 2026
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कुछ लोग मेरी बातों का गलत मतलब निकालते हैं -सलमान ख़ान

अमित द्विवेदी,
सलमान खान हाल ही में दिए विवादित बयान को लेकर काफी आलोचना के शिकार हुए लेकिन इसके बावजूद वो अपनी गलती स्वीकारने को राज़ी नहीं हैं। बलात्कार वाले बयान पर विवाद होने के बाद पहली बार सलमान खान ने चुप्पी तोड़ी भी तो बस ये कहा कि उन्हें कम बोलना चाहिए। सलमान ने अपनी गलती मानने की बजाय उलट विरोधियों पर ही आरोप लगा दिया है कि लोग उनके बयान का गलत मतलब निकाल लेते हैं।

इंटरनेशनल इंडियन फिल्म एकेडमी (IIFA) में भाग लेने गए सलमान ने अपने संबोधन में मज़ाकिया लहजे में कहा कि उन्हें कम बोलना चाहिए, क्योंकि इन दिनों वह जो कहते हैं उसकी गलत व्याख्या की जाती है। आईआईएफए अवार्ड समारोह को संबोधित करते वक्त सलमान ने कहा, “मैं ज्यादा समय नहीं लूंगा क्योंकि इन दिनों मैं जितना कम बोलूं ठीक रहेगा।”

उल्लेखनीय है कि सलमान खान ने एक साक्षात्कार में अपनी आने वाली फिल्म सुल्तान की शूटिंग के दौरान होने वाली थकान को रेप पीड़िता के साथ जोड़कर बताया था, जिसके बाद विवाद हो गया और उन्होंने चुप्पी साध ली थी। उनकी बलात्कार वाली टिप्पणी को लेकर कई राजनीतिक दलों और राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) द्वारा सार्वजनिक माफी मांगे जाने की उनसे मांग किए जाने के बावजूद, अभिनेता ने अभी तक माफी नहीं मांगी है। सलमान की इस गलती पर विवाद बढ़ने पर पिता सलीम खान ने सामने आकर माफी मांगी पर सलमान ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

सलमान के बयान पर गुस्साई शिवसेना ने निर्देशकों और दर्शकों से सलमान का तब तक बहिष्कार करने को कहा है, जब तक कि वह अपने इस बयान के लिए बेशर्त माफी नहीं मांग लेते हैं। शिवसेना ने कहा कि यह शर्म की बात है कि 50 वर्षीय एक व्यक्ति अपनी गलती स्वीकार नहीं कर सकता और उसके 80 वर्षीय पिता को उसके बचाव में आगे आना पड़ रहा है। इस बीच महाराष्ट्र में विपक्षी दलों ने सलमान के बयान पर मिलीजुली प्रतिक्रिया दी है।

कांग्रेस सांसद हुसैन दलवई ने कहा, “सलमान खान जोश में बोलते समय अपने दिमाग का प्रयोग नहीं करते और गलत बयान देते रहते हैं। उनका यह बयान महिलाओं का अपमान है। लेकिन जब उनके पिता, जो कि एक सम्मानजनक हस्ती हैं, ने माफी मांग ली है, इसलिए इस मामले को अब और बढ़ाना नहीं चाहिए।” इसके अतिरिक्त जहाँ सलमान का परिवार उनके बचाव में खड़ा है, वहीं खुद बॉलीवुड से भी सलमान के बयान पर कई दिग्गज हस्तियों ने दुःख जताया है।

भाजपा के दो वरिष्ठ नेताओं के बीच छिड़ी बहस

अमित द्विवेदी,

राजनीतिक आरोप प्रत्यारोपों के सिलसिले के दौरान अब भाजपा के दो दिग्गज नेताओं के बीच बहस छिड़ गई है। आज एक ओर भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकान्त दास पर हमला बोला, तो दूसरी ओर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने एक अनुशासित सरकारी अधिकारी पर इस तरह के हमले को अनुचित व गलत बताया।

स्वामी ने अपने ट्वीट में शक्तिकान्त दास पर आरोप लगाया कि दास के खिलाफ महाबलीपुरम के प्रमुख स्थान पर संपत्ति सौदे में मदद पहुंचाने से जुड़ा मामला लंबित है। उन्होंने रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर उर्जित पटेल तथा दास को रिजर्व बैंक गवर्नर पद से दूर रखने तथा दास को उनके मूल कैडर तमिलनाडु भेजने की मांग की। इसके तुरंत बाद जेटली ने ट्विट किया, “यह वित्त मंत्रालय के एक अनुशासित अधिकारी पर अनुचित व गलत हमला है।”

आपको बता दें कि वित्त मंत्री एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (एआईआईबी) के गवर्नर बोर्ड की बैठक में भाग लेने चीन गए हुए हैं। जेटली ने कल स्वामी द्वारा मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम पर हमले का भी बचाव करने में अगुवाई की थी। उन्होंने इस बात पर दुःख व्यक्त किया था कि राजनीतिज्ञ सरकार में बैठे लोगों पर किस हद तक आरोप लगा सकते हैं जबकि अधिकारी अनुशासन की वजह से प्रतिक्रिया नहीं दे सकता।

हालाँकि सुब्रमण्यम स्वामी ने एक टीवी चैनल को दिए बयान में कहा, “मुझे वित्त मंत्री अरुण जेटली से कोई लेना-देना नहीं है। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व अध्यक्ष अमित शाह के प्रति जवाबदेह हूँ।”

एनएसजी सदस्यता: चीन के साथ 5 और देशों का विरोध

शिखा पांडेय,

भारत की परमाणु आपूर्ति समूह की सदस्यता के मार्ग में रोड़ा अटकने के लिए अब चीन के साथ और 5 देश खड़े हो गए हैं। इनमें ब्राजील, ऑस्ट्रिया, न्यूजीलैंड, आयरलैंड और तुर्की के नाम शामिल हैं। इससे पहले चीन के विरोध के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन की बैठक में शामिल होने ताशकंद पहुंचे। यहां पर पीएम मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग से मुलाकात की।

उल्लेखनीय है कि भारत एनएसजी में प्रवेश के लिए कई देशों से बात कर रहा है। रूस और अमेरिका समेत कई ऐसे देश हैं जो भारत को एनएसजी का सदस्य बनाना चाहते हैं लेकिन चीन के साथ अब ये पांच और देश मिलकर इसका विरोध कर रहे हैं। चीन का कहना है कि जिन आधारों पर भारत को सदस्यता दी जा सकती है, उन्हीं आधारों पर अन्य देशों को भी एनएसजी में शामिल किया जाना चाहिए। ऐसे में न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप में पाकिस्तान के शामिल होने की राह भी खुल जायेगी, जिस पर अनेक देशों को आपत्ति है, क्योंकि पाकिस्तान ने गुप-चुप तरीके से ईरान, लीबिया और उत्तरी कोरिया को परमाणु तकनीक मुहैया कराई है। अब चीन के इसी पक्ष के साथ कई देश जुड़ गए हैं। इसलिए अब भारत के लिए राह और कठिन हो रही है।

इधर पाकिस्तान लगातार भारत का विरोध कर ही रहा है। भारत के विरोध में पाकिस्तान का तर्क है कि भारत को परमाणु साजो-सामान और तकनीक देने से उसके सैन्य परमाणु कार्यक्रम को बड़ी मदद मिलेगी। इससे परमाणु हथियारों की दौड़ को बढ़ावा मिलेगा। लेकिन यह तर्क बेमानी है, क्योंकि पाकिस्तान फिसिल मैटेरियल कट-ऑफ ट्रीटी का जोरदार विरोध करता है, जो सभी देशों में परमाणु हथियारों को कम करने के लिए लाया गया है। यह संधि पाकिस्तान की शंकाओं का समाधान करती है, पर उसने इसे मानने से इनकार कर दिया है।

बता दें कि सियोल में एनएसजी देशों के पूर्ण सत्र के पहले फ्रांस ने एनएसजी में एंट्री के लिए भारत के समर्थन का ऐलान किया था। फ्रांस ने इस बारे में बुधवार को एक बयान जारी किया था। अमेरिका ने भारत के समर्थन का पहले ही ऐलान किया है। इस बीच मैक्सिको ने भी एनएसजी में भारत की सदस्यता का समर्थन किया है। मैक्सिकन राजदूत ने कहा कि वह भारत के साथ ही सभी एनपीटी देशों के एनसीजी में शामिल होने का समर्थन करते हैं।

एक साल के लिए भारतीय टीम के कोच बने कुम्बले

शिखा पाण्डेय,

कई नामों और लंबी चर्चा के बाद अंततः भारतीय क्रिकेट टीम को उसका नया कोच मिल गया है। भारत के पूर्व कप्‍तान और दुनिया के सबसे महान गेंदबाज अनिल कुंबले को बीसीसीआई ने आज एक साल के लिए मुख्‍य कोच चुन लिया है। मीडिया में खबर थी कि टीम इंडिया के पूर्व कप्‍तान और पूर्व टीम निदेशक रवि शास्‍त्री को बल्‍लेबाजी कोच बनाया जा सकता है। कुंबले, शास्त्री, लालचंद राजपूत, प्रवीण आमरे, मूडी और स्टुअर्ट लॉ ने भारतीय कोच पद के लिए साक्षात्कार दिया था। कुंबले कोच पद की दौड़ में सबसे आगे चल रहे थे।

नए कोच की घोषणा बीसीसीआई अध्‍यक्ष अनुराग ठाकुर ने की। ठाकुर ने कोच पद की घोषणा के बाद कहा कि सहयोगियों की घोषणा बाद में की जाएगी। ठाकुर ने प्रेस कान्‍फ्रेंस में कहा कि टीम इंडिया के मुख्‍य कोच के चयन में पूरी तरह से पारदर्शिता बरती गयी है।  सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण के नेतृत्त्व में गठित तीन सदस्यीय समिति ने लंबे चले सत्र के दौरान कम से कम सात उम्मीद्वारों के साक्षात्कार लिए और अपनी रिपोर्ट बीसीसीआई को सौंपी, जिसमें उन्‍होंने कुंबले को सबसे ज़्यादा क़ाबिल पाया।

पूर्व भारतीय कप्तानों अनिल कुंबले और रवि शास्त्री सहित कई अन्य उम्मीद्वारों के साक्षात्कार लिये. सचिन तेंदुलकर (वीडिया कान्फ्रेंस के जरिये), सौरव गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण की तीन सदस्यीय समिति ने लंबे चले सत्र के दौरान कम से कम सात उम्मीद्वारों के साक्षात्कार लिये.

इस दौरान उम्मीद्वारों ने अपने परफॉरमेंस की प्रस्तुति भी दी। कुंबले स्वयं साक्षात्कार के लिए उपस्थित हुए जबकि शास्त्री विदेश में हैं और इसलिए उन्होंने स्काईप के जरिये इंटरव्यू दिया था। विदेशी आवेदनकर्ताओं में ऑस्ट्रेलिया के पूर्व खिलाडियों स्टुअर्ट लॉ और टॉम मूडी ने भी वीडियो कान्फ्रेंस के जरिए अपनी प्रस्तुति दी। दिलचस्प बात यह है कि संदीप पाटिल जैसे उम्मीद्वार को साक्षात्कार के लिए नहीं बुलाया गया जबकि पूर्व भारतीय खिलाडियों लालचंद राजपूत और प्रवीण आमरे को साक्षात्कार का मौका दिया गया।

एनएसजी मामले में न्यायपूर्ण और निष्पक्ष रवैया अख़्तियार करे चीन -भारत

अनुज हनुमत,

परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) की सदस्यता के भारत के पुरजोर प्रयासों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग से मुलाकात की। समझा जा रहा है कि उन्होंने इस बाबत चीन का समर्थन मांगा। इस कदम को प्रक्रिया बढ़ाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारत ने चीन से कहा है कि वो न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप की उसकी सदस्यता पर ‘न्यायपूर्ण’ और ‘निष्पक्ष’ रवैया अख़्तियार करे। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा है कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शि जिनपिंग से मुलाक़ात में कहा कि चीन को इस मामले में निष्पक्ष रवैया अपनाने की ज़रूरत है। दोनों नेताओं की बैठक गुरुवार को ताशकंद में हुई। दक्षिण कोरिया के सियोल में शुक्रवार से एनएसजी देशों की बैठक हो रही है, जिसमें भारत को समूह में शामिल किए जाने की बात पर ग़ौर किया जाएगा।

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने नरेंद्र मोदी की हाल की अमरीका यात्रा में भारत की सदस्यता को अपनी मंज़ूरी दे दी थी। चीन उन राष्ट्रों में से है, जो एनएसजी में भारत को शामिल किए जाने का विरोध कर रहा है। वो पाकिस्तान को भी इस ग्रुप का सदस्य बनाए जाने के पक्ष में है।

विकास स्वरूप से जब पूछा गया कि मोदी के आग्रह पर चीनी राष्ट्रपति की क्या प्रतिक्रिया रही तो उन्होनें कहा कि ये एक मुश्किल भरा सौदा है और फ़िलहाल वो इससे ज़्यादा कुछ नहीं कहना चाहेंगे।

भारत के एनएसजी में प्रवेश के प्रयासों पर अपने विरोध का स्पष्ट संकेत देते हुए चीन ने कल एनएसजी के सदस्यों के बीच मतभेदों को रेखांकित करते हुए कहा था, ‘‘पक्षों ने अभी इस मुद्दे पर आमने-सामने बातचीत नहीं की है।’’ भारत और पाकिस्तान की सदस्यता के मुद्दे पर चीन ने कहा था कि यह मामला पूर्ण सत्र के एजेंडा में नहीं है। यहां भी बीजिंग ने दोनों पड़ोसी देशों के परमाणु अप्रसार के ट्रैक रिकॉर्ड के अंतर के बावजूद उन्हें एक साथ करके देखा।

एससीओ के शिखर-सम्मेलन के साथ ही आज दक्षिण कोरिया की राजधानी में एनएसजी का दो दिवसीय पूर्ण अधिवेशन शुरू हुआ जिसमें परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह की सदस्यता के भारत के आवेदन पर विचार-विमर्श हो सकता है।

समाजवादी संतों ने सीएम अखिलेश को सौंपी कैराना रिपोर्ट, कहा माहौल बिगाड़ने की थी साज़िश

अनुज हनुमत,

लखनऊ। यूपी में जब कोई मुद्दा सीधे राजनीति को प्रभावित करता है, तो धमक महीनों सत्ता के गलियारों में गूंजती रहती है। सबकी अपनी अपनी रिपोर्ट है और अपना अपना उद्देश्य। लेकिन किसी को मतलब नही कि कैराना का वास्तविक दर्द क्या है। बुधवार को कैराना मामलें पर एक और रिपोर्ट सामने आई। समाजवादी संतो की टीम ने बुधवार को यूपी के सीएम अखिलेश यादव को कैराना मामलें की रिपोर्ट सौंपते हुए कहा कि कुछ लोग वहां की फिजा को खराब करना चाहते थे।

बता दें, कि संतो का प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं, भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रमोद कृष्णन सहित हिंदू महासभा के अध्यक्ष चक्रपाणि जी महाराज, देवानंद गिरी, शामिल थे। वहीं प्रमोद कृष्णन ने सीएम को रिपोर्ट सौंपते हुए बताया कि कैराना जांच के दौरान उन्होंने वहां पर सभी तबके के लोगो से बातचीत की और पाया कि उत्तर प्रदेश की फिजा को खराब करने की खतरनाक साजिश थी।

इस पर सीएम अखिलेश यादव ने गम्भीरता से विचार करते हुए सख्त कार्रवाई करने की मांग की। सपा संतों की टीम ने कहा, कैराना में रची गई यूपी की फिजा बिगाड़ने की साजिश थी ।

उत्तराखंड: शादी का झांसा देकर युवती से की 25 लाख की ठगी, 3 गिरफ्तार

नारायण सिंह ‘रघुवंशी’,

देहरादून: शादी का झांसा देकर युवती से ठगी करने का एक मामला और सामने आया है। 25 लाख रुपये ठगने वाले समेत दो युवकों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। युवती को शादी का झांसा देने वाले युवक ने उससे एक वैवाहिक वेबसाइट के जरिए संपर्क किया था और खुद को अफगानिस्तान में शांति सेना का दवा सप्लायर बताया था।

गिरफ्तार किए गए दोनों युवक उत्तर प्रदेश के बरेली जनपद के रहने वाले हैं। पुलिस ने बुधवार को उन्हें जेल भेज दिया। वहीं, इस घटना में शामिल एक अन्य युवक फरार बताया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार पटेलनगर निवासी एक युवती ने अपना प्रोफाइल एक वैवाहिक वेबसाइट पर डाल रखा था। मार्च 2015 में युवती के नंबर पर एक युवक का फोन आया। युवक ने बताया कि उसने युवती का प्रोफाइल उक्त वैवाहिक वेबसाइट पर देखा है और वह उससे शादी करना चाहता है।

युवक ने खुद को अफगानिस्तान में तैनात शांति सेना का दवा सप्लायर बताया। इसके बाद युवक और युवती की रोजाना फोन पर बातचीत होने लगी। इसी बीच युवक ने युवती से कहा कि वह अब भारत में बसना चाहता है और इसके लिए अपनी पूरी कमाई तकरीबन 20 करोड़ रुपये पार्सल से भारत भेजना चाहता है। उसने युवती से कहा कि पार्सल छुड़ाने के लिए उसे कुछ औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी, जिसमें तकरीबन 25 लाख रुपये खर्च होंगे। झांसे में आकर युवती ने फरवरी 2016 से मार्च 2016 के बीच दो अलग-अलग बैंक खातों में 25 लाख रुपये जमा कर दिए। लेकिन, इसके बाद युवक ने अपना मोबाइल नंबर बंद कर लिया।

युवती की शिकायत पर पुलिस ने जांच की तो पता चला कि ठगी के इस मामले में तीन युवक शामिल हैं, जो उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले हैं। ठगी में प्रयुक्त बैंक खातों की जांच की गई तो मुख्य आरोपी की पहचान पप्पू उर्फ चंद्रपाल उर्फ लड्डू कुमार पुत्र गजेंद्र शर्मा उर्फ रामचंद्र के रूप में हुई। साथ ही यह भी पता चला कि वह अफगानिस्तान में नहीं बल्कि बरेली के ग्राम डोडरिया थाना बिधरी चैनपुर में रहता है।

यह जालसाजी उसने गांव के ही संजय शर्मा उर्फ कालीचरण व उमेश पटेल पुत्र सोहनलाल की मदद से की थी। उमेश ने बैंक में फर्जी आइडी पर खाता खुलवाकर रकम ट्रांसफर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। पुलिस ने बुधवार को पप्पू उर्फ चंद्रपाल व उमेश पटेल को गिरफ्तार कर लिया, जबकि संजय शर्मा अभी फरार है। प्रभारी निरीक्षक पटेलनगर बीबीडी जुयाल ने बताया कि ये तीनों युवक वैवाहिक वेबसाइटों से लड़कियों के नंबर लेकर उन्हें झांसे में लेते थे।

हाथी से उतर साइकिल पर सवार होंगे स्वामी प्रसाद मौर्य, मंत्रिपद मिलना तय!

अनुज हनुमत,

लखनऊ। पूरे देश की सियासत एक तरफ और उत्तर प्रदेश की सियासत एक तरफ। यहां की सियासी हवा कब किधर मुड़ जाये किसी को नहीं पता। अभी पार्टी से बागी हुए स्वामी प्रसाद मौर्य को 48 घण्टे भी नही हुए, लेकिन उन्होंने नई सवारी करने की तैयारी कर ली है। कहा जा रहा है कि स्वामी प्रसाद जल्द ही साइकिल पर सवार होने जा रहे हैं। यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने स्वामी प्रसाद मौर्य की तारीफ करते हुए कहा कि स्वामी प्रसाद मौर्य एक अच्छे इन्सान हैं और एक मजबूत नेता हैं। अब इस बयान से मामला काफी साफ़ होता दिख रहा है।

मुख्तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल के विलय को लेकर मचे घमासान पर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि उससे भी बड़ा फैसला ये है कि स्वामी प्रसाद मौर्य बीएसपी छोड़कर आ गए हैं। बता दें इससे पहले मौर्य के पार्टी छोड़ने को लेकर बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने कहा था कि मौर्य परिवारवाद के मोह में थे। अगर वह पार्टी नहीं छोड़ते तो निकाले जाते।

मायावती ने मीडिया से बात करते हुए कहा था कि मैंने लोगों के कहने पर मौर्य को पार्टी में रखा। मौर्य अलग अलग पार्टियों में भटक रहे थे, जनता दल, लोकदल में रहे थे। बीएसपी में आने के बाद भी उनका परिवारवाद का मोह नहीं टूटा था।उन्होंने पार्टी छोड़कर उपकार किया है । मायावती ने कहा कि इन्हें कुशीनगर से लड़ाया गया, ऊंचाहार से बेटे को टिकट दिलाया, बेटी को आगरा से टिकट दिलाया। मैं इसके पक्ष में नहीं थी, लेकिन पार्टी नेताओं के कहने पर मैं मान गई। दोनों बेटे-बेटी चुनाव हार गए, ये कुशीनगर से जीते। 2014 में इन्होंने लोकसभा के लिए मैनपुरी से बेटे के लिए टिकट लिया, पर हार गए।

अब 2017 चुनाव में खुद के लिए कुशीनगर, बेटे के लिए ऊंचाहार और बेटी के लिए पुरानी सीट से टिकट मांगा। तो मैंने उनसे कहा कि क्या आपने मुलायम सिंह का जूठा खा लिया है, जिन्होंने पूरे परिवार राजनीति में लगा दिया है। अब देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में कौन किस पार्टी में पलटी मारेगा! क्योंकि यूपी में चुनावी गर्मी बढ़ती जा रही है।

ताशकंद के लिए रवाना हुए पीएम मोदी, चीनी राष्ट्रपति से करेंगे मुलाक़ात

अमित द्विवेदी,

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उजबेकिस्‍तान के ताशकंद में गुरुवार को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से संभावित मुलाक़ात को एनएसजी सदस्यता से जोड़ा जा रहा है। कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग से उसकी आपत्तियों पर चर्चा कर सकते हैं। इसलिए दोनों नेताओं की होने वाली इस मुलाक़ात पर सभी की निगाहें तिकी हुई हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सालाना शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए ताशकंद रवाना हो गए, जहां पूर्ण सदस्य के तौर पर पाकिस्तान के साथ भारत के इसमें शामिल होने की प्रक्रिया शुरू होगी। मोदी और जिनपिंग की बैठक होगी, कयास लगाया जा रहा हैं कि प्रधानमंत्री इस बैठक के दौरान एनएसजी के उसके विरोध को लेकर भी चर्चा कर सकते हैं।

सियोल में आज परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह का वार्षिक पूर्ण अधिवेशन होगा जिसमें विशिष्ट परमाणु कारोबार क्लब की सदस्यता के लिए भारत के आवेदन पर चर्चा होने की सम्भावना है।

पीएम मोदी ने ट्वीट कर अपनी यात्रा की जानकारी साझा की, उन्होंने लिखा, ‘मैं एससीओ सम्मेलन में भाग लेने और एससीओ राष्ट्रों के नेताओं से वार्ता करने के लिए संक्षिप्त यात्रा पर उज्बेकिस्तान जा रहा हूँ।’ उन्होंने कहा, ‘भारत एससीओ का सदस्य बनकर खुश होगा और एससीओ के जरिए विशेष आर्थिक सहयोग के क्षेत्र में सार्थक परिणामों की उम्मीद कर रहा है।’ प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत मध्य एशिया के साथ संबंधों को बहुत महत्व देता है और क्षेत्र के साथ आर्थिक एवं लोगों के आपसी संबंध मजबूत करना चाहता है। अंतर्राष्ट्रीय सियासी हलके में मोदी की उज़्बेकिस्तान यात्रा की वजह से माहौल गर्म है। सबकी निगाहें फिलहाल एनएसजी में भारत की सदस्यता पर टिकी हुई है।

एनएसजी सदस्यता को लेकर उठापटक, फ्रांस भी आया भारत के साथ

अमित द्विवेदी,
परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में भारत के प्रवेश के विषय में फ्रांस ने आज भारत का ज़ोरदार समर्थन करते हुए कहा कि इससे परमाणु प्रसार के खिलाफ वैश्विक प्रयास मजबूत होंगे। फ्रांस के अनुसार सदस्य देशों को सियोल में होने वाले पूर्ण अधिवेशन में भारत के लिए सकारात्मक फैसला लेना चाहिए।
फ्रांस के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “फ्रांस मानता है कि चार बहुपक्षीय निर्यात नियंत्रण व्यवस्थाओं, एनएसजी, एमटीसीआर, द ऑस्ट्रेलिया ग्रुप तथा द वासेनार अरेंजमेंट में भारत का प्रवेश परमाणु प्रसार से लड़ने में अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को मजबूत करेगा। एनएसजी में पूर्ण रुपेण सदस्य के तौर पर भारत के प्रवेश के सक्रिय और दीर्घकालिक समर्थन की दिशा में फ्रांस सियोल में 23 जून को मिल रहे इसके सदस्यों से सकारात्मक निर्णय लेने का आह्वान करेगा।” बयान में यह भी उल्लेख है कि 1998 से रणनीतिक साझेदार फ्रांस और भारत जनसंहार के हथियारों के अप्रसार और उनकी आपूर्ति व्यवस्था के संबंध में समान लक्ष्य साझा करते हैं।
परमाणु प्रसार रोकने में सहायक होगा भारत – फ्रांस
48 सदस्यीय एनएसजी के प्रमुख सदस्य देश फ्रांस ने कहा कि परमाणु नियंत्रण व्यवस्थाओं में भारत की सहभागिता संवेदनशील वस्तुओं के निर्यात को बेहतर तरीके से नियंत्रित करने में मदद करेगी, चाहे वे परमाणविक हों, रासायनिक हों, जैविक हों, बैलिस्टिक हों या परंपरागत सामग्री और प्रौद्योगिकी हों।
इससे पहले अमेरिका ने कल एक बयान में कहा था कि भारत एनएसजी की सदस्यता के लिए तैयार है। अमेरिका ने सहभागी सरकारों से कल सियोल में शुरु हो रहे एनएसजी के पूर्ण सत्र में भारत के आवेदन का समर्थन करने को कहा था।

उधर चीन भारत के प्रवेश पर अपना विरोध बरकरार रखे हुए है। उसका तर्क है कि भारत ने परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, हालांकि चीन इस बात पर जोर दे रहा है कि भारत को एनएसजी द्वारा किसी तरह की छूट मिलने की स्थिति में उसके करीबी सहयोगी पाकिस्तान को भी सदस्यता दी जाए।

भारत ने कहा है कि एनएसजी में शामिल होने के लिए एनपीटी पर हस्ताक्षर करना अनिवार्यता नहीं है। इस संबंध में भारत ने फ्रांस के मामले का जिक्र करते हुए कहा है कि पहले भी इस तरह के उदाहरण रहे हैं। अब स्वयं फ्रांस की ओर से सकारात्मक परिणाम मिलने और फ्रांस द्वारा भारत की एनएसजी सदस्यता के विषय में सियोल में पूर्ण समर्थन देने के वायदे से भारत की दावेदारी और अधिक पक्की हो गई है।