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Monday, August 3, 2026
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इसलिए अरविन्द सुब्रमण्यम पर भड़के हैं स्वामी!

शिखा पाण्डेय, 
भाजपा नेता व राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम पर किए गए हमले पर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज कहा कि मुख्य आर्थिक सलाहकार पर सरकार का पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा कि अरविंद सुब्रमण्यम की सलाह काफी महत्व रखती है। वित्त मंत्री ने उन आरोपों को भी खारिज किया कि स्वामी के हमलों के मद्देनजर सरकार और भाजपा ने रिजर्व बैंक गवर्नर रघुराम राजन का बचाव नहीं किया।

क्या हैं स्वामी के अरविंद सुब्रमण्यम पर आरोप?

भाजपा के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने मोदी सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम पर ट्विटर पर निशाना साधते हुए भारत के खिलाफ कार्रवाई करने का आरोप लगाया है और उन्हें बरखास्त करने की मांग की है। स्वामी ने कहा है कि अरविंद वही शख्स हैं, जिन्होंने मार्च 2013 में अमेरिका को विश्व व्यापार संगठन में अमेरिकी फार्मास्युटिकल्स के हितों का बचाव करते हुए भारत के खिलाफ कार्रवाई करने की सलाह दी थी। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी दावा किया है कि अरविंद सुब्रमण्यम ने जीएसटी में कांग्रेस से सुझावों को मानने की सलाह दी थी। सुब्रमण्यम स्वामी का कहना है कि अरविंद सरकार के विरोधी काम में लिप्त हैं। अत: उन्हें फौरन उनके पद से हटा देना चाहिए।

अपने ट्वीट के संबंध में उन्होंने कहा कि मैंने ट्विटर पर यही बताया है कि अरविंद अमेरिका में काम करते थे। ग्रीन कार्ड तो नहीं है, सिटिजन हैं भी या नहीं पता नहीं। स्वामी ने कहा कि अरविन्द ने लिखित में बयान दिया था, जिसमें उसने कहा कि भारत अमेरिका के अनुकूल नहीं चल रहा है, उसको सबक सिखाने के लिए कुछ करना चहिए। उन्होंने कहा  कि मैंने 27 नामों की लिस्ट तैयार की है जिनको एक-एक कर निपटाऊंगा।

स्वामी द्वारा अरविंद सुब्रमण्यन को निशाना बनाए जाने पर भारतीय जनता पार्टी ने उनसे पल्ला झाड़ लिया है। पार्टी सचिव श्रीकांत शर्मा ने इसे उनके निजी विचार बताते हुए कहा है कि भाजपा का इससे कुछ लेना-देना नहीं है। आज स्वामी केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मिलने भी पहुंचे थे। हालाँकि अभी मुलाकात के कारण का खुलासा नहीं हुआ है, लेकिन इसे स्वामी द्वारा मुख्य आर्थिक सलाहकार को निशाना बनाए जाने से जोड़ कर देखा जा रहा है।

सोल पहुंचे एस. जयशंकर, एनएसजी सदस्यता पर माथापच्ची

अनुज हनुमत,

भारत इस बार एनएसजी की सदस्यता पाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता, इसीलिए पीएमओ सहित पूरा विदेश मंत्रालय पूरी तेजी से लगा है। इसी प्रयास के तहत विदेश सचिव एस जयशंकर कल से शुरू हो रही एनएसजी की पूर्ण बैठक से पहले भारत के सदस्यता प्रयासों को मजबूत करने के लिए आज सोल रवाना हो गए।

एक तरफ भारत जहां सदस्यता पाने की उम्मीद कर रहा है वहीं चीन, तुर्की जैसे देश इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं। जयशंकर दक्षिण कोरिया की राजधानी में भारत की सदस्यता हासिल करने की संभावना को मजबूत करने के लिए सदस्यों का समर्थन जुटाने का प्रयास करेंगे। ये दौरा इसी लिहाज आवश्यक है। वह सोमवार से शुरू हुई 48 देशों वाले समूह की आधिकारिक स्तर की वार्ता के दौरान हो रहे घटनाक्रमों पर करीब से नजर रखे हुए थे। सूत्रों की माने तो विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी एवं ‘निरस्त्रीकरण और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा’ प्रभाग के प्रभारी अमनदीप सिंह गिल समर्थन जुटाने और भारत के मामले की व्याख्या करने के लिए पहले से ही सोल में हैं।

भारत जैसे गैर एनपीटी देशों के प्रवेश पर सदस्यों के बंटे होने के साथ चीन एनएसजी सदस्यता के भारत के प्रयासों में लगातार रोड़ा अटका रहा है। बताते चलें कि परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) सर्वसम्मति के सिद्धांत के तहत काम करता है और अगर कोई एक देश भी भारत के खिलाफ मतदान करता है तो सदस्यता पाने का उसका प्रयास विफल हो जाएगा। बहरहाल, समूह के अधिकतर देशों ने भारत का समर्थन किया है, लेकिन ऐसा माना जाता है कि चीन के साथ ही तुर्की, दक्षिण अफ्रीका, आयरलैंड और न्यूजीलैंड एनएसजी में भारत के प्रवेश के पक्ष में नहीं हैं।

‘सुल्तान’ ने लाई अनुष्का और विराट की लव लाइफ में फिर से रंगत

एंटरटेनमेंट डेस्क, 

स्टार क्रिकेटर विराट कोहली और अदाकारा अनुष्का शर्मा की जोड़ी एक बार फिर चर्चा में है। अनुष्‍का शर्मा की फिल्‍म सुल्‍तान ईद पर रिलीज होनी है, लेकिन फिल्‍म की स्‍क्रीनिंग 6 जुलाई को रखी गयी है। मिड डे की एक रिपोर्ट के अनुसार , अनुष्‍का शर्मा चाहती हैं कि उनकी फिल्‍म ‘सुल्‍तान’ की स्‍क्रीनिंग में उनके ब्‍वायफ्रेंड विराट कोहली भी मौजूद रहें और यही कारण है कि अनुष्‍का विराट के लिए स्‍पेशल स्‍क्रीनिंग रखना चाहती हैं।

सूत्रों के अनुसार अनुष्‍का शर्मा पहले केवल विराट कोहली के लिए ही स्‍पेशल स्‍क्रीनिंग चाहती थीं, पर बाद में अनुष्‍का ने कुछ खास लोगों के साथ अपनी फिल्‍म की स्‍क्रीनिंग की मांग की। इस फिल्‍म में अनुष्‍का ने कड़ी मेहनत की है और धोबी पछाड़ रोल में नजर आने वाली हैं। फिल्‍म में अनुष्‍का के साथ बॉलीवुड के दबंग हीरो सलमान खान मुख्य किरदार में हैं।

मीडिया में जो खबरें हैं, उसके अनुसार विराट कोहली वेस्‍टइंडीज टूर पर 9 या 10 जुलाई को रवाना होने वाले हैं। यही कारण है कि अनुष्‍का ने ‘सुल्‍तान’ की स्‍क्रीनिंग इसके पहले रखने की मांग की है। सुल्‍तान की स्‍क्रीनिंग 6 जुलाई या एक दिन पहले हो सकती है। अनुष्‍का शर्मा ने इसके लिए प्रोडक्‍शन हाउस से भी बात कर ली है।

बता दें कि पहले तो अनुष्का और विराट के बीच फिल्म सुल्तान को लेकर हुई अनबन पिछले दिनों काफी चर्चा में रही।उसके बाद कई दिनों तक मीडिया में दोनों के ब्रेकअप पर नमक मिर्च लगाकर खबरें उड़ाई गईं। फिर दोनों को एक साथ एयरपोर्ट पर देखा गया था और जब अनुष्‍का शर्मा अपनी आगामी फिल्‍म ‘सुल्‍तान’ की शूटिंग के लिए हंगरी जा रही थीं, तो उन्‍हें सीऑफ करने के लिए विराट कोहली खुद अपनी कार से मुंबई एयरपोर्ट गए थे। इस दौरान दोनों एक दूसरे के गले भी लगे थे। दोनों की तसवीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल भी हुई थीं।

स्वामी प्रसाद मौर्या ने कहा बसपा को अलविदा, मायावती पर टिकट बेचने का मौर्या ने लगाया आरोप

अनुज हनुमत,

लखनऊ। आज यू.पी. की सियासी हवा उस समय अचानक गर्म हो गई, जब स्वामी प्रसाद मौर्या ने मायावती पर टिकट बेचने का आरोप लगाते हुये पार्टी छोड़ने की घोषणा कर दी। मौर्या ने कहा कि मायावती ने अम्बेडकर के सपनों को बेचा है और बीएसपी में अब दलितों की पूछ नहीं है।

मौर्या ने आरोप लगाते हुए कहा कि मायावती दिखावे के लिए अम्बेडकरवादी बनती हैं और दिखावे के लिए अम्बेडकर की जयंती मनाती हैं। इस समय पार्टी में सौदेबाजी और टिकटों की नीलामी होती है और टिकट की बिक्री के चलते 2012, 2017 में BSP हारी। स्वामी प्रसाद यही नही रुके, उन्होंने मायावती पर आरोप लगाते हुए कहा कि बीजेपी को मजबूत करने में जुटी हैं बसपा सुप्रीमो। उन्होंने कहा कि अब मैं बीएसपी में घुटन महसूस कर रहा था। बीएसपी में दलितों की कोई जगह नहीं। मायावती दलित के सपनों में पलीता लगा रही। उन्होंने कहा कि अभी हाल ही में सम्पन्न हुए पंचायत चुनावों में जिला पंचायत सदस्यों से भी रुपया लिया गया।

यूपी में कुछ महीनों बाद ही चुनाव है और ऐसे में स्वामी प्रसाद मौर्या का बसपा छोड़ना मायावती को काफी नुकसान पहुंचा सकता है । सूत्रों का कहना है की मौर्या जल्दी ही मुलायम सिंह से मुलाकात कर सकते हैं और जल्दी ही सपा ज्वाइन कर सकते हैं ।

बिहार में बिजली गिरने से 57 की मौत, CM नीतीश कुमार ने बुलाई इमरजेंसी मीटिंग

अनुज हनुमत

पटना । मंगलवार देर शाम बिहार के कई जिलों में आकाशीय बिजली गिरने से पिछले 24 घंटों में 57 लोगों की मौत हो गई और 24 लोग जख्मी हैं। राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इमरजेंसी मीटिंग बुलाई। सरकार ने आपदा के शिकार लोगों के परिवार को 4 लाख रुपए मुआवजा देने का एलान किया है ।

बिहार के कई इलाकों में मानसून आ चुका है और पिछले 24 घंटों में यहां तेज बारिश के साथ बिजली गिरने की खबरें आ रही हैं। पटना के बिहटा में पांच, नौबतपुर में दो, रोहतास के नासरीगंज इलाके में चार लोग मारे गए। वहीं, औरंगाबाद में बाप-बेटे समेत चार लोग बिजली की चपेट में आ गए। कैमूर में चार और नालंदा में चार-चार लोगों की मौत होने की खबर है। आकाशीय बिजली से 57 लोगों की मौत को सरकार ने गंभीरता से लिया है । ये मौतें राज्य के 15 अलग-अलग जिलों में हुईं

सबसे ज्यादा मौतें पटना और रोहतास जिले में हुईं ।नीतीश कुमार ने खुद डिजास्टर मैनेजमेंट के अफसरों के साथ मीटिंग की। मारे गए लोगों की फैमिली को चार-चार लाख रुपए का चेक दिया गया है।

मानसून विभाग ने अगले तीन दिनों तक कहीं मूसलधार तो कहीं हल्की बारिश होने का अंदेशा जताया है। मंगलवार को बिहार में पूर्णिया में सबसे अधिक 83.8 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई, जबकि पटना में 17.2 मिमी बारिश हुई।

केदारनाथ जा रहे राष्ट्रपति मुख़र्जी मौसम की खराबी के चलते लौटे

नारायण सिंह,
उत्तराखंड,

मौसम में अचानक आई गड़बड़ी की वजह से केदारनाथ के दौरे पर जा रहे महामहिम प्रणब मुखर्जी को वापस लौटना पड़ा।प्राप्त जानकारी के मुताबिक़ मौसम की खराबी की वजह से हेलीकॉप्टर को रास्ते से ही लौटना पड़ा। इस दौरान केदारनाथ के लिए तीन बार उड़ाने भरने की कोशिश की गई। कुछ देर उन्होंने गौचर पहुंचकर मौसम साफ होने का इंतजार भी किया।

राष्ट्रपति प्रणब मुख़र्जी सुबह देहरादून के जौलीग्रांट हवाई अड्डे पर पहुंचे थे। यहां कुछ देर बाद रुकने के बाद उन्होंने केदारनाथ के लिए उड़ान भरी थी । इस दौरान राज्यपाल डॉ. केके पाल व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने उनका स्वागत किया।

तय समय के मुताबिक सुबह साढ़े आठ बजे राष्ट्रपति वायु सेना के विमान से जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंचे। यहां कुछ देर रुकने के बाद वह सेना के एमआइ-17 हेलीकॉप्टर से केदारनाथ को रवाना हुए। सुबह 9.40 बजे उनका केदारनाथ पहुंचने का कार्यक्रम था। मौसम खराब होने के चलते लिनचौली से उनका हेलीकॉप्टर वापस लौट गया।

इसके बाद उनके हेलीकॉप्टर ने दो बार गौचर से गुप्तकाशी की और चक्कर लगाए, लेकिन हेलीकॉप्टर आगे नहीं जा सका। ऐसे में उनका हेलीकॉप्टर देहरादूुन की ओर रवाना हुए। खराब मौसम के चलते राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी केदारबाबा के दर्शन नहीं कर पाए। लेकिन गौचर की वादियों में उन्होंने चाय की चु‌स्कियों का लुत्फ उठाया। दोपहर करीब बारह बजे वह देहरादून पहुंचकर राजभवन पहुंच गए। यहां से वह शाम छह बजे दिल्ली के लिए रवाना होंगे।

भारत ने अंतरिक्ष में एक साथ भेजा 20 उपग्रह, दर्ज़ किया नया रिकॉर्ड

शिखा पाण्डेय,

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने आज आंध्र प्रदेश में श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से एक मिशन के तहत PSLV-C3 नामक रॉकेट को अंतरिक्ष में भेजा। इसके साथ ही भारत ने एक नया रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज़ कर लिया। इसरो ने 20 उपग्रहों का एक साथ प्रक्षेपण किया। जिनमें भारत के उपग्रह के अलावा अमेरिका, कनाडा, जर्मनी, इंडोनेशिया के भी उपग्रह शामिल हैं।

श्रीहरिकोटा से पीएसएलवी सी-34 के जरिए 20 उपग्रहों को आज प्रक्षेपित करने के लिए 48 घंटे का काउन्टडाउन सोमवार सुबह नौ बजकर 26 मिनट पर शुरू हुआ था। आज इसे सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया गया।

भारतीय वैज्ञानिकों की इस बेमिसाल उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बधाई दी है। साथ ही पूरे विश्व से लोग सोशल मीडिया के ज़रिए इसरो के इस उपलब्धि की प्रशंसा कर रहे हैं।

इसरो के अनुसार 20 उपग्रहों का कुल वजन तकरीबन 1288 किलोग्राम है। कार्टोसैट-2 सीरीज के उपग्रह के साथ जिन अन्य उपग्रहों को भेजा उसमें अमेरिका, कनाडा, जर्मनी और इंडोनेशिया के साथ-साथ भारतीय विश्वविद्यालयों के भी दो उपग्रह हैं।

यात्रा सात गुफाओं से निर्मित ऐतिहासिक स्थल एलीफेंटा की

                                                                     (यात्रावृत्त)

डॉ. जितेन्द्र पांडेय,

मुंबई का ‘गेट वे ऑफ इंडिया’ महाराष्ट्र के व्यस्ततम पर्यटन स्थलों में से एक है। गुब्बारे वाले, दूरबीन वाले, खिलौने वाले और अपनी बीन पर सांप का करतब दिखाते सपेरे। सभी टूटी-फूटी अंग्रेजी बोलकर विदेशी सैलानियों का ध्यान अपनी ओर खींचना चाहते हैं। भारत की विरासत कहा जाने वाला ताज होटल भी बड़ी शान से अपनी लाल गुम्बद के साथ यहीं मौजूद है। तुरंत फोटो मुहैया कराने वाले फोटोग्राफर्स एकदम व्यस्त और मस्त। दूर उठती ऊंची-ऊंची लहरें सीमा बंध से टकराकर सैलानियों को भिगोती रहती हैं। पत्थर की दीवार से बंधे दर्ज़नों स्टीमर लहरों पर हिचकोले खाते अपने ग्राहकों के लिए पलक- पांवड़े बिछाए रहते हैं। गर्जना भरती लहरों को देखकर ऐसा लगता है कि किसी ने बब्बर शेर को पिंजरे में कैद कर रखा है। वरुण देवता के प्रकोप को सोचकर मन सिहर उठता है।

भोग को केंद्र में रखकर समुद्र से खिलवाड़ करता मानव आखिर किस हद तक जाएगा ? समुद्री तटों को पाटकर अत्याधुनिक इमारतों के निर्माण में मशगूल इंसान शायद 26 जुलाई के जल-प्लावन को भूल गया। चराचर को विस्मृत कर मानव का स्वयं में सीमित होना कितना त्रासद हो सकता है , जयशंकर प्रसाद की निम्न पंक्तियों से समझा जा सकता है -“अपने में सीमित रह कैसे/ व्यक्ति विकास करेगा/यह एकांत स्वार्थ भीषण है/अपना नाश करेगा /” प्रकृति के श्यामल पक्ष की इसी दुश्चिंता में डूबा बनारस के दोनों प्रफेसरों (डॉ. श्रीनिवास पाण्डेय और डॉ.रंगनाथ ) की उपस्थिति से मैं अंजान था। इन्हीं दोनों महाशयों को एलीफेण्टा केव्स दिखाने की जिम्मेदारी मुम्बई विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की तरफ से मुझे सौंपी गई थी। तब तक श्रीनिवास जी ने टिप्पणी की -“अभी तक समुद्र नहीं देखे हो पाण्डेय जी ?” अचकचाते हुए मैंने कहा -“ऐसी बात नहीं है सर। आप जैसे अतिथियों के सानिध्य में आज सागर भी विशेष है।” …तो चलो करते हैं समुद्री यात्रा।” उत्साह ज़ाहिर करते हुए डॉ. रंगनाथ ने टिकट मेरे हाथ में थमा दिया।

एलीफेण्टा के लिए यह मेरी पहली यात्रा थी। कल्पनाओं ने मानो पंख लगा लिए हों या यूं कहें कि स्वप्न के ऐसे अनोखे लोक में उतर आए हों जहां चारों ओर मात्र जल ही जल हो। हमारा स्टीमर समुद्र की लहरों को चीरता आगे बढ़ रहा था। इसी बीच सूर का पद भी स्मरण हो आया -“मेरो मन अनत कहां सुख पावै/जिमि जहाज का पंछी/उड़ि जहाज पे आवै/” यह लघु यात्रा सूर के वृहद् सामुद्रिक ज्ञान और आध्यात्मिक शक्ति का सहज ही भान करा रही थी। कुछेक घण्टों में हम एलीफेण्टा की धरती पर थे।

गेट वे ऑफ इंडिया से 10 किलोमीटर दूर एलीफैंट के आकार के इस द्वीप को एलीफेण्टा के नाम से जाना जाता है। यह ऐतिहासिक स्थल सात गुफाओं से निर्मित है। इनका प्राचीन नाम “घारापुरी की गुफाएं” है।” घारापुरी” शब्द की उत्पत्ति “अग्रहारपुरी” से मानी जाती है। 1987 में यूनेस्को ने इन गुफाओं को ‘विश्व धरोहर’ का दर्ज़ा दिया था। गुफाओं का निर्माण काल नौवीं से तेरहवीं शताब्दी के मध्य माना जाता है। सर्वप्रथम राष्ट्रकूट राजाओं द्वारा इन गुफाओं की खोज की गई। कुछ हद तक इन राजाओं ने कठोर पाषाणों को तराश कर दक्षिण भारतीय शिल्प को जगह-जगह उकेरा भी है। कुल मिलाकर दक्षिण वंशीय राजाओं की कई पीढ़ियां इसे सजाने-संवारने में खप गईँ। दूसरी तरफ उन आतताइयों का ख्याल आया जिनकी क्रूरता के साक्ष्य चारों तरफ बिखरे मिले। शांत और सौम्य मूर्तियों पर जमकर कुंठा बरपी थी। वज्राघात से अधिकांश मूर्तियों का अधोभाग क्षत-विक्षत था।

elephanta

ध्वंस-राग गूँजने के बावजूद ध्यानस्थ मूर्तियों की चिर समाधि यथावत है। भग्नावशेष एक समृद्ध संस्कृति का एहसास कराते हैं। सदियां बोलती हैं यहां। इनके बीच खड़ा होकर माथा गर्व से ऊंचा हो रहा था। अनायास ही जिह्वा पर आ गया, “कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी / सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-जहां हमारा/” खम्भों और दीवारों की पच्चीकारी अप्रतिम है। भगवान शिव और शक्ति कई रूपों में यहां मौजूद हैं। यदि सिंह और द्वारपाल को छोड़ दिया जाय तो लगभग सभी मूर्तियों में शिव-लीला अपने सर्वोत्तम एवं दुर्लभ रूप में मौजूद है। महेश मूर्ति गुफा सर्वाधिक आकर्षक एवं मिथकीय रहस्य समेटे हुए है। कई प्रकोष्ठों में विभाजित ये गुफाएं पर्यटकों के लिए आकर्षण की केंद्र हैं।पर्यटकों की तादात बढ़ाने के लिए महाराष्ट्र टूरिज्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन की तरफ से प्रतिवर्ष फरवरी महीने में द्विदिवसीय महोत्सव का आयोजन किया जाता है। नृत्य, संगीत और नाटक से सजा यह महोत्सव अनूठा होता है। इस उत्सव की शुरुआत 1989 से की गई थी।

अर्धनारीश्वर शिव की विशाल मूर्ति देखकर मन में ख्याल आया, “जहां शक्ति, शिव से मिलती हैं, वहीं सुंदरता आ पाती है। एक दूसरे से विलगाव विनाश और तांडव का कारण बन जाता है। सही मायने में जीवन और सृष्टि का सन्तुलन भी इसी सूत्र पर आधारित है।” इसी प्रकार हम शैव दर्शन पर चर्चा करते हुए त्रिमूर्ति शिव, शिवलिंग, नटराज की मुद्रा धारण किए हुए रूद्र, कैलाश पर विराजमान सपत्नीक चन्द्रशेखर, कैलाश पर्वत को उठाने की असफल कोशिश करता रावण, शिव-विवाह आदि मूर्तियों की शैल्पिक बुनावट को भी समझने और बूझने का प्रयत्न कर रहे थे। कार्तिकेय, गणेश, सिंह और द्वारपाल की पाषाण प्रतिमाएं दक्ष मूर्तिकारों की छैनी और हथौड़ी से सजीव हो उठी थीं। इसी बीच श्लीलता और अश्लीलता की भी बात उठी। “कला की परख पर आम समझ” विषय पर स्वस्थ व संतुलित चर्चा सुखकर लग रही थी।

जल्दी ही लौटने का वक़्त भी हो गया। अनचाहे मन से हम पगडंडीनुमा रास्ते से नीचे उतर रहे थे। रुद्राक्ष, शंख, पुस्तक और छोटी-छोटी वस्तुओं के खोमचे दोनों ओर लगे थे। डॉ. श्रीनिवास की नज़र स्टॉल के एक पुस्तक पर पड़ी। लगभग उछलते हुए उन्होंने कहा , “आज हमें “मारा बालि राम तब, हृदय माझि सर तानि” का रहस्य समझ में आ गया। मैं किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पा रहा था कि मल्ल युद्ध के दौरान आखिर वह कौन-सी स्थिति बनी होगी , जब प्रभु राम का बाण बालि का वक्षस्थल विदीर्ण कर गया ? बालि को चिन्हित करके भी मारना असंभव था क्योंकि सुग्रीव और बालि का लगातार तेजी से पैंतरा बदल रहे थे। देखिए, पुस्तक के ऊपर का चित्र। सब समझ में आ जाएगा।” हम लोगों की नज़रें पुस्तक के कवर पर छपे चित्र की तरफ उठी ही थी कि डॉ. साहब उसे व्याख्यायित करने लगे- ” ध्यान दें चित्र पर। सुग्रीव पेट के बल जमीन पर पड़ा है। बालि का दाहिना पैर सुग्रीव की पीठ पर। एक तरफ वह सुग्रीव का दोनों हाथ अपनी ओर खींच रहा है दूसरी ओर अपने पैर का दबाव बढ़ा रहा है। ऐसे में राम के लिए सर-संधान ज़रूरी हो जाता है अन्यथा सुग्रीव की मृत्यु निश्चित थी। यही वह स्थिति बनती है जब बालि का मुख राम की तरफ होता है और बाण सीधे उसके हृदय में प्रवेश कर जाता है।” मान गए सर, आप की तरल जिज्ञासा ‘सुंदरकांड’ के मधुसागर से रिसकर मानस में प्लावित हो रही है।” डॉ. रंगनाथ ने बड़े ही सधे शब्दों में गंभीर टिप्पणी की। मैं मन ही मन प्रसन्न था। सोचने लगा “कबीर का सुप्रसिद्ध दोहा ‘बरस्या बादल प्रेम का, भीजि गया सब अंग’ आज भी कितना खरा और सच्चा है।”
उधर सूरज का लाल गोला जल-समाधि ले रहा था। इधर हम भी भारी मन से प्रस्तर- कानन की तरफ रवाना हुए।

विश्व योग दिवस के मौके पर भारत में बने कई रिकॉर्ड

शिखा पांडेय,

आज अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर देश और दुनिया में कई कार्यक्रमों का आयोजन किया गया लेकिन फरीदाबाद में योग गुरु स्वामी रामदेव ने इस मौके पर कई वर्ल्ड रिकॉर्ड बना कर अनूठी मिसाल कायम कर दी। देश और दुनिया में कई सेलिब्रेटीज ने अलग-अलग जगहों पर योग दिवस समारोह में हिस्सा लेकर सेहत को लेकर जागरुकता का संदेश दिया। दुनिया के 191 देशों में इस मौके पर योग किया गया।

बाबा रामदेव ने कई दशकों से योग विज्ञान को आम जान तक पहुँचाने का प्रयास किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा योग को विश्व स्तर पर पहुँचाने के साथ ही स्वामी रामदेव ने विश्व का सबसे बड़ा योग शिबिर आयोजित कर गिनीज़ बुक में नाम दर्ज करा दिया है।

आज योग गुरु रामदेव के कार्यक्रम में एक लाख से अधिक लोगों ने शिरकत की जिनमें से 408 लोगों ने एक साथ शीर्षासन कर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज करवाया। समारोह में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने भी शिरकत की।

Ramdev

योग दिवस के कार्यक्रम के बाद स्वामी रामदेव ने बताया कि आज यहां कई रिकॉर्ड बने हैं। गिनीज रिकॉर्ड को गोल्डेन रिकॉर्ड्स मिले हैं। एक प्रतिभागी की पुशअप का प्रदर्शन भी गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल हो गया। रोहताश चैधरी ने एक मिनट के दौरान पीठ पर 80 पौंड (36.5 किलोग्राम) वजन लेकर 51 पुशअप्स किए। इसके पहले का वर्ल्ड रिकॉर्ड 38 पुशअप्स का था।

स्वामी रामदेव ने कहा कि योग का अभ्यास किसी एक दिन के लिए नहीं है। इसे रोज की जिंदगी में शामिल करें। इससे शांति और दिव्यता मिलेगी।

“अन्य बड़ी हस्तियों द्वारा कहाँ कहाँ किया गया योग और फैलाई जागरूकता”

कानपुर के योग दिवस कार्यक्रम में रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने हजारों लोगों के साथ योग किया।

लखनऊ में केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह और शिया धर्मगुरु मौलाना यासूब अब्बास योग दिवस कार्यक्रम में शामिल हुए।

मेरठ में यूनियन मिनिस्टर मुख्तार अब्बास नकवी और भाजपा सांसद राजेंद्र अग्रवाल योग दिवस कार्यक्रम में लोगों का साथ देने पहुंचे।

भोपाल में योग दिवस के कार्यक्रम में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने शामिल होकर लोगों में योग के लिए जागरूकता फैलाई।

बीसीसीआई के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर और क्रिकेटर हरभजन सिंह ने धर्मशाला क्रिकेट स्टेडियम में योग दिवस मनाया।

पटना के केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने योग दिवस के कार्यक्रम में योग का अभ्यास किया।

अमेरिका के राजदूत रिचर्ड राहुल वर्मा ने नई दिल्ली स्थित यूएस एंबेसी में आयोजित योग दिवस कार्यक्रम में योग का अभ्यास किया।

दिल्ली में दिव्यांग लोगों के लिए योग दिवस का एक खास कार्यक्रम किया गया।

मुंबई में योग दिवस के कार्यक्रम में महाराष्ट्र के राज्यपाल सी विद्यासागर राव ने योग दिवस कार्यक्रम को संबोधित किया।

दिल्ली में नेवी चीफ सुनील लांबा ने अपने साथियों के साथ योग दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया।

अब ऑनलाइन रिजर्वेशन में सिर्फ कन्फर्म या आरएसी टिकट

प्रमुख संवाददाता,

भारतीय रेल ने वेटिंग टिकट से संबंधित एक एक नया नियम लागू किया है। रेलवे अब ऑनलाइन रिजर्वेशन करने वाले यात्रियों को सिर्फ कन्फर्म या आरएसी टिकट ही जारी करेगा। अर्थात ऑनलाइन यात्रियों को अब वेटिंग टिकट नहीं मिलेगा। इसके साथ ही अब रेलवे अपने उपभोक्ताओं को क्षेत्रीय भाषाओं में भी टिकट उपलब्ध कराएगा। काफी लंबे अरसे से लोगों की मांग यह मांग थी जो अब भारतीय रेल द्वारा पूरी की जा रही है।

नए बदलावों के अनुसार अब राजधानी और शताब्दी ट्रेनों के लिए 1 जुलाई से पेपरलेस टिकट मिलेगी। इन ट्रेनों में मोबाइल टिकट वैध रहेगा। इसके अतिरिक्त भारतीय रेलवे एक जुलाई से राजधानी, शताब्दी, दुरंतो और मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों की तरह ही सुविधा ट्रेनें चलाएगा। इन ट्रेनों में यात्रियों को केवल कन्फर्म टिकट ही दी जाएगी। इनमें वेटिंग का सिस्टम नहीं रखा गया है। साथ ही प्रीमियम ट्रेनों का संचालन बंद कर दिया जाएगा।

रेलवे ने एक जुलाई से ही शताब्दी, राजधानी और कई अन्य ट्रेनों के कोचों की संख्या बढ़ाने का भी फैसला किया है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को कन्फर्म टिकट मिल सकें। तत्काल टिकट रद्द कराने पर उसकी आधी कीमत यात्रियों को मिलेगी। अन्य टिकट रद्द कराने का चार्ज अलग-अलग कोच का अलग-अलग होगा। प्रथम और द्वितीय श्रेणी में एसी टिकट रद्द कराने पर 100 रुपए, एसी तीसरी श्रेणी के लिए 90 रुपए और स्लीपर के लिए 60 रुपए रखा जाएगा।

अन्य बड़े बदलावों के तहत रेलवे में अब कोई भी व्यक्ति 50 हजार रुपए में सात दिनों के लिए एक कोच बुक करवा सकता है। 9 लाख रुपए देकर कोई भी व्यक्ति या संगठन सात दिनों के लिए 18 डिब्बों की पूरी ट्रेन बुक करवा सकता है। अगर उसे 18 डिब्बों से ज्यादा की जरूरत होगी, तो एक कोच के लिए 50 हजार रुपए अतिरिक्‍त जमा करवाकर कोच ले सकता है। इसके अलावा यदि सात दिन से ज्यादा कोच या रेलगाड़ी लेनी हो तो इसके लिए रोजाना के हिसाब से एक कोच के 10 हजार रुपए देने होंगे।