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Saturday, September 12, 2026
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फायदे के लिए बच्चों को मज़दूर बना रहा समाज

सौम्या केसरवानी,

किसी भी क्षेत्र में बच्चों द्वारा अपने बचपन में दी गई सेवा को बाल मजदूरी कहते है। इसे गैर-जिम्मेदार माता-पिता की वजह से, या कम लागत में निवेश पर अपने फायदे को बढ़ाने के लिये मालिकों द्वारा ज़बरदस्ती बनाए गए दबाव की वजह से जीवन जीने के लिये जरुरी संसाधनों की कमी के चलते ये बच्चों द्वारा स्वत: किया जाता है। इसका कारण मायने नहीं रखता क्योंकि सभी कारकों की वजह से बच्चे बिना बचपन के अपना जीवन जीने को मजबूर होते है।

बचपन सभी के जीवन में विशेष और सबसे खुशी का पल होता है, जिसमें बच्चे प्रकृति, प्रियजनों और अपने माता-पिता से जीवन जीने का तरीका सीखते है। सामाजिक, बौद्धिक, शारीरिक, और मानसिक सभी दृष्टिकोण से बाल मजदूरी बच्चों की वृद्धि और विकास में अवरोध का काम करता है।

बाल मजदूरी बच्चों से लिया जाने वाला काम है, जो किसी भी क्षेत्र में उनके मालिकों द्वारा करवाया जाता है। ये एक दबावपूर्ण व्यवहार है, जो अभिवावक या मालिकों द्वारा किया जाता है। बचपन सभी बच्चों का जन्म सिद्ध अधिकार है, जो माता-पिता के प्यार और देख-रेख में सभी को मिलना चाहिए। ये गैरकानूनी कृत्य बच्चों को बड़ों की तरह जीने पर मजबूर करता है। इसके कारण बच्चों के जीवन में कई सारी जरुरी चीजों की कमी हो जाती है जैसे- उचित शारीरिक वृद्धि और विकास, दिमाग का अनुपयुक्त विकास, सामाजिक और बौद्धिक रुप से अस्वास्थ्यकर आदि।

बाल मजदूरी को पूरी तरह से रोकने के लिये ढ़ेरों नियम-कानून बनाने के बावजूद भी ये गैर-कानूनी कृत्य दिनों-दिन बढ़ता ही जा रहा है।

भयंकर गरीबी और खराब स्कूली मौके की वजह से बहुत सारे विकासशील देशों में बाल मजदूरी बेहद आम बात है। बाल मजदूरी की उच्च दर अभी भी 50 प्रतिशत से अधिक है, जिसमें 5 से 14 साल तक के बच्चे विकासशील देशों में काम कर रहे है। कृषि क्षेत्र में बाल मजदूरी की दर सबसे उच्च है, जो ज्यादातर ग्रामीण और अनियमित शहरी अर्थव्यवस्था में दिखाई देती है। जहाँ अधिकतर बच्चे अपने दोस्तों के साथ खेलने और स्कूल भेजने के बजाए प्रमुखता से अपने माता-पिता के द्वारा कृषि कार्यों में लगाये गये है।

माता-पिता अपने बच्चों को परिवार के प्रति बचपन से ही जिम्मेदार बनाना चाहते है। वो ये नहीं समझते कि उनके बच्चों को प्यार और परवरिश की जरुरत होती है, उन्हें नियमित स्कूल जाने तथा अच्छी तरह से बड़ा होने के लिये दोस्तों के साथ खेलने की जरुरत है। बच्चों से काम कराने वाले माँ-बाप सोचते है कि बच्चे उनके जागीर होते है और वो उन्हें अपने हिसाब से इस्तेमाल करते हैं।

वास्तव में हर माता-पिता को ये समझना चाहिए कि देश के प्रति भी उनकी कुछ जिम्मेदारी है। देश के भविष्य को उज्जवल बनाने के लिये उन्हें अपने बच्चों को हर तरह से स्वस्थ बनाना चाहिए। माता-पिता को परिवार की जिम्मेदारी खुद से लेनी चाहिए तथा अपने बच्चों को उनका बचपन प्यार और अच्छी परवरिश के साथ जीने देना चाहिए।

साल के अंत तक भारत की एनएसजी सदस्यता तय!

शिखा पाण्डेय, 
चीन सहित कुछ देशों के विरोध के कारण सियोल बैठक में भारत की एनएसजी सदस्यता पर निर्णय न हो पाने पर अमेरिका ने कहा कि साल के अंत तक भारत के लिए एनएसजी की पूर्ण सदस्यता का एक रास्ता है। अमेरिका ने यह बात सियोल में एनएसजी की एक पूर्ण बैठक समाप्त होने के कुछ घंटे बाद कही।

ओबामा प्रशासन के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा है कि हमें पूरा भरोसा है कि हमारे समक्ष इस साल के अंत तक आगे का एक रास्ता है। अधिकारी ने अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर कहा है कि इसके लिए कुछ काम करने की जरूरत है। अधिकारी ने 48 सदस्यीय समूह के भीतर भारत की सदस्यता को लेकर हुई चर्चाओं और विरोध की जानकारी का खुलासा करने से इनकार करते हुए कहा कि आंतरिक चर्चाओं की जानकारी गोपनीय है।

अधिकारी ने कहा कि अमेरिका का भारत की एनएसजी की सदस्यता को लेकर दृढ़ विश्वास है तथा ओबामा प्रशासन ने इस मुद्दे पर भारत एवं अन्य देशों के साथ नजदीकी तौर पर काम किया है। अधिकारी ने चर्चाओं की जानकारी दिए बिना प्रक्षेपास्त्र प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था (एमटीसीआर) में हुई इसी तरह की चर्चा का उल्लेख किया जिसमें भारत को उसके सदस्य देशों के बीच कई महीने की चर्चा के बाद इस महीने के शुरू में शामिल किया गया था। एनएसजी की तरह ही एमटीसीआर में भी निर्णय सहमति से किए जाते हैं।

अधिकारी ने कहा है कि हमें उस भूमिका पर एक निर्णय की उम्मीद थी जो भारत निभाएगा। अधिकारी ने जोर देकर कहा है कि हम इस सप्ताह चर्चा समाप्त कर पाए और हमारे सामने भारत के एक पूर्ण सदस्य बनने के लिए वर्ष के अंत तक एक आगे का रास्ता है। यह पूछे जाने पर कि क्या अमेरिका उम्मीद करता है कि भारत को एनएसजी की सदस्यता इस वर्ष के अंत तक हासिल हो सकेगी, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने दोहराया है कि यह हमारी उम्मीद है।

वेब मीडिया नीति-2016 को मंजूरी, वेबसाइट्स को भी मिलेगा सरकारी विज्ञापन

ब्यूरो,

लखनऊ। वेबसाइट / पोर्टलों को शासकीय विज्ञापन प्रदान करने के उद्देश्य से मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश वेब मीडिया नीति-2016 को मंजूरी प्रदान कर दी है। इससे सरकार की उपलब्धियों, सूचनाओं एवं जानकारियों को जन-जन तक पहुंचाया जा सकेगा।

नीति में विज्ञापन निर्गमन हेतु सूचीबद्ध करने के लिए शर्तें निर्धारित की गयी हैं, जिसके अनुसार वेब मीडिया एवं पोर्टल कम से कम 3 वर्ष से अस्तित्व में होने चाहिए। ऐसे वेबसाइट / पोर्टल जिनके दर का निर्धारण भारत सरकार के डीएवीपी द्वारा किया गया हो उन्हें विभाग द्वारा सूचीबद्ध माना जाएगा। विज्ञापन मान्यता के लिए आवेदन करने के लिए वेबसाइट / पोर्टलों को अपना रजिस्ट्रेशन सूचना एवं जनसम्पर्क निदेशालय में कराना अनिवार्य होगा।

अंग्रेजी वेब मीडिया को भी हिन्दी वेब मीडिया की भांति विज्ञापन जारी किया जाएगा। विज्ञापन वितरण के उद्देश्य से वेब माध्यमों को 3 श्रेणियों में शर्तों के तहत वर्गीकृत किया जाएगा। विज्ञापन उस वेबसाइट/पोर्टल को दिया जाएगा, जिसकी प्रतिमाह हिट्स की न्यूनतम संख्या 2.5 लाख हिट्स होगी। हिट्स की गणना के लिए छः माह का औसत आधार लिया जाएगा। गणना के लिए सूचना विभाग अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्य थर्ड पार्टी, जो भारत में वेबसाइट ट्रैफिक मानीटर करती हो, को स्वीकार करेगा।

स्वामी प्रसाद मौर्या जल्द हो सकते हैं ‘बीजेपी’ में शामिल!

अनुज हनुमत,

बसपा के बागी नेता स्वामी प्रसाद मौर्य को लेकर अटकलों का दौर जारी है। बीएसपी छोड़ने के बाद पहली बार दिल्ली आए स्वामी प्रसाद मौर्या ने अपनी राजनीतिक मोर्चाबंदी शुरू कर दी है। मौर्या बीजेपी के आला नेताओं से तो मिलेंगे ही लेकिन उनका अगला कदम क्या होगा, इसपर उन्होंने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। उनका कहना है कि एक जुलाई को वो लखनऊ में अपने समर्थकों के साथ बैठक करेंगे, साथ ही बीएसपी से बाहर किए गए सभी नेताओं को एक साथ करेंगें, वहीं सूत्रों की माने तो बीजेपी पिछले कुछ महीनों से मौर्य के संपर्क में है।

मौर्य द्वारा सपा की तीखी आलोचना करने के बाद राजनीतिक पंडितों का मानना है कि अब स्वामी प्रसाद समाजवादी पार्टी में नहीं जायेंगे। वहीं दूसरी ओर यह भी कयास लगाये जा रहे हैं कि स्वामी प्रसाद मौर्य लगातार भाजपा नेताओं के संपर्क में बने हुए हैं। मौर्य के बीजेपी में शामिल होने की अटकलें तेज हो गयी हैं। राजनीतिक सूत्रों की माने तो स्वामी प्रसाद मौर्य अभी दिल्ली में हैं और बहुत जल्द उनकी मुलाकात बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से होगी।

मौर्य ने कहा कि वह अपने अगले कदम के बारे में जुलाई में फैसला करेंगे। उन्होंने लखनऊ में अपने समर्थकों की बैठक बुलाई है। उन्होंने कहा कि मैं कहां जाउंगा, इसका फैसला एक जुलाई को हो जाएगा। बीजेपी यूपी प्रेसिडेंट केशव प्रसाद मौर्या ने शुक्रवार को कहा कि अगर बीएसपी के बागी स्वामी प्रसाद मौर्या बीजेपी में आने का प्रस्ताव भेजते हैं, तो पार्टी उस पर विचार करेगी।

मायावती की पार्टी छोड़ने के बाद अटकलें यह भी थीं कि मौर्य के सपा से जुड़ सकते हैं लेकिन मौर्य द्वारा सपा की तीखी आलोचना करने के बाद ये साफ होता दिख रहा है कि वो अब स्वामी प्रसाद समाजवादी पार्टी में नहीं जाएंगे। मौर्य ने सपा को गुंडों की पार्टी कह डाला और इसके पलटवार में सपा ने भी उन्हें निशाने पर ले लिया।

थाने के चक्कर काटने से मिलेगी मुक्ति, पासपोर्ट बनवाना हुआ और भी आसान

ब्यूरो,

नई दिल्ली: अगर आप नया पासपोर्ट बनाना चाहते हैं तो ये खबर आपके लिए जरूरी है, क्योंकि सरकार आपके लिए राहत का खबर लेकर आई है। अब पासपोर्ट बनाने के दौरान पुलिस थाने के चक्कर नहीं काटने होंगे, पुलिस सत्यापन के नाम पर हो रही परेशानियों से निजात मिल गया है।

नई पासपोर्ट नीति के तहत पासपोर्ट बनाने के क्रम में आने वाली परेशानियों को दूर करने की दिशा में सरकार अहद कदम उठाने जा रही है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ऐलान किया है कि अब पासपोर्ट बनाने के लिए पुलिस सत्यापन की जरूरत नहीं पड़ेगी। पुलिस सत्यापन में हो रही देरी के मद्देनजर ये कदम उठाया गया है। हां ये जरूर है कि पासपोर्ट बनने के बाद आपका सत्यापऩ कराया जाएगा और गलत पाए जाने पर पासपोर्ट रद्द कर दिया जाएगा। सरकार के इस फैसले के बाद अगर आपके पास तीन चीजे हैं तो पासपोर्ट कम समय में बन सकता है।

नये नियम के मुताबिक अगर आपके पास पैन कार्ड, आधार कार्ड, चुनाव पहचान पत्र और ड्राइविंग लाइसेंस इन चारों में से कोई एक पहचान पत्र है तो आपको पुलिस वेरिफिकेशन की जरूरत नहीं पड़ेगी। आपको करना बस ये है कि इनमें से किसी एक पहचान पत्र को राशन कार्ड, बिजली बिल और हाउस रेंट स्लिप में से किसी एक दस्तावेज और जरूरी कागजता के साथ अटैच कर पासपोर्ट सेवा केंद्र में जमा कर दें। आपका पासपोर्ट बन जाएगा। पुलिस और थाने के आपको चक्कर नहीं काटने होंगे। कई लोग पुलिस सत्यापन के चक्रव्यूह में फंस जाते हैं और उनका पासपोर्ट लटक जाता है.

अब विदेश नीति को लेकर ‘आप’ के निशाने पर मोदी

अमित द्विवेदी,

दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधने का फिर एक नया बहाना ढूंढ निकाला है। एनएसजी और ब्रिटेन के यूरोपियन संघ से बाहर होने के मुद्दे को लेकर ‘आप’ और केजरीवाल ने एक बार फिर नरेंद्र मोदी सरकार पर जोरदार हमला बोला है।

एक ओर दिल्‍ली के उप मुख्‍यमंत्री मनीष सिसोदिया ने मोदी सरकार की विदेश नीति पर हमला बोला, दूसरी ओर मुख्यमंत्री केजरीवाल ब्रिटेन में यूरोपीय संघ (ईयू) को लेकर हुए ऐतिहासिक जनमत संग्रह के बाद एक बार फिर से दिल्‍ली को पूर्ण राज्‍य बनाने की धुन फिर छेड़ चुके हैं। केजरीवाल भी पूर्ण राज्‍य के लिए जनमत संग्रह की तैयारी कर रहे हैं। केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा, यूके रेफरेंडम के बाद अब जल्‍द ही दिल्‍ली में भी पूर्ण राज्‍य को लेकर जनमत संग्रह किया जाएगा।

मनीष सिसोदिया ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए एक के बाद एक कई ट्वीट किए। सिसोदिया ने एनएसजी को लेकर लिखा,” हारे तो चीन की चालाकी, और अगर जीते होते तो? मोदी मोदी जप रहे होते। तमाशे की कूटनीति को तमाचा लगा है। कुछ तो शर्म करो।” उन्‍होंने आगे लिखा,” झूला झुलाने, बिरयानी खिलाने और 10-10 लाख के सूट पहनकर दिखाने से दुनिया में कूटनीति नहीं चलती। क्या NSG पर देश की हार के लिए, राज्यों को कमज़ोर करने में व्यस्त PMO से सवाल नहीं पूछा जाना चाहिए? है कोई या सवाल पूछने वाले भी सब व्यस्त हैं?”

अरविंद केजरीवाल ने भी प्रधानमंत्री पर हमला करते हुए कहा,” प्रधानमंत्री मोदी विदेश नीति के मोर्चे पर पूरी तरह नाकाम रहे हैं। उन्होंने अपनी विदेश यात्राओं के दौरान क्या कुछ किया इस बारे में उन्हें स्पष्टीकरण देना होगा।”

गौरतलब हो कि मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल लगातार दिल्‍ली को पूर्ण राज्‍य का दर्जा दिये जाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन हर बार उन्‍हें राजनीतिक दबाव के कारण पीछे हटना पड़ जाता है।

गृह मंत्रालय ने लौटाए दिल्ली सरकार के 14 विधेयक, आप और केंद्र में फिर तकरार के आसार

अनुज हनुमत,

दिल्ली। अभी दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल और केंद्र सरकार के बीच रिश्ते ठीक होते कि उससे पहले गृहमंत्रालय के एक निर्णय ने फिर से माहौल गर्म कर दिया है। गृह मंत्रालय ने दिल्ली विधानसभा के करीब 14 विधेयक लौटा दिए हैं। मंत्रालय ने विधेयक लौटाने का कारण बताते हुए कहा कि विधेयक को मंजूरी देते समय केजरीवाल सरकार ने उचित प्रक्रिया का पालन नही किया है।

गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि दिल्ली एक केंद्रशासित क्षेत्र है और विधानसभा में किसी भी विधेयक को पारित करने से पहले मंजूरी के लिए केंद्र सरकार के पास भेजना होता है। केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने के बाद ही उसे विधानसभा की मंजूरी के लिए पेश किया जा सकता है।

विधानसभा में विधेयक पारित होने के बाद उसे उपराज्यपाल के पास और फिर राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए केंद्र सरकार के पास भेजना होता है। अधिकारी ने कहा कि इन 14 में से किसी भी विधेयक के लिए दिल्ली सरकार ने केंद्र सरकार से पूर्व मंजूरी नहीं ली और विधानसभा में सीधा विधेयक पारित करा लिया।
उन्होंने कहा कि चूंकि उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया, सभी 14 विधेयकों को सुधार के लिए दिल्ली सरकार के पास वापस भेज दिया गया।

पिछले कुछ हफ्तों में लौटाए गए विधेयकों में जनलोकपाल विधेयक 2015, न्यूनतम मजदूरी (दिल्ली संशोधन) विधेयक 2015, दिल्ली स्कूल (लेखा सत्यापन एवं अतिरिक्त शुल्क वापसी), दिल्ली स्कूल शिक्षा (संशोधन) विधेयक 2015, निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा (दिल्ली संशोधन) विधेयक 2015 और श्रमजीवी पत्रकारों से संबंधित एक विधेयक शामिल है। इस नए घटनाक्रम से आप सरकार और केंद्र के बीच टकराव का एक नया दौर शुरू हो सकता है। अब देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में दिल्ली की राजनीति किस करवट बैठेगी।

उत्तराखण्ड: पिकअप के खाईं में गिरने से 8 की मौत 7 घायल

नारायण सिंह ‘रघुवंशी’,

उत्तराखण्ड: अखोड़ी जा रही पिकअप के सांताखाल के पास गहरी खाई में गिरने से आठ लोगों की जान जाने की खबर है, जबकि सात लोगों को गंभीर चोट आई है। जानकारी के मुताबिक़ मृतकों में एक मां-बेटी भी शामिल हैं। पिकअप में कुल 15 लोग सवार थे।

शुक्रवार दोपहर बाद साढ़े तीन बजे घनसाली से अखोड़ी जा रही अपलाइन फॉर पिकअप सातांखाल के पास अनियंत्रित हो पैराफिट तोड़ती हुई लगभग 400 मीटर नीचे गबणी गदेरे में जा गिरी। हादसा इतना भयावह था कि खाई में गिरते ही पिकअप के परखच्चे उड़ गए और सात लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि, पिकअप चालक ने पिलखी अस्पताल ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ा। मृतकों में जीतराम (55 वर्ष), जलम दास (62 वर्ष), विनीता (19 वर्ष), सौणी देवी (50 वर्ष), मंगली देवी (35 वर्ष), सुंदरलाल भट्ट (32 वर्ष), बबीता देवी (22 वर्ष) व चालक कुलदीप सिंह (32 वर्ष) शामिल हैं।

नेपाली मूल के श्रमिक विकास, कमल, सुरेश, दीपक, सुमति देवी, शुभम, राजेंद्र हादसे में घायल हुए हैं। घायलों में सुमति देवी और शुभम की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया गया।

क्या है यूरोपीय संघ का मसला, जिसने दुनिया हिला दी? जानने के लिए पढ़ें पूरी रिपोर्ट

शिखा पाण्डेय, 
ब्रिटेन के यूरोपीय संघ (ईयू) में बने रहने या इसकी सदस्यता से बाहर निकलने को लेकर गुरुवार को कराए गए जनमत संग्रह में ब्रिटेन यूरोपीय संघ (ईयू) से अलग हो गया है। कल मतदान समाप्त होने के बाद आज वोटों की गिनती हुई, जिसमें करीब 52 फीसदी मतदान ‘ब्रेक्सिट’ (ब्रिटेन +एग्जिट) के पक्ष में हुआ है, जबकि 48 प्रतिशत वोट ‘ब्रिमेन’ (ब्रिटेन+रिमेन)के लिए पड़े हैं। इस जनमत संग्रह पर ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने शुक्रवार को कहा कि ब्रिटेन अब यूरोपियन यूनियन से अलग होगा। मैं ब्रिटेन के लोगों के फैसले का सम्‍मान करता हूं।

इस मतदान का फैसला वर्ष 1973 में हुए उस जनादेश को उलट रहा है, जिसमें ब्रिटेन ने यूरोपियन इकोनॉमिक कम्युनिटी का सदस्य बने रहने के लिए मतदान किया था और यही समूह बाद में यूरोपीय संघ बन गया था। लोगों को इस संघ से काफी उम्मीद थी लेकिन धीरे-धीरे उनकी उम्मीद पर पानी फिरता चला गया और 23 जून को एक बार फिर इस मामले को लेकर जनमत संग्रह कराया गया जिसका परिणाम 24 जून यानी आज आया जिसने 43 साल पहले के बिट्रेन का बदलता स्वरूप लोगों के सामने रखा।

इस मामले को लेकर ब्रिटेन में दो गुट बने, जिनमें से एक का मत ‘रीमेन’ (Remain या ईयू में बने रहें) था और दूसरे का मत है ‘लीव’ (Leave या ईयू को छोड़ दें) था। दोनों के बीच यहां कांटे की टक्कर हुई जिसमें  ‘लीव’ ग्रुप ने 52 प्रतिशत वोट हासिल करके ‘रीमेन’ को पछाड़ दिया।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने गुरुवार को हुए ऐतिहासिक जनमत संग्रह के बाद अगले कुछ महीनों के बाद पद पर बने नहीं रहने का एलान कर दिया है। वे अक्तूबर में प्रधानमंत्री पद छोड़ देंगे। ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने देश को संबोधित करते हुए कहा,” मैं ब्रिटेन के लोगों के फैसले का सम्‍मान करता हूं। इससे ब्रिटेन की अर्थव्‍यवस्‍था में सुधार होगा। ब्रिटेन के आर्थिक हालात बहुत बेहतर हैं। यूरोपियन यूनियन से अगल होना ऐतिहासिक फैसला है। हालांकि ईयू से अलग होने में ब्रिटेन को अभी दो साल का वक्‍त लगेगा।”

कैमरन ने कहा कि वह दुनियाभर के लोगों को यह आश्वासन देना चाहते हैं कि ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था मूलत: मजबूत है। जहां तक यूके में बसे यूरोपियन यूनियन के नागरिकों का सवाल है तो प्रधानमंत्री ने उन्हें साफ किया है कि उनकी स्थिति में फौरी तौर पर किसी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा। कैमरन ने कहा कि वे इस जहाज को स्थिर बनाए रखने की कोशिश करेंगे लेकिन अक्टूबर में इस देश को नया प्रधानमंत्री मिल जाएगा। आपको बता दें कि प्रधानमंत्री कैमरन भी ब्रिटेन के यूरोपीय संघ में रहने के पक्ष में थे।

क्या थी ‘लीव’ की दलील?

‘लीव’ ग्रुप की दलील थी कि ब्रिटेन की पहचान, आज़ादी और संस्कृति को बनाए और बचाए रखने के लिए एग्जिट करना ज़रूरी है। यह ग्रुप ब्रिटेन में भारी संख्या में आने वाले प्रवासियों पर भी सवाल उठा रहा था जिसको भारी संख्‍या में लोगों ने पसंद किया। ‘लीव’ ग्रुप का यह भी कहना था कि यूरोपियन यूनियन ब्रिटेन के करदाताओं के अरबों पाउंड सोख लेता है, और ब्रिटेन पर अपने ‘अलोकतांत्रिक’ कानून थोपता है।

क्या थी ‘रीमेन’ की दलील?

‘रीमेन’ खेमे के लोगों की दलील थी कि यूरोपियन यूनियन में बने रहना ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद साबित होगा। साथ ही उनका मानना था कि इस फायदे के सामने प्रवासियों का मुद्दा बेहद छोटा है। अधिकतर अर्थशास्त्री इस उनकी इस दलील से सहमत दिखाई दे रहे थे।

ब्रिटिश मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटेन ने इस जनमत संग्रह के जरिए 43 वर्षों बाद ईयू की सदस्यता से हटने के पक्ष में वोट किया है। ‘रीमेन’ अभियान के पक्ष में 15,692,092 वोट पड़े, जबकि ‘लीव’ के पक्ष में इससे 6,835,512 अधिक वोट पड़े। नतीजों से यह साफ हुआ कि पूर्वोत्तर इंग्लैंड, वेल्स और मिडलैंड्स में अधिकतर मतदाताओं ने यूरोपीय संघ से अलग होना पसंद किया है जबकि लंदन, स्कॉटलैंड और नॉर्दन आयरलैंड के ज्यादातर मतदाता यूरोपीय संघ के साथ ही रहना चाहते थे।

उत्तर प्रदेश: 24 घंटे में दो दरोगा चढ़े अपराधियों की भेंट

अनुज हनुमत,

जनता की सुरक्षा का दायित्व पुलिस का होता है, पर इस समय यूपी के हालात ऐसे है कि प्रदेश में खाकी ही सुरक्षित नहीं लग रही है। पिछले 24 घंटे के अंदर उत्तर प्रदेश में दो दारोगा, बदमाशों के शिकार बने हैं।

पहली वारदात हापुड़ा की है, जहां गुरूवार को एक दारोगा की गोली मारकर हत्या कर दी। दारोगा का नाम सुखबीर सिंह यादव है और वो बागपत के सिंघावली थाने में तैनात थे। वारदात हापुड़ कोतवाली के मोदीनगर रोड पर हुई है जिसके बाद से क्षेत्र में सन्नाटा पसरा हुआ है। बदमाशों का शिकार बने सुखबीर की इलाज के दौरान मौत हुई।

पुलिस का कहना है कि दारोगा से लूट की कोशिश में बदमाशों ने उन्हें गोली मारी। वहीं इससे पहले यूपी के बदायूं में बुधवार रात को बदमाशों ने एक दारोगा की गोली मारकर हत्या कर दी थी। 24 घंटे में दो दारोगा की मौत ने पुलिस महकमे में हलचल मचा दी है।

इससे पहले बुधवार रात यूपी के बदायूं में गश्त के दौरान बदमाशों ने एक दारोगा की गोली मारकर हत्या कर दी थी। दरोगा सर्वेश यादव बदमाशों की बिना नंबर की बाइक को रोकने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान बदमाशों ने उन्हें गोली मार दी। दरोगा को तुरंत इलाज के लिए बरेली भेजा गया लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो गई। जैसे ही दारोगा को गोली मारे जाने की सूचना मिली पुलिस ने बदमाशों का पीछा किया और एक गांव के पास उन्हें घेर लिया। दोनों तरफ से कई राउंड फायरिंग हुई। जिसमें एक सिपाही घायल हो गया। मुठभेड़ के बाद पुलिस ने एक बदमाश को दबोच लिया। जबकि दो बदमाश अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए। इन दोनों घटनाओं ने अब ये प्रश्न खड़ा कर दिया है की क्या वाकई ऐसे माहौल में जनता खुद को सुरक्षित महसूस कर सकती है जबकि खाकी ही सुरक्षित नही है ।