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Monday, August 3, 2026
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स्वामी प्रसाद मौर्या जल्द हो सकते हैं ‘बीजेपी’ में शामिल!

अनुज हनुमत,

बसपा के बागी नेता स्वामी प्रसाद मौर्य को लेकर अटकलों का दौर जारी है। बीएसपी छोड़ने के बाद पहली बार दिल्ली आए स्वामी प्रसाद मौर्या ने अपनी राजनीतिक मोर्चाबंदी शुरू कर दी है। मौर्या बीजेपी के आला नेताओं से तो मिलेंगे ही लेकिन उनका अगला कदम क्या होगा, इसपर उन्होंने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। उनका कहना है कि एक जुलाई को वो लखनऊ में अपने समर्थकों के साथ बैठक करेंगे, साथ ही बीएसपी से बाहर किए गए सभी नेताओं को एक साथ करेंगें, वहीं सूत्रों की माने तो बीजेपी पिछले कुछ महीनों से मौर्य के संपर्क में है।

मौर्य द्वारा सपा की तीखी आलोचना करने के बाद राजनीतिक पंडितों का मानना है कि अब स्वामी प्रसाद समाजवादी पार्टी में नहीं जायेंगे। वहीं दूसरी ओर यह भी कयास लगाये जा रहे हैं कि स्वामी प्रसाद मौर्य लगातार भाजपा नेताओं के संपर्क में बने हुए हैं। मौर्य के बीजेपी में शामिल होने की अटकलें तेज हो गयी हैं। राजनीतिक सूत्रों की माने तो स्वामी प्रसाद मौर्य अभी दिल्ली में हैं और बहुत जल्द उनकी मुलाकात बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से होगी।

मौर्य ने कहा कि वह अपने अगले कदम के बारे में जुलाई में फैसला करेंगे। उन्होंने लखनऊ में अपने समर्थकों की बैठक बुलाई है। उन्होंने कहा कि मैं कहां जाउंगा, इसका फैसला एक जुलाई को हो जाएगा। बीजेपी यूपी प्रेसिडेंट केशव प्रसाद मौर्या ने शुक्रवार को कहा कि अगर बीएसपी के बागी स्वामी प्रसाद मौर्या बीजेपी में आने का प्रस्ताव भेजते हैं, तो पार्टी उस पर विचार करेगी।

मायावती की पार्टी छोड़ने के बाद अटकलें यह भी थीं कि मौर्य के सपा से जुड़ सकते हैं लेकिन मौर्य द्वारा सपा की तीखी आलोचना करने के बाद ये साफ होता दिख रहा है कि वो अब स्वामी प्रसाद समाजवादी पार्टी में नहीं जाएंगे। मौर्य ने सपा को गुंडों की पार्टी कह डाला और इसके पलटवार में सपा ने भी उन्हें निशाने पर ले लिया।

थाने के चक्कर काटने से मिलेगी मुक्ति, पासपोर्ट बनवाना हुआ और भी आसान

ब्यूरो,

नई दिल्ली: अगर आप नया पासपोर्ट बनाना चाहते हैं तो ये खबर आपके लिए जरूरी है, क्योंकि सरकार आपके लिए राहत का खबर लेकर आई है। अब पासपोर्ट बनाने के दौरान पुलिस थाने के चक्कर नहीं काटने होंगे, पुलिस सत्यापन के नाम पर हो रही परेशानियों से निजात मिल गया है।

नई पासपोर्ट नीति के तहत पासपोर्ट बनाने के क्रम में आने वाली परेशानियों को दूर करने की दिशा में सरकार अहद कदम उठाने जा रही है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ऐलान किया है कि अब पासपोर्ट बनाने के लिए पुलिस सत्यापन की जरूरत नहीं पड़ेगी। पुलिस सत्यापन में हो रही देरी के मद्देनजर ये कदम उठाया गया है। हां ये जरूर है कि पासपोर्ट बनने के बाद आपका सत्यापऩ कराया जाएगा और गलत पाए जाने पर पासपोर्ट रद्द कर दिया जाएगा। सरकार के इस फैसले के बाद अगर आपके पास तीन चीजे हैं तो पासपोर्ट कम समय में बन सकता है।

नये नियम के मुताबिक अगर आपके पास पैन कार्ड, आधार कार्ड, चुनाव पहचान पत्र और ड्राइविंग लाइसेंस इन चारों में से कोई एक पहचान पत्र है तो आपको पुलिस वेरिफिकेशन की जरूरत नहीं पड़ेगी। आपको करना बस ये है कि इनमें से किसी एक पहचान पत्र को राशन कार्ड, बिजली बिल और हाउस रेंट स्लिप में से किसी एक दस्तावेज और जरूरी कागजता के साथ अटैच कर पासपोर्ट सेवा केंद्र में जमा कर दें। आपका पासपोर्ट बन जाएगा। पुलिस और थाने के आपको चक्कर नहीं काटने होंगे। कई लोग पुलिस सत्यापन के चक्रव्यूह में फंस जाते हैं और उनका पासपोर्ट लटक जाता है.

अब विदेश नीति को लेकर ‘आप’ के निशाने पर मोदी

अमित द्विवेदी,

दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधने का फिर एक नया बहाना ढूंढ निकाला है। एनएसजी और ब्रिटेन के यूरोपियन संघ से बाहर होने के मुद्दे को लेकर ‘आप’ और केजरीवाल ने एक बार फिर नरेंद्र मोदी सरकार पर जोरदार हमला बोला है।

एक ओर दिल्‍ली के उप मुख्‍यमंत्री मनीष सिसोदिया ने मोदी सरकार की विदेश नीति पर हमला बोला, दूसरी ओर मुख्यमंत्री केजरीवाल ब्रिटेन में यूरोपीय संघ (ईयू) को लेकर हुए ऐतिहासिक जनमत संग्रह के बाद एक बार फिर से दिल्‍ली को पूर्ण राज्‍य बनाने की धुन फिर छेड़ चुके हैं। केजरीवाल भी पूर्ण राज्‍य के लिए जनमत संग्रह की तैयारी कर रहे हैं। केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा, यूके रेफरेंडम के बाद अब जल्‍द ही दिल्‍ली में भी पूर्ण राज्‍य को लेकर जनमत संग्रह किया जाएगा।

मनीष सिसोदिया ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए एक के बाद एक कई ट्वीट किए। सिसोदिया ने एनएसजी को लेकर लिखा,” हारे तो चीन की चालाकी, और अगर जीते होते तो? मोदी मोदी जप रहे होते। तमाशे की कूटनीति को तमाचा लगा है। कुछ तो शर्म करो।” उन्‍होंने आगे लिखा,” झूला झुलाने, बिरयानी खिलाने और 10-10 लाख के सूट पहनकर दिखाने से दुनिया में कूटनीति नहीं चलती। क्या NSG पर देश की हार के लिए, राज्यों को कमज़ोर करने में व्यस्त PMO से सवाल नहीं पूछा जाना चाहिए? है कोई या सवाल पूछने वाले भी सब व्यस्त हैं?”

अरविंद केजरीवाल ने भी प्रधानमंत्री पर हमला करते हुए कहा,” प्रधानमंत्री मोदी विदेश नीति के मोर्चे पर पूरी तरह नाकाम रहे हैं। उन्होंने अपनी विदेश यात्राओं के दौरान क्या कुछ किया इस बारे में उन्हें स्पष्टीकरण देना होगा।”

गौरतलब हो कि मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल लगातार दिल्‍ली को पूर्ण राज्‍य का दर्जा दिये जाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन हर बार उन्‍हें राजनीतिक दबाव के कारण पीछे हटना पड़ जाता है।

गृह मंत्रालय ने लौटाए दिल्ली सरकार के 14 विधेयक, आप और केंद्र में फिर तकरार के आसार

अनुज हनुमत,

दिल्ली। अभी दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल और केंद्र सरकार के बीच रिश्ते ठीक होते कि उससे पहले गृहमंत्रालय के एक निर्णय ने फिर से माहौल गर्म कर दिया है। गृह मंत्रालय ने दिल्ली विधानसभा के करीब 14 विधेयक लौटा दिए हैं। मंत्रालय ने विधेयक लौटाने का कारण बताते हुए कहा कि विधेयक को मंजूरी देते समय केजरीवाल सरकार ने उचित प्रक्रिया का पालन नही किया है।

गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि दिल्ली एक केंद्रशासित क्षेत्र है और विधानसभा में किसी भी विधेयक को पारित करने से पहले मंजूरी के लिए केंद्र सरकार के पास भेजना होता है। केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने के बाद ही उसे विधानसभा की मंजूरी के लिए पेश किया जा सकता है।

विधानसभा में विधेयक पारित होने के बाद उसे उपराज्यपाल के पास और फिर राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए केंद्र सरकार के पास भेजना होता है। अधिकारी ने कहा कि इन 14 में से किसी भी विधेयक के लिए दिल्ली सरकार ने केंद्र सरकार से पूर्व मंजूरी नहीं ली और विधानसभा में सीधा विधेयक पारित करा लिया।
उन्होंने कहा कि चूंकि उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया, सभी 14 विधेयकों को सुधार के लिए दिल्ली सरकार के पास वापस भेज दिया गया।

पिछले कुछ हफ्तों में लौटाए गए विधेयकों में जनलोकपाल विधेयक 2015, न्यूनतम मजदूरी (दिल्ली संशोधन) विधेयक 2015, दिल्ली स्कूल (लेखा सत्यापन एवं अतिरिक्त शुल्क वापसी), दिल्ली स्कूल शिक्षा (संशोधन) विधेयक 2015, निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा (दिल्ली संशोधन) विधेयक 2015 और श्रमजीवी पत्रकारों से संबंधित एक विधेयक शामिल है। इस नए घटनाक्रम से आप सरकार और केंद्र के बीच टकराव का एक नया दौर शुरू हो सकता है। अब देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में दिल्ली की राजनीति किस करवट बैठेगी।

उत्तराखण्ड: पिकअप के खाईं में गिरने से 8 की मौत 7 घायल

नारायण सिंह ‘रघुवंशी’,

उत्तराखण्ड: अखोड़ी जा रही पिकअप के सांताखाल के पास गहरी खाई में गिरने से आठ लोगों की जान जाने की खबर है, जबकि सात लोगों को गंभीर चोट आई है। जानकारी के मुताबिक़ मृतकों में एक मां-बेटी भी शामिल हैं। पिकअप में कुल 15 लोग सवार थे।

शुक्रवार दोपहर बाद साढ़े तीन बजे घनसाली से अखोड़ी जा रही अपलाइन फॉर पिकअप सातांखाल के पास अनियंत्रित हो पैराफिट तोड़ती हुई लगभग 400 मीटर नीचे गबणी गदेरे में जा गिरी। हादसा इतना भयावह था कि खाई में गिरते ही पिकअप के परखच्चे उड़ गए और सात लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि, पिकअप चालक ने पिलखी अस्पताल ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ा। मृतकों में जीतराम (55 वर्ष), जलम दास (62 वर्ष), विनीता (19 वर्ष), सौणी देवी (50 वर्ष), मंगली देवी (35 वर्ष), सुंदरलाल भट्ट (32 वर्ष), बबीता देवी (22 वर्ष) व चालक कुलदीप सिंह (32 वर्ष) शामिल हैं।

नेपाली मूल के श्रमिक विकास, कमल, सुरेश, दीपक, सुमति देवी, शुभम, राजेंद्र हादसे में घायल हुए हैं। घायलों में सुमति देवी और शुभम की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया गया।

क्या है यूरोपीय संघ का मसला, जिसने दुनिया हिला दी? जानने के लिए पढ़ें पूरी रिपोर्ट

शिखा पाण्डेय, 
ब्रिटेन के यूरोपीय संघ (ईयू) में बने रहने या इसकी सदस्यता से बाहर निकलने को लेकर गुरुवार को कराए गए जनमत संग्रह में ब्रिटेन यूरोपीय संघ (ईयू) से अलग हो गया है। कल मतदान समाप्त होने के बाद आज वोटों की गिनती हुई, जिसमें करीब 52 फीसदी मतदान ‘ब्रेक्सिट’ (ब्रिटेन +एग्जिट) के पक्ष में हुआ है, जबकि 48 प्रतिशत वोट ‘ब्रिमेन’ (ब्रिटेन+रिमेन)के लिए पड़े हैं। इस जनमत संग्रह पर ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने शुक्रवार को कहा कि ब्रिटेन अब यूरोपियन यूनियन से अलग होगा। मैं ब्रिटेन के लोगों के फैसले का सम्‍मान करता हूं।

इस मतदान का फैसला वर्ष 1973 में हुए उस जनादेश को उलट रहा है, जिसमें ब्रिटेन ने यूरोपियन इकोनॉमिक कम्युनिटी का सदस्य बने रहने के लिए मतदान किया था और यही समूह बाद में यूरोपीय संघ बन गया था। लोगों को इस संघ से काफी उम्मीद थी लेकिन धीरे-धीरे उनकी उम्मीद पर पानी फिरता चला गया और 23 जून को एक बार फिर इस मामले को लेकर जनमत संग्रह कराया गया जिसका परिणाम 24 जून यानी आज आया जिसने 43 साल पहले के बिट्रेन का बदलता स्वरूप लोगों के सामने रखा।

इस मामले को लेकर ब्रिटेन में दो गुट बने, जिनमें से एक का मत ‘रीमेन’ (Remain या ईयू में बने रहें) था और दूसरे का मत है ‘लीव’ (Leave या ईयू को छोड़ दें) था। दोनों के बीच यहां कांटे की टक्कर हुई जिसमें  ‘लीव’ ग्रुप ने 52 प्रतिशत वोट हासिल करके ‘रीमेन’ को पछाड़ दिया।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने गुरुवार को हुए ऐतिहासिक जनमत संग्रह के बाद अगले कुछ महीनों के बाद पद पर बने नहीं रहने का एलान कर दिया है। वे अक्तूबर में प्रधानमंत्री पद छोड़ देंगे। ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने देश को संबोधित करते हुए कहा,” मैं ब्रिटेन के लोगों के फैसले का सम्‍मान करता हूं। इससे ब्रिटेन की अर्थव्‍यवस्‍था में सुधार होगा। ब्रिटेन के आर्थिक हालात बहुत बेहतर हैं। यूरोपियन यूनियन से अगल होना ऐतिहासिक फैसला है। हालांकि ईयू से अलग होने में ब्रिटेन को अभी दो साल का वक्‍त लगेगा।”

कैमरन ने कहा कि वह दुनियाभर के लोगों को यह आश्वासन देना चाहते हैं कि ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था मूलत: मजबूत है। जहां तक यूके में बसे यूरोपियन यूनियन के नागरिकों का सवाल है तो प्रधानमंत्री ने उन्हें साफ किया है कि उनकी स्थिति में फौरी तौर पर किसी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा। कैमरन ने कहा कि वे इस जहाज को स्थिर बनाए रखने की कोशिश करेंगे लेकिन अक्टूबर में इस देश को नया प्रधानमंत्री मिल जाएगा। आपको बता दें कि प्रधानमंत्री कैमरन भी ब्रिटेन के यूरोपीय संघ में रहने के पक्ष में थे।

क्या थी ‘लीव’ की दलील?

‘लीव’ ग्रुप की दलील थी कि ब्रिटेन की पहचान, आज़ादी और संस्कृति को बनाए और बचाए रखने के लिए एग्जिट करना ज़रूरी है। यह ग्रुप ब्रिटेन में भारी संख्या में आने वाले प्रवासियों पर भी सवाल उठा रहा था जिसको भारी संख्‍या में लोगों ने पसंद किया। ‘लीव’ ग्रुप का यह भी कहना था कि यूरोपियन यूनियन ब्रिटेन के करदाताओं के अरबों पाउंड सोख लेता है, और ब्रिटेन पर अपने ‘अलोकतांत्रिक’ कानून थोपता है।

क्या थी ‘रीमेन’ की दलील?

‘रीमेन’ खेमे के लोगों की दलील थी कि यूरोपियन यूनियन में बने रहना ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद साबित होगा। साथ ही उनका मानना था कि इस फायदे के सामने प्रवासियों का मुद्दा बेहद छोटा है। अधिकतर अर्थशास्त्री इस उनकी इस दलील से सहमत दिखाई दे रहे थे।

ब्रिटिश मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटेन ने इस जनमत संग्रह के जरिए 43 वर्षों बाद ईयू की सदस्यता से हटने के पक्ष में वोट किया है। ‘रीमेन’ अभियान के पक्ष में 15,692,092 वोट पड़े, जबकि ‘लीव’ के पक्ष में इससे 6,835,512 अधिक वोट पड़े। नतीजों से यह साफ हुआ कि पूर्वोत्तर इंग्लैंड, वेल्स और मिडलैंड्स में अधिकतर मतदाताओं ने यूरोपीय संघ से अलग होना पसंद किया है जबकि लंदन, स्कॉटलैंड और नॉर्दन आयरलैंड के ज्यादातर मतदाता यूरोपीय संघ के साथ ही रहना चाहते थे।

उत्तर प्रदेश: 24 घंटे में दो दरोगा चढ़े अपराधियों की भेंट

अनुज हनुमत,

जनता की सुरक्षा का दायित्व पुलिस का होता है, पर इस समय यूपी के हालात ऐसे है कि प्रदेश में खाकी ही सुरक्षित नहीं लग रही है। पिछले 24 घंटे के अंदर उत्तर प्रदेश में दो दारोगा, बदमाशों के शिकार बने हैं।

पहली वारदात हापुड़ा की है, जहां गुरूवार को एक दारोगा की गोली मारकर हत्या कर दी। दारोगा का नाम सुखबीर सिंह यादव है और वो बागपत के सिंघावली थाने में तैनात थे। वारदात हापुड़ कोतवाली के मोदीनगर रोड पर हुई है जिसके बाद से क्षेत्र में सन्नाटा पसरा हुआ है। बदमाशों का शिकार बने सुखबीर की इलाज के दौरान मौत हुई।

पुलिस का कहना है कि दारोगा से लूट की कोशिश में बदमाशों ने उन्हें गोली मारी। वहीं इससे पहले यूपी के बदायूं में बुधवार रात को बदमाशों ने एक दारोगा की गोली मारकर हत्या कर दी थी। 24 घंटे में दो दारोगा की मौत ने पुलिस महकमे में हलचल मचा दी है।

इससे पहले बुधवार रात यूपी के बदायूं में गश्त के दौरान बदमाशों ने एक दारोगा की गोली मारकर हत्या कर दी थी। दरोगा सर्वेश यादव बदमाशों की बिना नंबर की बाइक को रोकने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान बदमाशों ने उन्हें गोली मार दी। दरोगा को तुरंत इलाज के लिए बरेली भेजा गया लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो गई। जैसे ही दारोगा को गोली मारे जाने की सूचना मिली पुलिस ने बदमाशों का पीछा किया और एक गांव के पास उन्हें घेर लिया। दोनों तरफ से कई राउंड फायरिंग हुई। जिसमें एक सिपाही घायल हो गया। मुठभेड़ के बाद पुलिस ने एक बदमाश को दबोच लिया। जबकि दो बदमाश अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए। इन दोनों घटनाओं ने अब ये प्रश्न खड़ा कर दिया है की क्या वाकई ऐसे माहौल में जनता खुद को सुरक्षित महसूस कर सकती है जबकि खाकी ही सुरक्षित नही है ।

ज़ीरो माइलस्टोन से शुरू होगी फ़िल्म ‘ढिशूम’ की प्रमोशनल यात्रा

एंटरटेनमेंट डेस्क,

मुंबई। एक्शन एडवेंचर फिल्म ढिशूम रिलीज को तैयार है। फिल्म की कहानी क्रिकेट के आसपास घूमती है। फिल्म के खेल कनेक्शन और हाइड एंड सीक थीम को देखते हुए ढिशूम की टीम प्रमोशन के लिए नायाब रास्ता चुन रही है। टीम जीरो माइलस्टोन से अपनी प्रमोशनल यात्रा शुरू करने जा रही है। जीरो माइलस्टोन यानी पूरे देश का सेंटर जो नागपुर में है।

सड़क मार्ग से यात्रा करनेवालों के लिए जीरो माइलस्टोन जाना हमेशा से रोमांचकारी रहा है। ब्रिटिशकाल में बने इस माइलस्टोन की अपनी ही कहानी है और महत्व है। इस जगह को पहली बार किसी फिल्म ने अपनी प्रमोशनल एक्टिविटी के लिए चुना है। सूत्रों की मानें तो ढिशूम की टीम भी इस जगह को देखने के लिए काफी उत्साहित है। खासकर टीम वहां लोगों से मिलने और बात करने का बेसब्री से इंतजार कर रही है।

नागपुर के लोगों के लिए यह एक अच्छा मौका है, जब फिल्म से जुड़े स्टार यहां आएंगे। ढिशूम की टीम सेंटर इंडिया से कैंपेन की शुरूआत कर एक नया इतिहास रचने को तैयार है।

गुम हुए क्रिकेटर को मिडिल ईस्ट में खोजने निकले दो कॉप्स की जीवटता वाली फिल्म ढिशूम 29 जुलाई को रिलीज हो रही है। फिल्म में जॉन एब्राहम, वरुण धवन, जैकलीन फर्नांडिज के साथ अक्षय खन्ना हैं। फिल्म का निर्देशन रोहित धवन ने किया है, फिल्म के निर्माता साजिद नाडियाडवाला और सुनील ए लुल्ला हैं।

कुछ ‘तूफानी’ करने के मूड में नज़र आ रहे स्वामी

शिखा पाण्डेय, 
भाजपा के वरिष्ठ नेता व राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी एक के बाद एक ट्वीट कर वित्त मंत्रालय पर हमले किए जा रहे हैं। सुब्रमण्यम स्वामी ने आज अपने ऊपर नियंत्रण रखने की सलाह देनेवालों को यह साफ चेतावनी दी कि यदि वे(स्वामी) अनुशासन की उपेक्षा करेंगे तो तूफान आ जाएगा।
स्वामी ने हालांकि जेटली का नाम नहीं लिया लेकिन स्पष्ट रुप से वित्त मंत्री का हवाला देते हुए स्वामी ने अपने ट्वीट में कहा, “बिना मांगे मुझे अनुशासन और नियंत्रण की सलाह देने वाले लोग यह नहीं समझ रहे कि यदि मैंने अनुशासन की उपेक्षा की तो तूफान आ जाएगा।” जाहिर है कि स्वामी बिना नाम लिए वित्त मंत्री पर ही निशाना साध रहे थे जिन्होंने बुधवार को उनसे मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम पर हमले के मद्देनजर स्वामी से नियंत्रण और अनुशासन की अपील की थी।

अरुण जेटली पर एक और तंज कसते हुए स्वामी ने भाजपा से कहा कि वे अपने मंत्रियों को निर्देश दें कि जब वे विदेश जाएं तो पारंपरिक और आधुनिकीकृत भारतीय परिधान ही  पहनें। भाजपा सांसद ने  ट्वीट कर कहा, “भाजपा को अपने मंत्रियों को निर्देश देना चाहिए कि वे विदेश यात्रा के दौरान पारंपरिक और आधुनिकीकृत भारतीय परिधान पहनें। कोट और टाइ में वे वेटर जैसे लगते हैं।”

गौरतलब है कि आज अखबारों में जेटली की बैंक आफ चायना के अध्यक्ष तियान गुओली से मुलाकात की तस्वीर छपी है जिसमें उन्होंने लाउंज सूट पहना हुआ है। स्वामी पिछले दो-तीन दिनों से ट्विटर पर वित्त मंत्रालय के अधिकारियों पर निशाना साध रहे हैं और जेटली द्वारा उनका बचाव किए जाने के बाद से उन्होंने जेटली को भी निशाने पर ले लिया है।

चीन: तूफ़ान और भारी बारिश से 98 लोगों की मौत, 800 से अधिक घायल

ब्यूरो,

चीन में प्रकृति ने अत्यधिक वर्षा के रूप में अपना भीषण प्रकोप बरपाया है। चीन के पूर्व में स्थित जियांग्सू प्रांत में भारी बारिश के कारण कम से कम 98 लोगों की जान चली गई है और 800 से अधिक घायल हो गए हैं।

सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ की खबर में कहा गया है कि बारिश, ओले और तूफान के कारण यानचेंग शहर में जनजीवन बाधित हो गया और कई मकान ध्वस्त हो गए हैं। एजेंसी के अनुसार, प्रांत में हुई भारी बारिश के कारण अब तक 98 लोगों की जान जा चुकी है और 800 से अधिक घायल हुए हैं।

कुछ इलाकों में बिजली ठप हो जाने तथा संचार सेवाओं के बाधित होने की भी खबरें हैं। शिन्हुआ के अनुसार, लोगों को उनके ध्वस्त हुए मकानों के मलबे से खींच कर निकाला गया और अस्पताल ले जाया गया।

फुनिंग काउंटी में 125 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आए तूफान ने फुनिंग काउंटी के कई बाहरी नगरों में तबाही मचाई। शेयांग में हवाओं की गति 100 किमी प्रति घंटा रही। तूफान के कारण कई मकान ध्वस्त हो गए, 51 लोगों की मौत हो गई और दर्जनों घायल हो गए। आपको बता दें कि चीन में मौसमी बारिश के कारण हर साल भीषण बाढ़ आती है और मई के आखिर से करीब दो माह तक देश इस आपदा से प्रभावित रहता है।

यानचेंग शहर में शीर्ष अधिकारी प्रभावित गांवों में राहत एवं बचाव अभियान चला रहे हैं। नागरिक मामलों के मंत्रालय ने बुधवार को बताया था कि चीन के 10 प्रांत स्तर के क्षेत्रों में बीते पांच दिन में तेज बारिश के कारण 42 लोग मारे गए और 25 लापता हैं।

मंत्रालय के अनुसार, झेजियांग, जियांग्शी, हुबेई और सिचुआन सहित, देश के दक्षिणी हिस्सों से लगातार मूसलाधार बारिश के कारण 4,60,000 से अधिक लोगों किसी दूसरी जगह ले जाया गया और 3,21,000 लोगों को तत्काल राहत की जरुरत है।