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Saturday, August 1, 2026
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Bihar Assembly Election : भाजपा को लगा एक और झटका, शाहनवाज़ के बाद अब मोदी कोरोना संक्रमित

ब्यूरो | नवप्रवाह न्यूज़ नेट्वर्क 
बिहार में भाजपा को एक और झटका लगा है। शाहनवाज़ हुसैन के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद अब सुशील कुमार मोदी भी कोरोना पॉजिटिव हो गए हैं। इन दो दिग्गज नेताओं के प्रचार प्रक्रिया से दूर रहने से पार्टी का नुक़सान होगा, ऐसी आशंका जताई जा रही है।
बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए हैं। उन्हें पटना के एम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कोविड-19 की चपेट में आने की जानकारी उन्होंने खुद ट्वीट करके दी। उपमुख्यमंत्री ने कहा, ‘मेरी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। सभी पैरामीटर पूरी तरह से सामान्य हैं। पिछले दो दिनों से मेरे शरीर का तापमान हल्का ज्यादा था। बेहतर निगरानी के लिए पटना के एम्स अस्पताल में भर्ती हो गया हूं। फेफड़ों का सीटी स्कैन सामान्य है। जल्द ही चुनाव प्रचार के लिए वापस आऊंगा।’
इससे पहले भाजपा के स्टार प्रचारक सैयद शाहनवाज हुसैन कोरोना से संक्रमित पाए गए थे। उनके वायरस की चपेट में आने के बाद राजीव प्रताप रूडी, सुशील मोदी और मंगल पांडेय क्वारंटीन हो गए थे। अब बिहार के उपमुख्यमंत्री के कोरोना पॉजिटव होने की पुष्टि हो गई है। एक के बाद एक बिहार के बड़े भाजपा नेताओं के कोरोना संक्रमित होने से पार्टी का नुक़सान हो सकता है, ऐसी चर्चा गर्म है। राजनीतिक गलियारे में यह बात हो रही है कि इन नेताओं की जनता में अच्छी पैठ है। ऐसे में प्रचार से दूर रहना पार्टी के लिए नुक़सानदेह साबित हो सकता है।
हालाँकि अभी राजीव प्रताप रूडी और मंगल पांडेय के संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है। जबकि, शाहनवाज हुसैन ने खुद ट्वीट करके अपने कोविड-19 से संक्रमित होने की जानकारी दी। उन्होंने लिखा, ‘मैं कुछ ऐसे लोगों के संपर्क में आया था, जो कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। आज मैंने अपना टेस्ट करवाया, जो पॉजिटिव आया। पिछले कुछ दिनों में मेरे संपर्क में आए लोगों से मैं निवेदन करता हूं कि वो सरकारी दिशा निर्देशों के अनुसार अपनी कोरोना जांच करवा लें।

Bihar Election 2020 : राजनीतिक दलों ने वादों की लगाई झड़ी, पढ़िए चुनावी चूरन में क्या-क्या है

अमित द्विवेदी | नवप्रवाह न्यूज़ नेट्वर्क 
बिहार विधानसभा चुनाव में इस समय राजनीतिक दलों ने वायदों की झड़ी लगा दी है। विधानसभा चुनाव में सभी पार्टियाँ दानवीर बनती नज़र आ रही हैं। मतदाताओं को लुभाने के लिए हर सम्भव प्रयास किया जा रहा है। चर्चा यह भी है कि बिहार में इस बार मतदाता उन्हीं को वोट देंगे जिसने विकास किया है। ऐसे में ये कहना बहुत कठिन होता जा रहा है कि जनता इस बार किसे अपना नेता चुनेगी और कौन बनेगा मुख्यमंत्री।
भाजपा, राजद, कांग्रेस और लोजपा सभी बड़ी पार्टियों ने अपना घोषणापत्र जारी कर दिया है। राज्य में पहले चरण के लिए 28 अक्तूबर को मतदान होगा। घोषणापत्र जारी करने के बाद अब गेंद जनता के हाथ में है। जनता यह तय करेगी कि वह निशाना किस पर लगाएगी। एक नज़र उन सभी घोषणापत्रों पर डालते हैं कि किस पार्टी ने क्या-क्या वायदा किया है।
भाजपा ने बिहार के लिए अपने संकल्प पत्र को पांच सूत्र, एक लक्ष्य और 11 संकल्प का नाम दिया है। भाजपा ने सत्ता में आने पर 19 लाख नए रोजगार के अवसर पैदा करने का वादा किया है।
सभी को मुफ्त कोरोना वैक्सीन दी जाएगी।
• तीन लाख नए शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी।
• 50,000 करोड़ से एक करोड़ महिलाओं को स्वावलंबी बनाया जाएगा।
• 19 लाख लोगों को नौकरी दी जाएगी।
• 30 लाख लोगों को 2022 तक पक्का मकान दिया जाएगा। 
• हिंदी भाषा में मेडिकल, इंजीनियरिंग समेत तकनीकी शिक्षा होगी।
महागठबंधन के घोषणापत्र में मतदाताओं के लिए क्या है आइए जानते हैं- 
विधानसभा चुनाव के लिए नवरात्र के पहले दिन महागठबंधन ने अपना घोषणापत्र जारी किया। इसको लेकर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में तेजस्वी यादव ने ‘प्रण हमारा संकल्प बदलाव का’ टैग लाइन के साथ घोषणापत्र जारी किया। राजद, कांग्रेस और वाम दलों ने सरकार गठन के बाद बिहार के लिए जो प्राथमिकताएं तय की हैं उसके बारे में इस घोषणापत्र में जानकारी दी गई है।
10 लाख युवाओं को रोजगार।
• नौकरी के लिए साक्षात्कार में जाने वाले अभ्यार्थियों के लिए किराया।
• पलायन रोकने के लिए काम करेंगे।
• नियोजित शिक्षकों को समान काम समान वेतन देंगे। 
• जीविका दीदी की नियमित वेतन और राशि बढ़ाई जाएगी। 
• पहले विधानसभा सत्र में केंद्र के कृषि संबंधी तीनों बिल के प्रभाव से बिहार के किसानों को मुक्ति दिलाने का वादा।  
अब देखिए क्या है कांग्रेस के घोषणापत्र में-
कांग्रेस पार्टी की तरफ से जारी घोषणापत्र को बिहार बदलाव पत्र नाम दिया गया है। किसानों को कर्ज माफी और कृषि कानूनों से बचाने के लिए एक नए कानून को लेकर आने का भी वादा किया गया।
बिहार में सत्ता में आने पर किसानों की कर्ज माफी।
• गरीबों का बिजली बिल माफ।
• नौकरी नहीं मिलने तक बेरोजगारों को हर महीने 1500 रुपये देने का वादा।
• किसानों के सही फसल का सही मूल्य दिलाने का वादा।
• कृषि कानूनों को खारिज करने का वादा।
• विधवा महिलाओं को 1000 रुपये पेंशन।
पढ़िए, चिराग पासवान की पार्टी लोजपा के घोषणापत्र में मतदाताओं के लिए क्या-क्या है-
विधानसभा चुनाव के लिए बुधवार को लोजपा ने अपना विजन डाक्यूमेंट जारी किया। लोजपा प्रमुख चिराग पासवान ने घोषणापत्र जारी करते हुए सीता मैया का भव्य मंदिर बनाने का वादा किया। साथ ही कैंसर संस्थान बनाने का भी वादा किया।
सभी महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा।
• सभी विभागों के अनुमोदित व स्वीकृत पदों में शीघ्र बहाली।
• समान काम समान वेतन का वादा।
• कैंसर संस्थानों की स्थापना।
• बिहार फर्स्ट बिहारी फर्स्ट युवा आयोग का गठन का वादा।
• माता सीता का भव्य मंदिर निर्माण का वादा।

पुणे : तलवार से केक काट कर मनाया जन्मदिन, 7 गिरफ्तार

न्यूज़ डेस्क | नवप्रवाह न्यूज़ नेटवर्क
 खुलेआम रोड पर तलवार से केक काटकर एक शातिर बदमाश के बर्थडे सेलिब्रेशन की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पिंपरी चिंचवड़ की पुलिस ने इस मामले को संज्ञान में लिया। एमआईडीसी भोसरी स्थित बालाजीनगर झोपड़पट्टी में करीबन दो सप्ताह पहले हुए इस सेलिब्रेशन को लेकर पुलिस ने सात लोगों को गिरफ्तार किया है। बहरहाल इस मामले को लेकर पुलिस आयुक्त कृष्णप्रकाश खासे भड़के हुए हैं। उन्होंने सोमवार को वॉकी टॉकी से चैनल पर ही संबंधित वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक को कड़ी फटकार लगाई। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को कदापि बर्दाश्त नहीं की जाएगा, इन शब्दों में समझाइश दी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार भोसरी के बालाजीनगर चौक में कुछ युवकों के झुंड ने रोड पर ही तलवार से केक काटकर एक शातिर बदमाश का बर्थडे सेलिब्रेशन किया। इस सेलिब्रेशन की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद एमआईडीसी भोसरी पुलिस ने इस मामले को संज्ञान में लेकर सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। उनमें स्वप्निल पोटभरे, महेंद्र सरवदे, सलीम शेख, अभिषेक देवकर (सभी निवासी बालाजीनगर, भोसरी, पुणे) और उनके अन्य दो से तीन साथियों का समावेश है। इस बारे ।के पुलिस सिपाही विशाल काले ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई है। बताया जा रहा है कि यह पूरी घटना 5 अक्टूबर की रात साढ़े 9 से 10 बजे के बीच घटी है। चंद माह पहले तक पुलिस द्वारा सोशल मीडिया पर नजर रखकर ऐसी घटनाओं में मामले दर्ज किए जाते रहे। इसके बाद कुछ दिन तक शहर में ऐसी घटनाएं थम गई थी। पुलिस के तेवर ठंडे पड़ते ही अराजक तत्वों के हौसले फिर बुलंद होते नजर आ रहे हैं।

बिहार चुनाव में का बा? : एक्शन, इमोशन, ड्रामा सब बा

ब्यूरो । नवप्रवाह न्यूज़ नेट्वर्क

बिहार विधानसभा चुनाव इन दिनों कई मामलों की वजह से चर्चा में बना हुआ है। भाजपा-जेडीयू गठबंधन को लेकर चिराग पासवान लगातार हमले कर रहे हैं। चिराग पासवान बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार पर लगातार हमला करते नज़र आ रहे हैं और नितीश की हर रैली में निशाने पर रहते हैं लोजपा अध्यक्ष चिराग पासवान। अब इस पूरे मामले में एक नया मोड़ आ गया है, चिराग ने लगातार कई ट्वीट करके भाजपा के नेताओं और नितीश कुमार पर निशाना साधा वहीं, प्रधानमंत्री मोदी के प्रति उन्होंने अपना सॉफ्ट कार्नर भी ज़ाहिर कर दिया।

लोजपा अध्यक्ष चिराग पासवान ने अपने ट्वीट में लिखा, “मैं नहीं चाहता कि मेरी वजह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी किसी धर्मसंकट में पड़ें। वे अपना गठबंधन धर्म निभाएं, आदरणीय मौजूदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी को संतुष्ट करने के लिए मेरे ख़िलाफ़ भी कुछ कहना पड़े तो निस्संकोच कहें। नीतीश कुमार जी को भाजपा के साथियों का धन्यवाद करना चाहिए कि वे मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ इतना आक्रोश होने के बावजूद गठबंधनधर्म निभा रहे हैं और हर दिन नीतीश कुमार जी को प्रमाणपत्र देते हैं कि वे चिराग के साथ नहीं हैं।”

वहीं बीजेपी के नेता भी लोजपा और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष को याद दिला रहे हैं कि बिहार में अब वह एनडीए का हिस्सा नहीं है। इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के साथ अपने रिश्तों को भुनाने की कोशिश न करें। बीजेपी की तरफ से लगातार आ रहे इन बयानों के बाद लोजपा ने रणनीतिक पलटवार किया है। पार्टी के अध्यक्ष चिराग पासवान ने कहा है कि बीजेपी के नेता उनके खिलाफ इसलिए बयान दे रहे हैं, ताकि नीतीश कुमार को खुश किया जा सके।

लोजपा प्रमुख चिराग पासवान ने आज सोशल मीडिया के जरिए बीजेपी और नीतीश कुमार, दोनों पर हमले किए। टि्वटर पर एक के बाद एक किए गए अपने ट्वीट में चिराग ने अपने ऊपर किए जा रहे हमलों को जेडीयू मुखिया नीतीश को खुश करने की कोशिश करार दिया। साथ ही बीजेपी को एक बार फिर यह याद भी दिलाया कि लोजपा गठबंधन धर्म की मर्यादा का पालन करेगी और अपनी वजह से पीएम मोदी के ऊपर कोई आंच नहीं आने देगी।

लोकनायक के वारिसों से कुछ सवाल तो बनते ही हैं !

डॉ. अजय खेमरिया | नवप्रवाह न्यूज़ नेट्वर्क 
आजादी के स्वर्णिम आंदोलन के बाद जिस महान नेता को देश ने लोकनायक के रूप में स्वीकार किया, उस जयप्रकाश नारायण यानी जेपी के बिना आजाद भारत का कोई भी राजनीतिक विमर्श पूर्ण नही होता है।समकालीन राजनीति में नेतृत्व करने वाली पूरी पीढ़ी वस्तुतः जेपी की छतरी से निकलकर ही स्थापित हुई है, जो आज पक्ष विपक्ष की भूमिकाओं में है। जेपी के महान व्यक्तित्व को लोग कैसे स्मरण में रखना चाहेंगे, यह निर्धारित करने की जबाबदेही असल में उनके राजनीतिक चेलों की ही थी। जेपी का मूल्यांकन उनके वारिसों के उत्तरावर्ती  योगदान के साथ की जाए, तो जेपी की वैचारिकी का हश्र घोर निराशा का अहसास ही कराता है।
जिस सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक क्रांति के लिये जेपी ने आह्वान किया था, वह आज भी भारत में कहीं नजर नहीं आती है। सत्ताई तानाशाही और सार्वजनिक जीवन के कदाचरण के विरुद्ध जेपी ने समग्र क्रांति का बिगुल फूंका था। अपनी बेटी के समान प्रिय इंदिरा गांधी के साथ उनके मतभेद असल में व्यवस्थागत थे। बुनियादी रुप से शासन में भ्रष्ट आचरण को लेकर जेपी यह मानते थे कि देश की जनता के साथ छलावा किया जा रहा है। जिस उद्देश्य से गांधी और अन्य नेताओं ने आजादी की लड़ाई लड़ी थी, उसे इंदिरा औऱ कांग्रेस ने महज सत्ता तक सीमित करके रख दिया है।
असल में गांधी मौजूदा कांग्रेस को सेवा संघ में बदलने की बात कर रहे थे, उसे नेहरू और इंदिरा ने परिवार की विचारशून्य पैदल सेना बना दिया। सम्पूर्ण क्रांति भारत के उसी नवनिर्माण को समर्पित एक जनांदोलन था, जिसमें गांधी के सपनों को जमीन पर उतारने की वचनबद्धता भी समाई हुई थी।
नवनिर्माण आंदोलन ने इंदिरा गांधी की सत्ता को उखाड़ा, देश ने एक वैकल्पिक सरकार भी देखी, लेकिन यह एक असफल विकल्प भी था जो असल में इस आंदोलन के अग्रणी नेताओं के नैतिक स्खलन का परिणाम भी था।जेपी की विरासत है तो बहुत लंबी, पर आज निष्पक्ष होकर कहा जा सकता है कि जो वैचारिक हश्र गांधी का कांग्रेस की मौजूदा पीढ़ियों ने किया है वही मजाक जेपी और समाजवादी आंदोलन के लोहिया, नरेंद्र देव, बिनोवा, अच्युत पटवर्द्धन, अशोक मेहता, मीनू मसानी, जनेश्वर मिश्र जैसे नेताओं के साथ उनके काफिले में  पीछे चलने वाले समाजवादी नेताओं ने बाद में किया।
आज लालू यादव, नितीश कुमार, शरद यादव, हुकुमदेव यादव, सुशील मोदी, रविशंकर प्रसाद, मुलायम सिंह, , विजय गोयल, रेवतीरमण सिह, केसी त्यागी से लेकर उतर भारत और पश्चिमी भारत के सभी राज्यों में जेपी आंदोलन के नेताओं की 60 प्लस पीढ़ी सक्रिय है। इनमें से अधिकतर केंद्र और राज्यों की सरकारों में महत्त्वपूर्ण पदों पर रहे है। सवाल यह उठाया ही जाना चाहिये कि जिस नवनिर्माण के लिये जेपी जैसी शख्सियत ने कांग्रेस में अपनी असरदार हैसियत को छोड़कर समाजवाद और गांधीवाद का रास्ता चुना, उस जेपी के अनुयायियों ने देश के पुनर्निर्माण में क्या योग दिया है?
लालू यादव, नीतीश कुमार, मुलायम सिंह के रूप में जेपी के चेले सिर्फ इस बात की गवाही देते है कि राजनीतिक क्रांति तो हुई, लेकिन सिर्फ मुख्यमंत्री और दूसरे मंत्री पदों तक। जेपी और लोहिया का नारा लगाकर यूपी, बिहार, ओडिशा, गुजरात, कर्नाटक जैसे राज्यों के सीएम बने नेताओं ने भारत के भीतर उस व्यवस्था परिवर्तन के लिये क्या किया है, जिसके लिये सम्पूर्ण क्रांति की अवधारणा और अपरिहार्यता को जेपी ने अपने त्याग और पुरुषार्थ से प्रतिपादित किया था। क्या जातियों की गिरोहबंदी, अल्पसंख्यकवाद, जातीय प्रतिक्रियावाद, भाई भतीजावाद, भ्रष्टाचार, शैक्षणिक माफ़ियावाद जैसी उपलब्धियां नहीं है जेपी के वारिसों के खातों में।
सामाजिक न्याय के नाम पर लालू, मुलायम, बीजू, देवगौडा, अजीत सिंह ने शासन के विकृत संस्करण इस देश को नही दिए। माँ-बेटे (इंदिरा -संजय) के सर्वाधिकार को चुनौती देने वाली जेपी की समग्र क्रांति से सैफई, पाटिलीपुत्र, भुवनेश्वर और हासन के समाजवादी सामंत किस राजनीतिक न्याय की इबारत लिखते है? यह सवाल क्या आज पूछा नहीं जाना चाहिए।
यूपी और बिहार जैसे देश के सबसे बड़े राज्यों में जेपी आंदोलन के वारिस लंबे समय तक सत्ता में रहे हैं। क्या आज इन दोनों राज्यों में शिक्षा क्रांति से कोई नया भारत गढ़ा जा चुका है? बिहार और यूपी बोर्ड की परीक्षाओं के दृश्य असल में माफ़ियावाद की क्रांति की कहानी ही कहते हैं। तेजस्वी, अखिलेश, मीसा, चिराग़ नवीन, कुमारस्वामी जैसे चेहरो को ध्यान से देखिये और जेपी आंदोलन के उस नारे को याद कीजिये, जो संजय और इंदिरा गाँधी को लेकर देश भर में सम्पूर्ण क्रान्ति के अलमबरदार गुनगुनाते थे।
आज जेपी के पुण्य स्मरण के साथ उनकी विरासत के पुनर्मूल्यांकन की भी आवश्यकता है। हकीकत यह है कि भारत से समाजवाद का अंत इसी के उपासकों ने कर लिया है। भारत में जेपी को आज एक महान विचारक और सत्ता से सिद्धांतो के लिये जूझने वाले योद्धा की तरह याद किया जाएगा, इस त्रासदी के साथ कि उनके अनुयायियों ने उनके विचारों के साथ व्यभिचार की सीमा तक अन्याय किया।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने लिखा था-“
क्षमा करो बापू तुम हमको
 
वचनभंग के हम अपराधी
 
राजघाट को किया अपावन 
भूले मंजिल यात्रा आधी।
 जयप्रकाश जी!
 रखो भरोसा
 
टूटे सपनों को जोड़ेंगे
 
चिता भस्म की चिंगारी से 
 
अंधकार के गढ़ तोड़ेंगे”
टूटते विश्वास के इस तिमिर में आशा कीजिये कि अटल जी की बात सच साबित हो। भारत के संसदीय लोकतंत्र के लिये जेपी की समग्र क्रांति और गांधी दोनों की आज भी सामयिक आवश्यकता है।
(लेखक, वरिष्ठ पत्रकार, आलोचक एवं राजनीतिक विश्लेषक हैं।) 

चारा घोटाला : ज़मानत मिलने के बावजूद टेन्शन में लालू की मण्डली

लालू पहुंचे सलाखों के पीछे
झारखण्ड ब्यूरो | नवप्रवाह न्यूज़ नेट्वर्क 
चारा घोटाला के चाईबासा मामले में सज़ा काट रहे आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव को ज़मानत मिल गई है, लेकिन इसके बावजूद वे अभी जेल में ही रहेंगे। चाईबासा कोषागार में से अवैध निकासी मामले में उन्हें झारखण्ड उच्च न्यायालय ने ज़मानत दे दी है। जब तक दुमका कोषागार मामले की सुनवाई नहीं हो जाती, लालू अंदर जेल में ही बने रहेंगे। 
न्यायालय के निर्णय आने के बाद आरजेडी के खेमे में निराशा छा गई है। पार्टी के लोगों को उम्मीद थी कि RJD सुप्रीमो को ज़मानत मिल जाएगी तो इस समय चुनाव में उनकी उपस्थिति को भुनाया जा सकेगा लेकिन ज़मानत मिलने के बाद भी जेल में ही रहने के निर्णय ने राजद के नेताओं को टेन्शन में डाल दिया है।
लालू प्रसाद की जमानत याचिका पर शुक्रवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। दरअसल, चारा घोटाले से संबंधित चाईबासा कोषागार से अवैध निकासी के मामले में लालू प्रसाद को रांची की सीबीआई कोर्ट ने पांच साल की सजा सुनाई है। लालू ने अपनी जमानत याचिका में कहा था कि इस मामले में उन्होंने आधी सजा काट ली है। इस आधार पर उन्हें जमानत मिलनी चाहिए।
कोर्ट ने आदेश दिया कि लालू प्रसाद यादव को 50 हजार का दो निजी मुचलका भरना है और दो लाख जुर्माना भी देना है। कोर्ट ने लालू यादव की बीमारी की रिपोर्ट मांगी है और इस बीच कितने लोग उनसे मिले है उसकी रिपोर्ट भी मांगी है। रिपोर्ट पर छह नवंबर को सुनवाई होगी।
इससे पहले 11 सितंबर को सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से लालू की याचिका का विरोध किया गया था। सीबीआई ने जवाब दाखिल करते हुए कहा था कि लालू को चार मामले में सजा सुनाई गई है। सभी सजा अलग-अलग चल रही हैं। जब तक सभी सजा एक साथ चलने का आदेश संबंधित अदालत नहीं दे देती है, तब तक सभी सजा अलग-अलग चलेंगी। सभी में आधी सजा काटने के बाद ही इन्हें जमानत मिल सकती है।

जुलाई महीने में लालू प्रसाद ने जमानत याचिका दाखिल की थी। इसमें उनके बिगड़ते स्वास्थ्य का भी हवाला दिया गया था। जमानत याचिका में आधार बनाया गया है कि लालू प्रसाद यादव ने चाईबासा कोषागार से अवैध निकासी के मामले में सीबीआइ कोर्ट द्वारा सजा की आधी अवधि पूरी कर ली है और लालू प्रसाद यादव फिलहाल आधा दर्जन से ज्यादा गंभीर असाध्य रोगों से ग्रसित हैं। इसलिए उन्हें जमानत दी जाए।

कोर्ट ने आदेश दिया कि लालू प्रसाद यादव को 50 हजार का दो निजी मुचलका भरना है और दो लाख जुर्माना भी देना है। कोर्ट ने लालू यादव की बीमारी की रिपोर्ट मांगी है और इस बीच कितने लोग उनसे मिले है उसकी रिपोर्ट भी मांगी है। रिपोर्ट पर छह नवंबर को सुनवाई होगी।

इससे पहले 11 सितंबर को सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से लालू की याचिका का विरोध किया गया था। सीबीआई ने जवाब दाखिल करते हुए कहा था कि लालू को चार मामले में सजा सुनाई गई है। सभी सजा अलग-अलग चल रही हैं। जब तक सभी सजा एक साथ चलने का आदेश संबंधित अदालत नहीं दे देती है, तब तक सभी सजा अलग-अलग चलेंगी। सभी में आधी सजा काटने के बाद ही इन्हें जमानत मिल सकती है।

जुलाई महीने में लालू प्रसाद ने जमानत याचिका दाखिल की थी। इसमें उनके बिगड़ते स्वास्थ्य का भी हवाला दिया गया था। जमानत याचिका में आधार बनाया गया है कि लालू प्रसाद यादव ने चाईबासा कोषागार से अवैध निकासी के मामले में सीबीआइ कोर्ट द्वारा सजा की आधी अवधि पूरी कर ली है और लालू प्रसाद यादव फिलहाल आधा दर्जन से ज्यादा गंभीर असाध्य रोगों से ग्रसित हैं। इसलिए उन्हें जमानत दी जाए।
दूसरा मामला- देवघर सरकारी कोषागार से 84.53 लाख रुपये की अवैध निकासी का आरोप। लालू समेत 38 पर केस

सजा- लालू को साढ़े तीन साल की सजा और 5 लाख का जुर्माना। लालू जमानत पर।

तीसरा मामला- चाईबासा कोषागार से 33.67 करोड़ रुपये की अवैध निकासी का आरोप। लालू समेत 56 आरोपी।
सजा- लालू दोषी करार, 5 साल की सजा। लालू जमानत पर।

चौथा मामला- दुमका कोषागार से 3.13 करोड़ रुपये की अवैध निकासी का मामला। लालू प्रसाद यादव दोषी करार। 
सजा- 2 अलग-अलग धाराओं में 7-7 साल की सजा, 60 लाख जुर्माना। -जमानत याचिका दाखिल नहीं।

बता दें कि बिहार विधानसभा चुनाव के लिहाज से लालू यादव की जमानत को काफी अहम माना जा रहा था। मगर दुमका मामले में सुनवाई लंबित है, जिस वजह से उन्हें रिया नहीं किया जा सकता।  फिलहाल लालू यादव का रांची के रिम्स अस्पताल में भर्ती हैं। लालू प्रसाद यादव के बाहर निकलने से बिहार की राजनीति का समीकरण बदल सकता है।

भारतीय मीडिया बना ड्रैगन का सिरदर्द, खिसियाई बिल्ली की तरह खंभा नोच रहा चीन

अमित द्विवेदी | नवप्रवाह न्यूज़ नेट्वर्क 
भारतीय मीडिया भले ही आपस में कुत्ते-बिल्लियों की तरह लड़ रही हो और एक दूसरे को सीरियस न ले रही हो, लेकिन चीन भारतीय चैनल्स को लेकर बेहद गम्भीर है। दरअसल भारत के न्यूज़ चैनल्स ताइवान को स्वतंत्र राष्ट्र की संज्ञा देते हैं (जो कि वो है भी), जिसकी वजह से चीन का पारा बढ़ता जा रहा है। चीनी मीडिया तो सरकार के इशारे पर ही नाचती है, अब वे चाहते हैं कि भारतीय मीडिया भी उन्हीं के सुर में सुर मिलाए। भारतीय मीडिया की इस बेबाक़ी से चीन लगातार चिंचिया रहा है। 
चीनी सरकार का कहना है कि भारतीय मीडिया ताइवान को स्वतंत्र राष्ट्र कहना बंद करे। दरअसल चीन की सरकार चाहती है कि भारतीय मीडिया ताइवान को देश के रूप में सम्बोधित न करके रिपब्लिक ऑफ़ चाइना के  रूप में प्रस्तुत करे। इस सम्बंध में चीन के दूतावास ने भारत से कहा कि भविष्य में भारतीय मीडिया चाइना की इस पॉलिसी का ध्यान रखे। चीन की इस प्रतिक्रिया का जवाब देते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग अग्रवाल ने चीन से साफ़ कह दिया कि भारत में मीडिया स्वतंत्र है, चीन किसी भी तरह का दबाव बनाने की कोशिश न करे। 
अनुराग अग्रवाल ने कहा कि भारत ने चाइना की पॉलिसी का सम्मान करता है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि आप भारत की मीडिया पर नियंत्रण रखने की कोशिश करें। दरअसल हाल में भारतीय मीडिया ने ताइवान चुनाव की ख़बरों को प्रमुखता से प्रकाशित किया था, जिसकी वजह से चीन टेन्शन में है। इस सम्बंध में ताइवान की राष्ट्रपति ने भारत और भारतीय मीडिया के प्रति अपना आभार प्रकट किया, जिसमें उन्होंने यह स्पष्ट किया कि भारत एक लोकतांत्रिक राष्ट्र है और वह किसी के दबाव में नहीं आने वाला। भारतीय मीडिया ने ताइवान को स्वतंत्र देश सम्बोधित कर कोई ग़लत काम नहीं किया।
हाल ही में ताइवान के राष्ट्रीय दिवस पर भारतीय अखबारों ने विज्ञापन प्रकाशित किए थे और अन्य पठनीय सामग्री दी थी। कुछ महीने पहले ताइवान के चुनाव और उसके बाद की गतिविधियों को भी भारतीय मीडिया ने प्रमुखता से कवर किया था। इसी से चीन को मिर्ची लग रही है। 

क्या है ये TRP का खेल, जानने के लिए पढ़ें ये रिपोर्ट

 
अमित द्विवेदी | नवप्रवाह न्यूज़ नेट्वर्क
 
मुम्बई पुलिस के टीआरपी के खेल के ख़ुलासे ने पूरे देश में हंगामा मचा दिया है। मुम्बई पुलिस ने साफ किया कि TRP को लेकर गड़बड़ घोटाला हुआ है, जिसकी गहन छानबीन करने की तैयारी मुम्बई पुलिस कर रही है। आम जनता TRP शब्द से इत्तेफ़ाक रखती है, लेकिन बहुतों को इसकी पूरी जानकारी नहीं है। TRP का खेल होता क्या है, हम आप को बताते हैं। 
 
कुछ विशेष उपकरणों के ज़रिए BARC टीवी चैनल्स को रेट करता है। बार्क (BARC) एक सैटटॉप बॉक्स के जरिए यह जानकारी हासिल करता है कि उपभोक्ता द्वारा कौन से चैनल देखे गए हैं, जिसके आधार पर ही टीआरपी की रेटिंग तय की जाती है।
BARC India है क्या ? 

ब्रॉड्कास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) इंडिया नाम की एक संयुक्त उद्योग उपक्रम है, जिसे प्रसारणकर्ता (IBF), विज्ञापनदाता (ISA) और विज्ञापन और मीडिया एजेंसी (AAAI) का प्रतिनिधित्व करने वाले स्टॉकहोल्डर निधिबद्ध करते हैं। माना जाता है  कि यह दुनिया का सबसे बड़ा टेलीविजन मेजरमेंट निकाय है। BARC India साल 2010 में शुरू हुआ था और इसका मुख्यालय मुंबई में ही है।
TRP मॉनिटरिंग कैसे होती है ? 
टीवी चैनल्स की व्यूअरशिप मापने के लिए BARC India ऑडियो वाटरमार्किंग तकनीक का उपयोग करता है। यह सिस्टम बैरोमीटर ( BAR-o-meters) के जरिए टीआरपी की मॉनिटरिंग करता है। मुंबई में करीब 2000 बैरोमीटर हैं।
पहले ऑडियो वाटरमार्क तकनीक का उपयोग कर प्रसारण के वीडियो में और उसके साथ दोनों में ही वाटरमार्क भेजे जाते हैं, जिससे बैरोमीटर में वाटरमार्क सहित यह जानाकरी दर्ज हो जाती है कि उपभोक्ता कौन सा चैनल देख रहा है। इसके बाद इस जानकारी को अन्य संबंधित जानकारी के साथ जोड़ कर पूरे आंकड़े तैयार कर व्यूअरशिप डेटा के तौर पर जमा किया जाता है। इन्हीं आंकड़ों का मापन कर टीआरपी रेटिंग सहित अन्य जरूरी विश्लेषण भी किया जाता है। पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और सुरक्षित रखने का प्रयास किया जाता है।
शिकायत क्या है ? 
BARC ने इन बैरोमीटर की मॉनिटरिंग के लिए हंसा नाम की एजेंसी को इसका कॉंट्रैक्ट दिया था। हंसा रिसर्च ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उसके कुछ पूर्व कर्मचारियों ने उसके आंकड़ों का दुरुपयोग किया है, जो कि टीआरपी मॉनिटरिंग सिस्टम में हैं। इसमें कुछ वर्तमान कर्मचारियों के भी शामिल होने की आशंका जताई गई है। 

रहस्य से उठेगा पर्दा, पता लगेगा रसोड़े में आख़िर था कौन!

एंटरटेंमेंट डेस्क | नवप्रवाह न्यूज़ नेट्वर्क 
धारावाहिक साथ निभाना साथिया का पहला सीज़न समाप्त होने के लगभग तीन साल बाद, इसका दूसरा सीज़न जल्द शुरू होने वाला है। रश्मि शर्मा टेलीफिल्म्स द्वारा निर्मित इस शो का दूसरा सीज़न अक्टूबर में प्रसारित होगा। कुछ दिनों पहले निर्माताओं ने इस चर्चित शो के पहले लुक का अनावरण किया।
अपने अपकमिंग शो लॉन्च के बारे में निर्माता रश्मि शर्मा ने कहा, “साल 2010 में लॉन्च होने के बाद से ‘साथ निभाना साथिया’ शो एक घरेलू नाम बन गया था। नवरात्रि के उत्सव के बीच दूसरे सीज़न के लॉन्च की घोषणा करके मैं बहुत खुश हूँ। दर्शकों का प्यार कोकिला और गोपी को टीवी पर वापस ले आया है। मुझे उम्मीद है कि यह शो अपने पहले सीज़न की तरह बहुत अच्छा करेगा और एक नई कहानी के साथ दर्शकों को रोमांचित करेगा।”
हालांकि, देवोलीना भट्टाचार्जी, रूपल पटेल और मोहम्मद नाज़िम गोपी एक बार फिर गोपी, कोकिलाबेन और अहम के किरदारों में नज़र आऐंगे, जबकि नए चेहरे में हर्ष नागर और स्नेहा जैन, अनंत और गहना की नई और प्रमुख भूमिका निभाएंगे। यह शो 19 अक्टूबर से रात 9 बजे प्रसारित होगा। निर्माता का मानना है कि इस सीरीज़ में पता लगेगा कि आखिर रसोड़े में कौन था?

‘मिर्ज़ापुर 2’ ट्रेलर रिव्यू : बवाल काट रहे हैं मिर्ज़ापुर वाले कालीन भैया

अमित द्विवेदी | नवप्रवाह न्यूज़ नेट्वर्क 
प्रचण्ड बकैती, धुआँधार गाली, प्रतिशोध, षडयंत्र, खून-खराबा और धोखे से भरा हुआ ट्रेलर भौकाल मचाए है। जी हाँ, मिर्ज़ापुर २ का ट्रेलर आ गया है और बवाल भी काट दिया है। मिर्ज़ापुर की इस दूसरी सीरीज़ में नयापन तो कुछ ख़ास नज़र नहीं आया लेकिन किरदार ज़रूर नए नज़र आए। 
पंकज त्रिपाठी और उनकी मंडली ने ज़बर्दस्त वापसी की है। मिर्ज़ापुर सीरीज़ अपने ख़ास अन्दाज़ के लिए चर्चित है। उसी अन्दाज़ में कहानी को आगे बढ़ाती है मिर्ज़ापुर २। सीरीज़ के पहले भाग में क़ालीन भैया ने ग़दर मचाया था, दूसरे भाग में क़ालीन भैया के बच्चे गोली-गाली की बौछार किए पड़े हैं। इस बार मिर्जापुर 2 में विजय वर्मा, प्रियांशु पेंदौली और ईशा तलवार भी नज़र आने वाले हैं। 
आइए जानते हैं क्या है कहानी- 
ट्रेलर में कई नए चेहरे नज़र आएँगे। ट्रेलर में जितना दिखाया गया है, उतना देख कर यह कहा जा सकता है कि सीरीज़ का यह भाग पहले भाग से भी बेहतर हो सकता है। ट्रेलर में क़ालीन भैया के अलावा मुन्ना, गुड्डू और गोलू नाम का लीड कैरेक्टर नज़र आते हैं। मुन्ना इस बार किसी भी तरह मिर्जापुर की राजगद्दी पर बैठने का मन बना चुका है। उसने एक नया नियम का ईजाद किया है, मुन्ना कहता है कि जो गद्दी पर बैठेगा वो कभी भी नियम बदल सकता है। वहीं गुड्डू और गोलू प्रतिशोध की आग में जल रहे हैं। गुड्डू दुश्मन को मौत के घाट उतारने में तनिक भी देर नहीं लगाता। दुश्मन को दर्दनाक मौत देने से भी पीछे नहीं हटता। वह प्रतिशोध के साथ-साथ मिर्जापुर की गद्दी भी चाहता है। बस सीरीज में ये ट्विस्ट देखने में मज़ा आएगा।   
देखें ट्रेलर- 
https://youtu.be/xMKzdQrC5TI