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ब्यूरो । नवप्रवाह न्यूज़ नेट्वर्क
बिहार विधानसभा चुनाव इन दिनों कई मामलों की वजह से चर्चा में बना हुआ है। भाजपा-जेडीयू गठबंधन को लेकर चिराग पासवान लगातार हमले कर रहे हैं। चिराग पासवान बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार पर लगातार हमला करते नज़र आ रहे हैं और नितीश की हर रैली में निशाने पर रहते हैं लोजपा अध्यक्ष चिराग पासवान। अब इस पूरे मामले में एक नया मोड़ आ गया है, चिराग ने लगातार कई ट्वीट करके भाजपा के नेताओं और नितीश कुमार पर निशाना साधा वहीं, प्रधानमंत्री मोदी के प्रति उन्होंने अपना सॉफ्ट कार्नर भी ज़ाहिर कर दिया।
लोजपा अध्यक्ष चिराग पासवान ने अपने ट्वीट में लिखा, “मैं नहीं चाहता कि मेरी वजह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी किसी धर्मसंकट में पड़ें। वे अपना गठबंधन धर्म निभाएं, आदरणीय मौजूदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी को संतुष्ट करने के लिए मेरे ख़िलाफ़ भी कुछ कहना पड़े तो निस्संकोच कहें। नीतीश कुमार जी को भाजपा के साथियों का धन्यवाद करना चाहिए कि वे मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ इतना आक्रोश होने के बावजूद गठबंधनधर्म निभा रहे हैं और हर दिन नीतीश कुमार जी को प्रमाणपत्र देते हैं कि वे चिराग के साथ नहीं हैं।”
वहीं बीजेपी के नेता भी लोजपा और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष को याद दिला रहे हैं कि बिहार में अब वह एनडीए का हिस्सा नहीं है। इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के साथ अपने रिश्तों को भुनाने की कोशिश न करें। बीजेपी की तरफ से लगातार आ रहे इन बयानों के बाद लोजपा ने रणनीतिक पलटवार किया है। पार्टी के अध्यक्ष चिराग पासवान ने कहा है कि बीजेपी के नेता उनके खिलाफ इसलिए बयान दे रहे हैं, ताकि नीतीश कुमार को खुश किया जा सके।
लोजपा प्रमुख चिराग पासवान ने आज सोशल मीडिया के जरिए बीजेपी और नीतीश कुमार, दोनों पर हमले किए। टि्वटर पर एक के बाद एक किए गए अपने ट्वीट में चिराग ने अपने ऊपर किए जा रहे हमलों को जेडीयू मुखिया नीतीश को खुश करने की कोशिश करार दिया। साथ ही बीजेपी को एक बार फिर यह याद भी दिलाया कि लोजपा गठबंधन धर्म की मर्यादा का पालन करेगी और अपनी वजह से पीएम मोदी के ऊपर कोई आंच नहीं आने देगी।
लोकनायक के वारिसों से कुछ सवाल तो बनते ही हैं !
चारा घोटाला : ज़मानत मिलने के बावजूद टेन्शन में लालू की मण्डली
जुलाई महीने में लालू प्रसाद ने जमानत याचिका दाखिल की थी। इसमें उनके बिगड़ते स्वास्थ्य का भी हवाला दिया गया था। जमानत याचिका में आधार बनाया गया है कि लालू प्रसाद यादव ने चाईबासा कोषागार से अवैध निकासी के मामले में सीबीआइ कोर्ट द्वारा सजा की आधी अवधि पूरी कर ली है और लालू प्रसाद यादव फिलहाल आधा दर्जन से ज्यादा गंभीर असाध्य रोगों से ग्रसित हैं। इसलिए उन्हें जमानत दी जाए।
कोर्ट ने आदेश दिया कि लालू प्रसाद यादव को 50 हजार का दो निजी मुचलका भरना है और दो लाख जुर्माना भी देना है। कोर्ट ने लालू यादव की बीमारी की रिपोर्ट मांगी है और इस बीच कितने लोग उनसे मिले है उसकी रिपोर्ट भी मांगी है। रिपोर्ट पर छह नवंबर को सुनवाई होगी।
इससे पहले 11 सितंबर को सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से लालू की याचिका का विरोध किया गया था। सीबीआई ने जवाब दाखिल करते हुए कहा था कि लालू को चार मामले में सजा सुनाई गई है। सभी सजा अलग-अलग चल रही हैं। जब तक सभी सजा एक साथ चलने का आदेश संबंधित अदालत नहीं दे देती है, तब तक सभी सजा अलग-अलग चलेंगी। सभी में आधी सजा काटने के बाद ही इन्हें जमानत मिल सकती है।
सजा- लालू को साढ़े तीन साल की सजा और 5 लाख का जुर्माना। लालू जमानत पर।
तीसरा मामला- चाईबासा कोषागार से 33.67 करोड़ रुपये की अवैध निकासी का आरोप। लालू समेत 56 आरोपी।
सजा- लालू दोषी करार, 5 साल की सजा। लालू जमानत पर।
चौथा मामला- दुमका कोषागार से 3.13 करोड़ रुपये की अवैध निकासी का मामला। लालू प्रसाद यादव दोषी करार।
सजा- 2 अलग-अलग धाराओं में 7-7 साल की सजा, 60 लाख जुर्माना। -जमानत याचिका दाखिल नहीं।
बता दें कि बिहार विधानसभा चुनाव के लिहाज से लालू यादव की जमानत को काफी अहम माना जा रहा था। मगर दुमका मामले में सुनवाई लंबित है, जिस वजह से उन्हें रिया नहीं किया जा सकता। फिलहाल लालू यादव का रांची के रिम्स अस्पताल में भर्ती हैं। लालू प्रसाद यादव के बाहर निकलने से बिहार की राजनीति का समीकरण बदल सकता है।
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BARC ने इन बैरोमीटर की मॉनिटरिंग के लिए हंसा नाम की एजेंसी को इसका कॉंट्रैक्ट दिया था। हंसा रिसर्च ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उसके कुछ पूर्व कर्मचारियों ने उसके आंकड़ों का दुरुपयोग किया है, जो कि टीआरपी मॉनिटरिंग सिस्टम में हैं। इसमें कुछ वर्तमान कर्मचारियों के भी शामिल होने की आशंका जताई गई है।

















