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Wednesday, September 9, 2026
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IPL-13 : लगातार तीन मैच हारने के बाद बेंगलुरु से 8 विकेट से जीता चेन्नई

 

न्यूज़ डेस्क | नवप्रवाह न्यूज़ नेटवर्क
आईपीएल के 13वें सीजन के 44वें मैच में चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) ने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) को 8 विकेट से हरा दिया. दुबई में खेले गए मुकाबले में बेंगलुरु ने टॉस जीतकर बल्लेबाजी करते हुए चेन्नई को 146 रन का टारगेट दिया था. जवाब में चेन्नई ने 18.4 ओवर में 2 विकेट पर 150 रन बनाकर मैच जीत लिया. रितुराज गायकवाड़ ने आईपीएल में अपनी पहली फिफ्टी लगाते हुए नाबाद 65 रन बनाए.

प्लेऑफ के लिए बेंगलुरु को एक जीत की दरकार
धोनी की टीम लगातार तीन मैच हारने के बाद जीती है. इस जीत से 8 पॉइंट्स के साथ चेन्नई पॉइंट्स टेबल में 7वें स्थान पर पहुंच गई है. वहीं, बेंगलुरु को प्ले-ऑफ में अपनी जगह पक्की करने के लिए अभी और इंतजार करना होगा. बेंगलुरु 14 पॉइंट्स के साथ तीसरे स्थान पर है. एक जीत उसे टूर्नामेंट के प्लेऑफ में पहुंचा देगी.

19 रन बना कर नाबाद रहे धोनी
चेन्नई के लिए अंबाती रायडू ने 39 रन बनाए. कप्तान महेंद्र सिंह धोनी 19 रन बनाकर नाबाद रहे. गायकवाड़ ने छक्का लगाकर अपनी टीम को जीत दिलाई. उन्हें मैन ऑफ द मैच चुना गया. बेंगलुरु के लिए क्रिस मॉरिस और युजवेंद्र चहल ने 1-1 विकेट लिया.

पावर-प्ले में चेन्नई ने बनाए 48 रन
चेन्नई के लिए फाफ डु प्लेसिस और रितुराज गायकवाड़ ने पारी की शुरुआत की. दोनों ने टीम को अच्छी शुरुआत दिलाई और पहले विकेट के लिए 46 रन की पार्टनरशिप की. डु प्लेसिस 25 रन बनाकर क्रिस मॉरिस की बॉल पर आउट हुए. इसके बाद गायकवाड़ और अंबाती रायडू ने पारी संभाली.

बेंगलुरु के लिए अनलकी रही हरी जर्सी
बेंगलुरु का हरी जर्सी में प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा. उसने ग्रीन ड्रेस में अब तक 10 मैच खेले हैं. जिसमें उसने 2 जीते और 7 हारे हैं. आरसीबी ने 2011 और 2016 में हरी जर्सी में जीत दर्ज की थी. वहीं, 2015 में एक मुकाबला बेनतीजा रहा था.

नवाजुद्दीन सिद्दीकी की गिरफ्तारी पर स्टे

न्यूज़ डेस्क | नवप्रवाह न्यूज़ नेटवर्क
फिल्म अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी और उनके परिजनों की गिरफ्तारी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट से स्टे मिला है. हाईकोर्ट की दो सदस्यीय खंडपीठ ने पुलिस द्वारा चार्जशीट दाखिल करने तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाई है, जबकि मुकदमे के मुख्य आरोपी अभिनेता के छोटे भाई मिनाजुद्दीन सिद्दीकी को अग्रिम जमानत करानी होगी.

पत्नी ने दर्ज कराई थी रिपोर्ट
बुढ़ाना निवासी प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी की पत्नी आलिया सिद्दीकी उर्फ अंजलि पांडे ने 27 जुलाई 2020 को मुंबई के वर्सोवा थाने में यह मुकदमा दर्ज कराया था. आलिया ने दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया था कि नवाजुद्दीन उसे व बेटी को दिसंबर 2012 में बुढ़ाना स्थित अपने घर पर छोड़ गए थे.आरोप है कि यहां बेटी के साथ अत्याचार हुए. इनमें बैड टच से लेकर छेड़छाड़ व मारपीट के भी आरोप शामिल हैं. रिपोर्ट में आलिया ने पति नवाजुद्दीन के साथ ही सास मेहरून्निशां, नवाज के भाइयों फैय्याजुद्दीन, अयाजुद्दीन और मिनाजुद्दीन को आरोपी बनाया हुआ है.

बुढ़ाना शिफ्ट किया गया मुकदमा
यह मुकदमा जांच के लिए 12 अगस्त 2020 को बुढ़ाना कोतवाली आ गया था. 16 अक्तूबर को पुलिस ने आलिया सिद्दीकी के पॉक्सो कोर्ट में 164 के बयान भी दर्ज कराए थे. अब इस मुकदमे में नवाजुद्दीन और उनके परिजनों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है. उनके अधिवक्ता नदीम जाफर जैदी ने बताया कि हाईकोर्ट इलाहाबाद से नवाजुद्दीन सिद्दीकी आदि को इस मुकदमे में गिरफ्तारी पर स्टे मिला है.

भाई को लेनी होगी अग्रीम जमानत
न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और संजय कुमार पचौरी की खंडपीठ ने नवाजुद्दीन, उनके भाई फैय्याजुद्दीन, अयाजुद्दीन और मां मेहरून्निशां की गिरफ्तारी पर स्टे दिया है, जबकि मुख्य आरोपी मिनाजुद्दीन को अग्रिम जमानत करानी होगी. उधर, बुढ़ाना कोतवाली प्रभारी निरीक्षक एमएस गिल ने बताया कि उन्हें अभी तक स्टे आर्डर की प्रति नहीं मिली है.

‘कोई हमारी दोस्ती को हमारी कमजोरी न समझे’ दशहरा पूजन पर भागवत की गर्जना

न्यूज़ डेस्क | नवप्रवाह न्यूज़ नेटवर्क
रविवार को विजयादशमी के मौके पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर स्थित मुख्यालय में शस्त्र पूजा की. इस समय भागवत के उग्र तेंवर देखने को मिले. अपने संबोधन में भागवत ने चीन और पाकिस्तान को जम कर फटकार लगाते हुए कहा कि, चीन के साम्राज्यवादी स्वभाव के सामने भारत तन कर खड़ा हुआ है, जिससे पड़ोसी देश के हौसले पस्त हुए हैं. कोई भी देश हमारी दोस्ती को कमजोरी न समझे. उन्होंने कहा कि राम मंदिर पर 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट का असंदिग्ध निर्णय आया. एकमत से निर्णय था, सारे देश ने समाज ने उसे स्वीकार किया. हर्षोल्लास का विषय होने के बाद भी संयम से उसे मनाया. कोरोना के चलते इस बार केवल 50 लोग मौजूद थे.

भारत में कोरोना के कारण कम नुकसान हुआ
हम कह सकते हैं कि सारी परिस्थिति में कोरोना महामारी से होने वाला नुकसान भारत में कम है, इसके कारण कोरोना की बीमारी कैसे फैलेगी इसे समझकर हमारे शासन-प्रशासन ने उपाय बताए. उनका अमल हो, इसकी तत्परता से योजना की. उन्होंने इसका बढ़ा-चढ़ाकर इसका वर्णन किया, जिससे जनता में भय आ गया. उसका फायदा भी हुआ कि जनता अतिरिक्त सावधान हो गई.

हाथ पैर धोकर घर में प्रवेश करना हमारी संस्कृति का ही हिस्सा है
कोरोना में सारा समाज दूसरों की चिंता करने में जुट गया. लोग सहायता लेकर गए तो लोगों ने यह तक कहा कि हमारे पास सात दिन का राशन है, जिसे जरूरत है उसे दीजिए. संकट में लोगों ने परस्पर सहयोग दिखाया. अंग्रेजी में इसे सोशल कैपिटल कहते हैं, लेकिन यह हमारे संस्कारों में हैं. बाहर से आकर हाथ-पैर धोना, सफाई का ध्यान रखना यह हमारा सांस्कृतिक संचय है, यह हमारे व्यवहार में आ गया.

गांवों में रोजगार निर्माण करना होंगे
जो लोग अपना रोजगार बंद करके अपने-अपने गांव गए थे, वे वापस आने लगे हैं. बहुत अधिक तादाद वापस आने वालों की है. जो अभी अपने ही गांवों में टिके हैं, वे वहीं रोजगार ढूंढेंगे. ऐसे में अब रोजगार पैदा करना है. शिक्षकों का वेतन बंद है, कई को अभी भी सबको पूरा वेतन नहीं मिल पा रहा. अब वे घर कैसे चलाएं, इसकी समस्या है. अभिभावकों के पास बच्चों की फीस भरने का पैसा नहीं है. ये सारी व्यवस्था करना सेवा का आयाम ध्यान में आता है. ये सब परिस्थिति है, लेकिन इससे धीरे-धीरे बाहर आने वाले हैं. इस समय अपराध की समस्या बढ़ती है.

कोरोना के कारण प्रकृति में सुधार देखने को मिल रहा है
हमारे जीवन में कुछ कृत्रिम चीजें घुस गई थीं, जो इस दौर में कम हो गईं. इससे यह अनुभव हुआ कि इनके न रहने से जीवन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा. क्या आवश्यक है और क्या नहीं, ये पता लग गया है. हमें हवा में ताजगी का अनुभव हुआ. नदियों में हमने स्वच्छता देखी. हमने अनेक प्रकार के पक्षी घर की खिड़कियों पर और बगीचे में देखे.

विश्व के अन्य देश भी चीन के विरोध में खड़े हुए हैं
कोरोना महामारी में चाइना का नाम आता है, शंका है. चीन ने इस कालावधि में हमारी सीमाओं पर अतिक्रमण किया. यह उनका साम्राज्यवादी स्वभाव है, सब जानते हैं. इस बार भारत ने जो प्रतिक्रिया दी, उसकी वजह से वह सहम गया, क्योंकि भारत तन कर खड़ा होगा. भारत की सेना ने अपनी वीरता का परिचय दिया. अब दूसरे देशों ने भी चीन को आंख दिखाना शुरू किया है. हम स्वभाव मित्रता करने वाला है. हम लड़ने वाले नहीं हैं, लेकिन हमारी मित्रता की प्रवृत्ति को दुर्बलता न समझें. चीन को पहली बार समझ आया कि हम इतने कमजोर नहीं हैं.

हमें द्वेष सिखानेवालों से बचना होगा
हिंदुत्व एक ऐसा शब्द है, जिसे पूजा से जोड़कर संकुचित किया गया है. संघ में इसका प्रयोग नहीं होता हमारी मान्यता में अपने देश की पहचान को बताने वाला है. भारत को अपना मानने वाले और उसे अपने आचरण में लाने वाले सभी 130 करोड़ लोगों पर लागू होता है. जो इस समाज को तोड़ना चाहते हैं, वे इस शब्द से ही टीका-टिप्पणी से शुरुआत करते हैं. ‘हिंदू’ में विश्वभर की विविधताओं का सम्मान है. वे लोग बताते हैं कि आप विविध नहीं हो, अलग-अलग हो. हम डिफरेंस को सेपरेट बताते हैं. हिंदू किसी पंथ का नाम नहीं है, किसी की बपौती नहीं है. यह भारतभक्ति है और विशाल प्रांगण में बसाने वाला शब्द है. जब हम कहते हैं कि हिंदुस्तान हिंदू राष्ट्र है, इसके पीछे हमारी कोई राजनीतिक संकल्पना नहीं है. भारत में सिर्फ हिंदू रहेगा, ऐसा भी नहीं है. हमें द्वेष सिखाने वालों से बचना होगा. ये भारत की विविधता को तोड़ने वाली मंडलियां हैं, ‘भारत तेरे टुकड़े-टुकड़े’ गैंग है. भड़काने वालों की बातों में नहीं आना.

समाज को विभाजित करनेवाली शक्तियां सभी ओर मौजूद है
हमारे यहां अनेक दल हैं. एक दल प्रयास करता है कि अगले चुनाव में सत्ता बदल जाए और हम बैठ जाएं, यह प्रजातंत्र में चलता है. लेकिन यह स्पर्धा है, इसे स्वस्थ रूप से होना चाहिए, लेकिन हमारे भेद से समाज में विभाजन और कटुता पैदा हो, यह राजनीति नहीं है. यह ठीक नहीं है. भारत को दुर्बल करने के लिए विभाजित समाज बनाने के लिए कोशिश करने वाली शक्तियां हैं. दुनिया में भी हैं और भारत में भी हैं.

कुछ लोग देश को तोड़ने के मंसूबे पाले हुए है
कुछ लोग ‘भारत के टुकड़े हों’ कहते नजर आते हैं, वे संविधान और समाज के रखवाले बताकर समाज को उलटी पट्‌टी पढ़ाते हैं. बाबा साहब अंबेडकर ने जिसे अराजकता कहा है, ऐसी बातें सिखाने वाले ये लोग हैं. ये अपने निहित स्वार्थों के लिए ऐसी बात करते हैं.

जाति-धर्म नहीं, क़ाबिलियत देखकर करें मतदान – राजनीति की पाठशाला

ब्यूरो | नवप्रवाह न्यूज़ नेट्वर्क 

शनिवार को राजनीति की पाठशाला द्वारा नई दिल्ली स्थित प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ़्रेन्स का आयोजन किया गया। आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में मतदाताओं की जागरूकता के मद्देनज़र यह कॉन्फ़्रेन्स आयोजित किया गया। राजनीति की पाठशाला की तरफ़ से एक पोस्टर भी लॉंच किया गया, जिसके ज़रिए अपील किया गया है कि इस बार जाति-धर्म और पार्टी नहीं बल्कि प्रत्याशी की क़ाबिलियत को ध्यान में रखकर मतदान किया जाए।

राजनीति की पाठशाला के संस्थापक डॉ. अजय पाण्डेय ने पत्रकारों से बात-चीत के दौरान कहा कि मतदाताओं का जागरूक होना बेहद आवश्यक है। प्रदेश की तरक़्क़ी के लिए मतदाताओं को सही उम्मीदवार को चुनना चाहिए, न कि धर्म-जाति को देखकर। इसके साथ ही निर्वाचन आयोग के निर्देशों की अवमानना न हो, इसका भी ख़ास ख़याल रखा जाना चाहिए।

डॉक्टर पाण्डेय ने कहा कि देश इस समय कोरोना महामारी जैसे भीषण संकट से गुज़र रहा है। ऐसे में हर व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य पर विशेष रूप से ध्यान देने की ज़रूरत है। ऐसा देखा जा रहा है कि प्रचार सभाओं में भीड़ इकट्ठा हो जा रही है, इससे समस्या और भी ज़्यादा उग्र हो सकती है। इसलिए उचित दूरी बनाए रहें, ताकि चुनाव के बाद आपकी व्यक्तिगत समस्याएँ न बढ़ें।

ज्ञातव्य है कि राजनीति की पाठशाला गत तीन वर्षों से देश के विभिन्न हिस्सों में भारतीय संविधान को लेकर लोगों को जागरूक कर रहा है। अब तक देश के लगभग २५ राज्यों में पाठशाला की कार्यशालाएँ आयोजित की जा चुकी हैं। प्रेस वार्ता में राजनीति की पाठशाला के संयोजक मो. निज़ामुद्दीन ख़ान, राष्ट्रीय वाइस चेयरमैन संजीव त्यागी, लीगल अफ़ेयर्स विभाग के चेयरमैन एड. रोहित पाण्डेय, सलाहकार समिति के चेयरमैन सरदार त्रिलोचन सिंह, संस्था के संरक्षक बीपी शर्मा सहित राष्ट्रीय कार्यकारिणी के अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।

सदमे में पाकिस्तान, वजह जानकर आप चौंक जाएँगे!

ब्यूरो | नवप्रवाह न्यूज़ नेट्वर्क 
पाकिस्तान को एक बार फिर से ज़ोरदार झटका लगा है। दरअसल फ़ायनेंशियल ऐक्शन टास्क फ़ोर्स ने पाकिस्तान को एक बार फिर से ग्रे लिस्ट में डाल दिया है, जिसकी वजह से पाकिस्तान की हालत ख़राब है। यही नहीं, विश्व के 39 में से 38 देशों पाकिस्तान की किसी भी तरह से मदद करने से इंकार कर दिया है। मात्र तुर्की ऐसा देश है, जो पाकिस्तान की वकालत कर रहा है।
‘ग्रे’ लिस्ट में जाने से पाकिस्तान की हेकड़ी निकल गई है। उसको यह पता चल गया है कि आतंकियों को पनाह देना कितना भारी पड़ सकता है। विश्व के तमाम देशों के मुँह मोड़ने बाद पाकिस्तान के पास तुर्की की छतरी के नीचे छिपने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा है। तुर्की भी पाकिस्तान का साथ इसलिए दे रहा है, क्योंकि इस्लामिक राष्ट्रों का मठाधीश बनना है।
दरअसल अभी सऊदी अरब इस्लामिक राष्ट्रों का नेतृत्व करता है, यही जगह तुर्की हथियाना चाहता है, इसलिए वह इस समय पाकिस्तान के साथ खड़ा हुआ है। रेसप तैयप एर्दोगन के नेतृत्व में तुर्की तुर्क साम्राज्य की विरासत को पुनर्जीवित करने की कोशिश कर रहा है।
एफएटीएफ ने पाकिस्तान को जून 2018 में ‘ग्रे’ सूची में डाला था और इस्लामाबाद को धन शोधन और आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने की 27 बिंदुओं की कार्य योजना को वर्ष 2019 के अंत तक लागू करने को कहा था। कोविड महामारी की वजह से इस मियाद में वृद्धि कर दी गई।
भारत ने पाकिस्तान की सच्चाई से दुनिया के सामने पर्दा उठाया और बताया है कि पाक ने 27 में से सिर्फ 21 बिंदुओं पर काम किया है और अभी भी वहां आतंकियों को पनाह दी जा रही है। भारत ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र की सूची में शामिल जैश-ए-मोहम्मद के मुखिया और दाउद इब्राहिम जैसे आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करने में विफल रहा है।
भारत ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की कही इकाइयों और लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा है कि एफएटीएफ के 6 ऐसे अहम बिंदु हैं, जिन पर पाकिस्तान ने कोई काम नहीं किया है।

Lucknow: DIG की पत्नी ने फाँसी लगाकर की आत्महत्या, अधिकारी हाथरस बलात्कार मामले की जाँच टीम के सदस्य

ब्यूरो | नवप्रवाह न्यूज़ नेट्वर्क 
लखनऊ में डीआईजी रैंक के अधिकारी चंद्र प्रकाश की पत्नी पुष्पा प्रकाश ने शनिवार को आत्महत्या कर ली। चंद्र प्रकाश की पत्नी ने लगभग ११ बजे फाँसी लगाई। आनन फ़ानन में कुछ लोगों की सहायता से उन्हें नज़दीकी लोहिया अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहाँ चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव क़ब्ज़े में लेकर जाँच शुरू कर दिया है। 
पुष्पा प्रकाश ने फांसी लगाकर आत्महत्या क्यों की, इसकी वजह अभी तक साफ नहीं हो पाई है। न ही मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद हुआ है, जिससे ये पता लगाया जा सके कि अधिकारी की पत्नी ने फाँसी लगाई क्यों! हालाँकि, पुलिस मामले की जांच में जुटी है।  
आपको बता दें कि डीआईजी उन्नाव में तैनात हैं। इसके अलावा हाथरस जिले के चंदपा कोतवाली इलाके की युवती की सामूहिक दुष्कर्म और मौत मामले की जांच के लिए बनी एसआईटी में चंद्र प्रकाश बतौर सदस्य हैं।

Navratri 2020 : महाष्टमी आज, जानिए माँ महागौरी पूजन विधि एवं मंत्र

आचार्य प्रदीप द्विवेदी | नवप्रवाह न्यूज़ नेट्वर्क 
आज महाष्टमी का पर्व है, इसे दुर्गाष्टमी भी कहा जाता है। आज यानि नवरात्रि के आठवें दिन भगवती दुर्गा के आठवें स्वरूप माँ महागौरी की पूजा की जाएगी। अष्टमी तिथि पर माँ महागौरी की आराधना से व्यक्ति को सुख-समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
माँ महागौरी गौर वर्ण की हैं, इसलिए इनका नाम महागौरी पड़ा। माँ महागौरी की पूजा से कुंडली दोष भी दूर होता है। जब कभी शादी विवाह में अड़चन आती है, तो उस समस्या को दूर करने के लिए महागौरी का पूजन किया जाता है, क्योंकि महागौरी का पूजन करने से कुंडली का कमजोर शुक्र भी मजबूत हो जाता है और दांपत्य जीवन सुखद होता है साथ ही पारिवारिक कलह क्लेश भी मिट जाते हैं।
नवरात्रि में अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन का विशेष महत्व है। इस दिन कुंवारी कन्याओं को घर पर बुलाकर उनकी पूजा करने और भोजन कराने की परंपरा होती है। मान्यता है कि कुंवारी कन्याओं में माता दुर्गा का स्वरूप होता है और नवरात्रि पर उनकी नौ दिनों तक आराधना करने के बाद कन्या पूजन कर उनकी विदाई की जाती है। वैसे तो नवरात्रि के हर दिन पर कन्या पूजन का महत्व होता है लेकिन अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। कन्या पूजन में 9 कन्याओं का पूजन श्रेष्ठ माना जाता है।
पूजन विधि-
महा अष्टमी के दिन प्रातः उठ कर स्नान करने के बाद माता की प्रतिमा को अच्छे वस्त्रों से सुसज्जित करें और देवी भगवती की पूरे विधि और विधान से पूजा करनी चाहिए। मां के पूजन के लिए लाल फूलों का उपयोग करना चाहिए। पूजा के बाद मां को खीर, हलुआ और मिठाइयों का भोग लगाएं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन घर में हवन करवाना बड़ा ही शुभ होता है।
मां महागौरी बीज मंत्र-
श्री क्लीं ह्रीं वरदायै नम:।
महागौरी मंत्र-
माहेश्वरी वृष आरूढ़ कौमारी शिखिवाहना।
श्वेत रूप धरा देवी ईश्वरी वृष वाहना।।
ओम देवी महागौर्यै नमः।
अष्टमी तिथि शुभ मुहुर्त-
हिंदू पंचांग की गणना के अनुसार 23 अक्टूबर दिन शुक्रवार को सुबह 6 बजकर 57 मिनट से अष्टमी तिथि शुरू हो जाएगी। जो अगले दिन यानी 24 अक्टूबर की सुबह 6 बजकर 58 मिनट तक रहेगी। नवमी तिथि 24 अक्टूबर को सुबह 6 बजकर 58 मिनट से आरंभ हो जाएगी, जो 25 अक्टूबर की सुबह 7 बजकर 41 मिनट तक रहेगी।
(लेखक, ज्योतिषाचार्य एवं कर्मकाण्ड के ज्ञाता हैं।) 

महबूबा की मुल्क़ से बेवफ़ाई, तिरंगे का किया अपमान

महबूबा ने दिया राष्ट्रवाद पर बयान
ब्यूरो | नवप्रवाह न्यूज़ नेट्वर्क 
महबूबा मुफ़्ती रहती तो हिंदुस्तान में हैं, लेकिन उन्हें देश के झण्डे से मुहब्बत नहीं है। जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा ने ऐसा बयान दिया है, जिसकी तीखी आलोचना शुरू हो गई है। पीडीपी की अध्यक्षा महबूबा मुफ़्ती ने रिहाई के बाद पहली बार पत्रकारों से सीधी बात की।
पत्रकारों से बात करते हुए महबूबा मुफ़्ती ने जम्मू-कश्मीर के झंडे की तरफ इशारा करते हुए कहा कि ये मेरा झंडा है। जब तक हमारा झंडा हमारे पास वापस नहीं आ जाता, हम दूसरा कोई झंडा नहीं उठाएंगे। जब हमें अपना झंडा वापस मिल जाएगा, तब हम उस दूसरे झंडे (तिरंगा) को भी उठाएंगे।
मुफ़्ती ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भारत जम्मू-कश्मीर की भूमि चाहता है न कि उसके लोग। मैं अनुच्छेद 370 फिर से लागू होने तक कोई झंडा नहीं उठाऊंगी। महबूबा मुफ्ती ने कहा कि मुझे अनुच्छेद 370 की दोबारा बहाली होने का पूरा यकीन है। जिन्होंने हमसे हमारा हक छीना है। उन्हें हमारा हक लौटाना होगा।
महबूबा ने कहा कि कश्मीर के लिए अब तक हमारी आवाम ने बड़ी क़ुर्बानी दी है, अब हम नेताओं की बारी है। अब हमें आगे आकर कश्मीर को बचाना होगा। जब तक हमें हमारा हक़ लौटाया नहीं जाता, हम किसी भी चुनाव में शरीक नहीं होंगे।
महबूबा ने प्रधानमंत्री पर भी ज़ुबानी हमला किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री देश को असल समस्या से इत्तेफ़ाक नहीं रखते। उन्हें पता ही नहीं है कि देश किन परेशानियों से गुज़र रहा है। वे सिर्फ़ अनुच्छेद 370 के नाम पर वोट बटोरने की कोशिश में लगे हैं।

कपिल देव को पड़ा दिल का दौरा, अस्पताल में भर्ती

स्पोर्ट्स डेस्क | नवप्रवाह न्यूज़ नेट्वर्क 

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान कपिल देव को गुरुवार देर रात दिल का दौरा पड़ गया। जिसकी वजह  उन्हें आनन फ़ानन में दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा, जहाँ उनकी एंजियोप्लास्टी की गई। हालाँकि, इस समय उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है और वे ख़तरे से बाहर हैं। 

एएनआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक, महान क्रिकेटरों में शुमार कपिल देव को सीने में दर्द की शिकायत के बाद दिल्ली के ओखला में फोर्टिस अस्पताल में गुरुवार देर रात 1 बजे भर्ती कराया गया था। बाद में उनकी इमर्जेंसी एंजियोप्लास्टी की गई।
अस्पताल की ओर से जारी बयान के मुताबिक, कपिल फिलहाल आईसीयू में हैं और डॉ. अतुल माथुर और उनकी टीम की निगरानी में हैं। कपिल की हालत स्थिर है और उन्हें कुछ दिनों में अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी।
भारत को अपनी कप्तानी में पहला वनडे वर्ल्ड कप दिलाने वाले कपिल देव की गिनती विश्व के दिग्गज ऑलराउंडरों में की जाती है। भारत के पूर्व कप्तान और क्रिकेट जगत के बेहतरीन ऑलराउंडरों में शुमार कपिल देव की कप्तानी में भारत ने 1983 में पहली बार वर्ल्ड कप जीता था।

Bihar Assembly Election 2020 : पीएम मोदी ने कर्पूरी ठाकुर को किया याद, जानिए इतने महत्वपूर्ण क्यों हैं कर्पूरी ठाकुर

पॉलिटिकल डेस्क | नवप्रवाह न्यूज़ नेट्वर्क 
बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर प्रचार अपने चरम पर है। पहले चरण के लिए मतदान की तारीख़ एकदम क़रीब है। ऐसे में हर पार्टी के स्टार प्रचारक जी जान लगाकर चुनाव प्रचार करने में लगे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिहार में गठबंधन को मज़बूती देने के लिए बिहार के सासाराम पहुँचे। अपने चिर परिचित अन्दाज़ में प्रधानमंत्री ने भाषण शुरू किया। उन्होंने भोजपुरी में भाषण की शुरुआत की। रामविलास पासवान और रघुवंश प्रसाद को श्रद्धांजलि देने के बाद उन्होंने कर्पूरी ठाकुर को याद किया।
कर्पूरी ठाकुर की मृत्यु लगभग ३२ वर्ष पहले हुई थी, लेकिन आज भी दिवंगत कर्पूरी ठाकुर बिहार की राजनीति की धुरी बने हुए हैं। आइए जानते हैं कौन हैं कर्पूरी ठाकुर और कैसे बने वे इतने महत्वपूर्ण व्यक्ति।
कौन थे कर्पूरी ठाकुर? 
कर्पूरी ठाकुर एक साधारण नाई परिवार में जन्मे। आजीवन सामाजिक न्याय को लेकर लड़ते रहे, अपनी इसी लड़ाई की वजह से वे बिहार की सियासत के बेहद महत्वपूर्ण व्यक्ति बन गए। पूरी ज़िंदगी उन्होंने कांग्रेस के ख़िलाफ़ राजनीति की। यहां तक कि आपातकाल के दौरान तमाम कोशिशों के बावजूद इंदिरा गांधी उन्हें गिरफ्तार नहीं करवा सकी थीं।
कर्पूरी ठाकुर 1977 में बिहार के मुख्यमंत्री बने। ढाई साल के कार्यकाल में उन्होंने समाज के दबे-पिछड़ों लोगों के हितों के लिए ख़ूब काम किया। बिहार में मैट्रिक तक पढ़ाई मुफ्त की दी। वहीं, राज्य के सभी विभागों में हिंदी में काम करने को अनिवार्य बना दिया। उन्होंने अपने कार्यकाल में गरीबों, पिछड़ों और अति पिछड़ों के हक में ऐसे तमाम काम किए, जिससे बिहार में भारी बदलाव आया। इसके बाद कर्पूरी ठाकुर की राजनीतिक ताकत में जबरदस्त इजाफा हुआ और वो बिहार की सियासत में समाजवाद का बड़ा चेहरा बन गए।
जनता पार्टी के दौर में लालू और नीतीश ने कर्पूरी ठाकुर की उंगली पकड़कर सियासत के गुर सीखे। ऐसे में जब लालू यादव बिहार की सत्ता में आए तो उन्होंने कर्पूरी ठाकुर के कामों को आगे बढ़ाया। वहीं, नीतीश कुमार ने भी अति पिछड़े समुदाय के हक में कई काम किए। 
कर्पूरी ठाकुर को यह दुनिया छोड़े ३२ साल हो गया लेकिन आज भी पिछड़े/अतिपिछड़े लोगों के लिए किया गया उनका काम आदर्श है। पिछड़े वर्ग के समुदाय में आज भी कर्पूरी ठाकुर का सम्मान जस का तस है। आज भी वे उतने ही लोकप्रिय हैं।
बिहार में पिछड़ों और अतिपिछड़ों की आबादी करीब 52 प्रतिशत है। ऐसे में सभी राजनीतिक दल अपनी पकड़ बनाने के मकसद से कर्पूरी ठाकुर का नाम लेते रहते हैं। यही वजह है कि कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में ‘कर्पूरी ठाकुर सुविधा केंद्र’ खोलने का ऐलान किया। वहीं, अब पीएम मोदी ने सासाराम रैली में कर्पूरी ठाकुर का नाम लिया।