• नामचीन लेखक सुरेंद्र मोहन पाठक मेकर्स से बेहद ख़फ़ा।
• एक सीन को लेकर आपत्ति, लेखक ने भेजा नोटिस।
• पाठक बोले, “सीन तत्काल प्रभाव से हटाया जाए, नहीं तो जाएँगे कोर्ट।”
अमित द्विवेदी | नवप्रवाह न्यूज़ नेट्वर्क
गालियों की बौछार लगा देने वाले मिर्ज़ापुर के मेकर्स की हवा निकालने पूरी तैयारी लेखक सुरेंद्र मोहन पाठक कर चुके हैं। क्रिएटिविटी के नाम पर गंद फैलाने वाले निर्माता-निर्देशकों पर शायद इस कठोर कदम से कुछ अंकुश लगे। जाने-माने लेखक सुरेंद्र मोहन पाठक ने मिर्ज़ापुर के मेकर्स को उनकी और उनके पुस्तक की छवि ख़राब करने को लेकर एक नोटिस भेजा है। पिछले कुछ समय से मिर्ज़ापुर जैसी तमाम वेब सीरीज़ में क्रीएटिविटी के नाम पर अभद्र भाषा का प्रयोग बेहद आम हो गया है। ऐसे ट्रेण्ड सेट कर दिया गया है कि अगर सीरीज़ में गाली नहीं है, तो मेकर कमज़ोर है या वो डेली सोप वाला है।
गालियों की ऐसी लत लगी है युवाओं को कि रातों-रात ऐसी सीरीज़ हिट हो जा रही हैं और ऐसे निर्माताओं को बल मिलता जा रहा है। इस तरह की वेब सीरीज़ से आजिज़ आकर मिर्ज़ापुर की सांसद अनुप्रिया पटेल ने भी शहर की छवि ख़राब करने को लेकर आपत्ति जताई है और सेंसरशिप लगाने की बात कही है।
दरअसल, ‘मिर्जापुर 2’ के तीसरे एपिसोड में एक सीन है जिसमें अभिनेता कुलभूषण खरबंदा, जिन्होंने सत्यानंद त्रिपाठी का किरदार निभाया है वो ‘धब्बाड’ नाम की एक उपन्यास पढ़ रहे हैं। उपन्यास पढ़ने वाले सीन के दौरान कुछ पंक्तियाँ सुनाई दे रही हैं। इस सीन में जो वॉइस ओवर है, वो बेहद अश्लील है और उसका इस पुस्तक से कोई लेना देना नहीं है। लेखक सुरेंद्र मोहन पाठक ने स्पष्ट किया कि उनके उपन्यास का इन लाइंस से कोई सरोकार नहीं है और इसकी वजह से उनकी और उनकी कृति दोनों की छवि धूमिल हुई है।
एक अंग्रेज़ी अख़बार के खबर के मुताबिक, लेखक का कहना है कि मैं उनके रिस्पॉन्स का इंतज़ार कर रहा हूं। अगर एक हफ्ते में कोई जवाब नहीं आता तो मैं दिल्ली हाइकोर्ट में मेकर्स के खिलाफ केस फाइल करूंगा।
सुरेंद्र मोहन पाठक के इस ऐक्शन से यह तो निश्चित है कि मिर्ज़ापुर के मेकर्स की नींद उड़ी होगी। सीरीज़ को अलग लेवल का बनाने के चक्कर में उत्तर प्रदेश और बिहार को बदनाम करने का कोई मौक़ा मेकर्स नहीं छोड़ते और ग़ज़ब की बात यह कि इन फ़िल्मों की लीड में ऐसे ही अभिनेता अभिनय करते हैं, जो बख़ूबी जानते हैं कि ऐसी फ़िल्मों से उनके राज्य, शहर और उनके समुदाय की छवि ख़राब हो रही है।
हिंदूवादी संगठनों के दबाव के आगे आख़िरकार अभिनेता अक्षय कुमार को झुकना पड़ा। लक्ष्मी बॉम्ब फ़िल्म के ट्रेलर के बाद से ही अक्षय कुमार की लगातार आलोचना हो रही थी। कई संगठनों ने उनकी इस फ़िल्म को बॉयकॉट करने की मुहिम भी चलाई थी, जिसके चलते फ़िल्म का शीर्षक बदलकर ‘लक्ष्मी’ कर दिया गया।
फिल्म के निर्देशक राघव लॉरेंस ने ये फैसला केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के साथ हुई बैठक के बाद लिया। अक्षय की ये फिल्म अब ‘लक्ष्मी’ नाम से रिलीज होगी। दरअसल फिल्म ‘लक्ष्मी बॉम्ब’ अपने ट्रेलर की रिलीज के साथ ही विवादों में आ गई। फिल्म में अक्षय के किरदार का नाम की जानकारी सामने आते ही फिल्म के नाम का भी विरोध शुरू हो गया।
‘लक्ष्मी बॉम्ब’ को लेकर पहले तो सोशल मीडिया पर अक्षय कुमार को खूब ट्रोल किया गया। फिल्म के ट्रेलर के लाइक्स छुपाए गए तो ये मामला और भड़क गया। इसके बाद अक्षय ने किन्नर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के साथ मिलकर मामले को दूसरा रूप देने की कोशिश भी की। फिल्म का प्रचार भी उन्हीं के साथ जाकर एक टीवी शो पर किया। लेकिन, इसी के बाद करणी सेना मैदान में कूद गई।
करणी सेना ने फिल्म ‘लक्ष्मी बॉम्ब’ के नाम को लेकर कड़ी आपत्ति जताई और चेतावनी दी कि अगर फिल्म का नाम न बदला गया तो इससे जुड़े लोगों के लिए यह ठीक न होगा। संगठन ने इसके लिए बाकायदा नोटिस भी भेज दिया। उधर, फिल्म ‘लक्ष्मी बॉम्ब’ को टेलीविजन और सिनेमाघरों में भी रिलीज करने के लिए इसके निर्देशक राघव लॉरेंस फिल्म को लेकर सेंसर बोर्ड के पास पहुंच गए।
बिहार के मुंगेर की घटना से स्थानीय आम जनमानस की भावनाओं को गहरी ठेस लगी है। पुलिस प्रशासन पर जिले-प्रदेश और समुदाय की जनता में रोष व्याप्त है। गुरुवार को आम जनता का ग़ुस्सा फिर फूटा। लोगों ने गुरुवार को ख़ूब बवाल किया और गुस्साई भीड़ ने पूरब सराय को आग के हवाले कर दिया।
उग्र भीड़ ने पुलिस की भी कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया। यही नहीं, एसडीओ और डीएसपी के दफ्तर और आवास पर भी पथराव किया गया है। वहीं जिले की स्थिति को देखते हुए चुनाव आयोग ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को हटा दिया है। आज ही नए जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक की तैनाती की जाएगी।
घटना को लेकर बिहार चुनाव आयोग के सीईओ ने ट्वीट कर बताया कि मुंगेर की एसपी और डीएम को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। उन्होंने लिखा, ‘मुंगेर में मौजूदा स्थिति के मद्देनजर, चुनाव आयोग ने एसपी और डीएम मुंगेर को तत्काल हटाने का आदेश दिया है। आयोग ने असंगबा चुबा एओ, मंडल आयुक्त, मगध द्वारा पूरी घटना की जांच करने का आदेश दिया है, जिसे अगले सात दिनों के भीतर पूरा किया जाना है।’
स्थानीय लोगों की मांग थी कि मुंगेर की पुलिस अधीक्षक लिपि सिंह के खिलाफ मंगलवार की घटना को लेकर तुरंत कारवाई की जाए। बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान से ठीक एक दिन पूर्व हुई उस घटना ने राजनीतिक रंग लेना शुरू कर दिया।
नेता प्रतिपक्ष और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में जहां इस घटना की निंदा की, वहीं मुंगेर की एसपी लिपि सिंह को जनरल डायर की संज्ञा तक दे डाली। दरअसल दशहरे की रात मूर्ति विसर्जन के दौरान पुलिस और आम लोगों के बीच पहले विवाद हुआ और उसके बाद वहां जमकर हंगामा हुआ था। पुलिस को गोलियां तक चलानी पड़ी थी, जिसमे एक युवक की मौत हो गई थी और कई अन्य बुरी तरह घायल हो गए थे।
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर ज़िले में कुछ ऐसा हुआ कि समाजवादी पार्टी प्रदेश सरकार पर बरस पड़ी। सपाइयों को इतना ग़ुस्सा आया कि उन्होंने योगी सरकार को दूषित सोच वाली सरकार तक कह डाला। दरअसल, गोरखपुर जिले के रेलवे अस्पतालों के शौचालयों की दीवारों का रंग समाजवादी पार्टी के झण्डे के रंग जैसा होने की वजह से सपाई ग़ुस्से में हैं।
समाजवादी पार्टी की ओर से इस पर घोर आपत्ति जताते हुए तुरंत इसे ठीक करने की अपील की गई है। इस मामले को लेकर आज सपाई, रेलवे के अफसरों से मिलकर बातचीत करेंगे।
बता दें कि गुरुवार को समाजवादी पार्टी ने ट्वीट कर इस बारे में आपत्ति जताई। ट्वीट में लिखा गया, ‘दूषित सोच रखने वाले सत्ताधीशों द्वारा राजनीतिक द्वेष के चलते गोरखपुर रेलवे अस्पताल में शौचालय की दीवारों को सपा के रंग में रंगना लोकतंत्र को कलंकित करने वाली शर्मनाक घटना है!’
तस्वीरों में देखा जा सकता है कि शौचालयों पर लाल और हरे रंग की टाइलें लगाई गई हैं। जिसके बाद समाजवादी पार्टी की ओर से अब भाजपा पर हमला किया जा रहा है। इस पर पार्टी की ओर से संज्ञान लेकर कार्रवाई की मांग करने के साथ ही तत्काल रंग बदलने की मांग की गई है।
हालाँकि, प्रशासन की तरफ़ से अभी तक कोई फ़ैसला नहीं लिया जा सका है, लेकिन इस मुद्दे की वजह से एक बार सपाई और भाजपाई आमने-सामने नज़र आ रहे हैं।
गुजराती अभिनेता नरेश कनोड़िया का कोरोना की वजह से मौत हो गई। 77 वर्षीय अभिनेता कनोड़िया कुछ दिन पूर्व ही कोरोना संक्रमण की गिरफ़्त में आए, जिसके बाद उन्हें अहमदाबाद के यूएन मेहता इंस्टिट्यूट में भर्ती कराया गया, जहाँ इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने ट्वीट कर उन्हें श्रद्धांजलि दी है। उन्होंने लिखा- ‘मुझे गुजराती फिल्म सुपरस्टार और भाजपा नेता नरेश भाई कनोडिया के निधन से गहरा दुख हुआ है। सामाजिक और कला के क्षेत्र में उनका अमूल्य योगदान नई पीढ़ी को प्रेरित करेगा। विधायक श्री हितुभाई कनोडिया से टेलीफोन पर बात की। मैं भगवान से प्रार्थना करता हूं कि परमात्मा इस दिव्य आत्मा को अपने चरणों में स्थान दें और उनके परिवार और सभी शुभचिंतकों को इस दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें। ૐ शांति।’
नरेश कनोडिया को गुजराती फिल्मों का सुपरस्टार माना जाता है। गुजराती में उन्होंने सैकड़ों फिल्में की हैं। उनके पुत्र हितु कनोडिया भी गुजराती फिल्मों के कलाकार हैं तथा भाई महेश कनोडिया भाजपा के राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं। गुजराती के कई नामी फ़िल्मी हस्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।
उत्तर प्रदेश के ललितपुर से बच्ची का अपहरण कर ट्रेन से भाग रहे अपहरणकर्ता को रेल विभाग और पुलिस की सतर्कता से बचा लिया गया. भारतीय रेलवे विभाग ने इंसानियत की मिसाल पेश करते मासूम को बचाने के लिए ट्रेन को उत्तर प्रदेश के ललितपुर से मध्य प्रदेश के भोपाल तक नॉनस्टॉप दौड़ाया. रेलवे विभाग और आरपीएफ के सिपाहियों की सूझबूझ की हर कोई तारीफ कर रहा है.
– पुलिस ने दिखाई सतर्कता
जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश के ललितपुर में एक तीन साल की बच्ची का अपहरण हो गया था. जिसके बाद मासूम के माता-पिता बेटी को तलाशते हुए रेलवे स्टेशन तक पहुंच गए. जहां उन्होंने आरपीएफ थाने में जाकर शिकायत दी. इसके बाद आरपीएफ के सब इंस्पेक्टर रविंद्र सिंह रजावत हरकत में आया और स्टेशन पर लगे सीसीटीवी फुटेज खंगालना शुरू किया. लेकिन इंस्पेक्टर कुछ समझ पाता इससे पहले आरोपी बच्ची को लेकर राप्ती सागर एक्सप्रेस में सवार हो गया.
– ललितपुर से भोपाल तक नॉनस्टॉप दौड़ी ट्रेन
आरपीएफ सब इंस्पेक्टर रविंद्र सिंह ने ललितपुर रेलवे विभाग के अधिकारियों और पायलेट को इस मामले की जानकारी दी. कहा कि ट्रेन को ललितपुर से लेकर भोपाल के बीच किसी भी स्टेशन पर न रोकने का निवेदन किया. इसके अलावा ऑपरेटिंग कंट्रोल भोपाल को भी पूरे मामले के बारे में बताया गया. हुआ भी ऐसा ही और ट्रेन को ललितपुर से भोपाल तक नॉनस्टॉप दौड़ाया गया. ताकि बीच में आरोपी कहीं नहीं उतर सके.
– बीच स्टेशनों पर चिल्लाते रह गए यात्री
राप्तीसागर एक्सप्रेस में बैठे यात्री चिल्लाते रहे कि गाड़ी को रोक दो हमारा स्टेशन आ गया है, लेकिन गाड़ी को भोपाल पहुंचने के बाद ही रोका गया. यहां पर पहले से ही बच्ची को बचाने और आरोपी को पकड़ने के लिए आरपीएफ के जवान बेसब्री से इंतजार कर रहे थे. जैसे ही गाड़ी रुकी तो बच्ची को बचा लिया औरअपहरणकर्ता को गिरफ्तार कर लिया गया. इस तरह सब इंस्पेक्टर रविंद्र सिंह रजावत की सूझबूझ से मासूम बच्ची की जिंदगी बच गई.
रेलवे ने पहली बार किया यह काम
बच्ची को ले जाकर उसके माता-पिता के हाथों में सकुशल सौंप दिया गया. मां-बाप से लेकर हर कोई इंस्पेक्टर और रेलवे की तारीफ कर रहा है. इसके अलावा भारतीय रेलवे के लिए यह ऐसा पहला मौका है जब अपहरणकर्ता को पकड़ने और एक बच्ची को बचाने के लिए ट्रेन को इस तरह से नॉनस्टॉप चलाया गया हो.
न्यूज़ डेस्क | नवप्रवाह न्यूज़ नेटवर्क
बिहार विधानसभा चुनाव भाजपा की सहयोगी पार्टी लोजपा बिहार में नए समीकरण की तैयारी में है. लोजपा के अध्यक्ष किसी भी हाल में नीतीश कुमार से समझौते के मूड में नहीं है. चिराग पासवान ने नए समीकरण के संकेत देते हुए कहा कि इस बात में शक नहीं है कि हम सरकार बनाएंगे. अगर हमारी सरकार बनेगी तो हम सीता मंदिर की नींव रखेंगे. कम से कम जो अभी मुख्यमंत्री हैं, वे तो मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे. भाजपा की अगुआई में हम भाजपा-लोजपा सरकार बनाएंगे.
राम मंदिर से भी भव्य होगा सीता मंदिर
चिराग ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में मंदिर कार्ड भी खेला. उन्होंने कहा- अगर लोजपा सत्ता में आई तो सीतामढ़ी में सीता मंदिर बनाया जाएगा. खुद को मोदी का हनुमान कहने वाले चिराग ने कहा कि मैं राम मंदिर से भी बड़ा सीता मंदिर बनाना चाहता हूं. चिराग ने कहा कि सीता के बिना राम अधूरे हैं और इसी तरह सीता भी राम के बिना अधूरी हैं. अयोध्या के राम मंदिर को सीतामढ़ी के सीता मंदिर से जोड़ने के लिए एक कॉरिडोर भी बनाया जाएगा. चिराग पासवान सीतामढ़ी के पुनौरा धाम में पूजा करने आए थे.
बिहार-उत्तर प्रदेश के बीच बनाया जाएगा सीता राम कॉरिडोर
लोजपा ने बिहार फर्स्ट-बिहारी फर्स्ट के अपने विजन डॉक्यूमेंट में सीता मंदिर बनाने का वादा किया है. इसके साथ ही मंदिर के आसपास के इलाकों के विकास भी बात कही गई है. अयोध्या से सीतामढ़ी को जोड़ने के लिए एक सिक्स लेन कॉरिडोर की भी बात इसमें है. उन्होंने बिहार-उत्तर प्रदेश सीमा तक ये रोड बनेगी और इसे सीता-राम कॉरिडोर नाम दिया जाएगा. बिहार विधानसभा चुनाव में लोजपा ने जयदू के खिलाफ तो कैंडिडेट उतारे हैं, पर भाजपा के खिलाफ नहीं. बिहार में तीन चरणों में चुनाव होगा. 28 अक्टूबर, 3 नंवबर और 7 नवंबर को यहां वोटिंग होगी. वोटों की गिनती 10 नवंबर को की जाएगी.
न्यूज़ डेस्क | नवप्रवाह न्यूज़ नेटवर्क
आईपीएल के 13वें सीजन के 44वें मैच में चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) ने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) को 8 विकेट से हरा दिया. दुबई में खेले गए मुकाबले में बेंगलुरु ने टॉस जीतकर बल्लेबाजी करते हुए चेन्नई को 146 रन का टारगेट दिया था. जवाब में चेन्नई ने 18.4 ओवर में 2 विकेट पर 150 रन बनाकर मैच जीत लिया. रितुराज गायकवाड़ ने आईपीएल में अपनी पहली फिफ्टी लगाते हुए नाबाद 65 रन बनाए.
प्लेऑफ के लिए बेंगलुरु को एक जीत की दरकार
धोनी की टीम लगातार तीन मैच हारने के बाद जीती है. इस जीत से 8 पॉइंट्स के साथ चेन्नई पॉइंट्स टेबल में 7वें स्थान पर पहुंच गई है. वहीं, बेंगलुरु को प्ले-ऑफ में अपनी जगह पक्की करने के लिए अभी और इंतजार करना होगा. बेंगलुरु 14 पॉइंट्स के साथ तीसरे स्थान पर है. एक जीत उसे टूर्नामेंट के प्लेऑफ में पहुंचा देगी.
19 रन बना कर नाबाद रहे धोनी
चेन्नई के लिए अंबाती रायडू ने 39 रन बनाए. कप्तान महेंद्र सिंह धोनी 19 रन बनाकर नाबाद रहे. गायकवाड़ ने छक्का लगाकर अपनी टीम को जीत दिलाई. उन्हें मैन ऑफ द मैच चुना गया. बेंगलुरु के लिए क्रिस मॉरिस और युजवेंद्र चहल ने 1-1 विकेट लिया.
पावर-प्ले में चेन्नई ने बनाए 48 रन
चेन्नई के लिए फाफ डु प्लेसिस और रितुराज गायकवाड़ ने पारी की शुरुआत की. दोनों ने टीम को अच्छी शुरुआत दिलाई और पहले विकेट के लिए 46 रन की पार्टनरशिप की. डु प्लेसिस 25 रन बनाकर क्रिस मॉरिस की बॉल पर आउट हुए. इसके बाद गायकवाड़ और अंबाती रायडू ने पारी संभाली.
बेंगलुरु के लिए अनलकी रही हरी जर्सी
बेंगलुरु का हरी जर्सी में प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा. उसने ग्रीन ड्रेस में अब तक 10 मैच खेले हैं. जिसमें उसने 2 जीते और 7 हारे हैं. आरसीबी ने 2011 और 2016 में हरी जर्सी में जीत दर्ज की थी. वहीं, 2015 में एक मुकाबला बेनतीजा रहा था.
न्यूज़ डेस्क | नवप्रवाह न्यूज़ नेटवर्क
फिल्म अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी और उनके परिजनों की गिरफ्तारी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट से स्टे मिला है. हाईकोर्ट की दो सदस्यीय खंडपीठ ने पुलिस द्वारा चार्जशीट दाखिल करने तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाई है, जबकि मुकदमे के मुख्य आरोपी अभिनेता के छोटे भाई मिनाजुद्दीन सिद्दीकी को अग्रिम जमानत करानी होगी.
पत्नी ने दर्ज कराई थी रिपोर्ट
बुढ़ाना निवासी प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी की पत्नी आलिया सिद्दीकी उर्फ अंजलि पांडे ने 27 जुलाई 2020 को मुंबई के वर्सोवा थाने में यह मुकदमा दर्ज कराया था. आलिया ने दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया था कि नवाजुद्दीन उसे व बेटी को दिसंबर 2012 में बुढ़ाना स्थित अपने घर पर छोड़ गए थे.आरोप है कि यहां बेटी के साथ अत्याचार हुए. इनमें बैड टच से लेकर छेड़छाड़ व मारपीट के भी आरोप शामिल हैं. रिपोर्ट में आलिया ने पति नवाजुद्दीन के साथ ही सास मेहरून्निशां, नवाज के भाइयों फैय्याजुद्दीन, अयाजुद्दीन और मिनाजुद्दीन को आरोपी बनाया हुआ है.
बुढ़ाना शिफ्ट किया गया मुकदमा
यह मुकदमा जांच के लिए 12 अगस्त 2020 को बुढ़ाना कोतवाली आ गया था. 16 अक्तूबर को पुलिस ने आलिया सिद्दीकी के पॉक्सो कोर्ट में 164 के बयान भी दर्ज कराए थे. अब इस मुकदमे में नवाजुद्दीन और उनके परिजनों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है. उनके अधिवक्ता नदीम जाफर जैदी ने बताया कि हाईकोर्ट इलाहाबाद से नवाजुद्दीन सिद्दीकी आदि को इस मुकदमे में गिरफ्तारी पर स्टे मिला है.
भाई को लेनी होगी अग्रीम जमानत
न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और संजय कुमार पचौरी की खंडपीठ ने नवाजुद्दीन, उनके भाई फैय्याजुद्दीन, अयाजुद्दीन और मां मेहरून्निशां की गिरफ्तारी पर स्टे दिया है, जबकि मुख्य आरोपी मिनाजुद्दीन को अग्रिम जमानत करानी होगी. उधर, बुढ़ाना कोतवाली प्रभारी निरीक्षक एमएस गिल ने बताया कि उन्हें अभी तक स्टे आर्डर की प्रति नहीं मिली है.
न्यूज़ डेस्क | नवप्रवाह न्यूज़ नेटवर्क
रविवार को विजयादशमी के मौके पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर स्थित मुख्यालय में शस्त्र पूजा की. इस समय भागवत के उग्र तेंवर देखने को मिले. अपने संबोधन में भागवत ने चीन और पाकिस्तान को जम कर फटकार लगाते हुए कहा कि, चीन के साम्राज्यवादी स्वभाव के सामने भारत तन कर खड़ा हुआ है, जिससे पड़ोसी देश के हौसले पस्त हुए हैं. कोई भी देश हमारी दोस्ती को कमजोरी न समझे. उन्होंने कहा कि राम मंदिर पर 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट का असंदिग्ध निर्णय आया. एकमत से निर्णय था, सारे देश ने समाज ने उसे स्वीकार किया. हर्षोल्लास का विषय होने के बाद भी संयम से उसे मनाया. कोरोना के चलते इस बार केवल 50 लोग मौजूद थे.
भारत में कोरोना के कारण कम नुकसान हुआ
हम कह सकते हैं कि सारी परिस्थिति में कोरोना महामारी से होने वाला नुकसान भारत में कम है, इसके कारण कोरोना की बीमारी कैसे फैलेगी इसे समझकर हमारे शासन-प्रशासन ने उपाय बताए. उनका अमल हो, इसकी तत्परता से योजना की. उन्होंने इसका बढ़ा-चढ़ाकर इसका वर्णन किया, जिससे जनता में भय आ गया. उसका फायदा भी हुआ कि जनता अतिरिक्त सावधान हो गई.
हाथ पैर धोकर घर में प्रवेश करना हमारी संस्कृति का ही हिस्सा है
कोरोना में सारा समाज दूसरों की चिंता करने में जुट गया. लोग सहायता लेकर गए तो लोगों ने यह तक कहा कि हमारे पास सात दिन का राशन है, जिसे जरूरत है उसे दीजिए. संकट में लोगों ने परस्पर सहयोग दिखाया. अंग्रेजी में इसे सोशल कैपिटल कहते हैं, लेकिन यह हमारे संस्कारों में हैं. बाहर से आकर हाथ-पैर धोना, सफाई का ध्यान रखना यह हमारा सांस्कृतिक संचय है, यह हमारे व्यवहार में आ गया.
गांवों में रोजगार निर्माण करना होंगे
जो लोग अपना रोजगार बंद करके अपने-अपने गांव गए थे, वे वापस आने लगे हैं. बहुत अधिक तादाद वापस आने वालों की है. जो अभी अपने ही गांवों में टिके हैं, वे वहीं रोजगार ढूंढेंगे. ऐसे में अब रोजगार पैदा करना है. शिक्षकों का वेतन बंद है, कई को अभी भी सबको पूरा वेतन नहीं मिल पा रहा. अब वे घर कैसे चलाएं, इसकी समस्या है. अभिभावकों के पास बच्चों की फीस भरने का पैसा नहीं है. ये सारी व्यवस्था करना सेवा का आयाम ध्यान में आता है. ये सब परिस्थिति है, लेकिन इससे धीरे-धीरे बाहर आने वाले हैं. इस समय अपराध की समस्या बढ़ती है.
कोरोना के कारण प्रकृति में सुधार देखने को मिल रहा है
हमारे जीवन में कुछ कृत्रिम चीजें घुस गई थीं, जो इस दौर में कम हो गईं. इससे यह अनुभव हुआ कि इनके न रहने से जीवन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा. क्या आवश्यक है और क्या नहीं, ये पता लग गया है. हमें हवा में ताजगी का अनुभव हुआ. नदियों में हमने स्वच्छता देखी. हमने अनेक प्रकार के पक्षी घर की खिड़कियों पर और बगीचे में देखे.
विश्व के अन्य देश भी चीन के विरोध में खड़े हुए हैं
कोरोना महामारी में चाइना का नाम आता है, शंका है. चीन ने इस कालावधि में हमारी सीमाओं पर अतिक्रमण किया. यह उनका साम्राज्यवादी स्वभाव है, सब जानते हैं. इस बार भारत ने जो प्रतिक्रिया दी, उसकी वजह से वह सहम गया, क्योंकि भारत तन कर खड़ा होगा. भारत की सेना ने अपनी वीरता का परिचय दिया. अब दूसरे देशों ने भी चीन को आंख दिखाना शुरू किया है. हम स्वभाव मित्रता करने वाला है. हम लड़ने वाले नहीं हैं, लेकिन हमारी मित्रता की प्रवृत्ति को दुर्बलता न समझें. चीन को पहली बार समझ आया कि हम इतने कमजोर नहीं हैं.
हमें द्वेष सिखानेवालों से बचना होगा
हिंदुत्व एक ऐसा शब्द है, जिसे पूजा से जोड़कर संकुचित किया गया है. संघ में इसका प्रयोग नहीं होता हमारी मान्यता में अपने देश की पहचान को बताने वाला है. भारत को अपना मानने वाले और उसे अपने आचरण में लाने वाले सभी 130 करोड़ लोगों पर लागू होता है. जो इस समाज को तोड़ना चाहते हैं, वे इस शब्द से ही टीका-टिप्पणी से शुरुआत करते हैं. ‘हिंदू’ में विश्वभर की विविधताओं का सम्मान है. वे लोग बताते हैं कि आप विविध नहीं हो, अलग-अलग हो. हम डिफरेंस को सेपरेट बताते हैं. हिंदू किसी पंथ का नाम नहीं है, किसी की बपौती नहीं है. यह भारतभक्ति है और विशाल प्रांगण में बसाने वाला शब्द है. जब हम कहते हैं कि हिंदुस्तान हिंदू राष्ट्र है, इसके पीछे हमारी कोई राजनीतिक संकल्पना नहीं है. भारत में सिर्फ हिंदू रहेगा, ऐसा भी नहीं है. हमें द्वेष सिखाने वालों से बचना होगा. ये भारत की विविधता को तोड़ने वाली मंडलियां हैं, ‘भारत तेरे टुकड़े-टुकड़े’ गैंग है. भड़काने वालों की बातों में नहीं आना.
समाज को विभाजित करनेवाली शक्तियां सभी ओर मौजूद है
हमारे यहां अनेक दल हैं. एक दल प्रयास करता है कि अगले चुनाव में सत्ता बदल जाए और हम बैठ जाएं, यह प्रजातंत्र में चलता है. लेकिन यह स्पर्धा है, इसे स्वस्थ रूप से होना चाहिए, लेकिन हमारे भेद से समाज में विभाजन और कटुता पैदा हो, यह राजनीति नहीं है. यह ठीक नहीं है. भारत को दुर्बल करने के लिए विभाजित समाज बनाने के लिए कोशिश करने वाली शक्तियां हैं. दुनिया में भी हैं और भारत में भी हैं.
कुछ लोग देश को तोड़ने के मंसूबे पाले हुए है
कुछ लोग ‘भारत के टुकड़े हों’ कहते नजर आते हैं, वे संविधान और समाज के रखवाले बताकर समाज को उलटी पट्टी पढ़ाते हैं. बाबा साहब अंबेडकर ने जिसे अराजकता कहा है, ऐसी बातें सिखाने वाले ये लोग हैं. ये अपने निहित स्वार्थों के लिए ऐसी बात करते हैं.