देश का सबसे पुराना राजनीतिक दल अस्तित्व के संकट से जूझ रहा है। इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि गत दो वर्षों में तमाम चुनावी शिकस्त के बावजूद पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष का चयन नहीं कर पा रही। हालाँकि, इस बीच तमाम मुद्दों को लेकर पार्टी पहले से अधिक मुखर नज़र आई है। किसी भी मुद्दे को लेकर पार्टी पहले से अधिक आक्रामक दिख रही है। लेकिन इन सबके बावजूद कोई भी निश्चित राष्ट्रीय नेतृत्व न होने का नुक़सान भी पार्टी को हुआ है।
कहने को पार्टी को सोनिया गांधी का नेतृत्व प्राप्त है लेकिन आज भी नेताओं की अलग-अलग मंडली है, जिसमें कोई राहुल का झंडा ऊँचा करता दिखता है तो कोई प्रियंका का। इस परिस्थिति की वजह से युवा नेताओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। नेता यही नहीं निर्धारित कर पा रहे हैं कि वे किस के पीछे चलें, किसे कहें अपना नेता। कुछ युवा कांग्रेसी नेताओं का मानना है कि हम यही नहीं समझ पाते कि हमें किस की जय-जयकार करनी है।
हाल में राजस्थान में युवा कांग्रेस में काफ़ी युवा नेताओं को स्थान दिया गया। संगठन महासचिव जैसे पद का सृजन किया गया। इस से यह तो समझ आता है कि पार्टी भविष्य को लेकर बेहद गम्भीर है, लेकिन निश्चित केंद्रीय नेतृत्व के अभाव में कोई भी दल कितनी तरक़्क़ी कर सकता है यह विचारणीय मसला है।
हाल में ही सैम पित्रोदा की अध्यक्षता वाली इण्डियन ओवरसीज़ कांग्रेस ने भी कई नियुक्तियों की घोषणा की है। अब जब से यह घोषणा हुई है, तब से यह चर्चा भी तेज़ हो गई है कि अब कांग्रेस भारत से ज़्यादा विदेशों में राजनीतिक माहौल बनाने में लगी है।
कांग्रेस लगातार दो लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव हार चुकी है, बावजूद इस के कांग्रेस देश में फ़ोकस करने से ज़्यादा विदेशों में अपनी स्थिति मज़बूत करने में लगी है। चर्चा यह भी है कि मोदी की इंटर्नैशनल पॉलिटिकल कंडीशन को देखते हुए कांग्रेस ने यह फ़ैसले किए हैं। अब इसमें कितनी सच्चाई है, ये तो कांग्रेस के आलाकमान ही जाने, लेकिन लगातार चुनावी शिकस्त की वजह से पार्टी की जो फ़ज़ीहत हुई है, उस को लेकर पार्टी कितनी संवेदनशील है यह आने वाला समय ही बताएगा।
Mutthi Bhar Asman : मीनाक्षी सिंह की पहली किताब “बस तुम्हारे लिए” पिछली बार जब हाथ में आई थी तो उसे पढ़कर ही महसूस हुआ था कि कुछ समय बाद एकबार फिर से उनकी कोई नई किताब पढ़ने को जरूर मिलेगी।
यह सच भी हुआ, जब “मुट्ठी भर आसमान” ने एकबार फिर से आकर्षित किया।
सारा ब्रह्मांड हम आसमान की तरफ ही देखकर निहारते हैं, कोई भी नीचे की ओर नहीं देखता। लेखन कला से जुड़े लोगों की ख्वाहिश होती है कि वह आसमान में उड़े। मीनाक्षी ने सिर्फ एक मुठ्ठी आसमान को पकड़कर कुल 21 कहानियां रच दी हैं, यही क्या कम है।
इनकी कहानियों की बहुत सारी बातें उन आधुनिक समाज के रिश्तों से जुड़ी दिखाई देती हैं जो दिखने में तो पर्दे के भीतर हैं, किन्तु जब हम उनकी परतों को कुदेरते हैं तो अचानक से सामने एक आश्चर्य खड़ा हो जाता है।
बेजान रिश्तों के बीच की अधूरी ख्वाहिश
पहली कहानी “अधूरी ख्वाहिश” है जो बेजान से रिश्तों के बीच घूमती है। पति-पत्नी के रिश्तों का बेजान हो जाना कहाँ तक घातक हो सकता है, यह बात इस कहानी में सरलता से समझा दिया गया है।
यह कोई जरूरी नहीं कि एक व्यक्ति हमेशा किसी महान व्यक्तित्व से ही सीखता आया हो। कोई भी घटना आपकी आंखें खोल सकती हैं और कोई भी व्यक्ति, जो आपके आसपास है, चाहे वह आपके घर कामवाली ही क्यों न हो, वह भी एक बड़ी सीख देने की कूबत रखती है। कुछ ऐसा ही कहानी “मुट्ठी भर एहसान” में है।
पति-पत्नी के बीच झगड़े के कई कारण हो सकते हैं, किन्तु मीनाक्षी सिंह ने “मुट्ठी भर एहसान” में जिन कारणों को समझया है वह इस कहानी को पढ़कर ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
इस किताब ने कुल 21 कहानियां हैं और यदि कोई इसे गम्भीरता से पढ़ ले तो वह लेखिका को 21 तोपों की सलामी देना चाहेगा!!
एक कहानी है “मैं पुरूष हूँ” जिसमें लेखिका ने कुछ अलग ही नजरिये से एक पुरूष के मन के जकड़न को पकड़ा है। दुनिया में जिसे हम समाज कहते हैं वह कोई स्थिर रहने वाली चीज नहीं है। यह परिभाषा कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है, यहां पर आकर संदेह के घेरे में आ जाता है। इंसान अपनी मर्जी से जब अपने खुद के परिवार का सत्यनाश करने पर तुला हो तो उसे कौन रोक सकता है? यहां पुरूष नहीं, बल्कि एक महिला की मनःस्थिति को लेखिका ने मानों चिमटे से पकड़कर अपनी कलम के अंदर डाल लिया हो, इस कहानी को पढ़कर कुछ ऐसा ही प्रतीत होता है।
“आईने की तरह साफ जिंदगी” पढ़िए अथवा अपना “आखरी फर्ज” निभाइये, आपको तो हर कहानी में कुछ न कुछ ऐसी बातें जरूर मिल जाएंगी जिससे शायद आप परिचित न हों! हाँ, कुछ कहानियों के शीर्षक, ऐसे प्रतीत होते हैं मानों गुस्से में लिखी गयी हों। इनमें से “दोगले लोग” एक है। एक महिला का दूसरी महिला के साथ आपसी रिश्ते कभी -कभी इस कदर बिगड़ जाते हैं कि उसे अक्सर कथाओं में बयान नहीं किया जा सकता। किन्तु मीनाक्षी सिंह ने ऐसे रिश्तों को भी सामने लाया और शायद यही कारण रहा होगा कि कहानी का शीर्षक कुछ ऐसा बन गया हो।
कुल 111 पेज की यह कथा संग्रह हर्फ़ पब्लिकेशन , नई दिल्ली से प्रकाशित हुई है। किताब की कीमत मात्र 150 रुपये है तो जेब पर अधिक भार नहीं पड़ने वाला।
यहां पर हम यह कहना चाहेंगे कि एक अच्छी सी किताब को हाथ में रखने के लिए किसी भी पढ़ाकू इंसान को जेब खाली होने का भय कभी भी नहीं सताता । आखिरकार किताब इंसान के हाथों में रखा एक बाग की तरह ही तो है।
मीनाक्षी सिंह फ़ेसबुक पर हमारी मित्रों की सूची में बहुत ऊपर रही हैं। आजकी दुनिया में,खासकर हिंदी सहित्य की दुनिया में, मुँह फुला कर बैठने से बेहतर है कि लोग अपने मित्रों का खुले मन से समर्थन करें। कुछ भी रचने में समय और मेहनत लगती है। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट भी कोई मेहनत से ही लिखता/लिखती हैं, यहां तो एक कहानी संग्रह की बात है। तो, मेहनत बर्बाद न हो इन्हीं शुभकामनाओं के साथ मीनाक्षी सिंह को बहुत बधाई ।
सोशल मीडिया पर बिना पुष्टि के उपलब्ध भ्रामक तथ्य के ख़िलाफ़ राजनीति की पाठशाला नामक संस्था ने सुप्रीम कोर्ट में एक पीआईएल दाख़िल किया। गुरुवार को दाख़िल इस जनहित याचिका में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि किस तरह सोशल मीडिया पर ग़ैरज़िम्मेदाराना तथ्य प्रकाशित किए जा रहे हैं।
सोशल मीडिया पर भ्रामक लेख और इंफ़ोग्राफ़िक्स की भरमार है। जिन पर तत्काल प्रभाव से लगाम लगाने की आवश्यक्ता है। सर्च इंजन गूगल पर जाकर अगर आप विश्व में सबसे बड़े आपराधिक लोगों की सूची देखें तो आप को ऐसे नाम दिखेंगे कि आप भौचक्के रह जाएँगे। ऐसे तमाम तथ्य आप को परेशान कर सकते हैं। इस मामले पर संज्ञान लेते हुए राजनीति की पाठशाला के संस्थापक डॉक्टर अजय पाण्डेय ने गुरुवार को एक जनहित याचिका दाख़िल की, जिसमें उन्होंने ऐसे प्लैट्फ़ॉर्म्स को क़ानूनी दायरे में रखने की वकालत की। पाण्डेय ने कहा कि हमारे देश को महान विभूतियों के साथ खिलवाड़ सर्वथा अनुचित है और ऐसे लोगों पर कठोर कार्रवाई की भी आवश्यक्ता है, जो इन सब कृत्यों के पीछे हैं।
सोशल मीडिया पर नकेल न होने की वजह से कई बार साम्प्रदायिक दंगे भी हुए हैं, जिसने आम जनमानस की भारी क्षति हुई है। जिसके बाद पुलिस प्रशासन को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
प्रो.(डॉ.) हरेराम त्रिपाठी संस्कृत शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा नाम हैं। वे यहीं सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के छात्र रहे, अब वे इसी विवि के वाइस चांसलर बने हैं।
सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय का कुलपति बन चुके प्रो.(डॉ.) हरेराम त्रिपाठी संस्कृत शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा नाम हैं। दिलचस्प तथ्य ये हैं कि वे यहीं स्टूडेंट रहे, अब उन्हें यहां का वीसी बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। कुलपति बनने से पहले वे श्री लाल बहादुर राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली में सर्व दर्शन विभाग में वरिष्ठ आचार्य (प्रो.) की हैसियत से छात्रों को पढ़ाया करते थे। उनके कुलपति बनने से संस्कृत जगत में हर्ष का माहौल है। शांत स्वभाव के और पढ़ाई में शुरू से होनहार प्रो. त्रिपाठी ने गांव- चकिया, जनपद- कुशीनगर, उत्तर प्रदेश का नाम रोशन किया है।
संस्कृत शिक्षा के क्षेत्र में प्रो. त्रिपाठी के अनुपम योगदान को देखते हुए उत्तर प्रदेश की महामहिम राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनन्दीबेन पटेल ने बुधवार 9 जून को सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के 35 वें कुलपति के रूप में नियुक्त किया। कुलाधिपति के पत्र के मुताबिक, प्रो त्रिपाठी का कार्यकाल कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से तीन वर्ष की अवधि तक होगा। गौरतलब है कि संस्कृत विश्वविद्यालय के निवर्तमान कुलपति प्रो. राजाराम शुक्ल का तीन वर्षों का कार्यकाल 23 मई को पूरा हो गया।
आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के चकिया ग्राम में जन्मे प्रो. त्रिपाठी की प्रारंभिक शिक्षा गाँव के ही विद्यालय में हुई थी। उसके बाद सन् 1986 में वे आगे की पढ़ाई करने बनारस चले आए। रामाचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय से उत्तर मध्यमा (इंटरमीडिएट) की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद शास्त्री (स्नातक), आचार्य (स्नातकोत्तर) व पीएचडी तक की पढ़ाई संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से किया। यहां उन्होंने न्यायशास्त्र के प्रकांड विद्वान प्रो. वशिष्ठ त्रिपाठी के निर्देशन में पीएचडी की डिग्री हासिल किया। उन्होंने अध्ययन काल में आठ स्वर्ण पदक प्राप्त किया।
प्रोफ़ेसर त्रिपाठी ने शैक्षणिक करियर की शुरुआत वर्ष 1993 से राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान के जम्मू परिसर में सहायक आचार्य सर्वदर्शन विभाग से किया। वर्ष 2001 से श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में सह- आचार्य के रूप में अध्यापन का कार्य प्रारंभ किया। वर्ष 2009 में सर्वदर्शन विभाग में प्रोफेसर बने। प्रो. त्रिपाठी को वर्ष 2003 में महर्षि वादरायण राष्ट्रपति पुरस्कार, शंकर वेदांत, पाणिनी, उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान की ओर से विशिष्ट पुरस्कार सहित अन्य पुरस्कार व सम्मान मिल चुका है। उन्होंने अब तक 30 से अधिक ग्रंथों का संपादन व लेखन का कार्य भी किया हैं।
प्रो. त्रिपाठी विश्वविद्यालय में विभिन्न प्राशासनिक पदों जैसे छात्रावास अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष, संकायाध्यक्ष इत्यादि दायित्वों का भी कुशलतापूर्वक निर्वहन किया हैं। अध्यापन, शोध, प्राशासनिक जिम्मेदारियों के साथ उन्होंने संस्कृत शिक्षा एवं भारतीय दर्शन को बढ़ावा देने के लिए देश-विदेश का दौरा करते रहे। वे भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद (ICPR) के मानित सदस्य के रूप में 2016 से वर्तमान समय में भी कार्य कर रहें हैं।
प्रो. त्रिपाठी ICPR के गवर्निंग बाडी के सदस्य भी हैं। वे राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान के बोर्ड आफ मैनेजमेंट के सदस्य 2016 से 2019 तक रहे। इसके अतिरिक्त वे सोमनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय, गुजरात के एकेडमिक काउंसिल के सदस्य 2019 से हैं तथा महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय के प्लानिंग बोर्ड के भी सदस्य 2019 से हैं।
कोविड मैनजमेंट को लेकर केंद्र सरकार ने यूपी की योगी सरकार की सराहना भले की हो, लेकिन दिल्ली में संघ और भाजपा के बीच हुई हाई लेवल मीटिंग में कुछ और बातें सामने आ रही हैं। संघ और भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की बैठक के बाद अब उत्तर प्रदेश में भारी फेर-बदल की सम्भावना जताई जा रही है। ख़बर यह भी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के क़रीबी और पूर्व प्रशासनिक अधिकारी एवं वर्तमान एमएलसी ए. के. शर्मा को उप मुख्यमंत्री भी बनाया जा सकता है।
इस हाई लेवल बैठक के पीछे की एक वजह उत्तर प्रदेश के ही बड़े नेताओं को नाराज़गी बताई जा रही है। प्रदेश में कोरोना के हालात को लेकर लेकर केंद्रीय मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री और कई बड़े नेता प्रधानमंत्री कार्यालय को चिट्ठी लिख चुके हैं। पूर्वांचल और वाराणसी में ए.के.शर्मा के कोविड मैनजमेंट की तारीफ़ पीएम मोदी स्वयं कर चुके है। उन्हें इसका लाभ मिलता नज़र आ रहा है। फ़िलहाल संघ और भाजपा की बैठक के बाद सूत्र बताते हैं कि उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्रिमंडल में अब भारी बदलाव देखा जा सकता है।
आरएसएस के सरसंघ कार्यवाहक, भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व और उत्तर प्रदेश के संगठन महामंत्री के बीच हुई इस अहम् बैठक में आगामी 2022 के चुनाव की रणनीति पर भी चर्चा हुई। आगामी वर्ष में प्रदेश में होने वाले चुनाव की वजह से भी इस बैठक को बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रदेश में दो डिप्टी CM या तीन ?
इस बैठक के बाद भाजपा नेताओं के बीच यह भी चर्चा का विषय है कि प्रदेश में दो उप मुख्यमंत्री होंगे या तीन! अगर दो ही उप मुख्यमंत्री होंगे तो दिनेश शर्मा या केशव प्रसाद मौर्य में से किस का पत्ता कटेगा, यह भी सवाल ज्वलंत है। एके शर्मा को डिप्टी सी॰एम॰ बनाए जाने की ख़बर के बाद से ही प्रदेश के दोनों उप मुख्यमंत्रियों के खेमे के लोग तनाव में नज़र आने लगे हैं। जानकारी के मुताबिक़, पिछले दो दिन से उत्तर प्रदेश के संगठन मंत्री (भाजपा) दिल्ली में ही मौजूद हैं। ख़बर यह भी है कि उत्तर प्रदेश के मंत्रिमंडल विस्तार में पाँच नए चेहरे शामिल किए जाएँगे, जबकि क़रीब सात लोगों का पत्ता भी कट जाएगा।
सरकार की छवि सुधारने की कोशिश-
उत्तर प्रदेश के मंत्रिमंडल में फेर-बदल की एक वजह छवि सुधारने की कोशिश भी बताई जा रही है। गत दिनों कोरोना की वजह से प्रदेश में मची हाहाकर की वजह से सरकार की काफ़ी छीछालेदर हुई, जिसके चलते मंत्रियों का चेहरा बदलकर ऐसे व्यक्ति को आगे लाने की कोशिश की जा रही है, जो कोरोनाकाल में काफ़ी सक्रिय रहा और आम जनमानस का चहेता बना।
सूरजपुर के कलेक्टर रणवीर शर्मा को उनका तैश भारी पड़ गया। लॉकडाउन के दौरान कलेक्टर ने दवाई लेने जा रहे एक युवक का पहले तो फ़ोन पटक कर तोड़ दिया, उसके बाद उसकी पिटाई भी कर दी। सोशल मीडिया पर यह मामला बेहद गरम है, जिसके चलते प्रदेश के मुखिया भूपेश बघेल को हरकत में आना पड़ा। मुख्यमंत्री बघेल ने मामले को गम्भीरता से लेते हुए कलेक्टर को तत्काल प्रभाव से हटाने का निर्देश दिया है।
कलेक्टर प्रवीण शर्मा के इस शर्मनाक करतूत को लेकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि किसी भी अधिकारी का शासकीय जीवन में इस तरह का आचरण स्वीकार्य नहीं है। इस घटना से क्षुब्ध हूं। मैं नवयुवक व उनके परिजनों से खेद व्यक्त करता हूं।
सीएम भूपेश बघेल ने इस मामले में ट्वीट किया, “सोशल मीडिया के माध्यम से सूरजपुर कलेक्टर रणबीर शर्मा द्वारा एक नवयुवक से दुर्व्यवहार का मामला मेरे संज्ञान में आया है। यह बेहद दुखद और निंदनीय है। छत्तीसगढ़ में इस तरह का कोई कृत्य बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कलेक्टर रणबीर शर्मा को तत्काल प्रभाव से हटाने के निर्देश दिए हैं।”
दरअसल शनिवार को सूरजपुर में लॉकडाउन के दौरान एक युवक पर्चा लेकर दवाई लेने मेडिकल स्टोर जा रहा था। इसी बीच कलेक्टर रणवीर शर्मा लॉकडाउन का जायजा ले रहे थे। इस दौरान सड़कों पर लोगों की आवाजाही देख वह गुस्साए गए। उनकी नजर युवक पर पड़ी। उन्होंने अपने सुरक्षा गार्डों से उसे रोकने को कहा। जब वह युवक कलेक्टर के पास आया तो वह मोबाइल पर दवा वाला पर्चा दिखाने लगा।
कलेक्टर ने युवक को जड़ा थप्पड़-
इससे नाराज कलेक्टर रणबीर शर्मा ने उसे थप्पड़ जड़कर मोबाइल नीचे फेंक दिया। यही नहीं कलेक्टर ने अपने सिपाहियों से भी युवक को पिटवाया। लेकिन थोड़ी देर बाद ही कलेक्टर साहब का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा। रविवार को मुख्यमंत्री ने संज्ञान लेते हुए कलेक्टर को हटाने के निर्देश दे दिए।
कोरोना एक साथ कई आफ़त लेकर आया है। अभी तक कोरोना की वजह से ब्लैक फ़ंगस का मामला सामने आ ही रहा है, इसी बीच व्हाइट फ़ंगस का भी मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मध्य प्रदेश के जबलपुर ज़िले में 55 वर्षीय व्यक्ति में कोविड-19 से ठीक होने के बाद ‘व्हाइट फंगस’ संक्रमण का पता चला है।
कहा जा रहा है कि संभवत: इस बीमारी का प्रदेश में यह पहला मामला सामने आया है। प्रदेश के एक स्वास्थ्य अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी। जबलपुर स्थित नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज की ई एंड टी विभाग की प्रमुख डॉ कविता सचदेवा ने बताया कि सिर दर्द और आंखों का दर्द कम नहीं होने पर 17 मई को इस व्यक्ति का ऑपरेशन किया गया था। शुक्रवार को एक जांच में उसकी नाक में व्हाइट फंगस के संक्रमण का पता चला है।
इस मामले में मध्यप्रदेश के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने बताया कि प्रदेश में अब तक ब्लैक फंगस संक्रमण (म्यूकरमाइकोसिस) के 650 मरीजों की पुष्टि हो चुकी है। यह एक खतरनाक संक्रमण है जो कि कोविड-19 के मरीजों तथा इससे ठीक हो चुके लोगों में पाया जा रहा है।
ब्लैक फ़ंगस को गत दिनों केंद्र सरकार ने सभी प्रदेशों को महामारी घोषित करने का निर्देश दिया था। अभी कोरोना की जंग ख़त्म हुई नहीं कि ब्लैक फ़ंगस और अब व्हाइट फ़ंगस ने आतंक मचाना शुरू कर दिया है।
आलिया भट्ट कोरोना संक्रमित पाई गई हैं, जिसके चलते उनकी फ़िल्म गंगूबाई काठियावाड़ी की शूटिंग रोक दी गई है। आलिया ने संक्रमण की जानकारी इंस्टाग्राम के एक पोस्ट के ज़रिए दी। इसके पहले एक बार और शूटिंग रुकी थी, जब फ़िल्म के निर्देशक संजय लीला भंसाली कोरोना पॉज़िटिव पाए गए थे। इस बार शूटिंग सिने एम्प्लॉईज़ के फ़ेडरेशन के आदेश पर रोकी गई है।
फ़ेडरेशन ने आदेश दिया है कि कोई भी इस फ़िल्म की शूटिंग के लिए कुछ दिन न आए। ताकि ख़तरे को टाला जा सके। फ़ेडरेशन ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि यदि किसी भी कर्मचारी में इसके लक्षण नज़र आते हैं, तो वे तत्काल जाँच कराएँ और चिकित्सकों के निर्देश का पालन करें।
आलिया ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा, “हेलो, मैं कोरोना संक्रमित पाई गई हूँ। और मैंने ख़ुद को घर में क्वॉरंटीन कर लिया है। मैं चिकित्सकों के हिसाब से अपना ख़याल रख रही हूँ। आप सभी के प्यार और सहयोग के लिए शुक्रिया।”
दिल्ली में इज़राइल दूतावास के पास हुए धमाके से देश भर में सनसनी मच गई। दूतावास के पास हुए इस धमाके में कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन तेज़ धमाके की वजह से कई गाड़ियों के शीशे टूट गए, जिसकी वजह से इलाक़े में अफ़रातफ़री मच गई। हालाँकि इस धमाके की पड़ताल में दिल्ली पुलिस जुटी हुई है, अभी तक कोई ठोस वजह सामने नहीं आया है।
दिल्ली में इज़राइल दूतावास के पास हुए ब्लास्ट की ज़िम्मेदारी अभी किसी भी आतंकवादी संगठन ने नहीं लिया है। इस धमाके के बाद से सभी सुरक्षा एजेंसियाँ सतर्क हो गईं हैं और सुरक्षा व्यवस्था को और भी पुख़्ता कर दिया गया है। मिली जानकारी के अनुसार, बम ब्लास्ट की वजह से तीन गाड़ियों को क्षति पहुँची है।
यह ब्लास्ट दिल्ली में उस वक्त हुआ है जब यहां बीटिंग रिट्रीट का अयोजन हो रहा था। धमाका जहाँ हुआ, वह जगह बीटिंग रिट्रीट से मात्र डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर था। फिलहाल पूरे इलाक़े को सील कर जाचं एजेंसी इसकी छानबीन कर रही है। इस एरिया के सीसीटीवी फुटेज की तलाशी लेकर एरिया में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
धमाके की वजह से किसी के हताहत होने की कोई सूचना नहीं मिली है। इज़राइल का दूतावास तुग़लक रोड थाने से कुछ ही दूरी पर है। दिल्ली पुलिस के मुताबिक़, इसी तरह कुछ वर्ष पूर्व भी इज़राइल दूतावास के पास ऐसा गाड़ी से बम फेंककर हमला किया गया था।
नशीले पदार्थ और गांजा के साथ शराब की अवैध बिक्री करनेवाली एक महिला को पिंपरी चिंचवड़ पुलिस के सामाजिक सुरक्षा विभाग की टीम ने गिरफ्तार किया है. उसके घर पर की गई छापेमारी में पांच लाख 33 हजार रुपए का गांजा और शराब बरामद किया गया है. अंबिका मारुति गरड़ (55, निवासी घुंडरे आली, आलंदी, खेड़, पुणे) नामक महिला को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ आलंदी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है.
पुलिस आयुक्त कृष्ण प्रकाश ने एक संवाददाता सम्मेलन में इसकी जानकारी देते हुए बताया कि, सामाजिक सुरक्षा विभाग की टीम आलंदी परिसर में गश्त कर रही थी तब मुखबिर से आलंदी की घुंडरे आली में एक महिला के घर से अवैध रूप से गांजा व शराब की बिक्री शुरू रहने की जानकारी मिली थी. इसके अनुसार पुलिस की दो टीमें गठित की गई. भेष बदलकर पुलिस टीमों ने पहले महिला के घर पर गांजा व शराब रहने की तसल्ली की फिर महिला को हिरासत में लिया.
इसके बाद पुलिस टीमों ने उसके घर पर छापा मारा. तब घर से 4 लाख 3 हजार रुपये का 25 किलो 440 ग्राम गांजा, 1 लाख 12 हजार 900 रुपये नकद, 12 हजार 742 रुपए की शराब, 3500 रुपये का मोबाइल फोन बरामद किया गया. महिला के खिलाफ आलंदी पुलिस थाने में विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है. सामाजिक सुरक्षा विभाग के पुलिस निरीक्षक विट्ठल कुबड़े, सहायक निरीक्षक नीलेश वाघमारे, डॉ अशोक डोंगरे, पुलिस कर्मचारी संदीप गवारी, दीपक सावले, अनिल महाजन, वैष्णवी गावड़े, संगीता जाधव, योगेश तिड़के की टीम ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया.