27.6 C
Mumbai
Friday, July 31, 2026
Home Blog Page 45

अगर आपको पसंद हैं हीरे के गहने, तो ये ख़बर आप के लिए है

Dhanji Jewels

विशाखा मिश्रा । नवप्रवाह डॉट कॉम

आम जनमानस के लिए डायमंड इंडस्ट्री से एक अच्छी खबर है। लगातार सोने के बढ़ रहे भाव के बीच एक राहत देने वाली खबर ये है कि अब हीरा आपकी पहुंच से दूर नहीं है। ज्वेलरी इंडस्ट्री में धनजी ज्वेल्स की चर्चा ज़ोरों पर है। कंपनी ने हाल ही में अपना एक ई-कॉमर्स वेबसाइट लांच किया है, जिसके प्रोडक्ट्स बेहद किफ़ायती हैं, जिसे आम आदमी अफ़्फोर्ड कर सकता है। महज़ चार से पांच हज़ार रुपये में ही इसके प्रोडक्ट्स की रेंज शुरू होती है।

हीरे के व्यवसाय में लगभग एक दशक से एक्टिव महासुख चाँदपारा के मन में हमेशा से ये बात थी कि देश के हर वर्ग के व्यक्ति के पास सोने की तरह हीरे का भी गहना हो। सोचा तो उन्होंने काफी समय से था ये, लेकिन यह फलीभूत हुआ कुछ महीने पहले जब उन्होंने निर्णय किया कि वे धनजी को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर लेकर आएंगे। हाल ही में धनजी ने अपना ई-कॉमर्स वेबसाइट लांच किया, जिसके ज़रिये पूरी दुनिया भर से लोग आसानी से ज्वेलरी की खरीददारी कर सकेंगे।

नवप्रवाह के संवाददाता ने जब कंपनी के निदेशक महासुख से पूछा कि धनजी बाकी हीरे कंपनियों से कैसे अलग है तो उन्होंने बताया कि हमारे लिए यह सिर्फ व्यवसाय नहीं है, इमोशन भी है। हमारे लिए मुनाफे से ज़्यादा मायने रखता है, हमारे ग्राहकों के चेहरे की मुस्कान। अगर आपको कोई चीज़ बहुत पसंद है, लेकिन आप के पास उसे खरीदने के लिए पर्याप्त धन नहीं है, तो आप को निश्चित दुःख होगा। अब ऐसे में आप के पास एक ऐसा विकल्प हो, जिससे आप अपनी ख्वाहिश पूरी कर सकें तो आप ज़रूर खुश होंगे। हम ई-कॉमर्स ( www.dhanjijewels.com ) के ज़रिये उन सब के पास पहुंचना चाहते हैं, जो हीरा पहनना चाहते हैं। हमने प्रोडक्ट्स का रेंज बेहद कम रखा है ताकि हर कोई इसे अपना बना सके।

महासुख ने बताया कि हमारा टारगेट है कि हम देश के हर कोने तक पहुंचे, सिर्फ बड़े शहर ही नहीं। उन्होंने कहा कि लगभग सभी बड़े शहरों में डायमंड को लेकर जागरूकता है, लेकिन टू-थ्री टियर सिटीज़ में अभी भी लोगों के मन में यह भ्रम रहता है कि हीरा है तो बहुत ज़्यादा महंगा होगा। जब कि ऐसा है नहीं, हीरे महंगे भी होते हैं और कम पैसे में भी आते हैं। सब क्वालिटी, कलर और क्लैरिटी का खेल है। उन्होंने कहा कि मीडिया के माध्यम से ही लोग जागरूक होंगे, इसलिए मीडिया को भी इस इंडस्ट्री की खबरों पर फोकस करना चाहिए।

योगी 2.0: यूपी का नया ब्राह्मण चेहरा होगा उपयोगी ?

नितीश कुमार मिश्र | नवप्रवाह डॉट कॉम 

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार 2.0 की शुरुआत हो चुकी है और इसके साथ ही शुरुआत हो चुकी है विस्तारीकरण की। पिछली सरकार में दो उपमुख्यमंत्री थे, केशव प्रसाद मौर्य एवं दिनेश शर्मा। इस बार केशव प्रसाद मौर्य के चुनाव हारने के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि केशव प्रसाद को पुनः उपमुख्यमंत्री का दायित्व नहीं मिलेगा, लेकिन उनका स्थान यथावत रखा गया है एवं दिनेश शर्मा कोपद से हटा कर एक नया नाम शामिल किया गया है, वह हैं ब्रजेश पाठक।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि दिनेश शर्मा ब्राह्मण वोटरों को रिझाने में उतने सफल नहीं हो पाए जितनी की उम्मीद उनसे की गई थी।

कौन हैं ब्रजेश पाठक ?

ब्रजेश पाठक का जन्म 25 जून 1964 को हरदोई जिले के मल्लावां कस्बे में हुआ था। ब्रजेश पाठक पेशे से वकील हैं। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से विधि स्नातक की शिक्षा ग्रहण की है। छात्र राजनीति से ही इन्होंने अपने राजनीतिक सफ़र की शुरुआत की थी। वर्ष 1989 में लखनऊ विश्वविद्यालय छात्र संघ के उपाध्यक्ष बने और 1990 में लखनऊ विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष भी बने। इसके बाद वे कांग्रेस में शामिल हुए और मुख्य धारा की राजनीति में कदम रखा। साल 2002 के विधानसभा चुनाव में मल्लावां विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव भी लड़े, लेकिन करीबी मुकाबले में मात्र 130 वोटों से चुनाव हार गए।

इसके बाद ब्रजेश पाठक साल 2004 में बसपा में शामिल हो गए और 2004 में उन्नाव लोकसभा सीट से बीएसपी के टिकट पर चुनाव जीत कर सांसद बने। फिर 2009 में बसपा ने उन्हें राज्यसभा भेजा, जहां वे सदन में बसपा के मुख्य सचेतक भी रहे। लेकिन साल 2014 में प्रचंड मोदी लहर में जब उन्होंने दूसरी बार लोकसभा का चुनाव उन्नाव की सीट से लड़ा, तो इन्हें हार का सामना करना पड़ा। 

साल 2016 में उन्होंने एक बार फिर अपना पाला बदला एवं 22 अगस्त 2016 को इन्होंने तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा की मौजूदगी में बसपा का साथ छोड़ बीजेपी का हाथ थाम लिया। 

2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इन्हें लखनऊ सेंट्रल से अपना उम्मीदवार बनाया और पार्टी की उम्मीदों पर खरे उतरते हुए इन्होंने इस सीट पर विजय हासिल की एवं जीत के पुरस्कार स्वरुप पार्टी ने इन्हें प्रदेश सरकार में कानून मंत्री का पद सौंपा।

ब्रजेश पाठक को इस बार भी लखनऊ कैंट विधानसभा से प्रत्याशी बनाया गया। पार्टी के विश्वास को कायम रखते हुए इन्होंने जीत दोहराई। पाठक ने समाजवादी पार्टी के सुरेंद्र सिहं गांधी उर्फ राजू गांधी को 39,512 वोटों से हराया है। लखनऊ कैंट विधानसभा ब्राह्मण बाहुल्य सीट है। पाठक पेशे से वकील हैं और बीते कुछ वक्त में उत्तर प्रदेश में बीजेपी के बड़ा चेहरे बनकर उभरे हैं।

मतदान में औसत गिरावट के कारण, जानिए, कैसे होगा इसमें सुधार

विशाल सिंह | navpravah.com

संसार के सभी देशों में सरकार चुनने का अपना अपना प्रावधान है। इनमें सबसे उत्तम तरीका लोकतांत्रिक तरीके से प्रत्यक्ष रूप से जनता के द्वारा सरकार का चुना जाना है, जो कि हमारे भारत देश में अपनाया गया है।

भारत में चुनाव को महापर्व जैसा माना जाता है और प्रतिनिधियों के साथ-साथ जनता में भी काफी उत्साह होता है। इस महापर्व मे हिस्सा लेने वाला और यहाँ तक कि हिस्सा लेने की इच्छा मात्र रखने वाला भी, एक अच्छी और मजबूत सरकार बनाने के लिए उत्साहित रहता है।

जनता में इतना उत्साह होने के बावजूद भी अगर हम वोटिंग का औसत देखें तो वह बहुत ही निराशाजनक दिखाई देता है। हाल ही में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मतदान की स्थिति को देखे तो बड़ी आसानी से हमें पता चलेगा कि वोटिंग प्रतिशत् मात्र 50 से 60% ही रह रहा है। कहीं-कहीं तो 40% तक ही रहा वो भी उन बूथों पर जहाँ से हमारे बड़े बड़े माननीय लोग खुद ही प्रतिनिधि हैं। आखिर इतना उत्साह होने के बावजूद इस तरह की गिरावट क्यों है।

यह सोचने वाली बात है कि जिस देश मे प्रधानमंत्री, प्रदेशों के मुख्यमंत्री और नायक-नायिका, खिलाड़ी सभी लोग मतदाता को जागरूक करने के लिए प्रयासरत हैं। सबको उनके मताधिकार के बारे मे बता रहे, मतदान को सर्वोच्च कार्य की श्रेणी में रखने की सलाह दे रहे, वहां पर इतना कम वोटिंग आखिर क्यों ?

प्रश्न यही उठता है कि इसका मुख्य कारण क्या है और इसे सुधारा कैसे जा सकता है?

अक्सर इसका एक साधारण सा कारण सुनने को मिलता है कि लोग वोट के नाम पर छुट्टी का दिन समझते हैं, इस दिन या तो घर पर आराम करते हैं या फिर बाहर घूमने फिरने निकल जाते हैं पर जिस काम के लिए छुट्टी मिलती है, अर्थात वोटिंग के लिए वही नहीं करते हैं।

कुछ देर के लिए मान भी लिया जाए इस बात को, तो क्या इस तरह के लोग 50 या 60% हैं जो छुट्टी लेकर आराम करते हैं या घूमने चले जाते हैं। मुझे लगता है यह एक कारण हो सकता है कम वोटिंग का, लेकिन यही एकमात्र कारण है यह सच नहीं है।

आज यह समय की जरूरत है कि चुनाव आयोग, सभी माननीय और मतदाता भी इस पर विचार करें कि क्या सच में यही मात्र एक कारण है वोटिंग प्रतिशत् कम होने का ? इसके साथ साथ ही भविष्य मे वोटिंग प्रतिशत् को बढ़ाने का हर संभव प्रयास करें।

एक मुख्य कारण और है जो हमें समझ में आता है, आज के परिवेश में इस अर्थ प्रधान समय में, हर व्यक्ति रोजगार और युवा शिक्षा के लिए घर से दूर अन्यत्र किसी शहर या प्रदेश में जाकर रह रहे हैं। हर व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी निभाने मे संघर्षरत है। इस महगाई के दौर मे बच्चों की पढाई माँ पिता की ज़रूरतों को पूरा करना ही मुश्किल हो गया है।

आज के समय में हर परिवार से 40 से 50% लोग घर से दूर रह रहे, कुछ रोजगार के लिए तो कुछ शिक्षा के लिए या फिर कोई बीमार है तो कोई उसकी देखभाल मे लगा है और हर कोई सरकारी कर्मचारी नहीं है, जिसे वोट देने के लिए ड्यूटी लीव मिल रही है और अगर कोई सरकारी कर्मचारी भी है तो उसे मात्र एक दिन की लीव मिल रही है, जिसमें गृह जनपद जाना-आना और वोट देना सब संभव नहीं है।

गैर सरकारी कर्मचारी और विधार्थी को तो यह सुविधा भी नहीं मिल रही। ऊपर से पूरे परिवार को लेकर यात्रा करने का खर्च इस महगाई में अलग से। अतः यही वो 40% से 50% लोग हैं, जो चाहते हुए भी मतदान नहीं कर पाते हैं।

सरकार और चुनाव आयोग तथा मतदाता सभी को जागरूक होकर इस विषय मे सोचने की जरूरत है। आज का अत्याधुनिक भारत जो कि हर क्षेत्र ऑनलाइन सुविधा युक्त हो गया है, उसे वोटिंग के लिए भी कुछ इस तरह का प्रबंध करना चाहिए कि जो जहाँ है वही से वोट कर सके, बस इस प्रक्रिया में यह सुनिश्चित् होना चाहिए कि चुनाव की शुचिता पर कोई असर ना पड़े।

ये लेख आपको कैसा लगा हमें फेसबुक पेज पर जरुर बताएं

गुजरात विधानसभा में हंगामा, कांग्रेसी विधायक सस्पेंड, गृहमंत्री को कहे आपत्तिजनक शब्द

पीयूष उपाध्याय | नवप्रवाह न्यूज़ नेट्वर्क 

गुजरात विधानसभा में आज प्रश्न काल के दौरान कांग्रेस ने इतना हंगामा किया कि विधानसभा अध्यक्ष ने कांग्रेस के उना के विधायक पूंजन वंश को 7 दिनों के लिए सस्पेन्ड कर दिया गया। दरअसल कांग्रेस विधायक नौशाद सोलंकी ने एक सवाल पूछा, सरकार से जवाब न मिलने की वजह से वो हाउस के अंदर जमीन पर बैठ गए। ऐसे में कांग्रेस के सभी विधायक खड़े हो कर हल्ला मचाने लगे, जिसके सामने भाजपा के विधायकों ने भी हल्ला शुरू कर दिया।

कांग्रेस के विधायक पूंजन वंश ने गृहमंत्री हर्ष संधवी के सामने इशारा करते हुए टपोरी जैसे आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। इसको लेकर विधानसभा में और ज्यादा हंगामा शुरू हो गया और विधानसभा कुछ वक्त के लिए स्थगित हो गई। हालांकि, राजस्व मंत्री राजेन्द्र त्रिवेदी ने इन आपत्तिजनक शब्दों को वापस लेने के लिए कहा। इसपर पूंजा वंश ने कहा कि गृहमंत्री का बर्ताव उनके पद को शोभा नहीं देता है। विधानसभा अध्यक्ष को मामले में दखअंदाजी करनी पड़ी, तब जाकर मामला शांत हुआ।

बीजेपी की ओर से गृहमंत्री हर्ष संधवी के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तमाल करने वाले कांग्रेस के पूंजन वंश को 7 दिन के लिए हाउस से सस्पेन्ड करने का प्रस्ताव रखा गया। ये प्रस्ताव खुद बीजेपी के पंकज देसाई ने रखा। हाउस ने कांग्रेस विधायक को सात दिन के लिए निलम्बित कर दिया।

यूपी विधानसभा चुनाव 2022: क्या है भाजपा का जातीय समीकरण, कौन ख़ुश कौन ख़फा

up assembly elections 2022

यूपी विधानसभा चुनाव 2022 : भाजपा ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पहले चरण के चुनाव प्रचार हेतु अपने प्रचारकों की लिस्ट जारी की हैं जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत 30 लोगों को शामिल किया गया हैं.

यूपी विधानसभा चुनाव 2022 : गौर करने वाली बात यह हैं कि इस लिस्ट में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री एवं लखीमपुर खीरी से सांसद अजय कुमार मिश्रा टेनी, पीलीभीत लोकसभा सीट से सांसद वरुण गांधी एवं सुल्तानपुर क्षेत्र से सांसद उनकी माता मेनका गांधी कों स्टार प्रचारकों के लिस्ट से दूर रखा गया हैं.

बीते दिनों वरुण गांधी ने राज्य की योगी सरकार एवं केन्द्र की मोदी सरकार पर कई सवाल खड़े किए थे इसलिए एक वजह यह भी देखा जा रहा हैं इस लिस्ट में उनकी एवं उनकी मां का नाम नहीं शामिल करने के पीछे.

वहीं दूसरी ओर अगर हम बात करें अजय कुमार मिश्रा टेनी की तों पार्टी किसान आंदोलन से जुड़े मुद्दों पर किसी भी तरह का रिस्क लेने के विचार में नहीं दिख रही हैं आंदोलन भले ही खत्म हों चुकी हैं किसान अपने घरों कों भी लौट चुके हैं और सरकार ने चुनाव से ठीक पहले तीनों विवादित कृषि बिल वापस लेकर अपनें चुनावी दांव चल दिए हैं.

लेकिन किसान नेताओं की एक बड़ी मांग अभी भी लंबित हैं उनकी मांग है कि लखीमपुर खीरी में किसानों पर गाड़ी चढ़ाए जाने के मामले पर सख्त ऐक्शन लेते हुए केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी को उनके पद से हटाया जाए। इस कांड में मुख्य आरोपी के तौर पर टेनी के बेटे आशीष मिश्र का नाम आया था अब अगर भाजपा किसानों को खुश करने कें चक्कर में टेनी से उनके इस्तीफे की पेशकश करतीं हैं तों एक बङा “ब्राह्मण वोट बैंक” से उन्हें हाथ धोना पर सकता है हालांकि पार्टी इस समय ऐसे किसी सोच में नहीं दिख रही हैं.

बीते दिनों जब विकास दुबे एनकाउंटर हुआ तों योगी सरकार पर ‘ब्राह्मणों का शोषण’ करने के आरोप लगने लगे थे।उस वक्त उस रोष कों शांत करने हेतु केंद्रीय कैबिनेट के विस्तार में टेनी कों राज्य मंत्री का ओहदा दिया गया था उस समय इसे साफ तौर पर ब्राह्मणों की नाराजगी कम करने के एक प्रयास के तौर पर देखा गया था.

हालांकि विपक्ष एकता ने उस समय यह आरोप लगाया था राज्य सरकार ने राज्य में “ब्राह्मण तुष्टीकरण’ करना शुरू कर दिया हैं और एक बड़े वोटबैंक को हाथ से फिसलता देख बीजेपी ने भी अपना यह दांव चला हैं. फिर  जोङ तोङकी राजनीति भी शुरू हुई एवं डेमेज कंट्रोल कें तहत पार्टी ने एक ओर जहां अजय मिश्र टेनी को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया तों वहीं दुसरी ओर इलाके के दूसरे बड़े ब्राह्मण नेता जितिन प्रसाद को कांग्रेस से बीजेपी में लाकर योगी सरकार में मंत्री बना दिया. सब सेट हों गया वोट बैंक विधिवत अपने जगह पर स्थापित रहें सरकार काफी हद तक अपने ऊपर लगे “ब्राह्मण विरोधी” के दाग़ को धोने में सफल भी रहीं.

लेकिन किसान आंदोलन के समय दिये पहले अजय मिश्र टेनी के भड़काऊ बयान फिर लखीमपुर-खीरी कांड ने सरकार कों फिर से परेशान कर कें रख दिया हैं.

ये लेख आपको कैसा लगा हमें फेसबुक पेज पर जरुर बताएं

कोरोना, उत्तर प्रदेश और चुनाव, किसका चलेगा जोर?

Uttar Pradesh Legislative Assembly election

Uttar Pradesh Assembly Elections : बीते दिनों किसी मित्र ने सोशल मीडिया के माध्यम से एक पोस्ट शेयर किया था जिसमें लिखा था कि मुबारक हों कोरोना चंद दिनों में ही स्नातक हों जायेंगा और उम्मीद हैं कि अपनी डिग्री प्राप्त करके शायद अपने स्थान वापस लौट जायें.

इसके प्रतिउत्तर में किसी ने लिखा अच्छी बात है कि डिग्री लेकर वापिस लौट जायें क्योंकि अगर और पढ़ने की इच्छा जागृत हो गयी और सिविल सर्विसेज की तैयारियों में जुट गया तों बात कुछ और होंगी.. हालांकि यह कथन हास्यास्पद था पर संदेश और पीङा साफ साफ झलक रही थी यहां.

संपूर्ण विश्व इस वैश्विक महामारी कें चपेट में अपने आप कों असहाय महसूस कर रहा है आर्थिक, शारीरिक एवं मानसिक पीङा के इस दौर में जहां जनता अपने बहिखाता कों सुदृढ़ करने में प्रयास में जुटी हुई हैं वहीं जनता के सेवक इसें चुनावी मुद्दा समझ अपने अस्तित्व कों बचाने में लगे हुए हैं नेता नगरी में चुनावी बिगुल बज चुका हैं गद्दी की लालसा प्रबुद्ध हों चुकी हैं शह मात के इस खेल में पक्ष विपक्ष एकजुट हो कर अपनी भूमिका मजबूत करने में जुटे हैं वहीं जनता प्यादें की अहम भूमिका निभाने में मजबूर हों चुकी हैं और चुनाव आयोग कुशल रेफरी की तरह कोरोना मुक्त चुनाव कराने में कटिबद्ध हैं.

बीते 8 जनवरी को भारतीय चुनाव आयोग ने प्रेस कांफ्रेंस के माध्यम से बयान जारी कर कहा कि हम आगामी 10 फरवरी से 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव कराने जा रहें हैं जिसकी मतगणना 10 मार्च को होगी. राज्यों के नाम हैं पंजाब, उत्तराखंड, गोवा, मणिपुर और उत्तर प्रदेश जनता की उम्मीदों के अनुरूप फैसला निश्चित था यह आंकलन कोरोना काल में हुए चुनावों के आधार पर था.. चुनावी रणभेरी बिगुल बजने के बाद राजनीतिक एकत्रीकरण मजबूत हुई एवं जनता के प्रति समर्पित वियोग कोरोना की करुणा सत्ता सुख की लालसा में लुप्त सी हों गई.

चुनावी घोषणा एक राज्य की वजह से चर्चा का केंद्र बना हुआ हैं और वहां भी चुनाव होने निर्धारित हैं उसका कारण यह है कि जिस पार्टी ने भी यहां अपना किला फतह किया उसके लिए दिल्ली की दुरी आधी से भी कम हों जायेंगी जी हां हम बात कर रहे हैं उत्तर प्रदेश की जिसने सदैव ही भारतीय राजनीति में अपनी निर्णायक भूमिका निभाई हैं.

अगर बात करें उत्तर प्रदेश के विधानसभा सीटों की तों यहां कुल सीटों की संख्या 403 हैं और यहां 7 चरणों में वोटिंग होनी निर्धारित हैं । जिसकी शुरुआत 10 फरवरी से होगी और चुनाव के नतीजे 10 मार्च को आनें हैं ।

छोटे बङें सभी राजनीतिक दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंकनें आरंभ कर दियें हैं आरोप प्रत्यारोप का दौर निरंतर चालू हैं राजनेता अपने बयानबाजी से एक-दूसरे पर निशाना साधने में जुट गयें हैं सभी दलों ने अपने चुनावी वादों का पोस्टर बांटना भी आरंभ कर दिया है.

अगर बात वर्तमान सत्तारूढ़ पार्टी की करें तों वहां अभी भारतीय जनता पार्टी की सरकार हैं और मुखिया हैं योगी आदित्यनाथ अगर भाजपा की बात करें तों वह इसे 2024 के आम चुनाव के तौर पर देख रहीं हैं उनके मुताबिक यह आगामी लोकसभा चुनाव कें सेमीफाइनल के तौर पर देख रहें हैं शायद इसलिए इनके प्रवक्ता यह कहने से भी पीछे नहीं हट रहें हैं कि साल 2022 में ‘योगी को जिताना’ है, क्योंकि 2024 में फिर से ‘मोदी को लाना’ है हालांकि यह वाक्य अपनी सिद्धता कों सफल करने में कितनी पकड़ रखतीं हैं इसकी सच्चाई तों मतगणना के पश्चात पता चल जायेगी.

हालांकि अगर बात हम पिछले चुनावों की करें तों बीजेपी नेतृत्‍व वालें गठबंधन नें 325 सीटें हासिल कर सरकार बनाई थी हालांकि उस चुनाव में भाजपा ने अपनें मुख्यमंत्री पद का दावेदार की घोषणा पहले नहीं थी बाकी एक तथ्य यह भी हैं कि विगत चुनाव के दौरान केशव प्रसाद मौर्य भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष थे, तो उनसे जुड़े समुदायों को लगा कि वही मुख्यमंत्री बनेंगे, शायद यह भी भाजपा के लिए एक सुनहरा तर्क था लेकिन चुनाव के बाद सिंहासन योगी आदित्यनाथ कों सौंप दिया गया उनके नाम पर मुहर लगने से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समेत सभी हिंदूवादी संगठन उत्साहित थे.

राजनीतिक जानकारों के अनुसार उस वक्त संघ ने हिन्दुत्व के एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए तब योगी का चयन किया था। योगी ने इस कार्य कों सफल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। योगी के कार्यकाल में भव्य राम मंदिर निर्माण शुरू हो गया। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का काम भी पूरा कर लिया गया। कई विख्यात बाहुबलियों कों कारागृहों में जगह दिलवाई , इनकाउंटर हुए अलग अलग तरीकों से अपराध पर अंकुश लगाने का भरपूर प्रयास किया गया.. वहीं महंगाई,कोरोना महामारी, बेरोजगारी एवं सबसे बड़ा मुद्दा किसान आंदोलन मतगणना में अहम भूमिका निभा सकते हैं.

साथ ही जात पात अंदरुनी मनमुटाव भी अपनी मौजूदगी अवश्य दर्ज करा सकतीं हैं दल बदल अगरा पिछङा की राजनीति भी धीमी गति से अपनी रफ़्तार बनायें हुए हैं हाल में भाजपा छोड़कर गए स्वामी प्रसाद मौर्य और उनके साथ जाने वाले विधायक अति पिछड़े समुदाय से आते हैं पूर्व में ये सभी विधायक बहुजन समाज पार्टी का साथ दें चुके हैं गणना के अनुसार उत्तर प्रदेश में मौर्य, शाक्य और सैनी के साथ कुछ और अति पिछड़ी जातियों के आठ फीसदी से ज्यादा वोट माने जाते हैं। साल 2017 के चुनाव में पिछड़े वोटों को एकजुटता ने हीं भाजपा की जीत की भागीदारी निभाई थी। कहा जा रहा है कि मौर्य के भाजपा छोड़ने का असर प्रदेश की करीब सौ सीटों पर पड़ सकता है।वहीं दस फीसदी ब्राह्मणों की नाराज़गी भी भाजपा के लिए चिंतन का सबब है ।

2017 के चुनाव में भाजपा के 312 विधायकों में से 54 ऐसे नेता थे, जिन्होंने चुनाव के वक्त भाजपा का दामन थामा था और कुल मिलाकर पार्टी ने ऐसे 67 लोगों को टिकट दिया था। वहीं चर्चा कें बाजार में एक बयार यह भी हैं कि भाजपा करीब 50 मौजूदा विधायकों के टिकट काट सकती है। हालांकि चुनाव से पहले भागदौड़ का किस्सा बिल्कुल भी नया नहीं है दल बदल पक्ष विपक्ष सारी आम बातें हैं।

अगर बात अब ओपिनियन पोल की करें तों सत्ता के इस संघर्ष में बीजेपी समर्थित पार्टी अपनी दावेदारी मजबूत करती दिखाई दे रही हैं आंकङों के अनुसार आशंका हैं कि 2022 में भाजपा 235 से 250 सीटों पर काबिज हों सकतीं हैं 2017 में यह आंकड़ा 325 था हालांकि सीटों का नुक़सान भाजपा कों भी होता दिख रहा हैं लेकिन चिंता की सुई कांग्रेस और बसपा के लिए भी बराबर अपनी खनक बना रहीं. खैर किसका चलेगा जोर जनता किसके ओर इस चीज कों देखनें के लिए मतगणना की प्रतीक्षा भी जरूरी हैं.

ये लेख आपको कैसा लगा हमें फेसबुक पेज पर जरुर बताएं

भाजपा विधायक रविंद्र नाथ त्रिपाठी के पार्टी छोड़ने की ख़बर फ़र्ज़ी

अमित द्विवेदी | नवप्रवाह डॉट कॉम 
उत्तर प्रदेश में चुनावी सरगर्मियाँ ज़ोरों पर है। सत्ता सुख के लिए दल-बदलू नेताओं की नेतागीरी शुरू हो गई है। स्वामी प्रसाद मौर्य और दारा सिंह के भाजपा छोड़ने के बाद तमाम नेताओं का नाम सामने आने लगा है। इसी बीच भदोही से भाजपा विधायक रविंद्र नाथ त्रिपाठी के पार्टी छोड़ने की फ़र्ज़ी ख़बर ने हड़कम्प मचा दिया।
भाजपा विधायक रविंद्र नाथ त्रिपाठी ने एक विडियो जारी कर कहा कि उनके ख़िलाफ़ साज़िश की जा रही है। उन्होंने कहा कि उनका तन-मन और जीवन भाजपा को समर्पित है। उन्होंने इसे अफ़वाह क़रार करते हुए स्पष्ट किया कि उनके लेटर हेड को स्कैन कर के उसमें इस्तीफ़ा लिखा गया और फ़र्ज़ी हस्ताक्षर किया गया। उन्होंने कहा कि मैंने इसके ख़िलाफ़ एफ़आईआर करा दिया है और उत्तर प्रदेश पुलिस से माँग किया है कि दोषी के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई किया जाए।
रविंद्र नाथ त्रिपाठी ने कहा कि मेरी स्वामी प्रसाद मौर्य से ७-८ महीने से बात नहीं हुई। ऐसे में उनके कहने पर पार्टी छोड़ने का सवाल ही पैदा नहीं होता। उन्होंने यह भी कहा है कि वे इस मामले की तहक़ीक़ात करवाएँगे और जो भी दोषी होगा उसे कठोर दंड दिलाएँगे।
रविंद्र में पत्रकार रोहिणी सिंह के ट्वीट का स्क्रीन्शॉट शेयर करते हुए अपने ट्विटर हैंडल से लिखा कि उनके फ़र्ज़ी इस्तीफ़े की भ्रामक ख़बर फैलाने के लिए इन्हें दंडित किया जाना चाहिए। उन्होंने लिखा कि रोहिणी ने मेरा दुष्प्रचार किया है, जिसके लिए पुलिस को उन पर कठोर कार्रवाई करना चाहिए।
ग़ौरतलब है कि राजनेताओं के दल बदलने की ख़बर को लेकर लोग ट्विटर पर ख़ूब मज़े ले रहे हैं। ऐसे में लोग फ़र्ज़ी और मनगढ़ंत ख़बरें भी ख़ूब बना रहे हैं। वाहवाही लूटने के चक्कर में बिना जाँच पड़ताल किए लोग ब्रेकिंग न्यूज़ साझा कर रहे हैं। फ़िलहाल रविंद्र नाथ ने ये साफ़ कर दिया है कि वे अभी भी भाजपा के साथ बने हुए हैं।

नीति आयोग की सूची में पिछड़ गया बिहार राज्य, क्या है समस्या और समाधान!

bihar election article by kapil sharma

नीति आयोग की सूची में बिहार का नाम नीचे आया है।

ये खेदजनक है, मेरी अपनी समझ, अनुभव और जानकारी से मानना है कि बिहार में अन्तराष्ट्रीय धार्मिक पर्यटन और नॉलेज इकॉनमी बनने की संभावना जितनी है, उतनी संभावना शायद ही अन्य राज्यों में हो। बिहार के आगे बढ़ने के लिए कुछ बातें जो बेहद जरुरी है।

बिहार में 38 जिले है लेकिन सारा प्रमुख कार्य पटना और उसके आस-पास हुआ है। इस केन्द्रीयकरण प्रवृत्ति से बचते हुए बिहार के मोतीहारी, गया, भागलपुर, गोपालगंज, छपरा, किशनगंज, कटिहार, नांलदा, समस्तीपुर जैसे जिलो पर व्यापक रुप से व्यवस्थित शहरीकरण और बुनियादी ढांचे को विकसित किया जाये। राष्ट्रीय व राज्य स्तर के शिक्षा, चिकित्सा व अन्य संस्थानों की स्थापना के लिए भी पटना के बाहर के जिलों को वरीयता दी जाये। विकेन्द्रीकरण बढ़ने से पटना से दबाव कम होगा और पटना से बाहर के लोगों के लिए पटना आने की मजबूरी घटेगी। क्षेत्रीय असमानता और पिछड़ापन खत्म होगा।

आस्था व संस्कृति का केंद्र बिहार

बिहार में जैन व बौद्व धर्म की उत्पति हुई है, सिख धर्म की जड़े है, हिन्दू धर्म बहुसंख्यक है। मुस्लिम सबसे बड़े अल्पसंख्यक है। बिहार में धार्मिक पर्यटन और अर्थव्यवस्था की पर्याप्त संभावना है लेकिन इस क्षेत्र में पूरी योजना के साथ विजन के साथ काम करने की आवश्यकता है।

इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा काम होना चाहिये था। धार्मिक स्थलों को तीर्थाटन के लिए विकसित करना होगा, व्यवस्थित धर्मशालाएं, होटल, सड़क, खान-पान की सुविधा, यातायात का विकास करना होगा, आतिथ्य और सत्कार की भावना को अपनाना होगा, बेवकूफ बना कर लूट लेने की मंशा को त्यागना होगा, तंत्र सुविधाप्रदायक विकसित करना होगा। दूसरे राज्यों में रहने वाले लोगों के लिए नांलदा, केसरिया, वैशाली अजूबा है, सीतामढ़ी आस्था है और जब वे यहां आते है और उन्हें वैसा दर्शन नहीं मिलता जैसा उन्होंने सोचा था तो ये बहुत गलत संदेश जाता है।

श्रेष्ठ दिमागों को तैयार करें

बिहार के युवा जो मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, उड़ीसा, बंगाल और दिल्ली में उच्च शिक्षा के लिए जा रहे है, उनको वो उच्च शिक्षा यहीं देने के लिए बुनियादी ढांचा बनाना होगा, ऐसे में बिहार का रुपया भी बिहार से बाहर जाने से रुकेगा और इस रुपये से ही बिहार के भीतर ही शिक्षा के बुनियादी ढांचे का विकास होगा, नॉलेज इकॉनमी होने से बिहार के बाहर के लोग भी बिहार पढ़ने आयेंगे जैसे नांलदा के समय आया करते थे। बिहार भारत के श्रेष्ठ दिमागों को तैयार कर विकसित कर राष्ट्र निर्माण में भेजे, ऐसा होना चाहिए।

बिहार में जेजे स्कूल आफ आर्ट्स जैसे स्कूल खोले जाये ताकि मिथिला पेंटिग, पटना कलम को युवा पेशे के तौर पर अपना सकें। फैशन टेक्नोलॉजी, डिजाइन टेक्नोलॉजी, रिसर्च इंस्ट्रीटयूट , फिल्म इंस्टीटयूट, नाट्य संस्थान , संगीत संस्थान खोले जाये ताकि युवाओं को सरकारी बाबू बनने के अलावा कुछ और बनने और समझने का मौका मिले। नये नवाचारों का भरपूर मौका मिले।

तरीके में सुधार व सजगता की जरूरत

सबसे जरुरी बात लोगों को अपने तरीके में सुधार लाना होगा, जो भी राज्य आगे है, वे इसलिए आगे है क्योंकि वहां की जनता ज्यादा जिम्मेदार है, जनता जितनी जिम्मेदार, शासन-प्रशासन उतना प्रभावी और विजनरी हो जाता है। इंदौर का नाम या छत्तीसगढ़ के अंबीकापुर का नाम स्वच्छता में ऊपर आता है तो इसका कारण वहां के नागरिक है। इसलिए नागरिक जितने सजग, प्रगति उतनी ही ज्यादा।

ऐसे में दूसरों को मूर्ख मानने वाली ऐतिहासिक श्रेष्ठता की भावना से हटना होगा, सिविक सेंस विकसित करना होगा, सामाजिक द्वंद्व से उपजी जटिलता को छोड़कर साधारण बनना होगा, इसके अलावा लोगों को रचनात्मक रुप से कार्य करने वाला बनना पड़ेगा, अपनी कमियों में सुधार करने वाला बनना पड़ेगा और ऐसा हर व्यक्ति को करना पड़ेगा। तभी धीरे-धीरे बड़ा बदलाव आयेगा।

निश्चित तौर पर ये एक लंबी प्रक्रिया है लेकिन आज से ही शुरु किया जाये तो अगले ही कुछ वर्षो में तस्वीर कुछ और होगी।

ये लेख आपको कैसा लगा हमें फेसबुक पेज पर जरुर बताएं

अभाविप काशी क्षेत्र के महानगर कार्यकारिणी का गठन, प्रभात रंजन उपाध्याय बने महानगर उपाध्यक्ष

abvp kashi prant prabhat ranjan

आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, काशी महानगर के “महानगर कार्यकारिणी – २०२१” की घोषणा हुई।

जिसमें दो बार से लगातार महानगर उपाध्यक्ष पद के दायित्व का निर्वाह करने वाले प्रभात रंजन उपाध्याय को पुनः इस पद पर नियुक्त किया गया है।

बता दें कि, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् ने गुरुवार को काशी क्षेत्र के नए कार्यकारिणी की घोषणा की. नई कार्यकारिणी में डॉ. उर्जस्विता सिंह को महानगर अध्यक्ष बनाया गया. वहीँ राजन गुप्ता को महानगर मंत्री का पदभार सौंपा गया है. विद्यार्थी परिषद् ने काशी क्षेत्र के कार्यकारिणी में कुल 47 सदस्यों को शामिल किया है.

महानगर अध्यक्ष बनीं डॉ.उर्जस्विता सिंह के साथ ही प्रभात रंजन उपाध्याय को महानगर उपाध्यक्ष पदभार सौंपा गया है.

कार्यकारिणी के सदस्यों के सूची इस प्रकार है-

1.महानगर अध्यक्ष – डा० उर्जस्विता सिंह जी

2.महानगर उपाध्यक्ष – प्रभात रंजन उपाध्याय

3.महानगर उपाध्यक्ष – डा० नीलम सिंह जी

4.महानगर उपाध्यक्ष – संध्या वर्मा जी

5.महानगर उपाध्यक्ष – डा० रिंकी सिंह जी

6.महानगर उपाध्यक्ष – कृष्ण कुमार सिंह जी

7.महानगर मंत्री – राजन गुप्ता जी

8.महानगर सहमंत्री – सौरभ सोनकर जी

9.महानगर सहमंत्री – मिनाक्षी मिश्रा जी

10.महानगर सहमंत्री – पायल राय जी

11.महानगर सहमंत्री – कु० शुभम सिंह जी

12.महानगर सहमंत्री – जानवी कसेरा जी

13.महानगर सहमंत्री – विपूल सेठ जी

14.महानगर सहमंत्री – युविका तिवारी जी

15.महानगर सहमंत्री – अभय शक्ति सिंह जी

16.महानगर मिडिया संयोजक – रजनीश जी

17.महानगर सोशल मीडिया संयोजक – सचिदानंद पाण्डेय जी

18.महानगर सोशल मीडिया सहसंयोजक – शिवांश मिश्रा जी

19.महानगर SFD संयोजक – रामेश्वर सिंह जी

20.महानगर SFD सह संयोजक – अखिलधर द्विवेदी जी

21.महानगर SFS संयोजक – कुंदन मिश्रा जी

22.महानगर SFS सह संयोजक – सिद्धार्थ सिंह जी

23.महानगर खेल आयाम संयोजक – प्रिया राय जी

24.महानगर खेल आयाम सह संयोजक – विकल्प शुक्ला जी

25.महानगर राष्ट्रीय कला मंच संयोजक – सुभा पाण्डेय जी

26.महानगर राष्ट्रीय कला मंच सहसंयोजक – स्वेता खरवार जी

27.महानगर राष्ट्रीय कला मंच सहसंयोजक – अंकिता जायसवाल जी

28.महानगर विश्वविद्यालय कार्य संयोजक – रवि जायसवाल जी

29.महानगर विश्वविद्यालय कार्य सहसंयोजक – मिथिलेश जी

30.महानगर महाविद्यालय कार्य संयोजक – गौरव राय जी

31.महानगर महाविद्यालय कार्य सहसंयोजक – सत्यम पटेल जी

32.महानगर इंटर कॉलेज संयोजक – गोपी किशन सिंह जी

33.महानगर इंटर कॉलेज सहसंयोजक – सत्यम सिंह जी

34.महानगर एग्रीविजन संयोजक – नितिश सिंह जी

35.महानगर एग्रीविजन सहसंयोजक – आकाश चंदेल जी

36.महानगर शोध कार्य संयोजक – रोशन कुमार जी

37.महानगर कार्यकारिणी सदस्य – संदीप सोनकर जी

38.महानगर कार्यकारिणी सदस्य – गोपाल प्रजापति जी

39.महानगर कार्यकारिणी सदस्य – अक्षय वर्मा जी

40.महानगर कार्यकारिणी सदस्य – दिपक सोनकर जी

41.महानगर कार्यकारिणी सदस्य – प्रग्या गिरी जी

42.महानगर कार्यकारिणी सदस्य – रोशनी कुमारी जी

43.महानगर कार्यकारिणी सदस्य – स्वेतांशी तिवारी जी

44.महानगर कार्यकारिणी सदस्य – आर्या अग्रहरी जी

45.महानगर कार्यकारिणी सदस्य – प्रियंका मिश्रा जी

46.महानगर कार्यकारिणी सदस्य – मनीषा दास जी

47.महानगर कार्यकारिणी सदस्य – सौम्या कुमारी जी

कवि संगम की ‘दस्तक’ में युवा कवियों ने बाँधा समां

नई दिल्ली | navpravah.com

पश्चिमी दिल्ली के रोहिणी स्थित टेक्निया सभागार में युवा कवि सम्मेलन ‘दस्तक’ का आयोजन किया गया, जिसमें देश भर से चयनित 15 युवा कवियों ने काव्य पाठ किया। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय कवि संगम के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगदीश मित्तल के जन्मदिन के उपलक्ष में प्रत्येक वर्ष आयोजित किया जाता है।

जगदीश मित्तल की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति योगेश सिंह, सम्मानित अतिथि के रूप में बाबा सत्यनारायण मौर्य, श्याम सुन्दर अग्रवाल, रोशन कंसल, संजीव गोयल, अश्वनी अग्रवाल, प्रवीण गर्ग व अन्य कई लोग उपस्थित थे।

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ की गई। इस अवसर पर योगेश सिंह ने जगदीश मित्तल को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं और उनकी संस्था के द्वारा साहित्य जगत में किये जा रहे कार्यों की सराहना की। इसके बाद युवा कवि हरीश पटेल व शशि श्रेया के संचालन में सरस्वती वंदना के साथ कवि सम्मेलन प्रारंभ हुआ। सभी कवियों ने श्री राम पर केंद्रित कविता का पाठ कर श्रोताओं को आनंदित किया। इस दौरान छत्तीसगढ़ से आए उमाकांत टैगोर ने आज के आदमी पर शानदार कविता का पाठ किया। प्रशांत बजरंगी ने जहाँ देशद्रोहियों पर प्रहार किया, वहीं पीयूष मालवीय ने पढ़ा “कितने ही मैडल रसोइयों में कैद हैं‌”। गोपाल पांडे ने अपने ओज स्वर मे पढ़ा “बाबरी को बाबरे उजाडते चले गए”। साथ ही ऋतिका, दिव्या, वैभव अवस्थी, मधु गौड़, जीवन लाल, रोहिणी, उन्नति, अभिजीत, अंकिता, आदि ने भी श्रेष्ठतम काव्यपाठ कर खूब तालियां बटोरी।

मल्लिका रुद्रा, अशोक बत्रा के संयोजन में आयोजित इस कार्यक्रम में युवा कवियों के प्रोत्साहन के लिए मनमोहन गुप्ता, अरुण गोयल, सुनील गुप्ता, डा. जयदीप बंसल, राजीव अग्रवाल, सीताराम मित्तल सहित अनेक व्यक्ति उपस्थित थे। कार्यक्रम में देश के ओज के कवि डॉ हरिओम पंवार ने वीडियो सन्देश के माध्यम से अपनी शुभकामनाएं दीं। इस दौरान युवा कवियों के साथ साथ दर्शक दीर्घा में वरिष्ठ कवि सुदीप भोला, योगेन्द्र शर्मा, राजेश चेतन, अनिल अग्रवंशी, गजेन्द्र सोलंकी, रसिक गुप्ता, पीके आजाद, महेंद्र अजनबी, महेश शर्मा, कल्पना शुक्ला, मंजू शाक्या, बलजीत कौर, उपेंद्र पांडे, अशोक चावला, दास आरुही आनंद व अमरनाथ आदि उपस्थित थे। इस अवसर पर दिल्ली पुलिस अधिकारी पंचम दस्तक के कवि राजेन्द्र कलकल को जगदीश मित्तल काव्य पुरुस्कार से सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के समापन में सभी आमंत्रित अतिथियों ने अपना वक्तव्य देते हुए संगम परिवार के इस प्रयास की सराहना की। कार्यक्रम के सफल आयोजन में अशोक बत्रा, महेश शर्मा, ईश्वर मित्तल, कपिल गर्ग आदि ने पूर्ण सहयोग दिया।