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Friday, July 31, 2026
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UP: प्रयागराज से अपहृत बच्चे की नृशंस हत्या, अरवारी के जंगल में ख़ून से लथपथ मिली लाश

संवाददाता | navpravah.com

प्रयागराज के शंकरगढ़ बाज़ार से दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। शंकरगढ़ बाज़ार से अपहृत किशोर का शव बरगढ़ थाना के अरवारी जंगल में मिला है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक़, किशोर की बेरहमी से पत्थर से कूचकर हत्या कर दी गई। अरवारी जंगल प्रयागराज जनपद से एकदम सटा हुआ है। किशोर का शव मिलने के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

शंकरगढ़ के सदर बाज़ार निवासी पुष्पराज केसरवानी का बेटा चौदह वर्षीय शुभ केसरवानी शनिवार शाम को लगभग चार बजे घर से निकला था। रात लगभग आठ बजे पुष्पराज के फ़ोन पर अपहरण और फिरौती के लिए कॉल आई, अपहरणकर्ता ने कहा कि तुम्हारा बेटा शुभ मेरे क़ब्ज़े में है। पास के दभौरा जंगल में पंद्रह लाख रुपये लेकर आ जाओ। पुलिस की बताया तो बेटे को गोली मार देंगे। शुभ के पिता ने बेटे को छुड़ाने के लिए पैसे का इंतज़ाम भी शुरू कर दिया था। लेकिन इसकी जानकारी जब पड़ोस में रहने वाले भाजपा नेता को मिली तो उन्होंने स्थानीय पुलिस थानाध्यक्ष मनोज सिंह को इसकी जानकारी दी।

घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस सक्रिय हो गई और शुभ के सकुशल रिहाई के लिए प्रयास कर रही थी। अपहरणकर्ताओं की लोकेशन जनपद सीमा के डभौरा और बरगढ़ जंगल में मिली थी, जिस पर प्रयागराज पुलिस ने बरगढ़ थाना प्रभारी अंजनी कुमार सिंह से भी संपर्क किया था और हाईवे पर नाकेबंदी कराई थी। रविवार की सुबह चरवाहों ने देखा कि अरवरी के जंगल में एक किशोर का शव पड़ा है, उन्होंने इसकी सूचना पुलिस को दी।

थाना प्रभारी अंजनी कुमार के मुताबिक़, प्रथम दृष्टया किशोर की हत्या पत्थर से कूच कर की गई लगती है। बच्चे के चेहरे और सिर पर चोट के निशान हैं। पोस्टमार्टम के लिए शव को भेज दिया गया है। इस घटना से स्थानीय लोगों में भारी रोष है। घटनास्थल पर तमाम आला अधिकारी मौजूद हैं और जाँच जारी है।

यूपी: सरयू एक्सप्रेस में महिला कांस्टेबल पर हमला करने वाला आरोपी एनकाउंटर में ढेर

सरयू एक्सप्रेस में महिला मुख्य आरक्षी पर हमले के मामले में पुलिस ने मुख्य अपराधी अनीस खान को मुठभेड़ में किया ढेर। UP एसटीएफ और अयोध्या पुलिस के ज्वाइंट ऑपरेशन में एनकाउंटर में हुआ ढेर अपराधी अनीस, इस संपूर्ण एनकाउंटर में अनीस के दो अन्य साथी भी घायल हुए हैं। मुठभेड़ में पुलिस के लोग भी घायल हुए हैं जिसमें एसओ पुराकलंदर रतन शर्मा व दो अन्य सिपाही शामिल हैं। उक्त मुठभेड़ थाना पूराकलंदर के छतरिवा पारा कैल मार्ग पर हुई है। इसी मामले में थाना इनायत नगर से दो अन्य आरोपियों को भी पुलिस मुठभेड़ में गिरफ्तार किया गया है।

जानकारी के अनुसार मुठभेड़ में मारा गया अनीस महिला कांस्टेबल से छेड़खानी करने लगा था। महिला ने बदमाश को पटक दिया तो तीनों बदमाशों ने महिला पर जानलेवा हमला कर दिया। ट्रेन की खिड़की से सिर लड़ाकर महिला को घायल कर दिया था। अयोध्या से पहले ट्रेन धीमी हुई थी तो तीनों बदमाश फरार हो गए थे। यूपी एसटीएफ और अयोध्या पुलिस ने महिला कांस्टेबल पर जानलेवा हमला करने वाले एक बदमाश को मार गिराया है। मारे गए बदमाश अनीस के दो अन्य साथी आजाद और विशंभर दयाल उर्फ लल्लू घायल है।

लोकसभा में पास हुआ महिला आरक्षण बिल, विरोध में केवल दो सांसदों ने किया मतदान

न्यूज़ डेस्क | navpravah.com

केंद्र सरकार द्वारा लाया गया ऐतिहासिक ‘नारी शक्ति वंदन विधेयक’ यानि महिला आरक्षण विधेयक लोकसभा में पारित हो गया हैं। यह बिल लोकसभा और राज्यसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का अधिनियम देता है, जिसे लोकसभा में उपस्थित सांसदों एवं लगभग सभी दलों का अपार समर्थन मिला। इस विधेयक के पक्ष में 454 वोट पड़े, जबकि इसके विरोध में केवल 2 मत पड़े।

लोकसभा में यह बिल दो तिहाई बहुमत से पास हुआ एवं वोटिंग पर्ची के माध्यम से कराई गयी थी। साथ ही इतिहासों की फेहरिस्त में इस बिल ने एक और इतिहास लिखा कि नवीन संसद के निचले सदन से पारित होने वाली यह पहली विधेयक बनी।

इस बिल के पिछले इतिहास को अगर समझे तो पिछले 27 सालों से भारतीय राजनीति के किसी ना किसी गलियारों में इसका जिक्र हो ही जाती थी फिर चाहे वो महिला वोट बैंक की एकत्रीकरण में या फिर नारी के कर कौशल के सशक्तिकरण में लेकिन 19 सितंबर 2023 को इस बिल को नवीन लोकसभा भवन में पेश किया गया एवं 20 सितंबर 2023 को यह बिल पहली बार लोकसभा से पास हुआ। अब आज (गुरुवार) को यह बिल राज्यसभा में पेश किया जाएगा।

लोकसभा में विधेयक के पक्ष में 454 वोट पड़े, जबकि इसके विरोध में केवल 2 मत पड़े. बिल के खिलाफ वोट करने वालों सांसदों में AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और उनकी ही पार्टी के सांसद इम्तियाज जलील हैं।

वहीं बिल पास होने के बाद इस जीत का सेहरा किसके सिर बंधे उसके लिए भी बयान बाजी का दौर शुरू हो गया जहां एक ओर कांग्रेस पार्टी ने इस बिल को राजीव गांधी का सपना बताने लगी तो वहीं TMC ने ममता बनर्जी को इस बिल का जनक करार दिया।

वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा से विधेयक पारित होने के बाद हर्ष जाहिर करते हुए ट्वीट किया कि इस अभूतपूर्व समर्थन के साथ लोकसभा में संविधान (128वां संशोधन) विधेयक विधेयक 2023 पारित होने पर खुशी हुई, मैं सभी पार्टियों के सांसदों को धन्यवाद देता हूं जिन्होंने इस विधेयक के समर्थन में मतदान किया।

हालांकि संवैधानिक प्रावधानों का हवाला देते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि इस बिल को धरातल पर सूचारु रुप से आने में एवं पूरी प्रक्रिया पूरी होने में साल 2029 तक वक्त लग सकता हैं। सूचारु रुप में बिल पारित होने के पश्चात लोकसभा में महिला सांसदों की संख्या 181 हो जाएगी। हालांकि यह बिल अभी फिलहाल 15 साल के लिए ही लागू होंगा।

भारत-कनाडा के रिश्तों में खटास! जानिए इस प्रकरण में अब तक क्या-क्या हुआ

कनाडा की संसद में कनाडाई पीएम जस्टिन ट्रुडो के भारत विरोधी बेतुकी बयानबाजी ने दोनों देशों के सियासी रिश्तों में खटास पैदा कर दी हैं, जहां भारत में कनाडाई प्रधानमंत्री के बयान का विरोध करने के लिए पक्ष विपक्ष दोनों एक साथ दिख रहे हैं वहीं भारत सरकार का रुख भी बिल्कुल साफ दिख रहे हैं. भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए कनाडा के राजनयिक को बर्खास्त कर दिया साथ ही 5 दिनों के भीतर देश छोड़ने का आदेश भी दे दिया हैं।

जानिए अब तक क्या क्या हुआ है इस मामले में।
कहानी की शुरुआत होती हैं पंजाब के जालंधर से जहां के एक भारसिंहपुर गांव का रहने वाला शख्स जिसका नाम हरदीप सिंह निज्जर था जिसके ताल्लुकात प्रतिबंधित संगठन “खालिस्तान” से था एवं सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक उसकी गिनती उच्च के खालिस्तानी कमांडरों में थी। वह साल 1996 में भारत से फरार होकर कनाडा चला गया एवं उसने वहां की नागरिकता ले कर कनाडा के सरे क्षेत्र में रहने लगा साथ ही भारत विरोधी गतिविधियों में भी काफी तत्परता से कार्य करने लगा। निज्जर का नाम भारत में मोस्ट वांटेड आतंकियों की सूची में था,भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने उसे “भगोड़ा” घोषित कर दिया था।18 जून को कनाडा के सरे क्षेत्र के ब्रिटिश कोलंबिया में एक गुरुद्वारे की पार्किंग में गोली मारकर निज्जर की हत्या कर दी गई थी।
आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के मामले में कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत सरकार पर गंभीर आरोप लगाया है। ट्रूडो के अनुसार निज्जर की हत्या भारतीय खुफिया एजेंसियों द्वारा कराई गयी थी।जस्टिन ट्रूडो के भारत पर इस तरह के आरोप लगाने के बाद दोनों देशों के रिश्तों में सियासी खटास बढती दिख रही है।

आइए जानते हैं प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के भारत पर आरोप लगाने से लेकर अबतक इस विवाद ने क्या-क्या रूप लिया है।हरदीप सिंह निज्जर

1.सोमवार को कनाडा की संसद में कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने कहा कि हरदीप सिंह निज्जर जो कि एक कनाडाई नागरिक थे एवं “खालिस्तान” नामक एक स्वतंत्र सिख देश के निर्माण के लिए संगठित शांतिपूर्ण अभियान चला रहे थे वह एक सिख अलगाववादी नेता थे। जिनकी हत्या जून में कर दी गई थी। फिर मंगलवार को भारत पर इल्ज़ाम लगाते हुए प्रत्यक्ष रूप से प्रधानमंत्री ट्रूडो ने कहा कि जून में हुई इस हत्या में भारत सरकार के एजेंट शामिल थे। साथ ही उन्होंने धमकी भरे लफ्जों में भारत पर निशाना साधते हुए यह भी कहा कि कनाडा सरकार इस हत्याकांड में किसी अन्य देशों की संलिप्तता को बर्दाश्त नहीं करेगी।

2.प्रधानमंत्री ट्रूडो के इस बेतुके बयान के बाद दोनों देशों के राजनीतिक संबंध में दरार आने शुरू हो गयें। भारत ने पहले तो पीएम ट्रूडो के बयान का खंडन किया साथ ही अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया। वहीं कनाडा में मौजूद भारत के राजनायिक को निष्कासित कर दिया भारत ने भी जैसे को तैसा वाले लहज़े में भारत में मौजूद कनाडा के राजनायिक को फौरन तलब किया एवं बर्खास्त करते हुए 5 दिनों के भीतर भारत छोड़कर जाने का आदेश दे दिया हैं।

3.इस विवाद ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक राजनीतिक असमंजस बढ़ा दी। दुनिया भर के नेताओं ने इस विवाद पर अपनी चिंता प्रकट की हैं।
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस मुद्दे को लेकर अमेरिका राष्ट्रपति जो बाइडेन बेहद चिंतित हैं एवं चाहते हैं कि जल्द से जल्द यह विवाद सुलझ जाए एवं दोनों देशों के मध्य एक खुशहाल एवं स्थिरता युक्त संबंध स्थापित हो जाए।
वहीं दूसरी ओर ब्रिटेन के प्रवक्ता ने कहा कि वो नई दिल्ली के साथ अपनी व्यापार वार्ता को जारी रखेंगे संग ही उन्होंने कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो के द्वारा लगाए गए आरोपों को ‘गंभीर’ बताया और कहा कि हम कनाडा के साथ इस मामले को लेकर संपर्क बनाए हुए हैं।

4.पीएम जस्टिन ट्रूडो के कनाडा संसद में हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आरोप भारत पर लगाने के बाद निज्जर के परिजन के बयान भी सामने आये। हरदीप सिंह निज्जर का बेटा जिसका नाम बलराज निज्जर है उसने कहा कि उनका परिवार पीएम जस्टिन ट्रूडो का आभारी हैं कि उन्होंने तीन महीने बाद ही सही मगर इस मामले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया हम इस चीज के लिए पीएम जस्टिन ट्रूडो को धन्यवाद देते हैं।

5. वहीं इस विवाद को लेकर भारत में भी पक्ष-विपक्ष एकसाथ खङे नजर आए। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक्स (जिसे पहले ट्विटर कहा जाता था) पर एक पोस्ट करते हुए कहा कि कांग्रेस का हमेशा मानना रहा है कि आतंकवाद के खिलाफ हमारे देश की लड़ाई सदैव समझौता रहित होनी चाहिए, खासकर जब आतंकवाद भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता के लिए सबसे बड़ा खतरा हो।

6. वहीं बुधवार को इस पूरी दुनिया में आतंक के पनहगार से प्रसिद्ध पाकिस्तान भी कूद गया हैं एवं
भारत के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मंच से प्रोपेगैंडा फैलाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है. पाकिस्तान के विदेश सचिव ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से कहा है कि कनाडा ने भारत पर जो आरोप लगाए हैं, उसे लेकर पाकिस्तान को बिल्कुल भी कोई हैरानी नहीं है.वहीं पाकिस्तान के एक शीर्ष राजनयिक ने इस मामले में कुलभूषण यादव का उदाहरण पेश करते हुए कि ‘कनाडा में भारत का आतंकवाद पाकिस्तान के लिए आश्चर्य की बात नहीं है.’
वहीं मंगलवार को पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने भी भारत के खिलाफ आग उगलते हुए अपने प्रोपोगंडा में कहा कि “उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से यह स्वीकार करने का आग्रह किया था कि भारत एक दुष्ट, हिंदुत्व और आतंकवादी देश है.’

इन विवादों की बीच अब यह भी सोचने वाली बात हैं कि इसका भारत – कनाडा के व्यापारिक रिश्तों पर क्या असर पड़ेगा, एक गणना के अनुसार अप्रैल 2000 से मार्च 2023 तक कनाडा ने भारत में लगभग 3,306 मिलियन डॉलर का निवेश किया है। कनाडा भारत में 17वां सबसे बड़ा विदेशी निवेशक है। कनाडा में भारत से पढ़ने जाने वाले बच्चों की संख्या 2022 में लगभग 320,000 थी, जो कुल विदेशी छात्रों का लगभग 40% है।
कनाडा में पंजाबी तीसरी सबसे लोकप्रिय भाषा है. कनाडा की कुल आबादी में 1.3 फ़ीसदी लोग पंजाबी समझते और बोलते हैं.वहां रह रहे भारतीय मूल के लोगों की संख्या तकरीबन 14 से 18 लाख हैं। पंजाब के अलावा सबसे ज्यादा सिख पंथ के लोगों कनाडा में रहते हैं।

आंकङों के अनुसार कनाडा की कुल आबादी तकरीबन 3 करोड़ 82 लाख है। इनमें 9 लाख 42 हजार 170 पंजाबी हैं।

बिहार: सरकारी स्कूल में नहीं थी बैठने की व्यवस्था, नाराज छात्राओं ने BEO की गाड़ी को बनाया निशाना, किया तोड़फोड़

Nitish Mishra । navpravah.com


बिहार (Bihar) के वैशाली जिले अंतर्गत महनार प्रखंड के एक सरकारी स्कूल की छात्राओं ने 12 सितंबर को शिक्षा विभाग के एक अधिकारी के वाहन में जबरदस्त तोड़फोड़ की। छात्राओं का आरोप है कि स्कूल में बुनियादी सुविधाएं दुरुस्त नहीं है, बैठने के लिए बेंच डेस्क भी पर्याप्त नहीं हैं जिस वजह से छात्राओं का ग़ुस्सा चरम पर था और उन्होंने ऐसा कदम उठाया।

बिहार में जहां एक ओर शिक्षा विभाग के सचिव केके पाठक इन दिनों शैक्षणिक स्तर में सुधार के लिये लगातार फैसले ले रहे हैं, पर्व-त्योहारों के उपलक्ष्य में मिलने वाले छुट्टियों में कटौती की जा रही है, 75 प्रतिशत उपस्थिति को अनिवार्य कर दिया गया हैं। जब से यह फैसला लिया गया है तब से जिसके बाद से स्कूल में आने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या अचानक से बढ़ गई है। 12 सितंबर को भी ऐसा ही हुआ जहां स्कूल में एक हजार से ज्यादा छात्र क्लास लेने पहुंचे थे। जब उन्हें सीट नहीं मिली तो क्लास के बाहर बैठना पड़ा। लेकिन बैठने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से वह नाराज हो गई एवं देखते देखते भीङ उग्र हो गई।

इस बीच उग्र छात्राओं ने प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी के गाड़ी पर हमला कर गाड़ी को क्षतिग्रस्त कर दिया। उग्र छात्राओं को काबू में करने के लिए बाद में भारी संख्या में पुलिस बल को प्रदर्शन स्थल पर लाना पड़ा।

हालांकि महनार SDO नीरज कुमार ने इस बात को माना कि स्कूल में क्षमता से अधिक छात्रों का एडमिशन कराया था एवं पर्याप्त बैठने की व्यवस्था ना होने की वजह से कई छात्राओं को क्लास के बाहर बैठने के लिए मजबूर होना पड़ा था।

वहीं स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शांति स्थापित करने बुलाई पुलिस बल की कुछ महिला पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शन कर रही कुछ छात्राओं को थप्पड़ मार दिया था। जिसके बाद छात्राएं हिंसक हो गईं। 

 

G-20: वैश्विक पटल पर छाया रहा ‘भारत’

Amit Dwivedi | navpravah.com
G20 के आयोजन को लेकर भारत ने जिस तरह की कुशलता, कूटनीति, वैश्विक दृष्टिकोण और नेतृत्व क्षमता का प्रदर्शन किया है, वह अपने आप में एक अदम्य साहस का उदाहरण है। इसकी गूंज से आज सम्पूर्ण विश्व अचंभित है।
भारत ने न केवल G20 का भव्य और विशाल आयोजन किया है, बल्कि G20 देशों को भी इस बात का अहसास भी कराया है कि वैश्विक मञ्च का उपयोग केवल संवाद के लिए ही नहीं होता है। इस मञ्च से ही भारत ने नागरिक सम्मान सुरक्षा एवं आत्मबल के उत्थान के लिए भी अपनी बात प्रमुखता से रखी।
इस बार का G-20 समिट अब तक का सबसे सफल समिट भी बन गया है। इसमें पिछले समिट की तुलना में सबसे ज्यादा काम हुआ। भारत द्वारा आयोजित इस समिट के पहले दिन कुल 73 मुद्दों पर चर्चा के बाद सहमति बनी, जबकि पिछले साल इसी समिट में सिर्फ 27 मुद्दों पर ही सहमति बन सकी थी। वर्ष 2021 में 36, 2020 में 22, 2019 में 13, 2018 में 12 और 2017 में जब जर्मनी में G-20 का समिट हुआ था, तब सिर्फ 8 मुद्दों पर ही चर्चा के बाद सहमति बनी थी। भारत ने इस बार के समिट में सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए 73 मुद्दों पर चर्चा की और इस पर सभी देशों के नेताओं के बीच इन पर सहमति भी बनी।
वर्तमान में नई दिल्ली में आयोजित G20 शिखर सम्मेलन के आयोजन से भारत का कद राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ना तय है। भारत अपने विभिन्न आयामों में प्रगति की दौड़ में आगे बढ़ रहा है। पहले भारत की नज़र विश्व के दूसरे विकसित देशों के निर्णयों पर रहती थी लेकिन आज संपूर्ण विश्व भारत की ओर टकटकी लगाए देख रही है और भारत संपूर्ण विश्व का प्रतिनिधित्व करता नज़र आ रहा है। आज भारतीय नेतृत्व की साख को कहीं अधिक गंभीरता से लिया जा रहा है और अधिकांश राष्ट्र नई दिल्ली के साथ अपने संबंधों को मजबूत बनाकर हाथ मिला कर चलना चाह रही हैं।
बीते वर्षों में आंतरिक सुरक्षा पूर्व सरकार के लिए एक कड़ी चुनौती थी। वर्तमान सरकार में इसमें बेहतरीन सुधार हुआ है। कई महत्वपूर्ण लेकिन अशांत क्षेत्रों में शांति बहाल करने की कवायद संग अंजाम तक भी भेजा गया है। आतंकी हमलों के संग ही आतंकवाद पर व्यापक अंकुश लगाया गया है। अंदरुनी आतंकी गतिविधियों पर शिकंजा कस बाहरी आतंकियों के लिए भी एक सबक स्थापित किया आंतरिक सुरक्षा की दृष्टि से जम्मू-कश्मीर को अनुच्छेद 370 और 35-ए से मुक्ति दिलाना वर्तमान सरकार के लिए एक बड़ी उपलब्धि रही। स्वतंत्रता के बाद से कश्मीर घाटी में बनी यथास्थिति भारत के लिए भारी पड़ती जा रही थी। इसके बाद भी भारत ने न केवल सतत एवं समावेशी विकास को प्राथमिकता दी, बल्कि लैंगिक समानता जैसे विषयों को भी महत्व दिया।
वर्तमान सरकार ने देश के अनेक हिस्सों में जी-20 के विभिन्न समूहों की बैठकें आयोजित कर विश्व को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विविधता से भी परिचित कराया।
वर्तमान सरकार के कार्यकाल में भारत ने चंद्रयान 3 को चंद्रमा के कक्ष में स्थापित किया, जिससे दुनिया के कई बड़े और कहीं अधिक उन्नत देश इससे चकित हैं कि भारत ने तकनीक का किस तरह बड़े पैमाने पर उपयोग कर अपने लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने के साथ उनके जीवन को आसान बनाया।
खैर जो भी हो, G20 का आयोजन भारत में होना इतिहास का वह पल है, जिसने भारत की नेतृत्व क्षमता और सांस्कृतिक विरासत को विश्व के सामने सफलतापूर्वक प्रस्तुत किया है।

प्रयागराजः अतीक़ अहमद के वक़ील के घर पर बम से हमला

बीते दिनों कुख्यात माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या कैमरे के सामने एवं पुलिस की उपस्थिति में ही प्रयागराज में कर दी गई थी इस हत्याकांड के पश्चात आज फिर एक और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। जहां अतीक अहमद के वकीलों में से एक दयाशंकर मिश्र के घर के पास आज यानी मंगलवार को देसी बम से हमला किया गया हैं। इस घटना से स्थानीय लोगों में दहशत एवं भयपूर्ण माहौल बना हुआ है। बताया जा रहा है कि बम फेंकने का उद्देश्य केवल दहशत फैलाना है, हालांकि इस हमले में किसी के नुकसान या हताहत होने की खबर नहीं है। कर्नलगंज पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।

पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, प्रयागराज के कटरा गोबर गली में देसी बम फेंका गया है। इलाके में छोटू यादव नाम का शख्स रहता एवं उसका हर्षित सोनकर नाम के लड़के का विवाद हुआ था। आरोप है कि हर्षित ने ही छोटू को निशाना बनाकर बम चलाया, वकील विजय मिश्रा का इस विवाद से कोई लेना-देना नहीं है। पुलिस इलाके के चप्पे-चप्पे पर नजर रखे हुए है। साथ ही वहां की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है।
कर्नलगंज पुलिस स्टेशन के एसएचओ राम मोहन राय के अनुसार अतीक के वकील दयाशंकर मिश्रा निशाने पर नहीं थे और यह घटना दो युवकों के बीच दुश्मनी का नतीजा थी। हालांकि, वकील ने दावा किया कि यह केवल भय और आतंक पैदा करने की कोशिश थी।

IIJS Signature Show 2023 : नेचुरल डायमंड्स ज्वेलरी की बड़ी रेंज के साथ Dhanji Jewels ने की शिरकत

Dhanji Jewels : मुंबई | IIJS Signature Show 2023 में इस वर्ष 50 देशों की 600 कंपनियों के 800 विदेशी आगंतुकों की रिकॉर्ड संख्या बताई जा रही है।

गत दिनों 5 जनवरी से 9 जनवरी तक भारत के सबसे बड़े ज्वेलरी शो IIJS Signature Show का आयोजन हुआ। जिसमें देशभर से ज्वेलरी ब्रांड्स व ज्वेलर्स ने अपने बूथ लगाए।

रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद ( GJEPC) ने 5-9 जनवरी 2023 तक मुंबई के बांबे प्रदर्शनी केंद्र में कैलेंडर वर्ष 2023-भारत अंतर्राष्ट्रीय आभूषण प्रदर्शनी (आईआईजेएस सिग्नेचर) और भारत रत्न एवं आभूषण मशीनरी एक्सपो ( IGJME ) के पहले डिजाइन केंद्रित आभूषण प्रदर्शनी का आयोजन किया ।

आईआईजेएस सिग्नेचर 2023 के उद्घाटन में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल और सांसद श्रीमती पूनम महाजन एवं अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया।

आईआईजेएस सिग्नेचर का 15वां संस्करण 65,000 वर्गफुट में फैला था। IIJS Signature 2,400 से अधिक बूथों में फैले 1,300 से अधिक प्रर्दशकों को समायोजित किया गया। 10,000 घरेलू कंपनियों के 32,000 आगंतुकों ने शो में भाग लिया। जीजेईपीसी ने प्रयोगशाला में उगाए गए हीरों (Lab Grown Diamonds) के लिए भी एक नया खंड प्रस्तुत किया । आईजीजेएमई 90 से अधिक कंपनियों, 115 से अधिक बूथों / हॉल 7 के साथ समवर्ती शो था।

इस वर्ष आईआईजेएस सिग्नेचर में 50 देशों की 600 कंपनियों के 800 विदेशी आगंतुकों की रिकॉर्ड संख्या बताई जा रही है। 10 देशों : अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, मलेशिया, श्रीलंका, ईरान, बांग्ला देश, नेपाल, यूएई, बहरीन और रूस से प्रतिनिधिमंडल आये। पहली बार, 18 प्रमुख खरीदारों के साथ सऊदी अरब से भी एक प्रतिनिधिमंडल आया।

IIJS Signature 2023 में उत्पाद वर्गों में शामिल रहे: सोना एवं सोना सीजेड जड़ित आभूषण, हीरा, रत्न एवं अन्य जड़ित आभूषण, चांदी के आभूषण, कलाकृतियां और उपहार दी जाने वाली वस्तुएं, ढीले पत्थर, प्रयोगशाला एवं शिक्षा और प्रयोगशाला में उगाए गए हीरे ( ढीले एवं आभूषण )।

देश भर के ज्वेलरी मार्केट में तेजी से अपनी पकड़ बनाते हुए ब्रांड Dhanji Jewels ने भी नेचुरल हीरे जड़ित स्वर्ण आभूषणों के साथ इस शो में शानदार शिरकत की। जिसमें राउंड डायमंड, फैंसी डायमंड जड़े हुए शानदार स्वर्ण आभूषणों को विशाल रेंज प्रदर्शन के लिए रखी गई।

Dhanji Jewels Pvt Ltd के CEO अमित द्विवेदी ने संवाददाता को बताया कि, “हम पहली बार इतने बड़े शो का हिस्सा बन रहे थे तो हमें अपने यूनीक कॉन्सेप्ट पर विशेष काम करना था। Dhanji Jewels की पूरी टीम ने ज्वेलरी सिलेक्शन से लेकर बूथ डेकोर पर जबरदस्त टीम वर्क किया। इस शो को लेकर हम काफ़ी एक्साइटेड रहे। न केवल भारत बल्कि दुनिया भर के लोगों ने हमारे काम को देखा और तारीफ़ भी की। जो कि एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।”

“वसुधैव कुटुंबकम् विचार के दृढ़ अनुगामी प्रमुख स्वामी जी महाराज” – साधु अमृतवदन दास जी

कई कंपनियां अपने कर्मचारियों को मुफ्त में नौकरी पर रखती हैं। कई कंपनियां अपने कर्मचारियों को ब्याज मुक्त कर्ज मुहैया कराती हैं।

कितनी ही कंपनियां अपने आदमियों को घर, कार, गहने आदि उपहार में देती हैं। कई कंपनियां तो कंपनी के खर्चे पर अपने कर्मचारियों के बच्चों को भी पढ़ाती हैं। साथ ही कई कंपनियां कर्मचारियों को मुफ्त चिकित्सा, बीमा आदि की सुविधा देती हैं। क्‍योंकि ये सभी कंपनियां अपने कर्मचारियों के माध्‍यम से हर साल अच्‍छी खासी कमाई करती हैं। इसलिए कंपनियां उन्हें सुविधा सहायता प्रदान करती हैं। कई कंपनियां अन्य गरीबों, पिछड़ों आदि की मदद भी करती हैं।

कई कंपनियां भीतरी इलाकों में कौशल विकास के लिए अन्य संगठनों को बड़ी रकम या आवश्यक वस्तुएं देती हैं। क्योंकि उन्हें यह काम सरकार की सीएसआर गतिविधियों के तहत करना है। यदि वे करते हैं, तो एक सरकारी जांच शुरू होती है। कुछ महीने पहले मुंबई के एक बहुत बड़े बिजनेसमैन ने ऐलान किया कि मैं अपनी सारी संपत्ति दान कर दूंगा। हुआ यूँ कि इस अरबपति सट्टेबाज़ जैसे व्यवसायिक को शराब और सिगरेट आदि की भयानक लत लग गई थी। इससे उनकी दोनों किडनियां फेल हो गईं। जीवित रहने के लिए डायलिसिस के लिए वह लगातार अस्पताल में थे।

इन सभी बीमारियों से उनकी मृत्यु हो गई। लोगों के मन में आया कि इस भाई की दौलत से कई सामाजिक काम होंगे। लेकिन जब उसकी वसीयत का पता चला तो भाई ने बड़ी चालाकी से अपनी सारी संपत्ति, शेयर सर्टिफिकेट अपने परिवार वालों में बांट दिए। उन्हों ने बहुत कम रकम अपने पास रखी थी । लोग ऐसे भी सबकी मदद करते हैं।

लाओत्से ने कहा है कि Great square has no corner. महान आत्माओं का मन भेदभाव से परे होता है। छोटे-छोटे जीवों में यह भाव होता है कि यह मेरा है और यह तेरा है। लेकिन वास्तव में महान व्यक्ति को तुम्हारा और मेरा ऐसा का कोई भाव नहीं होता। इनका दिल बहुत बड़ा होता है। प्रमुख स्वामी महाराज एक संत व्यक्ति थे जिनके हृदय में अपने और पराये जैसी कोई बात नहीं थी। वसुधैव कुटुम्बकम् का आदर्श वाक्य उनके मन और जीवन में बुना हुआ था। जीवन की ऐसी भावना एक महान नेता का एक महान गुण है। जब उन्होंने समाज के किसी भी कोने से मदद के लिए पुकार सुनी तो उन्होंने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बहुत मदद की है। हद से ज्यादा मदद की। मोरबी में मच्छू बांध आपदा से लेकर मोरबी के झूला फूल तोड़ने की घटना तक, उनकी प्रेरणा से संतों और संगठन के स्वयंसेवकों ने दृढ़ और निरंतर सेवा की है। साथ ही उनका स्वभाव ऐसा था कि कभी मदद मांगने वाले की जाति, जाति, गांव, काम का नाम आदि नहीं पूछते थे।

Pramukh Swami Maharaj Shatabdi Samaroh, New Delhi

एक बार स्वामी जी मुम्बई में निवास कर रहे थे। एक हरिभक्त ने एक दुकानदार से कहा कि वह ठाकोरजी के लिए आम भेजना चाहता है। उस दुकानदार ने आम का बॉक्स एक आदमी के द्वारा मंदिर भिजवा दिया। वह आदमी मंदिर में आया और संयोग से स्वामी जी से भी मिला । उसका पसीने से लथपथ बदन, दुर्गंधयुक्त फटे-पुराने कपड़े और लाचार चेहरा उसकी मजबूरी दिखा रहे थे । स्वामी जी ने उनसे बड़े स्नेह से भेंट की। उसका नाम पूछा। इस पूछताछ में पता चला कि यह मजदूर भाई होम्योपैथी में डॉक्टर की तरह पढ़ा-लिखा है. लेकिन विकट स्थिति के चलते मेडिकल लाइन की जगह ऐसी फेरी का काम करता है। उनकी कहानी सुनकर स्वामीजी थोड़े दुःखी हो गए और उन्होंने वहां मौजूद रामचरण स्वामी से कहा कि अच्छा होगा कि इसकी वहां किसी अच्छे डॉक्टर से उनकी व्यवस्था करा दी जाए। कोई संबंध या कोई परिचय नहीं, लेकिन उस मजदूर की मदद करके स्वामीजी का मन शांत हो गया। मजदूर भाई आम की एक पेटी तो छोड़ गया लेकिन स्वामीजी की मदद से मीठे आमों की कई पेटियां ले गया। आया तो देने के लिए और जब गया तो मन भर कर चला गया। जो भी स्वामीजी के पास आता वह हमेशा उनसे कुछ ना कुछ ले जाता था ।

यदि स्वामीजी के पास कोई न आ पाता तो भी स्वामीजी उनके पास पहुँच जाते और बहुत कुछ दे देते। स्वामीजी देने में समता रखते थे लेकिन देखने में भी समता रखते थे। उन सबका मन एक जैसा था, इसलिए वे सबके साथ समान व्यवहार करते थे। उन्होंने कभी ऊँच-नीच का भेद नहीं किया। एक साधु और एक सांसारिक आश्रम अलग हैं। उनका दृढ़ विश्वास था कि उनके रास्ते अलग हैं लेकिन मंजिल एक है, इसलिए वे दोनों का सम्मान करते थे। इस प्रकार, स्वामीश्री के मन में सभी अपने है। कोई अजनबी नहीं हैं। एक बार ऐसा हुआ कि स्वामीजी बैठे थे। वहां साधु-संत आए। संत स्वामीश्री के चारों ओर बैठे थे। हरिभक्त थोड़े पीछे रह गए।

यह देखकर स्वामीश्री ने संतों को प्रणाम किया और कहा, “आप यहाँ क्यों बैठे हैं?जरा इस तरफ से आओ। यह भक्त थोड़े दूर बैठें है तो जरा उनको भी नजदीक आने दो । क्या आप अकेले इंसान हैं? क्या ये हरिभक्त मानव नहीं हैं?” स्वामीजी के भाव को देखकर संत तुरंत हठ गए और हरिभक्तों को उनकी इच्छा के अनुसार बैठने की अनुमति दी। संतों की समझ देखकर स्वामीजी प्रसन्न हुए। स्वामीजी के मन में तो जैसे संत वैसे ही गृहस्थ। छोटा बड़ा एक समान । वास्तव में, उनके विशाल हृदय में छोटे – बड़े, संत – गृहस्थ, एवं अपने – पराये सभी खुशी से रहते थे।

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“सामंजस्य की श्रेष्ठ प्रतिमूर्ति थे प्रमुख स्वामी जी महाराज” – साधु अमृतवदन दास जी

दुनिया का सबसे महान फुटबॉल खिलाड़ी पेले सबसे पहले अपने देश ब्राजील के सैंटोस क्लब के लिए खेलते थे।

एक बार 1969 में वे अपने क्लब की ओर से नाइजीरिया फुटबॉल खेलने जा रहे थे। यहां उन्हें बेनिन क्लब के साथ दोस्ताना मैच खेलना था। लेकिन उस समय नाइजीरिया घोर संकट के दौर से गुजर रहा था।

देश में भयानक गृहयुद्ध चल रहा था। यह गृहयुद्ध 1967 से 1970 तक नाइजीरिया देश और बियाफ्रा गणराज्य के बीच चला। इसलिए दोनों पक्षों ने स्वेच्छा से उस क्षेत्र में गृहयुद्ध को रोक दिया जहां यह मैच 48 घंटे तक खेला जाना था। कारण यह था कि सभी जुझारू न केवल फुटबॉल के प्रशंसक थे, बल्कि विशेष रूप से वे पेले के लिए बहुत सम्मान करते थे और उनके बड़े प्रशंसक थे। उन्होंने जीवन में एक बार पेले को खेलते हुए देखने के लिए अपनी बदले की भावना और आक्रामकता को एक तरफ रख दिया। ऐसा था पेले का प्रभाव। हमारे शास्त्रों में लोमश ऋषि का उल्लेख मिलता है। बताया गया है कि उनकी मौजूदगी में हिंसक वृत्ति का शमन हो जाता था । उनके आश्रम और आसपास के तालाब, सरोवर या नदी में बाघ, शेर, तेंदुआ जैसे जंगली जानवर और हिरण, खरगोश आदि सौम्य जानवर भी एक साथ पानी पीते थे। ऐसी होती है साधु की महिमा।

प्रमुख स्वामी महाराज एक गौरवशाली संत थे जिनकी दिव्य और पवित्र उपस्थिति में व्यक्तियों और व्यक्तियों के समूहों ने वैरवृत्ति, आक्रामकवृत्ति और हिंसकवृत्ति को त्याग दिया। उनके पावन सान्निध्य में ऐसी अनेकानेक किस्म की वैर वृत्तियों का भाव मिट जाता था ।

एक गाँव का एक क्षत्रिय अपने भतीजे की हत्या का बदला लेने की इच्छा से बेचैन था। दि. 11-3-1995 को गुजरात के गढ़डा गांव में, उन्होंने स्वामीश्री के सामने विरोध किया और कहा: ‘मैं इसे मार दूंगा। गांव में हम लोगों से लोग कहते हैं- ये सब कायर हैं।..’ तब स्वामीश्री ने उन्हें समझाया और कहा: “हम खुद को मारने की ज़िम्मेदारी नहीं लेते हैं। जो चला गया है वह वापस नहीं आएगा । फिर फालतू का बदला लेकर क्या करें? शांत रहें. भगवान सब अच्छा करेंगे । उसे मारने से जायदाद मिलनेवाली नहीं है ! हम शांत होंगे तो उसी हिसाब से सर्वत्र शांति होगी। आपको तो ऐसे बहोत मिल जाएंगे, लेकिन हमें कुछ नहीं करना है । लोग आपको बर्बाद कर छोड़ेंगे । पत्नी -लड़के तुम्हारे हैं। आपको चढ़ाने वाले को क्या कुछ है? इसलिए भांजे की मौत को केवल एक निमित्त समझें। इसे ईश्वर की इच्छा ही समझना। एक और झगड़ा खड़ा मत करो । शांति से भजन करो ।’ और स्वामीश्री की इस अनुभवपूर्ण वाणी से उनका क्रोध शान्त हो गया !

एक बार किसी गांव में किसी युवक ने गांव के एक सज्जन की हत्या कर दी। इस मामले ने पूरे गांव को खूनी गृहयुद्ध में झोंक दिया। खुन का बदला खून..आंख के बदले आंख निकालने की प्रवृत्ति से पूरा गांव जलने लगा। ऐसे ही गरमाते माहौल में स्वामीजी ने मृतक के बेटे से कहा, ‘तुम शांत रहो। हमें कोई शिकायत करनी नहीं है। कोर्ट से केस हटाओ। अपनी मां से कहो कि उस खूनी को भी माफ कर दे ।’ स्वामीश्री के इस वचन पर भावनगर की अदालत में जज के सामने महिला ने अपने पति के हत्यारे को अपनी आंखों के सामने माफ कर दिया! हर कोई चकित था। स्वामीश्री तब स्वयं गाँव में आए और गाँव के दोनों पक्षों को लगातार दो दिनों तक समझा-बुझाकर शांत किया, आपसी क्षमा की भावना पैदा की और जलते हुए गाँव को प्रतिशोध की ज्वाला से बचा लिया । उस घटना के चश्मदीद आज भी कहते हैं: ‘अगर प्रमुखस्वामी महाराज न होते तो न जाने कितनी लाशें गांव के रास्ते पर आ जातीं!’

BAPS Swaminarayan Mandir, Mahelav

सौराष्ट्र में कुकड़ और ओदारका आदि 45 गाँवों के क्षत्रियों में, डेढ़ सौ वर्ष पूर्व चराई भूमि विवाद से प्रतिशोध की ज्वाला भड़क उठी थी। लगातार डेढ़ सौ वर्षों से हिंसा और जबरन वसूली की आग पीढ़ी दर पीढ़ी को जोर पकड़ रही थी। भावनगर के महाराजा कृष्णकुमार सिंहजी से लेकर ब्रिटिश नौकरशाहों और यहां तक ​​कि स्वतंत्र भारत के अधिकारियों तक ने इस वैर को कुचलने के कई प्रयास किए। लेकिन असफलता ने पीछा नहीं छोड़ा। 1980 के दशक में स्वामी जी ने इन क्षत्रियों में वरिष्ठ ऐसे सूत्रधार रामसंग बापू का जीवन परिवर्तित किया तबसे डेढ़ सौ साल पुराने प्रतिशोध से मुक्ति का सिलसिला शुरू हुआ।

स्वामी जी ने सभी को क्षमा का अमृत पिलाने का निरंतर प्रयास किया। दि. 12-4-1990 का दिन इतिहास में एक प्रेरणादायी दिन बन गया । डेढ़ सौ साल बाद पहली बार दोनों दलों के क्षत्रिय स्वामीश्री की छत्रछाया में एकत्रित हुए, आपसी प्रतिशोध को त्यागा, डेढ़ सौ साल बाद स्वामीश्री के हाथों एक दूसरे के गाँव का पानी पिया। उस समय क्षत्रिय नेता बोल उठे, ‘जो ब्रिटिश सरकार या भारत सरकार डेढ़ सौ साल में नहीं कर पाई, वह इस साधु ने कर दिखाया। यह काम केवल प्रमुख स्वामी महाराज ही कर सकते हैं।’

संत वो है जो मेल-मिलाप करता है। संत वो है जो सामंजस्य बनाता है। एक संत जो आपको सुखी करता है। प्रमुख स्वामी महाराज ऐसे ही एक संत श्रेष्ठ थे।

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