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Wednesday, September 9, 2026
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सोशल साइट पर हिट नेता हो सकते हैं यूपी में बीजेपी के कैंडीडेट!

Bureau@Navpravah.com
भाजपा के जो नेता सोशल नेटवर्किंग साइट्स से दूर हैं, उनके लिए यह बुरी खबर हो सकती है। क्योंकि भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट बांटने को लेकर उन्हें प्राथमिकता देगी, जो सोशल साइट्स पर ज़्यादा सक्रिय हैं।
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव में बीजेपी के जो नेता फेसबुक/ट्विटर पर ज़्यादा चर्चित हैं, उन्हें उम्मीदवार बनाया जा सकता है। चुनावी तैयारियों को लेकर हाल ही में सांस्कृतिक मंत्री महेश शर्मा के घर हुई बैठक में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने यह संकेत दिया।
यूपी चुनावी तैयारियों के सम्बन्ध में हुई बैठक में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री राजनाथ सिंह समेत यूपी के कई सांसद मौजूद थे। शाह ने कहा कि हर विधायक को सोशल मीडिया पर कम से कम 25 हजार और सांसद को कम से कम 50 हजार लोग फॉलो करने चाहिए। ये इशारा भी किया गया कि चुनावों में टिकट देते वक्त सोशल मीडिया पर मौजूदगी एक पैमाना हो सकता है।
इस बैठक में उपस्थित सभी सांसदों को पीएम मोदी ने फटकार भी लगाई। केंद्र की योजनाओं पर जब कोई जवाब नहीं दे पाया तो पीएम मोदी ने कहा कि केंद्र की योजनाओं को लेकर अपडेट रहे और उन्हें अमल में लाएं। साथ ही पीएम में सभी सांसदों की मूलभूत ज़िम्मेदारियों के प्रति सजग रहने की बात भी कही।

संविधान में ‘टोपी’ पहनना भी नहीं लिखा है -जावेद अख़्तर

AmitDwivedi@Navpravah.com
मंगलवार को राज्य सभा में सांसद असदुदीन ओवैसी को मुंहतोड़ जवाब मिला। राज्य सभा सदस्य जावेद अख्तर ने ओवैसी की भारत माता की जय न बोलने वाली बात का करार जवाब दिया। सांसद अख्तर ने कहा कि संविधान में तो शेरवानी और टोपी पहनने के लिए भी तो नहीं लिखा गया है।
मंगलावक़्क़र को राज्य सभा में सांसद जावेद अख़्तर ने ओवैसी पर तीखा प्रहार किया। अपने भाषण में पहले अख्तर ने तीन बार भारत माता की जय कहा, उसके बाद कहा कि कुछ लोगों को इस बात का झूठा गुमान है कि वे राष्ट्रीय स्तर के नेता हैं जबकि उनकी हैसियत एक मोहल्ले के नेता से भी बढ़कर नहीं है।
जावेद यहीं नहीं रुके, उन्होंने ओवैसी पर तंज़ कसते हुए कहा कि वे कहते हैं कि भारत माता की जय इसलिए नहीं बोलूंगा क्योंकि संविधान में नहीं लिखा है। उन्होंने कहा कि संविधान में तो टोपी और शेरवानी पहनना भी नहीं लिखा है। इतना बोलते ही सभी राज्यसभा सदस्यों ने जावेद के इस बात की मेज़ थपथपा कर सराहना की।
जावेद ने कहा कि संविधान में हर बात का ज़िक्र हो ज़रूरी नहीं। देश प्रेम हर किसी का अधिकार है, कर्त्तव्य है। इसे समझना ज़रूरी है।
अपने भाषण में जावेद अख्तर ने सत्ता पक्ष को भी निशाना बनाया। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसे नेताओं पर नियंत्रण लगाना होगा तो समाज में ज़हर फ़ैलाने का काम कर रहे हैं।

तो ये है हनी सिंह के 18 महीने गायब रहने का सच

Entertainment desk
बेहतरीन इंटरटेनर यो यो हनी सिंह लंबे समय के बाद जल्द लाइव परफार्म करते नज़र आएंगे। कम समय में ही हनी सिंह ने एक बेहतरीन मुकाम हासिल किया है। साल 2015 में हनी का गाना ‘धीरे-धीरे से मेरी ज़िन्दगी’ को काफी सराहा गया और यह गाना सबसे ज़्यादा देखे जाने वाली लिस्ट में भी शामिल हो गया।
क्या आप जानते हैं करीब 2 साल से यो यो हनी सिंह गायब हैं ? क्या इतने दिनों में उन्हें किसी ने देखा ! शायद नहीं। अपने करियर के पीक समय पर कोई स्टार ऐसे कैसे अंडरग्राउंड हो सकता है। यह सवाल किसी के गले नहीं उतर रहा है। 2015 में भी उनके कई गाने आए और हिट हुए, लेकिन वो पहले से तैयार कर लिए गए थे। तो सवाल यह उठता है कि आखिर हनी सिंह हैं कहां और क्यों वो अंडर ग्राउंड है ? उनके साथ क्या हो गया ?
आज यानी 15 मार्च को हनी सिंह का बर्थ डे हैं। पिछले साल भी उन्हें उनके बर्थ डे पर ट्रेस नहीं किया जा सका था। लेकिन इस बार हनी सिंह के सामने आए हैं उनके ये शब्द… “शेर अगर बीमार है, तब भी वो शेर ही होता है।“ सूत्रों के अनुसार हनी सिंह फिलहाल दिल्ली से सटे नोएडा के अपने घर में आराम कर रहे हैं। वे एक लंबी बीमारी से पूरी तरह से रिकवर कर चुके हैं। इस बार का बर्थ डे वैसे ही मनाएंगे जैसा वो 2 साल पहले मनाते थे।
18 मार्च को हनी सिंह का दुबई में एक बड़े अंग्रेजी समाचार समूह के कार्यक्रम में लाइव परफार्म करते नज़र आएँगे। हनी सिंह को बाइपोलर नामक मानसिक बीमारी हो गई थी। जिसे ठीक होने में करीब 18 महीने लग गए।
इस मामले में हनी सिंह ने कहा कि “मैं पिछले 18 महीने से लोगों और दुनिया से दूर हूं। मैं एक प्रकार से मानसिक वेदना का शिकार हो गया था। जिसके कारण मैने खूब शराब पी। हजारों लोगों के सामने बिंदास परफॉर्म करने वाला आपका हनी सिंह 4-5 लोगों से मिलने में कतराने लगा। तो खुद को नोएडा वाले घर के एक कमरे में बंद कर लिया। पिछले एक साल तो डॉक्टर्स की किसी भी दवा ने मुझ पर असर नहीं किया। एक मां ही थी जिसने मुझे गर्त में जाने से बचा लिया। मेरे लिए उसके चेहरे पर शिकन से मुझे आत्मग्लानि हुई और आज मैं अपने जीवन के उस काले अँधेरे से निकल आया हूं। मुझे यह सब बताने में कोई झिझक या शर्म महसूस नहीं हो रही है। क्योंकि मैं आज जो कुछ हूं अपने फैन्स की वजह से हूं।
हनी ने आगे कहा “गानों और फिल्म की रिकार्डिंग पहले से होने के कारण भले ही उन्हें न पता चले लेकिन लाइव परफॉर्मेंस और इतने दिनों तक कहीं नही निकलने से उन्हें तो हिंट हो गया होगा। तो मैं यही बता रहा कि मैं बहुत बीमार था और अब उस बीमारी से लौट आया हूं। वैसे भी शेर अगर बीमार हो तब भी वो शेर ही होता है। इस शेर ने इस दौरान काफी शायरियां भी लिखी है। फैन्स का साथ रहा तो इन्हें उनके सामने किताब के शक्ल में बाद में लाया जाएगा।”

आमिर ख़ान ने अपनी माँ को दिया ‘बचपन का घर’

Entertainment desk
सोमवार को आमिर खान ने अपने जीवन के 51 बसन्त पूरे कर लिए। ट्विटर से लेकर फेसबुक सभी जगह आमिर रविवार से ट्रेंड कर रहे हैं। मुम्बई में एक इवेंट के दौरान आमिर ने अपना बर्थडे केक भी काटा।
आमिर अपने लॉस एंजेलिस के लंबे टूर से समय निकालकर मुम्बई अपनी माँ के पास खास आये हैं। उनकी 80 वर्षीया माँ की ख्वाहिश थी कि इस बर्थडे में आमिर उनके पास ही रहें। इसलिए आमिर ने अपने काम को विराम देकर जन्मदिन मनाने माँ के पास आए।
आमिर ने अपने बर्थडे सेलिब्रेशन के दौरान ये ऐलान किया कि वो अपनी माँ ज़ीनत हुसैन को एक घर गिफ्ट करेंगे। घर और कहीं नहीं बल्कि शिव की नगरी बनारस में होगा। आपको बता दें कि ज़ीनत का बनारस से खास रिश्ता है। उनका पूरा बचपन बनारस की गलियों में बीता है। ज़ीनत हमेशा से बनारस जाती रहीं है। इसलिए आमिर का भी बनारस से एक इमोशनल रिलेशन बना हुआ है।
आमिर ने अपनी माँ के पैतृक घर को लेने की सारी फॉरमैलिटी पूरी कर ली है। आमिर, थ्री इडियट की बनारस में शूटिंग के समय से इस ओर लगे हुए थे। लेकिन आज जाकर घर का सपना पूरा हुआ है। बनारस में माँ के पैतृक घर को लेना हमेशा से आमिर का सपना तो रहा है और उनकी विश लिस्ट में सबसे ऊपर भी रहा।
आमिर का यह तोहफा ज़ीनत के लिए उनके जीवन के सबसे अनमोल तोहफों में से एक होगा। 80 की उम्र में  इंसान एक बार फिर से बच्चा बन जाता है तो इस बचपने को जीने के लिए फिर से वही घर, गलियां मिल जाए तो यह किसी जन्नत से कम नहीं।
आमिर खान ने कहा कि “मैं अपनी माँ को उनका पैतृक घर इसलिए देना चाहता हूँ कि मेरी माँ अपने बचपने को एक बार फिर से जिएं।

भुजबल की गिरफ्तारी, पूरे राज्य में एनसीपी कार्यकर्ताओं का विरोध, आज अदालत में पेशी

Bureau@Navpravah.com
महाराष्ट्र सदन घोटाले में पूर्व उप मुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नेता छगन भुजबल की गिरफ्तारी के बाद से ही महाराष्ट्र में राजनीतिक सरगर्मी देखी जा रही है। गिरफ्तारी ने बाद से ही महाराष्ट्र के विभिन्न इलाकों में भुजबल के समर्थकों का विरोध शुरू हो गया है। आज ईडी के विशेष अदालत में भुजबल की पेशी होगी।
एनसीपी के प्रमुख नेता छगन भुजबल की गिरफ्तारी से महाराष्ट्र में माहौल गरम गया है। भुजबल की गिरफ्तारी से एनसीपी की शाख़ पर भी असर पड़ता दिख रहा है। जिस समय यह घोटाला हुआ था उस समय भुजबल महाराष्ट्र सरकार में लोकनिर्माण विभाग मंत्री थे।
प्रवर्तन निदेशालय लंबे समय से भुजबल से पूछताछ कर रहा है। अंततः करीब 10 घंटे की लंबी पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद ही  एनसीपी नेता धनञ्जय मुंडे के घर पार्टी नेताओं नेआपात बैठक की। जिसमें आगे की रणनीतियों पर चर्चा हुई।
भुजबल की गिरफ्तारी पर एनसीपी नेता नवाब मलिक ने इसे प्रतिशोध की राजनीति बताया। उन्हीने कहा कि भाजपा ने भुजबल को जानबूझकर गिरफ्तार करवाया है। उन्होंने कहा कि जब भुजबल जांच में सहयोग कर रहे थे तो गिरफ्तारी की क्या आवश्यकता थी।
आज भुजबल की पेशी ईडी की विशेष अदालत में होगी।

नहीं बोलूंगा ‘भारत माता की जय’ – ओवैसी

Bureau@Navpravah.com
असदुद्दीन ओवैसी ने लातूर में आज एक विवादित बयान देकर नया बवाल खड़ा कर दिया। ओवैसी ने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि अगर कोई उनकी गर्दन पर छूरी रखकर भी भारत माता की जय बुलवाने की कोशिश करे तो भी वो भारत माता की जय नहीं बोलेंगे।
पिछले दिनों राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था कि अब युवाओं को भारत माता की जय बुलवाना भी सिखाना पड़ेगा। इसी बयान पर प्रतिक्रिया स्वरुप ओवैसी ने मौक़ा मिलते ही रोटी सेंकने से बाज़ नहीं आए। ओवैसी ने कहा ‘भागवत कहते हैं कि नई पीढ़ी को भारत माता की जय बोलना सीखाना होगा।’ ओवैसी ने भरे मंच से मोहन भागवत को चुनौती देते हुए कहा कि मैं भारत माता की जय नहीं बोलूंगा, आप क्या कर लेंगे ?
ओवैसी ने भारतीय संविधान को मोहरा बनाते हुए कहा कि संविधान में कहां लिखा है कि सभी को भारत माता की जय बोलना पड़ेगा? हालाँकि ओवैसी के बयान के बाद से ही सोशल साइट्स पर उनके विरोध में काफी बयानबाज़ी हो रही है।
हालाँकि इस मामले पर अभी तक आरएसएस और बीजेपी कहीं से भी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन मसले पर राजनीतिक छींटाकसी होने की पूरी संभावना है।

देश विरोधियों को सज़ा दिया जाना ज़रूरी – ऋचा सिंह

Anuj Hanumat@Navpravah.com,
पिछले कुछ समय से देश के कई विश्वविद्यालयों में विभिन्न आंदोलनों के चलते अध्ययन व अध्यापन काफी प्रभावित हुआ है। जिन छात्रों को अपनी राजनीति चमकाने का मौक़ा मिल रहा है, उनकी तो चांदी है, लेकिन ऐसे छात्र जिन्हें सिर्फ पढ़ाई से मतलब है, वे काफी परेशान नज़र आ रहे हैं। हैदराबाद विश्वविद्यालय से विरोध की उठती आग पहले जेएनयू पहुँची और लगभग उसी तर्ज़ पर अब इलाहाबाद विश्वविद्यालय की स्थिति भी बिगड़ती नज़र आ रही है। विश्वविद्यालय की वर्तमान स्थिति को लेकर हमारे संवाददाता अनुज हनुमत ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय की छात्र संघ अध्यक्षा ऋचा सिंह से बात की । प्रस्तुत है उनसे हुई बातचीत के प्रमुख अंश-
प्रश्न.1 आप अभी जेएनयू से होकर आई हैं । जेएनयू में जो कुछ हुआ,क्या आप उसका समर्थन करती हैं ?
ऋचा- जेएनयू में जो घटना हुई है हम सभी उसका खंडन करते हैं और उसके प्रति अफ़सोस भी जाहिर करते हैं,लेकिन जिस तरीके से पूरे विश्वविद्यालय को निशाना बनाया गया और उसमें कुछ छात्रों को फंसाया गया हम इसकी निंदा करते हैं। लेकिन हाँ उस घटना के लिए अफ़सोस है और अगर किसी ने ये कृत्य किया है तो उसको सजा दी जानी चाहिए , लेकिन पूरे विश्वविद्यालय को निशाना न बनाया जाए।
प्रश्न.2 वि.वि. ‘राजनीति का अखड़ा’ हो गए हैं । क्या यह छात्रों के लिए ठीक है ? खासकर ऐसे समय में जब भारतीय राजनीति में विकास केंद्र में है ?
ऋचा-  विश्वविद्यालयों को राजनीति का अखाड़ा कहना गलत है। मुझे तो लगता है की वि.वि. ही एक ऐसा स्थान है जहाँ पर विद्यार्थियों का ‘राजनीतिकरण’ होना चाहिए क्योंकि विद्यार्थी ही देश का भविष्य हैं और ‘राजनीतिकरण’ का मतलब सिर्फ चुनाव लड़ना नहीं होता, बल्कि पूरी राजनीतिक प्रक्रिया को समझना होता है और वि.वि. को अपने विद्यार्थियों को ऐसा माहौल देना चाहिए जहाँ उन्हें हर तरीके की राजनीतिक पृष्ठभूमि या राजनीतिक विचारधाराओं को समझने का मौका मिले, क्योंकि आप मत देकर इस देश की राजनीतिक प्रक्रिया में भी शामिल होते हैं. इसलिए राजनीतिकरण जरुरी है ।लेकिन हाँ,मैं ये मानती हूँ की जिस तरीके से राजनीतिक पार्टियों ने  वि.वि. व उसकी कार्यप्रणाली में दखल दिया है वो नहीं होना चाहिए. वहां के छात्रों को तय करना चाहिए की किस तरीके से वि.वि. की राजनीति छात्र हितों के लिए होगी और देशहित में होगी ।
प्रश्न.3 आप निर्दलीय हैं और जीती हैं। क्या आप विचारों से भी निष्पक्ष हैं ? आपका झुकाव तो वामपंथ की ओर दिखाई देता है ?
ऋचा- मैं इस बात को नहीं मानती कि वामपंथ की ओर मेरा झुकाव है और न ही दक्षिणपंथ की ओर।  मैं उन लोगों के ज्यादा खिलाफ हूँ जो दक्षिणपंथी विचारधारा के हैं,जिसमें साम्प्रदायिकता को जगह दी जाती है, जिसमें विशेष तरीके के वर्गों को दबाने की बात की जाती है . मैं उसके खिलाफ हूँ। मेरा झुकाव न तो दक्षिणपंथ की तरफ है और न ही वामपंथ की तरफ। मैं सिर्फ विद्यार्थी हूँ और हालफिलहाल मैं छात्र राजनीति में हूँ । मैं छात्र हितों और छात्र मुद्दों की राजनीति कर रही हूँ।
प्रश्न.4 इलाहाबाद वि.वि. की समस्याएँ क्या हैं ? छात्र संघ अध्यक्ष के रूप में आप इसके लिए क्या प्रयास कर रही हैं ?
ऋचा- हमने चुनाव प्रचार के दौरान भी कहा था कि यहाँ की मूलभूत समस्याएं बहुत हैं। आप जब वि.वि. को देखेंगे तो यहाँ कैंटीन की समस्या है खासकर हमारी सारी फैकल्टीज में कैंटीन नहीं है। शौचालय की बहुत बड़ी समस्या है ।लाइब्रेरी से किताबें नही आबंटित होती है ,बसों की उचित व्यवस्था नहीं है. हम छात्रहितों की लड़ाई लड़ रहे हैं और हम लोग इसके लिए लगातार लगे हुए हैं। हमने यूजीसी के फेलोशिप के लिए भी आंदोलन किया । यह बात सही है की पहली बार महिला छात्रसंघ अध्यक्ष के रूप में कैम्पस ने हमें सहयोग नहीं दिया ।हमने कैम्पस को बहुत सारे प्रोजेक्टस छात्र हितों में बनाकर दिए हुए हैं जो कई बार दिखाई नहीं पड़ते हैं लेकिन कैम्पस में वि.वि. प्रशासन ने उसे जगह जगह रोक कर रखा है । जब मैं चुनकर आई तो सबसे पहले सभी विभागों में जाकर वहां के शौचालयों को खुलवाया तो कई लोगों ने कहा की छात्र संघ अध्यक्ष की ये गरिमा नहीं होती है कि वो जाकर शौचालय खुलवाए ।लेकिन मैं मानती हूँ की ये छात्रहित और छात्र मुद्दों की बात है । इसी तरह हमने रैम्प की बात कही थी और लाइब्रेरी के बाहर रैम्प बनाया गया । दूर-दराज स्थानों से आने वाले छात्रों के लिए बसों की बहुत दिक्कत थी हमने प्रदेश सरकार से मांग की और माननीय मुख्यमन्त्री अखिलेश यादव जी ने छह बसों की व्यवस्था कर दी है जिसमें छात्रों को केवल अपना पहचान पत्र दिखाना होगा ।
प्रश्न.5 क्या हर तरह की सरकारों ने अपनी विचारधारा को छात्रों और पाठ्यक्रमों पर थोपने की कोशिश नहीं की है ? आप इससे कहाँ तक सहमत हैं ? हाल ही में एचआरडी मिनिस्टर स्मृति ईरानी ने तत्कालीन यूपीए सरकार द्वारा स्कूली पाठ्यक्रम में शिक्षा के बदलाव को लेकर जो कहा ,उससे सहमत हैं ?
ऋचा- देखिये किसी भी सरकार को या राजनीतिक पार्टी को देश के इतिहास के साथ खिलवाड़  नहीं करना चाहिए . इससे हम बिलकुल भी सहमत नही हैं । देश के इतिहास के साथ या पाठ्यक्रमों के साथ  विचारधारा के आधार पर खिलवाड़ करना या निकाल देना , ये गलत परम्परा को बढ़ावा देना है।
प्रश्न -6 यदि आप तटस्थ हैं तो फिर FTTI के मुद्दे पर आप क्या सोंचती हैं ?
ऋचा- जी बिल्कुल. इस मुद्दे पर मेरा मानना है कि किसी भी संस्था का मुख्य तत्व विद्यार्थी है और अगर FTTI के विद्यार्थी उस नियुक्ति से संतुष्ट नही हैं तो वि.वि. को या किसी संस्था को चलाने के लिए जरुरी है कि विद्यार्थियों की बात मान ली जाए. एक कोई छात्रों का ग्रुप विशेष हो तो वो किसी पूर्वाग्रह से ग्रसित हो सकता है पर जब पूरा वि.वि. या संस्था उस बात का समर्थन करे,तो मनना ही चाहिए. यह बात सही है की कहीं न कहीं FTTI में जिस व्यक्ति को भेजा गया वो उस संस्था के लिए उपयुक्त नहीं थे। उनसे बेहतर व्यक्ति हो सकते थे । सरकार जब जबरदस्ती करके किसी संस्था में  हस्तक्षेप करती है,तो वो खतरनाक होता है।
प्रश्न -7 अभी हाल में ही आपको यूपी सरकार द्वारा रानी लक्ष्मी बाई वीरता पुरस्कार दिया गया है । क्या आपको नहीं लगता है कि ये पुरस्कार आपको राजनीति से प्रेरित होकर दिया गया है?
ऋचा-जी नहीं. ये पृरुस्कार मुझे मेरे संघर्षों के लिए दिया गया है ।  इसमें कोई राजनीति नहीं है ।

उत्तराखंड में प्रदेश सरकार का भारी विरोध, भाजपा कार्यकर्ता उतरे सड़क पर

नारायण सिंह ‘रघुवंशी’ ब्यूरो, देहरादून
उत्तराखंड में प्रदेश सरकार पर भ्रष्टाचार समेत विभिन्न आरोप लगाते हुए भाजपा कार्यकर्ताओं ने विधानसभा कूच किया। इस दौरान हरिद्वार रोड स्थित एलआइसी चौक पर पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें आगे बढ़ने से रोका, लेकिन कार्यकर्ता इसे तोड़ते हुए आगे बढ़ गए।
भाजपा की रैली से हरिद्वार रोड पर जाम लग गया।
भाजपा ने राज्य सरकार की राज्य विरोधी नीतियों, युवा विरोधी नीतियों, खनन घोटाला, आपदा राहत घोटाला, कानून व्यवस्था के बुरे हाल, सरकार पर राज्य को बेचने समेत विभिन्न आरोप लगाते हुए विधान सभा कूच का ऐलान किया है।
दोपहर एक बजे रेसकोर्स स्थित बन्नू स्कूल से भाजपा कार्यकर्ताओं ने विधानसभा कूच किया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट, पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडू़ड़ी समेत भाजपा के बड़े नेता इस कूच में शामिल हैं।
हरिद्वार रोड पर एलआइसी चौक पर पुलिस की ओर से लगाई गई दो बैरिकेडिंग को तोड़कर कार्यकर्ता आगे बढ़ गए। इस दौरान उनकी पुलिस के धक्का-मुक्की भी हुई।

उत्तराखंड में ओलावृष्टि, कई मार्ग बंद

नारायण सिंह देहरादून
उत्तराखंड में चारधाम समेत चोटियों पर बर्फबारी और निचले इलाकों में कहीं हल्की तो कहीं मध्यम वर्षा के चलते ठंडक लौट आई है। कुछेक स्थानों पर ओलावृष्टि भी हुई। पहाड़ में तो ठिठुरन जैसी स्थिति है। बदरीनाथ हाईवे पर पीपलकोटी जोशीमठ के बीच पाताल गंगा में मलबा आने से सड़क बंद हो गई थी, जिससे खोल दिया गया है।
बीते रोज खराब मौसम के कारण हेलीकाप्टर से कर्णप्रयाग जा रहे मुख्यमंत्री हरीश रावत भी आधे रास्ते से वापस लौट आए। उधर, मौसम विभाग के अनुसार आज भी सूबे में मौसम का यही रंग नुमायां हो सकता है। कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश तो 3500 मीटर और इससे अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फ गिरने की संभावना है।
विभाग ने चेतावनी भी जारी की है कि आज सुबह अगले 12 घंटों तक राज्य में कहीं-कहीं ओलावृष्टि और झक्कड़ के आसार हैं। मौसम विभाग का पूर्वानुमान सही साबित हुआ। बीती 11 मार्च की रात से ही उत्तराखंड के अधिकतर इलाकों में बूंदाबांदी के साथ ही तेज हवाएं चलीं। इससे कई क्षेत्रों में पेड़ उखड़ गए और बिजली गुल हो गई। बीते रोज सुबह भी मौसम के मिजाज में कोई बदलाव नहीं हुआ।
पहाड़ से लेकर मैदान तक झमाझम मेघ बरसे। वहीं, आज बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के अलावा हेमकुंड, द्यारा बुग्याल, डोडीताल, गोरसों, नंदा देवी, नीलकंठ कामेट, तुंगनाथ, मदमहेश्वर तथा कुमाऊं के मुनस्यारी की ऊंची चोटियों ने बर्फ की चादर ओढ़ ली। मौसम में आई तब्दीली से पारा लुढ़क गया और लोगों को तपिश से राहत मिली।

35 हजार स्वास्थ कर्मचारी हड़ताल पर, खून से लिखा राष्ट्रपति को खत

Bureau@navpravah.com
मध्य प्रदेश के 35000 संविदा स्वास्थ्य कर्मी अनिश्चित कालीन हड़ताल पर पिछले  13 दिनों से बैठे हुए हैं. प्रदेश के 51 जिलों में गत 29 फरवरी  से ये हड़ताल जारी है जिस कारण इमरजेंसी छोड़ बड़े स्तर पर सेवाएँ प्रभावित हैं.
             संविदा स्वास्थ्य कर्मी, मयंक चतुर्वेदी और उनके साथी जो फूलबाग, ग्वालियर स्थित गाँधी उद्यान, धरना स्थल पर पिछले 11 दिनों से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं, उन्होंने बताया कि, संविदा पर कम कर रहे इन स्वास्थ्य कर्मियों की मांगों को लम्बे समय से शासन द्वारा पूरा न किये जाने को लेकर ये कदम उठाया गया है. सुप्रीम कोर्ट के एक आर्मी  स्कूल मामले में आदेशानुसार संविदा जैसा कुछ होता ही नहीं है, बल्कि इन्हें अतिथि कहा जाता  है जो केवल कुछ दिनों के लिए कर्मचारी के तौर पर विभागों में आते हैं.
    उन्होंने ये भी बताया कीइस अनियमितता से क्षुब्ध होकर अनुराधा टेकाम (ANM), बिछिया ब्लॉक ,जिला मंडला में 4 फरवरी को फांसी  लगाकर  आत्महत्या कर ली. इस घटना से सम्पूर्ण संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ क्षुब्ध है, तथा शासन द्वारा लगातार उनकी बातों की अनसुना किये जाने के बाद ही वो इस अनिश्चितकालीन हड़ताल के निर्णय पर पहुंचे हैं.
            हड़ताल पर बैठे म.प्र. के स्वास्थ्य विभाग एवं विभिन्न परियोजनाओं के अंतर्गत कार्यरत समस्त संविदा कर्मचारियों की प्रमुख मांगे हैं, कि शिक्षा विभाग की भांति स्वास्थ्य विभाग परियोजनाओं में कार्यरत कर्मचारियों को एक निश्चित अवधि के बाद नियमित रूप से नियुक्त किया जाये तथा इस सम्बन्ध में नियमावली भी तैयार की जाए. मांगों को लेकर एक विस्तृत पत्र एम्.एस.बघेल,जिला अध्यक्ष,संविदा स्वास्थ कर्मचारी संघ मध्य प्रदेश जिला ग्वालियर की ओर से ज्ञापित किया गया है.
9 फरवरी को मयंक सहित  उनके साथियों ने भारत के माननीय राष्ट्रपति महोदय को अपने खून से पत्र लिखे जिनमे उन्होंने वर्षों से सेवारत संविदा कर्मियों को स्थायी पद्नियुक्त किये जाने की गुजारिश की या फिर उन्होंने स्वयं के लिए इच्छामृत्यु अनुमति की मांग की है.