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Friday, September 11, 2026
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“पिछड़ते पाकिस्तान की वैश्विक दुर्गति के लिए जिम्मेदार कौन!”

रत्नेश मिश्रा | Navpravah Desk

जहां भारत समेत पूरी दुनिया एक अत्यंत खतरनाक लाइलाज बीमारी , कोरोना संक्रमण से जूझ रही है जिससे पाकिस्तान भी अछूता नहीं है, ऐसी अवस्था में भी पाकिस्तान भारत के खिलाफ़ साजिश रचने की अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है।

शुरुआती दिनों में जब कोरोना त्रासदी चीन से होते हुए पूरी दुनिया में फैल रही थी तब यूरोपीय और अमरीकी देशों ने इस वायरस को अत्यंत गंभीरता के साथ नहीं लिया जिसका दुष्परिणाम इन देशों को देखने को मिला। जिसे देखते हुए भारत सरकार ने तत्काल 136 करोड़ की विशाल आबादी को देखते हुए बहुत जल्द महत्वपूर्ण फैसले लिए, ताकि भारत की इस विशाल आबादी को संक्रमण से बचाया जा सके। इन प्रयासों की तारीफ स्वयं WHO (वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन) ने भी की। मजबूत इच्छाशक्ति रखने वाली भारत सरकार ने तत्काल चीन समेत दुनिया के कई देशों में फंसे हुए भारतीय नागरिकों को बचाने के लिए “मिशन वंदे मातरम” शुरू किया। जिसके तहत दुनिया भर के देशों में फंसे हुए भारतीय नागरिकों को बचाया गया। भारत सरकार के द्वारा अपने नागरिकों को वापस लाने की इस मुहिम को देखकर दूर देशों में फंसे हुए पाकिस्तानी नागरिकों को भी अपने देश पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान से भी बहुत उम्मीद जगी। बदले में इमरान खान ने पाकिस्तानी नागरिकों को बचाने से यह कहकर इनका कर दिया कि, ‘इस समय जब चीन भयंकर बीमारी से जूझ रहा है, ऐसे में हम अपने परम मित्र चीन को अकेला कैसे छोड़े!’ अर्थात पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने अपने नागरिकों से साफ साफ कहा कि जो जहां है वहीं रहे और चीन के प्रति पाकिस्तान की मित्रता के प्रति कायम रहे। असल में ऐसा कह कर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने अपनी असमर्थता को छुपाने का प्रयास किया।

दरअसल पाकिस्तान के अंदरूनी आर्थिक हालात इतने खराब हो चुके हैं कि पाकिस्तान सरकार किसी भी तरह से अपने विदेशों में फंसे हुए 28000 से भी अधिक नागरिकों को ला पाने में असमर्थ है। पाकिस्तान के अंदर इतनी भी क्षमता नहीं कि वह अपनी विमानों में इंधन तक भरवा सके। इसी कारण से पाकिस्तान अपने नागरिकों को बचा नहीं पा रहा है। विदेशों में फंसे हुए नागरिकों को तो छोड़िए पाकिस्तान ने चीन से अपनी मित्रता के चलते आने-जाने वाले किसी भी व्यक्ति को पाकिस्तान में घुसने तक से नहीं रोका, जिस कारण पाकिस्तान में कोरोना संक्रमण बहुत तेजी के साथ फैला।

इसका एक प्रमुख कारण पाकिस्तान और चीन का ड्रीम प्रोजेक्ट CEPC (China–Pakistan Economic Corridor) भी है, जिसके चलते पाकिस्तान और चीन दोनों के ही अरबों रुपए इसमें फँसे हुए हैं। इसीलिए पाकिस्तान ने चीन से आने-जाने वाली किसी भी नागरिक को नहीं रोका जो पाकिस्तान में संक्रमण के तेजी से फैलने का प्रमुख कारण है।

दूसरी वजह यह है कि पाकिस्तान POK अर्थात पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर पर अपना सम्पूर्ण आधिपत्य जमाने का प्रयास कर रहा है। पाकिस्तान इसके लिए बड़ी तेजी के साथ पाक सेना से रिटायर हो चुके अपनी कई अधिकारियों और सैनिकों को PoK में बसाकर पाकिस्तान की डेमोग्राफ़ी चेंज करने का प्रयास कर रहा है। साथ ही पाकिस्तान की सरकार CEPC प्रोजेक्ट में लगे हुए कई श्रमिकों को भी PoK में बसा रहा है। पाकिस्तान PoK के नागरिकों के लाख विरोध के बावजूद भी कई चीनी कंपनियों को PoK की जमीन लीज़ पर दे रहा है।

“इसके साथ-साथ पाकिस्तान जानबूझकर PoK में कई कोरोना पॉजिटिव मरीजों को भी ला रहा है ताकि वहाँ के असल नागरिकों को दबाकर, डरा-धमका कर PoK को पाकिस्तान का हिस्सा बना सके। पाकिस्तान की चालबाजी इतने में ही नहीं रुक रही है। पाकिस्तान कोरोनावायरस त्रासदी के दौरान भी भारत के खिलाफ नई-नई साजिशें रचने से बाज नहीं आ रहा, जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण अभी हाल ही में देखने को मिला, जहां एक तरफ पूरी दुनिया इस भयंकर बीमारी से लड़ने का प्रयास कर रही है, इलाज खोजने का प्रयास कर रही है वहीं पाकिस्तान भारत के खिलाफ तमाम अंतरराष्ट्रीय मंचों का उपयोग भारत के खिलाफ सभी देशों को भ्रमित करने और झूठ फैलाकर भारत को बदनाम करने के लिए इस्तेमाल कर रहा है। हाल ही में भारत समेत दक्षिण एशियाई देशों के संगठन सार्क की ऑनलाइन बैठक के दौरान भी, पाकिस्तान ने इस मंच का उपयोग भारत से अपनी निजी दुश्मनी को दिखाने के लिए किया।”

इस सम्मेलन में भारत समेत पाकिस्तान, अफगानिस्तान, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, बर्मा, मालदीव आदि देशों के प्रधानमंत्री सम्मिलित हुए। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान इस सम्मेलन की अहम ऑनलाइन बैठक में सम्मिलित नहीं हुए और अपनी जगह मंत्रिमंडल के किसी अन्य नेता को भेजा। उस नेता ने भी कोरोना की बीमारी से निबटने के लिए आयोजित की गई इस ऑनलाइन सभा में भी दक्षिण एशियाई देशों के सामने कश्मीर का रोना रोने के अलावा और कुछ भी नहीं किया। इस दौरान भारत के प्रधानमंत्री ने संयम का परिचय देते हुए पाकिस्तान के मंत्री को टोका तक नहीं और उसको अपनी पूरी बात कर लेने दी। अगर भारत के प्रधानमंत्री चाहते तो वह उसी समय पाकिस्तान को ऑफलाइन कर सकते थे जो कि उन्होंने बिल्कुल नहीं किया। हालांकि पाकिस्तान का कोरोना आपदा से निपटने के लिए बुलाई गई सार्क देशों की इस ऑनलाइन मीटिंग में भारत के खिलाफ अपनी साजिश भी काम नहीं आयी और एक बार फिर से पाकिस्तान को मुह की खानी पड़ी। फिर भी पाकिस्तान अन्य कई अंतर्राष्ट्रीय मंचों का उपयोग, भारत के खिलाफ साजिशें रचने में इस्तेमाल करता आया है। अभी हाल ही में पाकिस्तान ने कोरोनावायरस से अपने देश को बचाने के लिए अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए, इस्लामिक देशों के संगठन से आर्थिक सहायता मांगी और दूसरी तरफ भारत के खिलाफ सभी इस्लामिक देशों को भड़काने का भी प्रयास किया। पाकिस्तान ने सभी इस्लामिक देशों को भारत के खिलाफ ‘इस्लामोफोबिया’ के नामपर डराने का प्रयास किया। इसके लिए पाकिस्तान ने अपने देश में बनाए गए झूठे प्रोपेगेंडा वीडियोज़ और झूठे सोशल नेटवर्किंग साइट्स के पेजेस का इस्तेमाल, भारत को बदनाम करने कि नीयत से किया। पाकिस्तान में बने, यमन की राजकुमारी के फ़र्ज़ी फेसबुक अकाउंट के माध्यम से भारत में इस्लामोफोबिया का डर दिखाने का प्रयास किया। हालांकि पाकिस्तान की यह साजिश भी नाकाम हो गई जब स्वयं यमन की राजकुमारी ने इस बात का खंडन कर दिया। पाकिस्तान ने भारत में कोरोना काल के दौरान भारतीय मुसलमानों के प्रति भी प्रोपेगैंडा फैलाया। बीजेपी की हिंदूवादी आरएसएस की विचारधारा वाली सरकार भारत के मुसलमानों पर धार्मिक अत्याचार कर रही है, ऐसा झूठ भी फैलाने का प्रयास किया। पाकिस्तान के विदेश मंत्री महमूद कुरैशी के अनुसार, “भारत में मुसलमानों के साथ अत्याचार हो रहा है, उन्हें धार्मिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है और हॉस्पिटलों में सही तरीके से इलाज नहीं किया जा रहा है। उन पर झूठी एफआईआर दर्ज कराई जा रही हैं, मारा-पीटा जा रहा है।” पाकिस्तान के मंत्री ने ऐसी बातों करके मुस्लिम देशों के संगठनों को भ्रमित करने का प्रयास किया। हालांकि भारत सरकार ने पाकिस्तान की इस झूठी चाल चलने नहीं दी और कुछ ही घंटों के अंदर पाकिस्तान के इस झूठ का पर्दाफाश किया।

गौरतलब यह है कि पाकिस्तान असल में क्या चाहता है! एक तरफ जहां पूरी दुनिया इस संक्रमण से जूझ रही है, वहीं पाकिस्तान ऐसी अवस्था में भी भारत के खिलाफ साजिशें कैसे रच सकता है इसका एक और उदाहरण देखने को हाल ही में मिला जब पाकिस्तान कोरोना संक्रमण को भी भारत के खिलाफ एक जैविक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने का प्रयास कर रहा है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण भारतीय मीडिया जी न्यूज के हवाले से प्राप्त हुआ है। ज़ी न्यूज़ चैनल के मुताबिक भारतीय सेना ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में चल रहे आतंकी , शिविर में से एक आतंकवादी की अपने पिता से की जा रही ऑडियो टेप इंटरसेप्ट की। इसमें एक पाकिस्तानी आतंकवादी अपने पिता से फोन पर बातचीत में कह रहा है कि, “पाकिस्तान की सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई उन्हें भारत में घुसपैठ कराने की तैयारी कर रही है। यहां मेरी तबीयत ठीक नहीं है, मेरे कई साथी कोरोना से संक्रमित हैं। हमें पाकिस्तान की सेना, सरकार और आईएसआई एजेंसी ने कोई भी दवाई उपलब्ध नहीं कराई है। इसके अलावा वह हमें भारत में घुसपैठ कराने की ट्रेनिंग और हथियार मुहैया करा रहे हैं।” इस ऑडियो टेप के भारत सरकार के हाथ लगने से, पूरी दुनिया के सामने फिर से पाकिस्तान बेनकाब हुआ है। पूरी दुनिया यह जान चुकी है कि, पाकिस्तान ऐसी विषम परिस्थिति में भी भारत के खिलाफ साजिश रचने से बाज नहीं आ रहा है।

पाकिस्तान भारत को क्षति पहुंचाने चोट पहुंचाने के लिए किसी भी हद से गुजर जाने को तैयार रहता है। हालांकि पाकिस्तान कितना भी प्रयास क्यों ना कर ले, भारतीय सेना उसके इन प्रयासों को हमेशा की तरह विफल करती रहेगी।

भारत सरकार और भारतीय सेना, एलाइट मोड पर है ताकि किसी भी कीमत पर संक्रमण से ग्रस्त कोई भी आतंकी सरहद के इस पार न आने पाए। क्योंकि पाकिस्तान कहीं ना कहीं चाह रहा है कि भारत में बैठे हुए चंद पाकपरस्त लोग, इन आतंकवादियों की मदद करेंगे। निश्चित रूप से संक्रमित आतंकवादियों द्वारा इन लोगों की मदद करने वाले व्यक्तियों को वह संक्रमित करेंगे। इस प्रकार पाकिस्तान भारत में कोरोनावायरस को सामुदायिक संक्रमण का रूप देने का प्रयास करना चाह रहा है। लेकिन पाकिस्तान की यह चाल भी नहीं चलने वाली क्योंकि भारत का कोई भी नागरिक पाकिस्तान के किसी भी आतंकवादी को ऐसी किसी भी प्रकार की मदद नहीं देने वाला। आतंकी रियाज नाइकू के मारे जाने के बाद पाकिस्तान को यह बात समझनी चाहिए कि ऐसी विषम परिस्थिति में भी भारत के खिलाफ साजिश रचने से वह अपने देश को कोरोनावायरस के संक्रमण से बचा नहीं सकता। पाकिस्तान के नागरिकों को यह बात समझनी चाहिए इस समय भारत के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखने में ही पाकिस्तान की भलाई है। मुसीबत की इस घड़ी में चीन पर भरोसा करके पाकिस्तान ने बहुत बड़ा धोखा खाया है। जिस चीन के मत्थे पाकिस्तान, भारत को उंगली दिखाने का प्रयास करता है, उसी चीन ने पाकिस्तान को, सबसे बड़ा धोखा दिया है। पाकिस्तान में कोरोना से लड़ने के लिए चीन से जो किट मांगी थी वह पूरी तरीके से एक्सपायर्ड और इस्तेमाल की हुई थी। पाकिस्तान की सरकार ने बिना देखे इन्हें देश के तमाम हॉस्पिटलों तक हस्तांतरित कर दिया। पैकेट खोले जाने पर चीन के इस धोखे का पता चला जिसमें एक्सपायर्ड दवाइयां, नकली पीपीई किट निकलीं, और अंतर्वस्त्र से बने हुए मास्क पाए गए। इस धोखे के बावजूद भी भारत से अपनी दुश्मनी के चलते पाकिस्तान सरकार यह नहीं समझ पा रही कि इस विपदा की घड़ी में उसके परम मित्र चीन से ज्यादा मददगार सिर्फ भारत ही हो सकता है। ऐसे में पाकिस्तान की जनता को चाहिए कि वे अपनी कठपुतली इमरान खान सरकार को कहे कि, वह भारत से मदद मांग ले जिससे भारत बिना देरी किए मानवता के आधार पर पाकिस्तान की मदद कर सके। यदि पाकिस्तान ऐसा नहीं करता है तो निश्चित रूप से पाकिस्तान को बर्बाद होने से कोई नहीं बचा सकता। पाकिस्तान अपनी बर्बादी के लिए स्वयं जिम्मेदार होगा। अब पाकिस्तान के ऊपर निर्भर करता है कि वे भारत से मदद मांगे या ना मांगे लेकिन भारत विरोधी मानसिकता से ग्रसित पाकिस्तान की सरकार ऐसा करेगी या नहीं, इसका फैसला पाकिस्तान की कठपुतली इमरान खान सरकार ना करके, पाकिस्तानी सेना और वहां की खुफिया एजेंसी आईएसआई के साथ कई आतंकवादी संगठन मिलकर करेंगे। क्योंकि इमरान खान इनके हाथों की एक कठपुतली मात्र है।

असल फैसला लेने का अधिकार पाकिस्तान की सेना और आईएसआई एजेंसी को ही है। पाकिस्तान के आर्थिक हालात इतने अच्छे नहीं है कि वह अपने बलबूते पर इस बीमारी से लड़ सके और स्वयं को बचा सके। पाकिस्तान सरकार ने प्रयास तो किया, अपने देश में संक्रमण को फैलने से रोकने का, परंतु पूरी तरीके से नाकामयाब हुए। क्योंकि स्वयं इमरान खान नेशनल टेलीविजन पर आकर कह चुके हैं, ‘एक तरफ अगर हम लोगों को कोरोना से बचाते हैं तो दूसरी तरफ लोग भूख से ही मर जाएंगे।’ अर्थात इमरान खान सरकार के पास अपनी जनता को बचाने के कोई ठोस नियम या उपाय नहीं है।

दरअसल पाकिस्तान की जनता भी इमरान खान सरकार के बनाए गए नियमों की अनदेखी कर रही है, और कहती है, ‘कोरोना वायरस से मरे या ना में भूख से जरूर मरेंगे।’ इतना ही नहीं इमरान खान यह जानते हुए भी कि यह वायरस इंसान से इंसान में फैलता है, और इसके लिए सोशल डिस्टेंस का पालन करना बहुत जरूरी है, के बावजूद लोगों को सामूहिक रूप से एकत्रित होने से रोक पाने में नाकाम सिद्ध हो रही है। इसका उदाहरण रमजान के पवित्र महीने में कठपुतली इमरान खान सरकार ने अपने देश के कट्टर मानसिक विचारधारा वाले मौलानाओं के दबाव में आकर देश की सभी मस्जिदों को खोल दिया है। जिससे भारी मात्रा में भीड़ एकत्रित होने का खतरा और ज्यादा बढ़ गया है। जिस कारण पूरे देश में संक्रमण ज्यादा तेजी के साथ फैल सकता है।

यह बात जानते हुए भी स्वयं इमरान खान सरकार ने कट्टरवादी ताकतों के आगे झुक कर इस बात की इजाजत दे दी। इमरान खान स्वयं ये जानते हैं कि, जब हम इलाज ही नहीं कर सकते तो स्क्रीनिंग करने या क्वारंटाइन सेंटर बनाने का खर्चा ही क्यों उठाया जाए। इसी के जवाब में इमरान खान सरकार ने 80 एकड़ का एक विशालकाय कब्रिस्तान बना दिया है। उन्हें पता है कि हम कुछ भी कर लें , हम पूरे तरीके से पाकिस्तान को कोरोनावायरस से मुक्त नहीं कर सकते और शायद यही कारण है कि भारत से अपनी नफरत के चलते पाकिस्तान हर हाल में भारत के ख़िलाफ़ साजिशें रचने से और अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है।

यह आज से नहीं बल्कि जब से पाकिस्तान का जन्म हुआ है, वह भारत को किसी न किसी तरीके से चोट पहुंचाने का प्रयास करता ही रहा है और मुह की खाता रहा है। अभी भी समय है, पाकिस्तान समझे कि यह समय भारत से नफरत का नहीं बल्कि भारत जैसे अत्यंत जिम्मेदार देश से, अपने देश के हालात को देखते हुए मदद मांगे। ऐसा करके पाकिस्तान की इमरान खान सरकार अपने देश के अस्तित्व को खत्म होने से बचा सकती है। भारत उसकी मदद मानवता के आधार पर करेगा। यदि वक्त रहते पाकिस्तान कोरोना संक्रमण पर लगाम नहीं लगा पाता है तो एक अनुमान के मुताबिक पाकिस्तान में लगभग डेढ़ करोड़ लोग बेरोजगार हो जाएंगे और, पहले से ही गरीबी से जूझ रहे पाकिस्तान में तकरीबन 7.30 करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे आ जाएंगे।

( लेखक समाजसेवी, स्तंभकार, व राजनीतिक जानकार हैं, उक्त लेख उनके निजी विचार हैं।)

सीतामढ़ी: लॉकडाउन में चीनी मिल की मनमानी, निकाले गए 600 मज़दूर

सीतामढ़ी: लॉकडाउन में चीनी मिल की मनमानी, निकाले गए 600 मज़दूर
सीतामढ़ी: लॉकडाउन में चीनी मिल की मनमानी, निकाले गए 600 मज़दूर

सुजीत कुमार मिश्रा | navpravah.com

बिहार के सीतामढ़ी जिले में मज़दूरों को रीगा चीनी मिल से निकाले जाने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि मिल प्रबंधन की मनमानी चरम पर है। मिल प्रबंधन ने रविवार देर शाम बिना कोई सूचना के सभी कामगारों को 2 महीने के लिए काम से हटा दिया है। लॉकडाउन के दौरान लिए गए इस निर्णय से कामगारों में हड़कंप मच गया है।

सीतामढ़ी के इस चीनी मिल में लगभग ६०० मज़दूर काम करते हैं। प्रबंधन के इस निर्णय से मज़दूरों पर कहर टूट पड़ा है। प्रबंधन की ओर से 11 मई से 11 जुलाई तक सभी तरह की सेवाओं पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है। प्रबंधन के इस निर्णय से लगभग 600 परिवार प्रभावित हुआ है।

स्थानीय सूत्र ने बताया कि मज़दूरों को इस बात की जानकारी तब मिली, जब वे मिल पर पहुंचे। वहां पहुंचने के बाद मज़दूरों ने देखा कि मिल के गेट पर चार पन्नों की एक नोटिस चस्पा थी।

इसके बाद यूनियन नेता के नेतृत्व में सभी कामगार चीनी मिल के मुख्य गेट के पास हंगामा करने लगे। करीब एक घंटे तक कामगार हंगामा करते रहे, लेकिन प्रबंधन की ओर से कोई नहीं आया और ना ही कोई एक्शन लिया गया। इसे रीगा मील वर्कर्स यूनियन ने बहुत बड़ा अन्याय बताते हुए मुख्यमंत्री, श्रम मंत्री, गन्ना मंत्री के अलावा जिला पदाधिकारी को पत्र भेजकर तत्काल कदम उठाने की मांग की।

हालाँकि अभी तक प्रबंधन की तरफ से मज़दूरों को कोई भी जवाब नहीं दिया गया। सभी मज़दूर इसलिए भी परेशान हैं कि उनके पास पैसे नहीं हैं और इस लॉकडाउन में कैसे वे अपने परिवार का पालन पोषण करेंगे।

अर्थव्यवस्था के लिए आत्मघाती हो सकता है लॉकडाउन बढ़ाना : आनन्द महिंद्रा

ब्यूरो | navpravah.com
लॉकडाउन को लेकर देश के दिग्गज व्यवसायी आनन्द महिंद्रा ने एक बार फिर अपने विचार रखे हैं। उन्होंने लगातार कई ट्वीट कर स्पष्ट किया कि लॉकडाउन को लम्बी अवधि के लिए आगे बढ़ाना देश की अर्थव्यवस्था के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है। 
सोमवार को कई ट्वीट कर आनन्द महिंद्रा ने चेताया कि लम्बी अवधि के लिए लॉकडाउन बढ़ाना निचले तबके के लिए अभिशाप बन सकता है। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन को आगे बढ़ाना ‘आर्थिक हारा-किरी’ यानी इकोनॉमी के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि ग़रीबों को इससे काफ़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
आनन्द महिंद्रा सोशल मीडिया पर काफ़ी सक्रिय रहते हैं और देश हित को लेकर काफ़ी सजग भी रहते हैं। उन्होंने कहा, ‘अर्थव्यवस्था का चलते रहना और आगे बढ़ना लोगों की जीविका के लिए प्रतिरक्षा तंत्र की तरह होता है। लॉकडाउन से यह प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर होता है और सबसे ज्यादा हमारे समाज के विपन्न तबके को नुकसान पहुंचाता है।’
उन्होंने अपने ट्वीट में ‘हारा-किरी’ शब्द का इस्तेमाल किया, जिसका मतलब होता है आत्महत्या। दरअसल, जापान में जब युद्ध में पराजित हो जाते थे, तो वे बंदी बनाए जाने से बचने के लिए आत्महत्या कर लेते थे। यह एक तरह की प्रथा थी, जिसे हारा-किरी कहते हैं।
ज्ञातव्य है कि आनंद महिंद्रा काफी समय से लॉकडाउन खोलने की वकालत कर रहे हैं और इसके पहले भी वे कई ट्वीट कर यह कह चुके हैं, कि ऑफिस जाकर काम करना वर्क फ्रॉम होम से बेहतर है।
हालाँकि आनन्द महिंद्रा ने यह भी साफ़ किया कि इस बात का ये मतलब बिल्कुल नहीं लगाया जाना चाहिए कि लॉकडाउन से कुछ फ़ायदा ही नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन की वजह से ही हमारे देश में स्थिति नियंत्रण में है। नहीं तो बाक़ी विकसित देशों की तरह भारत में भी बुरा हाल होता। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने सही समय पर लॉकडाउन का फ़ैसला किया, जिसकी वजह से बाक़ी देशों की तुलना में भारत की स्थिति बेहतर है। 

प्रधानमंत्री मोदी के सम्बोधन में क्या होगा ख़ास ?

प्रधानमंत्री मोदी के सम्बोधन में क्या होगा ख़ास ?
प्रधानमंत्री मोदी के सम्बोधन में क्या होगा ख़ास ?

ब्यूरो | navpravah.com 

आज रात 8 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर देश को सम्बोधित करेंगे। इस सूचना के मिलते ही तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं कि प्रधानमंत्री के आज के सम्बोधन में क्या ख़ास होगा। आम जनमानस में इस बात की चर्चा है कि प्रधानमंत्री लॉकडाउन को लेकर कोई बड़ा फैसला लेकर सबके सामने आ सकते हैं।

कोरोना वाइरस के खिलाफ जारी इस जंग में अब तक प्रधानमंत्री देश को चार बार सम्बोधित कर चुके हैं, आज पांचवीं बार मोदी देश को सम्बोधित करेंगे। अब सवाल ये है कि पीएम मोदी लॉकडाउन बढ़ाने का ऐलान करेंगे या लॉकडाउन को हटाएंगे या कुछ और ढील के साथ लॉकडाउन बढ़ाएंगे। इन सब सवालों के जवाब आज रात 8 बजे पीएम मोदी के संदेश में मिल सकते हैं।

कुछ बड़ा ऐलान कर सकते हैं पीएम-
आज रात अपने संबोधन में पीएम नरेन्द्र मोदी लॉकडाउन पर बड़ा ऐलान कर सकते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कल ही (सोमवार) देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की थी। जिसमें महाराष्ट्र, पंजाब, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, बिहार के सीएम ने लॉकडाउन को बढ़ाने की अपील की थी। हालाँकि प्रधानमंत्री ने सभी राज्यों से 15 मई तक लॉकडाउन और वर्तमान चुनौतियों से कैसे निबटा जाए, इसको लेकर सुझाव माँगा है। अब पीएम मोदी के संबोधन में किस बात को प्राथमिकता दी जायेगी, यह कयास लगाया जा रहा है।

राजनीतिक गलियारे में इस बात की भी चर्चा ज़ोरों पर है कि प्रधामंत्री लॉकडाउन से एग्जिट प्लान को लेकर भी घोषणा कर सकते हैं। आगामी १७ मई के बाद देश में लॉकडाउन को लेकर क्या होगा, इसका अंदाज़ा आज के प्रधानमंत्री के भाषण में लगाया जा सकेगा। वैसे ज़्यादातर राजनीतिज्ञों और वाइरस के जानकारों का मानना है कि अभी लॉकडाउन अभी एकदम से खोला जाना संभव नहीं है।

विशेष ट्रेनों में 82 हज़ार से अधिक लोग करेंगे यात्रा : रेलवे

विशेष ट्रेनों में 82 हज़ार से अधिक लोग करेंगे यात्रा
विशेष ट्रेनों में 82 हज़ार से अधिक लोग करेंगे यात्रा

न्यूज़ डेस्क | navpravah.com

भारतीय रेलवे ने मंगलवार को जानकारी दी कि अब तक लगभग 16 करोड़ रुपये की लगभग 45 हज़ार टिकटें बुक की जा चुकी हैं। दिल्ली से बिलासपुर के लिए रवाना होने वाली ट्रेन के जाने के कुछ समय पूर्व रेलवे ने यह आंकड़ा जारी किया। इन विशेष ट्रेनों की बुकिंग सोमवार शाम छह बजे शुरू हुई थी।

रेलवे ने बताया कि अभी तक अगले सात दिन के लिए 16.15 करोड़ रुपये की 45,533 (पीएनआर) बुकिंग की गई है। इन टिकटों पर करीब 82,317 लोग यात्रा करेंगे। रेलवे ने सोमवार को 15 विशेष ट्रेनों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए थे, जो आज मंगलवार से चलना शुरू होंगी।

रेलवे द्वारा जारी गाइडलाइन में यह स्पष्ट कर दिन गया था कि यात्रियों को अपना भोजन और चादर लाना होगा और स्वास्थ्य जांच के लिए ट्रेन के रवाना होने के समय से करीब 90 मिनट पहले पहुंचना होगा। उन्होंने कहा था कि इन यात्रियों के लिए ‘आरोग्य सेतु एप’ डाउनलोड करना भी अनिवार्य होगा।

ये रेलगाड़ियां नई दिल्ली और देश के सभी प्रमुख शहरों डिब्रूगढ़, अगरतला, हावड़ा, पटना, बिलासपुर, रांची, भुवनेश्वर, सिकंदराबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, तिरुवनंतपुरम, मडगांव, मुम्बई सेंट्रल, अहमदाबाद और जम्मू तवी के बीच चलेंगी। मंगलवार 12 मई को आठ में से तीन रेलगाड़ियां नई दिल्ली से रवाना होंगी और डिब्रूगढ़, बेंगलुरु और बिलासपुर पहुंचेंगी।

हावड़ा, राजेन्द्र नगर (पटना), बेंगलुरु, मुम्बई मध्य और अहमदाबाद से एक-एक रेलगाड़ी रवाना होगी और दिल्ली पहुंचेगी। लॉकडाउन में चलाए जाने के कारण इन विशेष रेलगाड़ियों में सिर्फ वातानुकूलित श्रेणी (एसी-1, एसी-2 और एसी-3) के डिब्बे होंगे। किराया सामान्य राजधानी ट्रेन के अनुरुप होगा। सार्वजनिक परिवहन रेलवे ने कहा था कि इन रेलगाड़ियों में अग्रिम आरक्षण अधिकतम सात दिन के लिए होगा, फिलहाल आरएसी और वेटिंग टिकट जारी नहीं होगा।

रेलवे ने स्पष्ट किया कि रेलगाड़ी में टीटीई को किसी का टिकट बनाने की अनुमति नहीं होगी। भारतीय रेल ने टिकटें रद्द कराने का भी विकल्प दिया है। इस संबंध में उसका कहना है कि यात्री रेलगाड़ी के प्रस्थान से 24 घंटे पहले तक ही टिकट रद्द करा सकते हैं, लेकिन टिकट रद्द होने पर कुल किराये का 50 प्रतिशत शुल्क के रूप में काट लिया जाएगा।

जमशेदपुर में दो छात्र कोरोना पॉज़िटिव, इलाक़े में मचा हड़कम्प

अभिषेक झा | navpravah.com

आज लॉकडाउन के 51वें दिन जमशेदपुर में सुबह ही दो कोरोना पॉज़िटिव मामले मिलने से इलाक़े में हड़कम्प मच गया। कोलकाता से आए इन दोनों छात्रों की जाँच हुई, जिसकी रिपोर्ट आज सुबह मिली। रिपोर्ट पॉज़िटिव आने की वजह से लोगों में भय का माहौल व्याप्त हो गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, दोनों ही छात्र, छात्रा जमशेदपुर के ग्रामीण इलाके से हैं। छात्र चाकुलिया नगर पंचायत के वार्ड संख्या 9 के जुगिपाड़ा निवासी है तथा छात्रा वार्ड संख्या 7 के पुराना बाजार निवासी है। दोनों विद्यार्थी 8 मई को कोलकाता से चाकुलिया आये थे। आने के बाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा उनकी जांच की प्रक्रिया कर दी गई थी जिसका रिपोर्ट आज (मंगलवार) सुबह पॉजिटिव पाया गया।

रिपोर्ट आने के बाद दोनों छात्रों को इलाज के लिए TMH लाया गया है और उनके नजदीकियों में गाँव के 13 लोगो को भी TMH में लाया गया है, उनकी भी जांच प्रक्रिया चल रही है। चाकुलिया के उस क्षेत्र को पूरी तरह सील कर दिया गया है, जहाँ से ये दोनों छात्रा मिले थे। इन दो मामलों के बाद स्थानीय प्रशासन सकते में है और व्यवस्था को और मज़बूत कर दिया गया है। ताकि किसी तरह की लापरवाही की वजह से मामले न बढ़े। स्थानीय प्रशासन ने सुनिश्चित किया कि लॉकडाउन का पूरी तरह से पालन किया जा रहा है।

भूली हुई यादें- “ दुर्गा खोटे ”

डॉ० कुमार विमलेन्दु सिंह | Navpravah Desk

नादुरुस्त, कुछ भी नहीं रहता ज़िंदगी में, या तो वक़्त ठीक कर देता है सब या बुन देता है ऐसा वहम, कि जिसमें पड़ के, सब ठीक लगने लगता है। वहम भी उम्रदराज़ नहीं होते, सो टूटते, बनते, ज़िंदगी को ख़ुशी और ग़म के रंगों से भरते रहते हैं। वहम टूटे, तो ग़म, बने तो ख़ुशी, लेकिन एक बात कभी नहीं बदलती, और वो है ज़िंदगी का चलते रहना। जो शख़्स किसी ख़ुशी या ग़म के मोहल्ले में ज़्यादा देर रुक जाता है, ज़िंदगी उसे छोड़, आगे बढ़ जाती है और जो बेफ़िक़्र बढ़ता चला जाता है, वो ज़िंदगी के बाद भी महफ़िलों में गुफ़्तगू का सबब बना रहता है। ऐसे ही चलीं, दुर्गा खोटे।

दुर्गा खोटे, फ़िल्म ‘हम एक हैं’ में (PC- Flickr)

दुर्गा खोटे का जन्म, एक कोंकणी परिवार में, 1905 में, मुंबई में हुआ। इनके पिता पांडुरंग श्यामराव लाड और माता मंजुलाबाई, एक बड़े और अमीर परिवार के सदस्य थे। इनका नाम, वीटा लाड रखा गया और अपने बाक़ी के भाई बहनों की तरह इनकी पढ़ाई लिखाई भी, बहुत अच्छे ढंग से हुई।

अभी ये कॉलेज में पढ़ ही रही थीं कि इनकी शादी, विश्वनाथ खोटे से हो गई, जो उन दिनों BHU से इंजीनियरिंग कर के लौटे थे। इसके कुछ दिनों बाद इनकी बहन शालिनी की शादी हुई और उस शादी में जे० एच० वाडिया भी आए थे, जो उन दिनों मोहन भगनानी के साथ फ़िल्में बनाया करते थे। उन्होंने शालिनी को फ़िल्मों में काम करने के लिए पूछा। शालिनी ने साफ़ मना कर दिया और कहा कि उनकी बहन काम कर सकती हैं।

दुर्गा खोटे, देवआनंद, हेमा मालिनी (PC- IMDb)

यहाँ दुर्गा खोटे को, उनकी पहली फ़िल्म, “फ़रेब जाल” मिली, जो 1931 में आई। ये फ़िल्म ज़बरदस्त फ़्लॉप हुई। दुर्गा का मज़ाक उड़ने लगा, लेकिन उनके पति ने उन्हें हौसला दिया। इस फ़िल्म में उनकी अदाकारी पर महान वी० शांताराम की नज़र पड़ी। उन्होंने आपनी फ़िल्म, “माया मछिन्द्रनाथ” के लिए, दुर्गा के साथ क़रार कर लिया। ये फ़िल्म ज़बरदस्त कामयाब रही और फिर “आयोध्याचे राजा”, जो कि पहली सवाक् मराठी फ़िल्म थी, इसमें भी दुर्गा खोटे, अहम किरदार में दिखीं। ये दोनों फ़िल्में 1932 में आईं। अब दुर्गा खोटे हर तरह से कामयाब हो रही थीं। उनके दो बेटे भी हो चुके थे। लेकिन इसी साल, इनके शौहर गुज़र गए। ऐसा लगा, जैसे सब ख़त्म हो गया।

दुर्गा खोटे इसके बाद भी चलती रहीं। 1936 में आई “अमर ज्योति” में इन्होंने सौदामिनी का किरदार निभाया जिसे बहुत पसंद किया गया। इन्होंने अपने दौर के सभी बड़े अदाकारों के साथ काम किया। उस दौर में फ़िल्म कंपनियां, अपने कलाकारों को हर महीने तनख़्वाह दिया करती थी, लेकिन दुर्गा खोटे कहीं बंध कर तनख़्वाह पर नहीं रहीं और लगभग सभी बड़ी कंपनियों के लिए काम किया।

दुर्गा खोटे, फ़िल्म ‘भरत मिलाप’ में (PC- Flickr)

सफ़र चलता रहा और इन्होंने इतनी शोहरत और नाम कमा लिया कि 1937 में “साथी” नाम की फ़िल्म का निर्माण और निर्देशन किया। इसके बाद 1941 और 1942 में इन्हें प्रतिष्ठित Bengal Film Journalists’ Association के द्वारा सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का इनाम भी मिला। 1943 में IPTA बनी, ये इसकी भी सदस्या रहीं।

“मुग़ल-ए-आज़म” में जोधाबाई का किरदार, इन्होंने निभाया और उसके बाद तो, “आनंद”, “अभिमान”, “बॉबी”, “कर्ज़”, “बावरची” और ऐसी कई मशहूर फ़िल्मों समेत 200 फ़िल्मों में काम किया। 1983 में इन्हें दादा साहब फाल्के आवार्ड दिया गया। “

इनके पति के बड़े भाई, नंदू खोटे, मराठी रंगमंच के बहुत बड़े कलाकार थे जिनके बेटे, विजू खोटे (शोले के कालिया) और बेटी शोभा खोटे (गोलमाल की कालिंदी) मशहूर चरित्र अभिनेता बने।  शोभा की बेटी भावना बलसावर ने भी “देख भाई देख” और “ज़बान संभाल के” जैसे मशहूर टीवी धारावाहिकों में काम किया। पूरा परिवार अभिनय की साधना में लगा रहा।

दुर्गा खोटे पर जारी डाक टिकट (PC-Amazon)

दुर्गा खोटे ने “दुर्गा खोटे प्रोडक्शन्स” भी शुरू किया और बेहद मशहूर टीवी धारावाहिक, “वागले की दुनिया” बनाई। दुर्गा के पोते, देवेन खोटे, UTV के संस्थापकों में से एक हैं।

लड़खड़ा चुकी ज़िंदगी को, दुर्गा खोटे ने, न केवल संभाला बल्कि रफ़्तार भी दी और एक बेहद सुहाना सफ़र करते हुए, कई मील के पत्थर पीछे छोड़ते हुए, 86 साल की उम्र में, 1991 में, इस दुनिया से चल बसीं।

सन् 2000 में, जब इंडिया टुडे ने अपना मिलेनियम अंक निकाला, तो उसमें उन सौ लोगों की फ़ेहरिस्त जारी की, जिन्होंने हिंदुस्तान को आकार दिया था। दुर्गा खोटे का भी नाम उसमें था। इनका नाम इसलिए था क्योंकि इनके पहले, किसी बहुत बड़े परिवार की लड़की, फ़िल्मों में काम नहीं करती थीं। इन्होंने ही बतौर महिला डायरेक्टर काम शुरू किया था फ़िल्मों में।

दुर्गा खोटे लगातार चलीं और उनके पीछे इबारतें लिखी जाती रहीं। इनके जज़्बे ने भारतीय सिनेमा को बहुत कुछ दिया, इन्हें हमेशा याद किया जाएगा।

(लेखक जाने-माने साहित्यकार, स्तंभकार, व शिक्षाविद हैं.)

“चीन का साइबर अटैक, हैकर्स कर रहे हैं कोरोना वैक्सीन हेल्थ डेटा चुराने की कोशिश” :अमेरिका

न्यूज़ अपडेट | Navpravah Desk

अमेरिका की सुरक्षा एजेंसी एफबीआई और होमलैंड सुरक्षा विभाग जल्द ही एक चेतावनी चीन को देंगे। यह चेतावनी साइबर अटैक से सम्बंधित है। अमेरिका का मानना है कि चीन के कुछ बेहद शातिर हैकर्स अमेरिका की कोरोना वायरस की वैक्सीन रिसर्च को चोरी करने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसा प्रयास चीन की तरफ से बार-बार किया जा रहा है जो कि एक प्रकार का साइबर हमला है और ऐसा साइबर हमला चीन द्वारा लाभ कमाने के लिए किया जा रहा है।

PC- The NewYork Times

न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित एक विस्तृत रिपोर्ट में यह दावा किया जा रहा है कि चीन के हैकर्स द्वारा चोरी का ऐसा प्रयास किया जा रहा है। यहां तक कि अमेरिका के मित्र देश साउथ कोरिया, वियतनाम आदि ने भी अपने साइबर सिक्योरिटी के लिए जिम्मेदार हैकर्स को वायरस संबंधी सतर्कता बरतने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए हैं।

चीन के विरुद्ध साइबर हमले कि इस रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की तैयारी अमेरिका के शीर्ष अधिकारियों द्वारा की जा रही है, जिसे जल्द ही आरोप के तौर पर सामने लाया जाएगा। इसमें यह आरोप लगाया जाएगा कि, “चीन अमेरिका के महत्वपूर्ण इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी और पब्लिक हेल्थ डाटा ( वैक्सीन ट्रीटमेंट और टेस्टिंग संबंधी जानकारियां) चुराने का अवैधानिक काम कर रहा है।”

अमेरिका द्वारा यह भी दावा किया जा रहा है कि वह चीन की तरफ़ से होने वाले किसी भी साइबर अटैक से निपटने के लिए पूरी तरह से सक्षम है। रिपोर्ट के मुताबिक यह ठीक वैसा ही है जैसा कि अमेरिका के 2018 मध्य अवधि चुनाव के दौरान रूसी हैकर्स ने अमेरिका के चुनावी डेटा से छेड़छाड़ करने की कोशिश की थी और बदले में अमेरिकी साइबर सिक्योरिटी द्वारा रूस में चेतावनी के तौर पर गैर गम्भीर वायरस भेज कर चेताया गया था।

रिपोर्ट की मानें तो जल्द ही अमेरिकी अधिकारी चीन के विरुद्ध साइबर अटैक की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी।

PM ने कहा, “कोरोना का गाँव पहुँचना एक बड़ा ख़तरा”, फिर बढ़ सकता है लॉकडाउन!

फिर बढ़ सकता है लॉकडाउन!
फिर बढ़ सकता है लॉकडाउन!

अमित द्विवेदी | navpravah.com

लॉकडाउन में विभिन्न प्रदेशों में फंसे मज़दूर अपने वतन पलयान करने को मजबूर हो गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मजदूरों के पलायन को लेकर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि मजदूरों का पलायन स्वाभाविक है, लेकिन साथ ही एक बड़ा खतरा हम सबके सामने आता नज़र आ रहा है। उन्होंने कहा कि राज्यों के सामने पलायन से एक बड़ा खतरा सामने आ सकता है।

पलायन को लेकर प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि कोरोना गाँव तक पहुंच गया, तो संकट गहरा सकता है। इस सम्बन्ध में आज प्रधानमंत्री ने विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात की। वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिये हुई इस बैठक में देश में कोरोना के चलते निर्माण हुई स्थिति पर विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे समेत सभी राज्यों के मुख्यमंत्री बैठक में उपस्थित थे। तीसरे लॉकडाउन की घोषणा करने के बाद मजदूरों के पलायन का मुद्दा तीव्र हो गया।

घर जाना मानव स्वभाव-
मुख्यमंत्रियों से बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि लोगों का घर जाना स्वाभाविक है, क्योंकि घर जाना मानव स्वभाव है। पीएम मोदी ने कहा, “मैं मजदूरों की घर जाने की आवश्यकता को समझ सकता हूं। तालाबंदी के बाद, हमने ‘जो लोग जहां है वहीं रहे’ इस पर जोर दिया था। लेकिन घर जाना मानव स्वभाव है। इसलिए हमें कुछ फैसले बदलने पड़े। अब मजदूर अपने गांव जा रहे है, कई मज़दूर घर पहुंच गए है। लेकिन हमारे सामने एक बड़ा संकट है। कोरोना गांव तक पहुंचेगा यह हमारे सामने बड़ी चुनौती है।”

बैठक में मोदी ने कोरोना के बारे में सभी राज्यों की भूमिकाएं जान ली। वहीं कोरोना के कारण विभिन्न राज्यों में बनी स्थिति की समीक्षा की। इससे अब 17 मई के बाद लॉकडाउन के बारे में फैसला लिया जा सकता है।

वर्तमान मे महाराष्ट्र के मुंबई और कुछ शहरों की स्थिति गंभीर है। इसलिए बाकी राज्यों में लॉकडाउन में ढील देने की बात की गई। इसके साथ ही मोदी ने मुंबई, पुणे, औरंगाबाद, मालेगांव, नागपुर और अन्य हॉटस्पॉट शहरों में कोरोना का प्रसार रोकने के लिए किए जाने वाले उपायों पर भी मार्गदर्शन दिया।

विवादित ट्वीट मामले में ज़फ़र पर कसा पुलिस का शिकंजा, लैप्टॉप ज़ब्त

ब्यूरो | Navpravah Desk

दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष ज़फ़र-उल-इस्लाम ख़ान अपने विवादित ट्वीट के चलते भारी परेशानी में आ गए हैं। उनके विवादित पोस्ट मामले में कार्रवाई करते हुए दिल्ली पुलिस ने उनका लैप्टॉप जमा करने को कहा था। ज़फ़र ने स्पष्ट किया कि उन्होंने पुलिस को लैप्टॉप सौंप दिया।

ज़फ़र ने अपने विवादित ट्वीट के बारे में कहा कि उन्होंने जो पोस्ट किया है, उसको लेकर आज भी अडिग हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने जो लैप्टॉप जमा किया है, वो दबाव की वजह से किया है। क्योंकि ट्वीट या किसी तरह का सोशल मीडिया पोस्ट वो मोबाइल से करते हैं, ऐसे में लैप्टॉप जमा करवाने के आदेश का मतलब समझ में नहीं आया।
ग़ौरतलब है कि वसंत कुंज के एक निवासी की शिकायत पर ख़ान के खिलाफ 30 अप्रैल को भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए और 153ए के तहत मामला दर्ज किया गया था। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि खान को ”विवादित” सोशल मीडिया पोस्ट करने में इस्तेमाल किया गया अपना लैपटॉप सौंपने के लिये अपराध प्रक्रिया संहिता की धारा 91 के तहत नोटिस भेजा गया था।

ज़फ़र खान ने ‘पीटीआई-भाषा’ को फोन पर बताया, ”मुझे ट्विटर और फेसबुक पोस्ट करने में इस्तेमाल किये गए लैपटॉप को जमा करने के लिए शनिवार को दिल्ली पुलिस का नोटिस मिला। मैंने आज अपना लैपटॉप पुलिस को सौंप दिया। लेकिन, मैंने लिखित रूप से कहा है कि मैं दबाव में यह सब कर रहा हूं, क्योंकि लैपटॉप में ट्वीट या सोशल मीडिया पोस्ट का कोई रिकॉर्ड नहीं है और यह केवल ऑनलाइन है।