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Wednesday, August 5, 2026
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भूली हुई यादें- “ मनमोहन कृष्ण ”

डॉ० कुमार विमलेन्दु सिंह | Navpravah Desk

रहा करते हैं इसी कहकशां में सारे किरदार और उनकी ख़ूबियां, और जब रूह किसी जिस्म को पा कर, नमूदार होती है ज़मीं पर तो एक शख़्सियत सबको नज़र आती है, वो दुआएं जो लेकर आता है शख़्स, उसका असर दिखता है बस। यही वजह है कि कभी-कभी हमारा सामना एक ऐसी शख़्सियत से हो बैठता है, जिसमें एक साथ इतनी सलाहियत होती है कि हैरत में पड़ जाते हैं हम। मनमोहन कृष्ण भी एक ऐसी ही शख़्सियत थे।

मनमोहन कृष्ण  (PC-IMDb)

मनमोहन का जन्म, 1922 में लाहौर में हुआ। लाहौर की हवा में अदब और तहज़ीब हुआ करती थी उस दौर में, सो इसका असर मनमोहन कृष्ण पर भी पड़ा। इनकी तरबियत और कॉलेज तक की पढ़ाई यहीं हुई। मनमोहन पढ़ने में बहुत अच्छे थे। इन्होंने M.Sc.  किया, वो भी फ़िज़िक्स में और फिर यहीं पढ़ाना भी शुरु कर दिया कॉलेज में।

मनमोहन कृष्ण अपनी ज़िंदगी में बहुत जल्दी, वो सब पा चुके थे, जो एक कामयाब इंसान के लिए ज़रूरी है, दुनिया के हिसाब से। लेकिन कुछ हिसाब दिल के भी होते हैं, जो दुनिया के सामने नहीं हारते। वैसे ही कुछ हिसाबों का हल, मनमोहन रेडियो में खोजना चाहते थे।

” मनमोहन को रेडियो में काम करने का बहुत शौक़ था, इन्होंने अर्ज़ी भी दे दी इसके लिए और इंटरव्यू के लिए बुला भी लिए गए। वहाँ इनसे कहा गया कि “आप M.Sc हैं, टेक्निकल साइड के लिए अर्ज़ी दें”, और जब वहाँ अर्ज़ी दी, तो कहा गया, “आपने तो इतना सांस्कृतिक कार्यक्रम किया है, बतौर कलाकार काम करने के लिए अर्ज़ी दें। “

मनमोहन को आगे कुछ और तो करना ही था, तो रेडियो और टेलीविज़न के क्षेत्र में और आगे पढ़ने के लिए, इन्होंने मुंबई की एक संस्था में अर्ज़ी दे दी। वहाँ से भी बुलावा आ गया। ये मुंबई आ गए और किसी जानने वाले के यहाँ एक दावत में गए, जहाँ बहुत बड़ी फ़िल्मी हस्तियां भी मौजूद थीं।

फ़िल्म ‘बीस साल बाद’ में वहीदा रहमान और मनमोहन कृष्ण (PC-Pinterest)

मनमोहन फ़िल्मों में किसी को ज़्यादा जानते न थे। यहाँ इन्होंने एक गाना गाया और गाना सुनकर, एक जनाब, इनसे मुख़ातिब हुए और इनकी तारीफ़ की। ये भी पूछ लिया कि क्या मनमोहन फ़िल्मों में काम करना चाहेंगे? मनमोहन को बिल्कुल भी पता न था, ये जनाब ख़ुद अज़ीम फ़िल्मकार, वी० शांताराम थे।

वी० शांताराम की फ़िल्म, “अपना देश”, जो 1949 में आई, और यहीं से मनमोहन कृष्ण के फ़िल्मी सफ़र की शुरुआत हुई। मनमोहन को गायक बनने का शौक़ था लेकिन बन गए अभिनेता। हालांकि, देव आनंद की फ़िल्म, “अफ़सर” जिसमें महान एस०डी० बर्मन का संगीत था, एक गाना, “झट खोल दे”, इन्होंने गाया। इसके बाद 1952 में आई, “बैजू बांवरा” और फिर इनकी चल पड़ी।

फ़िल्म ‘राज तिलक’ में आगा और मनमोहन  (PC- Film History Pics)

40 के दशक से शुरु होकर, 80 के दशक तक इनका फ़िल्मी सफ़र चला। “नया दौर” से लेकर “वक़्त”, “हमराज़” से लेकर “दीवार” तक, इन्होंने 250 से भी ज़्यादा फ़िल्में की और चोपड़ा बंधुओं की फ़िल्मों का तो, ये हिस्सा सा बन गए थे। इनपर फ़िल्माया गया गाना, ” तू हिन्दू बनेगा, न मुसलमान बनेगा” , आज भी सब के ज़हन में ज़िंदा है।

मनमोहन कृष्ण के अंदर सीखने की बड़ी अच्छी आदत थी। वे ऐक्टिंग के साथ, फ़िल्म के और हिस्सों के बारे में भी सीखते रहते थे। इसी का नतीजा हुआ कि जब यश चोपड़ा, “नूरी” बना रहे थे, तो निर्देशन का ज़िम्मा, मनमोहन कृष्ण को ही दिया गया। ये 1979 की बात है।

इसके बाद इनका फ़िल्मों में काम करना कम हो गया और 1990 में 68 साल की उम्र में, इन्होंने ये दुनिया छोड़ दी।

इनकी शख़्सियत से शराफ़त झलकती थी और इनका हर अंदाज़, इनके ज़हीन होने का सबूत था। हिन्दी सिनेमा की दुनिया में मनमोहन कृष्ण एक नायाब नगीने की तरह याद किए जाएंगे।

(लेखक जाने-माने साहित्यकार, स्तंभकार, व शिक्षाविद हैं.)

पिछले 24 घंटे में बांग्लादेश में सबसे ज़्यादा मामले, 14 हज़ार का आंकड़ा हुआ पार

ब्यूरो | Navpravah.com

बांग्लादेश में पिछले 24 घंटे में 887 कोरोना के मरीज सामने आए हैं। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक़, यह एक दिन में मरीजों का अधिकतम आंकड़ा है। ताज़ा जानकारी के अनुसार, बांग्लादेश में कोरोना मरीजों की संख्या 14,657 तक पहुंच गई है।

इस मामले में स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय की अतिरिक्त महानिदेशक नसिमा सुल्ताना ने कहा कि पिछले 24 घंटे में कोविड-19 से 14 मरीजों की मौत हुई है। इसी के साथ कोरोना से मरने वालों की कुल संख्या 228 पर पहुंच गई है। सुल्ताना ने बताया कि 887 नए केस का पता चलने के बाद देश में कोरोना से संक्रमित लोगों का आंकड़ा 14,657 तक पहुंच गया है।

पिछले 24 घंटे में सबसे ज्यादा मरीज सामने आए हैं। 24 घंटे के अंदर देश की अलग-अलग 36 आधिकारिक लैब में कोरोना के 5,738 सैंपल की जांच की गई, जिनमें इन मरीजों का पता चला है।

रिकवरी रेट बढ़ा
इस बीच अच्छी खबर ये है कि बांग्लादेश में रिकवरी रेट में भी इज़ाफ़ा हुआ है। प्राप्त आंकड़ों के हिसाब से 236 मरीजों को अस्पताल से छुट्टी दी गई है, जिससे ठीक हुए मरीजों की कुल संख्या 2650 हो गई है।

गौरतलब है कि कोरोना का पहला मामला बांग्लादेश में 18 मार्च को सामने आया था। बांगलदेश के स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो मई के तीसरे सप्ताह में कोरोना के सबसे ज़्यादा मामले सामने आएंगे।

पूर्व पीएम डॉ० मनमोहन सिंह ख़राब तबीयत के चलते AIIMS में भर्ती

न्यूज़ अपडेट | Navpravah Desk

पूर्व प्रधानमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ० मनमोहन सिंह अस्पताल में भर्ती कराए गए हैं। उन्हें सीने में दर्द की शिकायत के बाद रविवार शाम दिल्ली AIIMS अस्पताल में भर्ती कराया गया। वह दिल के मरीज हैं और वह 10 साल तक प्रधानमंत्री रहे हैं।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ मनमोहन सिंह की तबीयत खराब होने के बाद रविवार की रात उन्हें देश की राजधानी दिल्ली के एम्स में लाया गया। एम्स में मनमोहन सिंह को कार्डियो थोरासिक वॉर्ड में भर्ती कराया गया है। जहां डॉक्टर उनका उपचार कर रहे हैं।

डॉ मनमोहन सिंह ८७ वर्ष के हैं और दिल के मरीज हैं। डॉ सिंह एक नामचीन अर्थशास्त्री हैं और १० वर्ष तक देश के प्रधानमंत्री भी रहे हैं।

मप्र: ‘नरसिंहपुर में ट्रक पलटने से घर लौट रहे 5 मजदूरों की मौत’

न्यूज़ अपडेट |Navpravah Desk

मध्य प्रदेश | MP के नरसिंहपुर एक बड़ी दर्दनाक ख़बर आई है, जहाँ हैदराबाद से यूपी लौट रहे पांच मजदूरों की ट्रक पलटने से गई जान चली गई।

आज देर रात मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले में आम से भरा ट्रक पलटने से 5 मज़दूरों की मृत्यु हो गई, जबकि अन्य 13 मज़दूर गम्भीर रूप से घायल हुए हैं। घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती किया गया है, जहाँ उनका इलाज चल रहा है। ये मज़दूर हैदराबाद से आम के ट्रक में छिपकर उत्तर प्रदेश के झांसी अपने घरों को जा रहे थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार लॉकडाउन के चलते परिवहन की व्यवस्था न होने की वजह से ये मजदूर आम के ट्रक में छिपकर हैदराबाद से झांसी जा रहे थे। तभी नरसिंहपुर जिले के पाठा गांव के पास ट्रक अनियंत्रित होकर पलट गया और इस हादसे में इन पांच मज़दूरों की जान चली गई। हादसे में दो मजदूर गंभीर रूप से घायल हुए हैं जिन्हें इलाज के लिए जबलपुर रेफ़र किया गया है। अन्य 11 घायलों का इलाज जिला अस्पताल में किया जा रहा है।

गौरतलब है कि, घायल मज़दूरों में से एक को कुछ दिन से सर्दी खांसी की परेशानी थी जिसके चलते मृतकों सहित सभी के कोरोना सैम्पल लेकर जांच के लिए भेज दिए गए हैं।

घटना की जानकारी लगते ही जिले के कलेक्टर एसपी ने घटनास्थल पर पहुंचकर घायलों को अस्पताल पहुंचाने का काम शुरू किया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कलेक्टर ने इस घटना में पांच मज़दूरों की मौत की पुष्टि की है।

एक था ‘बस्टर कीटन’- “चार्ली चैपलिन जैसा ही”

डॉ० कुमार विमलेन्दु सिंह | Navpravah Desk

सिनेमा ने जीवन के हर रंग को सहेजा है और जब जैसी स्थिति बनी है, उसे प्रस्तुत किया है और याद दिलाया है कि एकरसता के प्रभाव में भुला दिए गए, कई रंग, हमारे ही हैं। हास्य या कॉमेडी भी मानव सभ्यता की ऐतिहासिक और अभूतपूर्व प्रस्तुतियों का हिस्सा रहा है।

Buster Keaton

नाटकों में भी हास्य या कॉमेडी का महत्व रहा है। शेक्सपीयर से लेकर फ़्रेड कार्नो तक, यूरोप से लेकर अमरीका तक, पश्चिम में कॉमेडी का मंचन या फ़िल्माया जाना बहुत प्रभावकारी और प्रशंसनीय रहा है।

चार्ली चैपलिन कॉमेडी के पर्याय बन कर, पूरी दुनिया में छा गए और उनके बाद भी, “लॉरेल एंड हार्डी” और सिनेमा के पूर्णतः स्थापित हो चुके, आजकल के दौर में बेनीनी ने कॉमेडी को एक स्थान दिलाया है। एक और नाम भी है जो चार्ली चैपलिन के समय का ही है और जिसके अभिनय ने कभी चैपलिन ही जितना तो कभी उनसे ज़्यादा, दर्शकों को प्रभावित किया। ऐसा नहीं कि उस नाम को चार्ली जितनी प्रसिद्धि नहीं मिली, लेकिन इतिहास और जनता के नायक चुनने के अजीब पैमाने हैं, सो “कीटन” का नाम दिखा और चाहा ज़रूर गया, लेकिन समय के साथ धुंधला पड़ गया। जोसेफ़ फ़्रैंक कीटन या बस्टर कीटन एक महान कॉमेडियन थे।

‘Buster Keaton’ in a film (PC- The Virginion Pilot)

चार्ली चैपलिन का जन्म 1889 में इंग्लैंड में हुआ और इसके 6 साल बाद बस्टर कीटन का जन्म 1895 में अमरीका में हुआ। दो अलग देशों में पैदा हुए, ये दो लोग, एक दूसरे से बिल्कुल अंजान, लगभग एक जैसी परिस्थिति का सामना करते हुए, विश्व सिनेमा में, कॉमेडी के हस्ताक्षर बन जाने वाले थे।

“चार्ली चैपलिन ने जहाँ, “स्लैपस्टिक कॉमेडी” को अपने आवारा अंदाज़ से सजाया, वहीं कीटन ने “वोडविल” विधा को अपने “डेडपैन”, चेहरे और कलाबाज़ी से नया आयाम दिया। प्रथम विश्व युद्ध के बाद दुनिया ने व्यवस्थित और सजावट भरी रचनात्मक प्रस्तुतियों को नकार दिया था। इसी कारण स्लैपस्टिक और वोडविल जैसी विधाएं प्रचलन में थी। साहित्य और चित्रकला में भी ये बदलाव दिख रहे थे। “

“स्लैपस्टिक कॉमेडी” में अभिनेता, अपनी ग़लतियों से किसी दूसरे किरदार से टकरा जाता था, उसकी नाक टकरा जाती थी, उसका मूंह केक में पड़ जाता था, दूसरे को चोट पहुंचाने के चक्कर में ख़ुद को ही चोट लगा लेता था, ऐसा “टॉम एंड जेरी” कार्टून में भी देखा जा सकता है। दूसरी ओर “वोडविल” में भी अभिनेता लगभग यही करता है, लेकिन उसका गिरना, उठना, टकराना अभ्यस्त एक्रोबैट की तरह होता है और कीटन इसमें पारंगत थे।

Buster Keaton in ‘Sherlock Jr’ (PC-Youtube)

बहुत छोटी उम्र से कीटन अपने पिता “जो कीटन” और माता “मायरा कीटन” के साथ मंच पर जाने लगे थे। जो और बस्टर कलाबाज़ियां दिखाते थे और मायरा सैक्सोफ़ोन बजाती थीं। चैपलिन के माता-पिता भी कलाकार थे।

एक बार इनके पिता के मित्र ने इन्हें सीढ़ियों पर से बिना चोटिल हुए कई बार गिरते उठते देखा और उन्होंने ही, उस मौक़े पर पहली बार इन्हें “बस्टर” कहा। तब से आजीवन इसी नाम से ये जाने गए।

1920 से 1929 तक इन्होंने ज़बरदस्त काम किया और इनकी प्रसिद्धि, पूरी दुनिया में हुई। फिर इन्होंने “मेट्रो गोल्डविन मेयर (MGM)” के साथ अनुबंध किया। इतनी सफलता और प्रसिद्धि वे ठीक से संभाल ना पाए और इनका अपनी पत्नी से तलाक़ भी हो गया। कीटन बुरी तरह शराब की लत में पड़ गए। लेकिन 40 के दशक में ये फिर से चैपलिन जैसे महान अभिनेता के समकक्ष खड़े हो गए। इनकी फ़िल्में, ” शर्लक जूनियर”, “द जनरल” और “द कैमरामैन” आज भी महानतम फ़िल्मों में गिनी जाती हैं।

1999 में, “अमेरिकन फ़िल्म इंस्टिट्यूट” ने कीटन को अब तक के महानतम अभिनेताओं की सूची में शामिल किया। 1966 में कैलिफ़ोर्निया में इनका निधन हो गया।

जिसने भी कीटन को देखा है और उनके बारे में जाना है वे सब ज़रूर कहते हैं कि, “एक था कीटन! कभी चार्ली चैपलिन के जैसा तो कभी उनसे बेहतर।”

(लेखक जाने-माने साहित्यकार, स्तंभकार, व शिक्षाविद हैं.)

भूली हुई यादें- “ओम शिवपुरी ”

डॉ० कुमार विमलेन्दु सिंह | Navpravah Desk

जो ज़िक़्र का सबब नहीं बनते, जो कई बार आते हैं, गुफ़्तगू करते हैं, रुकते हैं बिना कहे और बिना पूछे चले जाते हैं, सबसे ज़्यादा वही चेहरे याद आते हैं। अक्सर हम चुनते हैं कि हमें ज़िंदगी में क्या करना है, लेकिन कई बार ज़िंदगी भी चुनती है, उसे क्या और किससे करवाना है। ये चुने हुए लोग ही , चले जाने के बाद बहुत याद आते हैं। ओम शिवपुरी भी, अदाकारी के लिए चुने गए थे और क़िस्मत उनसे वो सब कुछ करवाती रही, जिसके लिए वे आए थे।

ओम शिवपुरी (PC-IMDB)

ओम शिवपुरी का जन्म जोधपुर में, एक कुलीन ब्राम्हण परिवार में हुआ और इनके पिता जोधपुर के राजपरिवार के संरक्षण में रहे। ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई इनकी, यहीं से हुई। हालांकि इनका परिवार, कश्मीर से ताल्लुक रखता था, ये राजस्थान के हो चुके थे। ग्रेजुएशन के बाद लॉ की पढ़ाई भी इन्होंने शुरू कर दी थी। लेकिन बचपन से ही इनका मन ऐक्टिंग में लगता था। ये कॉलेज से ग़ायब ही रहते थे, सो इन्हें वहाँ से निकाल दिया गया।

बचपन से ही स्टेज पर ये सक्रिय भी रहे थे। एक बार नाटक में इन्होंने लड़की का किरदार निभाया था और नाटक के बाद दर्शकों में इसी बात की चर्चा थी कि कैसे मान लिया जाए कि ओम लड़की नहीं लड़का हैं।

फ़िल्म ‘डॉन’ के एक दृश्य में साथी कलाकारों के साथ ओम शिवपुरी

कॉलेज छूटने के बाद ये रेडियो स्टेशन में काम करने लगे और वहाँ इनकी मुलाक़ात, सुधा शर्मा से हुई, जो वहीं काम करती थीं। उन्हें भी नाटकों का शौक़ था।

“सुधा के घर के हालात बहुत बेहतर न थे, सो काम करते रहना ज़रूरी था और ओम शिवपुरी अपनी नाट्य कला को निखारना चाहते थे, तो वे मौक़े तलाशने के लिए, राजस्थान से बाहर जाना चाहते थे। ओम ने फ़ैसला किया, कि सुधा भी उनके साथ दिल्ली चलें और NSD में पढ़ाई करें, नाटक सीखें। थोड़े संघर्ष के बाद ये हुआ भी। NSD से पढ़ लेने के बाद, इब्राहिम अलकाज़ी जैसे उस्ताद से सीखने के बाद, ओम शिवपुरी, NSD Repertory Company के पहले अध्यक्ष बहाल हुए, 1964 में। ये 1976 तक अध्यक्ष बने रहे और इनके बाद मनोहर सिंह ने ये पद संभाला। “

1964 में अध्यक्ष बनने के बाद, ओम और सुधा बहुत ख़ुश थे लेकिन अचानक एक लड़के को, सुधा को, शादी के मतलब से, देखने के लिए भेज दिया गया। इसके बाद ओम शिवपुरी और सुधा शर्मा का शादी कर लेना, ज़रूरी हो गया और इन दोनों ने ये काम भी 1968 में कर लिया।  शादी के बाद, दोनों ने मिलकर अपना एक थिएटर ग्रुप भी, “दिशांतर” नाम से बनाया, जो मोहन राकेश और गिरीश कर्नाड के नाटकों का मंचन किया करता था।

फ़िल्म जगत की अन्य हस्तियाँ और ओम शिवपुरी (PC-IMDb)

1972 में मोहन राकेश के गुज़र जाने के बाद, ओम शिवपुरी और सुधा शिवपुरी, 1974 में मुंबई आ गए, क्योंकि अब नाटकों पर आश्रित रहना काम न आ रहा था। हालांकि इसके पहले ही ओम, मणि कौल और गुलज़ार जैसे पारखी फ़िल्मकारों की फ़िल्मों में दिख चुके थे। मणि कौल की “आषाढ़ का एक दिन” 1971 और गुलज़ार की “कोशिश” 1972 में ये दिख चुके थे। मुंबई आते ही ओम शिवपुरी को ख़ूब काम मिलने लगा। उनकी अदाकारी उन्हें दर्शकों से जोड़ रही थी।  “नमक हराम”, “आंधी”, “शोले”, “बालिका वधु”, “डॉन” जैसी 175 से भी अधिक फ़िल्मों में इन्होंने काम किया।

सुधा शिवपुरी

सुधा शिवपुरी भी अब फ़िल्मों का हिस्सा बनने लगी थीं। “स्वामी”, “इंसाफ़ का तराज़ू” और “सावन को आने दो” जैसी फ़िल्मों में इन्होंने काम किया। सुधा टीवी पर भी ख़ूब सक्रिय रहीं। कभी न भूलने वाले धारावाहिक,”रजनी” में ये दिखीं और प्रचलित धारावाहिक, “क्योंकि सास भी कभी बहु थी” में, “बा” के किरदार में, सबने फिर से सुधा शिवपुरी को सराहा।

इन दोनों की बेटी, रितु शिवपुरी भी अभिनेत्री हैं और बेहद कामयाब फ़िल्म “आंखें” में गोविंदा के साथ इनके काम को सराहा गया। इनके बेटे विनीत भी असिस्टेंट डायरेक्टर हैं।

1990 में दिल का दौरा पड़ने से ओम शिवपुरी गुज़र गए। उनके गुज़र जाने के कई साल बाद भी उनकी फ़िल्में आती रहीं। सच में ओम शिवपुरी को अदाकारी के लिए, ज़िंदगी ने चुना था।

उनकी अदाकारी और उनकी शख़्सियत को सलाम।

(लेखक जाने-माने साहित्यकार, स्तंभकार, व शिक्षाविद हैं.)

चीन: “उइगर मुस्लिम को दाढ़ी रखने पर 6 साल की सज़ा”

न्यूज़ अपडेट | Navpravah Desk

चीन में एक मुस्लिम को अपनी दाढ़ी काटने से मना करने के कारण छह साल के लिए जेल में डाला गया है, जबकि उसकी पत्नी को बुर्का पहनने के लिए दो साल की कैद हुई।यह फैसला शिनजियांग के दूर-दराज के प्रांत में धार्मिक “चरमपंथ” पर एक गंभीर कार्रवाई के तहत किया गया था।

‘द वाशिंगटन पोस्ट’ में प्रकाशित एक ख़बर के अनुसार, चीन मुस्लिम कट्टरपंथियों और आतंकवादियों पर शिनजियांग में बढ़ती हिंसा का आरोप लगाता है और सरकार लोगों को इस्लाम के रूढ़िवादी रूपों को छोड़ने के लिए मजबूर करने की कोशिश कर रही है।

प्रोजेक्ट ब्यूटी के नाम से जानी जाने वाली पहल के तहत, लंबी दाढ़ी वाले पुरुषों और चेहरे को ढंकने वाली महिलाओं पर जुर्माना लगाया जाता है, साथ ही चेहरे की निगरानी भी फेस सर्विलांस की मदद से की जाती है। फरवरी में झिंजियांग की राजधानी उरूमकी में इन अपराधों के लिए आपराधिक मामला चलाया गया जिसके बाद यह दंड दिया गया था।

ख़बर के मुताबिक़, काशगर स्पेशल ज़ोन न्यूज़ के अनुसार, 38 वर्षीय व्यक्ति ने 2010 में दाढ़ी बढ़ा ली थी और स्थानीय अधिकारियों के बार-बार मना किये जाने के बावजूद उसने दाढ़ी शेव करने से मना कर दिया था। यह स्पष्ट नहीं था कि क्या उन्हें अन्य आरोपों का सामना करना पड़ा, क्योंकि रिपोर्ट किए गए चार्जेज़ के लिए अधिकतम सजा सामान्य रूप से पांच साल है।

चीन की मानें तो यह हिंसक जिहाद पर लगाम लगाने एवं चरमपंथियों द्वारा किए गए बम और चाकू के हमलों की रोकथाम के लिए एक न्यायसंगत प्रतिक्रिया है।

“उस व्यक्ति की पत्नी को दो साल की सजा सुनाई गई थी। चूंकि उसने स्थानीय अधिकारियों को एक बयान लिखा था। जिसमें उसने अधिकारियों के समक्ष अपनी भूल को स्वीकार करते हुए माफी मांगी थी ताकि उसकी सजा को माफ किया जा सके। “

ख़बर के अनुसार जारी की गई एक मूल रिपोर्ट में स्रोत के रूप में काशगर सरकार की राजनीतिक और कानूनी मामलों की समिति का हवाला दिया गया। इसे रविवार को प्रमुख चीनी वेब पोर्टलों द्वारा उठाया गया था, लेकिन बाद में सेंसर द्वारा हटा दिया गया। सोमवार को, संबंधित रिपोर्टर ने “एक झूठी रिपोर्ट” दर्ज करने के लिए माफी लिखी, हालांकि संदेह यह है कि क्या यह माफी वास्तविक थी या स्थानीय अधिकारियों के दबाव में बनाई गई थी।

निर्वासित विश्व उइघुर कांग्रेस के प्रवक्ता, दिलक्सत रक्सित ने कहा, “यह अस्वीकार्य और बेतुका है, जोकि चीन की शत्रुतापूर्ण मानसिकता और उसके शासन के संकट को दर्शाता है।”

इन सरकारी नौकरियों के लिए कर सकते हैं आवेदन

जॉब अपडेट्स | Navpravah Desk

इन सरकारी नौकरियों के लिए कर सकते हैं आवेदन:

एम्स, पटना
पद- मेडिकल रिकॉर्ड टेक्नीशियन
पद संख्या- कुल 10 पद
अंतिम तिथि- 7 जून, 2020
https://aiimspatna.org/

एनएलसी इंडिया लिमिटेड
पद- ग्रेजुएट एग्जीक्यूटिव ट्रेनी
पद संख्या- कुल 259 पद
अंतिम तिथि- 17 मई, 2020
www.nlcindia.com

आइसीएमआर
पद- जूनियर रिसर्च फेलो
पद संख्या- कुल 150 पद
अंतिम तिथि- 27 मई, 2020
https://icmr.nic.in/

एचएसएससी
पद- नायब तहसीलदार आदि
पद संख्या- कुल 1137 पद
अंतिम तिथि- 15 मई, 2020
https://www.hssc.gov.in/

कर्नाटक वन विभाग
पद- फॉरेस्ट गार्ड
पद संख्या- कुल 339 पद
अंतिम तिथि- 15 मई, 2020
https://aranya.gov.in/

यूपी पोस्टल सर्किल
पद- जीडीएस
पद संख्या- कुल 3951 पद
अंतिम तिथि- 7 मई, 2020
www.indiapost.gov.in

पीपीएससी
पद- प्रिंसिपल आदि
पद संख्या- कुल 544 पद
अंतिम तिथि- 1 जून, 2020
https://ppsc.gov.in/

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन, मध्य प्रदेश
पद- सीनियर डिजाइनर, असोसिएट सीनियर डिजाइनर, प्रिंसिपल टेक्नीकल इंस्ट्रक्टर आदि
पद संख्या- कुल 16 पद
अंतिम तिथि- 17 मई, 2020
https://nidmp.ac.in/

सीजीपीएससी
पद- इंश्योरेंस मेडिकल ऑफिसर
पद संख्या- कुल 52 पद
अंतिम तिथि- 8 मई, 2020
http://psc.cg.gov.in/

(यह लेख केवल सूचनार्थ है। अतः नवप्रवाह उक्त नौकरी सम्बन्धी किसी भी तथ्य की पुष्टि नहीं करता हैं, साथ ही इन तथ्यों की सत्यता की पुष्टि भी नहीं करता। कृपया आवेदक पूरी जाँच पड़ताल करने के पश्चात ही कोई निर्णय लें।)

COVID-19 : ऑर्थर रोड जेल के कैदियों ने मांगी जमानत, बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा, कैदियों को भी है जीने का अधिकार

न्यूज़ अपडेट | Navpravah Desk

मुम्बई | आर्थर रोड जेल के 100 से अधिक कैदियों और स्टाफ सदस्यों का कोरोना वायरस परीक्षण पॉजिटिव पाया गया है। इससे कैदियों के बीच आतंक की स्थिति पैदा कर हो गई है। विशेष रूप से उन लोगों के साथ जो किसी ना किसी चिकित्सा स्थिति जैसे कि हाइपर-टेंशन, मधुमेह आदि से पीड़ित हैं।

न्यायमूर्ति भारती डांगरे ने शुक्रवार को मेडिकल ग्राउंड पर जमानत की मांग कर रहे ऐसे कई कैदियों की याचिका पर सुनवाई की।

चिकित्सा आधार पर रिहाई की मांग करने वाले आरोपियों में से एक 66 वर्षीय हेमंत भट्ट है, जिसका कोविड -19 के लिए पॉजिटिव परीक्षण पाया गया है, वर्तमान में आर्थर रोड में बन्द है। भट्ट पीएनबी बैंक घोटाले का आरोपी और भगोड़े नीरव मोदी का प्रमुख सहयोगी है।

भट्ट क्रॉनिक हार्ट डिसीज का मरीज है, उसकी बाई-पास सर्जरी हुई है और वह हाइपर-टेंशन से पीड़ित है। शुक्रवार को, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, आर्थर रोड, ने आवेदक हेमंत भट्ट से संबंधित एक मेडिकल रिपोर्ट रिकॉर्ड पर रखी। यह कहा गया है कि उसका कोविड -19 के लिए परीक्षण किया गया था और सकारात्मक पाया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि मरीज जेल में अलग-थलग है और अन्य बीमारियों के लिए विस्तृत परीक्षण संभव नहीं है।

उक्त रिपोर्ट के साथ, जेल में कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए उठाए गए कदमों पर भी प्रकाश डाला गया है। यह बताया गया है कि आज तक, मुंबई सेंट्रल जेल के 77 कैदियों और 8 से 10 स्टाफ सदस्यों का कोरोना टेस्ट पॉजिटिव पाया गया है।

झारखण्ड: मरीज़ों की संख्या में बढ़ोत्तरी से टेंशन में सरकार

मरीज़ों की संख्या में बढ़ोत्तरी से टेंशन में सरकार
Jharkhand: मरीज़ों की संख्या में बढ़ोत्तरी से टेंशन में सरकार

अभिषेक कुमार झा | navpravah.com

झारखण्ड में भी अब कोरोना संक्रमितों की संख्या में इज़ाफ़ा देखा जा रहा है। प्रदेश में शुक्रवार को एक ही दिन में २२ नए मरीज मिलने से प्रशासन सकते में आ गया है। इनमें से 20 गढ़वा ज़िले से हैं, जबकि 2 कोडरमा से हैं। ऐसा राज्य में पहली बार हुआ है कि एक साथ इतने मरीज मिले हैं। इससे पहले 20 मरीज 7 मई को मिले थे।

प्रदेश में शुक्रवार को 22 नए मरीज़ों के मिलने की पुष्टि स्वास्थ्य विभाग के प्रधान डॉ० नितिन मदन कुलकर्णी ने की है। नए मरीज़ों को मिलने के साथ ही राज्य में कोरोना मरीज़ों का आंकड़ा 154 पहुँच गया है। वहीं, गढ़वा में कुल कोरोना मरीज़ों की संख्या 23 हो गयी है। इस तरह से ये जिला पूरे झारखंड में मरीज़ों के मिलने के मामले में दूसरे नंबर पर पहुंच गया है। पहले स्थान पर रांची है, जहाँ कुल मरीज 93 मिले हैं।

कोडरमा के एक मरीज का जांच धनबाद के PMCH से हुई है, जबकि दूसरे मरीज की पुष्टि रिम्स में हुई है। गढ़वा में मिले मरीजो की जांच रिम्स में हुई है।इससे पहले 27 अप्रैल को 20 मरीजों की पुष्टि की गई थी, जिसमे सभी रांची के थे। उससे पहले 16 मरीज की पुष्टि 26 अप्रैल को हुई थी, जिनमे 13 रांची के थे, 1 जामताड़ा और २ गढ़वा के थे। गढ़वा में मात्र 15 दिनों में ३ से २३ मरीज हो गए हैं। गढ़वा में पहले मरीज की पुष्टि 22 अप्रैल को हुई थी। 26 अप्रैल को उसके 2 रिश्तेदार पॉजिटिव पाए गए थे। शुक्रवार को 20 मरीज मिलने के साथ गढ़वा के मरीजो की संख्या 23 हो गई।

अच्छी खबर ये है कि राज्य में आधे मरीज स्वस्थ हुए। राज्य में शुक्रवार को 22 नए मरीज मिलने के साथ ही 27 मरीज स्वस्थ भी हुए हैं। जिसमें 22 रांची, 3 पलामू एवं 2 गढ़वा के हैं। इसके साथ ही राज्य में स्वस्थ हो चुके मरीज़ों की संख्या 77 है। 154 मरीज़ों में आधे मरीज स्वस्थ हो चुके हैं।

अब तक मिले मरीजो की स्थिति कुल 154-

राँची 93, गढ़वा 23, बोकारो 10, पलामू 8, हजारीबाग 3, धनबाद 2, गिरिडीह 1, सिमडेगा 2, कोडरमा 3, देवघर 4, जामताड़ा 2, गोड्डा 1, दुमका 2