कहते हैं रात को अपनी ख़ूबसूरती बताने के लिए, अल्फ़ाज़ नहीं लगते, एक चांद काफ़ी होता है और चांद को ऐतबार होता है कि उससे दूर रह कर भी, उससे ज़्यादा रौशन हो कर भी, सितारे, उसे संवारेंगे। ठीक ऐसा ही होता है ज़िंदगी में भी, हर कामयाबी,किसी के होने भर से असरदार बनती है, कुछ नाम ख़ामोशी से चले जाते हैं और कुछ बख़ूबी इफ़्तेख़ार कहलाते हैं।
इफ़्तेख़ार (PC-Mubi)
सैदना इफ़्तेख़ार अहमद शरीफ़ ख़ान, यही नाम था इनका इफ़्तेख़ार कहलाने के पहले। इनकी पैदाइश, 1920 में जलंधर में हुई और पंजाब की रूमानी आब-ओ-हवा में तरबियत पा कर जब ये जवान हुए, तो ख़ुद में, तरन्नुम सा महसूस किया और गाने में इनकी दिलचस्पी हुई। ये लखनऊ गए, वहाँ पेंटिंग भी सीखी, लेकिन गायक बनने का सपना न छोड़ सके। इनके आस पास के लोग अकसर इन्हें सुनते और सराहते थे। इन्हें के०एल० सहगल बहुत पसंद थे और ये उन्हीं के अंदाज़ में गाते थे। शौक़, इस हद तक था कि एक बार इन्होंने, किसी इश्तिहार में देखा कि HMV, कलकत्ते में कोई ऑडिशन रख रही थी, गायकों के लिए। जवानी का जोश और पुरज़ोर शौक़, इफ़्तेख़ार, अगले ही कुछ दिनों में कलकत्ते में थे। ऑडिशन में, इनकी आवाज़ को सराहा गया और कमल दासगुप्ता, जो HMV के मुलाज़िम थे, उन्होंने इनकी शख़्सियत की ख़ूब तारीफ़ कर दी, एक प्रोडक्शन हाउस में। बात ही बात में, इफ़्तेख़ार को उनकी पहली फ़िल्म, बहैसियत ऐक्टर मिल गई। ये साल था 1944 और फ़िल्म थी “तक़रार”।
इफ़्तेख़ार (PC-Cinestaan)
1947 में मुल्क़ के तक़सीम होने के बाद, इनके सारे रिश्तेदार उस तरफ़ के हो रहे, लेकिन ये यहीं रहे। इन्होंने हाना जोसफ़ नाम की यहूदी महिला से शादी कर ली थी और उस वक़्त के मुश्किल हालात में, कलकत्ते रहना ठीक नहीं था, सो ये परिवार के साथ मुंबई चले गए। कलकत्ते में रह चुके होने की वजह से, और वहाँ फ़िल्मों में काम करने की वजह से, इनकी जान पहचान अनिल बिस्वास (म्यूज़िक डायरेक्टर) और उनके दोस्त अशोक कुमार से थी।
“उस दौर में जान पहचान होते हुए भी, अशोक कुमार से मिल पाना ज़रा मुश्किल सा था। बात 1949 की है, फ़िल्म “महल” की शूटिंग में अशोक कुमार और मधुबाला, जी जान से लगे हुए थे और इफ़्तेख़ार भी ये शूटिंग देखने पहुंचे थे। इन्होंने अनूप कुमार जो कि अशोक कुमार के छोटे भाई थे, उनके हाथों एक पुर्ज़ा भेजा। अशोक कुमार ने उसे पढ़ा, उसमें मदद की मांग थी। इसके बाद इफ़्तेख़ारकी ख़ूब मदद हुई।”
50 के दशक में, “मिर्ज़ा ग़ालिब”, “श्री 420” और “देवदास” जैसी बड़ी फ़िल्मों का ये हिस्सा रहे और इनके अलावा भी कई फ़िल्में इन्होंने की। ये मशहूर हो चुके थे और 60 के दशक के शुरुआत में ही, बिमल रॉय की “बंदिनी” में ये दिखे और फिर इन्हें फ़ुर्सत न मिली। 1969 में एक फ़िल्म आई, “इत्तेफाक”, इसमें ये एक कड़क पुलिस इंस्पेक्टर का किरदार निभा रहे थे, बस यहीं से ये पुलिस की वर्दी, इनके साथ चस्पा हो गई। इसके बाद तो ये “डॉन”, “ज़ंजीर”, “विश्वनाथ”, “बेशरम” जैसी कई फ़िल्मों में पुलिस ही बने, हालाकि बाद की फ़िल्मों में इनकी तरक़्की, इंस्पेक्टर से कमिश्नर के ओहदे तक हुई।
फ़िल्म ‘इत्तेफ़ाक’ में राजेश खन्ना, बिन्दू, और इफ्तेख़ार (PC-Pinterest)
इन्होंने 400 से ज़्यादा फ़िल्मों में काम किया। हिन्दी के अलावा अंग्रेज़ी टीवी सीरियल, “माया” और डॉमिनिक लैपिएर के उपन्यास पर आधारित, “City of Joy” में भी, इन्होंने काम किया।
1995 में 75 साल की उम्र में ये गुज़र गए और क़ानून के लंबे हाथों की बारहा याद दिलाने वाला अज़ीम अदाकार चला गया। ये अपने ही जैसे उन सितारों में से एक थे, जो सिनेमा के फ़लक पर चांद को सजाने के लिए लाज़िम होते हैं।
(लेखक जाने-माने साहित्यकार, स्तंभकार, व शिक्षाविद हैं.)
आर्थिक पैकेज: कई बड़े सुधारों का ऐलान, निवेश के लिए प्राइवेट सेक्टर्स को तरजीह
ब्यूरो|Navpravah Desk
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने आज प्रेस कॉन्फ़्रेन्स में २० लाख करोड़ वित्तीय राहत कोष का लाभ देश को कैसे होगा, इसकी विस्तृत जानकारी दी।
आम जन मानस और उद्योग को कैसे राहत मिलने वाली है, आइए जानते हैं।
• EPF 12-12% से कम कर अगले तीन महीने तक 10 प्रतिशत कर दिया गया है। जो हमारे सरकारी संस्थान, PSU’s और PSE’s हैं उनमें ये 12% ही रहेगा।
• 25 लाख से लेकर 1करोड़ रुपए की इन्वेस्टमेंट कर जो 5करोड़ तक का व्यापार करेगा माइक्रो यूनिट कहलाएगा। स्मॉल के लिए 10करोड़ तक का निवेश और 50करोड़ तक का कारोबार और मीडियम में 20करोड़ तक का निवेश और 100करोड़ तक के टर्नओवर का प्रावधान किया गया है।
• 200 करोड़ से कम वाले में ग्लोबल टेंडर नहीं होंगे। इससे लघु ,सूक्ष्म, मध्यम उद्योगों को लाभ मिलेगा। आत्मनिर्भर भारत की तरफ ये एक और कदम है।
• प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज में एक सुविधा दी गई थी कि 12-12% EPF कर्मचारी और नौकरी देने वाले को भारत सरकार देगी ये पहले तीन महीनों के लिए किया गया था जिसे बढ़ाकर अगले तीन महीने जून, जुलाई और अगस्त तक कर दिया गया है। 3,67,000 ऐसी संस्थाओं के 72,22,000 ऐसे कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा। इनको कुल मिलाकर 2500 करोड़ का लाभ मिलेगा
• वर्ष २०१९-२०२० के इनकम टैक्स रिटर्न की तारीख़ बढ़ाकर 31 जुलाई कर दिया गया है।
कोरोना वायरस ने विश्व में हाहाकार मचा दिया है, अब तक इस संक्रमण से लाखों लोगों की मौत हो चुकी है, और अभी भी लाखों लोग संक्रमित हैं, पर इसी सबके बीच इंग्लैंड से एक राहत भरी खबर सामने आयी है।
इंग्लैंड में कोरोना वायरस की वजह से लगाए गये लॉकडाउन में आज से रियायतें मिलनी शुरू हो गईं है, और कामगार काम पर लौटने लगे हैं, लेकिन वहीं सार्वजनिक वाहन में यात्रा करने से बचने की सलाह दी गई है।
ब्रिटेन के पीएम बोरिस जॉनसन ने इस हफ्ते संसद में चरणबद्ध योजना पेश की थी, जिसके तहत लोग अब बाहर अधिक समय व्यतीत कर सकते हैं और अपने घर के बाहर एक व्यक्ति से मिल सकते हैं।
इस योजना के तहत जिन खेलों में शरीर से दूरी बरतना संभव है उन्हें अनुमति दी गई है जैसे कि गोल्फ और लोगों को चेहरे को ढंककर रखने की सलाह दी गई है, लेकिन वहीं ब्रिटेन सरकार और स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तर आयरलैंड प्रशासनों के बीच लॉकडाउन नियमों को लेकर कुछ मतभेद भी है।
जॉनसन ने बताया कि, सबसे खराब परिणाम इस विषाणु के फिर से लौटने और काबू से बाहर होने का है, जिससे लोगों की मौत हो सकती है और अर्थव्यवस्था को इसका खमियाजा फिर उठाना पड़ सकता है।
उन्होंने आगे कहा कि, हमें चौकन्ना रहना होगा, विषाणु को नियंत्रित करना होगा और ऐसा करते हुए जिंदगियों को बचाना होगा, इसलिए लोगों से अपील है कि वो अभी भी बहुत सी सावधानियां बरतें।
देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रधानमंत्री द्वारा घोषित वित्तीय राहत पैकेज से देश को होने वाले लाभ को सिलसिलेवार तरीक़े से बताया। मीडिया से उन्होंने बताया कि कैसे यह राहत कोष आम से लेकर ख़ास लोगों का सहयोग करेगा। आइए जानते हैं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने क्या-क्या कहा-
• आत्मानिभर भारत- अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढाँचा, प्रणाली, जनसांख्यिकी और माँग के पाँच स्तम्भ।
• आज से शुरू होकर, अगले कुछ दिनों में हम पीएम के दृष्टिकोण को सामने रखने के लिए टीम के साथ मीडिया के सामने अपनी बात रखेंगे।
• हम यह नहीं भूलेंगे कि हमारे पास गरीबों, जरूरतमंदों, प्रवासियों, दिव्यांगों और देश के वृद्धों के प्रति एक जिम्मेदारी है।
• एक बड़ी पहल में, हम एसएमई सहित व्यवसायों के लिए 3 लाख करोड़ रुपए के संपार्श्विक-मुक्त स्वचालित ऋणों की घोषणा करते हैं। 25 करोड़ रुपये तक बकाया और 100 करोड़ रुपये के टर्नओवर वाले पात्र हैं।
• एमएसएमई को 3 लाख रु. के लिए संपार्श्विक मुक्त स्वचालित ऋण इनका 4 वर्ष का कार्यकाल 31 अक्टूबर, 2020 तक मान्य है।
• इक्विटी समर्थन के साथ सरकार रुपये के प्रावधान को आसान करेगी। अधीनस्थ ऋण के रूप में 20,000 करोड़।
• यह 45 लाख MSME इकाइयों को व्यावसायिक गतिविधि फिर से शुरू करने और नौकरियों की सुरक्षा करने में सक्षम करेगा।
• 50,000 करोड़ रु. फंड ऑफ फंड्स के माध्यम से एमएसएमई के लिए इक्विटी इन्फ्यूजन, मदर फंड और कुछ फंडों के माध्यम से संचालित किया जाएगा। यह एमएसएमई के आकार और क्षमता का विस्तार करने में मदद करेगा।
• एमएसएमई की परिभाषा को संशोधित किया गया है। निवेश सीमा को संशोधित किया जाएगा, टर्नओवर के अतिरिक्त मापदंड भी पेश किए जाएंगे।
• 200 करोड़ रुपए तक की सरकारी खरीद में वैश्विक निविदाओं से आत्मनिर्भर भारत बनेगा, फिर ‘मेक इन इंडिया’ भी कर सकेगा।
• भारत सरकार और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम अगले 45 दिनों में हर MSME को भुगतान करेंगे।
सावन मास में सोलह सोमवार के व्रत की परंपरा काफी लम्बे समय से चली आरही है जिसमें महिलायें अपने लिए अच्छे वर की प्रार्थना भगवान शिव और शक्ति के प्रतीक शिवलिंग की पूजा कर, करती हैं।
भारतीय वामपंथी बुद्धजीवियों के आलोचनात्मक निशाने पर यह परंपरा आती रही है। अपने विचारों का मूल्यांकन करने के बजाय, यह बुद्धजीवी आरोप लगाकर भाग जाने में यकीन रखते हैं। विभिन्न सोशल मीडिया टूल्स/साइट्स पर पोस्ट या विडियो के माध्यम से अक्सर शिवलिंग के बारे में इनका बौद्धिक कीचड़ देखने-सुनने को मिल जाता है ।हद तो तब हो जाती है जब कुछ बुद्धजीवी इसे रेप की वजह बताने लगते हैं।
वैसे तो इन विषबुद्धियों को किसी भी प्रकार का जवाब देना अपनी तार्किक क्षमता का अपमान करना है मगर इन विडियोज़ को देखने वाले बहुत सारे युवा भी हैं, जिन्हें इस तरह की जानकारी से अपने कल्चर के बारे में संशय हो सकता है।
आप शिवलिंग को गौर से देखने पर पायेंगे कि यह सिर्फ एक लिंग नहीं है। दरअसल शिव लिंग का स्ट्रक्चर ,शिव लिंग और महायोनी के संयोग से बनता है। यह संयोग केवल सेक्स का द्योतक नहीं है, अपितु यह असल में प्रकृति में जीवन की शुरुआत का प्रतीक है। लिंग पुरुषत्व का प्रतीक है तो योनि नारीत्व का।
हम सभी में यह साधारण समझ होती है कि किसी भी तरह के जीवन के प्रादुर्भाव के लिए इन तत्वों का मेल आवश्यक है। चाहे प्रजाति कोई भी क्यूँ ना हो ,यह स्ट्रक्चर इसी बात को बताता है कि जीवन में दोनों पक्षों का एक समान महत्त्व है ,किसी भी पक्ष का योगदान कम करके नहीं आंक सकते और किसी एक की भी अनुपस्थिति में जीवन संभव नहीं।
यह स्ट्रक्चर हमें यह भी बताता है कि जीवन में क्रिएटर का क्या महत्त्व है। आज यह जो पूरी क्रिएशन की प्रक्रिया चल रही है, इसे गौर से देखेंगे तो आप इसमें एक तरीके का साम्य पायेंगे, हर चीज़ की एक वजह पायेंगें और उसके महत्त्व को समझेंगे। यह स्ट्रक्चर हमें उस महा-मिलन के बारें में बताता है जिससे यह पूरी क्रिएशन बनी है। वह महा-मिलन दरअसल एनर्जी और मैटर का मेल है।
यदि आप विज्ञान के विद्यार्थी हैं तो आप यह अवश्य जानते होंगे की ऊर्जा (एनर्जी) और तत्त्व (मैटर) मेल से ही इस श्रृष्टि की उत्पत्ति हुई है। यह दोनों ही ना तो पैदा किये जा सकते हैं और ना ही इनकी मौत हो सकती है (Neither created nor destroyed but can be transformed). अगर आप हिंदू फिलॉसफी में रूचि रखते हैं तो श्रीमदभगवद्गीता में आपको यह पढने का सुअवसर अवश्य मिला होगा कि – 1) आत्मा को न शस्त्र काट सकते हैं, न आग उसे जला सकती है। न पानी उसे भिगो सकता है, न हवा सुखा सकती है। 2) आत्मा अजन्मा, नित्य, शाश्वत, पुरातन है। 3) ना ऐसा वक़्त कभी था कि मैं और तुम नहीं थे और ना ही ऐसा वक़्त कभी आएगा कि मैं और तुम नहीं होगे। बस अंतर यह है कि तुम्हे इस तथ्य का भान नहीं है और मुझे है (श्री कृष्ण ,अर्जुन से )।
यही स्ट्रक्चर इस तथ्य का परिचायक है, कि क्रिएशन एक एवर लास्टिंग ,एवर इवोल्विंग और ऑलवेज हैपनिंग प्रोसेस है। सीधे कहें तो शिव लिंग में लिंग का स्ट्रक्चर एनर्जी को प्रदर्शित करता है जबकि महायोनी मैटर (तत्त्व) को और दोनों का मेल ही इस क्रिएशन का कारण और कारक है जो कि सतत रूप से हमेशा होता रहता है।
यह विचार शिव लिंग का वैज्ञानिक पहलू दर्शाता है, मगर मूल प्रश्न तो यह था कि इसे पूजा क्यूँ जाए और क्या यह रेप कल्चर को बढ़ावा देता है?
पहले प्रश्न के उत्तर के लिए हमें शिव की प्रेम कथा समझनी होगी। शिव एक अद्वितीय प्रेमी हैं, सती के। इतने कि जब राजा दक्ष द्वारा अपने पति शिव को अपमानित किये जाने पर सती यज्ञ कुंड में कूद कर आत्म-आहुति दे देती हैं तो क्रोध में शिव ना सिर्फ दक्ष का वध कर देतें हैं, बल्कि सती के मृत शरीर को प्रेम से गले लगाये फिरने लगते हैं।
अपनी पत्नी से ऐसा प्रेम करने वाला किस नवयुवती की आकांक्षा में नहीं होगा ,कौन नहीं चाहेगा कि उसका पति उसके प्रेम में शिव हो जाए और उसकी मृत्यु के पश्चात् भी उसे जाने ना दे। ऐसे में शिव ही वह व्यक्ति प्रतीत होते हैं जिनसे वर की मांग की जाए, तो कर्मकाण्डो से इतर शिव आराधना, अच्छे वर की प्राप्ति हेतु एक उचित क़दम प्रतीत होता है।
अब आते हैं दूसरे आक्षेप पर कि यह रेप को बढ़ावा देता है । अभी तक आपने यह तो जान लिया होगा कि यह सिर्फ एक कुंठित आरोप है जो सिर्फ निगेटिव फेम के लिए लगाया है। चूंकि भारत में हिन्दू प्रतीकों का अपमान बुद्धिमता का प्रतीक है, इसलिए ऐसा बौद्धिक पाखण्ड अक्सर देखने को मिल जाता है। गंगा जमुनी तहज़ीब के वकालती ही इन्हें अधिक प्रचारित करते हैं। पिछले दिनों एक मैन्युफैक्चर्ड पोल में भारत को महिलाओं के लिए सबसे खतरनाक जगह साबित करने का प्रयास किया गया। कुल 542 लोगों के समूह नें 135 करोड़ लोगों के चरित्र का सर्टिफिकेट जारी कर दिया। हालाँकि यह पोल भी ऊपर वाले आरोप की तरह सिर्फ कुंठा प्रदर्शन मात्र था।
कुछ वर्षों पहले एक सोशल एक्सपेरिमेंट के दौरान पर एक अमेरिकन नवयुवती न्यूयॉर्क की सड़कों पर अकेले घूमने लगी। उसने एक ऐसी ड्रेस पहनी थी जो रिविलिंग नहीं थी फिर भी अपनी पूरी वॉक के दौरान उसे बहुत सारे मर्दों नें वर्बली फ़्लर्ट/एब्यूज़ किया। एक युवक तो कई ब्लॉक्स तक उसके साथ चलता रहा और इस प्रकार एक ऐसा देश जहां महिलाओं को उन्मुक्त जीवन जीने के लगभग सारे अधिकार हासिल हैं, वहां भी महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक गंभीर प्रश्न चिन्ह प्रकाश में आ गया। यह प्रश्न गंभीर इसलिए है क्योंकि महिलाओं की महत्तम आज़ादी सुनिश्चित करने वाले इस देश की संसद में पुरुषों की संख्या औरतों से ज्यादा है, और अनुपात हमेशा से ही ऐसा रहा है। मानसिकता के मूल रूप से प्रो वीमेन होने की संभावना अधिक थी, किंतु ऐसा रिजल्ट मुझ जैसे बाहरी के लिए थोड़ा आश्चर्यजनक था। अब इस परिपेक्ष्य में भारत की सामाजिक चेतना को परखने के लिए मुंबई में इस प्रयोग को रेप्लिकेट किया गया। मुंबई के एक चौराहे पर एक नवयुवती तुलनात्मक रूप से रिविलिंग कपड़े पहन 3 घंटे खड़ी रही, मगर उस पर किसी ने कोई सेक्सिस्ट या मिसोजिनिस्टिक रिमार्क नहीं किया। यहां कपड़ो की बात इसलिए की जा रही है क्युंकी कुछ लोग मर्दों की ऐसी हरकत के पीछे कपड़ों को वजह बताते हैं, जो कि एक दकियानूसी बात है। अगर हम यह सोच भी लें कि भारतीय प्रयोग की नायिका एक अटेंशन सीक करने के लिए ऐसे कपड़े पहने तो भी वह सुरक्षित रही। हम यह आकलन निकाल सकते हैं कि उपरोक्त प्रयोग में हम महिला सुरक्षा चेतना के मामले में, अमेरिका से बेहतर साबित हुए। हालांकि स्तिथि दोनों ही अच्छी नहीं है और इस विषय में हमें बहुत काम करने की आवश्यकता है। बहुत सारे प्रशासनिक और संसदीय फैसलों से ही महिलाओं और पुरुष के बीच की अपॉरचुनिटी की ये गहरी खाई पटेगी और महिलाओं की आज़ादी का रास्ता बेहतर बनेगा। यद्यपि वर्तमान स्थिति में पूरे देश को होपलेस बता देना, दरअसल अपने बुरे व्यक्तिगत अनुभवों को विचार के रूप में प्रस्तुत करना है।
“किसी भी व्यक्ति को ,जो अपने बुरे अनुभव की छाप से कभी उबर नहीं पाया उसे किसी प्रतिरोधी संस्था (ऐसी संस्था जो कार्यरत सिस्टम में सुधार की हिमायती हो ) का प्रमुख नहीं बनाना चाहिए, क्योंकि वो कभी भी सकारात्मक बदलाव नहीं ला पायेगा। बल्कि वह बदला लेने में लग जाएगा/गी और इससे नई समस्यायें पैदा होनी शुरू हो जायेंगी। ऐसा व्यक्ति जब कार्यकर्ता के रूप में भी काम करे तो उसके काम की कड़ी स्क्रूटनी की जानी चाहिए ताकि संस्था अपने लक्ष्य से विमुख ना हो जाए। शिव लिंग पर ऐसे अनर्गल आरोप लगाने वाले व्यक्ति और संस्थाएं ऐसे ही अपने ‘सो कॉल्ड’ नोबल कॉज़ से विमुख हो चुकी हैं। यह दरअसल उसी समूह का हिस्सा है जिन्होनें दहेज़ / बलात्कार क़ानून का गलत इस्तेमाल कर उसे डाईलुशन की राह पर भेज दिया है। “
लेकिन अगर हम यह मान ही लें कि यह स्ट्रक्चर सिर्फ और सिर्फ ह्यूमन सेक्स को रिप्रेजेंट करता है तो भी यह कौन सी बुरी बात है। सेक्स इस विश्व की सबसे खरी सच्चाई है , यह पूरी मानवता आज यहां तक पहुंची है क्योंकि किसी नर ने किसी मादा के साथ संभोग किया और परिणाम स्वरुप हुए बच्चे का अच्छी तरह ख्याल रखा। सेक्स सिर्फ शारीरिक नहीं होता, विचारों का जन्म भी सेक्स की परिणति होती है। जब मनुष्य भावनाओं के ज्वार भाटे से गुजर रहा होता है तो अक्सर वो विचारों के उधेड़ बुन में होता है, फिर उन्हीं विचारों के मंथन से एक नया विचार जन्म लेता है। कवि नई रचना करता है ,लेखक नई कहानी लिखता है , विचारक नई प्रणाली के बीज बोता है ,इनमें से कई क्रांति का रूप ले लेते हैं, तो सेक्स को पूजने का मतलब सिर्फ सेक्स को रियल लाइफ में मेनिफेस्ट करना नहीं होगा, बल्कि यह समझना होगा कि क्रिएशन के कोर में यही प्रक्रिया है और इसे अनुशासन के साथ मैनेज करना ही वह तरीका है जिससे मानव प्रजाति स्वस्थ रूप से प्रगति कर सकती है। इसीलिए विवाह जैसी व्यस्था की स्थापना की गयी और सेक्स इस वैवाहिक व्यस्था का अभिन्न अंग है। यदि एक लड़की विवाह के उपरान्त एक ऐसे लिंग की आकांक्षा रखती है जो उसे संभोग के दौरान संतुष्ट कर पाये तो इसमें भी कुछ गलत नहीं और वो इसके लिए पूजा करे तो भी कुछ गलत नहीं। अच्छा सेक्स एक अच्छे रिश्ते में ही प्राप्त होता है, यदि आपके पार्टनर के साथ आपका मानसिक कनेक्शन बेहतर नहीं है तो उसके साथ सेक्स भी किसी अनवांटेड मेहनत के काम को करने जैसा ही होगा। ऐसे में अच्छे लिंग की कामना करना मतलब एक ऐसे इंसान की कामना करना जिसके साथ आपका मानसिक संतुलन बेहतर हो, जिसकी समग्रता में यह कह सकते हैं शिवलिंग–महायोनी को पूजने में कोई बुरी बात नहीं है और ना ही यह रेप का कारण हैं क्योंकि रेप वहां भी होते हैं और शायद ज़्यादा होते हैं जहां शिव नहीं पूजे जाते।
(लेखक मूलतः बैंकर हैं और साहित्य, समाज के विषयों में विशेष रुचि रखते हैं। यह आलेख उनके निजी विचार हैं।)
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज शाम 4 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस में वह 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज से जुड़ी सभी डिटेल साझा करेंगी। कल (मंगलवार को) अपने सम्बोधन में प्रधानमंत्री ने इस आर्थिक पैकेज का ऐलान किया था।
आर्थिक पैकेज से जुड़ी विस्तृत जानकारी आज वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बताएंगी। वित्त मंत्रालय के प्रधान आर्थिक सलाहकार संजीव सान्याल ने एक निजी चैनल को बताया कि पैकेज की पूरी जानकारी दो-तीन स्टेज में सामने आएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पैकेज से समाज के हर तबके को सहायता मिलेगी।
कोरोना से हुए नुकसान की भरपाई और देश को फिर से खड़ा करने के लिए मोदी सरकार ने 20 लाख करोड़ के राहत पैकेज का ऐलान किया है। कल अपने सम्बोधन में प्रधानमंत्री ने बताया कि देश के जीडीपी का लगभग दस प्रतिशत आर्थिक पैकेज के रूप में प्रदान किया जाएगा, ताकि इस संवेदनशील समय में देश को और देशवासियों में मज़बूत बनाया जा सके।
20 लाख करोड़ का राहत पैकेज देश की जीडीपी का करीब 10% है। ये धनराशि 2020-21 के स्वीकृत बजट यानि 30 लाख करोड़ से करीब 10 लाख करोड़ कम है। प्रधानमंत्री ने साफ किया इस आर्थिक पैकेज से कुटीर उद्योग, लघु-मंझोले उद्योग, श्रमिकों, किसानों और मध्यम वर्ग को फायदा मिलेगा। इसके साथ ही भारतीय उद्योग जगत को भी नई ताकत देगा।
आज शाम वित्त मन्त्री निर्मला सीतारमण इस राहत पैकेज की विस्तृत जानकारी प्रेस कॉन्फ़्रेन्स में देंगी।
आज से तीन दिन पहले भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव की खबर आई थी, सिक्किम से सटी सीमा पर भारत और चीन के सैनिकों के बीच टकराव हुआ, लेकिन इस टकराव को स्थानीय दखल के बाद सुलझा लिया गया था।
चीन के साथ भारत की विवादित सीमा का लद्दाख क्षेत्र अलर्ट पर रख दिया गया है, रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन की पीएलए ने 1962 की जंग के एक पुराने पड़ाव गलवान नदी के पास टेंट लगाया है और देमचोक क्षेत्र में निर्माण शुरू कर दिया है।
इकनॉमिक टाइम्स की खबर के अनुसार, तीन हफ्ते हो गए हैं और यह क्षेत्र तनावपूर्ण बना हुआ है, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि स्थापित संवाद चैनलों के जरिए हालात को धीरे-धीरे नियंत्रण में लाया जाएगा।
रक्षा सूत्रों का कहना है कि, 1962 में चीनी आक्रमण हुआ था, और इसके गवाह बने गलवान नदी के इलाके में हाल ही में भारत-चीन के सैनिक आमने-सामने आये थे, इसके बाद यह इलाका चर्चा में आया था।
सूत्रों ने कहा है कि, मौजूदा दौर का टकराव पैट्रोल पॉइंट-14 पर हुआ, जिसके बाद उचित कदम उठाए गए, यह स्थान दौलत बेग ओल्डी हवाई क्षेत्र के करीब है।
बता दें कि, इनपुट के बाद नेपाल सीमा पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है, बॉर्डर पोस्ट को चाक-चौबंद किया जा रहा है, लिपुलेख दर्रे के पास एक सड़क के निर्माण में हुए बदलाव के बाद सशस्त्र पुलिस के हजारों जवानों को हाल ही में तैनात किया जा रहा है।
देमचोक में सीमा के पार गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है, विवादित लाइन ऑफ ऐक्चुअल कंट्रोल (वास्तविक नियंत्रण रेखा) के पास भारी निर्माण को दोनों पक्षों के बीच समझौते के उल्लंघन के रूप में देखा जा रहा है, गलवान नदी क्षेत्र में चीन के साथ भारत का पुराना विवाद रहा है।
ख़्वाहिशें और हासिल, बारहा दूर ही चलते हैं एक दूसरे से, लेकिन अपने हिस्से, अगर ख़ुशी रखनी हो आख़िरकार, तो क्या फ़र्क़, कहाँ से गुज़रे, क्या मलाल कहाँ पे ठहरे। तफ़सील से करनी हो बात, या मुख़्तसर रखनी हो मुलाक़ात, कुछ लोग अपना असर छोड़ ही जाते हैं, बोलें या न बोलें, उन्हें पुकार भर लेने से ठहर जाते हैं वे यादों में हमेशा के लिए। मैक मोहन भी तो हमारी यादों में ऐसे ही बसे हैं।
मैक मोहन (PC-Cinestaan)
मैक मोहन का जन्म 1938 में कराची में हुआ और बंटवारे के समय इनका परिवार भारत आ गया और कुछ दिनों के संघर्ष के बाद, ये लोग लखनऊ में बस गए। इनका असली नाम मोहन मकीजानी था। एक इत्तेफ़ाक़ ये भी है कि उसी समय शानदार अदाकार सुनील दत्त का परिवार भी बंटवारे का ज़हर झेलते हुए लखनऊ ही पहुंचा था और ये दोनों एक ही स्कूल में पढ़े भी।
” मैक मोहन क्रिकेट के बेहद अच्छे खिलाड़ी थे और उन दिनों मुंबई को क्रिकेट के लिए बेहतरीन जगह माना जाता था। क्रिकेटर बनने की चाह में, इन्होंने मुंबई जाने का फ़ैसला किया और जा भी पहुंचे। क्रिकेट के साथ- साथ नाटकों में भी हिस्सा लेते थे। नाटकों में मैक मोहन की दिलचस्पी बढ़ती गई और IPTA के साथ भी काम करने लगे। “
शौकत कैफ़ी ने इनकी अदाकारी को सराहा और अभिनय जारी रखने को कहा। साथ ही ये भी हिदायत दी कि मैक फ़िल्मों में भी काम ढूंढते रहें। 60 का दशक शुरु हो चुका था और शौकत कैफ़ी की बात मान, मैक, चेतन आनंद के साथ बतौर असिस्टेंट काम करने लगे। इसी दौरान इन्होंने Filmalaya School of Acting में अदाकारी के भी गुर सीखे।
शुरुआती दौर की एक फ़िल्म में मैक मोहन
1964 में आई फ़िल्म, “हक़ीकत” में पहली बार, चेतन आनंद ने इन्हें, पर्दे पर आने का मौक़ा दिया। इनका किरदार थोड़ी ही देर के लिए दिखा लेकिन सबने इनकी सलाहियत देखी और इन्हें लगातार काम मिलने लगा। इनके रोल बड़े नहीं होते थे, लेकिन खलनायक के सबसे ख़ास गुर्गे के रूप में, सबको मैक ही चाहिए थे। एक इंटरव्यू में, मैक ने कहा भी था कि एक ही तरह का किरदार निभाने से उन्हें ये फ़ायदा हुआ कि जब भी वैसे किरदार फ़िल्मकारों के ज़हन में आते, मैक को बुला लिया जाता।
1975 में आई फ़िल्म, “शोले” ने मैक की ज़िंदगी बदल दी और गब्बर सिंह ने स्क्रीन पर जैसे ही पुकारा, “अरे ओ सांभा”, ये किरदार हमेशा के लिए ठहर गया सबके ज़हन में, सबकी यादों में हमेशा के लिए। एक इंटरव्यू के दौरान, मैक ने बड़ी दिलचस्प बात, “शोले” के बारे में बताई। इस फ़िल्म के लिए इन्होंने बहुत मेहनत की और कई सीन भी शूट किए, लेकिन जब फ़िल्म पूरी हुई तो इन्होंने देखा कि इनके ज़्यादातर सीन काट दिए गए हैं। मैक की आंखों में आंसू आ गए। वे रमेश सिप्पी के पास गए और कहा कि ” ये भी सीन काट लिया होता”, इसपर रमेश सिप्पी ने हंसते हुए कहा, “इससे ज़्यादा नहीं काट सकता और अगर ये फ़िल्म चल गई, मैक तुम्हारा नाम सांभा ही हो जाएगा।” ऐसा ही हुआ भी।
शोले के साम्भा
इस फ़िल्म के बाद मैक मोहन ने पीछे नहीं देखा, “डॉन”, “काला पत्थर”, “क़र्ज़”, “कुर्बानी”, “सत्ते पे सत्ता” जैसी कई बेहद कामयाब फ़िल्मों का, ये हिस्सा रहे। इन्होंने 200 से ज़्यादा फ़िल्में की और उड़िया को छोड़, सभी प्रमुख भारतीय भाषाओं में संवाद बोले।
मैक ने अंग्रेज़ी, फ़्रेंच और स्पैनिश भाषाओं में भी काम किया। इनकी अंग्रेज़ी बोलने और लिखने में बेहद उम्दा थी, जिसका मिसाल आज तक दिया जाता है। मैक मोहन ने 1986 में शादी की। इनके एक बेटा और दो बेटियाँ हैं।
एक फ़िल्म में हेमा मालिनी के साथ मैक मोहन (PC-JagranJunction)
इन्हें कपड़ों का बहुत शौक़ था इसलिए हमेशा इनका लिबास, चमकता रहता था। इनकी और संजीव कुमार की बड़ी गहरी दोस्ती थी। मशहूर फ़िल्मकार, रवि टंडन से इनके बहन की शादी हुई थी, इस तरीक़े से, ख़ूबसूरत अदाकारा, रवीना टंडन, इनकी भांजी हैं।
फ़िल्मों में शानदार काम मैक ने किया, हमसे उनकी मुलाक़ातें, मुख़्तसर सी ही रहीं हर बार, पर राबता कुछ ऐसा क़ायम हुआ, कि इतने तफ़सील से उन्हें आज भी याद किया गया। 2010 में मैक हमारे बीच नहीं रहे। बहुत ज़्यादा शराब और सिगरेट ने इन्हें 72 साल से ज़्यादा जीने न दिया।
मैक मोहन भारतीय सिनेमा के एक बेमिसाल सितारे थे, वे हमेशा याद आएंगे।
(लेखक जाने-माने साहित्यकार, स्तंभकार, व शिक्षाविद हैं.)
जहां भारत समेत पूरी दुनिया एक अत्यंत खतरनाक लाइलाज बीमारी , कोरोना संक्रमण से जूझ रही है जिससे पाकिस्तान भी अछूता नहीं है, ऐसी अवस्था में भी पाकिस्तान भारत के खिलाफ़ साजिश रचने की अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है।
शुरुआती दिनों में जब कोरोना त्रासदी चीन से होते हुए पूरी दुनिया में फैल रही थी तब यूरोपीय और अमरीकी देशों ने इस वायरस को अत्यंत गंभीरता के साथ नहीं लिया जिसका दुष्परिणाम इन देशों को देखने को मिला। जिसे देखते हुए भारत सरकार ने तत्काल 136 करोड़ की विशाल आबादी को देखते हुए बहुत जल्द महत्वपूर्ण फैसले लिए, ताकि भारत की इस विशाल आबादी को संक्रमण से बचाया जा सके। इन प्रयासों की तारीफ स्वयं WHO (वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन) ने भी की। मजबूत इच्छाशक्ति रखने वाली भारत सरकार ने तत्काल चीन समेत दुनिया के कई देशों में फंसे हुए भारतीय नागरिकों को बचाने के लिए “मिशन वंदे मातरम” शुरू किया। जिसके तहत दुनिया भर के देशों में फंसे हुए भारतीय नागरिकों को बचाया गया। भारत सरकार के द्वारा अपने नागरिकों को वापस लाने की इस मुहिम को देखकर दूर देशों में फंसे हुए पाकिस्तानी नागरिकों को भी अपने देश पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान से भी बहुत उम्मीद जगी। बदले में इमरान खान ने पाकिस्तानी नागरिकों को बचाने से यह कहकर इनका कर दिया कि, ‘इस समय जब चीन भयंकर बीमारी से जूझ रहा है, ऐसे में हम अपने परम मित्र चीन को अकेला कैसे छोड़े!’ अर्थात पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने अपने नागरिकों से साफ साफ कहा कि जो जहां है वहीं रहे और चीन के प्रति पाकिस्तान की मित्रता के प्रति कायम रहे। असल में ऐसा कह कर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने अपनी असमर्थता को छुपाने का प्रयास किया।
दरअसल पाकिस्तान के अंदरूनी आर्थिक हालात इतने खराब हो चुके हैं कि पाकिस्तान सरकार किसी भी तरह से अपने विदेशों में फंसे हुए 28000 से भी अधिक नागरिकों को ला पाने में असमर्थ है। पाकिस्तान के अंदर इतनी भी क्षमता नहीं कि वह अपनी विमानों में इंधन तक भरवा सके। इसी कारण से पाकिस्तान अपने नागरिकों को बचा नहीं पा रहा है। विदेशों में फंसे हुए नागरिकों को तो छोड़िए पाकिस्तान ने चीन से अपनी मित्रता के चलते आने-जाने वाले किसी भी व्यक्ति को पाकिस्तान में घुसने तक से नहीं रोका, जिस कारण पाकिस्तान में कोरोना संक्रमण बहुत तेजी के साथ फैला।
इसका एक प्रमुख कारण पाकिस्तान और चीन का ड्रीम प्रोजेक्ट CEPC (China–Pakistan Economic Corridor) भी है, जिसके चलते पाकिस्तान और चीन दोनों के ही अरबों रुपए इसमें फँसे हुए हैं। इसीलिए पाकिस्तान ने चीन से आने-जाने वाली किसी भी नागरिक को नहीं रोका जो पाकिस्तान में संक्रमण के तेजी से फैलने का प्रमुख कारण है।
दूसरी वजह यह है कि पाकिस्तान POK अर्थात पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर पर अपना सम्पूर्ण आधिपत्य जमाने का प्रयास कर रहा है। पाकिस्तान इसके लिए बड़ी तेजी के साथ पाक सेना से रिटायर हो चुके अपनी कई अधिकारियों और सैनिकों को PoK में बसाकर पाकिस्तान की डेमोग्राफ़ी चेंज करने का प्रयास कर रहा है। साथ ही पाकिस्तान की सरकार CEPC प्रोजेक्ट में लगे हुए कई श्रमिकों को भी PoK में बसा रहा है। पाकिस्तान PoK के नागरिकों के लाख विरोध के बावजूद भी कई चीनी कंपनियों को PoK की जमीन लीज़ पर दे रहा है।
“इसके साथ-साथ पाकिस्तान जानबूझकर PoK में कई कोरोना पॉजिटिव मरीजों को भी ला रहा है ताकि वहाँ के असल नागरिकों को दबाकर, डरा-धमका कर PoK को पाकिस्तान का हिस्सा बना सके। पाकिस्तान की चालबाजी इतने में ही नहीं रुक रही है। पाकिस्तान कोरोनावायरस त्रासदी के दौरान भी भारत के खिलाफ नई-नई साजिशें रचने से बाज नहीं आ रहा, जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण अभी हाल ही में देखने को मिला, जहां एक तरफ पूरी दुनिया इस भयंकर बीमारी से लड़ने का प्रयास कर रही है, इलाज खोजने का प्रयास कर रही है वहीं पाकिस्तान भारत के खिलाफ तमाम अंतरराष्ट्रीय मंचों का उपयोग भारत के खिलाफ सभी देशों को भ्रमित करने और झूठ फैलाकर भारत को बदनाम करने के लिए इस्तेमाल कर रहा है। हाल ही में भारत समेत दक्षिण एशियाई देशों के संगठन सार्क की ऑनलाइन बैठक के दौरान भी, पाकिस्तान ने इस मंच का उपयोग भारत से अपनी निजी दुश्मनी को दिखाने के लिए किया।”
इस सम्मेलन में भारत समेत पाकिस्तान, अफगानिस्तान, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, बर्मा, मालदीव आदि देशों के प्रधानमंत्री सम्मिलित हुए। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान इस सम्मेलन की अहम ऑनलाइन बैठक में सम्मिलित नहीं हुए और अपनी जगह मंत्रिमंडल के किसी अन्य नेता को भेजा। उस नेता ने भी कोरोना की बीमारी से निबटने के लिए आयोजित की गई इस ऑनलाइन सभा में भी दक्षिण एशियाई देशों के सामने कश्मीर का रोना रोने के अलावा और कुछ भी नहीं किया। इस दौरान भारत के प्रधानमंत्री ने संयम का परिचय देते हुए पाकिस्तान के मंत्री को टोका तक नहीं और उसको अपनी पूरी बात कर लेने दी। अगर भारत के प्रधानमंत्री चाहते तो वह उसी समय पाकिस्तान को ऑफलाइन कर सकते थे जो कि उन्होंने बिल्कुल नहीं किया। हालांकि पाकिस्तान का कोरोना आपदा से निपटने के लिए बुलाई गई सार्क देशों की इस ऑनलाइन मीटिंग में भारत के खिलाफ अपनी साजिश भी काम नहीं आयी और एक बार फिर से पाकिस्तान को मुह की खानी पड़ी। फिर भी पाकिस्तान अन्य कई अंतर्राष्ट्रीय मंचों का उपयोग, भारत के खिलाफ साजिशें रचने में इस्तेमाल करता आया है। अभी हाल ही में पाकिस्तान ने कोरोनावायरस से अपने देश को बचाने के लिए अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए, इस्लामिक देशों के संगठन से आर्थिक सहायता मांगी और दूसरी तरफ भारत के खिलाफ सभी इस्लामिक देशों को भड़काने का भी प्रयास किया। पाकिस्तान ने सभी इस्लामिक देशों को भारत के खिलाफ ‘इस्लामोफोबिया’ के नामपर डराने का प्रयास किया। इसके लिए पाकिस्तान ने अपने देश में बनाए गए झूठे प्रोपेगेंडा वीडियोज़ और झूठे सोशल नेटवर्किंग साइट्स के पेजेस का इस्तेमाल, भारत को बदनाम करने कि नीयत से किया। पाकिस्तान में बने, यमन की राजकुमारी के फ़र्ज़ी फेसबुक अकाउंट के माध्यम से भारत में इस्लामोफोबिया का डर दिखाने का प्रयास किया। हालांकि पाकिस्तान की यह साजिश भी नाकाम हो गई जब स्वयं यमन की राजकुमारी ने इस बात का खंडन कर दिया। पाकिस्तान ने भारत में कोरोना काल के दौरान भारतीय मुसलमानों के प्रति भी प्रोपेगैंडा फैलाया। बीजेपी की हिंदूवादी आरएसएस की विचारधारा वाली सरकार भारत के मुसलमानों पर धार्मिक अत्याचार कर रही है, ऐसा झूठ भी फैलाने का प्रयास किया। पाकिस्तान के विदेश मंत्री महमूद कुरैशी के अनुसार, “भारत में मुसलमानों के साथ अत्याचार हो रहा है, उन्हें धार्मिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है और हॉस्पिटलों में सही तरीके से इलाज नहीं किया जा रहा है। उन पर झूठी एफआईआर दर्ज कराई जा रही हैं, मारा-पीटा जा रहा है।” पाकिस्तान के मंत्री ने ऐसी बातों करके मुस्लिम देशों के संगठनों को भ्रमित करने का प्रयास किया। हालांकि भारत सरकार ने पाकिस्तान की इस झूठी चाल चलने नहीं दी और कुछ ही घंटों के अंदर पाकिस्तान के इस झूठ का पर्दाफाश किया।
गौरतलब यह है कि पाकिस्तान असल में क्या चाहता है! एक तरफ जहां पूरी दुनिया इस संक्रमण से जूझ रही है, वहीं पाकिस्तान ऐसी अवस्था में भी भारत के खिलाफ साजिशें कैसे रच सकता है इसका एक और उदाहरण देखने को हाल ही में मिला जब पाकिस्तान कोरोना संक्रमण को भी भारत के खिलाफ एक जैविक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने का प्रयास कर रहा है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण भारतीय मीडिया जी न्यूज के हवाले से प्राप्त हुआ है। ज़ी न्यूज़ चैनल के मुताबिक भारतीय सेना ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में चल रहे आतंकी , शिविर में से एक आतंकवादी की अपने पिता से की जा रही ऑडियो टेप इंटरसेप्ट की। इसमें एक पाकिस्तानी आतंकवादी अपने पिता से फोन पर बातचीत में कह रहा है कि, “पाकिस्तान की सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई उन्हें भारत में घुसपैठ कराने की तैयारी कर रही है। यहां मेरी तबीयत ठीक नहीं है, मेरे कई साथी कोरोना से संक्रमित हैं। हमें पाकिस्तान की सेना, सरकार और आईएसआई एजेंसी ने कोई भी दवाई उपलब्ध नहीं कराई है। इसके अलावा वह हमें भारत में घुसपैठ कराने की ट्रेनिंग और हथियार मुहैया करा रहे हैं।” इस ऑडियो टेप के भारत सरकार के हाथ लगने से, पूरी दुनिया के सामने फिर से पाकिस्तान बेनकाब हुआ है। पूरी दुनिया यह जान चुकी है कि, पाकिस्तान ऐसी विषम परिस्थिति में भी भारत के खिलाफ साजिश रचने से बाज नहीं आ रहा है।
पाकिस्तान भारत को क्षति पहुंचाने चोट पहुंचाने के लिए किसी भी हद से गुजर जाने को तैयार रहता है। हालांकि पाकिस्तान कितना भी प्रयास क्यों ना कर ले, भारतीय सेना उसके इन प्रयासों को हमेशा की तरह विफल करती रहेगी।
भारत सरकार और भारतीय सेना, एलाइट मोड पर है ताकि किसी भी कीमत पर संक्रमण से ग्रस्त कोई भी आतंकी सरहद के इस पार न आने पाए। क्योंकि पाकिस्तान कहीं ना कहीं चाह रहा है कि भारत में बैठे हुए चंद पाकपरस्त लोग, इन आतंकवादियों की मदद करेंगे। निश्चित रूप से संक्रमित आतंकवादियों द्वारा इन लोगों की मदद करने वाले व्यक्तियों को वह संक्रमित करेंगे। इस प्रकार पाकिस्तान भारत में कोरोनावायरस को सामुदायिक संक्रमण का रूप देने का प्रयास करना चाह रहा है। लेकिन पाकिस्तान की यह चाल भी नहीं चलने वाली क्योंकि भारत का कोई भी नागरिक पाकिस्तान के किसी भी आतंकवादी को ऐसी किसी भी प्रकार की मदद नहीं देने वाला। आतंकी रियाज नाइकू के मारे जाने के बाद पाकिस्तान को यह बात समझनी चाहिए कि ऐसी विषम परिस्थिति में भी भारत के खिलाफ साजिश रचने से वह अपने देश को कोरोनावायरस के संक्रमण से बचा नहीं सकता। पाकिस्तान के नागरिकों को यह बात समझनी चाहिए इस समय भारत के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखने में ही पाकिस्तान की भलाई है। मुसीबत की इस घड़ी में चीन पर भरोसा करके पाकिस्तान ने बहुत बड़ा धोखा खाया है। जिस चीन के मत्थे पाकिस्तान, भारत को उंगली दिखाने का प्रयास करता है, उसी चीन ने पाकिस्तान को, सबसे बड़ा धोखा दिया है। पाकिस्तान में कोरोना से लड़ने के लिए चीन से जो किट मांगी थी वह पूरी तरीके से एक्सपायर्ड और इस्तेमाल की हुई थी। पाकिस्तान की सरकार ने बिना देखे इन्हें देश के तमाम हॉस्पिटलों तक हस्तांतरित कर दिया। पैकेट खोले जाने पर चीन के इस धोखे का पता चला जिसमें एक्सपायर्ड दवाइयां, नकली पीपीई किट निकलीं, और अंतर्वस्त्र से बने हुए मास्क पाए गए। इस धोखे के बावजूद भी भारत से अपनी दुश्मनी के चलते पाकिस्तान सरकार यह नहीं समझ पा रही कि इस विपदा की घड़ी में उसके परम मित्र चीन से ज्यादा मददगार सिर्फ भारत ही हो सकता है। ऐसे में पाकिस्तान की जनता को चाहिए कि वे अपनी कठपुतली इमरान खान सरकार को कहे कि, वह भारत से मदद मांग ले जिससे भारत बिना देरी किए मानवता के आधार पर पाकिस्तान की मदद कर सके। यदि पाकिस्तान ऐसा नहीं करता है तो निश्चित रूप से पाकिस्तान को बर्बाद होने से कोई नहीं बचा सकता। पाकिस्तान अपनी बर्बादी के लिए स्वयं जिम्मेदार होगा। अब पाकिस्तान के ऊपर निर्भर करता है कि वे भारत से मदद मांगे या ना मांगे लेकिन भारत विरोधी मानसिकता से ग्रसित पाकिस्तान की सरकार ऐसा करेगी या नहीं, इसका फैसला पाकिस्तान की कठपुतली इमरान खान सरकार ना करके, पाकिस्तानी सेना और वहां की खुफिया एजेंसी आईएसआई के साथ कई आतंकवादी संगठन मिलकर करेंगे। क्योंकि इमरान खान इनके हाथों की एक कठपुतली मात्र है।
असल फैसला लेने का अधिकार पाकिस्तान की सेना और आईएसआई एजेंसी को ही है। पाकिस्तान के आर्थिक हालात इतने अच्छे नहीं है कि वह अपने बलबूते पर इस बीमारी से लड़ सके और स्वयं को बचा सके। पाकिस्तान सरकार ने प्रयास तो किया, अपने देश में संक्रमण को फैलने से रोकने का, परंतु पूरी तरीके से नाकामयाब हुए। क्योंकि स्वयं इमरान खान नेशनल टेलीविजन पर आकर कह चुके हैं, ‘एक तरफ अगर हम लोगों को कोरोना से बचाते हैं तो दूसरी तरफ लोग भूख से ही मर जाएंगे।’ अर्थात इमरान खान सरकार के पास अपनी जनता को बचाने के कोई ठोस नियम या उपाय नहीं है।
दरअसल पाकिस्तान की जनता भी इमरान खान सरकार के बनाए गए नियमों की अनदेखी कर रही है, और कहती है, ‘कोरोना वायरस से मरे या ना में भूख से जरूर मरेंगे।’ इतना ही नहीं इमरान खान यह जानते हुए भी कि यह वायरस इंसान से इंसान में फैलता है, और इसके लिए सोशल डिस्टेंस का पालन करना बहुत जरूरी है, के बावजूद लोगों को सामूहिक रूप से एकत्रित होने से रोक पाने में नाकाम सिद्ध हो रही है। इसका उदाहरण रमजान के पवित्र महीने में कठपुतली इमरान खान सरकार ने अपने देश के कट्टर मानसिक विचारधारा वाले मौलानाओं के दबाव में आकर देश की सभी मस्जिदों को खोल दिया है। जिससे भारी मात्रा में भीड़ एकत्रित होने का खतरा और ज्यादा बढ़ गया है। जिस कारण पूरे देश में संक्रमण ज्यादा तेजी के साथ फैल सकता है।
यह बात जानते हुए भी स्वयं इमरान खान सरकार ने कट्टरवादी ताकतों के आगे झुक कर इस बात की इजाजत दे दी। इमरान खान स्वयं ये जानते हैं कि, जब हम इलाज ही नहीं कर सकते तो स्क्रीनिंग करने या क्वारंटाइन सेंटर बनाने का खर्चा ही क्यों उठाया जाए। इसी के जवाब में इमरान खान सरकार ने 80 एकड़ का एक विशालकाय कब्रिस्तान बना दिया है। उन्हें पता है कि हम कुछ भी कर लें , हम पूरे तरीके से पाकिस्तान को कोरोनावायरस से मुक्त नहीं कर सकते और शायद यही कारण है कि भारत से अपनी नफरत के चलते पाकिस्तान हर हाल में भारत के ख़िलाफ़ साजिशें रचने से और अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है।
यह आज से नहीं बल्कि जब से पाकिस्तान का जन्म हुआ है, वह भारत को किसी न किसी तरीके से चोट पहुंचाने का प्रयास करता ही रहा है और मुह की खाता रहा है। अभी भी समय है, पाकिस्तान समझे कि यह समय भारत से नफरत का नहीं बल्कि भारत जैसे अत्यंत जिम्मेदार देश से, अपने देश के हालात को देखते हुए मदद मांगे। ऐसा करके पाकिस्तान की इमरान खान सरकार अपने देश के अस्तित्व को खत्म होने से बचा सकती है। भारत उसकी मदद मानवता के आधार पर करेगा। यदि वक्त रहते पाकिस्तान कोरोना संक्रमण पर लगाम नहीं लगा पाता है तो एक अनुमान के मुताबिक पाकिस्तान में लगभग डेढ़ करोड़ लोग बेरोजगार हो जाएंगे और, पहले से ही गरीबी से जूझ रहे पाकिस्तान में तकरीबन 7.30 करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे आ जाएंगे।
( लेखक समाजसेवी, स्तंभकार, व राजनीतिक जानकार हैं, उक्त लेख उनके निजी विचार हैं।)
सीतामढ़ी: लॉकडाउन में चीनी मिल की मनमानी, निकाले गए 600 मज़दूर
सुजीत कुमार मिश्रा | navpravah.com
बिहार के सीतामढ़ी जिले में मज़दूरों को रीगा चीनी मिल से निकाले जाने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि मिल प्रबंधन की मनमानी चरम पर है। मिल प्रबंधन ने रविवार देर शाम बिना कोई सूचना के सभी कामगारों को 2 महीने के लिए काम से हटा दिया है। लॉकडाउन के दौरान लिए गए इस निर्णय से कामगारों में हड़कंप मच गया है।
सीतामढ़ी के इस चीनी मिल में लगभग ६०० मज़दूर काम करते हैं। प्रबंधन के इस निर्णय से मज़दूरों पर कहर टूट पड़ा है। प्रबंधन की ओर से 11 मई से 11 जुलाई तक सभी तरह की सेवाओं पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है। प्रबंधन के इस निर्णय से लगभग 600 परिवार प्रभावित हुआ है।
स्थानीय सूत्र ने बताया कि मज़दूरों को इस बात की जानकारी तब मिली, जब वे मिल पर पहुंचे। वहां पहुंचने के बाद मज़दूरों ने देखा कि मिल के गेट पर चार पन्नों की एक नोटिस चस्पा थी।
इसके बाद यूनियन नेता के नेतृत्व में सभी कामगार चीनी मिल के मुख्य गेट के पास हंगामा करने लगे। करीब एक घंटे तक कामगार हंगामा करते रहे, लेकिन प्रबंधन की ओर से कोई नहीं आया और ना ही कोई एक्शन लिया गया। इसे रीगा मील वर्कर्स यूनियन ने बहुत बड़ा अन्याय बताते हुए मुख्यमंत्री, श्रम मंत्री, गन्ना मंत्री के अलावा जिला पदाधिकारी को पत्र भेजकर तत्काल कदम उठाने की मांग की।
हालाँकि अभी तक प्रबंधन की तरफ से मज़दूरों को कोई भी जवाब नहीं दिया गया। सभी मज़दूर इसलिए भी परेशान हैं कि उनके पास पैसे नहीं हैं और इस लॉकडाउन में कैसे वे अपने परिवार का पालन पोषण करेंगे।