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Friday, September 11, 2026
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‘अंदाज़ अपना अपना 2’ में भी नज़र आएँगे आमिर-सलमान!

एंटरटेनमेंट डेस्क,
हँसाकर लोटपोट कर देने वाली फिल्म अंदाज़ अपना अपना के अमर और प्रेम को आप बेशक़ भूले तो नहीं होंगे। इस फिल्म के फैंस के लिए एक बड़ी खुशखबरी यह है कि जल्द ही ‘अंदाज अपना-अपना’ का सीक्वल आने की उम्मीद है।
इस सुपरहिट फिल्म  के सीक्वल बनाए जाने को लेकर खबरें लंबे समय से सुनाई दे रही थीं, लेकिन अब इसका रास्ता साफ होता नजर आ रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, फिल्म की शूटिंग इस साल के अंत तक शुरू हो जाएगी। साल 1994 में आई सलमान-आमिर की फिल्म ‘अंदाज अपना अपना’ की सीक्वल  को ‘अंदाज अपना अपना-2’ नाम दिया जाएगा।
राजकुमार संतोषी निर्देशित ‘ अंदाज अपना अपना’ में सलमान खान, आमिर खान, करिश्मा कपूर, रवीना टंडन, शक्ति कपूर और परेश रावल ने मुख्य भूमिका निभाई थी और फिल्म के प्रोड्यूसर थे विनय सिन्हा।
रील लाइफ एंटरटेन्मेंट प्राइवेट लिमिटेड की निदेशक प्रीति सिन्हा ने बताया कि विनय सिन्हा ने ‘फैंटम फिल्म्स’ या किसी और को फिल्म का अधिकार नहीं बेचा है, जैसी कि मीडिया में अफवाह उड़ाई जा रही है। विनय पिक्चर्स ने आमिर और सलमान की मुख्य भूमिका वाली फिल्म का निर्माण किया था। फिल्म के अधिकार अब भी विनय पिक्चर्स के पास ही हैं और उसे फैंटम फिल्म्स को नहीं बेचा गया है। विनय सिन्हा की बेटी प्रीति ने बताया कि आनेवाली फिल्म मूल फिल्म ‘अंदाज अपना अपना’ की रिमेक नहीं है।”
दूसरी तरफ आमिर खान पहले ही सलमान खान के साथ इस फिल्म में काम करने की इच्छा व्यक्त कर चुके हैं। एक कार्यक्रम के दौरान आमिर ने  कहा कि मुझे आशा है कि सलमान भी ऐसी ही इच्छा रखते होंगे। अगर यह एक बेहतर स्क्रिप्ट हुई तो यकीनन हम फिर साथ-साथ काम करेंगे।

यू.पी. और पंजाब चुनाव को लेकर उत्सुक शीला, कहा- ‘जल्दी लिया जाए निर्णय’

ब्यूरो (नई दिल्ली),

कांग्रेस की वरिष्ठ नेता शीला दीक्षित ने कहा है कि पार्टी को उत्तर प्रदेश और पंजाब में चुनावी रणनीति को अंतिम रूप दे देना चाहिए। पार्टी के पास समय कम है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश या पंजाब में उन्हें जो भी भूमिका मिले, उसे निभाने को वे सहर्ष तैयार हैं।

उन्होंने कहा, “कांग्रेस के लिए समय हाथ से निकला जा रहा है। पंजाब और उत्तर प्रदेश, दोनों ही राज्यों में हमारी रणनीति के संबंध में निर्णय जितनी जल्द हो सके, उतनी जल्दी किया जाना चाहिए  जो भी निर्णय हो, जल्द से जल्द हो।”

जब उनसे यह पूछा गया कि क्या वह उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनने के लिए तैयार हैं, तब दीक्षित ने घुमा फिराकर जवाब देते हुए कहा कि वह पार्टी उच्च कमान के निर्देश का पालन करेंगी। उत्तर प्रदेश व पंजाब में से वे किसे प्राथमिकता देंगी,इस विषय में 78 वर्षीय दीक्षित ने कहा, ” पंजाब और उत्तर प्रदेश दोनों ही राज्यों में चुनाव हमारे लिए महत्वपूर्ण होंगे। पार्टी हाई कमांड जो भी भूमिका मुझे देना चाहती है, उसके लिए मैं तैयार हूं। “

दीक्षित ने उच्च कमान से अनुरोध किया कि प्रमुख निर्णय तेजी से लिया जाए। सूत्रों की मानें तो सोनिया और राहुल के साथ दीक्षित की बैठक में उन्हें उत्तर प्रदेश में अग्रणी भूमिका, संभवत: मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के लिए तैयार रहने को कहा गया है।

गौरतलब है कि दीक्षित ने कल पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी से मुलाकात की थी। उनकी इस मुलाकात को लेकर यह अटकलें जोरों पर हैं कि उन्हें उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया जा सकता है या पंजाब में एक बड़ी भूमिका दी जा सकती है। शीला दीक्षित तीन बार दिल्ली की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं।

ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी के चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने उत्तर प्रदेश के चुनावों में एक ब्राह्मण चेहरा सामने लाने के उद्देश्य से दीक्षित के नाम का सुझाव दिया है।

दूसरी ओर यह चर्चा भी ज़ोर पकड़ रही है कि दीक्षित को पंजाब का प्रभारी बनाया जा सकता है क्योंकि पार्टी एक ऐसा नेता तलाश रही है जो राज्य से संबंधित हो। दीक्षित मूल रूप से पंजाब से हैं। इसलिए कमलनाथ द्वारा बुधवार को पंजाब का प्रभार छोड़ने के बाद से ऐसी खबर आ रही है।

एनएसजी सदस्यता मामला: अब रूस भी भारत के साथ

शिखा पांडेय,

परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में भारत का पक्ष लगातार मजबूत होता जा रहा है। अमेरिका, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन के बाद रूस ने भी भारत को इस मामले में समर्थन का पूरा भरोसा दिया है। रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि वे इस मसले को सियोल में होने वाली बैठक में उठाएंगे और भारत के समर्थन की बात करेंगे।

एनएसजी में भारत की सदस्यता का समर्थन करते हुए पुतिन ने कहा कि वे चीन से बात करेंगे कि वो आखिर किस आधार पर भारत की सदस्यता का विरोध कर रहा है। हालांकि पुतिन ने कहा कि नियमों के मुताबिक ही आखिरी फैसला लिया जाएगा। रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि वो भारत को परमाणु संबंधी मसलों पर सहयोग देने के लिए तैयार है, लेकिन उसे अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में रहकर ही इस कोशिश को अंजाम तक पहुँचाना होगा।

पुतिन की इस बात से यह साबित हो गया है कि रूस भारत की एनएसजी में एंट्री को लेकर काफी सकारात्मक सोच रखता है। आपको बता दें कि सोमवार से एनएसजी सदस्यों की बैठक होने वाली है। पुतिन ने कहा है कि जितने नए देशों ने सदस्यता के लिए अपील की है, उनके बारे में 48 सदस्यों की एनएसजी टीम बैठक में विचार करेगी।

भारत-अमरीका के बीच बढ़ती दोस्ती पर पुतिन ने कहा कि इससे भारत और रूस के रिश्ते पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी आबादी वाले भारत में आर्थिक समस्‍याएं हैं और ऊर्जा से जुड़ी कई चुनौतियां हैं। हमें भारत के हितों को सुनिश्चित करने और उनको समर्थन देने के सभी मौकों को देखना चाहिए।

गौरतलब है कि एनएसजी में भारत की सदस्यता को लेकर विभिन्न देशों के साथ बातचीत को आगे बढ़ाते हुए नरेंद्र मोदी ने कुछ दिन पहले ही सीधे रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन से फोन पर बातचीत की थी। भारत के संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता से लेकर एनएसजी सदस्य बनने के वैश्विक महत्वाकांक्षा का रूस हमेशा से समर्थक रहा है। रूसी राष्ट्रपति द्वारा दिए गए इस समर्थन ने भारत के इरादों और विश्वास को और मज़बूत बना दिया है।

राजन के सेवा जारी न रखने के फैसले से दुखी हूँ -पी. चिदंबरम

शिखा पाण्डेय,
पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने आज रिजर्व बैंक गवर्नर रघुराम राजन के दूसरे कार्यकाल नहीं लेने के फैसले पर निराशा और दुःख व्यक्त किया लेकिन उन्हें इस घटनाक्रम पर कोई आश्चर्य नहीं हुआ।

पी. चिदंबरम ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा, “मैं डाक्टर रघुराम राजन के कार्यकाल समाप्ति के बाद आरबीआई छोड़ने के फैसले से निराश और बेहद दुखी हूं लेकिन मैं कहना चाहूंगा कि मुझे इस पर कोई आश्चर्य नहीं हुआ।” पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने जाने-माने विद्वान और अर्थशास्त्री पर उकसाने वाले, आधारहीन और बचकाने आरोप लगाकर, सोचे-समझे, नियोजित अभियान के जरिए इस मकसद में कामयाबी पाई है।

पूर्व वित्त मंत्री ने कहा, “मैं पहले भी कह चुका हूँ कि  यह सरकार खुद डाॅक्टर राजन के काबिल नहीं है। बावजूद इसके, भारत नुकसान में है।”
आपको बाता दें कि राजन को 2013 में संप्रग सरकार ने नियुक्त किया था जब चिंदबरम वित्त मंत्री थे। पिछले दिनों भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा लगाए गए तमाम आरोपों के बाद भी चिदंबरम ने राजन के पक्ष में अपना खुला मत रखा था और सरकार पर निशाना साधा था।

कैराना विवाद: मौके पर अब ‘ओवैसी’ का चौका

प्रमुख संवाददाता,
अब कैराना विवाद को बढ़ाने में रही सही कसर पूरी करने के लिए इस विवाद में कूद पड़े हैं एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी। कैराना से हिंदुओं के पलायन की खबरों के बीच अब ओवैसी ने दावा किया है कि साल 2013 के मुज़फ्फरनगर दंगों के बाद 50,000 मुसलमानों ने भी पलायन किया था। ओवैसी ने भाजपा से पूछा कि क्या वह एक तथ्यान्वेषी टीम मुज़फ्फरनगर भी भेजेगी, जैसा कि इसने हिंदुओं के कथित पलायन के मुद्दे पर कैराना भेजी है?

ओवैसी ने उत्तर प्रदेश के कैराना से कथित तौर पर पलायन करने वाले 346 परिवारों की सूची को ‘फर्जी’ बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और सपा दोनों इस मुद्दे पर नाटक कर माहौल को अपने-अपने अनुकूल बनाने में लगे हैं। ओवैसी ने दावा किया कि मुजफ्फरनगर दंगों के बाद 50,000 से अधिक लोगों ने अपना मूल स्थान छोड़ दिया, जहां वे पीढ़ियों से रहते आ रहे थे। उन्होंने दावा किया कि देश की आजादी के बाद अल्पसंख्यकों को सामूहिक रूप से हटाने के लिए यह सब किया गया था।

उन्होंने भाजपा के समक्ष सवाल खड़ा किया कि मुजफ्फरनगर दंगों के बाद विस्थापित हुए 50,000 लोगों के साथ क्या हुआ, उसका पता लगाने के लिए क्या भाजपा समय निकालेगी? क्या भाजपा अपनी तथ्यान्वेषी टीम भेजेगी? ओवैसी ने दावा किया कि मूल रूप से भाजपा के पास कोई और मुद्दा नहीं है। उन्होंने कहा कि जो भाजपा सबका साथ सबका विकास की बात करती है, कैराना मुद्दे ने उस भाजपा का असली चेहरा उजागर कर दिया है।
उन्होंने कहा कि भाजपा बहुसंख्यक समुदाय के बीच डर की भावना पैदा करना चाहती है और सपा मुसलमानों को यह संदेश देना चाहती है कि यदि आप सपा को नहीं चुनते हैं तो आप असुरक्षित हैं। इस तरह यह नाटक भाजपा और सपा, दोनों के लिए अनुकूल बैठता है। उन्होंने कहा कि जब ऐसा मुद्दा सामने आता है तो सपा खुश होती है क्योंकि इसे अपने मकसद में नाकाम रहने और कुशासन पर सवालों का जवाब नहीं देना पड़ता है।

ओवैसी ने कहा कि एआईएमआईएम अगले साल के शुरुआत में उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव लड़ेगा। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने उत्तर प्रदेश में एक गठबंधन बनाने के लिए विकल्प खुले रखे हैं।

कार्यकाल समाप्ति के बाद एकेडेमिक करियर में वापसी करेंगे रघुराम राजन

शिखा पाण्डेय,
आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन ने आज लगभग यह साफ कर दिया है कि सितंबर में अपना मौजूदा कार्यकाल पूरा करने पर वे अपने अकेडमिक कैरियर में वापसी करेंगे।  आरबीआई स्टाफ को लिखे एक पत्र में राजन ने अपनी दूसरी पारी, अपने कार्यकाल व आरबीआई की उपलब्धियों के विषय में चर्चा की है। राजन ने इस बात को लेकर आश्वस्ति जताई है कि उनके उत्तराधिकारी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को नई ऊंचाई पर ले जाएंगे।
उल्लेखनीय है कि राजन पर पिछले कुछ दिनों से राज्यसभा सदस्य व भाजपा के वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यन स्वामी लगातार गंभीर आरोप लगा रहे थे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उन्हें बरखास्त करने की मांग कर रहे थे। स्वामी ने आरोप लगाया था कि राजन ने जानबूझ कर देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाया है क्योंकि वे दिल से पूरे हिंदुस्तानी नहीं हैं। स्वामी ने कई बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख कर राजन को बर्खास्त करने की मांग की है। वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमण भी उनके खिलाफ बयान दे चुकी हैं। हालांकि आर्थिक जगत की ज्यादातर बड़ी हस्तियां चाहतीं हैं कि राजन को दूसरी पारी मिले।
दुविधा की बात यह रही कि सत्ताधारी भाजपा के अंदर एक वर्ग राजन की दूसरी पारी का पक्षधर रहा है, जबकि एक वर्ग उन्हें बाहर का रास्ता दिखाने का इक्षुक है।
आपको बता दें कि रघुराम राजन की नियुक्ति सितंबर 2013 में यूपीए सरकार द्वारा तत्कालीन गवर्नर डी. सुब्बाराव की जगह की गई थी। स्वामी द्वारा उन पर लगाए जा रहे आरोपों के बाद पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने उनका बचाव करते हुए कहा था कि यूपीए सरकार ने उस समय सबसे प्रतिभाशाली अर्थशास्त्रियों में एक को आरबीआइ का गवर्नर नियुक्त किया था। दो दिन पूर्व भाजपा नेता व वाजपेयी सरकार के अहम सदस्य रहे अरुण शौरी ने भी राजन का बचाव किया था और कहा था कि गड़बड़ियों के लिए वे अकेले दोषी नहीं हैं और उनकी क्षमता पर संदेह नहीं किया जा सकता है।
रिजर्व बैंक के गवर्नर के रूप में राजन का मौजूदा कार्यकाल इस साल चार सितंबर को पूरा होगा, हालांकि राजन ने कहा है कि वे हमेशा अपने देश की सेवा के लिए उपलब्ध रहेंगे। रघुराम राजन अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष आइएमएफ के पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री हैं। साथ ही शिकागो बूथ स्कूल में वित्त मामले के प्रोफेसर रहे हैं।

सेना ने दो आतंकी मारकर नाकाम की घुसपैठ की कोशिश

अनुज हनुमत 

श्रीनगर: एक बार फिर भारतीय सेना ने आज कश्मीर में नियंत्रण रेखा के पास तंगधार सेक्टर में दो आतंकियों को मारकर उनकी घुसपैठ की कोशिश को नाकाम कर दिया। यह जानकारी सेना के अधिकारियों ने दी है।

आपको बताते चलें की बीते तीन दिनों में नियंत्रण रेखा पर सुरक्षा बलों ने घुसपैठ की ऐसी कोशिश को दूसरी बार नाकाम किया है।

सेना के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘सेना ने आज सुबह नियंत्रण रेखा के पास कुपवाड़ा जिले के तंगधार सेक्टर में घुसपैठ की एक कोशिश को नाकाम कर दिया। दो आतंकी मारे गए हैं और ऑपरेशन जारी है।’’ उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन में एक जवान भी घायल हो गया जिसका उपचार चल रहा है।

बीते मंगलवार को ही कुपवाड़ा जिले के माचिल सेक्टर में घुसपैठ की कोशिश नाकाम की गई थी। दो दिन के ऑपरेशन में एक आतंकी मारा गया था और एक जवान शहीद हो गया था। इस ऑपरेशन में चार अन्य जवान भी घायल हो गए थे।

सावरकर पर की गई टिप्पणी पडी मंहगी, मुश्किल में कांग्रेस

अमित द्विवेदी,

ट्विटर पर विनायक दामोदर सावरकर के खिलाफ की गई टिप्पणी कांग्रेस पार्टी को मंहगी पड़ती नज़र आ रही है। मार्च महीने में सावरकर के खिलाफ किए गए ट्वीट को आधार बनाते हुए सावरकर परिवार के वकील ने कांग्रेस को मानहानि का नोटिस भेजा है और स्पष्ट कहा है कि उसी ट्विटर हैंडल से कांग्रेस सावरकार परिवार से माफ़ी मांगे।

विनायक दामोदर सावरकर के खिलाफ ट्विटर पर की गई आपत्तिजनक टिप्‍पणी को लेकर कांग्रेस पार्टी, पार्टी अध्यक्षा सोनिया गांधी और उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी को नोटिस भेजा गया है। पहली मर्तबा ऐसा हुआ है, जिसमें ट्विटर पर की गई टिपण्णी पर नोटिस भेजा गया है। सावरकर के रिश्तेदार रंजीत सावरकर ने यह कानूनी नोटिस भेजा है।

ईटी की एक खबर के मुताबिक, कांग्रेस के ट्विटर हैंडल से मार्च महीने में जो ट्वीट्स पोस्‍ट किए गए थे, उनसे वीर सावरकर का अपमान हुआ है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक़ यह नोटिस 16 जून को भेजा गया था।

सावरकर परिवार के वकील हितेश जैन ने बताया कि यह नोटिस कांग्रेस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से किए गए उस ट्वीट से संबंधित है, जिसमें सावरकर को गद्दार की संज्ञा दी गई। दरअसल, इस नोटिस में @INC द्वारा किए गए उन ट्वीट्स का जिक्र है जो 5, 22 और 23 मार्च को किए गए थे। हालाँकि इस पूरे मामले में अभी तक कांग्रेस की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्रीलंका के जाफना स्टेडियम का करेंगे उद्घाटन

ब्यूरो,

आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्रीलंका के जाफना में श्रीलंकाई राष्ट्रपति मैत्रिपाला सिरीसेना के साथ भारत की मदद से दोबारा बने एक स्टेडियम का उद्घाटन करेंगे। उद्घाटन की सबसे खास बात यह होगी कि मोदी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए इस स्टेडियम का उद्घाटन करेंगे।

श्रीलंकाई राष्ट्रपति उद्घाटन समारोह के दौरान स्टेडियम में मौजूद रहेंगे जबकि पीएम मोदी दिल्ली से वीडियो कॉफ़्रेंसिंग के जरिए जुड़ेंगे। पीएमओ की ओर से इस खबर की पुष्टि की गई है।

भारत ने 7 करोड़ की लागत से इस स्टेडियम का जीर्णोंद्धार करवाया है। लगभग 2 हजार लोगों की क्षमता वाला स्टेडियम 1997 से प्रयोग में नहीं था। यह स्टेडियम श्रीलंका में आए सूनामी तूफान में तबाह हो गया था।

जाफना के पूर्व महापौर दिवंगत अलफ्रेड थांगराजा दुरैपा के सम्मान में इस स्टेडियम का नाम दुरैपा स्टेडियम रखा गया है। स्टेडियम 1997 से ही प्रयोग में नहीं था। इस स्टेडियम में अतंराराष्ट्रीय योग दिवस भी मनाया जाएगा।

भारतीय वायुसेना ने रचा इतिहास, पहली बार शामिल हुईं महिला फाइटर पायलट्स

शिखा पांडेय,

भारतीय वायुसेना ने इतिहास रचते हुए आज पहली बार बतौर फाइटर पायलट तीन महिला पायलट्स को शामिल किया गया। फ्लाइंग कैडेट भावना कंठ, मोहना सिंह और अवनी चतुर्वेदी को हैदराबाद के पास वायुसेना एकेडमी में कमीशन मिला। इन तीनों की फाइटर पायलट की ट्रेनिंग का एलान अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर किया गया था।

इन तीनों कैडेटों का चयन 120 महिला कैडेटों में से किया गया था। हैदराबाद से तकरीबन तीन किलोमीटर दूर डुंडिगल एयरफोर्स अकादमी में इन तीन प्रशिक्षु महिला पायलटों को लड़ाकू विमान उड़ाने के लिए समारोहपूर्वक वायुसेना में शामिल किया गया। इंजीनियरिंग में ग्रेजुएट ये तीनों युवा महिलाएं अपनी शुरुआती ट्रेनिंग पूरी कर चुकी हैं। अब इनकी एक साल की एडवांस ट्रेनिंग कर्नाटक के बीदर में होगी।

उक्त तीनों महिला लड़ाकू पायलटों की पहले चरण की ट्रेनिंग 18 जून अर्थात आज खत्म हो रही है। उन्हें आज वायुसेना अकादमी में समारोहपूर्वक दूसरे चरण में भेजा जाएगा, जहां वे ट्रेनर हांक और लड़ाकू विमानों पर एक साल तक कड़ी ट्रेनिंग प्राप्त करेंगी। इस अवसर पर उन्हें वायुसेना में शामिल (कमीशन) कर लिया गया।

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वायुसेना ने फायटर महिला फाइटरों को चार साल तक गर्भधारण न करने का निर्देश जारी किया गया है। दुनिया के अन्य देशों जैसे अमेरिका, रूस इत्यादि में महिला लड़ाकू विमान पायलटों की नियुक्ति पहले से ही की जा चुकी है। यहां तक की पाकिस्तान ने भी पिछले दिनों एक माहिला लड़ाकू विमान पायलट की नियुक्ति की।

उल्लेखनीय है कि पिछले साल अक्टूबर माह में भारत सरकार ने भारतीय वायुसेना में महिला लड़ाकू पायलटों को भी शामिल करने की मंजूरी प्रदान की थी। हालांकि वर्ष 1991 से ही यहां की वायुसेना में महिलाएं हेलीकाप्टर तथा ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट उड़ाती आ रही हैं। लेकिन लड़ाकू विमानों से इनको दूर ही रखा जाता था। इन तीन महिला पायलटों ने 150 घंटे की ट्रेनिंग पूरी की है।महिला लड़ाकू पायलटों के चयन के पहले चरण में 120 कैडेट्स में से सिर्फ 37 का चयन किया गया था, जिसमें से अंतिम दौर में उक्त तीन कैडेट्स चुनी गईं।