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Friday, August 7, 2026
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प्रोदुनोवा को ‘वॉल्ट ऑफ डेथ’ नहीं मानती दीपा

शिखा पाण्डेय,

ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाली पहली भारतीय जिम्नास्ट दीपा कर्माकार प्रोदुनोवा को ‘वॉल्ट ऑफ डेथ’ नहीं मानतीं, हालांकि विशेषज्ञों का ऐसा ही मनना है। दुनिया के सर्वश्रेष्ठ जिम्नास्ट भी  ‘वॉल्ट ऑफ डेथ’ के नाम से मशहूर ‘प्रोदुनोवा वॉल्ट’ को परफॉर्म करने से बचते हैं, पर 23 वर्षीय दीपा उसका अपवाद हैं।

रियो में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर देश का नाम रोशन कर लौटी दीपा ने अपने शानदार स्वागत के बाद कहा, “मुझे नहीं लगता कि प्रोदुनोवा एक जानलेवा वॉल्ट है। अगर हम अभ्यास करें तो सबकुछ आसान हो जाता है और मेरे कोच ने मुझसे इसका बेहतरीन अभ्यास कराया। मैं इस समय किसी दूसरे वॉल्ट के बारे में नहीं सोच रही हूँ। मैं प्रोदुनोवा करती रहूंगी।”

दीपा ने अपनी ख़ुशी ज़ाहिर करते हुए कहा, “मैं अपने वॉल्ट के लिए ओलंपिक में मशहूर हो गयी। लोगों ने मुझे ‘प्रोदुनोवा गर्ल’ तथा ‘दीपा प्रोदुनोवा’ कहकर पुकारा और फाइनल में बहुत सारे लोगों ने मेरे लिए तालियां बजाईं। मुझे लगा कि मैंने यह वॉल्ट चुनकर सही फैसला किया।” दीपा ने कहा कि मुझे इस बात की बेहद ख़ुशी  है कि मेरी वजह से भारत में लोग जिम्नास्टिक को जानने लगे।

खेल रत्न के लिए अपने नाम की सिफारिश किए जाने पर दीपा ने कहा कि उन्हें अपने कोच को द्रोणाचार्य पुरस्कार दिए जाने पर अधिक खुशी होगी। उन्होंने कहा, ” मुझे ‘खेल रत्न’ दिए जाने से अधिक प्रसन्नता मुझे तब होगी जब मेरे गुरु को द्रोणाचार्य पुरस्कार मिलेगा।”

द्रोणाचार्य पुरस्कार के लिए नामांकित कोच बिश्वेश्वर नंदी ने भी अपनी शिष्या की खूब तारीफ की और साथ ही कहा कि उन्हें हमेशा से पता था कि दीपा फाइनल के लिए क्वालीफाई करेंगी। उन्होंने कहा,” मैं दीपा के प्रदर्शन से संतुष्ट हूं। अगर हम पदक जीत जाते तो मुझे और अच्छा लगता लेकिन पदक न जीतने पर भी  मैं उसके परफॉरमेंस से बहुत खुश हूं।”

उर्जित पटेल होंगे भारतीय रिज़र्व बैंक के नए गवर्नर

इंद्रकुमार विश्वकर्मा,

उर्जित पटेल भारतीय रिजर्व बैंक के नए गवर्नर होंगे। वे रघुराम राजन का स्थान लेंगे, जिनका कार्यकाल 4 सितंबर को खत्म हो रहा है। उनका कार्यकाल 3 साल तक का होगा। उर्जित पटेल फिलहाल आरबीआई के डिप्टी गवर्नर हैं। उर्जित पटेल लंदन स्कूल इकोनॉमिक्स से ग्रेजुएट हैं और फिर उन्होंने येल यूनिवर्सिटी से पीएचडी की।

उन्हें जनवरी में रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर के रूप में तीन साल का विस्तार दिया गया था। इस पद की दौड़ में कुछ और नाम भी शामिल थे, जिनमें विश्व बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री कौशिक बसु, आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास, भारतीय स्टेट बैंक की प्रमुख अरुंधति भट्टाचार्य और वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमणियम के नाम प्रमुख थे।

उर्जित देश और विदेश दोनों क्षेत्र में काम कर चुके हैं। बताया जाता है कि उर्जित बेहद लो प्रोफाइल वाले शख्स हैं। उम्मीद की जा रही है उर्जित उन लोगों की उम्मीदों पर काफी खरे उतरेंगे जो लोग हाउसिंग लोन में इंट्रेस्ट कम करने की उम्मीद लगा रहे हैं।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आरबीआई के नए गवर्नर की नियुक्ति के विषय में गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक घंटे तक विचार-विमर्श किया था, जिसके बाद आरबीआई प्रमुख के लिए पटेल के नाम पर सहमति बनी।

गौरतलब है कि डॉ. राजन के करीबी सहयोगी माने जाने वाले उर्जित पटेल उस समिति के अध्यक्ष रहे हैं, जिसने थोक मूल्यों की जगह खुदरा मूल्यों को महंगाई का नया मानक बनाए जाने सहित कई अहम बदलाव लाए।

बलूचिस्तान मामला: अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने भी किया मोदी का समर्थन

शिखा पाण्डेय,

अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई ने प्रधानमंत्री मोदी का समर्थन करते हुए कहा कि मोदी ने अपने बयान से बलोचिस्तान के लोगों का हौसला बढ़ाया है। हामिद करजई ने कहा कि बलोचिस्तान के लोग सरकार समर्थित कट्टरपंथियों से मुक्ति चाहते हैं। ऐसे में भारत के प्रधानमंत्री ने बहुत हौसला दिया है।

दिल्ली आए करजई ने कहा, “पाकिस्तान के अधिकारी अफगानिस्तान और भारत के बारे में हमेशा से बोलते आए हैं लेकिन, यह पहली बार है कि भारत के प्रधानमंत्री ने बलोचिस्तान के बारे में बोला है।”

करजई ने कहा, “दूसरे समाज की तरह बलोचिस्तान में लोग भी विकास चाहते हैं। बलोचिस्तान के लोग अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं। वहां के लोग हिंसा नहीं शांति चाहते हैं।”

दूसरी ओर पाकिस्तान का कहना है कि मोदी द्वारा अपने स्वतंत्रता दिवस के सम्बोधन में बलोचिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर का उल्लेख जम्मू कश्मीर में सामने आने वाली ‘भयानक त्रासदी’ से ध्यान भटकाने का एक प्रयास है।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में बलूचिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के लोगों पर पाकिस्तानी अत्याचार का मुद्दा उठाया था और बलूचिस्तान, गिलगित और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की जनता का शुक्रिया अदा किया था जिन्होंने उनके प्रति आभार व्यक्त किया था।

अब हिंदी भाषा में कर सकेंगे इंजीनियरिंग, अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय की अनूठी पहल

इंद्रकुमार विश्वकर्मा ,

हिंदी भाषी क्षेत्रों के उन विद्यार्थियों के लिए एक अच्‍छी खबर है, जो अंग्रेजी भाषा में कमजोर होने की वजह से इंजीनियिरंग की पढ़ाई नहीं कर पा रहे थे। अब राष्ट्रभाषा हिंदी में भी यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को पढ़ाया जायेगा। यह सुनहरा अवसर उपलब्‍ध करवा रहा है, भोपाल  स्‍थित अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय। वर्तमान सत्र से से ही प्रवेश प्रक्रिया का काम शुरू हो रहा है। संभवत: देश में पहली बार ऐसा होने जा रहा है, जब इंजीनियरिंग की पढाई विद्यार्थी हिंदी में भी कर सकेंगे। आम तौर पर मेडिकल और इंजिनीरिंग की पढाई वर्षों से अंग्रेजी में ही हो रही है।

गौरतलब है कि चीन, रूस, जापान, इस्राइल, कोरिया, जर्मनी सहित कई देश इस समय अंग्रेजी के अलावा अपनी क्षेत्रीय भाषा में भी इंजीनियरिंग और मेडिकल की पढ़ाई करवाते हैं। इस दिशा में बहुत ही महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए विश्वविद्यालय ने फिलहाल मैकेनिकल, सिविल, और इलेक्ट्रिकल शाखा में इंजीनियरिंग की डिग्री और डिप्लोमा पाठ्यक्रम शुरू किए हैं। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मोहनलाल छीपा ने बताया कि वर्तमान शिक्षा सत्र से ही हिंदी में इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम पूरी तैयारी के साथ शुरू कर दिया गया है। मेकैनिकल, सिविल और इलेक्ट्रिकल शाखाओं में डिग्री और डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के लिये प्रवेश प्रक्रिया जारी है।  उन्होंने जानकारी दी कि प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के बाद हम हिन्दी माध्यम में क्लास शुरू कर देंगे।

कुलपति ने कहा कि महत्वपूर्ण यह है कि लगभग 250 साल से इंजीनियरिंग और मेडिकल शिक्षा पर अंग्रेजी माध्यम का कब्जा रहा है और इसमें अब हिन्दी माध्यम का विकल्प उपलब्ध कराने का यह प्रयास किया जा रहा है। विश्वविद्यालय फिलहाल भोपाल के मिन्टो हाल-पुराने विधानसभा भवन में कार्य कर रहा है। करीब 50 एकड़ क्षेत्र में इसका अपना परिसर निर्माणाधीन है। मध्यप्रदेश सरकार ने 19 जून 2011 में इसकी स्‍थापना करवाई थी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं आने दी जायेगी।

पाठ्यक्रम के लिए हिंदी माध्यम से पढाई करने के लिए अब तक प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या के सवाल पर उन्होंने कहा कि 31 अगस्त तक प्रवेश प्रक्रिया पूरी हो जाएगी जिसके बाद हम चालू सत्र में हिन्दी माध्यम से पढ़ाई शुरू कर देंगे फिर चाहे इसमें केवल एक ही छात्र आएगा तब भी पढ़ाई अवश्य होगी।

कुलपति ने कहा, हम इस धारणा को बदलना चाहते हैं कि प्रगति केवल अंग्रेजी से ही हो सकती है।  कुछ मुल्कों को छोड़ दिया जाए तो रूस, इस्राइल, चीन, जापान, कोरिया, और जर्मनी सहित दुनिया के अन्य देशों में इन पाठ्यक्रमों की शिक्षा इन देशों की अपनी में दी जाती है और ये सभी देश तरक्की कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि अभियांत्रिकी की तीन शाखाओं मैकेनिकल, सिविल और इलेक्ट्रिकल में बीई डिग्री और डिप्लोमा पाठ्यक्रम में प्रत्येक में 30-30 स्थान हैं। इस प्रकार तीन शाखाओं में कुल 180 विद्यार्थियों को हिंदी में इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम पढ़ाया जा सकेगा। इसके लिए गणित, भौतिकी और रसायन शास्त्र सहित पांच संकायों की व्यवस्था की गई है।

जो भारत को अपना देश मानते हैं, उन्हें गाय को माँ मानना चाहिए -रघुवर दास

शिखा पाण्डेय,

झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास का मानना है कि जो लोग भारत को अपना देश मानते हैं, उन्हें गाय को माँ मानना चाहिये। इसके साथ ही दास ने यह बात भी कही कि गोरक्षा के नाम पर हिंसा फैलाना बेहद गलत है। उन्होंने यह आशंका भी जताई कि गाय बचाने के नाम पर हाल में हुई हिंसक घटनाओं में पशु तस्कर शामिल हो सकते हैं।

गौहत्या और गायों की गिनती के मुद्दे पर संघ परिवार के साथ मतभेदों के बारे में पूछे जाने पर दास ने कहा, “संघ परिवार इस मुद्दे पर एकजुट है। गाय हमारी माता है। जो लोग भारत में रहते हैं और भारतीय हैं, उनके लिए गाय उनकी माता की तरह है।”

दास ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिछले पर अपनी सहमति जताई। दास ने कहा,” आप किसी भी धर्म या जाति के हों, गाय हमारी माता है और हमें गायों की रक्षा करनी चाहिये। लेकिन गौरक्षा के नाम पर यदि कोई हिंसा करता है, तो यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

दास ने अपना व्यक्तिगत मत वयक्त करते हुए कहा, “मैं व्यक्तिगत रूप से महसूस करता हूं कि जो लोग पशु तस्करी में लिप्त हैं, वही इस प्रकार के अपराध करते हैं। इस बात की जांच की जानी चाहिये।”

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने छह अगस्त को कथित गौ-रक्षकों पर नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए कहा था कि इस तरह के समाज विरोधी तत्व रात को अपराधों में लिप्त रहते हैं और दिन में गौरक्षक बनने का ढोंग करते हैं। मोदी की इस टिप्पणी पर विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया बेहद नाराज़ हुए थे।

सुप्रीम कोर्ट को भी शिवसेना ने दी चुनौती, कहा- ‘निर्देश देने वाले लक्ष्मण रेखा पार न करें’

प्रमुख संवाददाता,

उच्चतम न्यायालय द्वारा महाराष्ट्र में दही-हांडी उत्सव पर प्रतिंबध लगाये जाने पर शिवसेना ने अपना क्रोध व्यक्त करते हुए सीधे न्यायालय को ही चुनौती दे डाली है। शिवसेना ने स्पष्ट कहा , “हमें निर्देश देने वाले न्यायालय को इस मुद्दे पर लक्ष्मण रेखा पार नहीं करनी चाहिये। हमारे परंपरागत त्योहारों में बाधा डालने की कोशिश हुई, तो उसे सफल नहीं होने दिया जाएगा। और इस काम में शिवसेना अगुवाई करेगी। “

सेना ने सरकार पर पूरा भरोसा जताते हुए कहा, “हमारे उत्सव हमारी मान्यताओं का हिस्सा हैं। लोगों ने लोकतांत्रित तरीके से अपनी सरकार चुनी है। यह काम सरकार को करने दीजिये। सरकार जानती है कि क्या सही है और क्या गलत। यदि सरकार को नकारने और लोकतंत्र की हत्या का प्रयास किया जाएगा, तो सभी मोर्चों पर राष्ट्रीय व्यवस्था ध्वस्त हो जाएगी।”

सेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में कहा, “हिन्दुओं के त्यौहार और रीति रिवाज जारी रहेंगे। लोग हिन्दू उत्सवों के संबंध में इस प्रकार की बाधाएं लगाने के प्रयासों को विफल कर के रख देंगे क्योंकि जनता को न्यायालय का यह फैसला कतई स्वीकार नहीं है।”

उल्लेखनीय है कि उच्च्तम न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि दही-हांडी की उंचाई 20 फुट से ज्यादा नहीं होनी चाहिये और इसमें मानव पिरामिड बनाने वाले प्रतिभागियों की उम्र 18 साल से अधिक होनी चाहिये। दही-हांडी उत्सव समन्वय समिति के प्रतिनिधि मंडल ने उच्चतम न्यायालय के बुधवार के निर्णय पर कल मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस से मुलाकात की थी।

दही-हांडी समूह का मानना है कि परंपरागत त्योहार दही-हांडी के लिए उंचाई की सीमा तय करने से इस खेल में रोमांच और साहस समाप्त हो जाएगा। फड़णवीस ने दही-हांडी प्रतिनिधि मंडल से सभी मानकों के अनुसार यह उत्सव मनाने को कहा था। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे ने इस तर्क को अदालत में जोरदार तरीके से नहीं रखने पर बृहस्पतिवार को सरकार की आलोचना भी की थी।

सिंधु के कोच ने कहा, ‘अब लौटा दूंगा उसे फोन’

सौम्या केसरवानी,

जब बात अनुशासन की आती है, तो भारत के दिग्गज बैडमिंटन कोच पुलेला गोपीचंद कोई समझौता नहीं करते और यही वजह रही कि उन्होंने पिछले तीन महीने से पी.वी. सिंधु को फोन से दूर रखा और रियो पहुंचने पर इस रजत पदक विजेता के खाने पीने की चीज़ों पर भी नियंत्रण रखा।

अब सिंधु एक आम 21 वर्षीय लड़की की तरह जिंदगी जी सकती है तथा अपने साथियों को व्हाट्सएप पर संदेश भेजने के अलावा अपनी पसंदीदा आईसक्रीम भी खा सकती हैं। सिंधु के रजत पदक जीतने के बाद गोपी ने कहा, ‘सिंधु के पास पिछले तीन महीने के दौरान उसका फोन नहीं था। पहला काम मैं यह करूंगा कि उसे उसका फोन लौटाउंगा।’

गोपी ने ओलंपिक से सिंधु के अनुशासन और कड़ी मेहनत की भी तारीफ की। उन्होंने कहा, ‘पिछला सप्ताह उसके लिये शानदार रहा। पिछले दो महीनों में उसने जिस तरह से कड़ी मेहनत की, वह बेजोड़ था। जिस तरह से बिना किसी शिकायत के उसने बलिदान किए, वह शानदार था।

सिंधु अभी 21 साल की है और गोपी को उम्मीद है उनकी पसंदीदा शिष्या अभी काफी कुछ हासिल करेगी। उन्होंने कहा, ‘सिंधु अभी युवा है। मेरा मानना है कि इस टूर्नामेंट से उसे काफी कुछ सीखने को मिला है। उसके पास आगे बढ़ने की बहुत क्षमता है। आपको अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करना चाहिए। उसने हमें गौरवान्वित किया है। मैं उसके लिये वास्तव में खुश हूं।’

उन्होंने कहा, ‘मैं भी चाहता था कि हमारा ध्वज थोड़ा और ऊपर फहराया जाता लेकिन यह कहते हुए भी मैं सिंधु की तारीफ करता हूं कि उसने यहां तक पहुंचने के लिये बेहद कड़ी मेहनत की।’ टूर्नामेंट की बात करें तो विश्व में 10वें नंबर की सिंधु पूरी तरह से एक अलग तरह की खिलाड़ी दिखी।

WB कांग्रेस ने राजीव गांधी के विवादित बयान को ट्वीट कर खड़ा किया बखेड़ा

अमित द्विवेदी,

आज पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी की 72वीं जयंती के अवसर पर कांग्रेस ने उन्हीं का एक विवादित बयान ट्वीट कर विवादों को पुनर्जीवित कर दिया है। पश्चिम बंगाल कांग्रेस ने राजीव गांधी की जयंती पर उनका वो बयान ट्वीट कर दिया जिसमें उन्होंने इंदिरा गांधी की हत्या के बाद कहा था कि जब बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है। इस बयान के बाद राजीव गांधी की काफी आलोचना हुई थी।

यह ट्वीट राज्य कांग्रेस के आधिकारिक ट्वीटर हैंडल से किया गया था। यह बयान ट्वीट किए जाने के बाद से एक बार फिर इसे लेकर राजनीति गरमा गई। अब विरोधी दलों ने इस ट्वीट को मुद्दा बना लिया है। विरोधी दल आरोप लगा रहे हैं कि 1984 के जख्मों को इस ट्वीट ने फिर से ताजा कर दिया है। बीजेपी का कहना है कि ऐसी भावनाएं भड़काने वाले ट्वीट के लिए कांग्रेस को कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। विवाद के बाद बंगाल कांग्रेस ने ये ट्वीट हटा लिया।

आम आदमी पार्टी का कहना है कि कांग्रेस को सन् 84 की हिंसा पर कभी अफसोस नहीं रहा है। आज भी वे इस पर गर्व करते हैं। आप के नेता एचएस फुल्का ने कांग्रेस और बीजेपी पर एक साथ निशाना साधाते हुए कहा कि कांग्रेस सिखों के और बीजेपी मुसलमानों के खिलाफ की राजनीति करती है।

बार-बार 1984 के दंगों पर राजनीति ठीक नहीं-

इस बीच कांग्रेस की ओर से उनकी प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने इस पर सफाई देते हुए कहा है कि 1984 दंगों के मामले में उनके दल की ओर से पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह तक मांफी मांग चुके हैं। बार-बार इस मुद्दे को उठाकर राजनीति करना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा,” पश्चिम बंगाल कांग्रेस के ट्वीट को तुरंत ही हटा लिया गया था। पीएम के ट्वीटर हैंडल पर भी गड़बड़ियां होती हैं।”

गौर करें तो यह मामला और इस मामले में हो रही राजनीति आगामी पंजाब चुनावों की ओर इशारा करती दिखाई दे है। कांग्रेस इस बार सत्ता हासिल करने के हर प्रयास में लगी है। लेकिन, आम आदमी पार्टी से उसे टक्कर मिल सकती है। बीजेपी और अकाली दल का प्रयास भी सरकार दोबारा बनाने की है। लेकिन, इन सब के बीच कोलकाता से हुआ यह ट्वीट कांग्रेस के लिए फिलहाल भारी पड़ गया है।

नेहरू-पटेल की कांग्रेस एक परिवार में सिमट गई -भाजपा

अमित द्विवेदी,

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर स्वतंत्रता सेनानियों के अपमान का कांग्रेस द्वारा लगाए जाने वाले आरोप से भाजपा खुन्नस में है। कांग्रेस पर हमला बोलते हुए भाजपा ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि जवाहर लाल नेहरू और सरदार पटेल ने कभी नहीं सोचा होगा कि पार्टी का ऐसा हाल होगा।

भाजपा ने कहा कि आज कांग्रेस पार्टी मात्र एक परिवार तक सीमित रह गई है। नेहरू और पटेल ने कभी ऐसा सोचा नहीं होगा कि उनके खून पसीने से बड़ी हुई पार्टी सिर्फ एक परिवार चलाएगा।

केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने राहुल गांधी के संस्कृत श्लोक वाले ट्वीट को आड़े हाथों लिया। प्रसाद ने कहा कि पहले तो ये पता करना होगा कि राहुल गांधी करे तरफ से ये ट्वीट किया किसने। यही नहीं राहुल के इतिहास की जानकारी को लेकर पता करना होगा। गौरतलब है कि कल राहुल गांधी ने मोदी की चुटकी लेते एक संस्कृत का श्लोक ट्वीट किया था, जिसमें राहुल मोदी पर व्यंग करते नज़र आए थे।

ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष में आरएसएस संस्थापक केबी हेडगेवार की भागीदारी का हवाला देते हुए मोदी ने गोवा तथा हैदराबाद के मुक्ति संग्राम तथा आपातकाल के खिलाफ आंदोलन में आरएसएस और भाजपा की भूमिका बताकर उनके बलिदान को रेखांकित किया। जिसके बाद विपक्षी पार्टियों ने चौतरफा हमला शुरू कर दिया। कांग्रेसी प्रवक्ताओं के बाद कल राहुल गांधी ने भी मोदी पर व्यंगात्मक टिप्पणी की थी।

राहुल गांधी ने भी मोदी के बयान का उड़ाया मज़ाक, कहा- भगवान अज्ञानता से आज़ाद करें

अमित द्विवेदी,

खुद अपनी अज्ञानता और बचपने के लिए मज़ाक का पात्र बने रहने वाले कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर व्यंगात्मक टिप्पणी करते हुए उनकी अज्ञानता पर चिंता जताई है। राहुल ने ट्विटर पर मोदी के लिए प्रार्थना की है कि ईश्वर उन्हें अज्ञानता से आज़ादी दें।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक बयान को लेकर कांग्रेसियों में खलबली मच गई है। कांग्रेस के प्रवक्ता से लेकर उपाध्यक्ष राहुल गांधी जैसे नेताओं ने पीएम मोदी के उस बयान का मज़ाक उड़ाया, जिसमें उन्होंने कहा था कि ब्रिटिश काल में जितनी परेशानियां कांग्रेस ने झेली उससे कहीं ज़्यादा बीजेपी को आज़ादी के बाद झेलनी पड़ीं। मोदी के इस बयान पर कटाक्ष करते हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा, ‘मोदीजी आपके लिए प्रार्थना अस्तोमा सदगम्य, तमसो मा ज्योतिर्गमय, मृत्योरमा अमृतम गमया, ओम शांति, शांति, शांति।’

राहुल गांधी ने दो ट्वीट करके अप्रत्यक्ष रूप से मोदी के बयान का मज़ाक उड़ाया। पीएम मोदी ने कहा था कि भाजपा ने किसी भी अन्य दल से अधिक बलिदान दिया है। मोदी ने अफसोस जाहिर किया था कि उनकी पार्टी के हर प्रयास को गलत रूप में देखा जा रहा है।

पीएम मोदी ने स्पष्ट किया था कि बीजेपी एकमात्र ऐसी पार्टी है, जिसने शुरू से ही दिक्कतों का सामना किया है। अपने कार्यकर्ताओं की तारीफ़ करते हुए मोदी ने कहा कि पिछले 50-60 सालों से बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने बहुत संघर्ष किया, जिसकी बदौलत आज हम इस मुकाम पर पहुंचे हैं।