रोहतक में जाट आरक्षण के दौरान हुई हिंसक घटनाओं की जांच के लिए हरियाणा सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश की है। जानकारी के मुताबिक़, राज्य में हुई व्यापक हिंसा की सही जांच के लिए केंद्र से यह अनुरोध किया गया है।
जाट आरक्षण को लेकर हरियाणा में हाल ही भीषण आगजनी और हिंसा के मामले सामने आए। जिसमें उपद्रवियों ने व्यापक स्तर पर सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुँचाया। जिन संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया, उनमें पुलिस महानिरीक्षक का आवास, सर्किट हाउस, मंत्री आवास और सरकारी इमारतें शामिल हैं।
राज्य में जाटों ने नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण की मांग को लेकर हिंसक आंदोलन किया। इस आंदोलन में जहां जनजीवन अस्त व्यस्त रह और करोड़ों की संपत्तियों का नुकसान हुआ, वहीं 30 लोगों की जान भी गई।
इसी आंदोलन में कुछ लोगों ने राज्य के एक मंत्री के घर भी हमला बोल दिया था। हमले में मंत्री के परिवारवालों को जान से मारने की कोशिश भी की गई। राज्य ने इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए केंद्र से सीबीआई जांच की सिफारिश की है।
समाजवादी पार्टी के चर्चित नेता रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया अब भाजपा के लिए ठाकुर विधायकों को जोड़ने में लगे हैं। खबर है कि उत्तर प्रदेश में सपा के गिरते ग्राफ से चिंतित राजा भैया ने भाजपा से नज़दीकी बढ़ानी शुरू हो गई है। ऐसे में यदि सपा से राजा भैया भाजपा की तरफ खिसक गई तो उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में सपा को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
पिछले कुछ समय से अखिलेश और राजा भैया के बीच शीतयुद्ध चल रहा है। सभाओं में भी राजा भैया ने सीएम अखिलेश पर हमला करना शुरू कर दिया है। कयास लगाया जा रहा है कि सही मौका देखकर राजाभैया साइकिल से उतरकर कमल का दामन थाम सकते हैं।
इन दिनों यह बात चर्चा में है कि यदि ठाकुर विधायकों को एकजुट करने में राजा भैया सफल हो जाते हैं तो यह सपा को बड़ा झटका साबित हो सकता है। वहीं इन दिनों सपा मुखिया मुलायम भी अखिलेश पर काफी नाराज़ नज़र दिखे हैं।
ताज़ा जानकारी के मुताबिक, राजा भैया राज्य के ठाकुर विधायकों के साथ भाजपा में शामिल होने की तैयारी में जुट गए हैं। हालाँकि राजा भैया के बयानों से सपा को भी अंदाजा हो चुका है कि राजा भैया कभी भी साइकिल की सवारी को रोक सकते हैं, इसीलिए उन्होंने अमर सिंह के जरिए क्षत्रिय विधायकों को जोड़ने की शुरुआत कर दी है।
मुम्बई में हुए हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद के खिलाफ बरेली में एक फतवा जारी किया गया। फतवे में उसे इस्लाम से खारिज़ करते हुए उसे मुसलमान मानने और उसकी बातों पर गौर करना नाजायज़ कहा गया।
मंजर-ए-इस्लाम सौदागरान संस्था के मुफ्ती मुहम्मद सलीम बरेलवी ने जयपुर के रहने वाले मुहम्मद मोइनुद्दीन नामक व्यक्ति द्वारा पूछे गये सवाल के जवाब में कहा कि हाफिज सईद का इस्लाम से कोई ताल्लुक नहीं है। उन्होंने कहा कि जो मासूमों और गुनाहगारों का क़ातिल है वो मुसलमान नहीं हो सकता।
मोइनुद्दीन ने पिछले दिनों मुफ्ती से सवाल किया था कि जो अल्लाह और रसूल की बातों का पालन न करता हो और लोगों को भटका कर उन्हें आतंकवादी बनाता हो, क्या उसे मुसलमान माना जा सकता है। इस सवाल के जवाब में मुफ्ती सलीम ने जवाब दिया कि अल्लाह और रसूल (मुहम्मद साहब) की शान में गुस्ताखी करने वालों से किसी भी तरह का ताल्लुक रखना नाजायज और हराम है, लिहाजा हाफिज सईद ऐसे लोगों से सम्बन्ध रखने की वजह से इस्लाम से खारिज हो चुका है। उसे मुसलमान मानना और उसकी बातों को सुनना भी नाजायज है।
फतवे के मुताबिक, सईद अपने बुरे कर्मों से पूरी दुनिया में इस्लाम और मुसलमानों को बदनाम कर रहा है। इसकी वजह से पूरा मुस्लिम समाज शर्मसार हो गया है। इसलिए मुसलमान इस आतंकवादी को न तो मुसलमान मानें न ही इसकी बातों को सुनें।
खेल की सबसे बड़ी अदालत-कोर्ट फॉर अर्बिट्रेशन फॉर स्पोर्ट (सीएएस) ने लम्बी सुनवाई के बाद भारतीय पहलवान नरसिंह यादव पर 4 साल प्रतिबन्ध लगाया है। न्यायालय ने यादव को डोपिंग मामले में क्लीन चिट दिए जाने के खिलाफ दायर वाडा की अपील को स्वीकार कर लिया।
सीएसए द्वारा वाडा की अपील को स्वीकार किए जाने का सीधा मतलब है कि नरसिंह यादव का भविष्य अंधकारमय है और वे इस ओलम्पिक में भी भाग नहीं ले सकेंगे। वाडा ने अपनी अपील में नाडा के क्लीन चिट को गलत बताया था और सीएसए के समक्ष अपील की थी कि नरसिंह यादव पर 4 साल का प्रतिबन्ध लगाया जाए।
रियो ओलंपिक में भारत के प्रतिनिधि मंडल के प्रमुख राकेश गुप्ता ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा, “यह बेहद दुःखद और दुर्भाग्यपूर्ण है। हम सुनवाई के अंतिम चरण तक आशान्वित थे। हमें उम्मीद थी कि नरसिंह को क्लीन चिट मिल जाएगा लेकिन ऐसा हो नहीं सका। नरसिंह में पदक जीतने की क्षमता है।”
सीएएस के एडहॉक डिविजन ने गुरुवार को यहां वाडा की अपील पर सुनवाई के लिए बैठक की और उन पर चार साल का प्रतिबंध लगाने का फैसला किया। नाडा की उस बात पर कि नरसिंह अपने निकटतम प्रतिद्वंदी की साज़िश का शिकार हुए, सीएसए ने मानने से इन्कार कर दिया। सीएसए ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि इस बात का क्या सबूत है कि इन सभी मामले में नरसिंह निर्दोष हैं। ऐसे में सीएसए ने यादव पर 4 साल का प्रतिबन्ध लगा दिया गया।
गौरतलब है कि डोपिंग टेस्ट के बाद नाडा ने नरसिंह को प्रतिबंधित पदार्थ के सेवन का आरोपी करार दिया था, लेकिन नरसिंह ने कहा था कि उन्हें फंसाया गया है।
मोदी सरकार ने रिलायंस इंडस्ट्रीज पर 2,500 करोड़ का जुर्माना लगाया है। केजी बेसिन के डी-6 फील्ड से लक्ष्य से कम गैस उत्पादन करने पर 380 मिलियन अमेरिकी डॉलर अर्थात करीब 2500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त जुर्माना लगाया है।
इसके साथ ही इस परियोजना क्षेत्र के विकास पर खर्चों के दावे में कंपनी का कुल 2.76 अरब डालर का दावा नामंजूर किया जा चुका है। इसका अर्थ है कि कंपनी इस परियोजना के तेल-गैस की बिक्री में से अब इतनी राशि की वसूली नहीं कर सकती है। कंपनी अप्रैल 2010 से लगातार पांच वित्तीय वर्षों में उत्पादन लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाई है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज़ पर पहले भी लग चुका है जुर्माना-
इससे पहले भी रिलायंस पर कम गैस उत्पादन के लिए जुर्माना लग चुका है। इस जुर्माने के साथ आरआईएल और उसकी पार्टनर कंपनियों पर कुल जुर्माना 17 हजार करोड़ से अधिक हो गया है। टारगेट से कम उत्पादन पर यह जुर्माना 1 अप्रैल, 2010 के बाद पांच फाइनेंशियल ईयर के दौरान लगाया गया है। आरआईएल और इसकी सहयोगी कंपनियों इंग्लैंड की ब्रिटिश पेट्रोलियम व कनाडा की नीको रिसोर्सेज के बीच प्रोडक्शन शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट किया गया था। इसके तहत इन कंपनियों को यहां से पैदा होने वाली नैचुरल गैस को बेचकर ही रिफाइनिंग में आए खर्च को वसूल करना था।
केजी-डी6 क्षेत्र के आवंटन के समय किये गये उत्पादन भागीदारी अनुबंध पीएससी में यह व्यवस्था है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और उसकी भागीदारी कंपनियां ब्रिटेन की बी.पी.पी.एल.सी. और कनाडा की नीको रिसोर्सिज तेल-गैस की खोज पर आये पूंजी और परिचालन खर्च को गैस की बिक्री से प्राप्त राशि से पूरा कर सकते हैं। उसके बाद ही वह मुनाफे को सरकार के साथ बांटेंगे।
केवल 10 फीसदी ही हो रहा है उत्पादन-
रिलायंस के केजी बेसिन-डी6 से प्रतिदिन 80 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर नैचुरल गैस उत्पादन का टारगेट है। लेकिन 2011-12 में यह रोजाना केवल 35.33 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर, 2012-13 में 20.88 और 2013-14 में महज 9.77 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर ही रहा। मौजूदा समय में इस रिजर्व से रोजाना केवल 8 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर नैचुरल गैस उत्पादन हो पा रहा है।
गौरतलब है कि कंपनी के खर्च के उपरोक्त दावे नामंजूर होने से खनिज तेल-गैस मुनाफे में सरकार की हिस्सेदारी बढ़ेगी। वित्त वर्ष 2013-14 तक क्षेत्र में 2.376 अरब डालर की लागत को नामंजूर किया गया था। जिसके परिणामस्वरूप सरकार की क्षेत्र के पेट्रोलियम मुनाफे में भागीदारी 19.53 करोड़ डालर बढ़ गई।
केरल के आईपीएस अधिकारी ऋषिराज सिंह द्वारा दिए गए ’14 सेकेंड्स’ वाले बयान पर शिवसेना ने पलटवार किया है। सिंह ने कहा था कि किसी महिला को 14 सेकेंड तक घूरने पर जेल हो सकती है। पार्टी ने उनकी खिंचाई करते हुए पूछा है कि महिला को 13 सेकेंड तक घूरने पर क्या ? शिवसेना ने यहां तक पूछ दिया है कि यदि किसी ने ‘काला चश्मा’ (गॉगल) लगाकर 14 सेकेंड घूर लिया, तब क्या होगा 14 सेकेंड के कानून का?
शिवसेना ने कहा कि घूरने और अपराध को अंजाम देने में बहुत बड़ा अंतर है। शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में कहा, “अगर कोई व्यक्ति किसी महिला को 14 सेकेंड की बजाय 13 सेकेंड तक घूरता है तो क्या उसको संदेह का लाभ दिया जाएगा?”
शिवसेना ने कहा है कि देश की महिलाएं अब फौज में शामिल हो रही हैं। ऐसे में वे अपनी सुरक्षा करने में खुद ही सक्षम हैं और ऐसे कानूनों की कोई जरूरत नहीं है। शिवसेना ने महिलाओं पर अत्याचार की बात स्वीकारी है लेकिन साथ में यह भी कह दिया है कि पुरुषों पर भी अत्याचार हो रहा है।
सामना में राष्ट्रपति की बेटी शर्मिष्ठा के उस कदम की भी प्रशंसा की गई है, जिसमें उन्होंने एक शख्स की गंदी हकरकों का खुसाला सोशल मीडिया पर कर डाला था। शिवसेना ने किसी तरह की छेड़खानी, सोशल मीडिया पर अश्लील संदेश भेजने आदि पर कड़ी कार्रवाई को उचित बताया है लेकिन, 14 सेकेंड घूरने पर अपराधी घोषित किए जाने को अति बताया है। सामना में दावा किया गया है कि इस तरह का कानून यदि हुआ भी तो महिलाएं खुद इसका समर्थन नहीं करेंगी।
कम से कम शब्दों में अपनी बात रखने वाले समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने बड़ा ही चौंकाने वाला बयान दिया है। मुलायम सिंह ने कहा है कि जब वे रक्षा मंत्री थे, तो उन्होंने जानबूझकर बोफोर्स की फाइल गायब कर दी थी और इसे आगे बढ़ाने में विलंब किया था।
बुधवार को लखनऊ के राम मनोहर लोहिया लॉ यूनिवर्सिटी के कार्यक्रम में सिंह ने कहा कि लोगों का ऐसा मानना है कि बोफोर्स सौदा राजीव गांधी की गलती थी, लेकिन रक्षा मंत्री के तौर पर उन्होंने देखा कि यह सही सौदा था और राजीव ने अच्छा काम किया। उन्होंने बताया,” जब मैंने बोफोर्स तोप को देखा तो पाया कि वह ठीक से काम कर रहा है। उस वक्त मेरे मन में पहला विचार यह आया कि राजीव गांधी ने बढ़िया काम किया है। इसलिए मैंने उससे जुड़ी फाइलों को गायब कर दिया।”
इस मौके पर मुलायम सिंह ने एक ओर समाजवादी पार्टी की उपलब्धि भी गिनाईं तो दूसरी ओर नरेंद्र मोदी सरकार पर हमला बोलने से भी नहीं चूके। मुलायम ने केंद्र सरकार की रक्षा नीतियों पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा,” एक ओर तो हमारी सरकार चीन के प्रतिनिधिमंडल का स्वागत कर रही है, वहीं दूसरी ओर चीनी सेना हमारे इलाके में घुसपैठ कर रही है।”
विवादित बयानों के लिए प्रसिद्ध कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह एक बार फिर एक ऊट पटांग बयान देकर सुर्ख़ियों में आ गए हैं। दिग्विजय सिंह ने कश्मीर के लिए ‘इंडियन ऑक्युपाइड कश्मीर’ शब्द का इस्तेमाल कर हंगामा बरपा दिया है।
दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जवाब देने की जल्दबाज़ी में सिंह ‘पीओके’ के साथ ‘आईवोके’ शब्द का भी इस्तेमाल कर गए। उन्होंने कहा, “नरेंद्र मोदी को पाक ऑक्युपाइड कश्मीर की ज्यादा चिंता हैं। उनको वो धन्यवाद देते हैं, बधाई देते हैं। बलूचिस्तान को बधाई और धन्यवाद देते हैं लेकिन, हिंदुस्तानियों के कश्मीरियों से बात करने के लिए तैयार नहीं हैं।” दिग्विजय बलूचिस्तान से जुड़े प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान का जवाब दे रहे थे।
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल पहुंचे दिग्विजय ने संवाददाताओं से बात चीत के दौरान कहा, ” कश्मीर में विश्वास पैदा करना आवश्यक है। चाहे पाक ऑक्युपाइड कश्मीर हो या फिर भारत ऑक्युपाइड कश्मीर, अगर यहां लोगों के मन में विश्वास कायम करना हैं तो बातचीत के जरिए ही हो सकता है।”
दिग्विजय का यह बयान मीडिया में आते ही हड़कंप मच गया, जिसके तुरंत बाद दिग्विजय सिंह ने बयान पर सफाई देते हुए कहा कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। कश्मीर और कश्मीरियत पर ध्यान देने की जरूरत है। बीजेपी ने हमला बोलते हुआ कहा कि दिग्वजिय सिंह ने वही कहा जो उनके दिल में था। मोदी जी के विरोध के लिए कांग्रेसी कुछ भी कर सकते हैं।
गौरतलब है कि इससे पहले सलमान खुर्शीद ने भी कहा था कि बलूचिस्तान, पाकिस्तान का मामला है उस पर पीएम मोदी को बोलना नहीं चाहिए था। कुछ इसी तरह का बयान पी. चिदंबरम ने भी दे दिया था। हालांकि, दोनों ही मामलों में कांग्रेस पार्टी ने अपने नेताओं के बयान से साफ तौर पर पल्ला झाड़ लिया था। अभी यह मामला शांत भी नहीं हुआ था कि कश्मीर मुद्दे पर ही दिग्विजय सिंह नया बखेड़ा खड़ा कर चुके हैं।
केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने आज रक्षाबंधन के पावन मौके पर भारतीय सेना के जवानों को सियाचिन में राखी बांधी। स्मृति जवानों को राखी बांधने के लिए सियाचिन के बेस कैंप गईं और पूरे देश की ओर से उन जवान भाइयों का आभार व्यक्त किया जिनकी बदौलत हम देशवासी चैन की नींद सो पाते हैं।
ईरानी ने सैनिकों को मिठाइयां बांटते हुए कहा,” पूरा देश आप बहादुर जवानों का आभारी है क्योंकि आप सभी अपने घर-परिवार से दूर ऐसी जगह पर तैनात होकर राष्ट्र की सेवा कर रहे हैं।” स्मृति ने कहा,” अपने सैनिकों के साथ रक्षाबंधन मनाकर मैं अपने आप को गौरवान्वित महसूस कर रही हूं। उनकी कलाई पर रखी बांधकर उनकी बेहतरी के लिए प्रार्थना करने पर मुझे गर्व है।”
आपको बता दें कि सियाचिन दुनिया में सबसे ऊंचा युद्ध का मैदान है। सियाचिन में न्यूनतम तापमान 50 डिग्री माइनस में चला जाता है। भारत व पाकिस्तान, दोनों ही 1984 से यहां सेना की तैनाती को बरकरार रखे हुए हैं।
इसके अतिरिक्त देश के विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न तरीकों से रक्षाबंधन का पर्व मनाया गया। एक ओर राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को स्कूली बच्चियों ने राखी बांधी तो दिल्ली के दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर बीजेपी के नए दफ्तर की नींव रखने आए पीएम नरेंद्र मोदी को स्कूली छात्राओं ने राखी बांधकर अपनी रक्षा का वचन लिया।
देहरादूनमें उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत को तिब्बती समुदाय की महिलाओं ने राखी बांधी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमन्त्री अखिलेश यादव को लखनऊ में बच्चियों ने राखी बांधी। सरकारी आवास पर गृहमंत्री राजनाथ सिंह को छोटी बच्चियों ने राखी बांधी।
भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन का त्यौहार आज पूरे देश में यह त्यौहार मनाया जा रहा है। यह त्यौहार केवल भारतवर्ष में ही नहीं, अपितु अब विदेशों में भी बड़े हर्षोल्लास से मनाया जाता है। । रक्षाबन्धन एक हिन्दू त्यौहार है जो प्रतिवर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। श्रावण (सावन) में मनाये जाने के कारण इसे श्रावणी (सावनी) या सलूनो भी कहते हैं। रक्षाबन्धन में राखी या रक्षासूत्र का सबसे अधिक महत्व है। राखी कच्चे सूत जैसे सस्ती वस्तु से लेकर रंगीन कलावे, रेशमी धागे, तथा सोने या चाँदी जैसी मँहगी वस्तु तक की हो सकती है।
आज के इस पवित्र पर्व पर बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं व भाई की कलाई पर राखी बाँधने के पश्चात ही अन्न-जल ग्रहण करती हैं। बदले में भाई उनकी रक्षा का वचन देता है। ऐसा माना जाता है कि राखी के रंगबिरंगे धागे भाई-बहन के प्यार के बन्धन को मज़बूत करते है। भाई बहन एक दूसरे को मिठाई खिलाते है। और सुख दुख में साथ रहने का विश्वास दिलाते हैं। यह एक ऐसा पावन पर्व है जो भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को पूरा आदर और सम्मान देता है। राखी सामान्यतः बहनें भाई को ही बाँधती हैं, परन्तु ब्राह्मणों, गुरुओं और परिवार में छोटी लड़कियों द्वारा सम्मानित सम्बन्धियों (जैसे पुत्री द्वारा पिता को) भी बाँधी जाती है। कभी कभी सार्वजनिक रूप से किसी नेता या प्रतिष्ठित व्यक्ति को भी राखी बाँधी जाती है।
प्रकृति संरक्षण हेतु वृक्षों को राखी बाँधने की परम्परा-
अब तो प्रकृति संरक्षण हेतु वृक्षों को राखी बाँधने की परम्परा भी प्रारम्भ हो गयी है। हिन्दुस्तान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पुरुष सदस्य परस्पर भाईचारे के लिये एक दूसरे को भगवा रंग की राखी बाँधते हैं। हिन्दू धर्म के सभी धार्मिक अनुष्ठानों में रक्षासूत्र बाँधते समय कर्मकाण्डी पण्डित या आचार्य संस्कृत में एक श्लोक का उच्चारण करते हैं, जिसमें रक्षाबन्धन का सम्बन्ध राजा बलि से स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर होता है। यह श्लोक रक्षाबन्धन का अभीष्ट मन्त्र है।[क] इस श्लोक का हिन्दी भावार्थ है- “जिस रक्षासूत्र से महान शक्तिशाली दानवेन्द्र राजा बलि को बाँधा गया था, उसी सूत्र से मैं तुझे बाँधता हूँ, तू अपने संकल्प से कभी भी विचलित न हो।”
रक्षाबंधन का ऐतिहासिक महत्व-
राजपूत जब लड़ाई पर जाते थे तब महिलाएँ उनको माथे पर कुमकुम तिलक लगाने के साथ साथ हाथ में रेशमी धागा भी बाँधती थी। इस विश्वास के साथ कि यह धागा उन्हे विजयश्री के साथ वापस ले आयेगा। राखी के साथ एक और प्रसिद्ध कहानी जुड़ी हुई है। कहते हैं, मेवाड़ की रानी कर्मावती को बहादुरशाह द्वारा मेवाड़ पर हमला करने की पूर्व सूचना मिली। रानी लड़ऩे में असमर्थ थी अत: उसने मुगल बादशाह हुमायूँ को राखी भेज कर रक्षा की याचना की। हुमायूँ ने मुसलमान होते हुए भी राखी की लाज रखी और मेवाड़ पहुँच कर बहादुरशाह के विरूद्ध मेवाड़ की ओर से लड़ते हुए कर्मावती व उसके राज्य की रक्षा की। एक अन्य प्रसंगानुसार सिकन्दर की पत्नी ने अपने पति के हिन्दू शत्रु पुरूवास को राखी बाँधकर अपना मुँहबोला भाई बनाया और युद्ध के समय सिकन्दर को न मारने का वचन लिया। पुरूवास ने युद्ध के दौरान हाथ में बँधी राखी और अपनी बहन को दिये हुए वचन का सम्मान करते हुए सिकन्दर को जीवन-दान दिया।
महाभारत में भी राखी के त्यौहार का उल्लेख-
महाभारत में भी इस बात का उल्लेख है कि जब ज्येष्ठ पाण्डव युधिष्ठिर ने भगवान कृष्ण से पूछा कि मैं सभी संकटों को कैसे पार कर सकता हूँ तब भगवान कृष्ण ने उनकी तथा उनकी सेना की रक्षा के लिये राखी का त्योहार मनाने की सलाह दी थी। उनका कहना था कि राखी के इस रेशमी धागे में वह शक्ति है जिससे आप हर आपत्ति से मुक्ति पा सकते हैं। इस समय द्रौपदी द्वारा कृष्ण को तथा कुन्ती द्वारा अभिमन्यु को राखी बाँधने के कई उल्लेख मिलते हैं। महाभारत में ही रक्षाबन्धन से सम्बन्धित कृष्ण और द्रौपदी का एक और वृत्तान्त भी मिलता है। जब कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध किया तब उनकी तर्जनी में चोट आ गई। द्रौपदी ने उस समय अपनी साड़ी फाड़कर उनकी उँगली पर पट्टी बाँध दी। यह श्रावण मास की पूर्णिमा का दिन था। कृष्ण ने इस उपकार का बदला बाद में चीरहरण के समय उनकी साड़ी को बढ़ाकर चुकाया। कहते हैं परस्पर एक दूसरे की रक्षा और सहयोग की भावना रक्षाबन्धन के पर्व में यहीं से प्रारम्भ हुई।
ई-कॉमर्स साइट से राखी भेजना अब बिल्कुल आसान-
आज के आधुनिक तकनीकी युग एवं सूचना सम्प्रेषण युग का प्रभाव राखी जैसे त्योहार पर भी पड़ा है। बहुत सारे भारतीय आजकल विदेश में रहते हैं एवं उनके परिवार वाले (भाई एवं बहन) अभी भी भारत या अन्य देशों में हैं। इण्टरनेट के आने के बाद कई सारी ई-कॉमर्स साइट खुल गयी हैं जो ऑनलाइन आर्डर लेकर राखी दिये गये पते पर पहुँचाती है।