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Friday, August 7, 2026
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भारत के 500वें टेस्ट मैच के लिए विशेष तैयारी, कप्तान कोहली काटेंगे 5 स्टोरी केक

 

अनुज हनुमत,

कानपुर का ग्रीन पार्क स्टेडियम इस बार एक ऐतिहासिक मौके का गवाह बनने जा रहा है। भारत और न्यूजीलैंड के बीच 22 सितम्बर को खेला जाने वाला पहला मैच काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह मैच भारत का 500वां टेस्ट मैच है और यही वजह है कि बीसीसीआई ने इसे यादगार बनाने के लिए विशेष इंतजाम किया हैं।

सबसे खास बात ये है कि कानपुर टेस्ट के लिए होटल में खिलाडियों को 500 तरह के व्यञ्जन परोसे जाएंगे और इतना ही नहीं टीम इंडिया के कैप्टन विराट कोहली इस मौके पर केक काटेंगे।

बीसीसीआई इस मौके पर इंडिया के सभी पूर्व टेस्ट कप्तानों को भी सम्मानित करेगी। गौरतलब है कि टेस्ट इतिहास में भारत के अलावा केवल तीन टीमें ही हैं, जिन्होंने 500 से जायदा टेस्ट मैच खेलें हैं। इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज के बाद अब भारत भी इस लिस्ट में शामिल हो जाएगा।

कानपुर के लोगों को भी इस ख़ास पल का बहुत इन्तजार है। चारों तरफ क्रिकेट प्रेमियों द्वारा इस मौके को ख़ास बनाने के लिए अपनी-अपनी तरफ से खास इंतजाम किये जा रहे हैं।

ख़त्म हुआ सियासी ड्रामा, सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह के आगे मुख्यमंत्री ‘बेटे’ ने टेके घुटने!

शिखा पाण्डेय,

ऐसा प्रतीत हो रहा है कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के अंदर चल रहे आतंरिक घमासान का अंत हो गया है। सपा सुप्रीमो ‘पिता’ मुलायम सिंह यादव के सामने मुख्यमंत्री ‘पुत्र’ अखिलेश की हार हो गई है। मुलायम सिंह यादव ने बेटे की नाराज़गी की परवाह न करते हुए नाराज़ भाई शिवपाल यादव को मनाना ज़्यादा महत्त्वपूर्ण समझा है।

आपको बता दें कि मुलायम सिंह के आदेशानुसार अखिलेश को शिवपाल यादव के सारे पद उन्‍हें वापस देने पड़े हैं। मुलायम ने स्वयं को पार्टी का सर्वे सर्वा साबित करते हुए अखिलेश के सारे फैसलों को पलट दिया है। आज शाम यूपी मुख्‍यमंत्री ऑफिस से खबर आयी कि शिवपाल यादव के सारे पोर्टफोलियो वापस किये जाएंगे। साथ ही गायत्री प्रजापति की कैबिनेट में वापसी होगी।

गौरतलब है कि दो दिनों पहले शिवपाल यादव को उत्तरप्रदेश इकाई का अध्‍यक्ष बनाये जाने से ख़फ़ा मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव ने उनसे पीडब्‍ल्‍यूडी मंत्रालय सहित कई अहम मंत्रालय छीन लिये। इसके बाद नाराज शिवपाल यादव ने अखिलेश के खिलाफ बयान दिया कि मौजूदा माहौल में सरकार के साथ काम करना मुश्किल है और उन्‍होंने अपने सारे पद से इस्‍तीफा दे दिया।

इस पूरे सियासी ड्रामे के क्लाइमेक्स के लिए सपा में मुलायम सिंह यादव लखनऊ पहुंचे और मामले को शांत कर अपने भाई शिवपाल यादव को मनाया और उन्‍हें मंत्रालय वापस दिलाने के लिए अपना विटो पावर दिखाया। इतना ही नहीं, कुछ दिनों पहले अखिलेश यादव ने अवैध खनन मामले में शामिल होने का आरोप लगने के बाद खनन विभाग के मंत्री गायत्री प्रजापति को मंत्री पद से हटा दिया था, उस फैसले को भी उलटते हुए मुलायम ने गायत्री की कैबिनेट में वापसी पर मुहर लगा दी है।

वित्तीय वर्ष 2017 से जीएसटी लागू करना चाहते हैं प्रधानमंत्री!

सौम्या केसरवानी,

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पूरे देश को एक बाज़ार के रूप में बदलने वाली कर व्यवस्था यानी जीएसटी को अगले साल 1 अप्रैल से लागू करना चाहते हैं। इस कर व्यवस्था के लागू होने के बाद सारे अप्रत्यक्ष कर मिलकर एक हो जाएंगे।

हाल ही में जीएसटी की तैयारियों के सिलसिले में मोदी ने वित्त मंत्रालय के साथ एक बैठक की थी। इस बैठक के बाद सरकार की ओर से एक बयान जारी किया गया था। इस बयान के हिसाब से पहली अप्रैल से जीएसटी लागू करना सुनिश्चित किया गया है।

हालांकि व्यापार जगत चाहता है कि नयी कर व्यवस्था को लागू करने के लिए कुछ और समय दिया जाना चाहिए। उनका मानना है कि नयी व्यवस्था की तैयारियों में कुछ समय लग सकता है, जिसके चलते पहली अप्रैल के बजाए अगस्त या सितम्बर में जीएसटी लागू करना बेहतर होगा, परंतु मोदी के ताजा रुख से साफ हो गया है कि वह पहली अप्रैल से ही जीएसटी लागू करेंगे।

आपको बता दें कि मोदी ने हर जरुरी जानकारी मुहैया कराने को लेकर की जा रही तैयारियों का जायजा लिया। साथ ही इसी हफ्ते केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जीएसटी काउंसिल के गठन से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी भी दे दी है। जिससे यह कहा जा सकता है कि प्रधानमंत्री अपने फैसले को लेकर काफी गंभीर हैं।

बिहार सरकार व चंदा बाबू द्वारा सुप्रीम कोर्ट में शहाबुद्दीन की ज़मानत के खिलाफ याचिका दर्ज़,शहाबुद्दीन बेफिक्र!

शिखा पाण्डेय
राजद नेता व पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन को पटना हाई कोर्ट से मिली ज़मानत के खिलाफ अब बिहार सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी है, जिसपर अगले हफ्ते सुनवाई होगी। बिहार सरकार ने विशेष अनुमति याचिका दायर कर पटना हाइकोर्ट द्वारा शाहबुद्दीन को दी गयी जमानत को रद्द करने की अपील की है।

आज चंद्रकेश्वर प्रसाद उर्फ़ चंदाबाबू ने भी शहाबुद्दीन के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में अपील की, जिनके बेटों की हत्या का अरोप शहाबुद्दीन पर है। चंदा बाबू की ओर से शहाबुद्दीन की जमानत रद्द करने की मांग करने वाली याचिका को आज सुप्रीम कोर्ट में जाने-माने वकील प्रशांत भूषण ने दाखिल किया। इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई होगी।

प्रशांत भूषण ने चंदा बाबू के वकालतनामे के हस्ताक्षर वाली कॉपी मिलने के बाद आज शहाबुद्दीन की जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। इस याचिका में शहाबुद्दीन की जमानत रद्द करने की मांग की गयी है। इससे पहले मीडिया से बातचीत के दौरान चंदा बाबू ने कहा था कि वे न्याय के लिए आखिरी सांस तक लड़ते रहेंगे और सहयोग मिलेगा तो जिंदा भी रहेंगे।

उल्लेखनीख है कि 16 अगस्त 2004 को सीवान के जाने-माने व्यवसायी चंदा बाबू के दो लड़के सतीश राज और गिरीश राज का अपहरण कर लिया गया था और तेजाब से नहलाकर उनकी हत्या कर दी गयी थी।  शहाबुद्दीन पर उन दोनों मृतकों की हत्या का आरोप था।

मृतकों के तीसरे भाई राजीव रौशन ने खुद को घटना का चश्मदीद गवाह बताते हुए पूरी घटना की सूचना कोर्ट में दी थी। उसके इस बयान पर ही पिछले वर्ष 11 दिसंबर को सीवान सिविल कोर्ट ने शहाबुद्दीन को दोषी बताते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई थी। 16 जून 2014 को सीवान के डीएवी कॉलेज मोड़ पर तेजाब कांड के एकमात्र चश्मदीद गवाह राजीव रौशन की भी गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी।

उधर शहाबुद्दीन ने खुद के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर किये जाने पर कहा कि उन्हें इसकी कोई परवाह नहीं है। उन्होंने कहा,”परेशान उन्हें किया जाता है, जो परेशान होता है। मैं परेशान नहीं होता हूं।”

ब्रेकिंग न्यूज- इविवि छात्र संघ चुनाव की तारीख घोषित, 30 सितम्बर को होगा मतदान

अनुज हनुमत,

आखिरकार एक लम्बे इन्तजार के बाद इलाहाबाद विवि प्रशासन द्वारा आज इस सत्र के छात्र संघ चुनावों की तिथि की घोषणा कर दी गई। आपको बता दें कि  21-22 सितम्बर को फार्म की बिक्री होगी और 23 सितम्बर को नामांकन होगा। इसके बाद 28 को  दक्षता भाषण होगा और 30 सितम्बर को मतदान होगा।

विवि में पढ़ रहे छात्रों से लेकर तमाम प्रत्याशियों को छात्र संघ चुनाव की तारीखों का इन्तजार था। अधिकांश प्रत्याशियों ने तो महीने भर पहले से ही चुनाव प्रचार तेज कर दिया था। चुनाव की तारीखें घोषित होने के बाद सबसे बड़ा प्रश्न ये है कि आखिरकार उन दर्जनों छात्र नेताओं का चुनावी भविष्य क्या होगा, जिन्हें कुछ हफ़्तों पहले विवि प्रशासन ने निलम्बित कर दिया था!

छात्रों के सामने इस बार सबसे बड़ी चुनौती अच्छे प्रत्याशियों को छात्र संघ भवन तक पहुंचाने की होगी, तो वहीं दूसरी ओर चुनाव तारीख घोषित होते ही प्रत्याशियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती ज्यादा से ज्यादा छात्रों तक अपनी बात पहुँचाने की होगी। कुछ भी हो लेकिन अभी तक अगर कुछ प्रत्याशियों को छोड़ दिया जाए, तो छात्र हित से जुड़े मुद्दे ज्यादातर प्रत्याशियों के बैनर और पोस्टर मात्र में नजर आ रहे हैं।

कुछ भी हो लेकिन इस बार विवि प्रशासन द्वारा साफ़ सुथरा चुनाव सम्पन्न कराना सबसे बड़ी चुनौती साबित होगी। अधिकांश प्रत्याशियों द्वारा चुनाव प्रचार में पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा है। अब देखना होगा कि विवि प्रशासन इस बेलगाम खर्च पर किस प्रकार लगाम लगा पायेगा।

कांग्रेस को लगा बड़ा झटका, अरुणाचल प्रदेश के सीएम खांडू सहित 43 विधायक पीपीए में शामिल

अनुज हनुमत,

आज कांग्रेस को उस वक्त जबर्दस्त झटका लगा जब उसके केवल एक विधायक को छोड़कर मुख्यमंत्री पेमा खांडू सहित इसके सभी विधायक पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल प्रदेश (पीपीए) में शामिल हो गए। इस घटना ने कांग्रेस को हिला दिया है।

सूत्रों की मानें तो खांडू कांग्रेस के 43 विधायकों के साथ पीपीए में शामिल हो गए और सरकार को वस्तुत: पीपीए सरकार में तब्दील कर दिया। गौरतलब है कि अभी दो महीने पहले ही कांग्रेस सरकार की बहाली के घटनाक्रम के बाद खांडू राज्य के मुख्यमंत्री बने थे। आज के घटनाक्रम के बाद कांग्रेस के साथ अब केवल एक विधायक नबाम तुकी ही बचे हैं। राजनीतिक जानकारों की माने तो कांग्रेस ने पार्टी में बगावत को नियंत्रित करने के प्रयास के तहत जुलाई में तुकी की जगह खांडू को मुख्यमंत्री बनाया था।

बहरहाल, अब देखना यह होगा कि पीपीए बीजेपी के साथ जाती है या नहीं। क्योंकि राज्य में बीजेपी के पास 11 विधायक हैं और  राज्य की 60 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के 47 विधायक थे। बीजेपी के 11 और दो निर्दलीय विधायक हैं। कांग्रेस के दो विधायकों की स्थिति के बारे में अभी फैसला होना बाकी है, जिन्होंने हालिया राजनीतिक घटनाक्रम से पहले इस्तीफा दे दिया था।

आपको बता दें की राज्य में राजनीतिक सरगर्मियों के चलते जनवरी 2016 में पहली तुकी सरकार गिर गई, राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा और कुछ समय के लिए दिवंगत कलिखो पुल की सरकार बनी। पार्टी आलाकमान को उस वक्त तगड़ा झटका लगा था जब कांग्रेस विधायक पुल ने पिछले महीने आत्महत्या कर ली थी। उन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जुलाई में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

आज के पूरे घटनाक्रम के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों की टिप्पणियाँ भी सामने आने लगी हैं। सबसे पहले केंद्रीय गृहराज्य मंत्री और अरुणाचल पश्चिम संसदीय सीट से बीजेपी के सांसद किरण रिजीजू ने इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस बेवजह बीजेपी पर आरोप लगाती है। अब अरुणाचल में कांग्रेस की सरकार ही नहीं रही,  क्योंकि सभी विधायक एक क्षेत्रीय पार्टी में चले गए हैं। आगे रिजीजू ने कहा कि अगर विधायक कांग्रेस के साथ रहना ही नहीं चाहते तो हम क्या कर सकते हैं?

इविवि छात्र संघ चुनाव :नियमों के विरुद्ध प्रचार पर उड़ रहे लाखों रुपए,विवि प्रशासन खामोश!

अनुज हनुमत
पूरब का ऑक्सफोर्ड कहे जाने वाले इलाहाबाद विश्वविद्यालय में इन दिनों छात्र चुनाव की गर्मी स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है। चारों तरफ पैम्पलेट्स , बैनर्स व गाड़ियों के काफिले नजर आ रहे हैं व प्रत्याशियों द्वारा एक बार फिर लिंगदोह कमेटी के नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। अगर चुनावी तामझाम की बात करें तो ये चुनाव भी लोकसभा और विधानसभा से कम नहीं नजर आ रहा और विश्वविद्यालय प्रशासन पहले की तरह इस बार भी खामोश है।

इस बार प्रत्याशियों के बीच में बैनर युद्ध अपने चरम पर है। पूरा इलाहाबाद शहर बैनरों और पोस्टरों से ढंका हुआ है। अगर इस पर हुए पूरे खर्च का आकलन करें, तो मोटे तौर पर यह लाखों से ऊपर का खर्च नजर आता है। प्रत्याशियों द्वारा अपनी छवि निर्माण के खातिर प्रचार-प्रसार में कोई कमी नहीं की जा रही है। छात्र संघ चुनाव से पहले लगभग सभी छात्र नेता यही कहते दिखते हैं कि हम सादगी से चुनाव लड़ेंगे पर चुनाव आते ही सब कुछ बदल जाता है। पूरा चुनाव छात्र हितों से इतर धनबल का खेल बनकर रह जाता है ।

गौरतलब है कि छात्र संघ चुनावों में लिंगदोह कमेटी के नियम लागू किये जाते हैं। इसके अनुसार एक प्रत्याशी का अधिकतम खर्च पांच हजार रुपये होना चाहिए और प्रिंटेड पोस्टर, पैम्प्लेट्स या प्रचार सामग्री के प्रयोग की अनुमति नहीं होती। कैंपेन में लाउड स्पीकर, वाहन एवं जानवरों का प्रयोग अनुबंधित होता है, लेकिन अफसोस की बात तो यह है कि इन सारे नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

अगर छात्रों की बात करें तो इस भारी भरकम खर्च को देखकर छात्र बिल्कुल भी प्रभावित नहीं हो रहे हैं। अधिकांश छात्रों का कहना है कि इस बार बैनर्स, पोस्टर्स से वोट नहीं मिलने वाले । इस बार हम प्रत्याशियों से मुद्दों पर बात करके वोट देना चाहते हैं। इतना है कि प्रत्याशियों द्वारा बेइंतेहा पैसा खर्चे करने के कारण कैम्पस के चुनावी मुद्दे हवा होते जा रहे हैं, जिस कारण आने वाले समय में एक अच्छे छात्र संघ की कल्पना फिर से बेमानी ही साबित होगी।

ऐसा नहीं है कि सभी प्रत्याशी अपने प्रचार प्रसार में बड़े बजट का प्रयोग कर रहे हैं। कुछ प्रत्याशी तो ऐसे हैं, जिन्होंने अभी तक अपने बैनर्स ,पोस्टर्स नहीं लगवाये। उनका कहना है कि जब हमने पिछले कई वर्षों से लगातार छात्रों के हक की लड़ाई लड़ी है, तो फिर किस बात के लिए बैनर्स, पोस्टर्स लगायें? हमें छात्रों के वोट धनबल के दम पर बिलकुल नहीं चाहिए, बल्कि अपने मनोबल के दम पर चाहिए।

अब आधार कार्ड से जुडी सूचनाओं का नहीं हो सकेगा दुरुपयोग, सरकार ने उठाए ये ठोस कदम

निश्चित सीमा से अधिक के लेनदेन में दिखाना होगा आईडी कार्ड, अब फोटो कॉपी से नही चलेगा काम

शिखा पाण्डेय,

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकार (यूआईडीएआई) ने आम लोगों के आधार कार्ड से जुड़ी सूचनाओं के दुपयोग रोकने के लिए एक अहम् कदम उठाया है। अब आम लोगों के आधार कार्ड की जानकारी रखने वाली एजेंसियों को 12 अंक वाले आधार अंक की गोपनीयता व सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी। साथ ही एजेंसियों को इस जानकारी को सार्वजनिक करने या प्रकाशित करने की अनुमति नहीं होगी।

हाल ही में जारी निमयों के तहत उक्त एजेंसियों को अब कार्डधारक को यह बताना होगा कि जानकारी का इस्तेमाल कैसे किया जाएगा।

यूआईडीएआई के सीईओ अजय भूषण पांडे ने पीटीआई भाषा से कहा, “नागरिकों द्वारा दी गई जानकारी भी अब सुरक्षित व संरक्षित है। अब यह यूआईडीएआई व विभिन्न उद्देश्यों के लिए आधार संख्या का इस्तेमाल करने वाली एजेंसियों की जिम्मेदारी है कि वे इस डेटा की सुरक्षा व गोपनीयता सुनिश्चित करें।”

उन्होंने कहा कि ‘आधार कानून’ का किसी भी तरह का उल्लंघन करना अपराध है और कानून के तहत दंडनीय है। इसके अनुसार कानून के तहत भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) द्वारा जुटाई गई बायोमेट्रिक सूचना को ‘किसी भी कारण से किसी अन्य के साथ साझा नहीं किया जाएगा।

नए नियमों के अनुसार,‘ अगर कोई व्यक्ति या इकाई किसी से उसके आधार कार्ड की जानकारी लेती है तो उसे तय उद्देश्य के लिए आधार संख्या व अन्य जानकारी अपने पास रखने तथा इसका इस्तेमाल करने के लिए कार्डधारक की सहमति लेनी होगी। ये एजेंसियां या लोग तय उद्देश्य के अलावा कहीं उस आधार कार्ड या जानकारी का इस्तेमाल नहीं कर संकेगे।

राहुल ने बनाई यूपी फतह करने की योजना, टिकट के दावेदार परेशान

सौम्या केसरवानी,

राहुल ने अपनी किसान यात्रा को नए ऐलान के साथ खासा गंभीर बना दिया है। राहुल के इस नये ऐलान से यूपी कांग्रेस में टिकट के दावेदारों के पसीने छूट रहे हैं। लेकिन ऐलान राहुल का है, तो उस पर अमल तो करना ही पड़ेगा।

राहुल ने उत्तर प्रदेश कांग्रेस को लिखित निर्देश जारी करते हुए कहा है कि जिन लोगों ने टिकट के लिए आवेदन किया है, उनमें से हर एक को 10 हजार घरों में किसान कर्ज माफ, बिजली बिल माफ और न्यूनतम मूल्य का हिसाब करो वाला फॉर्म देना होगा।

वीडियो रिकॉर्डिंग भी सुबूत के तौर पर रखनी होगी। फॉर्म भरने वाले की कांग्रेस को वोट देने की सहमति तो होगी ही, तो फॉर्म भरने वाले से किसान का कर्ज माफ, बिजली का बिल माफ और सही न्यूनतम समर्थन मूल्य का कांग्रेस का लिखित वादा होगा। ये काम राहुल की किसान यात्रा खत्म होने तक पूरा हो ही जाना चाहिए।

मामले को गंभीरता से लेते हुए राहुल ने ये भी दो टूक कह दिया है कि हर विधानसभा से जो पहले तीन प्रत्याशी 10 हजार फॉर्म भर देंगे, वही टिकट के दावेदार हो जाएंगे। टिकट उन्हीं में से किसी एक को बाद में दिया जाएगा और बाकी ये तय जान लें कि उनको टिकट नहीं मिलेगा।

सितंबर के आखिर में जांच पड़ताल पूरी कर ली जाएगी। इसके बाद हौसला अफजाई के लिए खुद राहुल गांधी हर विधानसभा के टॉप 3 में जगह बनाने वाले प्रत्याशियों से व्यक्तिगत मुलाकात करेंगे।

राहुल के इस प्लान का टारगेट है कि वो खाट चौपाल और कर्ज माफी के फॉर्म के जरिए करीब तीन करोड़ घरों तक पहुंच सकें। शुरुआत में करीब 9 हजार लोगों के टिकट लेने के लिए आवेदन किया था, उन सभी से बूथ के लिहाज से लिस्ट मांगी गयी थी, जिसमें 5 हजार की खुद ही छंटनी हो गई। पार्टी मानती है कि इन 4 हजार में होड़ मचेगी और कम से कम वो 4 नहीं तो 2.5 से 3 करोड़ घरों में अपना कर्ज माफ फॉर्म पहुंचा सकेगी।

अखिलेश यादव 3 अक्टूबर से होगें रथ पर सवार

सौम्या केसरवानी,

समाजवादी पार्टी मे तनातनी से जूझ रहे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अब विकास रथयात्रा निकालने जा रहे हैं। गांधी जयंती के अगले दिन 3 अक्टूबर से वह रथयात्रा शुरू करेंगे।

इस रथयात्रा के जरिए वो प्रदेश की 403 विधानसभा क्षेत्रों का दौरा करेंगे। इस रथयात्रा का नारा विकास से विजय की ओर रखा गया है। मिशन 2017 के लिए इस आयोजन को काफी अहम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने टि्वट करके यह जानकारी दी।

सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव अपने चुनाव अभियान की शुरुआत आजमगढ़ में 7 अक्टूबर रैली से करेंगे। मुख्यमंत्री की रथयात्रा के लिए खास बस को रथ में तब्दील किया जा रहा है। इसमें सभी आधुनिकतम संचार सुविधाएं तो होंगी ही साथ ही हांइड्रोलिक लिफ्ट, एलईडी स्क्रीन, लाउडस्पीकर, तेज रोशनी, मिनी आफिसर, शयन प्रसाधन की सुविधा होगी। सीएम की यह यात्रा चरणबद्ध तरीके से होगी।