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Friday, August 7, 2026
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यूपी में बढ़ रहे अपराधों के लिए पुलिस का राजनैतिक दुरुपयोग सबसे बड़ा कारण-राजनाथ सिंह

शिखा पाण्डेय,
केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने उत्तर प्रदेश में दिन दूने रात चौगुने बढ़ते अपराधों के लिए पुलिस के सियासी इस्तेमाल को जिम्मेदार ठहराया है। सिंह ने सलेमपुर में आयोजित सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि प्रदेश में बढ़ते अपराधों के लिये पुलिस का राजनैतिक दुरूपयोग मुख्य रूप से जिम्मेदार है और यह सिलसिला रुकना चाहिए।

गृहमंत्री ने आज कहा कि विकास के लिये कानून-व्यवस्था का चुस्त-दुरुस्त होना सबसे आवश्यक है लेकिन उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था व अपराध की स्थिति अत्यंत चिंतनीय है। यूपी पुलिस की क्षमता की प्रशंसा करते हुए गृहमंत्री ने कहा कि यदि यूपी पुलिस का राजनैतिक उपयोग न कर उसे निर्भीकता के साथ काम करने दिया जाये तो वह बड़े से बड़े शातिर अपराधी को काबू में करने में सक्षम है, परंतु यूपी पुलिस की नाकामी बयान करते हुए गृहमंत्री ने बताया कि वर्ष 2015 में उत्तर प्रदेश में महिलाओं के विरुद्घ 35727 अपराधिक वारदात के आंकड़े चौंकाने वाले हैं।

सलेमपुर में आज पूर्व सांसद हरिकेवल प्रसाद की पुण्य तिथि के मौके पर आयोजित सभा में सिंह ने ‘सपा परिवार’में जारी संग्राम का जिक्र करते हुए कहा कि एक परिवार में चल रहे झगड़े में दखल देने का किसी को कोई नैतिक अधिकार नहीं है लेकिन वे सरकार में चल रहे झगड़े को लेकर चिंतित हैं, क्योंकि इसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है।

गृह मंत्री ने इस बात पर ज़ोर देकर कहा कि सूबे को अराजकता और हिंसा मुक्त करने के लिए केंद्र सरकार पर्याप्त सुरक्षा बल मुहैया करने को तैयार है।

राजनाथ सिंह ने वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने का विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि जनता ने भाजपा को 2002 में वनवास दिया था। अब 14 वर्ष का वनवास पूरा हो गया और उन्हें पूर्ण विश्वास है कि जनता भाजपा का वनवास 2017 में समाप्त करेगी और सत्ता में पुनः लाएगी।

गृहमंत्री ने कहा कि मोदी सरकार अटल सरकार के काम को आगे बढ़ाने का काम कर रही है। उन्होंने भारत को विश्व की महाशक्ति बनाने के लिए भाजपा को 10 वर्ष का केंद्र में अवसर देने का भी आहवान किया।

राहुल जी का एकमात्र उद्देश्य है ‘किसानों का हित’ -सलमान खुर्शीद

राहुल गांधी और उनकी पूरी टीम इन दिनों ‘देवरिया से दिल्ली किसान यात्रा’ में जुटी है। ऐसे में उम्मीद की जा  रही है कि आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बड़ा उलटफेर हो सकता है। इसी बीच कुछ क्षेत्रीय कांग्रेसी नेताओं में ही विरोध की लहर भी नज़र आ रही है। कुछ नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी की यात्रा तो किसानों के लिए है, लेकिन बस नाम की। क्योंकि राहुल से मिलने को इच्छुक नेताओं को उनसे मिलने ही नहीं दिया जा रहा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद से हमारे संवाददाता ‘अनुज हनुमत’ ने उनसे इस मसले और कांग्रेस की स्थिति के बारे में चर्चा की। प्रस्तुत हैं सलमान खुर्शीद से हुई लंबी बातचीत के प्रमुख अंश।

प्रश्न – राहुल गांधी की ‘देवरिया से दिल्ली किसान यात्रा’ चित्रकूट पहुँच रही है। बुन्देलखण्ड के किसानों की बदहाल स्थिति के बारे में आपका क्या कहना है ?

सलमान खुर्शीद – बुन्देलखण्ड के किसानों की विशेष समस्या है, वहां कभी बाढ़ तो कभी सूखा। पिछले 3-4 वर्षों से बुन्देलखण्डवासी सूखे व बाढ़ के प्रकोप में लगातार फंसे हैं। कितने लोग पलायन कर चुके हैं।पहली बार नहीं होगा, जब राहुल जी ने इस बात को उठाया है। राहुल जी पहले भी वहां गए हैं और किसानों के बीच खड़े होकर उनकी आवाज को बुलन्द किया है, लेकिन अब राहुल जी ये मानते हैं कि सभी तरफ पूरे प्रदेश में किसानों पर कर्ज का बोझ है और खासकर वहां के किसानों पर, जहाँ 3-4 वर्षों से सूखा पड़ा है। राहुल जी दिल्ली जाकर माननीय प्रधानमंत्री से किसानों के कर्ज माफ़ करने हेतु प्रदेश के हजारों किसानों की तरफ से अपनी बात रखेंगे।

प्रश्न- राहुल गांधी की किसान यात्रा से आम आदमी को क्यों दूर रखा जा रहा है ?

सलमान खुर्शीद – किसान और आम आदमी एक ही हैं। कभी कभी किसी समय पर किसी का दर्द ज्यादा होता है तो उसको प्राथमिकता देनी होती है। आम आदमी व किसान अलग अलग नहीं हैं।

प्रश्न- राहुल जी की ‘किसान यात्रा’ के दौरान वीआईपी लोगो को ही क्यों उनसे मिलने दिया जा रहा है?

सलमान खुर्शीद – जी ऐसा नहीं है। खुद राहुल गांधी किसान यात्रा के दौरान बीच बीच में उतरते रहते हैं। बिना किसी संकोच के कल हमने कन्हैया यादव जी के यहाँ चाय पी थी। जहाँ-जहाँ सम्भव है, वहां राहुल जी लोगों से मिलते हैं, लेकिन एक बात आपको भी माननी पड़ेगी कि समय का अभाव होता है और जब एक दिन में सैकड़ों स्थान पर सभायें हों।

प्रश्न- अभी हाल ही में प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर चित्रकूट आये थे। वहां क्षेत्रीय नेताओं को राजबब्बर से नहीं मिलने दिया गया जबकि वीआईपी नेताओं को मिलने दिया गया।

सलमान खुर्शीद- किसी एक नेता या एक आम कार्यकर्ता के बीच में पक्षपात नहीं किया जायेगा। राहुल जी का भी यही कहना है कि किसी भी कार्यकर्ता या नेता के साथ पक्षपात नहीं होने दिया जायेगा।

प्रश्न- आपको क्या लगता है, इस यात्रा से कांग्रेस को आगामी विधानसभा चुनाव में कितना लाभ होगा?

सलमान खुर्शीद- हम लाभ के लिए यात्रा नहीं कर रहे हैं। हम जनता के दर्द को कम करने की कोशिश में लगे हैं। आज जिस तरीके से आम जनमानस को नज़रंदाज़ किया जा रहा है, वह दुःखद है। केंद्र सरकार को किसानों और आम आदमी के साथ सौतेला व्यवहार नहीं करना चाहिए। व्यापारियों को राहत दी जा रही है और किसान क़र्ज़ के बोझ तले दबते जा रहे हैं।

मुम्बई में 15 से 17 सितंबर तक होगा किड्स इंडिया B TO B एग्जिबिशन

डेस्क,

बच्चों के खिलौने अब केवल खिलौने नहीं रह गए हैं। मौजूदा समय में खिलौना कारोबार दुनिया के तमाम देशों के उद्योग क्षेत्र में अपनी खास भूमिका निभाता है। बच्चों के लिए बनने वाले उत्पादों और उनके निर्माण, वितरण व कच्चा माल उपलब्ध कराने वाले देश-विदेश के कारोबारियों को एक मंच पर लाने के लिए बीते तीन वर्ष से मुंबई में किड्स इंडिया बिज़नस टू बिज़नस फेयर का आयोजन किया जाता है।

आयोजकों ने इस बार भी तीन दिवसीय किड्स इंडिया खिलौना उद्योग बिजनस-टू-बिजनस एग्जिबिशन को 15 से 17 सितंबर तक मुंबई में आयोजित करने की घोषणा की है। किड्स इंडिया बिजनस-टू-बिजनस एग्जिबिशन के बारे में जानकारी देते हुए ऑल इंडिया टॉय मैनिफैक्चरिंग एसोशिएशन के अध्यक्ष विवेक जंगानी ने बताया कि 15 से 17 सितंबर तक मुंबई के बॉम्बे कॉनवेंशन एण्ड एग्जिबिशन सेंटर के हॉल न. 5 व 6 में आयोजित की जाएगी। यहां 18 वर्ष से कम उम्र के लोगों के लिए प्रवेश नहीं होगा। किड्स इंडिया बिजनस-टू-बिजनस एग्जिबिशन देश की सबसे बड़ी बिजनस एग्जिबिशन है, जो देश-विदेश के बच्चों के लिए खिलौना निर्माण से जुड़े लोगों को एक मंच पर लाने का प्रयास करती है।

एग्जिबिशन में देश-विदेश से हजारों खिलौना कारोबारी शामिल होते हैं, जो बच्चों के लिए श्रेष्ठ खिलौना उत्पाद तैयार करते हैं। इसके अलावा कारोबारी व्यवसाय से जुड़ी अपनी-अपनी जानकारियों को एक दूसरे के साथ साझा करते हैं। एग्जिबिशन में खिलौना कारोबार से जुड़ने वाले नए युवा कारोबारियों की संख्या भी अधिक रहती है। क्योंकि उन्हें यहां खिलौना व्यापार से जुड़ने के लिए तमाम जानकारियों व बारीकियों का एक ही स्थान पर समाधान मिलता है।

कारोबारियों के लिए यहां निःशुल्क प्रवेश रहेगा। इस बार हॉल न. 6 में वर्ल्ड ऑफ टॉय नाम से खास पवेलियन होगा, वहीं बैक टू स्कूल के लिए भी विशेष स्थान हैं, जहां स्टेशनरी से सम्बंधित आईटम होंगे। व्यापारियों की बिजनेस मीटिंग के लिए खास इंतजाम रहेंगे। आयोजकों ने उम्मीद जताई है कि 15 सितंबर से शुरू होने वाली किड्स इंडिया बिजनेश एग्जीबिशन में 10 देशों की 150 से अधिक कंपनियों के 350 से अधिक उत्पादों को देखने समझने का मौका मिलेगा।

राहुल का काफिला पहुँचा इलाहाबाद, मोदी पर जमकर साधा निशाना

अनुज हनुमत

आगामी यूपी विधानसभा चुनाव को फतह करने के उद्देश्य से ‘देवरिया से दिल्ली किसान यात्रा’ पर निकले कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का काफिला भारी लाव-लश्कर के साथ आज संगम नगरी इलाहाबाद से गुजरा। इलाहाबाद में भारी बारिश के बावजूद कांग्रेसी कार्यकर्ताओं का उत्साह कम नज़र नहीं आया।

राहुल गांधी कल रात ही इलाहाबाद पहुँच गए थे और उन्होंने अपने पैतृक घर (आनंद भवन) में एक रात गुजारी, जो कभी कांग्रेस की राजनीति का केंद्र हुआ करती थी। राहुल गांधी, आनंद भवन के स्वराज भवन में रात भर रहे।

राहुल आज सुबह सबसे पहले स्वराज भवन से निकलकर पहले चंद्रशेखर आज़ाद पार्क गए, वहां चंद्रशेखर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और फिर वापस आनंद भवन आ गए। आपको बता दें कि जब राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इलाहाबाद आए थे, तो वे भी आजाद पार्क गए थे और चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया था। उसी अंदाज में आज राहुल गांधी भी सर्वप्रथम आजाद पार्क गए।

आपको बता दें राहुल गांधी हर उस छोटी से छोटी याद को पुनर्जीवित करते जा रहे हैं, जिनमें गांधी परिवार की यादें जुड़ी हैं। गौरतलब है कि आनंद भवन यूं तो संग्रहालय में तब्दील किया जा चुका है, लेकिन आज भी नेहरू जी से जुड़ी यादें यहाँ संगृहीत हैं। एक हिस्से में कमला नेहरू के नाम से अस्पताल चलता है, जो इसी परिवार के ट्रस्ट से चलता है।

मोदी ने तोड़ा युवाओं का विश्वास-

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का काफिला इसके बाद आनंद भवन से होता हुआ यूनिवर्सिटी चौराहा (कटरा) पहुंचा, जहाँ बड़ी तदाद में लोगों का जनसमूह कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का इन्तजार कर रहा था। कटरा चौराहे पर उपस्थित भारी हूजूम को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने एक बार प्रधानंमत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा देश के युवाओं ने नरेंद्र मोदी पर विश्वास किया, लेकिन आज ढाई वर्ष पूरे होने को हैं लेकिन प्रधानमन्त्री जी ने युवाओं से जो वादे किए थे, अभी तक पूरे नही किये। 2 करोड़ लोगों को रोजगार देने का वादा अभी तक महज एक वादा है।उन्होंने वादा किया था कि 15 लाख रूपये हर परिवार के बैंक खाते में डाला जायेगा।

राहुल यहीं नहीं रुके, उन्होंने आगे कहा कि मोदी जी ने  देश के 10-15 बड़े बड़े उद्दोगपतियों का उन्होंने कर्जा माफ़ किया है लेकिन सूखे और बाढ़ से प्रभावित किसानों को भूल गए। अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा, लेकिन सूबे की अखिलेश सरकार पर कुछ नहीं बोले।

आज शाम राहुल गांधी की ‘देवरिया से दिल्ली किसान यात्रा’ का काफिला चित्रकूट पहुंचेंगा। बता दें इस समय बुन्देलखण्ड के किसान सबसे बुरे दौर से गुजर रहे हैं। अब देखना होगा कि राहुल गांधी बुन्देलखण्ड के किसानों का दर्द किस प्रकार बाँट पाएंगे।

मुंबई के हीरानंदानी टॉवर में लगी भीषण आग, समय पर पहुंची दमकल गाड़ियों ने टाला बड़ा हादसा

शिखा पाण्डेय,

मुंबई के कंदीवली वेस्ट में स्थित हीरानंदानी टॉवर में आग लगने की खबर है। बताया जा रहा है कि टावर की 32वीं मंजिल अर्थात टॉप फ्लोर पर आग लगी थी। ये आग काफी भीषण थी। सही समय पर फायर ब्रिगेड टीम के पहुंचने से बड़ा हादसा टल गया। आधे घंटे के प्रयास के बाद फ़िलहाल आग पर काबू पा लिया गया। आग लगने के कारणों का अभी तक पता नहीं चला है।

अचानक घटी इस दुर्घटना के बाद पूरी इमारत को खली करा लिया गया। इलाका भीड़-भाड़ वाला होने के कारण सड़क पर लंबा जाम लग गया है। मौके पर दमकल की 4 गाड़ियां, 2 एंबुलेंस और 3 वाटर टैंकर तुरंत भेजे गए।

गौरतलब है कि इस टावर में रिहाइशी अपार्टमेंट्स और कई कंपनियों के दफ्तर भी हैं। आग लगने के कारण इलाके में अफरातफरी मच गई। प्रशासन और एजेंसियों के तमाम आला अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंच गए। फिलहाल किसी के भी घायल होने की कोई खबर नहीं है।

“भैया जी क्या करें, इन कार्डों के बदले हमें कुछ रूपये तो मिल जाते हैं।”

अनुज हनुमत

इलाहाबाद: आपने अभी तक छोटे-छोटे बच्चों को ट्रेनों में और सड़क पर भीख मांगते ,दीवारों पर पोस्टर चिपकाते, होटलों में काम करते तो देखा होगा लेकिन क्या आपने कभी किसी बच्चे को चुनावों में प्रयोग किये जाने वाले विजिटिंग कार्ड्स बीनते हुए देखा है? गौरतलब है कि इस समय इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनावों की तैयारियां जोरों पर हैं । लगभग सभी प्रत्याशियों द्वारा प्रतिदिन हजारों की संख्या में विजिटिंग कार्ड बांटे जा रहे हैं ।इन्ही कार्डों को शाम को छोटे-छोटे बच्चे बीनते हुए नजर आते हैं।
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इन कार्डों के बदले उन बच्चों को रूपये दिए जाते हैं ।बच्चों के अनुसार,” हमें इससे कोई मतलब नहीं कि कार्ड किसका है।  हमें तो बस इन कार्डों के बदले मिलने वाले रुपयों से मतलब । हमें 100 कार्डों के बदले 10 रूपये मिलते हैं।” जब बच्चों से पूछा गया कि ये कार्ड आप कहाँ पर देते हो ? उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा “हम अपने मालिक को दे देते हैं।” आगे कुछ पूछने से पहले ही वे बच्चे वहां से भाग गए।

जब हमने इसकी पड़ताल की तो हमारे सामने बहुत ही चौंकाने वाली बातें सामने आईं। हमने छात्र नेताओं ,विजिटिंग कार्ड बनाने वाले दुकानदारों , कबाड़ वालों से बात की तो कुछ प्रमुख बातें पता लगीं, जिनमें पहली बात यह कि बच्चे जो कार्ड बीनते हैं उन कार्डों को फिर रिसाइकिल की प्रक्रिया द्वारा पुनः प्रयोग में लाया जाता है।

दूसरी बात यह कि कुछ छात्र नेताओं द्वारा इन कार्डों को पुनः अपने प्रयोग में लाया जाता है । इस पर अधिकांश छात्र नेतओं का कहना था कि अगर यह दोबारा इस्तेमाल होता है तो यह तो अच्छी बात है । कम से कम कागज से बने इन कार्डों की बर्बादी तो नहीं होती। उन्हीं कार्डों को पुनः प्रयोग में लाया जा सकता है।

पुनः प्रयोग किए जाने या रीसायकल किए जाने की बात अपनी जगह है, लेकिन सबसे बड़ा प्रश्न यह कि आखिर इन कार्यों में इतने छोटे बच्चों को क्यों शामिल किया जाता है ? जिस उम्र में इन्हें शिक्षा के मंदिर में किताबें लेकर पढ़ने जाना चाहिये उस उम्र में ये शिक्षा के मंदिर में कार्ड बीनने आते हैं, वो भी महज चन्द रुपयों के लिए!

आपको बता दें कि इस समय  इलाहाबाद विश्वविद्यालय में चारों तरफ छात्र संघ चुनावों की तैयारियां चल रही हैं। पूरा कैम्पस पैम्पलेट्स ,पोस्टरों से भरा पड़ा है । सभी प्रत्याशियों द्वारा हजारों की मात्रा में प्रतिदिन विजिटिंग कार्ड बाटें जा रहे हैं । जैसे- जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे- वैसे इलाहाबाद पैम्पलेट्स ,बैनर्स से ढंकता जा रहा है। कैसी विडंबना है, उधर प्रत्याशियों द्वारा पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा है और इधर ये बच्चे मात्र 10 रुपये के लिए दिन रात पसीना बहाने को मजबूर हैं!

विंध्य रेंज की एक विशिष्ट पुरापाषाणिक संस्कृति खत्म होने की कगार पर

 अनुज हनुमत,

चित्रकूट से तीस किलोमीटर दूर मानिकपुर के पास सरहट नामक स्थान पर प्राचीनतम शैलचित्र भारी संख्या में मौजूद हैं। ये तीस हजार साल पुराने बताए जाते हैं। पहले मैं भी मानता था की ये महज कुछ चित्रों का समूह बस है, लेकिन इनका विस्तृत अध्ययन करने के बाद लगा कि ये तो पाठा की पाषाणकालीन संस्कृति है जो बहुत बड़े विस्तृत क्षेत्र में फ़ैली हुई है । सरहट के पास ही बांसा चूहा, खांभा, चूल्ही में भी इस तरह के शैलचित्र मिलते हैं। सरहट के 20 किलोमीटर दक्षिण पूर्व में करपटिया में 40 शिलाश्रयों का समूह दर्शनीय है।

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यहां बिखरी पड़ी धरोहरें इतिहास के कालखंडों के रहस्यों को अपने गर्भ में छिपाए हैं।ये शैलचित्र यहां की प्राचीन शैली के गवाह हैं, पर संरक्षण के अभाव में ये जीवंत दस्तावेज विलुप्त होने के कगार पर हैं। इतिहासविद् शैलचित्रों के आरंभ को ईसा पूर्व से ही जोड़ते हैं।

यह देखना आश्चर्यजनक है कि इन पेंटिंग्स में जो रंग भरे गए थे वो कई युगों बाद अभी तक वैसे ही बने हुए हैं। इन पेंटिंग्स में आमतौर पर प्राकृतिक लाल ,गेरुआ और सफेद रंगों का प्रयोग किया गया है।

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प्राचीन इतिहास का छात्र होने के नाते जहाँ तक मुझे लगता है कि पाठा संस्कृति का निवास स्थल श्रेष्ठतम है, क्योंकि इस स्थल के बगल से चन्द दूरी पर कई स्थाई बरसाती नाले निकलते हैं । वहीं दूसरी ओर चट्टान असमान रूप से समतल है, जैसे उन्हें किसी ने घिसकर बराबर किया हो। जैसी स्थिति मध्यकालीन किलो की होती थी वैसे ही सुरक्षित स्थिति इसकी भी है ।

शैलचित्र के पास ही बहुत बड़ा सा एक सपाट आँगन है, जैसे वहीं पर हमारे पूर्वज अपने दैनिक कार्यक्रम करते रहे हों और स्थल के आसपास पत्थरों के बने दर्जनों चिकने चबूतरे हैं। एक सामान्य व्यक्ति भी इस बसावट को देखकर हमारे पूर्वजों के रहने की पुष्टि कर सकता है । वहीं पर पास में मुझे अप्रत्याशित रूप से एक पत्थर की मूर्ति भी देखने को मिली।

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यहाँ चट्टानों का ऐसा चिकनापन प्रकृति के अपक्षय से नहीं हो सकता ।जैसे रस्सी के आने जाने से पत्थर पर निशान पड़ जाता है वैसे ही उन पूर्वजों के दैनिक कार्यों के कारण ये पूरा स्थल भी मानवकृत और चिकना हो गया है । सारी चट्टानें चींख चींख कर कह रही हैं की यहाँ एक मानव सभ्यता पनपी थी, जिसे भरोसा न हो उसे मैं यहाँ आने का आमन्त्रण देता हूँ । प्राचीन इतिहास के शोध छात्रों का भी आह्वाहन करता हूँ कि इसे अपने शोध का विषय बनायें ।

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प्राचीन इतिहास विषय के जानकार व पाठा क्षेत्र के विशेषज्ञ डाक्टर नवल पाण्डेय का मानना है कि
“इन शैल चित्रों के माध्यम से आने वाली पीढ़ी एक नई कला को जन्म दे सकती है । यह खोज युवा पीढ़ी की खोज है,जिसने यह साबित कर दिया कि किताबों में लिखे पुरातात्विक ध्वंसावशेष आज भी जीवित अवस्था में हैं ।”

यह महज एक चित्र की कहानी नहीं है, बल्कि ये पाठा में पनपी एक बड़ी पुरापाषाणकालीन संस्कृति है। जैसे सिंधु घाटी सभ्यता की खोज बहुत बाद में हुई लेकिन आज वह श्रेष्टतम मानव संस्कृतियों में से एक है, उसी प्रकार पाठा की ये संस्कृति भी तमाम रहस्य समेटे हुए है और समकालीन पाषाण संस्कृतियों में सबसे आगे निकल सकती है ।

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पाठा संस्कृति के इन अवशेषों के नष्ट होने की सम्भावना है, क्योंकि इससे एक किमी दूर ही अवैध खनन माफियों द्वारा वोल्डरों का खनन जारी है । यदि सरकार इसे तुरन्त सरंक्षित क्षेत्र घोषित नहीं करती, तो  शायद मेरे द्वारा खींचे गए ये चित्र मात्र फोन पर ही रह जाएं।

“सपा की साइकिल पहले ही पंक्चर थी, अखिलेश ने एक पहिया भी निकाल फेंका”-राहुल गांधी

शिखा पाण्डेय,

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की किसान यात्रा का दूसरा चरण आज से शुरू हुआ। राहुल की किसान यात्रा मिर्जापुर से शुरू हुई। वहां उन्होंने दो खाट सभाएं की। उन्होंने किसानों से मुलाकात कर कर्ज माफी और बिजली समेत कई मुददों पर चर्चा की। साथ ही राहुल ने समाजवादी पार्टी में चल रही अंदरूनी कलह पर चुटकी लेते हुए कहा कि सपा की साइकिल तो पहले ही पंक्चर हो चुकी थी,कल अखिलेश यादव ने साइकिल का एक पहिया भी निकालकर फेंक दिया।

गौरतलब है कि मुलायम सिंह द्वारा उत्तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव को कल पार्टी की राज्य इकाई के अध्यक्ष पद से हटाए जाने और  अपने भाई एवं वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव को उत्तर प्रदेश का अध्यक्ष नियुक्त किए जाने के कुछ घंटे बाद ही मुख्यमंत्री ने अपने चाचा शिवपाल से लोक निर्माण विभाग, सिंचाई एवं सहकारी विभाग छीन लिये। इसके अतिरिक्त भी तमाम आपसी विवादों को लेकर सपा लंबे अरसे से चर्चा में रही है, जिसके कारण राहुल ने सपा पर यह व्यंग बाण चलाया।

सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी 15 सितंबर को बुंदेलखंड जाएंगे। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव साकेत बिहारी मिश्र ने मंगलवार को बताया कि राहुल गांधी 15 सितंबर को इलाहाबाद से चलकर चित्रकूट जिले की सीमा में दाखिल होंगे और यहीं रात्रि विश्रााम भी करेंगे। उन्होंने बताया कि राहुल 16 सितंबर को बांदा व 17 सितंबर को महोबा में रहेंगे, जहां कई जगह खाट सभा करेंगे। कांग्रेस उपाध्यक्ष 21 सितंबर को हमीरपुर से कानपुर के लिए प्रस्थान करेंगे।

बता दें कि इलाहाबाद से गांधी परिवार का बड़ा पुराना रिश्ता रहा है यहीं पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी का जन्म हुआ था। यहां राहुल गांधी को युगपुरुष बताने वाले पोस्टर लगाए गए हैं, जिसमें राहुल गांधी को अर्जुन अवतार में दिखाया गया है।

नितिन गडकरी ने कहा,” ‘अच्छे दिन’ का नारा अब गले की हड्डी बन गया है”,विपक्ष ने घेरा

सौम्या केसरवानी,

परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के एक बयान ने पूरे देश की सियासत में भूचाल ला दिया है और केंद्र सरकार के वादों पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया है। नितिन गडकरी ने मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान मोदी के अच्छे दिनों के नारे पर कहा, ”अच्छे दिनों का जिक्र मनमोहन सिंह ने किया था, जो हमारे गले की हड्डी बन गया है। अच्छे दिन कभी नहीं आते, अच्छे दिन सिर्फ मानने से होते हैं।”

गडकरी ने कहा, ”मोदी जी ने कहा था कि एक बार एक एनआरआई ने मनमोहन सिंह से अच्छे दिन को लेकर सवाल पूछा था। जिसके जवाब में मनमोहन सिंह ने कहा था कि अच्छे दिन आएंगे।”

गडकरी ने कहा, “हमारा देश अतृप्त महाआत्माओं का सागर है। जिसके पास साइकिल है वो मोटर साइकिल मांग रहा है और जिसके पास मोटर साइकिल है वो कार मांग रहा है।”

विपक्ष ने नितिन गडकरी को घेरा

नितिन गडकरी के इस बयान पर विपक्षी पार्टी कांग्रेस हमलावर हो गई है। कांग्रेस नेता मीम अफजल ने  कहा, “अच्छे दिन का नारा सिर्फ नारा नहीं था ये एक ख्वाब था जो मोदी जी ने देश की जनता को दिखाया था। अब इनकी सरकार आ गई है तो इन्हें लग रहा है कि अच्छे दिन आ गए हैं।”

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी 2014 लोकसभा चुनाव से पहले अपने प्रचार अभियान में अच्छे दिन के नारे को मुख्य स्लोगन बनाया था। मोदी सरकार की पूरी चुवानी कैंपेनिंग इसी नारे के इर्द गिर्द थी।  रैली के दौरान मोदी नारा लगवाते थे “अच्छे दिन”, जनता जवाब देती थी “आएंगे

‘सपा प्रदेश अध्यक्ष’ का पद खोने से बौखलाए अखिलेश ने शिवपाल से छीने सभी महत्वपूर्ण मंत्रालय!

 

शिखा पाण्डेय

ज्यों ज्यों उत्तरप्रदेश में विधानसभा चुनाव करीब आ रहे हैं, समाजवादी पार्टी में आंतरिक घमासान बढ़ता जा रहा है। सपा सुप्रीमो मुलायम यादव ने  मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से ‘सपा प्रदेश अध्यक्ष’ का पद छीन कर शिवपाल यादव को सौंप दिया, तो प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी खोने से बौखलाए अखिलेश ने शिवपाल से पीडब्लयूडी, सिंचाई जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय छीन लिए। अब शिवपाल के पास मात्र समाजिक कल्याण मंत्रालय रह गया है।

इस बड़े बदलाव के तहत अखिलेश द्वारा अवधेश प्रसाद को सिंचाई विभाग और बलराम यादव को राजस्व विभाग सौंपा गया है। सूत्रों के अनुसार अखिलेश के इस रवैये के चलते शिवपाल यादव का कहना है कि इस माहौल में अखिलेश सरकार के साथ काम करना तो मुश्किल है,पर वो पार्टी के लिए काम करते रहेंगे। सूत्रों की मानें तो शिवपाल यादव सपा अध्‍यक्ष मुलायम सिंह यादव से इस मसले को लेकर बात भी कर चुके हैं।

शिवपाल को उत्तर प्रदेश इकाई का अध्यक्ष नियुक्त  किए जाने के बाद सपा के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव ने शिवपाल को लिखे एक पत्र में कहा, ‘‘सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने आपको उत्तर प्रदेश इकाई का अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह आशा की जाती है कि आपकी कड़ी मेहनत से पार्टी को और मजबूती मिलेगी।” इस पत्र की एक प्रति अखिलेश यादव को भी भेजी गई।

हालांकि अखिलेश व शिवपाल के बीच का यह मनमुटाव और विवाद कोई नया नहीं है, पर इस बार का घमासान कुछ ज़्यादा बड़ा जान पड़ता है जो पार्टी के लिए हानिकारक साबित हो सकता है।