जम्मू-कश्मीर के उरी में सैन्य शिविर में पाकिस्तानी आतंकियों द्वारा किए गए हमले से पूरा विश्व गुस्से में हैं। इस कुकृत्य से नाराज़ देश के शिया धर्मगुरुओं ने मुहर्रम के दौरान मजलिस पढ़ने के लिए पाकिस्तान जाने से इंकार कर दिया है। शिया धर्मगुरुओं ने एक सुर से पाकिस्तान को आतंकी देश करार देते हुए न्यौता ठुकरा दिया है।
देश के शिया धर्मगुरुओं ने पाकिस्तान को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में शिया मुसलामानों को टारगेट करके मारा जा रहा है और हमारे मुल्क में आतंकी घटनाएं अंजाम दी जा रही हैं। ऐसे में उस मुल्क में हम मजलिस पढ़ने का आमंत्रण कैसे स्वीकार कर सकते हैं।
मौलाना कल्बे सादिक शिया, मौलाना यसुब अब्बास शिया, वसी असगर मुजफ्फरनगरी सरीखे मौलानाओं ने पाकिस्तान द्वारा अंजाम दी जा रही घटनाओं की मजम्मत की। मौलानाओं ने कहा कि वह देश पाक नहीं पाप है। इस्लाम किसी को मारने की सीख नहीं देता।
मौलाना कल्बे सादिक का कहना है कि मैंने तीन साल पहले पाकिस्तान को पापिस्तान कहा था। पाकिस्तान अब पाकिस्तान नहीं रहा, वहां केवल पाप हो रहे हैं। निर्दोषों की हत्या हो रही है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में सबसे ज्यादा हिंदू, सिख, ईसाई और शिया मारे जा रहे हैं।
उरी आतंकी हमले के बाद पूरा देश गुस्से में है। सोशल मीडिया पर आम जनमानस से लेकर नेताओं अभिनेताओं ने भी इसकी कड़ी निंदा की। इस मामले को लेकर अब महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना भी आक्रामक होती नज़र आ रही है।
भारतीय जवानों पर हुए हमलों से नाराज़ मनसे ने कहा है कि यदि अगले 48 घंटों में पाकिस्तानी कलाकार भारत छोड़कर नहीं गए तो उन्हें पीट पीटकर भगाया जाएगा।
देश में रह रहे पाकिस्तानी कलाकारों को एमएनएस ने भारत छोड़ने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। पाकिस्तानी कलाकारों को यह धमकी एमएनएस की विंग चित्रपट सेना ने दी है। चित्रपट विंग के नेता अमेय कोपकर ने कहा कि हमने 48 घंटे का समय दिया है पाकिस्तानी कलाकारों को, जो हिंदुस्तान में रहते हैं। अगर पाक कलाकारों ने देश नहीं छोड़ा तो एमएनएस कार्यकर्ता उन्हें जहां शूटिंग हो रही होगी, वहीं घुस कर मारेंगे।
हालाँकि इस मामले में अभी तक किसी पाकिस्तानी कलाकार ने कुछ नहीं कहा है। गौरतलब है कि उरी घटना के बाद से ही यह बात हो रही है कि जिस देश की सरकार हमारे जवानों का खून कर रही है, हम उस देश की जनता को क्यों पाल रहे हैं! जिसके बाद आज मनसे ने पाकिस्तानी कलाकारों को अल्टीमेटम दे दिया है।
उरी आतंकी हमले के बाद अब भारत ने पूरा मन बना लिया है कि वह पाकिस्तान के साथ सख्ती से पेश आएगा। इसी क्रम में पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए भारत अपने पड़ोसी मुल्क से सिंधु जल समझौता तोड़ सकता है। सूत्रों की मानें तो केंद्र सरकार इस पर जल्दी ही फैसला ले सकती है।
मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने इस जल समझौते पर कहा कि किसी भी समझौते के लिए दोनों देशों में आपसी भरोसा और सहयोग होना जरूरी है और यह एकतरफा नहीं हो सकता। इसी बयान के बाद अब कयास लगाये जा रहे हैं कि केंद्र सरकार अब सख्ती के मूड में है। अगर ऐसा हुआ तो पाकिस्तान पानी के लिए तरस जायेगा।
आपको बता दें कि सिंधु नदी संधि को आधुनिक विश्व के इतिहास का सबसे उदार जल बंटवारा माना जाता है। इसके तहत भारत द्वारा पाकिस्तान को 80.52 फीसदी पानी यानि 167.2 अरब घन मीटर पानी सालाना दिया जाता है। नदी की ऊपरी धारा के बंटवारे में उदारता की ऐसी मिसाल दुनिया में और किसी जल समझौते में नहीं मिलती। 1960 में हुए सिंधु समझौते के तहत उत्तर और दक्षिण को बांटने वाली एक रेखा तय की गई है, जिसके तहत सिंधु क्षेत्र में आने वाली तीन नदियों का नियंत्रण भारत और तीन का पाकिस्तान को दिया गया है।
उरी हमले के बाद पाकिस्तान पर जवाबी कार्रवाई के सवाल पर स्वरूप ने कहा कि हमारा काम अपने आप बोलता है और हमारे एक्शन से नतीजे आने शुरू हो गए हैं। आगे उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में किसी भी देश ने कश्मीर के मुद्दे पर एक शब्द भी नहीं कहा, लेकिन नवाज शरीफ के भाषण का 80 फीसदी कश्मीर पर केंद्रित था।
विकास स्वरूप ने कहा कि ‘हमें डोजियर की जरूरत नहीं, दुनिया पाक की सच्चाई जानती है। नवाज शरीफ ने बुधवार को अपने भाषण में कहा था कि वो कश्मीर में भारतीय सेना द्वारा किए जा रहे मानवाधिकारों के उल्लंघन को लेकर संयुक्त राष्ट्र को एक डोजियर सौपेंगे और कश्मीर हिंसा की जांच कराने की मांग करेंगे। इस पर विकास स्वरूप ने कहा कि हमें यूएन महासचिव के बयान में इसका कोई जिक्र नहीं मिला।
कुलमिलाकर केंद्र की मोदी सरकार यह नहीं चाहती कि अब पाकिस्तान के साथ रिश्तों को लेकर किसी प्रकार की कोई ढिलाई हो।
पाकिस्तान के एक पत्रकार ने बड़ा ही सनसनीखेज़ खुलासा किया है। ‘जीओ न्यूज’ के पत्रकार हामिद मीर ने ट्वीट किया है कि इस्लामाबाद के आसमान में एफ 16 विमान उड़ान भर रहे हैं। इतना ही नहीं वो रौशनी के गोले भी छोड़ रहे हैं। हामिद मीर के अलावा इस्लामाबाद से कई लोगों ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है।
हामिद ने ट्वीट कर कहा,” युद्ध पूर्वी एशिया के आम जन के हित में नहीं है। सारे लोग एकत्र हों और युद्ध के इस खतरे को रोकें।”
मीर ने एक न्यूज चैनल से बातचीत करते हुए यह जानकारी दी कि इस घटना से इस्लामाबाद के लोग हैरान हैं। हामिद ने बताया, “मैंने इस विषय पर जानकारी लेनी चाही तो सुरक्षा से जुड़े लोगों ने कहा कि यह युद्धअभ्यास है इससे डरने की जरूरत नहीं है।”
हामिद ने कहा,” मुझे नहीं पता यह युद्ध अभ्यास इस वक्त क्यों किया जा रहा है, लेकिन यह संकेत अच्छा नहीं है। मैं युद्ध का समर्थन नहीं करता क्योंकि युद्ध से कुछ हासिल नहीं होता।युद्ध में आम लोग मारे जाते हैं दहशतगर्द नहीं।”
पाकिस्तान के आम लोगों का भी यही कहना है कि एक साथ एफ 16 के कई विमान उड़ान भर रहे हैं इन विमानों की आवाज से सभी आश्चर्य चकित हैं कि ऐसा क्या हो गया है कि इस तरह की तैयारियों की जरूरत पड़ रही है।
इलाहाबाद। इलाहाबाद विश्वविद्यालय देश का एकमात्र ऐसा विश्वविद्यालय है, जिसने प्रशासनिक क्षेत्रों में सबसे ज्यादा सफल छात्र दिए हैं। आज शिक्षा का ये मंदिर अपनी स्थापना के 129 वर्ष पूरे कर रहा है। इस अवसर पर आज तीन बजे शाम को सीनेट हाल में विवि प्रशासन द्वारा भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया है।
आज विश्वविद्यालय का जन्मदिन होने के कारण उसके लिए ऐतिहासिक दिन होगा और ये महज एक संयोग ही है कि आज छात्र संघ चुनावों में प्रत्याशियों के नामांकन का भी दिन है । जहां पूरे दलबल और धूमधड़ाके के साथ प्रत्याशियों द्वारा अपनी उम्मीदवारी पेश की जायेगी।
आपको बता दें कि पूरब का आर्क्सफ़ोर्ड के नाम से विख्यात इलाहाबाद विश्वविद्यालय भारत का एक प्रमुख विश्वविद्यालय होने के साथ केंद्रीय विश्वविद्यालय भी है। सबसे ख़ास बात ये है कि यह आधुनिक भारत के सबसे पहले विश्वविद्यालयों में से एक है और इसीलिए इसे ‘पूर्व के आक्सफोर्ड’ नाम से जाना जाता है। आपको बता दें, इसकी स्थापना आज ही के दिन 23 सितम्बर सन् 1887 ई. को एल्फ्रेड लायर की प्रेरणा से हुयी थी। इस विश्वविद्यालय का नक्शा प्रसिद्र अंग्रेज वास्तुविद इमरसन ने बनाया था।
गौरतलब है कि 1866 में इलाहाबाद में म्योर कॉलेज की स्थापना हुई, जो आगे चलकर इलाहाबाद विश्वविद्यालय के रूप में विकसित हुआ। आज भी यह इलाहाबाद विश्वविद्यालय का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। म्योर कॉलेज का नाम तत्कालीन संयुक्त प्रांत के गवर्नर विलियम म्योर के नाम पर पड़ा। उन्होंने 24 मई 1867 को इलाहाबाद में एक स्वतंत्र महाविद्यालय तथा एक विश्वविद्यालय के निर्माण की इच्छा प्रकट की थी। 1869 में योजना बनी, उसके बाद इस काम के लिए एक शुरुआती कमेटी बना दी गई, जिसके अवैतनिक सचिव प्यारे मोहन बनर्जी बने। 23 सितंबर 1887 को एक्ट XVII पास हुआ और कलकत्ता, बंबई तथा मद्रास विश्वविद्यालयों के बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय उपाधि प्रदान करने वाला भारत का चौथा विश्वविद्यालय बन गया। इसकी प्रथम प्रवेश परीक्षा मार्च 1889 में हुई।
ये वही इलाहाबाद विश्वविद्यालय है, जिसने
मोतीलाल नेहरू, गोविन्द वल्लभ पन्त, शंकर दयाल शर्मा, गुलजारी लाल नन्दा, विश्वनाथ प्रताप सिंह, चन्द्रशेखर सूर्य बहादुर थापा (नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री), नारायण दत्त तिवारी, हेमवती नन्दन बहुगुणा, मुरली मनोहर जोशी, शान्ति भूषण जैसे राजनेता और महादेवी वर्मा, हरिवंश राय बच्चन, धर्मवीर भारती, भगवती चरण वर्मा, आचार्य नरेन्द्र देव, चन्द्रधर शर्मा ‘गुलेरी’ जैसे लेखक एवं शिक्षाविद् दिए हैं।
देश के अन्य राज्य-विश्वविद्यालयों के समान ही प्रवेश लेने वालों की भारी भीड़ के बीच इस विश्वविद्यालय को भी उच्च शिक्षा के स्तर को बनाए रखने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। सबसे ख़ास बात ये है कि विश्वविद्यालय प्रति छात्र संसाधनों की उपलब्धता और अध्यापक मण्डली एवं विद्यार्थियों में आमने-सामने के आदर्श व्यवहार को बनाए रखने में सफल रहा है।
कई राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुकी तमिल फिल्म ‘विसरनई’ वर्ष 2017 के ऑस्कर पुरस्कारों की ‘विदेशी भाषा फिल्म श्रेणी’ में भारत की ओर से नॉमिनेट होगी। दौड़ में शामिल 29 फिल्मों में से ‘विसरनई’ को इस कैटेगरी के लिए चुना गया। यह फिल्म एम. चंद्रकुमार के उपन्यास ‘लॉक अप’ पर आधारित है। अभिनेता-फिल्मकार धनुष इस फिल्म के निर्माता हैं। वेत्रिमारन इसके लेखक और निर्देशक हैं।
फिल्म ‘विसरनई’ में पुलिस की बर्बरता, भ्रष्टाचार और अन्याय को बखूबी दर्शाया गया है। फिल्म में दिनेश रवि, आनंदी और आदुकलाम मुरूगदोस ने मुख्य किरदार निभाए हैं। दिनेश ने ट्विटर पर लिखा, “विसरनई, अंबुम, अमाईतियुम मलारतुम (प्रेम और शांति का प्रसार हो)।” फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया के महासचिव सुपर्ण सेन ने फिल्म ‘विसरनई’ के नामांकन की जानकारी दी।
अभिनेता-निर्माता धनुष ने भी फिल्म के ऑस्कर में नामांकन पर ट्वीट किया, “वुंडरबार फिल्म्स और वेट्रिमारन के लिए गौरव का पल है।” धनुष ने कहा कि यह उनके लिए गौरव का दिन है क्योंकि आज रिलीज हुई उनकी नयी फिल्म ‘थोडारी’ को दर्शकों से शानदार प्रतिक्रिया मिल रही है।
उन्होंने ट्वीट किया, “मैं, मुझमें और मेरे प्रोडक्शन हाउस में भरोसा करने वाले सभी लोगों का पूरे दिल से शुक्रगुजार हूं। मैं फिल्म के शानदार कलाकारों – दिनेश, समुतिराकनी और किशोर का आभार जताना चाहूंगा। यह हम सबके लिए आनंद का पल है।”
गौरतलब है कि इस साल 63वें राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह में ‘विसरनई’ ने सर्वश्रेष्ठ तमिल फिल्म, सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता (समुतिराकनी) और सर्वश्रेष्ठ संपादन (किशोर ते) के लिए पुरस्कार हासिल किए थे। 72वें वेनिस फिल्म महोत्सव में भी इसने एमनेस्टी इंटरनेशनल इटालिया अवार्ड जीता था।
यूपी में कुछ ही दिनों में विधानसभा चुनाव होने हैं, शायद इसीलिए सूबे के सभी सियासी दल एक दूसरे पर छींटाकशी करने में पीछे नहीं रहना चाहते। आज इसी तरह की एक तस्वीर लखनऊ में दिखी, जहाँ बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने पार्टी का दामन छोड़ बीजेपी में गए स्वामी प्रसाद मौर्य की रैली के ऊपर तंज कसते हुए कहा कि बुधवार की रैली पूरी तरफ से ‘फ्लॉप’ थी और बीजेपी को अब खुद ही पछतावा हो रहा होगा कि खोदा पहाड़ और निकली चुहिया।
आज मायावती ने स्वामी प्रसाद मौर्य की रैली पर चुटकी लेते हुए कहा कि पिछले कई महीने से रात दिन मेहनत की जा रही थी और उत्तर प्रदेश के लोगों को विधानसभा चुनाव में टिकट दिलाने का आश्वासन दिया जा रहा था। बीजेपी ने अपनी इज्जत बचाने के लिए अपने समर्थकों की भीड़ जुटाई, इसके बावजूद बीएसपी के बागी मौर्य की रैली फ्लॉप रही। अब तो खुद बीजेपी को लग रहा है कि खोदा पहाड़ और निकली चुहिया। बसपा सुप्रीमो ने आगे कहा कि मौर्य का कार्यक्रम उसी तरह विफल रहा, जैसे कुछ दिन पूर्व बीएसपी के एक अन्य बागी जुगल किशोर का दलित आयोजन रहा था। उसमें भी बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के शामिल होने की वजह से भीड़ जुटाने के लिए बीजेपी ने पूरी ताकत झोंकी थी।
मायावती यही नहीं रुकी उन्होंने कहा कि, ‘एक दलित की बेटी अच्छे बंगले में रहे, ये जातिवादी मानसिकता रखने वाली बीजेपी और उसके शीर्ष नेतृत्व अमित शाह को हजम नहीं हो पा रहा है और ये उनके भाषण से भी साफ तौर पर स्पष्ट होता है।’
गौरतलब हो कि इससे पहले रैली के दौरान अमित शाह ने मायावती के दिल्ली स्थित बंगलों का उल्लेख करते हुए कहा था कि, ‘मायावती के जितने बंगले दिल्ली में हैं, उनकी ही कीमत दलितों में बांट देतीं तो हर दलित के घर में एयरकंडीशन लग गया होता।’ इसी बयान के बाद जवाबी हमले में मायावती ने आज तीखे अंदाज में दो टूक जवाब दिया।
अब जैसे जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आएगी वैसे ही तमाम पार्टी के सियासतदारों के बीच शीत युद्ध का सिलसिला और जोर पकड़ेगा। आज स्वामी प्रसाद मौर्य और भाजपा के ऊपर जिस प्रकार तीखे अंदाज में बसपा सुप्रीमो मायावती ने जुबानी प्रहार किया है, उससे स्पष्ट है कि आगे भी वह अपने इसी अंदाज में विरोधियों को जवाब देंगी।
अनियमित भर्तियों व भ्रष्टाचार के लिए आरोपित दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्षा स्वाति मालीवाल ने गुरुवार को दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेन्स कर भाजपा पर अपने खिलाफ साजिश का व भाजपा के एक मंत्री द्वारा जिस्मफरोशी के धंधे का संगीन आरोप लगाया है।
स्वाति मालीवाल ने कहा, ” मैं ये समझने की कोशिश कर रही हूं कि हजारों करोड़ रुपये का जिस्मफरोशी का धंधा खुलेआम दिल्ली में संसद से तीन किलोमीटर की दूरी पर कैसे चल रहा है। यहां पर हर रात कम से कम पांच करोड़ का बिजनेस हो रहा है।” उन्होंने कहा कि हम यह जानने की कोशिश कर रहे थे कि किनके संरक्षण में इतना बड़ा धंधा चल रहा है।
स्वाति ने कहा, “हमने यह जानने की कोशिश की कि इन कोठों का मालिक कौन है। मुझे जांच के दौरान बहुत ही पुख्ता संकेत मिले हैं कि दिल्ली भाजपा के एक बड़े नेता जो केन्द्र सरकार में मंत्री भी हैं, उनके संरक्षण में ये पूरा गोरखधंधा चल रहा है। अभी जांच चल ही रही थी और अचानक मुझपर एक फ़र्ज़ी एफआईआर दर्ज की गई और अब मुझे ये संकेत दिए जा रहे हैं, बहुत लोगों से मैसेजेस आ रहे हैं कि मुझे अब ये अरेस्ट करेंगे और एलजी के माध्यम से ये नेता मिलकर दिल्ली महिला आयोग से मुझको निकाल देंगे।”
स्वाति ने कहा कि वे यह जानकार बिल्कुल स्तब्ध हैं कि इस गोरखधंधे में 8-8, 10-10 साल की बच्चियों की बोली लगती है और पहली रात की बोली लाखों में लगती है। एक-एक महिला को 30-30 आदमियों के साथ सोना पड़ता है।
स्वाति ने कहा,” मैं भगवान से प्रार्थना करती हूं कि मुझे जो संकेत मिल रहे हैं, वो गलत हों, पर प्रश्न तो उठते हैं, क्योंकि संसद से तीन किलोमीटर पर यह सब चल रहा है। एमसीडी से शिकायत के बावजूद कोई एक्शन नहीं लिया जा रहा। ये पूरा का पूरा एक संगठित बिजनेस है, जिसकी एक रात की कमाई पांच करोड़ है। ये पैसा कहां जा रहा है?”
गौरतलब है कि भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने दिल्ली महिला आयोग (डीसीडब्लू) की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल के खिलाफ आयोग की भर्तियों में कथित अनियमितता मामले में प्राथमिकी दर्ज की है। मालीवाल के खिलाफ भ्रष्टाचार, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक साजिश रचने संबंधी धाराएं लगाई गई हैं।
इलाहाबाद। इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्र संघ में अपनी जीत तय करने के लिए छात्र संगठन चुन-चुनकर प्रत्याशी मैदान में उतारे जा रहे हैं। इसी क्रम में आज छात्र युवा अधिकार मंच ने प्रतियोगी छात्र मोर्चा के साथ संयुक्त रूप से अतुल नारायण सिंह को अध्यक्ष पद का उम्मीदवार घोषित किया है। जिन्हें अपना दल छात्र मोर्चा ने भी अपना समर्थन दिया है।
आपको बता दें कि अतुल नारायण सिंह प्राचीन इतिहास विषय से शोध छात्र हैं और विवि में गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुके हैं। आपको बता दें कि अध्यक्ष पद के उम्मीदवार अतुल नारायण सिंह के प्रमुख एजेंडों में हास्टल सब्सिडी मेस की शुरुआत, इलाहाबाद विश्वविद्यालय की पहचान यहाँ प्रतियोगी छात्र जीवन इलाहबाद में पुनः वापस जाना होगा। इसके अलावा लाइब्रेरी का डिजिटलाइजेशन कैम्पस में सफाई और हर विभाग की अपनी कैंटीन की व्यवस्था जैसे मुद्दे हैं।
आज छात्र युवा अधिकार मंच और प्रतियोगी छात्र मोर्चा ने संयुक्त रूप से अपना उम्मीदवार चुना। इस मौके पर मोर्चा के अध्यक्ष डॉ राजेंद्र सिंह, पूर्व महामन्त्री सुरेश यादव, छात्र युवा अधिकार मंच के संयोजक बाबुल सिंह, मनेन्द्र प्रताप सिंह एवं जितेंद्र, धीरेन्द्र प्रताप सिंह, मुन्ना पाठक, अभिनव सिंह और छोटू मौजूद रहे।
चौतरफा दबाव के चलते जम्मू-कश्मीर के उरी में हुए आतंकी हमले के बाद केंद्र सरकार अब सख्त मूड में दिख रही है। जानकारों के मुताबिक, लाइन ऑफ कंट्रोल यानी एलओसी पर उरी हमले के बाद चल रही सेना की कार्रवाई पर खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नजर बनाए हुए हैं। साउथ ब्लॉक में अपने दफ्तर से पीएम मोदी सेना के अधिकारियों से पल-पल की जानकारी ले रहे हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पीएम मोदी ने मिलिट्री ऑपरेशंस रूम में ऑपरेशन की जानकारी ली है और इसी कारण कश्मीर में सेना ने ऑपरेशन तेज कर दिया है और कश्मीर में सेना की संख्या भी बढ़ाई गई है। आपको बता दें कि पिछले 3 दिन में आतंकियों से 6 से ज्यादा मुठभेड़ हुई है और सबसे ख़ास बात ये है कि 18 सितंबर के बाद से पीएम लगातार बैठकें कर रहे हैं, जिसमें उन्होंने 19 सितंबर को 4 शीर्ष केंद्रीय मंत्रियों के साथ बैठक की थी। इस बैठक में पीएम मोदी के साथ सेनाध्यक्ष और एनएसए भी मौजूद थे।
सेना के अपडेट लेने के बाद 20 सितंबर को पीएम ने फिर ऑपरेशन का अपडेट लिया और 21 तारीख को इसे लेकर सीसीएस की बैठक ली। उरी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में कड़वाहट और बढ़ गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमले के बाद घोषणा की कि हमले के सूत्रधारों को बख्शा नहीं जाएगा। वहीं केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ ने पाकिस्तान को वैश्विक मंच पर अलग-थलग करने की बात कही थी।
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री एम वेंकैया नायडू ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को पाकिस्तान को आतंकवादी देश घोषित करने की ओर काम करना चाहिए। वहीं उरी हमले पर भारत को दुनिया का साथ मिला। अमेरिका, फ्रांस, जापान और नेपाल समेत दुनिया के तमाम देशों ने इस हमले की निंदा की।