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Sunday, August 9, 2026
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पूर्व सैनिक ग्रेवाल की मौत को सियासी रंग में रंगते राजनेता

शिखा पाण्डेय,

दिल्ली के पूर्व सैनिक राम मनोहर ग्रेवाल की खुदकुशी को इस कदर सियासी रंग में रंग दिया गया है कि वास्तविकता कहीं अंधकार में ही रह गई है। पूर्व सैनिक ग्रेवाल का एक एक्सक्लूसिव ऑडियो सामने आया है, जिसमें उन्होंने अपने बेटे से फ़ोन पर कहा है कि वे सैनिकों के हक़ की लड़ाई लड़ रहे थे पर उन पर होता अन्याय वे और बर्दाश्त नहीं कर सकते। इसलिए उन्होंने ज़हर खा लिया है।

दूसरी ओर सुबह पूर्व सैनिक के परिवार से मिलने आर एम एल हॉस्पिटल पहुंचे कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी वापस लौटाए जाने के बावजूद एक बार फिर परिवार से मिलने कई कांग्रेसी नेताओं के साथ लेडी हार्डिन अस्पताल पहुंचे, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी को एक बार फिर हिरासत में ले लिया है।

राहुल ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया है, जिसमें पूर्व सैनिक का बेटा रोता हुआ नज़र आ रहा है और पुलिस के सामने विनती करता दिख रहा है। इससे पूर्व सोशल मीडिया पर एक अन्य वीडियो पोस्ट किया गया था जिसमें सैनिक का बेटा कह रहा था कि उनके साथ बेहद अन्याय हुआ है और जनता उन्हें न्याय दिलाने में उनका साथ दे।

वहां दिल्ली की सड़कों पर आम आदमी पार्टी के कई वरिष्ठ नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ प्रदर्शन करते नज़र आ रहे हैं। उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को सैनिक के परिवार से न मिलने दिए जाने व हिरासत में लिए जाने से बौखलाए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल खुद सैनिक के परिवार से मिलने पहुंचे। उन्हें भी मिलने से रोक दिया गया, जिसके बाद उन्होंने सैनिक के बेटे से फ़ोन पर बात की और मीडिया से बताया कि उनके परिवार के साथ बहुत ज़्यादती की जा रही है और वे उनके परिवार से मिले बिना वापस नहीं लौटेंगे।

गौरतलब है कि राहुल गांधी व मनीष सिसोदिया सुसाइड करने वाले पूर्व सैनिक के परिवार से मिलने राम मनोहर लोहिया अस्पताल गए थे, लेकिन उन्हें वहां अस्पताल में अंदर नहीं जाने दिया गया। इसके बाद राहुल गांधी अंदर जाने के लिए काफी कोशिश करते रहे, लेकिन बाद में दिल्ली पुलिस ने उन्हें अपनी हिरासत में ले लिया। इसके बाद उन्हें दो घंटे तक हिरासत में रखने के बाद छोड़ दिया गया था। मनीष सिसोदिया को भी हिरासत में लिया गया था जिसके बाद अरविन्द केजरीवाल, मनीष सिसोदिया व राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर जम कर केंद्र सरकार को कोसा।

पूर्व सैनिक की मौत पर राजनीति करने पहुंचे राहुल और सिसोदिया को रोका गया, तो मचा दिया बवाल!

शिखा पाण्डेय,
आज कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी खुदकुशी करने वाले पूर्व सैनिक राम किशन ग्रेवाल के परिवार से मिलने राम मनोहर लोहिया अस्पताल पहुंचे लेकिन उन्हें गेट पर ही रोक दिया गया। पूर्व सैनिक के परिवार से मिलने न दिए जाने से राहुल बेहद नाराज हो गये। पीड़ित परिवार से मिलने अस्पताल पहुंचे दिल्ली के उपमुख्‍यमंत्री मनीष सिसोदिया को हिरासत में ले लिया गया।

जब राहुल अस्पताल पहुँचे तब पहले खबर आई कि पीड़ित परिवार राहुल गांधी से मिलने गेट के बाहर आ रहा है, जिसके बाद राहुल गेट नंबर पांच पर खड़े रहे। काफी देर इंतजार करने के बाद राहुल अपनी गाड़ी में बैठकर वापस चले गए। उन्होंने पीड़ित परिवार से मिल न पाने पर अपना रोष जताते हुए कहा कि ये कैसा देश बनाकर रख दिया है जहां मैं पीडि़त परिवार से मिल भी नहीं सकता! यह नया हिंदुस्तान बन रहा है।

इससे पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आज सुबह पूर्वसैनिक की खुदकुशी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर प्रहार करते हुए कहा कि उनके राज में किसान और जवान खुदकुशी कर रहे हैं। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि मोदी ‘एक रैंक, एक पेंशन’ (ओआरओपी) योजना के मुद्दे पर ‘‘झूठ’ बोल रहे हैं कि योजना लागू की गई है और कहा कि अगर केंद्र सरकार योजना लागू कर रही होती तो पूर्व सैनिक राम किशन ग्रेवाल ने खुदकुशी नहीं की होती।

सिसोदिया के हिरासत में लिए जाने की खबर के बाद मुख्यमंत्री केजरीवाल ने ट्वीट किया,” अगर अपने राज्य में किसी की मौत पर उप मुख्यमंत्री परिवार को सांत्वना देने जाए तो क्या उसे गिरफ़्तार किया जाएगा? गुंडागर्दी की हद है मोदी जी।” केजरीवाल ने अफसोस जताया कि यह बेहद दुखद है कि जवानों को सीमा पर बाहरी दुश्मनों से, और देश के अंदर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ता है। केजरीवाल ने कहा कि समूचे राष्ट्र को उनके अधिकार के पक्ष में खड़ा होना चाहिए।

दूसरी ओर हिरासत में लिये जाने के बाद सिसादिया ने ट्वीट किया, ” एक पूर्व सैनिक केंद्र सरकार की हरकतों की वजह से आत्महत्या कर लेता है और उसके परिवार से बात करने पर मुझे हिरासत में लिया जाता है,हद है! सैनिकों की बहादुरी पर सीना ठोककर अपनी वाहवाही में लगे प्रधानमंत्री जी! आज एक पूर्व सैनिक ने आत्महत्या कर ली है। इसकी जवाबदेही किसकी है?”

उल्लेखनीय है कि 70 वर्षीय ग्रेवाल ने ओआरओपी के मुद्दे पर कल जहर खा कर खुदकुशी कर ली थी। सरकार की लागू की गई इस योजना से वे संतुष्ट नहीं थे। हालांकि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर और वित्त मंत्री अरुण जेटली वन रैंक वन पेंशन लागू करने के बारे में कई बार घोषणा कर चुके हैं।

हरियाणा सरकार ने अपनी स्वर्ण जयंती पर दिया “सक्षम शिक्षित युवा-सम्मानित हुआ” योजना का तोहफा

सौम्या केसरवानी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वादे के मुताबिक भारत सरकार द्वारा प्रारंभ की गई मुद्रा योजना ने देशभर के लाखों बेरोज़गारों को खुद का रोज़गार शुरू करने का सामर्थ्य दिया। अब हरियाणा सरकार ने भी राज्य के पोस्ट ग्रेजुएट युवाओं के लिए एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण योजना शुरू करने का फैसला किया है। इस योजना के तहत घर बैठे 100 घंटे का काम करने के बदले युवाओं को 9000 रुपए का मानदेय दिया जाएगा।

मंगलवार को हरियाणा राज्य ने अपने स्थापना दिवस की गोल्डन जुबली मनाई, इसी मौके पर इस योजना के लिए पंजीकरण भी शुरू कर दिया गया है। रोजगार कार्यालयों में पंजीकृत करीब 1100 युवाओं को पहले चरण में इसका लाभ मिलेगा।

योजना के तहत एक वेब पोर्टल भी तैयार किया गया है, जिसका नाम “सक्षम शिक्षित युवा-सम्मानित हुआ” है। दरअसल योजना के तहत पोस्ट ग्रेजुएट युवाओं को घर बैठे रोजगार मिलेगा। इसके लिए उन्हें हर महीने 100 घंटे का काम करने के बदले 9000 रुपए दिए जाएंगे। इसके अलावा, नियम के मुताबिक लाभ लेने के लिए आवेदनकर्ता को हरियाणा राज्य का ही होना चाहिए। साथ ही वह दिल्ली, चंढीगड़ या हरियाणा की ही किसी यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएट कर चुका हो।

आपको बता दें कि यह सुविधा अधिकतम तीन वर्षों के लिए दी जाएगी, ताकि इस दौरान युवा कोई बेहतर रोजगार हासिल करने के लिए खुद को समक्ष बना सकें। मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने बताया कि पीजी तक की पढ़ाई कर चुके युवा वर्ग के लिए सरकार ने इस दिशा में पहल शुरू की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस सुविधा का लाभ लेने के लिए अधिकतम 35 वर्ष की आयु होगी। जबकि तीन वर्ष तक ही इसका फायदा मिल सकेगा।

बेटी की शादी के अधूरे सपने संग ही सिमी आतंकियों के हाथों शहीद हो गए हेड कॉन्स्टेबल रमाशंकर

शिखा पाण्डेय,

सिमी के आठ खूंखार आतंकवादियों के एनकाउंटर पर सवाल उठाने वाली कांग्रेस ने शायद ही उस हेड कांस्टेबल की जान के बारे में विचार किया होगा, जिसकी हत्या कर ये आतंकी फरार हुए थे। भोपाल की सेंट्रल जेल में बतौर हेड कॉन्स्टेबल काम कर रहे 57 वर्षीय शहीद रमाशंकर यादव ने बहादुरी से अकेले उन 8 आतंकियों का सामना किया।

57 वर्षीय यादव की कुछ साल पहले ही बाइपास सर्जरी की गई थी और वह 2 साल बाद 2019 में रिटायर होने वाले थे। अगले महीने ही यादव की छोटी बेटी की शादी होने वाली थी, लेकिन दिवाली से अगले ही दिन परिवार को सूचना मिली कि सिमी के 8 सदस्य यादव की हत्या कर जेल से फरार हो गए हैं।

रमाशंकर यादव का एक बेटा प्रभुनाथ यादव सेना में लांस नायक है जो हरियाणा के हिसार में तैनात है। उनका दूसरा बेटा शंभुनाथ भी सेना में है, जो असम में तैनात है। वहीं बेटी सोनिया की अगले महीने दिसंबर में शादी होने वाली थी। प्रभुनाथ ने कहा, “जेल से भागने की कोशिश कर रहे 8 कैदियों से लड़ते हुए पता नहीं मेरे पिता क्या बीती होगी!” प्रभुनाथ ने कहा, “कुछ साल पहले ही उनकी बाइपास सर्जरी हुई थी। हमने जेल प्रशासन से विनती की थी कि उन्हें कम मेहनत वाला काम दिया जाए और नाइट ड्यूटी ना लगाई जाए।”

यादव का घर जेल से कुछ ही दूरी पर है। दीपावली की खुशियों के बीच सोमवार को उनके घर मातम पसर गया। प्रभुनाथ को जैसे ही पिता की मौत की खबर मिली वे मां हीरामनी को सहारा देने के लिए तुरंत दिल्ली से फ्लाइट पकड़कर भोपाल आ गए। परिवार और रिश्तेदार रमाशंकर यादव की आकस्मिक मृत्यु से बेहद दुखी तो हैं ही, साथ ही ये लोग जेल प्रशासन पर गुस्सा भी हैं। उनका कहना है कि उम्रदराज और बीमार होने के बावजूद यादव को जेल का इतना मुश्किल काम दिया हुआ था।

मध्य प्रदेश के गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह ने यादव के परिवार से मुलाकात की और आश्वासन दिया है कि सरकार रमाशंकर को शहीद का दर्जा प्रदान करेगी। इसके अलावा राज्य सरकार ने परिवार को बेटी की शादी के लिए 5 लाख रुपए समेत 15 लाख रुपए की वित्तीय सहायता की घोषणा की है। पुलिस कॉन्स्टेबल और रमाशंकर के परिवार के करीबी राकेश कटारिया ने कहा, “रमाशंकर एक शहीद है जिसने बड़ी बहादुरी से मुकाबला किया।”

गौरतलब है कि सोमवार दोपहर भोपाल सेन्ट्रल जेल से फरार सिमी के सभी 8 सदस्यों को पुलिस ने एक मुठभेड़ में मार गिराया। भोपाल के बाहरी इलाके में इंटखेडी गांव के पास पुलिस के जवानों ने सिमी के इन सदस्यों को ढेर किया। ये सभी सिमी सदस्य सोमवार तड़के 3-4 बजे बैरक तोड़कर ड्यूटी पर मौजूद हेड कॉन्स्टेबल रमाशंकर यादव को मारकर भोपाल की सेन्ट्रल जेल से फरार हो गए थे। ओढ़ने के काम आने वाली चादर की रस्सी बनाकर आतंकी दीवार फांदकर फरार हुए। पुलिस ने बताया कि फरार कैदियों के पास हथियार भी थे। आतंकियों की फायरिंग के बदले पुलिस ने आत्मरक्षा में फायरिंग की और क्रॉस फायरिंग में सभी फरार कैदी मारे गए।

चंदू को वापस लाने के लिए कूटनीतिक तरीका अपनाएगा भारत!

शिखा पाण्डेय,

गलती से लाइन ऑफ़ कंट्रोल पार कर पाकिस्तान की गिरफ्त में आये भारतीय जवान चंदू बाबूलाल चव्हाण को वापस लाने के लिए भारत ने अब कूटनीतिक तरीका अपनाने का फैसला लिया है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अबतक इंडियन आर्मी के डीजीएमओ (डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन) रणबीर सिंह ही पाकिस्तान के डीजीएमओ से बातचीत कर रहे थे, लेकिन परिणाम सकारात्मक दिखाई नहीं दे रहे।

सिंह ने पाकिस्तान के डीजीएमओ से चंदू बाबूलाल चव्हाण को छोड़ने की अपील की थी लेकिन पाकिस्तान की तरफ से कोई जवाब ही नहीं आया। इसलिए सरकार ने फैसला किया है कि अब उसे ही पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय से बातचीत करनी होगी। आपको बता दें कि अब तक भारत ने आर्मी को ही चंदू को वापस लाने की जिम्मेदारी सौंप रखी थी। भारतीय विदेश मंत्रालय अब तक चव्हाण के केस को नहीं देख रहा था।

गौरतलब है कि चंदू महाराष्ट्र के धुले गांव के रहने वाले हैं। A-37 राष्ट्रीय राइफल के सिपाही चंदू बाबूलाल चौहान जो कि जम्मू कश्मीर के मेंडर सेक्टर में पोस्टिंग पर थे, सर्जिकल स्ट्राइक के कुछ घंटों बाद लापता हो गए थे। बाद में पता लगा कि वह अनजाने में बॉर्डर पार करके पाकिस्तान चले गए। उनके पकड़े जाने की खबर सुनकर उनकी दादी को ऐसा सदमा लगा कि उनकी मौत हो गई।

पहले तो पाकिस्तान चंदू के उसके पास होने की बात को नकारता रहा लेकिन बाद में उसने चंदू के उसके पास होने की बात स्वीकारी। रक्षा मंत्री मनहोर पर्रिकर ने कहा था कि फिलहाल हालात ठीक नहीं हैं इस वजह से चंदू को वापस लाने में थोड़ा वक्त लग सकता है। चंदू चव्हाण के भाई भूषण, जो खुद भारतीय सेना में हैं, उन्होंने कहा, “हम लोग इस बात को लेकर परेशान हैं कि वे लोग चंदू पर अत्याचार करेंगे।” भूषण इस वक्त गुजरात में तैनात हैं।

अरसे बाद साथ नज़र आए विराट अनुष्का, मनाई दीपावली

शिखा पाण्डेय,

अभिनेत्री अनुष्का शर्मा अपनी विवादित फिल्म ‘ऐ दिल है मुश्किल’ की सफलता और दीपावली की ख़ुशी अपने सबसे करीबी दोस्त विराट कोहली के साथ मनाती नज़र आईं। जी हां! भारतीय क्रिकेट टीम के धुआंधार बल्लेबाज़ विराट कोहली और अभिनेत्री अनुष्का शर्मा लंबे समय से अपने रिलेशनशिप, ब्रेकअप, फिर पैचअप को लेकर चर्चा में हैं। दोनों को अक्सर कई जगहों पर कई मौकों पर एक साथ देखा गया है, लेकिन पिछले कुछ महीनों से विराट-अनुष्का साथ नजर नहीं आ रहे थे। काफी लंबे अरसे बाद दिवाली की रात विराट और अनुष्का फिर सार्वजनिक स्थल पर एक साथ नजर आए।

दीवाली की रात गोवा में हुए इंडियन सुपर लीग फुटबॉल टूर्नामेंट के एफसी गोवा बनाम डेली डायनामोज के मैच में ये दोनों अपनी टीम एफसी गोवा को चीयर अप करने पहुंचे। आपको बता दें कि एफसी गोवा में विराट कोहली की 12 प्रतिशत साझेदारी है। फरवरी माह में ब्रेकअप और फिर पैचअप की खबरों के बाद यह पहला मौका था, जब दोनों सार्वजनिक तौर पर एकसाथ नजर आए हैं।

खूबसूरत सफेद सलवार सूट और उसके साथ सुनहरे रंग का दुपट्टा अनुष्का की बेजोड़ खूबसूरती में चार चांद लगा रहा था। दूसरी ओर विराट ने जींस के साथ टीम की टी-शर्ट पहन रखी थी।

गौरतलब है कि इससे पहले भी अनुष्का कई बार क्रिकेट स्टेडियम पहुंचकर विराट की हौसला अफजाई करती दिखी हैं। विश्वकप 2015 के फाइनल मैच के लिए भी अनुष्का ऑस्ट्रेलिया गई थीं। विराट भी अनुष्का की फिल्म ‘सुल्तान’ की स्क्रीनिंग पर पहुंचे थे।

सेंट्रल जेल से भागे सभी 8 सिमी आतंकी मुठभेड़ में ढेर

इंद्रकुमार विश्वकर्मा,

भोपाल सेन्ट्रल जेल से सिपाही की हत्या कर फरार हुए प्रतिबंधित संगठन सिमी के सभी 8 आतंकी भोपाल के बाहर ईंटखेड़ी गांव में मुठभेड़ में मारे गए। मुठभेड़ में मारे गए इन आतंकियों के नाम हैं- मेहबूब गुड्डू, मोहम्मद खालिद अहमद, अमजद, जाकिर हुसैन सिद्दीक, मोहम्मद सालिक, मुजीब शेख, अकील और माजिद। प्रदेश सरकार ने प्रत्येक फरार SIMI आतंकी की गिरफ्तारी पर 5 लाख रुपये के ईनाम की घोषणा कर दी थी।

ये सभी आठों आतंकी आज तड़के करीब 2 से 3 बजे के बीच एक सिपाही की स्टील के प्लेट से गला काटकर हत्या करने के बाद जेल से फरार हो गए थे। भोपाल के डीआईजी रमन सिंह ने बताया, ‘SIMI के 8 आतंकी तड़के करीब 2 से 3 बजे के बीच एक सुरक्षा गार्ड की हत्या करने के बाद जेल से फरार हो गए।’ उन्होंने कहा कि ‘द स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया’ के आतंकियों ने एक सुरक्षा गार्ड की हत्या कर दी और उसके बाद वे चादरों की सहायता से जेल की दीवार लांघ कर वहाँ से फरार हो गए।

गौरतलब है कि पिछले तीन साल में SIMI के कार्यकर्ताओं की जेल तोड़ने की यह दूसरी घटना है। इसके पूर्व वर्ष 2013 में मध्यप्रदेश के खंडवा में एक जेल से सिमी के सात सदस्य भाग निकले थे। एक अक्टूबर 2013 को सिमी के 7 सदस्य मध्यप्रदेश के खंडवा में स्थित जिला जेल से 14 फुट उंची दीवार फांद कर भाग गए थे। इनमें से एक कैदी ने अगले दिन आत्मसमर्पण कर दिया था और एक अन्य कैदी को मध्यप्रदेश के बड़वानी से दिसंबर 2013 में पकड़ा गया था। तीसरा कैदी पांच अप्रैल 2015 को तेलंगाना पुलिस के साथ एक मुठभेड़ में मारा गया था। 4 कैदियों की पुलिस लगातार 3 साल तक तलाश करती रही और फरवरी 2016 में इन्हें ओडिशा के राउरकेला से गिरफ्तार किया गया। जब चारों कैदी फरार थे, तब वह लोग मध्यप्रदेश, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों में आतंकवादी गतिविधियों में कथित तौर पर लिप्त थे।

सूत्रों की माने तो मारे गए ये आतंकी तेलंगाना के करीमनगर स्थित एक बैंक में लूटपाट के एक मामले में और एक फरवरी 2014 को चेन्नई सेंट्रल स्टेशन पर बेंगलूरु-गुवाहाटी ट्रेन में हुए विस्फोट में भी लिप्त थे। इस विस्फोट में एक युवा सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत हो गई थी। एक मई 2014 को पुणे के फर्शखाना पुलिस थाने में और 10 जुलाई 2014 को विश्रामबाग पुलिस थाने के समीप हुए विस्फोट में भी इन्हीं आतंकियों का हाथ होने की आशंका है। यह भी कहा जाता है कि यह लोग उत्तराखंड के रूड़की और उत्तर प्रदेश के बिजनौर में हुई बम विस्फोट की घटनाओं में भी कथित तौर पर लिप्त थे।

सरदार वल्लभभाई पटेल: “यही प्रसिद्ध लौहपुरुष प्रबल, यही प्रसिद्ध शक्ति की शिला अटल”

आनंद रूप द्विवेदी,

“यही प्रसिद्ध लौहपुरुष प्रबल,

यही प्रसिद्ध शक्ति की शिला अटल,

हिला इसे सका कभी न शत्रु दल,

पटेल पर स्वदेश को गुमान है।”

– हरिवंश राय बच्चन (1950)

15 अगस्त 1947 के बाद भारत से पाकिस्तान का अलगाव, मजहबी कट्टरता का राष्ट्रीय एकीकरण में बाधा बनना और मोहम्मद अली ज़िन्ना की कुटिल कोशिशें, इन सब के बीच अखण्ड भारत के स्वप्न को कोई जी रहा था तो वो थे “लौह पुरुष सरदार वल्लभ झवेर भाई पटेल”। ये हमारी खुशकिस्मती ही थी जो सरदार पटेल जैसे महापुरुषों ने भारत में जन्म लिया। गुजरात के एक साधारण किसान परिवार में जन्मे सरदार पटेल लंदन गए, बैरिस्टर की  पढ़ाई पूरी की और वापस अहमदाबाद में वकालत करने लगे।

महात्मा गांधी के आदर्शों-विचारों से प्रभावित सरदार पटेल भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में कूदे, तो गुजरात के खेड़ा में सूखे की मार झेल रहे गरीब किसानों पर ब्रिटिश हुकूमत द्वारा भारी कर लगाए जाने के विरोध में संघर्ष शुरू कर दिया, नतीजन हुकूमत को झुकना पड़ा। इसे सरदार पटेल की पहली बड़ी सफलता के रूप में देखा जाता है।

भारतीय स्वाधीनता संग्राम में 1928 के बारडोली सत्याग्रह का अहम स्थान है। गुजरात का यह किसान आन्दोलन ब्रिटिश सरकार द्वारा किसानों पर 30 प्रतिशत कर वृद्धि के खिलाफ था, जिसकी अगुवाई वल्लभभाई पटेल कर रहे थे। अंग्रेजों ने इस आन्दोलन को कुचलने की भरपूर कोशिश की, लेकिन वल्लभभाई पटेल किसी अडिग चट्टान से डटे रहे और विवश होकर अंग्रेजों ने कर घटा लिया। इस आन्दोलन की सफलता ने वल्लभभाई की ख्याति पर चार चाँद लगा दिए तो बारडोली कि स्थानीय महिलाओं ने उन्हें “सरदार” कि उपाधि दे दी। वल्लभभाई अब सरदार वल्लभभाई पटेल हो चुके थे, जिन्हें महात्मा गांधी भी सरदार कहकर ही बुलाते थे।

देश कि आजादी के बाद जब प्रधानमंत्रित्व की बात आई तो सरदार ने गांधी जी की व्यक्तिगत भावनाओं की कद्र करते हुए पंडित जवाहर लाल नेहरु के विरुद्ध स्वयं का नाम वापस ले लिया ! उन्हें देश का गृह मंत्री व उप प्रधानमन्त्री बना दिया गया ! ये समय था जब भारत के बरसों से सोये हुए रियासतों के राजा और नवाब गण जो कभी अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ चूं से चां तक नहीं कर पाए, वो अपना शाही रौब झाड़ने लगे। सभी को पहले की तरह अपनी रियासतों पर हुकूमत कि स्वतंत्रता चाहिए थी। ऐसे में सरदार पटेल की प्राथमिकता थी कि वो बिना किसी सैन्य संघर्ष या रक्तपात के रियासतों का विलय भारत में करवा लें। बाकी देसी रियासतों ने भारत में विलय करना स्वीकार कर लिया, तो केवल तीन को ये नागवार गुजरा जिसमें जम्मू-कश्मीर, हैदराबाद, और जूनागढ़ रियासतें शामिल थीं। हैदराबाद के निजाम नहीं माने तो सरदार पटेल ने ऑपरेशन पोलो के तहत सेना भेजी और हैदराबाद का विलय हुआ। जोधपुर के राजा हनुवंत सिंह को जिन्ना ने पाकिस्तान में शामिल हो जाने के लिए तरह-तरह के प्रलोभन दिए। बात जब सरदार पटेल तक पहुंची, तो वे आनन फानन में जोधपुर पहुंचे। हनुवंत सिंह उग्र स्वभाव के व्यक्ति थे। उन्होंने रौब झाड़ने क लिए सरदार पटेल के सामने टेबल में अपनी पिस्तौल निकालकर रख दी। सरदार पटेल के काफ़ी समझाने पर जब हनुवंत सिंह ताव में आ गये तो सरदार पटेल वही पिस्तौल राजा जोधपुर हनुवंत सिंह कि खोपड़ी पर तान कर बोले, “राजस्थान में विलय में हस्ताक्षर कीजिए नहीं तो आज हम दो सरदारों में से एक सरदार नहीं बचेगा।” हनुवंत सिंह के पास विलय पत्र में हस्ताक्षर करने के सिवा कोई और चारा न था।

सरदार वल्लभभाई पटेल के हौसले के सामने समस्त राजा-महाराजा-नवाब-निजामों के हौसले पस्त पड़ते गये, लेकिन पंडित नेहरू ने कश्मीर मामले में सरदार की एक न चलने दी। नेहरु ने इसे अंतर्राष्ट्रीय मसला करार देते हुए सरदार के अखण्ड भारत के रथ पर रोक लगा दी। मशहूर राजनीतिज्ञ एच.वी. कामत के अनुसार पटेल कहते थे कि, “यदि नेहरू और गोपाल स्वामी आयंगर कश्मीर मुद्दे पर हस्तक्षेप न करते और उसे गृह मंत्रालय से अलग न करते तो हैदराबाद की तरह इस मुद्दे को भी आसानी से देशहित में सुलझा लेते।”

आज जिसे हम भारत माता मानते हैं, उसकी शक्ल-ओ-सूरत वैसी न होती जैसी हम मानचित्र में देखते हैं। ये सब सरदार पटेल के अद्भुत सूझबूझ और साहसिक निर्णयों- प्रयासों का परिणाम है, जिन्होंने 562 छोटी-बड़ी रियासतों को एक भारत संघ में विलीन करके एक भारत का निर्माण किया। ऐसा विश्व के इतिहास में कभी न हुआ! आज हम सभी सरदार पटेल के महान जन्मदिवस के रूप में “एकता दिवस” मनाकर एक भारत के निर्माता को शत-शत नमन करते हैं।

 Photo ©ShikhaPandey

सिपाही का गला काटकर भोपाल सेंट्रल जेल से फरार हुए सिमी के 8 आतंकी

इंद्रकुमार विश्वकर्मा,

भोपाल सेंट्रल जेल से प्रतिबंधित संगठन SIMI के 8 आतंकी आज सुबह एक सुरक्षा गार्ड की हत्या करने के बाद चादरों की सहायता से जेल की दीवार लांघ कर फरार हो गए। फरार आतंकियो को पकड़ने के लिए तलाशी अभियान चल रही है। आतंकियों के फरार होने के बाद राज्य के पुलिसकर्मियों को अलर्ट कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को तलब किया है। इस घटना के बाद भोपाल सेंट्रल जेल के 5 अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया।

भोपाल के डीआईजी रमन सिंह ने बताया, ‘SIMI के 8 आतंकी तड़के करीब 2 से 3 बजे के बीच एक सुरक्षा गार्ड की हत्या करने के बाद जेल से फरार हो गए।’ उन्होंने कहा कि ‘द स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया’ के आतंकियों ने एक सुरक्षा गार्ड की हत्या कर दी और उसके बाद वे चादरों की सहायता से जेल की दीवार लांघ कर वहाँ से फरार हो गए।

डीआईजी ने बताया कि उन्होंने पहले गार्ड को घेर कर अपने कब्जे में लिया और फिर स्टील की प्लेट से उसका गला काट कर उसे मार डाला। उन्होंने बताया कि विस्तृत जानकारी अभी आनी बाकी है। फरार आतंकियों की खोज के लिए अभियान शुरू कर दिया गया है।

अखिलेश के ‘जनता से मुलाक़ात’ कार्यक्रम में भगदड़, 6 घायल

शिखा पाण्डेय,

रविवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ‘जनता से मुलाकात’ कार्यक्रम के दौरान जमा लोगों की भीड़ में भगदड़ मच गई। इस भगदड़ में कन्नौज के जिला पंचायत अध्यक्ष समेत छह लोग घायल हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि पुलिस द्वारा काफी मशक्कत करके भीड़ को काबू किये जाने के बाद जनता दर्शन कार्यक्रम दोबारा शुरू किया गया।

अपर पुलिस अधीक्षक रामकिशन यादव के अनुसार मुख्यमंत्री अखिलेश यादव लोकनिर्माण विभाग के अतिथिगृह में आम लोगों से मुलाकात कर रहे थे। इसी दौरान बड़ी संख्या में फरियादियों के वहां पहुंच जाने के कारण अतिथिगृह का मुख्य द्वार बंद कर दिया गया था। इस बीच, किसी विशिष्ट व्यक्ति की कार को अंदर भेजने के लिए मुख्य द्वार खोला गया तो कार के पीछे लोगों की भीड़ भी धक्का देकर अंदर घुसने की कोशिश करने लगी। इस दौरान भगदड़ सी मच गयी, जिसमें कन्नौज के जिला पंचायत अध्यक्ष संतोष यादव समेत छह लोग जख्मी हो गए। मौके पर मौजूद कुछ मीडियाकर्मियों को भी चोटें आईं। घायलों को मरहम-पट्टी के लिए अस्पताल ले जाया गया।

गौरतलब है कि जैसे ही अखिलेश के आने की जानकारी मिली, काफी संख्या में लोग उन्हें दिवाली की बधाई देने के लिए उनसे मिलने पहुंच गए। पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद भीड़ को नियंत्रित किया। अखिलेश ने लोगों से बातचीत की और उनकी दिक्कतें सुनीं। उसके बाद उन्होंने लोगों की समस्याओं का समाधान करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए।

आपको बता दें कि अखिलेश अपने परिवार के साथ दिवाली मनाने सैफई पहुंचे। सीएम अखिलेश लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे से यहां पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने रास्ते में रुक-रुककर लोगों से मुलाकात की। समाजवादी परिवार में मचे घमासान के बाद अखिलेश यादव की यह पहली सैफई यात्रा है।