बगदादी ने जारी किया ऑडियो, कहा," खून की नदियां बहा दो, जीत अपनी ही होगी"
सिर पर मौत की नंगी तलवार लटकने के बावजूद इस्लामिक स्टेट (आईएस) के मास्टर माइंड बगदादी के हौसले पस्त नहीं हुए हैं। इराक में अमेरिकी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन द्वारा इस्लामिक स्टेट (आईएस) के गढ़ मोसुल पर किए जा रहे हमलों के बावजूद संगठन के प्रमुख अबु बक्र अल-बगदादी ने गुरुवार, 3 नवंबर को एक ऑडियो संदेश जारी करके दावा किया है कि इस जंग में अंतिम जीत आईएस की ही होगी।
बगदादी ने अपने संदेश में कहा है कि “इस्लामिक स्टेट जो मुकम्मल जंग और अजीम जिहाद लड़ रहा है, उससे हमारा यकीन बढ़ा है। अल्लाह की मर्जी से ये जीत की शुरुआत है।” बगदादी ने अपने संदेश में मोसुल के निनेवेह प्रांत के आम अवाम से भी “अल्लाह के दुश्मनों” के खिलाफ लड़ने की अपील की है। बगदादी ने आईएस के फिदायीन हमलावरों से कहा है कि काफिरों के लिए “रात को दिन में बदल दो, उन पर ऐसा कहर बरपाओ कि उनके खून की नदियां बहने लगें।”
आपको बता दें कि मोसुल आखिरी बड़ा इराकी शहर है जहां आईएस का नियंत्रण है। पिछले दो हफ्तों से अमेरिकी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन में पचास हज़ार इराकी सैनिक, कुर्द लड़ाके, सुन्नी अरब कबीले के लड़ाके और शिया हथियारबंद लड़ाके मोसूल को आईएस के कब्जे से छुड़ाने के लिए कार्रवाई कर रहे हैं।
मोसुल पर दो साल से आईएस ने कब्जा जमा रखा था। इराकी सरकार के प्रवक्ता ने बुधवार को बीबीसी को बताया कि इराकी सेनाएं मोसुल में अब घर-घर जाकर लड़ाई की तैयारी कर रही हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार आईएस मोसुल में आम नागरिकों को ढाल बना रहा है। और उसे कदम दर कदम हार का सामना कर पड़ रहा है। इराक ने मंगलवार (1 नवंबर) को घोषणा की कि उसके सैनिकों ने दो वर्ष बाद मंगलवार को पहली बार जिहादियों के कब्जे वाले मोसुल शहर में प्रवेश किया।
साल 2016 बैटमैन वर्सेस सुपरमैन, कैप्टन अमेरिका-सिविल वॉर, एक्स-मेन एपोकेलिप्स, द जंगल बुक, कंजुरिंग-2, BFG, वारक्राफ्ट, इन्फर्नो और ऐसी ही तमाम बेहतरीन साई-फाई हॉलीवुड फिल्मों के लिए जाना जाएगा। हॉलीवुड फिल्मों के दीवानों के लिए ख़ास बात ये है कि आने वाला साल 2017 और भी हैरतअंगेज़ स्पेशल इफेक्ट्स और सुपर हीरोज़ के कारनामों से भरा हुआ होगा, जहाँ मार्वेल, यूनिवर्सल, फॉक्स स्टार, वार्नर ब्रदर्स, डिज्नी, और तमाम दिग्गज फिल्म प्रोडक्शन हाउसेस ने आपके दिलों को दहला देने की पूरी तैयारी कर ली है। आइये जानते हैं कि कौन सी वो दस मूवीज हैं, जिन्हें आने वाले साल में आप मिस नहीं करना चाहेंगे।
1. जस्टिस लीग (Justice League):
डीसी कॉमिक्स सुपरहीरो टीम पर आधारित जस्टिस लीग आने वाली सुपरहीरो फिल्मों में सबसे जबरदस्त एंट्री मारने वाली है। बैटमैन, वंडर वुमेन फ़्लैश, सुपरमैन, एक्वामैन, साईबोर्ग जैसे कॉमिक सुपरहीरोज आपका पूरा पैसा वसूल मनोरंजन करने वाले हैं। वार्नर ब्रदर्स पिक्चर्स द्वारा वितरित होने वाली इस फिल्म के डायरेक्टर होंगे जैक स्नाइडर, जो पहले ही 300, बैटमैन वर्सेस सुपरमैन, और मैन ऑफ़ स्टील जैसी बेहतरीन फ़िल्में दे चुके हैं। इस फिल्म में बेन एफ्लेक, क्लार्क केन्ट जैसे दिग्गज एक्टर्स के साथ अन्य जाने माने चेहरे होंगे। फिल्म रिलीज़ की अब संभावित डेट नवम्बर 2017 है।
2. गार्डियन्स ऑफ़ द गैलेक्सी- वॉल्यूम 2 (Guardians of the Galaxy Vol. 2):
ये मूवी 2014 में रिलीज़ हुई गार्डियंस ऑफ़ द गैलेक्सी का सीक्वल है। मार्वल स्टूडियोज के बैनर तले बनने वाली और जेम्स गन निर्देशित इस फिल्म के वितरक होंगे वाल्ट डिज्नी मोशन पिक्चर्स। मूवी में बड़ी स्टारकास्ट है, जिसमें विन डिज़ल, डेव बटिस्टा, क्रिस प्रैट, जो सेल्दाना, ब्रैडली कूपर, कर्ट रसेल समेत अन्य बड़े एक्टर्स होंगे। फिल्म को संभवतः मई 17 में रिलीज़ किया जाएगा।
3. पाइरेट्स ऑफ़ द कैरेबियन: डेड मेन टेल नो टेल्स (Pirates of the Caribbean: Dead Men Tell No Tales):
आने वाला साल कैप्टन जैक स्पैरो के फैन्स के लिए बेहतर साबित होगा। जोशिम रोनिंग और इस्पैन सैंडबर्ग निर्देशित, जॉनी डेप स्टारर पाइरेट्स सीरिज़ कि अगली फिल्म फिर वही समुद्री लुटेरों के बीच की फंतासी को लेकर आने वाली है। फिल्म में ऑर्लैंडो ब्लूम भी विल टर्नर के किरदार में नजर आयेंगे। कैप्टन जैक स्पैरो और कैप्टन सलाज़ार के बीच “ट्रिडेंट ऑफ़ पोसायडन” के लिए जबरदस्त सीन्स फिल्माए जायेंगे। पायरेट्स सीरीज की ये पांचवी कड़ी दर्शकों को एक बार फिर से उसी समंदर-तिलिस्म-और रूहानी दुनिया में ले जाने के लिए मई 17 में रिलीज़ होगी।
4. थोर: रैग्नरोक (Thor: Ragnarok) :
मार्वेल स्टूडियोज के सुपरहीरो थोर एक बार फिर से धरती पर आने वाले हैं, जिसमें उनकी मदद डिज्नी मोशन पिक्चर्स करेंगे। थोर: द डार्क वर्ड के बाद आने वाली इस फिल्म में मेन स्टार कास्ट पहले वाली ही है, जिसमें क्रिस हेम्स्वर्थ, थोर के रूप में अपना भारी भरकम हथौड़ा घुमाते नजर आयेंगे। एस्गार्ड के क्राउन प्रिंस थोर द्वारा मानवता की रक्षा में उनका साथ देने वाले इदरिस अल्बा भी हैं। मूवी में हल्क यानी मार्क रफेलो भी नजर आयेंगे, जो थोर के साथ होंगे। थोर सीरीज की ये तीसरी फिल्म नवम्बर 17 में रिलीज़ होगी।
5. स्पाइडर मैन-होमकमिंग (Spider-Man: Homecoming):
बच्चों के फेवरेट स्पाइडर मैन की घर वापसी आने वाले साल में होगी। स्पाइडर मैन फ्रेंचाईज़ की इस अगली फिल्म में टॉम हॉलैंड स्पाइडर मैन की भूमिका में होंगे, जो कि कैप्टन अमेरिका-सिविल वॉर में स्पाइडर मैन के रूप में नजर आ चुके हैं। मार्वल स्टूडियोज और कोलंबिया पिक्चर्स के बैनर तले बनने वाली ये मूवी स्पाइडर मैन के हैरतंगेज़ करतबों और कारनामों से लबरेज़ होगी। इस मूवी में टोनी स्टार्क यानि आयरन मैन (रॉबर्ट डाउनी जूनियर) भी नजर आयेंगे। फिल्म जुलाई 17 में रिलीज़ होगी।
6. फ़ास्ट 8 (Fast 8):
फ़ास्ट एंड फ्यूरियस श्रृंखला की अगली फ़िल्म फ़ास्ट 8 बड़ी फिल्मों में से एक होगी, जिसमें विन डिज़ल, मिशेल रोड्रिग्ज़, ड्वेन जॉनसन, जेसन स्टेथम, कर्ट रसेल, वेटरन फिल्म मेकर/एक्टर क्लिंट ईस्टवुड के बेटे स्कॉट ईस्टवुड समेत बाकी फ़ास्ट फ्रेंचाईज़ के कलाकार होंगे सिवाय पॉल वाकर के, जिनका एक दुर्घटना में देहांत हो चुका था। पिछली फ़ास्ट एंड फ्यूरियस-7 में पॉल वाकर की जगह उनके बॉडी डबल के रूप में पॉल के छोटे भाई कोडी वाकर ने उनकी कमी को पूरा किया था। कार चेजिंग, खतरनाक स्टंट्स के लवर्स के लिए फ़ास्ट-8 एक बेहतरीन फिल्म साबित होगी, जिसके निर्देशक एफ.गैरी ग्रे हैं। फिल्म अप्रैल 17 में रिलीज़ होने वाली है।
7. लोगन (Logan) :
म्यूतटेन्ट सुपरहीरो वुल्वरीन या लोगन को लेकर मार्वेल कॉमिक्स अपनी आने वाली फ़िल्म में कहानी को कुछ नए मोड़ देने को तैयार है। फिल्म का टीजर/ट्रेलर रिलीज़ हो चुका है। मार्च 17 में फिल्म रीलीज़ हो जाएगी। एक्स-मेन सीरीज़ कि फ़िल्में बच्चों में काफ़ी लोकप्रिय होती हैं, जिन्हें म्यूतटेन्ट्स की करिश्माई शक्तियां काफ़ी प्रभावित करती हैं। फ़िल्म वुल्वरीन पर केन्द्रित होगी, इसलिए इसमें बाकी के एक्स-मेन का ज्यादा फ्रेम नहीं मिलेगा। लेकिन लोगन की उँगलियों के बीच फौलादी ब्लेड्स कैसे आए, ये जानने को भी मिल सकता है। इस फिल्म में आपको उम्रदराज़ वुल्वरीन देखने को मिलेगा जो अल्जाइमर्स से भी पीड़ित है। ह्यूज़ जैकमैन कि बेमिसाल एक्टिंग और जेम्स मैनगोल्ड के अनुभवी निर्देशन में आपको जरूर मजा आयेगा।
8. ट्रांसफॉर्मर्स: द लास्ट नाइट (Transformers: The Last Knight):
ट्रांसफॉर्मर्स सीरीज में आने वाली अगली फ़िल्म द लास्ट नाइट रोमांच और टेक्नोलॉजी से भरपूर होगी जिसमें कार्स और ट्रक्स का रोबोट बन जाना और दुनिया को बचाने की कवायद के बीच इंसानी जज्बातों का अद्भुत तालमेल देखने को मिलेगा ! माइकल बे निर्देशित इस फिल्म में मशीनों के अलावा मार्क वालबर्ग, स्टैनले टसी, टेरेस गिब्सन समेत अन्य कलाकार दिखेंगे। फिल्म जून 17 में रिलीज़ होगी।
9. वॉर फॉर द प्लेनेट ऑफ़ द एप्स (War for the Planet of the Apes):
प्लैनेट ऑफ़ द एप्स की तीसरी कड़ी में आने वाली अगली साइंस फिक्शन फ़िल्म आपको और भी रोमांचित कर देगी। एप सीज़र के रूप में एंडी सर्किस, के साथ वूडी हैरेल्सन, स्टीव त्जान आदि प्रमुख भूमिकाओं में होंगे। प्लेनेट ऑफ़ एप्स की पिछली दो फिल्मों ने जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की थी। एप्स फिल्मों की स्टोरी और स्क्रीनप्ले जबरदस्त होता है, जो फिल्म को ख़ास बनाते हैं। फिल्म रिलीज़ जुलाई 17 में सिनेमाघरों में होगी।
10. द ममी (The Mummy):
मिस्र के पिरामिडों में दफ़न ममीज़ पर आधारित एक्शन एडवेंचर फंतासी फ़िल्में हमेशा दर्शकों को लुभाती रही हैं। इसी कड़ी में डायरेक्टर/प्रोडूसर एलेक्स कर्त्ज़मैन द ममी नामक नई फिल्म लेकर आ रहे हैं। दर्शकों में इस फिल्म को लेकर पहले से काफ़ी उत्साह है, खासकर जो लम्बे समय से ममीज़ आधारित फिल्मों का इंतज़ार कर रहे थे। इस फिल्म में ख़ास बात होगी इसकी स्टारकास्ट, जिसमें टॉम क्रूज़, रसेल क्रो, एनाबेल वैलिस जैसे दिग्गज सितारे होंगे, जिससे आपको एकदम नयापन देखने को मिलेगा। इस फिल्म के लिए अभी आपको जून 17 तक और इन्तजार करना पड़ेगा।
मिशन यूपी-2017 को ध्यान में रखते हुए सूबे की सत्ता पर काबिज समाजवादी पार्टी आज से चुनावी बिगुल फूंकेगी। आज लखनऊ से मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अगुवाई में रथयात्रा की शुरुआत होगी। चंद महीनों बाद यूपी में विधानसभा चुनाव होने हैं और इस नाते समाजवादी पार्टी के लिए आज का दिन बड़ा ही अहम है।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की ‘विकास रथ यात्रा’ को सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव हरी झंडी दिखाएंगे। सूत्रों के अनुसार अखिलेश से नाराज उनके चाचा शिवपाल यादव भी मौजूद हो सकते हैं। इस रथ यात्रा के द्वारा अखिलेश यादव 2017 में होने जा रहे उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले जनता की नब्ज टटोलेंगे।
समाजवादी पार्टी के मुताबिक रथ यात्रा की पूरी तैयारी हो चुकी है और प्रदेश के सभी जिलों से हजारों लाखों की संख्या में कार्यकर्ता लखनऊ पहुँच चुके हैं, वहीं प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए हैं। आपको बता दें कि रथ यात्रा पहले दिन लखनऊ से उन्नाव के लिए निकलेगी।
बता दें कि इस रथ पर मुख्यमंत्री अखिलेश के साथ उनके पिता और पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की बड़ी तस्वीर लगी हुई है, लेकिन उनके चाचा शिवपाल सिंह यादव की तस्वीर गायब है। इससे देश के सबसे बड़े सियासी कुनबे समाजवादी परिवार में छिड़ी महाभारत एक बार फिर सामने आ गई है, लेकिन देखना होगा कि इस रथयात्रा का पार्टी के वोटर्स के ऊपर कितना प्रभाव पड़ेगा।
पिछल दिनों तकरीबन हफ्ते भर पार्टी के अंदर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के बीच जमकर सियासी ड्रामा हुआ। सपा सूत्रों के मुताबिक, एक तरफ जहां समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव और उनके समर्थकों ने इस रथयात्रा से दूरी बना ली है, वहीं रामगोपाल ने अपने समर्थकों से अखिलेश की रथयात्रा को सफल बनाने का फरमान जारी कर दिया है।
शिवपाल समर्थकों ने बैठक कर इस बात का फैसला किया है कि वे सीएम अखिलेश की रथयात्रा में शामिल होने के बजाय रजत जयंती समारोह में शामिल होंगे। सबसे अहम बात यह है कि अखिलेश यादव की विकास रथ का निर्माण ‘मर्सडीज बेंज’ ने किया है। जिसकी कीमत एक करोड़ बताई जा रही है। इसे हाईटेक और आकर्षक बनाया गया है।
विकास रथ को पार्टी के झंडे के रंग के हिसाब से बनाया गया है। इस रथ पर मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव की बड़ी कद वाली तस्वीरें लगी हुई हैं। रथ यात्रा के लिए खासतौर से एक कैंपेन वीडियो भी तैयार किया गया है। इस वीडियो के बोल हैं ‘काम बोलता है।’ यह वीडियो रथ यात्रा के दौरान दिखाया जाएगा।
गौरतलब है कि अखिलेश यादव की यह तीसरी रथयात्रा होगी। हजारों किलोमीटर की साइकिल यात्रा का रिकॉर्ड भी उनके नाम दर्ज है। इससे पहले अखिलेश यादव पहली बार 2001-2002 में क्रांति रथ यात्रा पर निकले थे और 2011-12 में भी वे क्रान्तिरथ से पूरे प्रदेश में जनसंवाद पर निकले थे, जिसके बाद प्रदेश में बहुमत की समाजवादी सरकार बनी थी। बहरहाल ये देखना दिलचस्प होगा कि इस रथयात्रा का सूबे के वोटर्स पर कितना प्रभाव पड़ेगा लेकिन इतना तो स्पष्ट है कि इस रथयात्रा ने विरोधी खेमों मे जरूर खलबली मचा दी है।
रूढ़ीवादी सोच कैसे एक अबला के जीवन को हाशिये पर ला खड़ा करती है, इसकी एक बड़ी मिसाल सामने आई है। ये दास्ताँ उस बुधनी मंझियान की है, जिसने कभी पंडित नेहरु से सम्मान प्राप्त किया था।
दरअसल बात सन 1959 कि है, जब तत्कालीन प्रधानमन्त्री पंडित जवाहरलाल नेहरु एक बाँध के उद्घाटन में पश्चिम बंगाल गए थे। उनकी इच्छा पर बाँध का उद्घाटन 17 वर्षीय एक जनजातीय महिला बुधनी मंझियान के हाथों से करवाया गया। कार्यक्रम के दौरान पंडित जी ने बुधनी को माला भेंट कर सम्मान भी किया। इस घटना ने बुधनी के जीवन में जैसे भूचाल ही ला दिया।
दैनिक भास्कर अखबार कि रिपोर्ट के मुताबिक़, उस रात संथाली समाज की पंचायत बुलाई गई और आश्चर्यजनक रूप से ये घोषणा कि गई कि बुधनी को प्रधानमन्त्री जवारलाल नेहरु ने माला भेंट की, इसलिए उनके समाज कि रीति के अनुसार अब वो पंडित जी कि ब्याहता है। बवाल यहीं तक सीमित नहीं था, बल्कि जवाहरलाल नेहरु चूंकि उनके समाज से ताल्लुक नहीं रखते, इसलिए एक गैर संथाली व्यक्ति से तथाकथित विवाह करने के अपराध में बुधनी को अपवित्र मानते हुए समाज और गाँव से बाहर निकाल दिया गया।
बुधनी उस समय दामोदर वैली कारपोरेशन में श्रमिक थी, लेकिन सन 1962 में उसे वहाँ से भी निकाल दिया गया। इसके बाद बुधनी झारखण्ड चली गई और अपने जीवन के सात वर्ष उसने संघर्ष में बिताए। भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, वहाँ उसकी दोस्ती सुधीर दत्ता नामक एक व्यक्ति से हुई, जिसने समाज के खौफ से बुधनी को पत्नी का दर्ज़ा तो नहीं दिया लेकिन वो तीन बच्चों की माँ जरूर बन गई।
जब सन 1985 में नेहरु जी के नाती राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने बुधनी कि दास्ताँ सुनी। बुधनी राजीव गाँधी से उड़ीसा में मिली, जिसके बाद दामोदर वैली कारपोरेशन ने उसे वापस काम पर रख लिया। भास्कर द्वारा दी गई रिपोर्ट के अनुसार, बुधनी अब रिटायर्ड है। अब वो कभी कभार वापस अपने गाँव जाती है, लेकिन फिर भी लोगों कि नजरों में उसे अपने लिए किसी प्रकार का सम्मान भाव नहीं दिखता।
बुधनी अब राहुल गांधी से अपने लिए एक घर और अपने बेटे के लिए नौकरी चाहती है, जिससे वो अपना बचा खुचा जीवन शान्ति से जी सके।
ये वो सदी है, जब हम चाँद और मंगल पर पहुँच बना पाने में कामयाब हो गये हैं। और उसी सदी में आज भी बुधनी और उस जैसी न जाने कितनी मजलूम औरतों को समाज और समाज के ठेकेदारों द्वारा बनाए गये दकियानूसी और मनगढ़ंत ढकोसलों की भेंट चढ़ना पड़ता है।
रूढ़ीवादी सोच कैसे एक अबला के जीवन को हाशिये पर ला खड़ा करती है, इसकी एक बड़ी मिसाल सामने आई है। ये दास्ताँ उस बुधनी मंझियान की है, जिसने कभी पंडित नेहरु से सम्मान प्राप्त किया था।
दरअसल बात सन 1959 कि है, जब तत्कालीन प्रधानमन्त्री पंडित जवाहरलाल नेहरु एक बाँध के उद्घाटन में पश्चिम बंगाल गए थे। उनकी इच्छा पर बाँध का उद्घाटन 17 वर्षीय एक जनजातीय महिला बुधनी मंझियान के हाथों से करवाया गया। कार्यक्रम के दौरान पंडित जी ने बुधनी को माला भेंट कर सम्मान भी किया। इस घटना ने बुधनी के जीवन में जैसे भूचाल ही ला दिया।
दैनिक भास्कर अखबार कि रिपोर्ट के मुताबिक़, उस रात संथाली समाज की पंचायत बुलाई गई और आश्चर्यजनक रूप से ये घोषणा कि गई कि बुधनी को प्रधानमन्त्री जवारलाल नेहरु ने माला भेंट की, इसलिए उनके समाज कि रीति के अनुसार अब वो पंडित जी कि ब्याहता है। बवाल यहीं तक सीमित नहीं था, बल्कि जवाहरलाल नेहरु चूंकि उनके समाज से ताल्लुक नहीं रखते, इसलिए एक गैर संथाली व्यक्ति से तथाकथित विवाह करने के अपराध में बुधनी को अपवित्र मानते हुए समाज और गाँव से बाहर निकाल दिया गया।
बुधनी उस समय दामोदर वैली कारपोरेशन में श्रमिक थी, लेकिन सन 1962 में उसे वहाँ से भी निकाल दिया गया। इसके बाद बुधनी झारखण्ड चली गई और अपने जीवन के सात वर्ष उसने संघर्ष में बिताए। भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, वहाँ उसकी दोस्ती सुधीर दत्ता नामक एक व्यक्ति से हुई, जिसने समाज के खौफ से बुधनी को पत्नी का दर्ज़ा तो नहीं दिया लेकिन वो तीन बच्चों की माँ जरूर बन गई।
जब सन 1985 में नेहरु जी के नाती राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने बुधनी कि दास्ताँ सुनी। बुधनी राजीव गाँधी से उड़ीसा में मिली, जिसके बाद दामोदर वैली कारपोरेशन ने उसे वापस काम पर रख लिया। भास्कर द्वारा दी गई रिपोर्ट के अनुसार, बुधनी अब रिटायर्ड है। अब वो कभी कभार वापस अपने गाँव जाती है, लेकिन फिर भी लोगों कि नजरों में उसे अपने लिए किसी प्रकार का सम्मान भाव नहीं दिखता।
बुधनी अब राहुल गांधी से अपने लिए एक घर और अपने बेटे के लिए नौकरी चाहती है, जिससे वो अपना बचा खुचा जीवन शान्ति से जी सके।
ये वो सदी है, जब हम चाँद और मंगल पर पहुँच बना पाने में कामयाब हो गये हैं। और उसी सदी में आज भी बुधनी और उस जैसी न जाने कितनी मजलूम औरतों को समाज और समाज के ठेकेदारों द्वारा बनाए गये दकियानूसी और मनगढ़ंत ढकोसलों की भेंट चढ़ना पड़ता है।
रूढ़ीवादी सोच कैसे एक अबला के जीवन को हाशिये पर ला खड़ा करती है, इसकी एक बड़ी मिसाल सामने आई है। ये दास्ताँ उस बुधनी मंझियान की है, जिसने कभी पंडित नेहरु से सम्मान प्राप्त किया था।
दरअसल बात सन 1959 कि है, जब तत्कालीन प्रधानमन्त्री पंडित जवाहरलाल नेहरु एक बाँध के उद्घाटन में पश्चिम बंगाल गए थे। उनकी इच्छा पर बाँध का उद्घाटन 17 वर्षीय एक जनजातीय महिला बुधनी मंझियान के हाथों से करवाया गया। कार्यक्रम के दौरान पंडित जी ने बुधनी को माला भेंट कर सम्मान भी किया। इस घटना ने बुधनी के जीवन में जैसे भूचाल ही ला दिया।
दैनिक भास्कर अखबार कि रिपोर्ट के मुताबिक़, उस रात संथाली समाज की पंचायत बुलाई गई और आश्चर्यजनक रूप से ये घोषणा कि गई कि बुधनी को प्रधानमन्त्री जवारलाल नेहरु ने माला भेंट की, इसलिए उनके समाज कि रीति के अनुसार अब वो पंडित जी कि ब्याहता है। बवाल यहीं तक सीमित नहीं था, बल्कि जवाहरलाल नेहरु चूंकि उनके समाज से ताल्लुक नहीं रखते, इसलिए एक गैर संथाली व्यक्ति से तथाकथित विवाह करने के अपराध में बुधनी को अपवित्र मानते हुए समाज और गाँव से बाहर निकाल दिया गया।
बुधनी उस समय दामोदर वैली कारपोरेशन में श्रमिक थी, लेकिन सन 1962 में उसे वहाँ से भी निकाल दिया गया। इसके बाद बुधनी झारखण्ड चली गई और अपने जीवन के सात वर्ष उसने संघर्ष में बिताए। भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, वहाँ उसकी दोस्ती सुधीर दत्ता नामक एक व्यक्ति से हुई, जिसने समाज के खौफ से बुधनी को पत्नी का दर्ज़ा तो नहीं दिया लेकिन वो तीन बच्चों की माँ जरूर बन गई।
जब सन 1985 में नेहरु जी के नाती राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने बुधनी कि दास्ताँ सुनी। बुधनी राजीव गाँधी से उड़ीसा में मिली, जिसके बाद दामोदर वैली कारपोरेशन ने उसे वापस काम पर रख लिया। भास्कर द्वारा दी गई रिपोर्ट के अनुसार, बुधनी अब रिटायर्ड है। अब वो कभी कभार वापस अपने गाँव जाती है, लेकिन फिर भी लोगों कि नजरों में उसे अपने लिए किसी प्रकार का सम्मान भाव नहीं दिखता।
बुधनी अब राहुल गांधी से अपने लिए एक घर और अपने बेटे के लिए नौकरी चाहती है, जिससे वो अपना बचा खुचा जीवन शान्ति से जी सके।
ये वो सदी है, जब हम चाँद और मंगल पर पहुँच बना पाने में कामयाब हो गये हैं। और उसी सदी में आज भी बुधनी और उस जैसी न जाने कितनी मजलूम औरतों को समाज और समाज के ठेकेदारों द्वारा बनाए गये दकियानूसी और मनगढ़ंत ढकोसलों की भेंट चढ़ना पड़ता है।
ISIS Evil Terror Chief Location Targeted as Sister Sells Him Out
अनुज हनुमत,
पूरी दुनिया के लिए सिरदर्द बन चुके सबसे खूंखार आतंकी संगठन ‘आईएस’ के सरगना बगदादी को इराकी सेना और पेशमरगा सैनिकों ने मोसुल में तीन तरफ से घेर लिया है। एजेंसी के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, कुर्दिश आर्मी के एक सीनियर ऑफिसर ने उन्हें बताया कि बगदादी मोसुल में ही फंसा हुआ है और उसके साथ करीब 3 से 5 हजार आईएस के आतंकी हो सकते हैं यानि बगदादी अब चाह कर भी मोसुल छोड़ कर कहीं नहीं भाग सकता।
सबसे अहम बात यह है की मोसुल में बगदादी को सेना ने तीन तरफ से घेर लिया है और उसके बचने की बहुत कम उम्मीद है। गौरतलब हो की एक तरफ कुर्दिश लड़ाकों ने अपने पांव जमा लिए हैं, तो वहीं दूसरी ओर खाजेर, कुवायर और कायराह एयरबेस भी इराकी आर्मी के कंट्रोल में पहुंच चुका है। ये पूरा इलाका अब इराकी सेना के कब्जे में हैं और अगर आईएस इस तरफ रुख करता है तो बगदादी और उसके गुर्गों की मौत निश्चित है।
खबर के अनुसार ईराकी सेना के एक मेजर जनरल के मुताबिक आतंक का आका अबू बकर अल बगदादी और उसके आतंकवादी जल्द ही अपनी जान की भीख मांगते नज़र आएंगे। बग़दादी और उसके गुर्गे चारों तरफ से घिरने के बाद अब मोसुल छोड़ कर कहीं भी भाग नहीं सकते। दरअसल, मोसुल के पूर्वी, उत्तरी और दक्षिण हिस्से को कुर्दिश और इराकी सेना घेर चुकी है और मोसुल के पश्चिमी हिस्से पर शिया मिलिशिया के लड़ाके अपना कब्ज़ा जमा चुके हैं यानि अब बग़दादी और आईएस के आतंकवादियों के पास भागने के लिए ज़मीन कम पड़ने वाली है और करीब 40 हजार इराकी सैनिक बगदादी को उसके अंजाम तक पहुंचाने के लिए तीन तरफ से एक स्ट्रेटजी के साथ आगे बढ़ रहे हैं। इराकी और कुर्दिश पेशमरगा सेनाओं की रणनीति भी यही है कि किसी भी सूरत में बगदादी को चारों तरफ से घेर कर उसे सरेंडर करने पर मजबूर कर दिया जाए और फिर बगदादी को पकड़कर उसे उसके अंजाम तक पहुंचाया जाए।
आईएस के आतंकी जानते हैं कि वो इराकी और कुर्द सेना से सीधी लड़ाई में जीत नहीं सकते, लिहाज़ा अब वो कुर्द और इराकी सैनिकों पर हमले करने के लिए बूबी ट्रैप्स और आईईडी जैसे हथकंड़ों का इस्तेमाल कर रहे हैं। पिछले कई दिनों में आईएसआईएस के आतंकवादी मोसुल से भागने के लिए कई तरह के पैंतरे आजमा चुके हैं। कभी मासूम लोगों को अपनी ढ़ाल बनाया तो कभी 25 साल पुराने तरीके से इराकी सेना से बचने के लिए तेल के कुओं में आग लगाई।
फिलहाल सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि आखिर आतंक के इस राक्षस को कब तक मार गिराया जायेगा।
आत्महत्या करने वाले पूर्व सैनिक राम किशन ग्रेवाल के मामले ने अब एक नया मोड़ लिया है। अब रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि ओआरओपी की मांग को लेकर सुसाइड करने वाले राम किशन ग्रेवाल को ओआरओपी के तहत लाभ मिला था। हालांकि, मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि ओआरओपी के तहत ग्रेवाल को पूरा लाभ नहीं मिला था, उन्हें थोड़ी कम रकम मिली थी।
मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि इसमें हरियाणा भिवानी जिले में एसबीआई बैंक की ब्रांच ने कैल्कुलेशन में गड़बड़ कर दी थी। सूत्रों ने बताया कि ग्रेवाल ने रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर से घर या ऑफिस में मिलने के लिए वक्त नहीं मांगा था।
स्वयं रक्षामंत्री पर्रिकर ने आज इस विषय में कहा कि सरकार पूर्व सैनिकों के विकास के लिए समर्पित है और सरकार ने इस स्कीम के तहत 5,507.47 करोड़ रुपए बांटे हैं। गौरतलब है कि राम किशन के सुसाइड के राजनीतिक रंग लेने के बाद रक्षा मंत्रालय ने इस विषय में जानकारी दी है।
आज रामनाथ गोयनका पुरस्कार वितरण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभिन्न कैटेगरिज़ में पुरस्कार प्रदान किए व सभी पुरस्कार पाने वालों को ढेर सारी बधाइयां दीं। प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी के बाद भारत के लोकतंत्र को मतबूत बनाने में भारत की पत्रकारिता का अहम योगदान रहा है।
मोदी ने कहा,”आजादी के आंदोलन में अखबार अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम रहा है व पत्रकारिता की विकास यात्रा आजादी के आंदोलन से जुड़ी थी।” नरेंद्र मोदी ने रामनाथ गोयनका की तारीफ करते हुए कहा कि बहुत कम लोगों ने आपातकाल को चुनौती दी, आपातकाल को चुनौती देने में रामनाथ जी सबसे आगे रहे। प्रधानमंत्री ने कहा कि बहुत कम लोग अपने जीवनकाल के बाद अपना नाम बनाते हैं। उन्होंने कहा कि मैं खुशकिस्मत हूँ कि मुझे गोयनका जी के दर्शन करने का सौभाग्य मिला।
नरेंद्र मोदी ने कहा कि पत्रकारिता केवल कलम तक ही सीमित नहीं रही। उन्होंने कहा कि ज्यादातर पत्रकारिता में सेवा का भाव देखने को मिला है, हमारे देश के हर बड़े व्यक्ति का जुड़ाव पत्रकारिता से रहा है।
मीडिया द्वारा खबरों को सनसनीखेज़ बनाने की दिशा में की गई तामाम उठापटक पर मोदी ने चुटकी लेते हुए कहा कि अगर कहीं एक्सीडेंट होता है तो मीडिया में आता है कि एक वीएमडब्ल्यू कार ने दलित को कुचला। मोदी ने कहा, “मैं मांफी चाहता हूं, लेकिन मुझे बताइये कि बीएमडब्ल्यू कार या उसे चलाने वाले को कहां पता था कि कुचलने वाला दलित है?”
नरेंद्र मोदी ने कहा, “मेरा सौभाग्य रहा कि मुझे रामनाथ गोयनका जी के दर्शन हुए थे। जयप्रकाश जी के आंदोलन का वह काल था। रामनाथ जी के भीतर जो आग थी वो आग हम अनुभव कर सकते थे। वह आग किसी एक अखबार के लिए नहीं थी। उनकी भावनाओं के लिए अखबार भी छोटा पड़ता था। जयप्रकाश जी के पीछे वे एक ताकत बनकर खड़े रहे।”
पूर्व सैनिक की आत्महत्या मामले में एक के बाद एक नयी नाटकीय घटना सामने आ रही है। अब राहुल गांधी और मनीष सिसोदिया के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। केजरीवाल पूर्व सैनिक राम किशन ग्रेवाल के परिवार से मिलने के लिए अस्पताल गए थे। केजरीवाल 4-5 घंटों से अस्पताल के अंदर जाने के लिए इंतजार कर रहे थे, लेकिन पुलिस उन्हें अंदर नहीं जाने दे रही थी।
गौरतलब है कि केजरीवाल से पहले मनीष सिसोदिया पूर्व सैनिक परिवार से मिलने अस्पताल गए थे, उन्हें भी उनसे नहीं मिलने दिया गया था। सिसोदिया को भी पुलिस ने अपनी हिरासत में ले लिया था। वहीं कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी सैनिक परिवार से मिलने पहुंचे थे। लेकिन उन्हें भी दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। राहुल गांधी को दो घंटे हिरासत में रखने के बाद छोड़ दिया गया था। इसके बाद राहुल गांधी एक बार फिर सैनिक के परिवार से मिलने पहुंचे तो दिल्ली पुलिस ने उन्हें दोबारा हिरासत में ले लिया।
बता दें, पूर्व सैनिक ने ओआरओपी की मांग पूरी नहीं होने पर मंगलवार को दिल्ली में जहर खाकर सुसाइड कर लिया था। रामकिशन ग्रेवाल हरियाणा के भिवानी जिले के बामला गांव के रहने वाले थे। राम किशन हरियाणा सरकार के पंचायत विभाग में भी कार्यरत थे।
सुसाइड से पहले ग्रेवाल ने अपने बेटे से फोन पर बात की थी। इस बातचीत में उन्होंने अपने बेटे को जहर खा लेने की बात कही थी। इस बातचीत का ऑडियो आज सामने आया है। ऑडियो में ग्रेवाल अपने बेटे से कह रहे हैं, “मैंने जहर खा लिया है और इंडिया गेट पर बैठा हूं। मैंने तीन-चार सल्फास की गोलियां खाई हैं। हमारे साथ अनर्थ हुआ है। हमारे जवानों को न्याय नहीं मिला। हमारे जवानों के साथ जो अनर्थ और अन्याय हो रहा है, वह देखा नहीं गया।” उन्होंने कहा, ” हम लोगों ने अपनी लड़ाई लड़ी। अब आगे ये जवान जानें कि क्या करेंगे और क्या नहीं। हम अपने उसूलों के आदमी हैं। मेरे जवानों, देश और मातृभूमि के लिए अपनी जान न्यौछावर कर दी है।”