संबित पात्रा में कोरोना के लक्षण, अस्पताल में भर्ती
दिल्ली-कोलकाता फ़्लाइट में मिला कोरोना संदिग्ध यात्री, भेजा अस्पताल
न्यूज़ अपडेट | Navpravah Desk
देश में विमान सेवाएं बहाल की जा रही हैं। लॉकडाउन की वजह से बाधित विमान सेवा को एक बार फिर से पटरी पर लाया जा रहा है। ऐसे में दिल्ली से कोलकाता उड़ान भर रहे एक पैसेंजर विमान में कोरोना संदिग्ध मरीज मिलने से हड़कंप मच गया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एयर एशिया की फ्लाइट में एक कोरोना मरीज मिलने से उस वक़्त भय का माहौल पसर गया जब विमान कोलकाता में पहुँचा। संदिग्ध को फ़ौरन स्थानीय मेडिकल अथॉरिटी के हवाले कर दिया गया जिसके बाद उसे जांच के लिए ले जाया गया है।
आज सुबह 7 बजे ही यह विमान दिल्ली से उड़ान भरकर कोलकाता हवाई अड्डे पहुंचा था जहां पर स्क्रीनिंग के समय संदिग्ध कोरोना पीड़ित पाया गया, और उसे तत्काल प्रभाव से स्थानीय अस्पताल भेज दिया गया।
ऐसे में यह सवाल भी खड़ा होता है कि देश में विमान सेवाओं के चालू किये जाने के बाद कोरोना संक्रमण फैलने का खतरा भी उत्पन्न हुआ है? बहरहाल अब उस सन्दिग्ध पीड़ित की जांच के बाद ही यह पता चल पाएगा कि वह व्यक्ति कोरोना से ग्रस्त है या नहीं।
लाखों के लिए प्रेरणा बनी ज्योति की ज़िन्दगी पर बनेगी फ़िल्म
सौम्या केसरवानी | navpravah.com
क़रीब 1200 किमी की दूरी साइकिल से तय कर ज्योति ने एक मिसाल पेश की है। ज्योति इस जज़्बे की वजह से रातों-रात दुनिया भर में चर्चित हो गईं। अब इसी मुद्दे को सिनेमाइ शक्ल देने की भी बात शुरू हो गई है।
फ़िल्म निर्माता विनोद कापड़ी ने कहा है, ‘मैं पैदल और साइकिल से घर जाने वाले मजदूरों पर शॉर्ट फिल्म बना रहा हूं, लेकिन मैं ज्योति पर एक अलग फिल्म बनाने की तैयारी में हूं।’
विनोद कापड़ी ने कहा कि ज्योति अब लाखों लड़कियों के लिए प्रेरणा बन गयी है और ऐसे में उन पर फिल्म बनाया जाना जरूरी है। उन्होंने बताया कि वह ज्योति और उनके पिता की कहानी को अलग तरह से पेश करना चाहेंगे, ताकि लोग फिल्म दिल से देखें और पिता-पुत्री के संघर्ष को समझें।
ज्योति दरभंगा जिले की सिरुहुलिया गांव की रहने वाली हैं। ज्योति ने बताया था कि खाने-पीने के लिए हमारे पास पैसे नहीं बचे थे, मकान मालिक ने भी किराया न देने पर बाहर निकालने की धमकी दी थी।
ज्योति ने बताया कि, गुरुग्राम में मरने से अच्छा था कि हम रास्ते में मरें। इसलिए मैंने बीमार पापा से कहा कि, आप साइकिल से चलो, मैं आपको ले चलूंगी, मैंने पापा से जबरदस्ती की और उन्हें मनाकर साइकिल से निकल दी।
इस दौरान रास्ते में कई तरह की परेशानियां आईं लेकिन हर बाधा को ज्योति बिना हिम्मत हारे पार करती गई। कई बार ज्योति को खाना भी नहीं मिला, रास्ते में कहीं किसी ने पानी पिलाया तो कहीं किसी ने खाना खिलाया।
बता दें कि, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप ने ज्योति कुमारी को लेकर ट्वीट किया था, उन्होंने ट्विटर पर ज्योति कुमारी की खबर को शेयर किया है और भारतीयों की सहनशीलता को सराहा है। इवांका ने आगे लिखा है कि सहनशक्ति और प्यार की इस वीरगाथा ने भारतीय लोगों और साइकलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
जम्मू-कश्मीर: सेना के जवानों की मुस्तैदी से टला ‘पुलवामा 2’
बोलती तस्वीरें- “नुक्कड़ (1986)”
डॉ० कुमार विमलेन्दु सिंह | Navpravah Desk
जिनके रात की सुबह बस ये ऐलान करने आती है कि आज फिर संघर्ष होगा, आज फिर रोटियां अपने हिस्से की, मेहनत कर के लेनी होगी, उनके अंदर एक अजीब सा जज़्बा होता है ज़िंदगी को लेकर और ख़ुश रहने के लिए उन्हें अलग से उपाय नहीं करने पड़ते। अपने आस-पास चलती कहानियों से जुड़कर, वे अपने हिस्से की हंसी हंस लेते हैं और अपने हिस्से के आंसू भी रो लेते हैं, लेकिन वे अकेले कभी नहीं होते क्योंकि उनके साथ कई किरदार जुड़े होते हैं, जो उनकी ख़ुशी और ग़म बिना शर्त बांटते हैं। वो आपस में झगड़ते भी हैं, लेकिन सब की ज़िन्दगी साथ-साथ बढ़ती रहती है, इनकी एक अपनी टोली होती है।

ऐसे ही एक टोली की कहानी सुनाने का ज़िम्मा लिया अज़ीज़ मिर्ज़ा ने, लिखा प्रबोध जोशी और अनिल चौधरी ने और अपने निर्देशन से सजाया, सईद अख़्तर मिर्ज़ा और कुंदन शाह ने और दर्शकों तक 1986 में पहुंचाने का काम किया दूरदर्शन ने, नाम था “नुक्कड़”।
“ये धारावाहिक और इसके किरदार, घर-घर में छा गए। इसमें एक गली के नुक्कड़ पर कई लोग जो रोज़ मेहनत कर के रोज़ी रोटी कमाते हैं, एक साथ रहते थे। उनकी ज़िन्दगी की उलझने वे आपस में हंसते-खेलते, लड़ते-झगड़ते सुलझाते थे और इसी सिलसिले में आगे बढ़ते, इस धारावाहिक ने 100 एपिसोड पूरे किए। इसका हर एपिसोड 23-24 मिनट का होता था।”
“नुक्कड़” या “सराय”, हर काल की और हर देश की पुरानी कहानियों के केन्द्र-बिन्दु रहे हैं, जहाँ किरदार एक-दूसरे के सामने से और कभी साथ-साथ गुज़रते हैं।

यहां दिलीप धवन(गुरू) सब को एक सूत्र में बांधने वाला किरदार होता है जो बिजली मिस्त्री होता है। इसके अलावा, अवतार गिल (कादर भाई) जिनकी चाय बिस्कुट की दुकान होती है, पवन मल्होत्रा (हरि) जो साइकिल रिपेयर करता है, हैदर अली (राजा), सुरेश चटवाल (शायर), समीर खक्कर (खोपड़ी) जो शराबी होता है, सोमेश अग्रवाल (कुंडु मोची), जावेद ख़ान (करीम हज्जाम) रमा विज (मारिया) जो शिक्षिका होती हैं और भी कई किरदार इस धारावाहिक में थे। वैसे तो सभी किरदार मशहूर थे, लेकिन समीर खक्कर (खोपड़ी) और जावेद ख़ान (करीम हज्जाम), आज तक लोगों को याद आते हैं।

इस धारावाहिक के ज़रिए, लोगों ने जीवन के एक ऐसे विस्तार को देखा, जहाँ अपने आप में पूरी दुनिया बसी होती है लेकिन सहूलियत से भरी ज़िन्दगी वाले लोग इन्हें अनदेखा कर, अपनी अलग दुनिया में रहते हैं। ये भावना भी लोगों में जागी कि ये मेहनतकश लोग भी महसूस करते हैं, सुख, दुख, हार और जीत।
चन्द्रिमा पाल ने अपनी किताब ” The DD Files” में तो यहाँ तक लिखा कि, “नुक्कड़ मुंबई की गलियों को लिविंग रूम तक ले आया।”
देखें नुक्कड़ का एक एपिसोड “अमिताभ बच्चन का फ़ोटो”-
इम्तियाज़ हुसैन के लिखे बोल जब कुलदीप सिंह के जादू भरे सुरों से मिलकर गीत बनते थे और एक कोरस की आवाज़ आती थी, “बड़े शहर की एक गली में, बसा हुआ है नुक्कड़…”, तब अपनी सारी चिंताएं छोड़, उसी नुक्कड़ से थोड़ी दूर पर अपने टेलीविज़न से, हर उम्र के लोग चिपक जाते थे और डूब जाते थे उन बनती, बिगड़ती कहानियों में।
(लेखक जाने-माने साहित्यकार, फ़िल्म समालोचक, स्तंभकार, व शिक्षाविद हैं.)
लॉकडाउन में यूपी सरकार ने अब तक 22.10 करोड़ वसूले : उ०प्र० सरकार
न्यूज़ अपडेट | Navpravah Desk
उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार ने लॉक डाउन के दौरान IPC की धारा 188 के अंतर्गत बतौर जुर्माना राशि, कुल 22 करोड़ 10 लाख रुपये वसूल किये हैं।
लॉकडाउन में अब तक धारा 188 के अंतर्गत 58हज़ार FIR दर्ज़ कर दी गई है।अब तक 22करोड़10लाख रुपया वसूल हो गया है :उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी pic.twitter.com/FLe59OiaDI
— ANI_HindiNews (@AHindinews) May 27, 2020
समाचार एजेंसी ANI ने ट्वीट के माध्यम से यह जानकारी दी है। अवनीश अवस्थी ने मीडिया को बताया कि इस लॉकडाउन में अब तक धारा 188 के अंतर्गत 58 हज़ार FIR दर्ज़ कर दी गई है, और अब तक 22करोड़10लाख रुपया वसूल हो गया है।
क्या है आईपीसी की धारा-188?
दरअसल धारा-188 का संबंध 123 साल पहले बने कानून ‘महामारी रोग अधिनियम-1897’ से है। इस कानून को लॉकडाउन के आदेशों का उल्लंघन करने वालों पर कानूनी कार्रवाई के मकसद से बनाया गया था। इस कानून का उल्लंघन करने वालों के लिए आईपीसी की धारा-188 में सजा का प्रावधान किया गया है।
धारा-188 में कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति महामारी रोग अधिनियम के तहत जारी आदेश का पालन नहीं करता और इसके चलते किसी सरकारी व्यक्ति के काम में बाधा पहुंचती है या वह चोटिल होता है, तो उसे एक महीने की जेल या जुर्माना या फिर दोनों हो सकते हैं। जुर्माना अधिकतम 200 रुपये तक हो सकता है।
“साथ-साथ (1982)” -आदर्श और वास्तविकता के द्वंद को दर्शाती बेहतरीन फ़िल्म
डॉ० कुमार विमलेन्दु सिंह | Cinema Desk
आदर्श, सिद्धांत और सुनीति, सुविधा और संपन्नता में, ये बहुत देर ज़िंदा नहीं रह पाते और जैसे ही संघर्ष और युद्ध से थके शरीर को आराम और उपलब्धता की नर्माहट मिलती है, युद्ध क्षेत्र में वापस जाना, संघर्ष पथ पर पुनः यात्रा आरंभ कर पाना, दुष्कर और कठिन हो जाता है। विद्रोह के काल में जब आवश्यकताएं हर क्षण आपको क्षीण करने को तैयार रहती हैं, अपने उसुलों पर बने रहना कोई आसान बात नहीं होती। इसके क्या परिणाम होते हैं, व्यक्ति विशेष पर, समाज पर, परस्पर संबंधों पर, इसी की पड़ताल करती, एक फ़िल्म, “साथ-साथ”, 1982 में आई।
“साथ-साथ”, उस दौर की फ़िल्म थी, जब विषय वस्तु को मुनाफ़े से ज़्यादा तरजीह दी जाती थी। इसके निर्माता दिलीप धवन थे, जो एक अच्छे अभिनेता भी थे और दूरदर्शन के धारावाहिक, “नुक्कड़” में, उनके द्वारा निभाया गया, “गुरू” का किरदार, आज भी लोगों को याद है। फ़िल्म का निर्देशन, रमन कुमार ने किया था।

फ़िल्म के नायक फ़ारूक़ शेख़ (अविनाश), एक आदर्शवादी युवक होते हैं, जो एक बहुत बड़े परिवार से होते हैं, लेकिन अपने पिता से वैचारिक मतभेद होने के कारण, घर छोड़कर, M.A. की पढ़ाई कर रहे होते हैं और बहुत अच्छी, आदर्शवादी कविताएं भी लिखते हैं।
कॉलेज मे ही, गीता (दीप्ति नवल), जो कि एक बहुत बड़े बिज़नेसमैन की बेटी होती हैं, फ़ारूक़ शेख़ (अविनाश) से मिलती हैं और उनके विचारों से बहुत प्रभावित होती हैं। दोनों में प्रेम होता है और गीता (दीप्ति नवल), अपने पिता का घर छोड़, अविनाश से शादी कर लेती हैं।

एक छोटे से प्रकाशन कंपनी के साथ अविनाश काम करते हैं, जहाँ, साहित्य के स्तर के साथ कोई समझौता नहीं किया जाता, लेकिन उससे पैसे भी नहीं आते। इनके एक बच्चा होता है और आवश्यकताएं, आदर्श प्रेम को लगातार ख़त्म करने लगती हैं। बहुत मजबूर हो कर, अविनाश, अपने मित्र, सतीश शाह की प्रकाशन कंपनी से जुड़ जाता है जहाँ सस्ता और अभद्र साहित्य छपता है, लेकिन पैसे बहुत आते हैं।
अविनाश कविताओं की आदर्श दुनिया से निकलकर एक व्यापारी की तरह सोचने लगता है। ये सब गीता को बहुत दुखी करता है और वो उसे छोड़ कर चली जाती है। अविनाश को अपनी ग़लती समझ आ जाती है, और वो वापस अपने सिद्धांतो से जुड़ जाता है। गीता भी वापस आ जाती है।
“इस फ़िल्म का सबसे सुन्दर पक्ष है, इसका संगीत। इस फ़िल्म के गीत “प्यार मुझसे जो किया तुमने, तो क्या पाओगे”, “ये तेरा घर, ये मेरा घर”, “यूं ज़िंदगी की राह में”, आज तक हमारे जीवन में आदत की तरह ज़िंदा हैं और ये किसी जादू जैसा है। इस जादू जगाते संगीत के संगीतकार, कुलदीप सिंह हैं, जिन्होंने ऐसा जादू बुना, कि हम आज तक उससे निकल ही नहीं पाए।”
गीत, जावेद अख़्तर ने लिखे हैं। जगजीत सिंह और चित्रा सिंह की आवाज़ ने सभी गानों को आज तक जवान रखा है।
राकेश बेदी, नीना गुप्ता और ए० के० हंगल जैसे कलाकारों के सधे अनुभव ने फ़िल्म को यादगार बना दिया है।
पूरे 2 घंटे 25 मिनट की इस फ़िल्म ने आदर्श और वास्तविकता के द्वंद को दिखाया है और भारत के बेहतरीन फ़िल्मों की सूची में इसे हमेशा रखना चाहिए।
(लेखक जाने-माने साहित्यकार, फ़िल्म समालोचक, स्तंभकार, व शिक्षाविद हैं.)
महबूबा पाकिस्तान से पत्थरबाजी की ट्रेनिंग ली महबूब चीन की फौज ने?
आनंद रूप द्विवेदी | Editorial Desk
चीनी सैनिकों ने भारत की पैगोंग झील के पास पिछले दिनों झड़प के दौरान भारतीय जवानों पर डंडों, कंटीले तारों और पत्थरों से हमला किया।
इन चाइनीज़ सैनिकों का व्यवहार एकदम पाकिस्तान समर्थक कश्मीरी पत्थरबाजों की तरह है। सम्भवतः पाकिस्तान ने चीनी सैनिकों को पत्थर चलाने की ट्रेनिंग दी हो और बदले में चीन ने पाकिस्तानी ऑटो चालकों को हवाई जहाज़ उड़ाना सिखाया हो, क्योंकि चीन और पाकिस्तान का चोली दामन वाला इश्क़ किसी से छिपा नहीं है।
एक ओर जहाँ पूरी दुनिया को चाइनीज़ वायरस ने तबाही के किनारे पर लाकर खड़ा कर दिया है, वहीं दूसरी ओर चीनी सरकार और सेना अब भारत में कब्ज़ा करना चाहती हैं। चीन का व्यवहार एकदम पाकिस्तान जैसा है, इसीलिए उसका पाकिस्तान से गहन अंतरंग सम्बन्ध भी बना हुआ है। जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने चीन को जमकर लताड़ा और सभी ट्रेड सम्बन्ध समाप्त करने की धमकी दी, तब चीन की घिग्घी बंध गई थी, जिसकी खीझ वो भारत से निकालता है। हालांकि चीन की इतनी औकात नहीं है कि वो भारत को उंगली दिखाए। चीन की धमकी भी चाइनीज़ माल की तरह फर्जी है।
“इधर भारत ने चीन के सभी गलत मंसूबों को पहले से भांप कर तैयारी कर ली है। दुनिया भर की टेक्नोलॉजी को चुराकर नकली समान बनाने वाला चीन, अमेरिका के एफ-16 जहाज का भी फर्जी आइटम बना चुका है। हाल ही में इसने भारत की सीमा पर अपना चाइनीज़ खिलौना हेलीड्रोन तैनात किया जिसके जवाब में भारत के HAL ने पहले ही एक हेलिड्रोन तैयार कर रखा है। भारत वाला चाइनीज खिलौने से मजबूत ही होगा।”
न्यूज़ रिपोर्ट्स के अनुसार लद्दाख क्षेत्र में चीनी सेना के जवानों ने वाहियात हरकत की। झड़प के दौरान चीनी सैनिक संख्या बल में भारतीय जवानों से ज्यादा थे, लेकिन गैरपेशेवर हरकत करते हुए नाहक उग्र तेवर दिखाए। वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर लद्दाख से अरुणाचल प्रदेश तक भारत और चीनी सेना असॉल्ट रायफल से लैस हैं, लेकिन शांति बनाए रखने के लिए इस क्षेत्र में 1967 से अब तक गोलीबारी नहीं हुई है। भारत ने हमेशा सीमा रेखा का सम्मान किया लेकिन नापाक चीन ने 5000 से ज्यादा सैनिक सीमा रेखा पर तैनात कर दिए।
अपनी महबूबा पाकिस्तान को कच्छे बनियान से बने मास्क बेंचने वाला चीन दुनिया भर में अपनी थू-थू करवा चुका है, फ़िर भी बाज़ नहीं आता।
भारत के ख़िलाफ़ हर चाइनीज़ साज़िश नाकाम ही रहेगी, फ़िर चाहे वो सैन्य हरकत हो या चायनीज़ वायरस। पाकिस्तान के महबूब चीन को यह समझना होगा कि यह नया भारत है जो चीन के हवा में उड़ते मंसूबों के पर कतरने का माद्दा रखता है।
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अब दुश्मन को धूल चटायेगा स्वदेशी फ़ाइटर प्लेन ‘तेजस’, वायुसेना में स्क्वाड्रन ‘फ़्लाइंग बुलेट’ शामिल
न्यूज़ अपडेट | Navpravah Desk
आज स्वदेशी विमान तेजस को दूसरे स्क्वाड्रन वायुसेना में शामिल कर लिया गया है। इस स्क्वाड्रन का नाम “फ़्लाइंग बुलेट्स” होगा। एयर चीफ मार्शल आर के एस भदौरिया ने सुलूर एयरबेस से तेजस में उड़ान भर इसकी शुरुआत की।
IAF Chief Air Chief Marshal RKS Bhadauria today flew the Light Combat Aircraft Tejas fighter with 45 Squadron at Air Force Station Sulur. He flew the single-seater LCA. pic.twitter.com/Edu0X3hMEW
— ANI (@ANI) May 27, 2020
एयर चीफ मार्शल भदौरिया अब तक राफेल फ़ाइटर प्लेन समेत 28 से भी अधिक तरह के लड़ाकू और परिवहन विमानों को उड़ा चुके हैं। एयर मार्शल भदौरिया प्रायोगिक टेस्ट पायलट होने के साथ कैट ‘ए’ कैटेगरी के क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर और पायलट अटैक इंस्ट्रक्टर भी हैं।
तमिलनाडु के कोयंबटूर के पास सुलूर एयरफोर्स स्टेशन पर यह उड़ान भरी गई। यह स्क्वाड्रन एलसीए तेजस विमान से लैस है। भारतीय वायु सेना की यह दूसरी स्क्वाड्रन है जिसमें तेजस विमान हैं। भारतीय वायु सेना ने पहले ही 40 तेजस विमानों का ऑर्डर दिया है और जल्दी ही एचएएल को 83 और विमानों का ऑर्डर दिया जा सकता है जिसमें लगभग 38,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
तेजस 4th जनरेशन का फ़ाइटर प्लेन है जिसे एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी और हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा विकसित किया गया है।
यह भारत की 18वीं वायुसेना स्क्वाड्रन है जिसे 1965 में स्थापित किया गया था। इस स्क्वाड्रन का ध्येय वाक्य ‘तीव्र और निर्भय’ है। पाकिस्तान के साथ 1971 के युद्ध में अत्यंत सक्रिय भूमिका अदा करने वाली इस स्क्वाड्रन को 15 अप्रैल 2016 को सेवा मुक्त कर दिया गया था और इससे पहले इसमें मिग-27 विमान शामिल थे। स्क्वाड्रन को एक अप्रैल 2020 को पुनः शुरू किया गया। इस स्क्वाड्रन को नवंबर 2015 में राष्ट्रपति द्वारा ध्वज प्रदान किया गया था।

















